Wednesday, 27 May 2026 | 06:13 AM

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पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: बंगाल के इस ताजा सर्वे ने चौंकाया, बीजेपी को 100 से ज्यादा वोट मिलने का अनुमान, टीएमसी को नुकसान, किसकी बन सकती है सरकार

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: बंगाल के इस ताजा सर्वे ने चौंकाया, बीजेपी को 100 से ज्यादा वोट मिलने का अनुमान, टीएमसी को नुकसान, किसकी बन सकती है सरकार

पश्चिम बंगाल में आने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर एक नया ओपिनियन पोल में बड़ा संकेत मिला है। इस सर्वे के मुताबिक, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी एक बार फिर सत्ता में वापसी कर सकती है और लगातार चौथी बार सरकार बना सकती है। हालाँकि इस बार बुकिंग की संख्या पहले से कम रहने का अनुमान है। वोटवाइब के इस सर्वे में 294 रिजॉर्ट वाली विधानसभा में टीएमसी को करीब 174 से 184 लॉचमेंट मीटिंग का मजा मिला है। राज्य में बहुमत के लिए 148 सीटों की आवश्यकता है, यानि कि राज्य में बहुमत से बहुमत हासिल किया जा सकता है। बीजेपी के प्रदर्शन में सुधार देखने को मिल सकता है। सर्वे के अनुसार बीजेपी को 108 से 118 प्रवेश मिल सकते हैं, जो पिछले अनुमान से अधिक है। दूसरी तरफ कांग्रेस और वामदलों में इस बार भी कोई खास असर नहीं दिख रहा है और उन्हें सिर्फ 0 से 4 इंच मिलने की संभावना जताई गई है। इससे पहले 23 मार्च को एक सर्वे में टीएमसी को 184 से 194 और बीजेपी को 98 से 108 के बीच व्यूअरशिप मिलने का अनुमान था, लेकिन नए सर्वे में बीजेपी की स्थिति मजबूत दिख रही है और लोकप्रियता की कुछ कमियां बताई गई हैं। 2021 के चुनाव में टीएमसी को कितनी बढ़त मिली थी? अगर 2021 के चुनाव की बात करें तो उस समय टीएमसी ने 215 करोड़पति सरकार बनाई थी, जबकि बीजेपी को 77 लक्ष्य मिले थे. नया सर्वे यह संकेत देता है कि इस बार टीएमसी तो सत्ता में बनी रहेगी, लेकिन बीजेपी से पहले सबसे ज्यादा मजबूती उभर सकती है। इंडोनेशिया के अकाउंट से देखें तो कुछ स्थानों पर प्रतिस्पर्धा काफी कड़ी हो सकती है। मिदनापुर में बीजेपी बढ़त नजर आ रही है, जबकि प्रेसिडेंसी और मालदा में टीएमसी मजबूत नजर आ रही है। इन इलाक़ों के प्रदर्शन के अंतिम नतीजे बड़े प्रभावशाली परिणाम हो सकते हैं। मुख्यमंत्री के चेहरे की बात करें तो ममता बनर्जी अभी भी सबसे पसंदीदा नेता हैं। सर्वे में 46.4 फीसदी लोगों ने उन्हें पसंद किया, जबकि बीजेपी के सुवेंदु अधिकारी को 34.9 फीसदी समर्थन मिला. कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी और सीपीएम के मोहम्मद कट्टरपंथी काफी पीछे हैं. वोटरों की सबसे बड़ी संपत्ति क्या है? मतदाताओं के लिए सबसे बड़ी बेरोजगारी और विकास है, जिसमें 35.1 प्रतिशत लोगों ने सबसे अहम बताया। इसके बाद कानून व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा, फिर से सूची में शामिल वस्तुएं, मूर्तियां और अन्य मूर्तियां शामिल हैं। सरकारी मंजूरी को लेकर भी लोगों में मिलाजुला नजरिया है. विशेषकर युवाओं के लिए चल रही गाइडलाइन पर 53.6 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उनकी बेरोजगारी की समस्या हल नहीं होगी। धर्म और जाति के आधार पर वोट का रुझान भी साफ दिखता है। मुसलमानों में बहुसंख्यक संख्या में लोग शामिल हैं, जबकि एससी-एसटी और दलित जाति के हिंदू वोटरों में बीजेपी को प्रमुखता से समर्थन मिल रहा है। राज्य सरकार की जिम्मेदारी को लेकर भी लोगों की राय बंटी हुई है। कुछ लोग इसे अच्छा मानते हैं तो बड़ी संख्या में लोग इसे बुरा भी सिखाते हैं। ये भी पढ़ें: टूरिस्ट विजुअल्स पर आए थे 6 जापानी और एक अमेरिकी, मिजोरम से गए थे म्यांमार, एनआईए के साथी लिंक का शक

फैटी लिवर को रिवर्स करना पॉसिबल, डॉ. एसके सरीन की सिर्फ 5 बातें मान लीजिए, जल्द दिखने लगेगा फायदा

