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MP Weather Alert | Bhopal Gwalior 34 Districts Aandhi Baarish 40-50kmph

MP Weather Alert | Bhopal Gwalior 34 Districts Aandhi Baarish 40-50kmph

रीवा के त्योंथर में ओलावृष्टि से फसलें बर्बाद हुई हैं।

मध्य प्रदेश में आंधी-बारिश का नया सिस्टम एक्टिव हो गया है। इस वजह से अगले 3 दिन तक उत्तरी और पूर्वी हिस्से में मौसम का मिजाज बदला हुआ रहेगा। IMD (मौसम केंद्र), भोपाल ने 9 अप्रैल तक तेज आंधी, बारिश और गरज-चमक का अलर्ट जारी किया है। मंगलवार को भोपाल, ग

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मंगलवार को जिन जिलों में आंधी और बारिश हो सकती है, उनमें ग्वालियर, भिंड, मुरैना, दतिया, श्योपुर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, विदिशा, भोपाल, राजगढ़, शाजापुर, आगर-मालवा, उज्जैन, रतलाम, नीमच, मंदसौर, निवाड़ी, टीकमगढ़, सागर, दमोह, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, कटनी, उमरिया, शहडोल, डिंडौरी और अनूपपुर शामिल हैं।

8 और 9 अप्रैल को भी ग्वालियर, चंबल, सागर और रीवा संभाग के जिलों में सिस्टम का असर रहेगा।

तेज आंधी भी चलेगी मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में तेज आंधी भी चलेगी। कुछ जिलों में इसकी अधिकतम रफ्तार 40 से 60 किलोमीटर प्रतिघंटा तक रहेगी। बाकी में 30 से 40 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से आंधी चलेगी। मौसम का मिजाज दोपहर बाद ही बदलेगा।

अगले 3 दिन ऐसा रहेगा एमपी में मौसम…

11 अप्रैल को नया सिस्टम मौसम विभाग की माने तो 11 अप्रैल को उत्तर-पश्चिमी हिस्से में नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) एक्टिव होगा। जिसका असर प्रदेश में भी देखने को मिल सकता है।

अप्रैल में एमपी में दिखा कश्मीर जैसा नजारा इससे पहले 4, 5 और 6 अप्रैल को प्रदेश में सिस्टम की स्ट्रॉन्ग एक्टिविटी देखने को मिल चुकी है। 4 अप्रैल को तो 14 जिलों में ओलावृष्टि और 39 जिलों में तेज आंधी-बारिश का दौर रहा था। रविवार को भी मौसम का मिजाज बदला रहा। कहीं तेज आंधी चली तो कहीं बारिश भी हुई। सोमवार को कहीं-कहीं बारिश का दौर बना रहा।

50 से 60Km/प्रतिघंटा से चलेगी आंधी मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में तेज आंधी भी चलेगी। कुछ जिलों में इसकी अधिकतम रफ्तार 50 से 60 किलोमीटर प्रतिघंटा तक रहेगी। बाकी में 30 से 40 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से आंधी चलेगी।

अप्रैल-मई में सबसे ज्यादा गर्मी जिस तरह दिसंबर-जनवरी में सर्दी और जुलाई-अगस्त में सबसे ज्यादा बारिश होती है, उसी तरह गर्मी के दो प्रमुख महीने अप्रैल और मई हैं। इस बार मध्यप्रदेश में मार्च के दूसरे पखवाड़े में पारा 41 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचा था।

मार्च के आखिरी में टेम्प्रेचर बढ़ने लगता है, लेकिन इस बार ऐसा मौसम नहीं रहा। आखिरी 3 दिन वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) और साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम की वजह से पारे में गिरावट आई। इसी तरह अप्रैल के पहले पखवाड़े में मौसम का असर मिला-जुला रहेगा।

फरवरी-मार्च में 4-4 बार बदला मौसम इस साल जनवरी में बारिश नहीं हुई, लेकिन फरवरी और मार्च में 4-4 बार मौसम बदला। फरवरी में शुरुआत से ही दो बार ओले, बारिश और आंधी आई, जिससे फसलों को नुकसान हुआ। 18 फरवरी से बारिश का तीसरा दौर रहा, जिसका असर 21 फरवरी तक रहा। चौथा दौर 23-24 फरवरी को ओले-बारिश के रूप में आया।

