‘मुख्यमंत्री पद का दावेदार…’, केरल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के सीएम पद के दावेदार शशि थरूर क्या बोले?

केरल विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के न्यूनतम नेता शशि थरूर ने कहा था कि वह मुख्यमंत्री पद के लिए आवेदन नहीं करते हैं, क्योंकि वह चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। उनका मानना है कि आदर्श रूप से मुख्यमंत्री का चुनाव शेयरों में होना चाहिए। गुरुवार (19 मार्च, 2026) को शशि थरूर ने टीपी-भाषा को दिए गए विशेष साक्षात्कार में कहा कि वह विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे, इसलिए उन्हें किसी एक खास क्षेत्र की चिंता करने की जरूरत नहीं है, और राज्य चुनाव में उनकी भूमिका मिल-जुली है। उन्होंने कहा कि वह चुनाव प्रचार के लिए राज्य के कोने-कोने में जाने का बास से इंतजार कर रहे हैं। शशि थरूर ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की उस विचारधारा का भी ज़िक्र किया, जिसमें उन्होंने कांग्रेस के राष्ट्रीय गठबंधन के नेताओं से ‘एक लय-ताल के साथ काम करने’ की बात कही थी। शशि थरूर ने कहा कि यह एक अच्छा संदेश था, और अब हर कोई एक गीत-ताल के साथ काम कर रहा है। शशि थरूर ने यह भी कहा कि वैसे तो उन्हें केरल में कांग्रेस को बहुमत मिलने पर खुशी होगी, लेकिन 140 संसदीय क्षेत्र में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक मोर्चा (यूडीएफ) के लिए 85 से 100 नामांकन के बीच का आंकड़ा काफी अच्छा रहेगा। क्रिकेट की दवाओं का इस्तेमाल करते हुए शशि थरूर ने कहा कि यूएफसी, विशेष रूप से आसामी के नेतृत्व वाले वाम डेमोक्रेटिक मोर्चा (एलडीएफ) के खिलाफ गुगली गेंदें फेंकी जा रही हैं, क्योंकि वे मुश्किल पिच पर हैं, और हम उन्हें कैच कर सकते हैं। शशि थरूर ने यह भी कहा कि जैसे-जैसे राष्ट्रपति-शैली के चुनाव अधिक होते जा रहे हैं, वह व्यक्तिगत रूप से पद से पहले मुख्यमंत्री के व्यक्तिगत चेहरे को सामने रखते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि केरल में कांग्रेस के पास यह क्षमता है कि वह किसी एक व्यक्ति या नाम के बजाय एक आयाम, एक मिशन और पार्टी के चुनाव के आधार पर भी अच्छे चुनाव परिणाम दे सकते हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या चुनावी प्रचार में कोई चेहरा नहीं है, एल कम्युनिस्ट कांग्रेस की आम जनता पर प्रभाव पड़ सकता है क्योंकि मैसाचुसेट्स एलायंस के पास के समाजवादी मुख्यमंत्री पिनराईन की जीत में एक चेहरा है, इस पर शशि थरूर ने कहा, ‘निजी तौर पर, मैं आपकी बात से सहमत हूं; मेरा मतलब यह है कि हम अपना पद छोड़ सकते हैं, लेकिन जैसा कि पार्टी नेतृत्व ने मुझे बताया, कांग्रेस ने पहले कभी ऐसा नहीं किया।’ शशि थरूर ने कहा, ‘क्योंकि यह सिद्धांत है कि चुनाव पार्टी के लिए होता है, और एक बार जब पार्टी जीतती है, तो वह अपना नेता चुनती है। ‘असल में इसका मतलब यह है कि चुनाव के बाद नेता का चुनाव होना, चुनाव के बाद नेता का चुनाव होना।’ उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस की राज्य में बहुत गहरी पैठ है. पूरे केरल में उनकी बात बहुत ही पसंदीदा तरीके से सुनी जाती है. हर खंड, हर गांव और हर वार्ड में मौजूद है। इसी वजह से कांग्रेस के पास यह क्षमता है कि वह किसी एक व्यक्ति के चेहरे या नाम के बजाय, एक आदर्श, एक मिशन और पार्टी के चुनाव-श्रेणी के आधार पर भी अच्छे नतीजे दे सकती है।’ शशि थरूर ने कहा कि जरूरी नहीं कि हर जगह यही सिद्धांत बदला जाए। उन्होंने कहा कि अब जिस तरह असम में साफा पर गौरव गोगोई पार्टी के चेहरे हैं, वहीं दूसरे राज्यों में भी इसी तरह के नेता हैं. उन्होंने कहा, ‘लेकिन केरल में हम इसी तरह (बिना चेहरे घोषित किए) लड़ने जा रहे हैं और केरल में हमारी जगहों की वजह से मुझे लगता है कि यह एक ऐसा राज्य है जहां हम कलाकारी: इसी तरह जीतेंगे।’ जब उनसे सीधे तौर पर पूछा गया कि वह मुख्यमंत्री पद के लिए क्या पात्र हैं, तो शशि थरूर ने कहा, ‘नहीं, मैं नहीं हूं।’ इसके कई अच्छे कारण हैं, जिनमें यह भी शामिल है कि मैं खुद चुनाव लड़ने की बात नहीं कर रहा हूं। मेरा मानना है कि आदर्श रूप से मुख्यमंत्री का चुनाव शेयरों में होना चाहिए।’ उन्होंने अप्रैल में वोटिंग प्रोग्राम के संदर्भ में कहा, ‘यह काफी स्टार्स वाली बात है कि वोटिंग 9 आ रही है, खासकर तब जब इसकी घोषणा खुद 15 मार्च को करने में काफी देर हो गई थी।’ मूल रूप से, इलेक्ट्रॉनिक्स आयोग ने हमें लगभग तीन सप्ताह के लिए प्रोत्साहन दिया है। ज्यादातर यूनिवर्सल ने तो अभी तक अपने सभी साझा के नाम भी घोषित नहीं किये हैं. नॉमिनेशन सोमवार तक जमा हैं और अचानक, ये दावेदार 9 अप्रैल को रिजॉल्यूशन का सामना करने वाले हैं।’ शशि थरूर ने आरोप लगाया कि देखने में ऐसा लगता है कि यह सब जान-जेकर केरल में अलास्का, असम में बीजेपी और पुदुचेरी में स्थानीय पार्टी की एकजुटता को बढ़ावा देने के लिए गया है; ये हैं वो तीन राज्य जहां 9 अप्रैल को मतदान होना है. केरल विधानसभा चुनाव में यू.एफ.एफ.एफ.ई.सी. की जीत पर विश्वास व्यक्त करते हुए शशि थरूर ने कहा कि एल.एफ.एफ.ई.सी. सरकार के खिलाफ 10 साल की सत्य-विरोधी लहर है। उन्होंने कहा, ‘उसकी कट्टरपंथी नाकामियां, आर्थिक संकट, समर्थकों के आधार और हर तरह के नुकसान हैं, सिद्धांतों के आधार पर समाजवादी सरकार से विमुख हो गए हैं।’ यह पूछे जाने पर कि एक हफ्ते पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात के बाद उनके सभी मुद्दे उठाए जाने के बाद शशि थरूर ने कहा, ‘मेरे मुद्दे मूल रूप से राज्य के लिए कोई मतलब नहीं है। मैं राज्य चुनाव में उम्मीदवार नहीं हूं. यह ज्यादातर एक टीम के तौर पर सामूहिक काम करने का सवाल था और मैं इस टीम का पूरी तरह से हिस्सा हूं। असल में, मैं प्रचार समिति का सह-अध्यक्ष हूं।’ चुनाव में अपनी भूमिका के बारे में शशि थरूर ने कहा, ‘मैं संसद सत्र में हिस्सा लेने के लिए भी प्रचार समिति में अन्य दलों के साथ नियमित ऑफ़लाइन बैठकों में शामिल हो रहा हूं।’ मैं संसद सत्र के पिछले कुछ सप्ताह को खत्म करने जा रहा हूं।’ उन्होंने कहा कि वह नाइजीरिया और राज्य के सभी 14 पर्यटकों के बीच अपनी यात्रा की संभावना जता रहे हैं।
ऑफिस में 9 घंटे तक कुर्सी से चिपके रहते हैं? इन 5 बीमारियों का बढ़ रहा खतरा, वक्त रहते हो जाएं अलर्ट

Last Updated:March 19, 2026, 15:34 IST Health Risks of Long Sitting: एक ही जगह कई घंटों तक बैठकर काम करना सेहत के लिए खतरनाक है. इससे डायबिटीज, हार्ट डिजीज समेत कई गंभीर बीमारियों का रिस्क बढ़ जाता है. एक्सपर्ट्स की मानें तो हर आधे घंटे में उठकर कुछ देर टहलने से इन बीमारियों के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है. लंबे समय तक एक जगह बैठे रहने से कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. Risks of Sitting Too Much: आजकल देश में कॉरपोरेट कल्चर तेजी से बढ़ रहा है. अधिकतर लोग इस कल्चर को फॉलो करने में कंफर्टेबल महसूस कर रहे हैं, लेकिन लगातार 8-9 घंटे तक ऑफिस में एक जगह बैठे रहना सेहत के लिए ठीक नहीं होता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स लंबे समय तक बैठने को न्यू स्मोकिंग तक कह रहे हैं. जब आप लगातार 9 घंटे या उससे अधिक समय तक कुर्सी से चिपके रहते हैं, तो शरीर की मेटाबॉलिक प्रक्रियाएं धीमी पड़ जाती हैं और मांसपेशियों की सक्रियता न्यूनतम स्तर पर आ जाती है. हमारा शरीर गति करने के लिए बना है, स्थिरता के लिए नहीं. अगर आप भी अपने ऑफिस के काम के दौरान घंटों एक ही मुद्रा में बैठे रहते हैं, तो आप अनजाने में कई गंभीर बीमारियों को न्योता दे रहे हैं. मायो क्लीनिक की रिपोर्ट के मुताबिक जब आप घंटों एक कुर्सी पर बैठे रहते हैं, तो शरीर में ब्लड फ्लो धीमा हो जाता है और मांसपेशियां कम फैट बर्न करती हैं. इससे फैटी एसिड्स हार्ट की धमनियों में जमा होने लगते हैं, जिससे हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ जाता है. एक रिसर्च के अनुसार जो लोग दिन में 8 घंटे से अधिक बैठते हैं, उनमें हार्ट से जुड़ी बीमारियों से मौत का खतरा अन्य लोगों के मुकाबले दोगुना होता है. लगातार बैठने का सीधा असर शरीर की इंसुलिन के प्रति प्रतिक्रिया पर पड़ता है. केवल एक दिन लंबे समय तक बैठने से ही शरीर की इंसुलिन संवेदनशीलता कम होने लगती है, जिससे ब्लड शुगर का स्तर बढ़ने लगता है. इससे लॉन्ग टर्म में टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. कुर्सी पर टिके रहने से शरीर का मेटाबॉलिज्म सुस्त पड़ जाता है, जिससे कैलोरी बर्न करने की क्षमता कम हो जाती है. विशेष रूप से पेट के आसपास की चर्बी तेजी से बढ़ने लगती है. यह मोटापा केवल बाहरी दिखावट तक सीमित नहीं रहता, बल्कि शरीर के आंतरिक अंगों के कामकाज को भी प्रभावित करता है, जिससे मेटाबॉलिक सिंड्रोम की स्थिति पैदा हो जाती है. इसके अलावा गलत पोस्चर में घंटों बैठने से रीढ़ की हड्डी पर अत्यधिक दबाव पड़ता है. इससे डिस्क कंप्रेशन और पीठ के निचले हिस्से में दर्द की समस्या शुरू हो जाती है. इसके साथ ही कंप्यूटर स्क्रीन की ओर झुककर देखने से टेक नेक की समस्या होती है, जो गर्दन और कंधों की नसों को स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त कर सकती है. लंबे समय तक बैठने का संबंध केवल शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य से भी है. गतिहीन जीवनशैली के कारण शरीर में एंडोर्फिन और सेरोटोनिन जैसे हैप्पी हार्मोन्स का उत्पादन कम हो जाता है. धूप और ताजी हवा की कमी के साथ-साथ एक ही जगह जमे रहने से डिप्रेशन और एंजायटी का खतरा बढ़ जाता है, जिससे कार्यक्षमता भी प्रभावित होती है. इन खतरों से बचने के लिए आपको अपनी नौकरी छोड़ने की जरूरत नहीं है, बल्कि माइक्रो-ब्रेक्स लेने की आदत डालनी होगी. हर 30 मिनट में 2 मिनट के लिए खड़े हों या स्ट्रेचिंग करें. ऑफिस में फोन पर बात करते समय टहलने की आदत डालें और लिफ्ट के बजाय सीढ़ियों का इस्तेमाल करें. याद रखें जिम में एक घंटा बिताने से 9 घंटे बैठने का नुकसान पूरी तरह खत्म नहीं होता. इसके लिए शरीर को पूरे दिन छोटी-छोटी गतिविधियों की आवश्यकता होती है. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : March 19, 2026, 15:34 IST
दिव्यांका त्रिपाठी ने प्रेग्नेंसी कन्फर्म की:बेबी बंप फ्लॉन्ट कर शेयर की खबर; शादी के करीब 10 साल बाद एक्ट्रेस मां बनेंगी

एक्ट्रेस दिव्यांका त्रिपाठी ने गुरुवार को अपनी प्रेग्नेंसी की खबर कंफर्म कर दी है। दिव्यांका ने बेबी बंप फ्लॉन्ट करते हुए पति विवेक दहिया के साथ तस्वीरें शेयर कीं। कपल शादी के करीब 10 साल बाद माता-पिता बनेंगे। प्रेग्नेंसी को लेकर एक इंस्टा पोस्ट में दिव्यांका और विवेक ने लिखा, ‘10 साल बाद कहानी में नया मोड़। कुछ सफर जल्दी पूरा करने के लिए नहीं होते… वे साथ मिलकर तैयार होने के लिए होते हैं और जब लगता है कि कहानी पूरी हो गई है… तभी जिंदगी इसमें सबसे खूबसूरत अध्याय जोड़ देती है।’ पोस्ट में आगे लिखा गया, ‘अब भी इस एहसास को महसूस कर रहे हैं… बिना वजह मुस्कुरा रहे हैं… दिल कृतज्ञता से भरा है। हम माता-पिता बनने वाले हैं।’ बेबी जून में होगा: दिव्यांका अपनी प्रेग्नेंसी को लेकर दिव्यांका और विवेक ने ईटाइम्स से बातचीत में कहा कि उनका बेबी जून में होगा। एक्ट्रेस ने कहा कि वह लगभग हर महीने प्रेग्नेंसी टेस्ट करती थीं और पॉजिटिव रिजल्ट की उम्मीद करती थीं। जब रिपोर्ट पॉजिटिव आई, तो उन्हें इस बात को स्वीकार करने में थोड़ा समय लगा। विवेक ने खबर सुनकर खुशी जताई, लेकिन तुरंत जश्न नहीं मनाया। दिव्यांका ने यह भी कहा कि मेरे मन और शरीर में बदलाव आया। मैं अपने खान-पान, व्यायाम और चलने-फिरने के तरीके को लेकर काफी सतर्क हो गई। मैं अचानक ज्यादा जागरूक और सावधान हो गई। दिव्यांका और विवेक की पहली मुलाकात टीवी सीरियल ‘ये हैं मोहब्बतें’ के सेट (2015) पर हुई थी। शुरुआत में दोनों के बीच सिर्फ प्रोफेशनल रिश्ता था। सेट पर घंटों साथ रहते थे, लेकिन बातचीत बहुत कम होती थी। दिव्यांका और विवेक की लव स्टोरी में एक्टर पंकज भाटिया ने अहम भूमिका निभाई, जिन्होंने दोनों को एक-दूसरे के लिए परफेक्ट लाइफ पार्टनर बताया था। कुछ समय तक डेटिंग करने के बाद दोनों ने 8 जुलाई 2016 को भोपाल में शादी की थी।
castor leaves benefits in hindi | castor leaves benefits | अरंडी के पत्ते के फायदे | अरंडी के पत्ते के फायदे और नुकसान |

Last Updated:March 19, 2026, 15:28 IST Castor Leaves Benefits: बदलते मौसम और गलत जीवनशैली के कारण आज हर दूसरा व्यक्ति जोड़ों के दर्द, सूजन या पेट की समस्याओं से जूझ रहा है. ऐसे में आयुर्वेद का एक प्राचीन नुस्खा ‘अरंडी के पत्ते’ किसी वरदान से कम नहीं हैं. एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीसेप्टिक गुणों से भरपूर ये पत्ते न केवल गंभीर से गंभीर दर्द को सोख लेते हैं, बल्कि पुरानी कब्ज और त्वचा रोगों को जड़ से मिटाने की क्षमता रखते हैं. आइए जानते हैं डॉक्टर गीतिका शर्मा के अनुसार, कैसे ये मामूली दिखने वाले पत्ते आपकी सेहत के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं. अरंडी के पत्ते स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं. विशेष रूप से सूजन, जोड़ों के दर्द और त्वचा रोगों में, इनमें एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीसेप्टिक गुण होते हैं. जो दर्द कम करने और घाव भरने में मदद करते हैं. इनका इस्तेमाल मुख्य रूप से लेप या तेल के रूप में किया जाता है. जो कब्ज और त्वचा की समस्याओं में भी आराम देते हैं। डॉक्टर गीतिका शर्मा ने बताया किअरंडी के पत्ते जोड़ों के दर्द, सूजन और गठिया में राहत के लिए बहुत फायदेमंद हैं. इनमें सूजन-रोधी गुण होते हैं. जो दर्द कम करने में मदद करते हैं. सरसों या तिल के तेल के साथ गर्म करके, इन पत्तों का लेप या सिंकाई करने से जोड़ों की जकड़न कम होती है और पुराने दर्द में भी राहत मिलती है। अरंडी के पत्ते और उनका तेल त्वचा संबंधी समस्याओं जैसे संक्रमण, खुजली, घाव और सूजन के इलाज में बेहद फायदेमंद होते हैं. इनके एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीसेप्टिक गुणों के कारण, ये दाद और सोरायसिस जैसी स्किन कंडीशंस को ठीक करने में मदद करते हैं. पत्तों का पेस्ट या तेल त्वचा को नमी भी प्रदान करता है। Add News18 as Preferred Source on Google अरंडी के पत्ते और पाचन सुधारने व कब्ज दूर करने के लिए अत्यधिक फायदेमंद होते हैं. इनमें रेचक गुण होते हैं जो आंतों को उत्तेजित कर मल त्याग को आसान बनाते हैं. इनका उपयोग पुरानी कब्ज, गैस, और पेट की सूजन से राहत पाने के लिए किया जाता है। अरंडी के पत्ते शरीर में गांठ या सूजन को कम करते हैं. इनमें एंटी-इफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो दर्द और सूजन को राहत देते हैं. अब्जिव पत्तों का रस या पेस्ट लगाकर लाभ उठाएं. डॉक्टर से सलाह लेकर इसका उपयोग करें और सेहत का ध्यान रखें। अरंडी के पत्ते का पेस्ट घावों को जल्दी भरता है और बालों के विकास को बढ़ावा देता है. इसमें एंटीसेप्टिक और पोषक तत्व होते हैं जो त्वचा और बालों को स्वस्थ बनाते हैं. अब्जिव पत्तों का पेस्ट लगाकर लाभ उठाएं और सेहत का ध्यान रखें। अरंडी के पत्ते सेहत के लिए वैसे तो फायदेमंद होते हैं. लेकिन इसका सेवन करने से पहले चिकित्सक से सलाह लेना जरूरी होता है. बिना चिकित्सक की सलाह के इसका सेवन करने से बचना चाहिए क्योंकि यह नुकसानदायक भी हो सकते हैं। First Published : March 19, 2026, 15:28 IST
गर्मी में ताजगी का राज… ये 5 फल खाओ, डॉक्टर की नहीं पड़ेगी जरूरत, हाइड्रेट और इम्यूनिटी बूस्ट करना भी आसान!

Last Updated:March 19, 2026, 15:26 IST गर्मी के मौसम में शरीर में पानी की कमी जल्दी हो जाती है, जिससे थकान, चक्कर और कमजोरी जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं. ऐसे में सही फलों का सेवन करना बेहद जरूरी है, जो न केवल शरीर को ठंडक दें बल्कि जरूरी पोषक तत्व भी प्रदान करें. तरबूज, खरबूजा, ककड़ी, संतरा और अनानास जैसे पानी से भरपूर फल गर्मियों में हाइड्रेशन, इम्यूनिटी और ताजगी बनाए रखने के लिए सबसे फायदेमंद माने जाते हैं. गर्मी शुरू होते ही शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन की समस्या बढ़ जाती है, जिससे थकान, चक्कर और कमजोरी महसूस होती है. ऐसे में खानपान का सही ध्यान रखना जरूरी हो जाता है, खासकर उन फलों का सेवन करना चाहिए जिनमें पानी की मात्रा अधिक होती है और जो शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ जरूरी पोषक तत्व भी प्रदान करते हैं. गर्मियों में सही फल खाने से शरीर हाइड्रेट रहता है, इम्यूनिटी मजबूत होती है और बीमारियों से बचाव होता है. इसलिए अपनी डाइट में पानी से भरपूर फलों को शामिल करना सबसे आसान और असरदार तरीका है. गर्मी में सबसे फायदेमंद फल तरबूज माना जाता है, क्योंकि इसमें लगभग 90 प्रतिशत पानी होता है. यह शरीर को तुरंत ठंडक देता है और पानी की कमी को तेजी से पूरा करता है. तरबूज में विटामिन A और C भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो त्वचा को हेल्दी रखने और इम्युनिटी मजबूत करने में मदद करते हैं. इसके नियमित सेवन से शरीर में ताजगी बनी रहती है और लू से बचाव होता है. गर्मियों में दिन के समय तरबूज खाना सबसे फायदेमंद माना जाता है. इसके अलावा, खरबूजा भी गर्मियों के लिए बेहतरीन फल है, जो शरीर को ठंडा रखने के साथ-साथ पाचन को बेहतर बनाता है. इसमें फाइबर, पोटैशियम और विटामिन C अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं. खरबूजा खाने से पेट की समस्याएं कम होती हैं और शरीर में पानी का संतुलन बना रहता है. गर्मी के दिनों में इसे सुबह या दोपहर के समय खाने से शरीर को अधिक फायदा मिलता है और दिनभर तरोताजा महसूस होता है. Add News18 as Preferred Source on Google वहीं, ककड़ी को भी गर्मियों में जरूर शामिल करना चाहिए, क्योंकि इसमें लगभग 95 प्रतिशत पानी होता है. यह शरीर को तुरंत हाइड्रेट करता है और अंदर से ठंडक पहुंचाता है. ककड़ी को सलाद के रूप में या हल्के नमक के साथ खाने से पाचन बेहतर होता है और शरीर में ताजगी बनी रहती है. इसके अलावा, संतरा भी पानी और विटामिन C का अच्छा स्रोत है, जो इम्यूनिटी बढ़ाने और थकान दूर करने में मदद करता है. संतरा खाने से शरीर में ऊर्जा बनी रहती है. इसके साथ ही, अनानास भी गर्मी के मौसम में काफी फायदेमंद माना जाता है. इसमें पानी के साथ-साथ एंटीऑक्सीडेंट्स और एंजाइम्स होते हैं, जो पाचन को सुधारते हैं और शरीर को मजबूत बनाते हैं. अनानास का सेवन करने से शरीर में ताजगी बनी रहती है और कमजोरी दूर होती है. कुल मिलाकर, अगर आप गर्मी के मौसम में इन फलों को अपनी डाइट में शामिल करते हैं, तो न केवल पानी की कमी दूर होगी बल्कि शरीर भी फिट और हेल्दी रहेगा, जिससे आप पूरे दिन एक्टिव और ऊर्जावान महसूस करेंगे. First Published : March 19, 2026, 15:26 IST
बुरहानपुर में जल गंगा संवर्धन अभियान शुरू:ताप्ती राजघाट पर अफसर-जनप्रतिनिधियों ने किया श्रमदान, पानी बचाने जनआंदोलन का आह्वान

बुरहानपुर जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान गुरुवार को शुरू हुआ। इस अभियान का उद्देश्य पानी की हर बूंद बचाना और जल संरक्षण की दिशा में मजबूत पहल करना है। अभियान के शुभारंभ अवसर पर ताप्ती नदी के राजघाट पर जिला स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में विधायक अर्चना चिटनिस, महापौर माधुरी पटेल, जिला पंचायत सीईओ व अपर कलेक्टर सृजन वर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और कर्मचारियों ने भाग लिया। राजघाट पर मां ताप्ती के किनारे विधिवत पूजन और शपथ के साथ अभियान की शुरुआत हुई। इस दौरान जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से श्रमदान किया। उन्होंने कचरा एकत्र कर स्वच्छता और जल संरक्षण का संदेश दिया। इस अवसर पर बोरी बंधान कार्य का भी शुभारंभ किया गया। जल संरक्षण के लिए शपथ ली विधायक अर्चना चिटनिस ने जल गंगा संवर्धन अभियान में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इस अभियान में सभी की सहभागिता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने जल संरक्षण और संवर्धन के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए उपस्थित लोगों को प्रेरित किया। महापौर माधुरी पटेल ने नागरिकों से अपील की कि वे अपने घरों में भी वर्षा जल को सहेजने की व्यवस्था करें। उन्होंने जल संरक्षण के प्रयासों में सहभागी बनने का आग्रह किया। कार्यक्रम के दौरान सामूहिक शपथ भी ली गई। इस अभियान के माध्यम से न केवल जल स्रोतों का पुनर्जीवन किया जाएगा, बल्कि आमजनों को भी इससे जोड़कर इसे एक जन-आंदोलन के रूप में विकसित किया जाएगा।
पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: हैशटैग की जंग में बीजेपी बनाम टीएमसी का खुलासा- खुलासा, सोशल मीडिया पर ‘डिजिटल महाभारत’, नया चुनावी हथियार

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले राजनीति का सबसे बड़ा क्षेत्र अब मैदान या मंच नहीं, बल्कि सोशल मीडिया बन गया है। राजनीतिक के लिए हैशटैग सिर्फ ट्रेंडिंग शब्द नहीं, बल्कि राजनीतिक रणनीति का अहम हिस्सा बन गए हैं। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और वैष्णव कांग्रेस (टीएमसी) दोनों ही डिजिटल नैरेटिव के माध्यम से जनता के मन और वोट तक पहुंच की कोशिश कर रहे हैं। इस नए दौर में हर पोस्ट, हर ट्रेंड और हर डिजिटल अभियान का सीधा असर जमीन की राजनीति पर पड़ रहा है। यही वजह है कि बंगाल में अब हैशटैग के जरिए भी लड़की जा रही है। बीजेपी की रणनीति: बदलाव और पहचान का डिजिटल संदेश बीजेपी ने अपने नामांकन अभियान में बदलाव और शासन के गठबंधन को केंद्र में रखा है. पार्टी के मुख्य डिजिटल नारे में #PaltanoDorkarChaiभाजपा सरकार और #BanchteChaiभाजपाताई जैसे हैशटैग शामिल हैं। ये संदेश सीधे तौर पर सत्ता परिवर्तन और शासन के असंतोष के ख़िलाफ़ हवा देने की रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं। बदलावों के व्यापक नैरावेटिव को मजबूत करने के लिए #BanglaChaiPoriborton और #AsolPoriborton जैसे हैशटैग कॉन्स्टेंट का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह दर्शाता है कि स्थिर सरकार के खिलाफ जनभावना बन रही है और जनता ‘वास्तविक परिवर्तन’ चाहती है। हैशटैग के माध्यम से हैशटैग के माध्यम से भाजपा ने #MissionBengal2026 और #RoadToWriters2026 को डिजिटल रूप से सक्रिय करने की कोशिश की है। राइटर्स बिल्डिंग तक सत्य का प्रस्थान अभियान पार्टी के सैद्धांतिक राजनीतिक लक्ष्य का भी हिस्सा है। इसके साथ ही पहचान आधारित राजनीति को साधने के लिए #JusticeForhindus और #RespectAdivasis जैसे हैशटैग भी प्रमुखता से सामने आए हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि पार्टी धार्मिक और सामाजिक पहचान की विचारधारा को भी विचारधारा में प्रमुखता देना चाहती है। विकास केंद्र और राज्य समन्वय के मुद्दे को बढ़ावा देने के लिए #DoubleEngineForBengal और #SonarBangla2026 हैशटैग बीजेपी के डिजिटल नायर जैसे का हिस्सा बने हुए हैं। पार्टी इस संदेश के माध्यम से यह दिखाना चाहती है कि केंद्र और राज्य में एक ही पार्टी की सरकार से विकास की समीक्षा तेज होगी। टीएमसी का जवाब: क्षेत्रीय गौरव और महिला सुरक्षा पर फोकस दूसरी ओर, डेमोक्रेट कांग्रेस ने अपना डिजिटल अभियान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की छवि और क्षेत्रीय पहचान-गिरफ्तार को सौंपा है। पार्टी के मुख्य हैशटैग में #BanglaNijerMeyekeiChay, #DidiAgain और #BanglaWithDidi शामिल हैं। इसका मकसद ममता बनर्जी को ‘बंगाल की अपनी बेटी’ के रूप में पेश करना और इंस्टालमेंट बनाना है। बीजेपी के खिलाफ आक्रामक राजनीतिक संदेश के लिए टीएमसी ने #बीजेपीहटाओबंगलाबचाओ, #बीजेपीएक्सपोज्ड और #नोवोटटूबीजेपी टैग को विचारधारा चर्चा का हिस्सा बनाया है। इससे साफ है कि पार्टी चुनाव में सीधे तौर पर बीजेपी बनाम टीएमसी की लड़ाई के रूप में पेश होना चाहती है. महिलाओं और सामाजिक कल्याण से जुड़े सौंदर्य को बढ़ावा देने के लिए #नारीसुरक्षा और #बेटीबचाओ जैसे हैशटैग का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह रणनीति राज्य में महिला मतदाताओं के बीच सार्वभौम और राजनीतिक संदेश दोनों को मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखने जा रही है। इसके साथ ही टीएमसी पर शासन और क्षेत्रीय गौरव का मुद्दा #BanglarGorboMamata और #BanglarUnnayan जैसे हैशटैग के जरिए अपनी अर्जी को सामने रख रही है। पार्टी का उद्देश्य यह दर्शाता है कि विकास और पहचान दोनों ही उसका शासन है। विचारधारा गति और जनसमर्थन का डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए #VoteForTMC और #BanglaDecides जैसे हैशटैग भी लगातार ट्रेंडिंग की कोशिश की जा रही है। डिजिटल जंग का असर: वोटर्स तक पहुंच का नया रास्ता राजनीतिक सिद्धांतों का मानना है कि 2026 का बंगाल चुनाव डिजिटल रणनीति का दावा अब तक का सबसे आक्रामक चुनाव साबित हो सकता है। सोशल मीडिया के माध्यम से तैयार किया जा रहा है कि यह नैरेटिव न केवल प्रेरणा को सक्रिय करता है, बल्कि न्यूट्रल वोटर्स को भी प्रभावित करता है। हैशटैग की यह लड़ाई सिर्फ ट्रेंडिंग का खेल नहीं है, बल्कि जनमत निर्माण की प्रक्रिया का हिस्सा बन गई है। छोटे वीडियो, स्टॉक और वायरल पोस्ट के माध्यम से राजनीतिक संदेश अब तेजी से लोगों तक पहुंच रहे हैं। चुनाव से पहले दोनों विचारधाराओं का यह डिजिटल आक्रामक रुख सा संकेत देता है कि आने वाले महीनों में बंधक और तेज होंगे। बंगाल का चुनाव अब सिर्फ बैलेट बॉक्स की लड़ाई नहीं, बल्कि डिजिटल धारणा का भी परीक्षण हो गया है।
₹3 करोड़ का लॉटरी विनर 5वें दिन मिला:पंजाब होली बंपर के विजेता बने; बोले- खबरें पढ़ी, TV पर देखा लेकिन यकीन ही नहीं हो रहा था

पंजाब में 3 करोड़ रुपए की लॉटरी जीतने वाला व्यक्ति मिल गया है। यह लॉटरी जालंधर में फिल्लौर के रहने वाले ईंट भट्ठा मालिक मक्खन सिंह और उनकी पत्नी कमलेश कौर ने जीती है। अब उनकी खुशी का ठिकाना नहीं है। दैनिक भास्कर से बातचीत में कपल ने कहा कि वे 3 करोड़ रुपए की लॉटरी लगने की खबरें पढ़ रहे थे और टीवी पर सुन रहे थे। हालांकि, उन्हें लगा नहीं था कि यह लॉटरी उनकी है, इसलिए उन्होंने इस पर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा- भगवान का शुक्र है। अब हम इस पैसे को जरूरत के हिसाब खर्च करेंगे। इसका कुछ हिस्सा सोशल काम में लगाएंगे। करोड़पति बनने पर कपल की अहम बातें… 3 बच्चों के माता-पिता, तीनों विदेश में: कपल ने बताया कि हमारे दो बेटे और एक बेटी है। तीनो मैरिड हैं। वह अभी स्टडी वीजा पर विदेश गए हुए हैं। 14 मार्च को खुली थी लॉटरी बता दें कि 14 मार्च को पंजाब स्टेट लॉटरी विभाग की ओर से घोषित नतीजों में पहला इनाम 3 करोड़ रुपए का लगा है, जिसका टिकट नंबर 791016 है। वहीं, दूसरा इनाम 50 लाख रुपए का लगा, जिसका टिकट नंबर B 862817 है। इसके बाद एजेंसी को विनर की तलाश की थी। ———- ये खबर भी पढ़ें… मोहाली में सिक्योरिटी गार्ड बना करोड़पति, ₹200 के टिकट पर निकला डेढ़ करोड़ का इनाम; पंचकूला का रहने वाला मोहाली में सिक्योरिटी गार्ड ने डेढ़ करोड़ रुपए का इनाम जीता है। उन्होंने पंजाब स्टेट डियर लॉटरी का 200 रुपए का टिकट खरीदा था और फिर रातों-रात उसकी किस्मत बदल गई। सिक्योरिटी गार्ड कपिल हरियाणा के पंचकूला जिले के रायपुररानी के गांव मौली के रहने वाले हैं। लॉटरी जीतने के बाद परिवार भी काफी खुश है। (पढ़ें पूरी खबर)
इम्यूनिटी को मजबूत करने के लिए क्या खाएं और क्या न खाएं? यहां देखिए पूरी लिस्ट, सेहत में आएगा सुधार

Last Updated:March 19, 2026, 15:05 IST Best Foods to Boost Immunity: बदलते मौसम में निरोगी रहने के लिए इम्यूनिटी को मजबूत बनाए रखना बेहद जरूरी है. डाइटिशियन कामिनी सिन्हा के अनुसार खट्टे फल, हल्दी और अदरक शरीर के डिफेंस सिस्टम को एक्टिव करते हैं. इन चीजों का सेवन करना फायदेमंद होता है. जबकि अत्यधिक चीनी और प्रोसेस्ड फूड व्हाइट ब्लड सेल्स की कार्यक्षमता को घटा देते हैं. इससे इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है. बीमारियों से बचने के लिए हेल्दी खानपान जरूरी होता है. बदलते मौसम और संक्रमण के बढ़ते खतरों के बीच इम्यूनिटी हमारे शरीर को बचाती है. अगर आपका इम्यून सिस्टम मजबूत है, तो शरीर वायरस और बैक्टीरिया से लड़ने में सक्षम होता है, जिससे आप बार-बार बीमार नहीं पड़ते. इम्यूनिटी रातों-रात नहीं बनती, बल्कि यह हमारे खान-पान और लाइफस्टाइल का परिणाम है. नोएडा के डाइट मंत्रा क्लीनिक की सीनियर डाइटिशियन कामिनी सिन्हा से जानते हैं कि इम्यूनिटी मजबूत करने के लिए कौन से फूड्स का सेवन करना चाहिए और किन चीजों से परहेज करना चाहिए. इम्यूनिटी की बात हो और विटामिन C का जिक्र न हो, ऐसा मुमकिन नहीं है. संतरा, नींबू, मौसंबी और कीवी जैसे खट्टे फल सफेद रक्त कोशिकाओं के उत्पादन को बढ़ाते हैं, जो संक्रमण से लड़ने के लिए अनिवार्य हैं. विटामिन-C एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है, जो शरीर की कोशिकाओं को फ्री रेडिकल्स से बचाता है. चूंकि हमारा शरीर विटामिन-C को स्टोर नहीं कर सकता, इसलिए इसे रोजाना डाइट में शामिल करना जरूरी है. भारतीय मसालों में छिपे औषधीय गुण इम्यूनिटी के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं. लहसुन में एलिसिन नामक यौगिक होता है, जो संक्रमण और सूजन से लड़ता है. अदरक गले की खराश और इन्फ्लेमेशन को कम करने में सहायक है. वहीं, हल्दी में मौजूद करक्यूमिन एंटी-वायरल और एंटी-बैक्टीरियल गुणों से भरपूर होता है. रात को गर्म दूध में एक चुटकी हल्दी डालकर पीना सदियों पुराना और सबसे प्रभावी नुस्खा है. Add News18 as Preferred Source on Google हमारी इम्यूनिटी का लगभग 70 से 80% हिस्सा हमारे गट हेल्थ में होता है. दही और प्रोबायोटिक फूड्स शरीर में अच्छे बैक्टीरिया की संख्या बढ़ाते हैं. ये बैक्टीरिया न केवल पाचन सुधारते हैं, बल्कि बाहरी कीटाणुओं को शरीर पर हावी होने से भी रोकते हैं. दोपहर के भोजन में एक कटोरी ताजा दही शामिल करना आंतों के स्वास्थ्य और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए अत्यंत लाभकारी है. बादाम, अखरोट, कद्दू के बीज और सूरजमुखी के बीज विटामिन E, जिंक और ओमेगा-3 फैटी एसिड के बेहतरीन स्रोत हैं. विटामिन-E एक घुलनशील एंटीऑक्सीडेंट है, जो इम्यून फंक्शन को सुचारू बनाए रखने में मदद करता है. जिंक की कमी से शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है, इसलिए मुट्ठी भर सूखे मेवे रोज खाने चाहिए. पालक, ब्रोकली और मेथी जैसी हरी पत्तेदार सब्जियां न केवल विटामिन-C बल्कि विटामिन-A और आयरन से भी भरपूर होती हैं. ये सब्जियां शरीर में हीमोग्लोबिन के स्तर को बनाए रखती हैं और कोशिकाओं के पुनर्जनन में मदद करती हैं. ब्रोकली को कम से कम पकाकर खाना चाहिए ताकि इसके पोषक तत्व बरकरार रहें. यह शरीर को डिटॉक्स करने और संक्रमण रोकने में मदद करती है. इम्यूनिटी बढ़ाने के साथ-साथ यह जानना भी जरूरी