बंगाल SIR- 60 लाख में 47 लाख आपत्तियां निपटीं:SC बोला- 7 अप्रैल तक सबका निपटारा होगा; ट्रिब्यूनल गलत तरीके से जोड़े-हटाए नामों को सुधारेंगे

पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के खिलाफ लोगों की अपील सुन रहे अपीलीय ट्रिब्यूनल नए दस्तावेजों को स्वीकार कर सकते हैं। हालांकि बिना वेरिफिकेशन दस्तावेज स्वीकार नहीं किए जाएंगे। पहले कोर्ट ने कहा था कि अपीलीय ट्रिब्यूनल ऐसे नए दस्तावेज स्वीकार नहीं करेंगे, जो पहले जांच अधिकारी के सामने पेश नहीं किए गए थे। हालांकि अब कोर्ट ने अपने आदेश में बदलाव किया। कोर्ट ने यह भी कहा कि मतदाता सूची में गलत तरीके से जोड़े गए या हटाए गए नामों को ट्रिब्यूनल सुधार सकता है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने चिंता जताई कि नए वोटर के रूप में रजिस्ट्रेशन के लिए एक साथ बड़ी संख्या में फॉर्म-6 जमा किए जा रहे हैं। इसपर कोर्ट ने कहा- जब तक कोई चीज रिकॉर्ड में न हो, हम जुबानी दलीलों के आधार पर कोई फैसला नहीं कर सकते। यह खबर लगातार अपडेट हो रही है…
क्या है ऑटिज्म डिसऑर्डर, बच्चों को कैसे करता है प्रभावित, इन 5 संकेतों को नजरअंदाज न करें माता-पिता

Autism Spectrum Disorder: दुनियाभर में लाखों बच्चे ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर से जूझ रहे हैं. यह एक न्यूरोडेवलपमेंटल कंडीशन होती है, जो बच्चों को बुरी तरह प्रभावित करती है. कई बार माता-पिता बच्चे में शुरुआती दौर में ऑटिज्म की पहचान नहीं कर पाते हैं, जिसकी वजह से समस्या बढ़ जाती है. इस समस्या के कारण बच्चे के बातचीत करने, दूसरों से जुड़ने और व्यवहार करने का तरीका प्रभावित होता है. ऑटिज्म के लक्षण आमतौर पर जन्म के शुरुआती 2-3 वर्षों में दिखने लगते हैं. अगर सही समय पर इन संकेतों को पहचान लिया जाए, तो अर्ली इंटरवेंशन के जरिए बच्चे के जीवन को काफी हद तक बेहतर बनाया जा सकता है. सभी पैरेंट्स को ऑटिज्म से जुड़े संकेत जान लेने चाहिए, ताकि वक्त रहते इसकी पहचान की जा सके. अमेरिका के मायो क्लीनिक की रिपोर्ट के मुताबिक ऑटिज्म से प्रभावित बच्चों का सबसे पहला लक्षण सामाजिक जुड़ाव में कमी होना है. ऐसे बच्चे अक्सर आंखों में आंखें डालकर बात नहीं करते. जब माता-पिता उन्हें पुकारते हैं, तो वे अक्सर कोई प्रतिक्रिया नहीं देते, जिससे कई बार पैरेंट्स को लगता है कि बच्चे को सुनने में समस्या है. वे अपनी दुनिया में खोए रहते हैं और दूसरे बच्चों के साथ खेलने या घुलने-मिलने में दिलचस्पी नहीं दिखाते. अगर आपका बच्चा मुस्कुराने पर पलटकर जवाब नहीं देता या सामाजिक मेलजोल से बचता है, तो यह ऑटिज्म का एक महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है. बोलने में देरी होना भी ऑटिज्म का एक आम लक्षण है. कुछ बच्चे शब्द तो बोलते हैं, लेकिन वे वाक्यों का सही इस्तेमाल नहीं कर पाते या एक ही शब्द को बार-बार दोहराते हैं, जिसे मेडिकल भाषा में एकोलालिया कहा जाता है. उदाहरण के लिए अगर आप उनसे पूछें क्या आपको पानी चाहिए, तो वे जवाब देने के बजाय वही सवाल दोहरा सकते हैं. इसके अलावा वे अपनी जरूरतों को बताने के लिए शब्दों के बजाय हाथों के इशारों का इस्तेमाल अधिक करते हैं या दूसरों का हाथ पकड़कर उन्हें उस वस्तु तक ले जाते हैं, जो उन्हें चाहिए. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों में अक्सर रिपेटिटिव बिहेवियर देखा जाता है. वे शरीर की कुछ खास गतिविधियों को बार-बार दोहराते हैं, जैसे हाथों को फड़फड़ाना, एक ही जगह पर गोल-गोल घूमना या पंजों के बल चलना. इसके अलावा उन्हें बदलाव पसंद नहीं होता. अगर उनके खिलौनों की जगह बदल दी जाए या उनके दैनिक रूटीन में थोड़ा भी फेरबदल हो, तो वे बहुत ज्यादा परेशान या हिंसक हो सकते हैं. वे अक्सर अपनी चीजों या खिलौनों को एक सीधी लाइन में व्यवस्थित करने के प्रति जुनूनी होते हैं. ऑटिज्म से पीड़ित बच्चे रोशनी, आवाज, गंध या स्पर्श के प्रति सामान्य बच्चों से अलग तरह से प्रतिक्रिया करते हैं. इसे सेंसरी प्रोसेसिंग इशू कहा जाता है. ऑटिस्टिक बच्चे अक्सर तेज आवाज जैसे मिक्सर ग्राइंडर या पटाखे से डरकर अपने कान बंद कर लेते हैं. उन्हें कुछ खास तरह के कपड़ों का स्पर्श चुभ सकता है या वे कुछ विशिष्ट बनावट वाले भोजन को खाने