आगर में महिलाओं ने निकाली गणगौर यात्रा:अग्रवाल और ब्राह्मण समाज की महिलाओं ने सिर पर प्रतिमा रख की पूजा

आगर मालवा में रविवार शाम गणगौर पर्व के मौके पर महिलाओं ने शहर में पारंपरिक चल समारोह निकाले। इस दौरान महिलाएं सिर पर गणगौर माता की प्रतिमाएं रखकर और लोक गीतों पर नाचती हुई नजर आईं। अग्रवाल समाज महिला मंडल की ओर से गांधी उपवन से यात्रा शुरू की गई। पारंपरिक कपड़ों में सजी महिलाएं माता की प्रतिमाएं लेकर छावनी क्षेत्र के मुख्य रास्तों से होती हुई अग्रवाल धर्मशाला पहुंचीं। यहां विधि-विधान से पूजा के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। रास्ते भर श्रद्धालुओं ने यात्रा का स्वागत किया। ब्राह्मण समाज का आयोजन इसी तरह ब्राह्मण समाज की महिलाओं ने भी विश्वेश्वर महादेव मंदिर से चल समारोह निकाला। यह यात्रा विवेकानंद कॉलोनी के रास्तों से होते हुए पशुपतिनाथ महादेव मंदिर पहुंची। पूरी यात्रा के दौरान महिलाएं गणगौर के गीत गाती और नृत्य करती रहीं। इन आयोजनों में बड़ी संख्या में महिलाओं ने हिस्सा लिया और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की। गणगौर उत्सव को लेकर शहर में काफी उत्साह और भक्ति का माहौल रहा।
पलाश के फूल के फायदे: लू, डायबिटीज और त्वचा रोग में असरदार

Last Updated:March 15, 2026, 19:18 IST फागुन के महीने में तराई क्षेत्र में खिलने वाले टेसू यानी पलाश के फूल सिर्फ खूबसूरती ही नहीं बढ़ाते, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद माने जाते हैं. आयुर्वेद में इसके फूल, बीज, पत्ते और छाल का उपयोग पेट के कीड़े, डायबिटीज, त्वचा रोग और गर्मी से राहत पाने के लिए किया जाता है. गर्मियों में पलाश के फूलों से बना शरबत शरीर को ठंडक देने के साथ लू से भी बचाने में मदद करता है. उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के तराई इलाके में टेसू के पेड़ पाए जाते हैं. फागुन माह में पलाश के फूलों की बहार आ जाती है. ग्रामीण क्षेत्रों में टेसु के फूल के नाम से जाना जाता है. वही अब धीरे-धीरे पलाश के पेड़ों की संख्या कम होती जा रही है. वहीं आयुर्वेद में पलाश के फूल, बीज, पत्ते और छाल का उपयोग कई तरह की बीमारियों के इलाज में किया जाता है. पलाश के बीजों में एंटी वर्म यानी कृमिनाशक गुण पाए जाते हैं. इसी वजह से इसका उपयोग पेट के कीड़ों को खत्म करने के लिए किया जाता है. पलाश के बीज का पाउडर नियमित रूप से लेने से पेट के संक्रमण में भी राहत मिल सकती है. इसके अलावा पलाश के फूलों में एस्ट्रिंजेंट गुण मौजूद होता है, जो दस्त जैसी समस्याओं को नियंत्रित करने में मदद करता है. पलाश में एंटी हाइपरग्लाइसेमिक गुण भी पाए जाते हैं, जो मधुमेह को नियंत्रित करने में सहायक हो सकते हैं. इसके सेवन से शरीर में अच्छे कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बेहतर बनाने में भी मदद मिलती है. वहीं पलाश के पत्तों में टिक्ता गुण पाए जाते हैं, जो शरीर में कफ और पित्त को कम करने में सहायक होते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google त्वचा संबंधी रोगों में भी पलाश काफी उपयोगी माना जाता है. आयुर्वेद के अनुसार, पलाश के बीज का पेस्ट लगाने से एक्जिमा और अन्य स्किन इन्फेक्शन में राहत मिल सकती है. इससे खुजली और त्वचा का रूखापन भी कम होता है. इसके अलावा पलाश के बीज का काढ़ा घाव भरने में भी सहायक माना जाता है. आयुर्वेदिक चिकित्सक देवेंद्र कुमार ने जानकारी देते हुए बताएं कि गर्मियों के मौसम में पलाश के फूलों की डिमांड बढ़ जाती है, इसके फूल बहुत ही ठंडे माने जाते हैं. जिस कारण गर्मियों में लोग शरबत बनाकर सेवन करते हैं. इसका सेवन करने से शरीर को ठंडक मिलती है साथ में गर्मी में लू जैसी समस्या से छुटकारा मिल जाता है. पलाश के फूलों को अच्छी तरह धूप में सुखाकर पाउडर बना लें और हर सुबह ठंडे पानी के साथ इसका सेवन करें. यह शरीर को हल्का महसूस कराने के साथ-साथ आंतरिक सफाई में मदद करता है. डायबिटीज जैसी समस्या से छुटकारा मिल जाएगा. पलाश का फूल स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होता है. First Published : March 15, 2026, 19:18 IST
Bangladesh Imports 45,000 Tonnes Diesel from India by April 2026 via Friendship Pipeline

