Iran War Fears: Crude Oil Hits $100, Rupee Crosses 92

Hindi News Business Iran War Fears: Crude Oil Hits $100, Rupee Crosses 92 | FPIs Exit Indian Market मुंबई1 घंटे पहले कॉपी लिंक फरवरी में FPI ने बाजार में 22,615 करोड़ रुपए का निवेश किया था, जो पिछले 17 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर था। भारतीय शेयर बाजार में फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट (FPIs) की बिकवाली लगातार जारी है। मार्च के शुरुआती दो हफ्तों में विदेशी निवेशकों ने घरेलू इक्विटी बाजार से 52,704 करोड़ रुपए निकाले हैं। यह बिकवाली ऐसे समय में हुई है, जब मिडल ईस्ट में तनाव बढ़ रहा है और कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है। इससे पहले फरवरी महीने में FPIs ने बाजार में 22,615 करोड़ रुपए का निवेश किया था, जो पिछले 17 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर था। लेकिन मार्च की शुरुआत से ही विदेशी निवेशक हर ट्रेडिंग दिन पर नेट सेलर्स बने हुए हैं। कच्चे तेल और रुपए ने सेंटिमेंट बिगाड़ा बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस भारी बिकवाली के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण हैं। एंजेल वन के सीनियर फंडामेंटल एनालिस्ट वकारजावेद खान के मुताबिक, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज रूट में सप्लाई प्रभावित होने के डर से ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चला गया है। इससे निवेशकों ने जोखिम वाले एसेट्स से पैसा निकालकर सुरक्षित विकल्पों में लगाना शुरू कर दिया है। इसके अलावा डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपए के 92 के स्तर के पार पहुंचना और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने भी दबाव बनाया है। भारत की जगह चीन के बाजार में पैसा लगा रहे निवेशक जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार ने कहा कि पिछले 18 महीनों में भारतीय बाजार ने विकसित और अन्य उभरते बाजारों के मुकाबले कम रिटर्न दिया है। इस वजह से विदेशी निवेशकों का रुझान भारत के प्रति कम हुआ है। उनके अनुसार, दक्षिण कोरिया, ताइवान और चीन इस समय भारत की तुलना में ज्यादा आकर्षक लग रहे हैं, क्योंकि हालिया गिरावट के बाद वहां वैल्युएशन सस्ता है और कॉर्पोरेट अर्निंग की संभावनाएं बेहतर दिख रही हैं। साल 2025 में IT-FMCG सेक्टर में सबसे ज्यादा बिकवाली हुई साल 2025 में अब तक सेक्टर-वार देखें तो IT सेक्टर पर सबसे ज्यादा मार पड़ी है। IT सेक्टर: करीब 74,700 करोड़ रुपए निकाले गए। इसकी वजह रेवेन्यू ग्रोथ में कमी और ग्लोबल टेक खर्चों में गिरावट है। FMCG सेक्टर: शहरी खपत में कमी और मार्जिन के दबाव के चलते 36,800 करोड़ रुपए की निकासी हुई। पावर और हेल्थकेयर: इन सेक्टर्स से 24,000 से 26,000 करोड़ रुपए की बिकवाली की गई। ऑयल एंड गैस-मेटल्स जैसे सेक्टर्स में निवेश बढ़ाया हालांकि, निवेशकों ने टेलीकॉम, ऑयल एंड गैस, मेटल्स और केमिकल्स जैसे सेक्टर्स में अपना निवेश बढ़ाया है, जो यह दर्शाता है कि पैसा अब डोमेस्टिक वैल्यू और कमोडिटी शेयरों की ओर शिफ्ट हो रहा है। बैंकिंग शेयरों में गिरावट से घरेलू निवेशकों के लिए मौका विदेशी निवेशकों की फाइनेंशियल और बैंकिंग शेयरों में की गई बिकवाली ने इन सेक्टर की वैल्युएशन को काफी नीचे ला दिया है। जानकारों का कहना है कि जहां विदेशी निवेशक बाहर निकल रहे हैं। वहीं घरेलू निवेशकों के लिए ये शेयर अब आकर्षक कीमतों पर उपलब्ध हैं। मार्च के सेकंड हाफ के लिए बाजार का रुख अभी भी सतर्क बना हुआ है। चौथी तिमाही में बिकवाली की रफ्तार कम हो सकती है विशेषज्ञों का कहना है कि अगर चौथी तिमाही (Q4) के नतीजे, खासकर बैंकिंग और कंजम्पशन सेक्टर में उम्मीद से बेहतर रहते हैं, तो बिकवाली की रफ्तार कम हो सकती है। लेकिन अगर जियोपॉलिटिकल तनाव और बढ़ता है या तेल की कीमतें और ऊपर जाती हैं, तो बाजार पर दबाव जारी रहेगा। विदेशी पोर्टफोलियो निवेश यानी FPI क्या है? विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) वह निवेश है, जिसमें विदेशी नागरिक या कंपनियां दूसरे देश के शेयर बाजार, बॉन्ड या अन्य वित्तीय संपत्तियों में पैसा लगाते हैं। इनके आने-जाने से शेयर बाजार की चाल तय होती है। ये खबर भी पढ़ें… टॉप-10 कंपनियों की वैल्यू ₹4.48 लाख करोड़ घटी: SBI टॉप लूजर रहा, इसकी वैल्यू ₹89 हजार करोड़ घटी; HDFC बैंक का मार्केट कैप भी घटा मार्केट कैपिटलाइजेशन के लिहाज से देश की 10 सबसे बड़ी कंपनियों की वैल्यू बीते हफ्ते के कारोबार में 4.48 लाख करोड़ रुपए घट गई। इस दौरान SBI की वैल्यू सबसे ज्यादा घटी। SBI का मार्केट कैप 89,306 करोड़ रुपए घटकर ₹9.66 लाख करोड़ पर आ गया। HDFC बैंक का मार्केट कैप 61,715 करोड़ रुपए घटकर ₹12.57 लाख करोड़ पर आ गया। वहीं बजाज फाइनेंस की मार्केट वैल्यू ₹59,082 करोड़ घटकर ₹5.32 लाख करोड़ पर आ गई। इनके अलावा बीते हफ्ते TCS, ICICI बैंक, भारती एयरटेल, रिलायंस इंडस्ट्रीज, LIC, इंफोसिस और HUL का मर्केट कैप भी घटा है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Priyadarshan Defends Rajpal Yadav | 9 Crore Cheque Bounce Bail

32 मिनट पहले कॉपी लिंक फिल्म मेकर प्रियदर्शन अपने पुराने दोस्त और एक्टर राजपाल यादव के बचाव में उतरे हैं। चेक बाउंस मामले में राजपाल को अंतरिम जमानत मिलने के बाद प्रियदर्शन ने उन्हें मासूम बताया है। उन्होंने कहा कि राजपाल किसी के बिछाए जाल फंस गए हैं, लेकिन उनकी सच्चाई को देखते हुए फिल्म इंडस्ट्री के कई लोग उनकी मदद के लिए आगे आए हैं। 12 दिनों तक तिहाड़ जेल में रहने के बाद 17 फरवरी की शाम को रिहा हुए। चेक बाउंस मामले में जेल जा चुके राजपाल राजपाल यादव इन दिनों 9 करोड़ रुपए के चेक बाउंस मामले में कानूनी कार्यवाही का सामना कर रहे हैं। यह मामला उनकी साल 2010 की फिल्म ‘अता पता लापता’ के लिए लिए गए कर्ज से जुड़ा है। राजपाल ने बिजनेसमैन माधव गोपाल अग्रवाल से 5 करोड़ रुपए उधार लिए थे। ब्याज और पेनल्टी के साथ यह रकम अब बढ़कर 9 करोड़ रुपए हो गई है। मामले में राजपाल यादव ने 5 फरवरी को दिल्ली की तिहाड़ जेल में सरेंडर किया था। हाल ही में राजपाल ने कोर्ट में 1.5 करोड़ रुपए जमा कराए हैं, जिसके बाद उन्हें 18 मार्च तक के लिए अंतरिम जमानत दे दी गई है। राजपाल यादव, प्रियदर्शन के निर्देशन की 2 फिल्मों भूत बंगला और हैवान में नजर आने वाले हैं। प्रियदर्शन बोले- राजपाल जैसा कोई सीधा नहीं प्रियदर्शन और राजपाल ने पिछले दो दशकों में कई सुपरहिट फिल्मों में साथ काम किया है। अपनी दोस्ती पर बात करते हुए प्रियदर्शन ने कहा, मैं राजपाल को कई सालों से जानता हूं। मैं कह सकता हूं कि वह अब तक के सबसे मासूम एक्टर हैं। वह इतने सीधे थे कि किसी के जाल में फंस गए। इस कानूनी मामले की वजह से हमारे रिश्ते कभी नहीं बदलेंगे। इंडस्ट्री के लोग मदद के लिए आए साथ डायरेक्टर ने आगे बताया कि राजपाल की नेकदिली की वजह से ही आज लोग उनके साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा, अगर राजपाल की जगह कोई और होता, तो शायद इतने लोग मदद के लिए एक साथ नहीं आते। लोग उनकी मदद इसलिए कर रहे हैं क्योंकि वे जानते हैं कि यह इंसान कितना सच्चा है। उनकी मासूमियत उनके चेहरे और उनके दिल, दोनों में साफ दिखती है। प्रियदर्शन ने बढ़ाई राजपाल यादव की फीस बता दें कि चेक बाउंस केस में फंसे राजपाल यादव की मदद करने के लिए प्रियदर्शन ने उनकी भूत बंगला में फीस बढ़ा दी थी, जिससे उन्हें आर्थिक मदद मिल सके। राजपाल यादव, प्रियदर्शन के निर्देशन की 2 फिल्मों भूत बंगला और हैवान में नजर आने वाले हैं। इससे पहले वो प्रियदर्शन की फिल्मों हंगामा, हंगामा 2, चुप चुपके, भागम भाग, दे दना दन में नजर आ चुके हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
