Saturday, 13 Jun 2026 | 11:03 PM

Trending :

कॉन्टैक्ट लेंस सुरक्षा: आपकी आँखों में कांटेक्ट लेंस क्या हैं? जान लें कि इसे काफी देर तक सुरक्षित रखा जा सकता है क्रिकेटर ऋषभ पंत ने किए आदि कैलाश के दर्शन:आईटीबीपी जवानों के साथ मिलकर बढ़ाया हौसला, स्थानीय लोगों और प्रशंसकों के साथ तस्वीरें खिंचवाईं एंथ्रोपिक का सबसे एडवांस्ड AI मॉडल दुनियाभर में बंद:अमेरिकी सरकार को साइबर हमले का डर, विदेशी नागरिकों तक पहुंच रोकने का आदेश दिया था एंथ्रोपिक का सबसे एडवांस्ड AI मॉडल दुनियाभर में बंद:अमेरिकी सरकार को साइबर हमले का डर, विदेशी नागरिकों तक पहुंच रोकने का आदेश दिया था कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी का पारंपरिक इलाज- चॉकलेट से इलाज! 3 लाख करोड़ रुपए का इलाज करा चुके हैं ‘जड़ी-मजबूत की रानी’ पद्मश्री यानुंग जामोह मूंग दाल टिक्की रेसिपी: समोसा-पकौड़ा से भर गया मन, तो कम तेल में बनी टोकरी और कुरकुरी मूंग दाल टिक्की; विधि नोट करें
EXCLUSIVE

‘धुरंधर’ को लेकर प्रेशर नहीं, बल्कि एन्करेजमेंट महसूस होता है:‘तीन कौवे’ की डायरेक्टर प्रियंका घोष बोलीं- इस जॉनर में पहले भी काम किया है

‘धुरंधर’ को लेकर प्रेशर नहीं, बल्कि एन्करेजमेंट महसूस होता है:‘तीन कौवे’ की डायरेक्टर प्रियंका घोष बोलीं- इस जॉनर में पहले भी काम किया है

वेब सीरीज ‘द नाइट मैनेजर’, ‘द रॉयल्स’ और ‘ब्रोकेन बट ब्यूटिफुल’ जैसी परियोजनाओं के बाद डायरेक्टर प्रियंका घोष अब अपने नए प्रोजेक्ट ‘तीन कौवे’ के साथ सामने आ रही हैं। थ्रिलर और स्पाई जॉनर में उनकी पकड़ मानी जाती है। हमने उनसे इस सीरीज के आइडिया से लेकर मेकिंग तक की पूरी प्रक्रिया पर बातचीत की। ‘तीन कौवे’ का आइडिया कैसे आया? फिक्शनल है या रियल स्टोरी से प्रेरित? ये पूरी तरह फिक्शनल स्टोरी है। इसका आइडिया राइटर और क्रिएटर अब्बास टायरवाला ने 7–8 साल पहले सोचा था और इसे लंबी प्रक्रिया में डेवलप किया। जैसे-जैसे कहानी बढ़ी, किरदार और दुनिया बड़ी हुई। अंत में इसे फिल्म की बजाय सीरीज के लिए बेहतर माना गया। सिद्धार्थ रॉय कपूर के साथ अब्बास ने मुझे डायरेक्टर और को-क्रिएटर के तौर पर जोड़ा। ‘धुरंधर’ की सफलता के बाद सेम जॉनर की ‘तीन कौवे’ को लेकर कोई प्रेशर महसूस हुआ? प्रेशर नहीं, बल्कि एन्करेजमेंट महसूस होता है। इस जॉनर में पहले भी काम किया है, जैसे ‘द नाइट मैनेजर’। हर जॉनर की अलग टोन और कहानी होती है। ‘तीन कौवे’ की दुनिया, किरदार और टोन पूरी तरह अलग हैं। बॉबी देओल और कबीर बेदी जैसी बड़ी कास्ट को कैसे ऑनबोर्ड किया गया? कास्टिंग डायरेक्टर के साथ कई ऑप्शन्स देखे। प्रोड्यूसर, राइटर और अमेजन प्राइम के साथ डिस्कशन के बाद एक्टर्स को नैरेशन दिया। सौभाग्य रहा कि जिनको चाहिए थे, सभी ने एक्साइटमेंट के साथ हां कहा। ‘तीन कौवे’ टाइटल का मतलब? अभी खुलासा नहीं कर सकती। ट्रेलर आने पर धीरे-धीरे पता चलेगा। टीजर में दिख रहे चेहरे जरूरी नहीं कि वही ‘तीन कौवे’ हों। शूटिंग के दौरान सबसे बड़ी चुनौतियां क्या रहीं? पूरा साल शूटिंग में लगा। एक्टर्स की हेल्थ प्रॉब्लम्स, मार्च में बारिश, लद्दाख में तूफान- सबके बावजूद टीम ने पूरा सहयोग किया। इंडियन आर्मी की मदद से नेटवर्क बाधा दूर हुई। विजुअल ट्रीटमेंट और म्यूजिक में क्या खास किया गया? कहानी को सही ढंग से पेश करना प्राथमिकता थी। प्री-प्रोडक्शन में विजुअल, साउंड और म्यूजिक पर बारीकी से काम किया गया। एक्शन डायरेक्टर एजाज गुलाब और फ्रांस के मार्शल आर्ट एक्सपर्ट यानिक बेन की मदद से ‘हैंड-टू-हैंड कॉम्बैट’ सीक्वेंस बनाए। साउंड और म्यूजिक का तालमेल कैसे रखा गया? अचिंत ठक्कर और पार्थ पारेख के साथ काम किया। एडिटिंग के दौरान हर सीक्वेंस का पेस और मूड सुनिश्चित किया गया। सीरीज में सस्पेंस बनाए रखने के लिए कोई खास तकनीक? कहानी तीन बार लिखी जाती है- राइटिंग, शूटिंग और एडिटिंग में। एडिटिंग के दौरान हर ट्विस्ट और टेंशन पर ध्यान दिया गया ताकि दर्शक अंत तक जुड़ा रहे। भारतीय स्पाई प्रोजेक्ट्स हॉलीवुड के स्केल तक पहुंच सकते हैं? हॉलीवुड की बड़ी फ्रेंचाइज के बजट से मुकाबला मुश्किल है, लेकिन हम कम बजट में भी क्वालिटी में पीछे नहीं हैं। ‘धुरंधर’, ‘पठान’, ‘वॉर’ जैसी फिल्में और ‘द फैमिली मैन’, ‘स्पेशल ऑप्स’ जैसी सीरीज इस बात का उदाहरण हैं। शूटिंग लोकेशन्स कौन-कौन सी थीं? सीरीज पूरी तरह भारत आधारित है। मुंबई, लद्दाख, गोवा, पुणे, वाई और महाबलेश्वर जैसी लोकेशन्स पर शूटिंग हुई।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
विश्व जल दिवस पर मैनिट में ‘जल पर चर्चा’:जल प्रबंधन और समान वितरण पर विशेषज्ञ करेंगे मंथन

