स्कूली छात्र से मारपीट का VIDEO:सिवनी में दलसागर तालाब के पास युवकों ने लात-घूसे मारे

सिवनी के कोतवाली थाना क्षेत्र में दलसागर तालाब के पास एक स्कूली छात्र के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। इस घटना का एक वीडियो मंगलवार, 10 मार्च की रात को सोशल मीडिया पर पोस्ट हुआ, जिसमें कुछ युवक एक छात्र को पीटते और गालियां देते नजर आ रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद कोतवाली पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि यह घटना मंगलवार दोपहर की है, जब कुछ लड़कों ने एक छात्र को घेरकर उसके साथ हाथापाई की। मौके पर मौजूद किसी शख्स ने इस पूरी वारदात का वीडियो बना लिया। मिशन स्कूल का छात्र बताया जा रहा पीड़ित शुरुआती जानकारी के अनुसार, पीड़ित छात्र मिशन अंग्रेजी माध्यम स्कूल का विद्यार्थी लग रहा है। हालांकि, अब तक छात्र या उसके परिवार की तरफ से थाने में कोई लिखित शिकायत नहीं की गई है, लेकिन पुलिस ने वीडियो के आधार पर खुद ही एक्शन लेना शुरू कर दिया है। पुलिस कर रही आरोपियों की तलाश कोतवाली थाना प्रभारी सतीश तिवारी ने बताया कि वीडियो उनके संज्ञान में आया है। छात्र की स्कूल ड्रेस से उसके स्कूल की पहचान की जा रही है। पुलिस फिलहाल मारपीट करने वाले युवकों और पीड़ित छात्र, दोनों का पता लगाने की कोशिश कर रही है। थाना प्रभारी ने भरोसा दिलाया है कि पहचान होते ही दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पानी किस बर्तन में पीना है सबसे सही? स्टील, ग्लास और कॉपर में छुपा बड़ा फर्क

Last Updated:March 10, 2026, 22:08 IST पानी पीना सेहत के लिए बेहद जरूरी है, लेकिन अक्सर लोग इस बात पर ध्यान नहीं देते कि पानी किस बर्तन में पीना बेहतर होता है. घरों में आमतौर पर स्टील, कांच और तांबे के बर्तन इस्तेमाल किए जाते हैं और हर एक के अपने फायदे होते हैं. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि इन तीनों में से कौनसा बर्तन पानी पीने के लिए ज्यादा सुरक्षित और सेहत के लिहाज से बेहतर माना जाता है. फोटो AI से जेनरेट की गई है. पानी शरीर को स्वस्थ रखने के लिए सबसे जरूरी चीजों में से एक है, लेकिन कई बार लोग इस बात पर ध्यान नहीं देते कि पानी किस बर्तन में पीना ज्यादा बेहतर होता है. अलग-अलग तरह के बर्तनों में पानी रखने से उसके गुणों पर असर पड़ सकता है. घरों में आमतौर पर स्टील, कांच और तांबे के बर्तन इस्तेमाल किए जाते हैं. हर बर्तन की अपनी खासियत होती है और अगर सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो यह सेहत के लिए फायदेमंद भी साबित हो सकता है. इसलिए यह समझना जरूरी है कि किस बर्तन में पानी पीना ज्यादा सुरक्षित और सही माना जाता है. आज के समय में स्टेनलेस स्टील के गिलास और बोतल सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाते हैं. स्टील मजबूत होता है और इसमें जंग लगने की संभावना भी कम होती है. सबसे खास बात यह है कि स्टील पानी के साथ किसी तरह की खतरनाक केमिकल रिएक्शन नहीं करता. यही कारण है कि इसे रोजाना इस्तेमाल के लिए सुरक्षित माना जाता है. स्टील के बर्तन साफ करना भी आसान होता है और सही तरह से धोने पर इनमें बैक्टीरिया पनपने का खतरा कम रहता है. इसलिए रोजमर्रा की जिंदगी में पानी पीने के लिए स्टील एक अच्छा और भरोसेमंद विकल्प माना जाता है. कांच के गिलास में पानी पीने के फायदेकांच यानी ग्लास के बर्तन भी पानी पीने के लिए काफी अच्छे माने जाते हैं. कांच एक न्यूट्रल मटेरियल होता है, जिससे पानी के स्वाद या गुणवत्ता में कोई बदलाव नहीं होता. कई हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि कांच में रखा पानी बिल्कुल शुद्ध