मार्च में गर्मी की शुरुआत हुई। पहले पखवाड़े में तेज गर्मी रही। दूसरे पखवाड़े में बारिश शुरू हुई और एक दौर 4 दिन चला। इस दौरान 45 से ज्यादा जिलों में आंधी-बारिश और 17 जिलों में ओले गिरे। इससे गेहूं, पपीता और केले की फसलें बर्बाद हुईं।

तीसरा दौर 26-27 मार्च को रहा। 27 मार्च को सतना, रीवा, दतिया और भिंड में बारिश हुई। चित्रकूट में आंधी और बारिश से दीप सज्जा कार्यक्रम प्रभावित हुआ। चौथा दौर 29-30 मार्च को रहा। 30 मार्च को आधे प्रदेश में कहीं आंधी-बारिश और कहीं ओले गिरे।

MP के 5 बड़े शहरों में अप्रैल में मौसम का ऐसा ट्रेंड…

एमपी में अप्रैल के दूसरे पखवाड़े से गर्मी का असर तेज होने लगता है। महीने के आखिरी दिनों में तो तापमान रिकॉर्ड तोड़ देता है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर के 10 साल की डाटा बेस्ड स्टडी में सामने आया कि भोपाल-इंदौर में पारा 43 डिग्री तक पहुंचा जबकि जबलपुर में इसने 44 डिग्री सेल्सियस को छू लिया।

ग्वालियर में तो तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। पिछले तीन साल इन शहरों में तेज गर्मी पड़ी। इस बार भी तापमान में बढ़ोतरी की संभावना है।

भोपाल में 1996 में पड़ी थी सबसे ज्यादा गर्मी अप्रैल में गर्मी के ट्रेंड की बात करें तो भोपाल में 29 अप्रैल 1996 को अधिकतम तापमान 44.4 डिग्री सेल्सियस पहुंचा था। इस महीने भोपाल में बारिश-आंधी के आसार भी बनते हैं। यही कारण है कि पिछले कुछ साल से अप्रैल में बारिश का दौर चल रहा है।

20 अप्रैल 2013 को भोपाल में 24 घंटे के भीतर 30.8 मिमी यानी एक इंच से ज्यादा बारिश हुई थी। वहीं, 2023 में 22.6 मिमी पानी गिरा था।

इंदौर में पिछले साल गिरा था 22.3 मिमी पानी इंदौर में भी पारा 44 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। मौसम विभाग के अनुसार, 25 अप्रैल 1958 को सर्वाधिक 44.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया था। इस महीने यहां भी मौसम में बदलाव देखने को मिलता है। गर्मी के साथ बादल छाए रहते हैं तो बौछारें भी गिरती हैं। हर साल बारिश का दौर भी बनता है।

जबलपुर में तेज गर्मी का ट्रेंड जबलपुर की बात करें तो यहां अप्रैल में एक बार पारा 45 डिग्री सेल्सियस के पार रहा है। मौसम विभाग के अनुसार 28 अप्रैल 1970 को दिन का तापमान 45.4 डिग्री रहा था। अप्रैल में यहां भी बारिश होने की संभावना रहती है।

रिकॉर्ड के अनुसार, जबलपुर में 3 अप्रैल 1935 को 24 घंटे के भीतर 50.3 मिमी बारिश हुई थी। 2023 में 20.2 मिमी पानी गिरा था। इस साल 19 अप्रैल को अधिकतम तापमान 40.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा था।

ग्वालियर में पड़ती है सबसे ज्यादा गर्मी ग्वालियर में अप्रैल की गर्मी का ट्रेंड बाकी शहरों से अलग रहता है। यहां ज्यादा गर्मी पड़ती है। बीते 10 साल में यहां पारा एक बार 45 डिग्री और 3 बार 44 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। 28 अप्रैल 1958 को तापमान 46.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था।

एक दिन में सर्वाधिक बारिश होने का रिकॉर्ड वर्ष 1909 में बना था, जब 22 अप्रैल को कुल 67.6 मिमी बारिश हुई थी। इसी साल अप्रैल महीने में साढ़े 4 इंच पानी गिरा था।

उज्जैन में भी गर्मी, बारिश का ट्रेंड उज्जैन में भी अप्रैल महीने में गर्मी और बारिश का ट्रेंड रहता है। 18 अप्रैल 2010 को तापमान रिकॉर्ड 45.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा था। वहीं, 2014 से 2025 के बीच दो बार पारा 43 डिग्री के पार जा चुका है। पिछले साल यह रिकॉर्ड 48.8 डिग्री पारा पहुंच चुका है, जो ओवरऑल रिकॉर्ड भी है।