Hindi News Business Bangladesh Imports 45,000 Tonnes Diesel From India By April 2026 Via Friendship Pipeline | Fuel Supply Resumed नई दिल्ली45 मिनट पहले कॉपी लिंक बांग्लादेश ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत से अतिरिक्त डीजल इम्पोर्ट करने का फैसला किया है। अप्रैल तक भारत से कुल 45,000 टन डीजल बांग्लादेश पहुंचेगा। इसमें से 5,000 टन की पहली खेप पहुंच चुकी है, जबकि अगली खेप 18 या 19 मार्च तक पहुंचने की उम्मीद है। बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPC) के जनरल मैनेजर (ऑपरेशंस) मोहम्मद मुर्शिद हुसैन आजाद ने बताया कि 40,000 टन अतिरिक्त डीजल के इम्पोर्ट का प्रस्ताव मिल चुका है। लेटर ऑफ क्रेडिट (LC) और अन्य फॉर्मेलिटीज पूरी होते ही यह खेप भी अप्रैल तक आ जाएगी। बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद रुकी थी सप्लाई भारत और बांग्लादेश के बीच डीजल की सप्लाई को आसान बनाने के लिए मार्च 2023 में ‘भारत-बांग्लादेश फ्रेंडशिप पाइपलाइन’ (IBFP) का उद्घाटन किया गया था। इसका उद्घाटन तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना और भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी ने वर्चुअली किया था। इससे पहले डीजल की सप्लाई रेल वैगनों के जरिए होती थी, जो काफी खर्चीली और समय लेने वाली प्रक्रिया थी। हालांकि, पिछले साल बांग्लादेश में हुए राजनीतिक बदलाव और मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान इस पाइपलाइन से सप्लाई रुक गई थी। तारिक रहमान सरकार के आते ही बदली स्थिति बांग्लादेश में हाल ही में हुए चुनावों के बाद जब प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार ने सत्ता संभाली, तो भारत के साथ ऊर्जा सहयोग फिर से पटरी पर लौट आया है। पिछले कुछ दिनों में ही पाइपलाइन के जरिए 5,000 टन डीजल की सप्लाई फिर से शुरू कर दी गई है। यह डीजल भारत की सरकारी कंपनी ‘नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड’ (NRL) से सीधे बांग्लादेश के पार्बतीपुर डिपो भेजा जा रहा है। भारत-बांग्लादेश फ्रेंडशिप पाइपलाइन नुमालीगढ़ रिफाइनरी से शुरू होकर उत्तरी बांग्लादेश के दिनाजपुर जिले के पार्बतीपुर डिपो तक जाती है। पश्चिम एशिया में तनाव से बढ़ी थी तेल की किल्लत पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और इजराइल-ईरान जंग के कारण बांग्लादेश में ईंधन की कमी की आशंका पैदा हो गई थी। इसके चलते पेट्रोल पंपों पर भारी भीड़ जमा होने लगी थी और लोग पैनिक बाइंग कर रहे थे। स्थिति को संभालने के लिए सरकार ने तेल की बिक्री पर राशनिंग (सीमित बिक्री) लागू कर दी थी। अब भारत से सप्लाई बहाल होने के बाद सरकार ने यह पाबंदी हटा ली है। अधिकारियों का कहना है कि अब देश में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और घबराने की जरूरत नहीं है। ईद की छुट्टियों के लिए लिया गया फैसला बांग्लादेश में ईद सबसे बड़ा त्यौहार है। इस दौरान लाखों लोग शहरों से अपने गांव जाते हैं। परिवहन व्यवस्था सुचारू रहे और आम लोगों को यात्रा में कोई दिक्कत न आए, इसलिए सरकार ने तेल की राशनिंग खत्म करने का फैसला लिया है। डीजल की उपलब्धता बढ़ने से बसों और अन्य वाहनों को ईंधन मिलने में आसानी होगी। क्या है भारत-बांग्लादेश फ्रेंडशिप पाइपलाइन? लंबाई: यह पाइपलाइन करीब 131.5 किलोमीटर लंबी है। विस्तार: इसका 5 किमी हिस्सा भारत में और 126.5 किमी हिस्सा बांग्लादेश में है। क्षमता: पाइपलाइन के जरिए सालाना 10 लाख मीट्रिक टन डीजल भेजा जा सकता है। फायदा: इससे परिवहन की लागत कम होती है और कार्बन फुटप्रिंट भी घटता है। ये खबर भी पढ़ें… भारत ने बांग्लादेश को 5,000 टन डीजल भेजा: ईरान-इजराइल युद्ध के बीच नुमालीगढ़ रिफाइनरी से सप्लाई शुरू, सालाना 1.80 लाख टन सप्लाई का है समझौता मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव की वजह से दुनियाभर में एनर्जी पर संकट मंडरा रहा है, ऐसे में भारत ने असम की नुमालीगढ़ रिफाइनरी से क्रॉस-बॉर्डर पाइपलाइन के जरिए बांग्लादेश को डीजल भेजना शुरू कर दिया है। बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPC) के चेयरमैन मोहम्मद रेजानुर रहमान ने बताया कि मंगलवार तक करीब 5,000 टन डीजल की पहली खेप बांग्लादेश पहुंच गई है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Bangladesh Imports 45,000 Tonnes Diesel from India by April 2026 via Friendship Pipeline

