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ट्रम्प के पास जंग खत्म करने का कोई प्लान नहीं:ईरान की ताकत का गलत अंदाजा लगाया, तेल सप्लाई ठप होगी सोचा नहीं था

ट्रम्प के पास जंग खत्म करने का कोई प्लान नहीं:ईरान की ताकत का गलत अंदाजा लगाया, तेल सप्लाई ठप होगी सोचा नहीं था

18 फरवरी को जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प यह तय कर रहे थे कि ईरान पर हमला किया जाए या नहीं, तब ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने एक इंटरव्यू में कहा था कि उन्हें यह चिंता नहीं थी कि अगर युद्ध हुआ तो मिडिल ईस्ट से तेल की सप्लाई पर असर पड़ेगा या तेल के बाजार में बड़ी गड़बड़ी होगी। राइट ने कहा था कि पिछले साल जून में जब इजराइल और अमेरिका ने ईरान पर हमले किए थे, तब भी तेल बाजार पर ज्यादा असर नहीं पड़ा था। उनके मुताबिक उस समय तेल की कीमत थोड़ी बढ़ी थी, लेकिन जल्द ही फिर नीचे आ गई थी। ट्रम्प के दूसरे सलाहकार भी निजी तौर पर इसी तरह की राय रखते थे। उनका मानना था कि चेतावनियां बढ़ा-चढ़ाकर दी जा रही हैं और ईरान शायद ही इस बार तेल ले जाने वाले समुद्री रास्तों को बंद करेगा, जिनसे दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल सप्लाई गुजरती है। लेकिन हाल के दिनों में यह आकलन गलत साबित होता दिखाई दिया। ईरान ने धमकी दी कि वह होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले तेल के टैंकरों पर हमला कर सकता है। यह वही अहम समुद्री रास्ता है जिससे होकर फारस की खाड़ी से निकलने वाले सभी जहाज गुजरते हैं। हार्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही रूकी ईरान की इन धमकियों के बाद खाड़ी क्षेत्र में व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई है। इस वजह से तेल की कीमतें एक समय 110 डॉलर प्रति बैरल को छू गई थीं। ट्रम्प प्रशासन अब आर्थिक संकट को काबू में करने के तरीके खोजने में जुट गया है। इस संकट के कारण अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें भी बढ़ गई हैं। यह घटना इस बात को भी दिखाती है कि ट्रम्प और उनके सलाहकारों ने यह गलत अंदाजा लगाया कि ईरान इस युद्ध पर कैसे रिएक्ट करेगा। ईरान इस संघर्ष को अपने अस्तित्व से जुड़ा खतरा मान रही है। ईरान का जवाब ज्यादा आक्रामक पिछले साल जून में हुई 12 दिन की जंग की तुलना में इस बार ईरान ने कहीं ज्यादा आक्रामक प्रतिक्रिया दी है। उसने अमेरिका के सैन्य ठिकानों, मिडिल ईस्ट के कई अरब देशों के शहरों और इजराइल के आबादी वाले इलाकों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। इन हमलों के कारण अमेरिकी अधिकारियों को कई प्लान तुरंत बदलने पड़े। कुछ जगहों पर दूतावास खाली कराने पड़े और पेट्रोल की बढ़ती कीमतों को कंट्रोल करने के लिए नई पॉलिसी पर काम करना पड़ा। ट्रम्प के पास जंग खत्म करने का कोई प्लान नहीं इसके बाद मंगलवार को ट्रम्प प्रशासन के अधिकारियों ने सांसदों को बंद कमरे में जानकारी दी। इसके बाद कनेक्टिकट के डेमोक्रेटिक सीनेटर क्रिस्टोफर मर्फी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि प्रशासन के पास होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा सुरक्षित तरीके से खोलने का कोई प्लान नहीं है। प्रशासन के अंदर भी कुछ अधिकारी इस बात को लेकर निराश हैं कि युद्ध खत्म करने की कोई प्लान नजर नहीं आ रही है। हालांकि वे यह बात सीधे राष्ट्रपति ट्रम्प से कहने से बच रहे हैं, क्योंकि ट्रम्प बार-बार कह रहे हैं कि सैन्य अभियान पूरी तरह सफल रहा है। ईरान को लेकर ट्रम्प और रक्षा मंत्री