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Cambridge Study Shows 2°C Temperature Rise, Impacting 340 Million People

Cambridge Study Shows 2°C Temperature Rise, Impacting 340 Million People

Hindi News Business AI Data Centres Creating ‘Data Heat Island Effect’: Cambridge Study Shows 2°C Temperature Rise, Impacting 340 Million People नई दिल्ली44 मिनट पहले कॉपी लिंक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के डेटा सेंटर्स से तापमान बढ़ा रहा है। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की रिसर्च में कहा गया कि जहां ये डेटा सेंटर्स काम कर रहे हैं, वहां औसतन 2 डिग्री सेल्सियस तक तापमान बढ़ गया है। वैज्ञानिकों ने इसे ‘डेटा हीट आइलैंड इफेक्ट’ नाम दिया है। डेटा सेंटर्स के 10 किलोमीटर दायरे में गर्मी बढ़ी रिसर्चर्स ने पिछले दो दशकों के सैटेलाइट डेटा का एनालिसिस किया। पता चला कि जैसे ही किसी इलाके में AI डेटा सेंटर ऑपरेशनल होता है, वहां का तापमान अचानक बढ़ जाता है। डेटा सेंटर के पास तापमान औसतन 2.07 डिग्री सेल्सियस बढ़ा है। कुछ लोकेशन पर बढ़ा हुआ तापमान 9.1 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया गया। असर सिर्फ डेटा सेंटर की बाउंड्री तक नहीं है। सेंटर से 10 किलोमीटर के दायरे तक तापमान में बढ़ोतरी देखी जा रही है। AI सर्विस देने के लिए भारी मात्रा में बिजली और कंप्यूटिंग पावर की जरूरत होती है। रिसर्च की 4 बड़ी बातें… 1. डेटा हीट आइलैंड इफेक्ट अब तक अर्बन हीट आइलैंड का कॉन्सेप्ट सामने आया था, जहां कंक्रीट के जंगलों और बढ़ती आबादी की वजह से शहरों का तापमान गांवों के मुकाबले 4-6 डिग्री ज्यादा रहता है। अब AI इंफ्रास्ट्रक्चर भी इसी लीग में शामिल हो गया है। AI सर्विस देने के लिए भारी मात्रा में बिजली और कंप्यूटिंग पावर की जरूरत होती है, जिससे निकलने वाली गर्मी सीधे तौर पर स्थानीय वातावरण को प्रभावित कर रही है। 2. 34 करोड़ लोगों की सेहत पर असर स्टडी के अनुसार दुनिया भर में करीब 34.4 करोड़ लोग ऐसे इलाकों में रह रहे हैं, जो इन डेटा सेंटर्स की गर्मी की चपेट में हैं। कई डेटा सेंटर्स शहरों से दूर बनाए गए हैं, फिर भी इनका असर बड़े स्तर पर हो रहा है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इससे न केवल लोगों की सेहत पर असर पड़ेगा, बल्कि घरों को ठंडा रखने के लिए बिजली की खपत और खर्च भी बढ़ जाएगा। 3. स्पेन, मेक्सिको और ब्राजील में स्टडी रिसर्चर्स ने स्पेन के अरागोन, मेक्सिको के बाहियो और ब्राजील के उत्तर-पूर्वी इलाकों में केस स्टडी की। यहां डेटा सेंटर्स के क्लस्टर (समूह) हैं। यहां के तापमान में असामान्य बढ़ोतरी देखी गई है। गर्मी के साथ कार्बन एमिशन भी तेजी से बढ़ा है। 4. आने वाला खतरा- बिजली की भारी खपत रिसर्चर्स के मुताबिक, अगले एक दशक में डेटा सेंटर सेक्टर दुनिया के सबसे ज्यादा बिजली खपत करने वाले सेक्टरों में से एक बन जाएगा। इनकी कंप्यूटिंग के लिए लगने वाली बिजली जल्द ही मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के बजट को भी पीछे छोड़ देगी। चिंता की बात यह है कि अधिकांश AI इंफ्रास्ट्रक्चर जीवाश्म ईंधन से चलने वाली बिजली पर निर्भर है, जिससे गर्मी और प्रदूषण दोनों बढ़ रहे हैं। क्या होता है AI डेटा सेंटर? पावरफुल इंजन: सामान्य डेटा सेंटर से 10 गुना ज्यादा ताकतवर, AI का दिमाग यहीं चलता है। स्पेशल चिप्स: सामान्य चिप नहीं, GPU लगते हैं जो बेहद तेज कैलकुलेशन करते हैं। भारी बिजली खपत: एक AI डेटा सेंटर छोटे शहर जितनी बिजली खींचता है। लिक्विड कूलिंग: गर्म मशीनों को ठंडा रखने के लिए पानी या खास लिक्विड इस्तेमाल होता है। सुपरफास्ट डेटा: पलक झपकते ही पूरी लाइब्रेरी जितना डेटा प्रोसेस। 24×7 काम: साल के 365 दिन लगातार, ताकि AI एप्स हमेशा चालू रहें। ये खबर भी पढ़ें… भारत समेत दुनियाभर में इंटरनेट ठप होने का खतरा: जंग से होर्मुज में बिछीं केबल्स को नुकसान की आशंका; समुद्र में 97% ग्लोबल डेटा अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग के चलते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज प्रभावित होने से दुनियाभर में एनर्जी क्राइसिस के बाद अब इंटरनेट ठप होने का खतरा है। इसकी वजह यह है कि होर्मुज रूट से न केवल दुनिया का 20% कच्चा तेल और 25% LNG गुजरती है, बल्कि इस रास्ते के नीचे इंटरनेट केबल्स भी बिछीं हैं। अगर इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है या केबल्स को नुकसान पहुंचता है, तो भारत समेत पूरी दुनिया में इंटरनेट की स्पीड स्लो हो सकती है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह इलाका सिर्फ एनर्जी चोकपॉइंट नहीं, बल्कि एक डिजिटल चोकपॉइंट भी है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

गर्मियों में शुगर-बीपी रखना है कंट्रोल तो इस कड़वी सब्जी को जरूर खाएं, शरीर को मिलेगी ठंडक, जानें और भी फायदे