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SK Sarin Tips To Reverse Fatty Liver: जब हमारे लिवर के सेल्स में फैट जमा हो जाता है, तब इस कंडीशन को फैटी लिवर कहा जाता है. फैटी लिवर की समस्या इन दिनों तेजी से बढ़ रही है. बड़ी संख्या में युवा भी फैटी लिवर का शिकार हो रहे हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो अब बच्चे भी फैटी लिवर की समस्या का शिकार हो रहे हैं. खराब लाइफस्टाइल, अनहेल्दी खानपान, फिजिकल एक्टिविटी की कमी, शराब का सेवन और डायबिटीज के कारण फैटी लिवर के केस बढ़ रहे हैं. अगर शुरुआती स्टेज में फैटी लिवर का पता लग जाए, तो इसे बिना दवाओं के आसानी से रिवर्स किया जा सकता है. देश के जाने-माने लिवर डॉक्टर एसके सरीन ने एक यूट्यूब चैनल के पॉडकास्ट में बताया कि लिवर शरीर का एकमात्र ऐसा अंग है, जिसमें खुद को रीजेनरेट करने की अद्भुत क्षमता होती है. लिवर में अगर कोई छोटी-मोटी इंजरी हो जाए, तो वह अपने आप इसे ठीक कर लेता है. फैटी लिवर की बात करें, तो यह कोई लाइलाज बीमारी नहीं है. हालांकि लंबे समय तक फैटी लिवर की समस्या को इग्नोर करने से लिवर सिरोसिस और लिवर कैंसर का खतरा बढ़ सकता है. ऐसे में जरूरी है कि फैटी लिवर को जल्द से जल्द रिवर्स किया जाए. बेहतर खानपान, नियमित एक्सरसाइज और कुछ सही आदतों से यह समस्या दूर हो सकती है. फैटी लिवर को रिवर्स करने के 5 तरीके डॉ. सरीन का साफ कहना है कि फैटी लिवर के करीब 50% मरीजों का वजन ज्यादा होता है. मोटापा फैटी लिवर की एक बड़ी वजह है. अगर आप अपने शरीर का 10 से 15% वजन कम कर लें, तो इससे लिवर में जमा फैट कम हो सकता है. वेट लॉस से फैटी लिवर से राहत मिलने लगती है और लिवर की सूजन कम होती है. फैटी लिवर के मरीज अपना वजन कम करें. शराब लिवर के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक है. अगर आप शराब पीते हैं, तो इसे बिल्कुल बंद कर दें. शराब फैटी लिवर ही नहीं, बल्कि लिवर की अन्य गंभीर बीमारियों की सबसे बड़ी वजह बन सकती है. इसके अलावा सिगरेट, बीड़ी और गुटखा से भी दूरी बना लें. ये सभी चीजें लिवर की सेहत को बुरी तरह प्रभावित करती हैं. शराब बंद करने से लिवर की सेहत सुधरने लगेगी. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. आजकल अधिकतर लोग जंक फूड और डीप फ्राइड फूड्स का जमकर सेवन करते हैं. अगर आप फैटी लिवर से जूझ रहे हैं, तो इन चीजों से तुरंत दूरी बना लें. इसके बजाय ताजा फल, सब्जियां और मोटे अनाज का सेवन शुरू करें. कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाली चीजें खाएं. मीठा बिल्कुल छोड़ दें और खाने के बीच में स्नैक्स के तौर पर चना खाएं. अगर आपके लिवर में फैट जमा है, तो आप बिना चीनी वाली ब्लैक कॉफी पीना शुरू कर दें. ब्लैक कॉफी आपके लिवर में जमा फैट को पिघलाकर बाहर निकाल देगी और फैटी लिवर से राहत दिलाएगी. कॉफी का सेवन करने से लिवर सिरोसिस से बचाव हो सकता है और लिवर कैंसर का खतरा भी कम होता है. आप रोज 2 से 3 कप ब्लैक कॉफी पी सकते हैं. डॉक्टर सरीन कहते हैं कि फैटी लिवर से छुटकारा पाने के लिए रोज एक्ससाइज या फिजिकल एक्टिविटी जरूर करें. इससे आपकी ज्यादा कैलोरी बर्न होगी और फैट का जमाव कम होगा. हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने से लिवर की सेहत सुधर जाएगी. इसके अलावा साल में एक बार अपने लिवर की जांच जरूर कराएं.

नीतीश से मिले तेजस्वी के बागी विधायक:इस्तीफे के बाद भी CM को मिलेगी Z+ सिक्योरिटी; 14 अप्रैल के बाद बन सकती है नई सरकार

नीतीश से मिले तेजस्वी के बागी विधायक:इस्तीफे के बाद भी CM को मिलेगी Z+ सिक्योरिटी; 14 अप्रैल के बाद बन सकती है नई सरकार

बिहार की सियासत में जल्द ही बड़ा उलटफेर होने वाला है। सूत्रों के अनुसार, सीएम नीतीश 10 अप्रैल को राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करेंगे। इसके बाद 14 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। इसके साथ ही 18 तारीख तक बिहार में नई सरकार का गठन होगा। सीएम के इस्तीफे की चर्चाओं के बीच उनकी सिक्योरिटी को लेकर बड़ा फैसला किया गया है। मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के बाद भी नीतीश कुमार को Z+ कैटेगरी की सिक्योरिटी मिलेगी। बिहार सरकार के गृह विभाग ने इसे लेकर अधिसूचना जारी की है। इस अधिसूचना में नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे भी का जिक्र है। लेटर में लिखा गया है, “बिहार विधान परिषद के सदस्य और मुख्यमंत्री बिहार के पद से त्याग-पत्र देकर राज्यसभा सदस्य की सदस्यता ग्रहण करेंगे।” इधर, तेजस्वी के बागी विधायक फैसल रहमान ने गुरुवार को सीएम हाउस में नीतीश कुमार से मुलाकात की।16 मार्च को हुए राज्यसभा चुनाव में ढाका विधायक फैसल रहमान वोट देने नहीं पहुंचे थे। बिहार की सियासत से जुड़ी हर अपडेट पढ़िए… गृह विभाग के लेटर में इस्तीफे का जिक्र गृह विभाग की ओर से जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, नीतीश कुमार को बिहार स्पेशल सिक्योरिटी एक्ट-2000 के तहत सुरक्षा का योग्य माना गया है। ये कानून विशिष्ट व्यक्तियों को उनकी संवेदनशीलता के आधार पर सुरक्षा कवर प्रदान करने का अधिकार देता है। विभाग ने कहा कि मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल और वर्तमान राजनीतिक स्थिति की समीक्षा के बाद सुरक्षा को लेकर ये कदम उठाया गया है। पुलिस महानिदेशक के नाम लिखे गए पत्र में कहा गया, “बिहार स्पेशल सिक्योरिटी एक्ट- 2000 के तहत नीतीश कुमार को सुरक्षा दी जाएगी। नीतीश मौजूदा वक्त में राज्य सभा के लिए निर्वाचित हुए हैं और आने वाले वक्त में बिहार विधान परिषद की सदस्यता और मुख्यमंत्री पद से त्याग-पत्र देकर राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करेंगे।” 14 अप्रैल के बाद बिहार में नई सरकार! नीतीश कुमार के इस्तीफे की चर्चा के साथ ही बिहार की सियासत 21 साल बाद नए सीएम को लेकर बातें शुरू हो गई हैं। खबर है कि 14 अप्रैल के बाद बिहार में नई सरकार बनेगी और पहली बार बीजेपी का सीएम होगा। BJP और JDU के नेता ऑफ कैमरा इस बात को स्वीकार करते हैं कि बिहार का अगला CM BJP का होगा। पिछले 10 वर्षों से बिहार में सत्ता हासिल करने की जुगत में लगी BJP इसमें सफल हो गई है। लेकिन, दोनों इस बात को स्वीकार करते हैं कि BJP चाहे जिसे नेता चुने, नीतीश कुमार की सहमति उस चेहरे पर जरूर होनी चाहिए। 1990 से लेकर 2005 तक लालू यादव परिवार का बिहार की सियासत पर दबदबा रहा। 2005 से लेकर अब तक नीतीश कुमार लगातार (मई 2014- फरवरी 2015 छोड़कर) CM बने रहे। नीतीश कुमार से मिले तेजस्वी के बागी विधायक राज्यसभा चुनाव वोटिंग में गायब रहने वाले ढाका से राजद विधायक फैसल रहमान ने सीएम नीतीश कुमार से मुलाकात की। मुलाकात के बाद अपने सोशल मीडिया पर इसकी फोटो शेयर कर एक पोस्ट के जरिए इसे शिष्टाचार मुलाकात बताया। साथ ही लिखा- क्षेत्र के विकास के लिए मुख्यमंत्री जी से सकारात्मक चर्चा हुई। एक्शन में नीतीश कुमार इन सियासी हलचलों के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पूरी तरह से एक्टिव नजर आ रहे हैं। गुरुवार सुबह सीएम तीन अलग-अलग जगह पर निरीक्षण करने पहुंचे। पहले वो पाटलिपुत्र कॉलोनी के पार्क पहुंचे, जहां चल रहे निर्माण कार्य का जायजा लिया। फिर दीघा एम्स एलिवेटेड रोड पाटलिपुत्र का निरीक्षण किया। उसके बाद नीतीश कुमार गोला रोड में चल रहे विकास कार्यों का निरीक्षण करने पहुंचे। बिहार की सियासत से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए….