Hindi News Business Bangladesh Imports 45,000 Tonnes Diesel From India By April 2026 Via Friendship Pipeline | Fuel Supply Resumed नई दिल्ली2 घंटे पहले कॉपी लिंक बांग्लादेश ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत से अतिरिक्त डीजल इम्पोर्ट करने का फैसला किया है। अप्रैल तक भारत से कुल 45,000 टन डीजल बांग्लादेश पहुंचेगा। इसमें से 5,000 टन की पहली खेप पहुंच चुकी है, जबकि अगली खेप 18 या 19 मार्च तक पहुंचने की उम्मीद है। बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPC) के जनरल मैनेजर (ऑपरेशंस) मोहम्मद मुर्शिद हुसैन आजाद ने बताया कि 40,000 टन अतिरिक्त डीजल के इम्पोर्ट का प्रस्ताव मिल चुका है। लेटर ऑफ क्रेडिट (LC) और अन्य फॉर्मेलिटीज पूरी होते ही यह खेप भी अप्रैल तक आ जाएगी। बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद रुकी थी सप्लाई भारत और बांग्लादेश के बीच डीजल की सप्लाई को आसान बनाने के लिए मार्च 2023 में ‘भारत-बांग्लादेश फ्रेंडशिप पाइपलाइन’ (IBFP) का उद्घाटन किया गया था। इसका उद्घाटन तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना और भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी ने वर्चुअली किया था। इससे पहले डीजल की सप्लाई रेल वैगनों के जरिए होती थी, जो काफी खर्चीली और समय लेने वाली प्रक्रिया थी। हालांकि, पिछले साल बांग्लादेश में हुए राजनीतिक बदलाव और मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान इस पाइपलाइन से सप्लाई रुक गई थी। तारिक रहमान सरकार के आते ही बदली स्थिति बांग्लादेश में हाल ही में हुए चुनावों के बाद जब प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार ने सत्ता संभाली, तो भारत के साथ ऊर्जा सहयोग फिर से पटरी पर लौट आया है। पिछले कुछ दिनों में ही पाइपलाइन के जरिए 5,000 टन डीजल की सप्लाई फिर से शुरू कर दी गई है। यह डीजल भारत की सरकारी कंपनी ‘नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड’ (NRL) से सीधे बांग्लादेश के पार्बतीपुर डिपो भेजा जा रहा है। भारत-बांग्लादेश फ्रेंडशिप पाइपलाइन नुमालीगढ़ रिफाइनरी से शुरू होकर उत्तरी बांग्लादेश के दिनाजपुर जिले के पार्बतीपुर डिपो तक जाती है। पश्चिम एशिया में तनाव से बढ़ी थी तेल की किल्लत पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और इजराइल-ईरान जंग के कारण बांग्लादेश में ईंधन की कमी की आशंका पैदा हो गई थी। इसके चलते पेट्रोल पंपों पर भारी भीड़ जमा होने लगी थी और लोग पैनिक बाइंग कर रहे थे। स्थिति को संभालने के लिए सरकार ने तेल की बिक्री पर राशनिंग (सीमित बिक्री) लागू कर दी थी। अब भारत से सप्लाई बहाल होने के बाद सरकार ने यह पाबंदी हटा ली है। अधिकारियों का कहना है कि अब देश में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और घबराने की जरूरत नहीं है। ईद की छुट्टियों के लिए लिया गया फैसला बांग्लादेश में ईद सबसे बड़ा त्यौहार है। इस दौरान लाखों लोग शहरों से अपने गांव जाते हैं। परिवहन व्यवस्था सुचारू रहे और आम लोगों को यात्रा में कोई दिक्कत न आए, इसलिए सरकार ने तेल की राशनिंग खत्म करने का फैसला लिया है। डीजल की उपलब्धता बढ़ने से बसों और अन्य वाहनों को ईंधन मिलने में आसानी होगी। क्या है भारत-बांग्लादेश फ्रेंडशिप पाइपलाइन? लंबाई: यह पाइपलाइन करीब 131.5 किलोमीटर लंबी है। विस्तार: इसका 5 किमी हिस्सा भारत में और 126.5 किमी हिस्सा बांग्लादेश में है। क्षमता: पाइपलाइन के जरिए सालाना 10 लाख मीट्रिक टन डीजल भेजा जा सकता है। फायदा: इससे परिवहन की लागत कम होती है और कार्बन फुटप्रिंट भी घटता है। ये खबर भी पढ़ें… भारत ने बांग्लादेश को 5,000 टन डीजल भेजा: ईरान-इजराइल युद्ध के बीच नुमालीगढ़ रिफाइनरी से सप्लाई शुरू, सालाना 1.80 लाख टन सप्लाई का है समझौता मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव की वजह से दुनियाभर में एनर्जी पर संकट मंडरा रहा है, ऐसे में भारत ने असम की नुमालीगढ़ रिफाइनरी से क्रॉस-बॉर्डर पाइपलाइन के जरिए बांग्लादेश को डीजल भेजना शुरू कर दिया है। बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPC) के चेयरमैन मोहम्मद रेजानुर रहमान ने बताया कि मंगलवार तक करीब 5,000 टन डीजल की पहली खेप बांग्लादेश पहुंच गई है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
उज्जैन के स्टूडेंट को कनाडा में कार चढ़ाकर मार डाला:कॉलेज के 10-12 छात्रों ने आपसी रंजिश में पीटा; बिजनेस मैनेजमेंट की पढ़ाई करने गए थे