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गर्मी का मौसम आते ही शरीर में कई तरह की दिक्कतें बढ़ने लगती हैं, जैसे पाचन खराब होना, ब्लड शुगर का बढ़ना, कमजोरी और थकान महसूस होना. तेज धूप और बढ़ता तापमान शरीर की ऊर्जा को जल्दी खत्म कर देता है, जिससे लोग सुस्ती और बेचैनी का सामना करते हैं. ऐसे में खानपान पर खास ध्यान देना जरूरी हो जाता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, इस मौसम में कुछ ऐसी प्राकृतिक चीजें हैं जिन्हें डाइट में शामिल करके आप खुद को कई बीमारियों से बचा सकते हैं, और उन्हीं में से एक है करेला. करेला भले ही स्वाद में कड़वा लगता हो, लेकिन इसके फायदे इसे एक सुपरफूड बना देते हैं. आयुर्वेद और आधुनिक पोषण विज्ञान दोनों ही करेले को बेहद गुणकारी मानते हैं. Ministry of AYUSH के अनुसार, करेला कई जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर होता है, जैसे विटामिन ए, बी और सी, बीटा कैरोटीन, आयरन, जिंक, पोटैशियम, मैग्नीशियम और मैंगनीज. ये सभी तत्व शरीर को अंदर से मजबूत बनाते हैं और गर्मियों में होने वाली परेशानियों को कम करने में मदद करते हैं. गर्मियों में करेले के क्या फायदे हो सकते हैं?गर्मियों में करेले का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह शरीर को ठंडक देता है. इसकी तासीर ठंडी होती है, जिससे शरीर की अतिरिक्त गर्मी कम होती है और हीट से जुड़ी समस्याओं से राहत मिलती है. साथ ही यह शरीर को डिहाइड्रेशन से भी बचाने में मदद करता है. करेला शरीर में पानी के संतुलन को बनाए रखने में सहायक होता है, जिससे आप लंबे समय तक एक्टिव महसूस करते हैं. ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में भी करेला बेहद असरदार माना जाता है. इसमें मौजूद खास तत्व, जैसे चारेंटिन और पॉलीपेप्टाइड-पी, ब्लड ग्लूकोज लेवल को संतुलित रखने में मदद करते हैं. खासकर गर्मियों में जब खानपान गड़बड़ हो जाता है और शुगर लेवल बढ़ने का खतरा ज्यादा होता है, तब करेले का जूस या सब्जी नियमित रूप से लेना फायदेमंद साबित हो सकता है. करेले के जबरदस्त फायदेपाचन तंत्र को मजबूत बनाने में भी करेला अहम भूमिका निभाता है. गर्मियों में अक्सर अपच, गैस, कब्ज और पेट दर्द जैसी समस्याएं हो जाती हैं. करेला इन समस्याओं को दूर करने में मदद करता है. यह लिवर को डिटॉक्स करता है और पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है. करेले का जूस पेट साफ रखने में मदद करता है और पेट से जुड़ी कई परेशानियों से राहत दिलाता है. इसके अलावा, करेला इम्यून सिस्टम को मजबूत करने में भी मदद करता है. इसमें मौजूद विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं, जिससे आप संक्रमण और मौसमी बीमारियों से बचे रहते हैं. साथ ही यह खून को साफ करने और मेटाबॉलिज्म को तेज करने में भी सहायक होता है, जिससे वजन कंट्रोल में रहता है. कैसे करना चाहिए करेले का सेवन?करेले का सेवन करने के कई तरीके हैं. आप सुबह खाली पेट इसका जूस पी सकते हैं, जो सबसे ज्यादा फायदेमंद माना जाता है. इसके अलावा इसकी सब्जी बनाकर या हल्का भूनकर भी खाया जा सकता है. हालांकि, जिन लोगों को किसी तरह की एलर्जी या पहले से कोई गंभीर बीमारी है, उन्हें इसका सेवन शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए.

health benefits of mulberry in summer | sahtoot Khane Ke Fayde | शहतूत के फायदे और औषधीय गुण | शहतूत खाने का सही तरीका |

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Last Updated:March 31, 2026, 18:57 IST Sahtoot Khane Ke Fayde: गर्मियों में सिर्फ 2-3 महीने के लिए मिलने वाला छोटा सा शहतूत सेहत के लिए बड़े कमाल का है. बाजारों में इन दिनों इस खट्टे-मीठे फल की धूम है, जो न सिर्फ स्वाद में लाजवाब है बल्कि आंखों की रोशनी बढ़ाने से लेकर दिल की सेहत दुरुस्त रखने तक का पावर हाउस है. वैद्य जमुना प्रसाद यादव के अनुसार, शहतूत का सेवन खून की कमी दूर करने और चमकती त्वचा पाने का सबसे सस्ता प्राकृतिक नुस्खा है. लेकिन इसे खाते समय कौन सी एक बड़ी सावधानी बरतनी चाहिए, जिससे पेट की खराबी से बचा जा सके. आइए जानते हैं शहतूत के बेमिसाल फायदे और इसके इस्तेमाल का सही तरीका. गर्मी के मौसम की शुरुआत होते ही बाजारों में एक खास फल नजर आने लगता है, जिसे शहतूत कहा जाता है. यह फल साल भर उपलब्ध नहीं रहता, बल्कि केवल 2 से 3 महीने के लिए ही मिलता है. स्वाद में मीठा और हल्का खट्टा शहतूत न सिर्फ खाने में स्वादिष्ट होता है, बल्कि सेहत के लिए भी बहुत लाभकारी माना जाता है. यही वजह है कि लोग इसके मौसम का बेसब्री से इंतजार करते हैं. लोकल 18 से बातचीत के दौरान वैद्य जमुना प्रसाद यादव बताते हैं कि शहतूत शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी को मजबूत करता है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर को कई बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं. बदलते मौसम में जब लोग जल्दी बीमार पड़ते हैं, तब शहतूत का सेवन शरीर को मजबूत बनाता है और संक्रमण से बचाता है. गर्मी के मौसम में शहतूत का एक बड़ा फायदा यह है कि यह शरीर को ठंडक पहुंचाता है. तेज धूप और गर्मी में अक्सर शरीर में पानी की कमी हो जाती है, जिससे थकान और कमजोरी महसूस होती है. ऐसे में शहतूत खाने से शरीर को ताजगी मिलती है और ऊर्जा बनी रहती है. Add News18 as Preferred Source on Google पेट की समस्या में भी फायदेमंद, पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में भी शहतूत काफी मददगार होता है. इसमें फाइबर अच्छी मात्रा में होता है, जो पेट को साफ रखने में सहायक होता है. जिन लोगों को कब्ज या अपच की समस्या रहती है, उनके लिए शहतूत बहुत लाभकारी साबित हो सकता है. नियमित रूप से इसका सेवन करने से पाचन क्रिया मजबूत होती है. शहतूत खून के लिए भी बहुत अच्छा माना जाता है. इसमें आयरन की मात्रा पाई जाती है, जो शरीर में खून की कमी यानी एनीमिया को दूर करने में मदद करता है. खासकर महिलाओं को अक्सर खून की कमी की समस्या होती है, ऐसे में शहतूत उनके लिए एक अच्छा प्राकृतिक उपाय हो सकता है. त्वचा के लिए फायदेमंद : त्वचा की देखभाल के लिए भी शहतूत बेहद उपयोगी है. इसमें मौजूद विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाते हैं. नियमित रूप से शहतूत खाने से त्वचा में निखार आता है और झुर्रियों की समस्या भी कम होती है. यह त्वचा को अंदर से पोषण देता है. आंखों के लिए लाभकारी: शहतूत आंखों के लिए भी फायदेमंद होता है. इसमें मौजूद पोषक तत्व आंखों की रोशनी बढ़ाने में मदद करते हैं और आंखों को स्वस्थ रखते हैं. आजकल मोबाइल और कंप्यूटर के ज्यादा इस्तेमाल से आंखों पर असर पड़ता है, ऐसे में शहतूत का सेवन लाभकारी हो सकता है. दिल के लिए फायदेमंद: दिल की सेहत के लिए भी शहतूत अच्छा माना जाता है. यह शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में सहायक होता है. इससे दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम हो सकता है. जमुना प्रसाद यादव बताते हैं कि शहतूत के कई फायदे हैं लेकिन इसे सीमित मात्रा में ही खाना चाहिए. ज्यादा मात्रा में सेवन करने से पेट में गड़बड़ी हो सकती है. इसलिए संतुलित मात्रा में इसका सेवन करना ही बेहतर होता है. यदि आप किसी गंभीर बीमारी से परेशान हो तो अपने डॉक्टर के सलाह बिना शहतूत का प्रयोग ना करें. First Published : March 31, 2026, 18:40 IST

