Akshaye Khanna Struggle Success Story; Baldness

5 मिनट पहलेलेखक: आशीष तिवारी/वीरेंद्र मिश्र कॉपी लिंक बॉलीवुड में उतार‑चढ़ाव और बदलती परिस्थितियों के बावजूद अक्षय खन्ना हमेशा अपनी एक्टिंग पर ही फोकस बनाए रखा। कम उम्र में गंजेपन जैसी पर्सनल चुनौतियों और करियर के कई उतार-चढ़ाव झेलने के बावजूद अक्षय खन्ना ने कभी खुद पर भरोसा नहीं खोया। सुपरस्टार बनने का उनका सपना भले पूरी तरह साकार न हो पाया हो, लेकिन उन्होंने अपनी दमदार एक्टिंग के दम पर इंडस्ट्री में एक अलग और मजबूत पहचान जरूर बनाई। 90 के दशक में ‘बॉर्डर’ और ‘ताल’ जैसी फिल्मों से उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया और दर्शकों के दिलों में जगह बनाई। अक्षय खन्ना ने हमेशा ग्लैमर से ज्यादा अपने किरदारों और कंटेंट को महत्व दिया, यही वजह है कि उनका करियर भले ही पारंपरिक सुपरस्टार जैसा न रहा हो, लेकिन उनकी एक्टिंग को हमेशा सराहा गया। उन्होंने अलग-अलग तरह के रोल्स चुनकर यह साबित किया कि वे हर किरदार में खुद को ढाल सकते हैं। हाल ही में फिल्म ‘धुरंधर’ में उनके शानदार प्रदर्शन ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि वे आज भी अभिनय के मामले में किसी से कम नहीं हैं। उनकी गहराई, स्क्रीन प्रेजेंस और किरदार में पूरी तरह डूब जाने की कला उन्हें खास बनाती है। अक्षय खन्ना उन चुनिंदा कलाकारों में शामिल हैं, जो कम दिखाई देते हैं, लेकिन जब भी पर्दे पर आते हैं, अपनी छाप छोड़ जाते हैं और साबित करते हैं कि असली खिलाड़ी वही होते हैं, जो वक्त के साथ खुद को साबित करते रहें। आज की सक्सेस स्टोरी में आइए जानते हैं अक्षय खन्ना के करियर और निजी जीवन से जुड़ी कुछ और बातें.. अक्षय खन्ना का जन्म 28 मार्च 1975 को मुंबई था। ‘हिमालय पुत्र’ से ‘ताल’ तक अक्षय का सफर अक्षय खन्ना ने 1997 में फिल्म ‘हिमालय पुत्र’ से अपने करियर की आधिकारिक शुरुआत की, जिसे उनके पिता विनोद खन्ना ने प्रोड्यूस किया था। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर खास खड़खड़ाहट नहीं पैदा कर पाई, लेकिन इस दौर में उनका नाम जुड़ा रहा उन उभरते युवा अभिनेताओं की लिस्ट में, जिन्हें पिछली पीढ़ी के स्टार्स ने अपने बच्चों के तौर पर नहीं, बल्कि अभिनय की क्षमता के आधार पर देखा। उसी साल रिलीज हुई ‘बॉर्डर’ ने एक बार फिर साबित कर दिया कि अक्षय खन्ना सिर्फ स्टार किड नहीं, बल्कि एक अलग स्टाइल और इंटेंसिटी लेकर आए अभिनेता हैं। जे.पी. दत्ता की इस मल्टीस्टारर फिल्म में उनकी डिलीवरी ने न केवल क्रिटिक्स का ध्यान खींचा, बल्कि यह फिल्म उनके करियर की एक ऑल‑टाइम ब्लॉकबस्टर बन गई। 1999 में सुभाष घई की फिल्म ‘ताल’ ने उनके लुक, स्टाइल और भावनात्मक गहराई को नई ऊंचाई दी। फिल्म में उनका रोमांटिक किरदार दर्शकों को खासा पसंद आया। यह आज भी उनकी यादगार रोमांटिक फिल्मों में शुमार है। ‘ताल’ और ‘आ अब लौट चलें’ में अक्षय खन्ना ने ऐश्वर्या राय के साथ काम किया था। फ्लॉप फिल्मों से जूझता करियर सफल शुरुआत के बावजूद 2000 के दशक की शुरुआत अक्षय खन्ना के लिए चुनौतीपूर्ण रही। ‘आ अब लौट चलें’ जैसी फिल्मों में काम करने के बावजूद वे लगातार हिट फिल्में नहीं दे पाए। उनकी कई फिल्में बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकीं, जिससे उनका करियर अस्थिर हो गया। इस दौर में उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदार निभाने की कोशिश की, लेकिन लगातार सफल फिल्मों की कमी के कारण वे टॉप स्टार्स की रेस में पीछे रह गए। गंजेपन और असफलता ने तोड़ा आत्मविश्वास अक्षय खन्ना के करियर का सबसे कठिन दौर वह भी था जब उन्हें कम उम्र में ही गंजेपन का सामना करना पड़ा। मिड-डे को दिए इंटरव्यू में अक्षय खन्ना