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Child Maths Anxiety Reasons: Dr Amita Shringi Parenting Advice

Child Maths Anxiety Reasons: Dr Amita Shringi Parenting Advice

Hindi News Lifestyle Child Maths Anxiety Reasons: Dr Amita Shringi Parenting Advice | Kids Psychology 1 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल कॉपी लिंक सवाल- मैं उत्तर प्रदेश से हूं। मेरा 11 साल का बेटा छठवीं क्लास में पढ़ता है। वह पढ़ाई में अच्छा है, लेकिन मैथ्स से बहुत डरता है। कहता है, मैथ समझ में नहीं आती है। हमेशा मैथ टेस्ट से पहले उसे पेट दर्द, घबराहट होने लगती है। एक मां के रूप में मैं उसे कैसे समझाऊं, कैसे सपोर्ट करूं कि उसका डर कम हो और आत्मविश्वास बढ़े? एक्सपर्ट: डॉ. अमिता श्रृंगी, साइकोलॉजिस्ट, फैमिली एंड चाइल्ड काउंसलर, जयपुर जवाब- सवाल पूछने के लिए शुक्रिया। अच्छी बात यह है कि आपका बेटा अन्य विषयों में अच्छा है। इसका मतलब है कि उसकी सीखने की क्षमता अच्छी है। समस्या केवल मैथ्स को लेकर बने डर की है। साइकोलॉजी में इसे ‘मैथ एंग्जाइटी’ कहते हैं। दरअसल इस उम्र में बच्चों पर ग्रेड्स, टेस्ट और परफॉर्मेंस का दबाव बढ़ने लगता है। ऐसे में अगर किसी कारण से बच्चे को कोई विषय कठिन लगता है तो ये धीरे-धीरे उसके कॉन्फिडेंस को भी प्रभावित करता है। यही वजह है कि आपका बेटा टेस्ट से पहले पेट दर्द व घबराहट जैसे लक्षण महसूस कर रहा है। मैथ एंग्जाइटी के कारणों को करें आइडेंटिफाई जब बच्चा पढ़ाई से बचने के लिए बहाने बनाता है तो उसके पीछे कोई-न-कोई कारण छिपा होता है। ऐसे में समस्या का हल जानने से पहले उस कारण को आइडेंटिफाई करना जरूरी है। जब तक यह क्लीयर नहीं होगा कि उसे किस बात से सबसे ज्यादा डर लग रहा है, तब तक सही समाधान मिलना मुश्किल है। बच्चे की बहानेबाजी या डर के पीछे कई कारण हो सकते हैं। ग्राफिक में देखिए- ग्राफिक में दिए कारणों से समझें कि आखिर आपके बेटे के डर और एंग्जाइटी के पीछे कौन-सी वजहें हो सकती हैं। आइए, अब इसके आधार पर बच्चे की मैथ एंग्जाइटी के समाधान पर बात करते हैं। बच्चों में मैथ के प्रति इंटरेस्ट कैसे जगाएं? याद रखिए, बच्चों को अगर कोई भी चीज सिखानी है तो वह मजेदार होनी चाहिए। बच्चों को जो चीजें मजेदार लगती हैं, उसे वे इंटरेस्ट के साथ पढ़ते व समझते हैं। वहीं दबाव और जबरदस्ती करने से बच्चे उससे दूर भागते हैं। इसके लिए कुछ बातों का खास ख्याल रखें। आइए अब इन पॉइंट्स के बारे में थोड़ा विस्तार से बात करते हैं। मैथ को मजेदार बनाएं मैथ्स को बोरिंग बनाने के बजाय एक ‘गेम’ की तरह पेश करें। जब बच्चा इसे ‘टेस्ट का विषय’ मानता है तो डर बढ़ता है। लेकिन जब वही चीज गेम, क्विज या चैलेंज बन जाती है तो बच्चे का नजरिया बदलता है। इसके लिए आप घर पर टाइमर लगाकर 5 सवाल हल करने का छोटा गेम बना सकती हैं या सही जवाब पर स्टार सिस्टम रख सकती हैं। इससे बच्चा मैथ को बोझ नहीं, मजेदार एक्टिविटी के रूप में देखेगा। मैथ को रियल लाइफ से जोड़ें बच्चा जब