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Cambridge Study Shows 2°C Temperature Rise, Impacting 340 Million People

Cambridge Study Shows 2°C Temperature Rise, Impacting 340 Million People
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  • AI Data Centres Creating ‘Data Heat Island Effect’: Cambridge Study Shows 2°C Temperature Rise, Impacting 340 Million People

नई दिल्ली44 मिनट पहले

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के डेटा सेंटर्स से तापमान बढ़ा रहा है। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की रिसर्च में कहा गया कि जहां ये डेटा सेंटर्स काम कर रहे हैं, वहां औसतन 2 डिग्री सेल्सियस तक तापमान बढ़ गया है। वैज्ञानिकों ने इसे डेटा हीट आइलैंड इफेक्ट’ नाम दिया है।

डेटा सेंटर्स के 10 किलोमीटर दायरे में गर्मी बढ़ी

  • रिसर्चर्स ने पिछले दो दशकों के सैटेलाइट डेटा का एनालिसिस किया। पता चला कि जैसे ही किसी इलाके में AI डेटा सेंटर ऑपरेशनल होता है, वहां का तापमान अचानक बढ़ जाता है।
  • डेटा सेंटर के पास तापमान औसतन 2.07 डिग्री सेल्सियस बढ़ा है। कुछ लोकेशन पर बढ़ा हुआ तापमान 9.1 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया गया।
  • असर सिर्फ डेटा सेंटर की बाउंड्री तक नहीं है। सेंटर से 10 किलोमीटर के दायरे तक तापमान में बढ़ोतरी देखी जा रही है।
AI सर्विस देने के लिए भारी मात्रा में बिजली और कंप्यूटिंग पावर की जरूरत होती है।

AI सर्विस देने के लिए भारी मात्रा में बिजली और कंप्यूटिंग पावर की जरूरत होती है।

रिसर्च की 4 बड़ी बातें…

1. डेटा हीट आइलैंड इफेक्ट

अब तक अर्बन हीट आइलैंड का कॉन्सेप्ट सामने आया था, जहां कंक्रीट के जंगलों और बढ़ती आबादी की वजह से शहरों का तापमान गांवों के मुकाबले 4-6 डिग्री ज्यादा रहता है।

अब AI इंफ्रास्ट्रक्चर भी इसी लीग में शामिल हो गया है। AI सर्विस देने के लिए भारी मात्रा में बिजली और कंप्यूटिंग पावर की जरूरत होती है, जिससे निकलने वाली गर्मी सीधे तौर पर स्थानीय वातावरण को प्रभावित कर रही है।

2. 34 करोड़ लोगों की सेहत पर असर

स्टडी के अनुसार दुनिया भर में करीब 34.4 करोड़ लोग ऐसे इलाकों में रह रहे हैं, जो इन डेटा सेंटर्स की गर्मी की चपेट में हैं। कई डेटा सेंटर्स शहरों से दूर बनाए गए हैं, फिर भी इनका असर बड़े स्तर पर हो रहा है।

वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इससे न केवल लोगों की सेहत पर असर पड़ेगा, बल्कि घरों को ठंडा रखने के लिए बिजली की खपत और खर्च भी बढ़ जाएगा।

3. स्पेन, मेक्सिको और ब्राजील में स्टडी

रिसर्चर्स ने स्पेन के अरागोन, मेक्सिको के बाहियो और ब्राजील के उत्तर-पूर्वी इलाकों में केस स्टडी की। यहां डेटा सेंटर्स के क्लस्टर (समूह) हैं। यहां के तापमान में असामान्य बढ़ोतरी देखी गई है। गर्मी के साथ कार्बन एमिशन भी तेजी से बढ़ा है।

4. आने वाला खतरा- बिजली की भारी खपत

रिसर्चर्स के मुताबिक, अगले एक दशक में डेटा सेंटर सेक्टर दुनिया के सबसे ज्यादा बिजली खपत करने वाले सेक्टरों में से एक बन जाएगा। इनकी कंप्यूटिंग के लिए लगने वाली बिजली जल्द ही मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के बजट को भी पीछे छोड़ देगी।

चिंता की बात यह है कि अधिकांश AI इंफ्रास्ट्रक्चर जीवाश्म ईंधन से चलने वाली बिजली पर निर्भर है, जिससे गर्मी और प्रदूषण दोनों बढ़ रहे हैं।

क्या होता है AI डेटा सेंटर?

  • पावरफुल इंजन: सामान्य डेटा सेंटर से 10 गुना ज्यादा ताकतवर, AI का दिमाग यहीं चलता है।
  • स्पेशल चिप्स: सामान्य चिप नहीं, GPU लगते हैं जो बेहद तेज कैलकुलेशन करते हैं।
  • भारी बिजली खपत: एक AI डेटा सेंटर छोटे शहर जितनी बिजली खींचता है।
  • लिक्विड कूलिंग: गर्म मशीनों को ठंडा रखने के लिए पानी या खास लिक्विड इस्तेमाल होता है।
  • सुपरफास्ट डेटा: पलक झपकते ही पूरी लाइब्रेरी जितना डेटा प्रोसेस।
  • 24×7 काम: साल के 365 दिन लगातार, ताकि AI एप्स हमेशा चालू रहें।

ये खबर भी पढ़ें…

भारत समेत दुनियाभर में इंटरनेट ठप होने का खतरा: जंग से होर्मुज में बिछीं केबल्स को नुकसान की आशंका; समुद्र में 97% ग्लोबल डेटा

अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग के चलते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज प्रभावित होने से दुनियाभर में एनर्जी क्राइसिस के बाद अब इंटरनेट ठप होने का खतरा है। इसकी वजह यह है कि होर्मुज रूट से न केवल दुनिया का 20% कच्चा तेल और 25% LNG गुजरती है, बल्कि इस रास्ते के नीचे इंटरनेट केबल्स भी बिछीं हैं।

अगर इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है या केबल्स को नुकसान पहुंचता है, तो भारत समेत पूरी दुनिया में इंटरनेट की स्पीड स्लो हो सकती है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह इलाका सिर्फ एनर्जी चोकपॉइंट नहीं, बल्कि एक डिजिटल चोकपॉइंट भी है। पूरी खबर पढ़ें…

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Cambridge Study Shows 2°C Temperature Rise, Impacting 340 Million People

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नई दिल्ली44 मिनट पहले

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के डेटा सेंटर्स से तापमान बढ़ा रहा है। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की रिसर्च में कहा गया कि जहां ये डेटा सेंटर्स काम कर रहे हैं, वहां औसतन 2 डिग्री सेल्सियस तक तापमान बढ़ गया है। वैज्ञानिकों ने इसे डेटा हीट आइलैंड इफेक्ट’ नाम दिया है।

डेटा सेंटर्स के 10 किलोमीटर दायरे में गर्मी बढ़ी

  • रिसर्चर्स ने पिछले दो दशकों के सैटेलाइट डेटा का एनालिसिस किया। पता चला कि जैसे ही किसी इलाके में AI डेटा सेंटर ऑपरेशनल होता है, वहां का तापमान अचानक बढ़ जाता है।
  • डेटा सेंटर के पास तापमान औसतन 2.07 डिग्री सेल्सियस बढ़ा है। कुछ लोकेशन पर बढ़ा हुआ तापमान 9.1 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया गया।
  • असर सिर्फ डेटा सेंटर की बाउंड्री तक नहीं है। सेंटर से 10 किलोमीटर के दायरे तक तापमान में बढ़ोतरी देखी जा रही है।
AI सर्विस देने के लिए भारी मात्रा में बिजली और कंप्यूटिंग पावर की जरूरत होती है।

AI सर्विस देने के लिए भारी मात्रा में बिजली और कंप्यूटिंग पावर की जरूरत होती है।

रिसर्च की 4 बड़ी बातें…

1. डेटा हीट आइलैंड इफेक्ट

अब तक अर्बन हीट आइलैंड का कॉन्सेप्ट सामने आया था, जहां कंक्रीट के जंगलों और बढ़ती आबादी की वजह से शहरों का तापमान गांवों के मुकाबले 4-6 डिग्री ज्यादा रहता है।

अब AI इंफ्रास्ट्रक्चर भी इसी लीग में शामिल हो गया है। AI सर्विस देने के लिए भारी मात्रा में बिजली और कंप्यूटिंग पावर की जरूरत होती है, जिससे निकलने वाली गर्मी सीधे तौर पर स्थानीय वातावरण को प्रभावित कर रही है।

2. 34 करोड़ लोगों की सेहत पर असर

स्टडी के अनुसार दुनिया भर में करीब 34.4 करोड़ लोग ऐसे इलाकों में रह रहे हैं, जो इन डेटा सेंटर्स की गर्मी की चपेट में हैं। कई डेटा सेंटर्स शहरों से दूर बनाए गए हैं, फिर भी इनका असर बड़े स्तर पर हो रहा है।

वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इससे न केवल लोगों की सेहत पर असर पड़ेगा, बल्कि घरों को ठंडा रखने के लिए बिजली की खपत और खर्च भी बढ़ जाएगा।

3. स्पेन, मेक्सिको और ब्राजील में स्टडी

रिसर्चर्स ने स्पेन के अरागोन, मेक्सिको के बाहियो और ब्राजील के उत्तर-पूर्वी इलाकों में केस स्टडी की। यहां डेटा सेंटर्स के क्लस्टर (समूह) हैं। यहां के तापमान में असामान्य बढ़ोतरी देखी गई है। गर्मी के साथ कार्बन एमिशन भी तेजी से बढ़ा है।

4. आने वाला खतरा- बिजली की भारी खपत

रिसर्चर्स के मुताबिक, अगले एक दशक में डेटा सेंटर सेक्टर दुनिया के सबसे ज्यादा बिजली खपत करने वाले सेक्टरों में से एक बन जाएगा। इनकी कंप्यूटिंग के लिए लगने वाली बिजली जल्द ही मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के बजट को भी पीछे छोड़ देगी।

चिंता की बात यह है कि अधिकांश AI इंफ्रास्ट्रक्चर जीवाश्म ईंधन से चलने वाली बिजली पर निर्भर है, जिससे गर्मी और प्रदूषण दोनों बढ़ रहे हैं।

क्या होता है AI डेटा सेंटर?

  • पावरफुल इंजन: सामान्य डेटा सेंटर से 10 गुना ज्यादा ताकतवर, AI का दिमाग यहीं चलता है।
  • स्पेशल चिप्स: सामान्य चिप नहीं, GPU लगते हैं जो बेहद तेज कैलकुलेशन करते हैं।
  • भारी बिजली खपत: एक AI डेटा सेंटर छोटे शहर जितनी बिजली खींचता है।
  • लिक्विड कूलिंग: गर्म मशीनों को ठंडा रखने के लिए पानी या खास लिक्विड इस्तेमाल होता है।
  • सुपरफास्ट डेटा: पलक झपकते ही पूरी लाइब्रेरी जितना डेटा प्रोसेस।
  • 24×7 काम: साल के 365 दिन लगातार, ताकि AI एप्स हमेशा चालू रहें।

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अगर इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है या केबल्स को नुकसान पहुंचता है, तो भारत समेत पूरी दुनिया में इंटरनेट की स्पीड स्लो हो सकती है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह इलाका सिर्फ एनर्जी चोकपॉइंट नहीं, बल्कि एक डिजिटल चोकपॉइंट भी है। पूरी खबर पढ़ें…

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