रायसेन में संतान सुख का झांसा देकर ठगी:पूजा के बहाने अफसर की पत्नी से लाखों के जेवर लेकर महिला फरार

रायसेन की शीतल सिटी कॉलोनी में शनिवार को ठगी की एक चौंकाने वाली वारदात सामने आई है। यहां संतान प्राप्ति का झांसा देकर एक बुजुर्ग महिला ने अधिकारी की पत्नी से लाखों रुपए के जेवर ठग लिए और फरार हो गई। घटना वित्त विभाग में पदस्थ असिस्टेंट डायरेक्टर ध्रुव पटेल के निवास की है। उनकी पत्नी मिथिलेश उस समय घर पर अकेली थीं। इसी दौरान एक बुजुर्ग महिला भिक्षा मांगने उनके घर पहुंची। गेट पर ही भिक्षा देने से इनकार करने पर महिला ने बाहर आकर देने या अंदर बुलाने की बात कही। सहज विश्वास में आकर मिथिलेश ने उसे घर के भीतर बुला लिया। संतान सुख और पूजा-पाठ का दिया लालच घर के अंदर पहुंचते ही आरोपी महिला ने संतान प्राप्ति और विशेष पूजा-पाठ का जिक्र शुरू किया। उसने दावा किया कि खास अनुष्ठान से घर में खुशियां आएंगी और इसी बहाने मिथिलेश को अपने भरोसे में ले लिया। पूजा के नाम पर पहले गले में पहना एक मंगलसूत्र उतरवाया, फिर दूसरा मंगलसूत्र और एक सोने की अंगूठी भी मंगवा ली। जैसे ही मौका मिला, बुजुर्ग महिला जेवर लेकर चुपचाप घर से निकल गई। कुछ देर बाद मिथिलेश को ठगी का एहसास हुआ, लेकिन तब तक आरोपी फरार हो चुकी थी। घटना की खबर फैलते ही कॉलोनी में हड़कंप मच गया। पुलिस जांच में जुटी, सीसीटीवी खंगाले जा रहे सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। हालांकि, पुलिस को यह भी पता चला है कि घर में लगे सीसीटीवी कैमरे पहले ही चोरी हो चुके हैं, जिससे आरोपी की पहचान में दिक्कत आ रही है। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अजनबी को घर में प्रवेश देने से पहले सतर्क रहें। विशेष रूप से पूजा-पाठ, संतान सुख या किसी चमत्कार का लालच देने वाले लोगों से सावधान रहें और किसी भी संदिग्ध व्यक्ति की सूचना तुरंत पुलिस को दें।
भारत में हर वर्ष 54 हजार करोड़ का दान:हाउ इंडिया गिव्स 2025’ की रिपोर्ट 68% किसी न किसी रूप से करते हैं मदद, सर्वाधिक 45.9% धार्मिक संस्थाओं को

भारत में व्यक्तिगत दान का 45.9% हिस्सा धार्मिक संगठनों को जाता है। 41.8% दान सीधे बेहद गरीब, जरूरतमंद व भिक्षा मांगने वालों को मिलता है। गैर-धार्मिक संगठनों तक सिर्फ 14.9% दान पहुंचता है। यह बात ‘हाउ इंडिया गिव्स’ रिपोर्ट के तीसरे संस्करण में सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक देश में दान का सबसे बड़ा आधार आम घर हैं। कुल घरेलू दान का अनुमान हर साल 54 हजार करोड़ रुपए है। रिपोर्ट के मुताबिक 68% लोगों ने किसी न किसी रूप में देने की बात कही। दान में दिया बहुत सा खाना मुफ्त सामुदायिक रसोइयों तक जाता है। सेवा का सबसे आम रूप धार्मिक संस्थानों में काम है। रिपोर्ट में भारत में घरों के रोजमर्रा के दान का पैमाना, पैटर्न, वजहें बताई गई हैं। बताया गया है कि भारतीय दुनिया के सबसे उदार लोगों में हैं। यह अध्ययन 20 राज्यों में सर्वे पर आधारित है। इसका मकसद यह समझना रहा कि आम लोग नकद, सामान के रूप में मदद, सामाजिक कामों में कैसे योगदान देते हैं। दान किस रूप में 48% खाना, कपड़े, जरूरी वस्तुएं 44% नकद दान 30% समय देकर सेवा