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नई दिल्ली12 मिनट पहले

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दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि सशस्त्र बलों के कर्मियों की दिव्यांगता पेंशन को सिर्फ यह कहकर नहीं रोका जा सकता कि बीमारी ‘लाइफस्टाइल डिसऑर्डर’ है या वह पीस एरिया में तैनाती के दौरान हुई।

हाई कोर्ट ने कहा कि गैर-ऑपरेशनल क्षेत्रों में भी सैन्य सेवा तनावपूर्ण होती है और इससे गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। बता दें कि सेना में ‘पीस पोस्टिंग’ का मतलब है कि सैनिक या अधिकारी की पोस्टिंग बॉर्डर पर नहीं बल्कि शांत और सुरक्षित शहरों या छावनियों में होती है।

जस्टिस वी. कामेश्वर राव और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की डिवीजन बेंच ने आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल (AFT) के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें भारतीय वायुसेना के रिटायर्ड अधिकारी की दिव्यांग पेंशन याचिका खारिज कर दी गई थी। वे हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) और कोरोनरी आर्टरी डिजीज से पीड़ित हैं।

कोर्ट ने साफ कहा कि यह मायने नहीं रखता कि बीमारी फील्ड एरिया में हुई या पीस पोस्टिंग में। असली सवाल यह है कि क्या बीमारी का सेवा परिस्थितियों से संबंध है। इस केस में रिलीज मेडिकल बोर्ड यह ठीक से नहीं बता सका कि अफसर की बीमारियां सेवा से जुड़ी नहीं थीं या सेवा के कारण नहीं बढ़ीं।

कोर्ट ने बताया कि सैन्य जीवन में कड़ा अनुशासन, लंबे वर्किंग आवर्स, बार-बार तबादले, परिवार से दूर रहना और हर समय तैनाती की तैयारी जैसे कारणों से शारीरिक और मानसिक तनाव होता है, जो स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है।

कोर्ट ने साफ कहा कि बिना किसी ठोस वजह के बीमारी को सिर्फ ‘लाइफस्टाइल डिसऑर्डर’ कहना कानूनन सही नहीं है। कोर्ट ने यह भी बताया कि मेडिकल बोर्ड ने खुद माना था कि यह बीमारी अधिकारी की किसी लापरवाही या गलत आदतों की वजह से नहीं हुई।

कोर्ट ने मोटापा, धूम्रपान या शराब से जुड़े तर्क भी खारिज कर दिए, क्योंकि मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में इन्हें कारण नहीं बताया गया था। सिर्फ वजन ज्यादा होना, हाई ब्लड प्रेशर या हृदय रोग को खुद से पैदा हुई बीमारी साबित नहीं करता।

कोर्ट ने यह भी कहा कि AFT ने बिना मेडिकल सबूत के वजन और लाइफस्टाइल के आधार पर निष्कर्ष निकाले। कोर्ट ने हृदय रोग को लेकर मेडिकल बोर्ड की दलीलों को भी कमजोर बताया और कहा कि बीमारी को सिर्फ पिछले 14 दिनों की ड्यूटी से जोड़ना तर्कसंगत नहीं है।

अफसर ने 40 साल से ज्यादा सेवा दी, अब 50% दिव्यांग

याचिकाकर्ता रिटायर्ड अफसर ने भारतीय वायुसेना में 40 साल से अधिक सेवा दी थी। ज्वाइनिंग के समय वह मेडिकल रूप से फिट थे। 1999 में उन्हें हाईपरटेंशन हुआ और 2016 में गंभीर कोरोनरी आर्टरी डिजीज के कारण ओपन-हार्ट सर्जरी करानी पड़ी।

उनकी दिव्यांगता 50% आंकी गई थी, फिर भी पेंशन से वंचित कर दिया गया। हाईकोर्ट ने याचिका मंजूर करते हुए 50% आजीवन दिव्यांग पेंशन देने का निर्देश दिया। कोर्ट ने रिटायरमेंट की तारीख से बकाया भुगतान 8 सप्ताह के भीतर जारी करने को कहा है। देरी होने पर 12% सालाना ब्याज देना होगा।

………………..

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कोर्ट ने कहा कि कुंडली मेल न खाने की वजह से शादी से मना करने पर भारतीय न्याय संहिता(BNS) का सेक्शन 69 लग सकता है, जो धोखे से सेक्सुअल इंटरकोर्स को अपराध मानता है। पूरी खबर पढ़ें…

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जस्टिस वी. कामेश्वर राव और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की डिवीजन बेंच ने आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल (AFT) के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें भारतीय वायुसेना के रिटायर्ड अधिकारी की दिव्यांग पेंशन याचिका खारिज कर दी गई थी। वे हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) और कोरोनरी आर्टरी डिजीज से पीड़ित हैं।

कोर्ट ने साफ कहा कि यह मायने नहीं रखता कि बीमारी फील्ड एरिया में हुई या पीस पोस्टिंग में। असली सवाल यह है कि क्या बीमारी का सेवा परिस्थितियों से संबंध है। इस केस में रिलीज मेडिकल बोर्ड यह ठीक से नहीं बता सका कि अफसर की बीमारियां सेवा से जुड़ी नहीं थीं या सेवा के कारण नहीं बढ़ीं।

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कोर्ट ने साफ कहा कि बिना किसी ठोस वजह के बीमारी को सिर्फ ‘लाइफस्टाइल डिसऑर्डर’ कहना कानूनन सही नहीं है। कोर्ट ने यह भी बताया कि मेडिकल बोर्ड ने खुद माना था कि यह बीमारी अधिकारी की किसी लापरवाही या गलत आदतों की वजह से नहीं हुई।

कोर्ट ने मोटापा, धूम्रपान या शराब से जुड़े तर्क भी खारिज कर दिए, क्योंकि मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में इन्हें कारण नहीं बताया गया था। सिर्फ वजन ज्यादा होना, हाई ब्लड प्रेशर या हृदय रोग को खुद से पैदा हुई बीमारी साबित नहीं करता।

कोर्ट ने यह भी कहा कि AFT ने बिना मेडिकल सबूत के वजन और लाइफस्टाइल के आधार पर निष्कर्ष निकाले। कोर्ट ने हृदय रोग को लेकर मेडिकल बोर्ड की दलीलों को भी कमजोर बताया और कहा कि बीमारी को सिर्फ पिछले 14 दिनों की ड्यूटी से जोड़ना तर्कसंगत नहीं है।

अफसर ने 40 साल से ज्यादा सेवा दी, अब 50% दिव्यांग

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उनकी दिव्यांगता 50% आंकी गई थी, फिर भी पेंशन से वंचित कर दिया गया। हाईकोर्ट ने याचिका मंजूर करते हुए 50% आजीवन दिव्यांग पेंशन देने का निर्देश दिया। कोर्ट ने रिटायरमेंट की तारीख से बकाया भुगतान 8 सप्ताह के भीतर जारी करने को कहा है। देरी होने पर 12% सालाना ब्याज देना होगा।

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