Sunday, 23 Aug 2026 | 05:32 AM

Trending :

Curry Leaf Hair Toner: गंजेपन से हैं परेशान, तो सिर पर लगाएं करी पत्ता टोनर..यहां जानिए कैसे है बनाना

ask search icon

Last Updated:March 19, 2026, 14:19 IST देहरादून. आज के समय में ज्यादातर लोग झड़ते हुए बालों से परेशान हैं जिसके चलते उनके सर में गंजापन आ जाता है और वह बेहद शर्मिंदगी महसूस करते हैं. ऐसे में आप होममेड करी पत्ता हेयर टोनर का उपयोग कर सकते हैं सुबह रोजाना इसका उपयोग करने से गंजापन दूर होता है. आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी, प्रदूषण और खराब खान-पान के चलते बालों का झड़ना एक आम समस्या बन गई है. बहुत से लोग कम उम्र में ही गंजेपन का शिकार हो रहे हैं, जिससे उनका आत्मविश्वास गिर जाता है. ऐसे में आप करी पत्ता हेयर टोनर का उपयोग कर सकते हैं. करी पत्ता सिर्फ खाने का स्वाद ही नहीं बढ़ाता, बल्कि यह एंटीऑक्सीडेंट्स और प्रोटीन से भरपूर होता है. वहीं इसमें मौजूद पोषक तत्व स्कैल्प को गहराई से पोषण देते हैं और डेड हेयर के रोम को दोबारा से जीवन देते हैं. जब इसे मेथी और कलौंजी जैसे शक्तिशाली तत्वों के साथ मिलाया जाता है, तो इसकी शक्ति और भी बढ़ जाती है. इस टोनर को बनाने का आसान तरीका है. सबसे पहले 50 ग्राम ताजे करी पत्तों को अच्छी तरह धो लीजिए. अब एक बर्तन में इन पत्तों के साथ एक चम्मच मेथी दाना, एक चम्मच कलौंजी और 4-5 लौंग डालें. मेथी और कलौंजी बालों की जड़ों को मजबूती देते हैं, जबकि लौंग स्कैल्प में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाती है. Add News18 as Preferred Source on Google इस मिक्सचर तैयार करने के बाद इसमें थोड़ा सा पानी डालकर इसे ओवरनाइट के लिए छोड़ दें. रात भर भिगोने से इन सभी औषधियों के अर्क पानी में अच्छी तरह घुल जाते हैं. अगली सुबह इस पानी को तब तक उबालें जब तक कि पानी आधा न रह जाए या उसका रंग गहरा न हो जाए. ठंडा होने के बाद इसे छानकर एक स्प्रे बोतल में भर लें. इस टोनर का यूज करना बेहद आसान है. हर सुबह उठकर अपने सिर के उन हिस्सों पर इसे स्प्रे करें जहाँ बाल कम हैं या गंजापन दिखाई दे रहा है. स्प्रे करने के बाद हल्के हाथों से 5-10 मिनट तक मसाज करें. यह मसाज टोनर को जड़ों के अंदर तक पहुँचाने में मदद करती है, जिससे नए बालों के उगने की संभावना बढ़ जाती है. नियमित रूप से अगर आप 15 से 20 दिनों तक इसका उपयोग करेंगे तो आपको इसके रिजल्ट दिखने लगेंगे. छोटे-छोटे नए बाल उगना शुरू हो जाते हैं और बालों का झड़ना भी काफी हद तक कम हो जाता है. First Published : March 19, 2026, 14:19 IST

बंगाल की रेटिंग में ‘सोशल मीडिया वॉर’: बीजेपी-टीएमसी के आरोप-प्रत्यारोप ने भूकंप के झटके, वोट से पहले गरमाया मोरचा

बंगाल की रेटिंग में 'सोशल मीडिया वॉर': बीजेपी-टीएमसी के आरोप-प्रत्यारोप ने भूकंप के झटके, वोट से पहले गरमाया मोरचा

