Monday, 06 Apr 2026 | 12:50 PM

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Israel Nuclear Location Exposed; Iran Dimona Missile Attack

Israel Nuclear Location Exposed; Iran Dimona Missile Attack

तेल अवीव6 मिनट पहले कॉपी लिंक इजराइल के सबसे सुरक्षित इलाकों में उसका मुख्य परमाणु रिसर्च सेंटर माना जाता है। डिमोना न्यूक्लियर फैसिलिटी नेगेव रेगिस्तान में डिमोना शहर के पास स्थित है। यहां सुरक्षा बहुत कड़ी रहती है और इसे बचाने के लिए कई परतों वाली मिसाइल डिफेंस सिस्टम लगी हुई है। लेकिन शनिवार रात एक चौंकाने वाली घटना हुई। ईरान की दो बैलिस्टिक मिसाइलें इजराइल के एयर डिफेंस को चकमा देकर डिमोना और पास के शहर अराद के रिहायशी इलाकों में गिर गईं। रिपोर्ट्स के मुताबिक इसके लिए मिसाइलों ने 1500 किमी से ज्यादा दूरी तय की ये दोनों हमले करीब तीन घंटे के अंतर से हुए। इजराइल के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, ईरान की मिसाइल हमलों में 180 लोग घायल हुए हैं, जिनमें कुछ की हालत गंभीर है। डिमोना में शनिवार रात हुए ईरानी मिसाइल हमलों के बाद रिहायशी इलाके में भारी नुकसान हुआ। इजराइल ने माना- ईरानी मिसाइलें रोकने में नाकाम रहे डिमोना में स्थित शिमोन पेरेस नेगेव परमाणु रिसर्च सेंटर को आम तौर पर ‘डिमोना रिएक्टर’ कहा जाता है। माना जाता है कि यहां इजराइल के परमाणु हथियार मौजूद हैं, हालांकि इजराइल ने कभी इसे आधिकारिक तौर पर स्वीकार नहीं किया। यह देश के सबसे सुरक्षित इलाके माना जाता है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह रही कि इजराइली सेना ने खुद माना कि उसने इन मिसाइलों को रोकने की कोशिश की थी, लेकिन वह सफल नहीं हो सकी। ऐसे में यहां हुए हमले से आसपास रहने वाले लोगों में डर फैल गया है। इजराइल बोला- अब तक 400 ईरानी मिसाइलें रोकीं इजराइल का दावा है कि वह ज्यादातर मिसाइलों को रोक लेता है। इजराइली वायुसेना के अनुसार, 28 फरवरी को अमेरिका-इजराइल के हमले के बाद से अब तक ईरान 400 मिसाइलें दाग चुका है, जिनमें से 92 प्रतिशत को हवा में ही रोक लिया गया। हालांकि शनिवार रात की यह घटना दिखाती है कि कोई भी सुरक्षा सिस्टम 100 प्रतिशत सुरक्षित नहीं होता। अब जांच की जा रही है कि आखिर ये मिसाइलें इजराइल के एयर डिफेंस सिस्टम को कैसे पार कर गईं। इजराइल के पास कई तरह के एयर डिफेंस सिस्टम हैं। आयरन डोम छोटे रॉकेट रोकने के लिए है। डेविड्स स्लिंग मध्यम दूरी की मिसाइलों के लिए इस्तेमाल होता है। सबसे एडवांस सिस्टम एरो-3 है, जो अंतरिक्ष के पास ही मिसाइल को नष्ट करने की क्षमता रखता है। इसके अलावा अमेरिका का THAAD सिस्टम भी वहां तैनात है। इसके बावजूद ये मिसाइलें अंदर तक पहुंच गईं। इससे सवाल उठ रहे हैं कि आखिर गलती कहां हुई। कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह ऑपरेशन की नाकामी हो सकती है, यानी सिस्टम सही था लेकिन उसे इस्तेमाल करने में चूक हुई। इंटरसेप्टर मिसाइलों के स्टॉक खत्म होने की आशंका एक और बड़ी चिंता यह भी सामने आ रही है कि कहीं इजराइल अपने सबसे महंगे और ताकतवर इंटरसेप्टर मिसाइलों का इस्तेमाल बचाकर तो नहीं कर रहा। पिछले साल ईरान के साथ 12 दिन की लड़ाई में काफी मिसाइलें खर्च हो चुकी थीं, इसलिए स्टॉक कम होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि इजराइली सेना ने कहा है कि उसके पास पर्याप्त मिसाइलें हैं और वह लंबी लड़ाई के लिए तैयार है। फिर भी अगर युद्ध लंबा चलता है, तो दबाव बढ़ना तय माना जा रहा है। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने डिमोन पर हुए हमले की घटना को ‘चमत्कार’ बताया, क्योंकि इतने बड़े हमले के बावजूद कोई मौत नहीं हुई। उन्होंने लोगों से कहा कि अलर्ट मिलते ही तुरंत बंकर में जाएं और लापरवाही न करें। इन हमलों में करीब 175 लोग घायल हुए, जिनमें से कम से कम 10 की हालत गंभीर है। कई लोग इसलिए बच गए क्योंकि वे समय रहते बम शेल्टर में पहुंच गए थे। कोई भी डिफेंस सिस्मट फुल प्रूफ नहीं एक्सपर्ट्स के मुताबिक बैलिस्टिक मिसाइल को रोकना बेहद मुश्किल काम होता है। एरो-3 जैसे सिस्टम को सीधे मिसाइल से टकराना पड़ता है, जो ऐसा है जैसे दो गोलियां हवा में टकराएं। अगर मिसाइल रास्ता बदल दे या हवा में हल्का सा बदलाव हो जाए, तो उसे रोकना और मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा कुछ मिसाइलें हवा में ऊपर जाकर कई छोटे हिस्सों में टूट जाती हैं, जिन्हें पूरी तरह रोकना और भी कठिन होता है। इनके टुकड़े भी जमीन पर गिरकर नुकसान पहुंचाते हैं। कुल मिलाकर, यह घटना दिखाती है कि चाहे सिस्टम कितना भी मजबूत क्यों न हो, युद्ध की स्थिति में पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं होती। साथ ही यह भी साफ हो रहा है कि अगर यह संघर्ष लंबा चला, तो इजराइल के लिए अपने संसाधनों को संभालकर इस्तेमाल करना बड़ी चुनौती बन सकता है। ————————————- दावा-ईरान ने हीट ट्रैकिंग मिसाइल से अमेरिकी F-35 को गिराया:यह दुनिया का सबसे एडवांस फाइटर जेट, लेकिन ईरानी खतरे का अंदाजा नहीं लगा पाया ईरान ने 19 मार्च को दुनिया के सबसे एडवांस अमेरिकी फाइटर जेट F-35 को गिराने का दावा किया। ईरानी मीडिया प्रेस टीवी के मुताबिक ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अपने स्वदेशी ‘मजीद’ एयर डिफेंस सिस्टम के जरिए इसे मार गिराया। अगर यह सच है तो ईरान पहला ऐसा देश होगा जो ऐसा कर पाया है। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