टाइम मैग्जीन वर्ल्ड्स ग्रेटेस्ट प्लेसेस में भारत के 4 स्थान:पर्यटकों को लुभा रहे ‘जोधपुरी स्ट्रॉबेरी खेत’, 7000 फीट की ऊंचाई पर मिल रहा सुकून

पूरी दुनिया में घूमने का क्रेज लगातार बढ़ रहा है। साल 2025 में करीब 1.5 अरब पर्यटकों ने विदेश यात्रा की, जो पिछले साल से 4% अधिक है। इसी उत्साह को देखते हुए ‘टाइम’ मैग्जीन ने दुनिया के 100 द वर्ल्ड्स ग्रेटेस्ट प्लेसेस ऑफ 2026 की सूची जारी की है। इसमें भारत के भी 4 स्थानों को शामिल किया गया है। यह लिस्ट अंतरराष्ट्रीय लेखकों और संवाददाताओं के फीडबैक के आधार पर तैयार की गई है, जिसमें नए और रोमांचक अनुभव देने वाले होटल और संग्रहालयों को प्राथमिकता दी गई है। थार के बीच जोधपुर का ‘म्हारो खेत’, खेती के साथ लग्जरी स्टे जोधपुर। राजस्थान के जोधपुर के बाहरी इलाके में स्थित ‘म्हारो खेत’ थार रेगिस्तान के बीच एग्री-टूरिज्म का शानदार ठिकाना है। 40 एकड़ के रीजेनरेटिव फार्म पर बने इस परिसर में 10 लग्जरी सुइट्स हैं, जो मेहमानों को प्रकृति और खेती के करीब लाते हैं। यहां का मुख्य आकर्षण खेत की ताजी उपज और स्ट्रॉबेरी-अनार के बागान हैं। मेहमान खुद सब्जियां चुनने के साथ कुकिंग लेसन और फार्म वॉक का आनंद ले सकते हैं। भोजन के लिए यहां 3 रेस्टोरेंट्स भी मौजूद हैं। पहाड़ियों में ‘शक्ति प्राण लॉज’, पहुंचने का रास्ता सिर्फ पैदल कुमाऊं। उत्तराखंडके कुमाऊं की पहाड़ियों में स्थित ‘शक्ति प्राण लॉज’ शांति और रोमांच का अनूठा संगम है। 7,000 फीट की ऊंचाई पर बने इस रिट्रीट तक केवल पैदल ही पहुंचा जा सकता है। यहां सौर ऊर्जा से संचालित सिर्फ 7 सुइट्स हैं, जहां से नंदा देवी और पंचाचूली चोटियों के अद्भुत दृश्य दिखते हैं। प्रकृति प्रेमियों के लिए यह जगह खास है, जहां बर्फीली चोटियों के बीच लकड़ी के फायरप्लेस और सुकून भरा वातावरण मिलता है। पहाड़ियों में लीजिए बाघों और ऐतिहासिक मंदिरों का आनंद राजगढ़। मध्य प्रदेश की मणियागढ़ पहाड़ियों में स्थित ‘द ओबेरॉय राजगढ़ पैलेस’ बुंदेला वंश के 350 साल पुराने निवास को रीस्टोर कर बनाया गया भव्य रिसॉर्ट है। झील के किनारे बसे इस रिसॉर्ट की बड़ी खूबी पन्ना नेशनल पार्क के पास इसकी लोकेशन है, जहां सैलानी बाघ और तेंदुए देख सकते हैं। यहां के विशेषज्ञ मेहमानों को रनेह जलप्रपात और केन अभयारण्य की सफारी कराते हैं। साथ ही, पास ही स्थित यूनेस्को धरोहर खजुराहो के प्राचीन मंदिरों की नक्काशी देखने का अवसर भी मिलता है। एएबीबीसीसी: बार नहीं, ड्रिंक्स का म्यूजियम जैसा एक्सपीरियंस नई दिल्ली। दिल्ली के वसंत विहार में स्थित ‘एएबीबीसीसी’ ड्रिंक्स का एक आधुनिक म्यूजियम है। इसकी शुरुआत एक लैब से होती है, जहां जड़ी-बूटियों और शहद जैसी अनोखी सामग्रियों से पेयों को नया स्वाद दिया जाता है। यहां का मेन्यू समय की यात्रा जैसा है, जो बीता कल, आज और आने वाला कल श्रेणियों में बंटा है। इसमें बैंगन भरते जैसे अनूठे कॉकटेल प्रयोग भी शामिल हैं। अंत में एक म्यूजिक लाउंज है, जहां शानदार साउंड क्वालिटी का आनंद ले सकते हैं।
आर माधवन ने फेक अकाउंट को लेकर किया अलर्ट:फैंस से सतर्क रहने की अपील कर कहा– उनसे या उनकी टीम से कोई संबंध नहीं

