सीधी में भू-अर्जन कर्मचारी 1 लाख रिश्वत लेते गिरफ्तार:लोकायुक्त टीम ने पकड़ा, 27 लाख मुआवजे पर मांगी थे 13 लाख

मध्य प्रदेश के सीधी जिले में लोकायुक्त पुलिस रीवा ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए भू-अर्जन शाखा के कर्मचारी भूपेंद्र पांडेय को 1 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गुरुवार के दिन गिरफ्तार किया है। यह दूसरी बार है जब आरोपी को लोकायुक्त पुलिस ने ट्रैप में पकड़ा है, जिससे विभागीय तंत्र में हड़कंप मच गया है। शिकायतकर्ता शिवबहोर तिवारी, जो ग्राम सदना के निवासी हैं, ने लोकायुक्त को शिकायत दी थी। उनकी नौ डिसमिल जमीन हाईवे परियोजना में प्रभावित हुई थी, जिसके लिए उन्हें 27 लाख रुपये का मुआवजा स्वीकृत हुआ था। आरोप है कि इस मुआवजा राशि को जारी कराने के लिए कर्मचारी भूपेंद्र पांडेय ने उनसे 13 लाख रुपये की रिश्वत की मांग की थी। शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्होंने पहले भी मजबूरी में 1 लाख रुपये की राशि दी थी। तय योजना के तहत, गुरुवार को वह दूसरी किस्त के रूप में 1 लाख रुपये देने पहुंचे थे, जबकि शेष राशि पांच दिन बाद देने की बात हुई थी। इसी दौरान उन्होंने लोकायुक्त एसपी से शिकायत की, जिसके बाद सत्यापन कर ट्रैप की रणनीति बनाई गई। लोकायुक्त टीम को मिली सूचना का विधिवत सत्यापन किया गया। आरोप सही पाए जाने पर टीम ने योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप ऑपरेशन को अंजाम दिया। जैसे ही आरोपी ने रिश्वत की राशि स्वीकार की, टीम ने उसे तत्काल रंगे हाथों पकड़ लिया। कार्रवाई के दौरान आवश्यक साक्ष्य और दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी की गई। लोकायुक्त थाना प्रभारी एस. आर. मरावी ने बताया कि शिकायत के सत्यापन में तथ्य सही पाए जाने पर गुरुवार को आरोपी को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि आरोपी भूपेंद्र पांडेय के विरुद्ध पूर्व में भी लोकायुक्त पुलिस द्वारा आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जा चुका है।
इन 5 फलों को खाने से बढ़ती है एसिडिटी, सेवन करते समय बरतें ये सावधानियां

आज की जीवनशैली की वजह से पेट संबंधी रोग हर उम्र के लोगों को परेशान करने लगे हैं. कुछ भी खाने के तुरंत बाद गैस, पेट फूलना और हल्के पेट दर्द की शिकायत देखी जाती है. पेट की पाचन अग्नि को आराम देने के लिए लोग शीतलता देने वाले फलों का सेवन करते हैं, लेकिन कई बार फल खाने के बाद भी पेट की जलन और एसिडिटी बढ़ने लगती है, लेकिन ऐसा क्यों? पेट को ठंडक देने और जलन से बचाने के लिए सही फलों का सेवन करना जरूरी है. बहुत कम लोग जानते हैं कि फल भी एसिडिटी पैदा करने वाले होते हैं. कुछ फलों में साइट्रिक एसिड अधिक मात्रा में होता है, जिसके सेवन से गैस और सीने में जलन की परेशानी होती है. आज हम ऐसे ही फलों की जानकारी लेकर आए हैं, जिनका सेवन कम मात्रा में करना चाहिए. संतरा- संतरे में साइट्रिक एसिड की अधिक मात्रा होती है, जिससे अधिक सेवन से एसिड रिफ्लक्स और सीने में जलन पैदा हो सकती है. इसलिए अगर पेट संबंधी परेशानियों से जूझ रहे हैं तो संतरे का सेवन कम करें. नींबू- नींबू में साइट्रिक एसिड की मात्रा अधिक होती है, जो सीने में जलन पैदा करता है और गैस्ट्रिक एसिड का उत्पादन बढ़ जाता है, खासकर खाली पेट होने पर. इसलिए नींबू का सेवन सीमित मात्रा में करें. अनानास- अनानास का गुण अम्ल और तीक्ष्ण होता है और सेवन से पित्त की वृद्धि होती है. ऐसे में अगर आंतों से जुड़ी परेशानी से जूझ रहे हैं तो अनानास का सेवन करने से बचे क्योंकि अनानास में मौजूद एंजाइम और अम्ल संवेदनशील आंत की परत को परेशान कर सकते हैं. कच्चा आम- कच्चा आम का गुण अम्ल और भारी होता है. इसे पचाने के लिए पेट को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. इसके सेवन से कफ और वात की वृद्धि होती है. अपच की समस्या भी बन सकती है. पांचवा है खट्टे अंगूर. खट्टे अंगूर का गुण अम्लीय होता है और पित्त की वृद्धि करता है, ऐसे में पेट फूलना और गैस बनने की परेशानी हो सकती है, इसलिए अगर पाचन मंद है तो अंगूर या खट्टे फलों का सेवन सीमित मात्रा में करें. इसके अलावा, अमरूद का सेवन अगर बीज सहित करते हैं, तो यह भी पाचन में बाधा करता है. बीज सहित अमरूद का सेवन पेट फूलने की समस्या पैदा कर सकता है. साथ ही, जामुन और बेरी के सेवन से भी परहेज करना चाहिए. आयुर्वेद के अनुसार, खट्टे और तीखे फल पित्त को बढ़ाते हैं और अग्नि को कमजोर करते हैं.
