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बंद फोन, लैपटॉप पर भी आपके काम करेगा एआई:गूगल-ओपन एआई के बीच प्रतिस्पर्धा, जेमिनाई के नए एजेंट लाॅन्च‎

बंद फोन, लैपटॉप पर भी आपके काम करेगा एआई:गूगल-ओपन एआई के बीच प्रतिस्पर्धा, जेमिनाई के नए एजेंट लाॅन्च‎

गूगल अब केवल सर्च इंजन कंपनी नहीं रहना चाहती। उसका अगला लक्ष्य कंज्यूमर एआई की दुनिया में वही दबदबा बनाना है, जो कभी इंटरनेट सर्च में था। और अब ऐसा लगने लगा है कि वह ओपनएआई से एआई की दौड़ में ताज छीन सकती है। 19 मई को गूगल ने नए जेमिनाई 3.5 फ्लैश मॉडल से चलने वाले एआई एजेंट्स की श्रृंखला पेश की। इनमें ऐसे एआई कोडर्स भी शामिल हैं जो ओपनएआई और एंथ्रोपिक के टूल्स को चुनौती देने के लिए बनाए गए हैं। गूगल का फोकस अब केवल चैटबॉट नहीं, बल्कि “काम करने वाले एआई’ पर है। कंपनी ऐसे एजेंट्स ला रही है जो यूजर के फोन या लैपटॉप बंद करने के बाद भी काम जारी रख सकेंगे। “जेमिनाई स्पार्क’ नाम का एजेंट ईमेल स्कैन करने, ग्रुप ट्रिप आयोजित करने जैसे कई डिजिटल काम अपने आप निपटा सकेगा। वहीं गूगल सर्च में जोड़े जा रहे “इंफॉर्मेशन एजेंट्स’ स्पोर्ट्स टूर्नामेंट्स, शॉपिंग सेल्स और शेयर बाजार पर नजर रखेंगे। उसके कुछ एजेंट सीधे जेमिनाई ऐप में होंगे, जिसे हर महीने करीब 90 करोड़ लोग इस्तेमाल कर रहे हैं। कुछ एआई फीचर्स गूगल सर्च में जुड़ेंगे। इससे ओपनएआई पर दबाव बढ़ सकता है। दरअसल, गूगल की तेजी ने ओपनएआई को पहले ही सतर्क कर दिया था। नवंबर में जेमिनाई- 3 मॉडल आने के बाद ओपनएआई के सीईओ सैम आल्टमैन ने कर्मचारियों के लिए “कोड रेड’ इमरजेंसी जारी की थी। इसके बाद कंपनी ने अपने कोडिंग एजेंट्स पर फोकस बढ़ाया। लेकिन जेमिनाई 3.5 फ्लैश और नए एआई एजेंट्स ने फिर चैटजीपीटी की बढ़त पर सवाल खड़े कर दिए हैं। गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट इनकॉर्पोरेशन का बाजार मूल्य जनवरी के 382 लाख करोड़ रु. से बढ़कर अब लगभग 478 लाख करोड़ रु. तक पहुंच गया है। हालांकि इस सफलता के साथ चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। सीईओ सुंदर पिचई के मुताबिक एआई उपयोग मापने वाले टोकन्स की संख्या एक साल पहले 480 खरब थी, जो अब बढ़कर हर महीने 3.2 क्वाड्रिलियन (3.2 के बाद 15 जीरो) हो गई है। इसका मतलब है कि कम्प्यूटिंग कॉस्ट तेजी से बढ़ रही है। खर्च घटाने के लिए गूगल एआई सेवाओं में विज्ञापन जोड़ सकती है। फिलहाल जेमिनाई एप में विज्ञापन नहीं हैं, लेकिन गूगल ने सर्च सेवाओं के एआई-जनरेटेड जवाबों में विज्ञापन दिखाने शुरू कर दिए हैं। यही संकेत है कि आने वाले समय में एआई केवल तकनीकी लड़ाई नहीं, बल्कि दुनिया का सबसे बड़ा विज्ञापन और डेटा कारोबार भी बनने जा रहा है। पूंजी खर्च छह गुना बढ़ेगा‎
एआई टोकन जनरेट करने के लिए कंप्यूटिंग‎पॉवर लगती है। इस कारण गूगल का पूंजी‎खर्च चार साल पहले से छह गुना बढ़कर ‎इस साल 18.18 लाख करोड़ रु. हो जाएगा। ‎चिप से लेकर बिजली के दाम बढ़ने से यह ‎खर्च और भी बढ़ सकता है।‎

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एआई टोकन जनरेट करने के लिए कंप्यूटिंग‎पॉवर लगती है। इस कारण गूगल का पूंजी‎खर्च चार साल पहले से छह गुना बढ़कर ‎इस साल 18.18 लाख करोड़ रु. हो जाएगा। ‎चिप से लेकर बिजली के दाम बढ़ने से यह ‎खर्च और भी बढ़ सकता है।‎

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