सतना में सीमेंट प्लांट के लिए जमीन लीज का विरोध:किसानों ने ट्रैक्टर रैली निकालकर कलेक्ट्रेट घेरा, निर्णय वापस लेने की मांग

सतना जिले के रामपुर बाघेलान क्षेत्र में प्रस्तावित डालमिया सीमेंट कंपनी के लिए भूमि लीज पर लेने के विरोध में किसानों ने मंगलवार को जिला मुख्यालय में जोरदार प्रदर्शन किया। सैकड़ों किसानों ने ट्रैक्टर रैली निकालकर कलेक्ट्रेट कार्यालय का घेराव किया और प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। दरअसल, रामपुर बघेलान तहसील की करीब 3600 एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि को एक डालमिया सीमेंट कंपनी को 40 साल की लीज पर देने की प्रक्रिया चल रही है। इसी निर्णय के विरोध में क्षेत्र के किसान लामबंद हो गए हैं। किसानों का कहना है कि उनकी पुश्तैनी और उपजाऊ जमीन को उद्योग के लिए लीज पर देना उनके भविष्य के साथ अन्याय है। बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टर, चारपहिया वाहनों और बाइक के साथ रैली के रूप में शहर पहुंचे। किसानों ने नारेबाजी करते हुए भूमि लीज का विरोध जताया और प्रशासन से इस निर्णय को वापस लेने की मांग की। रैली कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंची, जहां किसानों ने प्रदर्शन कर अपना ज्ञापन अधिकारियों को सौंपा। आंदोलन करने की चेतावनी दी प्रदर्शन का नेतृत्व राष्ट्रीय किसान यूनियन के नेता शैलेन्द्र सिंह चौहान ने किया। उन्होंने कहा कि सरकार यदि जमीन उद्योग को देना ही चाहती है तो लीज की बजाय पूर्ण अधिग्रहण की प्रक्रिया अपनाए और किसानों को बाजार मूल्य से चार गुना मुआवजा दिया जाए। इसके साथ ही प्रभावित प्रत्येक परिवार के एक सदस्य को स्थायी नौकरी भी दी जाए। किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। किसानों का कहना है कि अपनी जमीन बचाने के लिए वे किसी भी स्तर तक संघर्ष करने को तैयार हैं।
MP में कमर्शियल गैस संकट, कई शहरों में बुकिंग बंद:ईरान-इजराइल युद्ध का असर, भोपाल-इंदौर समेत कई शहरों में होटल-रेस्टोरेंट बंद होने का खतरा

ईरान-इजराइल युद्ध के बीच एलपीजी सप्लाई को लेकर मध्यप्रदेश में सतर्कता बढ़ गई है। कई शहरों में कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई रोक दी गई है, जिससे होटल-रेस्टोरेंट और छोटे व्यवसायों पर असर पड़ने की आशंका है। राजधानी भोपाल में कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने ऑयल कंपनियों, गैस एजेंसियों और व्यापार संगठनों की बैठक बुलाई। वहीं भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स ने कहा कि कमर्शियल सिलेंडर नहीं मिलने से शहर के 2000 से ज्यादा होटल-रेस्टोरेंट संकट में आ सकते हैं। ऑयल कंपनियों ने सोमवार से कमर्शियल सिलेंडर की डिलीवरी रोक दी है। हालांकि सरकार का कहना है कि घरेलू गैस और पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति सामान्य है और घबराने की जरूरत नहीं है। पांच बड़े शहरों में घरेलू सिलेंडर की भी वेटिंग, विकल्प तलाश रहे भोपाल: 2000 होटल संकट में, कलेक्टर ने बुलाई बैठक भोपाल में कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई रुकने से होटल-रेस्टोरेंट और कैटरिंग कारोबार प्रभावित होने की आशंका है। भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष गोविंद गोयल और मंत्री अजय देवनानी ने प्रशासन को बताया कि शहर के 2000 से ज्यादा होटल-रेस्टोरेंट कमर्शियल गैस पर निर्भर हैं। शादियों के सीजन में एक बड़े होटल में एक बार में 10-15 सिलेंडर और छोटे होटल में 2-4 सिलेंडर तक इस्तेमाल होते हैं। अभी कुछ जगह स्टॉक बचा है, लेकिन दो दिन में खत्म होने की आशंका है। सराफा एसोसिएशन के मुताबिक गैस संकट का असर सोना-चांदी के करीब 3 हजार कारीगरों पर भी पड़ सकता है, जिन्हें रोज करीब 300 सिलेंडर की जरूरत होती है। कलेक्टर ने बैठक में जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इंदौर: कमर्शियल सप्लाई बंद, होटल में अभी संकट नहीं इंदौर में भी कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई बंद कर दी गई है। घरेलू गैस सिलेंडर की डिलीवरी 4-5 दिन में हो रही है। इंदौर होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष सुमित सूरी के अनुसार अभी शहर में होटल इंडस्ट्री को कोई बड़ा संकट नहीं आया है, लेकिन आने वाले दिनों में परेशानी हो सकती है। होटल संचालकों ने इस मुद्दे पर बैठक बुलाई है और मुख्यमंत्री से मुलाकात की तैयारी भी है। उज्जैन: रेस्टोरेंट बंद होने की कगार पर उज्जैन में भी दो दिन से कमर्शियल सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं। कलेक्टर रोशन सिंह के अनुसार फिलहाल कमर्शियल सिलेंडर सिर्फ अस्पताल और स्कूलों को दिए जा रहे हैं। घरेलू गैस सिलेंडर की बुकिंग अब 25 दिन बाद ही हो सकेगी और डिलीवरी में 5-7 दिन लग सकते हैं। एजेंसियों के अनुसार पैनिक में लोग बड़ी संख्या में बुकिंग करा रहे हैं। ग्वालियर: बुकिंग बंद, सिर्फ इमरजेंसी सेवाओं को छूट ग्वालियर में कमर्शियल गैस सिलेंडर की बुकिंग पूरी तरह बंद कर दी गई है। ग्वालियर-चंबल एलपीजी फेडरेशन के अनुसार फिलहाल सिर्फ हॉस्पिटल और इमरजेंसी सेवाओं को ही सिलेंडर दिए जा रहे हैं। घरेलू गैस सिलेंडर की डिलीवरी में 5 से 6 दिन का समय लग रहा है। होटल-रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि गैस नहीं मिलने पर कारोबार प्रभावित होगा। कई संचालक इंडक्शन चूल्हे का विकल्प भी तलाश रहे हैं। जबलपुर: होटल इंडस्ट्री पर असर शुरू जबलपुर में होटल और रेस्टोरेंट संचालकों ने गैस सप्लाई कम होने की बात कही है। होटल अरिहंत पैलेस के संचालक राजेश जैन का कहना है कि सरकार ने इंडस्ट्रियल और कमर्शियल सेक्टर में सप्लाई सीमित कर दी है, जिससे होटल व्यवसाय प्रभावित हो सकता है। होटल संचालक शुभम गुप्ता ने बताया कि एजेंसी से सिलेंडर लेने पहुंचे तो उन्हें सिलेंडर नहीं मिला। प्रदेश के बाकी शहरों में यह स्थिति सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडर के दाम ₹60 बढ़ाए सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडर 60 रुपए महंगा कर दिया है। दिल्ली में 14.2 किलोग्राम की LPG गैस अब 913 रुपए की मिल रही है। पहले यह 853 रुपए की थी। बढ़ी हुई कीमतें 7 मार्च से लागू हो गई हैं। वहीं 19 किग्रा वाले कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम 1 फरवरी को 115 रुपए बढ़ाए गए थे। यह अब 1883 रुपए का मिल रहा है। प्रदेश सरकार का दावा सप्लाई सामान्य, घबराने की जरूरत नहीं कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पेट्रोल-डीजल और गैस की उपलब्धता की निगरानी के निर्देश दिए। मंत्री चैतन्य काश्यप ने कहा कि प्रदेश में पेट्रोलियम उत्पादों का पर्याप्त स्टॉक है और घरेलू गैस की सप्लाई सामान्य है। सरकार ने सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों से बचने और अधिकृत जानकारी पर ही भरोसा करने की अपील की है। कालाबाजारी राेकने सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू किया इधर, केंद्र सरकार ने गैस समेत जरूरी चीजों की जमाखोरी रोक ने लिए देशभर में ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955’ लागू कर दिया है। अब गैस को 4 कैटेगरी में बांटा जाएगा…. संकट से निपटने सरकार ने 5 जरूरी कदम उठाए 1. हाई-लेवल कमेटी बनाई: संकट को देखते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय ने तीन तेल कंपनियों के कार्यकारी निदेशकों की एक हाई-लेवल कमेटी बनाई है, जो सप्लाई की समीक्षा करेगी। 2. एसेंशियल कमोडिटी एक्ट लागू: गैस की सप्लाई को कंट्रोल करने के लिए केंद्र सरकार ने देशभर में ‘एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955’ लागू कर दिया है। 3. 25 दिन बाद होगी LPG बुकिंग: घरेलू सिलेंडर की बुकिंग के नियमों में बदलाव किया है। उपभोक्ता एक सिलेंडर डिलीवर होने के बाद दूसरा सिलेंडर 25 दिन बाद ही बुक होगा। 4. OTP और बायोमेट्रिक अनिवार्य: गैस की जमाखोरी रोकने के लिए डिलीवरी एजेंट OTP या बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन का सख्ती से इस्तेमाल कर रहे हैं। 5. LPG उत्पादन बढ़ाने का आदेश: सरकार ने सभी ऑयल रिफाइनरीज को LPG उत्पादन बढ़ाने का आदेश दिया है। इस एक्स्ट्रा उत्पादन का इस्तेमाल घरेलू गैस के लिए होगा। सिलेंडर सप्लाई संकट की दो बड़ी वजह 1. ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का लगभग बंद होना भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का बंद होना है। ये करीब 167 किमी लंबा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। ईरान जंग के कारण यह रूट अब सुरक्षित नहीं रहा है। खतरे को देखते हुए कोई भी तेल टैंकर वहां से नहीं गुजर रहा। दुनिया के कुल पेट्रोलियम का 20% हिस्सा यहीं से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देश भी अपने निर्यात के लिए इसी पर निर्भर हैं। भारत अपनी जरूरत का 50% कच्चा तेल और 54% एलएनजी इसी रास्ते से
टॉक्सिक-धुरंधर के दौर में ट्रेंड फॉलो नहीं करते सुधांशु पांडे:बोले- मेरी हमेशा कोशिश रहती है कि मेरा हर काम नया ट्रेंड शुरू करे