Health Tips: डायबिटीज से बचना है तो आज से ही शुरू कर दें ये काम, वरना बाद में पछताएंगे!

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Last Updated:March 31, 2026, 18:39 IST Health tips: डायबिटीज यानी मधुमेह की बीमारी तेजी से लोगों में बढ़ रही है. जिसका मुख्य कारण खान-पान, तनाव, दिनचर्या सहित शारीरिक निष्क्रियता प्रमुख कारण माने जा रहे हैं. पहले यह बीमारी बुजुर्गों में देखी जाती थी लेकिन अब युवाओं और बच्चों में भी इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. ख़बरें फटाफट Health Tips: डायबिटीज यानी मधुमेह की बीमारी तेजी से लोगों में बढ़ रही है. इसके पीछे खान-पान, तनाव, दिनचर्या और शारीरिक निष्क्रियता जैसे कारण प्रमुख माने जाते हैं. पहले यह बीमारी ज्यादा उम्र के लोगों में देखी जाती थी, लेकिन अब युवाओं और बच्चों में भी इसके मामले तेजी से सामने आ रहे हैं. डॉक्टरों का मानना है कि मधुमेह को नियंत्रित रखने के लिए स्वस्थ जीवनशैली, नियमित जांच और जागरूकता बेहद जरूरी है. बदलती लाइफस्टाइल बन रही बड़ी वजहडॉक्टर रूप सिंह के अनुसार भारत में बढ़ता स्क्रीन टाइम, कम होती आउटडोर एक्टिविटी और नींद का डिस्टर्ब होना डायबिटीज के मामलों को बढ़ा रहा है. उन्होंने बताया कि समय पर भोजन करना, तले-भुने और मीठे पदार्थों से दूरी रखना और पर्याप्त नींद लेना इस बीमारी से बचाव के प्रभावी तरीके हैं. साथ ही, अगर लोग मोबाइल स्क्रीन पर कम समय बिताएं और आउटडोर गेम्स पर ध्यान दें, तो तनाव कम होगा और इससे डायबिटीज का खतरा भी घटेगा. दिनचर्या में बदलाव से मिलेगा फायदामधुमेह से बचाव के लिए डॉक्टरों का कहना है कि लोगों को अपनी दिनचर्या में आउटडोर एक्टिविटी बढ़ानी चाहिए और स्क्रीन टाइम कम करना चाहिए. भोजन में मोटे अनाज, हरी सब्जियां और कम वसा वाला आहार शामिल करना चाहिए. ज्यादा से ज्यादा पानी पीना भी जरूरी है. धूम्रपान और शराब से दूरी बनाकर रखना इस बीमारी से बचाव के लिए अहम कदम है. मौसम के अनुसार सलाद का सेवन करना और पूरी नींद लेना भी जरूरी बताया गया है. फास्ट फूड से दूरी और एक्सरसाइज जरूरीडॉक्टर ने यह भी सलाह दी कि फास्ट फूड का अधिक सेवन शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है, खासकर बच्चों के लिए. शरीर को स्वस्थ रखने के लिए रोजाना कुछ समय व्यायाम के लिए देना जरूरी है. इसमें पैदल चलना, साइकिल चलाना, दौड़ लगाना और अन्य शारीरिक गतिविधियां शामिल हैं. दिनभर में ज्यादा से ज्यादा कदम चलना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है. इसके साथ ही तनाव को कम रखना भी जरूरी है, क्योंकि तनाव बढ़ने से शुगर लेवल पर असर पड़ता है. About the Author Anand Pandey नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें Location : Alwar,Alwar,Rajasthan First Published : March 31, 2026, 18:39 IST

मोनालिसा के को-एक्टर बोले- डायरेक्टर सनोज मिश्रा को फंसाया गया:कहा- एक्ट्रेस छेड़छाड़ के आरोप झूठे, सेट पर मस्ती करने वाली मोनालिसा पीड़ित कैसे

मोनालिसा के को-एक्टर बोले- डायरेक्टर सनोज मिश्रा को फंसाया गया:कहा- एक्ट्रेस छेड़छाड़ के आरोप झूठे, सेट पर मस्ती करने वाली मोनालिसा पीड़ित कैसे

