कब्ज, अपच और गैस? गर्मियों में बेल बन सकता है आपका सुपरफूड, जानिए इसके फायदे और इस्तेमाल का तरीका

Last Updated:April 01, 2026, 13:41 IST गर्मी के मौसम में शरीर को ठंडक देने और पाचन सुधारने के लिए बेल का शरबत एक बेहतरीन उपाय है. यह प्राकृतिक कूलिंग ड्रिंक है जो कब्ज, अपच, दस्त और लू जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करता है. नियमित सेवन से शरीर हाइड्रेटेड रहता है और इम्यूनिटी भी मजबूत होती है. गर्मी का मौसम आते ही लोगों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, जिसमें सबसे आम समस्या पेट से जुड़ी होती है. तेज धूप, गलत खानपान, कम पानी पीना और बाहर का तला-भुना खाना खाने से कब्ज, गैस, अपच, पेट दर्द और दस्त जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं. ऐसे समय में अगर कोई आसान, सस्ता और देसी उपाय अपनाया जाए तो काफी राहत मिल सकती है, और इसमें सबसे असरदार फल है बेल. लोकल 18 से बातचीत के दौरान वैद्य अभिषेक कुमार मिश्रा बताते हैं कि बेल का फल गर्मियों में शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ पेट को स्वस्थ रखने में भी बहुत मदद करता है. आयुर्वेद में इसे औषधीय गुणों से भरपूर माना गया है और सदियों से इसका उपयोग पेट की बीमारियों के इलाज में किया जाता रहा है. बेल क्यों है खास? अभिषेक कुमार मिश्रा बताते हैं कि बेल में कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जैसे फाइबर, विटामिन C, कैल्शियम और एंटीऑक्सीडेंट. ये सभी मिलकर पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं और शरीर को अंदर से ठंडा रखते हैं. गर्मियों में अक्सर पेट खराब हो जाता है, लेकिन बेल का सेवन करने से पेट को आराम मिलता है. यह न सिर्फ पेट को साफ करता है, बल्कि पाचन प्रक्रिया को भी बेहतर बनाता है. Add News18 as Preferred Source on Google कब्ज में राहत: अगर किसी को कब्ज की समस्या रहती है, तो पका हुआ बेल का फल बेहद फायदेमंद माना जाता है. इसमें भरपूर मात्रा में फाइबर होता है, जो पाचन तंत्र को दुरुस्त करता है. बेल का सेवन करने से मल नरम होता है और आसानी से बाहर निकलता है, जिससे पेट साफ रहता है और कब्ज की समस्या धीरे-धीरे कम हो जाती है. नियमित रूप से बेल खाना या उसका शरबत पीना आंतों को स्वस्थ बनाए रखता है और पाचन को मजबूत करता है. गैस और अपच से राहत: गलत खान-पान और अनियमित दिनचर्या के कारण गैस और अपच की समस्या आम हो जाती है. ऐसे में बेल का फल बहुत फायदेमंद साबित होता है. बेल में ऐसे गुण होते हैं जो पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं और भोजन को अच्छे से पचाने में मदद करते हैं. इसके सेवन से पेट में गैस बनने की समस्या कम होती है, भारीपन दूर होता है और पेट हल्का महसूस होता है. नियमित रूप से बेल का शरबत या गूदा लेने से अपच की परेशानी धीरे-धीरे कम हो जाती है. दस्त और लू से बचाव: गर्मी के मौसम में तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण लू लगने का खतरा बढ़ जाता है. साथ ही, बाहर का दूषित पानी या खाना खाने से दस्त की समस्या भी हो सकती है. ऐसे में बेल का शरबत एक असरदार देसी उपाय है. यह शरीर को अंदर से ठंडक देता है और पानी की कमी को पूरा करता है. बेल में मौजूद पोषक तत्व आंतों को मजबूत बनाते हैं, जिससे दस्त में राहत मिलती है और शरीर जल्दी ठीक होने लगता है. नियमित रूप से बेल का शरबत पीने से लू से बचाव में भी मदद मिलती है. गर्मियों में बेल का शरबत क्यों है फायदेमंद: गर्मियों में रोजाना बेल का शरबत पीना शरीर के लिए बेहद लाभकारी होता है. यह एक प्राकृतिक कूलिंग ड्रिंक की तरह काम करता है और शरीर को अंदर से ठंडक देता है. इसके नियमित सेवन से शरीर में पानी की कमी नहीं होती और डिहाइड्रेशन से बचाव होता है. First Published : April 01, 2026, 13:41 IST
Dhurandhar 2 Box Office Collection, Ranveer singh’s Collects 1435 Cr Worldwide in just 13days

13 मिनट पहले कॉपी लिंक रणवीर सिंह की फिल्म धुरंधर 2 (धुरंधरः द रिवेंज) बॉक्स ऑफिस पर लगातार रिकॉर्ड बना रही है। 13 दिनों में फिल्म ने 1435 करोड़ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन कर लिया और RRR के ऑल टाइम कलेक्शन को पीछे छोड़ दिया। इसके साथ ही यह भारत की चौथी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बन गई है। इंडस्ट्री ट्रैकर सैकनिल्स के अनुसार, फिल्म ने 13वें दिन (दूसरे मंगलवार) 33.22 करोड़ और सोमवार को 30 करोड़ कमाए। इसके साथ वर्ल्डवाइड कलेक्शन 1435 करोड़ और इंडियन कलेक्शन 1077 करोड़ हो गया है। धुरंधर बॉलीवुड की दूसरी हाईएस्ट ग्रॉसिंग फिल्म बनी 1435 करोड़ कलेक्शन के साथ धुरंधर बॉलीवुड की दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बन गई है। इसने अपने पिछले पार्ट का रिकॉर्ड तोड़ा, लेकिन अब भी आमिर खान की दंगल (2200 करोड़) से पीछे है। दंगल की कमाई का बड़ा हिस्सा चीन से आया, जहां करीब 1300 करोड़ मिले, जबकि भारत में 535 करोड़ कमाए थे। भारत की चौथी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी धुरंधर 1435 करोड़ के साथ धुरंधर 2 सभी भाषाओं में भारत की चौथी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बन गई है। इसने RRR और पिछले पार्ट, धुरंधर को पीछे छोड़ा है, जबकि दंगल, पुष्पा-2 और बाहुबली-2 अब भी आगे हैं। इन आंकड़ों के साथ धुरंधर और धुरंधर 2 के डायरेक्टर आदित्य धर बॉलीवुड के इकलौते निर्देशक बन गए हैं, जिन्होंने 1000 करोड़ से ज्यादा कमाई वाली दो फिल्में दी हैं। उनसे पहले एसएस राजामौली भी बाहुबली और बाहुबली 2 जैसी दो 1000 करोड़ कमाने वाली फिल्में बना चुके हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
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25 मिनट पहले कॉपी लिंक रणवीर सिंह की फिल्म धुरंधर 2 (धुरंधरः द रिवेंज) बॉक्स ऑफिस पर लगातार रिकॉर्ड बना रही है। 13 दिनों में फिल्म ने 1435 करोड़ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन कर लिया और RRR के ऑल टाइम कलेक्शन को पीछे छोड़ दिया। इसके साथ ही यह भारत की चौथी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बन गई है। इंडस्ट्री ट्रैकर सैकनिल्स के अनुसार, फिल्म ने 13वें दिन (दूसरे मंगलवार) 33.22 करोड़ और सोमवार को 30 करोड़ कमाए। इसके साथ वर्ल्डवाइड कलेक्शन 1435 करोड़ और इंडियन कलेक्शन 1077 करोड़ हो गया है। धुरंधर बॉलीवुड की दूसरी हाईएस्ट ग्रॉसिंग फिल्म बनी 1435 करोड़ कलेक्शन के साथ धुरंधर बॉलीवुड की दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बन गई है। इसने अपने पिछले पार्ट का रिकॉर्ड तोड़ा, लेकिन अब भी आमिर खान की दंगल (2200 करोड़) से पीछे है। दंगल की कमाई का बड़ा हिस्सा चीन से आया, जहां करीब 1300 करोड़ मिले, जबकि भारत में 535 करोड़ कमाए थे। भारत की चौथी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी धुरंधर 1435 करोड़ के साथ धुरंधर 2 सभी भाषाओं में भारत की चौथी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बन गई है। इसने RRR और पिछले पार्ट, धुरंधर को पीछे छोड़ा है, जबकि दंगल, पुष्पा-2 और बाहुबली-2 अब भी आगे हैं। इन आंकड़ों के साथ धुरंधर और धुरंधर 2 के डायरेक्टर आदित्य धर बॉलीवुड के इकलौते निर्देशक बन गए हैं, जिन्होंने 1000 करोड़ से ज्यादा कमाई वाली दो फिल्में दी हैं। उनसे पहले एसएस राजामौली भी बाहुबली और बाहुबली 2 जैसी दो 1000 करोड़ कमाने वाली फिल्में बना चुके हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
खड़ी फसल में आग, 50 एकड़ में लगा गेहूं खाक:रायसेन में फायर ब्रिगेड का पानी हुआ खत्म, 25 से ज्यादा ट्रैक्टर चलाए तब पाया काबू

रायसेन में बुधवार दोपहर गेहूं की खड़ी फसल में भीषण आग लग गई। आग में करीब 50 एकड़ में लगी फसल जलकर राख हो गई। आग इतनी तेजी से फैली कि किसानों को संभलने का मौका नहीं मिला। आग की लपटों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए किसानों ने अपनी जान जोखिम में डालकर ट्रैक्टर और पेड़ों की टहनियों का उपयोग कर आग बुझाने का प्रयास किया। देखें तीन तस्वीरें फायर ब्रिगेड का पानी खत्म हुआ घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन के अधिकारी सहित सांची नगर पालिका की दमकल टीमें मौके पर पहुंची लगातार आग बुझाने में जुटी रहीं। इसी बीच फायर ब्रिगेड का पानी भी खत्म हो गया। अभी आग लगने का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट और नरवाई से आग लगा बताया जा रहा है हालांकि किसानों ने बिजली कंपनी पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। इन किसानों के खेतों की फसल जली इस भीषण आग में दीवान सिंह, अवतार सिंह, बदन सिंह, सुरेंद्र पटेल, रामबाबू पटेल, बहादुर सिंह, संदीप ठाकुर, अतर ठाकुर, गोलू ठाकुर, संजू ठाकुर और ओंकार सिंह सहित कई किसानों की फसलें जलकर खाक हो गईं। कटाई से ठीक पहले हुई इस घटना से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। महीनों की मेहनत कुछ ही मिनटों में राख में बदल गई, जिससे उनके सामने अब आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। प्रशासन नुकसान का आकलन कर रहा है।
बगदाद में बीच सड़क से अमेरिकी पत्रकार का अपहरण:जबरन गाड़ी में खींचकर ले गए, अमेरिकी दूतावास ने इराक न जाने की सलाह दी थी

अमेरिका की फ्रीलांस पत्रकार शैली किटल्सन का मंगलवार को इराक की राजधानी बगदाद में अपहरण कर लिया गया। अज्ञात हमलावरों ने शैली को अल-सादून स्ट्रीट पर स्थित बगदाद होटल के पास से अगवा किया। इस घटना से जुड़ा एक वीडियो भी वायरल हो रहा है जिसमें अपराधी, पत्रकार को जबरन गाड़ी में खींचकर ले जाते नजर आ रहे हैं। इराक के गृह मंत्रालय ने भी घटना की पुष्टि की है, हालांकि उसने पत्रकार की पहचान सार्वजनिक नहीं की। मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि एक विदेशी पत्रकार का अज्ञात लोगों ने अपहरण कर लिया, जिसके बाद सुरक्षा बलों को तुरंत कार्रवाई के लिए भेजा गया। न्यूज वेबसाइट अल-मॉनिटर की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी प्रशासन को पहले से सुरक्षा खतरे की जानकारी थी और उसने पत्रकार को इराक की यात्रा न करने की सलाह भी दी थी। शैली किटल्सन युद्ध क्षेत्रों में रिपोर्टिंग के लिए जानी जाती हैं और उन्हें 2017 में प्रेमियो कारावेला अवॉर्ड मिल चुका है। वह मुख्य रूप से मिडिल ईस्ट, खासकर इराक और सीरिया से जुड़ी रिपोर्टिंग करती रही हैं। एक आरोपी गिरफ्तार लेकिन पत्रकार का सुराग नहीं गृह मंत्रालय के अनुसार सुरक्षा बलों ने खुफिया जानकारी के आधार पर अपहरणकर्ताओं का पीछा किया। इस दौरान अपहरण में इस्तेमाल हो रही एक गाड़ी पलट गई, जिससे एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया और कुछ वाहन भी जब्त किए गए। हालांकि पत्रकार को ले जा रही दूसरी गाड़ी मौके से फरार हो गई और वह बगदाद के दक्षिण की ओर निकल गई। दो इराकी सुरक्षा अधिकारियों ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि अपहरण की शिकार पत्रकार एक अमेरिकी महिला हैं। घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें हथियारबंद लोग उनकी गाड़ी रोककर उन्हें जबरन बाहर निकालते दिख रहे हैं। सउदी अरब के चैनल अल-अरबिया ने इस कथित अपहरण का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया है। फिलहाल यह साफ नहीं है कि यह घटना मिडिल ईस्ट में चल रही जंग से जुड़ी है या नहीं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया समूहों द्वारा पहले भी विदेशी नागरिकों और अमेरिकी हितों को निशाना बनाया जाता रहा है। ISIS की हार के बाद की स्टोरी कर चर्चित हुईं शैली अमेरिकी फ्रीलांस पत्रकार शैली किटल्सन उन रिपोर्टर्स में गिनी जाती हैं जो दुनिया के सबसे खतरनाक संघर्ष क्षेत्रों से ग्राउंड रिपोर्टिंग करती हैं। उनका काम मुख्य रूप से मिडिल ईस्ट खासकर इराक और सीरिया पर केंद्रित रहा है। उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए काम किया है। उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य विषय युद्ध और संघर्ष, मिलिशिया समूह, स्थानीय आबादी पर असर और मानवीय संकट रहा है। शैली किटल्सन की सबसे ज्यादा चर्चा उन रिपोर्ट्स को लेकर हुई, जिनमें उन्होंने ISIS के पतन (2017 के बाद) के बाद इराक की स्थिति को ग्राउंड से दिखाया। उस वक्त उन्होंने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि ISIS की हार के बाद जमीनी स्तर पर संघर्ष खत्म नहीं हुआ है और सत्ता का खालीपन बना हुआ है। स्थानीय मिलिशिया इसे भरने की कोशिश में लगे हुए हैं। अमेरिका ने दी थी इराक छोड़ने की सलाह इराक की बिगड़ती सुरक्षा स्थिति को देखते हुए अमेरिका ने अपने नागरिकों को देश छोड़ने की सलाह दी है। बगदाद में अमेरिकी दूतावास ने 29 मार्च को एडवाइजरी जारी करते हुए कहा कि सभी अमेरिकी नागरिक जल्द से जल्द इराक छोड़ दें। दूतावास ने साफ कहा कि इराक में रहना इस समय बहुत खतरनाक है। यहां आतंकवाद, अपहरण और हिंसा का खतरा बढ़ गया है। इससे पहले भी मार्च 2026 की शुरुआत में अमेरिका ने इराक के लिए “Do Not Travel” (लेवल 4) की चेतावनी जारी की थी। इसमें कहा गया था कि किसी भी हाल में इराक की यात्रा न करें। इराक में पहले भी विदेशी नागरिक किडनैप हुए एलिजाबेथ त्सुरकोव- 2023 में बगदाद से लापता हुईं, बाद में एक मिलिशिया समूह के कब्जे में होने की पुष्टि हुई। (2026 तक भी उनकी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है; रिहाई की पुष्टि सार्वजनिक रूप से नहीं हुई है) जिल कैरोल- 2006 में अमेरिकी पत्रकार जिल का रिपोर्टिंग के दौरान अपहरण हुआ। उनके साथ काम करने वाले व्यक्ति की हत्या कर दी गई, हालांकि उन्हें 3 महीने बाद रिहा कर दिया गया। गिउलियाना स्ग्रेना- 2005 में इटली की पत्रकार को उग्रवादियों ने उन्हें बंधक बना लिया, लगभग 1 महीने तक कैद में रखा। बाद में रिहा कर दिया गया। जुनपेई यासुदा- 2004 में जापानी पत्रकार को जासूसी के शक में अगवा किया गया, हालांकि कुछ दिनों में ही छोड़ दिया गया। प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में इराक की स्थिति चिंताजनक अंतरराष्ट्रीय संगठन रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (RSF) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 के वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में इराक को 180 देशों में 155वां स्थान मिला है। हालांकि यह पिछले सालों के मुकाबले थोड़ा सुधार दिखाता है, लेकिन स्थिति अभी भी चिंता का विषय है। रिपोर्ट में इराक को ‘बहुत गंभीर’ श्रेणी में रखा गया है। इसका मतलब है कि वहां पत्रकारों को काम करते समय कई तरह के खतरे और दबाव का सामना करना पड़ता है।
बगदाद में बीच सड़क से अमेरिकी पत्रकार का अपहरण:जबरन गाड़ी में खींचकर ले गए; अमेरिकी दूतावास ने इराक न जाने की सलाह दी थी

अमेरिका की फ्रीलांस पत्रकार शैली किटल्सन का मंगलवार को इराक की राजधानी बगदाद में अपहरण कर लिया गया। अज्ञात हमलावरों ने शैली को अल-सादून स्ट्रीट पर स्थित बगदाद होटल के पास से अगवा किया। इस घटना से जुड़ा एक वीडियो भी वायरल हो रहा है जिसमें अपराधी, पत्रकार को जबरन गाड़ी में खींचकर ले जाते नजर आ रहे हैं। इराक के गृह मंत्रालय ने भी घटना की पुष्टि की है, हालांकि उसने पत्रकार की पहचान सार्वजनिक नहीं की। मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि एक विदेशी पत्रकार का अज्ञात लोगों ने अपहरण कर लिया, जिसके बाद सुरक्षा बलों को तुरंत कार्रवाई के लिए भेजा गया। कुछ समय से वह न्यूज वेबसाइट अल-मॉनिटर के लिए रिपोर्टिंग कर रही थी। इसी वेबसाइट के मुताबिक अमेरिकी सरकार ने पत्रकार को सुरक्षा वजहों से इराक की यात्रा न करने की सलाह भी दी थी। शैली किटल्सन युद्ध क्षेत्रों में रिपोर्टिंग के लिए जानी जाती हैं और उन्हें 2017 में प्रेमियो कारावेला अवॉर्ड मिल चुका है। वह मुख्य रूप से मिडिल ईस्ट, खासकर इराक और सीरिया से जुड़ी रिपोर्टिंग करती रही हैं। एक आरोपी गिरफ्तार लेकिन पत्रकार का सुराग नहीं गृह मंत्रालय के अनुसार सुरक्षा बलों ने खुफिया जानकारी के आधार पर अपहरणकर्ताओं का पीछा किया। इस दौरान अपहरण में इस्तेमाल हो रही एक गाड़ी पलट गई, जिससे एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया और कुछ वाहन भी जब्त किए गए। हालांकि पत्रकार को ले जा रही दूसरी गाड़ी मौके से फरार हो गई और वह बगदाद के दक्षिण की ओर निकल गई। दो इराकी सुरक्षा अधिकारियों ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि अपहरण की शिकार पत्रकार एक अमेरिकी महिला हैं। घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें हथियारबंद लोग उनकी गाड़ी रोककर उन्हें जबरन बाहर निकालते दिख रहे हैं। सउदी अरब के चैनल अल-अरबिया ने इस कथित अपहरण का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया है। इराकी मिलिशिया कतीब हिजबुल्लाह पर आरोप फिलहाल यह साफ नहीं है कि यह घटना मिडिल ईस्ट में चल रही जंग से जुड़ी है या नहीं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया समूहों द्वारा पहले भी विदेशी नागरिकों और अमेरिकी हितों को निशाना बनाया जाता रहा है। CNN से जुड़े वॉर एक्सपर्ट एलेक्स प्लिटास ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि किटल्सन को ईरान समर्थित इराकी मिलिशिया कतीब हिजबुल्लाह ने अगवा किया है। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यह ग्रुप ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के करीब माना जाता है। इराक में यह पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्स (PMF) का हिस्सा है। PMF को इराक सरकार ने ISIS के खिलाफ लड़ाई के दौरान आधिकारिक दर्जा दिया था। ISIS की हार के बाद की स्टोरी कर चर्चित हुईं शैली अमेरिकी फ्रीलांस पत्रकार शैली किटल्सन उन रिपोर्टर्स में गिनी जाती हैं जो दुनिया के सबसे खतरनाक संघर्ष क्षेत्रों से ग्राउंड रिपोर्टिंग करती हैं। उनका काम मुख्य रूप से मिडिल ईस्ट खासकर इराक और सीरिया पर केंद्रित रहा है। उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए काम किया है। उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य विषय युद्ध और संघर्ष, मिलिशिया समूह, स्थानीय आबादी पर असर और मानवीय संकट रहा है। शैली किटल्सन की सबसे ज्यादा चर्चा उन रिपोर्ट्स को लेकर हुई, जिनमें उन्होंने ISIS के पतन (2017 के बाद) के बाद इराक की स्थिति को ग्राउंड से दिखाया। उस वक्त उन्होंने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि ISIS की हार के बाद जमीनी स्तर पर संघर्ष खत्म नहीं हुआ है और सत्ता का खालीपन बना हुआ है। स्थानीय मिलिशिया इसे भरने की कोशिश में लगे हुए हैं। अमेरिका ने दी थी इराक छोड़ने की सलाह इराक की बिगड़ती सुरक्षा स्थिति को देखते हुए अमेरिका ने अपने नागरिकों को देश छोड़ने की सलाह दी है। बगदाद में अमेरिकी दूतावास ने 29 मार्च को एडवाइजरी जारी करते हुए कहा कि सभी अमेरिकी नागरिक जल्द से जल्द इराक छोड़ दें। दूतावास ने साफ कहा कि इराक में रहना इस समय बहुत खतरनाक है। यहां आतंकवाद, अपहरण और हिंसा का खतरा बढ़ गया है। इससे पहले भी मार्च 2026 की शुरुआत में अमेरिका ने इराक के लिए “Do Not Travel” (लेवल 4) की चेतावनी जारी की थी। इसमें कहा गया था कि किसी भी हाल में इराक की यात्रा न करें। इराक में पहले भी विदेशी नागरिक किडनैप हुए एलिजाबेथ त्सुरकोव- 2023 में बगदाद से लापता हुईं, बाद में एक मिलिशिया समूह के कब्जे में होने की पुष्टि हुई। (2026 तक भी उनकी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है; रिहाई की पुष्टि सार्वजनिक रूप से नहीं हुई है) जिल कैरोल- 2006 में अमेरिकी पत्रकार जिल का रिपोर्टिंग के दौरान अपहरण हुआ। उनके साथ काम करने वाले व्यक्ति की हत्या कर दी गई, हालांकि उन्हें 3 महीने बाद रिहा कर दिया गया। गिउलियाना स्ग्रेना- 2005 में इटली की पत्रकार को उग्रवादियों ने उन्हें बंधक बना लिया, लगभग 1 महीने तक कैद में रखा। बाद में रिहा कर दिया गया। जुनपेई यासुदा- 2004 में जापानी पत्रकार को जासूसी के शक में अगवा किया गया, हालांकि कुछ दिनों में ही छोड़ दिया गया। प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में इराक की स्थिति चिंताजनक अंतरराष्ट्रीय संगठन रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (RSF) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 के वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में इराक को 180 देशों में 155वां स्थान मिला है। हालांकि यह पिछले सालों के मुकाबले थोड़ा सुधार दिखाता है, लेकिन स्थिति अभी भी चिंता का विषय है। रिपोर्ट में इराक को ‘बहुत गंभीर’ श्रेणी में रखा गया है। इसका मतलब है कि वहां पत्रकारों को काम करते समय कई तरह के खतरे और दबाव का सामना करना पड़ता है।
‘ज्वार के विपरीत तैरना पसंद’: क्यों अधीर रंजन चौधरी चुनाव के लिए बहरामपुर लौट आए हैं | चुनाव समाचार

आखरी अपडेट:01 अप्रैल, 2026, 13:28 IST वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने आगामी चुनाव को नियमित चुनावी लड़ाई के बजाय एक व्यापक वैचारिक प्रतियोगिता बताया और कहा कि वह धर्मनिरपेक्षता में विश्वास करते हैं। अधीर रंजन चौधरी (लाल रंग में) बहरामपुर में एक रैली के लिए। (न्यूज़18) वरिष्ठ कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए बहरामपुर से औपचारिक रूप से अपना अभियान शुरू कर दिया है, जो लंबे संसदीय करियर के बाद राज्य स्तरीय चुनावी राजनीति में वापसी का संकेत है। बहरामपुर से पांच बार सांसद रहे चौधरी 2024 के लोकसभा चुनाव में यूसुफ पठान से सीट हार गए। हार के बाद, कांग्रेस नेतृत्व ने उन्हें उसी राजनीतिक आधार से विधानसभा चुनाव लड़ने का काम सौंपा है, जिस निर्वाचन क्षेत्र का उन्होंने दशकों से प्रतिनिधित्व किया है। विधानसभा राजनीति को लौटें विधानसभा चुनाव लड़ने के अपने फैसले को स्पष्ट करते हुए, चौधरी ने खुद को मौजूदा राजनीतिक रुझानों के विरोध में खड़ा किया। उन्होंने कहा, “मैंने हमेशा धारा के विपरीत तैरना पसंद किया है। वर्तमान राजनीतिक माहौल अत्यधिक ध्रुवीकृत है, प्रमुख दल विभाजन के माध्यम से वोटों को मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं। मेरा उद्देश्य लोगों के लिए काम करना है, जो मैंने लगातार किया है।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उनकी राजनीतिक स्थिति धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों पर आधारित है। उन्होंने कहा, “मैं धर्मनिरपेक्षता में विश्वास करता हूं। मैंने इस प्रतियोगिता में प्रवेश किया है क्योंकि मेरा मानना है कि लोग अभी भी इन सिद्धांतों को महत्व देते हैं और उसी के अनुसार मतदान करेंगे। बहरामपुर मेरे लिए नया नहीं है, इस निर्वाचन क्षेत्र के साथ मेरा पुराना जुड़ाव है। इस बार, मैं यहां से विधानसभा चुनाव लड़ूंगा।” प्रतियोगिता को वैचारिक लड़ाई के रूप में तैयार किया गया चौधरी ने आगामी चुनाव को एक नियमित चुनावी लड़ाई के बजाय एक व्यापक वैचारिक प्रतियोगिता के रूप में तैयार किया। उनके अनुसार, वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य प्रतिस्पर्धी राजनीतिक ताकतों द्वारा धार्मिक और सामाजिक ध्रुवीकरण के प्रयासों से चिह्नित है। उन्होंने तर्क दिया कि उनका अभियान शासन और बुनियादी सार्वजनिक जरूरतों पर ध्यान केंद्रित करके उस कथा का मुकाबला करना चाहता है। उन्होंने कहा, “लोग अंततः अपनी मूलभूत आवश्यकताओं के आधार पर मतदान करते हैं। आजीविका, विकास और सेवाओं तक पहुंच जैसे मुद्दे विभाजनकारी राजनीति से अधिक मायने रखते हैं।” मुर्शिदाबाद में अल्पसंख्यक राजनीति पर बाबरी से संबंधित लामबंदी और असदुद्दीन ओवैसी जैसे नेताओं की भूमिका सहित मुर्शिदाबाद में राजनीतिक घटनाक्रम पर सवालों को संबोधित करते हुए, चौधरी ने किसी भी महत्वपूर्ण चुनावी प्रभाव की संभावना को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “ऐसे मुद्दे मुर्शिदाबाद में कोई असर नहीं डालेंगे। इन कथाओं के जरिए मतदाताओं को प्रभावित करने की राजनीतिक कोशिशें सफल नहीं होंगी। लोग जागरूक हैं और उनके बहकावे में नहीं आएंगे।” ‘धर्मनिरपेक्षता कायम रहेगी’ यह पूछे जाने पर कि क्या उनकी 2024 की हार क्षेत्र में धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक स्थान के कमजोर होने का संकेत देती है, चौधरी ने इस व्याख्या को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “धर्मनिरपेक्षता एक स्थायी विचारधारा है; इसे ख़त्म नहीं किया जा सकता। मेरी राजनीतिक लड़ाई इसी विश्वास पर केंद्रित है। मुझे विश्वास है कि लोग इन मूल्यों का समर्थन करना जारी रखेंगे।” मतदाता सूची पुनरीक्षण (एसआईआर) पर चिंताएं चौधरी ने भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के संबंध में विशेष चिंताएं उठाईं। उन्होंने कुछ विलोपनों के आधार पर सवाल उठाया और प्रक्रिया में पारदर्शिता का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “चुनाव आयोग को स्पष्ट करना चाहिए कि इस अभ्यास के दौरान उन्होंने कितने रोहिंग्या व्यक्तियों की पहचान की है। जबकि मतदाता सूची का पुनरीक्षण एक नियमित और आवश्यक प्रक्रिया है, प्रामाणिक मतदाताओं का नाम हटाना एक गंभीर चिंता का विषय है।” उन्होंने फरक्का विधानसभा क्षेत्र के एक उदाहरण का हवाला देते हुए दावा किया कि कांग्रेस उम्मीदवार का नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया था, जबकि उनके बेटे का नाम बना हुआ था। उन्होंने कहा, “हमने इस मुद्दे को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया है। यदि बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाता नाम हटाए जाने के कारण अपना वोट नहीं डाल पाते हैं, तो यह चुनावी प्रक्रिया की अखंडता और उद्देश्य के बारे में बुनियादी चिंताएं पैदा करता है।” अभियान फोकस चौधरी ने संकेत दिया कि उनका अभियान क्षेत्र में उनकी लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक उपस्थिति का लाभ उठाते हुए, बहरामपुर में प्रत्यक्ष मतदाता पहुंच पर ध्यान केंद्रित करेगा। उन्होंने दोहराया कि उनका केंद्रीय संदेश धर्मनिरपेक्षता, शासन और मतदाता अधिकारों की सुरक्षा के इर्द-गिर्द घूमेगा। जगह : कोलकाता (कलकत्ता), भारत, भारत पहले प्रकाशित: 01 अप्रैल, 2026, 13:28 IST समाचार चुनाव ‘ज्वार के विपरीत तैरना पसंद करते हैं’: क्यों अधीर रंजन चौधरी चुनाव के लिए बहरामपुर लौट आए हैं अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट) अधीर रंजन चौधरी बहरामपुर अभियान (टी) पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (टी) बहरामपुर निर्वाचन क्षेत्र की राजनीति (टी) कांग्रेस नेता अधीर रंजन (टी) विधानसभा राजनीति में वापसी (टी) भारतीय राजनीति में धर्मनिरपेक्षता (टी) मुर्शिदाबाद अल्पसंख्यक राजनीति (टी) चुनावी रोल संशोधन एसआईआर
उज्जैन में विद्यार्थियों का तिलक लगाकर स्वागत हुआ:कलेक्टर उत्कृष्ट स्कूल के मुख्य आयोजन में शामिल; 4 अप्रैल तक स्कूल चलें हम अभियान

एक अप्रैल से शुरू हुए नवीन शिक्षण सत्र 2026-27 के तहत उज्जैन जिले के स्कूलों में प्रवेश उत्सव मनाया गया। बुधवार को विद्यार्थियों को तिलक लगाकर स्कूलों में प्रवेश दिलाया गया। दशहरा मैदान स्कूल और शास्त्री नगर स्थित उत्कृष्ट स्कूल में मुख्य कार्यक्रम आयोजित हुए, जिसमें जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के अधिकारी शामिल हुए। जिले का मुख्य कार्यक्रम शासकीय उत्कृष्ट उमावि माधवनगर में आयोजित किया गया। इसमें कलेक्टर रौशन सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष कलावती यादव, सीईओ श्रेयांश कुमुट और शिक्षा विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में राज्य स्तरीय संबोधन का सीधा प्रसारण भी दिखाया गया। चार अप्रैल तक चलेंगे दैनिक आयोजन एडीपीसी गिरीश तिवारी ने बताया कि “स्कूल चलें हम” अभियान एक से चार अप्रैल तक चलेगा। इस दौरान प्रतिदिन स्कूलों में अलग-अलग गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। ब्लॉक स्तर पर भी उत्कृष्ट स्कूलों में कार्यक्रम आयोजित किए गए। विद्यार्थियों को पुस्तक और साइकिल वितरण अभियान के तहत विद्यार्थियों का स्वागत कर उन्हें पाठ्यपुस्तकें वितरित की गईं। पात्र विद्यार्थियों को साइकिल भी दी गई। सभी स्कूलों को निर्देश दिए गए कि कोई भी बच्चा प्रवेश से वंचित न रहे। दो अप्रैल को शाला स्तर पर पालकों के साथ पीटीएम, सांस्कृतिक और खेलकूद गतिविधियां आयोजित होंगी। इसमें अभिभावकों को शासकीय योजनाओं की जानकारी दी जाएगी और 85% से अधिक उपस्थिति वाले विद्यार्थियों के पालकों का सम्मान किया जाएगा। चार अप्रैल को ‘भविष्य से भेंट’ कार्यक्रम चार अप्रैल को “भविष्य से भेंट” कार्यक्रम आयोजित होगा। इसके तहत कलेक्टर सहित 91 अधिकारी विभिन्न स्कूलों में पहुंचकर विद्यार्थियों से संवाद करेंगे और उन्हें पढ़ाई के महत्व के बारे में बताएंगे।
पीएम मोदी ने असम के चाय बगान में पत्ती तोड़ी:महिला कामगार के साथ सेल्फी ली; केरलम में राहुल ने बस में सफर किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को असम पहुंचे। उन्होंने डिब्रूगढ़ में चाय बागान दौरा किया। वहां काम करने वाली महिलाओं से साथ बातचीत, उनसे चाय की पत्नी तोड़ना सीखा, साथ ही महिलाओं ने बिहू नृत्य भी किया। पीएम ने उनके साथ सेल्फी भी ली। वहीं, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 31 मार्च को केरलम का दौरा किया। उन्होंने कोझिकोड के बालुसेरी से नानमंडा तक बस में आम लोगों के साथ सफर किया। इस दौरान उन्होंने कई महिलाओं, युवाओं से बातचीत की। मोदी के चाय बगान दौरे की फोटोज… राहुल के केरलम दौरे की तस्वीरें…
अगर एक बार स्पर्म काउंट जीरो हो जाए तो क्या दोबारा बढ़ सकता है? IVF स्पेशलिस्ट से जान लीजिए

Last Updated:April 01, 2026, 13:06 IST Azoospermia Problem in Men: कई पुरुषों का स्पर्म काउंट जीरो हो जाता है और इसकी वजह से पिता बनने में परेशानी आने लगती है. डॉक्टर सोनाली गुप्ता के अनुसार स्पर्म काउंट जीरो होने की वजह का पता लग जाए, तो अधिकतर मामलों में इसे रिवर्स किया जा सकता है. दवाओं, सर्जरी और कुछ तरीकों से स्पर्म काउंट दोबारा बढ़ाया जा सकता है. डॉ. सोनाली गुप्ता के मुताबिक अधिकतर मामलों में सही ट्रीटमेंट से स्पर्म काउंट बढ़ाया जा सकता है. Can Zero Sperm Count Be Reversed: आज के जमाने में अधिकतर लोगों की लाइफस्टाइल और खानपान बिगड़ गया है. लोगों के सोने-जागने का रूटीन खराब हो गया है और स्ट्रेस हद से ज्यादा झेलना पड़ रहा है. इसका सीधा असर पुरुषों की फर्टिलिटी पर भी पड़ रहा है. कई युवा जीरो स्पर्म काउंट जैसी समस्या का शिकार हो रहे हैं. इसे मेडिकल की भाषा में एजोस्पर्मिया कहा जाता है. डॉक्टर्स की मानें तो जब किसी पुरुष की सीमेन रिपोर्ट में एक भी लाइव स्पर्म नहीं मिलता, तो इसे जीरो स्पर्म काउंट माना जाता है. ऐसी कंडीशन में सबसे पहले इसकी वजह का पता लगाया जाता है और फिर उसके अनुसार ट्रीटमेंट किया जाता है. वक्त रहते ट्रीटमेंट कराया जाए, तो अधिकतर मामलों में इस कंडीशन को रिवर्स किया जा सकता है. ग्रेटर नोएडा के Bliss आईवीएफ एंड गायनी केयर सेंटर की स्पेशलिस्ट डॉ. सोनाली गुप्ता ने News18 को बताया कि सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि स्पर्म काउंट जीरो होने का कारण क्या है. कई बार शरीर में स्पर्म बनता है, लेकिन किसी रुकावट के कारण बाहर नहीं आ पाता है. इस कंडीशन को ऑब्स्ट्रक्टिव एजोस्पर्मिया कहा जाता है. ब्लॉकेज की कंडीशन में सर्जरी से रुकावट दूर कर दी जाती है. कई मामलों में इंजेक्शन के जरिए टेस्टिकल्स से सीधे स्पर्म निकाल लिए जाते हैं. इसका इस्तेमाल करके IVF के जरिए बच्चा पैदा किया जाता है. इस कंडीशन के अधिकतर मरीज IVF की मदद से आसानी से पिता बन सकते हैं. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. डॉक्टर ने बताया कि कई मामलों में नॉन-ऑब्स्ट्रक्टिव एजोस्पर्मिया की कंडीशन पैदा हो जाती है. इसमें स्पर्म बनना ही बंद हो जाता है. आमतौर पर सीवियर इंफेक्शन, बुखार, टॉक्सिसिटी, हॉट वॉटर बाथ, लैपटॉप-मोबाइल गोद में रखने जैसे फैक्टर्स की वजह से यह कंडीशन पैदा होती है. इसमें बीमारियों का ट्रीटमेंट किया जाता है और इसके बाद अधिकतर मामलों में स्पर्म प्रोडक्शन शुरू हो जाता है. कुछ मामलों में जीरो स्पर्म काउंट का मुख्य कारण हार्मोनल असंतुलन होता है. शरीर में टेस्टोस्टेरोन, FSH और LH का स्तर कम होने पर शुक्राणुओं का निर्माण प्रभावित होता है. फर्टिलिटी विशेषज्ञ ब्लड टेस्ट के जरिए इन हार्मोन्स की जांच करते हैं. अगर समस्या हार्मोनल हो, तो दवाओं और इंजेक्शन के माध्यम से स्पर्म प्रोडक्शन को फिर से शुरू किया जा सकता है. आईवीएफ स्पेशलिस्ट के मुताबिक अगर स्पर्म काउंट की समस्या का कारण तनाव, स्मोकिंग, शराब या गलत आदतें हैं, तो इसमें सुधार की पूरी संभावना रहती है. लंबे समय तक लैपटॉप गोद में रखना या बहुत टाइट कपड़े पहनना अंडकोष का तापमान बढ़ा देता है, जिससे स्पर्म निर्माण प्रभावित होता है. नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और नशे से दूरी बनाकर स्पर्म की क्वालिटी और काउंट दोनों में सुधार किया जा सकता है. आजकल बहुत सी तकनीक मौजूद हैं, जिनकी मदद से इस समस्या से निजात मिल सकती है. हालांकि लंबे समय तक इस समस्या को इग्नोर करने से स्पर्म काउंट हमेशा के लिए जीरो हो सकता है. ऐसे में लोगों को वक्त रहते अपनी जांच करानी चाहिए, ताकि सही समय पर ट्रीटमेंट शुरू किया जा सके. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : April 01, 2026, 13:06 IST