की सोच अलग ट्रम्प कई बार बहुत बड़े टारगेट की बात करते हैं। जैसे कि वे चाहते हैं कि ईरान में ऐसा नेता आए जो अमेरिका की बात माने। लेकिन विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ऐसी बात नहीं करते। पीट हेगसेथ ने मंगलवार को कहा भी था कि अमेरिका, इराक में हाथ जला चुका है। वे ऐसा ईरान में नहीं करेगा। उनका कहना है कि ईरान की मिसाइल ताकत और सैन्य क्षमता को कमजोर करना ही असल मकसद है। अगर यह हो जाता है तो युद्ध खत्म करने का रास्ता निकल सकता है। हेगसेथ ने माना कि ईरान ने अपने पड़ोसी देशों पर जिस तरह से जोरदार जवाबी हमले किए, उसकी तीव्रता का अंदाजा पेंटागन को पूरी तरह नहीं था। हालांकि उन्होंने कहा कि ईरान की ये कार्रवाइयां आखिरकार उसी के खिलाफ जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि यह कहना मुश्किल है कि ईरान से बिल्कुल ऐसे ही जवाब की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा हो सकता है, इसकी संभावना थी। उनके मुताबिक ईरान के ये हमले दिखाते हैं कि वहां की सरकार दबाव में है। तेल की सप्लाई पर पड़े असर से ट्रम्प नाराज इस बीच ट्रम्प ने यह भी कहा कि तेल की सप्लाई पर युद्ध के असर से वह नाराज हैं। उन्होंने फॉक्स न्यूज से कहा कि तेल टैंकरों के क्रू मेंबर्स को ‘थोड़ी हिम्मत दिखानी चाहिए’ और होर्मुज स्ट्रेट से गुजरते रहना चाहिए। कुछ सैन्य सलाहकारों ने युद्ध से पहले चेतावनी दी थी कि ईरान बहुत आक्रामक जवाब दे सकता है और अमेरिका-इजराइल के हमले को अपने अस्तित्व के लिए खतरा मान सकता है। लेकिन कुछ अन्य सलाहकारों को भरोसा था कि अगर ईरान के शीर्ष नेताओं को मार दिया गया तो उनकी जगह आने वाले नेता ज्यादा व्यावहारिक होंगे और युद्ध खत्म करने की कोशिश करेंगे। जब ट्रम्प को बताया गया कि युद्ध के कारण तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, तो उन्होंने इस संभावना को स्वीकार तो किया, लेकिन इसे अस्थायी समस्या बताते हुए ज्यादा महत्व नहीं दिया। उन्होंने ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट और वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट को संभावित कीमत बढ़ोतरी से निपटने के विकल्प तैयार करने को कहा। हालांकि राष्ट्रपति ने इन विकल्पों के बारे में सार्वजनिक रूप से तब तक कुछ नहीं कहा, जब तक युद्ध शुरू हुए 48 घंटे से ज्यादा समय नहीं बीत गया। इन विकल्पों में अमेरिकी सरकार द्वारा राजनीतिक जोखिम बीमा देना और अमेरिकी नौसेना द्वारा जहाजों को सुरक्षा देना जैसे कदम शामिल थे। अभी तक नौसेना की ऐसी एस्कॉर्ट व्यवस्था शुरू नहीं हुई है। समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी में ईरान अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने 10 मार्च को सोशल मीडिया पर लिखा कि अमेरिकी नौसेना ने एक तेल टैंकर को सुरक्षित तरीके से होर्मुज स्ट्रेट पार कराया है। उनके इस पोस्ट के बाद तेल बाजार में हलचल मच गई और निवेशकों को लगा कि हालात सुधर रहे हैं। लेकिन बाद में जब प्रशासन के अन्य अधिकारियों ने कहा कि ऐसा कोई एस्कॉर्ट ऑपरेशन हुआ ही नहीं है, तो राइट को वह पोस्ट हटानी पड़ी और बाजार फिर से अस्थिर हो गया। तेल की सप्लाई फिर से शुरू करने की कोशिशें इसलिए भी मुश्किल हो रही हैं क्योंकि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को जानकारी मिली है कि ईरान स्ट्रेट में समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी कर रहा है। हालांकि यह योजना अभी शुरुआती चरण में थी, लेकिन इससे ट्रम्प प्रशासन चिंतित हो गया। अमेरिकी सेना ने मंगलवार शाम कहा कि उसने स्ट्रेट के पास ईरान के 16 ऐसे जहाजों को निशाना बनाया है जो बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी में लगे थे। तेल की कीमतें बढ़ने से नेताओं की चिंता बढ़ीं
इस बीच तेल की कीमतें बढ़ने से वॉशिंगटन में रिपब्लिकन नेताओं की चिंता भी बढ़ गई है। उन्हें डर है कि इससे मध्यावधि चुनाव से पहले मतदाताओं के बीच उनकी आर्थिक नीतियों को नुकसान हो सकता है। अमेरिका में नवंबर में मध्यावधि चुनाव होने हैं। ट्रम्प सार्वजनिक और निजी तौर पर यह भी कह रहे हैं कि वेनेजुएला का तेल इस संकट से निपटने में मदद कर सकता है। मंगलवार को प्रशासन ने टेक्सास में एक नई रिफाइनरी की घोषणा भी की, जिससे तेल सप्लाई बढ़ाने में मदद मिल सकती है और ईरान के कारण तेल बाजार पर लंबे समय तक असर नहीं पड़ेगा। कुछ एक्सपर्ट्स को यह भी हैरानी हुई कि ट्रम्प को इतना भरोसा कैसे था कि तेल सप्लाई चलते रहेंगे। क्योंकि पिछले साल ही ट्रम्प ने यमन के हूती विद्रोहियों के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया था, जिन्होंने मिसाइल और ड्रोन हमलों से रेड सी में जहाजों की आवाजाही को लगभग रोक दिया था। पिछले साल मार्च में हूतियों पर हमले की घोषणा करते समय ट्रम्प ने कहा था कि इन हमलों से वैश्विक अर्थव्यवस्था को अरबों डॉलर का नुकसान हुआ है। बार-बार बयान बदल रहे ट्रम्प लेकिन ईरान के साथ शुरू हुई इस जंग के बाद ट्रम्प के बयान लगातार एक जैसे नहीं रहे हैं। ट्रम्प कभी कहते हैं कि यह युद्ध एक महीने से ज्यादा चल सकता है, तो कभी कहते हैं कि यह लगभग पूरा हो चुका है। दूसरी ओर विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने हाल के दिनों में 3 मकसदों की बात की है। 1. ईरान की मिसाइलें और उन्हें लॉन्च करने की क्षमता को नष्ट करना।
2. मिसाइल बनाने वाली फैक्ट्रियों को खत्म करना।
3. ईरान की नौसेना को नष्ट करना। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे यह संकेत मिल सकता है कि अमेरिका जल्द ही युद्ध खत्म करने का रास्ता तलाश रहा है। हालांकि ट्रम्प ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में चेतावनी दी कि अगर ईरान ने दुनिया की ऊर्जा सप्लाई रोकने की कोशिश की तो अमेरिका और भी कड़ा कदम उठाएगा। ट्रम्प प्रशासन में पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रह चुके मैथ्यू पॉटिंगर ने कहा कि ट्रम्प शायद अभी भी युद्ध को थोड़ा और आगे बढ़ाने का फैसला कर सकते हैं। उनके मुताबिक ट्रम्प नहीं चाहते कि बाद में फिर से एक और युद्ध लड़ना पड़े। जंग खत्म करना अमेरिका के लिए बेहद जरूरी इस बीच युद्ध खत्म करने के रास्ते खोजने की जरूरत इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं और अमेरिका बड़ी मात्रा में महंगे हथियार इस्तेमाल कर रहा है। पेंटागन अधिकारियों ने संसद में बंद कमरे में बताया कि युद्ध के पहले दो दिनों में ही करीब 5.6 अरब डॉलर के हथियार इस्तेमाल हो चुके हैं। यह आंकड़ा पहले सार्वजनिक रूप से बताए गए आंकड़ों से कहीं ज्यादा है। उधर ईरान के अधिकारी अभी भी सख्त रुख दिखा रहे हैं। उनका कहना है कि वे दुनिया की तेल सप्लाई पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके अमेरिका और इजराइल पर दबाव बनाएंगे। ईरान के वरिष्ठ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारी अली लारिजानी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि होर्मुज स्ट्रेट या तो सबके लिए शांति और समृद्धि का रास्ता बनेगा, या फिर युद्ध चाहने वालों के लिए हार और दुख का रास्ता।

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ट्रम्प के पास जंग खत्म करने का कोई प्लान नहीं:ईरान की ताकत का गलत अंदाजा लगाया, तेल सप्लाई ठप होगी सोचा नहीं था

ट्रम्प के पास जंग खत्म करने का कोई प्लान नहीं:ईरान की ताकत का गलत अंदाजा लगाया, तेल सप्लाई ठप होगी सोचा नहीं था

18 फरवरी को जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प यह तय कर रहे थे कि ईरान पर हमला किया जाए या नहीं, तब ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने एक इंटरव्यू में कहा था कि उन्हें यह चिंता नहीं थी कि अगर युद्ध हुआ तो मिडिल ईस्ट से तेल की सप्लाई पर असर पड़ेगा या तेल के बाजार में बड़ी गड़बड़ी होगी। राइट ने कहा था कि पिछले साल जून में जब इजराइल और अमेरिका ने ईरान पर हमले किए थे, तब भी तेल बाजार पर ज्यादा असर नहीं पड़ा था। उनके मुताबिक उस समय तेल की कीमत थोड़ी बढ़ी थी, लेकिन जल्द ही फिर नीचे आ गई थी। ट्रम्प के दूसरे सलाहकार भी निजी तौर पर इसी तरह की राय रखते थे। उनका मानना था कि चेतावनियां बढ़ा-चढ़ाकर दी जा रही हैं और ईरान शायद ही इस बार तेल ले जाने वाले समुद्री रास्तों को बंद करेगा, जिनसे दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल सप्लाई गुजरती है। लेकिन हाल के दिनों में यह आकलन गलत साबित होता दिखाई दिया। ईरान ने धमकी दी कि वह होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले तेल के टैंकरों पर हमला कर सकता है। यह वही अहम समुद्री रास्ता है जिससे होकर फारस की खाड़ी से निकलने वाले सभी जहाज गुजरते हैं। हार्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही रूकी ईरान की इन धमकियों के बाद खाड़ी क्षेत्र में व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई है। इस वजह से तेल की कीमतें एक समय 110 डॉलर प्रति बैरल को छू गई थीं। ट्रम्प प्रशासन अब आर्थिक संकट को काबू में करने के तरीके खोजने में जुट गया है। इस संकट के कारण अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें भी बढ़ गई हैं। यह घटना इस बात को भी दिखाती है कि ट्रम्प और उनके सलाहकारों ने यह गलत अंदाजा लगाया कि ईरान इस युद्ध पर कैसे रिएक्ट करेगा। ईरान इस संघर्ष को अपने अस्तित्व से जुड़ा खतरा मान रही है। ईरान का जवाब ज्यादा आक्रामक पिछले साल जून में हुई 12 दिन की जंग की तुलना में इस बार ईरान ने कहीं ज्यादा आक्रामक प्रतिक्रिया दी है। उसने अमेरिका के सैन्य ठिकानों, मिडिल ईस्ट के कई अरब देशों के शहरों और इजराइल के आबादी वाले इलाकों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। इन हमलों के कारण अमेरिकी अधिकारियों को कई प्लान तुरंत बदलने पड़े। कुछ जगहों पर दूतावास खाली कराने पड़े और पेट्रोल की बढ़ती कीमतों को कंट्रोल करने के लिए नई पॉलिसी पर काम करना पड़ा। ट्रम्प के पास जंग खत्म करने का कोई प्लान नहीं इसके बाद मंगलवार को ट्रम्प प्रशासन के अधिकारियों ने सांसदों को बंद कमरे में जानकारी दी। इसके बाद कनेक्टिकट के डेमोक्रेटिक सीनेटर क्रिस्टोफर मर्फी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि प्रशासन के पास होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा सुरक्षित तरीके से खोलने का कोई प्लान नहीं है। प्रशासन के अंदर भी कुछ अधिकारी इस बात को लेकर निराश हैं कि युद्ध खत्म करने की कोई प्लान नजर नहीं आ रही है। हालांकि वे यह बात सीधे राष्ट्रपति ट्रम्प से कहने से बच रहे हैं, क्योंकि ट्रम्प बार-बार कह रहे हैं कि सैन्य अभियान पूरी तरह सफल रहा है। ईरान को लेकर ट्रम्प और रक्षा मंत्री की सोच अलग ट्रम्प कई बार