सिंगरौली के आमो गांव में आधी रात चोर पकड़ाया:ग्रामीणों ने खंभे से बांध; जियावान पुलिस को सौंपा

सिंगरौली जिले के जियावान थाना क्षेत्र के आमो गांव में बुधवार देर रात चोरी की घटना सामने आई। एक घर में घुसे चोर को मकान मालिक ने रंगे हाथों पकड़ लिया। ग्रामीणों ने चोर को खंभे से बांधकर पुलिस को सौंप दिया। यह घटना रात करीब 1 बजे की है। गुरुवार को पुलिस ने मामला दर्ज किया है पीड़ित गृहस्वामी राम रती केवट ने बताया कि रात में उनके घर और किराने की दुकान से कुछ आहट सुनाई दी, जिससे उनकी नींद खुल गई। बाहर निकलने पर उन्होंने देखा कि कुछ लोग दुकान के अंदर घुसे हुए थे। उन्होंने तुरंत शोर मचाया, जिससे गांव के अन्य लोग और उनका बेटा भी मौके पर पहुंच गए। भगदड़ के दौरान राम रती केवट और उनके बेटे ने भागते हुए एक चोर को पकड़ लिया। पकड़े गए आरोपी ने अपना नाम लवकुश बताया। वह घर की बहू के बैग से एक सोने का लॉकेट और किराने की दुकान से कुछ सामान चुराकर भागने की कोशिश कर रहा था। राम रती केवट के अनुसार, उनकी दुकान में यह चौथी चोरी की घटना है। इससे पहले भी तीन बार चोरी हो चुकी है। ग्रामीणों ने चोर को खंभे से बांधकर जियावान थाना पुलिस को सूचना दी। चोर को पकड़कर थाने लाए जियावान थाना प्रभारी डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि ग्रामीणों से सूचना मिलते ही पुलिस टीम रात में मौके पर पहुंची। ग्रामीणों द्वारा पकड़े गए चोर को थाने लाया गया है और मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
Soldiers Disability Pension Not Blocked for Lifestyle Disorder

Hindi News National Delhi HC: Soldiers Disability Pension Not Blocked For Lifestyle Disorder नई दिल्ली12 मिनट पहले कॉपी लिंक दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि सशस्त्र बलों के कर्मियों की दिव्यांगता पेंशन को सिर्फ यह कहकर नहीं रोका जा सकता कि बीमारी ‘लाइफस्टाइल डिसऑर्डर’ है या वह पीस एरिया में तैनाती के दौरान हुई। हाई कोर्ट ने कहा कि गैर-ऑपरेशनल क्षेत्रों में भी सैन्य सेवा तनावपूर्ण होती है और इससे गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। बता दें कि सेना में ‘पीस पोस्टिंग’ का मतलब है कि सैनिक या अधिकारी की पोस्टिंग बॉर्डर पर नहीं बल्कि शांत और सुरक्षित शहरों या छावनियों में होती है। जस्टिस वी. कामेश्वर राव और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की डिवीजन बेंच ने आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल (AFT) के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें भारतीय वायुसेना के रिटायर्ड अधिकारी की दिव्यांग पेंशन याचिका खारिज कर दी गई थी। वे हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) और कोरोनरी आर्टरी डिजीज से पीड़ित हैं। कोर्ट ने साफ कहा कि यह मायने नहीं रखता कि बीमारी फील्ड एरिया में हुई या पीस पोस्टिंग में। असली सवाल यह है कि क्या बीमारी का सेवा परिस्थितियों से संबंध है। इस केस में रिलीज मेडिकल बोर्ड यह ठीक से नहीं बता सका कि अफसर की बीमारियां सेवा से जुड़ी नहीं थीं या सेवा के कारण नहीं बढ़ीं। कोर्ट ने बताया कि सैन्य जीवन में कड़ा अनुशासन, लंबे वर्किंग आवर्स, बार-बार तबादले, परिवार से दूर रहना और हर समय तैनाती की तैयारी जैसे कारणों से शारीरिक और मानसिक तनाव होता है, जो स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। कोर्ट ने साफ कहा कि बिना किसी ठोस वजह के बीमारी को सिर्फ ‘लाइफस्टाइल डिसऑर्डर’ कहना कानूनन सही नहीं है। कोर्ट ने यह भी बताया कि मेडिकल बोर्ड ने खुद माना था कि यह बीमारी अधिकारी की किसी लापरवाही या गलत आदतों की वजह से नहीं हुई। कोर्ट ने मोटापा, धूम्रपान या शराब से जुड़े तर्क भी खारिज कर दिए, क्योंकि मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में इन्हें कारण नहीं बताया गया था। सिर्फ वजन ज्यादा होना, हाई ब्लड प्रेशर या हृदय रोग को खुद से पैदा हुई बीमारी साबित नहीं करता। कोर्ट ने यह भी कहा कि AFT ने बिना मेडिकल सबूत के वजन और लाइफस्टाइल के आधार पर निष्कर्ष निकाले। कोर्ट ने हृदय रोग को लेकर मेडिकल बोर्ड की दलीलों को भी कमजोर बताया और कहा कि बीमारी को सिर्फ पिछले 14 दिनों की ड्यूटी से जोड़ना तर्कसंगत नहीं है। अफसर ने 40 साल से ज्यादा सेवा दी, अब 50% दिव्यांग याचिकाकर्ता रिटायर्ड अफसर ने भारतीय वायुसेना में 40 साल से अधिक सेवा दी थी। ज्वाइनिंग के समय वह मेडिकल रूप से फिट थे। 1999 में उन्हें हाईपरटेंशन हुआ और 2016 में गंभीर कोरोनरी आर्टरी डिजीज के कारण ओपन-हार्ट सर्जरी करानी पड़ी। उनकी दिव्यांगता 50% आंकी गई थी, फिर भी पेंशन से वंचित कर दिया गया। हाईकोर्ट ने याचिका मंजूर करते हुए 50% आजीवन दिव्यांग पेंशन देने का निर्देश दिया। कोर्ट ने रिटायरमेंट की तारीख से बकाया भुगतान 8 सप्ताह के भीतर जारी करने को कहा है। देरी होने पर 12% सालाना ब्याज देना होगा। ……………….. यह खबर भी पढ़ें हाइकोर्ट बोला-फिजिकल रिलेशन के बाद शादी से मना करना अपराध दिल्ली हाइकोर्ट ने कहा कि फिजिकल रिलेशन के बाद शादी मना करना एक अपराध है। कोर्ट ने ये बात एक व्यक्ति की जमानत याचिका पर सुनवाई को दौरान कही। कोर्ट ने कहा कि कुंडली मेल न खाने की वजह से शादी से मना करने पर भारतीय न्याय संहिता(BNS) का सेक्शन 69 लग सकता है, जो धोखे से सेक्सुअल इंटरकोर्स को अपराध मानता है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Ayurvedic Upay for Piles, nagdon leaves benefits, Piles treatment in Ayurveda

Last Updated:February 26, 2026, 15:57 IST Ayurvedic Upay for Piles: डॉ विपिन सिंह के मुताबिक, नागदोन के पत्ते पाइल्स के इलाज में काफी कारगर माने जाते हैं. अगर इसके पांच ताजे पत्ते लगातार तीन दिनों तक चबाए जाएं, तो शुरुआती अवस्था की पाइल्स में राहत मिल सकती है. सीधी. मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में पाए जाने वाले औषधीय पौधों में नागदोन का विशेष महत्व माना जाता है. आयुर्वेद में इसका उपयोग वर्षों से विभिन्न रोगों के उपचार के लिए किया जाता रहा है. नागदोन की पत्तियां, डंठल और जड़ें औषधीय गुणों से भरपूर मानी जाती हैं और यह पौधा प्राकृतिक रूप से ग्रामीण इलाकों में आसानी से मिल जाता है. सीधी के आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डॉ विपिन सिंह ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि आज के समय में बड़ी संख्या में लोग पाइल्स की समस्या से जूझ रहे हैं. युवाओं में भी यह परेशानी तेजी से बढ़ रही है. पाइल्स को बवासीर या हेमोरॉइड्स भी कहा जाता है, जिसमें मलद्वार के आसपास की नसों में सूजन आ जाती है. इस कारण मल त्याग के दौरान दर्द, जलन और कई बार खून आने जैसी समस्या भी हो सकती है, जिसे खूनी बवासीर कहा जाता है. डॉक्टर के अनुसार, कब्ज, लंबे समय तक बैठकर काम करना, फाइबर युक्त आहार की कमी और लगातार तनाव इसके प्रमुख कारण हैं. समय पर इलाज न मिलने पर स्थिति गंभीर रूप ले सकती है. ऐसे में आयुर्वेदिक उपचार राहत देने में सहायक साबित हो सकते हैं. डॉ सिंह के मुताबिक, नागदोन के पत्ते पाइल्स में काफी कारगर माने जाते हैं. यदि नागदोन के पांच ताजे पत्ते सुबह खाली पेट लगातार तीन दिनों तक चबाए जाएं, तो शुरुआती अवस्था की बीमारी में राहत मिल सकती है. उन्होंने बताया कि इन पत्तों में एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-बैक्टीरियल और दर्द निवारक गुण पाए जाते हैं, जो सूजन, जलन और दर्द को कम करने में मदद करते हैं. खूनी बवासीर की स्थिति में भी इससे ब्लीडिंग में कमी आ सकती है. सूजी हुई नसों को शांत करने में सहायकउन्होंने आगे बताया कि नागदोन मलद्वार की सूजी हुई नसों को शांत करने में सहायक होता है और धीरे-धीरे सूजन कम करता है. नियमित उपयोग से कुछ ही दिनों में फर्क महसूस होने लगता है. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि हर व्यक्ति की शारीरिक प्रकृति अलग होती है, इसलिए किसी भी घरेलू या आयुर्वेदिक उपचार को अपनाने से पहले डॉक्टर या आयुर्वेदाचार्य से सलाह जरूर लेनी चाहिए. इसके अलावा संतुलित आहार, पर्याप्त पानी का सेवन और फाइबर युक्त भोजन भी बवासीर से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. पुरानी या गंभीर समस्या होने पर स्वयं उपचार करने के बजाय चिकित्सकीय परामर्श लेना जरूरी है. नागदोन एक सस्ता और प्राकृतिक विकल्प जरूर है लेकिन सही जीवनशैली और चिकित्सकीय सलाह के साथ ही इसका उपयोग बेहतर परिणाम दे सकता है. About the Author Rahul Singh राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं. Location : Sidhi,Madhya Pradesh First Published : February 26, 2026, 11:07 IST
‘मोहम्मद को शामिल करने के बाद…’: कोटद्वार जिम मालिक से मुलाकात के लिए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री का राहुल गांधी पर तंज | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:26 फरवरी, 2026, 15:57 IST राहुल गांधी ने सोमवार को दिल्ली में ‘मोहम्मद’ दीपक से मुलाकात की, जो कोटद्वार में सांप्रदायिक विवाद के दौरान एक मुस्लिम दुकानदार का बचाव कर सुर्खियों में आए थे. उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ‘मोहम्मद’ दीपक से मुलाकात के बाद उन पर कटाक्ष किया। (पीटीआई) उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कोटद्वार के जिम ट्रेनर दीपक कुमार से मुलाकात के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर कटाक्ष किया, जिन्होंने एक मुस्लिम व्यापारी को भीड़ से बचाते समय खुद को ‘मोहम्मद दीपक’ कहा था। राहुल गांधी ने सोमवार को दिल्ली में ‘मोहम्मद’ दीपक से मुलाकात की, जब दीपक ने एक सांप्रदायिक विवाद के दौरान एक दुकानदार का बचाव किया, जिससे उनकी आजीविका बुरी तरह प्रभावित हुई। गांधी ने जिम ट्रेनर की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने तिरंगे और संविधान की रक्षा की। बैठक पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, धामी ने टिप्पणी की कि जब गांधी ‘दीपक’ थे तो उन्होंने जिम मालिक पर कोई ध्यान नहीं दिया, लेकिन जैसे ही उन्होंने अपने नाम के साथ ‘मोहम्मद’ जोड़ा, उन्होंने उन्हें इफ्तार पार्टी में आमंत्रित किया। “अभी कुछ दिन पहले, यहां आपके पड़ोस, कोटद्वार में, एक घटना घटी। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई अपने नाम के आगे क्या लगाता है, हमें इससे क्या लेना-देना है? वे अपने नाम के साथ “मोहम्मद” जोड़ते हैं, कांग्रेस पार्टी के राजकुमार उन्हें अपने महल में आमंत्रित करते हैं और अपने समर्थकों के साथ ऐसे लोगों के लिए इफ्तार पार्टी का आयोजन करते हैं, “पौड़ी गढ़वाल में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा। #घड़ी | पौडी गढ़वाल: उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी कहते हैं, “अभी कुछ दिन पहले, यहां आपके पड़ोस, कोटद्वार में, एक घटना घटी। कोई अपने नाम के आगे कुछ भी लगाए, हमें इससे क्या लेना-देना? वे अपने नाम के साथ “मोहम्मद” जोड़ते हैं, यहां के राजकुमार… pic.twitter.com/Dlbv6KGVF1– एएनआई (@ANI) 26 फ़रवरी 2026 उन्होंने कहा, “जब वह दीपक थे और आपने उन्हें आमंत्रित नहीं किया था, लेकिन जैसे ही उन्होंने अपने नाम में ‘मोहम्मद’ जोड़ा, आपने उन्हें इफ्तार पार्टी में आमंत्रित किया।” राहुल गांधी की दीपक से मुलाकात इससे पहले, दीपक कुमार ने कहा कि गांधी ने उन्हें फोन किया था और मिलने के लिए कहा था। दीपक ने कहा, “राहुल गांधी जी ने मुझे मिलने के लिए बुलाया था। उन्होंने मेरे परिवार से बात की और मुझे समझाया कि डरने की कोई जरूरत नहीं है, आपने कुछ भी गलत नहीं किया है।” बैठक के बाद बोलते हुए, दीपक ने कहा कि गांधी ने व्यक्तिगत रूप से उन्हें दिल्ली में आमंत्रित किया, उनके परिवार से बातचीत की और उन्हें आश्वस्त किया कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया है। उन्होंने कहा, “उन्होंने मुझसे डरने की बात नहीं की और कहा कि वह कोटद्वार आएंगे और मेरे जिम की सदस्यता लेंगे। यह मेरे लिए बहुत खुशी की बात होगी।” राहुल गांधी ने जिम ट्रेनर की तारीफ करते हुए कहा, “करोड़ों लोगों के दिलों में सद्भावना और प्यार है, लेकिन डर भी है। दीपक ने अपने साहस से उन्हें रास्ता दिखाया है। जो लोग नफरत फैलाकर समाज को डराने की कोशिश करते हैं, वे असल में कायर हैं। उनसे कभी मत डरना।” उत्तराखंड में क्या हुआ? दीपक 26 जनवरी को तब सुर्खियों में आए जब उन्होंने एक मुस्लिम व्यक्ति पर अपनी दुकान का नाम बदलने का दबाव बना रही भीड़ का सामना किया। दुकान का नाम अहमद बाबा स्कूल ड्रेस एंड मैचिंग सेंटर है। कथित तौर पर दुकानदार ने इनकार कर दिया, जिससे बहस शुरू हो गई जो बाद में बढ़ गई। दीपक ने आरोप लगाया कि दुकान के नाम में “बाबा” शब्द के इस्तेमाल को लेकर दुकानदार को निशाना बनाया गया और दावा किया कि इस मुद्दे को बाद में सांप्रदायिक रंग दे दिया गया। उन्होंने भीड़ का सामना करते हुए कहा, “मेरा नाम मोहम्मद दीपक है, आपसे क्या लेना-देना?” भीड़ के साथ दीपक के टकराव के कारण विरोध प्रदर्शन हुआ। घटना के बाद उनकी जिम सदस्यता 150 से घटकर 15 रह गई। जगह : पौडी, भारत, भारत पहले प्रकाशित: 26 फरवरी, 2026, 15:57 IST समाचार राजनीति ‘मोहम्मद को जोड़ने के बाद…’: कोटद्वार जिम मालिक से मुलाकात के लिए उत्तराखंड के सीएम का राहुल गांधी पर तंज अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें
DNPA Conclave 2026: AI Era Trust in News

नई दिल्ली2 मिनट पहले कॉपी लिंक DNPA Conclave2026 के सेशन के दौरान बातचीत करते दैनिक भास्कर कॉर्प के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर पवन अग्रवाल और मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (MeitY) के सचिव एस कृष्णन। द डिडिटल न्यूद पब्लिशर्स एसोसिएशन (DNPA) ने गुरुवार को नई दिल्ली में DNPA कॉन्क्लेव 2026 का आयोजन किया। कॉन्क्लेव में दैनिक भास्कर कॉर्प के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर पवन अग्रवाल ने मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (MeitY) के सचिव एस कृष्णन से डिजिटल मीडिया कंटेंट को लेकर बातचीत की। इसमें इनोवेशंस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रेग्यूलेशन, सस्टेनेबल ग्रोथ किस तरह से भारत की न्यूज इंडस्ट्री के भविष्य को आकार देंगे, इस पर चर्चा हुई। विषय था ‘एक मजबूत डिजिटल भविष्य के लिए नई रणनीति तैयार करना”। बातचीत के संपादित अंश: डीपीआईटी इस समय सभी तरह के कंटेंट डील कर रही है, जिनमें न्यूज, म्यूजिक, फिल्म शामिल हैं। क्या हमें सेक्टर स्पेसफिक एआई गाइडलाइंस की उम्मीद करनी चाहिए? जवाब: अभी इस बारे में कुछ नहीं कह सकते। हमने अभी जो डेटा वर्क किया है, उसमें जनरल फ्रेमवर्क होगा। हां, इसके भीतर सेक्टर व्यू भी देख सकते हैं। जहां तक न्यूज क्रिएटर्स की चिंता है, वह एक लेवल पर यह एक जैसा है। जैसे कि कॉपीराइट। अगर आप लॉन्गटर्म में देख रहे हैं जैसे कि कोई नाॉवेल, पेंटिंग, आर्टवर्क तो वह थोड़ा अलग हो सकता है। जो आज न्यूज है, वह एक साल बाद रिलेवेंट नहीं होगी, लेकिन आर्काइव में रहकर 50 साल बाद इम्पॉर्टेंट हो सकती है। इसलिए कछ मामलों में कॉपीराइट इश्यू सबसे अहम रह सकता है। कुछ मामलों में डीपर सोसाइटल रोल्स अहम हो सकता है। इसलिए हमें स्पेसिफिक रोल रखना होगा। ऐतिहासिक और कानूनी रूप से हम ऐसा अप्रोच रखते रहे हैं। लेकिन यह कॉपीराइट से एकदम अलग भी नहीं होगा। कॉन्क्लेव में दैनिक भास्कर कॉर्प के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर पवन अग्रवाल ने सवाल किए। क्या इस मामले में क्लैरिटी लाने के लिए सरकार और पब्लिशर मिलकर काम कर सकते हैं। अगर हां तो कैसे? जवाब: मेरी मिनिस्ट्री कोई भी कानून बनाने से पहले संबंधित लोगों से बात करती है। यह हमारी जरूरत भी है। जहां तक आपका सवाल है तो यह तीन-चार मिनिस्ट्री से जुड़ा है, लेकिन सरकार के तौर हम हर मसले पर नजर रखते हैं। हमें अपनी सरकार के स्ट्रक्चर को देखकर काम करना होता है, जैसे कि अगर टेक्नोलॉजी चेंज हो रही है या दुनिया में कुछ बड़ा बदलाव हो रहा है। ऐसा होने पर हम यह सुनिश्चित करते हैं कि हमारे लिए कौन से बदलाव जरूरी हैं, जिन्हें अपनाया जाना चाहिए। क्या इसके लिए कोई नोडल एजेंसी होगी क्योंकि यह बेहद संवेदनशीन मामला है और इनका तेजी से समाधान चाहिए होगा? जवाब: मैं अपनी मिनिस्ट्री के अलावा किसी और के बारे में बात नहीं कर सकता हूं। मैं यह नहीं कह सकता हूं कि हर चीज सेंट्रलाइज्ड होनी चाहिए। तो क्या मैं जान सकता हूं कि यह आपकी विशलिस्ट में है या नहीं? जवाब: देखिए। यदि कुछ किया जाना है तो उसका एक प्रोसेस है। आखिर सरकार में पोर्टफोलियो सिस्टम क्यों है। यह सिस्टम ही इसलिए है कि अलग-अलग लोगों के हितों या सवालों को समझा जा सके और उसे सुलझाया जा सके। अगर कहीं समस्या आती है तो यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम मिलकर इसे कैसे सुलझाते हैं। मैं अभी यह नहीं कह सकता कि यह इश्यू मेरा नहीं है, किसी और का है। इसकी बजाय मैं यह कहूंगा कि मुझे इसके लिए दूसरी मिनिस्ट्री से बात करनी होगी। इसके बाद हम मिलकर कोई समाधान तय करेंगे। इसलिए मुझे लगता है कि आपको नोडल एजेंसी को लेकर चिंता नहीं करनी चाहिए कि कोई इश्यू होने पर किससे संपर्क करना है। इसके लिए एक की बजाय दो या तीन पॉइंट्स हो सकते हैं। हां, अगर हमें लगेगा कि किसी मामले में अर्जेंसी है तो हम हस्तक्षेप कर इसे जल्दी सुलझा लेंगे। मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (MeitY) के सचिव एस कृष्णन ने जवाब दिए। हम दुनियाभर में सोशल मीडिया कंटेंट पर स्क्रूटनी देख रहे हैं। ऐसे में भारत फ्री एक्सप्रेशन और प्लेटफॉर्म अकाउंटबिलिटी के बीच कैसे संतुलन बनाएगा? जवाब: राइट टू स्पीच 1902 ऑफ कॉन्सिट्यूशन में बोलने की आजादी की बात है। कंटेंट उसके तहत होना चाहिए। 69 ए में प्रतिबंध हैं जैसे पब्लिक ऑर्डर डिफेंस आदि हैं। दूसरे सेक्शन में डिफेमेटरी और ऑब्लिगेटरी कंटेंट हैं ये आईटी एक्ट के सेक्शन 79 में आते हैं। आपको भारत मे काम करना है तो यहां का कानून पालन करना होगा। हम इसी तरह के मुद्दों से डील करते हैं। इस पर सवाल हो सकता है। सरकार डिडिटल न्यूज से क्या उम्मीत करती है? जवाब: सबसे जरूरी है कि मीडिया चाहता है कि उसे लोग सीरियली लें तो उसे क्या हो रहा है यह बताना चाहिए। यदि ऐसा नहीं है तो इस पर आपको विचार करना चाहिए। सबसे जरूरी बात है कि मीडिया को लोग सीरियली लेना चाहें तो यह सवाल आपको खुद से करने की जरूरत है। एक प्रशानिक अधिकारी और सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर मैं कहना चाहूंगा कि आप कानून का पालन करें। हम यही चाहते हैं। आप क्रेडिबल हैं या नहीं यह लोगों को तय करने लीजिए। (इस पर पवनजी ने कहा इस कमरे में सभी सहमत हैं कि लोग हम पर भरोसा करते हैं। यही हमारे अस्तित्व की वजह है।) डीपर गवर्नमेंट एंड इंडस्ट्री कोलैबरेशन को लेकर आप क्या कहना चाहेंगे? जवाब: अपार्चुनिटी यह है कि तकनीक अवेलेबल है। इसका उपयोग करें। मीडिया यह कर सकता है। यह बैलेंस वे में होना चाहिए। यह सोसायटी से जुड़ा मामला है। छात्रों से लेकर बुजुर्ग तक सभी इनफॉर्म्ड रहना चाहते हैं और एजुकेट रहना चाहते हैं। आप नहीं चाहेंगे कि इस पर प्रतिबंध हो। इस एआई एरा में लेगेसी और भरोसेमंद पब्लिशर्स को रिलेवेंट बने रहने के लिए स्ट्रेटजिक शिफ्ट क्या होनी चाहिए? जवाब: मेरे जैसा व्यक्ति जो हर दिन न्यूज पेपर पढ़ता है हर दिन अपडेट रहना चाहता है। उसे आप अपडेट करते रहिए। पहले एक डेडलाइन होती थी। अब ऐसा नहीं है। अब आपको हर वक्त कंटेंट अपडेट करना होगा। पत्रकारों के लिए यह कठिन है लेकिन आप हर दिन जिस तरह से अपडेट करते हैं इसकी क्रेडिबलिटी है। दैनिक भास्कर को Google पर
DNPA Conclave 2026: AI Era Trust in News

नई दिल्ली40 मिनट पहले कॉपी लिंक DNPA Conclave2026 के सेशन के दौरान बातचीत करते दैनिक भास्कर कॉर्प के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर पवन अग्रवाल और मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (MeitY) के सचिव एस कृष्णन। द डिडिटल न्यूद पब्लिशर्स एसोसिएशन (DNPA) ने गुरुवार को नई दिल्ली में DNPA कॉन्क्लेव 2026 का आयोजन किया। कॉन्क्लेव में दैनिक भास्कर कॉर्प के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर पवन अग्रवाल ने मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (MeitY) के सचिव एस कृष्णन से डिजिटल मीडिया कंटेंट को लेकर बातचीत की। इसमें इनोवेशंस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रेग्यूलेशन, सस्टेनेबल ग्रोथ किस तरह से भारत की न्यूज इंडस्ट्री के भविष्य को आकार देंगे, इस पर चर्चा हुई। विषय था ‘एक मजबूत डिजिटल भविष्य के लिए नई रणनीति तैयार करना”। बातचीत के संपादित अंश: डीपीआईटी इस समय सभी तरह के कंटेंट डील कर रही है, जिनमें न्यूज, म्यूजिक, फिल्म शामिल हैं। क्या हमें सेक्टर स्पेसफिक एआई गाइडलाइंस की उम्मीद करनी चाहिए? जवाब: अभी इस बारे में कुछ नहीं कह सकते। हमने अभी जो डेटा वर्क किया है, उसमें जनरल फ्रेमवर्क होगा। हां, इसके भीतर सेक्टर व्यू भी देख सकते हैं। जहां तक न्यूज क्रिएटर्स की चिंता है, वह एक लेवल पर यह एक जैसा है। जैसे कि कॉपीराइट। अगर आप लॉन्गटर्म में देख रहे हैं जैसे कि कोई नाॉवेल, पेंटिंग, आर्टवर्क तो वह थोड़ा अलग हो सकता है। जो आज न्यूज है, वह एक साल बाद रिलेवेंट नहीं होगी, लेकिन आर्काइव में रहकर 50 साल बाद इम्पॉर्टेंट हो सकती है। इसलिए कछ मामलों में कॉपीराइट इश्यू सबसे अहम रह सकता है। कुछ मामलों में डीपर सोसाइटल रोल्स अहम हो सकता है। इसलिए हमें स्पेसिफिक रोल रखना होगा। ऐतिहासिक और कानूनी रूप से हम ऐसा अप्रोच रखते रहे हैं। लेकिन यह कॉपीराइट से एकदम अलग भी नहीं होगा। कॉन्क्लेव में दैनिक भास्कर कॉर्प के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर पवन अग्रवाल ने सवाल किए। क्या इस मामले में क्लैरिटी लाने के लिए सरकार और पब्लिशर मिलकर काम कर सकते हैं। अगर हां तो कैसे? जवाब: मेरी मिनिस्ट्री कोई भी कानून बनाने से पहले संबंधित लोगों से बात करती है। यह हमारी जरूरत भी है। जहां तक आपका सवाल है तो यह तीन-चार मिनिस्ट्री से जुड़ा है, लेकिन सरकार के तौर हम हर मसले पर नजर रखते हैं। हमें अपनी सरकार के स्ट्रक्चर को देखकर काम करना होता है, जैसे कि अगर टेक्नोलॉजी चेंज हो रही है या दुनिया में कुछ बड़ा बदलाव हो रहा है। ऐसा होने पर हम यह सुनिश्चित करते हैं कि हमारे लिए कौन से बदलाव जरूरी हैं, जिन्हें अपनाया जाना चाहिए। क्या इसके लिए कोई नोडल एजेंसी होगी क्योंकि यह बेहद संवेदनशीन मामला है और इनका तेजी से समाधान चाहिए होगा? जवाब: मैं अपनी मिनिस्ट्री के अलावा किसी और के बारे में बात नहीं कर सकता हूं। मैं यह नहीं कह सकता हूं कि हर चीज सेंट्रलाइज्ड होनी चाहिए। तो क्या मैं जान सकता हूं कि यह आपकी विशलिस्ट में है या नहीं? जवाब: देखिए। यदि कुछ किया जाना है तो उसका एक प्रोसेस है। आखिर सरकार में पोर्टफोलियो सिस्टम क्यों है। यह सिस्टम ही इसलिए है कि अलग-अलग लोगों के हितों या सवालों को समझा जा सके और उसे सुलझाया जा सके। अगर कहीं समस्या आती है तो यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम मिलकर इसे कैसे सुलझाते हैं। मैं अभी यह नहीं कह सकता कि यह इश्यू मेरा नहीं है, किसी और का है। इसकी बजाय मैं यह कहूंगा कि मुझे इसके लिए दूसरी मिनिस्ट्री से बात करनी होगी। इसके बाद हम मिलकर कोई समाधान तय करेंगे। इसलिए मुझे लगता है कि आपको नोडल एजेंसी को लेकर चिंता नहीं करनी चाहिए कि कोई इश्यू होने पर किससे संपर्क करना है। इसके लिए एक की बजाय दो या तीन पॉइंट्स हो सकते हैं। हां, अगर हमें लगेगा कि किसी मामले में अर्जेंसी है तो हम हस्तक्षेप कर इसे जल्दी सुलझा लेंगे। मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (Meity) के सचिव एस कृष्णन ने जवाब दिए। हम दुनियाभर में सोशल मीडिया कंटेंट पर स्क्रूटनी देख रहे हैं। ऐसे में भारत फ्री एक्सप्रेशन और प्लेटफॉर्म अकाउंटेबिलिटी के बीच कैसे संतुलन बनाएगा? जवाब: राइट टू स्पीच 1902 ऑफ कॉन्सिट्यूशन में बोलने की आजादी की बात है। कंटेंट उसके तहत होना चाहिए। 69 ए में प्रतिबंध हैं जैसे पब्लिक ऑर्डर डिफेंस आदि हैं। दूसरे सेक्शन में डिफेमेटरी और ऑब्लिगेटरी कंटेंट हैं ये आईटी एक्ट के सेक्शन 79 में आते हैं। आपको भारत मे काम करना है तो यहां का कानून पालन करना होगा। हम इसी तरह के मुद्दों से डील करते हैं। इस पर सवाल हो सकता है। सरकार डिजिटल न्यूज से क्या उम्मीद करती है? जवाब: सबसे जरूरी है कि मीडिया चाहता है कि उसे लोग सीरियली लें तो उसे क्या हो रहा है यह बताना चाहिए। यदि ऐसा नहीं है तो इस पर आपको विचार करना चाहिए। सबसे जरूरी बात है कि मीडिया को लोग सीरियली लेना चाहें तो यह सवाल आपको खुद से करने की जरूरत है। एक प्रशानिक अधिकारी और सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर मैं कहना चाहूंगा कि आप कानून का पालन करें। हम यही चाहते हैं। आप क्रेडिबल हैं या नहीं यह लोगों को तय करने लीजिए। (इस पर पवनजी ने कहा यहां सभी सहमत हैं कि लोग हम पर भरोसा करते हैं। यही हमारे अस्तित्व की वजह है।) डीपर गवर्नमेंट एंड इंडस्ट्री कोलैबरेशन को लेकर आप क्या कहना चाहेंगे? जवाब: अपार्चुनिटी यह है कि तकनीक अवेलेबल है। इसका उपयोग करें। मीडिया यह कर सकता है। यह बैलेंस वे में होना चाहिए। यह सोसायटी से जुड़ा मामला है। छात्रों से लेकर बुजुर्ग तक सभी इनफॉर्म्ड रहना चाहते हैं और एजुकेट रहना चाहते हैं। आप नहीं चाहेंगे कि इस पर प्रतिबंध हो। इस एआई एरा में लेगेसी और भरोसेमंद पब्लिशर्स को रिलेवेंट बने रहने के लिए स्ट्रेटजिक शिफ्ट क्या होनी चाहिए? जवाब: मेरे जैसा व्यक्ति जो हर दिन न्यूज पेपर पढ़ता है हर दिन अपडेट रहना चाहता है। उसे आप अपडेट करते रहिए। पहले एक डेडलाइन होती थी। अब ऐसा नहीं है। अब आपको हर वक्त कंटेंट अपडेट करना होगा। पत्रकारों के लिए यह कठिन है लेकिन आप हर दिन जिस तरह से अपडेट करते हैं इसकी क्रेडिबलिटी है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स
जीवाजी विश्वविद्यालय में आवारा कुत्तों को खाना खिलाने पर प्रतिबंध:नियम तोड़ने वालों पर होगी कार्रवाई, सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन

ग्वालियर के जीवाजी विश्वविद्यालय ने परिसर में आवारा कुत्तों को खाना खिलाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। विश्वविद्यालय प्रबंधन ने इस संबंध में एक आदेश जारी किया है और चेतावनी दी है कि नियम का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यह कदम शहर में बढ़ते डॉग बाइट के मामलों और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मद्देनजर उठाया गया है। विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर एक आदेशात्मक बैनर लगाया गया है। इसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यदि कोई भी व्यक्ति परिसर के अंदर आवारा कुत्तों को भोजन वितरित करते पाया गया, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रबंधन ने इस निर्णय को सर्वोच्च न्यायालय में आवारा कुत्तों के हमलों से संबंधित याचिका पर आए आदेश का अनुपालन बताया है। 7-8 लोग डॉग बाइट के शिकार हुए थे दरअसल, ग्वालियर में प्रतिदिन 250 से अधिक डॉग बाइट के मामले सामने आ रहे हैं। हाल ही में, विश्वविद्यालय परिसर में ही एक आवारा कुत्ते ने एक ही दिन में 7 से 8 लोगों को काट लिया था। इस घटना के बाद छात्र-छात्राओं, प्रोफेसरों और सुबह टहलने आने वाले लोगों में दहशत फैल गई थी। विश्वविद्यालय परिसर में लड़कों और लड़कियों के छात्रावास, प्रोफेसरों के आवास सहित अन्य आवासीय क्षेत्र हैं। यहां प्रतिदिन लगभग पांच हजार लोग सुबह-शाम टहलने आते हैं। ऐसे में सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंता स्वाभाविक है। विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. विमलेंद्र सिंह राठौर ने बताया कि प्रबंधन ने सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों को भोजन न देने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के परिपालन में यह कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि परिसर में डॉग बाइट की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए यह निर्णय आवश्यक हो गया था।
Rahul Gandhi Vs PM Modi; Congress Shirtless Protest Arrest Case

Hindi News National Rahul Gandhi Vs PM Modi; Congress Shirtless Protest Arrest Case | North Korea Dictator नई दिल्ली2 मिनट पहले कॉपी लिंक संसद में नेता विपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया X पर यूथ कांग्रेस मेंबर्स के खिलाफ एक्शन पर राहुल ने PM की आलोचना की। उन्होंने अपनी पार्टी के यूथ विंग के सदस्यों के खिलाफ शर्टलेस प्रोटेस्ट को लेकर पुलिस एक्शन पर कमेंट किया। उन्होंने कहा कि प्राइम मिनिस्टर नरेंद्र मोदी की सरकार और नॉर्थ कोरिया के तानाशाही शासन एक जैसा है। उन्होंने कहा कि ये इंडिया है, नॉर्थ कोरिया नहीं। राहुल ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट डेमोक्रेसी की आत्मा है। यह कोई अपराध नहीं है। राहुल ने पूछा… जब आदिवासी अपने जल, जंगल, जमीन के हक के लिए खड़े हुए, तो उन पर भी शक की नजर डाली गई। यह कैसा लोकतंत्र है, जहां PM सवालों से डरते है? जहां असहमति को कुचलना शासन का स्वभाव बनता जा रहा है? दरअसल, दिल्ली में आयोजित AI समिट के दौरान यूथ कांग्रेस मेंबर्स ने शर्ट उतार कर प्रोटेस्ट किया था। इस संबंध में दिल्ली पुलिस 3 सदस्यों को गिरफ्तार करने शिमला पहुंची थी। इसके बाद हिमाचल पुलिस ने दिल्ली पुलिस को उन्हें ले जाने से रोक लिया था। राहुल ने ये बातें गिरफ्तार तीन यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं को दिल्ली वापस लाने की इजाजत मिलने के बाद कही। राहुल ने अपनी पोस्ट में और क्या कहा… सोचिए मुद्दा कोई भी हो, अगर आप सत्ता के खिलाफ संवैधानिक तरीके से आवाज उठाते हैं, तो लाठी, मुकदमा और जेल, यह लगभग तय है। पेपर लीक से त्रस्त युवाओं ने अपने भविष्य के लिए आवाज उठाई, जवाब मिला लाठियों से। देश की गौरवशाली महिला पहलवानों ने BJP के प्रभावशाली नेता पर लगे गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की। उनकी पुकार को बदनाम किया गया, आंदोलन को कुचला गया, और उन्हें सड़कों से जबरन हटाया गया। एक बलात्कार पीड़ित के समर्थन में इंडिया गेट पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन हुआ। न्याय की मांग को व्यवस्था के लिए असुविधा मानकर हटा दिया गया। युवा कांग्रेस ने देश का अहित करने वाले US ट्रेड डील का शांतिपूर्ण विरोध किया तो उन्हें देशविरोधी बताकर गिरफ्तार कर लिया। जब आम लोग जहरीली हवा के खिलाफ खड़े हुए, तो पर्यावरण की चिंता को भी राजनीति कहकर दबा दिया गया। जब किसानों ने अपने अधिकारों के लिए आंदोलन किया, तो उन्हें देशविरोधी करार दिया गया। आंसू गैस, रबर की गोलियां, पानी की बौछारें और लाठियां, यही संवाद का माध्यम बना। शिमला के शोघी में शिमला पुलिस ने दिल्ली पुलिस को रोका और पूछताछ की। अब समझिए हिमाचल में क्या हुआ… दिल्ली में AI समिट में अर्धनग्न होकर प्रदर्शन करने के आरोप में 3 यूथ कांग्रेस नेताओं की गिरफ्तारी को लेकर बुधवार को हिमाचल और दिल्ली पुलिस में टकराव हो गया। दिल्ली पुलिस ने शिमला के एक होटल से मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के 3 नेताओं को गिरफ्तार किया, लेकिन हिमाचल पुलिस ने उन्हें आधे रास्ते में रोक लिया और दिल्ली नहीं ले जाने दिया। हिमाचल पुलिस का तर्क था कि इस बारे में दिल्ली पुलिस ने कोई औपचारिक सूचना नहीं दी। हिमाचल में सादे कपड़ों में आकर मेहमानों को उठाया गया। कोर्ट में सुनवाई के दौरान भी दोनों पुलिस में बहस होती रही। इसके बाद जज ने फाइल तैयार करने को कहा तो दिल्ली पुलिस फिर बिना कागजी कार्रवाई के तीनों नेताओं को ले गई। इसका पता चलते ही हिमाचल पुलिस ने फिर उन्हें रोक लिया। इसके बाद तीनों नेताओं को कोर्ट में पेश कर दिल्ली पुलिस ने ट्रांजिट रिमांड पर लिया। करीब 18 घंटे तक दिल्ली और हिमाचल पुलिस के बीच ड्रामा चलता रहा। फिर गुरुवार सुबह करीब पौने 6 बजे दिल्ली पुलिस तीनों नेताओं को लेकर चली गई। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…