एक्टर सुधांशु पांडे इन दिनों कलर्स के नए शो ‘दो दुनिया एक दिल’ को लेकर चर्चा में हैं। इस शो में वे बलदेव नाम के ऐसे किरदार में नजर आ रहे हैं, जिसकी जिंदगी डिजिटल और रियल दुनिया के टकराव के बीच उलझी हुई है। शो में ऑनलाइन स्कैम, डिजिटल धोखाधड़ी और टेक्नोलॉजी के बढ़ते प्रभाव जैसे मुद्दों को ड्रामा के जरिए दिखाया गया है। दैनिक भास्कर से बातचीत में सुधांशु पांडे ने टेक्नोलॉजी के फायदे-नुकसान, डिजिटल फ्रॉड के बढ़ते मामलों, बदलती स्टोरीटेलिंग और ‘टॉक्सिक’ और ‘धुरंधर’ जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर खुलकर बात की। पेश है सुधांशु पांडे से हुई बातचीत के कुछ खास अंश.. सवाल: ‘दो दुनिया एक दिल’ डिजिटल और रियल दुनिया की टकराहट दिखाता है। क्या आपको लगता है कि आज के दौर में टेक्नोलॉजी रिश्तों को मजबूत कर रही है या उन्हें और जटिल बना रही है? जवाब: मेरा हमेशा से मानना रहा है कि डिजिटल टेक्नोलॉजी जितनी हमारे लिए वरदान है, उतनी ही बड़ी अभिशाप भी बन सकती है। यह पूरी तरह हम पर निर्भर करता है कि हम इसका इस्तेमाल अपने फायदे के लिए करते हैं या नुकसान के लिए। इसलिए यह समझना बहुत जरूरी है कि टेक्नोलॉजी हमारे जीवन में किस काम की है और हमें उस पर कितना निर्भर होना चाहिए। अगर हम बिना सोचे-समझे पूरी तरह उस पर निर्भर हो जाएं, तो यह हमें नुकसान भी पहुंचा सकती है। सवाल: आजकल डिजिटल फ्रॉड और ऑनलाइन स्कैम के कई मामले सामने आ रहे हैं। आपके हिसाब से परिवारों को बच्चों को इसके बारे में कैसे जागरूक करना चाहिए? क्या कभी आपके आसपास ऐसा कुछ हुआ है? जवाब: मेरे आसपास मैंने कई ऐसे किस्से सुने हैं, जहां लोगों का बहुत बड़ा नुकसान हुआ है। कुछ लोगों के तो 60-70 लाख रुपये तक उड़ गए। मुझे लगता है कि लोग समझते तो हैं, लेकिन अभी भी जागरूकता उतनी नहीं है जितनी होनी चाहिए। स्कैम लगातार होते रहते हैं। फोन, मैसेज और लिंक के जरिए। आप दस बार सावधान रहेंगे, लेकिन अगर ग्यारहवीं बार भावनाओं में आकर किसी लिंक पर क्लिक कर दिया, तो नुकसान हो सकता है। इसलिए कॉन्शियस अवेयरनेस बहुत जरूरी है। हमारा शो भी इसी मुद्दे को एक ह्यूमन स्टोरी और ड्रामा के जरिए सामने लाता है, जिसमें दिखाया गया है कि लोग कैसे फंसते हैं और कैसे सतर्क रहकर इससे बच सकते हैं। सवाल: आप लंबे समय से इंडस्ट्री में काम कर रहे हैं। क्या आपको लगता है कि आज की कहानियां पहले से ज्यादा डार्क और रियलिस्टिक हो गई हैं? जवाब: नहीं, मेरा मानना है कि हर दौर में उसी समय के हिसाब से कहानियां कही जाती रही हैं। कुछ कहानियां अपने समय से आगे भी होती थीं। फर्क सिर्फ इतना है कि आज मीडियम्स बहुत बढ़ गए हैं। अलग-अलग प्लेटफॉर्म आ गए हैं। इसलिए कहानियों की डिमांड और विविधता भी बढ़ी है। आज फिल्ममेकर के पास ज्यादा स्कोप है कि वह अलग-अलग तरह की कहानियां कह सके। यही वजह है कि अब ऐसे विषय भी सामने आ रहे हैं, जिन्हें पहले कम एक्सप्लोर किया जाता था। इनमें रियलिस्टिक, फैंटेसी और कई तरह के अलग-अलग सब्जेक्ट शामिल हैं। सवाल: आजकल ‘टॉक्सिक’ और ‘धुरंधर’ जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स चर्चा में हैं, जिनमें ग्रे शेड्स वाले किरदार दिख रहे हैं। ‘दो दुनिया एक दिल’ में आपका बलदेव का किरदार इस ट्रेंड में कहां फिट होता है? जवाब: देखिए, मैंने पर्सनली कभी भी अपनी लाइफ में ट्रेंड्स को फॉलो नहीं किया। यह कहना कि आज के समय में जब धुरंधर जैसी फिल्में आ रही हैं, जहां नेगेटिव कैरेक्टर्स को काफी ग्लोरिफाई किया जा रहा है, तो ऐसे में बलदेव का किरदार कहां फिट बैठता है। अगर वह इस दौर में नेचुरली फिट हो रहा है, तो यह अच्छी बात है। क्योंकि यह भी एक ग्रे शेड्स वाला कैरेक्टर है। लेकिन मैं सिर्फ इसलिए कोई काम नहीं कर सकता कि वह ट्रेंड में चल रहा है। मैंने अपनी जिंदगी में कभी भी ऐसा कुछ नहीं किया जो सिर्फ ट्रेंड को देखकर किया गया हो। मेरी हमेशा कोशिश रहती है कि मैं जो भी काम करूं, उससे एक नया ट्रेंड शुरू हो।पहले भी मैंने जिन किरदारों को निभाया है, उनसे एक अलग ट्रेंड देखने को मिला था। इसलिए मेरी उम्मीद है कि इस शो में जो किरदार मैं निभा रहा हूं, उससे भी दर्शकों के बीच एक नया ट्रेंड शुरू हो सकता है।
टॉक्सिक-धुरंधर के दौर में ट्रेंड फॉलो नहीं करते सुधांशु पांडे:बोले- मेरी हमेशा कोशिश रहती है कि मेरा हर काम नया ट्रेंड शुरू करे