तक यह नहीं समझेगा कि वह मैथ्स क्यों पढ़ रहा है, तब तक उसे इसमें दिलचस्पी नहीं आएगी। उसे बताएं कि मैथ कैसे हमारे रोजमर्रा के जीवन से जुड़ा हुआ है। इसके लिए उसे साथ बाजार ले जाएं और छोटे-छोटे हिसाब कराएं। इससे बच्चा मैथ का महत्व समझेगा। बच्चा तब तेजी से सीखता है, जब उसे समझ आता है कि मैथ रोजमर्रा की जिंदगी में काम आती है। बाजार में खरीदारी करते समय उसे बिल जोड़ने दें, जेब खर्च में बचत का हिसाब खुद करने दें। खेल के मैदान में स्कोर, टाइम और डिस्टेंस की काउंटिंग कराएं। जब उसे महसूस होगा कि मैथ ‘जिंदगी का हिस्सा’ है, तो उसका जुड़ाव अपने-आप बढ़ेगा। प्रेशर बिल्कुल न डालें और छोटे गोल सेट करें एक साथ पूरे सवाल खत्म करने का दबाव न बनाएं। उसे कहें, “आज हम सिर्फ 2 सवाल करेंगे, लेकिन उसे अच्छे से समझेंगे।” जब बच्चा छोटा लक्ष्य हासिल करता है, तो उसके ब्रेन में डोपामिन (हैप्पी हॉर्मोन) रिलीज होता है, जिससे उसका आत्मविश्वास बढ़ता है। याद रखें, धीमी लेकिन निरंतर गति पहाड़ जैसे सिलेबस को भी छोटा कर देती है। रिजल्ट नहीं, एफर्ट पर फोकस करें अक्सर हम बच्चे की तारीफ तभी करते हैं, जब उसके 10 में से 10 नंबर आते हैं। ऐसा न करके उसकी हर छोटी–छोटी कोशिश की तारीफ करें। अगर उसने एक कठिन सवाल को हल करने में 15 मिनट मेहनत की, भले ही उत्तर गलत आया हो, तो कहें, “मुझे खुशी है कि तुमने हार नहीं मानी और इसे हल करने का पूरा प्रयास किया।” इससे उसका ‘फेल होने का डर’ खत्म होगा। गलतियों को सीखने का हिस्सा बताएं जब वह गलती करे, तो उसे डांटने के बजाय कहें, ‘’कोई बात नहीं, हम गलतियों से ही सीखते हैं।’’ जब हम गलतियों को ‘नॉर्मलाइज’ कर देते हैं, तो बच्चा क्लास में सवाल पूछने से नहीं डरता है। विजुअल मेथड का इस्तेमाल करें आजकल यूट्यूब पर कई ऐसे चैनल्स हैं, जो एनिमेशन के जरिए मैथ समझाते-सिखाते हैं। साथ में बैठकर इसे बच्चे को दिखाएं। जो चीज दिखती है, वह जल्दी समझ में आती है। टीचर से मिलकर बात करें चूंकि बच्चा क्लास में बैठने से डर रहा है, इसलिए स्कूल का माहौल भी ठीक होना जरूरी है। इसके लिए टीचर से मिलें और उन्हें बताएं कि बच्चा ‘मैथ एंग्जाइटी’ से जूझ रहा है। उनसे कहें कि वे क्लास में उसे प्रोत्साहित करें और अचानक सबके सामने सवाल पूछकर उसे असहज न करें। टीचर बच्चे का डर आधा कर सकता है। जरूरत पड़ने पर ट्यूटर रखें कई बार स्कूल टीचर से बच्चे डरते हैं। इसके लिए एक शांत और इंटेलिजेंट ट्यूटर की मदद लें। ट्यूटर ऐसा होना चाहिए, जो सिलेबस पूरा करवाने के बजाय बच्चे के ‘बेसिक्स’ और ‘कॉन्फिडेंस’ पर काम करे। कभी-कभी बच्चे अपनों के बजाय किसी तीसरे व्यक्ति से ज्यादा शांति से सीखते हैं। मैथ्स को ‘इंटेलिजेंस’ का पैमाना न बनाएं अगर आपका बेटा बाकी विषयों में अच्छा है, तो इसका मतलब है कि वह होनहार है। हर बच्चे का दिमाग अलग होता है। कोई साइंस में अच्छा होता है तो कोई आर्ट में। जरूरी नहीं कि हर बच्चा ‘मैथ्स जीनियस’ ही बने। उसे यह भरोसा दिलाएं कि गणित में औसत रहना कोई अपराध नहीं है। जब