बहुत बड़े टारगेट की बात करते हैं। जैसे कि वे चाहते हैं कि ईरान में ऐसा नेता आए जो अमेरिका की बात माने। लेकिन विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ऐसी बात नहीं करते। पीट हेगसेथ ने मंगलवार को कहा भी था कि अमेरिका, इराक में हाथ जला चुका है। वे ऐसा ईरान में नहीं करेगा। उनका कहना है कि ईरान की मिसाइल ताकत और सैन्य क्षमता को कमजोर करना ही असल मकसद है। अगर यह हो जाता है तो युद्ध खत्म करने का रास्ता निकल सकता है। हेगसेथ ने माना कि ईरान ने अपने पड़ोसी देशों पर जिस तरह से जोरदार जवाबी हमले किए, उसकी तीव्रता का अंदाजा पेंटागन को पूरी तरह नहीं था। हालांकि उन्होंने कहा कि ईरान की ये कार्रवाइयां आखिरकार उसी के खिलाफ जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि यह कहना मुश्किल है कि ईरान से बिल्कुल ऐसे ही जवाब की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा हो सकता है, इसकी संभावना थी। उनके मुताबिक ईरान के ये हमले दिखाते हैं कि वहां की सरकार दबाव में है। तेल की सप्लाई पर पड़े असर से ट्रम्प नाराज इस बीच ट्रम्प ने यह भी कहा कि तेल की सप्लाई पर युद्ध के असर से वह नाराज हैं। उन्होंने फॉक्स न्यूज से कहा कि तेल टैंकरों के क्रू मेंबर्स को ‘थोड़ी हिम्मत दिखानी चाहिए’ और होर्मुज स्ट्रेट से गुजरते रहना चाहिए। कुछ सैन्य सलाहकारों ने युद्ध से पहले चेतावनी दी थी कि ईरान बहुत आक्रामक जवाब दे सकता है और अमेरिका-इजराइल के हमले को अपने अस्तित्व के लिए खतरा मान सकता है। लेकिन कुछ अन्य सलाहकारों को भरोसा था कि अगर ईरान के शीर्ष नेताओं को मार दिया गया तो उनकी जगह आने वाले नेता ज्यादा व्यावहारिक होंगे और युद्ध खत्म करने की कोशिश करेंगे। जब ट्रम्प को बताया गया कि युद्ध के कारण तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, तो उन्होंने इस संभावना को स्वीकार तो किया, लेकिन इसे अस्थायी समस्या बताते हुए ज्यादा महत्व नहीं दिया। उन्होंने ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट और वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट को संभावित कीमत बढ़ोतरी से निपटने के विकल्प तैयार करने को कहा। हालांकि राष्ट्रपति ने इन विकल्पों के बारे में सार्वजनिक रूप से तब तक कुछ नहीं कहा, जब तक युद्ध शुरू हुए 48 घंटे से ज्यादा समय नहीं बीत गया। इन विकल्पों में अमेरिकी सरकार द्वारा राजनीतिक जोखिम बीमा देना और अमेरिकी नौसेना द्वारा जहाजों को सुरक्षा देना जैसे कदम शामिल थे। अभी तक नौसेना की ऐसी एस्कॉर्ट व्यवस्था शुरू नहीं हुई है। समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी में ईरान अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने 10 मार्च को सोशल मीडिया पर लिखा कि अमेरिकी नौसेना ने एक तेल टैंकर को सुरक्षित तरीके से होर्मुज स्ट्रेट पार कराया है। उनके इस पोस्ट के बाद तेल बाजार में हलचल मच गई और निवेशकों को लगा कि हालात सुधर रहे हैं। लेकिन बाद में जब प्रशासन के अन्य अधिकारियों ने कहा कि ऐसा कोई एस्कॉर्ट ऑपरेशन हुआ ही नहीं है, तो राइट को वह पोस्ट हटानी पड़ी और बाजार फिर से अस्थिर हो गया। तेल की सप्लाई फिर से शुरू करने की कोशिशें इसलिए भी मुश्किल हो रही हैं क्योंकि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को जानकारी मिली है कि ईरान स्ट्रेट में समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी कर रहा है। हालांकि यह योजना अभी शुरुआती चरण में थी, लेकिन इससे ट्रम्प प्रशासन चिंतित हो गया। अमेरिकी सेना ने मंगलवार शाम कहा कि उसने स्ट्रेट के पास ईरान के 16 ऐसे जहाजों को निशाना बनाया है जो बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी में लगे थे। तेल की कीमतें बढ़ने से नेताओं की चिंता बढ़ीं
इस बीच तेल की कीमतें बढ़ने से वॉशिंगटन में रिपब्लिकन नेताओं की चिंता भी बढ़ गई है। उन्हें डर है कि इससे मध्यावधि चुनाव से पहले मतदाताओं के बीच उनकी आर्थिक नीतियों को नुकसान हो सकता है। अमेरिका में नवंबर में मध्यावधि चुनाव होने हैं। ट्रम्प सार्वजनिक और निजी तौर पर यह भी कह रहे हैं कि वेनेजुएला का तेल इस संकट से निपटने में मदद कर सकता है। मंगलवार को प्रशासन ने टेक्सास में एक नई रिफाइनरी की घोषणा भी की, जिससे तेल सप्लाई बढ़ाने में मदद मिल सकती है और ईरान के कारण तेल बाजार पर लंबे समय तक असर नहीं पड़ेगा। कुछ एक्सपर्ट्स को यह भी हैरानी हुई कि ट्रम्प को इतना भरोसा कैसे था कि तेल सप्लाई चलते रहेंगे। क्योंकि पिछले साल ही ट्रम्प ने यमन के हूती विद्रोहियों के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया था, जिन्होंने मिसाइल और ड्रोन हमलों से रेड सी में जहाजों की आवाजाही को लगभग रोक दिया था। पिछले साल मार्च में हूतियों पर हमले की घोषणा करते समय ट्रम्प ने कहा था कि इन हमलों से वैश्विक अर्थव्यवस्था को अरबों डॉलर का नुकसान हुआ है। बार-बार बयान बदल रहे ट्रम्प लेकिन ईरान के साथ शुरू हुई इस जंग के बाद ट्रम्प के बयान लगातार एक जैसे नहीं रहे हैं। ट्रम्प कभी कहते हैं कि यह युद्ध एक महीने से ज्यादा चल सकता है, तो कभी कहते हैं कि यह लगभग पूरा हो चुका है। दूसरी ओर विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने हाल के दिनों में 3 मकसदों की बात की है। 1. ईरान की मिसाइलें और उन्हें लॉन्च करने की क्षमता को नष्ट करना।
2. मिसाइल बनाने वाली फैक्ट्रियों को खत्म करना।
3. ईरान की नौसेना को नष्ट करना। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे यह संकेत मिल सकता है कि अमेरिका जल्द ही युद्ध खत्म करने का रास्ता तलाश रहा है। हालांकि ट्रम्प ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में चेतावनी दी कि अगर ईरान ने दुनिया की ऊर्जा सप्लाई रोकने की कोशिश की तो अमेरिका और भी कड़ा कदम उठाएगा। ट्रम्प प्रशासन में पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रह चुके मैथ्यू पॉटिंगर ने कहा कि ट्रम्प शायद अभी भी युद्ध को थोड़ा और आगे बढ़ाने का फैसला कर सकते हैं। उनके मुताबिक ट्रम्प नहीं चाहते कि बाद में फिर से एक और युद्ध लड़ना पड़े। जंग खत्म करना अमेरिका के लिए बेहद जरूरी इस बीच युद्ध खत्म करने के रास्ते खोजने की जरूरत इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं और अमेरिका बड़ी मात्रा में महंगे हथियार इस्तेमाल कर रहा है। पेंटागन अधिकारियों ने संसद में बंद कमरे में बताया कि युद्ध के पहले दो दिनों में ही करीब 5.6 अरब डॉलर के हथियार इस्तेमाल हो चुके हैं। यह आंकड़ा पहले सार्वजनिक रूप से बताए गए आंकड़ों से कहीं ज्यादा है। उधर ईरान के अधिकारी अभी भी सख्त रुख दिखा रहे हैं। उनका कहना है कि वे दुनिया की तेल सप्लाई पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके अमेरिका और इजराइल पर दबाव बनाएंगे। ईरान के वरिष्ठ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारी अली लारिजानी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि होर्मुज स्ट्रेट या तो सबके लिए शांति और समृद्धि का रास्ता बनेगा, या फिर युद्ध चाहने वालों के लिए हार और दुख का रास्ता।

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