ऊंची आय: दान 80%तक 4000–5000 रुपए महीना आय वाले आधे घर दान करते हैं ऊंची आय पर भागीदारी 70 से 80% तक बढ़ जाती है। दान की सबसे बड़ी वजह 90%+ इसे धार्मिक कर्तव्य मानते हैं नैतिक जिम्मेदारी आमने-सामने अपील सबसे असरदार कुल दान में नकद का हिस्सा 44 फीसदी रिपोर्ट में दान के तरीके भी बताए गए हैं। सामान के रूप में मदद का हिस्सा सबसे ज्यादा 46% है। नकद दान 44% है। करीब 30% लोगों ने वॉलंटियरिंग की बात कही। रिपोर्ट के मुताबिक यह दान के रिश्तों और समुदाय आधारित स्वरूप को दिखाता है। रिपोर्ट में दान के तरीके और पैटर्न पर भी हुआ विश्लेषण रिपोर्ट के मुताबिक भारत में रोजमर्रा के घरेलू दान का इकोसिस्टम सालाना करीब 54 हजार करोड़ रुपए का है। रिपोर्ट लॉन्च पर सीएसआईपी की डायरेक्टर और हेड जिनी उप्पल ने कहा कि ‘हाउ इंडिया गिव्स 2025-26’ की रिपोर्ट भारत की उस उदारता को सामने लाती है, जो हमेशा से रही है, पर कम आंकी गई। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय खपत आंकड़ों के आधार पर विश्लेषण करने से यह समझ आता है कि भारत कैसे दान देता है। यह भी पता चलता है कि देश के विकास की गति के साथ दान कैसे बदलता है। हर आय वर्ग के लोग रोजाना करते हैं दान रिपोर्ट के मुताबिक,रोजमर्रा का दान हर आय वर्ग में होता है। कम खपत स्तर 4 से 5 हजार रुपए महीना पर भी करीब आधे घर दान करते हैं। आय बढ़ने पर भागीदारी तेजी से बढ़ती है। रिपोर्ट ने दानदाताओं के चार प्रकार भी बताए हैं। ग्रासरूट, एस्पिरेशनल, प्रैक्टिकल, वेल-ऑफ गिवर्स। इनकी प्रेरणा, जागरूकता, जुड़ने की पसंद अलग-अलग बताई गई है।
भारत में हर वर्ष 54 हजार करोड़ का दान:68% लोग किसी न किसी रूप से करते हैं मदद, सर्वाधिक 45.9% दान धार्मिक संस्थाओं को; हाउ इंडिया गिव्स 2025’ की रिपोर्ट

भारत में व्यक्तिगत दान का 45.9% हिस्सा धार्मिक संगठनों को जाता है। 41.8% दान सीधे बेहद गरीब, जरूरतमंद व भिक्षा मांगने वालों को मिलता है। गैर-धार्मिक संगठनों तक सिर्फ 14.9% दान पहुंचता है। यह बात ‘हाउ इंडिया गिव्स’ रिपोर्ट के तीसरे संस्करण में सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक देश में दान का सबसे बड़ा आधार आम घर हैं। कुल घरेलू दान का अनुमान हर साल 54 हजार करोड़ रुपए है। रिपोर्ट के मुताबिक 68% लोगों ने किसी न किसी रूप में देने की बात कही। दान में दिया बहुत सा खाना मुफ्त सामुदायिक रसोइयों तक जाता है। सेवा का सबसे आम रूप धार्मिक संस्थानों में काम है। रिपोर्ट में भारत में घरों के रोजमर्रा के दान का पैमाना, पैटर्न, वजहें बताई गई हैं। बताया गया है कि भारतीय दुनिया के सबसे उदार लोगों में हैं। यह अध्ययन 20 राज्यों में सर्वे पर आधारित है। इसका मकसद यह समझना रहा कि आम लोग नकद, सामान के रूप में मदद, सामाजिक कामों में कैसे योगदान देते हैं। दान किस रूप में 48% खाना, कपड़े, जरूरी वस्तुएं 44% नकद दान 30% समय देकर सेवा ऊंची आय: दान 80%तक 4000–5000 रुपए महीना आय वाले आधे घर दान करते हैं ऊंची आय पर भागीदारी 70 से 80% तक बढ़ जाती है। दान की सबसे बड़ी वजह 90%+ इसे धार्मिक कर्तव्य मानते हैं नैतिक जिम्मेदारी आमने-सामने अपील सबसे असरदार कुल दान में नकद का हिस्सा 44 