एक्टर सुधांशु पांडे इन दिनों कलर्स के नए शो ‘दो दुनिया एक दिल’ को लेकर चर्चा में हैं। इस शो में वे बलदेव नाम के ऐसे किरदार में नजर आ रहे हैं, जिसकी जिंदगी डिजिटल और रियल दुनिया के टकराव के बीच उलझी हुई है। शो में ऑनलाइन स्कैम, डिजिटल धोखाधड़ी और टेक्नोलॉजी के बढ़ते प्रभाव जैसे मुद्दों को ड्रामा के जरिए दिखाया गया है। दैनिक भास्कर से बातचीत में सुधांशु पांडे ने टेक्नोलॉजी के फायदे-नुकसान, डिजिटल फ्रॉड के बढ़ते मामलों, बदलती स्टोरीटेलिंग और ‘टॉक्सिक’ और ‘धुरंधर’ जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर खुलकर बात की। पेश है सुधांशु पांडे से हुई बातचीत के कुछ खास अंश.. सवाल: ‘दो दुनिया एक दिल’ डिजिटल और रियल दुनिया की टकराहट दिखाता है। क्या आपको लगता है कि आज के दौर में टेक्नोलॉजी रिश्तों को मजबूत कर रही है या उन्हें और जटिल बना रही है? जवाब: मेरा हमेशा से मानना रहा है कि डिजिटल टेक्नोलॉजी जितनी हमारे लिए वरदान है, उतनी ही बड़ी अभिशाप भी बन सकती है। यह पूरी तरह हम पर निर्भर करता है कि हम इसका इस्तेमाल अपने फायदे के लिए करते हैं या नुकसान के लिए। इसलिए यह समझना बहुत जरूरी है कि टेक्नोलॉजी हमारे जीवन में किस काम की है और हमें उस पर कितना निर्भर होना चाहिए। अगर हम बिना सोचे-समझे पूरी तरह उस पर निर्भर हो जाएं, तो यह हमें नुकसान भी पहुंचा सकती है। सवाल: आजकल डिजिटल फ्रॉड और ऑनलाइन स्कैम के कई मामले सामने आ रहे हैं। आपके हिसाब से परिवारों को बच्चों को इसके बारे में कैसे जागरूक करना चाहिए? क्या कभी आपके आसपास ऐसा कुछ हुआ है? जवाब: मेरे आसपास मैंने कई ऐसे किस्से सुने हैं, जहां लोगों का बहुत बड़ा नुकसान हुआ है। कुछ लोगों के तो 60-70 लाख रुपये तक उड़ गए। मुझे लगता है कि लोग समझते तो हैं, लेकिन अभी भी जागरूकता उतनी नहीं है जितनी होनी चाहिए। स्कैम लगातार होते रहते हैं। फोन, मैसेज और लिंक के जरिए। आप दस बार सावधान रहेंगे, लेकिन अगर ग्यारहवीं बार भावनाओं में आकर किसी लिंक पर क्लिक कर दिया, तो नुकसान हो सकता है। इसलिए कॉन्शियस अवेयरनेस बहुत जरूरी है। हमारा शो भी इसी मुद्दे को एक ह्यूमन स्टोरी और ड्रामा के जरिए सामने लाता है, जिसमें दिखाया गया है कि लोग कैसे फंसते हैं और कैसे सतर्क रहकर इससे बच सकते हैं। सवाल: आप लंबे समय से इंडस्ट्री में काम कर रहे हैं। क्या आपको लगता है कि आज की कहानियां पहले से ज्यादा डार्क और रियलिस्टिक हो गई हैं? जवाब: नहीं, मेरा मानना है कि हर दौर में उसी समय के हिसाब से कहानियां कही जाती रही हैं। कुछ कहानियां अपने समय से आगे भी होती थीं। फर्क सिर्फ इतना है कि आज मीडियम्स बहुत बढ़ गए हैं। अलग-अलग प्लेटफॉर्म आ गए हैं। इसलिए कहानियों की डिमांड और विविधता भी बढ़ी है। आज फिल्ममेकर के पास ज्यादा स्कोप है कि वह अलग-अलग तरह की कहानियां कह सके। यही वजह है कि अब ऐसे विषय भी सामने आ रहे हैं, जिन्हें पहले कम एक्सप्लोर किया जाता था। इनमें रियलिस्टिक, फैंटेसी और कई तरह के अलग-अलग सब्जेक्ट शामिल हैं। सवाल: आजकल ‘टॉक्सिक’ और ‘धुरंधर’ जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स चर्चा में हैं, जिनमें ग्रे शेड्स वाले किरदार दिख रहे हैं। ‘दो दुनिया एक दिल’ में आपका बलदेव का किरदार इस ट्रेंड में कहां फिट होता है? जवाब: देखिए, मैंने पर्सनली कभी भी अपनी लाइफ में ट्रेंड्स को फॉलो नहीं किया। यह कहना कि आज के समय में जब धुरंधर जैसी फिल्में आ रही हैं, जहां नेगेटिव कैरेक्टर्स को काफी ग्लोरिफाई किया जा रहा है, तो ऐसे में बलदेव का किरदार कहां फिट बैठता है। अगर वह इस दौर में नेचुरली फिट हो रहा है, तो यह अच्छी बात है। क्योंकि यह भी एक ग्रे शेड्स वाला कैरेक्टर है। लेकिन मैं सिर्फ इसलिए कोई काम नहीं कर सकता कि वह ट्रेंड में चल रहा है। मैंने अपनी जिंदगी में कभी भी ऐसा कुछ नहीं किया जो सिर्फ ट्रेंड को देखकर किया गया हो। मेरी हमेशा कोशिश रहती है कि मैं जो भी काम करूं, उससे एक नया ट्रेंड शुरू हो।पहले भी मैंने जिन किरदारों को निभाया है, उनसे एक अलग ट्रेंड देखने को मिला था। इसलिए मेरी उम्मीद है कि इस शो में जो किरदार मैं निभा रहा हूं, उससे भी दर्शकों के बीच एक नया ट्रेंड शुरू हो सकता है।
अनूपपुर में पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप:एसपी से की शिकायत, पीड़ित बोला- आपके सिपाही आरोपी को बचा रहे

