Monday, 06 Apr 2026 | 01:42 AM

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Shraddha Kapoor Rent Juhu Home

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1 घंटे पहले कॉपी लिंक बॉलीवुड अभिनेत्री श्रद्धा कपूर ने मुंबई के जुहू इलाके में स्थित अपने लग्जरी अपार्टमेंट का किराया एक और साल के लिए रीन्यू कर लिया है, जिसमें वह हर महीने 6 लाख रुपए का किराया देने जा रही हैं। यह नई लीज फरवरी 2026 में आधिकारिक तौर पर रजिस्टर्ड हुई। प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन दस्तावेजों के अनुसार, श्रद्धा ने इसी अपार्टमेंट को पिछले साल भी किराये पर लिया था और अब एक नया 12-महीने का करार तैयार किया गया है। इसका कुल किराया लगभग 72 लाख रुपए होगा, जो अगले एक साल में वह मालिक को चुकाएंगी। यह घर जुहू के प्राइम बीच क्षेत्र में है, जिसकी कुल फीसल (area) लगभग 365 वर्ग मीटर (≈3,929 sq. ft.) बताई गई है। इसके साथ 4 कार पार्किंग स्पॉट्स हैं, जो इस तरह के प्रीमियम घर में आम सुविधा मानी जाती है। नए करार पर स्टाम्प ड्यूटी के रूप में लगभग 36,000 रुपए और रजिस्ट्रेशन फीस के तौर पर 1,000 रुपए भी चुकाए गए। मुंबई के जुहू इलाके को हमेशा से प्रीमियम रेजिडेंशियल जोन माना जाता रहा है। यहां कई हाई-एंड रिहायशी प्रॉपर्टीज, सी-फेसिंग फ्लैट्स और बॉलीवुड हस्तियों के घर हैं। जुहू की लोकप्रियता की वजह इसमें साफ सड़कों, एयरपोर्ट से कम दूरी और शहर के व्यापारिक इलाकों तक सहज कनेक्टिविटी है। इस इलाके में पहले भी कई एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के नामी सितारों ने किराये के घर लिए हैं। कुछ ने लाखों रुपर प्रति माह का किराया चुकाया है। इसी वजह से मुंबई रियल एस्टेट में जुहू का रेंटल मार्केट हमेशा चर्चा में रहता है। श्रद्धा कपूर ने बॉलीवुड में एक मजबूत पहचान बनाई है और कई हिट फिल्मों में काम किया है। हाल ही में वे ‘स्त्री 2’ जैसी सफल फिल्म में नजर आई थीं, और अब उनके आगे भी कई प्रोजेक्ट्स लाइन में हैं। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, इस रेंटल डील को लेकर अभिनेत्री की ओर से कोई व्यक्तिगत बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन रजिस्टर्ड दस्तावेजों से यह जानकारी सामने आई है कि उन्होंने अपनी सुविधाजनक और प्रीमियम रहने की जगह को एक और साल के लिए पक्का कर लिया है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

ग्रेड-बेस्ड ड्राइविंग लाइसेंस सिस्टम लाएगी सरकार:ट्रैफिक नियम तोड़ने पर लाइसेंस रद्द या सस्पेंड होगा, हादसे रोकने के लिए पहल

ग्रेड-बेस्ड ड्राइविंग लाइसेंस सिस्टम लाएगी सरकार:ट्रैफिक नियम तोड़ने पर लाइसेंस रद्द या सस्पेंड होगा, हादसे रोकने के लिए पहल

देश में सड़क हादसों को कम करने और जिम्मेदार ड्राइविंग को बढ़ावा देने के लिए सरकार ग्रेड (अंक) आधारित ड्राइविंग लाइसेंस प्रणाली शुरू करने की योजना बना रही है। इसमें ट्रैफिक नियम तोड़ने पर लाइसेंस रद्द या निलंबित करने का प्रावधान होगा। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि हर साल देश में लगभग 1.8 लाख लोगों की मौत सड़क हादसों में होती है। इसके मुख्य कारण हैं – गाड़ी चलाते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल, तेज रफ्तार, गलत दिशा में गाड़ी चलाना और नशे में ड्राइविंग। उन्होंने कहा कि लोगों की जान बहुत कीमती है और सरकार सड़क सुरक्षा के लिए कई कदम उठा रही है। ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर जुर्माना बढ़ाया गया है, लेकिन सबसे बड़ी समस्या नियमों का सही पालन कराना है। लोगों में कानून का डर और सम्मान कम है। हर साल भारत में 5 लाख सड़क हादसे ———————- ये खबर भी पढ़ें: भास्कर इन्वेस्टिगेशन लाइसेंस के लिए फर्जी आधार, 3 कार्ड पर पता अलग-अलग:इंदौर-उज्जैन में बने फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस; भास्कर के पास फर्जीवाड़े के सबूत न लर्निंग लाइसेंस बनवाने की जरूरत, न ड्राइविंग टेस्ट देने का झंझट। बस एक ऑनलाइन फोटो, कुछ फर्जी दस्तावेज…और आपके हाथ में होगा एक असली ड्राइविंग लाइसेंस, जो भारत के किसी भी कोने में मान्य होगा। मप्र के आरटीओ यानी क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय इसी तरह बिना जांच पड़ताल के फर्जी लाइसेंस जारी कर रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर…