ने कहा था। मेरे साथ ये बहुत कम उम्र में होने लगा था। उस समय मुझे ऐसा लगता था जैसे किसी पियानो बजाने वाले का हाथ कट गया हो। एक एक्टर के लिए ये वैसा ही है, क्योंकि आपकी शक्ल-सूरत बहुत मायने रखती है। जब आप इस सच्चाई को स्वीकार कर लेते हैं, तब ये आपको कम परेशान करता है। लेकिन उससे पहले जो अनुभव होता है, वो बहुत मुश्किल होता है। जैसे आप सुबह उठें, अखबार देखें और महसूस करें कि मुझे कुछ भी साफ नहीं दिख रहा, मैं इसे पढ़ नहीं पा रहा हूं। मुझे चश्मे की जरूरत है। आप सोचते हैं कि अचानक क्या हो गया, मेरी आंखें काम क्यों नहीं कर रहीं? मान लीजिए आप एक खिलाड़ी हैं, क्रिकेटर या फुटबॉलर और आपको पता चले कि आपके घुटने की सर्जरी होगी। ये दिल तोड़ने वाला होता है, क्योंकि इससे आपके करियर के एक-दो साल चले जाते हैं। मेरे लिए प्रीमैच्योर बाल्डिंग कुछ वैसा ही था। ‘दिल चाहता है’ बनीं करियर की टर्निंग पॉइंट अक्षय खन्ना की सबसे बड़ी ताकत हमेशा उनकी अभिनय क्षमता रही है। 2001 में आई फिल्म ‘दिल चाहता है’ उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुई। फिल्म में ‘सिड’ के किरदार में उनके संयमित और गहराई भरे अभिनय ने दर्शकों और समीक्षकों दोनों का दिल जीत लिया। ‘दिल चाहता है’ में अक्षय खन्ना को शुरू में आकाश का किरदार दिया गया था, लेकिन बाद में यह रोल आमिर खान को दे दिया गया। इसके अलावा अक्षय ने ‘हमराज’, ‘हंगामा’ और ‘दीवानगी’ जैसी फिल्मों में अपनी बहुमुखी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इन फिल्मों ने उन्हें एक वर्सेटाइल अभिनेता के रूप में स्थापित किया, हालांकि व्यावसायिक रूप से वे लगातार सुपरहिट फिल्मों की कतार नहीं लगा सके, और उन्हें बॉलीवुड में सुपरस्टार का दर्जा नहीं मिल पाया। इस पर खुद अक्षय खन्ना का नजरिया काफी साफ और व्यावहारिक रहा है। सुपरस्टार बनने के लिए बड़ी और कल्ट फिल्मों की जरूरत अक्षय कहते हैं- किसी कलाकार का सुपरस्टार बनना सिर्फ उसकी एक्टिंग या मेहनत पर निर्भर नहीं करता, बल्कि सही समय पर सही फिल्म मिलना बेहद जरूरी होता है। उनके मुताबिक- आपको सुपरस्टार बनाने का काम फिल्में करती हैं। जब तक आपके पास ‘गदर: एक प्रेम कथा’, ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ और ‘हम आपके हैं कौन’ जैसी बड़ी और कल्ट फिल्में नहीं होतीं, तब तक उस स्तर तक पहुंचना मुश्किल है। सुपरस्टार बनना खुद के हाथ में नहीं होता है अक्षय ने यह भी माना कि एक कलाकार के हाथ में बहुत सीमित चीजें होती हैं। वह सिर्फ अपनी
मेकअप छोड़ने वाली डेनमार्क की पीएम फ्रेडरिक्सन का इस्तीफा:देश में 100 नए एयरपोर्ट विकसित करने की योजना मंजूर; 27 मार्च करेंट अफेयर्स

जानते हैं आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं… नेशनल (NATIONAL) 1. कैबिनेट ने UDAN 2.0 को मंजूरी दी 25 मार्च को केंद्र सरकार ने मोडिफाइड रीजनल एयर कनेक्टिविटी योजना UDAN 2.0 को मंजूरी दी। INTERNATIONAL (इंटरनेशनल) 2. डेनमार्क की पीएम मेटे फ्रेडरिक्सन ने हार के बाद इस्तीफा दिया 26 मार्च को डेनमार्क की पीएम मेटे फ्रेडरिक्सन ने आम चुनाव में हार के बाद पद से इस्तीफा दे दिया। निधन (DEATH) 3. मलयाली एक्टर ई. ए. राजेंद्रन का निधन 26 मार्च को मलयाली थिएटर एक्टर ई.ए. राजेंद्रन का निधन हो गया। वे 71 साल के थे। मिसलीनियस (MISCELLANEOUS) 4. शनि ग्रह पर 11 नए चंद्रमा मिले ताइवान के एस्ट्रोनॉमर्स ने शनि ग्रह (Saturn) की परिक्रमा करते हुए 11 नए चंद्रमाओं की खोज की है। 5. इंग्लैंड चर्च की पहली महिला आर्चबिशप ऑफ कैंटरबरी बनीं साराह मुल्लाली 25 मार्च को साराह मुल्लाली ने इंग्लैंड के चर्च की पहली महिला आर्चबिशप ऑफ कैंटरबरी का पद संभाला। आज का इतिहास 27 मार्च ——————– ये खबरें भी पढ़ें… बच्चों के लिए सिर्फ 1 घंटे स्क्रीन-टाइम का नियम बनेगा:QS वर्ल्ड रैंकिंग में IIT दिल्ली 6 लिस्ट में शामिल; 26 मार्च के करेंट अफेयर्स जानते हैं आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं… पूरी खबर पढ़ें…
