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How Body Senses Cold | शरीर को ठंड का अहसास कैसे होता है? वैज्ञानिकों ने सुलझाई शरीर की सबसे बड़ी मिस्ट्री, अंदर छिपा है ‘माइक्रोस्कोपिक थर्मामीटर’, वो सेंसर जो दिमाग को भेजता है कूल सिग्नल

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नई दिल्ली: जब आप सर्दियों की सुबह घर से बाहर निकलते हैं या मुंह में पुदीने की गोली (Mint) रखते हैं, तो आपके शरीर के भीतर एक छोटा सा मॉलिक्यूलर सेंसर तुरंत एक्टिव हो जाता है. यह सेंसर आपके दिमाग को अलर्ट करता है कि बाहर ठंड है या आपने कुछ ठंडा खाया है. वैज्ञानिकों ने अब इस सेंसर की पहली विस्तृत तस्वीरें कैद करने में सफलता हासिल की है. इस रिसर्च से यह साफ हो गया है कि हमारा शरीर असली ठंड और मेंथॉल (Menthol) से मिलने वाली बनावटी ठंडक के बीच कैसे फर्क करता है या कैसे दोनों को एक ही तरह से महसूस करता है. सैन फ्रांसिस्को में 21-25 फरवरी, 2026 तक चलने वाली ’70वीं बायोफिजिकल सोसाइटी एनुअल मीटिंग’ में इस रिसर्च को पेश किया गया.

1. क्या है TRPM8 और यह कैसे काम करता है?

इस पूरी रिसर्च का केंद्र ‘TRPM8’ नामक एक प्रोटीन चैनल है. ड्यूक यूनिवर्सिटी के रिसर्चर ह्युक-जून ली ने इसे शरीर के भीतर मौजूद एक ‘माइक्रोस्कोपिक थर्मामीटर’ की तरह बताया है. यह प्रोटीन हमारे सेंसरी न्यूरॉन्स की झिल्लियों (Membranes) में स्थित होता है, जो हमारी त्वचा, मुंह और आंखों तक फैले होते हैं. जब तापमान 46°F से 82°F (लगभग 8°C से 28°C) के बीच होता है, तो यह चैनल खुल जाता है. इसके खुलते ही कोशिका के अंदर आयन (Ions) का प्रवाह शुरू होता है, जो दिमाग को ठंडक का इलेक्ट्रिकल सिग्नल भेजता है.

2. मेंथॉल कैसे देता है दिमाग को धोखा?

रिसर्च में यह दिलचस्प खुलासा हुआ कि मेंथॉल वास्तव में शरीर को ‘बेवकूफ’ बनाता है. ली के अनुसार, मेंथॉल एक ट्रिक की तरह काम करता है. यह प्रोटीन चैनल के एक खास हिस्से से जुड़ जाता है और उसे बिल्कुल वैसे ही खोल देता है जैसे असली ठंडक खोलती है. हालांकि मेंथॉल किसी चीज को बर्फ की तरह जमाता नहीं है, लेकिन आपका शरीर दिमाग को वही सिग्नल भेजता है जो बर्फ छूने पर मिलता है. यही कारण है कि पुदीना खाने पर या नीलगिरी (Eucalyptus) का तेल लगाने पर हमें तेज ठंडक का एहसास होता है.

क्रायो-इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी एक ऐसी तकनीक जो इलेक्ट्रॉन बीम से फ्लैश-फ्रोजन प्रोटीन की इमेज बनाती है. इसका इस्तेमाल करके रिसर्चर्स ने कोल्ड सेंसिंग चैनल, TRPM8 के कई कन्फर्मेशनल स्नैपशॉट कैप्चर किए, जब यह बंद से खुले में बदलता है. (Credit: Hyuk-Joon Lee)

3.क्रायो-इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी से खुला राज?

वैज्ञानिकों ने इस सेंसर को काम करते हुए देखने के लिए ‘क्रायो-इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी’ तकनीक का इस्तेमाल किया. इसमें प्रोटीन को अचानक जमा दिया जाता है और फिर इलेक्ट्रॉन बीम के जरिए उसकी इमेज ली जाती है. टीम ने TRPM8 के बंद होने से लेकर खुलने तक की कई तस्वीरें लीं. उन्होंने पाया कि ठंड और मेंथॉल दोनों ही इस चैनल को सक्रिय करते हैं, लेकिन उनके तरीके अलग-अलग हैं. ठंड सीधे उस रास्ते (Pore) को प्रभावित करती है जहां से आयन गुजरते हैं, जबकि मेंथॉल प्रोटीन के दूसरे हिस्से से जुड़कर उसमें बदलाव लाता है, जो अंततः रास्ते को खोल देता है.

4. बीमारियों के इलाज में कैसे मिलेगी मदद?

इस खोज के मेडिकल मायने बहुत गहरे हैं. जब TRPM8 सेंसर सही से काम नहीं करता, तो यह क्रोनिक पेन (लगातार होने वाला दर्द), माइग्रेन, आंखों का सूखापन (Dry Eye) और यहां तक कि कुछ प्रकार के कैंसर से जुड़ जाता है. फिलहाल ‘एकोल्ट्रेमोन’ नामक दवा, जो TRPM8 को सक्रिय करती है, ड्राई आई के इलाज के लिए इस्तेमाल की जा रही है. यह दवा मेंथॉल की तरह ही काम करती है और आंखों में ठंडक का अहसास कराकर आंसू बनाने की प्रक्रिया को तेज करती है.

AI की मदद से बनाई प्रतीकात्मक तस्वीर.

5. क्या भविष्य में दर्द से मिलेगी पूरी राहत?

