Monday, 06 Apr 2026 | 05:49 AM

Trending :

EXCLUSIVE

डेंड्रफ की समस्या और घरेलू उपाय जानें डॉक्टर जी.एन बरनवाल की सलाह.

perfGogleBtn

Last Updated:February 22, 2026, 23:50 IST वातावरण में बढ़ते प्रदूषण, धूल और गलत जीवनशैली के कारण डेंड्रफ की समस्या आम हो गई है. यह सिर में खुजली, पपड़ी और बालों के झड़ने की वजह बन सकती है. घरेलू उपायों और सही आदतों से इससे निजात पाई जा सकती है, लेकिन यदि समस्या बढ़े तो यह गंभीर त्वचा रोगों का संकेत भी हो सकती है, जैसे स्किन सोरायसिस, इसलिए समय रहते उचित इलाज और त्वचा विशेषज्ञ से परामर्श लेना जरूरी है. वातावरण में बढ़ते प्रदूषण और धूल के कारण आजकल डेंड्रफ की समस्या बेहद आम लेकिन परेशान करने वाली बन चुकी है. यह समस्या पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं में भी देखने को मिल रही है. अधिक डैंड्रफ होने पर सर के स्कैल्प में हमेशा खुजली की समस्या भी देखने को मिलती है, जिससे लोग अक्सर परेशान रहते हैं. बालों में डैंड्रफ होने पर स्कैल्प पर सफेद रंग की पपड़ी जमने लगती है, जिससे सिर में लगातार तेज खुजली की समस्या बनी रहती है. लगातार खुजली करने से सिर के स्कैल्प में कभी कभी छोटे-छोटे घाव भी बन जाते हैं. जिससे बालों की जे भी कमजोर होने लगते हैं और इससे हेयर फॉल की समस्या भी देखने को मिलती है. इसके पीछे का कारण लगातार बदलती जीवन शैली, गलत खानपान, तनाव और बालों में तरह-तरह के केमिकल वाले शैंपू कंडीशनर और तेल का इस्तेमाल करना हो सकता है. इसके अलावा वातावरण में मौजूद धूल और प्रदूषण के कारण भी स्कैल्प पर गंदगी जम जाती है, जिससे अक्सर डेंड्रफ की समस्या देखने को मिलती है. Add News18 as Preferred Source on Google डेंड्रफ की समस्या से जूझ रहे लोग इससे निजात पाने के लिए तरह-तरह के केमिकल वाले शैंपू, कंडीशनर, तेल और आजकल सीरम का भी इस्तेमाल कर रहे हैं. लेकिन आप इस समस्या को कुछ सही आदतों और घरेलू उपाय से भी काफी हद तक ठीक कर सकते हैं. आज हम आपको इस समस्या से निजात पाने के लिए कुछ घरेलू और असरदार उपाय बताने जा रहे हैं.  इसके अलावा अगर स्केल पर डेंड्रफ की समस्या लगातार बढ़ रही है, तो यह त्वचा से संबंधित कुछ गंभीर बीमारियों के संकेत भी हो सकते हैं. लगातार डेंड्रफ की समस्या बढ़ने पर आपको त्वचा विशेषज्ञ से परामर्श लेना भी बेहद आवश्यक होता है. अगर यह डेंड्रफ बालों के साथ-साथ त्वचा के किसी अन्य जगहों पर भी दिखाई दे तो यह स्किन सोरायसिस के लक्षण हो सकते है.. First Published : February 22, 2026, 23:50 IST

sugar control tips| डायबिटीज में आलू या शकरकंद: ब्लड शुगर कंट्रोल के लिए क्या बेहतर?