एक्ट्रेस मोनालिसा भोंसले और फरमान खान की शादी का मामला अब कानूनी लड़ाई के साथ-साथ आपसी बयानों में उलझ गया है। मोनालिसा ने जहां अपने डायरेक्टर सनोज मिश्रा पर छेड़छाड़ के गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं उनके को-एक्टर मुकेश पाल ने एक्ट्रेस के दावों को झूठा बताया है। मुकेश का कहना है कि मोनालिसा ने लव जिहाद के एंगल को छुपाने के लिए डायरेक्टर को बदनाम करने की साजिश रची है। मुकेश फिल्म ‘द डायरी ऑफ मणिपुर’ में मोनालिसा के साथ काम कर चुके हैं। ‘सेट पर मस्ती करने वाली एक्ट्रेस पीड़ित कैसे?’ मुकेश ने एक यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में अपना गुस्सा जाहिर किया। मुकेश ने कहा, “अगर मोनालिसा के साथ कुछ गलत हो रहा था, तो वह सेट पर इतनी खुश कैसे थीं? उन्होंने मेरे साथ रील्स बनाईं, टीम के साथ डांस किया और जमकर पार्टियां कीं। अगर कोई महिला छेड़छाड़ का शिकार होती है, तो उसके चेहरे पर वो दर्द दिखता है, लेकिन मोनालिसा तो पूरी मौज-मस्ती में थीं।” मुकेश ने डायरेक्टर सनोज मिश्रा को पूरी तरह निर्दोष बताया है। फरमान पर लगाया ‘जिहादी’ होने का आरोप मुकेश ने मोनालिसा के पति फरमान खान पर भी तीखे हमले किए। उन्होंने दावा किया कि फरमान पहले एक ‘बाबा’ का भेष बनाकर हिंदू बनकर लोगों से मिलता था। मुकेश ने कहा, “फरमान एक जिहादी है। मोनालिसा उसके साथ मिलकर हम सबको बदनाम कर रही है। जिस इंसान के पास कुछ नहीं था, उसके पास केरल में इतनी बड़ी शादी और पार्टियों के लिए फंडिंग कहां से आ रही है? इसकी पूरी जांच होनी चाहिए।” मुकेश ने अंदेशा जताया कि इस शादी के पीछे कोई बड़ी साजिश और विदेशी पैसा हो सकता है। उम्र और दस्तावेजों पर उठाए सवाल एक्टर मुकेश ने मोनालिसा की उम्र को लेकर भी चौंकाने वाला दावा किया है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, “साल 2025 में मोनालिसा 16 साल की थीं, फिर एक ही साल में वह 18 की कैसे हो गईं? जब किसी के पीछे कोई ताकत होती है, तो इंसान फर्जी डॉक्यूमेंट्स भी बनवा लेता है।” विवाद की वजह से बंद हुई फिल्म इस पूरे विवाद का सबसे बुरा असर उनकी फिल्म ‘द डायरी ऑफ मणिपुर’ पर पड़ा है। डायरेक्टर और लीड एक्ट्रेस के बीच चल रही इस कानूनी जंग की वजह से फिल्म का काम पूरी तरह रुक गया है और इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। काम बंद होने से काफी नुकसान की बात कही जा रही है। केरल से शुरू हुआ विवाद यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब मोनालिसा ने अपने परिवार की मर्जी के खिलाफ जाकर केरल में फरमान खान से शादी कर ली। इसके बाद डायरेक्टर सनोज मिश्रा ने इसे लव जिहाद बताते हुए शिकायत दर्ज कराई। जवाब में मोनालिसा ने वीडियो जारी कर रोते हुए सनोज मिश्रा पर छेड़छाड़ के आरोप लगाए और सुरक्षा की गुहार लगाई। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और दोनों पक्षों की ओर से आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।

Mumbai Vasai Child Assault: Iron Rod Attack After Father Dispute

Mumbai Vasai Child Assault: Iron Rod Attack After Father Dispute

Hindi News National Mumbai Vasai Child Assault: Iron Rod Attack After Father Dispute | VIDEO मुंबई2 घंटे पहले कॉपी लिंक महाराष्ट्र के मुंबई से सटे वसई इलाके में एक व्यक्ति ने पिता से मामूली विवाद का गुस्सा उसके 4 साल के बच्चे पर उतार दिया। आरोपी ने बच्चे को ऑटो-रिक्शा से बाहर खींचकर सड़क पर पटक दिया और उसका सिर लोहे की रॉड पर भी मारा। पुलिस के मुताबिक यह घटना वसई की एक हाउसिंग सोसायटी में हुई। पूरी घटना सोसायटी में लगे CCTV कैमरे में रिकॉर्ड हो गई, जिसका वीडियो मंगलवार को सामने आया है। बताया जा रहा है कि कुछ समय पहले उसका बच्चे के पिता से किसी मामूली बात को लेकर विवाद हुआ था। इसी के बाद आरोपी ने बदला लेने की नीयत से यह कदम उठाया। 3 तस्वीरों में देखें पूरी घटना… आरोपी बच्चे को लेने के लिए ऑटो के पास पहुंचा। आरोपी ने बच्चे का पैर पकड़कर सिर को जमीन पर मारा। आरोपी फिर बच्चे को लेकर भागा। पूरे घटनाक्रम को समझें CCTV फुटेज में दिखाई दे रहा है कि 4 साल का विग्नेश (पीली टी-शर्ट में) सोसायटी परिसर में खड़े एक ऑटो-रिक्शा में अन्य बच्चों के साथ खेल रहा था। इसी दौरान आरोपी संदीप पवार वहां पहुंचा। आरोपी ने अचानक बच्चे को उसके पैरों से पकड़कर ऑटो से बाहर खींच लिया। इसके बाद उसने मासूम को जोर से सड़क पर पटक दिया। आरोपी ने बच्चे का सिर पास में मौजूद लोहे की रॉड पर दे मारा और फिर दोबारा जमीन पर फेंक दिया। घटना के तुरंत बाद गंभीर रूप से घायल बच्चे को मीरा रोड स्थित एक अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे ICU में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों के अनुसार बच्चे की हालत फिलहाल गंभीर बनी हुई है और उसका इलाज जारी है। पुलिस ने आरोपी संदीप पवार को गिरफ्तार कर केस दर्ज कर लिया है। घटना के बाद सोसायटी के लोगों में भारी आक्रोश है। स्थानीय निवासियों ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जताई है और दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। —————————————- ये खबर भी पढ़ें… मराठी नहीं बोलने पर मां ने बेटी का गला घोंटा, मुंबई में 6 साल की बेटी की हत्या करने वाली महिला बेटा चाहती थी महाराष्ट्र के नवी मुंबई के कलांबोली की एक महिला ने अपनी 6 साल की बच्ची की हत्या कर दी। पुलिस के मुताबिक महिला एक बेटा चाहती थी और बच्ची के मराठी जगह हिंदी बोलने पर नाराज थी। आरोपी ने हत्या को छिपाने के लिए बच्ची की मौत को हार्ट अटैक बताया। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

बंगाल चुनाव 2026 बनाम 2021: अगली बड़ी लड़ाई से पहले क्या बदल गया है? | भारत समाचार

Ryan Williams is set to make his debut for India in Kochi (AIFF Media)