से पूरी तरह इनकार कर सकते हैं. कुछ बच्चे दर्द या ठंडे-गर्म के प्रति बिल्कुल भी प्रतिक्रिया नहीं देते, जो कि उनके सेंसरी सिस्टम के अलग तरह से काम करने का संकेत है. ऑटिज्म से प्रभावित बच्चों के शौक अक्सर बहुत सीमित और असामान्य होते हैं. वे खिलौने के साथ खेलने के बजाय उसके किसी एक हिस्से को घंटों तक देखते रह सकते हैं. उनमें किसी खास विषय या वस्तु के प्रति अत्यधिक लगाव देखा जा सकता है. उनकी एकाग्रता का स्तर कुछ चीजों में बहुत ज्यादा होता है, लेकिन साधारण सामाजिक निर्देशों को समझने में उन्हें कठिनाई होती है. अगर माता-पिता को इनमें से कोई भी लक्षण अपने बच्चे में दिखाई दे, तो बिना देरी किए पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजिस्ट या चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए ताकि समय पर थैरेपी शुरू की जा सके.
उमरिया में प्रवेशोत्सव शुरू, 89 हजार बच्चों ने लिया प्रवेश:स्कूलों में तिलक-माला से स्वागत; समन्वयक ने 'शिक्षा रथ' को दिखाई हरी झंडी

उमरिया जिले में नए शिक्षा सत्र का शुभारंभ उत्साहपूर्ण माहौल में हुआ। बुधवार को जिला मुख्यालय सहित जिले के लगभग 1097 स्कूलों में ‘प्रवेशोत्सव’ मनाया गया। इस दौरान बच्चों का तिलक लगाकर और माला पहनाकर स्वागत करते हुए उन्हें स्कूलों में प्रवेश दिया गया। कई स्कूलों में बच्चों और अभिभावकों की मौजूदगी में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। पहले दिन 89 हजार बच्चों का प्रवेश हुआ शिक्षा विभाग ने जिले में 1 लाख 21 हजार बच्चों को प्रवेश दिलाने का लक्ष्य रखा है। प्रवेशोत्सव के पहले दिन लगभग 89 हजार बच्चों को प्रवेश दिया गया और उनका कक्षा उन्नयन किया गया। यह शिक्षा सत्र 1 अप्रैल से शुरू हुआ है और अगले 30 दिनों तक एक विशेष अभियान के रूप में जारी रहेगा। इस अभियान के तहत शिक्षक मोहल्लों और गांवों में जाकर अभिभावकों से संपर्क करेंगे। उनका उद्देश्य बच्चों को शिक्षा से जोड़ने और उन्हें स्कूल भेजने के लिए प्रेरित करना है। ‘शिक्षा रथ’ गांव-गांव जाकर जागरूकता फैलाएगा जिला परियोजना समन्वयक के.के. डेहरिया ने बताया कि प्रवेशोत्सव के साथ ‘शिक्षा रथ’ को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया है। यह रथ गांव-गांव जाकर शिक्षा के महत्व, विभिन्न सरकारी योजनाओं और बच्चों को स्कूल भेजने के लाभों के बारे में लोगों को जागरूक करेगा। कालरी स्कूल सहित कई विद्यालयों में बच्चों का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया, जिससे नए शिक्षा सत्र की शुरुआत एक सकारात्मक और उत्साहपूर्ण माहौल में हुई।
Govt Caps Airfare 25% | Domestic Flights Remain Affordable Amidst Jet Fuel Surge

Hindi News Business Govt Caps Airfare 25% | Domestic Flights Remain Affordable Amidst Jet Fuel Surge नई दिल्ली7 मिनट पहले कॉपी लिंक अंतरराष्ट्रीय बाजार में ATF यानी जेट फ्यूल 100% से ज्यादा महंगा हो गया है। इस तेजी के बावजूद सरकार ने ATF में बढ़ोतरी को सिर्फ 25% तक सीमित रखने का फैसला किया है। इस पूरे घटनाक्रम समझने के लिए पढ़ें यह Q&A सवाल 1: आज से हवाई ईंधन (ATF) की कीमतों में कितनी बढ़ोतरी हुई है? जवाब: अंतरराष्ट्रीय बाजार को देखते हुए भारत में हवाई ईंधन के दाम 100% से ज्यादा बढ़ने की आशंका थी। लेकिन सरकार ने हस्तक्षेप करते हुए इसे केवल 25% तक सीमित कर दिया है। दिल्ली में अब ATF 1,04,927 रुपए प्रति किलोलीटर हो गई है, जो मार्च में 96,638 रुपए थी। सवाल 2: सरकार को यह फैसला क्यों लेना पड़ा? जवाब: पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक, ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ बंद होने की वजह से ग्लोबल एनर्जी मार्केट में असाधारण स्थिति पैदा हो गई है। अगर सरकार दखल नहीं देती, तो ईंधन के दाम दोगुने से ज्यादा हो जाते। घरेलू हवाई सफर को पहुंच में रखने के लिए यह फैसला लिया गया है। सवाल 3: क्या इसका फायदा अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को भी मिलेगा? जवाब: नहीं। सरकार ने साफ किया है कि यह राहत केवल घरेलू उड़ानों के लिए है। जो फ्लाइट्स विदेश जा रही हैं, उन्हें ATF की बढ़ी हुई कीमत ही चुकानी होगी। अंतरराष्ट्रीय रूट पर चलने वाली फ्लाइट्स जेट