अनूपपुर के ताराडांड निवासी चैतू सिंह ने पुलिस पर जानलेवा हमले के बाद आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई न करने का आरोप लगाया है। मंगलवार को उन्होंने पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें पुलिस पर सरकारी पद के दुरुपयोग और अपराध छिपाने का गंभीर आरोप लगाया गया है। पीड़ित ने भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना की जिम्मेदारी भी तय करने की गुहार लगाई है। चैतू सिंह, जो अनुसूचित जनजाति वर्ग से हैं और अपनी भूमि पर खेती करते हैं, 26 दिसंबर 2025 को दोपहर 3-4 बजे के बीच वे अपने खेत के पास बिजली के खंभे पर सुधार कार्य कर रहे थे। उसी दौरान मंजू गौतम ने उन्हें जातिसूचक व अपमानजनक गालियां दीं। इसके बाद लल्लू गौतम और उनके पुत्र प्रशांत गौतम भी वहां आए और तीनों ने मिलकर उन पर जानलेवा हमला किया तथा जान से मारने की धमकी दी। मारपीट के कारण चैतू सिंह बेहोश हो गए। पुलिस ने नहीं की मदद पीड़ित के अनुसार, लल्लू गौतम ने 112 पर कॉल किया। मौके पर पहुंचे 112 वाहन में प्रदीप गौतम (चालक) और एक अन्य आरक्षक मौजूद थे। चैतू सिंह ने आरोप लगाया कि इन पुलिसकर्मियों ने आरोपियों से मिलीभगत कर उन्हें उपचार दिलाने के बजाय मरा हुआ समझकर वहीं छोड़ दिया। प्रत्यक्षदर्शी ज़ेहर सिंह ने पूरी घटना देखी और बाद में चैतू सिंह को होश में लाकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। पसली टूटी जिला अस्पताल अनूपपुर में कराई गई जांच में चैतू सिंह की पसली टूटने और गंभीर अंदरूनी चोटें पाई गईं। पीड़ित ने बताया कि वे भय, पीड़ा और मानसिक तनाव में हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि पूर्व में आरोपियों के खिलाफ अजाक थाने में शिकायत दी गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिससे उनके हौसले बढ़े हैं। अप्रिय घटना की दी चेतावनी चैतू सिंह ने अपनी शिकायत में दर्ज कराया है कि यदि भविष्य में उनके या उनके परिवार के किसी सदस्य के साथ कोई भी अप्रिय या जानलेवा घटना घटित होती है, तो उसके लिए लल्लू गौतम, प्रशांत गौतम, मंजू गौतम, प्रदीप गौतम (112 वाहन चालक) और 112 वाहन में उपस्थित अज्ञात आरक्षक जिम्मेदार होंगे। उन्होंने सभी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धाराओं और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के अंतर्गत तत्काल एफआईआर दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई करने, गवाह ज़ेहर सिंह को प्रकरण में दर्ज करने तथा उन्हें व उनके परिवार को सुरक्षा प्रदान करने की मांग की है।
नर्मदापुरम में दिन का पारा 38 डिग्री के करीब:अचानक तापमान बढ़ने से गेहूं की फसल को नुकसान की आशंका; दोपहर में सड़कें सूनी

नर्मदापुरम जिले में 4 मार्च के बाद से गर्मी का असर तेज हो गया है। दिन का तापमान 37 से 38 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया जा रहा है, जिसके कारण दोपहर के समय सड़कों पर आवाजाही कम नजर आ रही है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले चार दिनों में तापमान में 2 से 3 डिग्री की बढ़ोतरी होने का अनुमान है। अचानक बढ़ रही इस गर्मी से गेहूं की फसल के 10 से 12 दिन पहले पकने और किसानों को नुकसान होने की आशंका है। मंगलवार को नर्मदापुरम में तेज धूप खिली रही। दिन के साथ-साथ रात के तापमान में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मंगलवार को रात का न्यूनतम तापमान 19.8 डिग्री सेल्सियस रहा। वहीं, प्रदेश के एकमात्र हिल स्टेशन पचमढ़ी में भी गर्मी का असर दिखाई दे रहा है। पचमढ़ी में दोपहर का तापमान 31 डिग्री के पार पहुंच गया है, जबकि रात का न्यूनतम तापमान 11 डिग्री सेल्सियस के ऊपर दर्ज किया जा रहा है। अगले 4 दिन में 2 से 3 डिग्री और बढ़ेगा तापमान मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, जिले के मौसम में अगले चार दिनों तक कोई बड़े बदलाव की संभावना नहीं है, लेकिन अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री तक की वृद्धि हो सकती है। ऐसे में मार्च के पहले पखवाड़े में ही पारा 39 से 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान है। गेहूं की फसल को नुकसान का अंदेशा मार्च महीने में अचानक बढ़ रहे तापमान का सीधा असर कृषि पर पड़ने की आशंका है। कृषि उपसंचालक डॉ. रविकांत सिंह ने बताया कि वर्तमान में गेहूं की बालियों में दाना भर चुका है और यह इसके पोषित होने का समय है। यदि गर्मी इसी तरह अधिक रही, तो पौधे की नमी खत्म हो जाएगी और वह सूखने लगेगा। इससे दाना पर्याप्त मात्रा में पोषित नहीं हो पाएगा। जिले में आमतौर पर मार्च के अंत तक गेहूं की कटाई शुरू होती है, लेकिन तापमान ऐसा ही बना रहा तो फसल के 10-12 दिन पहले ही पकने की संभावना है, जिससे उत्पादन प्रभावित हो सकता है। पिछले 5 दिनों का अधिकतम तापमान (डिग्री सेल्सियस में) तारीख नर्मदापुरम पचमढ़ी 5 मार्च 39.4 29.8 6 मार्च 38.1 30.2 7 मार्च 37.6 31.8 8 मार्च 38.1 31.4 9 मार्च 37.9 31.2