रिसर्चर्स ने प्रोटीन के अंदर एक ‘कोल्ड स्पॉट’ (Cold Spot) की भी पहचान की है. यह हिस्सा तापमान को भांपने के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार होता है. यह खोज वैज्ञानिकों को ऐसी नई दवाएं विकसित करने का आधार प्रदान करती है जो सीधे इस रास्ते को टारगेट कर सकें. इससे न केवल दर्द के इलाज में मदद मिलेगी, बल्कि यह भी समझ में आएगा कि लंबे समय तक ठंड में रहने पर हमारा शरीर उसे सहने के अनुकूल कैसे हो जाता है. दशकों से वैज्ञानिक जिस सवाल का जवाब ढूंढ रहे थे, वह अब हमारे सामने है.

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नई दिल्ली: जब आप सर्दियों की सुबह घर से बाहर निकलते हैं या मुंह में पुदीने की गोली (Mint) रखते हैं, तो आपके शरीर के भीतर एक छोटा सा मॉलिक्यूलर सेंसर तुरंत एक्टिव हो जाता है. यह सेंसर आपके दिमाग को अलर्ट करता है कि बाहर ठंड है या आपने कुछ ठंडा खाया है. वैज्ञानिकों ने अब इस सेंसर की पहली विस्तृत तस्वीरें कैद करने में सफलता हासिल की है. इस रिसर्च से यह साफ हो गया है कि हमारा शरीर असली ठंड और मेंथॉल (Menthol) से मिलने वाली बनावटी ठंडक के बीच कैसे फर्क करता है या कैसे दोनों को एक ही तरह से महसूस करता है. सैन फ्रांसिस्को में 21-25 फरवरी, 2026 तक चलने वाली ’70वीं बायोफिजिकल सोसाइटी एनुअल मीटिंग’ में इस रिसर्च को पेश किया गया.

1. क्या है TRPM8 और यह कैसे काम करता है?

इस पूरी रिसर्च का केंद्र ‘TRPM8’ नामक एक प्रोटीन चैनल है. ड्यूक यूनिवर्सिटी के रिसर्चर ह्युक-जून ली ने इसे शरीर के भीतर मौजूद एक ‘माइक्रोस्कोपिक थर्मामीटर’ की तरह बताया है. यह प्रोटीन हमारे सेंसरी न्यूरॉन्स की झिल्लियों (Membranes) में स्थित होता है, जो हमारी त्वचा, मुंह और आंखों तक फैले होते हैं. जब तापमान 46°F से 82°F (लगभग 8°C से 28°C) के बीच होता है, तो यह चैनल खुल जाता है. इसके खुलते ही कोशिका के अंदर आयन (Ions) का प्रवाह शुरू होता है, जो दिमाग को ठंडक का इलेक्ट्रिकल सिग्नल भेजता है.

2. मेंथॉल कैसे देता है दिमाग को धोखा?

रिसर्च में यह दिलचस्प खुलासा हुआ कि मेंथॉल वास्तव में शरीर को ‘बेवकूफ’ बनाता है. ली के अनुसार, मेंथॉल एक ट्रिक की तरह काम करता है. यह प्रोटीन चैनल के एक खास हिस्से से जुड़ जाता है और उसे बिल्कुल वैसे ही खोल देता है जैसे असली ठंडक खोलती है. हालांकि मेंथॉल किसी चीज को बर्फ की तरह जमाता नहीं है, लेकिन आपका शरीर दिमाग को वही सिग्नल भेजता है जो बर्फ छूने पर मिलता है. यही कारण है कि पुदीना खाने पर या नीलगिरी (Eucalyptus) का तेल लगाने पर हमें तेज ठंडक का एहसास होता है.

क्रायो-इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी एक ऐसी तकनीक जो इलेक्ट्रॉन बीम से फ्लैश-फ्रोजन प्रोटीन की इमेज बनाती है. इसका इस्तेमाल करके रिसर्चर्स ने कोल्ड सेंसिंग चैनल, TRPM8 के कई कन्फर्मेशनल स्नैपशॉट कैप्चर किए, जब यह बंद से खुले में बदलता है. (Credit: Hyuk-Joon Lee)

3.क्रायो-इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी से खुला राज?

वैज्ञानिकों ने इस सेंसर को काम करते हुए देखने के लिए ‘क्रायो-इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी’ तकनीक का इस्तेमाल किया. इसमें प्रोटीन को अचानक जमा दिया जाता है और फिर इलेक्ट्रॉन बीम के जरिए उसकी इमेज ली जाती है. टीम ने TRPM8 के बंद होने से लेकर खुलने तक की कई तस्वीरें लीं. उन्होंने पाया कि ठंड और मेंथॉल दोनों ही इस चैनल को सक्रिय करते हैं, लेकिन उनके तरीके अलग-अलग हैं. ठंड सीधे उस रास्ते (Pore) को प्रभावित करती है जहां से आयन गुजरते हैं, जबकि मेंथॉल प्रोटीन के दूसरे हिस्से से जुड़कर उसमें बदलाव लाता है, जो अंततः रास्ते को खोल देता है.

4. बीमारियों के इलाज में कैसे मिलेगी मदद?

इस खोज के मेडिकल मायने बहुत गहरे हैं. जब TRPM8 सेंसर सही से काम नहीं करता, तो यह क्रोनिक पेन (लगातार होने वाला दर्द), माइग्रेन, आंखों का सूखापन (Dry Eye) और यहां तक कि कुछ प्रकार के कैंसर से जुड़ जाता है. फिलहाल ‘एकोल्ट्रेमोन’ नामक दवा, जो TRPM8 को सक्रिय करती है, ड्राई आई के इलाज के लिए इस्तेमाल की जा रही है. यह दवा मेंथॉल की तरह ही काम करती है और आंखों में ठंडक का अहसास कराकर आंसू बनाने की प्रक्रिया को तेज करती है.

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