फीसदी रिपोर्ट में दान के तरीके भी बताए गए हैं। सामान के रूप में मदद का हिस्सा सबसे ज्यादा 46% है। नकद दान 44% है। करीब 30% लोगों ने वॉलंटियरिंग की बात कही। रिपोर्ट के मुताबिक यह दान के रिश्तों और समुदाय आधारित स्वरूप को दिखाता है। रिपोर्ट में दान के तरीके और पैटर्न पर भी हुआ विश्लेषण रिपोर्ट के मुताबिक भारत में रोजमर्रा के घरेलू दान का इकोसिस्टम सालाना करीब 54 हजार करोड़ रुपए का है। रिपोर्ट लॉन्च पर सीएसआईपी की डायरेक्टर और हेड जिनी उप्पल ने कहा कि ‘हाउ इंडिया गिव्स 2025-26’ की रिपोर्ट भारत की उस उदारता को सामने लाती है, जो हमेशा से रही है, पर कम आंकी गई। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय खपत आंकड़ों के आधार पर विश्लेषण करने से यह समझ आता है कि भारत कैसे दान देता है। यह भी पता चलता है कि देश के विकास की गति के साथ दान कैसे बदलता है। हर आय वर्ग के लोग रोजाना करते हैं दान रिपोर्ट के मुताबिक,रोजमर्रा का दान हर आय वर्ग में होता है। कम खपत स्तर 4 से 5 हजार रुपए महीना पर भी करीब आधे घर दान करते हैं। आय बढ़ने पर भागीदारी तेजी से बढ़ती है। रिपोर्ट ने दानदाताओं के चार प्रकार भी बताए हैं। ग्रासरूट, एस्पिरेशनल, प्रैक्टिकल, वेल-ऑफ गिवर्स। इनकी प्रेरणा, जागरूकता, जुड़ने की पसंद अलग-अलग बताई गई है।
SIR Final Voter List 2026 Update; Rajasthan Chhattisgarh

Hindi News National SIR Final Voter List 2026 Update; Rajasthan Chhattisgarh | Goa Kerala Andaman जयपुर/रायपुर4 मिनट पहले कॉपी लिंक देश के 12 राज्यों-केंद्र शासित प्रदेश में चुनाव आयोग के वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) का दूसरा फेज अपने अंतिम चरण में है। शनिवार को राजस्थान, छत्तीसगढ़ और केरल की फाइनल वोटर लिस्ट पब्लिश हुई। इसके बाद राजस्थान में कुल 5.15 करोड़, छत्तीसगढ़ में 1.87 करोड़ और केरल में 2.69 करोड़ वोटर दर्ज हैं। आज गोवा और अंडमान-निकोबार की लिस्ट भी आ सकती है। अब तक कुल 6 राज्यों-UT की फाइनल लिस्ट आ चुकी है। इससे पहले लक्षद्वीप, पुडुचेरी और गुजरात की अंतिम मतदाता सूची जारी हुई थी। 23 फरवरी को तमिलनाडु और मध्य प्रदेश की लिस्ट आएगी। देश में SIR प्रक्रिया 27 अक्टूबर 2025 से शुरू हुई थी। 23 दिसंबर 2025 से 22 जनवरी तक नाम जोड़ने, हटाने और सुधार के लिए आवेदन लिए गए, जिनका निपटारा करने के बाद फाइनल वोटर लिस्ट पब्लिश की जा रही है। 12 राज्यों-UT में वोटर लिस्ट के SIR में करीब 51 करोड़ मतदाता शामिल हैं। 1 हफ्ते में 6 राज्यों की फाइनल लिस्ट पब्लिश 21 फरवरी- SIR की फाइनल लिस्ट जारी होने के बाद राजस्थान में 5,15,19,929 वोटर हैं। राज्य में 31,36,286 वोटर के नाम कट गए हैं। पूरी खबर पढ़ें..छत्तीसगढ़ में कुल 1,87,30,914 वोटर दर्ज हैं। ड्राफ्ट लिस्ट के मुकाबले फाइनल लिस्ट में 2,34,994 नए वोटर बढ़े हैं। पूरी खबर पढ़ें…केरल में कुल 2,69,53,644 वोटर्स हैं, जबकि पिछले साल अक्टूबर में SIR शुरू होने से पहले 2,78,50,855 वोटर्स थे। 17 फरवरी- गुजरात की फाइनल वोटर लिस्ट के बाद राज्य में कुल 4,40,30,725 वोटर दर्ज हैं। 14 फरवरी- केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में 9,44,211 मतदाता और लक्षद्वीप में कुल 57,607 मतदाता रजिस्टर्ड हैं। 