आखरी अपडेट:मार्च 31, 2026, 18:01 IST पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: भाजपा का लक्ष्य राज्य में ममता बनर्जी के एक दशक से अधिक लंबे शासन को चुनौती देना है। 2026 के बंगाल चुनाव केवल दो चरणों में होंगे – 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को। (एआई-जनरेटेड तस्वीर) पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: जैसे-जैसे पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, सत्तारूढ़ अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच एक उच्च-स्तरीय राजनीतिक टकराव के लिए मंच तैयार हो गया है। 2021 की नाटकीय प्रतियोगिता ने राज्य के राजनीतिक परिदृश्य को नया रूप देने के पांच साल बाद, आगामी चुनावों को टीएमसी सुप्रीमो और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लंबे समय से चले आ रहे प्रभुत्व और भारत के सबसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्यों में से एक पर कब्जा करने के लिए भाजपा के निरंतर प्रयास की एक महत्वपूर्ण परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है। बंगाल की लड़ाई साधारण चुनावी प्रतिद्वंद्विता से आगे बढ़ चुकी है। जबकि 2021 का चुनाव काफी हद तक भाजपा की तीव्र वृद्धि और टीएमसी के निर्णायक जनादेश द्वारा परिभाषित किया गया था, 2026 की प्रतियोगिता बदलती राजनीतिक गति, नए अभियान विषयों और मतदाता सूची और पहचान की राजनीति पर गहन बहस के बीच सामने आ रही है। भाजपा का लक्ष्य राज्य में बनर्जी के एक दशक से अधिक लंबे शासन को चुनौती देना है। पिछले एक दशक में, पार्टी बंगाली भाषी राज्य में तेजी से उभरी है, एक सीमांत खिलाड़ी से प्रमुख विपक्ष और सत्ता के लिए एक गंभीर दावेदार में बदल गई है। आगामी विधानसभा चुनाव सतह पर 2021 की प्रतियोगिता के समान दिखाई दे सकते हैं – मोटे तौर पर सत्तारूढ़ टीएमसी और भाजपा के बीच सीधी लड़ाई। हालाँकि, पिछले राज्य चुनाव के बाद से राजनीतिक परिदृश्य, अभियान के मुद्दे और चुनावी गतिशीलता महत्वपूर्ण रूप से विकसित हुई है। भाजपा की बढ़त से प्रतिस्पर्धी दौड़ तक 2021 में, चुनाव को व्यापक रूप से मुख्यमंत्री बनर्जी और उनकी पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में देखा गया। 2019 के लोकसभा चुनावों में अपने मजबूत प्रदर्शन के बाद भाजपा ने राज्य में तेजी से विस्तार किया था, जिससे ऐतिहासिक सफलता की उम्मीदें बढ़ गई थीं। हालाँकि, नतीजे कुछ और ही कहानी बयां करते हैं। टीएमसी ने 294 सीटों में से 215 सीटें जीतकर प्रचंड जीत हासिल की, जबकि भाजपा 77 सीटों के साथ प्रमुख विपक्ष के रूप में उभरी – 2016 में केवल तीन सीटों से नाटकीय वृद्धि। जैसे-जैसे 2026 का चुनाव नजदीक आ रहा है, विश्लेषकों का मानना ​​है कि मुकाबला काफी करीबी हो सकता है। दोनों पार्टियां आक्रामक तरीके से तैयारी कर रही हैं और स्विंग वोटर्स पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं, शुरुआती आकलन एकतरफा परिणाम के बजाय प्रतिस्पर्धी दौड़ का सुझाव दे रहे हैं। मतदान कार्यक्रम काफी छोटा एक अन्य महत्वपूर्ण अंतर मतदान संरचना में है। 2021 का चुनाव आठ चरणों में आयोजित किया गया था, सुरक्षा और साजो-सामान संबंधी विचारों के आधार पर एक लंबा कार्यक्रम बनाया गया था। इसके विपरीत, 2026 का चुनाव केवल दो चरणों में होगा – 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को। छोटी समयसीमा से विस्तारित प्रचार अभियान में कमी आने की उम्मीद है और राजनीतिक दलों के लिए जमीनी स्तर की लामबंदी रणनीतियों में बदलाव हो सकता है। मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रमुख फ्लैशप्वाइंट के रूप में उभरा शायद 2026 के चुनाव में सबसे बड़ा नया कारक मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़ा विवाद है। 2021 के विपरीत, जब मतदाता सूची एक केंद्रीय मुद्दा नहीं थी, इस बार संशोधन प्रक्रिया एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बन गई है। कथित तौर पर लगभग 64 लाख नाम सूची से हटा दिए गए हैं, जबकि कई लाख से अधिक नाम जांच के दायरे में हैं। इस कवायद के पैमाने पर भाजपा और राज्य में सत्तारूढ़ दल के बीच तीखी बहस छिड़ गई है। भाजपा ने विशेष रूप से सीमावर्ती जिलों में अवैध आप्रवासन और जनसांख्यिकीय परिवर्तनों के बारे में चिंताओं को दूर करने के लिए आवश्यक संशोधन का बचाव किया है। हालाँकि, टीएमसी ने अपने प्रतिद्वंद्वी पर वास्तविक मतदाताओं, विशेषकर अल्पसंख्यकों को वंचित करने का प्रयास करने का आरोप लगाया है। प्रभाव महत्वपूर्ण हो सकता है, विशेषकर करीबी मुकाबले वाले निर्वाचन क्षेत्रों में जहां जीत का अंतर हटाए गए नामों की संख्या से कम था। बदलती राजनीतिक गति पिछले विधानसभा चुनाव के बाद से पश्चिम बंगाल में राजनीतिक परिदृश्य बदल गया है। निवर्तमान विधानसभा में 77 सीटों का दावा करके, भाजपा ने खुद को राज्य में प्रमुख विपक्ष के रूप में मजबूती से स्थापित किया। हालाँकि तब से भाजपा की गति में उतार-चढ़ाव आया है, जिसमें 2019 की तुलना में 2024 के लोकसभा चुनावों में कमजोर प्रदर्शन भी शामिल है, लेकिन पिछले एक दशक में इसकी वृद्धि आश्चर्यजनक बनी हुई है। 2011 में लगभग 4% वोट शेयर के साथ एक भी सीट जीतने में नाकाम रहने से, पार्टी 2021 में 77 सीटों और 38% से अधिक वोटों तक विस्तारित हो गई, और राज्य में मुख्य चुनौती के रूप में वामपंथियों और कांग्रेस की जगह ले ली। इस बीच, मुख्यमंत्री और उनकी पार्टी शासन कर रही है, लेकिन एक दशक से अधिक समय तक सत्ता में रहने के बाद बढ़ती सत्ता विरोधी लहर का सामना कर रही है, जिससे 2026 के चुनाव के लिए शासन और राजनीतिक परिवर्तन की मांग के बीच एक प्रतियोगिता के रूप में मंच तैयार किया जा रहा है। अभियान विषयों में बदलाव 2021 के चुनावों के बाद से अभियान के मुद्दे भी विकसित हुए हैं। 2021 में चुनाव काफी हद तक पहचान की राजनीति और कल्याणकारी योजनाओं के इर्द-गिर्द घूमता रहा। 2026 से पहले, सीएए और एनआरसी जैसे नागरिकता मुद्दों पर निरंतर चर्चा के साथ-साथ सत्ता विरोधी लहर, भ्रष्टाचार के आरोप, प्रवासन, आर्थिक अवसर और महिला सुरक्षा को शामिल करने के लिए बहस व्यापक हो गई है। बैटलग्राउंड सीटें और नई चुनावी गणना राजनीतिक विश्लेषकों का सुझाव है कि लगभग 57 निर्वाचन क्षेत्र 2026 के उच्च-दांव वाले प्रदर्शन के परिणाम को निर्धारित करने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। इनमें से कई सीटें 2021 में 8,000 वोटों या उससे कम के अंतर से जीती गईं, जिससे वे इस बार महत्वपूर्ण युद्ध का मैदान बन

Fastest Goal Record, Arjun Award Winner; School Named After Him

Fastest Goal Record, Arjun Award Winner; School Named After Him

Hindi News Career Gurjant Singh Retires: Fastest Goal Record, Arjun Award Winner; School Named After Him 7 घंटे पहले कॉपी लिंक इंडियन हॉकी प्लेयर गुरजंत सिंह ने इंटरनेशनल हॉकी से रिटायरमेंट का ऐलान किया। इसकी घोषणा उन्होंने 27 मार्च को दिल्ली के ला मेरेडिएन में आयोजित हॉकी इंडिया एनुअल अवॉर्ड सेरेमनी के दौरान की, जिसके बाद से ही वे चर्चा में हैं। गुरजंत नेशनल हॉकी टीम में फॉर्वर्ड प्लेअर हैं। लगभग एक दशक के अपने शानदार करियर में उन्होंने दो गोल्ड मेडल- 2022 एशियन गेम्स (हांगझोऊ) और 2016 जूनियर विश्व कप (लखनऊ) में जीते हैं। इसके अलावा, वे टोक्यो 2020 और पेरिस 2024 ओलिंपिक में ब्रॉन्ज जीतने वाली टीम का हिस्सा रहे हैं। 2005 में चंडीगढ़ हॉकी एकेडमी जॉइन की गुरजंत ने एक इंटरव्यू में कहा था कि बटाला में पहली बार अपने भाइयों को हॉकी खेलता देख बहुत खुशी हुई थी, तभी उन्होंने तय कर लिया कि हॉकी खेलना है। जल्द ही हॉकी के बारे में सब पता किया और 2005 में चंडीगढ़ हॉकी एकेडमी जॉइन कर ली। 2011 तक वहां और फिर जालंधर के सूरजित हॉकी एकेडमी में ट्रेनिंग ली। जल्द ही हॉकी के डोमेस्टिक सर्किट में अपने प्रदर्शन के लिए मशहूर होने लगे। इस बीच पंजाब और हरियाणा के लिए कई टूर्नामेंट्स जीते। गुरजंत ने भुवनेश्वर में आयोजित FIH प्रो लीग में आखिरी इंटरनेशनल मैच खेला था। 2016 में FIH जूनियर मेन्स वर्ल्ड कप में गोल्ड जिताया गुरजंत ने साल 2016 के इंटरनेशनल हॉकी फेडरेशन (FIH) जूनियर मेन्स वर्ल्ड कप की टीम में अपनी जगह बनाई और ट्रेनिंग के लिए बेंगलुरु के SAI एकेडमी गए। हॉकी इंडिया के मुताबिक, 2015 में नीदरलैंड्स में आयोजित अंडर-21 सिक्स नेशंस टूर के लिए चुना गया था। वे ऑस्ट्रेलियन हॉकी लीग में भी भारतीय टीम का हिस्सा रहे। उसमें उनके प्रदर्शन को देखते हुए लखनऊ में आयोजित मेंस हॉकी जूनियर वर्ल्ड कप 2016 के लिए चुना गया। इसमें टीम और उनकी बेहतरीन पर्फॉर्मेंस ने भारत को वर्ल्ड कप में गोल्ड जिताया। गुरजंत अपने एक इंटरव्यू में कहते हैं, ‘मैं 18 दिसंबर 2016 का वो दिन कभी नहीं भूलूंगा। उस दिन हमने जूनियर वर्ल्ड कप का खिताब जीता था और अब तक यह मेरे करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि रही है। इस शानदार जीत के बाद ही लोगों ने मुझे नोटिस करना शुरू किया।’ जर्मन खिलाड़ी ने ‘मिस्टर बैकहैंड’ नाम दिया इसी वर्ल्ड कप में गुरजंत ने अपने दूसरे गोल में एक बेहतरीन टोमहॉक यानी रिवर्स स्टिक शॉट खेला था। इस शानदार गोल के लिए जर्मनी के दिग्गज हॉकी खिलाड़ी फ्लोरियन फुच्स ने उन्हें ‘मिस्टर बैकहैंड’ निकनेम से बुलाना शुरू कर दिया। गुरजंत ने सीनियर टीम के लिए अपना पहला मैच 2017 में बेल्जियम के खिलाफ खेला था। उसी साल ढाका में आयोजित हीरो एशिया कप भी भारत ने जीता था। गुरजंत उस टीम का भी हिस्सा थे। हालांकि, इस शानदार शुरुआत के बाद उनका फॉर्म कुछ बिगड़ा था, जिसकी वजह से 2018 के कॉमन वेल्थ और एशियन गेम्स में उन्हें इंडियन स्क्वॉड में जगह नहीं मिली। फास्टेस्ट गोल का रिकॉर्ड अपने नाम किया चोट के कारण FIH मेन्स वर्ल्ड कप स्क्वॉड में भी जगह नहीं मिली। उसी साल मस्कट में आयोजित एशियन चैम्पियंस ट्रॉफी में चुने गए, जिसमें उन्होंने 5 गोल किए। हालांकि, इसके बावजूद भी वो टीम में अपनी जगह नहीं बना पाए और बेहतर परफॉर्म नहीं कर पाए। जनवरी 2020 में FIH प्रो लीग में नीदरलैंड्स के खिलाफ पहले 13 सेकेंड में सबसे तेज गोल किया। इसके साथ ही वे इंटरनेशनल मैच में सबसे तेज गोल करने वाले भारतीय खिलाड़ी बन गए। 2020 में इस गोल को फैंस ने FIH प्रो लीग का सेकेंड बेस्ट गोल वोट किया था। वो पल जब 2020 के FIH प्रो लीग में फास्टेस्ट गोल करने वाले खिलाड़ी बने थे। 41 साल बाद ओलिंपिक जीतने वाली टीम का हिस्सा रहे गुरजंत टोक्यो ओलिंपिक 2020 में 41 साल बाद ऐतिहासिक पदक जीतने वाली टीम का भी हिस्सा रहे। इसके बाद 2024 में पेरिस ओलिंपिक में इंडिया को बैक-टू-बैक दो ब्रॉन्ज मेडल जिताने वाली टीम का हिस्सा रहे। गुरजंत को भारत सरकार ने 2021 में खेल में उनके योगदान के लिए अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया। पंजाब सरकार ने 2024 में PCS अपॉइंट किया 2021 में पंजाब सरकार ने गांव के गवर्नमेंट प्राइमरी स्कूल का नाम ‘ओलिंपियन गुरजंत सिंह गवर्नमेंट प्राइमरी स्कूल’ रखा दिया। ऐसा 2020 टोक्यो समर ओलिंपिक्स में गुरजंत के प्रदर्शन के सम्मानित करने के लिए किया। इसके साथ ही पंजाब सरकार ने 2024 में इंडियन हॉकी में उनके योगदान के लिए पंजाब का PCS ऑफिसर अपॉइंट किया। स्टोरी – सोनाली राय ——————– ये खबरें भी पढ़ें… UPSC प्रिपरेशन के लिए बड़े शहर जाना जरूरी नहीं: मोबाइल, इंटरनेट डिस्‍ट्रैक्‍शन नहीं, तैयारी के टूल्‍स; AIR 137 ने सेल्‍फ स्‍टडी से क्रैक किया IPS 6 मार्च को जारी UPSC सिविल सर्विस 2025 रिजल्ट्स में हरियाणा की मानसी डागर ने 137वीं रैंक हासिल की। ये रैंक उन्होंने बिना किसी कोचिंग और प्रोफेश्नल गाइडेंस के सिर्फ सेल्फ स्टडी से हासिल की। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Internet Blackout Risk for India & World Amid Iran Conflict

Internet Blackout Risk for India & World Amid Iran Conflict

Hindi News Business Strait Of Hormuz Crisis: Internet Blackout Risk For India & World Amid Iran Conflict नई दिल्ली14 घंटे पहले कॉपी लिंक भारत का ज्यादातर इंटरनेशनल इंटरनेट बैंडविड्थ अरब सागर और खाड़ी क्षेत्र से होकर आता है। अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग के चलते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज प्रभावित होने से दुनियाभर में एनर्जी क्राइसिस के बाद अब इंटरनेट ठप होने का खतरा है। इसकी वजह यह है कि होर्मुज रूट से न केवल दुनिया का 20% कच्चा तेल और 25% LNG गुजरती है, बल्कि इस रास्ते के नीचे इंटरनेट केबल्स भी बिछीं हैं। अगर इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है या केबल्स को नुकसान पहुंचता है, तो भारत समेत पूरी दुनिया में इंटरनेट की स्पीड स्लो हो सकती है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह इलाका सिर्फ एनर्जी चोकपॉइंट नहीं, बल्कि एक डिजिटल चोकपॉइंट भी है। समुद्र के नीचे से गुजरता है 97% ग्लोबल डेटा अक्सर लोगों को लगता है कि इंटरनेट सैटेलाइट के जरिए चलता है, लेकिन हकीकत अलग है। दुनिया का करीब 95 से 97% डेटा फाइबर ऑप्टिक केबल्स के जरिए ट्रांसफर होता है। ये केबल्स समुद्र के नीचे बिछी होती हैं। भारत को यूरोप, अफ्रीका और पश्चिम एशिया से जोड़ने वाली मुख्य केबल्स इसी रूट के पास से गुजरती हैं। इसमें SEA-ME-WE, AAE-1 और EIG जैसे बड़े केबल सिस्टम शामिल हैं। भारत को यूरोप-अफ्रीका और पश्चिम एशिया से जोड़ने वाली केबल्स होर्मुज रूट से गुजरती हैं। भारत के लिए क्यों बड़ा है खतरा? भारत की डिजिटल इकोनॉमी काफी हद तक इन समुद्री रूट्स पर निर्भर है। भारत का ज्यादातर इंटरनेशनल इंटरनेट बैंडविड्थ अरब सागर और खाड़ी क्षेत्र से होकर आता है। लेटेंसी बढ़ जाएगी: अगर केबल्स को नुकसान होता है, तो ट्रैफिक को लंबे ‘पैसिफिक रूट’ पर डायवर्ट करना पड़ेगा। इससे लेटेंसी यानी डेटा ट्रैवल टाइम बढ़ जाएगा। इंटरनेट स्लो होगा: यूट्यूब, इंस्टाग्राम और नेटफ्लिक्स जैसे प्लेटफॉर्म्स पर बफरिंग बढ़ जाएगी। वीडियो कॉल और क्लाउड सर्विस में भी दिक्कतें आ सकती हैं। 23.48 लाख करोड़ के IT सेक्टर पर असर भारत का IT और आउटसोर्सिंग सेक्टर करीब 250 बिलियन डॉलर (23.48 लाख करोड़) का है। अमेरिकी और यूरोपीय क्लाइंट्स के साथ रियल-टाइम कनेक्टिविटी इसी लो-लेटेंसी नेटवर्क पर टिकी है। केबल कटने की स्थिति में कंपनियों को भारी नुकसान हो सकता है, जिससे सर्विस एग्रीमेंट्स (SLA) टूटने और पेनाल्टी लगने का डर है। इसके अलावा, खाड़ी देशों से आने वाली रेमिटेंस (पैसा भेजना) और SWIFT जैसे बैंकिंग ट्रांजेक्शन भी धीमे पड़ सकते हैं। दुनिया का करीब 95 से 97% डेटा फाइबर ऑप्टिक केबल्स के जरिए ट्रांसफर होता है। फोटो सोर्स- https://www.submarinecablemap.com क्या पूरी तरह बंद हो जाएगा इंटरनेट? इंटरनेट का डिजाइन इस तरह बनाया गया है कि एक रास्ता बंद होने पर ट्रैफिक दूसरे रास्ते (री-रूटिंग) पर चला जाता है। इसलिए ‘टोटल ब्लैकआउट’ यानी पूरी तरह इंटरनेट बंद होने की संभावना कम है। हालांकि, री-रूटिंग की वजह से वैकल्पिक रास्तों पर लोड बढ़ जाएगा, जिससे स्पीड बहुत कम हो जाएगी। शेयर बाजार और हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग जैसे सेक्टर्स, जहां मिलीसेकंड का महत्व होता है। वहां बड़ा वित्तीय जोखिम खड़ा हो सकता है। नए ऑप्शन पर निवेश कर रहा भारत इस खतरे को देखते हुए भारत समेत कई देश अब वैकल्पिक रास्तों पर निवेश कर रहे हैं। इलॉन मस्क की स्टारलिंक जैसी सैटेलाइट इंटरनेट सर्विसेज बैकअप के तौर पर देखी जा रही हैं। भविष्य में ऐसी केबल्स बिछाने की योजना है जो संवेदनशील क्षेत्रों को बायपास कर सकें। फिलहाल, होर्मुज में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव तेल की कीमतों से ज्यादा डिजिटल दुनिया की चिंता बढ़ा रहा है। ये खबर भी पढ़ें… तेल की कीमतें 10 डॉलर बढ़ने से 0.60% बढ़ेगी महंगाई: रेटिंग एजेंसी का दावा- GDP ग्रोथ और रुपए पर भी असर; कच्चा तेल 116 डॉलर पार पश्चिम एशिया में तनाव से ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। रेटिंग एजेंसी केयरएज ग्लोबल के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में हर 10 डॉलर प्रति बैरल बढ़ोतरी से भारत में रिटेल महंगाई 60 बेसिस पॉइंट्स (0.60%) तक बढ़ सकती है। इस बीच डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि उनकी प्राथमिकता ईरान के तेल संसाधनों पर कब्जा करना है। उनके इस बयान के बाद ब्रेंट क्रूड आज 116 डॉलर प्रति बैरल पार पहुंच गया। केयरएज ग्लोबल के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने का असर भारतीय अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जेब पर पड़ सकता है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026: जिलों, निर्वाचन क्षेत्रों और 234 सीटों के लिए लड़ाई की निश्चित मार्गदर्शिका | चुनाव समाचार