RPSC Political Science Result Out

RPSC Political Science Result Out

राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की ओर से पात्रता जांच और दस्तावेज सत्यापन के बाद पॉलिटिकल साइंस व कॉमर्स लेक्चरर का फाइनल रिजल्ट घोषित कर दिया गया है। पॉलिटिकल साइंस में केवल 6 कैंडिडेट्स सिलेक्ट हुए हैं और ऐसे में 219 पद खाली रह गए। . वहीं कामर्स में 58 पद खाली रह गए। मिनीमम 40 प्रतिशत मार्क्स हासिल नहीं करने के कारण ऐसे हालात बने हैं। आयोग की ओर से 25 अक्टूबर 2024 को विभिन्न सब्जेक्ट में कुल 2202 पदों पर भर्ती निकाली गई। इसमें पॉलिटिकल साइंस के 225 पद थे। बता दें कि पॉलिटिकल साइंस भर्ती एग्जाम 6 जुलाई 2025 को हुआ। इसमें 84 हजार 846 अभ्यर्थियों में से 45 हजार 674 कैंडिडेट्स ने एग्जाम दिया। भर्ती में 386 कैंडिडेट्स को 10 प्रतिशत से ज्यादा सवालों में 5 विकल्पों में से कोई विकल्प नहीं भरने पर अयोग्य भी घोषित कर दिया था। आरपीएससी की ओर से 25 अक्टूबर 2024 को विभिन्न सब्जेक्ट में कुल 2202 पदों पर भर्ती निकाली गई। इसमें पॉलिटिकल साइंस के 225 पद थे। रिजल्ट के कट ऑफ में लिखा ‘कैंडिडेट नॉट एवेलेबल’ आरपीएससी ने रिजल्ट की कट ऑफ में सामान्य, एसटी सामान्य, एक्स सर्विसमेन सामान्य को छोड़कर सभी कैटेगरी में ‘एनए’ या​नी “कैंडिडेट नॉट एवेलेबल” लिखा है। 40 प्रतिशत मिनिमम मार्क्स लाने थे प्राध्यापक कोच भर्ती परीक्षा में कैंडिडेट्स को 40 प्रतिशत मार्क्स लाना अनिवार्य है। इसमें आरक्षित वर्ग को पांच प्रतिशत छूट का प्रावधान किया गया है। इससे पहले ही निकाले गए रिजल्ट में कईं पद खाली रह गए हैं। आरपीएससी की ओर से जारी किया गया फाइनल रिजल्ट। आरपीएससी की ओर से जारी की गई कट ऑफ। कॉमर्स में भी 58 पद खाली इसी तरह कॉमर्स विषय के अभ्यर्थियों की पात्रता जांच के लिए विचारित सूची 3 नवंबर को जारी की थी। विचारित सूची में शामिल अभ्यर्थियों की पात्रता जांच एवं दस्तावेज सत्यापन का कार्य संबंधि विभाग द्वारा किया गया। दस्तावेज सत्यापन के बाद आयोग ने 265 अभ्यर्थियों को मुख्य सूची में सफल घोषित किया है। जबकि आरक्षित सूची में 17 अभ्यर्थी शामिल हैं। यह परीक्षा कॉमर्स विषय के 340 पदों के लिए आयोजित की गई थी। लेकिन न्यूनतम उत्तीर्णांक के कारण शेष 58 पद खाली रह गए। ………. पढें ये खबर भी…. RPSC-एसआई भर्ती एग्जाम के ADMIT-CARD अपलोड:7.70 लाख कैंडिडेट्स; 1174 सेंटर पर 5 व 6 को दो पारियों में होगी परीक्षा राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की ओर से SI भर्ती एग्जाम 5 एवं 6 अप्रैल को होंगे। परीक्षा के प्रवेश पत्र वेबसाइट और SSO पोर्टल पर अपलोड कर दिए गए है। प्रदेश के 41 चयनित शहरों में स्थापित 1174 परीक्षा केंद्रों पर लगभग 7.70 लाख कैंडिडेट्स शामिल होंगे। ये भर्ती 1015 पदों के लिए है। परीक्षा के जिलों की जानकारी पहले से SSO पोर्टल पर उपलब्ध है। पूरी खबर पढें

मोबाइल-लैपटॉप घंटों देखने से हो रही जलन? अपनाएं डॉक्टरों का सुझाया 20-20-20 नियम, तुरंत मिलेगा आराम