ट्रम्प के पास जंग खत्म करने का कोई प्लान नहीं:ईरान की ताकत का गलत अंदाजा लगाया, तेल सप्लाई ठप होगी सोचा नहीं था

ट्रम्प के पास जंग खत्म करने का कोई प्लान नहीं:ईरान की ताकत का गलत अंदाजा लगाया, तेल सप्लाई ठप होगी सोचा नहीं था

18 फरवरी को जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प यह तय कर रहे थे कि ईरान पर हमला किया जाए या नहीं, तब ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने एक इंटरव्यू में कहा था कि उन्हें यह चिंता नहीं थी कि अगर युद्ध हुआ तो मिडिल ईस्ट से तेल की सप्लाई पर असर पड़ेगा या तेल के बाजार में बड़ी गड़बड़ी होगी। राइट ने कहा था कि पिछले साल जून में जब इजराइल और अमेरिका ने ईरान पर हमले किए थे, तब भी तेल बाजार पर ज्यादा असर नहीं पड़ा था। उनके मुताबिक उस समय तेल की कीमत थोड़ी बढ़ी थी, लेकिन जल्द ही फिर नीचे आ गई थी। ट्रम्प के दूसरे सलाहकार भी निजी तौर पर इसी तरह की राय रखते थे। उनका मानना था कि चेतावनियां बढ़ा-चढ़ाकर दी जा रही हैं और ईरान शायद ही इस बार तेल ले जाने वाले समुद्री रास्तों को बंद करेगा, जिनसे दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल सप्लाई गुजरती है। लेकिन हाल के दिनों में यह आकलन गलत साबित होता दिखाई दिया। ईरान ने धमकी दी कि वह होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले तेल के टैंकरों पर हमला कर सकता है। यह वही अहम समुद्री रास्ता है जिससे होकर फारस की खाड़ी से निकलने वाले सभी जहाज गुजरते हैं। हार्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही रूकी ईरान की इन धमकियों के बाद खाड़ी क्षेत्र में व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई है। इस वजह से तेल की कीमतें एक समय 110 डॉलर प्रति बैरल को छू गई थीं। ट्रम्प प्रशासन अब आर्थिक संकट को काबू में करने के तरीके खोजने में जुट गया है। इस संकट के कारण अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें भी बढ़ गई हैं। यह घटना इस बात को भी दिखाती है कि ट्रम्प और उनके सलाहकारों ने यह गलत अंदाजा लगाया कि ईरान इस युद्ध पर कैसे रिएक्ट करेगा। ईरान इस संघर्ष को अपने अस्तित्व से जुड़ा खतरा मान रही है। ईरान का जवाब ज्यादा आक्रामक पिछले साल जून में हुई 12 दिन की जंग की तुलना में इस बार ईरान ने कहीं ज्यादा आक्रामक प्रतिक्रिया दी है। उसने अमेरिका के सैन्य ठिकानों, मिडिल ईस्ट के कई अरब देशों के शहरों और इजराइल के आबादी वाले इलाकों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। इन हमलों के कारण अमेरिकी अधिकारियों को कई प्लान तुरंत बदलने पड़े। कुछ जगहों पर दूतावास खाली कराने पड़े और पेट्रोल की बढ़ती कीमतों को कंट्रोल करने के लिए नई पॉलिसी पर काम करना पड़ा। ट्रम्प के पास जंग खत्म करने का कोई प्लान नहीं इसके बाद मंगलवार को ट्रम्प प्रशासन के अधिकारियों ने सांसदों को बंद कमरे में जानकारी दी। इसके बाद कनेक्टिकट के डेमोक्रेटिक सीनेटर क्रिस्टोफर मर्फी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि प्रशासन के पास होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा सुरक्षित तरीके से खोलने का कोई प्लान नहीं है। प्रशासन के अंदर भी कुछ अधिकारी इस बात को लेकर निराश हैं कि युद्ध खत्म करने की कोई प्लान नजर नहीं आ रही है। हालांकि वे यह बात सीधे राष्ट्रपति ट्रम्प से कहने से बच रहे हैं, क्योंकि ट्रम्प बार-बार कह रहे हैं कि सैन्य अभियान पूरी तरह सफल रहा है। ईरान को लेकर ट्रम्प और रक्षा मंत्री की सोच अलग ट्रम्प कई बार बहुत बड़े टारगेट की बात करते हैं। जैसे कि वे चाहते हैं कि ईरान में ऐसा नेता आए जो अमेरिका की बात माने। लेकिन विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ऐसी बात नहीं करते। पीट हेगसेथ ने मंगलवार को कहा भी था कि अमेरिका, इराक में हाथ जला चुका है। वे ऐसा ईरान में नहीं करेगा। उनका कहना है कि ईरान की मिसाइल ताकत और सैन्य क्षमता को कमजोर करना ही असल मकसद है। अगर यह हो जाता है तो युद्ध खत्म करने का रास्ता निकल सकता है। हेगसेथ ने माना कि ईरान ने अपने पड़ोसी देशों पर जिस तरह से जोरदार जवाबी हमले किए, उसकी तीव्रता का अंदाजा पेंटागन को पूरी तरह नहीं था। हालांकि उन्होंने कहा कि ईरान की ये कार्रवाइयां आखिरकार उसी के खिलाफ जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि यह कहना मुश्किल है कि ईरान से बिल्कुल ऐसे ही जवाब की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा हो सकता है, इसकी संभावना थी। उनके मुताबिक ईरान के ये हमले दिखाते हैं कि वहां की सरकार दबाव में है। तेल की सप्लाई पर पड़े असर से ट्रम्प नाराज इस बीच ट्रम्प ने यह भी कहा कि तेल की सप्लाई पर युद्ध के असर से वह नाराज हैं। उन्होंने फॉक्स न्यूज से कहा कि तेल टैंकरों के क्रू मेंबर्स को ‘थोड़ी हिम्मत दिखानी चाहिए’ और होर्मुज स्ट्रेट से गुजरते रहना चाहिए। कुछ सैन्य सलाहकारों ने युद्ध से पहले चेतावनी दी थी कि ईरान बहुत आक्रामक जवाब दे सकता है और अमेरिका-इजराइल के हमले को अपने अस्तित्व के लिए खतरा मान सकता है। लेकिन कुछ अन्य सलाहकारों को भरोसा था कि अगर ईरान के शीर्ष नेताओं को मार दिया गया तो उनकी जगह आने वाले नेता ज्यादा व्यावहारिक होंगे और युद्ध खत्म करने की कोशिश करेंगे। जब ट्रम्प को बताया गया कि युद्ध के कारण तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, तो उन्होंने इस संभावना को स्वीकार तो किया, लेकिन इसे अस्थायी समस्या बताते हुए ज्यादा महत्व नहीं दिया। उन्होंने ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट और वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट को संभावित कीमत बढ़ोतरी से निपटने के विकल्प तैयार करने को कहा। हालांकि राष्ट्रपति ने इन विकल्पों के बारे में सार्वजनिक रूप से तब तक कुछ नहीं कहा, जब तक युद्ध शुरू हुए 48 घंटे से ज्यादा समय नहीं बीत गया। इन विकल्पों में अमेरिकी सरकार द्वारा राजनीतिक जोखिम बीमा देना और अमेरिकी नौसेना द्वारा जहाजों को सुरक्षा देना जैसे कदम शामिल थे। अभी तक नौसेना की ऐसी एस्कॉर्ट व्यवस्था शुरू नहीं हुई है। समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी में ईरान अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने 10 मार्च को सोशल मीडिया पर लिखा कि अमेरिकी नौसेना ने एक तेल टैंकर को सुरक्षित तरीके से होर्मुज स्ट्रेट पार कराया है। उनके इस पोस्ट के बाद तेल बाजार में हलचल मच गई और निवेशकों को लगा कि हालात सुधर रहे हैं। लेकिन बाद में जब प्रशासन के अन्य अधिकारियों ने कहा कि ऐसा कोई एस्कॉर्ट ऑपरेशन हुआ ही

ट्रम्प के पास जंग खत्म करने का कोई प्लान नहीं:ईरान की ताकत का गलत अंदाजा लगाया, तेल सप्लाई ठप होगी सोचा नहीं था

ट्रम्प के पास जंग खत्म करने का कोई प्लान नहीं:ईरान की ताकत का गलत अंदाजा लगाया, तेल सप्लाई ठप होगी सोचा नहीं था

