Boxa Fast-Track Court For Zubain Garg Case

गुवाहाटी54 मिनट पहले कॉपी लिंक दावा है कि सिंगर जुबीन गर्ग का ये वीडियो 19 सितंबर 2025 को हादसे से ठीक पहले लिया गया था। गुवाहाटी हाईकोर्ट ने असम के सिंगर जुबीन गर्ग की मौत के मामले की हर दिन सुनवाई के लिए एक विशेष फास्ट-ट्रैक सेशन कोर्ट नियुक्त किया है। बक्सा जिले की जिला जज शर्मिला भुइयां इस फास्ट-ट्रैक कोर्ट की अध्यक्षता करेंगी। गुवाहाटी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने ये नियुक्ति की है। जुबीन गर्ग की पिछले साल 19 सितंबर को सिंगापुर में समुद्र में तैरते समय मौत हो गई थी। जुबीन वहां चौथे नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल में भाग लेने गए थे। असम पुलिस की CID की विशेष जांच टीम (SIT) ने इस मामले की जांच की और स्थानीय कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की, जिसमें सात लोगों को आरोपी बनाया गया है। राज्य कैबिनेट ने पिछले महीने इस मामले की सुनवाई तेज करने के लिए गुवाहाटी हाई कोर्ट से फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने का अनुरोध किया था। सिंगापुर की जांच में किसी साजिश की बात नहीं सिंगापुर में स्थानीय एजेंसियां भी वहां अलग जांच कर रही है। वहां की कोरोनर कोर्ट ने हाल ही में किसी साजिश की आशंका से इनकार करते हुए कहा कि जुबीन गर्ग अत्यधिक नशे में थे और लाइफ जैकेट पहनने से इनकार करने के बाद लाजरस आइलैंड के पास समुद्र में डूब गए। ——————- ये खबर भी पढ़ें: जुबीन गर्ग के परिवार ने PM को लेटर लिखा:केस की सुनवाई के लिए विशेष कोर्ट बनाने की मांग, सिंगर की मौत सिंगापुर में हुई थी दावा है कि सिंगर जुबीन गर्ग का ये वीडियो 19 सितंबर 2025 को हादसे से ठीक पहले लिया गया था। असम के सिंगर जुबीन गर्ग की मौत के मामले में उनके परिवार ने शनिवार (24 सितंबर) को PM नरेंद्र मोदी को लेटर लिखा। लेटर में मांग की है कि सिंगर की मौत के मामले में तेजी से सुनवाई के लिए विशेष कोर्ट बनाई जाए। परिवार ने यह भी मांग की है कि सजा मिलने तक केस में किसी भी आरोपी को जमानत न दी जाए। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
आयरलैंड के जॉन मूनी DC के फील्डिंग कोच बने:तीन वनडे वर्ल्ड कप खेल चुके, दिल्ली को पहले खिताब का इंतजार

IPL टीम दिल्ली कैपिटल्स ने आयरलैंड के पूर्व ऑलराउंडर जॉन मूनी को टीम का नया फील्डिंग कोच बनाया है। रिपोर्ट के मुताबिक, मूनी जल्द ही भारत आकर टीम के साथ जुड़ेंगे और आगामी सीजन की तैयारियों में हिस्सा लेंगे। मूनी ने एंटोन रूक्स और ज्ञानेश्वर राव की जगह ली है। वेस्टइंडीज-अफगानिस्तान के साथ काम कर चुके 44 साल के मूनी वनडे और टी-20 फॉर्मेट में आयरलैंड के लिए 90 से ज्यादा मैच खेले। उन्होंने अपना आखिरी मुकाबला साल 2015 में खेला था। वहीं, इसके बाद साल 2018 से लेकर 2019 तक अफगानिस्तान टीम के लिए फील्डिंग कोच की जिम्मेदारी निभाई, इसके बाद साल 2019 में मूनी ने कुछ समय के लिए वेस्टइंडीज टीम के लिए भी काम किया था। IPL में पहली बार मूनी को किसी टीम के साथ काम करने का मौका मिल रहा है। दिल्ली अपना पहला मैच 1 अप्रैल को खेलेगी दिल्ली कैपिटल्स पहले फेज के शेड्यूल में अपना पहला मुकाबला 1 अप्रैल को लखनऊ सुपर जाएंट्स के खिलाफ लखनऊ में खेलेगी। IPL के दूसरे फेज का शेड्यूल 5 राज्यों में होने वाले चुनाव की तारीखों को देखते हुए जारी किया जाएगा। 2008 में IPL शुरू होने के बाद जब भी देश में आम चुनाव (2009, 2014, 2019 और 2024) या किसी राज्य में विधानसभा चुनाव हुए हैं, तब टूर्नामेंट का शेड्यूल दो हिस्सों में जारी किया गया है। DC पहले सीजन 2008 से IPL में हिस्सा ले रही है। टीम को पहले खिताब की तलाश है। ————————– स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… अगरकर ने 2027 वर्ल्डकप तक कॉन्ट्रैक्ट बढ़ाने की मांग की:BCCI से रिक्वेस्ट की भारतीय क्रिकेट टीम के चीफ सिलेक्टर अजीत अगरकर ने अपने कॉन्ट्रैक्ट को 2027 वनडे वर्ल्ड कप तक बढ़ाने की इच्छा जताई है। उन्होंने इसके लिए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) से एक्सटेंशन मांगा है।अगरकर का मौजूदा कार्यकाल पहले ही बढ़ाया जा चुका है। 2025 IPL से पहले BCCI ने उनका कॉन्ट्रैक्ट एक साल के लिए बढ़ाकर जून 2026 तक कर दिया था। पूर्व तेज गेंदबाज अगरकर को जुलाई 2023 में टीम इंडिया की सिलेक्शन कमेटी का चेयरमैन बनाया गया था। पूरी खबर…
सिक्किम की फिल्म ‘शेप ऑफ मोमो’ दो इंटरनेशनल अवॉर्ड जीती:रूस के फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट डेब्यू फिल्म बनी; डायरेक्टर ने अवॉर्ड राज्य को डेडिकेट किए

सिक्किम की नेपाली भाषा की फिल्म ‘शेप ऑफ मोमो’ ने दो इंटरनेशनल अवॉर्ड जीते हैं। रूस के खांटी-मानसीस्क में आयोजित ‘स्पिरिट ऑफ फायर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल’ में इस फिल्म को बेस्ट इंटरनेशनल डेब्यू फिल्म के लिए ‘सिल्वर टैगा अवॉर्ड’ मिला है। इसके साथ ही सांस्कृतिक मूल्यों को संजोने के लिए फिल्म को ‘सोल ऑफ रशिया – वर्ल्ड सिनेमा स्पेशल प्राइज’ अवॉर्ड दिया गया है। इस फिल्म का निर्देशन त्रिबेनी राय ने किया है। डायरेक्टर सिक्किम को समर्पित की जीत अवॉर्ड लेते समय डायरेक्टर त्रिबेनी राय काफी भावुक नजर आईं। उन्होंने अपनी इस सफलता को सिक्किम राज्य को समर्पित किया है। त्रिबेनी ने बताया कि यह अवॉर्ड उनके लिए इसलिए भी खास है क्योंकि उनकी मां इस फिल्म की प्रोड्यूसर हैं और उन्होंने अपनी मां के साथ स्टेज पर यह सम्मान हासिल किया। रूस के फिल्म फेस्टिवल से मिली पहचान ‘शेप ऑफ मोमो’ को इस फिल्म फेस्टिवल के इंटरनेशनल डेब्यू कॉम्पिटिशन में शामिल किया गया था। 16 मार्च को हुए अवॉर्ड समारोह में फिल्म की काफी तारीफ हुई। यह फिल्म सिक्किम और पूर्वोत्तर भारत की कहानियों को ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर ले जाने में सफल रही है। इस फेस्टिवल की शुरुआत साल 2003 में हुई थी और इसे दुनियाभर के नए फिल्ममेकर्स के लिए रूस का सबसे महत्वपूर्ण मंच माना जाता है। अब एम्स्टर्डम में होगी फिल्म की स्क्रीनिंग रूस में जीत के बाद अब ‘शेप ऑफ मोमो’ का सफर और आगे बढ़ेगा। अप्रैल में यह फिल्म नीदरलैंड के ‘सिनेमा एशिया फिल्म फेस्टिवल’ में अपनी डच प्रीमियर के लिए एम्स्टर्डम जाएगी। इससे पहले इस फिल्म का यूरोपियन प्रीमियर स्पेन के ‘सैन सेबेस्टियन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल’ में हो चुका है। इंटरनेशनल सर्किट में सराहना मिलने के बाद अब मेकर्स इसे भारत में रिलीज करने की तैयारी कर रहे हैं। इसकी शुरुआत गंगटोक में एक बड़े प्रीमियर के साथ होगी। कौन हैं डायरेक्टर त्रिबेनी राय? ईस्ट सिक्किम की रहने वाली त्रिबेनी राय का रूस से पुराना नाता है। साल 2016 में उन्होंने रूस के प्रतिष्ठित VGIK इंटरनेशनल समर स्कूल में हिस्सा लिया था, जहां उन्होंने एक शॉर्ट फिल्म भी बनाई थी। त्रिबेनी की फिल्म ‘शेप ऑफ मोमो’ न केवल एक कहानी है, बल्कि यह सिक्किम की संस्कृति और वहां के पारंपरिक मूल्यों को भी बखूबी दर्शाती है।
