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Hospitals Offered Lakhs for NABH Certifications

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आयुष्मान योजना में निजी अस्पतालों के लिए NABH फाइनल लेवल सर्टिफिकेट अनिवार्य किए जाने के फैसले के बाद नया विवाद सामने आया है। नर्सिंग होम एसोसिएशन का दावा है कि इस फैसले के बाद निजी कंपनियां और एजेंट सक्रिय हो गए हैं। ये एजेंट अस्पतालों में पहुंचकर N

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बैठक में सामने आया एजेंटों का मामला नर्सिंग होम एसोसिएशन की बुधवार को हुई बैठक में यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। बैठक में बताया गया कि आयुष्मान योजना में NABH फाइनल लेवल की अनिवार्यता लागू होते ही कई निजी कंपनियां और एजेंट सक्रिय हो गए हैं। ये एजेंट सीधे अस्पताल संचालकों से संपर्क कर रहे हैं और NABH सर्टिफिकेट दिलाने का भरोसा दे रहे हैं। इसके लिए वे दो से ढाई लाख रुपए तक का पैकेज बता रहे हैं। इस पैकेज में आवेदन करने, जरूरी दस्तावेज तैयार कराने और पूरी प्रक्रिया पूरी कर सर्टिफिकेट दिलाने की जिम्मेदारी लेने की बात कही जा रही है।

चार बड़े शहरों के अस्पतालों पर सबसे ज्यादा असर सरकार का यह नियम फिलहाल मध्यप्रदेश के चार बड़े शहरों भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर के निजी अस्पतालों पर लागू किया गया है। आंकड़ों के मुताबिक इन शहरों में कुल 395 निजी अस्पताल आयुष्मान योजना से जुड़े हैं। इनमें से 212 अस्पताल पिछले करीब पांच साल से NABH के एंट्री लेवल सर्टिफिकेट पर ही काम कर रहे हैं। वहीं, केवल 59 अस्पतालों के पास ही फुल NABH सर्टिफिकेट है। ऐसे में करीब 336 अस्पतालों के योजना से बाहर होने की स्थिति बन सकती है।

अस्पतालों को मिला 15 दिन का अतिरिक्त समय स्थिति को देखते हुए आयुष्मान कार्यालय ने सभी अस्पताल संचालकों को एक ई-मेल भेजा है। इसमें NABH सर्टिफिकेट के लिए 15 दिन का अतिरिक्त समय दिया गया है। अब जिन अस्पतालों ने 31 मार्च तक NABH सर्टिफिकेट नहीं कराया है, उन्हें 15 अप्रैल तक का समय दिया गया है। इसके बाद 16 अप्रैल के बाद स्टेट हेल्थ अथॉरिटी इस पूरे मामले की समीक्षा करेगी और आगे का निर्णय लिया जाएगा।

नर्सिंग होम एसोसिएशन जाएगा हाईकोर्ट इस फैसले के विरोध में नर्सिंग होम एसोसिएशन ने कोर्ट जाने का फैसला किया है। एसोसिएशन का कहना है कि इतने कम समय में सभी अस्पतालों के लिए NABH फाइनल लेवल हासिल करना संभव नहीं है। इसी मुद्दे को लेकर जबलपुर में नर्सिंग होम एसोसिएशन की ओर से एक जनहित याचिका भी दायर की गई है। इस याचिका पर 16 मार्च को सुनवाई होना तय है।

छोटे शहरों के अस्पतालों के सामने बड़ी चुनौती नर्सिंग होम एसोसिएशन के सचिव डॉ. संजय गुप्ता का कहना है कि प्रदेश के कई शहरों में NABH सर्टिफाइड अस्पतालों की संख्या बहुत कम है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि उज्जैन में केवल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का अस्पताल ही NABH सर्टिफाइड है, जबकि बाकी अस्पतालों के पास यह सर्टिफिकेट नहीं है। एसोसिएशन का कहना है कि सरकार के इस फैसले का पूरे प्रदेश के निजी अस्पताल संचालक विरोध कर रहे हैं और अपनी बात सरकार व अन्य मंचों तक पहुंचाने की रणनीति बनाई जा रही है।