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प 18 फरवरी को जब यह तय कर रहे थे कि ईरान पर हमला किया जाए या नहीं, तब ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने एक इंटरव्यू में कहा था कि उन्हें यह चिंता नहीं थी कि अगर युद्ध हुआ तो मिडिल ईस्ट से तेल की सप्लाई पर असर पड़ेगा या तेल के बाजार में बड़ी गड़बड़ी होगी। राइट ने कहा था कि पिछले साल जून में जब इजराइल और अमेरिका ने ईरान पर हमले किए थे, तब भी तेल बाजार पर ज्यादा असर नहीं पड़ा था। उनके मुताबिक उस समय तेल की कीमत थोड़ी बढ़ी थी, लेकिन जल्द ही नीचे आ गई थी। ट्रम्प के दूसरे सलाहकार भी निजीतौर पर इसी तरह की राय रखते थे। उनका मानना था कि चेतावनियां बढ़ा-चढ़ाकर दी जा रही हैं और ईरान शायद ही इस बार तेल ले जाने वाले समुद्री रास्तों को बंद करेगा, जिनसे दुनिया की लगभग 20% तेल सप्लाई गुजरती है। लेकिन हाल के दिनों में यह आकलन गलत साबित होता दिख रहा है। ईरान ने धमकी दी कि वह होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले तेल के टैंकरों पर हमला कर सकता है। यह वही अहम समुद्री रास्ता है जिससे होकर फारस की खाड़ी से निकलने वाले सभी जहाज गुजरते हैं। होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही रूकी ईरान की इन धमकियों के बाद खाड़ी रीजन में व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई है। इस वजह से तेल की कीमतें एक समय 110 डॉलर प्रति बैरल को छू गई थीं। ट्रम्प प्रशासन अब आर्थिक संकट को काबू में करने के तरीके खोजने में जुट गया है। इस संकट के कारण अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें भी बढ़ गई हैं। इस घटना यह भी पता चलता है कि ट्रम्प और उनके सलाहकारों ने जंग पर ईरान के रुख का गलत अंदाजा लगाया। ईरान इस संघर्ष को अपने अस्तित्व से जुड़ा खतरा मान रहा है। ईरान का जवाब ज्यादा आक्रामक पिछले साल जून में हुई 12 दिन की जंग की तुलना में इस बार ईरान ने कहीं ज्यादा आक्रामक प्रतिक्रिया दी है। उसने अमेरिका के सैन्य ठिकानों, मिडिल ईस्ट के कई अरब देशों के शहरों और इजराइल के आबादी वाले इलाकों पर मिसाइल और ड्रोन अटेक किए हैं। इन हमलों के कारण अमेरिकी अधिकारियों को कई प्लान तुरंत बदलने पड़े। कुछ जगहों पर दूतावास खाली कराने पड़े और पेट्रोल की बढ़ती कीमतों को कंट्रोल करने के लिए नई पॉलिसी पर काम करना पड़ा। ट्रम्प के पास जंग खत्म करने का कोई प्लान नहीं इसके बाद मंगलवार को ट्रम्प प्रशासन के अधिकारियों ने सांसदों को बंद कमरे में जानकारी दी। इसके बाद अमेरिकी प्रांत कनेक्टिकट के डेमोक्रेटिक सीनेटर क्रिस्टोफर मर्फी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि प्रशासन के पास होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा सुरक्षित तरीके से खोलने का कोई प्लान नहीं है। प्रशासन के अंदर भी कुछ अधिकारी इस बात को लेकर निराश हैं कि युद्ध खत्म करने का कोई प्लान नजर नहीं आ रहा है। हालांकि वे यह बात सीधे राष्ट्रपति ट्रम्प से कहने से बच रहे हैं, क्योंकि ट्रम्प बार-बार कह रहे हैं कि सैन्य अभियान पूरी तरह सफल रहा है। ईरान को लेकर ट्रम्प और रक्षा मंत्री की सोच अलग ट्रम्प कई बार बहुत बड़े टारगेट की बात करते हैं। जैसे कि वे चाहते हैं कि ईरान में ऐसा नेता आए जो अमेरिका की बात माने। लेकिन विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ऐसी बात नहीं करते। पीट हेगसेथ ने मंगलवार को कहा भी था कि अमेरिका, इराक में हाथ जला चुका है। वे ऐसा ईरान में नहीं करेगा। उनका कहना है कि ईरान की मिसाइल ताकत और सैन्य क्षमता को कमजोर करना ही असल मकसद है। अगर यह हो जाता है तो युद्ध खत्म करने का रास्ता निकल सकता है। हेगसेथ ने माना कि ईरान ने अपने पड़ोसी देशों पर जिस तरह से जोरदार जवाबी हमले किए, उसकी तीव्रता का अंदाजा पेंटागन को पूरी तरह नहीं था। हालांकि उन्होंने कहा कि ईरान की ये कार्रवाइयां आखिरकार उसी के खिलाफ जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि यह साफ-साफ कहना मुश्किल है कि ईरान से बिल्कुल ऐसा ही जवाब आएगा, लेकिन इस तरह के हमले होने की संभावना पहले से थी। उनके मुताबिक ईरान के इन हमलों से लगता है कि वहां की सरकार इस समय काफी दबाव में है। तेल की सप्लाई पर पड़े असर से ट्रम्प नाराज इस बीच ट्रम्प ने यह भी कहा कि तेल की सप्लाई पर युद्ध के असर से वह नाराज हैं। उन्होंने फॉक्स न्यूज से कहा कि तेल टैंकरों के क्रू मेंबर्स को ‘थोड़ी हिम्मत दिखानी चाहिए’ और होर्मुज स्ट्रेट से गुजरते रहना चाहिए। कुछ सैन्य सलाहकारों ने युद्ध से पहले चेतावनी दी थी कि ईरान बहुत आक्रामक जवाब दे सकता है और अमेरिका-इजराइल के हमले को अपने अस्तित्व के लिए खतरा मान सकता है। लेकिन कुछ अन्य सलाहकारों को भरोसा था कि अगर ईरान की टॉप लीडरशिप को मार दिया गया तो उनकी जगह आने वाले नेता ज्यादा व्यावहारिक होंगे और युद्ध खत्म करने की कोशिश करेंगे। जब ट्रम्प को बताया गया कि युद्ध की वजह से तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, तो उन्होंने माना कि ऐसा हो सकता है, लेकिन इसे थोड़े समय की समस्या बताते हुए ज्यादा महत्व नहीं दिया। उन्होंने ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट और वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट से कहा कि अगर तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो उससे निपटने के लिए जरूरी विकल्प तैयार रखें। इन विकल्पों में सरकार की तरफ से कंपनियों को राजनीतिक जोखिम का बीमा देना और अमेरिकी नेवी के जरिए जहाजों को सुरक्षा देना जैसे कदम शामिल हैं, लेकिन अभी तक नौसेना की ऐसी एस्कॉर्ट व्यवस्था शुरू नहीं हुई है। समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी में ईरान अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने 10 मार्च को सोशल मीडिया पर लिखा कि अमेरिकी नौसेना ने एक तेल टैंकर को सुरक्षित तरीके से होर्मुज स्ट्रेट पार कराया है। उनके इस पोस्ट के बाद तेल बाजार में हलचल मच गई और निवेशकों को लगा कि हालात सुधर रहे हैं। लेकिन बाद में जब प्रशासन के अन्य अधिकारियों ने कहा कि ऐसा कोई एस्कॉर्ट ऑपरेशन हुआ ही नहीं है, तो राइट को वह पोस्ट हटानी पड़ी और बाजार फिर