पश्चिम बंगाल की राजनीति में चुनाव से पहले सोशल मीडिया पर एक बार फिर से मुख्य युद्धभूमि बन गई है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और पारंपरिक कांग्रेस (टीएमसी) के बीच आरोप-प्रत्यारोप का नारा तेजी से चल रहा है। दोनों के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से जारी ऑर्केस्ट्रा ने इंटरमीडिएट को और हॉट कर दिया है, जिससे 2026 विधानसभा चुनाव और रंग भरने की तैयारी चल रही है। बीजेपी ने अपने पोस्ट में राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि नौकरी चोरी करो, टिकट पाओ, राशन चोरी करो, टिकट पाओ, छात्रों का अपमान करो, टिकट पाओ, आरक्षण का अपमान करो, टिकट पाओ लेकिन ज्यादा समय तक नहीं। 46 दिनों में यह दमनकारी शासक लोकतांत्रिक तरीके से उखाड़ फेंका गया। यह अभिकथन अधिसूचना रणनीति के अनुसार सीधे तौर पर शासन और शेयर बाजार को केंद्र में लाया जाता है। बीजेपी ने सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने के आरोप लगाए इसी क्रम में बीजेपी ने एक और पोस्ट में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने का आरोप लगाया है. पार्टी ने लिखा, “एक जैसे लोग साथ ही रहते हैं। ममता बनर्जी ने राघव को समय सीमा की धमकी दी है, ठीक वैसे ही जैसे अकबरुद्दीन ने कहा था, लेकिन हम जानते हैं कि बीजेपी सांप्रदायिक सौहार्द के मुद्दे पर कभी समझौता नहीं करती है। बंगाल में सांप्रदायिकता का अंत बंद है।” इस कथन में कहा गया है कि भाजपा की चुनावी चर्चा धार्मिक और पहचान आधारित राजनीति के लिए है। संदेश स्पष्ट है: 👉 नौकरियाँ चुराओ, टिकट पाओ👉राशन चुराओ, टिकट पाओ👉हिन्दुओं का अपमान करो, टिकट पाओ 👉आदिवासियों का अपमान करो, टिकट लो लेकिन ज्यादा समय तक नहीं. 46 दिनों में इस दमनकारी शासन को लोकतांत्रिक तरीके से उखाड़ फेंका जाएगा! क्योंकि #PaltanoDorkarChaiभाजपा सरकार pic.twitter.com/6c3lYlyl1i – भाजपा पश्चिम बंगाल (@भाजपा4बंगाल) 19 मार्च 2026 वहीं, अनौपचारिक कांग्रेस ने भी पलटवार करते हुए बीजेपी पर टिकट वितरण में लोगों को आपराधिक दायित्व देने का आरोप लगाया है. पार्टी ने कहा, “बीजेपी की टिकटें एक आपराधिक रिकॉर्ड के समान योग्यता रखती हैं। बंगाल बेहतर है। 2026 में चुनाव परिणाम स्पष्ट और स्पष्ट होंगे।” इस बयान से साफ है कि टीएमसी के खिलाफ और उम्मीदवारों के चयन के मुद्दे को बीजेपी बनाना चाहती है। महाराष्ट्र-यूपी की घटनाएं टीएमसी कार्यकर्ताओं को लेकर सिर्फ बंगाल ही नहीं, महिलाओं की सुरक्षा का नुकसान भी राजनीतिक सिद्धांत का बड़ा आधार बन गया है। टीएमसी ने महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में कथित स्मृतियों का खुलासा करते हुए बीजेपी को लाभ का आधार दिया। पार्टी ने कहा, “महिलाओं की जिंदगी बीजेपी राज्यों में लगातार मौलाना के रूप में है। एक 13 साल के दशक में एसिड अटैक की घटना हुई लेकिन ‘बेटी बचाओ’ का नारा नेतृत्व वाले नेताओं की शैलियां पूछती हैं।” इसमें आरोप लगाया गया है कि महिला सुरक्षा और कानून-व्यवस्था में केंद्रीय आरक्षण रणनीति बनाने की कोशिश की जा रही है। .@बीजेपी4इंडिया आपराधिक रिकार्ड की तरह टिकट बांटना योग्यता है। बंगाल बेहतर जानता है. 2026 में फैसला जोरदार और स्पष्ट होगा। pic.twitter.com/tBEgRFQWp4 – अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (@AITCofficial) 18 मार्च 2026 टीएमसी ने एक अन्य पोस्ट में उत्तर प्रदेश की घटना का जिक्र करते हुए कहा, “चार साल की बच्ची को चॉकलेट का लालच दिया गया, उसके साथ दोस्ती की गई और हत्या कर दी गई। बीजेपी फिर से राज्यों में बेटियां सुरक्षित नहीं हैं।” इस प्रकार के कथनों में सांकेतिक एवं राजनीतिक दोनों गुटों के लिए प्रभावकारी तत्व तैयार किए जाते हैं। महाजंगलराज में @बीजेपी4इंडिया-उत्तर प्रदेश शासित। एक 4 साल की मासूम बच्ची को चॉकलेट का लालच देकर एक दरिंदा अपने साथ खींच ले गया, उसके साथ बेरहमी से बलात्कार किया गया और फिर पत्थर से कुचलकर उसकी हत्या कर दी गई। उसका शव उससे महज 500 मीटर की दूरी पर झाड़ियों में कूड़े की तरह फेंक दिया गया था… pic.twitter.com/FNSHDIRjl4 – अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (@AITCofficial) 18 मार्च 2026 तेज़ होंगे आरोप-प्रत्यारोप राजनीतिक विश्लेषकों का मानना ​​है कि सोशल मीडिया पर इस तरह के हमले आगामी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हैं। इससे एक तरफ पार्टी के बीच ऊर्जा की धार तेज होती है। 2026 विधानसभा चुनाव से पहले बंगाल की राजनीति अब सिर्फ रैली और सभाओं तक सीमित नहीं रही। डिजिटल मंच पर चल रही यह जंग यह संकेत है कि आने वाले महीनों में आरोप-प्रत्यारोप और भी तेज होंगे। इस चुनावी लड़ाई में असली सवाल यही रहेगा कि सोशल मीडिया का यह डॉक्यूमेंटेशन के जजमेंट को प्रभावित करेगा, या फिर जमीन पर विकास और शासन का मुद्दा ही अंतिम परिणाम तय करेगा। ये भी पढ़ें ‘बीजेपी में अब कोई एंट्री नहीं’: इस बार दलबदलुओं के लिए डोर बंदा, बंगाल की भविष्यवाणी में नया सस्पेंस

असम बीजेपी उम्मीदवारों की सूची: असम में बीजेपी ने की फील्डिंग सेट! प्रद्युत बोरदोलोई सहित कई बड़े दांव, क्या उलटी पड़ जाएगी बाजी?

असम बीजेपी उम्मीदवारों की सूची: असम में बीजेपी ने की फील्डिंग सेट! प्रद्युत बोरदोलोई सहित कई बड़े दांव, क्या उलटी पड़ जाएगी बाजी?