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बैठक में सामने आया एजेंटों का मामला नर्सिंग होम एसोसिएशन की बुधवार को हुई बैठक में यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। बैठक में बताया गया कि आयुष्मान योजना में NABH फाइनल लेवल की अनिवार्यता लागू होते ही कई निजी कंपनियां और एजेंट सक्रिय हो गए हैं। ये एजेंट सीधे अस्पताल संचालकों से संपर्क कर रहे हैं और NABH सर्टिफिकेट दिलाने का भरोसा दे रहे हैं। इसके लिए वे दो से ढाई लाख रुपए तक का पैकेज बता रहे हैं। इस पैकेज में आवेदन करने, जरूरी दस्तावेज तैयार कराने और पूरी प्रक्रिया पूरी कर सर्टिफिकेट दिलाने की जिम्मेदारी लेने की बात कही जा रही है।

चार बड़े शहरों के अस्पतालों पर सबसे ज्यादा असर सरकार का यह नियम फिलहाल मध्यप्रदेश के चार बड़े शहरों भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर के निजी अस्पतालों पर लागू किया गया है। आंकड़ों के मुताबिक इन शहरों में कुल 395 निजी अस्पताल आयुष्मान योजना से जुड़े हैं। इनमें से 212 अस्पताल पिछले करीब पांच साल से NABH के एंट्री लेवल सर्टिफिकेट पर ही काम कर रहे हैं। वहीं, केवल 59 अस्पतालों के पास ही फुल NABH सर्टिफिकेट है। ऐसे में करीब 336 अस्पतालों के योजना से बाहर होने की स्थिति बन सकती है।

अस्पतालों को मिला 15 दिन का अतिरिक्त समय स्थिति को देखते हुए आयुष्मान कार्यालय ने सभी अस्पताल संचालकों को एक ई-मेल भेजा है। इसमें NABH सर्टिफिकेट के लिए 15 दिन का अतिरिक्त समय दिया गया है। अब जिन अस्पतालों ने 31 मार्च तक NABH सर्टिफिकेट नहीं कराया है, उन्हें 15 अप्रैल तक का समय दिया गया है। इसके बाद 16 अप्रैल के बाद स्टेट हेल्थ अथॉरिटी इस पूरे मामले की समीक्षा करेगी और आगे का निर्णय लिया जाएगा।

नर्सिंग होम एसोसिएशन जाएगा हाईकोर्ट इस फैसले के विरोध में नर्सिंग होम एसोसिएशन ने कोर्ट जाने का फैसला किया है। एसोसिएशन का कहना है कि इतने कम समय में सभी अस्पतालों के लिए NABH फाइनल लेवल हासिल करना संभव नहीं है। इसी मुद्दे को लेकर जबलपुर में नर्सिंग होम एसोसिएशन की ओर से एक जनहित याचिका भी दायर की गई है। इस याचिका पर 16 मार्च को सुनवाई होना तय है।

छोटे शहरों के अस्पतालों के सामने बड़ी चुनौती नर्सिंग होम एसोसिएशन के सचिव डॉ. संजय गुप्ता का कहना है कि प्रदेश के कई शहरों में NABH सर्टिफाइड अस्पतालों की संख्या बहुत कम है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि उज्जैन में केवल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का अस्पताल ही NABH सर्टिफाइड है, जबकि बाकी अस्पतालों के पास यह सर्टिफिकेट नहीं है। एसोसिएशन का कहना है कि सरकार के इस फैसले का पूरे प्रदेश के निजी अस्पताल संचालक विरोध कर रहे हैं और अपनी बात सरकार व अन्य मंचों तक पहुंचाने की रणनीति बनाई जा रही है।

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