कस्बों में डॉक्टरों की खुशामद:60 लाख तक प्री बोनस, मुफ्त फ्लैट-कार दे रहे, आधी रात कार पंक्चर तो भी सेवक हाजिर; कनाडा में चिकित्सकों की कमी

कस्बों में डॉक्टरों की खुशामद:60 लाख तक प्री बोनस, मुफ्त फ्लैट-कार दे रहे, आधी रात कार पंक्चर तो भी सेवक हाजिर; कनाडा में चिकित्सकों की कमी

कनाडा की पहचान जिस स्वास्थ्य व्यवस्था से थी, वही आज डॉक्टरों की भारी कमी की वजह से गंभीर संकट में है। देश की करीब 25% आबादी के पास अपना फैमिली डॉक्टर नहीं है। हालात ऐसे हैं कि छोटे शहर डॉक्टरों को नियुक्त करने के लिए एक-दूसरे से होड़ कर रहे हैं। कस्बों और शहर में आईपीएल नीलामी की तरह डॉक्टरों पर बोली लगा रहे हैं। कहीं, डॉक्टरों को रिझाने के लिए मेयर खुद गाइड बन रहे हैं तो कहीं मुफ्त कार, तो कहीं कोई फ्लैट दे रहा है। अल्बर्टा प्रांत के स्टेटलर कस्बे की कहानी से इसे समझ सकते हैं। स्टेटलर और इसके आसपास के इलाके की आबादी करीब 12 हजार है। कोरोना के बाद कई डॉक्टर मानसिक थकावट के कारण जल्दी रिटायरमेंट ले रहे हैं। 2023 में यहां के 14 फैमिली डॉक्टरों में से 7 ने रिटायरमेंट या ट्रांसफर ले लिया। हालात इतने बिगड़े कि डॉक्टरों की कमी के कारण इमरजेंसी विभाग कुछ दिनों तक बंद रहने लगा। तब मेयर समेत अन्य नेताओं ने बैठक बुलाई। भर्ती टीम के प्रमुख डीन लोवेल बताते हैं, ‘वह संकट का समय था। हमने तय किया कि हम डॉक्टरों को सिर्फ सैलरी नहीं, बल्कि एक वीआईपी लाइफस्टाइल ऑफर करेंगे।’ स्टेटलर ने 7 नए डॉक्टर लाने के लिए करीब 2.5 करोड़ रु. खर्च किए। मेयर ने डॉक्टर के लिए गाइड बनना तय किया। डॉक्टरों के परिवार की हर जरूरत पूरी करने के लिए एक व्यक्ति की नियुक्ति की गई है। चाहे रात 12 बजे कार का टायर पंक्चर हो जाए या बच्चों के लिए बेस्ट स्कूल और आइसक्रीम पार्लर खोजना हो। वो व्यक्ति तैयार मिलेगा। घाना से आई डॉ. एवुरा कंकम बताती हैं, ‘जब मैं कस्बे में गई, मेरे बच्चे परेशान हो रहे थे, लेकिन यहां के अपनेपन ने दिल जीत लिया।’ तथ्य – स्टेटलर में आए 7 नए डॉक्टरों में से 6 नाइजीरिया से स्टेटलर में आए 7 नए डॉक्टरों में से 6 नाइजीरिया से हैं। भर्ती टीम के प्रमुख डीन लोवेल कहते हैं, ‘नाइजीरिया जैसे देश डॉक्टर ट्रेंड करते हैं और हम उन्हें ले आते हैं।’ डॉक्टरों को लुभाने के तरीके, नकद बोनस – ओंटारियो के कई कस्बे 60 लाख रु. तक का नकद बोनस दे रहे हैं। वहीं, स्टेटलर हर डॉक्टर को 30 से 43 लाख रु. का नकद जॉइनिंग बोनस दिया गया। लग्जरी सुविधाएं – एक साल के लिए मुफ्त कार और गोल्फ क्लब की मेंबरशिप। ओंटारियो के मुख्यमंत्री डग फोर्ड ने तो डॉक्टरों को अपना फोन नंबर तक दे दिया है कि ‘बस एक कॉल करो और यहां आ जाओ।’

Hyderabad Yogi Found Dead in Flat; Diary Entry: Afraid to Move Forward

Hyderabad Yogi Found Dead in Flat; Diary Entry: Afraid to Move Forward

हैदराबाद2 घंटे पहले कॉपी लिंक यूट्यूबर विशाखापट्टनम की रहने वाली थी। 11 महीने से हैदराबाद में रहकर बीएससी की पढ़ाई कर रही थी। तेलंगाना के हैदराबाद में 21 साल की यूट्यूबर अपने कमरे में फंदे से लटकी मिली। मीडिया रिपोर्ट्स से मुताबिक, मौत से कुछ घंटे पहले उसने अपनी मां को ‘आई लव यू मम्मी’ का मैसेज भेजा था। मृतका की पहचान बोनू कोमली के रूप में हुई है। वह आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम की रहने वाली थी। करीब 11 महीने से हैदराबाद में रहकर एक प्राइवेट कॉलेज से बीएससी की पढ़ाई कर रही थी। साथ ही वह यूट्यूब पर लाइफस्टाइल और पर्सनल वीडियो भी बनाती थी। पुलिस के मुताबिक, कोमली की मां कुवैत में काम करती हैं। सोमवार सुबह उसने मां बी. सत्य वरलक्ष्मी को मैसेज भेजकर लिखा था- आई लव यू मम्मी, अपने छोटे भाई का ध्यान रखना। मैसेज के कुछ देर बाद उसका फोन बंद हो गया। मां ने एक दोस्त को फ्लैट पर जाकर देखने को कहा। दोस्त ने पहुंचकर दरवाजा खटखटाया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद लैच तोड़कर अंदर देखा गया। अंदर कोमली फंदे से लटकी हुई मिली। मौके से एक सीढ़ी और साड़ी भी बरामद हुई है। बोनू कोमली पढ़ाई के साथ-साथ यूट्यूबर भी चलाती थी। डायरी में लिखा- ब्रेकअप ने आगे नहीं बढ़ पा रही मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस को फ्लैट से एक डायरी और कुछ कागजात मिले। डायरी में 21 फरवरी की आखिरी एंट्री में उसने अपने ब्रेकअप का जिक्र किया था। डायरी में लिखा था- मैं आगे बढ़ने से डरती हूं… अगर वह वापस आ गया तो क्या होगा… मुझे पता है मुझे उसे छोड़ देना चाहिए, लेकिन मेरा एक हिस्सा अब भी उसका इंतजार करता है। पुलिस के मुताबिक, कोमली का एक 27 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर और साथी यूट्यूबर के साथ करीब तीन साल से रिश्ता था। कुछ समय पहले दोनों का ब्रेकअप हो गया था। बताया जा रहा है कि करीब छह महीने पहले भी उसने आत्महत्या की कोशिश की थी। पुलिस ने संदिग्ध मौत का मामला दर्ज कर मोबाइल फोन, मैसेज, सीसीटीवी फुटेज और आसपास के लोगों के बयान के आधार पर जांच शुरू कर दी है। सुसाइड से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… अमेरिका का वीजा नहीं मिला तो सुसाइड किया: हैदराबाद में महिला डॉक्टर की फ्लैट में लाश मिली डॉ. रोहिणी अमेरिका जाकर मेडिसिन की पढ़ाई करना चाहती थी। हैदराबाद में रहने वाली महिला डॉ. रोहिणी (38) ने अमेरिका का वीजा नहीं मिलने पर सुसाइड कर लिया। उसकी लाश फ्लैट से बरामद हुई। पुलिस को सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें वीजा नहीं मिलने के कारण डिप्रेशन होने और इसी वजह से सुसाइड करने की बात लिखी हुई है। चिलकलगुडा थाना पुलिस ने बताया कि घटना 21 नवंबर की रात की है। रोहिणी ने या तो नींद की गोलियां की ओवरडोज की थी या किसी तरह का इंजेक्शन लिया था। मौत की असली वजह पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता चल सकेगी। मामले की जांच दूसरे एंगल से भी की जा रही है। पूरी खबर पढ़ें… हैदराबाद में महिला सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने सुसाइड किया: 6 महीने पहले गोवा में शादी हुई थी; मां बोली- दामाद दहेज के लिए परेशान करता था हैदराबाद में महिला सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने सुसाइड किया है। 25 साल की देविका ने 2 मार्च की रात रायदुर्गम के प्रशांति हिल्स स्थित अपने घर में सीलिंग फैन से फांसी लगाकर जान दे दी। घटना के बाद मृतक देविका की मां ने FIR दर्ज करवाई। जिसमें कहा कि दामाद सतीश शादी के बाद से ही देविका को दहेज के लिए परेशान करता था। इससे तंग आकर उसने आत्महत्या कर ली। देविका और सतीश एक ही सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करते थे। दोनों 2 साल से एक-दूसरे को जानते थे। अगस्त 2024 में दोनों की गोवा में शादी हुई थी। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

शिल्पा ने ‘बास्टियन’ बंद होने की अफवाहों पर तोड़ी चुप्पी:बोलीं– मेरा नाम सिर्फ क्लिकबेट बनाकर पेश किया जा रहा है

शिल्पा ने ‘बास्टियन’ बंद होने की अफवाहों पर तोड़ी चुप्पी:बोलीं– मेरा नाम सिर्फ क्लिकबेट बनाकर पेश किया जा रहा है

बॉलीवुड एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी ने आखिरकार अपने फेमस रेस्तरां बास्टियन के बंद होने की अफवाहों और उनके पति राज कुंद्रा को लेकर छाई नकारात्मक पब्लिसिटी पर बयान दिया है। अभिनेत्री ने कहा है कि पिछले कई महीनों से उनके नाम और ब्रांड का जिक्र मीडिया में ऐसे तरीके से हो रहा है जैसे उनका नाम केवल क्लिकबेट बन गया हो। The Indian Express को दिए इंटरव्यू में शिल्पा ने बताया कि जो बातें सोशल मीडिया पर चल रही हैं, उन पर वह आम तौर पर चुप रहती हैं। उनका मानना है कि एक सेलिब्रेटी को कभी शिकायत नहीं करनी चाहिए और कभी स्पष्टीकरण नहीं देना चाहिए। लेकिन इस बार उन्होंने चुप्पी तोड़ी क्योंकि चर्चाओं का असर उनके प्यार से बनाया गया बास्टियन ब्रांड पर पड़ रहा था। उन्होंने साफ कहा कि चाहे खबरें कैसी भी हों, उनकी प्रतिष्ठा और काम की ईमानदारी लोगों को पहचान में आती है और यही वजह है कि ब्रांड आज भी मजबूती से खड़ा है। शिल्पा ने मीडिया में चल रही अफवाहों को नकारते हुए कहा कि उन्होंने जानबूझकर सोशल मीडिया पर ब्रांड से जुड़ी बातें साझा कीं, ताकि गलतफहमियों को दूर किया जा सके। बातचीत में बास्टियन के मूल संस्थापक रणजीत बिंद्रा भी मौजूद थे। उन्होंने हंसते हुए कहा कि किसी भी तरह की पब्लिसिटी अच्छी पब्लिसिटी होती है। शिल्पा ने भी माना कि नकारात्मक खबरों में भी कुछ सकारात्मक सीख मिलती है, खासकर जब लोग सकारात्मक सोच के साथ मुद्दों को लेते हैं। शिल्पा ने बास्टियन की शुरुआत का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि 2016 में वह पहली बार ग्राहक के रूप में बास्टियन गई थीं और वहीं से उनकी दोस्ती और पार्टनरशिप की शुरुआत हुई। बाद में यह ब्रांड बढ़ा और आज इसके चार अलग-अलग ब्रांड की आठ आउटलेट्स हैं। शिल्पा ने यह भी कहा कि लोग सही और गलत में फर्क करना जानते हैं, और वो अपने काम के साथ आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि बास्टियन अपने ग्राहकों को वही दे रहा है जो उन्हें चाहिए।

ब्रेन को डिटॉक्स करने के लिए रात में अच्छी नींद जरूरी, मेमोरी भी हो जाएगी बूस्ट, फायदों की लिस्ट बेहद लंबी

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Last Updated:February 26, 2026, 17:16 IST Nighttime Brain Detox: गहरी नींद के दौरान ब्रेन का ग्लिम्फैटिक सिस्टम सक्रिय होकर टॉक्सिन्स और वेस्ट प्रोडक्ट्स को साफ करता है. ऐसे में पर्याप्त नींद याददाश्त, भावनात्मक संतुलन और दिमागी सेहत के लिए बेहद जरूरी है. अगर आप रात में पर्याप्त नींद नहीं लेंगे, तो इससे ब्रेन में टॉक्सिन्स जमा हो जाएंगे और आपकी दिमागी सेहत बिगड़ जाएगी. अच्छी नींद के दौरान ब्रेन खुद को रिपेयर करता है और इससे ब्रेन फंक्शन बूस्ट होता है. Sleep and Brain Health: अक्सर कहा जाता है कि स्वस्थ रहने के लिए हर दिन 7 से 8 घंटे की पर्याप्त नींद लेनी चाहिए. अच्छी और गहरी नींद को अक्सर आराम से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन वैज्ञानिक दृष्टि से यह शरीर और ब्रेन की रात की रिपेयरिंग प्रोसेस है. दिनभर की भागदौड़, मानसिक तनाव और शारीरिक थकान के बाद नींद वह समय है, जब शरीर खुद को रिपेयर करता है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर नींद पूरी न हो, तो इसका असर केवल एनर्जी पर नहीं, बल्कि ब्रेन की कार्यक्षमता, भावनात्मक संतुलन और याददाश्त पर भी पड़ता है. इससे ब्रेन हेल्थ बिगड़ सकती है और कई गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं. हाल ही में लोंगेविटी और प्रिवेंटिव मेडिसिन विशेषज्ञ डॉक्टर थॉमन पेलोस्की ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट के जरिए बताया है कि नींद को सबसे शक्तिशाली डिटॉक्स माना जा सकता है. गहरी नींद के दौरान मस्तिष्क एक विशेष क्लीन-अप सिस्टम सक्रिय करता है, जिसे ग्लिम्फैटिक सिस्टम कहा जाता है. यह प्रणाली सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड (CSF) की मदद से मस्तिष्क में जमा वेस्ट प्रोडक्ट्स, टॉक्सिन्स और अतिरिक्त प्रोटीन को साफ करती है. इसे दिमाग की रात की धुलाई प्रक्रिया कहा जा सकता है, जो हमें अगले दिन के लिए तरोताजा बनाती है. रात की अच्छी नींद ब्रेन को डिटॉक्स करने का बेहतरीन तरीका है. View this post on Instagram

आशा कार्यकर्ताओं ने मानदेय न मिलने पर किया प्रदर्शन:पन्ना कलेक्ट्रेट में धरना, मुख्यमंत्री से मांगों पर कार्रवाई की मांग

आशा कार्यकर्ताओं ने मानदेय न मिलने पर किया प्रदर्शन:पन्ना कलेक्ट्रेट में धरना, मुख्यमंत्री से मांगों पर कार्रवाई की मांग

पन्ना जिले में आशा और आशा पर्यवेक्षक कार्यकर्ताओं ने महीनों से रुके मानदेय और अन्य मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। गुरुवार, 26 फरवरी को म.प्र. आशा/ऊषा सहयोगी श्रमिक संघ के बैनर तले सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट कार्यालय का घेराव किया। इस दौरान उन्होंने जमकर नारेबाजी की और धरने पर बैठ गईं। प्रदर्शन के बाद, संघ ने जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री मोहन यादव को एक ज्ञापन सौंपा। इसमें कार्यकर्ताओं ने अपनी विभिन्न मांगों को विस्तार से रखा। ज्ञापन में बताया गया कि स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ मानी जाने वाली ये कार्यकर्ता आर्थिक तंगी का सामना कर रही हैं। पूर्व में घोषित 1000 रुपये की वार्षिक वृद्धि और केंद्र सरकार द्वारा जारी 1500 रुपये की राशि का भुगतान अभी तक नहीं किया गया है। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि उन्हें महीनों तक मानदेय नहीं मिलता, और जब मिलता है तो वह अधूरा होता है। कार्यकर्ताओं ने यह भी बताया कि रक्षाबंधन, दशहरा और दीपावली जैसे त्योहारों पर भी उन्हें बकाया भुगतान नहीं मिला। इतनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के बावजूद, उन्हें न्यूनतम वेतन, पेंशन, ग्रेच्युटी और सामाजिक सुरक्षा जैसे लाभों से वंचित रखा गया है। आशा कार्यकर्ता करुणा गौतम ने कहा कि शासन-प्रशासन मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए उनकी तारीफ तो करता है, लेकिन जब उनके हक के पैसे देने की बात आती है, तो फाइलें दबा ली जाती हैं। उन्होंने अपनी खराब आर्थिक स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि बच्चों की पढ़ाई, इलाज और घर का किराया देना भी मुश्किल हो रहा है। यूनियन के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही मानदेय का नियमित भुगतान और अन्य अनियमितताओं को दूर नहीं किया गया, तो यह आंदोलन और भी उग्र रूप लेगा।

ये हैं शुरुआती स्टेज के कैंसर के 9 लक्षण! जानें बचाव और जांच के तरीके!