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रीवा के त्योंथर में ओलावृष्टि से फसलें बर्बाद हुई हैं।

मध्य प्रदेश में आंधी-बारिश का नया सिस्टम एक्टिव हो गया है। इस वजह से अगले 3 दिन तक उत्तरी और पूर्वी हिस्से में मौसम का मिजाज बदला हुआ रहेगा। IMD (मौसम केंद्र), भोपाल ने 9 अप्रैल तक तेज आंधी, बारिश और गरज-चमक का अलर्ट जारी किया है। मंगलवार को भोपाल, ग

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मंगलवार को जिन जिलों में आंधी और बारिश हो सकती है, उनमें ग्वालियर, भिंड, मुरैना, दतिया, श्योपुर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, विदिशा, भोपाल, राजगढ़, शाजापुर, आगर-मालवा, उज्जैन, रतलाम, नीमच, मंदसौर, निवाड़ी, टीकमगढ़, सागर, दमोह, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, कटनी, उमरिया, शहडोल, डिंडौरी और अनूपपुर शामिल हैं।

8 और 9 अप्रैल को भी ग्वालियर, चंबल, सागर और रीवा संभाग के जिलों में सिस्टम का असर रहेगा।

तेज आंधी भी चलेगी मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में तेज आंधी भी चलेगी। कुछ जिलों में इसकी अधिकतम रफ्तार 40 से 60 किलोमीटर प्रतिघंटा तक रहेगी। बाकी में 30 से 40 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से आंधी चलेगी। मौसम का मिजाज दोपहर बाद ही बदलेगा।

अगले 3 दिन ऐसा रहेगा एमपी में मौसम…

11 अप्रैल को नया सिस्टम मौसम विभाग की माने तो 11 अप्रैल को उत्तर-पश्चिमी हिस्से में नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) एक्टिव होगा। जिसका असर प्रदेश में भी देखने को मिल सकता है।

अप्रैल में एमपी में दिखा कश्मीर जैसा नजारा इससे पहले 4, 5 और 6 अप्रैल को प्रदेश में सिस्टम की स्ट्रॉन्ग एक्टिविटी देखने को मिल चुकी है। 4 अप्रैल को तो 14 जिलों में ओलावृष्टि और 39 जिलों में तेज आंधी-बारिश का दौर रहा था। रविवार को भी मौसम का मिजाज बदला रहा। कहीं तेज आंधी चली तो कहीं बारिश भी हुई। सोमवार को कहीं-कहीं बारिश का दौर बना रहा।

50 से 60Km/प्रतिघंटा से चलेगी आंधी मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में तेज आंधी भी चलेगी। कुछ जिलों में इसकी अधिकतम रफ्तार 50 से 60 किलोमीटर प्रतिघंटा तक रहेगी। बाकी में 30 से 40 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से आंधी चलेगी।

अप्रैल-मई में सबसे ज्यादा गर्मी जिस तरह दिसंबर-जनवरी में सर्दी और जुलाई-अगस्त में सबसे ज्यादा बारिश होती है, उसी तरह गर्मी के दो प्रमुख महीने अप्रैल और मई हैं। इस बार मध्यप्रदेश में मार्च के दूसरे पखवाड़े में पारा 41 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचा था।

मार्च के आखिरी में टेम्प्रेचर बढ़ने लगता है, लेकिन इस बार ऐसा मौसम नहीं रहा। आखिरी 3 दिन वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) और साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम की वजह से पारे में गिरावट आई। इसी तरह अप्रैल के पहले पखवाड़े में मौसम का असर मिला-जुला रहेगा।

फरवरी-मार्च में 4-4 बार बदला मौसम इस साल जनवरी में बारिश नहीं हुई, लेकिन फरवरी और मार्च में 4-4 बार मौसम बदला। फरवरी में शुरुआत से ही दो बार ओले, बारिश और आंधी आई, जिससे फसलों को नुकसान हुआ। 18 फरवरी से बारिश का तीसरा दौर रहा, जिसका असर 21 फरवरी तक रहा। चौथा दौर 23-24 फरवरी को ओले-बारिश के रूप में आया।

मार्च में गर्मी की शुरुआत हुई। पहले पखवाड़े में तेज गर्मी रही। दूसरे पखवाड़े में बारिश शुरू हुई और एक दौर 4 दिन चला। इस दौरान 45 से ज्यादा जिलों में आंधी-बारिश और 17 जिलों में ओले गिरे। इससे गेहूं, पपीता और केले की फसलें बर्बाद हुईं।

तीसरा दौर 26-27 मार्च को रहा। 27 मार्च को सतना, रीवा, दतिया और भिंड में बारिश हुई। चित्रकूट में आंधी और बारिश से दीप सज्जा कार्यक्रम प्रभावित हुआ। चौथा दौर 29-30 मार्च को रहा। 30 मार्च को आधे प्रदेश में कहीं आंधी-बारिश और कहीं ओले गिरे।

MP के 5 बड़े शहरों में अप्रैल में मौसम का ऐसा ट्रेंड…

एमपी में अप्रैल के दूसरे पखवाड़े से गर्मी का असर तेज होने लगता है। महीने के आखिरी दिनों में तो तापमान रिकॉर्ड तोड़ देता है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर के 10 साल की डाटा बेस्ड स्टडी में सामने आया कि भोपाल-इंदौर में पारा 43 डिग्री तक पहुंचा जबकि जबलपुर में इसने 44 डिग्री सेल्सियस को छू लिया।

ग्वालियर में तो तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। पिछले तीन साल इन शहरों में तेज गर्मी पड़ी। इस बार भी तापमान में बढ़ोतरी की संभावना है।

भोपाल में 1996 में पड़ी थी सबसे ज्यादा गर्मी अप्रैल में गर्मी के ट्रेंड की बात करें तो भोपाल में 29 अप्रैल 1996 को अधिकतम तापमान 44.4 डिग्री सेल्सियस पहुंचा था। इस महीने भोपाल में बारिश-आंधी के आसार भी बनते हैं। यही कारण है कि पिछले कुछ साल से अप्रैल में बारिश का दौर चल रहा है।

20 अप्रैल 2013 को भोपाल में 24 घंटे के भीतर 30.8 मिमी यानी एक इंच से ज्यादा बारिश हुई थी। वहीं, 2023 में 22.6 मिमी पानी गिरा था।

इंदौर में पिछले साल गिरा था 22.3 मिमी पानी इंदौर में भी पारा 44 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। मौसम विभाग के अनुसार, 25 अप्रैल 1958 को सर्वाधिक 44.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया था। इस महीने यहां भी मौसम में बदलाव देखने को मिलता है। गर्मी के साथ बादल छाए रहते हैं तो बौछारें भी गिरती हैं। हर साल बारिश का दौर भी बनता है।

जबलपुर में तेज गर्मी का ट्रेंड जबलपुर की बात करें तो यहां अप्रैल में एक बार पारा 45 डिग्री सेल्सियस के पार रहा है। मौसम विभाग के अनुसार 28 अप्रैल 1970 को दिन का तापमान 45.4 डिग्री रहा था। अप्रैल में यहां भी बारिश होने की संभावना रहती है।

रिकॉर्ड के अनुसार, जबलपुर में 3 अप्रैल 1935 को 24 घंटे के भीतर 50.3 मिमी बारिश हुई थी। 2023 में 20.2 मिमी पानी गिरा था। इस साल 19 अप्रैल को अधिकतम तापमान 40.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा था।

ग्वालियर में पड़ती है सबसे ज्यादा गर्मी ग्वालियर में अप्रैल की गर्मी का ट्रेंड बाकी शहरों से अलग रहता है। यहां ज्यादा गर्मी पड़ती है। बीते 10 साल में यहां पारा एक बार 45 डिग्री और 3 बार 44 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। 28 अप्रैल 1958 को तापमान 46.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था।

एक दिन में सर्वाधिक बारिश होने का रिकॉर्ड वर्ष 1909 में बना था, जब 22 अप्रैल को कुल 67.6 मिमी बारिश हुई थी। इसी साल अप्रैल महीने में साढ़े 4 इंच पानी गिरा था।

उज्जैन में भी गर्मी, बारिश का ट्रेंड उज्जैन में भी अप्रैल महीने में गर्मी और बारिश का ट्रेंड रहता है। 18 अप्रैल 2010 को तापमान रिकॉर्ड 45.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा था। वहीं, 2014 से 2025 के बीच दो बार पारा 43 डिग्री के पार जा चुका है। पिछले साल यह रिकॉर्ड 48.8 डिग्री पारा पहुंच चुका है, जो ओवरऑल रिकॉर्ड भी है।

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