Wednesday, 09 Sep 2026 | 12:24 PM

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बीसीजी रिपोर्ट: पार्ट-2 यूएस में भारतवंशियों का कितना दमखम?:अमेरिकी पेटेंट में भारतवंशियों की हिस्सेदारी 50 साल में 5 गुना तक बढ़ गई

बीसीजी रिपोर्ट: पार्ट-2 यूएस में भारतवंशियों का कितना दमखम?:अमेरिकी पेटेंट में भारतवंशियों की हिस्सेदारी 50 साल में 5 गुना तक बढ़ गई

जब अमेरिका को नोबेल चाहिए, तो भारतीय दिमाग काम आता है। जब स्पेलिंग बी का ताज चाहिए, तो भारतीय बच्चे मैदान मारते हैं। जब नए पेटेंट चाहिए, तो भारतीय वैज्ञानिक कलम उठाते हैं। यह महज संयोग नहीं, यह उस भारतवंशी समुदाय की कहानी है, जो अमेरिका की धरती पर आया तो 2% बनकर, लेकिन अब बौद्धिक दुनिया में अपनी हिस्सेदारी दस गुना से भी ज्यादा बढ़ा ली। बीसीजी और इंडियास्पोरा द्वारा तैयार की गई ‘अमेरिका में भारतवंशियों के दमखम की कहानी’ के दूसरे हिस्से में पढ़िए, कैसे अमेरिका की बौद्धिक ताकत बने भारतवंशी… यदि अमेरिका आज विज्ञान और स्वास्थ्य के क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व कर रहा है, तो उसमें भारतीय दिमागों का बहुत बड़ा योगदान है। पेटेंट फाइल करने से लेकर वैज्ञानिक शोध पत्रों के प्रकाशन तक, भारतीय डायस्पोरा का ग्राफ 1975 से अब तक पांच गुना बढ़ चुका है। हर 10 में से 1 अमेरिकी डॉक्टर भारतीय मूल का है, जो देश के सबसे दुर्गम इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं दे रहा है। हर साल 1,800 नए भारतीय डॉक्टर सिस्टम में जुड़ रहे हैं, जो डॉक्टरों की कमी पूरा करने में सबसे आगे हैं। रिसर्च के क्षेत्र में भी यही कहानी है। अमेरिका के शीर्ष 50 कॉलेजों में से 35 में भारतवंशी नेतृत्व की भूमिकाओं में हैं। अमेरिका में 38,000 भारतीय मूल की नर्सें कार्यरत हैं। दो बार नोबेल अवॉर्ड जीत चुके; स्पेलिंग बी में 26 साल में 34 में से 28 विजेता भारतवंशी, शोध पत्रों में 13% भागीदारी है… भारतीय मूल के अमेरिकियों की कहां-कितनी हिस्सेदारी नोबेल पुरस्कार 2 बार फील्ड्स मेडल 1 बार ट्यूरिंग अवॉर्ड 1 बार स्पेलिंग बी विजेता 82% पेटेंट में हिस्सेदारी 10% कंप्यूटर पेटेंट 11% वैज्ञानिक शोध पत्र 13% फोर्ब्स 30 अंडर 30 11% (स्रोत: फोर्ब्स, यूएसपीटीओ और नेचर इंडेक्स के आंकड़े।) -1968 में हर गोविंद खुराना और 2019 में अभिजीत बनर्जी को नोबेल अवॉर्ड प्रदान किया गया। -मंजुल भार्गव ने साल 2014 में फील्ड्स मेडल जीता था, जिसे ‘गणित का नोबेल’ कहा जाता है। -स्पेलिंग बी में 2000 के बाद से 34 में से 28 विजेता भारतवंशी। -2022 से 2024 के बीच पूरे उत्तरी अमेरिका में फोर्ब्स 30 अंडर 30 पुरस्कारों में 11% हिस्सेदारी। -1975 में पेंटेंट में भारतवंशियों की हिस्सेदारी 1.9% थी, जो 2019 में बढ़कर 10% पर पहुंची। शिक्षा – टॉप-50 में से 35 कॉलेजों में यही शीर्ष पर – 22,000 से अधिक भारतीय मूल के प्रोफेसर्स अमेरिकी विश्वविद्यालयों में पढ़ा रहे हैं। – हार्वर्ड, स्टैनफोर्ड जैसे संस्थानों के डीन और प्रेसिडेंट के पदों पर भारतीयों का होना अब सामान्य। – अमेरिका के टॉप-50 कॉलेजों पर नजर डालें तो 35 में भारतीय अमेरिकी नेतृत्व की भूमिका में। यानी अमेरिका के हर दूसरे शीर्ष विश्वविद्यालय में कोई न कोई भारतीय अमेरिकी नेतृत्व में है। सेहत – अमेरिका के लिए भारतवंशी ‘संकटमोचक’ – 2032 तक अमेरिका में 1.22 लाख डॉक्टरों की कमी होगी। – 2027 तक अमेरिका की 8 लाख नर्सें काम छोड़ देंगी। – हेल्थकेयर में जॉब 2030 तक 10-20% बढ़ेंगी, पर लोग नहीं। – भारतवंशियों का मेडिकल स्कूल में एडमिशन औसत से करीब चार गुना की तेजी से बढ़ रहा है। – भारत दूसरा सबसे बड़ा देश है जो अमेरिका को नर्सें भेजता है। – सीडीसी और एनएसएफ जैसी बड़ी सरकारी एजेंसियों में भारतीय अमेरिकी 3% टॉप पोजीशन पर हैं। ये डॉक्टर अक्सर सबसे दूरदराज और वंचित इलाकों में सेवा देते हैं, जहां कोई और जाना नहीं चाहता।

बीसीजी रिपोर्ट: पार्ट-2 यूएस में भारतवंशियों का कितना दमखम?:अमेरिकी पेटेंट में भारतवंशियों की हिस्सेदारी 50 साल में 5 गुना तक बढ़ गई

बीसीजी रिपोर्ट: पार्ट-2 यूएस में भारतवंशियों का कितना दमखम?:अमेरिकी पेटेंट में भारतवंशियों की हिस्सेदारी 50 साल में 5 गुना तक बढ़ गई

जब अमेरिका को नोबेल चाहिए, तो भारतीय दिमाग काम आता है। जब स्पेलिंग बी का ताज चाहिए, तो भारतीय बच्चे मैदान मारते हैं। जब नए पेटेंट चाहिए, तो भारतीय वैज्ञानिक कलम उठाते हैं। यह महज संयोग नहीं, यह उस भारतवंशी समुदाय की कहानी है, जो अमेरिका की धरती पर आया तो 2% बनकर, लेकिन अब बौद्धिक दुनिया में अपनी हिस्सेदारी दस गुना से भी ज्यादा बढ़ा ली। बीसीजी और इंडियास्पोरा द्वारा तैयार की गई ‘अमेरिका में भारतवंशियों के दमखम की कहानी’ के दूसरे हिस्से में पढ़िए, कैसे अमेरिका की बौद्धिक ताकत बने भारतवंशी… यदि अमेरिका आज विज्ञान और स्वास्थ्य के क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व कर रहा है, तो उसमें भारतीय दिमागों का बहुत बड़ा योगदान है। पेटेंट फाइल करने से लेकर वैज्ञानिक शोध पत्रों के प्रकाशन तक, भारतीय डायस्पोरा का ग्राफ 1975 से अब तक पांच गुना बढ़ चुका है। हर 10 में से 1 अमेरिकी डॉक्टर भारतीय मूल का है, जो देश के सबसे दुर्गम इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं दे रहा है। हर साल 1,800 नए भारतीय डॉक्टर सिस्टम में जुड़ रहे हैं, जो डॉक्टरों की कमी पूरा करने में सबसे आगे हैं। रिसर्च के क्षेत्र में भी यही कहानी है। अमेरिका के शीर्ष 50 कॉलेजों में से 35 में भारतवंशी नेतृत्व की भूमिकाओं में हैं। अमेरिका में 38,000 भारतीय मूल की नर्सें कार्यरत हैं। दो बार नोबेल अवॉर्ड जीत चुके; स्पेलिंग बी में 26 साल में 34 में से 28 विजेता भारतवंशी, शोध पत्रों में 13% भागीदारी है… भारतीय मूल के अमेरिकियों की कहां-कितनी हिस्सेदारी नोबेल पुरस्कार 2 बार फील्ड्स मेडल 1 बार ट्यूरिंग अवॉर्ड 1 बार स्पेलिंग बी विजेता 82% पेटेंट में हिस्सेदारी 10% कंप्यूटर पेटेंट 11% वैज्ञानिक शोध पत्र 13% फोर्ब्स 30 अंडर 30 11% (स्रोत: फोर्ब्स, यूएसपीटीओ और नेचर इंडेक्स के आंकड़े।) -1968 में हर गोविंद खुराना और 2019 में अभिजीत बनर्जी को नोबेल अवॉर्ड प्रदान किया गया। -मंजुल भार्गव ने साल 2014 में फील्ड्स मेडल जीता था, जिसे ‘गणित का नोबेल’ कहा जाता है। -स्पेलिंग बी में 2000 के बाद से 34 में से 28 विजेता भारतवंशी। -2022 से 2024 के बीच पूरे उत्तरी अमेरिका में फोर्ब्स 30 अंडर 30 पुरस्कारों में 11% हिस्सेदारी। -1975 में पेंटेंट में भारतवंशियों की हिस्सेदारी 1.9% थी, जो 2019 में बढ़कर 10% पर पहुंची। शिक्षा – टॉप-50 में से 35 कॉलेजों में यही शीर्ष पर – 22,000 से अधिक भारतीय मूल के प्रोफेसर्स अमेरिकी विश्वविद्यालयों में पढ़ा रहे हैं। – हार्वर्ड, स्टैनफोर्ड जैसे संस्थानों के डीन और प्रेसिडेंट के पदों पर भारतीयों का होना अब सामान्य। – अमेरिका के टॉप-50 कॉलेजों पर नजर डालें तो 35 में भारतीय अमेरिकी नेतृत्व की भूमिका में। यानी अमेरिका के हर दूसरे शीर्ष विश्वविद्यालय में कोई न कोई भारतीय अमेरिकी नेतृत्व में है। तकनीक – एआई की नींव रखने में भी अहम भूमिका जेनरेटिव एआई की नींव रखने वाला 2017 का शोध पत्र गूगल के आठ इंजीनियरों द्वारा लिखा गया था, जिनमें से दो भारतीय मूल के थे। इस शोध को लार्ज मॉडल्स की आधारशिला मानते हैं यानी आज जो चैटजीपीटी आदि चल रहे हैं, वे सब इसी पेपर की देन हैं यानी एआई की नींव रखने में भी बड़ा योगदान। सेहत – अमेरिका के लिए भारतवंशी ‘संकटमोचक’ – 2032 तक अमेरिका में 1.22 लाख डॉक्टरों की कमी होगी। – 2027 तक अमेरिका की 8 लाख नर्सें काम छोड़ देंगी। – हेल्थकेयर में जॉब 2030 तक 10-20% बढ़ेंगी, पर लोग नहीं। – भारतवंशियों का मेडिकल स्कूल में एडमिशन औसत से करीब चार गुना की तेजी से बढ़ रहा है। – भारत दूसरा सबसे बड़ा देश है जो अमेरिका को नर्सें भेजता है। – सीडीसी और एनएसएफ जैसी बड़ी सरकारी एजेंसियों में भारतीय अमेरिकी 3% टॉप पोजीशन पर हैं। ये डॉक्टर अक्सर सबसे दूरदराज और वंचित इलाकों में सेवा देते हैं, जहां कोई और जाना नहीं चाहता।

धुरंधर 2 ने रिलीज से पहले ₹100 करोड़ कमाए:प्री-सेल्स में 200 करोड़ की टिकट बिक सकती हैं; 19 मार्च को रिलीज

धुरंधर 2 ने रिलीज से पहले ₹100 करोड़ कमाए:प्री-सेल्स में 200 करोड़ की टिकट बिक सकती हैं; 19 मार्च को रिलीज

बॉलीवुड फिल्म ‘धुरंधर: द रिवेंज’ बॉक्स ऑफिस पर रिलीज से पहले ही 100 करोड़ रुपए कमा लिए हैं। फिल्म ने वर्ल्डवाइड एडवांस बुकिंग (प्री-सेल्स) में 100 करोड़ रुपए का आंकड़ा पार कर लिया है। शनिवार के कारोबार के अंत तक फिल्म का कुल ग्लोबल एडवांस कलेक्शन लगभग 101 करोड़ रुपए रहा। इसमें भारत से 44 करोड़ और विदेशी बाजारों (ओवरसीज) से 57 करोड़ रुपए आए हैं। बाहुबली 2 का रिकॉर्ड तोड़ा विदेशी बाजारों में फिल्म का जबरदस्त क्रेज देखने को मिल रहा है। ‘धुरंधर’ ने सिर्फ बॉलीवुड ही नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा के प्री-सेल्स रिकॉर्ड्स बदल दिए हैं। ऑस्ट्रेलिया में फिल्म ने 1.05 मिलियन ऑस्ट्रेलियन डॉलर की कमाई कर ‘बाहुबली: द कंक्लूजन’ का सालों पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया है। ओवरसीज मार्केट में भारी डिमांड विदेशी मार्केट्स में फिल्म की डिमांड इतनी ज्यादा है कि कई जगहों पर सिनेमाघर पहले ही फुल (हाउसफुल) हो चुके हैं। नॉर्थ अमेरिका में एडवांस बुकिंग करीब 3.40 मिलियन डॉलर तक पहुंच गई है। ट्रेड जानकारों का मानना है कि यह जल्द ही 4 से 5 मिलियन डॉलर के आंकड़े को छू लेगी। दर्शकों की भारी भीड़ को देखते हुए डिस्ट्रीब्यूटर्स और एग्जीबिटर्स सोमवार और मंगलवार को फिल्म के और ज्यादा शोज बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं। 200 करोड़ के क्लब पर नजर वर्ल्डवाइड लेवल पर फिल्म की एडवांस बुकिंग आसानी से 150 करोड़ रुपए के पार निकल जाएगी। अगर भारत में फिल्म का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक रहा, तो प्री-सेल्स का आंकड़ा 200 करोड़ तक पहुंचना भी संभव लग रहा है। इससे पहले ‘पुष्पा 2’, ‘लियो’ और ‘RRR’ जैसी फिल्में इस आंकड़े के करीब रही हैं। हालांकि, अगर ‘धुरंधर’ वहां तक पहुंचती है, तो यह पहली ऐसी फिल्म होगी जो इस मुकाम को हासिल करेगी। धुरंधर को भी शानदार रिस्पॉन्स मिला था इससे पहले फिल्म धुरंधर के पहले पार्ट ने भारत के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बॉक्स ऑफिस पर भी शानदार प्रदर्शन किया था। फिल्म ने दुनिया भर में करीब ₹1,303 करोड़ की कमाई की। भारत में फिल्म का ग्रॉस कलेक्शन ₹1,005.85 करोड़ रहा, जबकि नेट कलेक्शन लगभग ₹836.95 करोड़ हुआ। इसके साथ ही यह भारत में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली हिंदी सिंगल-लैंग्वेज फिल्म बन गई। विदेशी बाजारों में भी फिल्म धुरंधर को जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला। ओवरसीज में इसने करीब ₹299.5 करोड़ का कारोबार किया। खासतौर पर अमेरिका और कनाडा में फिल्म ने ₹193.06 करोड़ से ज्यादा की कमाई कर ‘बाहुबली 2’ का रिकॉर्ड भी पीछे छोड़ दिया। दिलचस्प बात यह है कि यह बड़ी सफलता फिल्म को तब मिली, जब इसे खाड़ी देशों में रिलीज की अनुमति नहीं मिली थी। इसके अलावा ‘धुरंधर’ भारतीय सिनेमा की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली ‘A’ रेटेड फिल्म भी बन गई।

थोक महंगाई 12 महीने में सबसे ज्यादा:फरवरी में ये 2.13% पर पहुंची, खाने-पीने की चीजें और रोजाना जरूरत का सामान महंगा हुआ

थोक महंगाई 12 महीने में सबसे ज्यादा:फरवरी में ये 2.13% पर पहुंची, खाने-पीने की चीजें और रोजाना जरूरत का सामान महंगा हुआ

फरवरी में थोक महंगाई (WPI) बढ़कर 2.13% पर पहुंच गई है। ये महंगाई का 12 महीने का हाई लेवल है। फरवरी 2025 में ये 2.38% पर पहुंच गई थी। इससे पहले जनवरी 2026 में थोक महंगाई 1.81% पर थी। वहीं दिसंबर में थोक महंगाई 0.83% पर थी। कॉमर्स मिनिस्ट्री ने आज यानी 16 मार्च को थोक महंगाई के आंकड़े जारी किए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग लंबी चली तो कच्चे तेल के दाम 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकते हैं। इससे पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है, जिससे माल ढुलाई का खर्च बढ़ेगा और फल-सब्जी समेत हर जरूरी सामान की कीमतें बढ़ जाएंगी। रोजाना जरूरत के सामान, खाने-पीने की चीजें महंगी हुईं होलसेल महंगाई के 4 हिस्से प्राइमरी आर्टिकल, जिसका वेटेज 22.62% है। फ्यूल एंड पावर का वेटेज 13.15% और मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट का वेटेज सबसे ज्यादा 64.23% है। प्राइमरी आर्टिकल के भी चार हिस्से हैं। फरवरी में रिटेल महंगाई बढ़कर 3.21% पहुंची फरवरी में रिटेल महंगाई बढ़कर 3.21% पहुंच गई है। इससे पहले जनवरी में यह 2.74% थी। महंगाई में यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच जंग चल रही है। होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) का आम आदमी पर असर थोक महंगाई के लंबे समय तक बढ़े रहने से ज्यादातर प्रोडक्टिव सेक्टर पर इसका बुरा असर पड़ता है। अगर थोक मूल्य बहुत ज्यादा समय तक ऊंचे स्तर पर रहता है तो प्रोड्यूसर इसका बोझ कंज्यूमर्स पर डाल देते हैं। सरकार केवल टैक्स के जरिए WPI को कंट्रोल कर सकती है। जैसे कच्चे तेल में तेज बढ़ोतरी की स्थिति में सरकार ने ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी कटौती की थी। हालांकि, सरकार टैक्स कटौती एक सीमा में ही कम कर सकती है। WPI में ज्यादा वेटेज मेटल, केमिकल, प्लास्टिक, रबर जैसे फैक्ट्री से जुड़े सामानों का होता है। महंगाई कैसे मापी जाती है? भारत में दो तरह की महंगाई होती है। एक रिटेल यानी खुदरा और दूसरी थोक महंगाई होती है। रिटेल महंगाई दर आम ग्राहकों की तरफ से दी जाने वाली कीमतों पर आधारित होती है। इसको कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) भी कहते हैं। वहीं, होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) का अर्थ उन कीमतों से होता है, जो थोक बाजार में एक कारोबारी दूसरे कारोबारी से वसूलता है। महंगाई मापने के लिए अलग-अलग आइटम्स को शामिल किया जाता है। जैसे थोक महंगाई में मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की हिस्सेदारी 63.75%, प्राइमरी आर्टिकल जैसे फूड 22.62% और फ्यूल एंड पावर 13.15% होती है। वहीं, रिटेल महंगाई में फूड और प्रोडक्ट की भागीदारी 45.86%, हाउसिंग की 10.07% और फ्यूल सहित अन्य आइटम्स की भी भागीदारी होती है।

थोक महंगाई 12 महीने में सबसे ज्यादा:फरवरी में ये 2.13% पर पहुंची, खाने-पीने की चीजें और रोजाना जरूरत का सामान महंगा हुआ

थोक महंगाई 12 महीने में सबसे ज्यादा:फरवरी में ये 2.13% पर पहुंची, खाने-पीने की चीजें और रोजाना जरूरत का सामान महंगा हुआ

फरवरी में थोक महंगाई (WPI) बढ़कर 2.13% पर पहुंच गई है। ये महंगाई का 12 महीने का हाई लेवल है। फरवरी 2025 में ये 2.38% पर पहुंच गई थी। इससे पहले जनवरी 2026 में थोक महंगाई 1.81% पर थी। वहीं दिसंबर में थोक महंगाई 0.83% पर थी। कॉमर्स मिनिस्ट्री ने आज यानी 16 मार्च को थोक महंगाई के आंकड़े जारी किए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग लंबी चली तो कच्चे तेल के दाम 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकते हैं। इससे पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है, जिससे माल ढुलाई का खर्च बढ़ेगा और फल-सब्जी समेत हर जरूरी सामान की कीमतें बढ़ जाएंगी। रोजाना जरूरत के सामान, खाने-पीने की चीजें महंगी हुईं होलसेल महंगाई के 4 हिस्से प्राइमरी आर्टिकल, जिसका वेटेज 22.62% है। फ्यूल एंड पावर का वेटेज 13.15% और मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट का वेटेज सबसे ज्यादा 64.23% है। प्राइमरी आर्टिकल के भी चार हिस्से हैं। फरवरी में रिटेल महंगाई बढ़कर 3.21% पहुंची फरवरी में रिटेल महंगाई बढ़कर 3.21% पहुंच गई है। इससे पहले जनवरी में यह 2.74% थी। महंगाई में यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच जंग चल रही है। होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) का आम आदमी पर असर थोक महंगाई के लंबे समय तक बढ़े रहने से ज्यादातर प्रोडक्टिव सेक्टर पर इसका बुरा असर पड़ता है। अगर थोक मूल्य बहुत ज्यादा समय तक ऊंचे स्तर पर रहता है तो प्रोड्यूसर इसका बोझ कंज्यूमर्स पर डाल देते हैं। सरकार केवल टैक्स के जरिए WPI को कंट्रोल कर सकती है। जैसे कच्चे तेल में तेज बढ़ोतरी की स्थिति में सरकार ने ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी कटौती की थी। हालांकि, सरकार टैक्स कटौती एक सीमा में ही कम कर सकती है। WPI में ज्यादा वेटेज मेटल, केमिकल, प्लास्टिक, रबर जैसे फैक्ट्री से जुड़े सामानों का होता है। महंगाई कैसे मापी जाती है? भारत में दो तरह की महंगाई होती है। एक रिटेल यानी खुदरा और दूसरी थोक महंगाई होती है। रिटेल महंगाई दर आम ग्राहकों की तरफ से दी जाने वाली कीमतों पर आधारित होती है। इसको कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) भी कहते हैं। वहीं, होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) का अर्थ उन कीमतों से होता है, जो थोक बाजार में एक कारोबारी दूसरे कारोबारी से वसूलता है। महंगाई मापने के लिए अलग-अलग आइटम्स को शामिल किया जाता है। जैसे थोक महंगाई में मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की हिस्सेदारी 63.75%, प्राइमरी आर्टिकल जैसे फूड 22.62% और फ्यूल एंड पावर 13.15% होती है। वहीं, रिटेल महंगाई में फूड और प्रोडक्ट की भागीदारी 45.86%, हाउसिंग की 10.07% और फ्यूल सहित अन्य आइटम्स की भी भागीदारी होती है।

‘लोगों का जनादेश स्पष्ट है’: अखिलेश यादव ने पश्चिम बंगाल में भाजपा के लिए ‘सम्मानजनक हार’ की भविष्यवाणी की | राजनीति समाचार

The United States and Israel launched a joint large-scale military offensive against Iran on February 28. (File pic/AFP)

आखरी अपडेट:मार्च 16, 2026, 12:24 IST सपा नेता ने मौजूदा एलपीजी संकट पर सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि एलपीजी शब्द का मतलब अब “लैपाटा गैस” है। अखिलेश यादव। (पीटीआई) समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने रविवार को कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पश्चिम बंगाल में “सम्मानजनक हार” की ओर बढ़ रही है, उन्होंने दावा किया कि पार्टी ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के खिलाफ गंभीर चुनौती पेश करने में विफल रही है। विज़न इंडिया कार्यक्रम में भाग लेने के बाद मुंबई में मीडिया से बात करते हुए, यादव ने कहा कि पश्चिम बंगाल में राजनीतिक मूड से संकेत मिलता है कि ममता बनर्जी मुख्यमंत्री के रूप में वापस आएंगी। उन्होंने कहा, ”लोगों का जनादेश स्पष्ट है।” सपा नेता ने मौजूदा एलपीजी संकट पर सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि एलपीजी शब्द का मतलब अब “लैपाटा गैस” है, जिससे पता चलता है कि सरकार लोगों की दैनिक चिंताओं को संबोधित करने से गायब हो गई है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने वैश्विक मंच पर नेतृत्व दिखाने का मौका गंवा दिया है. उन्होंने कहा, “अगर पीएम ने कार्रवाई की होती तो वह स्थिति को रोक सकते थे और ‘विश्व गुरु’ के रूप में खड़े हो सकते थे।” भारत के चुनाव आयोग द्वारा चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में मतदान की तारीखों की घोषणा पर टिप्पणी करते हुए, यादव ने कहा कि चुनाव आयोग को जनता के विश्वास के पुनर्निर्माण के लिए काम करना चाहिए। उन्होंने कहा, “चुनाव आयोग को मेरा संदेश निष्पक्ष चुनाव कराने और भाजपा की कठपुतली नहीं बनने का है। उसे इस बार अपनी विश्वसनीयता साबित करनी चाहिए।” समाजवादी पार्टी के नेता ने विपक्षी भारत गठबंधन के लिए अपनी पार्टी के समर्थन की भी पुष्टि की और कहा कि वह असम को छोड़कर सभी चुनावी राज्यों में गठबंधन का समर्थन करेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी गठबंधन का समर्थन करते हुए असम में एक सीट पर चुनाव लड़ सकती है। उत्तर प्रदेश के प्रवासियों पर राज ठाकरे की हालिया टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए, यादव ने कहा कि ऐसी टिप्पणियां अक्सर चुनावों के दौरान भावनाएं भड़काने के लिए की जाती हैं। उन्होंने कहा कि उनके ठाकरे के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध हैं। यादव ने उत्तर प्रदेश में एसआईआर प्रक्रिया की भी आलोचना की और आरोप लगाया कि इससे आम मतदाता प्रभावित हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि सत्तारूढ़ दल के समर्थकों को भी इस व्यवस्था के कारण कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उन्होंने एलपीजी सिलेंडर बुकिंग को प्रभावित करने वाली तकनीकी समस्याओं के बारे में चिंता जताई और कहा कि लोगों को ऑनलाइन फॉर्म भरते समय त्रुटियों का सामना करना पड़ रहा है और सरकार की तैयारियों पर सवाल उठ रहे हैं। स्कूलों में मराठी भाषा को अनिवार्य बनाने के महाराष्ट्र सरकार के फैसले पर, यादव ने कहा कि वह सभी भारतीय भाषाओं का समर्थन करते हैं और कहा कि प्रौद्योगिकी ने सीखने और संचार को आसान बना दिया है। पहले प्रकाशित: मार्च 16, 2026, 12:23 IST समाचार राजनीति ‘लोगों का जनादेश स्पष्ट है’: अखिलेश यादव ने पश्चिम बंगाल में भाजपा के लिए ‘सम्मानजनक हार’ की भविष्यवाणी की अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)अखिलेश यादव(टी)समाजवादी पार्टी(टी)बीजेपी(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)ममता बनर्जी(टी)तृणमूल कांग्रेस(टी)एलपीजी संकट(टी)प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

डेढ़ साल के मासूम को कुत्ते ने काटा:घर के आंगन में खेल रहा था, 11 साल का बच्चा भी घायल, दोनों मामले में केस दर्ज

डेढ़ साल के मासूम को कुत्ते ने काटा:घर के आंगन में खेल रहा था, 11 साल का बच्चा भी घायल, दोनों मामले में केस दर्ज

शहर में पालतू कुत्तों के हमले की दो अलग-अलग घटनाओं में दो बच्चे घायल हो गए। दोनों ही मामलों में पुलिस ने कुत्ते के मालिकों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पहली घटना बाणगंगा थाना क्षेत्र के विशाल नगर की है। यहां पालतू कुत्ते के हमले में डेढ़ साल का मासूम घायल हो गया। बच्चे के कान और गाल पर कुत्ते ने काट लिया, जिससे खून निकलने लगा। पुलिस के मुताबिक विशाल नगर निवासी भारती कश्यप ने शिकायत दर्ज कराई है कि 15 मार्च को सुबह करीब 11:35 बजे उनका डेढ़ साल का बेटा आरव घर के आंगन में खेल रहा था। उसी दौरान सामने रहने वाले मनोज परिहार ने अपने पालतू कुत्ते को खुला छोड़ रखा था। कुत्ता अचानक घर के सामने पहुंचा और बच्चे आरव के कान और गाल पर काट लिया, साथ ही सीने पर पंजा भी मार दिया। बच्चे के कान और गाल से खून निकलने लगा और वह जोर-जोर से रोने लगा। आवाज सुनकर परिजन मौके पर पहुंचे और बच्चे को संभाला। घटना के बाद परिजनों ने बाणगंगा थाने में शिकायत दर्ज कराई। तेजाजी नगर में 11 साल का बच्चा भी कुत्ते के हमले में घायल दूसरी घटना तेजाजी नगर थाना क्षेत्र में सामने आई। यहां एक 11 साल के बच्चे को कुत्ते ने काट लिया। बच्चे के परिवार का आरोप है कि पड़ोसी ने जानबूझकर अपने पालतू कुत्ते को बच्चे पर छोड़ दिया। पुलिस के मुताबिक हनुमान मोहल्ला, रालामंडल काकड़ निवासी रेखा सोलंकी की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया है। उनका बेटा शुभम सोलंकी (11) पानी की टंकी के पास खड़ा था। तभी पड़ोस में रहने वाले सुनील कटारे अपने पालतू कुत्ते के साथ वहां पहुंचे और कुत्ते को बच्चे की तरफ छोड़ दिया। कुत्ता अचानक शुभम पर झपटा और उसकी कमर के बाएं हिस्से में काट लिया, जिससे खून निकलने लगा। इसके बाद बच्चे को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। पुलिस दोनों मामलों में जांच कर रही है। पिछले साल 49 हजार लोग बने थे कुत्तों के शिकार पिछले साल 2025 में 1 जनवरी से 31 दिसंबर 2025 तक 48,972 रहवासियों को आवारा कुत्तों ने शिकार बनाया। इसमें घायल नाबालिगों की संख्या 8727, महिलाओं की संख्या 8976 और पुरुष पीड़ितों की संख्या 31 हजार है। यह आंकड़े तो सिर्फ सरकारी हुकुमचंद पोली क्लिनिक लाल अस्पताल के हैं, जबकि अन्य प्राइवेट अस्पताल के मरीजों की संख्या अलग है। बाकी इंदौर जिले के अन्य शासकीय या निजी अस्पतालों में इलाज कराने वालों की संख्या जोड़ी जाए तो आंकड़ा लगभग 55 हजार तक पहुंच सकता है।

राज्यसभा चुनाव 2026: सिर्फ तीन क्रॉस-वोट बिहार में एनडीए को क्लीन स्वीप दिला सकते हैं | व्याख्याकार समाचार

US President Donald Trump (AFP)

आखरी अपडेट:मार्च 16, 2026, 12:09 IST पांच सीटों के लिए छह उम्मीदवारों के मैदान में होने से, चुनाव विधायी अंकगणित, गठबंधन अनुशासन और संभावित क्रॉस-वोटिंग की परीक्षा बन गया है। जबकि एनडीए को चार सीटें जीतने का भरोसा है, उसके पांचवें उम्मीदवार – शिवेश कुमार – को गठबंधन को क्लीन स्वीप करने के लिए विपक्ष से कम से कम तीन क्रॉस वोटों की आवश्यकता होगी। (एएफपी) यहां तक ​​कि 10 राज्यों में 37 राज्यसभा सीटों के लिए मतदान चल रहा है, राजनीतिक सुर्खियों का केंद्र बिहार है, जहां सत्तारूढ़ एनडीए और विपक्षी गुट के बीच गहन युद्धाभ्यास के बीच उच्च सदन की पांच सीटों पर चुनाव हो रहा है। पाँच सीटों के लिए छह उम्मीदवारों के मैदान में होने से, चुनाव विधायी अंकगणित, गठबंधन अनुशासन और संभावित क्रॉस-वोटिंग की परीक्षा में बदल गया है। जबकि एनडीए को चार सीटें जीतने का भरोसा है, उसके पांचवें उम्मीदवार- शिवेश कुमार- को गठबंधन को क्लीन स्वीप करने के लिए विपक्ष से कम से कम तीन क्रॉस वोटों की आवश्यकता होगी। दूसरी ओर, राजद के नेतृत्व वाले विपक्ष को छोटे दलों के समर्थन से कम से कम एक सीट सुरक्षित करने की उम्मीद है, जिससे बिहार सोमवार के राज्यसभा चुनावों में सबसे करीबी नजर वाला युद्धक्षेत्र बन जाएगा। क्रॉस वोटिंग क्या है? क्रॉस वोटिंग तब होती है जब कोई विधायक अपनी पार्टी या गठबंधन द्वारा नामित उम्मीदवार के अलावा किसी अन्य उम्मीदवार को वोट देता है। चूँकि राज्यसभा में मतदान एकल हस्तांतरणीय वोट प्रणाली का उपयोग करके गुप्त मतदान के माध्यम से किया जाता है, यह कभी-कभी विधायकों को तत्काल पता लगाए बिना पार्टी के निर्देशों की अवहेलना करने की अनुमति देता है। वोट कोटा की गणना कैसे की जाती है बिहार विधानसभा में 243 विधायक हैं. एक राज्यसभा सांसद को चुनने का फॉर्मूला है: कोटा = (कुल विधायक/सीटें + 1) + 1 बिहार में, विचाराधीन पांच सीटों के लिए, संख्या होगी: (243/6) + 1, जो लगभग 41 के बराबर है। इसका मतलब है कि प्रत्येक उम्मीदवार को एक सीट जीतने के लिए 41 प्रथम-वरीयता वोट की आवश्यकता है। अब आइए बिहार विधानसभा में अनुमानित गुट संख्या और वर्तमान राजनीतिक ताकत पर नजर डालते हैं। सत्तारूढ़ गठबंधन – एनडीए – में भारतीय जनता पार्टी, जनता दल (यूनाइटेड) और सहयोगी शामिल हैं, जिसमें कुल मिलाकर लगभग 202 विधायक हैं। विपक्षी गुट में, राष्ट्रीय जनता दल की ताकत 25 विधायक है, कांग्रेस के छह विधायक हैं, और वामपंथी दलों के तीन विधायक हैं, जो लगभग 35 विधायक हैं। एनडीटीवी के मुताबिक, अन्य में पांच पर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन और एक पर बहुजन समाज पार्टी शामिल है। सीट अंकगणित एनडीए के लिए, उपलब्ध वोट 202 हैं। इसका मतलब है कि गारंटीकृत सीटों की संख्या 41×4 है, जो 164 वोट है। अब चार सीटों के बाद बचे वोट हैं 202-164 = 38 वोट. पांचवीं सीट जीतने के लिए एनडीए को बाहर से तीन और विधायकों की जरूरत है. विपक्षी गुट में, वोट 35 हैं, और एक सीट के लिए आवश्यक संख्या 41 है। इसका मतलब है कि विपक्ष को एक सीट जीतने के लिए एआईएमआईएम/बसपा/अन्य के छह और विधायकों की आवश्यकता है। यही कारण है कि क्रॉस वोटिंग महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि पांचवीं सीट संख्यात्मक रूप से कड़ी है। संभावित परिदृश्य क्या हैं? परिदृश्य 1: एनडीए को क्रॉस-वोट मिले अगर विपक्ष के तीन विधायकों ने क्रॉस वोटिंग कर दी तो एनडीए पांचों सीटों पर जीत हासिल कर लेगा. परिदृश्य 2: विपक्ष एकजुट होता है अगर एआईएमआईएम (5) + बीएसपी (1) विपक्ष का समर्थन करती है, तो इसका मतलब 41 वोट होगा, जिसका मतलब है कि विपक्ष एक सीट जीतता है। परिदृश्य 3: छोटी पार्टियों में विभाजन यदि एआईएमआईएम अपना उम्मीदवार खड़ा करती है, तो विपक्षी वोट विभाजित हो जाएंगे, जिसका मतलब है कि एनडीए पांचवीं सीट आसानी से जीत सकता है। मुकाबला कांटे का है क्योंकि कुछ विधायक खेल पलट सकते हैं। राजनीतिक दल सकते में हैं क्योंकि 1-3 विधायकों के पाला बदलने से आखिरी सीट तय हो सकती है. इसके अलावा एआईएमआईएम जैसी छोटी पार्टियां किंगमेकर की ताकत रखती हैं और नतीजे पलट सकती हैं। इसके अलावा, मतदान की गुप्त प्रकृति को देखते हुए, गठबंधन अपने झुंड को एक साथ रखने की कोशिश कर रहे हैं। पहले प्रकाशित: मार्च 16, 2026, 10:54 IST समाचार समझाने वाले राज्यसभा चुनाव 2026: सिर्फ तीन क्रॉस-वोट बिहार में एनडीए को क्लीन स्वीप दिला सकते हैं अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें

चुनाव के ऐलान के बाद बंगाल में कब्ज़ा, डीजीपी-कमिशनर भी बदले, अब तक कितने पद? पूरी सूची पढ़ें

चुनाव के ऐलान के बाद बंगाल में कब्ज़ा, डीजीपी-कमिशनर भी बदले, अब तक कितने पद? पूरी सूची पढ़ें

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 की तारीखों की घोषणा कुछ ही घंटों बाद भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने राज्य प्रशासन में बड़ा निवेश कर दिया। आयोग ने पहले मुख्य सचिव और गृह सचिव को हटाने का आदेश दिया और अब राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को भी बर्खास्त कर दिया गया है। राज्य के अधिकारियों, आईजी और कोलकाता के पुलिस आयुक्त को उनके पद से हटा दिया गया है और उनकी जगह नए अधिकारियों को कार्यभार सौंपा जाएगा। मुख्य सचिव और गृह सचिव बदल गयेचुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल की मुख्य सचिव नंदिनी चौधरी और गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीना को उनके पद से हटा दिया गया है। नंदिनी आर्केस्ट्रा फ़्लोरिडा नारियाला को राज्य का नया मुख्य सचिव नियुक्त किया गया है। वहीं संगमित्रा घोष को नया गृह सचिव बनाया गया है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का गोदामऔद्योगिक के साथ-साथ आयोग ने राज्य के पुलिस स्टेशनों में भी बदलाव किये हैं। पश्चिम बंगाल के पुलिस कमिश्नर (डीजीपी), एक आईजी रैंक के अधिकारी और कोलकाता के पुलिस कमिश्नर का भी दिवालियापन किया गया है। इन अधिकारियों की जगह जल्द ही नए अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी, जो चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालेंगे। सात एयरो अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गयाचुनाव आयोग ने सात एयरो (एईआरओ) अधिकारियों पर भी सीधे तौर पर मुहर लगाते हुए उन्हें निलंबित कर दिया है। आयोग का मानना ​​है कि चुनाव प्रक्रिया में शिक्षकों और बंधकों के लिए व्यवस्था में बदलाव जरूरी है। जानें किसे मिली जिम्मेदारीईसीआई ने एक पत्र में कहा कि 1993 में बैक आईएएस अधिकारी मरियल नारियाला को पश्चिम बंगाल का नया मुख्य सचिव नियुक्त किया गया था। वहीं 1997 में बैचलर आईएएस अधिकारी संगमित्रा घोष को पश्चिम बंगाल के गृह और पहाड़ी मामले में प्रधान सचिव के पद पर नियुक्त किया गया था। निर्वाचन आयोग ने निर्देश दिए हैं कि यह आदेश तुरंत लागू किया जाएगा और इसमें शामिल अधिकारियों की रिपोर्ट 16 मार्च (सोमवार) दोपहर 3 बजे तक जारी की जाएगी।

मुंबई में सलमान खान से मिले अखिलेश यादव:बीमार पिता सलीम खान की सेहत का हाल जाना; सोशल मीडिया पर फोटो शेयर की

मुंबई में सलमान खान से मिले अखिलेश यादव:बीमार पिता सलीम खान की सेहत का हाल जाना; सोशल मीडिया पर फोटो शेयर की

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने रविवार को मुंबई में बॉलीवुड स्टार सलमान खान से मुलाकात की। अखिलेश ने खुद सलमान के साथ अपनी तस्वीर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी शेयर की। सूत्रों के मुताबिक, अखिलेश सलमान के पिता सलीम खान की सेहत का हाल जानने पहुंचे थे। अखिलेश ने यहां विजन इंडिया कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया। 5 राज्यों में चुनाव को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा- कांग्रेस हमारा पुराना साथी है। हम उसके साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे। असम में सीट मिले या न मिले, सपा कांग्रेस का चुनाव में पूरा समर्थन करेगी। भाजपा पार्टी नहीं, बल्कि गैंग की तरह काम कर रही। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की जीत का दावा करते हुए अखिलेश ने कहा- वहां चुनाव आयोग निष्पक्ष चुनाव कराए। बसपा से दोबारा गठबंधन के सवाल के जवाब में अखिलेश ने कहा- ऐसा मायावती को प्रधानमंत्री बनाने के लिए किया था। इंस्टाग्राम पर फोटो शेयर की, लिखा- मुंबई मिलन अखिलेश यादव ने इस मुलाकात की तस्वीर पोस्ट करते हुए कैप्शन में ‘मुंबई मिलन’ लिखा है। फोटो में दोनों एक साथ पोज देते नजर आ रहे हैं। पोस्ट होते ही यह तस्वीर वायरल हो गई और कुछ ही घंटों में इसे लाखों लाइक्स मिल गए। वहीं फैन्स इस मुलाकात के पीछे के मकसद को लेकर कई तरह के कयास लगा रहे हैं। सलीम खान लीलावती अस्पताल में भर्ती सलीम खान को 17 फरवरी को सुबह ब्रेन से जुड़ी दिक्कत के बाद लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्हें सुबह करीब 8:30 बजे इमरजेंसी में लाया गया। यहां डॉक्टरों की एक स्पेशल टीम बनाई गई, जिसने सलीम खान की तबीयत देखी। 18 फरवरी को लीलावती अस्पताल के डॉक्टर जलील पारकर ने जानकारी दी थी कि सलीम खान की डिजिटल सब्स्ट्रैक्शन एंजियोग्राफी (DSA) की गई। डॉक्टरों के मुताबिक, यह ब्रेन सर्जरी नहीं है। DSA एक एडवांस्ड डायग्नोस्टिक टेस्ट है, जिससे दिमाग की नसों की स्थिति और संभावित ब्लॉकेज को साफ तरीके से देखा जाता है। खान परिवार के राजनेताओं से पुराने संबंध सलमान खान के परिवार के साथ अलग-अलग पार्टियों के राजनेताओं के पुराने संबंध रहे हैं। इससे पहले भी अखिलेश यादव और अन्य कई बड़े नेता सलमान और सलीम खान से मिलते रहे हैं। सलीम खान बॉलीवुड के दिग्गज लेखक हैं। उनकी तबीयत खराब होने की खबर के बाद से ही कई बड़ी हस्तियां उनसे मिलने पहुंच चुकी हैं। अब अखिलेश की प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही बड़ी बातें पढ़िए… 1- बीजेपी राजनैतिक दल नहीं बल्कि गैंग अखिलेश यादव ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा कोई राजनीतिक पार्टी नहीं है, बल्कि एक गैंग की तरह काम कर रही है। माघ मेला में शंकराचार्य को स्नान नहीं देने का जिक्र करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि शंकराचार्य के अपमान पर भाजपा के नेताओं के बयान आपस में विरोधाभासी हैं। उनके दो डिप्टी सीएम ने कहा था कि जब भी मुलाकात होगी तो माफी मांगेंगे, लेकिन उनके ‘गैंग लीडर’ ने कह दिया कि जो भी उनसे मिलेगा उसे कैबिनेट से निकाल दिया जाएगा। 2- चुनाव आयोग, भाजपा का आयोग न बने सपा प्रमुख ने भारत निर्वाचन आयोग से अपील की कि वह निष्पक्ष चुनाव कराए। उन्होंने कहा- चुनाव आयोग भाजपा का आयोग बनकर चुनाव न कराए। अपनी क्रेडिबिलिटी साबित करते हुए चुनाव कराए कि आयोग बिल्कुल निष्पक्ष है। अखिलेश ने आरोप लगाया कि एसआईआर के दौरान ऐसा लगा कि चुनाव आयोग भाजपा के साथ मिलकर काम कर रहा था। 3- बंगाल में भाजपा सम्मानजनक हार चाहती है पश्चिम बंगाल की राजनीति पर बोलते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा वहां टक्कर नहीं दे पा रही है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी एक बार फिर मुख्यमंत्री बनने जा रही हैं। बंगाल में भाजपा केवल “सम्मानजनक हार” चाहती है। अखिलेश यादव ने बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा कि भाजपा राजनैतिक दल नहीं बल्कि गैंग। यूपी में भाजपा नेताओं के बयानों में आपस में विरोधाभास। 4- मायावती को पीएम बनवाने के लिए गठबंधन किया सपा प्रमुख ने बहुजन आंदोलन के नेता कांशीराम को याद करते हुए कहा- वे बाबा साहेब के रास्ते पर चलने वाले नेता थे। एक समय ऐसा भी आया जब यूपी में नेता जी ने कांशीराम के साथ मिलकर सरकार बनाई थी और बसपा को ताकत देने का काम किया था। हमने दूसरी बार गठबंधन इसलिए किया था ताकि मायावती प्रधानमंत्री बन सकें। 5- कांग्रेस के साथ गठबंधन जारी रखेंगे सपा अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस उनकी पुरानी सहयोगी है और दोनों दल मिलकर चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि अगर असम में सीट नहीं भी मिलेगी, तब भी समाजवादी पार्टी कांग्रेस का समर्थन करेगी। 6- बांग्लादेशियों को लेकर पूछा- बांग्लादेश क्यों नहीं भेजा अखिलेश यादव ने आगरा से पकड़े गए कथित बांग्लादेशियों को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अगर वे बांग्लादेशी थे तो उन्हें कोलकाता छोड़ने के बजाय सीधे बांग्लादेश भेजा जाना चाहिए था। 7- VIP विमानों की सुरक्षा पर भी जताई चिंता अजित पवार के विमान हादसे में मौत के सवाल पर अखिलेश ने कहा कि देश के महत्वपूर्ण लोग प्राइवेट एयरक्राफ्ट से उड़ान भरते हैं, इसलिए वीआईपी विमानों की गुणवत्ता बेहतर होनी चाहिए। हालांकि, ऐसी घटनाओं पर शक होना स्वाभाविक है। इसकी जांच होनी चाहिए ताकि सच सामने आ सके। —————– ये खबर भी पढ़ें… अलीगढ़ सांसद बोले- मुसलमान क्या हमारी छाती पर चढ़ेंगे, नमाज पर भड़के; कहा- सुबह 4 बजे से चिल्लाते हैं ​”मकान इनको, राशन इनको, सिलेंडर इनको… सब कुछ तो सरकार इन्हें दे रही है। AIIMS से लेकर जिला अस्पताल तक चले जाओ, सारी सरकारी व्यवस्थाओं का फायदा सबसे ज्यादा मुसलमान ही ले रहा। इसके बाद अब क्या हमारी छाती पर चढ़ेंगे?” यह बात अलीगढ़ से भाजपा सांसद सतीश गौतम ने एक यूट्यूबर को दिए इंटरव्यू में कही। पूरी खबर पढ़ें…