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बीसीजी रिपोर्ट पार्ट-1: यूएस में भारतवंशियों का कितना दमखम?:अमेरिका की आबादी में भारतवंशी 1.5% ही, लेकिन कुल टैक्स में हिस्सेदारी 6%

बीसीजी रिपोर्ट पार्ट-1: यूएस में भारतवंशियों का कितना दमखम?:अमेरिका की आबादी में भारतवंशी 1.5% ही, लेकिन कुल टैक्स में हिस्सेदारी 6%

अमेरिका के माइक्रोसॉफ्ट (सत्या नडेला), गूगल (सुंदर पिचाई) और एडोबी (शांतनु नारायण) जैसे बड़े संस्थान हों या स्टार्टअप के सरताज 72 यूनिकॉर्न या होटल और किराना स्टोर, हर जगह भारतवंशियों का दबदबा है। खर्च करने और दान करने की बात आए या टैक्स चुकाने की, उसमें भी भारतीय मूल के अमेरिकी अपनी आबादी के हिसाब से कहीं आगे खड़े हैं। बीसीजी और इंडियास्पोरा द्वारा तैयार की गई ‘अमेरिका में भारतवंशियों के दमखम की कहानी’ के पहले हिस्से में पढ़िए, कैसे अमेरिकी इकोनॉमी में अहम भूमिका निभा रहे भारतवंशी… अमेरिका में भारतीय समुदाय की सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के आर्थिक ढांचे का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुकी है। अमेरिका में भारतवंशियों की महज 1.5% जनसंख्या होने के बावजूद यह समुदाय अमेरिकी खजाने में 5-6% टैक्स का योगदान देता है। सिलिकॉन वैली के बोर्डरूम से लेकर छोटे शहरों की छोटी-छोटी दुकानों तक, भारतीय मूल के उद्यमियों ने लाखों अमेरिकियों के लिए रोजगार पैदा किए हैं। फॉर्च्यून 500 कंपनियों के नेतृत्व से लेकर नए यूनिकॉर्न्स खड़े करने तक, भारतीय मेहनत और मेधा ने अमेरिका को दुनिया के मुकाबले आगे रखा है। सालाना 42 लाख करोड़ खर्च कर रहे हैं अमेरिका में भारतीय मूल का हर परिवार सालाना औसतन 2.8 करोड़ रुपए खर्च कर रहा।
– अमेरिका में भारतीय मूल के कुल 51 लाख लोग रहते हैं, जो उत्तराखंड की कुल आबादी का लगभग आधा है।
– भारत ने अपने 140 करोड़ लोगों के लिए जितना सालाना बजट बनाया है, उसका 79% अकेले 51 लाख भारतीय अमेरिकी हर साल वहां खर्च कर देते हैं। हर साल 28 लाख करोड़ रु. टैक्स दे रहे अपनी कुल आबादी के हिसाब से देखें तो 4 गुना से भी ज्यादा टैक्स दे रहे भारतवंशी।
– भारतीय डायस्पोरा की औसत आयु 36 साल है, अमेरिकियों की 39.2 है।
– भारतवंशियों की औसत आय 1.36 लाख डॉलर है, जो अमेरिकियों के 70 हजार डॉलर के मुकाबले करीब दोगुनी।
– फॉर्च्यून 500 कंपनियों के सीईओ में 16 भारतवंशी, ये 25 लाख जॉब दे रहे। 91 हजार करोड़ सालाना दे रहे छात्र अमेरिकी विश्वविद्यालयों को 2008 से तीन अरब डॉलर से ज्यादा दान दे चुके भारतवंशी।
– ओपन डोर्स के अनुसार 2022-23 में भारत से 2.7 लाख छात्रों ने अमेरिकी विवि में स्नातक और स्नातकोत्तर डिग्री के लिए दाखिला लिया, जो अमेरिका में विदेशी छात्र आबादी का 25% है।
– ये छात्र सालाना 91,000 करोड़ रुपए खर्च करते हैं। 93,000 नौकरियां पैदा होती हैं। अमेरिका के 60% होटल भारतवंशियों के होटल कारोबार में भारतीयों की भागीदारी 1940 के दशक में कांजी देसाई से शुरू हुई।
– भारतवंशी लगभग 60% होटलों के मालिक हैं, जिससे सालाना लगभग 64 लाख करोड़ रु. राजस्व आता है और 40 लाख से ज्यादा नौकरियां पैदा हुई हैं।
– भारतवंशी 35-50% छोटी दुकानों के भी मालिक हैं। इनसे करीब 45 लाख करोड़ रु. का राजस्व अर्जित होता है। यूएस में 1.1 करोड़ नौकरियां पैदा कर दीं जहां ज्यादा भारतवंशी काम करते हैं, ऐसे सेक्टर अपेक्षाकृत अधिक रोजगार दे रहे।
– अमेरिका में सीधे काम करने वाले 31 लाख भारतीय, 1.15 करोड़ से भी ज्यादा नौकरियां पैदा कर चुके हैं।
– जहां अधिकांश भारतवंशी काम करते हैं, जैसे- स्टेम, कारोबार व कला, वे 3.9 गुना जॉब पैदा करते हैं, जबकि बाकी सेक्टरों में ये आंकड़ा 2.7 गुना है।
अमेरिका में भारतीय मूल का हर परिवार सालाना औसतन 2.8 करोड़ रुपए खर्च कर रहा। इन्होंने बनाई रिपोर्ट बीसीजी और इंडियास्पोरा ने ‘अमेरिका में भारतीय डायस्पोरा’ नाम से यह रिपोर्ट तैयार की। बीसीजी (बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप) दुनिया की सबसे बड़ी मैनेजमेंट कंसल्टिंग कंपनियों में शुमार है। वहीं, अमेरिकी संगठन इंडियास्पोरा दुनिया भर के भारतीय मूल के प्रभावशाली लोगों को एकजुट कर उन्हें सकारात्मक कार्यों में हिस्सेदार बना रहा है।

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बीसीजी रिपोर्ट पार्ट-1: यूएस में भारतवंशियों का कितना दमखम?:अमेरिका की आबादी में भारतवंशी 1.5% ही, लेकिन कुल टैक्स में हिस्सेदारी 6%

बीसीजी रिपोर्ट पार्ट-1: यूएस में भारतवंशियों का कितना दमखम?:अमेरिका की आबादी में भारतवंशी 1.5% ही, लेकिन कुल टैक्स में हिस्सेदारी 6%

अमेरिका के माइक्रोसॉफ्ट (सत्या नडेला), गूगल (सुंदर पिचाई) और एडोबी (शांतनु नारायण) जैसे बड़े संस्थान हों या स्टार्टअप के सरताज 72 यूनिकॉर्न या होटल और किराना स्टोर, हर जगह भारतवंशियों का दबदबा है। खर्च करने और दान करने की बात आए या टैक्स चुकाने की, उसमें भी भारतीय मूल के अमेरिकी अपनी आबादी के हिसाब से कहीं आगे खड़े हैं। बीसीजी और इंडियास्पोरा द्वारा तैयार की गई ‘अमेरिका में भारतवंशियों के दमखम की कहानी’ के पहले हिस्से में पढ़िए, कैसे अमेरिकी इकोनॉमी में अहम भूमिका निभा रहे भारतवंशी… अमेरिका में भारतीय समुदाय की सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के आर्थिक ढांचे का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुकी है। अमेरिका में भारतवंशियों की महज 1.5% जनसंख्या होने के बावजूद यह समुदाय अमेरिकी खजाने में 5-6% टैक्स का योगदान देता है। सिलिकॉन वैली के बोर्डरूम से लेकर छोटे शहरों की छोटी-छोटी दुकानों तक, भारतीय मूल के उद्यमियों ने लाखों अमेरिकियों के लिए रोजगार पैदा किए हैं। फॉर्च्यून 500 कंपनियों के नेतृत्व से लेकर नए यूनिकॉर्न्स खड़े करने तक, भारतीय मेहनत और मेधा ने अमेरिका को दुनिया के मुकाबले आगे रखा है। सालाना 42 लाख करोड़ खर्च कर रहे हैं अमेरिका में भारतीय मूल का हर परिवार सालाना औसतन 2.8 करोड़ रुपए खर्च कर रहा।
– अमेरिका में भारतीय मूल के कुल 51 लाख लोग रहते हैं, जो उत्तराखंड की कुल आबादी का लगभग आधा है।
– भारत ने अपने 140 करोड़ लोगों के लिए जितना सालाना बजट बनाया है, उसका 79% अकेले 51 लाख भारतीय अमेरिकी हर साल वहां खर्च कर देते हैं। हर साल 28 लाख करोड़ रु. टैक्स दे रहे अपनी कुल आबादी के हिसाब से देखें तो 4 गुना से भी ज्यादा टैक्स दे रहे भारतवंशी।
– भारतीय डायस्पोरा की औसत आयु 36 साल है, अमेरिकियों की 39.2 है।
– भारतवंशियों की औसत आय 1.36 लाख डॉलर है, जो अमेरिकियों के 70 हजार डॉलर के मुकाबले करीब दोगुनी।
– फॉर्च्यून 500 कंपनियों के सीईओ में 16 भारतवंशी, ये 25 लाख जॉब दे रहे। 91 हजार करोड़ सालाना दे रहे छात्र अमेरिकी विश्वविद्यालयों को 2008 से तीन अरब डॉलर से ज्यादा दान दे चुके भारतवंशी।
– ओपन डोर्स के अनुसार 2022-23 में भारत से 2.7 लाख छात्रों ने अमेरिकी विवि में स्नातक और स्नातकोत्तर डिग्री के लिए दाखिला लिया, जो अमेरिका में विदेशी छात्र आबादी का 25% है।
– ये छात्र सालाना 91,000 करोड़ रुपए खर्च करते हैं। 93,000 नौकरियां पैदा होती हैं। अमेरिका के 60% होटल भारतवंशियों के होटल कारोबार में भारतीयों की भागीदारी 1940 के दशक में कांजी देसाई से शुरू हुई।
– भारतवंशी लगभग 60% होटलों के मालिक हैं, जिससे सालाना लगभग 64 लाख करोड़ रु. राजस्व आता है और 40 लाख से ज्यादा नौकरियां पैदा हुई हैं।
– भारतवंशी 35-50% छोटी दुकानों के भी मालिक हैं। इनसे करीब 45 लाख करोड़ रु. का राजस्व अर्जित होता है। यूएस में 1.1 करोड़ नौकरियां पैदा कर दीं जहां ज्यादा भारतवंशी काम करते हैं, ऐसे सेक्टर अपेक्षाकृत अधिक रोजगार दे रहे।
– अमेरिका में सीधे काम करने वाले 31 लाख भारतीय, 1.15 करोड़ से भी ज्यादा नौकरियां पैदा कर चुके हैं।
– जहां अधिकांश भारतवंशी काम करते हैं, जैसे- स्टेम, कारोबार व कला, वे 3.9 गुना जॉब पैदा करते हैं, जबकि बाकी सेक्टरों में ये आंकड़ा 2.7 गुना है।
अमेरिका में भारतीय मूल का हर परिवार सालाना औसतन 2.8 करोड़ रुपए खर्च कर रहा। इन्होंने बनाई रिपोर्ट बीसीजी और इंडियास्पोरा ने ‘अमेरिका में भारतीय डायस्पोरा’ नाम से यह रिपोर्ट तैयार की। बीसीजी (बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप) दुनिया की सबसे बड़ी मैनेजमेंट कंसल्टिंग कंपनियों में शुमार है। वहीं, अमेरिकी संगठन इंडियास्पोरा दुनिया भर के भारतीय मूल के प्रभावशाली लोगों को एकजुट कर उन्हें सकारात्मक कार्यों में हिस्सेदार बना रहा है।

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