10 फरवरी: असम में फाइनल लिस्ट पब्लिश EC ने असम में हुए स्पेशल रिवीजन (SR) 2026 के तहत फाइनल वोटर लिस्ट जारी की थी। EC के मुताबिक, ड्राफ्ट वोटर लिस्ट की तुलना में 2.43 लाख से ज्यादा नाम हटाए गए हैं। अब राज्य में कुल 2,49,58,139 वोटर्स रजिस्टर्ड हैं। ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में मतदाताओं की संख्या 2,52,01,624 थी। स्पेशल रिवीजन प्रक्रिया के बाद लिस्ट में 2,43,485 नाम हटाए गए हैं। अब फाइनल लिस्ट में 1,24,82,213 पुरुष, 1,24,75,583 महिलाएं और 343 थर्ड-जेंडर शामिल हैं। SIR के बारे में जानें… यह चुनाव आयोग की एक प्रक्रिया है। इसमें वोटर लिस्ट अपडेट की जाती है। इसमें 18 साल से ज्यादा के नए वोटर्स को जोड़ा जाता है। ऐसे लोग जिनकी मौत हो चुकी है। जो शिफ्ट हो चुके हैं उनके नाम हटाए जाते हैं। वोटर लिस्ट में नाम, पते में हुई गलतियों को भी ठीक किया जाता है। BLO घर-घर जाकर खुद फॉर्म भरवाते हैं। 1951 से लेकर 2004 तक का SIR हो गया है, लेकिन पिछले 21 साल से बाकी है। इस लंबे दौर में मतदाता सूची में कई परिवर्तन जरूरी हैं। जैसे लोगों का माइग्रेशन, दो जगह वोटर लिस्ट में नाम होना। डेथ के बाद भी नाम रहना। विदेशी नागरिकों का नाम सूची में आ जाने पर हटाना। कोई भी योग्य वोटर लिस्ट में न छूटे और कोई भी अयोग्य मतदाता सूची में शामिल न हो। पहले फेज में बिहार में हुआ। फाइनल लिस्ट में 7.42 करोड़ वोटर्स हैं। ——————————– ये खबर भी पढ़ें… दिल्ली-कर्नाटक समेत 22 राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों में SIR की घोषणा, अप्रैल से प्रक्रिया शुरू होगी चुनाव आयोग ने देशभर में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की घोषणा कर दी है। चुनाव आयोग के सचिव पवन दीवान ने 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO) को लेटर लिखकर SIR से जुड़ी तैयारी का काम जल्द से जल्द पूरा करने के लिए कहा है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
झाबुआ में 45 हजार से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए:अंतिम वोटर लिस्ट जारी, जिले में कुल 8.83 लाख मतदाता

झाबुआ जिले में चुनाव आयोग के निर्देश पर वोटर लिस्ट को सुधारने का काम पूरा हो गया है। शनिवार को कलेक्टर नेहा मीना ने राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ बैठक की और नई वोटर लिस्ट जारी की। सभी पार्टियों को लिस्ट की कॉपी भी दे दी गई है। वोटर लिस्ट को साफ-सुथरा बनाने के लिए प्रशासन ने 2003 की लिस्ट से मिलान किया। जांच में पता चला कि कई लोग अब वहां नहीं रहते, कुछ की मौत हो चुकी है और कुछ के नाम दो जगह दर्ज थे। ऐसे कुल 45,439 नाम लिस्ट से हटा दिए गए हैं। झाबुआ सीट से करीब 19 हजार, थांदला से 13 हजार और पेटलावद से करीब 13 हजार नाम काटे गए हैं। 21 हजार से ज्यादा नए वोटर जुड़े पुराने नाम हटाने के साथ-साथ नए वोटरों को जोड़ने का अभियान भी चलाया गया। 24 दिसंबर से 22 जनवरी तक चले इस काम में 21,229 नए नाम जोड़े गए हैं। इनमें ज्यादातर वे युवा हैं जिन्होंने हाल ही में 18 साल की उम्र पूरी की है। जिले में अब कितने वोटर? नई लिस्ट के हिसाब से अब पूरे झाबुआ जिले में कुल 8,83,497 वोटर हैं। विधानसभा के हिसाब से देखें तो- झाबुआ: 3,17,068 वोटर थांदला: 2,70,950 वोटर पेटलावद: 2,95,479 वोटर जांच के दौरान लगभग 2 हजार वोटर ऐसे भी मिले जिनका रिकॉर्ड 2003 की लिस्ट में नहीं था। प्रशासन ने ऐसे ‘नो मैपिंग’ वाले नामों की अलग से सुनवाई कर जरूरी सुधार किए हैं।