फ्यूल के लिए वही रेट देंगी जो दुनिया के बाकी हिस्सों में चल रहे हैं। सवाल 4: इसका आम यात्रियों के टिकट पर क्या असर पड़ेगा? जवाब: चूंकि सरकार ने ईंधन की बढ़त को 25% पर रोक दिया है, इसलिए घरेलू उड़ानों के किराए में ‘अचानक और बहुत ज्यादा’ उछाल नहीं आएगा। हालांकि, 25% की बढ़ोतरी भी कम नहीं है, इसलिए एयरलाइंस टिकट की कीमतों में मामूली इजाफा कर सकती हैं। सवाल 5: ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ का बंद होना भारत के लिए क्यों चिंता की बात है? जवाब: यह समुद्री रास्ता कच्चे तेल की सप्लाई के लिए दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण पॉइंट है। इजराइल, ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण यह रास्ता ब्लॉक हो गया है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा यहीं से आयात करता है। सप्लाई रुकने से कीमतें बढ़ गई है। सवाल 6: ATF के दाम कब और कैसे तय होते हैं? जवाब: भारत में साल 2001 से ATF की कीमतें विनियमित हैं। इनका निर्धारण अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क के आधार पर हर महीने की पहली तारीख को सरकारी तेल कंपनियां करती हैं। सवाल 7: क्या आने वाले समय में राहत बढ़ सकती है? जवाब: यह पूरी तरह से पश्चिम एशिया के हालातों पर निर्भर करता है। सरकार ने फिलहाल ‘स्टैगर्ड’ (किस्तवार) तरीके से दाम बढ़ाए हैं ताकि एकदम से दाम न बढ़े। अगर तनाव कम होता है और सप्लाई बहाल होती है, तो भविष्य में कीमतें स्थिर हो सकती हैं। सवाल 8: अगर सरकार ने 25% का कैप लगाया है तो दाम अभी 8-9% ही क्यों बढ़े हैं? जवाब: सरकार ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में चाहे 100% की तेजी आए, भारत में तेल कंपनियां एक बार में 25% से ज्यादा दाम नहीं बढ़ाएंगी। इसका मतलब यह नहीं है कि उन्हें 25% ही बढ़ाना है। 25% की पहली किस्त हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में 100% की तेजी कच्चे तेल के दामों में है। जब इसे भारत में प्रोसेस करके ATF बनाया जाता है, तो उसमें रिफाइनिंग कॉस्ट, लॉजिस्टिक्स और टैक्स भी शामिल होते हैं। सरकार ने फिलहाल सिर्फ बेसिक कॉस्ट के एक हिस्से को ही पास-ऑन करने की अनुमति दी है। नॉलेज पार्ट: जानें क्या है ATF एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) वह खास ईंधन है जिसका इस्तेमाल हवाई जहाजों के टर्बाइन इंजनों में किया जाता है। किसी भी एयरलाइन के कुल खर्च का लगभग 40% हिस्सा सिर्फ ईंधन पर खर्च होता है, इसीलिए ATF के दाम सीधे हवाई किराए को प्रभावित करते हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Summer Health Tips | dehydration and heat stroke prevention tips | गर्मी में डिहाइड्रेशन और लू से बचाव के उपाय | लू से बचने के आसान तरीके |

Last Updated:April 01, 2026, 14:18 IST Summer Health Tips: तपती गर्मी के बीच स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चौंकाने वाली बात बताई है. डॉक्टर के अनुसार बढ़ता तापमान अब केवल पसीना और बेचैनी का कारण नहीं है, बल्कि हमारी रोजमर्रा की 3 छोटी गलतियां इसे साइलेंट किलर बना रही हैं. डॉ. राजकुमार (आयुष) के अनुसार, अनजाने में की गई ये लापरवाही शरीर को अंदर ही अंदर खोखला कर रही है, जिससे हीट स्ट्रोक और ऑर्गन फेलियर जैसी गंभीर स्थितियां पैदा हो सकती हैं. आखिर कौन सी हैं वे आदतें जिन्हें हम नजरअंदाज कर रहे हैं आइए जानते हैं. ऋषिकेश: गर्मी का मौसम आते ही लोग अक्सर सिर्फ पसीना और चिपचिपाहट को ही परेशानी मानते हैं, लेकिन असल खतरा इससे कहीं ज्यादा गहरा होता है. तेज होती धूप अब धीरे-धीरे शरीर पर ऐसा असर डाल रही है, जो तुरंत नजर नहीं आता, लेकिन अंदर ही अंदर नुकसान करता रहता है. यही वजह है कि डॉक्टर इसे ‘साइलेंट किलर’ कहने लगे हैं. तापमान बढ़ने के साथ शरीर का संतुलन बिगड़ने लगता है और हमारी रोजमर्रा की कुछ छोटी-छोटी आदतें इस खतरे को और बढ़ा देती हैं. लोग समझ ही नहीं पाते कि उनकी ही दिनचर्या उन्हें बीमार बना रही है. लोकल 18 के साथ बातचीत के दौरान डॉ राजकुमार (आयुष) ने बताया कि सबसे आम और खतरनाक आदत है दिनभर पर्याप्त पानी न पीना. कई लोग तब ही पानी पीते हैं जब उन्हें प्यास लगती है, लेकिन गर्मियों