LPG Crisis India | Russia Oil Deal, Silver Price Drop

LPG Crisis India | Russia Oil Deal, Silver Price Drop

नई दिल्ली1 घंटे पहले कॉपी लिंक कल की बड़ी खबर कच्चे तेल से जुड़ी रही। ईरान-इजराइल में जारी जंग के बीच स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज रूट बंद हो गया है। ऐसे में कच्चे तेल की सप्लाई बंद होने के बाद भारत करीब 3 करोड़ बैरल कच्चा तेल रूस से खरीदेगा। वहीं जंग की वजह से देशभर में LPG की किल्लत हो रही है। गैस सिलेंडर लेने के लिए एजेंसियों पर लंबी लाइनें लगी हैं। कल की बड़ी खबर से पहले आज की ये सुर्खियां… शेयर बाजार में आज गिरावट देखने को मिल सकती है। फरवरी महीने के रिटेल महंगाई दर के आंकड़े आएंगे। पेट्रोल-डीजल के दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ है। अब कल की बड़ी खबरें पढ़ें… 1. रूस से 3 करोड़ बैरल कच्चा तेल खरीदेगा भारत: रिलायंस-IOC ने बुकिंग की, ईरान जंग के बीच सप्लाई बंद होने के बाद फैसला ईरान-इजराइल में जारी जंग के बीच स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज रूट बंद हो गया है। ऐसे में कच्चे तेल की सप्लाई बंद होने के बाद भारत करीब 3 करोड़ बैरल कच्चा तेल रूस से खरीदेगा। यह दावा ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में किया गया है। रिपोर्ट में बताया कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियों ने रूस से तेल के एग्रीमेंट किए हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 2. देशभर में LPG की किल्लत, एजेंसी के बाहर लंबी लाइनें: UP-बिहार में पुलिस सुरक्षा में सिलेंडर बंट रहे, अयोध्या में राम रसोई बंद अमेरिका-इजराइल की ईरान से जंग की वजह से देशभर में LPG की किल्लत हो रही है। गैस सिलेंडर लेने के लिए एजेंसियों पर लंबी लाइनें लगी हैं। दिल्ली, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और राजस्थान समेत कई राज्यों ने कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई पर रोक से होटलों और रेस्टोरेंट्स में खाना नहीं बन पा रहा है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 3. चांदी आज करीब ₹5,000 गिरकर ₹2.66 लाख/किलो पर आई: सोना ₹42 बढ़कर ₹1.60 लाख पर पहुंचा, इस साल कीमत में ₹27 हजार का इजाफा सोने में 11 मार्च को मामूली तेजी और चांदी में गिरावट रही। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 42 रुपए बढ़कर ₹1.60 लाख पहुंच गया। इससे पहले मंगलवार को इसकी कीमत 1.60 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम थी। वहीं, एक किलो चांदी 4,934 रुपए घटकर ₹2.66 लाख पर आ गई है। इससे पहले मंगलवार को इसकी कीमत 2.71 लाख रुपए प्रति किलो थी। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 4. लैपटॉप-डेस्कटॉप इस साल 35% तक महंगे होंगे: मार्च में 10% बढ़ सकती है कीमतें, 12% बढ़ोतरी पहले ही हो चुकी; मेमोरी-GPU के दाम बढ़ने का असर देश में अगले कुछ महीनों में लैपटॉप और डेस्कटॉप खरीदना महंगा पड़ सकता है। प्रोसेसर और ग्राफिक्स कार्ड (GPU) जैसे प्रमुख कंपोनेंट्स के दाम बढ़ने से इस साल लैपटॉप-डेक्सटॉप की कीमतों में 35% तक के उछाल की संभावना है। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि कीमतों में इस बढ़ोतरी की वजह से इस साल कंप्यूटर बाजार की ग्रोथ में 8% तक की कमी आ सकती है। मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट में इस बात की जानकारी दी गई है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 5. अमेरिका में 50 साल बाद पहली नई रिफाइनरी बनेगी: रिलायंस के साथ पार्टनरशिप, ट्रम्प बोले- ये अमेरिकी इतिहास की सबसे बड़ी डील रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अमेरिका में ऑयल रिफाइनरी बनाने के लिए डील की है। अमेरिका में पिछले 50 सालों में यह पहली नई ऑयल रिफाइनरी होगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 11 मार्च को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर इसकी जानकारी दी। ट्रम्प ने कहा कि यह 300 अरब डॉलर यानी, करीब 27 लाख करोड़ रुपए की एक ऐतिहासिक डील है। उन्होंने कहा कि यह अमेरिकी वर्कर्स, हमारे एनर्जी सेक्टर और साउथ टेक्सस के शानदार लोगों की बहुत बड़ी जीत है। रिलायंस के निवेश लिए उन्होंने धन्यवाद दिया। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 6. शाओमी 17 अल्ट्रा फ्लैगशिप स्मार्टफोन भारत में लॉन्च: 200MP लाइका कैमरा और स्नैपड्रैगन 8 एलीट जेन 5 प्रोसेसर, कीमत ₹1,39,999 चाइनीज टेक कंपनी शाओमी ने 11 मार्च को भारतीय बाजार में अपना सबसे पावरफुल फ्लैगशिप स्मार्टफोन ‘शाओमी 17 अल्ट्रा’ लॉन्च कर दिया है। इस फोन को स्टैंडर्ड शाओमी 17 मॉडल के साथ पेश किया गया है। जिसकी डिटेल यहां क्लिक कर देख सकते हैं। कंपनी का दावा है कि यह दुनिया का पहला ऐसा फोन है जिसमें लाइका का 1-इंच LOFIC सेंसर दिया गया है। फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए इसमें 200 मेगापिक्सल का टेलीफोटो कैमरा और प्रोफेशनल फोटोग्राफी किट जैसे फीचर्स मिलते हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… कल दुनिया के टॉप-10 सबसे अमीर कौन रहे यह भी देख लीजिए… कल के शेयर मार्केट और सोना-चांदी का हाल जान लीजिए… पेट्रोल-डीजल और घरेलू गैस सिलेंडर की लेटेस्ट कीमत जान लीजिए… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

LPG Crisis India | Russia Oil Deal, Silver Price Drop

LPG Crisis India | Russia Oil Deal, Silver Price Drop

नई दिल्ली3 घंटे पहले कॉपी लिंक कल की बड़ी खबर कच्चे तेल से जुड़ी रही। ईरान-इजराइल में जारी जंग के बीच स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज रूट बंद हो गया है। ऐसे में कच्चे तेल की सप्लाई बंद होने के बाद भारत करीब 3 करोड़ बैरल कच्चा तेल रूस से खरीदेगा। वहीं जंग की वजह से देशभर में LPG की किल्लत हो रही है। गैस सिलेंडर लेने के लिए एजेंसियों पर लंबी लाइनें लगी हैं। कल की बड़ी खबर से पहले आज की ये सुर्खियां… शेयर बाजार में आज गिरावट देखने को मिल सकती है। फरवरी महीने के रिटेल महंगाई दर के आंकड़े आएंगे। पेट्रोल-डीजल के दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ है। अब कल की बड़ी खबरें पढ़ें… 1. रूस से 3 करोड़ बैरल कच्चा तेल खरीदेगा भारत: रिलायंस-IOC ने बुकिंग की, ईरान जंग के बीच सप्लाई बंद होने के बाद फैसला ईरान-इजराइल में जारी जंग के बीच स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज रूट बंद हो गया है। ऐसे में कच्चे तेल की सप्लाई बंद होने के बाद भारत करीब 3 करोड़ बैरल कच्चा तेल रूस से खरीदेगा। यह दावा ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में किया गया है। रिपोर्ट में बताया कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियों ने रूस से तेल के एग्रीमेंट किए हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 2. देशभर में LPG की किल्लत, एजेंसी के बाहर लंबी लाइनें: UP-बिहार में पुलिस सुरक्षा में सिलेंडर बंट रहे, अयोध्या में राम रसोई बंद अमेरिका-इजराइल की ईरान से जंग की वजह से देशभर में LPG की किल्लत हो रही है। गैस सिलेंडर लेने के लिए एजेंसियों पर लंबी लाइनें लगी हैं। दिल्ली, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और राजस्थान समेत कई राज्यों ने कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई पर रोक से होटलों और रेस्टोरेंट्स में खाना नहीं बन पा रहा है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 3. चांदी आज करीब ₹5,000 गिरकर ₹2.66 लाख/किलो पर आई: सोना ₹42 बढ़कर ₹1.60 लाख पर पहुंचा, इस साल कीमत में ₹27 हजार का इजाफा सोने में 11 मार्च को मामूली तेजी और चांदी में गिरावट रही। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 42 रुपए बढ़कर ₹1.60 लाख पहुंच गया। इससे पहले मंगलवार को इसकी कीमत 1.60 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम थी। वहीं, एक किलो चांदी 4,934 रुपए घटकर ₹2.66 लाख पर आ गई है। इससे पहले मंगलवार को इसकी कीमत 2.71 लाख रुपए प्रति किलो थी। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 4. लैपटॉप-डेस्कटॉप इस साल 35% तक महंगे होंगे: मार्च में 10% बढ़ सकती है कीमतें, 12% बढ़ोतरी पहले ही हो चुकी; मेमोरी-GPU के दाम बढ़ने का असर देश में अगले कुछ महीनों में लैपटॉप और डेस्कटॉप खरीदना महंगा पड़ सकता है। प्रोसेसर और ग्राफिक्स कार्ड (GPU) जैसे प्रमुख कंपोनेंट्स के दाम बढ़ने से इस साल लैपटॉप-डेक्सटॉप की कीमतों में 35% तक के उछाल की संभावना है। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि कीमतों में इस बढ़ोतरी की वजह से इस साल कंप्यूटर बाजार की ग्रोथ में 8% तक की कमी आ सकती है। मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट में इस बात की जानकारी दी गई है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 5. अमेरिका में 50 साल बाद पहली नई रिफाइनरी बनेगी: रिलायंस के साथ पार्टनरशिप, ट्रम्प बोले- ये अमेरिकी इतिहास की सबसे बड़ी डील रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अमेरिका में ऑयल रिफाइनरी बनाने के लिए डील की है। अमेरिका में पिछले 50 सालों में यह पहली नई ऑयल रिफाइनरी होगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 11 मार्च को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर इसकी जानकारी दी। ट्रम्प ने कहा कि यह 300 अरब डॉलर यानी, करीब 27 लाख करोड़ रुपए की एक ऐतिहासिक डील है। उन्होंने कहा कि यह अमेरिकी वर्कर्स, हमारे एनर्जी सेक्टर और साउथ टेक्सस के शानदार लोगों की बहुत बड़ी जीत है। रिलायंस के निवेश लिए उन्होंने धन्यवाद दिया। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 6. शाओमी 17 अल्ट्रा फ्लैगशिप स्मार्टफोन भारत में लॉन्च: 200MP लाइका कैमरा और स्नैपड्रैगन 8 एलीट जेन 5 प्रोसेसर, कीमत ₹1,39,999 चाइनीज टेक कंपनी शाओमी ने 11 मार्च को भारतीय बाजार में अपना सबसे पावरफुल फ्लैगशिप स्मार्टफोन ‘शाओमी 17 अल्ट्रा’ लॉन्च कर दिया है। इस फोन को स्टैंडर्ड शाओमी 17 मॉडल के साथ पेश किया गया है। जिसकी डिटेल यहां क्लिक कर देख सकते हैं। कंपनी का दावा है कि यह दुनिया का पहला ऐसा फोन है जिसमें लाइका का 1-इंच LOFIC सेंसर दिया गया है। फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए इसमें 200 मेगापिक्सल का टेलीफोटो कैमरा और प्रोफेशनल फोटोग्राफी किट जैसे फीचर्स मिलते हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… कल दुनिया के टॉप-10 सबसे अमीर कौन रहे यह भी देख लीजिए… कल के शेयर मार्केट और सोना-चांदी का हाल जान लीजिए… पेट्रोल-डीजल और घरेलू गैस सिलेंडर की लेटेस्ट कीमत जान लीजिए… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Breaking News Headlines Today, Pictures, Videos and More From Dainik Bhaskar

