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The dominance of ‘wonderkids’, players being developed at a young age

The dominance of 'wonderkids', players being developed at a young age
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लंदन25 मिनट पहले

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क्रिकेट में 14 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी आईपीएल और अंडर-19 वर्ल्ड कप खेलने और शतक लगाने वाले सबसे युवा बैटर हैं।

खेलों की दुनिया में अद्भुत ट्रेंड नजर आने लगा है। इंग्लिश फुटबॉल क्लब आर्सनल के मैक्स डॉवमैन हाल ही में प्रीमियर लीग के इतिहास में गोल करने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बने हैं। स्केटबोर्डिंग में 17 वर्षीय स्काई ब्राउन और डार्ट्स में 18 वर्षीय ल्यूक लिटलर दो-दो बार वर्ल्ड चैम्पियन बन चुके हैं। क्रिकेट में 14 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी आईपीएल और अंडर-19 वर्ल्ड कप खेलने और शतक लगाने वाले सबसे युवा बैटर हैं। टेनिस में एमा राडुकानू ने 18 की उम्र में ग्रैंड स्लैम जीता था। फॉर्मूला-1 में 19 वर्षीय किमी एंटोनेली दूसरे सबसे कम उम्र के रेस विनर बने हैं। ऐसा लगता है टीनेजर्स खेलों पर राज कर रहे हैं।

दिलचस्प बात यह है कि आंकड़े कुछ और कहानी बताते हैं। 1992 से 2021 के बीच ओलिंपियंस की औसत उम्र में वास्तव में दो साल का इजाफा हुआ है। टेनिस, क्रिकेट और फुटबॉल में खिलाड़ी अब ज्यादा उम्र तक अपने करियर के शीर्ष पर खेल रहे हैं। तो फिर औसत उम्र का बढ़ना और दूसरी तरफ 14-18 साल के युवाओं का विश्व स्तर पर धूम मचाना, आखिर इस चमत्कार के पीछे क्या वजह है? विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सबसे बड़ा कारण आधुनिक स्पोर्ट्स साइंस, मनोविज्ञान और एडवांस ट्रेनिंग है।

फॉर्मूला-1 की ड्राइवर एकेडमी में नेक्स्ट-जेनरेशन सिमुलेटर और ट्रेनिंग की मदद से युवाओं को कम अनुभव के बावजूद कम उम्र में ही शारीरिक और मानसिक दबाव के लिए तैयार कर लिया जाता है। फुटबॉल में भी ‘एलीट प्लेयर परफॉर्मेंस प्लान’ जैसी व्यवस्थाओं ने बड़ी क्रांति ला दी है। डेस रयान कहते हैं कि अब खिलाड़ियों को फिजिकल, मेडिकल, साइकोलॉजिकल और एजुकेशनल तौर पर जो सुविधाएं मिल रही हैं, वे उन्हें बड़े मंच के लिए जल्दी तैयार कर रही हैं। प्रोफेसर शॉन कमिंग बताते हैं कि अब खेल पहले से कहीं ज्यादा तेज और ताकतवर हो गया है। जो बच्चे जल्दी विकसित होते हैं, उन्हें बेहतर सपोर्ट मिलता है। एकेडमी में बच्चों पर भारी वजन उठाने का दबाव नहीं डाला जाता, बल्कि उन्हें सही टेक्निक सिखाई जाती है ताकि शरीर तैयार होने पर वे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकें।

हालांकि, सफलता के साथ कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं। विशेषज्ञों की चेतावनी है कि इन युवा एथलीटों का शरीर 22 साल की उम्र तक बढ़ता है, इसलिए चोटों से बचाने के लिए वर्कलोड मैनेज करना जरूरी है। युवाओं का दिमाग 23 साल तक पूरी तरह परिपक्व नहीं होता। वे गलतियां कर सकते हैं, इसलिए मैदान के बाहर भी उन्हें सही मेंटरशिप और सुरक्षा की उतनी ही जरूरत होती है जितनी मैदान पर।