फिल्म मातृभूमि का गाना 'चांद देख लेना' रिलीज:गाने में सलमान खान और चित्रांगदा सिंह के बीच इमोशनल लव स्टोरी दिखी

सलमान खान ने अपने फैंस को ईद से पहले खास तोहफा दिया है। बुधवार को सलमान और चित्रांगदा सिंह पर फिल्माया गया फिल्म “मातृभूमि” का गाना “चांद देख लेना” रिलीज किया गया है। गाने का संगीत हिमेश रेशमिया ने दिया है और इसको सिंगर निहाल टौरो और अंकोना मुखर्जी ने गाया है। यह गाना पुराने दौर के सच्चे प्यार की याद दिलाता है। यह एक सैनिक की ड्यूटी और उसके रिश्तों के बीच की इमोशनल जर्नी को खूबसूरती से दिखाता है। यह गाना चांद के इमोशनल महत्व को बहुत खूबसूरती से दिखाता है, जो ईद और करवा चौथ दोनों का अहम हिस्सा है। जहां ईद पर चांद का दिखना जश्न और मिलन का प्रतीक है, वहीं करवा चौथ पर यह प्यार, इंतजार और भरोसे को दर्शाता है। गाना इन दोनों परंपराओं को भावनाओं और उम्मीद के जरिए एक साथ पिरोता है। देखें गाने की झलक- गौरतलब है कि फिल्म के टाइटल ट्रैक “मातृभूमि” को लोगों ने खूब पसंद किया और इसे यूट्यूब पर 50 मिलियन से ज्यादा व्यूज मिले। इसके बाद वेलेंटाइन डे पर गाना “मैं हूं” गाना रिलीज हुआ था। बता दें कि पहले इस फिल्म का नाम ‘बैटल ऑफ गलवान’ था, जिसे अब बदलकर ‘मातृभूमि: मे वार रेस्ट इन पीस’ कर दिया गया है। यह बदलाव फिल्म की कहानी के गहरे जज्बात और जंग के बीच इंसानियत के संदेश को दर्शाने के लिए किया गया है। फिल्म को सलमान खान फिल्म्स के बैनर तले सलमा खान ने प्रोड्यूस किया है, जबकि अपूर्व लाखिया इसके डायरेक्टर हैं।
गुनगुने पानी में नींबू और शहद…. सही मात्रा और तरीका जानें, साथ ही जानिए 5 चौंकाने वाले फायदे

Last Updated:March 19, 2026, 14:49 IST स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए सुबह खाली पेट नींबू पानी पीना एक सरल और असरदार तरीका है. इसमें मौजूद विटामिन C, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर को डिटॉक्स करते हैं, इम्यूनिटी मजबूत करते हैं, त्वचा को चमकदार बनाते हैं और दिनभर ऊर्जा बनाए रखते हैं. आजकल हेल्दी रहने के लिए लोग कई घरेलू नुस्खे अपनाते हैं, जिनमें से एक असरदार तरीका है सुबह खाली पेट नींबू पानी पीना. नींबू में विटामिन C, एंटीऑक्सीडेंट, पोटैशियम और साइट्रिक एसिड जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर के लिए फायदेमंद होते हैं. आयुर्वेद में भी सुबह गुनगुने पानी के साथ नींबू लेने को सेहत के लिए लाभकारी माना गया है. नींबू में भरपूर विटामिन C पाया जाता है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी को मजबूत बनाने में मदद करता है. सुबह खाली पेट नींबू पानी पीने से शरीर को दिनभर के लिए ऊर्जा मिलती है और संक्रमण से लड़ने में भी मदद होती है. आयुर्वेद के अनुसार, नींबू में ऐसे गुण होते हैं जो शरीर की प्राकृतिक रक्षा प्रणाली को मजबूत करते हैं और मौसम बदलने पर सर्दी-जुकाम जैसी समस्याओं से बचाने में सहायक होते हैं. नींबू पानी शरीर को प्राकृतिक तरीके से डिटॉक्स करने में मदद करता है और शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालता है. आयुर्वेद के अनुसार, जब शरीर में अमा (टॉक्सिन) जमा हो जाता है तो विभिन्न बीमारियां हो सकती हैं. सुबह नींबू पानी पीने से शरीर की सफाई होती है और लिवर बेहतर तरीके से काम करता है. Add News18 as Preferred Source on Google आजकल कई लोग वजन कम करने के लिए सुबह नींबू पानी पीते हैं. गुनगुने पानी में नींबू मिलाकर पीने से मेटाबॉलिज्म तेज होता है, जिससे शरीर कैलोरी को बेहतर तरीके से बर्न करता है. आयुर्वेद में इसे शरीर के कफ दोष को संतुलित करने वाला माना जाता है, और कफ बढ़ने से वजन बढ़ सकता है. इसलिए सुबह नींबू पानी पीना वजन नियंत्रित रखने में मदद कर सकता है. नींबू में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन C त्वचा के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं. नियमित रूप से नींबू पानी पीने से शरीर से टॉक्सिन बाहर निकलते हैं, जिससे त्वचा साफ और चमकदार दिखती है. यह त्वचा में कोलेजन बनने में भी मदद करता है, जिससे त्वचा हेल्दी और फ्रेश नजर आती है. इसलिए इसे कई लोग प्राकृतिक स्किन केयर ड्रिंक भी मानते हैं. रात भर सोने के बाद शरीर को पानी की जरूरत होती है, और सुबह नींबू पानी पीने से शरीर को तुरंत हाइड्रेशन मिलता है. इससे शरीर में ताजगी महसूस होती है और दिन की शुरुआत भी अच्छी होती है. आयुर्वेद में सुबह उठकर पानी पीने की परंपरा को उषापान कहा जाता है, और जब इस पानी में नींबू मिलाया जाता है तो यह और भी ज्यादा फायदेमंद हो जाता है. अगर आप सुबह नींबू पानी पीना चाहते हैं तो इसे सही तरीके से लेना जरूरी है. सुबह उठने के बाद एक गिलास गुनगुना पानी लें, इसमें आधा नींबू निचोड़ें, चाहें तो थोड़ा शहद भी मिला सकते हैं, और इसे धीरे-धीरे घूंट-घूंट करके पिएं. इससे शरीर को अधिक लाभ मिल सकता है. First Published : March 19, 2026, 14:49 IST
इंडक्शन यूजिंग टिप्स: गैस की रसोई में चूल्हे का उपयोग कैसे किया जाता है? तो जान लें ये स्मार्ट उपाय ऑलिव ग्रोथ एक्सटेंशन मुश्किल

19 मार्च 2026 को 14:44 IST पर अपडेट किया गया रसोई सुरक्षा युक्तियाँ: यदि आप भी विशेष चूल्हा यूज़ कर रहे हैं तो इन 4 सेंसेट से डाउनग्रेड करें, नहीं तो आपका बिजली बिल बढ़ सकता है, वहीं सुरक्षा का खतरा हो सकता है। पढ़ें पूरी खबर। (टैग्सटूट्रांसलेट) इंडक्शन कुकटॉप गलतियाँ (टी) बिजली बिल बचाएं इंडक्शन (टी) किचन सेफ्टी टिप्स (टी) इंडक्शन सेफ्टी टिप्स भारत (टी) गैस सिलेंडर की कमी इंडक्शन डिमांड (टी) सामान्य रसोई उपकरण त्रुटियां (टी) इंडक्शन टिप्स का उपयोग करना (टी) इंडक्शन टिप्स (टी) इंडक्शन
SBI ₹2929 Cr Fraud | Anil Ambani CBI Inquiry RCom Case

नई दिल्ली1 घंटे पहले कॉपी लिंक फाइल फाेटो स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से जुड़े ₹2,929 करोड़ के लोन फ्रॉड मामले में CBI ने आज 19 मार्च को उद्योगपति अनिल अंबानी से पूछताछ की। अनिल अंबानी सुबह दिल्ली स्थित सीबीआई हेडक्वार्टर पहुंचे, जहां एजेंसी के अधिकारियों ने उनसे सवाल-जवाब किए। SBI को ₹2,929 करोड़ का नुकसान CBI ने पिछले साल अगस्त में अनिल अंबानी और आरकॉम के खिलाफ केस दर्ज किया था। एसबीआई की शिकायत के मुताबिककंपनी पर विभिन्न बैंकों का कुल ₹40,000 करोड़ से ज्यादा का बकाया था। इसमें से अकेले SBI को ₹2,929.05 करोड़ का नुकसान हुआ। CBI ने इस मामले में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। 10 साल पुराना मामला, मैनेजमेंट में शामिल होने से इनकार अनिल अंबानी के पक्ष का कहना है कि एसबीआई की यह शिकायत 10 साल से ज्यादा पुराने मामलों से जुड़ी है। जिस समय की यह बात है, उस समय अनिल अंबानी कंपनी के केवल नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर थे और वे कंपनी के रोजमर्रा के मैनेजमेंट या कामकाज में शामिल नहीं थे। अनिल अंबानी के प्रवक्ता बोले- जांच में पूरा सहयोग करेंगे पूछताछ को लेकर अनिल अंबानी के प्रवक्ता ने एक बयान जारी किया है। बयान में कहा गया है कि अनिल अंबानी 19 और 20 मार्च को दिल्ली में सीबीआई के सामने पेश हो रहे हैं। यह पेशी एसबीआई की शिकायत पर दर्ज एफआईआर के सिलसिले में है। प्रवक्ता ने कहा, अंबानी सभी जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध हैं और वे अपना पक्ष मजबूती से रखेंगे। आगे क्या होगा? सीबीआई अब इस मामले में जुटाए गए दस्तावेजों और अनिल अंबानी के बयानों का मिलान करेगी। अनिल अंबानी ने एसबीआई द्वारा खुद को फ्रॉड घोषित किए जाने के फैसले को भी अदालत में चुनौती दी है। सीबीआई की यह पूछताछ कल यानी 20 मार्च को भी जारी रह सकती है, जिसमें फंड ट्रेल (पैसे कहां गए) को लेकर गहराई से सवाल पूछे जा सकते हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
डॉग को छाछ-दही? कहीं आप अपने कुत्ते को दूध पिला कर गलती तो नहीं कर रहे हैं? जानें पूरी डिटेल और सुरक्षित तरीका

Last Updated:March 19, 2026, 14:33 IST गर्मियों में पालतू कुत्तों की देखभाल विशेष ध्यान मांगती है. तेज धूप और बढ़ते तापमान में कुत्तों को सुस्ती, भूख कम लगना और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं. सादा दही और पतली छाछ उनकी ताजगी और पोषण बनाए रखने में मदद करते हैं, लेकिन इसे सुरक्षित मात्रा और सही तरीके से देना जरूरी है. गर्मियों का मौसम पालतू कुत्तों के लिए चुनौतीपूर्ण होता है. तेज धूप और बढ़ते तापमान के कारण कुत्तों में सुस्ती, भूख कम लगना और अधिक प्यास जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं. लंबे समय तक गर्मी में रहने से हीट स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ जाता है, जो उनकी सेहत के लिए गंभीर हो सकता है. ऐसे समय में पालतू जानवरों के खान-पान और पानी की मात्रा पर खास ध्यान देना जरूरी है. डॉ. गौरव कोहली ने लोकल 18 को बताया कि हल्के और ठंडक देने वाले खाद्य पदार्थ कुत्तों को राहत दे सकते हैं, इसलिए गर्मियों में डॉग के आहार में सही बदलाव करना उनकी सेहत बनाए रखने के लिए अहम है. दही और छाछ को प्राकृतिक कूलेंट माना जाता है, जो शरीर के तापमान को संतुलित रखने में मदद करते हैं. गर्मियों में जब कुत्तों का शरीर जल्दी गर्म हो जाता है, तब थोड़ी मात्रा में सादा दही या पतली छाछ उन्हें ठंडक पहुंचाती है. इससे कुत्तों को आराम और तरोताजा महसूस होता है, और थकान भी कम हो सकती है. खासकर दोपहर या शाम के समय ट्रीट के रूप में दिया गया दही-छाछ कुत्तों को राहत देता है. हालांकि इसे हमेशा कमरे के तापमान पर देना बेहतर होता है, क्योंकि बहुत ठंडी या फ्रिज से निकली चीजें देने से गले या पाचन से जुड़ी परेशानी हो सकती है, इसलिए सावधानी बरतना जरूरी है. दही और छाछ में प्राकृतिक प्रोबायोटिक्स और लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया पाए जाते हैं, जो कुत्तों के पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद होते हैं. ये अच्छे बैक्टीरिया पेट में संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं और गैस, अपच या कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिला सकते हैं. गर्मियों में जब कुत्तों की भूख कम हो जाती है, हल्का और आसानी से पचने वाला आहार उनकी सेहत बनाए रखने में मदद करता है. नियमित रूप से सीमित मात्रा में दही देने से पेट की कार्यप्रणाली बेहतर हो सकती है. हालांकि, हर कुत्ते की पाचन क्षमता अलग होती है, इसलिए शुरुआत में कम मात्रा देकर उसकी प्रतिक्रिया जरूर देखनी चाहिए. Add News18 as Preferred Source on Google छाछ में पानी की मात्रा अधिक होती है, जो कुत्तों के शरीर में तरल पदार्थों की कमी को पूरा करने में मदद करती है. गर्मियों में डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है, खासकर जब कुत्ते बाहर ज्यादा समय बिताते हैं. ऐसे में पतली और बिना नमक वाली छाछ उन्हें हाइड्रेटेड रखने में सहायक हो सकती है और शरीर में इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने में मदद कर सकती है. हालांकि, छाछ देने के साथ-साथ हमेशा साफ और ताजा पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करनी चाहिए. कुत्तों को कभी भी सिर्फ छाछ के भरोसे नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि पानी उनकी सबसे जरूरी आवश्यकता है. सादा दही कैल्शियम, प्रोटीन और विटामिन B12 जैसे कई जरूरी पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत माना जाता है. ये तत्व कुत्तों की हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं, जबकि प्रोटीन मांसपेशियों के विकास और शरीर की ताकत बनाए रखने में सहायक होता है. गर्मियों में जब कुत्ते कम खाते हैं, तब पौष्टिक ट्रीट के रूप में थोड़ी मात्रा में दही देना फायदेमंद हो सकता है. हालांकि, इसे मुख्य भोजन का विकल्प नहीं बनाना चाहिए. संतुलित डॉग फूड के साथ दही को अतिरिक्त पोषण के रूप में देना बेहतर होता है, ताकि कुत्ते की संपूर्ण सेहत बनी रहे. कई लोग आदत या जानकारी की कमी के कारण कुत्तों को दूध पिलाते हैं, लेकिन यह हमेशा सही नहीं होता. कई कुत्तों में लैक्टोज पचाने की क्षमता कम होती है, जिससे दूध पीने के बाद दस्त, गैस या पेट दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं. इसी कारण दूध की बजाय दही या छाछ देने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इनमें लैक्टोज कम और प्रोबायोटिक्स अधिक होते हैं. अगर किसी कुत्ते को दूध से परेशानी होती है तो उसका सेवन तुरंत बंद कर देना चाहिए. सही जानकारी और सावधानी से ही पालतू जानवरों की सेहत सुरक्षित रखी जा सकती है. कुत्तों को दही या छाछ देते समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए. हमेशा सादा, बिना नमक और बिना चीनी वाला दही ही दें, क्योंकि फ्लेवर्ड या मीठा दही कुत्तों के लिए नुकसानदायक हो सकता है. शुरुआत में एक-दो चम्मच मात्रा से शुरू करना बेहतर होता है, ताकि यह देखा जा सके कि कुत्ता इसे आसानी से पचा पा रहा है या नहीं. बड़े कुत्तों को थोड़ी ज्यादा मात्रा दी जा सकती है, लेकिन रोजाना अधिक मात्रा देना सही नहीं माना जाता. दही-छाछ को मुख्य भोजन की जगह सिर्फ ट्रीट या सप्लीमेंट के रूप में ही देना चाहिए. अगर दही या छाछ देने के बाद कुत्ते को उल्टी, दस्त या खुजली जैसी समस्या दिखे तो तुरंत इसका सेवन बंद कर देना चाहिए. कुछ कुत्तों को डेयरी उत्पादों से एलर्जी हो सकती है, जिससे उनकी सेहत प्रभावित हो सकती है. ऐसे मामलों में पशु चिकित्सक से सलाह लेना जरूरी होता है. हर कुत्ते की सेहत और जरूरत अलग होती है, इसलिए आहार में बदलाव सोच-समझकर करना चाहिए. सही देखभाल और संतुलित भोजन से ही कुत्ते को गर्मियों में स्वस्थ और सक्रिय रखा जा सकता है. First Published : March 19, 2026, 14:33 IST
अमेरिका की वर्ल्ड कप जर्सी की कहानी:2022 के विद्रोह के बाद खिलाड़ियों ने खुद तय की 2026 की डिजाइन; अवे जर्सी तो नाइट क्लब में पहन सकते हैं

जून में शुरू हो रहे 2026 फीफा वर्ल्ड कप का खुमार छाने लगा है। इस बीच, अमेरिकी पुरुष फुटबॉल टीम ने इस महाकुंभ के लिए अपनी नई जर्सी लॉन्च की है। लेकिन इस जर्सी के पीछे सिर्फ डिजाइनरों की मेहनत नहीं है, बल्कि खिलाड़ियों की एक दिलचस्प बगावत की कहानी भी छिपी है। यह किट खिलाड़ियों ने खुद अपनी पसंद और शर्तों पर तैयार करवाई है। इसकी शुरुआत जून 2022 में टेक्सास के ऑस्टिन शहर से हुई। अमेरिकी टीम 2022 वर्ल्ड कप की अपनी नई किट के फोटोशूट के लिए वहां मौजूद थी। लेकिन जब खिलाड़ियों ने वह जर्सी देखी, तो वे भड़क गए। टीम के स्टार मिडफील्डर टायलर एडम्स ने तब कहा था, ‘हमें नहीं लगा कि यह किट हमारी सही पहचान पेश करती है।’ नाराजगी इस कदर थी कि खिलाड़ियों ने सेट पर काम रोक दिया। लगभग 30 मिनट तक शूटिंग रुकी रही, जिससे नाइकी और अमेरिकी फेडरेशन के अधिकारियों के बीच अफरा-तफरी मच गई। बाद में जैसे-तैसे शूट पूरा हुआ, लेकिन खिलाड़ियों की इस बगावत ने फेडरेशन को कड़ा संदेश दे दिया था। 2022 के उस अनुभव के बाद नाइकी और अमेरिकी सॉकर ने 2026 वर्ल्ड कप के लिए रणनीति पूरी तरह बदल दी। इस बार बंद कमरों में डिजाइन फाइनल करने के बजाय, खिलाड़ियों को शुरुआत से ही इस प्रक्रिया का हिस्सा बनाया गया। नवंबर 2023 और 2024 में कई ट्रेनिंग कैंप्स के दौरान नाइकी के डिजाइनरों ने खिलाड़ियों को एक-एक कर मीटिंग में बुलाया। उनसे पूछा गया कि वे कैसी जर्सी चाहते हैं और उनके लिए अमेरिका का प्रतिनिधित्व करने का क्या मतलब है। टायलर एडम्स कहते हैं, ‘इस बार हमने सचमुच हर एक चीज खुद चुनी है।’ खिलाड़ियों और डिजाइनरों की लंबी माथापच्ची के बाद दो जर्सी तैयार की गईं। होम जर्सी पर लाल और सफेद स्ट्रिप्स हैं। खिलाड़ी चाहते थे कि ब्राजील के पीले या नीदरलैंड्स के नारंगी रंग की तरह अमेरिका की भी एक पक्की पहचान हो। इसलिए इस जर्सी में अमेरिकी झंडे की लहराती हुई धारियों को शामिल किया गया। यह उन जोशीले फैंस के लिए है, जो स्टैंड्स में ‘U-S-A’ के नारे लगाते हैं। वहीं, अवे जर्सी ऐसी है, जिसे पहनकर नाइट क्लब में भी जा सकते हैं। इसके लिए जब नाइकी ने पहली बार सितारों वाला एक चमकीला डिजाइन दिखाया, तो खिलाड़ियों ने उसे रिजेक्ट कर दिया। खिलाड़ियों की एक खास मांग थी, ‘हमें एक ऐसी कूल जर्सी चाहिए, जिसे हम जींस के साथ पहनकर किसी क्लब में भी जा सकें।’ इसके बाद डिजाइन को बदला गया और इसे लगभग काले रंग का बनाया गया, जिसमें पास से देखने पर चमकते हुए सितारे नजर आते हैं। खिलाड़ियों का मानना है कि यह 2026 की नई जर्सी सिर्फ एक कपड़े का टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह से उनकी और उनके देश की भावना का प्रतिनिधित्व करती है।
सिर्फ बीमारी का पता ही नहीं लगाता MRI, अब इलाज में भी हो रहा इस्तेमाल, डॉक्टर से जानिए 5 बड़ी बातें

Last Updated:March 19, 2026, 14:23 IST MRI for Precision Surgery: एमआरआई एक एडवांस स्कैनिंग है, जिसके जरिए कई गंभीर बीमारियों का पता लगाया जाता है. रेडियोलॉजिस्ट डॉ. अभिषेक बंसल के अनुसार MRI अब केवल बीमारी की जांच के लिए नहीं है, बल्कि इसका उपयोग कई तरह की सर्जरी और कीमोथेरेपी की निगरानी के लिए किया जा रहा है. यह ट्रीटमेंट को ज्यादा इफेक्टिव बनाने में मदद कर रहा है. एमआरआई के जरिए कई तरह की सर्जरी भी की जाती हैं. Critical Facts About MRI: जब भी लोगों को कोई अंदरूनी समस्या होती है, तब मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग यानी MRI कराने की सलाह दी जाती है. यह एक तरह की स्कैनिंग तकनीक है, जिसमें शरीर के अंदरूनी हिस्सों की साफ तस्वीर बन जाती है. लंबे समय से इसे केवल एक डायग्नोस्टिक टूल यानी बीमारी का पता लगाने वाली मशीन माना गया है, लेकिन अब MRI का इस्तेमाल कई तरह के ट्रीटमेंट में भी किया जा रहा है. अब MRI सिर्फ यह नहीं बताता कि बीमारी कहाँ है, बल्कि यह गंभीर बीमारियों के सटीक इलाज का एक हिस्सा बन चुका है. कैंसर से लेकर न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर तक MRI डॉक्टर्स के लिए एक गाइड की तरह काम कर रहा है. चलिए डॉक्टर से जानते हैं कि एमआरआई का इस्तेमाल किन-किन ट्रीटमेंट में किया जा रहा है. दिल्ली के आकाश हेल्थकेयर सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी डिपार्टमेंट के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. अभिषेक बंसल ने News18 को बताया कि पहले सर्जन एक्स-रे या सीटी स्कैन की मदद से ऑपरेशन करते थे, लेकिन अब इंट्रा-ऑपरेटिव MRI का इस्तेमाल हो रहा है. इसका मतलब है कि ऑपरेशन के दौरान ही मरीज का MRI किया जाता है. इससे सर्जन्स को रियल टाइम में पता चलता है कि ट्यूमर का कितना हिस्सा निकल चुका है और कितना बाकी है. इसी तरह MRI-गाइडेड बायोप्सी के जरिए डॉक्टर शरीर के उस सटीक बिंदु से सैंपल लेते हैं, जहां बीमारी मौजूद है. इससे गलत रिपोर्ट की गुंजाइश खत्म हो जाती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. डॉक्टर बंसल ने बताया कि अब फोकस्ड अल्ट्रासाउंड थेरेपी (MRgFUS) में भी एमआरआई का यूज किया जा रहा है. इसमें MRI का उपयोग बिना किसी चीर-फाड़ के ट्यूमर को नष्ट करने के लिए किया जाता है. डॉक्टर MRI के जरिए ट्यूमर की सटीक लोकेशन देखते हैं और फिर हाई-इंटेंसिटी अल्ट्रासाउंड किरणों को उसी बिंदु पर केंद्रित करते हैं. इससे ट्यूमर कोशिकाएं जलकर नष्ट हो जाती हैं. यह तकनीक विशेष रूप से गर्भाशय के फाइब्रॉएड और पार्किंसंस रोग के कारण होने वाले कंपन के इलाज में असरदार साबित हो रही है. एक्सपर्ट के मुताबिक MRI अब सिर्फ कैंसर का पता नहीं लगाता, बल्कि यह भी बताता है कि दी जा रही कीमोथेरेपी कितनी प्रभावी है. फंक्शनल MRI के जरिए डॉक्टर देख सकते हैं कि दवा शरीर के भीतर ट्यूमर पर कैसा असर कर रही है. अगर ट्यूमर नहीं सिकुड़ रहा, तो डॉक्टर समय रहते इलाज का तरीका बदल सकते हैं. इससे मरीज का कीमती समय और पैसा दोनों बचते हैं और उसे अनावश्यक दवाओं के दुष्प्रभाव से बचाया जा सकता है. इसके अलावा हार्ट डिजीज के मामले में कार्डियक MRI एक गेम-चेंजर है. यह न केवल दिल की बनावट दिखाता है, बल्कि यह भी मापता है कि दिल की मांसपेशियां कितनी सक्रिय हैं और ब्लड फ्लो कैसा है. हार्ट अटैक के बाद दिल का कितना हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ है और क्या उसे दोबारा ठीक किया जा सकता है. इसका सटीक फैसला अब कार्डियक MRI की मदद से लिया जा रहा है, जो एंजियोग्राफी से भी ज्यादा डिटेल्ड जानकारी देता है. डॉक्टर के मुताबिक कैंसर के इलाज में रेडिएशन देते समय सबसे बड़ी चुनौती स्वस्थ कोशिकाओं को बचाना होती है. नई MRI-Linac मशीनें रेडिएशन के दौरान लगातार तस्वीरें लेती रहती हैं. चूंकि मरीज के सांस लेने से ट्यूमर की स्थिति थोड़ी बदल सकती है, इसलिए MRI तुरंत रेडिएशन की बीम को एडजस्ट कर देता है. इससे केवल कैंसर कोशिकाओं पर हमला होता है और आस-पास के स्वस्थ अंग पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : March 19, 2026, 14:23 IST