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Hindi News National Breaking News Headlines Today, Pictures, Videos And More From Dainik Bhaskar 44 मिनट पहले कॉपी लिंक दिल्ली के उत्तम नगर इलाके में मछली मंडी के पास बुधवार देर रात को भीषण आग लगने की घटना सामने आई है। आग लगते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलने के बाद दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचकर आग बुझाने का काम कर रही हैं। फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है। राहत और बचाव कार्य जारी है और अभी किसी के हताहत होने की जानकारी नहीं मिली है। मामले में अधिक जानकारी का इंतजार किया जा रहा है। आज की अन्य बड़ी खबरें… तेलंगाना- कविता की भूख हड़ताल में बेटे आदित्य भी शामिल, वेलुगुमटला के पीड़ितों को घर के लिए जगह देने की मांग तेलंगाना जागृति की अध्यक्ष के कविता वेलुगुमटला के पीड़ितों को घर की जगह देने की मांग को लेकर तीन दिन से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठी हैं। उनके समर्थन में बुधवार को उनके बेटे आदित्य कलवकुंतला भी हैदराबाद के बंजारा हिल्स स्थित पार्टी ऑफिस में प्रदर्शन में शामिल हुए। आदित्य हाल ही में अमेरिका से पढ़ाई पूरी कर भारत लौटे हैं और कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में अपनी मां के साथ सक्रिय रूप से नजर आए हैं। पार्टी नेताओं और समर्थकों ने भी इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होकर सरकार से मांग की है कि वेलुगुमटला के प्रभावित परिवारों को जल्द से जल्द घर की जगह उपलब्ध कराई जाए। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Hospitals Offered Lakhs for NABH Certifications