है कि क्या चीज उसे कमजोर करती है. अत्यधिक चीनी का सेवन शरीर की सफेद रक्त कोशिकाओं की कीटाणुओं को मारने की क्षमता को कुछ घंटों के लिए कम कर देता है. इसी तरह प्रोसेस्ड फूड, पैकेट बंद स्नैक्स और सोडा में मौजूद प्रिजर्वेटिव्स शरीर में सूजन बढ़ाते हैं, जिससे इम्यून सिस्टम दूसरी बीमारियों से लड़ने के बजाय खुद को ठीक करने में उलझ जाता है. शराब का अधिक सेवन फेफड़ों के स्वास्थ्य को बिगाड़ता है और शरीर की प्राकृतिक सफाई प्रक्रिया को धीमा कर देता है. धूम्रपान श्वसन तंत्र की सुरक्षात्मक परतों को नष्ट कर देता है, जिससे वायरस के लिए शरीर में प्रवेश करना आसान हो जाता है. अगर आप अपनी इम्यूनिटी को लेकर गंभीर हैं, तो इन नशीले पदार्थों से दूरी बनाना पहला कदम होना चाहिए. केवल खाना ही काफी नहीं है, बल्कि शरीर को डिटॉक्स करने के लिए दिन भर में कम से कम 3-4 लीटर पानी पीना जरूरी है. पानी शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है. इसके साथ ही रात की 7-8 घंटे की गहरी नींद इम्यून सेल्स के उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण है. नींद की कमी शरीर को थका देती है, जिससे संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. First Published : March 19, 2026, 15:05 IST
‘हमारी कोई दुश्मनी नहीं…’, असम चुनाव में गौरव गोगोई को टक्कर देने जा रहे हितेंद्र नाथ गोस्वामी ने क्या कहा

असम में विधानसभा चुनाव को लेकर फोकस बिसात बिछुनी शुरू हो गई है. इस बार जोरहाट में एक हाई-प्रोफाइल चुनावी मुकाबला होने जा रहा है, क्योंकि असम विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष और विधायक हितेंद्र नाथ गोस्वामी इस बार चुनाव में असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीपीसी) के अध्यक्ष गौरव गोगोई को चुनौती देने के लिए तैयार हैं। अपने उम्मीदवार की आधिकारिक घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए गोस्वामी ने जोरहाट क्षेत्र से चुनाव लड़ने के लिए गोगोई के फैसले पर आश्चर्यचकित कर दिया। मीडिया से बात करते हुए गोस्वामी ने कहा, “मुझे आश्चर्य है कि गौरव गोगोई यहां नेता के रूप में चुनाव लड़ने क्यों आए हैं। वे जोर देकर कह रहे हैं कि वे अब विधानसभा चुनाव में उतरने का फैसला क्यों कर रहे हैं?” क्या बोले हितेन्द्र नाथ गोस्वामी?समर्थक समर्थक ने अपनी भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि गोगोई के अल्पसंख्यक रहते हुए भी विकास समन्वय पर प्रत्यक्ष समन्वय की कमी हो रही है। उन्होंने आगे कहा, “वे जोरहाट के न्यूनतम थे और मैं यहां का नेता हूं, लेकिन मुझे इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र के यात्रियों को ले जाने के बारे में कोई चर्चा याद नहीं है।” युवा पीढ़ी की महत्वपूर्ण भूमिका – गोस्वामीगोस्वामी ने स्पष्ट किया कि दोनों नेताओं के बीच कोई व्यक्तिगत प्रतिद्वंदिता नहीं है। उन्होंने कहा, “हमारी कंपनी कोई शत्रु नहीं है, इसलिए मैं किसी भी तरह की टिप्पणी नहीं करना चाहता।” आगामी प्रकाशन में युवा कॉलेज की भूमिका में गोस्वामी ने अपने बढ़ते प्रभाव को स्वीकार किया। उन्होंने कहा, ”युवा पीढ़ी इस चुनाव में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, लेकिन वे वैज्ञानिक हैं और जानते हैं कि किसे नियुक्त किया गया है।” बेहोशी की हालत में बेबस हुए गोस्वामी ने गोगोई को पाकिस्तान से जोड़ने वाले काम पर टिप्पणी करने से पहले कहा और कहा, “मैं इस पर टिप्पणी नहीं करना चाहता। जोर के घाट के लोग शिक्षित हैं और वे जानते हैं कि क्या सही है।” इसी बीच गोस्वामी ने असमिया म्यूजिक के दिग्गज जुबिन गर्ग के सम्मान में एक प्रोजेक्ट की योजना का खुलासा करते हुए एक कल्चरल पहल की घोषणा की। उन्होंने बताया, “हम जुबिन गर्ग को समर्पित एक प्रोजेक्ट शुरू कर रहे हैं, जिसका निर्माण उद्योग महाविद्यालय के पास सोताई में किया जाएगा।” दोनों नेताओं के महत्वपूर्ण राजनीतिक प्रभाव को देखते हुए, आने वाले दिनों में जोर-शोर से एक कड़ा और गहन मुकाबला देखने की उम्मीद है। ये भी पढ़ें असम बीजेपी उम्मीदवारों की सूची: असम में बीजेपी ने की फील्डिंग सेट! प्रद्युत बोरदोलोई सहित कई बड़े दांव, क्या उलटी पड़ जाएगी बाजी? (टैग्सटूट्रांसलेट)असम विधानसभा चुनाव 2026(टी)गौरव गोगोई(टी)हितेंद्र नाथ गोस्वामी(टी)कांग्रेस(टी)असम(टी)विधानसभा चुनाव(टी)जोरहाट(टी)कांग्रेस(टी)गौरव गोगोई(टी)हितेंद्र नाथ गोस्वामी