में शरीर को लगातार हाइड्रेट रखना बेहद जरूरी होता है. पानी की कमी से शरीर में डिहाइड्रेशन होने लगता है, जिससे सिरदर्द, थकान, चक्कर और कमजोरी जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं. लंबे समय तक पानी की कमी रहने पर किडनी पर भी असर पड़ सकता है. खासकर बाहर काम करने वाले लोग या ज्यादा पसीना बहाने वाले लोग अगर इस बात को नजरअंदाज करते हैं, तो उनका शरीर जल्दी थकने लगता है और बीमारियों की चपेट में आ जाता है. तेज धूप में सुरक्षा बेहद जरूरी दूसरी आदत है तेज धूप में बिना किसी सुरक्षा के बाहर निकलना. कई लोग जल्दी में सिर ढकना या सनस्क्रीन लगाना जरूरी नहीं समझते, लेकिन यही लापरवाही भारी पड़ सकती है. सीधे सूरज की किरणें शरीर के तापमान को तेजी से बढ़ा देती हैं, जिससे हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है. हीट स्ट्रोक एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर का तापमान अचानक बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और व्यक्ति बेहोश तक हो सकता है. इसके अलावा त्वचा पर जलन, टैनिंग और सनबर्न जैसी समस्याएं भी इसी वजह से होती हैं. इसलिए धूप में निकलते समय सिर ढकना, हल्के कपड़े पहनना और सन प्रोटेक्शन का इस्तेमाल करना जरूरी हो जाता है. यह भी पढ़ें: गर्मियों में मिलने वाला ये छोटा सा फल है बड़ा ताकतवर! खून बढ़ाने से लेकर दिल तक रखे फिट, जानिए इसके कमाल के फायदे खान-पान में लापरवाही पड़ेगी भारी तीसरी और अक्सर नजरअंदाज की जाने वाली आदत है बाहर का बासी या जंक फूड खाना. गर्मियों में खाने-पीने की चीजें जल्दी खराब हो जाती हैं, लेकिन फिर भी लोग स्वाद के चक्कर में सड़क किनारे मिलने वाला खाना या लंबे समय से रखा हुआ फूड खा लेते हैं. इससे पेट में संक्रमण, फूड पॉइजनिंग, उल्टी और दस्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं. शरीर पहले ही गर्मी से जूझ रहा होता है और ऐसे में खराब खाना उसकी हालत और बिगाड़ देता है. खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है. इन तीनों आदतों की खास बात यह है कि ये दिखने में बहुत छोटी लगती हैं, लेकिन इनका असर धीरे-धीरे शरीर को कमजोर कर देता है. लोग अक्सर इन्हें नजरअंदाज करते रहते हैं और जब तक समस्या गंभीर होती है, तब तक काफी देर हो चुकी होती है. गर्मी के मौसम में सिर्फ ठंडा पानी पी लेना या पंखे के नीचे बैठना ही काफी नहीं है, बल्कि अपनी दिनचर्या में थोड़े बदलाव करना बेहद जरूरी है. सही मात्रा में पानी पीना, धूप से बचाव करना और साफ-सुथरा, ताजा खाना खाना ही इस मौसम में खुद को सुरक्षित रखने का सबसे आसान तरीका है. About the Author Seema Nath सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें Location : Rishikesh,Dehradun,Uttarakhand First Published : April 01, 2026, 14:18 IST
छतरपुर चौक बाजार के सोना-चांदी पॉलिश सेंटर में आग:अंदर एलपीजी सिलेंडर भी रखे, काफी मशक्कत के बाद पाया काबू

छतरपुर के चौक बाजार स्थित एक सोना-चांदी पॉलिश सेंटर में बुधवार को आग लग गई। दुकान के अंदर एलपीजी सिलेंडर भी रखा हुआ था। बड़े विस्फोट के डर से लोग आग बुझाने नहीं जा रहे थे। काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। यह आग अब्दुल उजाल पॉलिश एवं छिलाई सेंटर में लगी, जहां सोने-चांदी के आभूषणों की पॉलिश और छिलाई का काम होता है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग अचानक भड़की और देखते ही देखते पूरी दुकान को अपनी चपेट में ले लिया। स्थानीय लोगों ने बताया कि दुकान में एलपीजी गैस सिलेंडर रखे हुए थे। पुलिस ने संभाली स्थिति स्थिति की गंभीरता को देखते हुए लोगों ने तुरंत पुलिस और फायर ब्रिगेड को सूचना दी। सिटी कोतवाली थाना पुलिस मौके पर पहुंची और भीड़ को नियंत्रित करते हुए इलाके को खाली कराना शुरू किया। पुलिस आसपास के लोगों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दे रही है। इस घटना के बाद पूरे चौक बाजार क्षेत्र में दहशत का माहौल है। लोगों को डर है कि यदि सिलेंडर में विस्फोट होता तो बड़ा हादसा हो सकता था। देखें मौके की तीन तस्वीरें
एचएस फूलका का बीजेपी में जाना: 2027 पंजाब चुनाव से पहले सिख राजनीति, नैरावेटिव और स्पेक्ट्रम का बड़ा किरदार?

दिल्ली में वरिष्ठ वकील और मानवाधिकार कार्यकर्ता हर वकील सिंह फूलका का बीजेपी में शामिल होना सिर्फ एक राजनीतिक खबर नहीं है. यह पंजाब की राजनीति में नाममात्र नैरेटिविटी का संकेत है। करीब सात साल की सक्रिय राजनीति से दूरी के बाद उनकी वापसी, और वह भी बीजेपी के साथ, कई कट्टर पर सवाल और स्टॉकिंग्स दोनों का जन्म हुआ है। यह कदम ऐसे समय आया है, जब बीजेपी 2027 विधानसभा चुनाव पर ध्यान केंद्रित करते हुए पंजाब में अपनी सामाजिक और राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। फूलका का ‘नैतिक राजधानी’: बीजेपी के लिए अहम क्यों?एचएस फूलका की पहचान एक राजनेता से पहले एक कानूनी योद्धा की रही है। 1984 के सिख विरोधी विद्रोहियों के लिए दशकों तक लड़ाई का सिलसिला, कई मामलों को फिर से स्थापित करना और महिमा को सजा देना, इन सबने उन्हें सिख समाज में एक विश्वसनीय चेहरा बनाया। बीजेपी के लिए फूलका की शुरुआत इसी ‘मोरल कैपिटल’ को जोड़ने की कोशिश है. खासकर उस राज्य में, जहां पार्टी की पारंपरिक पकड़ कमजोर हो रही है। बीजेपी की सीख आउटरीच: एक लंबी रणनीतिफूलका का बीजेपी में आना किसी एक दिन का फैसला नहीं लगता. यह उस रणनीति का हिस्सा है, जिस पर पार्टी पिछले कुछ वर्षों से काम कर रही है। 2021 में मंजिंदर सिंह सीडिया और हरमीत सिंह जैसे नेताओं को पार्टी में शामिल करना इसी दिशा में पहला कदम था. दिल्ली में इसका असर भी दिखा, जहां सिख मतदाताओं में भारतीय जनता पार्टी की पकड़ मजबूत हुई। अब बीजेपी उसी मॉडल को पंजाब में दोहराने की कोशिश कर रही है, ताकि संगठन के साथ-साथ पंथिक नेतृत्व में भी प्रभाव डाला जा सके। अकाली दल का संकट: भाजपा के लिए अवसरपंजाब की राजनीति में लंबे समय तक सिख नेतृत्व का केंद्र रहे शिरोमणि अकाली दल अब पतन के दौर से गुजर रहे हैं। उत्पादों में गिरावट और आंतरिक गुटबाजी ने पार्टी की पकड़ बनाई है। फूलका खुद 2024 में अकाली दल से जुड़े थे, लेकिन महिला पॉलिटिक्स और कई सारे धड़ों के गुटबाजी के चलते उनका यह कदम अधूरा रह गया। यही राजनीतिक खाली जगह अब बीजेपी के लिए अवसर बन रही है। पार्टी सिख अकाली दल के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाने की रणनीति पर काम कर रही है, जिसमें फूलका अहम कड़ी बन सकती हैं। साथ ही कैप्टन फिलाडेल्फिया सिंह के बाद कांग्रेस के दोषपूर्ण छवि से बने नारे को भी बीजेपी के लिए नया खुलासा किया जा रहा है। आप के लिए चुनौती: नैरेटिव बनाम एडवेंचरपंजाब में सत्य सत्य आम आदमी के पास है। AAP ने 2022 में ‘परिवर्तन’ और ‘ईमानदार राजनीति’ के तहत नैरावेटिव पर जीत हासिल की थी। लेकिन एचएस फूलका जैसे नेता, जो कभी आप के अहम चेहरे थे और बाद में अलग हो गए, अब बीजेपी में शामिल हो रहे हैं. यह आप के नैटिवेटिव को चुनौती देता है। फूलका का अतीत आप के साथ कायम है, लेकिन उनकी पार्टी के कार्यकर्ता और अब बीजेपी में शामिल होना इस बात का संकेत देता है कि पंजाब की राजनीति में वैज्ञानिक और गठबंधन गठबंधन में बदलाव जारी है। बीजेपी के प्रति क्या बदलेगा सिखा वोट का रुख?पंजाब की राजनीति में सिख वोट की भूमिका निभाई है। अब तक बीजेपी में बार-बार ‘बाहरी’ पार्टी देखने को मिल रही है, खासकर कृषि कानूनों के विवाद के बाद यह दूरियां और गरीबी पैदा हो गई है। ऐसे में फूलका जैसे चेहरे की पार्टी बीजेपी को एक ‘इनसाइडर’ नैरेटिव बनाने में मदद कर सकती है। हालाँकि, यह कितना गहरा बदलाव होगा, यह इस बात पर निर्भर है कि ग्राउंड लेवल पर कितने बोल्टेज बने होते हैं। फूलका का राजनीतिक सफर: प्रतिष्ठा और विरोधाभासों की कहानीफूलका का राजनीतिक सफर भी दिलचस्प है। 