प्रयागराज में पूर्व मंत्री का कोल्ड स्टोरेज ढहा,4 की मौत:मलबे से 17 लोगों को बाहर निकाला गया; प्रत्यक्षदर्शी बोले- धमाका हुआ था

प्रयागराज में पूर्व मंत्री का कोल्ड स्टोरेज ढहा,4 की मौत:मलबे से 17 लोगों को बाहर निकाला गया; प्रत्यक्षदर्शी बोले- धमाका हुआ था

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में सोमवार दोपहर करीब डेढ़ बजे तेज धमाके के बाद कोल्ड स्टोरेज की एक बिल्डिंग ढह गई। मलबे में करीब 20 मजदूर दब गए। हादसे में 4 मजदूरों की मौत हुई है। मरने वालों में पिलत चौधरी, मशींदर, ज्योतिष और जगदीश शामिल हैं। जगदीश प्रयागराज और बाकी तीनों बिहार के रहने वाले थे। हालांकि, प्रशासन ने अभी मौतों की पुष्टि नहीं की है। प्रशासन 7 जेसीबी से रेस्क्यू ऑपरेशन चला रहा है। अब तक 17 लोगों को मलबे से बाहर निकाला गया है। एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीम मौके पर हैं। यह कोल्ड स्टोरेज सपा नेता और पूर्व मंत्री अंसार अहमद का है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है, पहले अमोनिया गैस स्टोरेज टैंक में विस्फोट हुआ। इससे आरसीसी पिलर स्ट्रक्चर ढह गया। फिर बिल्डिंग भरभराकर गिर गई। अमोनिया गैस की बदबू करीब 1 किलोमीटर तक फैल चुकी है। ज्यादातर लोग मुंह पर कपड़ा (रुमाल, गमछा) बांधे हुए हैं। घटना को लेकर लोग गुस्से में हैं। पुलिस को भी विरोध का सामना करना पड़ा। हादसे की तस्वीरें देखिए- कोल्ड स्टोरेज 5 हजार स्क्वायर फीट जमीन पर बना आदर्श कोल्ड स्टोरेज नाम से यह बिल्डिंग हादसा फाफामऊ इलाके में थी। इसके मालिक सपा नेता और पूर्व मंत्री अंसार अहमद है। 27 साल पुराना कोल्ड स्टोरेज करीब 5 हजार स्क्वायर फीट जमीन पर बना है। इसमें तीन बिल्डिंग हैं। करीब 1500 स्क्वायर फीट एक बिल्डिंग ढही है। यहां 100 से ज्यादा लोग काम करते हैं। पुलिस ने कोल्ड स्टोरेज के मैनेजर और अंसार अहमद के परिवार के कई सदस्यों को हिरासत में लिया है। सीएम योगी ने मृतकों को 2-2 लाख और घायलों को 50 हजार रुपए देने का ऐलान किया है। उन्होंने घटना पर दुख जाहिर किया है। घटना से जुड़े पल-पल के अपडेट्स के लिए लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…

धुरंधर 2 में आर माधवन के सीन पर विवाद:शिवसेना नेता ने गुरबाणी के अपमान पर उठाया सवाल, फिल्म मेकर्स से सार्वजनिक माफी की मांग की

धुरंधर 2 में आर माधवन के सीन पर विवाद:शिवसेना नेता ने गुरबाणी के अपमान पर उठाया सवाल, फिल्म मेकर्स से सार्वजनिक माफी की मांग की

फिल्म धुरंधर 2 को लेकर नया विवाद सामने आया है। फिल्म के एक सीन में गुरबाणी के कथित अपमान को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है। शिव सेना गुरजोत सिंह कीर ने ने इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए फिल्म मेकर्स से सार्वजनिक माफी की मांग की है। रिपोर्ट के मुताबिक, विवाद उस सीन को लेकर है जिसमें आर माधवन का किरदार गुरबाणी का उच्चारण करता नजर आता है। आरोप है कि इस दौरान उनके हाथ में सिगरेट दिखाई गई है। सिख समुदाय और नेताओं का कहना है कि यह प्रस्तुति धार्मिक मर्यादाओं के खिलाफ है और इससे उनकी भावनाएं आहत हुई हैं। यही इस पूरे विवाद का मुख्य कारण बन गया है। शिवसेना नेता गुरजोत सिंह कीर ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी इस सीन को बेहद आहत करने वाला और अस्वीकार्य बताया। उन्होंने कहा कि गुरबाणी सिख धर्म की पवित्र वाणी है और इसे इस तरह दिखाना किसी भी हालत में सही नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने फिल्म निर्माताओं से तुरंत माफी मांगने और विवादित सीन को हटाने की मांग की है। नेता ने चेतावनी भी दी कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो इस मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन हो सकता है। उनका कहना है कि धार्मिक भावनाओं से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता बरतना जरूरी है, खासकर जब बात किसी समुदाय की आस्था की हो। यह मामला अब केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा। खबर के अनुसार, इस मुद्दे को लेकर शिकायत भी दर्ज कराई गई है। शिकायत में फिल्म से जुड़े लोगों पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया गया है। फिलहाल, फिल्म के मेकर्स या कलाकारों की तरफ से इस विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि बढ़ते विरोध के बीच मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। गौरतलब है कि धुरंधर 2 पहले भी अलग-अलग कारणों से चर्चा में रही है, लेकिन गुरबाणी से जुड़े इस विवाद ने इसे फिर सुर्खियों में ला दिया है।

समर दही तड़का रेसिपी: 5 मिनट में सादा दही में डालें ये 4 तरह का तड़का, देखते ही हो जाएंगे फैन; बढ़ जाएगी खाने का स्वाद

गर्मियों में स्वस्थ आहार युक्तियों के लिए 5 मिनट की दही तड़का रेसिपी, स्वादिष्ट मसालेदार दही रेसिपी

दही तड़का रेसिपी | छवि: सोशल मीडिया Tadke Wali Dahi Kaise Banaye: गर्मियों में दही खाना स्वास्थ्य के लिए बहुत स्वादिष्ट माना जाता है। यह शरीर को ठंडक देता है और पाचन तंत्र को भी बेहतर बनाता है। लेकिन अगर आप रोज-रोज सादा दही खात पैदा हो गए हैं, तो अब यह बेकार बेकार भुगतान का समय है। आज हम आपको बताएंगे 4 आसान और झटपट बनने वाले दही तड़का रेसिपी, जिसे आप सिर्फ 5 मिनट में तैयार कर सकते हैं। ये स्वाद में लाजवाब हैं और आपके साधारण दही को बना देंगे सुपर टेस्टी। जीरा-हींग तड़का दही यह सबसे आसान और क्लासिक तड़का है। इसका स्वाद, सुगंधदार और पेट के लिए बेहद अच्छा होता है। कैसे?: एक पैन में थोड़ी सी घी या तेल गरम कर लीजिये. इसमें जीरा और एक चुटकी हींग शामिल हैं। प्रभाव भूनने के बाद इसे दही में डाल दें। ऊपर से नमक और थोड़ा काला नमक। लहसुन-लाल मिर्च तड़का दही अगर आपको लिटिल सिम्पसी पसंद है, तो ये आपके लिए है। इसका स्वाद तीखा, चटपटा और खाने का मजा डबल कर देगा। कैसे?: तेल गर्म करें, जिसमें थर्मोस्टैटिक लहसुन शामिल है और सुगंध होने तक। फिर साबुत लाल मिर्च डालें और तुरंत बनाएं दही की दाल। कारी पत्ता-सरसोन तड़का दही दक्षिण भारतीय स्वाद का मजा घर पर लें। कैसे देखें: तेल में राई डालें, जब चटकने लगें तो करी पत्ते और हरी मिर्च डालें। इसे दही में रखें। इसका स्वाद फ्लेवर तीखा और बिल्कुल अलग टेस्ट होता है। धनिया-पुदीना तड़का दही समरसमान के लिए ताजातरीन होटल रहेंगे। इसका स्वाद ठंडा, ताजगी भरा और बहुत ही स्वादिष्ट होता है। कैसे देखें: धनिया और पुदीना को डेमोक्रेट पीस लें। प्रभाव सा जीरा तड़का रोके, पकौड़े और दही की दाल में। अन्य जरूरी टिप्स दही हमेशा अन्वेषित और ताजी लें। तड़का ज्यादा गरम न रखें, अन्य दही फैट हो सकता है स्वाद बढ़ाने के लिए ऊपर से जीरा पाउडर भी डाला जा सकता है। अब आपको सादा दही खाने की जरूरत नहीं है। इन आसान तडकों से आप हर दिन दही को नया स्वाद दे सकते हैं। ये रेसिपी ना सिर्फ स्वाद मसाला, बल्कि गर्मियों में आपको ठंडक भी देगी। यह अवश्य पढ़ें: पनीर बनाम टोफू: सेहत के लिए टोफू और पनीर में से कौन सा है स्वादिष्ट? जानें अंतर्ज्ञान और का सही तरीका

