पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के खिलाफ लोगों की अपील सुन रहे अपीलीय ट्रिब्यूनल नए दस्तावेजों को स्वीकार कर सकते हैं। हालांकि बिना वेरिफिकेशन दस्तावेज स्वीकार नहीं किए जाएंगे। पहले कोर्ट ने कहा था कि अपीलीय ट्रिब्यूनल ऐसे नए दस्तावेज स्वीकार नहीं करेंगे, जो पहले जांच अधिकारी के सामने पेश नहीं किए गए थे। हालांकि अब कोर्ट ने अपने आदेश में बदलाव किया। कोर्ट ने यह भी कहा कि मतदाता सूची में गलत तरीके से जोड़े गए या हटाए गए नामों को ट्रिब्यूनल सुधार सकता है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने चिंता जताई कि नए वोटर के रूप में रजिस्ट्रेशन के लिए एक साथ बड़ी संख्या में फॉर्म-6 जमा किए जा रहे हैं। इसपर कोर्ट ने कहा- जब तक कोई चीज रिकॉर्ड में न हो, हम जुबानी दलीलों के आधार पर कोई फैसला नहीं कर सकते। यह खबर लगातार अपडेट हो रही है…












