मध्य प्रदेश के उज्जैन के एक छात्र की कनाडा में कॉलेज के छात्रों ने हत्या कर दी। 10-12 युवकों ने पहले छात्र की पिटाई की, फिर उस पर गाड़ी चढ़ा दी। छात्र को गंभीर चोटें आई थीं। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसने दम तोड़ दिया। वारदात 14 मार्च को फोर्ट सेंट जॉन शहर में हुई। जानकारी के मुताबिक मृतक की पहचान गुरकीरत सिंह मनोचा के रूप में हुई है, जो देवास रोड स्थित पार्श्वनाथ सिटी के निवासी थे। वे कनाडा के नॉर्दर्न लाइट्स कॉलेज में बिजनेस मैनेजमेंट के पोस्ट डिग्री डिप्लोमा प्रोग्राम की पढ़ाई कर रहे थे। CM मोहन यादव ने दुख जताते हुए परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है। दोस्त के फोन से परिवार को मिली जानकारी रायपुर निवासी प्रबकीरत सिंह ने बताया कि वह गुरकीरत के बड़े भाई हैं। उन्हें कनाडा में ही रह रहे गुरकीरत के एक दोस्त ने देर रात फोन कर घटना की जानकारी दी। उसने बताया कि गुरकीरत की मौत हो गई है। इसके बाद प्रबकीरत सिंह ने परिवार को सूचना दी। स्थानीय पुलिस और अस्पताल से संपर्क किया। देखिए, दो तस्वीरें… मारपीट के बाद गाड़ी चढ़ाकर हत्या की गई प्रबकीरत सिंह ने बताया कि गुरकीरत वॉलमार्ट में काम करते थे। ड्यूटी खत्म होने के बाद नॉर्दर्न लाइट्स कॉलेज के कुछ छात्र उन्हें अपने साथ ले गए थे। छात्रों के बीच पहले से किसी बात को लेकर विवाद बताया जा रहा है। झगड़े के दौरान गुरकीरत भी उसमें फंस गए। कुछ युवकों ने उनके साथ मारपीट की और उन पर गाड़ी चढ़ा दी, जिससे उनकी मौत हो गई। वारदात में 10-12 युवक शामिल थे उन्होंने बताया कि वारदात में करीब 10-12 युवक शामिल थे। स्थानीय पुलिस ने शुरुआती कार्रवाई में 7-8 लोगों को हिरासत में लिया, हालांकि बाद में उनके वकील के पहुंचने पर उन्हें छोड़ दिया गया। पुलिस ने अस्पताल में शव की पहचान करवाई, जिसमें पुष्टि हुई कि मृतक गुरकीरत सिंह मनोचा ही हैं। तीन सप्ताह में भारत लाया जाएगा शव प्रबकीरत सिंह ने बताया कि कनाडा पुलिस पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है, जिसके बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। गुरकीरत के पार्थिव शरीर को भारत लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके लिए करीब तीन सप्ताह का समय बताया गया है। परिवार ने सरकार से शव को जल्द भारत लाने में मदद की अपील की है। आखिरी बार शुक्रवार को पिता से बातचीत परिजनों के मुताबिक, घटना से पहले शुक्रवार को उनकी आखिरी बार अपने पिता गुरजीत सिंह मनोचा से बात हुई थी। उस समय उनके पिता दिल्ली से उज्जैन लौट रहे थे। वे दिल्ली में आयोजित एक फूड एग्जीबिशन देखने गए थे, जिसको लेकर गुरकीरत से सामान्य बातचीत हुई थी। परिवार ने बताया कि कनाडा में पढ़ाई के नियम के तहत सप्ताह में चार दिन पढ़ाई और तीन दिन नौकरी करना अनिवार्य होता है। गुरकीरत भी इसी व्यवस्था के तहत पढ़ाई के साथ-साथ नौकरी कर रहे थे। गुरकीरत सिंह मनोचा के बारे में जानिए उज्जैन निवासी गुरकीरत सिंह मनोचा ने अपनी स्कूली शिक्षा कार्मेल कॉन्वेंट स्कूल, उज्जैन से पूरी की थी। उन्होंने विक्रम यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया। उच्च शिक्षा के लिए वे कनाडा गए थे। उन्हें कनाडा गए करीब सवा साल ही हुआ था। कनाडा जाने से पहले गुरकीरत अपने पिता के साथ फूड सप्लाई के पारिवारिक व्यवसाय में भी हाथ बंटाते थे। इसी क्षेत्र में उनकी रुचि थी। परिवार के अनुसार उनका भविष्य में कनाडा में ही सेटल होने का प्लान था। पढ़ाई के साथ-साथ वे कनाडा में वॉलमार्ट स्टोर में मैनेजर पद पर कार्यरत थे। ……………………… यह खबर भी पढ़ें उज्जै में युवक ने खुद को गोली मारने से पहले लगाया आखिरी स्टेटस उज्जैन में शनिवार शाम एक युवक ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। घटना नीलगंगा थाना क्षेत्र की बंगाली कॉलोनी में हुई। पुलिस की जांच में सामने आया कि युवक ने आत्महत्या से पहले अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर दो भावुक स्टेटस पोस्ट किए थे। पढ़ें पूरी खबर…
चुनाव तारीखें 2026: दो चरण, 824 पायदान और 17.4 करोड़ की कमाई, जानें 5 राज्यों में होने वाले चुनाव से जुड़ी सभी बड़ी बातें