Hospitals Offered Lakhs for NABH Certifications

आयुष्मान योजना में निजी अस्पतालों के लिए NABH फाइनल लेवल सर्टिफिकेट अनिवार्य किए जाने के फैसले के बाद नया विवाद सामने आया है। नर्सिंग होम एसोसिएशन का दावा है कि इस फैसले के बाद निजी कंपनियां और एजेंट सक्रिय हो गए हैं। ये एजेंट अस्पतालों में पहुंचकर N . बैठक में सामने आया एजेंटों का मामला नर्सिंग होम एसोसिएशन की बुधवार को हुई बैठक में यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। बैठक में बताया गया कि आयुष्मान योजना में NABH फाइनल लेवल की अनिवार्यता लागू होते ही कई निजी कंपनियां और एजेंट सक्रिय हो गए हैं। ये एजेंट सीधे अस्पताल संचालकों से संपर्क कर रहे हैं और NABH सर्टिफिकेट दिलाने का भरोसा दे रहे हैं। इसके लिए वे दो से ढाई लाख रुपए तक का पैकेज बता रहे हैं। इस पैकेज में आवेदन करने, जरूरी दस्तावेज तैयार कराने और पूरी प्रक्रिया पूरी कर सर्टिफिकेट दिलाने की जिम्मेदारी लेने की बात कही जा रही है। चार बड़े शहरों के अस्पतालों पर सबसे ज्यादा असर सरकार का यह नियम फिलहाल मध्यप्रदेश के चार बड़े शहरों भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर के निजी अस्पतालों पर लागू किया गया है। आंकड़ों के मुताबिक इन शहरों में कुल 395 निजी अस्पताल आयुष्मान योजना से जुड़े हैं। इनमें से 212 अस्पताल पिछले करीब पांच साल से NABH के एंट्री लेवल सर्टिफिकेट पर ही काम कर रहे हैं। वहीं, केवल 59 अस्पतालों के पास ही फुल NABH सर्टिफिकेट है। ऐसे में करीब 336 अस्पतालों के योजना से बाहर होने की स्थिति बन सकती है। अस्पतालों को मिला 15 दिन का अतिरिक्त समय स्थिति को देखते हुए आयुष्मान कार्यालय ने सभी अस्पताल संचालकों को एक ई-मेल भेजा है। इसमें NABH सर्टिफिकेट के लिए 15 दिन का अतिरिक्त समय दिया गया है। अब जिन अस्पतालों ने 31 मार्च तक NABH सर्टिफिकेट नहीं कराया है, उन्हें 15 अप्रैल तक का समय दिया गया है। इसके बाद 16 अप्रैल के बाद स्टेट हेल्थ अथॉरिटी इस पूरे मामले की समीक्षा करेगी और आगे का निर्णय लिया जाएगा। नर्सिंग होम एसोसिएशन जाएगा हाईकोर्ट इस फैसले के विरोध में नर्सिंग होम एसोसिएशन ने कोर्ट जाने का फैसला किया है। एसोसिएशन का कहना है कि इतने कम समय में सभी अस्पतालों के लिए NABH फाइनल लेवल हासिल करना संभव नहीं है। इसी मुद्दे को लेकर जबलपुर में नर्सिंग होम एसोसिएशन की ओर से एक जनहित याचिका भी दायर की गई है। इस याचिका पर 16 मार्च को सुनवाई होना तय है। छोटे शहरों के अस्पतालों के सामने बड़ी चुनौती नर्सिंग होम एसोसिएशन के सचिव डॉ. संजय गुप्ता का कहना है कि प्रदेश के कई शहरों में NABH सर्टिफाइड अस्पतालों की संख्या बहुत कम है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि उज्जैन में केवल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का अस्पताल ही NABH सर्टिफाइड है, जबकि बाकी अस्पतालों के पास यह सर्टिफिकेट नहीं है। एसोसिएशन का कहना है कि सरकार के इस फैसले का पूरे प्रदेश के निजी अस्पताल संचालक विरोध कर रहे हैं और अपनी बात सरकार व अन्य मंचों तक पहुंचाने की रणनीति बनाई जा रही है।

श्रमिक प्रसूति सहायता योजना भुगतान में लापरवाही:तीन स्वास्थ्य कर्मचारियों की 10 दिन की सैलरी काटी, सुधार न होने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी

श्रमिक प्रसूति सहायता योजना भुगतान में लापरवाही:तीन स्वास्थ्य कर्मचारियों की 10 दिन की सैलरी काटी, सुधार न होने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी

प्रसूता महिलाओं को मिलने वाली सरकारी योजनाओं के भुगतान में देरी स्वास्थ्य कर्मचारियों को महंगी पड़ गई। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) मध्यप्रदेश ने जननी सुरक्षा योजना और मुख्यमंत्री श्रमिक सेवा प्रसूति सहायता योजना की राशि समय पर जारी नहीं करने पर तीन स्वास्थ्य कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की है। इन कर्मचारियों को पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, लेकिन उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। जांच में सामने आया कि बड़ी संख्या में हितग्राहियों का भुगतान अब भी लंबित है। इसके बाद विभाग ने तीनों कर्मचारियों के 10 दिन का वेतन काटते हुए चेतावनी दी है कि कार्य में सुधार नहीं होने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। रीवा और सीधी जिले के कर्मचारियों पर कार्रवाई राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन मध्यप्रदेश के मिशन संचालक ने रीवा और सीधी जिले के तीन स्वास्थ्य कर्मचारियों पर यह कार्रवाई की है। इनमें विकासखंड हनुमना (मऊगंज), जिला रीवा के विकासखंड कार्यक्रम प्रबंधक रोहित सिंह, विकासखंड सिहावल, जिला सीधी के विकासखंड लेखा प्रबंधक रोहित सिंह और जिला अस्पताल सीधी के लेखा प्रबंधक अरुण सिंह शामिल हैं। इन कर्मचारियों को हितग्राही मूलक योजनाओं के भुगतान में अनावश्यक देरी और कार्य के प्रति उदासीनता के कारण पहले नोटिस जारी किया गया था। नोटिस के बाद भी लंबित रहे कई भुगतान स्वास्थ्य विभाग के अनुसार कारण बताओ नोटिस जारी होने के बाद भी कई प्रसूताओं को मिलने वाली योजनाओं की राशि लंबित पाई गई। जांच में यह भी सामने आया कि नोटिस जारी होने की तारीख से लेकर अब तक बड़ी संख्या में जननी सुरक्षा योजना और मुख्यमंत्री श्रमिक सेवा प्रसूति सहायता योजना के हितग्राहियों को भुगतान नहीं किया गया। विभाग ने इसे गंभीर लापरवाही माना है। 10 दिन का वेतन काटा, दी चेतावनी कार्य में लापरवाही और राज्य कार्यालय के आदेशों की लगातार अनदेखी करने पर स्वास्थ्य विभाग ने तीनों कर्मचारियों पर अर्थदंड लगाया है। कार्रवाई के तहत उनके 10 दिन का वेतन काटा गया है। साथ ही उन्हें निर्देश दिया गया है कि लंबित भुगतान जल्द से जल्द निपटाएं। सरकार की प्राथमिकता है समय पर भुगतान स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि जननी सुरक्षा योजना और मुख्यमंत्री श्रमिक सेवा प्रसूति सहायता योजना का उद्देश्य प्रसूता महिलाओं को आर्थिक सहायता देना है, ताकि उन्हें प्रसव के समय बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। सरकार की प्राथमिकता है कि इन योजनाओं का लाभ हितग्राहियों को समय पर मिले। विभाग ने चेतावनी दी है कि भविष्य में ऐसी लापरवाही पाए जाने पर संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ और कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।