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फेफड़ों की बीमारी में जेनेटिक कारण और परिवार का इतिहास क्यों है जरूरी.

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फेफड़ों की बीमारियों को अक्सर धूम्रपान, प्रदूषण या संक्रमण से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इसके पीछे आनुवंशिक कारण भी हो सकते हैं. अगर परिवार में किसी को अस्थमा, सीओपीडी या अन्य सांस से जुड़ी समस्या रही है, तो जोखिम बढ़ सकता है.

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फेफड़े हमारे शरीर का बेहद अहम हिस्सा हैं, क्योंकि यही हमें सांस लेने और शरीर को ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करते हैं. अक्सर लोग फेफड़ों की बीमारी को सिर्फ प्रदूषण, धूम्रपान या संक्रमण से जोड़कर देखते हैं, लेकिन कई मामलों में इसके पीछे जेनेटिक कारण भी हो सकते हैं. अगर परिवार में किसी को अस्थमा, सीओपीडी या अन्य फेफड़ों से जुड़ी बीमारी रही है, तो सतर्क रहना और भी जरूरी हो जाता है. खास बात यह है कि फेफड़ों की समस्या हमेशा सिर्फ खांसी से ही शुरू नहीं होती, बल्कि इसके कई और संकेत भी हो सकते हैं जिन्हें नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है.

मेडिकल रिसर्च के मुताबिक कुछ फेफड़ों की बीमारियों में जेनेटिक रोल भी होता है. मतलब अगर परिवार में पहले से किसी को लंग डिजीज रही है, तो उसका असर अगली पीढ़ी पर भी पड़ सकता है. उदाहरण के तौर पर अल्फा-1 एंटीट्रिप्सिन की कमी एक ऐसी जेनेटिक कंडीशन है, जो माता-पिता से बच्चों में ट्रांसफर हो सकती है और अगर समय पर जांच न हो तो फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है.

इसी तरह विश्व स्वास्थ्य संगठन भी मानता है कि अस्थमा जैसी बीमारियां सिर्फ प्रदूषण या एलर्जी से नहीं होतीं, बल्कि इसमें जेनेटिक और एनवायरनमेंट दोनों फैक्टर काम करते हैं. यानी अगर घर में किसी को अस्थमा है तो परिवार के बाकी सदस्यों को भी सतर्क रहने की जरूरत है. वहीं मेडिकल जर्नल द लैंसेट रेस्पिरेटरी मेडिसिन में छपी स्टडीज बताती हैं कि क्रॉनिक लंग डिजीज में फैमिली हिस्ट्री एक बड़ा रिस्क फैक्टर हो सकता है, खासकर तब जब इसके साथ धूम्रपान या प्रदूषण जैसे ट्रिगर भी मौजूद हों.

सांस फूलना और सीने में जकड़न
अगर बिना ज्यादा मेहनत के ही सांस फूलने लगे या सीने में बार-बार जकड़न महसूस हो, तो इसे सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज न करें. अमेरिकन लंग एसोसिएशन की रिपोर्ट के अनुसार, सांस फूलना फेफड़ों की कार्यक्षमता में कमी का शुरुआती संकेत हो सकता है. खासकर अगर यह लक्षण बार-बार दिखे, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है.

बार-बार संक्रमण और बलगम
अगर आपको या परिवार के किसी सदस्य को बार-बार सीने में संक्रमण, निमोनिया या लंबे समय तक बलगम की शिकायत रहती है, तो यह भी चेतावनी हो सकती है. द लैंसेट रेस्पिरेटरी मेडिसिन में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, क्रॉनिक लंग डिजीज वाले लोगों में संक्रमण का खतरा अधिक रहता है. लंबे समय तक चलने वाला बलगम या रंग में बदलाव भी गंभीर संकेत हो सकता है.

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Vividha Singh

विविधा सिंह न्यूज18 हिंदी (NEWS18) में पत्रकार हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में बैचलर और मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में ये 3 वर्षों से काम कर रही हैं. फिलहाल न्यूज18…और पढ़ें

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इसी तरह विश्व स्वास्थ्य संगठन भी मानता है कि अस्थमा जैसी बीमारियां सिर्फ प्रदूषण या एलर्जी से नहीं होतीं, बल्कि इसमें जेनेटिक और एनवायरनमेंट दोनों फैक्टर काम करते हैं. यानी अगर घर में किसी को अस्थमा है तो परिवार के बाकी सदस्यों को भी सतर्क रहने की जरूरत है. वहीं मेडिकल जर्नल द लैंसेट रेस्पिरेटरी मेडिसिन में छपी स्टडीज बताती हैं कि क्रॉनिक लंग डिजीज में फैमिली हिस्ट्री एक बड़ा रिस्क फैक्टर हो सकता है, खासकर तब जब इसके साथ धूम्रपान या प्रदूषण जैसे ट्रिगर भी मौजूद हों.

सांस फूलना और सीने में जकड़न
अगर बिना ज्यादा मेहनत के ही सांस फूलने लगे या सीने में बार-बार जकड़न महसूस हो, तो इसे सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज न करें. अमेरिकन लंग एसोसिएशन की रिपोर्ट के अनुसार, सांस फूलना फेफड़ों की कार्यक्षमता में कमी का शुरुआती संकेत हो सकता है. खासकर अगर यह लक्षण बार-बार दिखे, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है.

बार-बार संक्रमण और बलगम
अगर आपको या परिवार के किसी सदस्य को बार-बार सीने में संक्रमण, निमोनिया या लंबे समय तक बलगम की शिकायत रहती है, तो यह भी चेतावनी हो सकती है. द लैंसेट रेस्पिरेटरी मेडिसिन में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, क्रॉनिक लंग डिजीज वाले लोगों में संक्रमण का खतरा अधिक रहता है. लंबे समय तक चलने वाला बलगम या रंग में बदलाव भी गंभीर संकेत हो सकता है.

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विविधा सिंह न्यूज18 हिंदी (NEWS18) में पत्रकार हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में बैचलर और मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में ये 3 वर्षों से काम कर रही हैं. फिलहाल न्यूज18…और पढ़ें

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