March 22, 2026/
5:50 am

भोपाल स्थित मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान में विश्व जल दिवस के अवसर पर 22 मार्च को ‘जल पर चर्चा’...

खाने का तेल अब 9 स्टैंडर्ड पैक-साइज में ही मिलेगा:कंपनियों को वॉल्यूम के साथ वजन लिखना भी जरूरी, 3 महीने में लागू होंगे नए नियम

June 6, 2026/
8:06 pm

डिपार्टमेंट ऑफ कंज्यूमर अफेयर्स ने शनिवार को लीगल मेट्रोलॉजी फ्रेमवर्क के तहत खाने वाले तेल के लिए स्टैंडर्ड पैक साइज...

Tamim Iqbal Calls WC Omission Injustice

May 12, 2026/
8:15 am

ढाका2 घंटे पहले कॉपी लिंक बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) के अंतरिम अध्यक्ष और पूर्व कप्तान तमीम इकबाल ने टी-20 वर्ल्ड...

डायरेक्टर आदित्य धर बोले-धुरंधर 2 के स्पॉयलर शेयर न करें:कहा- फैंस फिल्म के सरप्राइज और सस्पेंस को खराब न होने दें

March 18, 2026/
2:33 pm

रणवीर सिंह स्टारर फिल्म ‘धुरंधर: द रिवेंज’ की रिलीज से कुछ घंटे पहले डायरेक्टर आदित्य धर ने फैंस से एक...

ईरान बोला- दुश्मनों को होर्मुज इस्तेमाल नहीं करने देंगे:इस पर हमारा कंट्रोल, दखल बर्दाश्त नहीं; अमेरिका-ईरान 60 दिन के सीजफायर पर सहमत

May 29, 2026/
6:48 am

ईरान ने कहा है कि वह होर्मुज स्ट्रेट का इस्तेमाल अपने खिलाफ सैन्य कार्रवाई के लिए नहीं होने देगा। UN...

सेंट्रल यूनिवर्सिटी में विद्यार्थियों ने की भूख हड़ताल:सागर में महर्षि पतंजलि भवन से योग शिक्षा विभाग को शिफ्ट किए जाने का कर रहे विरोध

March 24, 2026/
6:51 pm

सागर के डॉ हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय में विद्यार्थी भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उन्होंने बताया कि योग शिक्षा विभाग...

Delhi CM Argues Own Case

April 6, 2026/
3:13 am

नई दिल्ली3 घंटे पहले कॉपी लिंक 27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट से बरी होने के बाद केजरीवाल अपने घर पहुंचे...

राजनीति

‘धुरंधर’ को लेकर प्रेशर नहीं, बल्कि एन्करेजमेंट महसूस होता है:‘तीन कौवे’ की डायरेक्टर प्रियंका घोष बोलीं- इस जॉनर में पहले भी काम किया है

‘धुरंधर’ को लेकर प्रेशर नहीं, बल्कि एन्करेजमेंट महसूस होता है:‘तीन कौवे’ की डायरेक्टर प्रियंका घोष बोलीं- इस जॉनर में पहले भी काम किया है

वेब सीरीज ‘द नाइट मैनेजर’, ‘द रॉयल्स’ और ‘ब्रोकेन बट ब्यूटिफुल’ जैसी परियोजनाओं के बाद डायरेक्टर प्रियंका घोष अब अपने नए प्रोजेक्ट ‘तीन कौवे’ के साथ सामने आ रही हैं। थ्रिलर और स्पाई जॉनर में उनकी पकड़ मानी जाती है। हमने उनसे इस सीरीज के आइडिया से लेकर मेकिंग तक की पूरी प्रक्रिया पर बातचीत की। ‘तीन कौवे’ का आइडिया कैसे आया? फिक्शनल है या रियल स्टोरी से प्रेरित? ये पूरी तरह फिक्शनल स्टोरी है। इसका आइडिया राइटर और क्रिएटर अब्बास टायरवाला ने 7–8 साल पहले सोचा था और इसे लंबी प्रक्रिया में डेवलप किया। जैसे-जैसे कहानी बढ़ी, किरदार और दुनिया बड़ी हुई। अंत में इसे फिल्म की बजाय सीरीज के लिए बेहतर माना गया। सिद्धार्थ रॉय कपूर के साथ अब्बास ने मुझे डायरेक्टर और को-क्रिएटर के तौर पर जोड़ा। ‘धुरंधर’ की सफलता के बाद सेम जॉनर की ‘तीन कौवे’ को लेकर कोई प्रेशर महसूस हुआ? प्रेशर नहीं, बल्कि एन्करेजमेंट महसूस होता है। इस जॉनर में पहले भी काम किया है, जैसे ‘द नाइट मैनेजर’। हर जॉनर की अलग टोन और कहानी होती है। ‘तीन कौवे’ की दुनिया, किरदार और टोन पूरी तरह अलग हैं। बॉबी देओल और कबीर बेदी जैसी बड़ी कास्ट को कैसे ऑनबोर्ड किया गया? कास्टिंग डायरेक्टर के साथ कई ऑप्शन्स देखे। प्रोड्यूसर, राइटर और अमेजन प्राइम के साथ डिस्कशन के बाद एक्टर्स को नैरेशन दिया। सौभाग्य रहा कि जिनको चाहिए थे, सभी ने एक्साइटमेंट के साथ हां कहा। ‘तीन कौवे’ टाइटल का मतलब? अभी खुलासा नहीं कर सकती। ट्रेलर आने पर धीरे-धीरे पता चलेगा। टीजर में दिख रहे चेहरे जरूरी नहीं कि वही ‘तीन कौवे’ हों। शूटिंग के दौरान सबसे बड़ी चुनौतियां क्या रहीं? पूरा साल शूटिंग में लगा। एक्टर्स की हेल्थ प्रॉब्लम्स, मार्च में बारिश, लद्दाख में तूफान- सबके बावजूद टीम ने पूरा सहयोग किया। इंडियन आर्मी की मदद से नेटवर्क बाधा दूर हुई। विजुअल ट्रीटमेंट और म्यूजिक में क्या खास किया गया? कहानी को सही ढंग से पेश करना प्राथमिकता थी। प्री-प्रोडक्शन में विजुअल, साउंड और म्यूजिक पर बारीकी से काम किया गया। एक्शन डायरेक्टर एजाज गुलाब और फ्रांस के मार्शल आर्ट एक्सपर्ट यानिक बेन की मदद से ‘हैंड-टू-हैंड कॉम्बैट’ सीक्वेंस बनाए। साउंड और म्यूजिक का तालमेल कैसे रखा गया? अचिंत ठक्कर और पार्थ पारेख के साथ काम किया। एडिटिंग के दौरान हर सीक्वेंस का पेस और मूड सुनिश्चित किया गया। सीरीज में सस्पेंस बनाए रखने के लिए कोई खास तकनीक? कहानी तीन बार लिखी जाती है- राइटिंग, शूटिंग और एडिटिंग में। एडिटिंग के दौरान हर ट्विस्ट और टेंशन पर ध्यान दिया गया ताकि दर्शक अंत तक जुड़ा रहे। भारतीय स्पाई प्रोजेक्ट्स हॉलीवुड के स्केल तक पहुंच सकते हैं? हॉलीवुड की बड़ी फ्रेंचाइज के बजट से मुकाबला मुश्किल है, लेकिन हम कम बजट में भी क्वालिटी में पीछे नहीं हैं। ‘धुरंधर’, ‘पठान’, ‘वॉर’ जैसी फिल्में और ‘द फैमिली मैन’, ‘स्पेशल ऑप्स’ जैसी सीरीज इस बात का उदाहरण हैं। शूटिंग लोकेशन्स कौन-कौन सी थीं? सीरीज पूरी तरह भारत आधारित है। मुंबई, लद्दाख, गोवा, पुणे, वाई और महाबलेश्वर जैसी लोकेशन्स पर शूटिंग हुई।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.