Bird Hospital Visit; Space Water Cloud; Odor Socks Welcome Summer

अमेरिका में बदबूदार मोजों को जलाकर गर्मियों का स्वागत किया जा रहा है। वहीं, वहीं गले का ऑपरेशन कराने के लिए एक चिड़िया खुद ही अस्पताल पहुंच गई। उधर, अंतरिक्ष में धरती से 12 लाइट-ईयर्स दूर पानी से भरा एक बादल मिला। . आज खबर हटके में जानेंगे ऐसी ही 5 रोचक खबरें…
Summer Dehydration Health Risks; Early Signs – Symptoms

47 मिनट पहलेलेखक: अदिति ओझा कॉपी लिंक गर्मियों में पसीना ज्यादा आता है। इसलिए शरीर की पानी की जरूरत बढ़ जाती है। अगर पानी की ये अतिरिक्त जरूरत पूरी न की जाए तो डिहाइड्रेशन हो सकता है। डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी। इसका सीधा प्रभाव शरीर के सभी अंगों पर पड़ता है। दरअसल, शरीर में करीब 60-70% पानी होता है। ब्रेन और हार्ट में लगभग 73%, मांसपेशियों और किडनी में करीब 79%, स्किन में 64% और फेफड़ों में लगभग 83% पानी होता है। इसलिए शरीर में पानी की कमी से गंभीर समस्या हो सकती है। इसलिए आज जरूरत की खबर में डिहाइड्रेशन की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- गर्मियों में डिहाइड्रेशन का रिस्क ज्यादा क्यों होता है? इसके शुरुआती संकेत क्या हैं? इससे बचने के लिए क्या करना चाहिए? एक्सपर्ट: डॉ. रोहित शर्मा, कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, जयपुर सवाल- डिहाइड्रेशन क्या होता है? जवाब- डिहाइड्रेशन एक ऐसी कंडीशन है, जिसमें शरीर में पानी और जरूरी फ्लूइड (तरल पदार्थ) की कमी हो जाती है। इससे शरीर सामान्य तरीके से काम नहीं कर पाता है। यह तब होता है, जब शरीर से पसीना, पेशाब, उल्टी या दस्त के जरिए ज्यादा तरल बाहर निकल जाता है। इससे शरीर में पानी का संतुलन बिगड़ जाता है और डिहाइड्रेशन की स्थिति बन जाती है। सवाल– शरीर में पानी का संतुलन (वाटर बैलेंस) रहना क्यों जरूरी है? क्या पानी की कमी लाइफ थ्रेटनिंग भी हो सकती है? जवाब- शरीर के हर अहम फंक्शन के लिए पानी बेहद जरूरी है। जैसे- पानी शरीर के तापमान को कंट्रोल में रखता है। शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मदद करता है। लार बनाता है, जो खाने और पाचन के लिए जरूरी है। हड्डियों के जोड़ों के काम में मदद करता है। शरीर के केमिकल्स के बैलेंस्ड रखता है। ब्रेन के हॉर्मोन्स और न्यूरोट्रांसमीटर्स को एक्टिव रखता है। शरीर के हर हिस्से तक ऑक्सीजन पहुंचाने में मदद करता है। ब्रेन और स्पाइनल कॉर्ड के लिए शॉक एब्जॉर्बर की तरह काम करता है। शरीर में पानी की कमी से ये सभी प्रक्रियाएं प्रभावित होने लगती हैं। गंभीर स्थिति में यह लाइफ-थ्रेटनिंग भी हो सकता है। सवाल- गर्मियों में डिहाइड्रेशन ज्यादा क्यों होता है? जवाब- गर्मियों में टेम्परेचर ज्यादा होता है। ऐसे में बॉडी टेम्परेचर मेंटेन रखने के लिए ज्यादा पसीना आता है। पसीने के साथ शरीर से पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स बाहर निकल जाते हैं। अगर समय पर पानी या जरूरी फ्लूइड्स न लिए जाएं तो डिहाइड्रेशन की स्थिति बन सकती है। सवाल- गर्मियों में ज्यादा डिहाइड्रेशन होने के मुख्य कारण क्या हैं? जवाब- इसके पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं, जैसे- तापमान का बढ़ना। ज्यादा पसीना आना। पर्याप्त पानी न पीना। धूप या गर्म वातावरण में ज्यादा समय बिताना। शारीरिक मेहनत करना। इसके अलावा बुखार, उल्टी या दस्त जैसी स्थितियों