MS Dhoni Invests in AI Storytelling Platform Kuku, Becomes Brand Ambassador for Kuku TV

Hindi News Business MS Dhoni Invests In AI Storytelling Platform Kuku, Becomes Brand Ambassador For Kuku TV मुंबई5 मिनट पहले कॉपी लिंक भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान एमएस धोनी ने AI-ऑपरेटेड स्टोरीटेलिंग प्लेटफॉर्म कुकू (कुकू) में निवेश किया है। इसके साथ ही वे इसके शॉर्ट-फॉर्म वीडियो और ड्रामा ऐप कुकू TV के ब्रांड एंबेसडर भी बन गए हैं। धोनी का मानना है कि यह प्लेटफॉर्म भारत के साथ-साथ ग्लोबल ऑडियंस के लिए भी एक अलग तरह का एंटरटेनमेंट एक्सपीरियंस तैयार कर रहा है। धोनी बोले- फाउंडर्स भी मेरी तरह छोटे शहरों से हैं धोनी ने कहा, ‘मैंने कुकू में निवेश करने और कुकू TV का ब्रांड एंबेसडर बनने का फैसला इसलिए किया, क्योंकि यह प्लेटफॉर्म दूसरों से अलग है। इन्होंने कई भाषाओं और फॉर्मेट्स में भारतीय दर्शकों के लिए एक बेहतरीन अनुभव तैयार किया है। प्लेटफॉर्म की ग्रोथ प्रभावित करने वाली है। सबसे बड़ी बात यह कि मैं इसके फाउंडर्स से जुड़ाव महसूस करता हूं, क्योंकि वे भी मेरी तरह छोटे शहरों से आते हैं और उन्होंने इस लेवल का बिजनेस खड़ा किया है।’ स्टोरीटेलिंग प्लेटफॉर्म के विजन पर भरोसा धोनी ने आगे कहा कि वे भारत के लिए बनाए जा रहे इस AI-ऑपरेटेड स्टोरीटेलिंग प्लेटफॉर्म के विजन पर भरोसा करते हैं। उनका मानना है कि यह तकनीक न केवल देश में बल्कि पूरी दुनिया में मनोरंजन का तरीका बदल सकती है। को-फाउंडर ने कहा- थाला का देशभर में क्रेज कुकू के को-फाउंडर और COO विनोद कुमार मीणा ने बताया कि धोनी को साथ जोड़ना उनके लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा, ‘हमारे थाला (धोनी) उन चुनिंदा हस्तियों में से हैं जिनकी पहुंच पूरे देश में है। चूंकि हम पूरे भारत के लिए कुकू बना रहे हैं, इसलिए वे हमारे लिए एकदम सही फिट हैं।’ वहीं कंपनी के CTO विकास गोयल ने कहा कि धोनी को लोगों की गहरी समझ है। जब हम क्रिएटर्स और कंज्यूमर्स के लिए AI-बेस्ड स्टोरीटेलिंग स्टैक बना रहे हैं, तब धोनी का अनुभव और नजरिया हमारे लिए काफी कीमती साबित होगा। बोल्ड फैसले लेने में धोनी और कुकू एक जैसे कुकू के को-फाउंडर और CEO लाल चंद बिसू ने कहा, ‘धोनी अपने उन बोल्ड फैसलों के लिए जाने जाते हैं, जिन्हें लेने में दूसरे लोग हिचकिचाते हैं। कुकू में हम भी इसी तरह के साहसी दांव लगा रहे हैं। धोनी की यह अनकंवेंशनल (लीक से हटकर) सोच हमारी कंपनी की वैल्यूज से मेल खाती है।’ कुकू के निवेशकों में शामिल पैंथेरा पीक कैपिटल के मैनेजिंग डायरेक्टर निखिल भंडारकर ने कहा कि कुकू के काम करने का तरीका और उनकी क्लैरिटी बिल्कुल एमएस धोनी की अप्रोच जैसी ही है। वे इस प्लेटफॉर्म को एक ग्लोबल एंटरटेनमेंट ब्रांड बनते देखना चाहते हैं। ये खबर भी पढ़ें… धोनी 2 हफ्ते IPL से बाहर रह सकते हैं: मांसपेशियों में खिंचाव, CSK ने पोस्ट में जानकारी दी एमएस धोनी IPL 2026 के शुरुआती दो हफ्ते बाहर रह सकते हैं। चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के पूर्व कप्तान इस समय मांसपेशियों में खिंचाव के कारण रिहैब से गुजर रहे हैं। CSK की ओर से एक सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि उन्हें काफ स्ट्रेन, यानी पिंडली में खिंचाव है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं… रुपया डॉलर के मुकाबले सबसे कमजोर: पहली बार 1 डॉलर ₹95.58 का हुआ; मोबाइल, सोना, तेल, विदेशी सामान खरीदना महंगा 0:50Play video Play video कॉपी लिंक शेयर इंपैक्ट फीचर: सीकर बना देश की नंबर-1 शिक्षा नगरी,प्रिंस एजुकेशन हब ने नीट, सीबीएसई बोर्ड एग्जाम्स, एनडीए, सीयूईटी, जेईई में सबसे ज्यादा टॉपर्स दिए कॉपी लिंक शेयर सेंसेक्स 1636 अंक गिरकर 71,948 पर बंद: निफ्टी भी 488 अंक टूटा, 22331 पर आया; बैंकिंग शेयर्स में बिकवाली 1:01Play video Play video कॉपी लिंक शेयर सोना ₹3 हजार बढ़कर ₹1.46 लाख पर पहुंचा: चांदी ₹6 हजार बढ़कर ₹2.28 लाख हुई, देखें अपने शहर में सोने के दाम Play video कॉपी लिंक शेयर