सूर्या बोले– अभिषेक के फॉर्म की चिंता न करें:उनकी चिंता करें, जिसके खिलाफ उनका बल्ला चलेगा; वर्ल्डकप के तीनों मैच में 0 पर आउट हुए

टी-20 वर्ल्ड कप के तीन मैचों में बिना खाता खोले आउट हुए टीम इंडिया के ओपनर अभिषेक शर्मा के सपोर्ट में कप्तान सूर्यकुमार यादव का बयान आया है। शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सूर्या बोले, अभिषेक शर्मा का फॉर्म चिंता का विषय नहीं है। मुझे चिंता उन लोगों की है, जो अभिषेक की चिंता कर रहे हैं। मुझे फिक्र उन टीमों की है, जिनके खिलाफ अभिषेक का बल्ला चलेगा। उसने पिछले साल टीम के लिए सब कुछ किया था, अब हमारी बारी है कि हम उसका साथ दें। भारत का मुकाबला रविवार को सुपर-8 में साउथ अफ्रीका के खिलाफ अहमदाबाद में खेला जाएगा। अब तक खाता भी नहीं खेल सके टीम इंडिया के ओपनर अभिषेक शर्मा का मौजूदा फॉर्म चिंता का विषय बना हुआ है। वे लगातार तीन मैचों में शून्य पर आउट हुए हैं। इस वर्ल्ड कप में उन्होंने अब तक तीन मुकाबले खेले हैं, लेकिन उनका खाता भी नहीं खुल पाया है। प्लेइंग-11 में बदलाव पर हंस पड़े जब प्लेइंग इलेवन में बदलाव और संजू सैमसन को शामिल करने पर सवाल पूछा गया तो सूर्यकुमार हंस पड़े। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि क्या अभी अभिषेक को हटा दूं? या तिलक को? पिच और परिस्थितियों पर भरोसा पिच को लेकर सूर्यकुमार ने कहा कि टीम हर तरह की परिस्थितियों के लिए तैयार है। उन्होंने माना कि विकेट ज्यादा चुनौतीपूर्ण नहीं थे, लेकिन टीम ने हालात के मुताबिक खुद को ढालने की कोशिश की है। उन्होंने यह भी कहा, बल्लेबाजी में परिस्थिति का सम्मान करना जरूरी है। हमारे पास पर्याप्त कौशल है। कभी-कभी स्थिति के अनुसार खेलना पड़ता है। हमारे पास ऐसे खिलाड़ी हैं जो मैच का रुख बदल सकते हैं। ——————————- क्रिकेट का कीड़ा है तो सॉल्व कीजिए ये सुपर क्विज क्या आप खुद को क्रिकेट के सुपर फैन मानते हैं? पूरे T20 वर्ल्ड कप टूर्नामेंट के दौरान दैनिक भास्कर के खास गेम ‘SUPER ओवर’ में रोज क्रिकेट से जुड़े 6 सवाल आपका क्रिकेट ज्ञान परखेंगे। जितनी जल्दी सही जवाब देंगे उतने ज्यादा रन बनेंगे। जितने ज्यादा रन बनेंगे, लीडरबोर्ड में उतना ही ऊपर आएंगे। तो रोज खेलिए और टूर्नामेंट का टॉप स्कोरर बनिए। अभी खेलें SUPER ओवर…क्लिक करें ———————— स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… टीम इंडिया के टॉप ऑर्डर की कमजोरी ऑफ-स्पिन:13 टीमों में भारत का स्कोरिंग रेट सबसे खराब टी-20 वर्ल्ड कप 2026 के ग्रुप स्टेज में टीम इंडिया का प्रदर्शन शानदार रहा, लेकिन एक बड़ी कमजोरी भी सामने आई है। भारतीय टॉप ऑर्डर के पहले आठ बल्लेबाजों में से छह बाएं हाथ के हैं। टीमें इसी का फायदा उठाते हुए भारतीय बल्लेबाजों के खिलाफ लगातार ऑफ स्पिन का इस्तेमाल कर रही हैं। पढ़ें पूरी खबर…
सूर्या बोले– अभिषेक के फॉर्म की चिंता न करें:उनकी चिंता करें, जिनके खिलाफ उनका बल्ला चलेगा; वर्ल्डकप के तीनों मैच में 0 पर आउट हुए

टी-20 वर्ल्ड कप के तीन मैचों में बिना खाता खोले आउट हुए टीम इंडिया के ओपनर अभिषेक शर्मा के सपोर्ट में कप्तान सूर्यकुमार यादव का बयान आया है। शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सूर्या बोले, अभिषेक शर्मा का फॉर्म चिंता का विषय नहीं है। मुझे चिंता उन लोगों की है, जो अभिषेक की चिंता कर रहे हैं। मुझे फिक्र उन टीमों की है, जिनके खिलाफ अभिषेक का बल्ला चलेगा। उसने पिछले साल टीम के लिए सब कुछ किया था, अब हमारी बारी है कि हम उसका साथ दें। भारत का मुकाबला रविवार को सुपर-8 में साउथ अफ्रीका के खिलाफ अहमदाबाद में खेला जाएगा। प्लेइंग-11 में बदलाव पर हंस पड़े सूर्या जब प्लेइंग इलेवन में बदलाव और संजू सैमसन को शामिल करने पर सवाल पूछा गया तो सूर्यकुमार हंस पड़े। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि क्या अभी अभिषेक को हटा दूं? या तिलक को? कप्तान बोले-पिच और परिस्थितियों पर भरोसा पिच को लेकर सूर्यकुमार ने कहा कि टीम हर तरह की परिस्थितियों के लिए तैयार है। उन्होंने माना कि विकेट ज्यादा चुनौतीपूर्ण नहीं थे, लेकिन टीम ने हालात के मुताबिक खुद को ढालने की कोशिश की है। उन्होंने यह भी कहा, बल्लेबाजी में परिस्थिति का सम्मान करना जरूरी है। हमारे पास पर्याप्त कौशल है। कभी-कभी स्थिति के अनुसार खेलना पड़ता है। हमारे पास ऐसे खिलाड़ी हैं जो मैच का रुख बदल सकते हैं। नामीबिया के खिलाफ नहीं खेले थे अभिषेक अभिषेक टूर्नामेंट के दूसरे मुकाबले में नामीबिया के खिलाफ पेट में इन्फेक्शन के कारण नहीं खेल सके थे। उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें दो दिनों के लिए दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती भी कराया गया था। हालांकि इलाज के बाद उनकी स्थिति में सुधार हुआ और वे फिर से टीम से जुड़ गए। ——————————- क्रिकेट का कीड़ा है तो सॉल्व कीजिए ये सुपर क्विज क्या आप खुद को क्रिकेट के सुपर फैन मानते हैं? पूरे T20 वर्ल्ड कप टूर्नामेंट के दौरान दैनिक भास्कर के खास गेम ‘SUPER ओवर’ में रोज क्रिकेट से जुड़े 6 सवाल आपका क्रिकेट ज्ञान परखेंगे। जितनी जल्दी सही जवाब देंगे उतने ज्यादा रन बनेंगे। जितने ज्यादा रन बनेंगे, लीडरबोर्ड में उतना ही ऊपर आएंगे। तो रोज खेलिए और टूर्नामेंट का टॉप स्कोरर बनिए। अभी खेलें SUPER ओवर…क्लिक करें ———————— स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… टीम इंडिया के टॉप ऑर्डर की कमजोरी ऑफ-स्पिन:13 टीमों में भारत का स्कोरिंग रेट सबसे खराब टी-20 वर्ल्ड कप 2026 के ग्रुप स्टेज में टीम इंडिया का प्रदर्शन शानदार रहा, लेकिन एक बड़ी कमजोरी भी सामने आई है। भारतीय टॉप ऑर्डर के पहले आठ बल्लेबाजों में से छह बाएं हाथ के हैं। टीमें इसी का फायदा उठाते हुए भारतीय बल्लेबाजों के खिलाफ लगातार ऑफ स्पिन का इस्तेमाल कर रही हैं। पढ़ें पूरी खबर…
16,839 नए मतदाता जुड़े, वोटरों की संख्या 11.11 लाख पार:राजगढ़ में अंतिम मतदाता सूची जारी, 2,554 नाम को हटाया, 7,504 में किया बदलाव