किसने कहा कि कर्नाटक का मुख्यमंत्री बदला जाएगा? कांग्रेस आलाकमान को दबाव में नहीं आना चाहिए: मोइली | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:मार्च 10, 2026, 16:09 IST वीरप्पा मोइली ने न्यूज18 से कहा, “हममें से कोई भी इसके बारे में नहीं जानता. इसलिए हमें यह मान लेना चाहिए कि ऐसा कोई आश्वासन नहीं था.” (बाएं से) वीरप्पा मोइली, डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया। (पीटीआई फ़ाइल) ऐसे समय में जब कर्नाटक में सत्ता को लेकर खींचतान जारी है, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने एक बयान देते हुए कहा कि अगर कांग्रेस आलाकमान ने उन्हें मौका दिया, तो वह दो और बजट पेश करेंगे, जिससे यह संकेत मिलता है कि वह मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बने रहेंगे और शेष कार्यकाल तक बने रहेंगे। उन्होंने कहा, “मैंने अपना 17वां बजट पेश किया है। कर्नाटक राज्य में, मेरे पास सबसे ज्यादा बजट पेश करने का रिकॉर्ड है।” इस टिप्पणी ने इस बात पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या मुख्यमंत्री पूरे कार्यकाल के लिए पद पर बने रहने की अपनी उम्मीद का संकेत दे रहे हैं। CNN-News18 के साथ एक विशेष साक्षात्कार में, वरिष्ठ कांग्रेसी और पूर्व केंद्रीय मंत्री वीरप्पा मोइली ने कहा कि नेतृत्व पर सार्वजनिक बयान, दावे और प्रतिदावे “कांग्रेस पार्टी की स्थिरता और शासन के लिए वांछनीय नहीं थे” और कांग्रेस आलाकमान को दबाव की रणनीति के आगे नहीं झुकना चाहिए। कड़ा रुख अपनाते हुए उन्होंने कहा, “हम सभी को आलाकमान पर भरोसा करना चाहिए जब वे मंत्रिमंडल में फेरबदल या मुख्यमंत्री पद में बदलाव के लिए अपना मन खोलेंगे। आज तक इनमें से कुछ भी नहीं हुआ है।” मोइली का बयान डीके शिवकुमार के समर्थकों के साथ-साथ खुद शिवकुमार द्वारा बार-बार दिए गए बयानों के मद्देनजर आया है, जिससे अटकलों को जगह मिल रही है कि मुख्यमंत्री पद में बदलाव आसन्न है। संपादित अंश: यह रस्साकशी, यह सत्ता संघर्ष जो हम देख रहे हैं कि मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि वह पांच साल तक बने रहेंगे और डीके शिवकुमार पर्याप्त संकेत दे रहे हैं कि सत्ता उन्हें सौंपी जानी चाहिए – क्या इससे कांग्रेस प्रभावित हो रही है? सड़कों पर आना और खुले तौर पर ये दावे और प्रतिदावे करना कांग्रेस पार्टी की स्थिरता और शासन के लिए वांछनीय नहीं है। इससे विपक्ष को अपना खेल खेलने का मौका मिल जाएगा. यह सभी स्तर के कांग्रेसियों को एक साथ आने का समय है और यदि कोई बदलाव करना है तो उसके लिए एक उचित प्रक्रिया है। केवल बातें करके, दावे-प्रतिदावे करके घूमना-फिरना और प्रशासन को भूल जाना वांछनीय नहीं है। मैं दृढ़ता से कहता हूं कि जिस तरह से दावे किए जा रहे हैं वह कांग्रेस के लिए या राज्य में कांग्रेस सरकार के शासन या स्थिरता के लिए वांछनीय नहीं है। मुझे लगता है कि इन मुद्दों को उठाने वाले सभी संबंधित पक्षों को ऐसी गतिविधियों को रोकना चाहिए और प्रशासन पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। यदि कोई परिवर्तन होता है – कभी-कभी परिवर्तन किए जाते हैं, कभी-कभी नहीं – अंततः, परिवर्तन बेहतर शासन और स्थिरता के लिए होते हैं। एक प्रक्रिया है. हम देख रहे हैं कि रात्रिभोज बैठकें हो रही हैं, जहां सतीश जारकीहोली ने बैठकें की हैं और डीके शिवकुमार के समर्थक भी बैठकें कर रहे हैं। क्या इस तरह की गुटबाजी का मकसद हाईकमान पर फैसला लेने का दबाव बनाना है? मुझे लगता है कि इन दबावों में आलाकमान को कार्रवाई नहीं करनी चाहिए. उन्हें इन दबावों, इस कलह, इन बैठकों को कम करने में बहुत सख्त होना चाहिए। कितने लोगों को मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है? केवल एक। अगर इतने सारे दावे होंगे तो इससे अस्थिरता ही पैदा होगी। उस बारे में बात करते हुए, हमने कई पहली बार विधायकों को आलाकमान को पत्र लिखते हुए देखा है, जिसमें कहा गया है कि उन्हें एक मौका दिया जाना चाहिए और युवा और अनुभवी नेताओं का एक अच्छा मिश्रण होना चाहिए। लेकिन श्री सिद्धारमैया ने कहा है कि अगर कैबिनेट विस्तार होता है तो पहली बार के विधायकों के लिए कोई जगह नहीं है? मुझे नहीं पता कि जगह है या नहीं. उसी समय, मैं पहली बार था जब मुझे देवराज उर्स के मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था। सवाल ये है कि मंत्रालय में फेरबदल के लिए आलाकमान अपने हिसाब से समय लेगा. जब मंत्रालय में फेरबदल होगा तभी यह तय होगा. मुझे