authorimg

Last Updated:February 22, 2026, 23:41 IST Diabetes Control Tips: डायबिटीज में आलू खाएं या शकरकंद यदि आप भी इस सवाल से उलझन में पड़ गए हैं, तो ये लेख आपके लिए है. आलू और शकरकंद दोनों की सेहतमंद गुणों से भरपूर है, लेकिन ज्यादा मात्रा या गलत तरीके से खाने पर ये ब्लड शुगर को बढ़ा सकते हैं. डायबिटीज में खानपान का ध्यान रखना इसे कंट्रोल करने की पहली शर्त होती है. डाइट में शुगर ट्रिगर करने वाली एक चीज भी डायबिटीज के लक्षणों को गंभीर बना सकती है. देश में करोड़ों लोग या तो डायबिटीज से जूझ रहे हैं या फिर उनका ब्लड शुगर कंट्रोल में नहीं रहता. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये है कि रोज की थाली में क्या खाया जाए और क्या नहीं. खासतौर पर आलू और शकरकंद जैसी आम सब्जियों को लेकर लोगों के मन में दुविधा बनी रहती है. कोई कहता है आलू जहर है, तो कोई शकरकंद को चमत्कारी मानता है. लेकिन सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि डायबिटीज में खाने का मतलब किसी चीज को पूरी तरह छोड़ देना नहीं होता. ब्लड शुगर इस बात पर निर्भर करता है कि खाना कितनी जल्दी पचकर ग्लूकोज में बदलता है और खून में जाता है. इसी को ग्लाइसेमिक इंडेक्स कहा जाता है. जितना ज्यादा जीआई, उतनी जल्दी शुगर बढ़ेगी. यही वजह है कि आलू और शकरकंद की तुलना जरूरी हो जाती है. डायबिटीज में आलू खाना चाहिए? आलू को अक्सर डायबिटीज का दुश्मन मान लिया जाता है, लेकिन हर आलू एक जैसा नहीं होता. भारत में आलू की कई किस्में उगाई जाती हैं और हर किस्म का शरीर पर असर अलग हो सकता है. कुछ किस्मों में ऐसा स्टार्च होता है जो धीरे-धीरे टूटता है, जिससे शुगर तेजी से नहीं बढ़ती. रिसर्च बताती है कि सही किस्म और सही तरीके से पकाया गया आलू सीमित मात्रा में नुकसानदेह नहीं होता. समस्या तब होती है जब आलू को तलकर या ज्यादा मसाले के साथ खाया जाता है. उबला आलू भी अगर जरुरत से ज्यादा खाया जाए तो शुगर बढ़ा सकता है, क्योंकि इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स हाई होता है. हालांकि उबालकर ठंडा किया गया आलू थोड़ा बेहतर माना जाता है, क्योंकि उसमें मौजूद स्टार्च का लेवल बदल जाता है. शकरकंद खाने से ब्लड शुगर बढ़ता है?अब बात करें शकरकंद की, जिसे लोग अक्सर डायबिटीज के लिए सुरक्षित मानते हैं. शकरकंद मीठा जरूर होता है, लेकिन उसकी मिठास का असर शरीर पर अलग तरह से पड़ता है. इसमें फाइबर की मात्रा ज्यादा होती है, जो शुगर को धीरे-धीरे खून में जाने देता है. यही वजह है कि इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स आलू की तुलना में कम रहता है. इसके अलावा, शकरकंद में विटामिन ए, विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो शरीर की कोशिकाओं को नुकसान से बचाते हैं और इंसुलिन के असर को बेहतर बना सकते हैं. आयुर्वेद में भी शकरकंद को ऊर्जा देने वाला और पाचन के लिए अपेक्षाकृत संतुलित माना गया है, बशर्ते मात्रा सही हो. वैज्ञानिक शोधों के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति की प्राथमिकता ब्लड शुगर को नियंत्रित रखना है, तो शकरकंद थोड़ा बेहतर विकल्प साबित हो सकता है. लेकिन ज्यादा मात्रा में खाने पर यह कार्बोहाइड्रेट शुगर बढ़ा सकता है. वहीं आलू को पूरी तरह छोड़ देना भी जरूरी नहीं है. अगर आलू उबला हुआ हो, तो उसे सब्जियों व दाल के साथ संतुलित मात्रा में खाया जा सकता है. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह बतौर सीनियर सब एडिटर News18 Hindi से जुड़ी हैं. वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्यू पर आधारित रिपोर्ट्स बनाने में एक्सपर्ट हैं. शारदा पिछले 5 सालों से मीडिया …और पढ़ें First Published : February 22, 2026, 23:41 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

‘ममता बनर्जी इंडिया ब्लॉक की नेता’: मणिशंकर अय्यर का राहुल गांधी पर ताजा हमला | राजनीति समाचार

India vs South Africa Live Score, T20 World Cup 2026 Super 8s: Follow Scorecard And Match Action From Ahmedabad. (Picture Credit: AP)

आखरी अपडेट:22 फरवरी, 2026, 23:23 IST मणिशंकर अय्यर ने यह कहकर राहुल गांधी पर ताजा हमला बोला कि ममता बनर्जी इंडिया ब्लॉक की वास्तविक नेता हैं और उन्हें दूसरों को यह पद संभालने देना चाहिए। कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर और राहुल गांधी. (पीटीआई) अपनी विवादास्पद टिप्पणियों के लिए जाने जाने वाले कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर ताजा हमला बोलते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इंडिया ब्लॉक की असली नेता हैं और उनके बिना गठबंधन खत्म हो जाएगा। आईएएनएस से बात करते हुए, अय्यर ने टिप्पणी की, “ममता दी के बिना, भारत गठबंधन का ‘आई’, ‘एन’, ‘डी’, ‘आई’, ‘ए’ खत्म हो जाएगा। क्योंकि ममता बनर्जी इस गठबंधन की नेता हैं। उनके साथ, दो से चार अन्य लोग हैं जो इस पद को हासिल कर सकते हैं।” अय्यर ने आगे कहा, “मुझे उम्मीद है कि इस पद पर बने रहने की कोशिश करने के बजाय, जो छोटी पार्टियों का है – चाहे वह स्टालिन, ममता दीदी, अखिलेश, तेजस्वी या कोई और हो – राहुल गांधी को उन्हें इसे संभालने देना चाहिए।” कोलकाता, पश्चिम बंगाल: कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर कहते हैं, “ममता दी के बिना, भारत गठबंधन का ‘आई’, ‘एन’, ‘डी’, ‘आई’, ‘ए’ खत्म हो जाएगा। क्योंकि ममता बनर्जी इस गठबंधन की नेता हैं। उनके साथ दो-चार अन्य लोग भी हैं जो यह पद हासिल कर सकते हैं। मैं… pic.twitter.com/d2jtl9KBud– आईएएनएस (@ians_india) 22 फ़रवरी 2026 दिग्गज कांग्रेस नेता ने यह भी याद किया कि वह तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में ममता बनर्जी के पहले राष्ट्रीय सचिव थे। उन्होंने कहा, “मैं दिसंबर 1997 के अंत में यहां पार्टी में शामिल हुआ था। लेकिन तीन हफ्ते के भीतर मुझे एहसास हुआ कि यह पार्टी बंगालियों की है और मैं बंगाली नहीं हूं। तो फिर मैं वहां क्या करूंगा? इसलिए मैंने छोड़ दिया।” “मैं आपको कांग्रेस के बारे में क्या बता सकता हूँ?” मैं केवल यही आशा करता हूं कि ममता दीदी एक बार फिर भाजपा नेताओं को ऐसा करारा जवाब देंगी कि वे बिना किसी चेहरे के रह जाएं,” उन्होंने आगामी राज्य चुनावों पर कहा। इससे कुछ दिन पहले ही अय्यर ने कांग्रेस के राहुल गांधी के नेतृत्व की खुलेआम आलोचना करते हुए कहा था, “मैं भूल गया हूं कि मैं पार्टी का सदस्य हूं, और इसलिए मैं गांधीवादी हूं, मैं नेहरूवादी हूं, मैं राजीववादी हूं, लेकिन मैं राहुलवादी नहीं हूं।” केरल में एलडीएफ सरकार की प्रशंसा करने और विश्वास व्यक्त करने के बाद कि सीएम पिनाराई विजयन लगातार तीसरा कार्यकाल हासिल करेंगे, अय्यर ने भी कांग्रेस का गुस्सा आकर्षित किया। विजयन ने अय्यर की टिप्पणियों का स्वागत किया, लेकिन कांग्रेस ने खुद को टिप्पणियों से अलग कर लिया। पश्चिम बंगाल कांग्रेस की प्रतिक्रिया पश्चिम बंगाल में कांग्रेस नेताओं ने अय्यर की टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि वह अब पार्टी गतिविधियों से जुड़े नहीं हैं। “आइए हम शुरुआत में ही स्पष्ट कर दें – लंबे समय से, मणिशंकर अय्यर अब कांग्रेस पार्टी की गतिविधियों से जुड़े नहीं हैं। बंगाल से पांच राज्यसभा सीटें अब खाली हैं। क्या मणिशंकर अय्यर की ऐसी टिप्पणी के पीछे यही कारण था?” कांग्रेस के राज्य महासचिव सुमन रॉय चौधरी ने एनडीटीवी को बताया। उन्होंने कहा, “मणिशंकर जी, क्या आप जानते हैं कि ममता बनर्जी पर्दे के पीछे से बीजेपी की कठपुतली के रूप में काम करती हैं, जिसके खिलाफ इंडिया ब्लॉक लड़ रहा है? मुझे नहीं लगता कि पार्टी से दूर रहने के बाद, कांग्रेस पार्टी के बारे में कोई भी निर्णय लेने में आपकी कोई भूमिका है।” टीएमसी नेता कुणाल घोष ने कहा कि सरकार का प्राथमिक कर्तव्य भाजपा को निर्णायक रूप से हराना है और यह सुनिश्चित करना है कि यहां चौथी बार ममता बनर्जी के नेतृत्व में सरकार बने, उन्होंने कहा कि “पूरा देश देख रहा है कि भाजपा को उचित वैचारिक लड़ाई कौन दे रहा है।” पश्चिम बंगाल 2026 की पहली छमाही में विधानसभा चुनावों के लिए तैयार हो रहा है, जिसमें टीएमसी और बीजेपी के बीच तीखी लड़ाई चल रही है। टीएमसी का मुकाबला कांग्रेस से भी होगा, जिसने इस बार सीपीआई (एम) के साथ गठबंधन किए बिना अकेले चुनाव लड़ने का विकल्प चुना है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 22 फरवरी, 2026, 23:23 IST समाचार राजनीति ‘ममता बनर्जी इंडिया ब्लॉक की नेता’: मणिशंकर अय्यर का राहुल गांधी पर ताज़ा हमला अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)भारत गठबंधन(टी)मणिशंकर अय्यर(टी)ममता बनर्जी(टी)राहुल गांधी(टी)कांग्रेस पार्टी(टी)तृणमूल कांग्रेस(टी)पश्चिम बंगाल की राजनीति(टी)टीएमसी बनाम बीजेपी

फेफड़ों की बीमारी में जेनेटिक कारण और परिवार का इतिहास क्यों है जरूरी.

authorimg

Last Updated:February 22, 2026, 22:59 IST फेफड़ों की बीमारियों को अक्सर धूम्रपान, प्रदूषण या संक्रमण से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इसके पीछे आनुवंशिक कारण भी हो सकते हैं. अगर परिवार में किसी को अस्थमा, सीओपीडी या अन्य सांस से जुड़ी समस्या रही है, तो जोखिम बढ़ सकता है. ख़बरें फटाफट फेफड़े हमारे शरीर का बेहद अहम हिस्सा हैं, क्योंकि यही हमें सांस लेने और शरीर को ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करते हैं. अक्सर लोग फेफड़ों की बीमारी को सिर्फ प्रदूषण, धूम्रपान या संक्रमण से जोड़कर देखते हैं, लेकिन कई मामलों में इसके पीछे जेनेटिक कारण भी हो सकते हैं. अगर परिवार में किसी को अस्थमा, सीओपीडी या अन्य फेफड़ों से जुड़ी बीमारी रही है, तो सतर्क रहना और भी जरूरी हो जाता है. खास बात यह है कि फेफड़ों की समस्या हमेशा सिर्फ खांसी से ही शुरू नहीं होती, बल्कि इसके कई और संकेत भी हो सकते हैं जिन्हें नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है. मेडिकल रिसर्च के मुताबिक कुछ फेफड़ों की बीमारियों में जेनेटिक रोल भी होता है. मतलब अगर परिवार में पहले से किसी को लंग डिजीज रही है, तो उसका असर अगली पीढ़ी पर भी पड़ सकता है. उदाहरण के तौर पर अल्फा-1 एंटीट्रिप्सिन की कमी एक ऐसी जेनेटिक कंडीशन है, जो माता-पिता से बच्चों में ट्रांसफर हो सकती है और अगर समय पर जांच न हो तो फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है. इसी तरह विश्व स्वास्थ्य संगठन भी मानता है कि अस्थमा जैसी बीमारियां सिर्फ प्रदूषण या एलर्जी से नहीं होतीं, बल्कि इसमें जेनेटिक और एनवायरनमेंट दोनों फैक्टर काम करते हैं. यानी अगर घर में किसी को अस्थमा है तो परिवार के बाकी सदस्यों को भी सतर्क रहने की जरूरत है. वहीं मेडिकल जर्नल द लैंसेट रेस्पिरेटरी मेडिसिन में छपी स्टडीज बताती हैं कि क्रॉनिक लंग डिजीज में फैमिली हिस्ट्री एक बड़ा रिस्क फैक्टर हो सकता है, खासकर तब जब इसके साथ धूम्रपान या प्रदूषण जैसे ट्रिगर भी मौजूद हों. सांस फूलना और सीने में जकड़नअगर बिना ज्यादा मेहनत के ही सांस फूलने लगे या सीने में बार-बार जकड़न महसूस हो, तो इसे सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज न करें. अमेरिकन लंग एसोसिएशन की रिपोर्ट के अनुसार, सांस फूलना फेफड़ों की कार्यक्षमता में कमी का शुरुआती संकेत हो सकता है. खासकर अगर यह लक्षण बार-बार दिखे, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है. बार-बार संक्रमण और बलगमअगर आपको या परिवार के किसी सदस्य को बार-बार सीने में संक्रमण, निमोनिया या लंबे समय तक बलगम की शिकायत रहती है, तो यह भी चेतावनी हो सकती है. द लैंसेट रेस्पिरेटरी मेडिसिन में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, क्रॉनिक लंग डिजीज वाले लोगों में संक्रमण का खतरा अधिक रहता है. लंबे समय तक चलने वाला बलगम या रंग में बदलाव भी गंभीर संकेत हो सकता है. About the Author Vividha Singh विविधा सिंह न्यूज18 हिंदी (NEWS18) में पत्रकार हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में बैचलर और मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में ये 3 वर्षों से काम कर रही हैं. फिलहाल न्यूज18…और पढ़ें First Published : February 22, 2026, 22:57 IST

डॉ. अमित कुमार से जानें छोटे बच्चों के लिए टूथपेस्ट की सुरक्षा

authorimg

Last Updated:February 22, 2026, 22:59 IST छोटे बच्चों को टूथपेस्ट देना उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है. विशेष रूप से 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को बिना फ्लोराइड वाले टूथपेस्ट के ब्रश करना नहीं चाहिए. दंत रोग विशेषज्ञों की सलाह है कि इस उम्र में बच्चों के दांतों को सॉफ्ट ब्रश से साफ करें और ध्यान रखें कि बच्चों के लिए ही बनाए गए टूथपेस्ट का ही उपयोग किया जाए. ख़बरें फटाफट मऊ. अक्सर देखा जाता है छोटे बच्चे जीद करते हैं लोग उन्हें टूथपेस्ट दे देते हैं. लेकिन क्या आपको पता है छोटे बच्चों को टूथपेस्ट देना काफी हानिकारक है. अगर नहीं तो आइए आज हम आपको बताते हैं छोटे बच्चों को टूथपेस्ट को लेकर क्या कुछ बताते हैं दंत रोग विशेषज्ञ. क्या उन्हें टूथपेस्ट देना सही है या नहीं यदि टूथपेस्ट दे तो कैसा दे और कितने वर्ष के बच्चों को दें. 2 वर्ष के कम उम्र के बच्चों को न कराए टूथपेस्टलोकल 18 से बातचीत करते हुए शांति डेंटल क्लीनिक के दंत रोग विशेषज्ञ डॉक्टर अमित कुमार उपाध्याय बताते हैं कि ब्रश करना तो हर किसी के लिए फायदेमंद होता है लेकिन ब्रश करने की एक उम्र होती है यदि 2 वर्ष के छोटे बच्चे ब्रश करते हैं तो उनके लिए काफी नुकसान दायक साबित हो सकता है. यदि ब्रश भी कराना हो  तो माता-पिता अपने हाथों से सॉफ्ट ब्रश से टूथपेस्ट कराए क्योंकि छोटा बच्चा यदि ब्रश लेकर मुंह में डालता है तो इंजरी कर सकता है या टूथपेस्ट खा सकता है, जो दांतों के साथ सेहत पर काफी असर डालता है. 2 वर्ष के बच्चों को टूथपेस्ट के साथ ब्रश करने के लिए ना दे नहीं तो उनकी सेहत के लिए काफी नुकसानदायक साबित हो सकता है. फ्लोराइड वाला टूथपेस्ट उपयोग कराएकोशिश करें कि 2 वर्ष के कम उम्र के बच्चों को टूथपेस्ट ना कराए,  उन्हें केवल सॉफ्ट ब्रश लेकर उनके दांतों को अपने हाथों से साफ करें. क्योंकि 2 वर्ष के कम उम्र के बच्चों को टूथपेस्ट काफी नुकसान करता है. 2 वर्ष के कम उम्र के बच्चों को चाहिए कि उनके माता-पिता उनका विशेष ध्यान दें, क्योंकि छोटी सी लापरवाही उनके बच्चों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर सकती है. यदि बच्चों को ब्रश करते भी है तो फ्लोराइड वाला टूथपेस्ट उपयोग कराए, क्योंकि यह टूथपेस्ट स्पेशली बच्चों के लिए ही बनाए गए हैं जो उन्हें नुकसान नहीं करता है. आमतौर पर जो बड़े लोग घरों में टूथपेस्ट काम में लेते हैं वह छोटे बच्चों को काफी नुकसान पहुंचता है. छोटे बच्चों को टूथपेस्ट करते समय विशेष ध्यान दें खासतौर पर यदि 2 वर्ष से कम घर में बच्चे हैं तो उन्हें टूथपेस्ट न कराए नहीं उनके दांत खराब हो सकते हैं. About the Author Monali Paul Hello I am Monali, born and brought up in Jaipur. Working in media industry from last 9 years as an News presenter cum news editor. Came so far worked with media houses like First India News, Etv Bharat and NEW…और पढ़ें Location : Mau,Uttar Pradesh First Published : February 22, 2026, 22:59 IST

न्यू मार्केट में ‘संकल्प दिवस’ पर चला हस्ताक्षर अभियान:संसद के 1994 के प्रस्ताव की दिलाई याद, राष्ट्र की अखंडता के समर्थन में हस्ताक्षर

न्यू मार्केट में ‘संकल्प दिवस’ पर चला हस्ताक्षर अभियान:संसद के 1994 के प्रस्ताव की दिलाई याद, राष्ट्र की अखंडता के समर्थन में हस्ताक्षर

राजधानी के न्यू मार्केट में रविवार को ‘संकल्प दिवस’ के अवसर पर जम्मू कश्मीर अध्ययन केंद्र, मध्यप्रदेश की भोपाल इकाई ने हस्ताक्षर अभियान चलाया। अभियान में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने भाग लेकर राष्ट्र की अखंडता के समर्थन में हस्ताक्षर किए। अभियान के दौरान आम नागरिकों को जम्मू कश्मीर और लद्दाख के भारतीय क्षेत्रों पर चीन और पाकिस्तान के अवैध कब्जे के विषय में जानकारी दी गई। साथ ही 22 फरवरी 1994 को भारतीय संसद द्वारा पारित सर्वसम्मत संकल्प का उल्लेख करते हुए उसके ऐतिहासिक महत्व से अवगत कराया गया। कार्यक्रम में भरत शर्मा, गीत धीर, डॉ. दीपक द्विवेदी, शशांक जैन, विभोर श्रीवास्तव, डॉ. जितेंद्र गुप्ता, डॉ. आर. डी. माण्डवकर और आदर्श कुमार सहित कई नागरिक मौजूद रहे। उपस्थित लोगों ने कहा कि संसद का संकल्प केवल दस्तावेज नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक है। केंद्र के मध्यप्रदेश संयोजक डॉ. विश्वास चौहान ने बताया कि यह अभियान एक सप्ताह तक चलेगा। इसके अंतर्गत प्रदेश के सभी सांसदों को संसद के ऐतिहासिक प्रस्ताव का स्मरण कराया जाएगा। साथ ही विभिन्न कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में व्याख्यान व संवाद कार्यक्रम आयोजित कर युवाओं को विषय की ऐतिहासिक, संवैधानिक और सामरिक पृष्ठभूमि से जोड़ा जाएगा।

बॉडी डिटॉक्स: फैट से भी हो सकता है फुल बॉडी डिटॉक्स, बस गुनगुने पानी में इन 3 बॉडी डिटॉक्स को डाइट में शामिल करें फुट सोक

बॉडी डिटॉक्स: फैट से भी हो सकता है फुल बॉडी डिटॉक्स, बस गुनगुने पानी में इन 3 बॉडी डिटॉक्स को डाइट में शामिल करें फुट सोक

बॉडी डिटॉक्स: रात को सोने से पहले आदिवासियों को गुनगुने पानी में डुबोकर रखना बेहद अजीब आदत मानी जा रही है। यह केवल दांतों की थकान दूर करने का उपाय नहीं है, बल्कि पूरे शरीर और दिमाग को आराम देने की अद्भुत औषधि है। इसे एक तरह की वेबसाइट रिलैक्सेशन और डिटॉक्स रिचुअल भी कहा जा सकता है। इसे फॉलो करने से फुल बॉडी डिटॉक्स हो जाता है। आदिवासियों में हजारों नर्व एंडिंग्स मौजूद होते हैं, जो सीधे शरीर के अलग-अलग अंगों से जुड़े होते हैं। जब दांतों को पानी में डुबोया जाता है तो शरीर में ब्लड सर्कोलन बेहतर होता है और तत्वों को आराम मिलता है। सही तरीके से किए गए फ़ुट सोक स्ट्रेस को कम करने से, ब्रेन फ़ॉग से पीड़ित और नींद की समस्या में मदद मिल सकती है। रोजाना 20 से 30 मिनट का फुट सोक दिमाग को शांत करता है और फोकस बढ़ाने में मदद करता है। इससे शरीर पर असर महसूस होता है और थकान कम होती है। गुणगुणा पानी वैज्ञानिक सार्कटोकन को सक्रिय करता है, जिससे शरीर की सफाई की सुविधा बेहतर होती है। एप्सम सॉल्ट- गुनगुने पानी में आधा कप एप्सम सॉल्ट कुल मिलाकर 20 से 30 मिनट तक, मसाले को जोड़ने से तनाव कम होता है। इसमें मौजूद मैग्नीशियम शरीर को रिलेक्स करने में मदद करता है और सूजन को कम करने में भी मदद कर सकता है। एप्पल साइडर सिरका- एक कप साइडर सिरका को गुनगुने पानी में संपूर्ण अनुपात को जोड़ने से त्वचा का तरल पदार्थ बराबर रहता है। यह त्वचा की सफाई में मदद करता है और त्वचा की सफाई को कम करने में भी मदद मिल सकती है। रोज़मेरी, लैवेंडर या अदरक- गुनगुने पानी में रोजमेरी या लैवेंडर की दोस्त या ताज़ा कटा हुआ मगरमच्छ के पैर सोक करने से सरकुलेशन बेहतर होता है। इन इनसाइड की दिलचस्प बात दिमाग को शांत कर देती है और शरीर को ताजगी का अहसास करा देती है। दोस्ती को लागू करने के बाद ड्रू ब्रूसिंग की जा सकती है। बसों को हृदय की दिशा से ऊपर की ओर यात्रा करनी चाहिए। इससे ब्लड फ़्लो बेहतर होता है और शरीर को अधिक आराम मिलता है। (टैग्सटूट्रांसलेट)पैर भिगोने के फायदे(टी)एप्सम नमक पैर भिगोने(टी)एप्पल साइडर विनेगर डिटॉक्स(टी)रात्रि विश्राम युक्तियाँ(टी)प्राकृतिक रूप से नींद में सुधार(टी)तनाव राहत घरेलू उपाय(टी)प्राकृतिक डिटॉक्स थेरेपी(टी)लसीका जल निकासी(टी)मैग्नीशियम लाभ(टी)पैर की देखभाल की दिनचर्या

मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर फंसे लोगों को मिलेगा टोल-रिफंड:टैंकर पलटने से 33 घंटे तक फंसीं थीं 1 लाख से ज्यादा गाड़ियां; ₹5.16 करोड़ लौटाएगा विभाग

मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर फंसे लोगों को मिलेगा टोल-रिफंड:टैंकर पलटने से 33 घंटे तक फंसीं थीं 1 लाख से ज्यादा गाड़ियां; ₹5.16 करोड़ लौटाएगा विभाग

मुंबई पुणे एक्सप्रेसवे पर गैस टैंकर पलटने से जाम में फंसे रहे लोगों को उनके फास्टैग में टोल रिफंड किया जाएगा। महाराष्ट्र स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन(MSRDC) के एक सीनियर अधिकारी ने रविवार को इसकी जानकारी दी। 3 फरवरी को एक्सप्रेसवे पर खंडाला घाट सेक्शन में शाम करीब 5 बजे अडोशी टनल के पास एक गैस से भरा टैंकर पलट गया था। इससे 33 घंटे तक ट्रैफिक जाम रहा और कई किलोमीटर तक 1 लाख से ज्यादा गाड़ियां फंस गई थीं। गाड़ी चलाने वालों और यात्रियों को पानी, खाने और दूसरी जरूरी सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ा था। अधिकारी ने बताया कि टोल कलेक्शन रोकने का ऑर्डर जारी होने के बाद भी गाड़ी मालिकों से वसूले गए पूरे पैसे वापस करने का फैसला किया गया है। 5.16 करोड़ रुपये का रिफंड MSRDC प्रोसेस करेगा। NDRF, SDRF और भारत पेट्रोलियम की टीमें तैनात की गई थीं गैस लीक के बाद हालात संभालने के लिए NDRF, SDRF और भारत पेट्रोलियम (BPCL) की टीमें मौके पर तैनात की गई थीं। पुणे से मुंबई जाने वाली लेन पूरी तरह बंद कर दी गई थी और ट्रैफिक को पुराने मुंबई-पुणे हाईवे की ओर डायवर्ट किया गया था। स्थिति को कुछ हद तक संभालने के लिए पुणे लेन से मुंबई की ओर 15–20 मिनट के ब्लॉक में गाड़ियां जा रही थी। 4 फरवरी की शाम तक वाहनों की कतारें करीब 20 किलोमीटर तक फैल गई थीं। मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर जाम की 3 तस्वीरें… यात्रियों के बीच पानी और बिस्कुट बांटे गए मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के संचालन और रखरखाव के लिए जिम्मेदार MSRDC और IRB MPEPL की टीमें FM रेडियो, सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से यात्रियों को लगातार अपडेट देती रहीं। लोगों से अपील की गई कि बेहद जरूरी न हो तो यात्रा से बचें और वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें। फंसे यात्रियों की मदद के लिए IRB MPEPL और पुणे ग्रामीण पुलिस ने जहां संभव हो सका वहां पानी और बिस्कुट बांटे। एक MSRTC ड्राइवर ने बताया कि उनकी बस अडोशी टनल के पास करीब 9 घंटे तक फंसी रही और आखिरकार बुधवार सुबह 3 बजे पनवेल पहुंच सकी। यात्रियों ने सोशल मीडिया पर नाराजगी जताई थी। कुछ यूजर्स ने एक्सप्रेसवे को ‘पार्किंग लॉट’ बताया। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को टॉयलेट और पानी की कमी के कारण सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ी। ———————————— मुंबई से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… मुंबई में लिफ्ट में फटे गैस से भरे गुब्बारे, VIDEO: लिफ्ट में मौजूद महिला और व्यक्ति आग में घिरे मुंबई की एक बिल्डिंग की लिफ्ट में बुधवार को गुब्बारे फटने से आग लग गई। लिफ्ट में पहले एक महिला और फिर एक व्यक्ति गुब्बारे लेकर घुसता है। इसके बाद अचानक से गुब्बारों में ब्लास्ट हो जाता है। पुलिस ने बताया कि आग से आदमी और महिला को चोटें आई हैं। पूरी खबर पढ़ें…

ब्यूटी टिप्स: डैल स्किन को हमेशा के लिए कहें तो, मुल्तानी मिट्टी से घर पर बनाएं ये असरदार DIY फेस पैक

ब्यूटी टिप्स: डैल स्किन को हमेशा के लिए कहें तो, मुल्तानी मिट्टी से घर पर बनाएं ये असरदार DIY फेस पैक

22 फरवरी 2026 को 20:46 IST पर अपडेट किया गया ब्यूटी टिप्स: अगर आपकी भी त्वचा खराब हो गई है, तो अब उसे देखने का समय आ गया है। मुल्तानी मिट्टी से आप घर पर बना सकते हैं ये विटवाई फेसपैक। आइए जानें आपको नौकरी कैसे मिलती है… (टैग्सटूट्रांसलेट) DIY फेस पैक (टी) मुल्तानी मिट्टी फेस पैक (टी) प्राकृतिक त्वचा देखभाल युक्तियाँ (टी) चमकती त्वचा के घरेलू उपचार (टी) रसायन मुक्त फेस पैक (टी) घर का बना फेस मास्क (टी) त्वचा को चमकदार बनाने के उपाय (टी) प्राकृतिक सौंदर्य टिप्स (टी) घर पर त्वचा की देखभाल की दिनचर्या

‘घुसपैठियों को बचाने के लिए एसआईआर को रोक रहे हैं’: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने ममता बनर्जी पर निशाना साधा; टीएमसी का पलटवार | राजनीति समाचार

India vs South Africa Live Score, T20 World Cup 2026 Super 8s: Follow Scorecard And Match Action From Ahmedabad. (Picture Credit: AFP)

आखरी अपडेट:22 फरवरी, 2026, 20:34 IST रेखा गुप्ता ने ममता बनर्जी पर घुसपैठियों को बचाने के लिए एसआईआर को अवरुद्ध करने और महिला सुरक्षा पर विफल रहने का आरोप लगाया। टीएमसी के शशि पांजा ने गुप्ता के शासन में दिल्ली के अपराध का हवाला देते हुए पलटवार किया। बाएं: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता; दाएं: वरिष्ठ टीएमसी मंत्री और राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. शशि पांजा दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने रविवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोलते हुए उन पर घुसपैठियों की पहचान रोकने के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभ्यास को रोकने की कोशिश करने का आरोप लगाया। 22 फरवरी, 2026 को कोलकाता के साइंस सिटी सभागार में भाजपा की महिला शाखा द्वारा आयोजित ‘नारी संकल्प यात्रा’ को संबोधित करते हुए गुप्ता ने आरोप लगाया कि बनर्जी ने इस प्रक्रिया को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। गुप्ता ने कहा, “वह इसे कायम रखना चाहती है और इसलिए एसआईआर अभ्यास को रोकने की कोशिश कर रही है, जिसका उद्देश्य घुसपैठियों की पहचान करना और उन्हें निर्वासित करना है। कल्पना कीजिए कि एक मुख्यमंत्री स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए एक अभ्यास के खिलाफ बहस करने के लिए शीर्ष अदालत में जा रहा है।” उन्होंने आगे दावा किया कि पश्चिम बंगाल में लोगों ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को सत्ता से हटाने का फैसला कर लिया है। तुष्टिकरण और घुसपैठ के आरोप दिल्ली के मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि टीएमसी सरकार की “हाथोंहाथ” और तुष्टिकरण की नीतियों ने हाल के वर्षों में हजारों घुसपैठियों को राज्य में प्रवेश करने की अनुमति दी है। उनके मुताबिक इससे वास्तविक नागरिकों की बुनियादी सुविधाएं और अधिकार प्रभावित हुए हैं. उन्होंने दावा किया कि कथित आमद के कारण पानी, बिजली, राशन, शिक्षा, आजीविका और यहां तक ​​कि मतदान के अधिकार तक पहुंच पर दबाव पड़ा है। गुप्ता ने यह भी आरोप लगाया कि मौजूदा शासन के तहत तुष्टिकरण की राजनीति “खतरनाक स्तर” पर पहुंच गई है। महिला सुरक्षा सवालों के घेरे में महिला सुरक्षा पर चिंता जताते हुए गुप्ता ने कहा कि महिला मुख्यमंत्री होने के बावजूद राज्य में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। उन्होंने आरजी कर अस्पताल में एक महिला डॉक्टर के साथ बलात्कार-हत्या का जिक्र किया और आरोप लगाया कि सरकार प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया देने में विफल रही है। उन्होंने दुर्गापुर में एक महिला चिकित्सक और कोलकाता कॉलेज परिसर में एक अन्य कानून की छात्रा के साथ कथित बलात्कार का भी उल्लेख किया और दावा किया कि अपराधियों का हौसला बढ़ गया है। कन्याश्री जैसी कल्याणकारी योजनाओं की आलोचना करते हुए उन्होंने इसे “झूठे दावों” पर आधारित बताया और कहा कि महिलाओं को वादों के बजाय वास्तविक सुरक्षा की जरूरत है। योजनाओं को लेकर केंद्र-राज्य में खींचतान गुप्ता ने राज्य सरकार पर केंद्रीय कल्याणकारी योजनाओं को रोकने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि “लाखों करोड़ रुपये” का धन गरीबों तक नहीं पहुंचा है क्योंकि आयुष्मान भारत, पीएम आवास योजना और जल जीवन मिशन जैसे कार्यक्रम पश्चिम बंगाल में लागू नहीं किए गए हैं। उन्होंने कहा, “आप केवल परियोजनाओं का नाम बदलने और श्रेय लेने में रुचि रखते हैं।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिक्षा प्रणाली को नुकसान हुआ है, उन्होंने दावा किया कि शिक्षकों की कमी के कारण कई राज्य संचालित स्कूल बंद हो गए हैं और सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति का विरोध किया है। ‘अब दीदी को विदाई देने की आपकी बारी है’ दिल्ली से तुलना करते हुए गुप्ता ने कहा, “लोगों ने पहले ही ‘भैया’ (दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का संदर्भ) को वोट दे दिया है। अब ‘दीदी’ को विदाई देने की आपकी बारी है।” उन्होंने महिलाओं से “मजबूत-हाथ वाली रणनीति” के खिलाफ खड़े होने का आह्वान करते हुए उनसे देवी दुर्गा का आह्वान करते हुए अपनी ताकत दिखाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “बंगाल को सम्मान के साथ जीने का अधिकार है और महिलाओं को भी सम्मान के साथ जीने का अधिकार है।” टीएमसी काउंटर रेखा गुप्ता ने दिल्ली की महिला सुरक्षा और शासन पर सवाल उठाए पश्चिम बंगाल सरकार पर निशाना साधने वाली दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की टिप्पणी के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने उन पर पलटवार किया और उन पर बंगाल की आलोचना करते हुए राष्ट्रीय राजधानी में गंभीर मुद्दों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। वरिष्ठ टीएमसी मंत्री और राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. शशि पांजा ने कहा कि दिल्ली की मुख्यमंत्री ने अपनी कोलकाता यात्रा के दौरान महिला सशक्तिकरण पर “बड़े व्याख्यान” दिए, लेकिन दिल्ली की जमीनी हकीकत चिंताजनक तस्वीर पेश करती है। “वह कोलकाता आईं और महिला सशक्तीकरण पर लंबे व्याख्यान दिए। लेकिन दिल्ली की स्थिति चिंताजनक है। हाल ही में, सरिता विहार में एक 35 वर्षीय महिला और उसके किशोर बच्चे की हत्या कर दी गई और उनके शवों को एक बक्से के अंदर भर दिया गया। उनकी सरकार के तहत दिल्ली की यह स्थिति है। वहां महिला सुरक्षा की स्थिति क्या है?” पांजा ने कहा. उन्होंने आगे दावा किया कि अकेले जनवरी 2026 के पहले 15 दिनों में, दिल्ली में 807 लड़कियों के लापता होने की सूचना मिली थी। उन्होंने कहा, “आप दिल्ली के मुख्यमंत्री हैं। आपने क्या कदम उठाए हैं? अपनी विफलताओं को संबोधित करने के बजाय, आप बंगाल पर व्याख्यान दे रहे हैं।” अपने राज्य का बचाव करते हुए पांजा ने कहा, “यहां महिलाएं सुरक्षित हैं।” टीएमसी नेता ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा केवल चुनाव के समय बंगाल का दौरा करती है और दिल्ली में कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाया। “अगर आपके कार्यकाल में दिल्ली में कोई विस्फोट हुआ था, तो क्या गृह मंत्री को इसका जवाब नहीं देना चाहिए?” उसने पूछा. पांजा ने प्रदूषण का मुद्दा उठाते हुए कहा, “दिल्ली में लोग सांस लेने के लिए संघर्ष कर रहे हैं और आप यह भी नहीं समझते कि AQI का मतलब क्या है। दिल्ली की समस्याओं को ठीक करने के बजाय, आप बंगाल को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं।” चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 22 फरवरी, 2026, 20:32 IST समाचार राजनीति ‘घुसपैठियों को बचाने के लिए एसआईआर को रोक रहे हैं’: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने ममता बनर्जी पर निशाना