एक्टर आर माधवन ने शनिवार को लोगों को एक फ्रॉड सोशल मीडिया अकाउंट को लेकर अलर्ट किया, जो सोशल मीडिया पर लोगों से कॉन्टैक्ट करने के लिए उनके नाम का इस्तेमाल कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह अकाउंट उनसे या उनकी टीम से किसी भी तरह जुड़ा नहीं है और इसके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। माधवन ने शनिवार को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर उस फेक हैंडल का स्क्रीनशॉट शेयर किया। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया पर कोई भी अन्य अकाउंट उन्हें रिप्रेजेंट नहीं करता और न ही उनकी ओर से लोगों से बात करता है। उन्होंने कैप्शन में लिखा कि यह व्यक्ति खुद को उनका रिप्रेजेंटेटिव बताकर सोशल मीडिया पर लोगों से संपर्क कर रहा है, जो पूरी तरह फेक है। उन्होंने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। माधवन ने यह भी कहा कि इंस्टाग्राम या किसी भी अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उनके अलावा कोई और अकाउंट उनकी ओर से बात नहीं करता। इस मामले में जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ उचित कदम उठाए जा रहे हैं। फिल्म धुरंधर 2 में नजर आएंगे आर माधवन आर माधवन जल्द ही फिल्म “धुरंधर 2: द रिवेंज” में दिखाई देंगे। यह फिल्म 19 मार्च को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। आदित्य धर के निर्देशन में बनी यह फिल्म “धुरंधर” का सीक्वल है। इसमें माधवन इंटेलिजेंस ब्यूरो के डायरेक्टर अजय सान्याल की भूमिका निभाते नजर आएंगे।
खाली जेब नर्मदा परिक्रमा पर निकले थे राजीव:180 दिन की पैदल यात्रा का समापन; लौटते समय जेब में थे 2800 रुपए

प्रदेश किसान मोर्चा मंत्री और ‘मैं हूं नर्मदा पुत्र’ अभियान के संस्थापक राजीव पटेल की 180 दिवसीय नर्मदा पैदल यात्रा का रविवार को माकड़खेड़ा स्थित वेदांत विला आश्रम में समापन हो गया। इस समापन समारोह को ‘नर्मदा सेवा संकल्प महोत्सव’ के रूप में मनाया गया, जहां लोगों को नर्मदा सेवा के लिए प्रेरित किया गया। इस अवसर पर राजीव पटेल ने अपनी नर्मदा परिक्रमा के अनुभव सभी के साथ साझा किए। मां पर कोई कचरा कैसे डाल सकता है उन्होंने बताया कि वे बिल्कुल खाली जेब इस नर्मदा परिक्रमा पर निकले थे, लेकिन लौटते समय उनकी जेब में 2800 रुपए थे। पटेल ने लोगों से अपील करते हुए कहा, “नर्मदा मैया हैं, तो भला कोई अपनी मां के ऊपर कचरा कैसे डाल सकता है। यह भाव मन में होना चाहिए।” 111 कन्याओं के पूजन से हुई शुरुआत नर्मदा सेवा संकल्प महोत्सव की शुरुआत 111 कन्याओं के पूजन के साथ की गई। इस दौरान परिसर में नर्मदा मैया के जयकारे लगाए गए। कार्यक्रम में पधारे संत समाज और उपस्थित अतिथियों का सम्मान करते हुए उन्हें नर्मदा पुराण भी भेंट की गई। 800 से अधिक कुनबी पटेल समाजजन हुए शामिल कार्यक्रम में मालवा निमाड़ इकाई के 800 से अधिक कुनबी पटेल समाजजन शामिल हुए। सभी ने नर्मदा सेवा संकल्प मिशन की सराहना की। समारोह में पूज्य दंडी स्वामी कांची पीठ आश्रम, सांसद गजेंद्रसिंह पटेल, पूर्व सांसद कृष्णमुरारी मोघे और डॉ. आयुषी भय्यू महाराज देशमुख शामिल रहे। इसके अलावा भाजपा किसान मोर्चा अध्यक्ष जयपाल सिंह चावड़ा, विधायक राजकुमार मेव और सचिन बिरला भी इस महोत्सव का हिस्सा बने। बड़वानी भाजपा जिलाध्यक्ष अजय यादव, जयदीप पटेल, भारती दीदी ठाकुर और रामलाल पटेल सहित कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
AI will help in war, Pentagon’s Deals with US Tech Companies, AI Chatbots to Determine Which Targets Are Struck First