बीजेपी ने असम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए अपनी लंबे समय से इंतजार कर रही वाली की लिस्ट आखिरकार जारी कर दी है। पार्टी ने 89 रेज़्यूमे पर खुद की लड़ाई का निर्णय लिया है, जबकि बाकी 37 रेज़्यूमे सहयोगी ऑर्केज़म दिए गए हैं। असम में कुल 126 सीटें हैं और बीजेपी ने 89 पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं. असोम गण परिषद (एजीपी) को 26 और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) को 11 सीटें मिली हैं। सीएम हिमंत जालुकबारी से ही लड़ेंगे चुनाव सीएम हिमंत बिस्वा सरमा अपनी पुरानी और मजबूत सीट जालुकबारी से ही चुनाव लड़ेंगे। 2001 से यह सीट लगातार जीती आ रही है और यहां उनका गढ़ माना जाता है। दूसरी तरफ, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और विपक्ष में डिप्टी लीडर गौरव गोगोई जोर-शोर से लड़ रहे हैं। बीजेपी ने यहां बुजुर्ग नेताओं, पूर्व मंत्रियों और कट्टर समर्थकों हितेंद्र नाथ गोस्वामी को उतारा है। यह प्रतियोगिता राज्य की सबसे हाई-प्रोफाइल लड़ाइयों में से एक होगी, क्योंकि जोरहाट कांग्रेस का पारंपरिक क्षेत्र है, लेकिन गोस्वामी ने यहां कई बार जीत हासिल की है। बीजेपी की लिस्ट में कौन सा बड़ा नाम शामिल? प्रभात से प्रमुख भाजपा नेता मनाब डेका को टिकटें। नाजिरा में बीजेपी के मैरी बोरगोहेन बनाम कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डेब्रेट सैकिया। तीताबाद से हाल ही में पूर्व चाय बागान के नेता धीरज गोवला शामिल हुए। ये सीट पहले कांग्रेस की मजबूत गढ़ थी और वंचित सीएम युवा गोगोई से जुड़ी हुई है. बिहपुरिया से पूर्व कांग्रेस नेता भूपेन बोरा. दिसपुर से कांग्रेस ने वरिष्ठ नेता प्रद्युत बोरदोलोई को टिकट दे दिया है। दिसपुर असम की सबसे प्रतिष्ठित सीट है। महमोरा में सुरुज दिहिंगिया को मौका मिला, क्योंकि स्टैलिस्ट विधायक जोगेन मोहन महाजन चुने गए हैं। चक्रधर गोगोई बनाम असम जतिया परिषद (एजेपी) के अध्यक्ष लुरिनज्योति गोगोई का आमना-सामना। शिवसागर में एजीपी के वेटरन प्रदीप हजारिका बनाम राजोर दल के प्रमुख अखिल गोगोई। बीजेपी के पास कई स्टैटिक्स के टिकट नहीं हैं, जो पार्टी की नई रणनीतियाँ हैं। पार्टी एंटी-इनकंबेंसी से बच और नए राहुल को अवसर देने पर फोकस कर रही है। सूची में अनुभवी नेताओं के साथ नए और युवा चेहरे, महिलाएं और युवा किशोरी शामिल हैं। बीजेपी की एक ही लिस्ट में काम खत्म, कांग्रेस के दावेदार बाकी चुनाव 9 अप्रैल 2026 को एक चरण में ही होगा। नामांकन की अंतिम तारीख 23 मार्च है और 4 मई 2026 को आएगी। कांग्रेस ने अब तक 65 की दो लिस्ट जारी की है, जबकि बीजेपी ने एक ही लिस्ट में अपना काम पूरा कर लिया है. यह घोषणा असम में राजनीतिक और जातीय माहौल में पूरी तरह गरमा गई है। एनडीए गठबंधन मजबूत स्थिति में दिख रहा है, लेकिन कांग्रेस और लोकतंत्र गठबंधन भी चुनौती दे रहे हैं। कई हाई-प्रोफाइल पोर्टफोलियो पर मुकाबला दिलचस्प होने वाला है। (टैग्सटूट्रांसलेट)असम बीजेपी उम्मीदवारों की सूची(टी)असम चुनाव 2026(टी)असम विधानसभा चुनाव(टी)असम विधानसभा चुनाव 2026(टी)चुनाव 2026(टी)गौरव गोगोई(टी)कांग्रेस(टी)बीजेपी(टी)हिमंत बिस्वा सरमा(टी)असम समाज सूची(टी)असम चुनाव 2026(टी)असम चुनाव चुनाव(टी)असम विधानसभा चुनाव 2026(टी)चुनाव 2026(टी)हिमंता बिस्वा सरमा(टी)गौरव गोगोई(टी)कांग्रेस(टी)बीजेपी

weakened Iran is insisting on prolonging the war

weakened Iran is insisting on prolonging the war

तेहरान/तेल अवीव/वॉशिंगटन डीसी7 मिनट पहले कॉपी लिंक ईरान इस समय अब तक के सबसे बड़े खतरे का सामना कर रहा है। इसके बावजूद वह अमेरिका और इजराइल के साथ चल रहे संघर्ष को लंबा खींचने में लगा हुआ है। पिछले कुछ हफ्तों में ईरान को भारी नुकसान हुआ है। उसके कई बड़े नेता और सैन्य कमांड ढांचे के अहम लोग मारे गए हैं। इससे उसकी नेतृत्व व्यवस्था को गंभीर झटका लगा है। ईरान के अंदर भी हालात अच्छे नहीं हैं। लोगों को जरूरी सामान की कमी, बुनियादी ढांचे के नुकसान और सख्त सुरक्षा माहौल झेलना पड़ रहा है। इसके बावजूद ईरान की बची हुई लीडरशिप लगातार आक्रामक बयान दे रही है। वे यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि ईरान लंबे समय तक संघर्ष झेल सकता है। उन्हें और नेताओं के मारे जाने की परवाह नहीं है और वे इस युद्ध को लंबा खींचने के लिए तैयार हैं, चाहे इसका असर पूरे क्षेत्र और दुनिया पर क्यों न पड़े। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ईरान का मकसद इस युद्ध में जीत हासिल करना नहीं है। उसका असली मकसद है अपने अस्तित्व को बचाना, दुश्मनों को डराना और ऐसी स्थिति बनाना जिसमें वह युद्ध के बाद की शर्तें तय कर सके। वह संघर्ष बढ़ा रहा है ताकि बाकी देशों के लिए इसे जारी रखना बहुत महंगा हो जाए और वे समझौता करने पर मजबूर हो जाएं। इस महीने UAE के मीना अल फजेर से दिख रहे होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकर और मालवाहक जहाज। जंग खत्म करने के लिए हर्जाना चाहता है ईरान अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान से सरेंडर करने को कहा है। लेकिन ईरान इसके उलट खुद को मजबूत स्थिति में दिखा रहा है। वह कह रहा है कि वह इस संघर्ष में टिके रहने में सफल रहा है और अब शांति के लिए अपनी शर्तें रख रहा है। ईरान चाहता है कि युद्ध खत्म होने के बाद क्षेत्र में नई व्यवस्था बनाई जाए। वह युद्ध के नुकसान की भरपाई (मुआवजा) भी मांग रहा है और खाड़ी देशों और अमेरिका के बीच लंबे समय से चले आ रहे रिश्तों में बदलाव चाहता है। ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि युद्धविराम तभी संभव है जब यह सुनिश्चित हो जाए कि दुश्मन दोबारा हमला नहीं करेगा। उनका कहना है कि अगर युद्धविराम से दुश्मन को अपनी ताकत फिर से तैयार करने का मौका मिलता है, जैसे रडार ठीक करना या मिसाइल सिस्टम मजबूत करना, तो ऐसा युद्धविराम बेकार है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान तब तक लड़ाई जारी रखेगा जब तक दुश्मन अपने हमले पर पछतावा न करे और दुनिया और क्षेत्र में सही राजनीतिक और सुरक्षा हालात न बन जाएं। ईरानी विदेश मंत्री बोले- होर्मुज स्ट्रेट के लिए नया नियम बने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि युद्ध के बाद होर्मुज स्ट्रेट के लिए नया नियम बनाया जाना चाहिए, जिसमें ईरान के हितों को ध्यान में रखा जाए। उन्होंने कहा कि जहाजों की सुरक्षित आवाजाही कुछ खास शर्तों के तहत ही होनी चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान आगे चलकर अपने विदेशों में फंसे पैसे को छुड़ाने की मांग कर सकता है या इस समुद्री रास्ते का इस्तेमाल करने वाले देशों से टैक्स भी ले सकता है। गालिबाफ ने साफ कहा कि होर्मुज की स्थिति अब पहले जैसी नहीं रहेगी। अब ‘युद्ध के बाद क्या होगा’ इस सवाल पर भी दबाव बढ़ रहा है। दो दशकों तक पश्चिमी देशों और ईरान के बीच बातचीत चलती रही, लेकिन पिछले महीने अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमला कर दिया। इस हमले में सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई और देश की सैन्य व प्रशासनिक व्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचा। इसके जवाब में ईरान ने तेज और लगातार हमले किए। उसने पूरे क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगियों पर सैकड़ों मिसाइल और ड्रोन दागे। इससे खाड़ी देशों के साथ उसके रिश्ते और खराब हो गए और ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर भी असर पड़ा। खासकर होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर हमलों के कारण। दबाव को अपने फायदे में बदलना चाहता है ईरान मिडिल ईस्ट से जुड़े मामलों की एक्सपर्ट सिना तूस्सी ने CNN से कहा कि ईरान चाहता है कि अभी जो दबाव है, उसे बाद में अपने फायदे में बदल सके। वह ऐसी स्थिति चाहता है जहां उसे अलग-थलग या खत्म करने की कोशिश न हो, बल्कि उसे क्षेत्र की स्थिरता का जरूरी हिस्सा माना जाए। अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने मंगलवार को कहा कि ईरान युद्ध हार रहा है। ट्रम्प ने भी कहा कि ईरान की सेना लगभग खत्म हो चुकी है और उसके नेता लगभग हर स्तर पर खत्म कर दिए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान फिर कभी अमेरिका, उसके सहयोगियों या दुनिया को धमकी न दे सके। लेकिन इसके कुछ ही घंटों बाद ईरान ने 61वीं बार हमला किया, जिसमें इजराइल में एक दंपति की मौत हो गई। एक्सपर्ट बोले- ईरान जीत नहीं रहा, उसे जीतने की जरूरत भी नहीं जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर नारगिस बाजोगली का कहना है कि पारंपरिक युद्ध के हिसाब से ईरान जीत नहीं रहा है, लेकिन उसे उसी तरह जीतने की जरूरत भी नहीं है। उसकी रणनीति अलग है। ईरान एक अलग रणनीति अपना रहा है, जिसमें वह युद्ध को इतना महंगा बना देना चाहता है कि सामने वाला देश उसे जारी न रख सके। उनका कहना है कि अमेरिका और खाड़ी देश लंबे समय तक तेल व्यापार में रुकावट और बढ़ती कीमतों को सहन नहीं कर सकते। किसी समय वे कहेंगे कि अब बहुत हो गया और यही दबाव ईरान बनाना चाहता है। ईरान ने पहले से ही ऐसी स्थिति के लिए तैयारी कर रखी थी। रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने ऐसे प्लान बनाए थे कि बड़े हमले होने पर छोटे-छोटे यूनिट्स अलग-अलग जगहों से काम कर सकें। पुराने अफसरों की मौत, नए अफसर फैसले ले रहे ईरान कहता है कि वह सिर्फ अमेरिकी हितों को निशाना बना रहा है, लेकिन उसके हमलों में ओमान, यूएई, बहरीन, कुवैत, कतर, इराक और सऊदी अरब में होटल, एयरपोर्ट, ऊंची इमारतें और ऊर्जा फैसिलिटीज भी प्रभावित हुई हैं। इससे साफ है कि ईरान क्षेत्र में नई ताकत का

भोपाल कोर्ट से रिहाई के बाद असलम की गिरफ्तारी:VIDEO:प्राइवेट कार में बैठा ले गए पुलिसकर्मी, एक घंटे तक कार में घुमाया, कार्रवाई की

भोपाल कोर्ट से रिहाई के बाद असलम की गिरफ्तारी:VIDEO:प्राइवेट कार में बैठा ले गए पुलिसकर्मी, एक घंटे तक कार में घुमाया, कार्रवाई की

नगर निगम के स्लॉटर हाउस से निकले मांस में गोमांस की पुष्टि के बाद गिरफ्तार असलम कुरैशी उर्फ चमड़ा को जमानत मिलने के बाद बुधवार रात उसकी रिहाई हो गई। हालांकि जेल से निकलते ही उसे दोबारा गिरफ्तार कर लिया गया है। सूत्रों की मानें तो असलम पर धारा 151 के तहत कार्रवाई जोन-4 के एक थाना पुलिस ने की है। अब पुलिस उसके खिलाफ रासुका प्रतिवेदन पेश करने की तैयारी कर रही है। बुधवार रात करीब 10 बजे भोपाल सेंट्रल जेल के मुख्य द्वार से असलम के निकलते ही पुलिस टीम ने उसे गिरफ्तार किया था। लाल रंग की पोलो कार से उसे जेल परिसर से बाहर निकाला गया। इस कार का एक वीडियो भी सामने आया है। पहले उसे परवलिया सड़क फिर सीहोर रोड ले जाया गया। इसके बाद देर रात उसे थाने लेकर पहुंची पुलिस ने टीम ने कार्रवाई की। इधर गो मांस तस्करी से जुड़े पूरे मामले का खुलासा करने का दावा करने वाले भानू हिंदू का आरोप है कि पुलिस की ओर से कमजोर चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की गई थी। इन्हीं खामियों का फायदा असलम को बेल मिलने के लिए मिला। भानू के मुताबिक पुलिस ने केस की शुरुआत से ही लापरवाही की थी। गो मांस से भरे कंटेनर को छोड़ दिया गया था। हैदराबाद जिस सैंपल को जाना था, वह खराब हो गया। मथुरा से आई सेंपल रिपोर्ट के आधार पर उसकी गिरफ्तारी की गई थी। पुलिस की खामियों के कारण ही असलम को कोर्ट से राहत मिली। लेकिन असलम पर रासुका की कार्रवाई नहीं की गई तो समस्त हिंदू संगठनों के साथ सड़कों पर उतरेंगे और अलग-अलग इलाकों में प्रदर्शन किया जाएगा। 70 दिन बाद हुई थी जेल से रिहाई करीब 70 दिन बाद एडीजे पंकज कुमार जैन की अदालत ने 35 हजार रुपए के मुचलके पर असलम को रिहा करने के आदेश दिए। हालांकि, देर रात भोपाल सेंट्रल जेल से रिहाई के बाद से असलम गायब है। असलम के भाई आसिफ के अनुसार वे असलम को लेने जेल पहुंचे थे, लेकिन उन्हें उससे मिलने तक नहीं दिया गया। पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने कहा कि उन्हें इस मामले में कोई जानकारी नहीं है। जानिए कोर्ट ने जमानत आदेश में क्या कहा अदालत ने बुधवार को अपने आदेश में कहा कि संबंधित अपराध न तो मृत्युदंड और न ही आजीवन कारावास से दंडनीय है और यह न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है। आरोपी दो माह से अधिक समय से अभिरक्षा में है, जबकि मामले की विवेचना पूरी हो चुकी है और चार्जशीट भी प्रस्तुत की जा चुकी है। ऐसे में ट्रायल पूरा होने में समय लगने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, इसलिए जमानत देना उचित है। कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि आरोपी का यह दूसरा जमानत आवेदन था। पहला आवेदन गुण-दोष के आधार पर निरस्त नहीं हुआ था। अब परिस्थितियों में बदलाव और जांच पूरी होने के बाद जमानत दी गई। साथ ही शर्त रखी गई है कि आरोपी ट्रायल में कोई बाधा नहीं डालेगा और बिना अनुमति देश से बाहर नहीं जाएगा। इन शर्तों पर बाहर आया असलम असलम की तरफ से वकील विजय चौधरी और जगदीश गुप्ता ने कोर्ट में पक्ष रखा। कोर्ट ने जमानत देते हुए कुछ शर्तें भी रखी हैं। वह केस की सुनवाई में कोई रुकावट नहीं डालेगा। बिना कोर्ट की इजाजत के वह देश छोड़कर बाहर नहीं जा सकेगा। सुनवाई के दौरान वह बार-बार तारीखें आगे बढ़ाने (स्थगन) की मांग नहीं करेगा। एडिशनल डीसीपी बोले नहीं की कोई कार्रवाई एडिशनल डीसीपी जोन-4 मलकीत सिंह ने बताया कि उनके जोन से असलम के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। उन्हें असलम की गिरफ्तारी के संबंध में कोई जानकारी भी नहीं है। क्या था पूरा मामला 17 दिसंबर की रात हिंदू संगठनों ने पुलिस कंट्रोल रूम के पास एक कंटेनर पकड़ा था, जो जिंसी स्लॉटर हाउस से निकला था। इसमें 26 टन मांस भरा था। जब इस मांस के सैंपल मथुरा की लैब भेजे गए, तो वहां से आई रिपोर्ट में इसमें गोमांस होने की बात सामने आई। रिपोर्ट आने के बाद 8 जनवरी 2026 को जहांगीराबाद पुलिस ने केस दर्ज कर असलम और ड्राइवर शोएब को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने निकाली निगम-पुलिस की अर्थी असलम चमड़ा को जमानत मिलने के बाद शहर में विरोध तेज हो गया है। गुरुवार को बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने पुलिस कमिश्नर कार्यालय के सामने प्रदर्शन करते हुए नगर निगम और पुलिस प्रशासन की सांकेतिक अर्थी निकाली और पुतला दहन किया। इस दौरान मौके पर जमकर नारेबाजी की गई। प्रदर्शन को देखते हुए एहतियातन मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा। पुलिस ने पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर स्थिति पर नजर बनाए रखी, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने कहा कि इतने गंभीर मामले में आरोपी को जमानत मिलना न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। उनका कहना था कि इससे आम लोगों में गलत संदेश जाएगा और पीड़ित पक्ष के साथ अन्याय हुआ है। कार्यकर्ताओं ने प्रशासन पर भी निशाना साधते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मामले में कड़ी कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

Chief Selector Ajit Agarkar; BCCI Contract Extension Request

Chief Selector Ajit Agarkar; BCCI Contract Extension Request

स्पोर्ट्स डेस्क40 मिनट पहले कॉपी लिंक अगरकर के कार्यकाल में टीम इंडिया 2024 और इस साल टी-20 वर्ल्ड कप और पिछले साल की शुरुआत में चैंपियंस ट्रॉफी जीती थी। भारतीय क्रिकेट टीम के चीफ सिलेक्टर अजीत अगरकर ने अपने कॉन्ट्रैक्ट को 2027 वनडे वर्ल्ड कप तक बढ़ाने की इच्छा जताई है। उन्होंने इसके लिए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) से एक्सटेंशन मांगा है। अगरकर का मौजूदा कार्यकाल पहले ही बढ़ाया जा चुका है। 2025 IPL से पहले BCCI ने उनका कॉन्ट्रैक्ट एक साल के लिए बढ़ाकर जून 2026 तक कर दिया था। पूर्व तेज गेंदबाज अगरकर को जुलाई 2023 में टीम इंडिया की सिलेक्शन कमेटी का चेयरमैन बनाया गया था। अगरकर के कार्यकाल में भारत ने तीन खिताब जीते अगरकर के कार्यकाल में टीम इंडिया 2024 में टी-20 वर्ल्ड कप और पिछले साल की शुरुआत में चैंपियंस ट्रॉफी जीती थी। इसके अलावा, टीम इंडिया 2023 के वनडे वर्ल्ड कप के फाइनल में भी पहुंची थी। जहां उसे ऑस्ट्रेलिया के हाथों हार मिली थी। इसके अलावा टीम ने हाल ही में टी-20 वर्ल्ड कप खिताब भी डिफेंड किया। BCCI के मंजूरी का इंतजार रिपोर्ट के मुताबिक, इस मुद्दे पर पहले ही चर्चा हो चुकी है। अब देखना यह है कि क्या BCCI अगरकर के रिक्वेस्ट को मंजूरी देता है या नहीं। हालांकि फिलहाल, बोर्ड के पास इस पद के लिए कोई मजबूत विकल्प नहीं है। भारतीय टीम के लिए अगली चुनौती वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप और वनडे वर्ल्ड कप है। IPL 2025 से पहले कॉन्ट्रैक्ट रिन्यू किया गया था पिछले साल एक रिपोर्ट आई थी उसके मुताबिक, अगरकर का कॉन्ट्रैक्ट इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2025 से पहले रिन्यू किया गया था। एक BCCI अधिकारी ने बताया, उनके कार्यकाल में भारतीय टीम ने खिताब जीते और बदलाव (टेस्ट और टी-20 में) भी देखा। BCCI ने उनका कॉन्ट्रैक्ट जून 2026 तक बढ़ा दिया था और उन्होंने कुछ महीने पहले इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया था। 349 इंटरनेशनल विकेट ले चुके हैं अगरकर करियर में 349 इंटरनेशनल विकेट ले चुके हैं। उन्होंने टेस्ट में 58, वनडे में 288 और टी-20 इंटरनेशनल में 3 विकेट लिए हैं। देखें उनके 3 रिकॉर्ड्स… टी-20 वर्ल्ड कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहे : अजित अगरकर 2007 में टी-20 वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम इंडिया का हिस्सा रहे। उन्होंने टूर्नामेंट के 2 मैचों में 15 रन बनाने के साथ एक विकेट भी लिया था। साउथ अफ्रीका में हुए टूर्नामेंट के फाइनल में भारत ने पाकिस्तान को हराकर खिताब जीता था। वनडे में सबसे तेज अर्धशतक लगाने वाले भारतीय : अजित अगरकर वनडे में सबसे तेज हाफ सेंचुरी जमाने वाले भारतीय बैटर हैं। उन्होंने साल 2000 में जिम्बाब्वे के खिलाफ 21 बॉल पर अर्धशतक जमाया था। सबसे तेज 50 विकेट लिए : अगरकर ने भारत के लिए वनडे में सबसे तेज 50 विकेट पूरे किए हैं। उन्होंने 23 मुकाबलों में यह कारनामा किया था। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

नारियल पानी पीने से पहले सावधान! बढ़ सकता है ये गंभीर जोखिम, बुजुर्गों के लिए जानना जरूरी ये सच्चाई

ask search icon

Last Updated:March 19, 2026, 13:28 IST नारियल पानी को अक्सर सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है, लेकिन हर उम्र के लिए यह समान रूप से सुरक्षित नहीं होता. खासकर 60 साल से अधिक उम्र के लोगों में इसका अधिक सेवन कई स्वास्थ्य समस्याओं को बढ़ा सकता है. इसलिए बुजुर्गों को इसे अपनी डेली रूटीन में शामिल करने से पहले सावधानी बरतना जरूरी है. उम्र के साथ शरीर का मैकेनिज्म धीमा हो जाता है और कुछ भी खाने-पीने पर असर डाल सकता है. खासकर 60 साल से अधिक उम्र के लोगों में, जब अंग पहले की तुलना में कम सक्रिय हो जाते हैं, तब नारियल पानी में मौजूद तत्वों का असंतुलन पैदा हो सकता है. नारियल पानी में पोटैशियम की भरपूर मात्रा पाई जाती है, जो मांसपेशियों और तंत्रिकाओं के लिए अहम है. हालांकि, बुजुर्गों के लिए नारियल पानी ‘हाइपरकलेमिया’ का कारण बन सकता है. यह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें खून में पोटैशियम का स्तर सामान्य से अधिक हो जाता है. बुजुर्गों का मेटाबॉलिज्म सुस्त होने के चलते शरीर अतिरिक्त पोटैशियम को जल्दी प्रोसेस नहीं कर पाता, जिससे हृदय की गति अनियमित हो सकती है और मांसपेशियों में अचानक कमजोरी महसूस हो सकती है. उम्र बढ़ने के साथ किडनी की कार्यक्षमता कम होने लगती है, जिससे शरीर से अतिरिक्त खनिज और टॉक्सिन्स बाहर नहीं निकल पाते हैं. ऐसे में नारियल पानी किडनी की सेहत पर असर डाल सकता है. अगर कोई बुजुर्ग किडनी से संबंधित किसी समस्या से जूझ रहा है, तो नारियल पानी का सेवन उनकी किडनी पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है. इससे शरीर में पोटैशियम और सोडियम का संतुलन बिगड़ सकता है, जो जानलेवा भी साबित हो सकता है. Add News18 as Preferred Source on Google ब्लड प्रेशर के मैनेजमेंट में भी नारियल पानी दोधारी तलवार की तरह काम करता है. जहां यह हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में सहायक माना जाता है, वहीं लो ब्लड प्रेशर की दवा ले रहे बुजुर्गों के लिए यह खतरनाक हो सकता है. नारियल पानी पीने से बीपी और ज्यादा गिर सकता है, जिससे अचानक चक्कर आना, अत्यधिक कमजोरी या बेहोशी जैसी समस्याएं हो सकती हैं, जो गिरने या चोट लगने का जोखिम बढ़ा देती हैं. डॉ. सिराज सिद्दीकी के अनुसार, डायबिटीज से जूझ रहे लोगों को भी इसके सेवन में सावधानी बरतनी चाहिए. नारियल पानी में नेचुरल शुगर और कार्बोहाइड्रेट होते हैं. हालांकि यह कोल्ड ड्रिंक्स की तुलना में बेहतर है, लेकिन ज्यादा मात्रा में इसका सेवन ब्लड शुगर लेवल को अचानक बढ़ा सकता है. बुजुर्गों के शरीर में इंसुलिन संवेदनशीलता कम होने के कारण वे इस ग्लूकोज लोड को अच्छे ढंग से नियंत्रित नहीं कर पाते हैं. पाचन तंत्र पर भी इसके प्रभाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. कई बुजुर्गों में नारियल पानी पीने के बाद गैस, पेट दर्द या दस्त जैसी शिकायतें देखी गई हैं. नारियल पानी में मौजूद नेचुरल इलेक्ट्रोलाइट्स संवेदनशील पाचन तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं, खासतौर पर खाली पेट या रात के वक्त इसे पीना पाचन संबंधी परेशानियों को बढ़ा सकता है. अपनी डेली रूटीन का हिस्सा बनाने के बजाय नारियल पानी को सिर्फ विशेष परिस्थितियों तक सीमित रखना चाहिए. डॉ. सिद्दीकी का कहना है कि अगर कोई बुजुर्ग कड़ी धूप में बाहर गया है या शरीर में पानी की बहुत कमी है, तो सीमित मात्रा में इसे लिया जा सकता है, लेकिन इसे नियमित ‘हेल्थ ड्रिंक’ की तरह इस्तेमाल करना, खासकर हृदय या गुर्दे के मरीजों के लिए सही नहीं है. First Published : March 19, 2026, 13:28 IST

असम चुनाव 2026: विधानसभा चुनावों के लिए भाजपा उम्मीदवारों और उनके निर्वाचन क्षेत्रों की पूरी सूची | राजनीति समाचार

GATE 2026 results anytime soon at gate2026.iitg.ac.in.

आखरी अपडेट:मार्च 19, 2026, 13:22 IST भाजपा उम्मीदवारों की सूची असम विधानसभा चुनाव 2026: असम में भाजपा ने 2026 विधानसभा चुनावों के लिए अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा भाजपा उम्मीदवारों की सूची असम विधानसभा चुनाव 2026: असम में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आगामी 2026 विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, असम में पार्टी के एक प्रमुख व्यक्ति, जालुकबारी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ेंगे। जलुकबारी को सरमा का गढ़ माना जाता है, क्योंकि असम के मुख्यमंत्री ने 2001, 2006, 2011, 2016 और 2021 में हुए पिछले सभी विधानसभा चुनावों में इस सीट पर जीत हासिल की है। कांग्रेस से आए प्रद्युत बोरदोलोई, जो कल भाजपा में शामिल हुए, को दिसपुर विधानसभा क्षेत्र से मैदान में उतारा गया है। असम में मतदान कार्यक्रम भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) के अनुसार, असम में विधानसभा चुनाव एक ही चरण में निर्धारित किया गया है, जिसमें 9 अप्रैल, 2026 को मतदान होगा। वोटों की गिनती 4 मई को होगी. पूरी सूची यहां देखें गोलकगंज-अश्विनी राय सरकार धुबरी – उत्तम प्रसाद बिरसिंग-जरुआ – माधवी दास गोलपारा पश्चिम (एसटी) – पबित्रा राभा दुधनाई (एसटी) – टंकेश्वर राभा अभयपुरी – भूपेन रॉय बिजनी – अरूप कुमार डे भवानीपुर-सोरभोग-रंजीत कुमार दास मांडिया – बादल चंद्र अर्ज्य चमरिया – ज्योस्तना कलिता बोको-चायगांव (एसटी) – राजू मेच पलासबाड़ी-हिमांशु शेखर वैश्य रंगिया – भाबेश कलिता कमालपुर – दिगंता कलिता दिसपुर – प्रद्युत बोरदोलोई न्यू गुवाहाटी-डिप्लू रंजन सरमाह गुवाहाटी सेंट्रल – विजय कुमार गुप्ता जालुकबारी – हिमंत बिस्वा सरमा बरखेत्री – नारायण डेका *):पॉइंटर-इवेंट-ऑटो स्क्रॉल-एमटी-(calc(var(–header-height)+min(200px,max(70px,20svh))))” dir=’auto’ data-turn-id=’request-WEB:cd312711-ea5c-453d-9e3d-5795a8538891-9′ डेटा-टेस्टिड = “बातचीत-टर्न-20” डेटा-स्क्रॉल-एंकर = “सही” डेटा-टर्न = “सहायक”> रोंगखांग (एसटी) – डॉ. तुलीराम रोंगखांग अमरी (एसटी) – डॉ. हाबे टेरोन हाफलोंग (एसटी) – रूपाली लंगथासा लखीपुर-कौशिक राय उधरबोंड – राजदीप गोला कटिगोराः- कमलाख्या दे पुरकायस्थ बोरखोला – किशोर नाथ सिलचर – राजदीप रॉय ढोलाई (एससी) – अमिया कांति दास हैलाकांडी – मिलन दास करीमगंज उत्तर – सुब्रत भट्टाचार्य पत्थरकांडी – कृष्णेंदु पॉल राम कृष्णा नगर (एससी) – बिजॉय मालाकार पहले प्रकाशित: मार्च 19, 2026, 12:22 IST समाचार राजनीति असम चुनाव 2026: विधानसभा चुनावों के लिए भाजपा उम्मीदवारों और उनके निर्वाचन क्षेत्रों की पूरी सूची अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)बीजेपी असम उम्मीदवार(टी)असम विधानसभा चुनाव 2026(टी)हिमंत बिस्वा सरमा(टी)जलुकबारी निर्वाचन क्षेत्र(टी)बीजेपी पहली सूची(टी)असम बीजेपी उम्मीदवार(टी)असम चुनाव(टी)बीजेपी असम समाचार

चांदी ₹13 हजार गिरकर ₹2.37 लाख पर आई:5 दिन में ये ₹31 हजार गिरी, सोने की कीमत आज ₹4 हजार घटकर ₹1.52 लाख हुई

चांदी ₹13 हजार गिरकर ₹2.37 लाख पर आई:5 दिन में ये ₹31 हजार गिरी, सोने की कीमत आज ₹4 हजार घटकर ₹1.52 लाख हुई

सोने-चांदी की कीमतों में आज यानी 19 मार्च को गिरावट है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, एक किलो चांदी की कीमत 13 हजार रुपए घटकर 2.37 लाख रुपए पर आ गई है। इससे पहले मंगलवार को इसकी कीमत 2.50 लाख रुपए किलो थी। वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 4 हजार रुपए गिरकर 1.52 लाख रुपए पर आ गया है। इससे पहले 18 मार्च को सोना 1.56 लाख रुपए प्रति 10g था। अमेरिका-ईरान जंग के कारण सोना 5 कारोबारी दिन में 9 हजार और चांदी 31 हजार सस्ती हुई है। कैरेट के हिसाब से सोने की कीमत देश के बड़े शहरों में सोने की कीमत सोर्स: goodreturns 19 मार्च, 2026) सोने की कीमतों का सफर: ₹1.76 लाख से ₹1.52लाख तक सोने में इस साल की शुरुआत में तेजी दिखी थी, लेकिन पिछले कुछ हफ्तों में मुनाफावसूली और वैश्विक कारणों से इसमें गिरावट आई है। चांदी की कीमतों में भारी क्रैश: ₹3.86 लाख से ₹2.37 लाख तक चांदी में सोने के मुकाबले कहीं ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। यह अपने ऑल टाइम हाई से बहुत तेजी से नीचे आई है। गिरावट के मुख्य कारण: मेटल छोड़कर ‘कैश’ पर भरोसा आमतौर पर जंग के माहौल में सोने-चांदी के दाम बढ़ते हैं, लेकिन इस बार स्थिति थोड़ी अलग है: कैश की बचत: मिडिल ईस्ट जंग के कारण निवेशक जोखिम नहीं लेना चाह रहे हैं। वे अपने गोल्ड और सिल्वर को बेचकर ‘कैश’ इकट्ठा कर रहे हैं ताकि अनिश्चितता के समय उनके पास लिक्विड मनी रहे। प्रॉफिट बुकिंग: जनवरी में कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थीं, इसलिए बड़े निवेशकों ने ऊंचे दामों पर अपनी होल्डिंग बेचना शुरू कर दिया, जिससे बाजार में सप्लाई बढ़ गई और कीमतें गिर गईं। ब्याज दरों का असर: अमेरिका में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपनाने से भी कीमती धातुओं की चमक थोड़ी फीकी हुई है। कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया के मुताबिक सोना-चांदी के दाम में आगे भी ये गिरावट जारी रह सकती है। इसके चलते सोना 1.50 लाख और चांदी 2.50 लाख रुपए तक आ सकती है। ऐसे में निवेशकों को अभी सोने-चांदी में निवेश से बचना चाहिए।

चांदी ₹13 हजार गिरकर ₹2.37 लाख पर आई:5 दिन में ये ₹31 हजार गिरी, सोने की कीमत आज ₹4 हजार घटकर ₹1.52 लाख हुई

चांदी ₹13 हजार गिरकर ₹2.37 लाख पर आई:5 दिन में ये ₹31 हजार गिरी, सोने की कीमत आज ₹4 हजार घटकर ₹1.52 लाख हुई

सोने-चांदी की कीमतों में आज यानी 19 मार्च को गिरावट है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, एक किलो चांदी की कीमत 13 हजार रुपए घटकर 2.37 लाख रुपए पर आ गई है। इससे पहले मंगलवार को इसकी कीमत 2.50 लाख रुपए किलो थी। वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 4 हजार रुपए गिरकर 1.52 लाख रुपए पर आ गया है। इससे पहले 18 मार्च को सोना 1.56 लाख रुपए प्रति 10g था। अमेरिका-ईरान जंग के कारण सोना 5 कारोबारी दिन में 9 हजार और चांदी 31 हजार सस्ती हुई है। सोने की कीमतों का सफर: ₹1.76 लाख से ₹1.52लाख तक सोने में इस साल की शुरुआत में तेजी दिखी थी, लेकिन पिछले कुछ हफ्तों में मुनाफावसूली और वैश्विक कारणों से इसमें गिरावट आई है। चांदी की कीमतों में भारी क्रैश: ₹3.86 लाख से ₹2.37 लाख तक चांदी में सोने के मुकाबले कहीं ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। यह अपने ऑल टाइम हाई से बहुत तेजी से नीचे आई है। गिरावट के मुख्य कारण: मेटल छोड़कर ‘कैश’ पर भरोसा आमतौर पर जंग के माहौल में सोने-चांदी के दाम बढ़ते हैं, लेकिन इस बार स्थिति थोड़ी अलग है: कैश की बचत: मिडिल ईस्ट जंग के कारण निवेशक जोखिम नहीं लेना चाह रहे हैं। वे अपने गोल्ड और सिल्वर को बेचकर ‘कैश’ इकट्ठा कर रहे हैं ताकि अनिश्चितता के समय उनके पास लिक्विड मनी रहे। प्रॉफिट बुकिंग: जनवरी में कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थीं, इसलिए बड़े निवेशकों ने ऊंचे दामों पर अपनी होल्डिंग बेचना शुरू कर दिया, जिससे बाजार में सप्लाई बढ़ गई और कीमतें गिर गईं। ब्याज दरों का असर: अमेरिका में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपनाने से भी कीमती धातुओं की चमक थोड़ी फीकी हुई है। कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया के मुताबिक सोना-चांदी के दाम में आगे भी ये गिरावट जारी रह सकती है। इसके चलते सोना 1.50 लाख और चांदी 2.50 लाख रुपए तक आ सकती है। ऐसे में निवेशकों को अभी सोने-चांदी में निवेश से बचना चाहिए।