भूत बंगला का 'तू ही दिसदा' सॉन्ग टीजर रिलीज:अक्षय-वामिका की रोमांटिक केमिस्ट्री दिखी; अरिजीत सिंह की आवाज में फिल्म का दूसरा ट्रैक

भूत बंगला का 'तू ही दिसदा' सॉन्ग टीजर रिलीज:अक्षय-वामिका की रोमांटिक केमिस्ट्री दिखी; अरिजीत सिंह की आवाज में फिल्म का दूसरा ट्रैक

अक्षय कुमार और प्रियदर्शन की फिल्म ‘भूत बंगला’ के नए लव ट्रैक ‘तू ही दिसदा’ का टीजर रिलीज कर दिया गया है। टीजर में अक्षय कुमार और वामिका गब्बी की रोमांटिक केमिस्ट्री नजर आ रही है। गाने में अरिजीत सिंह और निकिता गांधी की आवाज वाले इस गाने में खूबसूरत लोकेशन्स और प्यारी लव स्टोरी की झलक दिखाई गई है। अरिजीत सिंह की आवाज में रोमांटिक ट्रैक फिल्म के पहले गाने ‘राम जी आके भला करेंगे’ की सफलता के बाद मेकर्स ने अब फिल्म का रोमांटिक पहलू पेश किया है। ‘तू ही दिसदा’ गाने के विजुअल्स में झरने, घने जंगल और खूबसूरत पहाड़ों के नजारे दिखाए गए हैं। वामिका गब्बीअक्षय कुमार के साथ पहली बार स्क्रीन शेयर करती नजर आएंगी और उनकी जोड़ी काफी ‘नेचुरल’ लग रही है। गाने में अरिजीत सिंह की सुकून देने वाली आवाज इस गाने को और खूबसूरत बना रही है। 14 साल बाद साथ आए अक्षय-प्रियदर्शन ‘भूत बंगला’ साल 2026 की बड़ी फिल्मों में से एक मानी जा रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह अक्षय कुमार और डायरेक्टर प्रियदर्शन का 14 साल बाद साथ आना है। इस जोड़ी ने पहले ‘हेरा फेरी’, ‘भूल भुलैया’ और ‘गरम मसाला’ जैसी कल्ट क्लासिक कॉमेडी फिल्में दी हैं। फैंस एक बार फिर बड़े पर्दे पर उसी पुराने स्टाइल का ह्यूमर और एंटरटेनमेंट देखने का इंतजार कर रहे हैं। पुरानी कॉमेडी कास्ट की वापसी फिल्म में सिर्फ अक्षय ही नहीं, बल्कि प्रियदर्शन की पसंदीदा कॉमेडी टीम भी वापस लौट रही है। फिल्म में परेश रावल, राजपाल यादव और असरानी जैसे दिग्गज कलाकार अहम भूमिकाओं में हैं। इन एक्टर्स की मौजूदगी ने फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच पुरानी यादें ताजा कर दी हैं। फिल्म में इनके साथ तब्बू भी नजर आएंगी, जिससे स्टार कास्ट और भी मजबूत हो गई है। अप्रैल में रिलीज होगी फिल्म ‘भूत बंगला’ का निर्माण बालाजी मोशन पिक्चर्स और केप ऑफ गुड फिल्म्स के बैनर तले किया जा रहा है। एकता कपूर और अक्षय कुमार इसके प्रोड्यूसर हैं। यह फिल्म 10 अप्रैल, 2026 को सिनेमाघरों में दस्तक देगी।