के कारण भी शरीर में पानी की कमी हो सकती है। सवाल- डिहाइड्रेशन के शुरुआती संकेत क्या होते हैं? जवाब- डिहाइड्रेशन के लक्षण उम्र के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। बच्चों, खासकर शिशुओं और छोटे बच्चों में डिहाइड्रेशन के लक्षण जल्दी दिखाई देने लगते हैं। ग्राफिक से समझते हैं- वयस्कों में डिहाइड्रेशन के लक्षण आमतौर पर शरीर में पानी की कमी बढ़ने के साथ दिखाई देते हैं, जैसे- सवाल- डिहाइड्रेशन कब जानलेवा हो सकता है? जवाब- अगर शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स इस स्तर तक कम हो जाए कि बॉडी फंक्शनिंग प्रभावित होने लगे तो यह जानलेवा हो सकता है। ऐसी कंडीशंस में किडनी फेलियर और हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। ग्राफिक से समझते हैं, यह कब जानलेवा हो सकता है- सवाल- डिहाइड्रेशन के कारण और कौन सी हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं? जवाब- अगर डिहाइड्रेशन लंबे समय तक बना रहे तो इससे शरीर में कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। ग्राफिक से समझते हैं- सवाल- किन लोगों को गर्मियों में डिहाइड्रेशन का रिस्क ज्यादा होता है? जवाब- गर्मियों में कुछ लोगों को डिहाइड्रेशन का खतरा ज्यादा होता है, जैसे- छोटे बच्चे और शिशु। बुजुर्ग। एथलीट। जो धूप में काम करते हैं। जो हैवी एक्सरसाइज करते हैं। जिन्हें बुखार, उल्टी या दस्त की समस्या है। जिन्हें कोई क्रॉनिक हेल्थ कंडीशन (डायबीटिज या किडनी की समस्या) है। जो मेडिकेशन पर हैं, खासतौर पर जो डाई-यूरेटिक दवाएं ले रहे हैं। सवाल- क्या सिर्फ धूप में रहने से ही डिहाइड्रेशन हो सकता है? जवाब- नहीं, डिहाइड्रेशन केवल धूप में रहने से ही नहीं होता है। अगर आप धूप मेें रहने के बावजूद पर्याप्त पानी पीते हैं या इक्लेक्ट्रोलाइट्स लेते हैं तो आप डिहाइड्रेशन से बच सकते हैं। इसका मतलब ये है कि डिहाइड्रेशन के लिए धूप एकमात्र फैक्टर नहीं है। इसके लिए और भी कंडीशंस जिम्मेदार हैं। सवाल- लंबे समय तक डिहाइड्रेटेड रहने से दिल और किडनी पर क्या असर पड़ता है? जवाब- लंबे समय तक शरीर में पानी की कमी रहने से ब्लड गाढ़ा हो सकता है। इसके कारण हार्ट को ब्लड पंप करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इससे हार्ट बीट्स तेज हो सकती है और ब्लड प्रेशर भी प्रभावित हो सकता है। वहीं डिहाइड्रेशन के कारण किडनी टॉक्सिन्स बाहर नहीं निकाल पाती हैं और वर्कलोड बढ़ जाता है। इसलिए लंबे समय तक डिहाइड्रेटेड रहने पर किडनी स्टोन, किडनी डैमेज या किडनी फेलियरने का रिस्क बढ़ सकता है। सवाल- क्या गर्मियों में शराब पीने से भी डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ सकता है? जवाब- हां, शराब डाई-यूरेटिक होती है। इससे शरीर में यूरिन फ्रीक्वेंसी बढ़ जाती है। इसलिए शराब पीने से डिहाइड्रेशन का रिस्क बढ़ जाता है। सवाल- डिहाइड्रेशन से बचने के लिए क्या करें? जवाब- डिहाइड्रेशन से बचने के लिए शरीर में फ्लूइड बैलेंस बनाए रखना जरूरी है। इसके लिए कुछ आसान उपाय अपनाए जा सकते हैं। ग्राफिक से समझते हैं- सवाल- एक सामान्य व्यक्ति को गर्मी के मौसम में दिन में कितना पानी पीना चाहिए? जवाब- आमतौर पर एक स्वस्थ वयस्क व्यक्ति को दिन में लगभग 2.5 से 3 लीटर पानी पीना चाहिए। हालांकि यह मात्रा मौसम, फिजिकल एक्टिविटी, उम्र और व्यक्ति की हेल्थ कंडीशन के अनुसार कम या ज्यादा हो सकती है। सवाल- क्या सिर्फ पानी पीना ही डिहाइड्रेशन से बचाव के लिए पर्याप्त है? जवाब- पानी पीना जरूरी है, लेकिन कई बार केवल पानी
कर्नाटक में पति ने बीच सड़क पत्नी का गला काटा:फिर कार से कुचला, मौके पर मौत; राहगीरों ने वीडियो बनाया

कर्नाटक में एक व्यक्ति ने बीच सड़क पत्नी की हत्या कर दी। उसने पहले पत्नी का गला काटा, फिर SUV से कुचल दिया। घटना के दो वीडियो सामने आए है। घटना कलबुर्गी जिले के बल्लूरगी गांव के पास की है। वीडियो में आरोपी पत्नी के बाल पकड़कर उसे पीटता दिख रहा है, जबकि महिला मदद के लिए चीखती नजर आती है। पुलिस के मुताबिक, अक्षय अपनी पत्नी सान्वी के साथ गुरुवार सुबह तीर्थ स्थल गनागापुरा जा रहा था। दोनों मारुति सुजुकी अर्टिगा कार में थे। सुबह करीब 11 बजे रास्ते में दोनों के बीच विवाद हुआ, जिसके बाद अक्षय ने शैला को गाड़ी से बाहर धक्का दे दिया। इसके बाद अक्षय बीच सड़क पर सान्वी का बाल पकड़कर पीटने लगा और हंसिए से गला काट दिया। फिर वह सान्वी को कार में बैठाकर खेत की तरफ ले गया। वहां पत्नी को जमीन पर लिटाकर SUV चढ़ा दी। शैला की मौके पर ही मौत हो गई। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में आरोपी के आसपास कुछ गाड़ियों और लोग दिख रहे है। जब अक्षय पत्नी का गला काट रहा था, तब वहां से एक कार भी गुजरी, जबकि एक शख्स बाइक पर खड़े होकर वारदात देख रहा था। चार साल पहले हुई थी शादी कलबुर्गी के पुलिस अधीक्षक अड्डुरु श्रीनिवासुलु के मुताबिक, दोनों की शादी चार साल पहले हुई थी। वे महाराष्ट्र के बारामती के रहने वाले थे। पुलिस ने मामला दर्ज किया है। आरोपी और उसके माता-पिता को हिसारत में लिया गया है। ————- ये खबर भी पढ़ें… बेंगलुरु में प्रोफेसर ने क्लासरूम में छात्रा को प्रपोज किया:लड़की ने चप्पल से पीटा, कॉलेज के बाहर स्टूडेंट्स ने भी घेरकर मारपीट की बेंगलुरु के एक मेडिकल कॉलेज में एक प्रोफेसर ने क्लास के दौरान ही एक छात्रा को प्रपोज कर दिया। छात्रा के विरोध के बाद विवाद बढ़ा और इसके बाद अन्य छात्रों ने कॉलेज के बाहर प्रोफेसर के साथ मारपीट कर दी। घटना का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस और कॉलेज प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है।
मेंटनेंस घोटाले को किया गया शामिल, टीवी खरीदी को छोड़ा:स्कूलों के लिए 3 साल में आई राशि की जांच करेंगे कलेक्टर

मप्र के स्कूल शिक्षा विभाग में कंप्यूटर खरीदी और मेंटनेंस के नाम पर बड़ा घोटाला हुआ है। विभागीय मंत्री ने इस मामले को लेकर नाराजगी जाहिर की है। इसके बाद आयुक्त लोक शिक्षण शिल्पा गुप्ता ने एक पत्र सभी जिलों के कलेक्टर को लिखा है कि वे बीते 3 साल में हुए कामों की जांच करके प्रतिवेदन भेजें। इसमें तीन साल के भीतर जो भी बजट आवंटित हुआ है और उसमें जो निर्माण कार्य हुए हैं, उनकी पूरी जांच करना है। हालांकि इसमें इंटरएक्टिव पैनल के मामले को शामिल नहीं किया है, जबकि इसको लेकर भी कई शिकायतें विभागीय मंत्री और अफसरों को हो चुकी हैं। जांच के लिए कोई समय सीमा तय नहीं की गई है। उधर, जिलों में इस पत्र के बाद कलेक्टरों की तरफ से जांच कमेटी बनाई जा रही है, जो कि कलेक्टरों की निगरानी में ही पूरे मामले की जांच करेगी। हालांकि इस पूरे मामले में मंत्री उदय प्रताप सिंह के निर्देश के बाद तीन अफसरों को हटाने की कार्रवाई कर दी गई है। इनमें डीएस कुशवाह संचालक लोक शिक्षण को सीमेट (राज्य शैक्षिक प्रबंधन प्रशिक्षण संस्थान) का संचालक बनाकर भेजा गया है। वहीं प्रमोद कुमार सिंह सीमेट को लोक शिक्षण में संचालक बनाया गया है। साथ ही विभाग में उप सचिव बनाया गया है। इसके अलावा पीके सिंह बघेल जो कि उप संचालक लोक शिक्षण थे को राज्य शिक्षा केंद्र में पदस्थ किया गया है। यह मामले हैं जांच की जद में मप्र में तीन साल में स्कूलों में जमकर मेंटनेंस काम हुआ है। बीते साल ही करीब 149 करोड़ रुपए स्कूलों में मेंटनेंस के लिए भेजे गए थे, लेकिन इसके लिए भोपाल की ही फर्म को काम दे दिया गया। जिला शिक्षा अधिकारी को बायपास