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Iran War Fears: Crude Oil Hits $100, Rupee Crosses 92

Iran War Fears: Crude Oil Hits $100, Rupee Crosses 92
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  • Iran War Fears: Crude Oil Hits $100, Rupee Crosses 92 | FPIs Exit Indian Market

मुंबई1 घंटे पहले

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फरवरी में FPI ने बाजार में 22,615 करोड़ रुपए का निवेश किया था, जो पिछले 17 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर था।

भारतीय शेयर बाजार में फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट (FPIs) की बिकवाली लगातार जारी है। मार्च के शुरुआती दो हफ्तों में विदेशी निवेशकों ने घरेलू इक्विटी बाजार से 52,704 करोड़ रुपए निकाले हैं। यह बिकवाली ऐसे समय में हुई है, जब मिडल ईस्ट में तनाव बढ़ रहा है और कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है।

इससे पहले फरवरी महीने में FPIs ने बाजार में 22,615 करोड़ रुपए का निवेश किया था, जो पिछले 17 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर था। लेकिन मार्च की शुरुआत से ही विदेशी निवेशक हर ट्रेडिंग दिन पर नेट सेलर्स बने हुए हैं।

कच्चे तेल और रुपए ने सेंटिमेंट बिगाड़ा

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस भारी बिकवाली के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण हैं। एंजेल वन के सीनियर फंडामेंटल एनालिस्ट वकारजावेद खान के मुताबिक, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज रूट में सप्लाई प्रभावित होने के डर से ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चला गया है। इससे निवेशकों ने जोखिम वाले एसेट्स से पैसा निकालकर सुरक्षित विकल्पों में लगाना शुरू कर दिया है। इसके अलावा डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपए के 92 के स्तर के पार पहुंचना और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने भी दबाव बनाया है।

भारत की जगह चीन के बाजार में पैसा लगा रहे निवेशक

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार ने कहा कि पिछले 18 महीनों में भारतीय बाजार ने विकसित और अन्य उभरते बाजारों के मुकाबले कम रिटर्न दिया है। इस वजह से विदेशी निवेशकों का रुझान भारत के प्रति कम हुआ है। उनके अनुसार, दक्षिण कोरिया, ताइवान और चीन इस समय भारत की तुलना में ज्यादा आकर्षक लग रहे हैं, क्योंकि हालिया गिरावट के बाद वहां वैल्युएशन सस्ता है और कॉर्पोरेट अर्निंग की संभावनाएं बेहतर दिख रही हैं।

साल 2025 में IT-FMCG सेक्टर में सबसे ज्यादा बिकवाली हुई

साल 2025 में अब तक सेक्टर-वार देखें तो IT सेक्टर पर सबसे ज्यादा मार पड़ी है।

IT सेक्टर: करीब 74,700 करोड़ रुपए निकाले गए। इसकी वजह रेवेन्यू ग्रोथ में कमी और ग्लोबल टेक खर्चों में गिरावट है।

FMCG सेक्टर: शहरी खपत में कमी और मार्जिन के दबाव के चलते 36,800 करोड़ रुपए की निकासी हुई।

पावर और हेल्थकेयर: इन सेक्टर्स से 24,000 से 26,000 करोड़ रुपए की बिकवाली की गई।

ऑयल एंड गैस-मेटल्स जैसे सेक्टर्स में निवेश बढ़ाया

हालांकि, निवेशकों ने टेलीकॉम, ऑयल एंड गैस, मेटल्स और केमिकल्स जैसे सेक्टर्स में अपना निवेश बढ़ाया है, जो यह दर्शाता है कि पैसा अब डोमेस्टिक वैल्यू और कमोडिटी शेयरों की ओर शिफ्ट हो रहा है।

बैंकिंग शेयरों में गिरावट से घरेलू निवेशकों के लिए मौका

विदेशी निवेशकों की फाइनेंशियल और बैंकिंग शेयरों में की गई बिकवाली ने इन सेक्टर की वैल्युएशन को काफी नीचे ला दिया है। जानकारों का कहना है कि जहां विदेशी निवेशक बाहर निकल रहे हैं। वहीं घरेलू निवेशकों के लिए ये शेयर अब आकर्षक कीमतों पर उपलब्ध हैं। मार्च के सेकंड हाफ के लिए बाजार का रुख अभी भी सतर्क बना हुआ है।

चौथी तिमाही में बिकवाली की रफ्तार कम हो सकती है

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर चौथी तिमाही (Q4) के नतीजे, खासकर बैंकिंग और कंजम्पशन सेक्टर में उम्मीद से बेहतर रहते हैं, तो बिकवाली की रफ्तार कम हो सकती है। लेकिन अगर जियोपॉलिटिकल तनाव और बढ़ता है या तेल की कीमतें और ऊपर जाती हैं, तो बाजार पर दबाव जारी रहेगा।

विदेशी पोर्टफोलियो निवेश यानी FPI क्या है?

विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) वह निवेश है, जिसमें विदेशी नागरिक या कंपनियां दूसरे देश के शेयर बाजार, बॉन्ड या अन्य वित्तीय संपत्तियों में पैसा लगाते हैं। इनके आने-जाने से शेयर बाजार की चाल तय होती है।

ये खबर भी पढ़ें…

टॉप-10 कंपनियों की वैल्यू ₹4.48 लाख करोड़ घटी: SBI टॉप लूजर रहा, इसकी वैल्यू ₹89 हजार करोड़ घटी; HDFC बैंक का मार्केट कैप भी घटा

मार्केट कैपिटलाइजेशन के लिहाज से देश की 10 सबसे बड़ी कंपनियों की वैल्यू बीते हफ्ते के कारोबार में 4.48 लाख करोड़ रुपए घट गई। इस दौरान SBI की वैल्यू सबसे ज्यादा घटी। SBI का मार्केट कैप 89,306 करोड़ रुपए घटकर ₹9.66 लाख करोड़ पर आ गया।

HDFC बैंक का मार्केट कैप 61,715 करोड़ रुपए घटकर ₹12.57 लाख करोड़ पर आ गया। वहीं बजाज फाइनेंस की मार्केट वैल्यू ₹59,082 करोड़ घटकर ₹5.32 लाख करोड़ पर आ गई। इनके अलावा बीते हफ्ते TCS, ICICI बैंक, भारती एयरटेल, रिलायंस इंडस्ट्रीज, LIC, इंफोसिस और HUL का मर्केट कैप भी घटा है। पूरी खबर पढ़ें…

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फरवरी में FPI ने बाजार में 22,615 करोड़ रुपए का निवेश किया था, जो पिछले 17 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर था।

भारतीय शेयर बाजार में फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट (FPIs) की बिकवाली लगातार जारी है। मार्च के शुरुआती दो हफ्तों में विदेशी निवेशकों ने घरेलू इक्विटी बाजार से 52,704 करोड़ रुपए निकाले हैं। यह बिकवाली ऐसे समय में हुई है, जब मिडल ईस्ट में तनाव बढ़ रहा है और कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है।

इससे पहले फरवरी महीने में FPIs ने बाजार में 22,615 करोड़ रुपए का निवेश किया था, जो पिछले 17 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर था। लेकिन मार्च की शुरुआत से ही विदेशी निवेशक हर ट्रेडिंग दिन पर नेट सेलर्स बने हुए हैं।

कच्चे तेल और रुपए ने सेंटिमेंट बिगाड़ा

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस भारी बिकवाली के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण हैं। एंजेल वन के सीनियर फंडामेंटल एनालिस्ट वकारजावेद खान के मुताबिक, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज रूट में सप्लाई प्रभावित होने के डर से ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चला गया है। इससे निवेशकों ने जोखिम वाले एसेट्स से पैसा निकालकर सुरक्षित विकल्पों में लगाना शुरू कर दिया है। इसके अलावा डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपए के 92 के स्तर के पार पहुंचना और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने भी दबाव बनाया है।

भारत की जगह चीन के बाजार में पैसा लगा रहे निवेशक

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार ने कहा कि पिछले 18 महीनों में भारतीय बाजार ने विकसित और अन्य उभरते बाजारों के मुकाबले कम रिटर्न दिया है। इस वजह से विदेशी निवेशकों का रुझान भारत के प्रति कम हुआ है। उनके अनुसार, दक्षिण कोरिया, ताइवान और चीन इस समय भारत की तुलना में ज्यादा आकर्षक लग रहे हैं, क्योंकि हालिया गिरावट के बाद वहां वैल्युएशन सस्ता है और कॉर्पोरेट अर्निंग की संभावनाएं बेहतर दिख रही हैं।

साल 2025 में IT-FMCG सेक्टर में सबसे ज्यादा बिकवाली हुई

साल 2025 में अब तक सेक्टर-वार देखें तो IT सेक्टर पर सबसे ज्यादा मार पड़ी है।

IT सेक्टर: करीब 74,700 करोड़ रुपए निकाले गए। इसकी वजह रेवेन्यू ग्रोथ में कमी और ग्लोबल टेक खर्चों में गिरावट है।

FMCG सेक्टर: शहरी खपत में कमी और मार्जिन के दबाव के चलते 36,800 करोड़ रुपए की निकासी हुई।

पावर और हेल्थकेयर: इन सेक्टर्स से 24,000 से 26,000 करोड़ रुपए की बिकवाली की गई।

ऑयल एंड गैस-मेटल्स जैसे सेक्टर्स में निवेश बढ़ाया

हालांकि, निवेशकों ने टेलीकॉम, ऑयल एंड गैस, मेटल्स और केमिकल्स जैसे सेक्टर्स में अपना निवेश बढ़ाया है, जो यह दर्शाता है कि पैसा अब डोमेस्टिक वैल्यू और कमोडिटी शेयरों की ओर शिफ्ट हो रहा है।

बैंकिंग शेयरों में गिरावट से घरेलू निवेशकों के लिए मौका

विदेशी निवेशकों की फाइनेंशियल और बैंकिंग शेयरों में की गई बिकवाली ने इन सेक्टर की वैल्युएशन को काफी नीचे ला दिया है। जानकारों का कहना है कि जहां विदेशी निवेशक बाहर निकल रहे हैं। वहीं घरेलू निवेशकों के लिए ये शेयर अब आकर्षक कीमतों पर उपलब्ध हैं। मार्च के सेकंड हाफ के लिए बाजार का रुख अभी भी सतर्क बना हुआ है।

चौथी तिमाही में बिकवाली की रफ्तार कम हो सकती है

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर चौथी तिमाही (Q4) के नतीजे, खासकर बैंकिंग और कंजम्पशन सेक्टर में उम्मीद से बेहतर रहते हैं, तो बिकवाली की रफ्तार कम हो सकती है। लेकिन अगर जियोपॉलिटिकल तनाव और बढ़ता है या तेल की कीमतें और ऊपर जाती हैं, तो बाजार पर दबाव जारी रहेगा।

विदेशी पोर्टफोलियो निवेश यानी FPI क्या है?

विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) वह निवेश है, जिसमें विदेशी नागरिक या कंपनियां दूसरे देश के शेयर बाजार, बॉन्ड या अन्य वित्तीय संपत्तियों में पैसा लगाते हैं। इनके आने-जाने से शेयर बाजार की चाल तय होती है।

ये खबर भी पढ़ें…

टॉप-10 कंपनियों की वैल्यू ₹4.48 लाख करोड़ घटी: SBI टॉप लूजर रहा, इसकी वैल्यू ₹89 हजार करोड़ घटी; HDFC बैंक का मार्केट कैप भी घटा

मार्केट कैपिटलाइजेशन के लिहाज से देश की 10 सबसे बड़ी कंपनियों की वैल्यू बीते हफ्ते के कारोबार में 4.48 लाख करोड़ रुपए घट गई। इस दौरान SBI की वैल्यू सबसे ज्यादा घटी। SBI का मार्केट कैप 89,306 करोड़ रुपए घटकर ₹9.66 लाख करोड़ पर आ गया।

HDFC बैंक का मार्केट कैप 61,715 करोड़ रुपए घटकर ₹12.57 लाख करोड़ पर आ गया। वहीं बजाज फाइनेंस की मार्केट वैल्यू ₹59,082 करोड़ घटकर ₹5.32 लाख करोड़ पर आ गई। इनके अलावा बीते हफ्ते TCS, ICICI बैंक, भारती एयरटेल, रिलायंस इंडस्ट्रीज, LIC, इंफोसिस और HUL का मर्केट कैप भी घटा है। पूरी खबर पढ़ें…

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