भगवान अजीतनाथ का मोक्ष कल्याणक महोत्सव:श्रद्धालुओं ने किया केसर, गुलाब से पक्षाल; बंधु त्रिपुटी महाराजश्री रहे उपस्थित

भगवान अजीतनाथ का मोक्ष कल्याणक महोत्सव:श्रद्धालुओं ने किया केसर, गुलाब से पक्षाल; बंधु त्रिपुटी महाराजश्री रहे उपस्थित

आगर मालवा के जैन अजीतनाथ मंदिर में भगवान अजीतनाथ का मोक्ष कल्याणक महोत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर जैन समाज के श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा गया और मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में रंगा नजर आया। महोत्सव के दौरान मुंबई के भयंदर से आए गिरनारी ग्रुप ने विशेष आयोजन किया। इसमें केसर, गुलाब सहित विभिन्न जड़ी-बूटियों और पवित्र द्रव्यों से भगवान अजीतनाथ का वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधि-विधानपूर्वक पक्षाल (अभिषेक) किया गया। इस भव्य धार्मिक अनुष्ठान ने उपस्थित श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक भाव से अभिभूत कर दिया। कल्याणक में महाराजश्री ने श्रद्धालुओं को प्रेरित किया यह मोक्ष कल्याणक महोत्सव सोमवार सुबह करीब 10 बजे प्रारंभ हुआ। इसमें बंधु त्रिपुटी महाराजश्री-आगमरत्न, प्रशमरत्न एवं वज्ररत्न सागर महाराज की पावन उपस्थिति विशेष आकर्षण का केंद्र रही। उनके सान्निध्य में संपन्न हुए कार्यक्रमों ने श्रद्धालुओं को धर्म और आत्मकल्याण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। इस अवसर पर वज्ररत्न सागर महाराज ने अपने प्रवचनों में दान, शील, तप और प्रभु भक्ति को मोक्ष प्राप्ति के सच्चे मार्ग बताया। उन्होंने श्रद्धालुओं को संयम, साधना और आत्मचिंतन का महत्व समझाते हुए धर्ममय जीवन अपनाने का संदेश दिया। धर्म के सिद्धांतों को अपनाने का संकल्प कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे। सभी ने श्रद्धापूर्वक भगवान का पक्षाल कर धर्मलाभ प्राप्त किया। पूरे आयोजन के दौरान भक्ति, आस्था और अनुशासन का अद्भुत संगम देखने को मिला। अंत में श्रद्धालुओं ने भगवान अजीतनाथ के मोक्ष कल्याणक की शुभकामनाएं देते हुए धर्म के सिद्धांतों को अपनाने का संकल्प लिया।

प्राइवेट पार्ट पर मस्से होने की क्या है वजह? किन लोगों को इसका ज्यादा खतरा, कैसे मिलेगा छुटकारा

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Last Updated:March 23, 2026, 13:50 IST Warts on Private Parts: प्राइवेट पार्ट पर मस्से ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) के कारण होते हैं. एक्सपर्ट्स की मानें तो जेनिटल वॉर्ट्स एक सेक्सुअल ट्रांसमिटेड इंफेक्शन है. यह वायरस असुरक्षित यौन संबंध बनाने और संक्रमित व्यक्ति के स्किन के संपर्क से फैलता है. प्राइवेट पार्ट के मस्से हटाने के लिए कई तरह के ट्रीटमेंट उपलब्ध हैं. जेनिटल वॉर्ट्स की सबसे बड़ी वजह ह्यूमन पैपिलोमावायरस है. HPV and Genital Warts: हाथ-पैर और गर्दन पर मस्से हो जाएं, तो लोग इन्हें नजरअंदाज करते हैं. ये मस्से जिंदगीभर बने रहते हैं और अधिकतर लोग इसका कोई ट्रीटमेंट नहीं कराते हैं. कई बार लोगों के प्राइवेट पार्ट पर या इसके आसपास मस्से हो जाते हैं. इन मस्सों से लोगों को समस्याएं होती हैं और वे शर्मिंदगी के कारण इस बारे में किसी से बात भी नहीं करते हैं. डॉक्टर्स के अनुसार प्राइवेट पार्ट पर मस्से होना एक कॉमन, लेकिन सेंसिटिव समस्या है. मेडिकल की भाषा में इन्हें जेनिटल वॉर्ट्स (Genital Warts) कहा जाता है. ये मस्से आमतौर पर जानलेवा नहीं होते हैं, लेकिन समय पर ध्यान न देने पर ये बढ़ सकते हैं. अमेरिका की क्लीवलैंड क्लीनिक की रिपोर्ट के मुताबिक जेनिटल वॉर्ट्स की सबसे बड़ी वजह ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) है. यह एक प्रकार का सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन (STI) है. यह वायरस त्वचा से त्वचा के संपर्क के जरिए फैलता है. असुरक्षित यौन संबंध, एक से अधिक पार्टनर होना या संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से यह वायरस फैल जाता है. खास बात यह है कि कई बार व्यक्ति में वायरस होने के बावजूद लक्षण दिखाई नहीं देते, फिर भी वह दूसरों को संक्रमित कर सकता है. इसके लक्षणों की बात करें तो जेनिटल वॉर्ट्स छोटे-छोटे उभरे हुए दाने या मस्सों की तरह दिखाई देते हैं, जो त्वचा के रंग या हल्के ग्रे कलर के हो सकते हैं. ये मस्से जननांग, गुदा, जांघों के आसपास या महिलाओं में योनि के अंदर भी हो सकते हैं. कई बार ये फूलगोभी जैसे गुच्छों के रूप में भी दिखाई देते हैं. आमतौर पर इनमें दर्द नहीं होता, लेकिन खुजली, जलन, हल्का खून आना या असहजता महसूस हो सकती है. जेनिटल वॉर्ट्स का कोई परमानेंट नहीं है, लेकिन मस्सों को हटाया जा सकता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. डॉक्टर की सलाह से क्रीम, केमिकल ट्रीटमेंट, क्रायोथेरेपी, लेजर या सर्जरी के जरिए प्राइवेट पार्ट के मस्सों को हटाया जा सकता है. कुछ मामलों में ये अपने आप भी ठीक हो सकते हैं, लेकिन इलाज करवाने से संक्रमण फैलने का खतरा कम हो जाता है. इलाज के दौरान यौन संबंध से बचना जरूरी होता है. इन मस्सों से बचने के लिए सेफ संबंध बनाना जरूरी है. कंडोम का इस्तेमाल संक्रमण के खतरे को कम करता है, हालांकि यह पूरी तरह सुरक्षा नहीं देता. एक ही पार्टनर के साथ संबंध रखना, व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखना और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच करवाना भी जरूरी है. डॉक्टर्स की मानें तो HPV वैक्सीन भी जेनिट वॉर्ट्स से बचने का एक असरदार तरीका है. यह वैक्सीन एचपीवी वायरस से काफी हद तक बचाव कर सकती है. आमतौर पर इस वैक्सीन को सर्वाइकल कैंसर से बचाने में बेहद कारगर माना जाता है और इस कैंसर की वजह भी HPV वायरस होता है. ऐसे में अगर आप एचपीवी वैक्सीन लगवा लेंगे, तो सर्वाइकल कैंसर के अलावा एचपीवी वायरस से होने वाली कई समस्याओं से बचाव कर सकते हैं. यह वैक्सीन लड़के और लड़कियां दोनों लगवा सकते हैं. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : March 23, 2026, 13:50 IST

The dominance of ‘wonderkids’, players being developed at a young age

The dominance of 'wonderkids', players being developed at a young age

Hindi News Sports The Dominance Of ‘wonderkids’, Players Being Developed At A Young Age लंदन25 मिनट पहले कॉपी लिंक क्रिकेट में 14 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी आईपीएल और अंडर-19 वर्ल्ड कप खेलने और शतक लगाने वाले सबसे युवा बैटर हैं। खेलों की दुनिया में अद्भुत ट्रेंड नजर आने लगा है। इंग्लिश फुटबॉल क्लब आर्सनल के मैक्स डॉवमैन हाल ही में प्रीमियर लीग के इतिहास में गोल करने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बने हैं। स्केटबोर्डिंग में 17 वर्षीय स्काई ब्राउन और डार्ट्स में 18 वर्षीय ल्यूक लिटलर दो-दो बार वर्ल्ड चैम्पियन बन चुके हैं। क्रिकेट में 14 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी आईपीएल और अंडर-19 वर्ल्ड कप खेलने और शतक लगाने वाले सबसे युवा बैटर हैं। टेनिस में एमा राडुकानू ने 18 की उम्र में ग्रैंड स्लैम जीता था। फॉर्मूला-1 में 19 वर्षीय किमी एंटोनेली दूसरे सबसे कम उम्र के रेस विनर बने हैं। ऐसा लगता है टीनेजर्स खेलों पर राज कर रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि आंकड़े कुछ और कहानी बताते हैं। 1992 से 2021 के बीच ओलिंपियंस की औसत उम्र में वास्तव में दो साल का इजाफा हुआ है। टेनिस, क्रिकेट और फुटबॉल में खिलाड़ी अब ज्यादा उम्र तक अपने करियर के शीर्ष पर खेल रहे हैं। तो फिर औसत उम्र का बढ़ना और दूसरी तरफ 14-18 साल के युवाओं का विश्व स्तर पर धूम मचाना, आखिर इस चमत्कार के पीछे क्या वजह है? विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सबसे बड़ा कारण आधुनिक स्पोर्ट्स साइंस, मनोविज्ञान और एडवांस ट्रेनिंग है। फॉर्मूला-1 की ड्राइवर एकेडमी में नेक्स्ट-जेनरेशन सिमुलेटर और ट्रेनिंग की मदद से युवाओं को कम अनुभव के बावजूद कम उम्र में ही शारीरिक और मानसिक दबाव के लिए तैयार कर लिया जाता है। फुटबॉल में भी ‘एलीट प्लेयर परफॉर्मेंस प्लान’ जैसी व्यवस्थाओं ने बड़ी क्रांति ला दी है। डेस रयान कहते हैं कि अब खिलाड़ियों को फिजिकल, मेडिकल, साइकोलॉजिकल और एजुकेशनल तौर पर जो सुविधाएं मिल रही हैं, वे उन्हें बड़े मंच के लिए जल्दी तैयार कर रही हैं। प्रोफेसर शॉन कमिंग बताते हैं कि अब खेल पहले से कहीं ज्यादा तेज और ताकतवर हो गया है। जो बच्चे जल्दी विकसित होते हैं, उन्हें बेहतर सपोर्ट मिलता है। एकेडमी में बच्चों पर भारी वजन उठाने का दबाव नहीं डाला जाता, बल्कि उन्हें सही टेक्निक सिखाई जाती है ताकि शरीर तैयार होने पर वे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकें। हालांकि, सफलता के साथ कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं। विशेषज्ञों की चेतावनी है कि इन युवा एथलीटों का शरीर 22 साल की उम्र तक बढ़ता है, इसलिए चोटों से बचाने के लिए वर्कलोड मैनेज करना जरूरी है। युवाओं का दिमाग 23 साल तक पूरी तरह परिपक्व नहीं होता। वे गलतियां कर सकते हैं, इसलिए मैदान के बाहर भी उन्हें सही मेंटरशिप और सुरक्षा की उतनी ही जरूरत होती है जितनी मैदान पर। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Gurugram LPG ATM Launch: 24×7 Gas Cylinder Relief

Gurugram LPG ATM Launch: 24x7 Gas Cylinder Relief

गुरुग्राम29 मिनट पहले कॉपी लिंक सेंट्रल पार्क फ्लावर वैली में लगा एलपीजी ATM। गुरुग्राम के सोहना क्षेत्र में सेक्टर 33 स्थित सेंट्रल पार्क फ्लावर वैली में भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने देश का पहला ‘LPG ATM’ यानि गैस वेंडिंग मशीन शुरू की है। इसे ‘भारतगैस इंस्टा LPG’ नाम दिया गया है। यह उत्तर भारत में इस तरह का पहला स्वचालित सिस्टम है, जो 24 घंटे खुला रहता है और घरेलू गैस सिलेंडर की तत्काल उपलब्धता सुनिश्चित करता है। पिछले कुछ महीनों से देशभर में LPG की सप्लाई चेन में देरी, मिडिल ईस्ट में तनाव और पैनिक बुकिंग के कारण गैस सिलेंडर की कमी देखी जा रही है। कई इलाकों में उपभोक्ताओं को डिलीवरी के लिए दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसे में गुरुग्राम में यह LPG ATM एक बड़ी राहत लेकर आया है। यह मशीन ATM की तरह ही काम करती है, उपभोक्ता खाली सिलेंडर लाकर कुछ ही मिनटों में भरा हुआ सिलेंडर प्राप्त कर सकते हैं।प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और संपर्क-रहित (कॉन्टैक्टलेस) है। सोसाइटी के फैसिलिटी डिप्टी मैनेजर अमित खटाना। 2 मिनट में मिलेगा सिलेंडर पूरी प्रक्रिया में मात्र 2 से 3 मिनट का समय लगता है। यह मशीन हल्के वजन वाले कम्पोजिट सिलेंडर वितरित करती है, जो पारंपरिक स्टील सिलेंडर से काफी हल्के होते हैं और इन्हें महिलाओं व बुजुर्गों के लिए उठाना-रखना आसान होता है। फिलहाल यहां से 10 किग्रा के सिलेंडर दिए जा रहे हैं। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू मशीन में एक समय पर 10 सिलेंडर रखे जा सकते हैं। स्टॉक दो सिलेंडर रह जाने पर नजदीकी गैस एजेंसी को ऑटोमैटिक अलर्ट चला जाता है, जिससे रीस्टॉकिंग समय पर हो सके। यह प्रोजेक्ट BPCL का पायलट प्रोजेक्ट है, जिसका उद्देश्य पारंपरिक डिलीवरी सिस्टम पर निर्भरता कम करना और उपभोक्ताओं को 24×7 सुविधा उपलब्ध कराना है। रेजिडेंट्स को फायदा मिल रहा सोसाइटी के फैसिलिटी डिप्टी मैनेजर अमित खटाना ने बताया कि सेंट्रल पार्क फ्लावर वैली के निवासियों के लिए यह विशेष रूप से उपयोगी साबित हो रहा है, क्योंकि वे अब रात के समय या छुट्टी के दिन भी बिना किसी एजेंट के इंतजार के सिलेंडर प्राप्त कर सकते हैं। यह मशीन बहुत सुविधाजनक है। पहले डिलीवरी का इंतजार करना पड़ता था, अब खुद जाकर 2 मिनट में काम हो जाता है। कई अन्य रेजिडेंट्स ने भी इसे ‘स्मार्ट सिलेंडर’ की दिशा में बड़ा कदम बताया है। यदि यह पायलट सफल रहा तो इसे अन्य शहरों और आवासीय कॉलोनियों में भी विस्तारित किया जा सकता है। इससे न केवल गैस संकट जैसी स्थितियों में मदद मिलेगी, बल्कि डिजिटल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्यों को भी बल मिलेगा। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