Hindi News International AI Will Help In War, Pentagon’s Deals With US Tech Companies, AI Chatbots To Determine Which Targets Are Struck First न्यूयॉर्क46 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका अब युद्ध की रणनीति में एआई को एक ‘सलाहकार’ के रूप में जोड़ रहा है। – सिम्बॉलिक इमेज युद्ध के मैदान में अब जनरल और सिपाही ही नहीं, बल्कि कंप्यूटर स्क्रीन पर एआई ‘चैटबॉट्स’ भी यह तय करेंगे कि पहले किस दुश्मन पर मिसाइल गिरानी है। अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने हाल ही में एक्सएआई और ओपनएआई के साथ गुप्त सैन्य नेटवर्क में एआई इस्तेमाल के लिए डील की है। पेंटागन अब युद्ध की रणनीति में एआई को एक ‘सलाहकार’ के रूप में जोड़ रहा है। यह तकनीक अब केवल डेटा ही नहीं जुटाएगी, बल्कि इंसानों को युद्ध के दौरान यह सलाह भी देगी कि मौजूदा स्थिति और विमानों की लोकेशन के आधार पर सबसे पहले दुश्मन के किन ठिकानों को निशाना बनाया जाए। हालांकि अंतिम फैसला इंसान ही लेगा। चैटबॉट्स के साथ सीधे बातचीत से तय होगी हमलों की प्राथमिकता अब तक अमेरिकी सेना ‘मेवेन’ प्रोजेक्ट जैसी तकनीक से ड्रोन फुटेज और तस्वीरों के आधार पर लक्ष्य पहचानती थी। अब इसमें चैटजीपीटी और ग्रोक जैसे स्मार्ट चैटबॉट की नई परत जुड़ रही है। सैन्य अधिकारी के अनुसार सैनिक उनसे सीधे पूछ सकेंगे कि किन लक्ष्यों को पहले प्राथमिकता दी जाए। इससे प्रक्रिया तेज होती है, लेकिन चुनौती इन मशीनी सुझावों की सच्चाई परखना है, क्योंकि नया एआई डेटा के बजाय सीधे निष्कर्ष देता है। आर्मी ऑपरेशंस में एआई का इस्तेमाल बढ़ा अमेरिका-ईरान युद्ध के दौरान ही ईरान के स्कूल पर हाल ही में हुए हमले में 160 से ज्यादा लड़कियों की मौत हुई थी। हालांकि पेंटागन अभी इसकी जांच कर रहा है, लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक यह हमला अमेरिकी मिसाइल से हुआ था। इस स्ट्राइक में पुराने और गलत डेटा का हाथ था। कुछ रिपोर्ट में इस लक्ष्य के फैसलों में ‘क्लॉड’ और ‘मेवेन’ तकनीक के इस्तेमाल की बात भी कही जा रही है। यही तकनीक वेनेजुएला ऑपरेशंस में भी की गई थी, लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं है। चुनौती यह है कि कंपनियां अपने सिस्टम पर कुछ सीमाएं लगाती हैं, लेकिन युद्ध के दौरान वे कितनी कारगर होंगी, स्पष्ट नहीं। ट्रम्प ने कुछ कंपनियों को ‘सप्लाई चेन रिस्क’ तक बताया, यानी ऐसी तकनीकी निर्भरता जो युद्ध के समय काम बंद या हैक की जा सकती है। चैटबॉट डेटा स्कैन कर लक्ष्य की प्राथमिकता तय करता है युद्ध के दौरान ड्रोन, सैटेलाइट, रडार और खुफिया स्रोतों से हर सेकेंड भारी मात्रा में डेटा आता है। इस दौरान एआई चैटबॉट डेटा को तेजी से स्कैन कर पैटर्न पहचानता है। इसके बाद यह खतरे का आकलन कर प्राथमिकता तय करता है कि कौन सा लक्ष्य तुरंत हमला कर सकता है। चैटबॉट यह सुझाव भी देता है कि किसी लक्ष्य पर कौन-सा हथियार सबसे ज्यादा प्रभावी रहेगा, ताकि कार्रवाई सटीक तरीके से हो सके। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत अंतिम मंजूरी मानव सैनिक ही देता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
न्यूजीलैंड टी-20 इंटरनेशनल में अपना 10वां सबसे छोटा स्कोर बनाया:7 बल्लेबाज दहाई का आंकड़ा पार नहीं कर सके, साउथ अफ्रीका को 92 का टारगेट

साउथ अफ्रीका के खिलाफ पहले टी-20 मुकाबले में न्यूजीलैंड की टीम सिर्फ 91 रन पर ऑलआउट हो गई। इंटरनेशनल टी-20 में यह टीम का 10वां सबसे छोटा स्कोर है। न्यूजीलैंड ने माउंट माउंगानुई के बे ओवल स्टेडियम में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया, लेकिन मेजबान टीम की शुरुआत बेहद खराब रही। पावरप्ले के अंदर ही उसके पांच विकेट गिर गए। इसके बाद टी-20 वर्ल्ड कप 2026 की फाइनलिस्ट रही न्यूजीलैंड की टीम अपने ही घर में 14.3 ओवर में 91 रन पर ऑलआउट हो गई। न्यूजीलैंड की बैटिंग फेल इस मुकाबले में न्यूजीलैंड के लिए जेम्स नीशम ने सबसे ज्यादा 21 गेंदों पर 26 रन बनाए। उनके अलावा कप्तान मिचेल सैंटनर ने 19 गेंदों पर 15 रन, कोल मैकॉन्ची ने 11 गेंदों पर 15 रन और बेवॉन जैकब्स ने 7 गेंदों पर 10 रन की पारी खेली। हालांकि टीम के सात बल्लेबाज दहाई के आंकड़े तक भी नहीं पहुंच सके। न्यूजीलैंड के लिए सबसे बड़ी साझेदारी 7वें विकेट के लिए हुई, जब नीशम और मैकॉन्ची ने 17 गेंदों में 26 रन जोड़े। डेब्यूटेंट मोकोएना ने 3 विकेट लिए साउथ अफ्रीका के लिए डेब्यू कर रहे नकोबानी मोकोएना ने 3.3 ओवर में 26 रन देकर सबसे ज्यादा 3 विकेट लिए। वहीं जेराल्ड कूट्जी और ओटनील बार्टमैन ने 3-3 ओवर में 2-2 विकेट झटके। स्पिनर केशव महाराज ने भी किफायती गेंदबाजी करते हुए 4 ओवर में 25 रन देकर 2 विकेट हासिल किए। इसके अलावा डियान फॉरेस्टर ने 1 ओवर में सिर्फ 4 रन दिए, हालांकि उन्हें कोई विकेट नहीं मिला। दोनों टीमों की प्लेइंग-XI न्यूजीलैंड: डेवोन कॉन्वे, टॉम लैथम (विकेटकीपर), टिम रॉबिन्सन, निक केली, बेवॉन जैक्बस, जेम्स नीशम, कोल मैकॉन्ची, मिचेल सैंटनर (कप्तान), काइल जेमीसन, जकारी फॉल्कस, बेन सियर्स। साउथ अफ्रीका: कॉनर एस्टरहुइजन (विकेटकीपर), जॉर्डन हरमन, टोनी डी जॉर्जी, रुबिन हरमन, जेसन स्मिथ, डियान फॉरेस्टर, जॉर्ज लिंडे, जेराल्ड कूट्जी, केशव महाराज (कप्तान), नकोबानी मोकोएना, ओटनील बार्टमैन।
बीसीजी रिपोर्ट पार्ट-1: यूएस में भारतवंशियों का कितना दमखम?:अमेरिका की आबादी में भारतवंशी 1.5% ही, लेकिन कुल टैक्स में हिस्सेदारी 6%

अमेरिका के माइक्रोसॉफ्ट (सत्या नडेला), गूगल (सुंदर पिचाई) और एडोबी (शांतनु नारायण) जैसे बड़े संस्थान हों या स्टार्टअप के सरताज 72 यूनिकॉर्न या होटल और किराना स्टोर, हर जगह भारतवंशियों का दबदबा है। खर्च करने और दान करने की बात आए या टैक्स चुकाने की, उसमें भी भारतीय मूल के अमेरिकी अपनी आबादी के हिसाब से कहीं आगे खड़े हैं। बीसीजी और इंडियास्पोरा द्वारा तैयार की गई ‘अमेरिका में भारतवंशियों के दमखम की कहानी’ के पहले हिस्से में पढ़िए, कैसे अमेरिकी इकोनॉमी में अहम भूमिका निभा रहे भारतवंशी… अमेरिका में भारतीय समुदाय की सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के आर्थिक ढांचे का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुकी है। अमेरिका में भारतवंशियों की महज 1.5% जनसंख्या होने के बावजूद यह समुदाय अमेरिकी खजाने में 5-6% टैक्स का योगदान देता है। सिलिकॉन वैली के बोर्डरूम से लेकर छोटे शहरों की छोटी-छोटी दुकानों तक, भारतीय मूल के उद्यमियों ने लाखों अमेरिकियों के लिए रोजगार पैदा किए हैं। फॉर्च्यून 500 कंपनियों के नेतृत्व से लेकर नए यूनिकॉर्न्स खड़े करने तक, भारतीय मेहनत और मेधा ने अमेरिका को दुनिया के मुकाबले आगे रखा है। सालाना 42 लाख करोड़ खर्च कर रहे हैं अमेरिका में भारतीय मूल का हर परिवार सालाना औसतन 2.8 करोड़ रुपए खर्च कर रहा। – अमेरिका में भारतीय मूल के कुल 51 लाख लोग रहते हैं, जो उत्तराखंड की कुल आबादी का लगभग आधा है। – भारत ने अपने 140 करोड़ लोगों के लिए जितना सालाना बजट बनाया है, उसका 79% अकेले 51 लाख भारतीय अमेरिकी हर साल वहां खर्च कर देते हैं। हर साल 28 लाख करोड़ रु. टैक्स दे रहे अपनी कुल आबादी के हिसाब से देखें तो 4 गुना से भी ज्यादा टैक्स दे रहे भारतवंशी। – भारतीय डायस्पोरा की औसत आयु 36 साल है, अमेरिकियों की 39.2 है। – भारतवंशियों की औसत आय 1.36 लाख डॉलर है, जो अमेरिकियों के 70 हजार डॉलर के मुकाबले करीब दोगुनी। – फॉर्च्यून 500 कंपनियों के सीईओ में 16 भारतवंशी, ये 25 लाख जॉब दे रहे। 91 हजार करोड़ सालाना दे रहे छात्र अमेरिकी विश्वविद्यालयों को 2008 से तीन अरब डॉलर से ज्यादा दान दे चुके भारतवंशी। – ओपन डोर्स के अनुसार 2022-23 में भारत से 2.7 लाख छात्रों ने अमेरिकी विवि में स्नातक और स्नातकोत्तर डिग्री के लिए दाखिला लिया, जो अमेरिका में विदेशी छात्र आबादी का 25% है। – ये छात्र सालाना 91,000 करोड़ रुपए खर्च करते हैं। 93,000 नौकरियां पैदा होती हैं। अमेरिका के 60% होटल भारतवंशियों के होटल कारोबार में भारतीयों की भागीदारी 1940 के दशक में कांजी देसाई से शुरू हुई। – भारतवंशी लगभग 60% होटलों के मालिक हैं, जिससे सालाना लगभग 64 लाख करोड़ रु. राजस्व आता है और 40 लाख से ज्यादा नौकरियां पैदा हुई हैं। – भारतवंशी 35-50% छोटी दुकानों के भी मालिक हैं। इनसे करीब 45 लाख करोड़ रु. का राजस्व अर्जित होता है। यूएस में 1.1 करोड़ नौकरियां पैदा कर दीं जहां ज्यादा भारतवंशी काम करते हैं, ऐसे सेक्टर अपेक्षाकृत अधिक रोजगार दे रहे। – अमेरिका में सीधे काम करने वाले 31 लाख भारतीय, 1.15 करोड़ से भी ज्यादा नौकरियां पैदा कर चुके हैं। – जहां अधिकांश भारतवंशी काम करते हैं, जैसे- स्टेम, कारोबार व कला, वे 3.9 गुना जॉब पैदा करते हैं, जबकि बाकी सेक्टरों में ये आंकड़ा 2.7 गुना है। अमेरिका में भारतीय मूल का हर परिवार सालाना औसतन 2.8 करोड़ रुपए खर्च कर रहा। इन्होंने बनाई रिपोर्ट बीसीजी और इंडियास्पोरा ने ‘अमेरिका में भारतीय डायस्पोरा’ नाम से यह रिपोर्ट तैयार की। बीसीजी (बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप) दुनिया की सबसे बड़ी मैनेजमेंट कंसल्टिंग कंपनियों में शुमार है। वहीं, अमेरिकी संगठन इंडियास्पोरा दुनिया भर के भारतीय मूल के प्रभावशाली लोगों को एकजुट कर उन्हें सकारात्मक कार्यों में हिस्सेदार बना रहा है।
डाइट करने वालों की पहली पसंद बना लेट्यूस, क्या सच में करता है वजन कम?..यहां जानिए सच्चाई

Last Updated:March 15, 2026, 14:01 IST डॉ राजकुमार (आयुष) ने बताया कि लेट्यूस एक हरी पत्तेदार सब्जी है जिसमें कैलोरी बहुत कम होती है और पानी की मात्रा काफी ज्यादा होती है. यही वजह है कि इसे खाने से पेट जल्दी भर जाता है, लेकिन शरीर में ज्यादा कैलोरी नहीं पहुंचती. वजन घटाने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए यह खास फायदा देता है. आजकल हेल्दी डाइट की बात होती है, तो सबसे पहले जिस हरी सब्जी का नाम सामने आता है, वह है लेट्यूस. सलाद, सैंडविच और बर्गर में इस्तेमाल होने वाला यह पत्ता अब डाइट करने वालों की प्लेट का अहम हिस्सा बन गया है. सोशल मीडिया से लेकर फिटनेस एक्सपर्ट तक इसे वजन कम करने में मददगार बता रहे हैं.,लेकिन सवाल यह है कि क्या सच में लेट्यूस खाने से वजन कम होता है या यह सिर्फ एक ट्रेंड बनकर रह गया है. डॉ राजकुमार (आयुष) ने बताया कि लेट्यूस एक हरी पत्तेदार सब्जी है जिसमें कैलोरी बहुत कम होती है और पानी की मात्रा काफी ज्यादा होती है. यही वजह है कि इसे खाने से पेट जल्दी भर जाता है, लेकिन शरीर में ज्यादा कैलोरी नहीं पहुंचती. वजन घटाने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए यह खास फायदा देता है. इसमें मौजूद फाइबर पाचन को बेहतर बनाने में भी मदद करता है, जिससे लंबे समय तक भूख कम लगती है. वजन कम करने के लिए सबसे जरूरी होता है कम कैलोरी और ज्यादा पोषण वाला खाना. लेट्यूस इस मामले में काफी अच्छा विकल्प माना जाता है. इसमें विटामिन A, विटामिन C और कुछ जरूरी मिनरल्स भी पाए जाते हैं, जो शरीर को जरूरी पोषण देते हैं. इसलिए कई लोग भारी भोजन की जगह सलाद में लेट्यूस को शामिल करना पसंद करते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google लेट्यूस का एक और फायदा यह है कि यह शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है. इसमें लगभग 90 प्रतिशत तक पानी होता है, जिससे शरीर को ताजगी मिलती है. गर्मियों के मौसम में इसे खाने से शरीर को हल्कापन महसूस होता है. यही वजह है कि कई लोग इसे रोजाना के सलाद में शामिल करते हैं. सिर्फ लेट्यूस खाकर वजन कम करना संभव नहीं है.