करके बीईओ और प्राचार्य स्तर पर काम कराया गया। रीवा, मैहर और सतना जिले में बिना काम के भुगतान करने का मामला सामने आया। जांच में आरोप सही पाए गए। इसके बाद यह मामला विधानसभा में उठाया गया और मंत्री ने इसमें जांच के निर्देश दिए। IAS अफसर की निगरानी वाली कमेटी अभी होल्ड विभागीय मंत्री ने आईएएएस अफसर की निगरानी में कमेटी बनाकर जांच के आदेश दिए थे, लेकिन फिलहाल इस समिति को बनाने का मामला होल्ड हो गया है। कमाल की बात यह है कि इस पूरे मामले में वित्तीय स्वीकृति देने वाले लोक शिक्षण संचालनालय के वित्त अधिकारी राजेश मोर्य व उन फर्म से सवाल-जवाब नहीं हुए, जिनके ऊपर बिना काम किए भुगतान लेने के आरोप हैं। विभागीय अफसरों ने बताया कि कलेक्टरों की रिपोर्ट आने के बाद ही मामले में कुछ आगे होगा।
भोपाल में पराली जलाने पर रोक:एडीएम ने 3 महीने के लिए प्रतिबंध लगाया; उल्लंघन पर होगी FIR

भोपाल में पराली जलाने पर रोक लगा दी गई है। गुरुवार देर रात एडीएम सुमित कुमार पांडेय ने आदेश जारी किया। इसके मुताबिक, अगले 3 महीने तक पराली यानी, नरवाई जलाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। उल्लंघन करने पर थाने में एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। NGT (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) के आदेश का पालन करते हुए यह रोक लगाई गई है, जो पूरे भोपाल जिले में लागू रहेगी। एडीएम पांडेय ने सभी एसडीएम को पराली जलाने पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। वहीं, कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। वर्तमान में कई किसान गेहूं की कटाई में लगे हैं। इस कारण खेतों में पराली जलाने की घटनाएं बढ़ रही हैं। कई किसान फसल काटने के बाद खेतों में आग लगा देते हैं। इससे भूमि की उर्वरा शक्ति भी खत्म हो रही है। इसलिए एडीएम ने यह आदेश जारी किया है। आदेश में यह कलेक्टर के आदेश में यह… जून तक रहेगा आदेश एडीएम ने यह आदेश अगले 3 महीने यानी, जून तक लगाया है। तब भोपाल में मानसून एक्टिव हो जाता है। इससे पराली जलाने की घटनाएं नहीं होती है। एडीएम ने आदेश में लिखा कि यह एक पक्षीय पारित किया गया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से प्रभावशील होगा। इस आदेश का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति के विरुद्ध भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. जीएल सोढ़ी बने रहेंगे सिविल सर्जन:इंदौर हाईकोर्ट का फैसला, अब 65 वर्ष की आयु में होंगे रिटायर

लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में सामने आए प्रशासनिक विवाद के बीच हाईकोर्ट ने सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक डॉ. जी.एल. सोढ़ी के पक्ष में निर्णय दिया है। कोर्ट के आदेश के बाद वे अपने पद पर बने रहेंगे और अब 65 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर सेवानिवृत्त होंगे। गौरतलब है कि विभाग द्वारा डॉ. सोढ़ी को 20 वर्ष की अनिवार्य क्लीनिकल सेवा पूर्ण न करने और 62 वर्ष की आयु पूरी होने के आधार पर शासकीय सेवा से पृथक करने के निर्देश जारी किए गए थे। वरिष्ठ संयुक्त संचालक डॉ. राजू नादरिया द्वारा यह आदेश जारी कर क्षेत्रीय संचालक, इंदौर को अमल के लिए भेजा गया था। विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार डॉ. सोढ़ी की कुल क्लीनिकल सेवा लगभग 17 वर्ष 10 माह पाई गई, जबकि सिविल सर्जन पद के लिए 20 वर्ष की अनिवार्यता बताई गई थी। साथ ही उनकी जन्मतिथि 29 जून 1961 के अनुसार वे 30 जून 2023 को 62 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके थे। इसके बावजूद वे पद पर कार्यरत रहे। बाद में 18 मार्च 2026 को आदेश जारी कर उन्हें उसी तिथि से सेवानिवृत्त माना गया। प्रक्रिया पर उठे सवाल नियुक्ति और पदस्थापना के दौरान सेवा रिकॉर्ड का सत्यापन अनिवार्य होता है। इसके बावजूद सेवा अवधि की कमी और सेवानिवृत्ति आयु को लेकर समय पर कार्रवाई न होना इसे लेकर विभागीय निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठे थे। हाईकोर्ट के ताजा निर्णय के बाद डॉ. जी.एल. सोढ़ी को राहत मिली है और अब वे 65 वर्ष की आयु पूर्ण होने तक अपने पद पर बने रहेंगे।
नगरीय निकायों में अनुभवी बनेंगे एल्डरमैन:बडे़ शहरों से लेकर कस्बों के लिए फॉर्मूला तय, 18 सौ वर्कर होंगे एडजस्ट

एमपी में सवा साल बाद नगरीय निकाय के चुनाव होने हैं। अर्बन लोकल बॉडी इलेक्शन के पहले बीजेपी ने कार्यकर्ताओं को नगरीय निकायों में एल्डरमैन बनाकर एडजस्ट करने का फॉर्मुला फाइनल कर लिया है। हफ्ते भर के भीतर प्रदेश के 413 नगरीय निकायों में नियुक्त होने वाले एल्डरमैन की लिस्ट घोषित हो सकती है। मिशन ‘निकाय चुनाव’: अनुभवी नेताओं को कमान भाजपा इस बार एल्डरमैन की नियुक्तियों को केवल पद भरने के तौर पर नहीं, बल्कि निकाय चुनावों से पहले कार्यकर्ताओं को एक्टिव करने के टूल के रूप में देख रही है। फॉर्मूले के तहत उन पुराने और अनुभवी नेताओं को प्राथमिकता दी गई है, जिन्हें नगर प्रशासन का गहरा ज्ञान है। रणनीति के पीछे दो मुख्य उद्देश्य कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करना: चुनाव से पहले जिला स्तर के उन सक्रिय नेताओं को एडजेस्ट करना जो लंबे समय से नियुक्तियों का इंतजार कर रहे थे। प्रशासनिक पकड़: अनुभवी एल्डरमैन के जरिए परिषदों के कामकाज और विकास कार्यों की निगरानी को मजबूत करना चाहती है। बडे़ शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक के लिए फॉर्मुला तय भाजपा संगठन में कई दौर के मंथन के बाद यह तय हुआ है कि नगरीय निकायों में 10 लाख से अधिक आबादी वाले 12 नगरीय निकायों में 4-4 एल्डरमैन की नियुक्ति की जाएगी। 10 लाख से कम आबादी वाले 4 नगर निगमों में 8-8 एल्डरमैन की नियुक्ति होगी। नगर पालिकाओं में 6-6 और नगर परिषदों में 4-4 एल्डरमैन की नियुक्ति का फॉर्मूला तय किया गया है। इस लिहाज से 99 नगर पालिकाओं में 594 और 298 नगर परिषदों में 1192 एल्डरमैन की नियुक्तियां होंगी। वहीं 16 नगर निगमों में कुल 80 एल्डरमैन नियुक्त होंगे। 413 निकायों में 18 सौ से ज्यादा वर्कर हो सकते हैं एडजस्ट नियम और अधिकार: वोटिंग नहीं कर सकते प्रदेश के नगरीय निकायों में एल्डरमैन की नियुक्ति का मुख्य आधार प्रशासनिक अनुभव और नगर पालिका अधिनियम की जानकारी होता है। संगठन की सिफारिश पर नियुक्त होने वाले ये एल्डरमैन परिषद की बैठकों और चर्चाओं में तो सक्रिय रूप से भाग ले सकते हैं, लेकिन इनके पास मत (वोट) देने का अधिकार नहीं होता। इनका कार्यकाल परिषद के कार्यकाल के साथ ही समाप्त होता है। सरल शब्दों में कहें तो, ये परिषद के ‘मार्गदर्शक’ की भूमिका में होते हैं, ‘निर्णायक’ की नहीं।
ड्रग्स माफिया पर नकेल कसें सभी एसपी:मुख्य सचिव ने वीडियो कांफ्रेंसिंग में दिए निर्देश, कहा- पेट्रोल-डीजल का संकट नहीं

मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा है कि कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक त्यौहारों के दौरान कानून और व्यवस्था की कड़ी निगरानी करें। सभी एसपी जोनल प्लान तैयार करके 31 मार्च तक प्रस्तुत कर दें। ड्रग्स माफिया पर सख्ती के लिए नशीले पदार्थों के विरुद्ध अभियान चलाने के साथ-साथ जन जागरुकता अभियान चलाएं। एनकोर समिति की हर महीने बैठक करके कार्यवाही विवरण पोर्टल पर दर्ज कराएं। सीएस जैन ने ये बातें वीडियो कांफ्रेंसिंग से हुई कलेक्टर-कमिश्नर कांफ्रेंस में कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों से कहीं। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने प्रदेश में ड्रग्स माफियाओं के विरुद्ध सख्त कार्यवाही करने के निर्देश प्रदेश के सभी पुलिस अधीक्षकों को दिए हैं। मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश से ड्रग्स माफियाओं का नेटवर्क पूर्णतः समाप्त होना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में ड्रग्स का कारोबार करने वाले अपराधियों को चिन्हित करें और उनके विरुद्ध सख्त कार्यवाही करें। मनरेगा में जल संरक्षण के काम कराएं उन्होंने कहा कि सीएम हेल्पलाइन में सौ दिन से अधिक समय से लंबित प्रकरणों का समय सीमा में निराकरण कराएं। मुख्य सचिव ने कहा कि मनरेगा योजना से जल संरक्षण और संवर्धन के कार्य प्राथमिकता से कराएं। इसे जल गंगा अभियान में शामिल करके पोर्टल पर प्रगति दर्ज करें। मनरेगा से दो लाख 51 हजार कार्य स्वीकृत हैं। इनमें जल संरक्षण के कार्यों को प्राथमिकता देने से जल गंगा संवर्धन अभियान अधिक प्रभावी बनेगा। एकल नलजल योजनाओं का निर्माण कार्य 31 मार्च तक पूरा कराकर इन्हें ग्राम पंचायतों को समारोहपूर्वक हैण्डओवर करें। साथ ही सभी घरों में नल कनेक्शन और पानी की आपूर्ति भी सुनिश्चित कराएं। एकल नलजल योजनाओं के स्रोत तथा हैण्डपंपों में रिचार्ज पिट बनाएं। पेट्रोल डीजल का संकट नहीं, लोगों को करें जागरुक बैठक में मुख्य सचिव ने अधिकारियों को प्राकृतिक खेती, खाद के ई टोकन से शत-प्रतिशत वितरण, पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की आपूर्ति पर निगरानी के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने कहा कि पेट्रोल और डीजल की प्रदेश में पर्याप्त उपलब्धता है। इस संबंध में आमजनों को लगातार जानकारी दें। बैठक में अधिकारियों को गेंहू उपार्जन की तैयारी, स्वरोजगार योजनाओं की लक्ष्यपूर्ति, नरवाई प्रबंधन, अग्नि दुर्घटना से बचाव के उपाय, राहवीर योजना तथा प्रधानमंत्री दुर्घटना राहत योजना के संबंध में निर्देश दिए गए। मुख्य सचिव ने प्रदेश के सभी कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि वे अनुसूचित जाति जनजाति वर्ग के अत्याचार पीड़ितों और पक्षकारों को मिलने वाली राहत राशि का भुगतान समय पर कराएं। तय टारगेट से राजस्व जुटाने काम करें उन्होंने कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि नामांकन, सीमांकन और बंटवारा के प्रकरणों का समय पर निराकरण करना राजस्व अधिकारियों की जिम्मेदारी है। इस जिम्मेदारी का निर्वहन सभी राजस्व अधिकारी और कलेक्टर्स निष्ठापूर्वक करें। अविवादित नामांतरण तथा बटवारा के प्रकरण समय सीमा में निराकृत करें। सभी जिले तय लक्ष्य के अनुसार राजस्व का संग्रहण कराएं। सागर, इंदौर, भोपाल और जबलपुर जिले इस पर विशेष ध्यान दें। स्वामित्व योजना में शेष लंबित प्रकरणों का निराकरण एक माह में कराएं। नरवाई जलाने की घटनाओं पर लाएं कमी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में कृषि विभाग की समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव ने कहा कि नरवाई जलाने की घटनाओं के प्रति किसानों को जागरुक करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि नरवाई जलाने से किसानों और आम लोगों को क्या हानियां होती हैं तथा पर्यावरण पर क्या विपरीत प्रभाव पड़ता है, इसके संबंध में जागरूक किया जाए। बैठक में प्रदेश में गेहूं उपार्जन कार्य की तैयारियों की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि गेहूं उपार्जन के लिए सभी माकूल व्यवस्थाएं जाएं। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में पशुपालन विभाग, मत्स्य पालन विभाग एवं पेयजल व्यवस्था की भी समीक्षा की गई।