पश्चिम बंगाल, केरल, असम, तमिलनाडु और पुडुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनावों की तारीखों की मुनादी जारी है। रविवार (15 मार्च) को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने घोषणाओं की घोषणा की। दो चरण, 824 के लिए 17.4 करोड़ क्रिएटर्स निर्णय लेंगे कि इन राज्यों में कौन सा सत्य की बागडोर संभालेगा। आइये जानते हैं 5 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेश में होने वाले चुनाव से जुड़ी सभी बड़ी बातें। बंगाल में दो दशक बाद 2 चरणों में चुनाव हुआ पश्चिम बंगाल में इस बार केवल दो चरणों में वोटिंग होगी। इससे पहले 2021 में राज्य में 8 चरणों में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान हुआ था। यहां पांचों मुख्यमंत्रियों में सबसे ज्यादा 294 लोग शामिल हैं। बहुमत हासिल करने के लिए 148 की जरूरत होगी। इस बार यहां दो चरणों में वोटिंग होगी। पहले चरण में 23 अप्रैल को 152 को शुरुआती चरण में वोटिंग होगी जबकि दूसरे चरण में 29 अप्रैल को 142 को शुरुआती चरण में वोटिंग होगी। 4 मई को एक साथ जारी किया गया वीडियो. करीब दो दशक में यह पहला मौका है, जब यहां दो स्टेज में वोटिंग होगी। 824 प्रारूप का निर्णय 17.4 करोड़ मतदाता मुख्य चुनाव आयुक्त ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि भारत में चुनावी लोकतंत्र का पर्व है। जिन पांच राज्यों में चुनाव हो रहा है, वहां 824 पर वोट डाले जाएंगे। यहां 17.4 करोड़ वोटर्स का फैसला होगा। बताएं कि यह संख्या जर्मनी, कनाडा, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों की कुल जनसंख्या के बराबर है। 20 से अधिक देशों से चुनावी दर्शन अतिथि अतिथि भारत में चुनावी लोकतंत्र का पर्व है। इसकी बानगी चुनाव में देखने को मिलेगी। इन पांचों राज्यों में चुनाव को लेकर शांति भंग होने की जिम्मेदारी भारतीय निर्वाचन आयोग के हाथ में होगी। साथ ही इलेक्शन इसलिए भी खास होने वाला है क्योंकि 20 से अधिक देशों के टेलीकॉम आयोग के दौरे पर भारत आए और इन राज्यों में होने वाले चुनाव को देखा जाए। सर के चुनाव के बाद पांच राज्यों में स्पेशल इंटेंसिव रिव्यू के बाद चुनाव हो रहे हैं जो कई मायनों में खास हैं। वैज्ञानिक है कि पश्चिम बंगाल में एस. वहीं, असम में भी एसआर वाईज स्पेशल रिवीनज को लेकर विवाद खड़ा हो गया था. हर दो घंटे में वोट वोट परसेंटेज अपलोड करें सभी मतदान प्रतिशत पर सभी मतदान प्रतिशत अपलोड करें और चुनाव समाप्त होने के तुरंत बाद मतदान के आंकड़े अपलोड करें। 2.19 लाख पोलिंग बूथ पर मतदान होगा मुख्य टेलीकॉम कमिश्नर ने चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेशों के बारे में बताया, 2.19 लाख वोट पर वोट डाला जाएगा। यहां 25 लाख चुनाव अधिकारियों की होगी धूम। असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में प्रति मतदान केंद्र पर टोक्यो की औसत संख्या 750-900 है। मतदान केंद्र के अंदर नहीं ले जा सकता मोबाइल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि मतदान केंद्र के अंदर मोबाइल ले जाने की अनुमति नहीं होगी, इसे मतदान केंद्र के बाहर ही रखना होगा। वोट के बाद अपना मोबाइल वापस ले फाइन. किस प्रकार का समर्पण? तमिलनाडु में कुल 234 भाग हैं, जहां द्रमुक नेता एम.के. मॉडल सात मई, 2021 से सीएम हैं। पश्चिम बंगाल में कुल 294 विधानसभाएं हैं, जहां 2011 से सत्ता में हैं। केरल में कुल 140 दल शामिल हैं, जहां 2016 में विपक्षी नेता पिनराई विजयन से सीएम और वाम डेमोक्रेटिक मोर्चा (एल एलजेके) सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं। असम में 126 सीटें हैं, हिमंत विश्व शर्मा 2021 से मुख्यमंत्री हैं। पुडुचेरी के मुख्यमंत्री एन. रंगासामी 2021 से सत्ता में हैं। केंद्र शासित प्रदेश में कुल 33 अतिथि हैं, केंद्र द्वारा मनोनीत तीन सदस्य शामिल हैं। चुनाव की तारीखें 2026: असम, केरल और पुदुचेरी में 9 अप्रैल को चुनाव, बंगाल समेत देखें पांचों राज्यों का पूर्ण चुनाव कार्यक्रम (टैग्सटूट्रांसलेट)भारत का चुनाव आयोग(टी)पांच राज्यों के चुनाव(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)विधानसभा चुनाव 2026(टी)तमिलनाडु चुनाव(टी)असम चुनाव(टी)केरल चुनाव(टी)पुडुचेरी चुनाव(टी)ममता बनर्जी(टी)एमके स्टालिन(टी)हिमंत बिस्वा सरमा(टी)भारतीय लोकतंत्र(टी)विधानसभा चुनाव 2026(टी)चुनाव आयोग(टी)पांच राज्यों के चुनाव(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)तमिलनाडु चुनाव(टी)असम चुनाव(टी)केरल चुनाव(टी)पुडुचेरी चुनाव
59 की उम्र में भी 30 का दिखता है ये शख्स, महंगी क्रीम नहीं, रोज इन फूड्स को खाकर स्किन को बनाया है ग्लोइंग

Last Updated:March 15, 2026, 18:51 IST आजकल लोग बढ़ती उम्र के साथ स्किन को यंग और ग्लोइंग बनाए रखने के लिए तरह-तरह की महंगी क्रीम और ट्रीटमेंट का सहारा लेते हैं. लेकिन 59 साल के एक इन्फ्लुएंसर ने बताया कि असली एंटी-एजिंग सीक्रेट महंगे प्रोडक्ट्स नहीं, बल्कि सही डाइट और हेल्दी लाइफस्टाइल है. उनका कहना है कि कुछ खास सुपरफूड्स को रोज की डाइट में शामिल करके स्किन को लंबे समय तक यंग और हेल्दी रखा जा सकता है. ख़बरें फटाफट इन्फ्लुएंसर एडसन ब्रांडाओ 50 की उम्र में लगते हैं यंग. 59 साल की उम्र में भी 30 जैसा दिखने वाले एक इन्फ्लुएंसर ने हाल ही में बताया कि उनकी यंग और ग्लोइंग स्किन का सबसे बड़ा सीक्रेट कोई महंगी क्रीम नहीं, बल्कि सही डाइट और हेल्दी लाइफस्टाइल है. उनका मानना है कि स्किन की असली चमक बाहर से नहीं बल्कि शरीर के अंदर से आती है. इसलिए वह रोजमर्रा के खाने में ऐसे फूड्स शामिल करते हैं जो स्किन को पोषण, हाइड्रेशन और इलास्टिसिटी देने में मदद करते हैं. इन्फ्लुएंसर एडसन ब्रांडाओ अक्सर सोशल मीडिया पर बताते हैं कि लोग उन्हें 59 की उम्र में भी 30 साल का समझ लेते हैं. उनके मुताबिक स्किन को यंग रखने के लिए किसी एक जादुई उपाय पर भरोसा नहीं करना चाहिए, बल्कि डाइट, एक्सरसाइज और सही लाइफस्टाइल का कॉम्बिनेशन जरूरी है. खासतौर पर एंटीऑक्सीडेंट, ओमेगा-3 और विटामिन से भरपूर फूड्स स्किन को एजिंग से बचाने में अहम भूमिका निभाते हैं. View this post on Instagram
पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: बंगाल में 8 की जगह अब सिर्फ 2 चरणों में चुनाव, ममता बनर्जी के लिए कितनी मुश्किल? परीक्षण की राय जानें

बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 का बिगुल बज चुका है। चुनाव आयोग ने रविवार को राज्य की तारीखों का ऐलान कर दिया है. राज्य में दो चरणों में चुनाव हो रहे हैं. पिछली बार यहां 8 चरणों में नामांकन कार्यक्रम आयोजित हुआ था। ऐसे में माना जा रहा है कि बंगाल में दो चरणों में होने वाला चुनाव वर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए मुश्किल साबित हो सकता है। यहां 294 प्रधानमंत्रित्व होंगे। पहले चरण की वोटिंग 23 अप्रैल को और दूसरे चरण की वोटिंग 29 अप्रैल को होगी। इसके अलावा 4 मई को चुनाव परिणाम आएंगे। इस चुनाव में बीजेपी से कड़ी टक्कर मिल सकती है। राज्य में कई समस्याएं से जुड़ी हैं ममता बनर्जी: स्कॉचर्स दो चरणों में चुनाव में ममता बनर्जी के लिए मुश्किल काम हो सकता है। ऐसे उदाहरणों का फेल है. वरिष्ठ पत्रकार जनसंपर्क मणि तिवारी ने कहा कि यह चुनाव ममता बनर्जी के लिए चुनौती से पहले बना है। वह कई सारी समस्याओं से जूझ रही है। इस राज्य में वह पिछले 15 वर्षों से मुख्यमंत्री और पर्वतीय सरकार इस राज्य का शासन प्रशासन प्रणाली देख रही है। ऐसे प्राकृतिक रूप से एंटी इंस्टालमेंट या विरोधी लहर की स्थिति में वृद्धि होती है। हालाँकि, पिछले साल 8 चरणों के चुनाव में ममता बनर्जी की आलोचना की गई थी। लेकिन तब 8 चरणों का फ़ायदा ही मिला था। इनके तंत्र को इधर से उधर ले जाने का मौका मिल गया था। इस बार चुनाव आयोग की पूर्ण समीक्षा जब आई थी तो दल ने दो चरणों में चुनाव की मांग की थी। लेकिन राहुल ने इस मुद्दे पर एक शब्द भी नहीं कहा था. ये ममता के लिए एक चुनौती है, क्योंकि चुनाव पर एक साथ इतनी छूट है। 6 दिनों के अंतर में दो चरणों में अलग-अलग 152 और 142 पर चुनाव होना है, एक साथ इतने सालों में चुनाव होना उनके लिए मुश्किल हो रहा है। ममता बनर्जी कई महीनों में अर्थशास्त्री मूड में: प्रशिक्षु इसके अलावा वरिष्ठ पत्रकार आदेश रावल ने कहा है कि ममता बनर्जी कई महीनों से चुनाव के मूड में हैं। पिछले कुछ दिनों में कैसे राज्य में एचडी बनाम पुलिस का झगड़ा हुआ था। इसके बाद नेपोलियन पूर्वी राज्य अमेरिका रवाना हो गया। लेकिन बीजेपी के सामने राज्य में चुनौती होती है. मतलब पूरा चुनाव मोदी-अमित शाह बनाम ममता बनर्जी होता है। बीजेपी के पास कोई ऐसा स्थानीय नेता नहीं है, जिसका नाम ममता बनर्जी के बराबर हो। उन्होंने कहा कि चरण एक प्रौद्योगिकी की खोज है. इसका फ़ायदा या नुकसान बाद में समझ आएँ। इसके अलावा 8 चरणों की तुलना में दो चरणों में चुनाव का अंतर वोट और तीसरे चरण के बाद नजर आना। पिछले साल बीजेपी ने ममता बनर्जी के खिलाफ अक्रमिक चुनावी लड़ाई लड़ी थी. बीजेपी की खास बात ये है कि जबतक नतीजे नहीं आते बीजेपी तबतक चुनाव लड़ती है. यहां ममता बनर्जी इंडिया एलायंस के एक ऐसे नेता हैं, जो अपने उग्र आंदोलन के लिए मशहूर हैं। उनकी आंतरिक क्षमता बीजेपी से लड़ने की है। ऐसे ही जब बिहार चुनाव के नतीजे आए तो उसके बाद से ही चर्चा शुरू हो गई कि क्या बीजेपी की ओर से ममता बनर्जी को हरा दर्जा दिया जाएगा? ममता बनर्जी वास्तव में ऐसे नेता हैं, जो बीजेपी के पिच पर विक्रेता खेलती हैं और उन्हें कड़ी टक्कर देती हैं। दो चरणों का नुकसान होगा, लाभ होगा यह अलग विषय है। लेकिन राजनीतिक तौर पर ममता बनर्जी बीजेपी को कड़ी टक्कर देने वाली हैं. यह भी पढ़ें: चुनाव तिथियां 2026: असम, केरल और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को चुनाव, बंगाल सहित देखें पांचों राज्यों का फुल इलेक्शन प्लान