2013 में AAP से जुड़ना, 2017 में चुनाव जीतना और फिर अचानक से जुड़ना। यह सिद्धांत है कि उन्होंने सदैव अपने सिद्धांतों को देशभक्ति दी है। बेअदबी मामलों में न्याय की असंबद्ध प्रक्रिया से नाराज राजनीतिक कर्मियों और फिर सामाजिक-न्याय के सिद्धांतों पर सक्रिय रहना, यह उनकी छवि को और मजबूत बनाता है। लेकिन सवाल भी यही है- क्या फूलका, जो राजनीति से निराश होकर बाहर निकले थे, अब बीजेपी ऊर्जा के साथ काम करेगी? 2027 का रोडमैप: बीजेपी की नई सोशल इंजीनियरिंगपंजाब में 2027 के चुनाव के लिए बीजेपी के लिए सिर्फ नामांकन की लड़ाई नहीं, बल्कि विचारधारा की परीक्षा होगी। फूलका की शुरूआती इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है, जहां पार्टी जातीय और धार्मिक पहचान के साथ ‘विश्वासनीय संयुक्त राष्ट्र’ को नया सामाजिक स्तर बनाने की कोशिश की जा रही है। यह रणनीति तीन कलाकारों पर काम करती दिख रही है। सिख नेतृत्व में और भरोसेमंद समर्थक, अकाली दल के अविभाज्य होते आधार को अपमानित करना, आम आदमी पार्टी के नैरेटिविटी को चुनौती देना। लेकिन रास्ता आसान नहीं है. पंजाब में भाजपा की ऐतिहासिक पकड़ सीमित रही है और कृषि भवनों के बाद नकारात्मक धारणा अभी भी प्रभावित हो रही है। सिख राजनीति में गहरी जड़ें वाले आश्रम के बीच जगह बनाना बड़ी चुनौती है। ऐसे में सिर्फ चेहरा जोड़ना काफी नहीं होगा, पार्टी को जमीनी स्तर पर भरोसेमंद भी बनाना होगा। फूलका की शुरुआत एक बड़ी बात है, लेकिन यह बदलाव की शुरुआत है या सिर्फ प्रतीकात्मक चाल-इसका जवाब आने वाला समय ही देगा। निरीक्षण इतना साफ है कि 2027 से पहले पंजाब में नैरावेटिव की जंग तेज हो गई है।
भारतीय डॉक्टर ने USG के लिए बनाया AI टूल, सेकेंडों में तैयार होगी अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट

Last Updated:April 01, 2026, 14:02 IST नई दिल्ली में रहने वाले रेडियोलॉजिस्ट डॉ तरुण कोठारी ने वेब आधारित एआई टूल डेवलप किया है. रिपोर्टर डॉट रेडप्लस एआई नाम के इस टूल के माध्यम से सेकेंडों में यूएसजी या अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट तैयार हो जाएगी. भारतीय डॉक्टर तरुण कोठारी ने अल्ट्रासाउंड के लिए एआई टूल बनाया है. AI Tool For USG: आमतौर पर अल्ट्रासाउंड कराने के बाद रिपोर्ट लेने के लिए कम से एक से दो घंटे या कहीं-कहीं तो पूरे एक दिन का इंतजार करना पड़ता है और मरीजों को दूसरे दिन रिपोर्ट मिलती है, लेकिन भारतीय रेडियोलॉजिस्ट डॉ. तरुण कोठारी ने ऐसा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल तैयार किया है जिसके इस्तेमाल से यह काम भी फुर्ती से पूरा हो सकेगा और सेकेंडों में अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट तैयार हो जाएगी. डॉ. तरुण कोठारी ने एक बेव आधारित एआई प्लेटफॉर्म https://reporter.redplusai.com/ बनाया है जो रेडियोलॉजी में बड़ी क्रांति साबित हो सकता है. इस टूल से अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट बेहद ही कम समय में तैयार हो जाएगी. हालांकि ऐसा नहीं है कि रिपोर्ट को तैयार करने में रेडियोलॉजिस्ट या एक्सपर्ट की जरूरत नहीं होगी, बल्कि इन दोनों की मौजूदगी त जरूरी होगी लेकिन काम जल्दी हो जाएगा. कोरोना महामारी के दौरान काफी लोकप्रिय हुए दिल्ली स्थित डॉ. तरुण कोठारी ने बताया कि रेडियोलॉजिस्ट्स और सोनोलॉजिस्ट्स के लिए विकसित यह टूल रिपोर्ट लेखन की प्रक्रिया को काफी सरल बना देता है. इस टूल का फायदा यह है कि इसमें डॉक्टर को केवल अपने क्लिनिकल निष्कर्ष टाइप करने होते हैं और पलक झपकते ही एक संपूर्ण, संरचित और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप रिपोर्ट तैयार हो जाती है. इस प्लेटफॉर्म की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह पूरी