सुप्रीम कोर्ट जज बोले-ज्यूडिशियरी हद से ज्यादा सख्त हो रही:इसलिए लोग जेलों में सड़ रहे; यह विकसित भारत का आदर्श नहीं हो सकता

सुप्रीम कोर्ट जज बोले-ज्यूडिशियरी हद से ज्यादा सख्त हो रही:इसलिए लोग जेलों में सड़ रहे; यह विकसित भारत का आदर्श नहीं हो सकता

सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने कहा कि ज्यूडिशियरी के कुछ हिस्से ‘मोर लॉयल देन द किंग सिंड्रोम’ से ग्रस्त हैं। यानी ये हिस्से राजा से भी ज्यादा वफादार होने की प्रवृत्ति अपना चुके हैं। इसके कारण ही लोग महीनों तक जेलों में सड़ते रहते हैं। जस्टिस भुइयां ने यह बात रविवार को बेंगलुरु में हुए सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की पहली नेशनल समिट के दौरान कही। ‘विकसित भारत में न्यायपालिका की भूमिका’ विषय पर पैनल डिस्कशन के दौरान जस्टिस भुइयां ने कहा- कुछ मामलों में सिस्टम इतना ज्यादा सख्त हो रहा है कि जरूरत से ज्यादा केस दर्ज हो रहे हैं। बार एंड बेंच की एक खबर के मुताबिक जस्टिस भुइयां ने सरकार और न्यायपालिका के संबंधों, PMLA, UAPA कानूनों के जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने विरोध प्रदर्शन और सोशल मीडिया एक्टिविटी जैसे छोटे मुद्दों पर मनमाने ढंग से क्रिमिनल केस दर्ज किए जाने की निंदा की। UAPA और PMLA एक्ट का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल उनकी वैल्यू घटा रहा अपनी स्पीच के दौरान जस्टिस भुइयां ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) जैसे कानूनों के तहत आरोपियों को लंबे समय तक हिरासत में रखे जाने पर चिंता जताई। उन्होंने कहा- PMLA प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, ऐसे मामलों से निपटने का एक बड़ा साधन है, लेकिन कानून का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल इसके असर को कमजोर करता है। वहीं, UAPA को लेकर कहा कि जब दोषसिद्धि की दर लगभग 5% से भी कम है, तो आरोपी को सालों तक जेल में क्यों रखा जाए। जस्टिस भुइयां ने कहा कि सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़े कुछ विवादों से निपटने के लिए सुप्रीम कोर्ट को SIT बनानी पड़ी हैं, जिससे सिर्फ समय की बर्बादी हुई है। विकसित भारत राजनीतिक नारा, अदालतें इससे अलग रहें जस्टिस भुइयां ने न्यायपालिका को विकसित भारत जैसे राजनीतिक नारों से बहुत ज्यादा जोड़ने के खिलाफ भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा- ‘विकसित भारत’ का विचार एक राजनीतिक लक्ष्य है और अदालतों को अपने कामकाज में स्वतंत्र रहना चाहिए। जब हम विकसित भारत की बात करते हैं, तो बहस और असहमति के लिए गुंजाइश होनी चाहिए। असहमति को अपराध नहीं माना जाना चाहिए। दलित से भेदभाव होता रहा, तो विकास सार्थक नहीं हो सकता पैनल डिस्कशन के दौरान जस्टिस भुइयां बोले- “भारत में दलितों से भेदभाव जैसी सामाजिक दरारें बर्दाश्त नहीं की जा सकतीं। माता-पिता यह जिद नहीं कर सकते कि बच्चे दलित महिला के हाथ का बना खाना नहीं खाएंगे। हम ऐसी स्थिति बर्दाश्त नहीं कर सकते जहां दलित पुरुषों, अनुसूचित जाति के पुरुषों को गलियारों में खड़ा किया जाए और लोग उन पर पेशाब करें। यह विकास का मॉडल नहीं हो सकता। व्यक्ति के सम्मान की रक्षा की जानी चाहिए।”