वजन घटाने के लिए संतुलित आहार और नियमित शारीरिक गतिविधि जरूरी होती है. अगर कोई व्यक्ति सिर्फ लेट्यूस खाकर बाकी पोषक तत्वों को नजरअंदाज करता है तो इससे शरीर को नुकसान भी हो सकता है. इसलिए इसे एक हेल्दी डाइट का हिस्सा बनाकर खाना ज्यादा बेहतर माना जाता है. आजकल कई फिटनेस प्रेमी लोग लेट्यूस रैप, लेट्यूस सलाद और स्मूदी जैसी चीजें भी ट्राई कर रहे हैं. यह न सिर्फ स्वाद में हल्का होता है बल्कि पेट के लिए भी आरामदायक माना जाता है. खासकर जो लोग ज्यादा ऑयली या भारी खाना नहीं खाना चाहते, उनके लिए यह एक अच्छा विकल्प बन सकता है. लेट्यूस वजन कम करने की डाइट में मदद जरूर कर सकता है, लेकिन यह कोई जादुई उपाय नहीं है. अगर इसे संतुलित भोजन, नियमित एक्सरसाइज और हेल्दी लाइफस्टाइल के साथ जोड़ा जाए तो बेहतर परिणाम मिल सकते हैं. इसलिए वजन घटाने के लिए सिर्फ एक चीज पर निर्भर रहने की बजाय पूरी डाइट और दिनचर्या पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है. First Published : March 15, 2026, 13:59 IST
Vijay Sethupathis Maharaja Sequel Confirmed

Hindi News Entertainment Vijay Sethupathis Maharaja Sequel Confirmed | Director Nithilans Story Complete, Actor Excited 27 मिनट पहले कॉपी लिंक विजय सेतुपति की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘महाराजा’ का सीक्वल बनने जा रहा है। खुद विजय सेतुपति ने कन्फर्म किया है कि फिल्म के डायरेक्टर निथिलन समिनाथन ने दूसरे पार्ट की कहानी पूरी कर ली है। विजय ने कहा कि वे इस फिल्म की कहानी सुनने के लिए बहुत एक्साइटेड हैं। 2024 में रिलीज हुई फिल्म महाराजा ने बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़ कमाई की थी और अब इसके दूसरे पार्ट की तैयारी शुरू हो गई है। फिल्म महाराजा में विजय ने एक ऐसे साधारण नाई का किरदार निभाया था। डायरेक्टर निथिलन ने तैयार की स्क्रिप्ट हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में विजय सेतुपति ने फिल्म के फ्यूचर प्लान पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि ‘महाराजा 2’ की कहानी पर काम पूरा हो चुका है। विजय ने कहा, निर्देशक निथिलन समिनाथन ने महाराजा 2 की कहानी पूरी कर ली है। मैं इसे जल्द ही सुनने के लिए बहुत एक्साइटेड हूं। हालांकि, एक्टर ने अभी यह साफ नहीं किया है कि फिल्म फ्लोर पर कब जाएगी। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 100 करोड़ रुपए से ज्यादा का कलेक्शन किया था। 2024 की सफल फिल्मों में से एक ‘महाराजा’ बता दें कि जून 2024 में रिलीज हुई ‘महाराजा’ विजय सेतुपति के करियर की 50वीं फिल्म थी। इस फिल्म में विजय ने एक ऐसे साधारण नाई का किरदार निभाया था, जिसकी जिंदगी में एक हादसा सब कुछ बदल देता है। फिल्म की सस्पेंस भरी कहानी और विजय सेतुपति की एक्टिंग ने दर्शकों का दिल जीत लिया था। 20 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने वर्ल्डवाइड बॉक्स ऑफिस पर 100 करोड़ रुपए से ज्यादा का कलेक्शन किया था। सीक्वल में क्या हो सकता है खास? ‘महाराजा’ के पहले पार्ट का क्लाइमेक्स और उसकी कहानी की बुनावट फिल्म की सबसे बड़ी ताकत थी। फिल्म में अनुराग कश्यप ने विलेन का रोल निभाया था। अब सीक्वल की खबर आने के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई है कि क्या कहानी वहीं से आगे बढ़ेगी या विजय सेतुपति किसी नए सस्पेंस के साथ पर्दे पर लौटेंगे। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔