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Last Updated:April 02, 2026, 09:06 IST Eye Care Tips: डिजिटल दौर में मोबाइल, लैपटॉप और स्क्रीन का उपयोग तेजी से बढ़ा है, जिसका सीधा असर आंखों पर पड़ रहा है. लंबे समय तक स्क्रीन देखने से डिजिटल आई स्ट्रेन की समस्या बढ़ रही है, जिसमें सूखापन, जलन, सिरदर्द और धुंधलापन शामिल हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, 20-20-20 नियम अपनाकर इन समस्याओं से काफी हद तक बचा जा सकता है. हर 20 मिनट बाद 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर देखने से आंखों को आराम मिलता है. यह आसान उपाय आंखों को स्वस्थ रखने और तनाव कम करने में मददगार साबित होता है. आज के डिजिटल दौर में मोबाइल, लैपटॉप और अन्य स्क्रीन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं. ऑफिस का काम, ऑनलाइन पढ़ाई और सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल के कारण लोग घंटों स्क्रीन के सामने समय बिता रहे हैं. इसका सीधा असर आंखों पर पड़ रहा है. आंखों में थकान, जलन, भारीपन और ड्रायनेस जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं. लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों की रोशनी भी प्रभावित हो सकती है. इसलिए जरूरी है कि समय-समय पर आंखों को आराम दें और उनकी सही देखभाल करें. नेत्र रोग विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक स्क्रीन पर लगातार नजर टिकाए रखने से “डिजिटल आई स्ट्रेन” की समस्या बढ़ जाती है. इसमें आंखों में सूखापन, जलन, सिरदर्द, धुंधला दिखना और फोकस करने में परेशानी जैसी दिक्कतें सामने आती हैं. इससे आंखों पर दबाव बढ़ता है और काम करने की क्षमता भी प्रभावित होती है. ऐसे में डॉक्टर 20-20-20 नियम अपनाने की सलाह देते हैं, जिसमें हर 20 मिनट बाद 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर किसी वस्तु को देखने से आंखों को आराम मिलता है और स्ट्रेन कम होता है. 20-20-20 नियम एक बेहद आसान और प्रभावी आंखों की एक्सरसाइज है, जिसे आप कहीं भी और कभी भी अपना सकते हैं. इसके तहत हर 20 मिनट में स्क्रीन से नजर हटाकर 20 सेकंड के लिए करीब 20 फीट दूर किसी वस्तु को देखना होता है. ऐसा करने से आंखों की मांसपेशियों को आराम मिलता है और लगातार स्क्रीन देखने से होने वाली थकान कम होती है. यह नियम डिजिटल आई स्ट्रेन को कम करने में मदद करता है और आंखों को स्वस्थ बनाए रखने का सरल तरीका है. Add News18 as Preferred Source on Google जब हम लंबे समय तक मोबाइल या कंप्यूटर स्क्रीन देखते रहते हैं, तो आंखें एक ही दूरी पर लगातार फोकस बनाए रखती हैं. इससे आंखों की मांसपेशियां थकने लगती हैं और तनाव बढ़ता है. 20-20-20 नियम अपनाने से यह लगातार फोकस टूटता है, जिससे आंखों को आराम और रिलैक्स होने का मौका मिलता है. साथ ही, इस दौरान बार-बार पलक झपकाने से आंखों में नमी बनी रहती है, जिससे ड्रायनेस, जलन और भारीपन जैसी समस्याओं में काफी राहत मिलती है. 20-20-20 नियम अपनाने के कई फायदे हैं. डॉक्टरों के अनुसार, यह आंखों को स्वस्थ रखने का आसान और असरदार तरीका है. इसे अपनाने से आंखों की थकान कम होती है और ड्रायनेस व जलन में राहत मिलती है. लंबे समय तक स्क्रीन देखने से होने वाले सिरदर्द की समस्या भी कम हो जाती है. इसके अलावा आंखों का फोकस बेहतर होता है और काम के दौरान कंफर्ट बना रहता है. नियमित रूप से इस नियम का पालन करने से आंखों पर पड़ने वाला दबाव कम होता है और दृष्टि को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है. आंखों को स्वस्थ रखने के लिए कुछ जरूरी सावधानियां अपनाना बेहद आवश्यक है. सबसे पहले, बहुत कम रोशनी में मोबाइल या लैपटॉप का इस्तेमाल करने से बचें, क्योंकि इससे आंखों पर अधिक दबाव पड़ता है. लगातार घंटों तक स्क्रीन को घूरते रहने की आदत भी नुकसानदायक हो सकती है, इसलिए बीच-बीच में ब्रेक लें. स्क्रीन से उचित दूरी बनाए रखना भी जरूरी है, ताकि आंखों पर जोर कम पड़े. अगर आंखों में लगातार दर्द, पानी आना या धुंधलापन बना रहे, तो इसे नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. First Published : April 02, 2026, 09:06 IST

हिमाचल में चिट्टा तस्करों के पंचायत चुनाव लड़ने पर रोक:प्रधान की जाएगी कुर्सी, सरकार ने कानून बदला; डिफाल्टर-ऑडिट रिकवरी वाले भी अयोग्य

हिमाचल में चिट्टा तस्करों के पंचायत चुनाव लड़ने पर रोक:प्रधान की जाएगी कुर्सी, सरकार ने कानून बदला; डिफाल्टर-ऑडिट रिकवरी वाले भी अयोग्य

हिमाचल प्रदेश में चिट्टा तस्करी में शामिल लोग पंचायत चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। विधानसभा में आज (गुरुवार को) हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (संशोधन) विधेयक, 2026 बिना चर्चा के पारित कर दिया गया। अब इसे राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राज्यपाल की स्वीकृति मिलते ही यह प्रावधान प्रभावी हो जाएगा और चिट्टा तस्करी से जुड़े लोग चुनावी प्रक्रिया से बाहर हो जाएंगे। पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह द्वारा बीते बुधवार को इस विधेयक को सदन में पेश किया था। चुने जाने के बाद भी जाएगी कुर्सी इस संशोधन के तहत पंचायत जनप्रतिनिधियों पर भी सख्त प्रावधान लागू होंगे। यदि कोई प्रधान, उप प्रधान, वार्ड मेंबर, बीडीसी सदस्य या जिला परिषद सदस्य चुने जाने के बाद चिट्टा तस्करी में संलिप्त पाया जाता है और उस पर आरोप तय हो जाते हैं, तो उसकी सदस्यता समाप्त कर दी जाएगी। ग्राम सभाओं के कोरम में बड़ा बदलाव विधेयक में ग्राम सभाओं के कोरम को लेकर भी अहम संशोधन किया गया है। अब तक ग्राम सभा के लिए 25 प्रतिशत परिवारों की उपस्थिति अनिवार्य थी, लेकिन नए प्रावधान के तहत इसे बदल दिया गया है। अब कुल परिवारों की बजाय कुल मतदाताओं में से 10 प्रतिशत की उपस्थिति को कोरम माना जाएगा। डिफाल्टर भी नहीं लड़ सकेंगे चुनाव संशोधन में सहकारी बैंकों और सोसाइटियों के डिफाल्टरों को भी चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित करने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा जिन लोगों पर पंचायत ऑडिट में रिकवरी लंबित है, वे भी चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। सरकार का उद्देश्य पंचायतों में वित्तीय अनुशासन लाना और साफ-सुथरी छवि वाले प्रतिनिधियों को बढ़ावा देना है। 3600 पंचायतों में चुनाव से पहले बड़ा असर प्रदेश की करीब 3600 पंचायतों में 31 मई से पहले चुनाव प्रस्तावित हैं। इसके लिए 7 अप्रैल तक आरक्षण रोस्टर तय किया जाना है। हर चुनाव में 60 हजार से अधिक उम्मीदवार मैदान में उतरते हैं। ऐसे में यह संशोधन बड़ी संख्या में संभावित उम्मीदवारों को प्रभावित करेगा और पंचायत चुनाव की तस्वीर बदल सकता है।गों को प्रभावित करेगा।

बंगाल में एसआईआर हटाने का विरोध: मालदा में 7 न्यायिक अधिकारियों का 8 घंटे तक घेराव | राजनीति समाचार

PSEB 5th 8th Result 2026 Live Updates: PSEB 5th, 8th exams were held in February-March. (Representative/File Photo)

आखरी अपडेट:02 अप्रैल, 2026, 08:53 IST विरोध प्रदर्शन कालियाचक 2 खंड विकास कार्यालय के बाहर दिन में शुरू हुआ और देर रात तक जारी रहा। बंगाल के मालदा में 7 न्यायिक अधिकारियों का घंटों तक घेराव. चुनावी राज्य पश्चिम बंगाल में 60 लाख से अधिक मतदाताओं के रिकॉर्ड में कथित विसंगतियों से संबंधित विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) मामलों को संभालने वाले सात न्यायिक अधिकारियों को बुधवार शाम को मालदा जिले के कालियाचौक क्षेत्र में एक बीडीओ कार्यालय के अंदर सीमित कर दिया गया, जब स्थानीय निवासियों ने विरोध में परिसर को घेर लिया। सूत्रों के मुताबिक, सात अधिकारियों में से तीन महिलाएं हैं। पुलिस अधिकारियों की एक टीम ने करीब आठ घंटे की मशक्कत के बाद उन्हें बचाया. जब उन्हें पुलिस वैन में ले जाया जा रहा था तो भीड़ ने पथराव कर दिया. घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। विरोध प्रदर्शन कालियाचक 2 खंड विकास कार्यालय के बाहर दिन में शुरू हुआ और देर रात तक जारी रहा। अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने शुरू में न्यायिक अधिकारियों के साथ बैठक की मांग की; हालाँकि, उन्होंने शाम लगभग 4 बजे प्रदर्शन शुरू किया और प्रवेश से इनकार किए जाने के बाद परिसर को घेर लिया। अधिकारियों ने बताया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान कार्यालय के अंदर फंसे लोगों में तीन महिला न्यायिक अधिकारी भी शामिल थीं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “हमने अधिकारियों को सतर्क कर दिया है। जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक को तुरंत मौके पर पहुंचने का निर्देश दिया गया है।” उन्होंने कहा कि पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से भी घटना पर रिपोर्ट मांगी गई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, न्यायिक अधिकारी वर्तमान में उन मतदाताओं के मामलों की जांच कर रहे हैं जिनके नाम 28 फरवरी को प्रकाशित मतदाता सूची में “न्यायाधीन” के रूप में चिह्नित किए गए थे ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि उन्हें बरकरार रखा जाना चाहिए या हटा दिया जाना चाहिए। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में होंगे, वोटों की गिनती 4 मई को होगी। जगह : पश्चिम बंगाल, भारत, भारत पहले प्रकाशित: 02 अप्रैल, 2026, 08:53 IST समाचार राजनीति बंगाल में SIR विलोपन का विरोध: मालदा में 7 न्यायिक अधिकारियों का 8 घंटे तक घेराव अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल(टी)मालदा(टी)सर

भाजपा पश्चिम बंगाल चुनाव रणनीति 2026: नरम स्वर और स्थानीय धक्का | चुनाव समाचार

Four men walk as a thick plume of smoke from a US-Israeli strike on an oil storage facility rises behind them in Tehran, Iran. (File IMAGE: AP)

आखरी अपडेट:02 अप्रैल, 2026, 08:41 IST भाजपा ने 2026 के पश्चिम बंगाल अभियान को पुनर्गठित किया, ममता पर व्यक्तिगत हमलों से परहेज किया, धार्मिक ध्रुवीकरण को कम किया, स्थानीय नेताओं को बढ़ावा दिया, टीएमसी के बाहरी आख्यानों का मुकाबला किया पश्चिम बंगाल में दो चरणों में चुनाव होंगे: 23 अप्रैल और 29 अप्रैल। वोटों की गिनती 4 मई 2026 को होगी। (फोटो: पीटीआई फ़ाइल) पहले चरण के मतदान के लिए केवल तीन सप्ताह शेष रह गए हैं, 2026 पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव अभियान हाई-वोल्टेज चरण में प्रवेश कर गया है। लगातार असफलताओं के बाद वाम दलों और कांग्रेस के हाशिये पर चले जाने से, मुकाबला प्रभावी रूप से सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच सीधी लड़ाई में बदल गया है। भाजपा, जिसने 2021 में 294 सदस्यीय विधानसभा में 77 सीटें हासिल कीं, इस चुनाव में एक पुनर्निर्धारित रणनीति के साथ आगे बढ़ रही है – जो स्पष्ट रूप से उसकी पिछली हार के सबक से बनी है। ममता बनर्जी पर कोई व्यक्तिगत हमला नहीं सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में से एक भाजपा के सुर में है। 2021 में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ममता बनर्जी पर “दीदी-ओ-दीदी” का तंज एक प्रमुख मुद्दा बन गया, जिससे टीएमसी को अभियान को अपमान और पीड़ित होने की कहानी में बदलने की अनुमति मिल गई। इस बार बीजेपी ज्यादा संभलकर कदम रख रही है. बनर्जी पर सीधे व्यक्तिगत हमलों से काफी हद तक बचा गया है। इसके बजाय, ध्यान उनके 15 साल के शासन के प्रदर्शन को लक्षित करने पर केंद्रित हो गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में राज्य सरकार के खिलाफ एक आरोप पत्र जारी किया, लेकिन विशेष रूप से सम्मानजनक लहजा बरकरार रखते हुए उन्हें “ममता जी” या “दीदी” कहा। यह बदलाव भावनात्मक प्रतिक्रिया से बचने और अभियान को शासन, भ्रष्टाचार और विकास पर केंद्रित रखने के एक सचेत प्रयास को दर्शाता है। ‘बाहरी’ का टैग हटाना दूसरा महत्वपूर्ण बदलाव स्थानीय नेतृत्व पर नए सिरे से जोर देना है। ब्रिगेड ग्राउंड में हाल की रैली में, प्रधानमंत्री के साथ मंच पर दिलीप घोष से लेकर राहुल सिन्हा तक बंगाल के नेताओं का दबदबा था, जबकि केंद्रीय पर्यवेक्षक ज्यादातर पृष्ठभूमि में रहे। यह 2021 से प्रस्थान का प्रतीक है, जब तत्कालीन प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय जैसे राज्य के बाहर के नेताओं ने कहीं अधिक स्पष्ट भूमिका निभाई थी। जबकि भूपेन्द्र यादव और मंगल पांडे जैसी केंद्रीय हस्तियां संगठनात्मक पहलुओं की देखरेख जारी रखती हैं, उनकी सार्वजनिक उपस्थिति अधिक संयमित रही है। रणनीति स्पष्ट है: टीएमसी को अपने “बाहरी बनाम बंगाली” कथन को पुनर्जीवित करने के लिए कोई भी जगह न दें। धार्मिक ध्रुवीकरण से बचना पश्चिम बंगाल की चुनावी गतिशीलता इसकी बड़ी मुस्लिम आबादी से प्रभावित होती रहती है, जो लगभग 125 निर्वाचन क्षेत्रों को प्रभावित करती है। इन सीटों पर टीएमसी का लगातार दबदबा रहा है, जिससे उसे संरचनात्मक लाभ मिला है। इस बार, भाजपा प्रत्यक्ष धार्मिक ध्रुवीकरण से बच रही है – एक ऐसा दृष्टिकोण जो पहले उस राज्य में प्रतिकूल साबित हो सकता है जहां मुसलमानों की आबादी 30% से अधिक है। बयानबाजी को नियंत्रित कर दिया गया है, तेज वैचारिक रेखाओं की जगह अधिक कोडित संदेशों ने ले ली है। उन्होंने कहा, टीएमसी के पीछे मुस्लिम वोटों का एकीकरण अभी भी निर्णायक हो सकता है, खासकर कांग्रेस और वामपंथियों को एक मजबूत चुनौती देने के लिए संघर्ष करते हुए। हुमायूँ कबीर जैसे विद्रोही व्यक्ति कुछ अप्रत्याशितता का परिचय दे सकते हैं, लेकिन उनका समग्र प्रभाव अनिश्चित बना हुआ है। सांस्कृतिक राष्ट्रवाद बनाम बंगाली पहचान प्रतियोगिता सांस्कृतिक आधार पर भी सामने आ रही है। ममता बनर्जी ने बंगाली पहचान के इर्द-गिर्द अपनी आवाज़ तेज़ कर दी है, और अक्सर भाजपा को राज्य के साथ सांस्कृतिक रूप से असंगत के रूप में चित्रित किया है। उनका दावा है कि भाजपा सरकार स्थानीय संवेदनाओं और रोजमर्रा की सांस्कृतिक प्रथाओं का लाभ उठाने के लिए मछली पर प्रतिबंध लगाएगी। खान-पान की आदतों से लेकर धार्मिक प्रतीकों तक, टीएमसी ने “अंदरूनी बनाम बाहरी” विभाजन को मजबूत करने का प्रयास किया है। जवाब में, भाजपा ने अपने संदेश को समायोजित किया है। 2021 के विपरीत, जब “जय श्री राम” उसके अभियान पर हावी था, पार्टी अब उन प्रतीकों की ओर झुक रही है जो बंगाल के सांस्कृतिक लोकाचार के साथ अधिक गहराई से मेल खाते हैं। सांकेतिक जवाब में बीजेपी के एक उम्मीदवार को हाथ में मछली लेकर प्रचार करते हुए भी देखा गया. भाजपा की सांस्कृतिक पुनर्ब्रांडिंग प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का “जय माँ काली” और “जय माँ दुर्गा” का आह्वान स्वर में एक उल्लेखनीय बदलाव का प्रतीक है। उनका आउटरीच विकास के आह्वान को सांस्कृतिक संदर्भों के साथ जोड़ता है जो बंगाल की परंपराओं के साथ अधिक निकटता से मेल खाता है। यह नारों में महज बदलाव से भी आगे जाता है। यह भाजपा द्वारा “बाहरी” लेबल को त्यागने और खुद को राज्य के सामाजिक-सांस्कृतिक ढांचे के भीतर समाहित करने के व्यापक प्रयास का संकेत देता है। कुल मिलाकर, ये बदलाव 2026 में अधिक सूक्ष्म भाजपा अभियान की ओर इशारा करते हैं – कम जुझारू, अधिक स्थानीयकृत, और बंगाल की सांस्कृतिक और सामाजिक वास्तविकताओं से कहीं अधिक परिचित। हालाँकि, यह पुनर्गणित दृष्टिकोण चुनावी लाभ में तब्दील होता है या नहीं, यह वोटों की गिनती के बाद ही पता चलेगा। पहले प्रकाशित: 02 अप्रैल, 2026, 08:41 IST समाचार चुनाव भाजपा की बंगाल चुनाव रणनीति को डिकोड करना: नरम स्वर, स्थानीय दबाव और सांस्कृतिक रीसेट अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)बीजेपी अभियान रणनीति(टी)तृणमूल कांग्रेस बनाम बीजेपी(टी)ममता बनर्जी नेतृत्व(टी)बाहरी बनाम बंगाली कथा(टी)धार्मिक ध्रुवीकरण की राजनीति(टी)बंगाल में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद

कोटा में स्टूडेंट्स के लिए हॉस्टल का किराया घटाया:2 से 4 हजार में मिल रहे PG, कोचिंग संस्थान दे रहे 50% तक स्कॉलरशिप

कोटा में स्टूडेंट्स के लिए हॉस्टल का किराया घटाया:2 से 4 हजार में मिल रहे PG, कोचिंग संस्थान दे रहे 50% तक स्कॉलरशिप

डॉक्टर और इंजीनियर बनने का सपना लेकर कोटा आने वाले देश भर के लाखों स्टूडेंट्स के लिए इस बार राहत भरी खबर है। नया सेशन शुरू होते ही स्टूडेंट्स का कोटा पहुंचना शुरू हो गया है, लेकिन इस बार उन्हें न तो महंगे कमरों की चिंता है और न ही बढ़ती फीस की। कोचिंग संस्थान इस बार 50 फीसदी तक स्कॉलरशिप दे रहे हैं। करीब 3 साल पहले तक जिस कोटा में स्टूडेंट्स को 15 हजार रुपए में भी कमरा मिलना मुश्किल हो रहा था, वहां अब 9 से 11 हजार रुपए में एसी, खाना और लॉन्ड्री जैसी सुविधां के साथ बेहतरीन विकल्प उपलब्ध हैं। कोटा में हॉस्टलों के अलावा कई पीजी भी हैं। पीजी में पहले किराया 5 से 6 हजार रुपए था। वर्तमान में 2 से 4 हजार रुपए लिए जा रहे हैं। 4 हजार रुपए भी बड़े हॉलनुमा कमरे का किराया है, जिसमें बिजली-पानी भी शामिल है। हॉस्टल एसोसिएशन का फैसला- 11 हजार से ज्यादा किराया नहीं हॉस्टल एसोसिएशन के अध्यक्ष नवीन मित्तल ने बताया कि कोरोना के बाद अचानक स्टूडेंट्स की संख्या 1.90 लाख तक पहुंच गई थी, जिससे डिमांड बढ़ने पर रेट 15 हजार तक चले गए थे। अब स्थिति नियंत्रण में है। हॉस्टल संचालकों को 9 हजार से 11 हजार रुपए तक किराया रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें रूम, एसी, खाना, लॉन्ड्री और सफाई शामिल है। कभी सबसे महंगा रहने वाले राजीव गांधी नगर इलाके में अब 3 हजार रुपए तक में कमरे उपलब्ध हैं। कोचिंग संस्थानों ने भी बढ़ाया हाथ, नहीं बढ़ेगी फीस मिडिल क्लास परिवारों को राहत देने के लिए इस साल कोचिंग संस्थानों ने अपनी फीस में कोई बढ़ोतरी नहीं करने का निर्णय लिया है। साथ ही, अब हॉस्टलों में महीनों का एडवांस किराया लेने की प्रथा पर भी रोक लगा दी गई है। स्टूडेंट्स की काउंसिलिंग से लेकर 24 घंटे की हेल्पलाइन सेवा भी दी जा रही है। टेस्ट में अच्छे नंबर लाइए, फीस में छूट पाइए कोटा में 50 से ज्यादा छोटे-बड़े कोचिंग संस्थान हैं। इनमें NEET और JEE की तैयारी करवाई जाती है। स्टूडेंट्स को राहत देते हुए इंस्टीट्यूट्स ने इस बार फीस में कोई बढ़ोतरी नहीं की है। इसके अलावा स्टूडेंट्स के लिए स्कॉलरशिप टेस्ट भी करवाए जा रहे हैं। इसमें बच्चों को 50 प्रतिशत तक स्कॉलरशिप दी जा रही है। सामाजिक सारोकार के तहत चुनिंदा बच्चों को फ्री में रहने, खाने और पढ़ाने की सुविधा भी दी जा रही है। कोचिंग इंस्टीट्यूट्स में कोर्स के हिसाब से अलग-अलग फीस है, जो 80 हजार से लेकर 1.50 लाख रुपए तक है। सामान्यत: बड़े कोचिंग इंस्टीट्यूट में NEET स्टूडेंट्स से एक लाख 35 हजार और IIT की तैयारी करवाने के लिए डेढ़ लाख की फीस ली जा रही है। तीन साल पहले 15 हजार में भी नहीं मिलते थे कमरे कोटा में 3 साल पहले ऐसा समय आया था, जब स्टूडेंट्स को हॉस्टलों में 15 हजार रुपए तक में भी कमरे नहीं मिल रहे थे। अब स्टूडेंटस के लिए हॉस्टल में कमरों के कई विकल्प (ऑपशन) मौजूद हैं। स्टूडेंट अपने बजट के अनुसार कमरा ले सकता है। हॉस्टल एसोसिएशन अध्यक्ष नवीन मित्तल ने बताया कि कोटा में वर्तमान में स्टूडेंट्स के बजट में हॉस्टल में कमरे मिल रहे है। उन्होंने बताया कि कोरोना के बाद स्टूडेंट्स की संख्या काफी बढ़ गई थी। उस समय करीब 1 लाख 90 हजार स्टूडेंट्स कोटा में थे। काफी डिमांड होने की वजह से कई हॉस्टल काफी महंगे हो गए थे। स्टूडेंट्स से 15 हजार रुपए तक वसूले जा रहे थे। अब जब स्टूडेंट्स की संख्या कम हुई है तो उनकी सहूलियत को ध्यान में रखते हुए हॉस्टल संचालकों को कहा गया है कि हॉस्टल में 9 हजार से लेकर 11 हजार रुपए तक किराया ही तय रखें। राजीव गांधी नगर एरिया में कई हॉस्टलों में 3 हजार रुपए तक में कमरा किराए पर लेने के बोर्ड लगे हुए हैं। पहले यहां कमरे के लिए 11 हजार रुपए तक वसूले जाते थे। हॉस्टल्स में बायोमीट्रिक अटेंडेंस, सुरक्षा का पूरा ध्यान हॉस्टल एसोसिएशन के अध्यक्ष नवीन मित्तल बताते हैं- बच्चों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। ज्यादातर हॉस्टल्स में बायोमीट्रिक अटेडेंस सिस्टम है। यहां हॉस्टल में आने और जाने का समय रिकॉर्ड रहता है। इसके अलावा इसकी सूचना बच्चों के माता-पिता को भी दी जाती है। कमरों में एंटी हैंगिग डिवाइस पहले से ही इंस्टॉल है। रात 10 बजे बाद बच्चों को बाहर जाने की अनुमति नहीं रहती है। हर स्टूडेंटस से वार्डन रोज संपर्क करते हैं। कॉशन (सिक्योरिटी) मनी लेना बंद कर दिया गया है। मेस में मेन्यू के आधार पर कीमत कोटा में हॉस्टल मेस के अलावा ओपन मेस भी चलते हैं। इनमें 3 हजार से 3500 रुपए तक में बच्चों को आसानी से खाना मिल रहा है। मेस की रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। मेन्यू के आधार पर अलग-अलग मेस का अलग-अलग रेट है। बच्चे मेस में आकर खाना खा सकते हैं या उनके पीजी रूम तक मेस की तरफ से टिफिन भिजवाया जाता है। बच्चों के लिए 24 घंटे हेल्पलाइन कोचिंग स्टूडेंट्स के लिए ASWS (ऑल स्टूडेंटस वेलफेयर सोसायटी) भी काम कर रही है, जिसमें कोचिंग संस्थानों के मेंटर्स काम करते है। जैसे- एमपी–हरियाणा से आए स्टूडेंट्स कोटा में पिछले एक साल से NEET की तैयारी कर रहे हरियाणा के हर्ष मलिक ने अपने छोटे भाई रक्षित को भी कोचिंग के लिए कोटा बुलाया है। हर्ष ने बताया यहां पर फैकल्टी दूसरी जगह से काफी अच्छी है। टीचर्स का सपोर्ट रहता है ताकि बच्चा अपना बेस्ट दे सके। हरियाणा में इतनी अच्छी व्यवस्था नहीं है, जितनी यहां है। निगेटिव बातों को लेकर हर्ष ने कहा- ऐसी बात तब आती है, जब स्टूडेंट अपना 100 फीसदी नहीं दे रहा होता है। रीवा (मध्य प्रदेश) के नमन ने भी इसी साल कोटा में एडमिशन लिया है। उसके साथ दोस्त श्रीकांत भी कोटा पहली बार आया है। नमन ने बताया कि कोटा का रिव्यू बहुत अच्छा है। यहां पढ़ाई का माहौल है। यहां हॉस्टल के ऑप्शन हैं और खाने की भी कोई दिक्कत नहीं है। एक स्टूडेंट साल में साढ़े 3 से 4 लाख रुपए खर्च करता है। पेरेंट्स बोले– कोटा में अच्छा माहौल,

हिमाचल में पार्टी छोड़ने वाले विधायकों को पेंशन नहीं, सुक्खू सरकार ने पेश किया नया संशोधन विधेयक | शिमला समाचार

PSEB 5th 8th Result 2026 Live Updates: PSEB 5th, 8th exams were held in February-March. (Representative/File Photo)

आखरी अपडेट:02 अप्रैल, 2026, 08:39 IST हिमाचल सरकार ने दलबदल पर लगाम लगाने के लिए एक विधेयक पेश किया है. दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य ठहराए गए विधायकों को पेंशन और स्थायी लाभ नहीं मिलेंगे इसलिए इस संशोधन को लोकतंत्र को मजबूत करने और मतदाताओं के जनादेश की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण उपाय के रूप में देखा जाता है। हिमाचल सरकार ने विधायकों के दलबदल पर लगाम लगाने के लिए अहम कदम उठाया है। बुधवार को विधानसभा के बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हिमाचल प्रदेश विधानसभा भत्ते और पेंशन संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया। एक बार अधिनियमित होने के बाद, विधेयक दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य ठहराए गए सांसदों को पेंशन लाभ प्राप्त करने से रोक देगा। संशोधन के प्रमुख प्रावधान विधेयक में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि 14वीं विधानसभा या उसके बाद चुने गए सदस्य, जिन्हें संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के तहत अयोग्य घोषित किया गया है, वे पेंशन के हकदार नहीं होंगे। इसे लागू करने के लिए मौजूदा 1971 अधिनियम की धारा 6-बी में एक नई उपधारा (2-ए) जोड़ी गई है। सरकार ने पाया है कि मौजूदा कानून में चुनाव के बाद विधायकों को दल बदलने से हतोत्साहित करने के लिए पर्याप्त प्रावधानों का अभाव है। निर्वाचित प्रतिनिधि कभी-कभी सार्वजनिक जनादेश के विपरीत पार्टियां बदल लेते हैं, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और सार्वजनिक विश्वास दोनों को नुकसान पहुंचता है। इसलिए इस संशोधन को लोकतंत्र को मजबूत करने और मतदाताओं के जनादेश की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण उपाय के रूप में देखा जाता है। वर्तमान पेंशन संरचना वर्तमान में, पूरे पांच साल का कार्यकाल पूरा करने वाले विधायक विस्तारित सेवा के लिए अतिरिक्त वेतन वृद्धि के साथ, प्रति माह 50,000 रुपये की पेंशन के हकदार हैं। एक से अधिक कार्यकाल के लिए, सेवा के प्रत्येक अतिरिक्त वर्ष के लिए प्रति माह 1,000 रुपये अतिरिक्त दिए जाते हैं। 2030 से, पेंशन को मुद्रास्फीति सूचकांक के अनुसार हर पांच साल में संशोधित किया जाएगा। विधायक की मृत्यु की स्थिति में उनके परिवार को पेंशन का 50% मिलता है। इस संशोधन को राजनीतिक अखंडता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जाता है, जिसका उद्देश्य लोगों के जनादेश की रक्षा करना और लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखना है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि संशोधन कानून निर्माताओं को एक मजबूत संकेत भेजता है: पार्टियों को बदलने से न केवल राजनीतिक बल्कि वित्तीय परिणाम भी होंगे। पेंशन जैसे स्थायी लाभों की हानि, विधायकों को भविष्य में दल बदलने से पहले पुनर्विचार करने पर मजबूर कर सकती है। कानून निर्माता जो खो देंगे पेंशन इस समय हिमाचल प्रदेश का 14वां विधानसभा सत्र चल रहा है। 2024 के राज्यसभा चुनाव के दौरान, छह कांग्रेस विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की, जिसके परिणामस्वरूप भाजपा उम्मीदवार हर्ष महाजन को राज्यसभा सांसद के रूप में चुना गया। शामिल विधायक थे: -सुधीर शर्मा राजेंद्र राणा इंदर दत्त लखनपाल रवि ठाकुर चैतन्य शर्मा देवेन्द्र भुट्टो उस समय, कांग्रेस ने विनियोग विधेयक पर मतदान के लिए विधायकों को उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी किया था, लेकिन ये छह व्हिप का उल्लंघन करते हुए अनुपस्थित थे। परिणामस्वरूप, उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया। इनमें चैतन्य शर्मा और देवेन्द्र भुट्टो पहली बार विधायक बने थे और पार्टी बदलने के कारण उनकी सदस्यता चली गयी। बाद के उप-चुनावों में, भाजपा ने सभी छह उम्मीदवार मैदान में उतारे; हालाँकि, देवेन्द्र भुट्टो, रवि ठाकुर और चैतन्य शर्मा हार गये। बाकी चार पहले विधायक रह चुके हैं। संशोधन के बाद, चैतन्य शर्मा और देवेंद्र कुमार भुट्टो अपनी पेंशन और अन्य लाभ खो देंगे, जबकि शेष विधायक 12वीं और 13वीं विधानसभा में अपनी सेवा से पेंशन के लिए पात्र रहेंगे। विधेयक के लिए अगले चरण विधानसभा में चर्चा के बाद संशोधन विधेयक पारित कर राज्यपाल के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा. राज्यपाल के विधेयक पर हस्ताक्षर करते ही संशोधित कानून के प्रावधान लागू हो जायेंगे. जगह : हिमाचल प्रदेश, भारत, भारत पहले प्रकाशित: 02 अप्रैल, 2026, 08:39 IST समाचार शहर शिमला हिमाचल में पार्टी छोड़ने वाले विधायकों को पेंशन नहीं, सुक्खू सरकार ने पेश किया नया संशोधन विधेयक अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)हिमाचल प्रदेश दल-बदल विरोधी पेंशन बिल(टी)हिमाचल विधानसभा पेंशन संशोधन(टी)सुखविंदर सिंह सुक्खू बिल(टी)दलबदल विरोधी कानून भारत(टी)हिमाचल प्रदेश विधायकों की पेंशन(टी)पार्टी बदलने वाले विधायक(टी)राजनीतिक अखंडता हिमाचल(टी)राज्यसभा क्रॉस वोटिंग