तरह वेब आधारित है और इसके लिए किसी सॉफ्टवेयर इंस्टॉलेशन की जरूरत नहीं है. मोबाइल हो या कंप्यूटर, इसे कहीं से भी उपयोग किया जा सकता है. इस टूल में डालने के बाद रिपोर्ट PDF के रूप में ऑटोमेटिक तरीके से सेव हो जाती है और फाइल का नाम भी अपने आप तैयार हो जाता है. जिससे डॉक्टरों का कीमती समय बचता है. किन-किन अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट होती तैयार? यह टूल यूएसजी की प्रमुख श्रेणियों को कवर करता है. इनमें एब्डोमेन व पेल्विस, प्रसूति स्कैन, स्मॉल पार्ट्स, डॉप्लर और एमएसके. ये सभी आमतौर पर किए जाने वाले अल्ट्रासाउंड हैं. यह टूल रोजाना क्लिनिकल अभ्यास के लिए बेस्ट किट की तरह काम करता है. डॉ. तरुण ने बताया कि यह टूल एक भारतीय रेडियोलॉजिस्ट ने बनाया जो खुद रोजाना यूएसजी की रिपोर्टिंग करते हैं, इसलिए इसमें वास्तविक क्लिनिकल जरूरतों का पूरा ध्यान रखा गया है. इस टूल पर नए उपयोगकर्ताओं के लिए 300 निःशुल्क रिपोर्ट्स भी उपलब्ध हैं जो बिना किसी अग्रिम भुगतान के पढ़ी जा सकती हैं. यह उन सभी रेडियोलॉजिस्ट्स के लिए काफी सहयोगी है जो अपनी रिपोर्टिंग को तेज, सटीक और आधुनिक बनाना चाहते हैं. About the Author प्रिया गौतमSenior Correspondent Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …और पढ़ें First Published : April 01, 2026, 14:02 IST
कनाडा में मर्डर के 21 दिन बाद उज्जैन पहुंचेगा शव:2 अप्रैल को अहमदाबाद के रास्ते आएगा, 3 को देवास रोड से चक्रतीर्थ तक निकलेगी अंतिम यात्रा

उज्जैन निवासी सिख युवक गुरकीरत सिंह मनोचा का पार्थिव शरीर 21 दिन बाद भारत लाया जा रहा है। 14 मार्च को कनाडा में हुई हत्या के बाद अब 2 अप्रैल को शव अहमदाबाद और 3 अप्रैल को उज्जैन पहुंचेगा, जहां अंतिम संस्कार किया जाएगा। मनोचा के पार्थिव शरीर को भारत लाने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। शव वैंकूवर से दिल्ली होते हुए 2 अप्रैल की रात करीब 9 बजे अहमदाबाद एयरपोर्ट पहुंचेगा, जहां कस्टम और दस्तावेजी कार्रवाई के बाद परिजनों को सौंपा जाएगा। 3 अप्रैल को उज्जैन में अंतिम दर्शन, निकलेगी शव यात्रा अहमदाबाद से एम्बुलेंस के जरिए 3 अप्रैल की सुबह करीब 9 बजे पार्थिव शरीर को पार्श्वनाथ सिटी, देवास रोड स्थित निवास लाया जाएगा। यहां अंतिम दर्शन और अरदास के बाद शव यात्रा निकाली जाएगी। इन मार्गों से निकलेगी अंतिम यात्रा शव यात्रा पार्श्वनाथ सिटी से देवास रोड, संजीवनी हॉस्पिटल चौराहा, फ्रीगंज स्थित सुख सागर गुरुद्वारा साहिब, टावर चौक, चामुंडा माता मंदिर, आगर रोड, मंगलनाथ मार्ग, पीपलीनाका होते हुए चक्रतीर्थ श्मशान घाट पहुंचेगी, जहां अंतिम संस्कार होगा। रास्ते में विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा श्रद्धांजलि दी जाएगी। सरकार और प्रशासन के सहयोग से संभव हुआ परिजनों ने पार्थिव शरीर को भारत लाने में मध्यप्रदेश सरकार, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, भारत सरकार, विदेश मंत्रालय, भारतीय दूतावास और स्थानीय प्रशासन के सहयोग के लिए आभार जताया है। घटनाक्रम से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें उज्जैन के स्टूडेंट को कनाडा में कार चढ़ाकर मार डाला:कॉलेज के 10-12 छात्रों ने आपसी रंजिश में पीटा मध्य प्रदेश के उज्जैन के एक छात्र की कनाडा में कॉलेज के छात्रों ने हत्या कर दी। 10-12 युवकों ने पहले छात्र की पिटाई की, फिर उस पर गाड़ी चढ़ा दी। छात्र को गंभीर चोटें आई थीं। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसने दम तोड़ दिया। वारदात 14 मार्च को फोर्ट सेंट जॉन शहर में हुई। जानकारी के मुताबिक मृतक की पहचान गुरकीरत सिंह मनोचा के रूप में हुई है, जो देवास रोड स्थित पार्श्वनाथ सिटी के निवासी थे। वे कनाडा के नॉर्दर्न लाइट्स कॉलेज में बिजनेस मैनेजमेंट के पोस्ट डिग्री डिप्लोमा प्रोग्राम की पढ़ाई कर रहे थे। CM मोहन यादव ने दुख जताते हुए परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है। दोस्त के फोन से परिवार को मिली जानकारी
पीरियड्स में क्या वाकई नहीं खाना चाहिए खट्टा? डॉक्टर से जान लें सारा सच

Last Updated:April 01, 2026, 13:44 IST Diet During Periods: पीरियड्स हर महिला के लिए अलग-अलग अनुभव लेकर आते हैं. किसी के लिए यह केवल सामान्य थकान होती है, तो किसी के लिए पेट में असहनीय मरोड़ यानी क्रैम्प्स (Cramps), कमर दर्द और मूड स्विंग्स (Mood Swings) जैसी बड़ी परेशानी. अक्सर इन दिनों सिर्फ मीठा या जंक फूड खाने का मन करता है. अक्सर महिलाएं पूछती हैं कि पीरियड्स में क्या खाना चाहिए ताकि दर्द कम हो और शरीर में कमजोरी न आए. फरीदाबाद: पीरियड्स को लेकर हमारे यहां अब भी तरह-तरह की मान्यताएं चलती आ रही हैं. खासकर खाने-पीने को लेकर ज्यादातर… माएं-बुआएं कहती हैं कि इन दिनों खट्टा या ठंडा मत खाओ. कुछ लड़कियां सचमुच अपनी पसंद की चीजें छोड़ देती हैं बिना ये जाने कि इसका कोई ठोस कारण भी है या नहीं. असल में क्या पीरियड्स में खट्टा खाने से कोई नुकसान होता है या ये सिर्फ सुनी-सुनाई बातें हैं? सही जानकारी ज्यादा जरूरी है वरना बेवजह परेशान रहते हैं. आइए डॉक्टर से जानते हैं सबकुछ… लोकल18 को सर्वोदय अस्पताल फरीदाबाद की गाइनॉकॉलोजिस्ट डॉ. रैना चावला ने बताया कि पीरियड्स एकदम नेचुरल प्रक्रिया है. ये हर महिला के जीवन का हिस्सा है करीब 12 साल से 50 की उम्र तक. फिर भी हमारे समाज में इसे लेकर ढेरों गलतफहमियां फैली हुई हैं. खासकर खट्टा या ठंडा मत खाओ… इसका तो कोई वैज्ञानिक आधार भी नहीं. न इससे पीरियड का फ्लो बदलता है न दर्द में फर्क पड़ता है. यानी ये सब मिथक ही हैं. इन पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है. डॉ. रैना बताती हैं कि पीरियड्स के दौरान सबसे जरूरी है पोषक और संतुलित आहार लेना. शरीर से खून की कमी इस समय आम है. खासकर अगर ब्लीडिंग ज्यादा हो रही हो तो ऐसे में आयरन और प्रोटीन से भरपूर खाना बहुत फायदेमंद होता है. जैसे पालक, मेथी, गुड़, चना, दाल, सेब, केला वगैरह. इनसे शरीर को ताकत मिलती है. पानी और जूस भी खूब पिएं ताकि शरीर डिहाइड्रेट न हो. वो आगे कहती हैं कि कमजोरी और दर्द भी इन दिनों हर लड़की-महिला झेलती है. दर्द कम करने में काजू, बादाम, पिस्ता और दूसरे ड्राइ फ्रूट्स, जिनमें मैग्नीशियम होता है, मदद करते हैं. वैसे कोई एक ऐसा फूड नहीं है जिससे दर्द गायब हो जाए. मगर सही तरीके से खाएं तो बहुत फर्क पड़ता है. जिन्हें ज्यादा दर्द या ब्लीडिंग होती है उन्हें अपनी डाइट खास देखनी चाहिए. वह बताती हैं कि बहुत ज्यादा तला-भुना, मसालेदार और बाहर का खाना कम ही खाएं. घर का हल्का-फुल्का हेल्दी खाना सबसे अच्छा है. थोड़ा-बहुत योग या हल्की एक्सरसाइज भी फायदेमंद रहती है. शरीर थोड़ा एक्टिव रहता है तो आराम भी मिलता है. असल में पीरियड्स के दौरान खट्टा खाने से कुछ भी बिगड़ता नहीं. बस सही जानकारी रखें और अपनी डाइट-व्यवहार को सही बना लें यही सबसे बेहतर है. पीरियड्स के दौरान हम खट्टा खा सकते हैं कोई दिक्कत नहीं है. About the Author काव्या मिश्रा Kavya Mishra is working with News18 Hindi as a Senior Sub Editor in the regional section (Uttar Pradesh, Uttarakhand, Haryana and Himachal Pradesh). Active in Journalism for more than 7 years. She started her j…और पढ़ें Location : Faridabad,Haryana First Published : April 01, 2026, 13:44 IST