नहीं लगता कि अब कोई संभावना खुली है. नये और पुराने दोनों विधायकों को प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार करना होगा. मुझे नहीं लगता कि आलाकमान ने ऐसी कोई प्रक्रिया शुरू की है. इन विधायकों, चाहे नए हों या पुराने, को प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार करना चाहिए और ऐसे मुद्दे नहीं खोलने चाहिए। मुझे नहीं लगता कि आलाकमान ने ऐसी कोई प्रक्रिया शुरू की है. ऐसे मुद्दे खोलकर वे भानुमती का पिटारा खोल रहे हैं, जो बिल्कुल भी वांछनीय नहीं है। उन्हें इंतजार करने दीजिए. मैं यह नहीं कह रहा कि वे मंत्री नहीं बन सकते। हम सभी मंत्री बने हैं, यहां तक कि पहली बार मंत्री बने हैं। लेकिन प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है. हम सभी को कैबिनेट फेरबदल या मुख्यमंत्री पद में बदलाव के लिए अपना मन खोलने के लिए आलाकमान पर भरोसा रखना चाहिए। आज तक इनमें से कुछ भी नहीं हुआ. क्या ऐसा होने वाला है? मुझें नहीं पता। अनुमान लगाना हमारा काम नहीं है. सभी अटकलें शरारतपूर्ण हैं और इससे अस्थिरता पैदा होगी और यह सुशासन के हित में नहीं है। मुख्यमंत्री पद के लिए कई योग्य उम्मीदवार हो सकते हैं, लेकिन इस समय पर विचार करने का समय हमेशा होता है। मुझे नहीं लगता कि इस समय ऐसे प्रस्तावों या दावों के लिए कार्रवाई की कोई मांग है। लोगों को अपनी बारी का इंतजार करना होगा. 1980 में, मुझे सीएम बनना चाहिए था – मेरे पास बहुमत था। मैंने कोई दावा नहीं किया. मैं पूरी निष्ठा और निष्ठा के साथ सरकार की सेवा करता रहा। मुझे भी एक ब्रेक मिला था जिस पर हाईकमान ने गंभीरता से विचार किया था। लेकिन मैंने अपनी बारी का इंतजार किया. जब मेरी बारी आई तो मैं सीएम बन गया. आलाकमान ने एक तरीका अपनाया है. मुझे नहीं लगता कि आलाकमान को मानक पद्धति छोड़ देनी चाहिए. आलाकमान को निर्णय लेने या इस बारे में बोलने में इतना समय क्यों लग रहा है? ये खींचतान काफी लंबी चल चुकी
'पापा आज ट्रॉफी हाथ में है, आप साथ नहीं हो':क्रिकेटर रिंकू सिंह पिता को याद कर भावुक, मंगेतर प्रिया बोलीं- चैंपियन बनकर निकले

टी-20 वर्ल्ड कप 2026 जीतने के बाद स्टार क्रिकेटर रिंकू सिंह अपने दिवंगत पिता खानचंद सिंह को याद कर भावुक हो उठे। उन्होंने इंस्टाग्राम पर लिखा- पापा आज ट्रॉफी हाथ में है। बस आप साथ नहीं हो। आपका सपना पूरा हो गया। रिंकू सिंह ने आगे लिखा- ‘आपसे बात किए बिना इतने दिन कभी नहीं निकले। मुझे नहीं पता आगे की जिंदगी आपके बिना कैसे चलेगी। पर मुझे हर कदम पर आपकी जरूरत पड़ेगी। आपने सिखाया था कि फर्ज सबसे आगे है। तो फील्ड पर बस आपका सपना पूरा करने की कोशिश कर रहा था। अब आपका सपना पूरा हो गया है, तो बस यही लगता है कि काश आप मेरे पास होते। हर छोटी-बड़ी खुशी में आपकी कमी खलेगी। बहुत मिस करूंगा आपको पापा। बहुत ज्यादा।’ स्टार क्रिकेटर के पिता खानचंद फोर्थ स्टेज लिवर कैंसर से जूझ रहे थे। 23 फरवरी को अचानक तबीयत ज्यादा बिगड़ गई थी। तब उन्हें हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया था। टी-20 वर्ल्ड कप के सफर के बीच रिंकू सिंह उनसे मिलने नोएडा अस्पताल पहुंचे थे। 27 फरवरी की सुबह 4.36 बजे खानचंद का निधन हो गया था। वह 60 साल के थे। रिंकू ने अंतिम संस्कार में हिस्सा लिया और फिर टीम इंडिया को जॉइन करने लौट गए थे। भारत ने रविवार, 8 मार्च को फाइनल में न्यूजीलैंड को 96 रन से हराकर खिताब जीता है। यह मैच अहमदाबाद में खेला गया था। रिंकू सिंह की इमोशनल पोस्ट देखिए… प्रिया सरोज ने लिखा- दुनिया को दिखाया असली ताकत क्या होती है रिंकू सिंह की मंगेतर और जौनपुर के मछलीशहर से सपा सांसद प्रिया सरोज ने टी-20 वर्ल्ड कप ट्रॉफी के साथ रिंकू की फोटो शेयर की है। उन्होंने लिखा, ‘कुछ दिन स्याही से लिखे जाते हैं, लेकिन 8 मार्च जैसे दिन इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो जाते हैं। यह वह दिन है जब टीम इंडिया ने आईसीसी मेंस टी-20 वर्ल्ड कप जीतकर हर भारतीय के दिल को गर्व से भर दिया, एक ऐसा पल जिसे यह राष्ट्र पीढ़ियों तक याद रखेगा और मनाता रहेगा। इस ऐतिहासिक जीत के बीच मैंने एक बेटे की ताकत भी देखी, जो अपने पिता, अपनी टीम और अपने देश के लिए डटकर खड़ा रहा। जीवन के सबसे कठिन पलों में भी मैदान पर उतरकर चैंपियन बनकर निकलना, यह एक अलग ही साहस की बात है। टीम इंडिया को और आपको रिंकू सिंह बधाई हो, जिन्होंने दुनिया को दिखाया कि असली ताकत क्या होती है।’ पिता के वो ‘आखिरी शब्द’ जो रिंकू की ताकत बने रिंकू के संरक्षक कहे जाने वाले अर्जुन सिंह फकीरा ने बताया, पिता खानचंद सिंह के आखिरी पलों के शब्दों ने रिंकू को टूटने से बचा लिया। जब रिंकू टूर्नामेंट के बीच में पिता की तबीयत बिगड़ने पर नोएडा अस्पताल में आए थे। तब पिता ने बस इतना कहा था कि बेटा, मेरी चिंता छोड़, तू जा और तिरंगा लहरा। मेरा सपना तभी पूरा होगा जब तू वर्ल्ड कप लेकर आएगा। पिता के इन्हीं शब्दों ने रिंकू को मैदान पर डटे रहने की हिम्मत दी। रिंकू ने पिता का अंतिम संस्कार किया और तुरंत टीम के साथ जुड़ गए। उन्होंने अपना फर्ज निभाया। आज जीत का कप जब हाथ में है तो गर्व करने वाले मार्गदर्शक पिता पास नहीं हैं। 12 मार्च को अलीगढ़ लौटेंगे रिंकू वर्ल्ड कप के ऐतिहासिक जश्न के बाद रिंकू सिंह अब अपने घर लौट रहे हैं। आगामी 12 मार्च को उनके पिता का त्रयोदशी संस्कार (तेरहवीं) है। पूरे अलीगढ़ को अपने इस जांबाज खिलाड़ी का इंतजार है, जिसने व्यक्तिगत दुख को पीछे रखकर देश के मान को ऊपर रखा। वर्ल्ड कप में रिंकू सिंह 5 मैचों में मौका मिला रिंकू सिंह को 2024 वर्ल्ड कप में भारतीय टीम के स्क्वॉड में जगह नहीं मिली थी और वे ट्रैवलिंग रिजर्व थे। लेकिन इस बार उन्हें मौका मिला और उन्होंने भारत के लिए अपना पहला वर्ल्ड कप खेला। टूर्नामेंट में उन्होंने 5 मैच खेले और 24 रन बनाए। पापा को मेहनत करते देख, परेशान हो जाते थे रिंकू रिंकू सिंह की सफलता के पीछे उनके पिता का कड़ा संघर्ष छिपा था। खानचंद अलीगढ़ में एक गैस एजेंसी पर हॉकर का काम करते थे। अपने 5 बेटों और बेटी की अच्छी परवरिश के लिए उन्होंने कई साल घर-घर सिलेंडर पहुंचाए। पहले वह साइकिल पर डिलीवरी करते थे, फिर लोगों के घरों में टेंपो से सिलेंडर पहुंचाने लगे। रिंकू बचपन में पिता को इस तरह मेहनत को देखकर परेशान हो जाते थे। उन्होंने वादा किया था कि पापा…एक दिन मैं आपका सहारा बनूंगा और आपको इस कड़ी मेहनत से निजात दिलाऊंगा। क्रिकेट में कामयाब होते ही रिंकू ने पापा से किया अपना वादा भी पूरा किया। उनकी मां वीना देवी घर की जिम्मेदारियां संभालती हैं। रिंकू 5 भाई और एक बहन में चौथे नंबर पर हैं। बड़े भाई सोनू, मुकुल और शीलू हैं। जबकि बहन नेहा और भाई जीतू, रिंकू से छोटे हैं। उनका परिवार एक समय बुलंदशहर के दानगढ़ में रहता था। जो बाद में अलीगढ़ में शिफ्ट हो गया। रिंकू के पिता आखिरी इंटरव्यू में बोले- बेटा तो स्टार है… टी-20 वर्ल्ड कप में 15 फरवरी को भारत और पाकिस्तान के मैच के दिन रिंकू सिंह के पिता ने खानचंद ने दैनिक भास्कर से बात की थी। उन्होंने कहा था कि मैच अच्छा रहा। मेरी तबीयत थोड़ी खराब थी। लेकिन जैसे ही चौका लगा, मैं बिल्कुल ठीक महसूस करने लगा। उन्होंने कहा था- मैंने ये पूरा मैच देखा। रिंकू स्टार है। उसे और बॉल मिलती तो और रन बनते। रिंकू ने 4 बॉल पर 11 रन बनाए थे। एक चौका और एक छक्का जड़ा था। बड़े मैच में छोटे स्कोर भी बहुत मददगार होते हैं, ये बहुत खुशी की बात है। परिवार के सदस्यों ने बताया था कि खानचंद जब अपने घर की टीवी स्क्रीन पर मैच देख रहे थे। रिंकू को खेलता देखकर वह भावुक हो गए। इसके बाद वह रिंकू के शुरुआती दिनों को याद कर परेशान हो गए थे। तब उन्होंने कहा था कि बेटे ने यहां तक पहुंचने के लिए बहुत मेहनत की। मगर अब सब ठीक है। रिंकू की प्रिया सरोज से 2025 में हुई थी सगाई, IPL के बाद शादी होनी है रिंकू
उड़द दाल वड़ी: उड़द दाल की वड़ी: घर पर तैयार करें उड़द दाल की वड़ी, साल भर नहीं होगी खराब; बनाना भी है आसान

10 मार्च 2026 को 16:04 IST पर अद्यतन किया गया घर पर कैसे बनाएं दाल वड़ी: अगर आप एक बार घर पर उड़द दाल की वड़ी बनाते हैं, तो बाजार की वड़ी की जरूरत ही नहीं है। घर की बनी वड़ी न केवल स्वाद में बेहतर होती है बल्कि सेहत के लिए भी बहुत अच्छी होती है।
हर 10 में एक लड़की को यह बीमारी ! हार्मोन्स से जुड़ी है यह समस्या, बिल्कुल न करें नजरअंदाज

All About PCOS: पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) एक हार्मोनल डिसऑर्डर है, जिससे करीब 10% लड़कियां जूझ रही हैं. इसकी वजह से यंग महिलाओं को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. इस डिसऑर्डर के कारण प्रेग्नेंसी कंसीव करने में समस्या का सामना करना पड़ता है. चिंता की बात यह है कि तमाम महिलाएं इस बीमारी के बारे में जानती ही नहीं हैं. फेमस गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. तान्या नरेंद्र ने एक वीडियो के जरिए PCOS के बारे में जरूरी जानकारी दी है, जो महिलाओं को इस समस्या के बारे में जागरूक करता है. सभी महिलाओं को इस बारे में जरूर जानना चाहिए.