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क्रिकेट में 14 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी आईपीएल और अंडर-19 वर्ल्ड कप खेलने और शतक लगाने वाले सबसे युवा बैटर हैं।

खेलों की दुनिया में अद्भुत ट्रेंड नजर आने लगा है। इंग्लिश फुटबॉल क्लब आर्सनल के मैक्स डॉवमैन हाल ही में प्रीमियर लीग के इतिहास में गोल करने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बने हैं। स्केटबोर्डिंग में 17 वर्षीय स्काई ब्राउन और डार्ट्स में 18 वर्षीय ल्यूक लिटलर दो-दो बार वर्ल्ड चैम्पियन बन चुके हैं। क्रिकेट में 14 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी आईपीएल और अंडर-19 वर्ल्ड कप खेलने और शतक लगाने वाले सबसे युवा बैटर हैं। टेनिस में एमा राडुकानू ने 18 की उम्र में ग्रैंड स्लैम जीता था। फॉर्मूला-1 में 19 वर्षीय किमी एंटोनेली दूसरे सबसे कम उम्र के रेस विनर बने हैं। ऐसा लगता है टीनेजर्स खेलों पर राज कर रहे हैं।

दिलचस्प बात यह है कि आंकड़े कुछ और कहानी बताते हैं। 1992 से 2021 के बीच ओलिंपियंस की औसत उम्र में वास्तव में दो साल का इजाफा हुआ है। टेनिस, क्रिकेट और फुटबॉल में खिलाड़ी अब ज्यादा उम्र तक अपने करियर के शीर्ष पर खेल रहे हैं। तो फिर औसत उम्र का बढ़ना और दूसरी तरफ 14-18 साल के युवाओं का विश्व स्तर पर धूम मचाना, आखिर इस चमत्कार के पीछे क्या वजह है? विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सबसे बड़ा कारण आधुनिक स्पोर्ट्स साइंस, मनोविज्ञान और एडवांस ट्रेनिंग है।

फॉर्मूला-1 की ड्राइवर एकेडमी में नेक्स्ट-जेनरेशन सिमुलेटर और ट्रेनिंग की मदद से युवाओं को कम अनुभव के बावजूद कम उम्र में ही शारीरिक और मानसिक दबाव के लिए तैयार कर लिया जाता है। फुटबॉल में भी ‘एलीट प्लेयर परफॉर्मेंस प्लान’ जैसी व्यवस्थाओं ने बड़ी क्रांति ला दी है। डेस रयान कहते हैं कि अब खिलाड़ियों को फिजिकल, मेडिकल, साइकोलॉजिकल और एजुकेशनल तौर पर जो सुविधाएं मिल रही हैं, वे उन्हें बड़े मंच के लिए जल्दी तैयार कर रही हैं। प्रोफेसर शॉन कमिंग बताते हैं कि अब खेल पहले से कहीं ज्यादा तेज और ताकतवर हो गया है। जो बच्चे जल्दी विकसित होते हैं, उन्हें बेहतर सपोर्ट मिलता है। एकेडमी में बच्चों पर भारी वजन उठाने का दबाव नहीं डाला जाता, बल्कि उन्हें सही टेक्निक सिखाई जाती है ताकि शरीर तैयार होने पर वे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकें।

हालांकि, सफलता के साथ कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं। विशेषज्ञों की चेतावनी है कि इन युवा एथलीटों का शरीर 22 साल की उम्र तक बढ़ता है, इसलिए चोटों से बचाने के लिए वर्कलोड मैनेज करना जरूरी है। युवाओं का दिमाग 23 साल तक पूरी तरह परिपक्व नहीं होता। वे गलतियां कर सकते हैं, इसलिए मैदान के बाहर भी उन्हें सही मेंटरशिप और सुरक्षा की उतनी ही जरूरत होती है जितनी मैदान पर।

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