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Last Updated:February 26, 2026, 16:36 IST कैंसर धीरे-धीरे महामारी का रूप ले रहा है। इसका मुख्य कारण यह है कि यह बीमारी देर से पकड़ में आ रही है। जब पकड़ में आती है, तो स्थिति हाथ से निकल जाती है. कैंसर शरीर में बस जाता है लेकिन शुरू से ही संकेत देता है। आइए इससे बचें। कौन से लक्षण कैंसर के पहले स्टेज के लक्षण हो सकते हैं? कैंसर आजकल धीरे-धीरे एक महामारी बनता जा रहा है. इसका मुख्य कारण यह है कि इस बीमारी का पता अक्सर देर से चलता है. जब तक इसका पता चलता है, तब तक स्थिति कंट्रोल से बाहर हो चुकी होती है. जब कैंसर शरीर में घुसता है, तो शरीर शुरू से ही सिग्नल देना शुरू कर देता है, लेकिन हम अक्सर उन्हें नज़रअंदाज़ कर देते हैं. शुरुआती स्टेज के कैंसर के नौ लक्षण क्या हैं? कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को रोकने के लिए सबसे पहली शर्त है कि इसका पता शुरुआती स्टेज में ही चल जाए. नेशनल लाइब्रेरी ऑफ़ मेडिसिन की एक स्टडी से पता चला है कि जब कैंसर फैलता है, तो शरीर में कुछ लक्षण जल्दी दिखाई देते हैं, और अगर इन लक्षणों पर ध्यान दिया जाए, तो कैंसर का पता शुरुआती स्टेज में ही लगाया जा सकता है. रिसर्च से पता चला है कि अगर कैंसर का पता शुरुआती स्टेज में ही चल जाए, तो इलाज की संभावना काफी बढ़ जाती है. तो, कैंसर का पता चलने पर किन लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए? अगर किसी व्यक्ति का वज़न बिना किसी वजह के अचानक कम होने लगे या उसे भूख न लगे, तो यह चिंता की बात है. इसके अलावा, बहुत ज़्यादा थकान महसूस होना या सोने के तरीके में बदलाव जैसे लक्षणों को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए. ये लक्षण आमतौर पर किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होते हैं, लेकिन कभी-कभी ये कैंसर जैसी बीमारी की शुरुआत हो सकते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google आंतों की समस्याएं कोलन कैंसर का एक बड़ा लक्षण हैं. पेट की आदतों में कोई भी असामान्य बदलाव, जैसे कि काला मल या मल में खून, चिंता का कारण हैं. पिछले दस सालों में अमेरिका और दुनिया भर में कोलन कैंसर के मामले बढ़े हैं. रिसर्चर्स के अनुसार, लाइफस्टाइल और डाइट में बदलाव इस बढ़ोतरी के मुख्य कारण हैं. अगर आपको रात में बहुत ज़्यादा पसीना आना, बुखार, ठंड लगना या कमजोरी महसूस होती है, तो यह चिंता का कारण है। ये लक्षण लिम्फोमा के संकेत हो सकते हैं, यह एक तरह का कैंसर है जो शरीर के इम्यून सिस्टम पर असर डालता है. अगर आपको अपने शरीर में कहीं भी गांठ या सूजन दिखे, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें. आपकी स्किन में अचानक बदलाव, जैसे कि किसी जगह का रंग बदलना या धब्बे, गांठ या सूजन, मेलेनोमा जैसे स्किन कैंसर के शुरुआती संकेत हो सकते हैं. अगर आपको रात में बहुत ज़्यादा पसीना आना, बुखार, ठंड लगना या कमज़ोरी महसूस होती है, तो यह चिंता की बात है. ये लक्षण लिम्फोमा कैंसर के संकेत हो सकते हैं, यह एक तरह का कैंसर है जो शरीर के इम्यून सिस्टम पर असर डालता है. अगर आपको अपने शरीर में कहीं भी गांठ या सूजन दिखे, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें. नज़र में बदलाव, सिरदर्द या पीठ दर्द जैसे लक्षण ब्रेन या स्पाइनल कॉर्ड कैंसर के संकेत हो सकते हैं. अगर आपको हड्डी में दर्द या शरीर में कोई अजीब परेशानी महसूस होती है, तो यह सारकोमा नाम के कैंसर का संकेत हो सकता है।. शरीर के किसी हिस्से का अचानक, बिना किसी वजह के नीला पड़ना, बार-बार इन्फेक्शन होना या बहुत ज़्यादा थकान ल्यूकेमिया (एक ब्लड कैंसर) के लक्षण हो सकते हैं. यूरिन में खून किडनी या ब्लैडर की बीमारी का संकेत हो सकता है। महिलाओं में, पीरियड्स के बीच या इंटरकोर्स के बाद ब्लीडिंग सर्वाइकल या सर्विक्स कैंसर का संकेत हो सकता है। First Published : February 26, 2026, 16:31 IST

एयर टिकट बुकिंग 48 घंटे में कैंसिल की तो फुल-रिफंड:फ्लाइट से 7 दिन पहले बुकिंग जरूरी, DGCA के नए नियम; जानें बदलाव

एयर टिकट बुकिंग 48 घंटे में कैंसिल की तो फुल-रिफंड:फ्लाइट से 7 दिन पहले बुकिंग जरूरी, DGCA के नए नियम; जानें बदलाव

नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने गुरुवार को हवाई यात्रा के टिकट रिफंड और कैंसिल करने से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। नए नियमों के मुताबिक, अब टिकट बुक करने के 48 घंटे के भीतर कैंसिल या बदलाव करने पर एक्स्ट्रा चार्ज नहीं लगेगा, यानी टिकट का पूरा अमाउंट रिफंड किया जाएगा। यह फैसला यात्रियों की बढ़ती शिकायतों और हाल ही में इंडिगो की उड़ानों में हुई दिक्कतों के बाद लिया गया है। इस फैसले से जुड़े जरूरी सवालों के जवाब सवाल 1: DGCA के नए आदेश में बड़ी राहत क्या है? जवाब: सबसे बड़ी राहत ‘जीरो कैंसिलेशन चार्ज’ को लेकर है। अब अगर आप एयर टिकट बुक करते हैं, तो बुकिंग के 48 घंटे के भीतर उसे कैंसिल करने या उसमें कोई बदलाव करने पर एयरलाइन आपसे कोई एक्स्ट्रा चार्ज नहीं वसूल सकती। हालांकि, यह सुविधा कुछ शर्तों के साथ मिलेगी। सवाल 2: क्या यह सुविधा हर टिकट पर मिलेगी या कोई समय सीमा भी है? जवाब: इसके लिए ‘फ्री लुक-इन पीरियड’ की शर्त है। यह सुविधा तभी मिलेगी जब टिकट की बुकिंग उड़ान की तारीख से कम से कम 7 दिन पहले की गई हो। अगर आप फ्लाइट से दो-तीन दिन पहले टिकट बुक करते हैं, तो 48 घंटे वाली यह छूट लागू नहीं होगी। सवाल 3: अगर टिकट ट्रेवल एजेंट या ऑनलाइन पोर्टल से बुक किया है, तो रिफंड कौन देगा? जवाब: DGCA ने साफ किया है कि भले ही टिकट ट्रेवल एजेंट या किसी पोर्टल (जैसे मेकमायट्रिप, गोइबिबो आदि) से बुक हुआ हो, रिफंड वापस करने की जिम्मेदारी एयरलाइन की ही होगी। एजेंट एयरलाइन के प्रतिनिधि माने जाते हैं, इसलिए एयरलाइन यह बहाना नहीं बना सकती कि पैसा एजेंट के पास है। सवाल 4: रिफंड का पैसा वापस मिलने में कितने दिन लगेंगे? जवाब: एयरलाइंस को यह सुनिश्चित करना होगा कि रिफंड की प्रक्रिया हर हाल में 14 वर्किंग डेज (कामकाजी दिनों) के भीतर पूरी हो जाए। 5. मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में रिफंड के क्या नियम हैं? जवाब: अगर यात्री या उसके परिवार का कोई सदस्य (जो उसी PNR पर है) यात्रा के दौरान अस्पताल में भर्ती हो जाता है, तो एयरलाइन को या तो पूरा रिफंड देना होगा या ‘क्रेडिट शेल’ (जिसे बाद में इस्तेमाल किया जा सके) की सुविधा देनी होगी। अन्य बीमारियों के मामले में, एयरलाइन के एरोस्पेस मेडिसिन विशेषज्ञ या DGCA के पैनल में शामिल डॉक्टर की फिटनेस रिपोर्ट के आधार पर फैसला लिया जाएगा। सवाल 6: DGCA को नियमों में यह बदलाव करने की जरूरत क्यों पड़ी? जवाब: इसके पीछे दो मुख्य कारण हैं। पहला, यात्रियों की ओर से रिफंड न मिलने या देरी से मिलने की शिकायतें लगातार बढ़ रही थीं। दूसरा, दिसंबर 2025 में इंडिगो की उड़ानों में रुकावट आई थी, जिसके बाद मंत्रालय ने सख्त रुख अपनाया और रिफंड प्रक्रिया को सरल बनाने के निर्देश दिए। सवाल 7: क्या किराया बढ़ने पर बदलाव के दौरान अंतर देना होगा? जवाब: नियम के मुताबिक एयरलाइन आपसे ‘कैंसिलेशन फीस’ या ‘चेंज फीस’ नहीं लेगी, लेकिन यदि आप टिकट की तारीख बदलते हैं और उस नई तारीख का बेस फेयर पुराना टिकट बुक करते समय के फेयर से ज्यादा है, तो आपको किराए का अंतर देना पड़ सकता है। सवाल 8: यह नया नियम कब से प्रभावी हुआ है? जवाब: नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने संशोधित सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट्स (CAR) को 24 फरवरी को जारी किया है। यह अब से लागू माना जाएगा। सवाल 9: क्या एयरलाइंस अपनी मर्जी से कोई और चार्ज जोड़ सकती हैं? जवाब: नहीं, DGCA के नियम का उल्लंघन करने पर एयरलाइंस पर जुर्माना लगाया जा सकता है। यात्रियों की सुविधा के लिए नियमों को ‘पैसेंजर फ्रेंडली’ बनाया गया है ताकि एयरलाइंस रिफंड के नाम पर मनमानी न कर सकें। सवाल 10: अगर 48 घंटे बीत जाएं, तो क्या होगा? जवाब: बुकिंग के शुरुआती 48 घंटों के बाद ‘लुक-इन’ ऑप्शन खत्म हो जाएगा। इसके बाद अगर आप टिकट कैंसिल करते हैं या बदलाव करते हैं, तो आपको एयरलाइन की सामान्य पॉलिसी के हिसाब से कैंसिलेशन फीस और अन्य चार्जेस देने होंगे। —————————————————– बिजनेस से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें ED ने अनिल अंबानी का 17 मंजिला घर जब्त किया:कीमत ₹3716 करोड़; बिजनेसमैन की 40 हजार करोड़ के फ्रॉड मामले में जांच जारी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी के मुंबई स्थित बंगले ‘एबोड’ को अटैच यानी जब्त कर लिया है। PTI के अनुसार इसकी कीमत करीब 3,716 करोड़ रुपए आंकी गई है। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक कानून (PMLA) के तहत की गई है। पूरी खबर पढ़ें

अधिकतर परेशानियों में डॉक्टर MRI कराने की देते हैं सलाह, क्या CT Scan और X-Ray हो गए आउटडेटेड?