स्वाद देता है. इसके अलावा कांच में कोई केमिकल नहीं मिलते, इसलिए यह भी सुरक्षित माना जाता है. हालांकि कांच के बर्तन नाजुक होते हैं और गिरने पर टूट सकते हैं, इसलिए इन्हें संभालकर इस्तेमाल करना पड़ता है. साफ-सफाई का ध्यान रखा जाए तो कांच का गिलास भी पानी पीने के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है. तांबे के बर्तन में पानी पीने की परंपराभारत में तांबे के बर्तन में पानी पीने की परंपरा काफी पुरानी है. आयुर्वेद के अनुसार तांबे के पात्र में रखा पानी शरीर के लिए फायदेमंद माना जाता है. कहा जाता है कि तांबे में हल्के एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो पानी में मौजूद कुछ बैक्टीरिया को कम करने में मदद कर सकते हैं. आमतौर पर तांबे के बर्तन में पानी को 6 से 8 घंटे तक रखने के बाद पीना बेहतर माना जाता है. हालांकि इसका ज्यादा इस्तेमाल भी सही नहीं माना जाता, इसलिए इसे सीमित मात्रा में ही इस्तेमाल करना चाहिए. आखिर सबसे सुरक्षित विकल्प कौनसा हैअगर रोजमर्रा के इस्तेमाल की बात करें तो स्टील और कांच दोनों ही पानी पीने के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक विकल्प माने जाते हैं. वहीं तांबे के बर्तन का पानी भी फायदेमंद हो सकता है, लेकिन उसे सही तरीके से और सीमित मात्रा में ही पीना चाहिए. सबसे जरूरी बात यह है कि जिस भी बर्तन में पानी रखें, उसे हमेशा साफ रखें. साफ बर्तन और शुद्ध पानी ही शरीर को सही तरीके से हाइड्रेट रखने और सेहत को बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं. About the Author Vividha Singh विविधा सिंह न्यूज18 हिंदी (NEWS18) में पत्रकार हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में बैचलर और मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में ये 3 वर्षों से काम कर रही हैं. फिलहाल न्यूज18…और पढ़ें Location : Delhi,Delhi,Delhi First Published : March 10, 2026, 22:08 IST
नरसिंहपुर में हाईवे पर तेंदुए का शव मिला:वाहन की टक्कर से मौत की आशंका, 3 साल का था

नरसिंहपुर-सागर नेशनल हाईवे 44 पर झिराघाटी के पास मंगलवार रात एक तेंदुए का शव मिला है। तेंदुआ सड़क की उस लेन पर पड़ा था जो सागर से नरसिंहपुर की ओर जाती है। घटना की खबर डायल 112 के जरिए पुलिस को मिली, जिसके बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। सुआतला थाना प्रभारी प्रियंका केवट ने बताया कि डायल 112 पर सूचना मिली थी कि झिराघाटी के पास किसी एक्सीडेंट में एक ‘चीता’ घायल हो गया है। जब पुलिस की टीम वहां पहुंची, तो पता चला कि वह एक तेंदुआ था और उसकी मौत हो चुकी थी। इसके तुरंत बाद वन विभाग को जानकारी दी गई। 3 साल का था नर तेंदुआ बरमान वन परिक्षेत्र अधिकारी एचएल बिसेन के मुताबिक, मारा गया तेंदुआ नर है और उसकी उम्र करीब 3 साल के आसपास है। शुरुआती जांच में यही लग रहा है कि किसी तेज रफ्तार वाहन ने उसे टक्कर मार दी, जिससे उसकी जान चली गई। जंगल से निकलकर पार कर रहा था रोड अंदेशा जताया जा रहा है कि तेंदुआ सागर और नरसिंहपुर जिले की सीमा पर लगे जंगल से निकलकर सड़क पार कर रहा होगा, तभी वह किसी गाड़ी की चपेट में आ गया। वन विभाग की टीम ने मौके की बारीकी से जांच की है और मामले में आगे की कार्रवाई कर रही है।
पंजाब: मोमोज खाने से दो बच्चों की मौत, जंक फूड्स पर सवाल eating momos can cause death

हाल ही में पंजाब के तरनतारन में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जिसमें मोमोज खाने से दो सगे भाई-बहनों की मौत हो गई. माता-पिता की ओर से बताया गया कि शनिवार शाम को मोमोज और सोया चाप खाने के बाद बच्चों के पेट में भीषण दर्द उठा और उल्टियां होने लगीं. दोनों बच्चों की हालत बिगड़ती देख उन्हें घर पर रखी उल्टी रोकने की दवा दे दी और वे सो गए लेकिन रविवार सुबह उनकी मौत हो गई. जंक फूड के लगभग ऐसे ही दो मामले कुछ दिन पहले यूपी से भी आए थे जब पेरेंट्स ने बताया था कि उनकी बेटी ज्यादा चाऊमीन-बर्गर खाने की लत के चलते बीमार हुई और फिर उसकी मौत हो गई. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या जंक फूड्स अब जानलेवा होते जा रहे हैं? मोमोज हो या चाऊमीन-बर्गर क्या ये चीजें खाने के तुरंत बाद किसी की जान ले सकती हैं? आईए सर गंगाराम अस्पताल नई दिल्ली में इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी एंड पैनक्रिएटिको बिलियरी साइंसेज के वाइस चेयरपर्सन डॉ. पीयूष रंजन और डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में डायटीशियन मनीषा वर्मा से जानते हैं उनकी राय.. विशेषज्ञों से जानें मोमोज, बर्गर आदि जंक फूड कितने नुकसानदेह हैं? डॉ. पीयूष रंजन कहते हैं कि मोमोज वाले मामले में क्लिनिकल डिटेल्स ज्यादा नहीं मालूम है इसलिए पूरी तरह ये बताना तो मुश्किल है कि बच्चों की मौत की असली वजह क्या है, हालांकि मौत के पीछे खाना नहीं बल्कि इससे या किसी और चीज से होने वाला इन्फेक्शन वजह हो सकता है. बाहर के खाने पीने की चीजों में अगर गंदगी है और हाईजीन का अभाव होता है तो बच्चों को टाइफॉइड हो सकता है, ज्यादा गंभीर स्थिति में ब्लीडिंग हो सकती है, आंतें फट सकती हैं. इन्फेक्टेड खाने से एक्यूट डायरिया हो सकता है, जिसमें पेट में दर्द और उल्टी होती हैं. संक्रमण के बाद एक और जो खराब चीज हो सकती है वह है रैपिडली किडनी का शट डाउन होना. किडनी शट डाउन 24 घंटे या उससे थोड़े ज्यादा समय में भी हो सकता है. वहीं डायटिशियन मनीषा कहती हैं कि जंक फूड नुकसानदेह तो होता ही है लेकिन सिर्फ मोमोज खाने भर से किसी की मृत्यु हो जाए ये संभव नहीं लगता. हालांकि बच्चों की मौत के पीछे मोमोज में मौजूद कोई टॉक्सिक चीज वजह हो सकती है. मोमोज बनाने से लेकर रखरखाव तक क्या उसमें किसी तरह की अनहाइजेनिक कंडीशन, टॉक्सिक चीजें या मिलावट की गई है तो वह संक्रमण पैदा कर सकती है, शरीर में जहरीले तत्व पहुंच सकते हैं और तब उससे जान जा सकती है. डॉ. रंजन आगे कहते हैं कि फूड पॉइजनिंग का मामला अगर हो भी तो उससे मौत की संभावना कम दिखती है. डिहाइड्रेशन से भी इतनी जल्दी जान नहीं जा सकती है. मामोज खाने और बच्चों की मौत होने का पीरियड इतना छोटा है कि इसमें किसी प्रकार के संक्रमण और किडनी शट डाउन की संभावना हो सकती हैं, हालांकि ये सभी संभावनाएं हैं और ऐसे केसेज में ऐसी चीजें हो सकती हैं लेकिन एक्जेक्टली हुआ क्या है यह तो जांच का विषय है. वहीं मनीषा कहती हैं कि इस चीज का खुलासा तो बच्चों की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट या फॉरेंसिक जांच के बाद ही हो सकता है कि उन मोमोज में ऐसा क्या था. क्या उसमें खराब मीट या चिकन का इस्तेमाल हुआ, या अगर वेज मोमोज थे तो उनमें किसी प्रकार की खराब या अनहाइजेनिक चीजें मिली थीं या उनके रखरखाव के समय उसमें कुछ गड़बड़ हुई. क्या जंक फूड हैं नुकसानदेह डायटीशियन मनीषा कहती हैं, हालांकि जंक फूड सेहत के लिए बहुत नुकसानदेह होते हैं और ये लंबे समय तक खाने से शरीर को काफी नुकसान पहुंचाते हैं. सबसे बड़ी बात है कि आपको नहीं पता कि ये कैसे बनाए गए हैं, इन्हें कैसे रखा गया है, कितनी साफ-सफाई का ध्यान रखा गया है या नहीं रखा गया है, कैसा पानी इस्तेमाल हुआ है, क्या संक्रमित चीजें इनके प्रभाव में आई हैं. इसलिए बाहर के खाने को अवॉइड करें या सिर्फ वहीं से खरीदें जहां आपको साफ-सफाई का भरोसा हो. सड़क किनारे कहीं भी मिलने वाले फूड्स को न खाएं.
Health Tips: गरीबों का प्रोटीन और आयरन वाला सलाद, वजन करे कंट्रोल, शरीर को बनाए ताकतवर

Last Updated:March 10, 2026, 21:59 IST Iron-Protein Rich Easy Breakfast: झारखंड की राजधानी रांची के खासकर आदिवासी और ग्रामीण इलाकों में सुबह का नाश्ता अलग ही अंदाज का होता है. यहां न तो एवोकाडो टोस्ट चलता है और न ब्रेड-मटर. बल्कि लोग ऐसा नाश्ता करते हैं जो प्रोटीन और आयरन से भरपूर हो, सस्ता हो और शरीर को मजबूत भी बनाए. स्वाद भी चटपटा और देसी. रांची के कैम्बो गांव के निवासी नीरज बताते हैं कि वे लोग रोज महंगा या आधुनिक नाश्ता नहीं करते. उनका कहना है कि भले पैसे कम हों, लेकिन शरीर को प्रोटीन और आयरन तो चाहिए ही. इसलिए वे रात में काले चने को भिगो देते हैं और सुबह एक कटोरी फूला हुआ चना निकाल लेते हैं. नीरज बताते हैं कि भीगे हुए काले चने में एक मुट्ठी हल्की भुनी हुई मूंगफली डाल दीजिए. मूंगफली का छिलका हटाने की जरूरत नहीं है. इसके बाद थोड़ा सा सरसों का तेल डालते हैं. जैसे कुछ लोग ओलिव ऑयल इस्तेमाल करते हैं, वैसे यहां सरसों का तेल काम आता है. फिर उसमें थोड़ा नींबू रस, काला नमक, चाट मसाला, कटा हुआ प्याज, टमाटर और थोड़ा खीरा डालकर अच्छी तरह मिला लिया जाता है. Add News18 as Preferred Source on Google लीजिए, तैयार है सादा लेकिन पौष्टिक नाश्ता. यह पेट को लंबे समय तक भरा रखता है. चना और मूंगफली दोनों में फाइबर अच्छी मात्रा में होता है, जिससे जल्दी भूख नहीं लगती. साथ ही यह प्रोटीन और आयरन से भरपूर होता है, जिससे शरीर को ताकत मिलती है और वजन भी संतुलित रहता है. नीरज का कहना है कि यह नाश्ता शरीर को मजबूत बनाता है. इससे वजन बढ़ने की समस्या नहीं होती, क्योंकि इसमें कैलोरी और खराब वसा कम होती है, जबकि अच्छे वसा और पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में होते हैं. यही वजह है कि वे इसे अपना लोकल प्रोटीन नाश्ता कहते हैं. इसे बनाना भी बहुत आसान है और सुबह खाने के बाद दिनभर एनर्जेटिक फील होता है. First Published : March 10, 2026, 21:59 IST
मखाना क्रिस्पी रेसिपी: मखाने से 2 टेस्टी मसाला, मिनटों में तैयार होगी कुरकुरी टिक्की और गार्लिक रोस्टेड मखाना

10 मार्च 2026 को 21:56 IST पर अद्यतन किया गया मखाना क्रिस्पी रेसिपी: मखाने से कुछ ही समय में कुरकुरे मखाने लाल हो जाते हैं। इससे आप टिक्की से लेकर गार्लिक रोस्ट तैयार कर सकते हैं। आइए आपको इसे बनाने की रेसिपी बताते हैं। (टैग्सटूट्रांसलेट)मखाना रेसिपी(टी)कुरकुरा मखाना टिक्की रेसिपी(टी)लहसुन भुना हुआ मखाना रेसिपी(टी)स्वस्थ नाश्ता रेसिपी(टी)फॉक्स नट रेसिपी(टी)शाम के नाश्ते के विचार(टी)भारतीय स्वस्थ स्नैक्स(टी)मखाना के फायदे और रेसिपी
निवाड़ी में 5 कॉलोनाइजरों को नोटिस:बिना अनुमति प्लॉटिंग पर कार्रवाई, प्रशासन ने 17 मार्च को दस्तावेजों के साथ बुलाया

निवाड़ी जिले में अवैध कॉलोनियों को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। बिना अनुमति के धड़ल्ले से प्लॉट काटकर जमीन बेचने वाले पांच कॉलोनाइजरों पर कार्रवाई की गई। कलेक्टर कोर्ट ने इन सभी को नोटिस भेजकर 17 मार्च को पेश होने का फरमान सुनाया है। जांच में पता चला कि इन लोगों ने न तो कॉलोनाइजर का लाइसेंस लिया था और न ही टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TCP) से कोई मंजूरी ली थी। नियमों को ताक पर रखकर, बिना किसी सरकारी परमिशन के जमीन के छोटे-छोटे टुकड़े कर बेच दिए गए, जो कि सीधा-सीधा कानून का उल्लंघन है। इन लोगों को थमाया गया नोटिस प्रशासन ने जिन पांच मामलों में कार्रवाई की है, वे ये हैं- चंद्रपाल यादव (झांसी): ओरछा के फुटेरा गांव में बिना लाइसेंस प्लॉटिंग करने का आरोप। रेणु सिंह राठौर (जेर): पृथ्वीपुर में करीब 11 अलग-अलग खसरा नंबरों की जमीन पर अवैध तरीके से प्लॉट बेचने का मामला। बिजयकांत और उदयकांत सोनी (पृथ्वीपुर): करगुवा गांव की भारी-भरकम जमीन पर अवैध कॉलोनी काटने का आरोप। शैलेंद्र सिंह यादव (झांसी): ओरछा में करीब डेढ़ हेक्टेयर जमीन पर बिना मंजूरी के प्लॉटिंग। लक्ष्मीनारायण नामदेव (झांसी): ओरछा की जमीन पर बिना किसी परमिशन के टुकड़े कर बेचने का आरोप। 17 मार्च को पेशी, वरना होगी सख्त कार्रवाई एसडीएम की जांच में इन सभी को नियमों का दोषी पाया गया है। कलेक्टर कोर्ट ने साफ कह दिया है कि अगर ये लोग 17 मार्च 2026 को अपने कागजों के साथ हाजिर नहीं होते हैं, तो उनके खिलाफ एकतरफा सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन इन जमीनों को फिर से पुराने हाल में लाने (अवैध निर्माण ढहाने) की तैयारी भी कर सकता है।
अब मीठा खाने से नहीं बढ़ेगा शुगर लेवल, स्टीविया से बना मीठा, बिना डर खा सकेंगे मिठाई

होमफोटोलाइफ़फूड डायबिटीज मरीजों के लिए खुशखबरी, स्टीविया से बना मीठा, बिना डर खा सकेंगे मिठाई Last Updated:March 10, 2026, 21:31 IST Sweet Option For Sugar Patients: डायबिटीज के मरीजों के लिए एक अच्छी खबर है और जो लोग शुगर बढ़ने के डर से मीठा खाना छोड़ चुके हैं, उनके लिए भी एक बड़ी खुशखबरी है. दरअसल, अब आप जी भरकर मीठा खा सकते हैं. चाय भी पी सकते हैं और हलवा भी खा सकते हैं, क्योंकि हमारे देश में चीनी का विकल्प आ चुका है. यह काम तो चीनी की ही तरह करेगा, यानी स्वाद आपको पूरा मीठा देगा, लेकिन यह चीनी नहीं होगा और न ही आपकी सेहत को नुकसान पहुंचाएगा. ऐसा इसलिए क्योंकि इसे स्टीविया के पत्तों से बनाया गया है, जो सेहत के लिए फायदेमंद है. इसे बीकानेरवाला ब्रांड ने तैयार किया है. वहां मौजूद वैज्ञानिक, जो 20 साल से इसे तैयार करने पर काम कर रहे थे, वे दिल्ली आए हुए थे. उनका नाम बलजीत सिंह है. लोकल18 ने उनसे खास बातचीत की. बीकानेरवाला के वरिष्ठ वैज्ञानिक बलजीत सिंह ने बताया कि इसे बनाने का मकसद यही था कि चीनी लोगों की सेहत को काफी नुकसान पहुंचा रही है, जिस वजह से शुगर बढ़ने के डर से लोग मीठा खाना छोड़ते जा रहे हैं. डायबिटीज के मरीज तो मीठा खाने के लिए तरस जाते हैं. इसलिए यह विकल्प खोजा गया और हम लोग खुद ही स्टीविया की खेती करते हैं. उसके पत्तों से इसे बनाते हैं. यह चीनी से ज्यादा मीठा होता है, लेकिन नुकसानदायक नहीं होता. सिर्फ पांच प्रतिशत इसका इस्तेमाल करके मिठाई, हलवा, कॉफी, चाय, बेकरी का सामान या दूध में डालकर पी सकते हैं. इसे शुगर फ्री कहना गलत नहीं होगा. 20 साल की कड़ी मेहनत के बाद इस प्रोडक्ट को तैयार किया गया है. इससे हम लोग करीब 18 तरह की मिठाइयां बना रहे हैं. Add News18 as Preferred Source on Google स्टीविया एक प्राकृतिक, शून्य कैलोरी वाला मीठा पौधा है, जिसे हिंदी में ‘मीठी तुलसी’ या ‘मधु पत्ती’ भी कहते हैं. इसकी पत्तियां चीनी से 25–30 गुना अधिक मीठी होती हैं, जिनमें स्टीवियोल ग्लाइकोसाइड पाया जाता है. यह मधुमेह रोगियों के लिए चीनी का एक सुरक्षित विकल्प है और इसे घर में गमले में आसानी से उगाया जा सकता है. इसमें लगभग कैलोरी नहीं होती और यह ब्लड शुगर लेवल नहीं बढ़ाता है. यह डायबिटीज के मरीजों के लिए सुरक्षित है और वजन बढ़ने नहीं देता. दांतों के लिए भी यह बेहतर माना जाता है. First Published : March 10, 2026, 21:31 IST
India Eases FDI Rules for China & Neighbouring Countries: Press Note 3 Amended

Hindi News Business India Eases FDI Rules For China & Neighbouring Countries: Press Note 3 Amended नई दिल्ली12 मिनट पहले कॉपी लिंक सरकार ने स्ट्रैटेजिक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में निवेश के लिए 60 दिनों की समय सीमा तय की है। केंद्र सरकार ने चीन समेत भारत के साथ बॉर्डर शेयर करने वाले यानी पड़ोसी देशों से आने वाले फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) के नियमों में ढील दी है। PM मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार (10 मार्च) को हुई कैबिनेट मीटिंग में प्रेस नोट 3 यानी FDI पॉलिसी के नियमों में बदलाव को मंजूरी दी गई। नए नियमों के तहत अब उन निवेश प्रस्तावों को ऑटोमैटिक मंजूरी मिल जाएगी, जिनमें पड़ोसी देश के निवेशक की हिस्सेदारी 10% से कम हो और उसका कंपनी पर कोई कंट्रोल न हो। इसके साथ ही, स्ट्रैटेजिक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में निवेश के लिए 60 दिनों की समय सीमा तय कर दी गई है। दरअसल जब कोई विदेशी कंपनी या व्यक्ति भारत में किसी कंपनी, फैक्ट्री, बिजनेस या प्रोजेक्ट में सीधे पैसा लगाता है, तो उसे FDI कहते हैं। स्टार्टअप्स और डीप टेक कंपनियों को फायदा मिलेगा सरकार के इस फैसले का सबसे बड़ा असर भारतीय स्टार्टअप्स और डीप टेक सेक्टर पर पड़ेगा। सरकार का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य ग्लोबल फंड्स से निवेश हासिल करना और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देना है। अब तक प्रेस नोट 3 की वजह से कई ग्लोबल प्राइवेट इक्विटी (PE) और वेंचर कैपिटल (VC) फंड्स को निवेश करने में परेशानी हो रही थी, क्योंकि उनमें पड़ोसी देशों के निवेशकों का छोटा हिस्सा भी शामिल होता था। अब 10% की सीमा तय होने से फंड का फ्लो आसान हो जाएगा। ‘बेनिफिशियल ओनर’ की परिभाषा साफ हुई सरकार ने निवेश के नियमों में पारदर्शिता लाने के लिए ‘बेनिफिशियल ओनर’ की परिभाषा को अब प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) रूल्स, 2005 के समान कर दिया है। अगर किसी निवेश में लैंड बॉर्डर वाले देश के निवेशक की हिस्सेदारी 10% से कम है और वह कंपनी के फैसलों को प्रभावित नहीं करता है, तो उसे सरकारी मंजूरी लेने की जरूरत नहीं होगी। ऐसी स्थिति में भारतीय कंपनी को सिर्फ डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (DPIIT) यानी उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग को इसकी जानकारी देनी होगी। 60 दिन में निवेश पर फैसला, जॉइंट वेंचर बनाना आसान कैबिनेट ने मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए एक ‘फास्ट ट्रैक’ अप्रूवल सिस्टम को भी हरी झंडी दी है। अब स्पेशल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टरों में निवेश के प्रस्तावों पर सरकार को 60 दिनों के भीतर फैसला लेना होगा। इससे भारतीय कंपनियों को विदेशी कंपनियों के साथ मिलकर टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप करने और जॉइंट वेंचर बनाने में मदद मिलेगी। सरकार का मानना है कि इससे भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन का हिस्सा बनने में आसानी होगी। इलेक्ट्रॉनिक और सोलर सेक्टर को सबसे ज्यादा फायदा होगा सरकार ने साफ किया है कि इन बदलावों से विशेष रूप से तीन सेक्टरों को सबसे ज्यादा फायदा होगा… इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स: मोबाइल-लैपटॉप के पार्ट्स बनाने वाली कंपनियों को विदेशी निवेश और तकनीक मिल सकेगी। कैपिटल गुड्स: भारी मशीनरी और इंडस्ट्रियल इक्विपमेंट के प्रोडक्शन में तेजी आएगी। सोलर सेल्स: रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी। सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं, भारतीय कंट्रोल जरूरी नियमों में ढील के बावजूद सरकार ने सुरक्षा को बरकरार रखा है। संवेदनशील सेक्टर में फास्ट-ट्रैक अप्रूवल तभी मिलेगा, जब उस कंपनी की मेजोरिटी शेयर-होल्डिंग और कंट्रोल भारतीय नागरिकों या भारतीय कंपनियों के पास ही रहे। यह सुनिश्चित किया गया है कि किसी भी निवेश से देश की सुरक्षा को खतरा न हो और कंपनी का कमांड भारतीय हाथों में ही रहे। ———————– ये खबर भी पढ़ें… भारतीय एयरलाइंस ने इंटरनेशनल फ्लाइट्स का किराया 15% बढ़ाया: कच्चे तेल के रेट बढ़ने से जेट फ्यूल के दाम दोगुने, ईरान जंग का असर मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब सीधे आम आदमी की जेब पर भी पड़ते दिखाई दे रहा है। भारतीय एयरलांइस ने इंटरनेशनल फ्लाइट्स के किराए में करीब 15% की बढ़ोतरी की है। ब्लूमबर्ग ने अपनी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ती जंग और होर्मुज रूट प्रभावित होने के कारण कच्चे तेल की कीमतों और जेट फ्यूल के दाम में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। जिसका असर ग्लोबल एविएशन इंडस्ट्री पर भी दिखने लगा है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
India Eases FDI Rules for China & Neighbouring Countries: Press Note 3 Amended

Hindi News Business India Eases FDI Rules For China & Neighbouring Countries: Press Note 3 Amended नई दिल्ली11 मिनट पहले कॉपी लिंक केंद्र सरकार ने चीन सहित भारत के साथ जमीनी सीमा यानी बॉर्डर शेयर करने वाले देशों से आने वाले फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) के नियमों में ढील दी है। PM मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार (10 मार्च) को हुई कैबिनेट मीटिंग में प्रेस नोट 3 यानी FDI पॉलिसी के प्रावधानों में संशोधन यानी बदलाव को मंजूरी दी गई। नए नियमों के तहत अब उन निवेश प्रस्तावों को ‘ऑटोमैटिक रूट’ से मंजूरी मिल जाएगी, जिनमें पड़ोसी देश के निवेशक की हिस्सेदारी 10% से कम हो और उसका कंपनी पर कोई कंट्रोल न हो। इसके साथ ही, स्ट्रैटेजिक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में निवेश के लिए 60 दिनों की समय सीमा तय कर दी गई है। स्टार्टअप्स और डीप टेक कंपनियों को फायदा मिलेगा सरकार के इस फैसले का सबसे बड़ा असर भारतीय स्टार्टअप्स और डीप टेक सेक्टर पर पड़ेगा। सरकार का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य ग्लोबल फंड्स से निवेश हासिल करना और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देना है। अब तक प्रेस नोट 3 की वजह से कई ग्लोबल प्राइवेट इक्विटी (PE) और वेंचर कैपिटल (VC) फंड्स को निवेश करने में परेशानी हो रही थी, क्योंकि उनमें पड़ोसी देशों के निवेशकों का छोटा हिस्सा भी शामिल होता था। अब 10% की सीमा तय होने से फंड का फ्लो आसान हो जाएगा। FDI के नियमों में क्या-क्या बदला पुराने नियम नए नियम पड़ोसी देशों से हर निवेश के लिए सरकारी मंजूरी जरूरी थी। 10% से कम ‘बेनिफिशियल ओनरशिप’ पर निवेश को ऑटोमैटिक अनुमति। अप्रूवल मिलने में महीनों का समय लगता था, कोई डेडलाइन नहीं थी। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए 60 दिन की समय सीमा तय की गई है। ‘बेनिफिशियल ओनर’ की परिभाषा को लेकर अस्पष्टता थी। PMLA एक्ट के तहत 10% की लिमिट और स्पष्ट परिभाषा लागू की। ‘बेनिफिशियल ओनर’ की परिभाषा साफ हुई सरकार ने निवेश के नियमों में पारदर्शिता लाने के लिए ‘बेनिफिशियल ओनर’ की परिभाषा को अब प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) रूल्स, 2005 के समान कर दिया है। अगर किसी निवेश में लैंड बॉर्डर वाले देश के निवेशक की हिस्सेदारी 10% से कम है और वह कंपनी के फैसलों को प्रभावित नहीं करता है, तो उसे सरकारी मंजूरी लेने की जरूरत नहीं होगी। ऐसी स्थिति में भारतीय कंपनी को सिर्फ डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (DPIIT) यानी उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग को इसकी जानकारी देनी होगी। 60 दिन में निवेश पर फैसला, जॉइंट वेंचर बनाना आसान कैबिनेट ने मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए एक ‘फास्ट ट्रैक’ अप्रूवल सिस्टम को भी हरी झंडी दी है। अब स्पेशल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टरों में निवेश के प्रस्तावों पर सरकार को 60 दिनों के भीतर फैसला लेना होगा। इससे भारतीय कंपनियों को विदेशी कंपनियों के साथ मिलकर टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप करने और जॉइंट वेंचर बनाने में मदद मिलेगी। सरकार का मानना है कि इससे भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन का हिस्सा बनने में आसानी होगी। इलेक्ट्रॉनिक और सोलर सेक्टर को सबसे ज्यादा फायदा होगा सरकार ने साफ किया है कि इन बदलावों से विशेष रूप से तीन सेक्टरों को सबसे ज्यादा फायदा होगा… इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स: मोबाइल-लैपटॉप के पार्ट्स बनाने वाली कंपनियों को विदेशी निवेश और तकनीक मिल सकेगी। कैपिटल गुड्स: भारी मशीनरी और इंडस्ट्रियल इक्विपमेंट के प्रोडक्शन में तेजी आएगी। सोलर सेल्स: रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी। सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं, भारतीय कंट्रोल जरूरी नियमों में ढील के बावजूद सरकार ने सुरक्षा को बरकरार रखा है। संवेदनशील सेक्टर में फास्ट-ट्रैक अप्रूवल तभी मिलेगा, जब उस कंपनी की मेजोरिटी शेयरहोल्डिंग और कंट्रोल भारतीय नागरिकों या भारतीय कंपनियों के पास ही रहे। यह सुनिश्चित किया गया है कि किसी भी निवेश से देश की सुरक्षा को खतरा न हो और कंपनी का कमांड भारतीय हाथों में ही रहे। FDI पॉलिसी को 2020 में लागू किया गया था अप्रैल 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान केंद्र सरकार ने प्रेस नोट 3 यानी FDI पॉलिसी को लागू किया था। उस समय भारतीय कंपनियों की वैल्यूएशन काफी गिर गई थी। सरकार को डर था कि चीन जैसे पड़ोसी देश की कंपनियां इस मौके का फायदा उठाकर भारतीय कंपनियों का ‘अवसरवादी अधिग्रहण’ कर सकती हैं। इसी को रोकने के लिए नियम बनाया गया था कि पड़ोसी देशों से आने वाले हर छोटे-बड़े निवेश के लिए सरकार की मंजूरी अनिवार्य होगी। ये खबर भी पढ़ें… भारतीय एयरलाइंस ने इंटरनेशनल फ्लाइट्स का किराया 15% बढ़ाया: कच्चे तेल के रेट बढ़ने से जेट फ्यूल के दाम दोगुने, ईरान जंग का असर मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब सीधे आम आदमी की जेब पर भी पड़ते दिखाई दे रहा है। भारतीय एयरलांइस ने इंटरनेशनल फ्लाइट्स के किराए में करीब 15% की बढ़ोतरी की है। ब्लूमबर्ग ने अपनी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ती जंग और होर्मुज रूट प्रभावित होने के कारण कच्चे तेल की कीमतों और जेट फ्यूल के दाम में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। जिसका असर ग्लोबल एविएशन इंडस्ट्री पर भी दिखने लगा है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…