बंगाल में 23, 29 अप्रैल को मतदान: सरगर्मी के बीच टीएमसी बनाम भाजपा द्विध्रुवी मुकाबले के लिए मंच तैयार | चुनाव समाचार

आखरी अपडेट:मार्च 15, 2026, 18:49 IST भाजपा की सीमांत उपस्थिति से लेकर तृणमूल कांग्रेस के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी के रूप में उभरने ने राजनीतिक समीकरण को मौलिक रूप से बदल दिया है भाजपा और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी दोनों के लिए, चुनाव केवल अगली सरकार बनाने के बारे में नहीं है। (छवि: पीटीआई/फ़ाइल) पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों की घोषणा के साथ, द्विध्रुवीय मुकाबला राज्य में सबसे परिणामी राजनीतिक लड़ाई में से एक के रूप में आकार ले रहा है। पश्चिम बंगाल 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में मतदान होगा। वोटों की गिनती 4 मई को होगी। भाजपा और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी दोनों के लिए, चुनाव केवल अगली सरकार बनाने के बारे में नहीं है। इसमें राजनीतिक अस्तित्व, वैचारिक और राष्ट्रीय स्थिति और राज्य की राजनीति की दिशा के बारे में गहरे निहितार्थ हैं। चुनाव तिथियों 2026 की घोषणा के लाइव अपडेट यहां देखें पिछले एक दशक में, पश्चिम बंगाल एक बड़े पैमाने पर पूर्वानुमानित चुनावी स्थान से हटकर भारत में सबसे तीव्र प्रतिस्पर्धा वाले राज्यों में से एक बन गया है। भाजपा की सीमांत उपस्थिति से लेकर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी के रूप में उभरने ने राजनीतिक समीकरण को मौलिक रूप से बदल दिया है। साथ ही, बार-बार चुनौतियों के बावजूद राज्य पर ममता बनर्जी की पकड़ लचीली बनी हुई है, जिससे आने वाला चुनाव इस बात की परीक्षा बन जाएगा कि क्या प्रभुत्व जारी रह सकता है, या फीका पड़ सकता है। सत्तारूढ़ दल द्वारा कल्याणकारी योजनाओं और शासन के दावों के प्रतिस्पर्धी आख्यानों और राजनीतिक हिंसा, भ्रष्टाचार और शासन की विफलताओं पर विपक्ष के आरोपों के बीच भी यह प्रतियोगिता सामने आती है। इस मिश्रण में मतदाता सूचियों का चल रहा विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) भी शामिल है, जिसने चुनावों से पहले प्रशासनिक जांच और राजनीतिक बहस दोनों को जन्म दिया है। यह भी पढ़ें | तमिलनाडु में 23 अप्रैल को मतदान: फिर से DMK बनाम AIADMK, लेकिन क्या ‘वाइल्ड कार्ड’ विजय की TVK जोड़ सकती है नया मोड़? अस्तित्व की एक परीक्षा भाजपा के लिए, पश्चिम बंगाल में दांव सीटों के अंकगणित से परे है। पार्टी ने राज्य में अपने राजनीतिक पदचिह्न का विस्तार करने में भारी निवेश किया है, जिससे बंगाल को अपनी बड़ी राष्ट्रीय राजनीतिक रणनीति में प्रमुख युद्धक्षेत्रों में से एक के रूप में स्थापित किया गया है। 2019 के आम चुनाव और फिर 2021 के विधानसभा चुनाव में प्रमुख विपक्ष के रूप में उभरने के बाद, पार्टी को अब उस गति को बनाए रखने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। राज्य की भौगोलिक स्थिति रणनीतिक संवेदनशीलता की एक परत भी जोड़ती है। पश्चिम बंगाल बांग्लादेश के साथ एक लंबी और छिद्रपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करता है, जो सीमा पार आंदोलन, सुरक्षा और जनसांख्यिकीय चिंताओं जैसे मुद्दों को बड़े राजनीतिक प्रवचन का हिस्सा बनाता है। भाजपा के लिए, जिसने बार-बार सीमा सुरक्षा और नागरिकता संबंधी बहसों को आगे बढ़ाया है, चुनाव में ऐसे निहितार्थ हैं जो राष्ट्रीय राजनीतिक आख्यानों के साथ जुड़ते हैं। यह भी पढ़ें | केरलम में 9 अप्रैल को मतदान होगा: एलडीएफ ऐतिहासिक सफलता चाहता है, यूडीएफ का लक्ष्य सत्ता में वापसी है क्योंकि भाजपा विस्तार करना चाहती है व्यक्तिगत लड़ाई हालाँकि, बनर्जी के लिए, दांव बेहद व्यक्तिगत और राजनीतिक हैं। लगातार चौथे कार्यकाल के लिए, यह चुनाव मुख्यमंत्री के रूप में उनके लंबे कार्यकाल और कल्याणकारी योजनाओं और जमीनी स्तर की राजनीतिक लामबंदी के आसपास बनाए गए शासन मॉडल पर जनमत संग्रह का प्रतिनिधित्व करता है। एक जीत न केवल राज्य के भीतर उनकी स्थिति को मजबूत करेगी बल्कि राष्ट्रीय विपक्षी राजनीति में भी उनकी स्थिति को मजबूत कर सकती है। जीत का अंतर भी उतना ही महत्वपूर्ण हो सकता है. एक निर्णायक जनादेश भारतीय राजनीति में सबसे टिकाऊ क्षेत्रीय नेताओं में से एक के रूप में उनकी छवि को मजबूत कर सकता है और संभावित रूप से एक बड़ी राष्ट्रीय भूमिका के बारे में चर्चा को पुनर्जीवित कर सकता है। इसके विपरीत, एक करीबी मुकाबला राज्य के भीतर राजनीतिक संरेखण को नया आकार दे सकता है। जैसे-जैसे अभियान तेज़ हो रहा है, कल्याणकारी लाभ और पहचान की राजनीति से लेकर राजनीतिक हिंसा के आरोपों तक के मुद्दे कथा पर हावी होने की संभावना है। मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया और उससे निकलने वाले आंकड़े भी राजनीतिक संदेश को प्रभावित करते रह सकते हैं। यह भी पढ़ें | असम में 9 अप्रैल को मतदान: क्या कांग्रेस के विरोध के बीच सीएए हिमंत सरमा के दूसरे कार्यकाल की राह तय करेगा? जिस राज्य को कड़े चुनावों के लिए जाना जाता है, वहां आने वाला वोट सिर्फ पश्चिम बंगाल में अगली सरकार का निर्धारण नहीं करेगा। यह सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और उसके प्रमुख प्रतिद्वंद्वी, भाजपा दोनों के राजनीतिक प्रक्षेप पथ को भी फिर से परिभाषित कर सकता है। पहले प्रकाशित: मार्च 15, 2026, 16:41 IST समाचार चुनाव बंगाल में 23, 29 अप्रैल को मतदान: सरगर्मी के बीच टीएमसी बनाम भाजपा द्विध्रुवी मुकाबले के लिए मंच तैयार अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव(टी)पश्चिम बंगाल की राजनीति(टी)बीजेपी बनाम टीएमसी(टी)ममता बनर्जी(टी)भारतीय जनता पार्टी(टी)तृणमूल कांग्रेस(टी)पश्चिम बंगाल में राजनीतिक लड़ाई(टी)चुनावी सूची संशोधन
Govinda Unmatched Talent; Defends Late Onset

14 मिनट पहले कॉपी लिंक डायरेक्टर डेविड धवन ने कहा है कि उनके साथ काम करने वाले एक्टर्स में गोविंदा अब भी बेस्ट एक्टर हैं। डेविड अपने बेटे वरुण के साथ द ग्रेट इंडियन कपिल शो के ग्रैंड फिनाले में मेहमान बनकर पहुंचे हमान बनकर पहुंचे थे। शो के दौरान डेविड ने अपने पुराने दोस्त गोविंदा की जमकर तारीफ की। उन्होंने गोविंदा के सेट पर लेट आने की खबरों पर उनका बचाव किया और और बताया कि काम के टैलेंट के मामले में उनका कोई मुकाबला नहीं है। गोविंदा के लेट आने पर किया बचाव डेविड धवन ने गोविंदा के सेट पर लेट आने के पुराने विवादों पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा, लोग बोलते हैं ना कि वो सेट पर देर से आता है, आज कौन लेट नहीं आता? वो आता है और अपना काम पूरी तरह खत्म करके जाता है। डेविड ने आगे कहा कि उन्होंने बॉलीवुड के कई बड़े स्टार्स के साथ काम किया है, लेकिन उन सबमें गोविंदा उन्हें आज भी बेस्ट लगते हैं। वरुण बोले- पापा आज भी ची ची भैया को याद करते हैं एपिसोड के दौरान वरुण धवन ने बताया कि उनके पिता आज भी गोविंदा के काम के बहुत बड़े फैन हैं। वरुण ने कहा, आज भी जब कोई नया सीन लिखा जाता है, तो पापा को ची ची भैया (गोविंदा) की याद आती है। वे मुझसे कहते हैं कि अगर गोविंदा यहां होते, तो वे इसे कैसे करते? वे अक्सर मेरी तुलना सलमान खान, गोविंदा और अनिल कपूर से करते हैं। वरुण ने मजाकिया अंदाज में यह भी बताया कि अगर सेट पर कोई एक्टर खराब काम करे, तो डेविड माइक पर ही उसे ‘ठंडा एक्टर’ बोल देते हैं। पार्टनर फिल्म का सुनाया दिलचस्प किस्सा डेविड ने फिल्म ‘पार्टनर’ की शूटिंग का एक वाकया साझा किया। उन्होंने बताया कि गोविंदा ने चार पन्नों का लंबा सीन सिर्फ एक बार पढ़ा और उसे एक ही टेक में पूरा कर दिया। डेविड ने कहा, आप यकीन नहीं करेंगे, वह चार पन्नों का सीन था। मैंने शॉट सेट करना शुरू किया तो उसने कहा कि अभी सेट मत करो, बस मुझे परफॉर्म करते देखो। उस सीन में उसने ऐसी कलाबाजियां दिखाईं कि मैं दंग रह गया। गोविंदा वाकई कमाल का है। चश्मे बद्दूर’ फिल्म ने बढ़ाई थी कड़वाहट डेविड और गोविंदा ने साथ में ‘कुली नंबर 1’, ‘साजन चले ससुराल’ और ‘हीरो नंबर 1’ जैसी कई ब्लॉकबस्टर फिल्में दीं। हालांकि, बाद में इनके रिश्तों में खटास आ गई थी। गोविंदा ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया था कि उन्होंने डेविड को ‘चश्मे बद्दूर’ फिल्म का आइडिया दिया था, लेकिन डेविड ने उन्हें बिना बताए वह फिल्म किसी और के साथ बना ली। गोविंदा को इस बात का बुरा लगा कि उनके पुराने दोस्त ने उन्हें इस बारे में फोन तक नहीं किया। इसके बाद से दोनों के बीच दूरियां बढ़ गईं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔