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Last Updated:February 26, 2026, 16:22 IST MRI vs CT Scan vs X-Ray: एमआरआई, सीटी स्कैन और एक्स-रे तीनों का अपना अलग महत्व है. रेडियोलॉजिस्ट डॉक्टर अभिषेक बंसल ने बताया कि MRI सॉफ्ट टिश्यूज और नसों की जांच में बेहतर है, जबकि CT स्कैन इमरजेंसी में तेज और प्रभावी होता है. X-Ray आज भी हड्डियों और फेफड़ों की जांच के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है. कोई भी इमेजिंग आउटडेटेड नहीं है. डॉ. अभिषेक बंसल के मुताबिक एमआरआई में रेडिएशन नहीं होता है, जिससे इसे ज्यादा सेफ माना जाता है. Are CT Scans and X-Rays Outdated: एक जमाने में किसी भी तरह की परेशानी होने पर लोगों को एक्स-रे और सीटी स्कैन कराने की सलाह दी जाती थी. अब समय काफी बदल गया है और डॉक्टर्स अधिकतर मामलों में एमआरआई कराने की सलाह देते हैं. MRI के जरिए सेहत से जुड़ी तमाम समस्याओं का आसानी से पता लगाया जा सकता है. सीटी स्कैन और एक्स-रे के मुकाबले MRI की कीमत भी ज्यादा होता है. ऐसे में कई मरीजों के मन में सवाल उठता है कि क्या अब CT स्कैन और X-Ray जैसे पुरानी इमेजिंग तकनीक आउटडेटेड हो चुकी हैं? क्या अब हर बीमारी के लिए MRI ही जरूरी है? इस बारे में डॉक्टर से जानते हैं. दिल्ली के आकाश हेल्थकेयर सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी डिपार्टमेंट के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. अभिषेक बंसल ने News18 को बताया कि एक्स-रे, सीटी स्कैन और एमआरआई तीनों का अपना अलग महत्व है. किसी भी इमेजिंग तकनीक को आउटडेटेड नहीं कहा जा सकता है. X-Ray की बात करें तो यह सबसे पुरानी और तेज इमेजिंग तकनीक में से एक है. हड्डियों में फ्रैक्चर, फेफड़ों के इंफेक्शन जैसे निमोनिया या टीबी और दांतों की जांच में एक्स-रे आज भी बेहद उपयोगी है. एक्स-रे करने में 1 मिनट से कम वक्त लगता है और इसकी कीमत कम होती है. हालांकि इस इमेजिंग में सिर्फ 2D इमेज दिखती है. डॉक्टर बंसल ने बताया कि कंप्यूटेड टोमोग्राफी यानी CT Scan की बात करें, तो यह स्कैन एक्स-रे का एडवांस वर्जन माना जा सकता है. यह शरीर की क्रॉस-सेक्शनल इमेज देता है. यह सिर की चोट, ब्रेन हेमरेज, फेफड़ों की गंभीर समस्या, पेट के आंतरिक अंगों और कैंसर की जांच में उपयोगी माना जाता है. इस स्कैन से लिवर और किडनी की समस्याओं का भी पता लगाया जा सकता है. इमरजेंसी कंडीशंस में CT स्कैन बहुत तेजी से रिजल्ट देता है, इसलिए एक्सीडेंट या स्ट्रोक के मामलों में इसे प्रायोरिटी दी जाती है. सीटी स्कैन 2 मिनट में हो जाता है. इस स्कैन में 3D इमेज दिखती है, लेकिन इसमें एक्स-रे रेडिएशन होता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. एक्सपर्ट के मुताबिक मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग यानी MRI सबसे एडवांस तकनीक है और इसमें रेडिएशन नहीं होता है. एमआरआई में पावरफुल मैग्नेटिक फील्ड और रेडियो वेव्स की मदद से शरीर के अंदर की 3D इमेज ली जाती हैं. MRI हमारी रीढ़ की हड्डी, नसों, मांसपेशियों और सॉफ्ट टिश्यू की समस्याओं में ज्यादा सटीक जानकारी देता है. ट्यूमर, लिगामेंट इंजरी, स्लिप डिस्क या न्यूरोलॉजिकल डिजीज में MRI सबसे सटीक इमेज बनाता है. शरीर के जिन अंगों की इमेज एक्स-रे और सीटी स्कैन में नहीं बन पाती है, उन मामलों में एमआरआई कराने की सलाह दी जाती है. MRI करने में करीब 30 मिनट वक्त लगता है और इसकी कीमत ज्यादा होती है. रेडियोलॉजिस्ट की मानें तो प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए भी MRI को सुरक्षित माना जाता है, क्योंकि इसमें रेडिएशन नहीं होता है. हालांकि CT स्कैन और X-Ray को आउटडेटेड नहीं माना जा सकता है. मरीज की कंडीशन के अनुसार डॉक्टर एक्स-रे, सीटी स्कैन या एमआरआई कराने की सलाह देते हैं. मरीजों को खुद से जांच की मांग करने के बजाय विशेषज्ञ की सलाह पर भरोसा करना चाहिए. MRI, CT स्कैन और X-Ray तीनों आधुनिक चिकित्सा के महत्वपूर्ण उपकरण हैं, जो डायग्नोसिस के अलावा ट्रीटमेंट में भी इस्तेमाल किए जा रहे हैं. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : February 26, 2026, 16:21 IST