सलमान खान की नई फिल्म का ऐलान:साउथ के फिल्ममेकर वामशी पेडिपल्ली काम करेंगे; अप्रैल से शुरू होगी शूटिंग

बॉलीवुड एक्टर सलमान खान की नई फिल्म का ऐलान हो गया है। इस बार वे साउथ के फिल्ममेकर वामशी पेडिपल्ली और प्रोड्यूसर दिल राजू के साथ काम करेंगे। सोमवार को सलमान खान और प्रोडक्शन हाउस ‘श्री वेंकटेश्वर क्रिएशन्स’ ने सोशल मीडिया पर प्रोजेक्ट की घोषणा की। यह हाई-ऑक्टेन एक्शन ड्रामा है, जिसकी शूटिंग अप्रैल से शुरू होगी। सलमान ने वामशी पेडिपल्ली के साथ फोटो शेयर कर लिखा, ‘दिल, दिमाग, जिगर से अप्रैल से वामशी पेडिपल्ली और दिल राजू के साथ।’ फिल्म का अस्थायी नाम SVC63 है। सलमान खान की SVC63 फिल्म क्या है SVC63 बड़े बजट की एक्शन थ्रिलर है, जिसे बड़े पैमाने पर बनाया जा रहा है। इसमें हिंदी और दक्षिण भारतीय इंडस्ट्री के कलाकार शामिल होंगे। बताया गया है, ‘यह फिल्म सलमान खान को पर्दे पर एक ऐसे अवतार में पेश करेगी, जैसा उनके फैंस ने इससे पहले कभी नहीं देखा होगा। फिल्म की शूटिंग पूरे भारत में अलग-अलग लोकेशन पर होगी और 14 अप्रैल से मुंबई के सेट से शुरू होगी। साउथ के बड़े डायरेक्टर करेंगे निर्देशित फिल्म का निर्देशन वामशी पेडिपल्ली करेंगे। वे साउथ सिनेमा के ऐसे डायरेक्टर हैं जो अपनी फिल्मों में इमोशन और स्टारडम को प्रभावी ढंग से पेश करते हैं। उन्होंने प्रभास के साथ ‘मुन्ना’ से करियर शुरू किया और बाद में ‘येवादु’ व ‘महार्षि’ जैसी हिट फिल्में दीं। थलापति विजय के साथ उनकी फिल्म ‘वारिसु’ सफल रही थी। खास बात यह है कि फिल्म ‘महार्षि’ के लिए वामशी नेशनल अवॉर्ड जीत चुके हैं। 60 से ज्यादा फिल्में बना चुके हैं दिल राजू फिल्म का निर्माण दिल राजू के बैनर तले होगा। वे भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के बड़े प्रोड्यूसर हैं और 60 से ज्यादा फिल्में बना चुके हैं। उन्हें ‘महार्षि’ और ‘शतमानम भवति’ के लिए नेशनल अवॉर्ड मिल चुका है। वामशी पेडिपल्ली और दिल राजू की जोड़ी पहले 5 फिल्मों में साथ काम कर चुकी है और इनका ट्रैक रिकॉर्ड बॉक्स ऑफिस पर मजबूत रहा है।
गर्मियों में प्याज खाने के क्या फायदे हैं? किन लोगों को करना चाहिए परहेज, एक्सपर्ट की क्या है सलाह

Last Updated:March 30, 2026, 16:52 IST Health Benefits of Onion: गर्मियों में प्याज को सुपरफूड माना जाता है, क्योंकि यह शरीर को ठंडा रखने में मदद करता है. डाइटिशियन कामिनी सिन्हा के अनुसार प्याज को हीट स्ट्रोक से बचाने में भी असरदार माना जाता है. प्याज पाचन तंत्र को सुधारने और ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में भी असरदार होता है. हालांकि एसिडिटी के मरीजों को इसका सेवन कम करना चाहिए. गर्मियों में कच्चा प्याज खाने से इम्यूनिटी मजबूत हो सकती है. Onions Benefits in Summer: गर्मियों में खान-पान का विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है, ताकि सेहत ठीक बनी रहे. गर्मी के मौसम में पेट से जुड़ी समस्याएं बढ़ जाती है और ऐसे में पाचन दुरुस्त करने वाले फूड्स का सेवन करने की सलाह दी जाती है. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो गर्मियों में प्याज का सेवन करना बेहद फायदेमंद माना जाता है. आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों में प्याज को गर्मियों के लिए सुपरफूड माना गया है. प्याज खाने से गर्मियों में हीट स्ट्रोक से बचाव होता है और कई समस्याओं से बचाव होता है. गर्मी में कच्चा प्याज खाना सेहत के लिए सबसे अच्छा माना जाता है. नोएडा के डाइट मंत्रा क्लीनिक की डाइटिशियन कामिनी सिन्हा ने News18 को बताया कि गर्मियों में कच्चा प्याज खाने से हीट स्ट्रोक का बचाव हो सकता है. प्याज में मौजूद कुछ तत्व शरीर के तापमान को कंट्रोल करने में मदद करते हैं और लू से बचाते हैं. प्याज में भरपूर मात्रा में पानी और फाइबर होता है, जो शरीर को हाइड्रेटेड रखता है. प्याज पाचन तंत्र के लिए बेहद गुणकारी है. इसमें इनुलिन नामक फाइबर होता है, जो पेट में अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाता है. गर्मियों में अक्सर पाचन संबंधी समस्याएं जैसे कब्ज या अपच हो जाती है, जिसे कच्चा प्याज काफी हद तक दूर करता है. प्याज में मौजूद विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर की इम्यूनिटी को बढ़ाते हैं, जिससे मौसमी संक्रमणों का खतरा कम हो जाता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. डाइटिशियन ने बताया कि प्याज का सेवन करने से ब्लड शुगर लेवल को स्टेबल रखने में मदद मिल सकती है. इस वजह से प्याज को डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद माना जाता है. प्याज में बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने की क्षमता होती है. ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने में भी प्याज लाभकारी है. अगर आप इसका नियमित रूप से सेवन करेंगे, तो हार्ट हेल्थ बेहतर हो जाएगी और दिल से जुड़ी समस्याओं का खतरा कम हो जाएगा. गर्मियों में प्याज का अधिकतम लाभ उठाने के लिए इसे कच्चा सलाद के रूप में खाना सबसे अच्छा है. इसे नींबू और काला नमक छिड़क कर खाने से इसके पोषक तत्व शरीर में बेहतर तरीके से अवशोषित होते हैं. एक्सपर्ट ने बताया कि जिन लोगों को अक्सर एसिडिटी या सीने में जलन की समस्या रहती है, उन्हें कच्चा प्याज कम खाना चाहिए, क्योंकि यह समस्या बढ़ा सकता है. इसके अलावा जिन लोगों को प्याज से एलर्जी है या जिनका पेट बहुत ज्यादा सेंसिटिव है, उन्हें एक्सपर्ट की सलाह लेने के बाद ही इसका सेवन करना चाहिए. ज्यादा मात्रा में प्याज खाने से पेट फूलने की समस्या भी हो सकती है. डाइटिशियन यह भी सलाह देती हैं कि कटा हुआ प्याज लंबे समय तक बाहर न रखें, क्योंकि यह जल्दी बैक्टीरिया के संपर्क में आ जाता है. हमेशा ताजा कटा हुआ प्याज ही अपनी डाइट में शामिल करें. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : March 30, 2026, 16:52 IST
Sikar Becomes Indias No.1 Education Hub

Hindi News Business Sikar Becomes Indias No.1 Education Hub | Prince Education Tops NEET, JEE, CUET, NDA 49 मिनट पहले कॉपी लिंक आज राजस्थान का छोटा सा शहर सीकर देखते ही देखते देश की नम्बर 1 शिक्षा नगरी बन चुका है। आज विभिन्न राज्यों के विद्यार्थी सीकर में पढ़कर अपने सपनों को हकीकत में बदल रहे हैं। इस गौरवशाली यात्रा में सीकर के प्रिंस एजुकेशन हब का सबसे ज्यादा योगदान रहा है। अपने यूनिक शिक्षा पैटर्न एवं सर्वश्रेष्ठ शैक्षणिक माहौल के कारण प्रिंस साल दर साल विभिन्न एग्जाम्स में ऑल इंडिया टॉपर्स देता आ रहा है। सबसे ज्यादा ऑल इंडिया टॉपर्स दिये हैं प्रिंस एजुकेशन हब, सीकर ने : 1. नीट में 720 में से 720 अंक हासिल करके पीसीपी, प्रिंस के देवेश जोशी ने ऑल इंडिया फर्स्ट रैंक हासिल की है। 2. सीबीएसई बोर्ड एग्जाम्स में 500 में से 499 अंक हासिल करके प्रिंस की खुशी शेखावत ऑल इंडिया टॉपर रही है। 3. एनडीए जैसी प्रतिष्ठित डिफेंस सर्विसेज में प्रिंस की भूमिका ने ऑल इंडिया फर्स्ट रैंक (फिमेल) हासिल की है। 4. सीयूईटी में 800 में से 800 अंक हासिल कर हिमानी ऑल इंडिया टॉपर रही है। 5. प्रत्येक वर्ष आईआईटी-जेईई, नीट, एनडीए, सीयूईटी, क्लैट, सी.ए. फाउंडेशन, जेट-आईसीएआर में प्रिंस के हजारों विद्यार्थी उत्कृष्ट रैंक्स के साथ चयनित हो रहे हैं। कॉम्पिटिशन स्कूलिंग (कक्षा 6 से 10) प्रिंस का यूनिक एंड एडवांस्ड कॉम्पिटिशन स्कूलिंग पैटर्न प्रिंस एजुकेशन हब, सीकर की विभिन्न स्कूल्स प्रिंस एकेडमी सीबीएसई, प्रिंस लोटस वैली सीबीएसई, प्रिंस स्कूल्स राजस्थान बोर्ड, फ्लोरेटो वर्ल्ड स्कूल में कक्षा 6 से 10 तक के स्टूडेंट्स को स्कूल के वातावरण में ही रेगुलर एक्स्ट्रा करिकूलर एक्टिविटीज के साथ-साथ विभिन्न ओलंपियाड्स एवं कॉम्पिटिशन एग्जाम्स (IOQM, NMTC, NSEJS, IMO, IJSO, STSE आदि) की तैयारी करवायी जा रही है। जहां एक ओर अन्य कोचिंग संस्थाओं में प्री-फाउंडेशन कोचिंग से स्टूडेंट्स स्कूलिंग से दूर होते जा रहे हैं, जिसके कारण स्टूडेंट्स की पर्सनैलिटी ग्रूमिंग भी कमजोर रहती जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर प्रिंस का यह पैटर्न अभिभावकों एवं विद्यार्थियों को बेहद पसंद आ रहा है। प्रिंस के कई सैंकड़ों विद्यार्थी प्रतिवर्ष उपर्युक्त प्रतियोगी परीक्षाओं में टॉप रैंक्स के साथ सफल हो रहे हैं। 1. एसटीएसई (स्टेट टैलेंट सर्च एग्जामिनेशन) में कक्षा 10वीं एवं 12वीं दोनों में ही राजस्थान स्तर पर प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय तीनों टॉपर्स के साथ ही 278 स्टूडेंट्स का चयन (राजस्थान में सर्वाधिक)। 2. एनएमटीसी (NMTC) नेशनल मैथेमेटिक्स टैलेंट कॉन्टेस्ट में ऑल इंडिया 11वीं रैंक मोहित (Best Rank in Sikar)। 3. आईओक्यूएम, एनएसईजेएस में अनेक चयन। 4. विभिन्न ओलंपियाड्स में प्रिंस के स्टूडेंट्स को 5669 मेडल्स (राजस्थान में सर्वाधिक)। कॉम्पिटिशन स्कूलिंग (कक्षा 11 व 12): प्रिंस में कक्षा 11 वीं एवं 12वीं के साथ-साथ स्पेशलाइज्ड डेडिकेटेड कैम्पसेज एवं फैकल्टीज द्वारा IIT-JEE, NEET, NDA, CLAT, CUET, CA Foundation, JET-ICAR आदि की तैयारी करवायी जा रही है। प्रत्येक रिजल्ट में प्रिंस के स्टूडेंट अव्वल आ रहे हैं। 1. NDA SSB (नेशनल डिफेंस एकेडमी सर्विस सलेक्शन बोर्ड) प्रिंस सैनिक स्कूल, सीकर (कक्षा 6 से 12 एवं 12वीं उत्तीर्ण) से विगत एक वर्ष में प्रिंस के 60 विद्यार्थियों का डिफेंस ऑफिसर्स (फ्लाईंग ऑफिसर, लेफ्टिनेंट) के लिए चयन (राजस्थान में सर्वाधिक)। । 2. CLAT (कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट) एवं AILET (ऑल इंडिया लॉ एंट्रेंस टेस्ट) प्रिंस एकेडमी सीबीएसई स्कूल, सीकर से ऑल इंडिया टॉप रैंक्स के साथ 39 चयन (राजस्थान में सर्वाधिक)। 3. CUET (कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट) में प्रिंस एकेडमी सीबीएसई एवं प्रिंस स्कूल राजस्थान बोर्ड से 252 विद्यार्थियों का दिल्ली यूनिवर्सिटी, जेएनयू, सेंट्रल यूनिवर्सिटीज सहित देश की विभिन्न टॉप यूनिवर्सिटीज में चयन (राजस्थान में सर्वाधिक)। 4. CA Foundation (चार्टर्ड एकाउंटेंट्स फाउंडेशन) में प्रिंस एकेडमी सीबीएसई एवं प्रिंस स्कूल राजस्थान बोर्ड से 42 विद्यार्थियों का चयन (राजस्थान में सर्वाधिक)। 5. Airforce, Navy, Army (एयरफोर्स, नेवी, आर्मी) में प्रिंस डिफेंस एकेडमी से विगत तीन वर्षों में 1286 विद्यार्थियों का विभिन्न डिफेंस फोर्सेज में चयन (राजस्थान में सर्वाधिक)। IIT-JEE एवं NEET की तैयारी हेतु अभिभावकों की पहली पसंद बना PCP, प्रिंस सीकर : आईआईटी एवं नीट की तैयारी के लिए PCP, प्रिंस के सीकर शहर में पालवास रोड एवं पिपराली रोड पर तीन कैम्पसेज के साथ ही गोपालपुरा बाईपास, जयपुर में भी कैम्पस संचालित हैं। एक ही कैम्पस में कोचिंग हॉस्टल मैस डाउट काउंटर्स सैल्फ स्टडी वीडियो लाइब्रेरी आदि के कारण पीसीपी, प्रिंस का वातावरण अन्य कोचिंग संस्थाओं से एकदम अलग है। देश की नामी फैकल्टीज अब पीसीपी, प्रिंस के साथ जुड़ चुकी हैं। जेईई, नीट के हर रिजल्ट्स में पीसीपी के स्टूडेंट्स कोचिंग नगरी सीकर के टॉपर्स बनते जा रहे हैं। NEET में ऑल इंडिया फर्स्ट रैंक पीसीपी, प्रिंस से : 1. नीट में 720/720 अंकों के परफेक्ट स्कोर के साथ पीसीपी के देवेश जोशी की ऑल इंडिया फर्स्ट रैंक। नीट-2025 में टॉप 300 ऑल इंडिया रैंक में पीसीपी के 6 विद्यार्थी। 2.नीट-2025 में 854 विद्यार्थियों का हुआ चयन। 3. हर पांचवां विद्यार्थी बन रहा है डॉक्टर (Highest Selection Rate). JEE में सीकर कोचिंग्स के टॉपर पीसीपी, प्रिंस से 1. JEE (Main) 2026 में 99.9768 परसेंटाइल के साथ पीसीपी का नवदीप मान बना सीकर कोचिंग्स का टॉपर। 2. पीसीपी के 6 विद्यार्थियों ने हासिल किये 99.94+ परसेंटाइल से अधिक अंक (सीकर में सर्वाधिक)। 3. सीकर कोचिंग्स के टॉप-11 विद्यार्थियों में 6 विद्यार्थी अर्थात् 55% अकेले पीसीपी, प्रिंस से। 4. हर चौथा विद्यार्थी बन रहा है आईआईटीयन / एनआईटीयन (Highest Selection Rate). CBSE, RBSE कक्षा 10वीं, 12वीं टॉपर्स प्रिंस से : 1. सीबीएसई रिजल्ट-2025 प्रिंस की खुशी शेखावत ऑल इंडिया टॉपर। कक्षा 10वीं एवं 12वीं में प्रिंस के 29 विद्यार्थी ऑल इंडिया टॉप-10 रैंक में शामिल (राजस्थान में सर्वाधिक)। 2. राजस्थान बोर्ड रिजल्ट-2025 कक्षा 10वीं एवं 12वीं में प्रिंस के 46 विद्यार्थी टॉप-10 टॉप-15 स्टेट मेरिट में शामिल (राजस्थान में सर्वाधिक)। कॉलेज प्रथम वर्ष से ही आईएएस/आरएएस / एसएससी सीजीएल की तैयारी: प्रिंस कॉलेज, सीकर देश का एकमात्र कॉलेज है जिसमें कॉलेज प्रथम वर्ष (B.Sc., B.A., B.Com) से ही स्पेशलाइज्ड बैच बनाकर एक्सपर्ट फैकल्टीज द्वारा IAS / RAS / SSC CGL/CDS की तैयारी करवायी जा रही है। सिविल सर्विसेज में चयनित मेंटर्स द्वारा कॅरियर ओरिएंटेड सेमीनार का भी समय-समय पर आयोजन करवाया जाता है। कॉलेज प्रथम वर्ष से ही राइटिंग स्किल्स, न्यूजपेपर रीडिंग एवं पर्सनैलिटी डवलपमेंट पर विशेष फोकस किया जाता है। अब प्रिंस कॉलेज के
सिगरेट केवल पीने वालों को नहीं आसपास के लोगों को करता है प्रभावित, स्वास्थ्य, समाज, प्रकृति तीनों के लिए खतरनाक

अलीगढ़ः स्मोकिंग को आमतौर पर एक आदत माना जाता है, लेकिन इसका असर केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता. यह आदत धीरे-धीरे पूरे परिवार, आसपास के लोगों और यहां तक कि पर्यावरण को भी गंभीर नुकसान पहुंचाती है. इसके बावजूद, बहुत से लोग इसके दुष्प्रभावों से पूरी तरह अनजान हैं. ऐसे में यह समझना बेहद जरूरी हो जाता है कि स्मोकिंग किस तरह हमारे स्वास्थ्य, समाज और प्रकृति तीनों के लिए खतरनाक साबित हो रही है. सेहत के लिए होता है हानिकारक एएमयू के जियोग्राफी विभाग की प्रोफेसर सालेहा जमाल ने लोकल18 से बताया कि यह एक प्रमाणित तथ्य है कि स्मोकिंग स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक होती है. इसका असर सिर्फ स्मोक करने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसके आसपास मौजूद लोग जैसे परिवार के सदस्य, दोस्त और सार्वजनिक स्थानों पर मौजूद अन्य लोग भी इसकी चपेट में आ जाते हैं. सिगरेट के धुएं में कई जहरीली और टॉक्सिक गैसें होती हैं, जैसे बेंजीन, फॉर्मेल्डिहाइड और टॉलीन. इनमें से कई गैसें कार्सिनोजेनिक होती हैं, यानी वे कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती हैं. स्मोक करने वाला व्यक्ति इन जहरीले तत्वों को सीधे अपने शरीर में लेता है, लेकिन उसके आसपास के लोग भी पैसिव स्मोकिंग के जरिए इन्हें सांस के साथ अपने फेफड़ों तक पहुंचा लेते हैं. श्वसन तंत्र को करती है प्रभावित प्रोफेसर सालेहा बताती हैं कि स्वास्थ्य पर इसके गंभीर प्रभाव देखने को मिलते हैं. स्मोकिंग सबसे पहले श्वसन तंत्र को प्रभावित करती है, जिससे फेफड़ों से जुड़ी बीमारियां जैसे लंग फाइब्रोसिस और लंग कैंसर का खतरा बढ़ जाता है. इसके अलावा यह इम्यून सिस्टम को कमजोर करती है, ब्लड प्रेशर को प्रभावित करती है और मानसिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर डाल सकती है. कुल मिलाकर, स्मोकिंग का कोई भी सकारात्मक पहलू नहीं है, बल्कि यह हर स्तर पर नुकसान ही पहुंचाती है. पर्यावरण पर भी स्मोकिंग का बुरा असर पड़ता है. सिगरेट से निकलने वाली गैसें हवा को प्रदूषित करती हैं. वहीं, सिगरेट के बचे हुए टुकड़े (बड्स), जो सिंथेटिक प्लास्टिक फाइबर से बने होते हैं, आसानी से नष्ट नहीं होते और सालों तक पर्यावरण में बने रहते हैं. ये मिट्टी और पानी दोनों को प्रदूषित करते हैं, क्योंकि इनमें मौजूद निकोटीन और अन्य जहरीले तत्व धीरे-धीरे पर्यावरण में घुलते रहते हैं. बिना बुझे सिगरेट बनते हैं आग के कारण उन्होंने कहा कि इसके अलावा, कई बार लोग सिगरेट पीने के बाद उसे पूरी तरह बुझाए बिना फेंक देते हैं, जिससे आग लगने की घटनाएं भी सामने आती हैं. खासकर जंगलों में लगने वाली आग (फॉरेस्ट फायर) के पीछे सिगरेट एक बड़ी वजह मानी जाती है, जो बड़े पैमाने पर पर्यावरण और वन संपदा को नुकसान पहुंचाती है. बचाव के लिए सबसे जरूरी कदम है स्मोकिंग को पूरी तरह छोड़ देना. लोगों में इसके प्रति जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है, ताकि वे इसके खतरनाक परिणामों को समझ सकें. यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक स्थान पर स्मोकिंग कर रहा हो, तो उसे ऐसा करने से रोका जाना चाहिए और उसे निर्धारित स्मोकिंग ज़ोन में जाने के लिए कहा जाना चाहिए.
कटनी पीजी कॉलेज में छात्राओं को फेल करने की धमकी:अतिरिक्त फीस वसूली का विरोध किया, स्टूडेंट्स ने थाने में की शिकायत

कटनी जिले के विजयराघवगढ़ में स्थित श्री द्वारका प्रसाद आर्ट्स एंड साइंस पीजी कॉलेज (DPCT) की छात्राओं ने कॉलेज मैनेजमेंट पर ज्यादा फीस वसूलने का आरोप लगाया है। छात्राओं का कहना है कि विरोध करने पर उन्हें फेल करने की धमकी दी जा रही है। सोमवार को इस मामले में पीड़ित छात्राओं ने विजयराघवगढ़ थाने में शिकायत की है। कॉलेज की सेकंड ईयर की छात्रा भूमि पाठक ने अपनी सहेलियों खुशबू भगत, ईशू तिवारी और श्वेता के साथ मिलकर पुलिस को लिखित आवेदन दिया है। छात्राओं ने बताया कि उन्होंने साल 2024 में कॉलेज में एडमिशन लिया था, लेकिन उस वक्त स्टाफ ने फीस को लेकर कोई साफ जानकारी नहीं दी थी। आरोप है कि छात्राओं से 8 से 10 हजार रुपए तक की फीस लेकर रसीदें थमा दी गईं। अतिरिक्त फीस का दबाव शिकायत में कहा गया है कि अब कॉलेज मैनेजमेंट बिना किसी ठोस वजह या कागज के 1,000 रुपए एक्स्ट्रा मांग रहा है। जब छात्राओं ने इस फालतू खर्चे का विरोध किया, तो कॉलेज प्रशासन उन पर दबाव बनाने लगा। फेल करने की धमकी छात्राओं का आरोप है कि उन्हें डराया जा रहा है कि अगर पैसे नहीं दिए, तो परीक्षा में फेल कर दिया जाएगा और एग्जाम फॉर्म भी नहीं भरने देंगे। छात्राओं के मुताबिक, कॉलेज के इस डर की वजह से कई छात्र पहले ही यह एक्स्ट्रा पैसे जमा कर चुके हैं। अब पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। कॉलेज प्रबंधन ने नहीं दिया कोई जवाब इस मामले में कॉलेज का पक्ष जानने के लिए जब कॉलेज प्राचार्य और संचालक दोनों से ही फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने कॉल का कोई जवाब नहीं दिया। थाना प्रभारी बोले- शिकायत मिली है विजयराघवगढ़ थाना प्रभारी रितेश शर्मा ने बताया कि छात्राओं की ओर से शिकायत प्राप्त हुई है। पुलिस ने मामले को संज्ञान में ले लिया है और आरोपों की बारीकी से जांच कराई जा रही है। जांच के बाद नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाएगी। विजयराघवगढ़ एसडीएम विवेक गुप्ता ने कहा कि आपके माध्यम से जानकारी प्राप्त हुई है। अगर शिकायत प्राप्त होती है तो मामले की जांच कराई जाएगी और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
महिला के शरीर में कितने अंडे होते हैं? आजकल 30 साल में ही महिलाओं अंडों का रिजर्व क्यों कम होने लगता? न्यूट्रिशन ने बताई सच्ची बात

Last Updated:March 30, 2026, 16:37 IST Why Fertility Decline: आज से सिर्फ 2 दशक पहले तक महिलाएं 40 साल की उम्र तक आराम से कंसीव कर लेती थी. मुश्किल से ही किसी महिला को इसके लिए डॉक्टर के पास जाना पड़ता था लेकिन आजकल 30 साल के बाद तेजी से महिलाओं में फर्टिलिटी या प्रजनन क्षमता कम होने लगती है और अधिकांश महिलाओं को आईवीएफ का सहारा लेना पड़ता है. आखिर वह क्या कारण है कि 30 साल की उम्र से ही महिलाओं में फर्टिलिटी कम होने लगती है. एक महिला के जीवनकाल में कुल कितने अंडों का रिजर्व होता है. आइए इसके बारे में जानते हैं. महिलाओं में ओवेरियन रिजर्व का क्या मतलब. Why Fertility Decline: महिला का शरीर प्रकृति की कारीगरी का नायाब नमूना है. इसमें इतनी कारीगरी है कि इसे अब तक पूरी तरह से समझा नहीं जा सका है. लेकिन कुतरत में हस्तक्षेप की वजह से महिलाओं का बायलॉजिकल चक्र कमजोर पड़ने लगा है. महज 15 से 20 साल पहले तक 40 साल की उम्र तक महिलाओं को कंसीव करने में शायद ही दिक्कतों का सामना करना पड़ता था लेकिन आज 30 साल क्रॉस करते ही महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य में कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और अधिकांश महिलाओं को बच्चा पैदा करने के लिए आईवीएफ का सहारा लेना पड़ता है. आखिर ऐसा क्यों होता कि महिलाओं में अंडों का रिजर्व कम होने लगा है. महिलाओं कितने अंडों का रिजर्व होताआइए पहले ये जानते हैं कि एक महिला के शरीर में कितने अंडों का रिजर्व होता है. पहले तो यह जानकर आपको हैरानी होगी कि जन्म के बाद महिला के शरीर में एक भी नया अंडा नहीं बनता. जो भी अंडा होता है वह जन्म से पहले मां के पेट में ही बन जाता है. हेल्थलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक जब मादा भ्रुण मां के गर्भ में होता है तब दो अंडाणु बनता है. इन्हीं अंडाणु में अंडा बनता है और मादा भ्रुण एक दो महीने का होता है तभी अंडा बनना शुरू हो जाता है. गर्भ में ही महिला के शरीर में 60 लाख अंडे बन जाते हैं. इसके बाद से तेजी से इनकी संख्या घटती जाती है. जन्म के समय महिला के शरीर में 10 से 20 लाख अंडों का रिजर्व रहता है. हर दिन यह रिजर्व घटता जाता है. प्यूबर्टी यानी पहला पीरियड आते ही अंडों की संख्या घटकर 3 से 4 लाख तक रह जाती है. अब अंडों का रिजर्व एकदम सीमित हो जाता है. हर महीने पीरियड्स आने से पहले सिर्फ 1 अंडा परिपक्व होकर कंसीव के लिए तैयार होता है और इसी अंडे से अगर शुक्राणु को मिलन हो गया तो यह भ्रुण बनता है. अगर भ्रुण नहीं बना तो 28 दिनों के बाद इसका विखंडन हो जाता है और यही पीरियड्स के दौरान निकल जाता है. पीरियड शुरू होने के समय जो अंडे रिजर्व में रहता है उनमें से हर महीने करीब 1000 परिपक्व नहीं होता है और वह मर जाता है. इस तरह एक महिला के जीवन काल में 450 से 500 पीरियड्स आते हैं और हर महीने सिर्फ 1 अंडे मैच्योर होता है. लेकिन आजकल इसी रिजर्व में कमी आने लगी है. आखिर इसका क्या कारण है. क्यों घटने लगा है अंडों का रिजर्व न्यूट्रिशनिस्ट अवंती देशपांडे सोशल मीडिया पर बताती है कि कई शोध हुए हैं जिनमें कहा गया है कि कुछ साल पहले तक महिलाओं को 40 साल की उम्र तक कंसीव करने में कोई परेशानी नहीं होती थी लेकिन आजकल 30 साल होते ही महिलाओं को फर्टिलिटी संबंधी समस्याएं होने लगी है. उनका ओवेरियन रिजर्व यानी अंडों का रिजर्व कम होने लगा है. इसके वैसे तो कई कारण है लेकिन इसके लिए लाइफस्टाइल के साथ-साथ पर्यावरण भी जिम्मेदार है. उन्होंने कहा कि अब फर्टिलिटी सिर्फ उम्र पर नहीं बल्कि शरीर की कोशिकाओं की सेहत और लाइफस्टाइल पर भी निर्भर करती है. आज भारत में करीब 10–15% दंपति बांझपन की समस्या से जूझ रहे हैं और शहरों में 35 साल से कम उम्र की महिलाएं भी इलाज के लिए पहुंच रही हैं. ये कारण हैं जिम्मेदार आजकल कम उम्र से महिलाएं इंसुलिन रेजिस्टेंस का शिकार हो रही है. इसके कारण प्रीडायबिटीज हो जाता है. वहीं ओवरी की बीमारी पीसीओसी बढ़ रही हैं जिससे ओव्यूलेशन और अंडों की गुणवत्ता प्रभावित होती है. देर रात तक जागना और ज्यादा स्क्रीन देखने से मेलाटोनिन हार्मोन बिगड़ता है. मेलोटोनिन हार्मोन के कम होने से अंडों की सेहत कमजोर होती है. प्लास्टिक, प्रदूषण और हॉर्मोन को प्रभावित करने वाले केमिकल्स शरीर के सामान्य हार्मोन संतुलन को खराब करते हैं. प्रोसेस्ड खाना जैसे कि पिज्जा, बर्गर, पैकेटबंद फूड, फास्ट फूड, मोमोज, नूडल्स आदि से इंफ्लामेशन बढ़ता है. इससे भी ज्यादा परेशानी तनाव से है. तनाव से पूरे शरीर में सूजन बढ़ जाती हैं, जिससे ओवरी पर असर पड़ता है. कई महिलाएं कैरियर को प्राथमिकता देते हुए गर्भधारण में देरी करती हैं, लेकिन समय रहते अपनी सेहत (जैसे मेटाबॉलिक या थायरॉयड) की जांच नहीं करातीं. फिर क्या करना चाहिए कि कंसीव में दिक्कत न हो हर वयस्क महिला को हर साल नियमित रूप से कुछ टेस्ट कराना चाहिए. इनमें फास्टिंग इंसुलिन, HbA1c, विटामिन D, थायरॉयड और AMH, ओविरयन रिजर्व टेस्ट, लिपिड प्रोफाइल आदि की जांच प्रमुख करें. अगर किसी तरह की दिक्कत है तो तुरंत डॉक्टर से इसका इलाज कराएं. प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करें. प्लास्टिक फर्टिलिटी पर असर डाल सकता है. इसकी जगह स्टील जैसे सुरक्षित विकल्प अपनाएं. सही तरह से कंसीव करने के लिए मांसपेशियां को मजबूत बनाना जरूरी है. मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए नियमित रूप से एक्सरसाइज करना चाहिए. साथ ही पौष्टिक फूड भी जरूरी है. नियमित एक्सरसाइज से ओवरऑल हेल्थ सुधरती है. आंत की सेहत का ध्यान रखें, इससे सूजन कम होती है. वहीं हार्मोन संतुलित रहते हैं और फर्टिलिटी बेहतर होती है. इसके लिए आपको रोज हरी पत्तीदार सब्जियां, दाल, साबुत अनाज, फल, सीड्स आदि का सेवन करें. About the Author Lakshmi Narayan 18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें
गाय और भैंस को हो रहा है लाल पेशाब, इस संकेत से पशुपालक हो जाएं सावधान, एक्सपर्ट से जानें कारण और बचाव के उपाय

होमफोटोकृषि गाय और भैंस को हो रहा है लाल पेशाब, इस संकेत से पशुपालक हो जाएं सावधान Last Updated:March 30, 2026, 16:36 IST Cow and Buffaloes Health Tips: गाय-भैंसों में “लाल पेशाब” की समस्या एक गंभीर बीमारी है जो पशुपालकों के लिए कई बार भारी मुश्किल पैदा देती है. यह बीमारी पशुओं के लिए बेहद दर्दनाक और कष्टदायक होती है. इसका सीधा असर उनके दूध उत्पादन पर पड़ता है, जिससे पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. ऐसे में बोकारो के चास पेट क्लीनिक के पशु चिकित्सक डा. अनिल कुमार ने गाय में लाल पेशाब से होने वाली गंभीर बिमारियों और इनके रोकथाम को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है. डॉ अनिल कुमार के अनुसार कि गाय या भैंस में लाल पेशाब आना सामान्य स्वास्थ्य समस्या नहीं बल्कि यह कई गंभीर बीमारियों का इशारा हो सकता है. इसके मुख्य बीमारियों में बेबेसियोसिस (टिक फीवर), बेसिलरी हीमोग्लोबिन्यूरिया और सिस्टाइटिस (मूत्र मार्ग संक्रमण) हो सकता है. इसके अलावा कई बार जहरीला या दूषित चारा खाने से लाल पेशाब कि समस्या उत्पन्न हो जाती है. पहली बीमारी है बेबेसियोसिस जो किलनी टिक के कारण फैलने वाली बीमारी है. इस बीमारी को टिक फीवर भी कहा जाता है. संक्रमित पशु के संपर्क में आने या चाटने-खाने के जरिए इस बीमारी का संक्रमण तेजी से फैलता है. इस बीमारी में पशु बार-बार लाल रंग का पेशाब करता है और धीरे-धीरे पशु कमजोर होने लगता है. दूसरी बीमारी है बेसिलरी हीमोग्लोबिन्यूरिया. यह एक संक्रामक बीमारी है जो बैक्टीरिया के कारण होती है. इस बीमारी में अधिकतर पशु का लिवर प्रभावित होता है. इस कारण पशु के शरीर की लाल कोशिकाएं टूटने लगती हैं. इससे पेशाब अधिकतर लाल हो जाता है. समय पर इलाज न मिलने पर जानलेवा भी हो सकता है. Add News18 as Preferred Source on Google तीसरी बीमारी सिस्टाइटिस यानी यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (यूटीआई) है. यह बीमारी भी लाल पेशाब का एक कारण है, जिसमें पशु को पेशाब करते समय दर्द, बार-बार पेशाब आना और बेचैनी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. इन बीमारियों में आमतौर पर तेज बुखार, भूख में कमी, कमजोरी, बार-बार पेशाब आना और दूध उत्पादन में गिरावट जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं. ऐसे में इन लक्षण के मिलते ही तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए. इस समस्या से बचाव के लिए सबसे पहले गौशाला परजीवी कीटनाशक छिड़काव करना जरूरी है. समय-समय पर पशुओं के शरीर पर भी बाहरी परजीवियों से बचाव के लिए निरंतर दवाओं का उपयोग कर छिड़काव करना जरूरी है. इसके अलावा पशु को चराते समय दूषित चारा या जहरीला घास और पौधा खाने से बचाएं. अपने पशु को हमेशा पोषण युक्त खाना खिलाएं क्योंकि लाल पेशाब से जुड़ी बीमारी में पशु को ठीक होने में दो से तीन दिन का समय लगता है. उसके बाद पशु सामान्य रूप से दूध उत्पादन करता है. First Published : March 30, 2026, 16:36 IST
ट्रैक्टर ने बाइक को टक्कर मारी, युवक की मौत:दतिया-भांडेर रोड पर हादसा; माता-पिता घायल, लुहार वाली माता के दर्शन को जा रहे थे

दतिया में भांडेर थाना क्षेत्र में सोमवार दोपहर एक सड़क हादसे में 18 वर्षीय युवक की मौत हो गई।जबकि उसके माता-पिता गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा दतिया-भांडेर रोड पर उस समय हुआ, जब एक तेज रफ्तार ट्रैक्टर ने बाइक को टक्कर मार दी। मृतक की पहचान संदीप अहिरवार (20) के रूप में हुई है। घायल पिता राकेश अहिरवार और मां भारती अहिरवार हैं। जो मूल रूप से शिवपुरी जिले के राजपुरदयाल गांव के निवासी हैं और वर्तमान में दतिया की सिद्धार्थ कॉलोनी में रह रहे हैं। जानकारी के अनुसार, पूरा परिवार बाइक से भांडेर स्थित लुहार वाली माता के दर्शन करने जा रहा था। इसी दौरान रास्ते में ट्रैक्टर और बाइक की आमने-सामने भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी तेज थी कि तीनों सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को जिला अस्पताल पहुंचाया गया।जहां डॉक्टरों ने संदीप को मृत घोषित कर दिया। वहीं पिता राकेश की हालत गंभीर होने पर उन्हें ग्वालियर रेफर किया गया है, जबकि मां भारती का इलाज जिला अस्पताल में जारी है। पुलिस ने मामला दर्ज कर दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक तौर पर तेज रफ्तार और लापरवाही को हादसे की वजह माना जा रहा है।
50 साल बाद नासा का चंद्र मिशन:आर्टेमिस-2 मिशन की पहली महिला होंगी क्रिस्टीना; टीम में 4 अंतरिक्ष यात्री

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का आर्टेमिस-2 मिशन चांद की ओर 50 साल बाद पहली मानव यात्रा की तैयारी के अंतिम चरण में पहुंच गया है। चार अंतरिक्ष यात्री फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर पहुंच चुके हैं, जहां से उनका लगभग 10 दिन का मिशन लॉन्च होगा। यह मिशन चांद के चारों ओर उड़ान भरकर पृथ्वी पर लौटेगा और ओरियन यान की क्षमता का परीक्षण करेगा। बता दें कि आर्टेमिस-2 मिशन की लॉन्चिंग 1 अप्रैल के आसपास निर्धारित है, हालांकि अंतिम तारीख तकनीकी तैयारियों पर निर्भर करेगी। रीड वाइजमैन (कमांडर) – 50 वर्षीय पूर्व नेवी पायलट, 165 दिन अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर बिता चुके हैं। दो बेटियों के पिता वाइजमैन इस मिशन का नेतृत्व कर रहे हैं। विक्टर ग्लोवर (पायलट) – 49 वर्षीय ग्लोवर पहले ब्लैक अंतरिक्ष यात्री होंगे जो चांद के पास जाएंगे। नेवी के अनुभवी पायलट हैं। क्रिस्टीना कोच (मिशन विशेषज्ञ) – 47 वर्षीय इंजीनियर, 328 दिन अंतरिक्ष में रहने का रिकॉर्ड। चांद के पास जाने वाली पहली महिला होंगी। जेरमी हैनसेन (कनाडा) – 50 वर्षीय फाइटर पायलट, पहली बार अंतरिक्ष यात्रा करेंगे और चांद के लिए जाने वाले पहले गैर-अमेरिकी होंगे।