राजगढ़ जिले में विशेष गहन पुनरीक्षण 2026 के तहत शनिवार को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित कर दी गई। कलेक्टर और जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा ने कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर पूरी जानकारी साझा की। पांचों विधानसभा क्षेत्रों में 23 दिसंबर 2025 से 20 फरवरी 2026 तक आए दावों और आपत्तियों को देखा गया। इस दौरान 16,839 नए वोटर जुड़े, 2,554 नाम हटाए गए और 7,504 प्रविष्टियों में सुधार किया गया। इस प्रकार आज की स्थिति में कुल 11 लाख 11 लाख 28 हजार 39 वोटर सम्मिलित हैं, जिनमें 14,140 दिव्यांग वोटर शामिल हैं। राजनीतिक दलों को दी गई सीडी राजनीतिक दलों को सूची की हार्ड कॉपी और फोटो वाली सीडी भी दी गई। नागरिक अपनी सूची अपने रजिस्ट्रीकरण कार्यालय या अधिकृत जगह पर देख सकते हैं। फोटो सहित सूची मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, मध्यप्रदेश की वेबसाइट http://www.ceoelection.mp.gov.in पर भी उपलब्ध है। कलेक्टर डॉ. मिश्रा ने कहा कि अगर किसी का नाम सूची में नहीं है तो वे प्रपत्र-6 से आवेदन करें। नाम हटाने के लिए प्रपत्र-7 और सुधार के लिए प्रपत्र-8 का इस्तेमाल करें। 18 साल के हो रहे युवाओं को भी सूची में जोड़ने के लिए कहा गया। डॉ. मिश्रा ने सभी राजनीतिक दलों का सहयोग सराहा और कहा कि उनकी मदद से मतदाता सूची हमेशा सही और अपडेट रहेगी।
स्विट्जरलैंड 1 करोड़ की आबादी के बाद रोक देगा एंट्री:भीड़ से थका ‘धरती का स्वर्ग‘, 14 जून को होगा जनमत संग्रह, प्रयोग पर पूरी दुनिया की नजर

यूरोप का समृद्ध और अनुशासित देश अब एक असाधारण फैसले की दहलीज पर खड़ा है। 14 जून 2026 को स्विट्जरलैंड में जनमत संग्रह होगा, जिसमें तय किया जाएगा कि 2050 तक देश की कुल स्थायी आबादी अधिकतम 1 करोड़ पर सीमित की जाए या नहीं। यह प्रस्ताव दक्षिणपंथी दल स्विस पीपुल्स पार्टी ने आगे बढ़ाया है। स्विट्जरलैंड की वर्तमान आबादी लगभग 91 लाख है। पिछले बीस वर्षों में वृद्धि का बड़ा कारण बाहरी कामगारों का आगमन रहा है। कुल जनसंख्या का पच्चीस प्रतिशत हिस्सा विदेशी मूल का है। इसी तेज वृद्धि ने आवास संकट को गहरा किया है। ज्यूरिख और जिनेवा जैसे शहरों में खाली मकानों की दर एक प्रतिशत से भी कम बताई जाती है। किराये बढ़े हैं। अस्पतालों में प्रतीक्षा समय लंबा हुआ है, सड़कों, रेल मार्गों पर भीड़ बढ़ी है। प्रस्तावित प्रावधान स्पष्ट करते हैं कि 1 करोड़ की सीमा जन्म दर से नहीं, बल्कि आव्रजन पर नियंत्रण के जरिये लागू की जाएगी। जिसके अनुसार यदि आबादी 95 लाख से ऊपर जाती है, तो सरकार को वीसा, कामगार कोटा, शरण नियम और पारिवारिक पुनर्मिलन जैसे प्रावधानों को सख्त करना होगा। यदि जनसंख्या 1 करोड़ पार जाती है, तो आव्रजन को और सीमित कर आबादी को वापस सीमा के भीतर लाने के उपाय करने होंगे। समर्थक इसे अव्यवस्था की रफ्तार थामने का तरीका बताते हैं। वहीं ज्यूरिख विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्री यान आइगनबर्गर मानते हैं कि उत्पादकता वृद्धि का महत्वपूर्ण हिस्सा कुशल विदेशी श्रमिकों से आता है। कठोर सीमा से श्रम बाजार में कमी और कर राजस्व पर दबाव पड़ सकता है। स्विस नियोक्ता संघ के अध्यक्ष वैलेंटिन वोग्ट पहले संकेत दे चुके हैं कि स्वास्थ्य, निर्माण और सेवा क्षेत्र पहले से श्रमिक कमी झेल रहे हैं। आबादी सीमा से यह संकट गहरा सकता है। अब फैसला स्विस मतदाताओं के हाथ में है, लेकिन इसकी गूंज वैश्विक बहस में दूर तक सुनाई देगी। कुल आबादी पर संवैधानिक सीमा का उदाहरण नहीं इससे पहले ऑस्ट्रेलिया ने 2013 के बाद अवैध समुद्री प्रवेश रोका। हंगरी ने 2015 के बाद सीमा बाड़ और कड़े शरण नियम लागू किए। जापान ने लंबे समय तक सीमित आव्रजन रखा, लेकिन वृद्ध होती आबादी और श्रमिक कमी के कारण नियमों में ढील देनी पड़ी। स्विट्जरलैंड का प्रस्ताव इसलिए अलग है क्योंकि यह कुल आबादी की ऊपरी सीमा तय करने की कोशिश है। सवाल सीधा है कि भविष्य की समृद्धि खुली व्यवस्था से आएगी या नियंत्रित विस्तार से।
Chess FIDE Candidates 2026 Pairings Update; Praggnanandhaa Vs Anish Giri

Hindi News Sports Chess FIDE Candidates 2026 Pairings Update; Praggnanandhaa Vs Anish Giri | Caruana Nakamura साइप्रस3 मिनट पहले कॉपी लिंक FIDE कैंडिडेट्स टूर्नामेंट और FIDE विमेंस कैंडिडेट्स 2026 की पेयरिंग जारी कर दी गई है। यह पेयरिंग ड्रॉ ऑफ लॉट्स के जरिए साइप्रस के पाफोस स्थित कैप सेंट जॉर्ज होटल एंड रिजॉर्ट में तय कर दी गई। शुक्रवार को साइप्रस में FIDE अधिकारियों, साइप्रस चेस फेडरेशन और सरकारी प्रतिनिधियों की मौजूदगी में खिलाड़ियों को ड्रॉ नंबर अलॉट किए गए। टूर्नामेंट 28 मार्च से 16 अप्रैल 2026 तक खेला जाएगा। कैंडिडेट्स का विनर वर्ल्ड चेस चैंपियनशिप फाइनल में वर्ल्ड चैंपियन को चुनौती देगा। टूर्नामेंट का पूरा शेड्यूल राउंड-1 में प्रज्ञानानंद का मैच गिरी से होगा ओपन वर्ग में पहले ही राउंड में अमेरिका के फैबियानो कारुआना और हिकारू नकामुरा आमने-सामने होंगे। साथ ही आर प्रज्ञानानंद का मुकाबला अनीश गिरी से होगा। जबकि, सिंदारोव-एसिपेंको और ब्लूबाउम-वेई यी भी पहले दिन भिड़ेंगे। विमेंस कैटेगरी में दिव्या देशमुख का मैच हम्पी कोनेरू से होगा। जबकि आर वैशाली का मुकाबला बिबिसारा असाउबायेवा से होगा। झू जिनर बनाम तान झोंगयी जैसे मुकाबले पहले ही राउंड में देखने को मिलेंगे। 2 टूर्नामेंट एक साथ खेले जाएंगे साइप्रस में 2 टूर्नामेंट साथ-साथ आयोजित किए जाएंगे। पहला ओपन कैटेगरी में FIDE कैंडिडेट्स टूर्नामेंट और दूसरा FIDE महिला कैंडिडेट्स टूर्नामेंट। दोनों टूर्नामेंट डबल राउंड रॉबिन के आधार पर खेला जाएगा। इसमें 14 राउंड के मुकाबले खेले जाएंगे। जहां हर खिलाड़ी हर प्रतिद्वंद्वी से दो बार खेलेगा। 10 लाख यूरो की न्यूनतम पुरस्कार राशि वाले इस टूर्नामेंट में टाई की स्थिति में प्लेऑफ से विजेता तय होगा। गुकेश ने जीता था पिछला कैंडिडेट्स टूर्नामेंट पिछली बार भारत के डी गुकेश ने इसे जीतकर चीन के डिंग लिरेन को चुनौती दी थी। तब गुकेश कैंडिडेट्स टूर्नामेंट जीतने वाले भारत के दूसरे खिलाड़ी बने थे। 5 बार के वर्ल्ड चैंपियन विश्वनाथन आनंद ने 1995 में पहली बार कैंडिडेट्स टूर्नामेंट जीता था। डी गुकेश ने पिछले साल कैंडिडेट्स टूर्नामेंट जीता था। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…