Punjab Kings vs Gujarat Titans Live Score: IPL 2026 Match Today Updates From New Chandigarh. (Picture Credit: Sportzpics)

आखरी अपडेट:मार्च 31, 2026, 17:32 IST यहां चुनावी मानचित्र का व्यापक विवरण दिया गया है जो अगले पांच वर्षों के लिए तमिलनाडु के भाग्य का फैसला करेगा तमिलनाडु में विधानसभा के सभी 234 सदस्यों को चुनने के लिए 23 अप्रैल को मतदान होगा। वोटों की गिनती 4 मई को होगी. (प्रतीकात्मक तस्वीर) जैसे-जैसे तमिलनाडु 2026 विधान सभा चुनावों की तैयारी कर रहा है, राजनीतिक परिदृश्य में भूकंपीय बदलाव देखा जा रहा है। यह चुनाव केवल पारंपरिक द्रविड़ दिग्गजों, द्रमुक और अन्नाद्रमुक के बीच का मुकाबला नहीं है; यह एक बहुकोणीय लड़ाई है जिसमें भाजपा के आक्रामक उभार, एनटीके की संगठनात्मक ताकत और अभिनेता विजय की टीवीके की बहुप्रतीक्षित चुनावी शुरुआत शामिल है। तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत हासिल करने के लिए किसी पार्टी या गठबंधन को कम से कम 118 सीटें हासिल करनी होंगी। यहां चुनावी मानचित्र का व्यापक विवरण दिया गया है जो अगले पांच वर्षों के लिए राज्य का भाग्य तय करेगा। चुनावी खाका: त्वरित तथ्य कुल विधानसभा सीटें | 234 | आरक्षित सीटें (एससी) | 44 | आरक्षित सीटें (एसटी) | 2 | कुल जिले | 38 | बहुमत मार्क | 118 | जिलेवार सीट वितरण 2026 का चुनाव 38 जिलों में लड़ा जाएगा। उत्तरी और पश्चिमी बेल्ट (“कोंगु” क्षेत्र) में उच्च सीट घनत्व अक्सर तमिलनाडु की राजनीति में किंगमेकर के रूप में कार्य करता है। उत्तरी तमिलनाडु (वन्नियार और दलित हृदयभूमि) राजधानी सहित यह क्षेत्र अक्सर गहन सामाजिक इंजीनियरिंग और गठबंधन-निर्माण का स्थल है। चेन्नई: 16 सीटें चेंगलपट्टू: 7 सीटें कांचीपुरम: 4 सीटें तिरुवल्लूर: 10 सीटें वेल्लोर: 5 सीटें तिरुवन्नामलाई: 8 सीटें विल्लुपुरम: 7 सीटें रानीपेट: 4 सीटें तिरुपथुर: 4 सीटें कल्लाकुरिची: 5 सीटें पश्चिमी तमिलनाडु (‘कोंगु’ बेल्ट) अपनी औद्योगिक शक्ति और कृषि शक्ति के लिए जाना जाने वाला यह क्षेत्र अन्नाद्रमुक का पारंपरिक गढ़ है और भाजपा के विस्तार का प्राथमिक लक्ष्य है। कोयंबटूर: 10 सीटें इरोड: 8 सीटें सेलम: 11 सीटें तिरुपुर: 8 सीटें नमक्कल: 6 सीटें नीलगिरी: 3 सीटें कृष्णागिरी: 6 सीटें धर्मपुरी: 5 सीटें मध्य एवं डेल्टा क्षेत्र (कावेरी हार्टलैंड) कृषि प्रधान क्षेत्र जहां कावेरी जल मुद्दा और किसान कल्याण चुनावी चर्चा पर हावी है। तिरुचिरापल्ली: 9 सीटें तंजावुर: 8 सीटें नागापट्टिनम: 3 सीटें मयिलादुथुराई: 3 सीटें तिरुवरूर: 4 सीटें पुदुक्कोट्टई: 6 सीटें करूर: 4 सीटें पेरम्बलूर: 2 सीटें अरियालुर: 2 सीटें दक्षिणी तमिलनाडु (मुक्कुलाथोर और अल्पसंख्यक प्रभाव) सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बेल्ट जहां सामुदायिक गतिशीलता और पारंपरिक वफादारी निर्णायक भूमिका निभाती है। मदुरै: 10 सीटें डिंडीगुल: 7 सीटें थेनी: 4 सीटें विरुधुनगर: 7 सीटें शिवगंगा: 4 सीटें रामनाथपुरम: 4 सीटें थूथुकुडी: 6 सीटें तिरुनेलवेली: 5 सीटें तेनकासी: 5 सीटें कन्नियाकुमारी: 6 सीटें 2026 में देखने योग्य प्रमुख निर्वाचन क्षेत्र कई “स्टार” निर्वाचन क्षेत्र राष्ट्रीय ध्यान आकर्षित करेंगे क्योंकि इन सीटों से हाई-प्रोफाइल उम्मीदवारों के चुनाव लड़ने की संभावना है: 1. कोलाथुर: मुख्यमंत्री एमके स्टालिन द्वारा प्रतिनिधित्व। 2. एडप्पादी: एआईएडीएमके महासचिव एडप्पादी के पलानीस्वामी का गृह क्षेत्र। 3. चेपॉक-थिरुवल्लिकेनी: उदयनिधि स्टालिन का निर्वाचन क्षेत्र। 4. बोडिनायक्कनुर: ओ पन्नीरसेल्वम का पारंपरिक आधार। 5. कोयंबटूर दक्षिण: भाजपा और मक्कल निधि मय्यम (एमएनएम) के लिए केंद्र बिंदु। अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (एफएक्यू) 38 जिलों का क्या महत्व है? जबकि 234 निर्वाचन क्षेत्र हैं, प्रशासनिक सीमाओं को हाल ही में अद्यतन किया गया था (उदाहरण के लिए, मयिलादुथुराई और तेनकासी)। 2026 के चुनावों में अधिक मतदान सुनिश्चित करने के लिए इन नए जिलों में सख्त लॉजिस्टिक प्रबंधन देखा जाएगा। क्या सीटों की संख्या में कोई बदलाव होगा? नहीं, सीटों की संख्या 234 बनी हुई है। अगला प्रमुख परिसीमन अभ्यास, जो जनसंख्या के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या को बदल सकता है, राष्ट्रीय जनगणना प्रक्रिया पूरी होने तक अपेक्षित नहीं है। अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए कितनी सीटें आरक्षित हैं? 234 सीटों में से 44 एससी उम्मीदवारों के लिए आरक्षित हैं, और 2 एसटी उम्मीदवारों (यरकौड और सेंगर) के लिए आरक्षित हैं। पहले प्रकाशित: मार्च 31, 2026, 17:32 IST समाचार चुनाव तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026: जिलों, निर्वाचन क्षेत्रों और 234 सीटों के लिए लड़ाई की निश्चित मार्गदर्शिका अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें