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मां बनना और भी आसान और सस्ता, भारत के IVF में पहली बार AI की हुई एंट्री, इन कारणों से बढ़ रहा बांझपन

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Last Updated:April 02, 2026, 11:00 IST आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब आईवीएफ में भी आ गया है. एआई की सहायता से अब मां बनाना और भी आसान हो जाएगा. यह जानकारी गौडियम आईवीएफ की निदेशक डॉ. मनिका खन्ना न दी है. इस उपलब्धि का औपचारिक उद्घाटन भारत सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और सैयद शाहनवाज हुसैन ने किया. इस टेक्नोलॉजी के बाद इलाज की कीमत लगभग 15 से 20% तक कम हो जाएगी. नई दिल्ली. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब आईवीएफ में भी आ गया है. इसके जरिए मां बनना अब पहले से ज्यादा आसान हो गया है. सरल होने के साथ-साथ अब आईवीएफ का इलाज सस्ता भी होने जा रहा है. लगभग 15 से 20% तक आईवीएफ का इलाज सस्ता हो जाएगा. यह जानकारी दी है देश में पहली बार आईवीएफ में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दो टूल्स जोकि एसआईडी यानी स्पर्म आइडेंटिफिकेशन डिवाइस और एरिका यानी एम्ब्रियो रैंकिंग इंटेलिजेंट क्लासिफिकेशन असिस्टेंट को लॉन्च करने वाले सेंटर गौडियम आईवीएफ की निदेशक डॉ. मनिका खन्ना ने. गौडियम आईवीएफ की इस उपलब्धि का औपचारिक उद्घाटन भारत सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और सैयद शाहनवाज हुसैन जोकि पूर्व लोकसभा सदस्य हैं उन्होंने किया. आईवीएफ 2.0 के क्लीनिक साइंटिस्ट और ग्लोबल कम्युनिकेशंस के निदेशक जाइल्स पामर ने भी इस कदम की सराहना की. निदेशक डॉ. मनिका खन्ना ने खास बातचीत में बताया कि स्पर्म आइडेंटिफिकेशन डिवाइस और एम्ब्रियो रैंकिंग इंटेलिजेंट क्लासिफिकेशन असिस्टेंट के जरिए सही एम्ब्रियो को चुनना आसान हो जाएगा जिससे सक्सेस रेट बढ़ेगा. इसकी कीमत भी घट जाएगी. इलाज की कीमत लगभग 15 से 20% तक कम हो जाएगी. बात करें इसके दुष्प्रभाव की तो इसका दुष्प्रभाव कोई भी नहीं है, क्योंकि हम शरीर के अंदर इसके जरिए कोई सुई या कुछ डाल नहीं रहे हैं. ऐसे में यह एकदम सुरक्षित है. तमाम रिसर्च और टेस्टिंग के बाद ही इसे लाया गया है. उन्होंने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इन दो टूल्स को आईवीएफ में लाने वाला उनका सेंटर देश का पहला सेंटर है. यकीनन इसके जरिए आईवीएफ पर लोगों का विश्वास और बढ़ेगा क्योंकि इलाज सरल, सस्ता और आसान हो जाएगा. उन्होंने बताया कि यूनाइटेड स्टेट में इसके जरिए ट्रीटमेंट चल रहा है जोकि सफल है. भारत में 15% लोग बांझपन का शिकारनिदेशक डॉ. मनिका खन्ना ने खास बातचीत में बताया कि भारत देश में 15% लोग बांझपन का शिकार है. सबसे हैरानी की बात यह है कि उसमें सिर्फ दो प्रतिशत लोग ही आगे आकर आईवीएफ का इलाज करवा रहे हैं, ताकि वो मां-बाप बनने का सुख प्राप्त कर सकें. उन्होंने बताया कि ऐसा नहीं है कि बांझपन सिर्फ महिला में ही है, बांझपन पुरुषों में भी है. शादी के बाद अगर बच्चा नहीं हो रहा है तो 2009 से लेकर अब तक उन्होंने देखा है कि ऐसे मामलों में 40% महिलाएं और 40% पुरुष में बांझपन पाया जाता है. जबकि 20% मामलों में दोनों ही बांझपन का शिकार होते हैं, जिस वजह से यह कहना गलत है कि सिर्फ महिला में ही कमी है. कमी दोनों तरफ से होती है. इन कारणों से बढ़ रहा बांझपनडॉ. मनिका खन्ना ने बताया कि बांझपन जेनेटिक नहीं होता है. बल्कि इसका प्रमुख कारण तनाव है और मिलावट खाना है. इसके अलावा प्रदूषण और बढ़ता हुआ नशा भी इसके कारण बन रहे हैं. आजकल महिलाएं और लड़कियां देर से शादी कर रही है जोकि अच्छा फैसला है क्योंकि वो पहले आत्मनिर्भर बनकर ही शादी करना चाह रही है. इसके लिए एक अच्छा विकल्प है कि वह अपने आगे यानी अंडों को फ्रिज करवा लें. अंडों को 10 साल तक फ्रीजिंग में रखा जा सकता है. इसके लिए मामूली सा मेंटेनेंस चार्ज देना होता है. इसके बाद दोबारा अपने अंडों के जरिए लड़कियां मां बन सकती हैं. About the Author Mohd Majid with more than more than 5 years of experience in journalism. It has been two and half year to associated with Network 18 Since 2023. Currently Working as a Senior content Editor at Network 18. Here, I am cover…और पढ़ें First Published : April 02, 2026, 11:00 IST

Govt Big Decision: Plastic, Textile & Auto Sectors Get Relief

Govt Big Decision: Plastic, Textile & Auto Sectors Get Relief

Hindi News Business Govt Big Decision: Plastic, Textile & Auto Sectors Get Relief | Petrochemical Import Duty Cut नई दिल्ली28 मिनट पहले कॉपी लिंक केंद्र सरकार ने बुधवार यानी 1 अप्रैल को चुनिंदा क्रिटिकल पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स पर लगने वाली बेसिक कस्टम्स ड्यूटी को पूरी तरह से माफ कर दिया है। यह छूट 30 जून 2026 तक लागू रहेगी। अमेरिका-इजराइल और ईरान युद्ध के बीच में जारी तनाव और ग्लोबल सप्लाई चेन में रुकावटों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। इसका उद्देश्य घरेलू मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को कच्चे माल की सप्लाई लगातर मिलना और बढ़ती लागत को कम करना है। इंडस्ट्री को सप्लाई चेन की दिक्कतों से बचाना लक्ष्य सरकार की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की वजह से ग्लोबल मार्केट में अनिश्चितता बनी हुई है। इससे पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक और इंटरमीडिएट्स की कीमतों में भारी उछाल आया है और सप्लाई चेन में दिक्कत आई है। इस फैसले से घरेलू उद्योगों पर पड़ने वाले अतिरिक्त आर्थिक बोझ को कम करने में मदद मिलेगी। प्लास्टिक से लेकर दवाओं तक, इन सेक्टर्स को होगा फायदा कस्टम ड्यूटी हटने से उन सभी उद्योगों को राहत मिलेगी जो पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल कच्चे माल के रूप में करते हैं। इसमें मुख्य रूप से प्लास्टिक, पैकेजिंग, टेक्सटाइल (कपड़ा), फार्मास्यूटिकल्स (दवा), केमिकल्स और ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स सेक्टर शामिल हैं। जानकारों का मानना है कि इनपुट कॉस्ट कम होने से फाइनल प्रोडक्ट्स की कीमतें भी स्थिर रहेंगी। इससे आम आदमी को महंगाई से राहत मिल सकती है। इन प्रमुख प्रोडक्ट्स पर अब नहीं लगेगी ड्यूटी सरकार ने छूट वाली लिस्ट में कई महत्वपूर्ण रसायनों और कच्चे माल को शामिल किया है। इनमें शामिल हैं: केमिकल इनपुट्स: एनहाइड्रस अमोनिया, मेथनॉल, टोल्यूनि, स्टाइरीन, विनाइल क्लोराइड मोनोमर। इंटरमीडिएट्स: मोनोएथिलीन ग्लाइकॉल (MEG), फिनोल, एसिटिक एसिड और प्यूरीफाइड टेरेफ्थेलिक एसिड (PTA)। स्पेशियलिटी केमिकल्स: एपॉक्सी रेजिन, पॉलीयुरेथेन, फॉर्मेल्डिहाइड डेरिवेटिव्स और पॉलीओल्स। पॉलीमर और इंजीनियरिंग प्लास्टिक भी हुए सस्ते आम तौर पर पैकेजिंग और ऑटो सेक्टर में इस्तेमाल होने वाले पॉलिमर कैटेगरी को भी इस छूट के दायरे में रखा गया है। इसमें पॉलीथीन, पॉलीप्रोपाइलीन, पॉलीस्टाइनिन, पीवीसी (PVC) और पीईटी (PET) चिप्स शामिल हैं। साथ ही एबीएस (ABS) और पॉलीकार्बोनेट जैसे इंजीनियरिंग प्लास्टिक पर भी इंपोर्ट ड्यूटी माफ कर दी है। जून 2026 तक मिलेगी राहत सरकार ने साफ किया है कि यह एक अस्थायी उपाय है जिसे मौजूदा ग्लोबल टेंशन्स को देखते हुए लिया गया है। इस छूट की डेडलाइन 30 जून 2026 तय की गई है। सरकार के सूत्रों का कहना है कि वे जियो पॉलिटिकल हालातों पर नजर बनाए हुए हैं। अगर जरूरत पड़ी तो भविष्य में सप्लाई चेन की स्थिति को देखते हुए और भी कदम उठाए जा सकते हैं। नॉलेज बॉक्स: क्या होता है पेट्रोकेमिकल इंटरमीडिएट? आसान भाषा में समझें तो क्रूड ऑयल या नेचुरल गैस से जो बुनियादी रसायन निकलते हैं, उन्हें रिफाइन करके इंटरमीडिएट्स बनाए जाते हैं। ये सीधे इस्तेमाल नहीं होते, बल्कि इनसे आगे चलकर प्लास्टिक, फाइबर, पेंट और दवाएं बनाई जाती हैं। भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से इंपोर्ट करता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Govt Big Decision: Plastic, Textile & Auto Sectors Get Relief

Govt Big Decision: Plastic, Textile & Auto Sectors Get Relief

Hindi News Business Govt Big Decision: Plastic, Textile & Auto Sectors Get Relief | Petrochemical Import Duty Cut नई दिल्ली10 घंटे पहले कॉपी लिंक केंद्र सरकार ने बुधवार यानी 1 अप्रैल को 40 क्रिटिकल पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स पर लगने वाली बेसिक कस्टम्स ड्यूटी को पूरी तरह से माफ कर दिया है। यह छूट 30 जून 2026 तक लागू रहेगी। अमेरिका-इजराइल और ईरान युद्ध के बीच में जारी तनाव और ग्लोबल सप्लाई चेन में रुकावटों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। इसका उद्देश्य घरेलू मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को कच्चे माल की सप्लाई लगातर मिलना और बढ़ती लागत को कम करना है। इससे सरकारी खजाने पर 1,800 करोड़ रुपए का बोझ पड़ेगा। इंडस्ट्री को सप्लाई चेन की दिक्कतों से बचाना लक्ष्य सरकार की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की वजह से ग्लोबल मार्केट में अनिश्चितता बनी हुई है। इससे पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक और इंटरमीडिएट्स की कीमतों में भारी उछाल आया है और सप्लाई चेन में दिक्कत आई है। इस फैसले से घरेलू उद्योगों पर पड़ने वाले अतिरिक्त आर्थिक बोझ को कम करने में मदद मिलेगी। प्लास्टिक से लेकर दवाओं तक, इन सेक्टर्स को होगा फायदा कस्टम ड्यूटी हटने से उन सभी उद्योगों को राहत मिलेगी जो पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल कच्चे माल के रूप में करते हैं। इसमें मुख्य रूप से प्लास्टिक, पैकेजिंग, टेक्सटाइल (कपड़ा), फार्मास्यूटिकल्स (दवा), केमिकल्स और ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स सेक्टर शामिल हैं। जानकारों का मानना है कि इनपुट कॉस्ट कम होने से फाइनल प्रोडक्ट्स की कीमतें भी स्थिर रहेंगी। इससे आम आदमी को महंगाई से राहत मिल सकती है। इन प्रमुख प्रोडक्ट्स पर अब नहीं लगेगी ड्यूटी सरकार ने छूट वाली लिस्ट में कई महत्वपूर्ण रसायनों और कच्चे माल को शामिल किया है। इनमें शामिल हैं: केमिकल इनपुट्स: एनहाइड्रस अमोनिया, मेथनॉल, टोल्यूनि, स्टाइरीन, विनाइल क्लोराइड मोनोमर। इंटरमीडिएट्स: मोनोएथिलीन ग्लाइकॉल (MEG), फिनोल, एसिटिक एसिड और प्यूरीफाइड टेरेफ्थेलिक एसिड (PTA)। स्पेशियलिटी केमिकल्स: एपॉक्सी रेजिन, पॉलीयुरेथेन, फॉर्मेल्डिहाइड डेरिवेटिव्स और पॉलीओल्स। पॉलीमर और इंजीनियरिंग प्लास्टिक भी हुए सस्ते आम तौर पर पैकेजिंग और ऑटो सेक्टर में इस्तेमाल होने वाले पॉलिमर कैटेगरी को भी इस छूट के दायरे में रखा गया है। इसमें पॉलीथीन, पॉलीप्रोपाइलीन, पॉलीस्टाइनिन, पीवीसी (PVC) और पीईटी (PET) चिप्स शामिल हैं। साथ ही एबीएस (ABS) और पॉलीकार्बोनेट जैसे इंजीनियरिंग प्लास्टिक पर भी इंपोर्ट ड्यूटी माफ कर दी है। जून 2026 तक मिलेगी राहत सरकार ने साफ किया है कि यह एक अस्थायी उपाय है जिसे मौजूदा ग्लोबल टेंशन्स को देखते हुए लिया गया है। इस छूट की डेडलाइन 30 जून 2026 तय की गई है। सरकार के सूत्रों का कहना है कि वे जियो पॉलिटिकल हालातों पर नजर बनाए हुए हैं। अगर जरूरत पड़ी तो भविष्य में सप्लाई चेन की स्थिति को देखते हुए और भी कदम उठाए जा सकते हैं। नॉलेज बॉक्स: क्या होता है पेट्रोकेमिकल इंटरमीडिएट? आसान भाषा में समझें तो क्रूड ऑयल या नेचुरल गैस से जो बुनियादी रसायन निकलते हैं, उन्हें रिफाइन करके इंटरमीडिएट्स बनाए जाते हैं। ये सीधे इस्तेमाल नहीं होते, बल्कि इनसे आगे चलकर प्लास्टिक, फाइबर, पेंट और दवाएं बनाई जाती हैं। भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से इंपोर्ट करता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Bhojshala Case Hearing Today | Indore High Court to Review Survey Report, Objections

Bhojshala Case Hearing Today | Indore High Court to Review Survey Report, Objections

इंदौर/धार7 घंटे पहले कॉपी लिंक भोजशाला को लेकर ASI की सर्वे रिपोर्ट पर अदालत में आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। धार के भोजशाला विवाद मामले में 6 अप्रैल से रोज सुनवाई होगी। हाईकोर्ट के जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच सोमवार दोपहर ढाई बजे से सभी याचिकाओं को एक साथ सुनेगी। गुरुवार को हुई सुनवाई में अदालत ने स्पष्ट किया है कि पहले याचिकाकर्ताओं के तर्क सुने जाएंगे, फिर आपत्ति लगाने वालों को दलील रखने का अवसर दिया जाएगा। सुनवाई के दौरान हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से वकील विष्णु शंकर जैन, विनय जोशी मौजूद रहे जबकि मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी की ओर से एडवोकेट सलमान खुर्शीद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े थे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- हाईकोर्ट ही करेगा अंतिम फैसला इससे पहले बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने भोजशाला विवाद में अहम आदेश देते हुए स्पष्ट किया था कि मामले का अंतिम निर्णय अब हाईकोर्ट ही करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की सर्वे रिपोर्ट, वीडियोग्राफी और पक्षकारों की आपत्तियों पर हाईकोर्ट अंतिम सुनवाई में विचार करेगा। सभी मुद्दे हाईकोर्ट के समक्ष खुले रहेंगे और वहीं तय किए जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- ASI द्वारा तैयार की गई सर्वे रिपोर्ट सभी पक्षों को उपलब्ध करा दी गई है। कई पक्षों ने इस पर अपनी आपत्तियां भी दर्ज कराई हैं। ASI द्वारा की गई साइट की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी से जुड़े बिंदुओं को भी हाईकोर्ट गंभीरता से देखेगा। यदि वीडियोग्राफी के आधार पर कोई नई आपत्तियां उठती हैं, तो उन पर भी सुनवाई के दौरान विचार किया जाएगा। इसके अलावा शीर्ष कोर्ट ने पहले दिए गए निर्देश को बरकरार रखते हुए कहा था कि भोजशाला परिसर के स्वरूप में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। साथ ही, 7 अप्रैल 2003 को ASI द्वारा जारी आदेश का पालन जारी रहेगा। हाईकोर्ट में पेश की जा चुकी ASI की सर्वेक्षण रिपोर्ट मध्य प्रदेश में धार स्थित भोजशाला को लेकर पुरातात्विक सर्वेक्षण रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की जा चुकी है। रिपोर्ट में परिसर के ऐतिहासिक स्वरूप, स्थापत्य और शिलालेखों से जुड़े कई बड़े खुलासे सामने आए हैं। विशेष रूप से 10वीं से 13वीं शताब्दी के दौरान राजा भोज और राजा अर्जुन वर्मन द्वारा कराए गए निर्माण और सांस्कृतिक कार्यों के सबूत मिले हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पूरे परिसर में कुल 106 स्तंभ मिले हैं, जिन पर अलग-अलग प्रकार की नक्काशी और डिजाइन हैं। इसके अलावा 32 शिलालेख भी हैं। इन शिलालेखों में राजा भोज के समय लिखित और अर्जुन वर्मन के राजगुरु मदन द्वारा रचित ‘पारिजलमंजरी नाटिका’ और ‘विजयश्री’ नाटक के पहले दो अंकों का उल्लेख है। अलग-अलग पत्थरों पर ऐसी कई रचनाएं और नाट्यांश लिखे हैं। परिसर से मिले कुछ शिलालेखों में 14वीं शताब्दी के दौरान मालवा में मुसलमानों के आने और मुस्लिम शासन की स्थापना का जिक्र भी है। बता दें कि 1389 ईस्वी में दिलावर खान, जिसका मूल नाम हुसैन था, को दिल्ली से मालवा प्रांत का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। बाद में दिलावर खान ने धार में स्वतंत्रता की घोषणा की। इसे अपनी राजधानी बनाया और 1401 ईस्वी में शाही उपाधि धारण कर स्वतंत्र रूप से राज्य चलाया। रिपोर्ट में दर्ज इन तथ्यों को लेकर ऐतिहासिक और कानूनी परिप्रेक्ष्य में आगे बहस की संभावना जताई जा रही है। तस्वीरों में समझिए, भोजशाला परिसर में क्या-क्या मिला पूरे परिसर में ऐसे कुल 106 पिलर खड़े हैं। सभी अलग-अलग स्थानों पर हैं और अलग-अलग दिशाओं में हैं। पुरातत्व विभाग ने इन 106 पिलर्स की वास्तविक डिजाइन की ड्रॉइंग भी कोर्ट में पेश की है। परिसर में 56 अरबी और फारसी शिलालेख भी मिले नागपुर के शिलालेख विज्ञान विभाग के एक पुरातत्वविद् ने भोजशाला परिसर की कमाल मौला मस्जिद और कमाल मौला मकबरे में मिले 56 अरबी और फारसी शिलालेखों का अध्ययन किया। इनमें 43 स्याही से लिखे शिलालेख हैं, जिनमें यहां आने वाले लोगों का विवरण है। कुछ शिलालेखों में इस्लामी मत, प्रार्थना और ईश्वर के गुणों जैसे धार्मिक ग्रंथों के अंश भी हैं जबकि कुछ में फारसी कविता के दोहे और व्यक्तियों के नाम हैं। अरबी और फारसी शिलालेख मालवा के मुस्लिम इतिहास को समझने में सहायक हैं, जो यहां मुसलमानों के आने और धार को राजधानी बनाकर मालवा में शासन की स्थापना के बारे में बताते हैं। शिलालेखों पर लिखीं कुरान की आयतें एएसआई की रिपोर्ट के मुताबिक, कमाल मौला मकबरे के परिसर के अंदर शिलालेख मिले हैं। इन पर कुरान की आयतें लिखी हैं, जो ईश्वर के गुणों और एकेश्वरवाद पर आधारित हैं। ये शिलालेख दो प्रकार के हैं। अलाउद्दीन महमूद शाह ने बनवाई थी कुछ संरचना ASI की रिपोर्ट के मुताबिक, यहां मिला एपी-48 शिलालेख मालवा के सुल्तान महमूद शाह प्रथम का है, जिसे इतिहास में अलाउद्दीन महमूद शाह के नाम से भी जाना जाता है। जिसने हिजरी 861 (1456-57 ईस्वी) में मकबरे के परिसर में गैलरी, आंगन, द्वार का गुंबद, पत्थर की जाली, कोठरियां, कुआं, आंतरिक भाग में एक ऊंचा चबूतरा, मठ, प्रवेश कक्ष, कंगूरे आदि जैसी संरचनाएं बनवाई थीं। इस शिलालेख को हिजरी 866 (1461-62 ईस्वी) में हबी अल-हाफिज अश-शिराजी अल-मुर्शिदी द्वारा बनवाया गया था। शिलालेख AP-01 कमाल मौला मस्जिद के केंद्रीय मेहराब के आसपास से मिला है। शिलालेख AP-02 उपदेश मंच के ऊपर स्थित है, जबकि शिलालेख AP-03 दक्षिणी दीवार पर मिला है। ये तीनों कुरान के शिलालेख हैं, जो इस संरचना को इस्लामी पहचान देते हैं। शिलालेख AP-02 कुरान के अध्याय 51 की आयत 55 का आंशिक भाग है। इसे पता चलता है कि यह संरचना इस्लाम धर्म के प्रचार, सांस्कृतिक मूल्यों और शिष्टाचार के संवर्धन और व्यापारिक केंद्र के रूप में काम करती रही है। ये खबर भी पढ़ें… भोजशाला पर अलाउद्दीन खिलजी के हमले के 700 साल भोजशाला का इतिहास करीब 990 साल पुराना है। 1034 ई. में राजा भोज ने इसका निर्माण कराया था और यहां मां वाग्देवी की प्रतिमा स्थापित की थी। 200 सालों से ज्यादा समय तक भोजशाला का वैभव कायम रहा, लेकिन 1305 ई में मोहम्मद खिलजी ने भोजशाला पर आक्रमण कर इसे नेस्तनाबूत करने की कोशिश की। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

आजकल कम उम्र में छाती के बाल क्यों हो जाते हैं सफेद? क्या होती है इसकी वजह, डॉक्टर से जानें कैसे करें बचाव

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Premature Greying of Body Hair: आजकल युवाओं के बाल तेजी से सफेद हो रहे हैं. सिर और दाढ़ी के बाल ही नहीं, बल्कि कम उम्र में छाती के बाल भी सफेद होने लगे हैं. इसे मेडिकल भाषा में प्रीमेच्योर ग्रेइंग कहा जाता है. आमतौर पर 50-60 साल की उम्र के बाद लोगों पर यह सफेदी आती थी, लेकिन अब युवा इस समस्या से परेशान नजर आ रहे हैं. कई लोग मानते हैं कि छाती के बाल सफेद होना कोई बीमारी है, जबकि कुछ लोग इसे प्रीमेच्योर ग्रेइंग से जोड़ते हैं. अब सवाल है कि कम उम्र में छाती के बाल क्यों सफेद हो रहे हैं, इसकी क्या वजह है और इससे किस तरह बचा जा सकता है? चलिए इसके जवाब डॉक्टर से जान लेते हैं. यूपी के कानपुर स्थित जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर और डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. युगल राजपूत ने News18 को बताया कि हमारे बालों का काला रंग मेलानिन नामक पिगमेंट के कारण होता है. जब शरीर में इसकी कमी होने लगती है, तो बाल सफेद होने लगते हैं. यह पिगमेंट शरीर के सभी हिस्सों पर असर डालता है. इसकी वजह से सिर और दाढ़ी ही नहीं, बल्कि छाती के बाल भी सफेद होने लगते हैं. यह पिगमेंट कई कारणों से कम हो सकता है. इनमें विटामिन्स की कमी, अत्यधिक तनाव, खराब खानपान, जेनेटिक और हार्मोनल फैक्टर्स शामिल हो सकते हैं. हेल्थ चेकअप से सही वजह का पता लगाया जा सकता है. छाती के बाल सफेद होने की बड़ी वजह पोषक तत्वों की कमी : डॉक्टर ने बताया कि आजकल की डाइट में पोषक तत्वों की कमी सफेद बालों का एक बड़ा कारण है. विटामिन B12 की कमी से एनीमिया हो सकता है, जो सीधे तौर पर बालों के सफेद होने से जुड़ा है. शरीर में आयरन और कॉपर की कमी मेलानिन के उत्पादन को प्रभावित करती है. इसकी कमी बालों की रंगत छीन लेती है. खराब लाइफस्टाइल और स्मोकिंग : बीड़ी-सिगरेट पीने से हमारी ब्लड वेसल्स सिकुड़ जाती हैं, जिससे बालों के फॉलिकल्स तक सही मात्रा में ऑक्सीजन और पोषक तत्व नहीं पहुंच पाते हैं. इसकी वजह से बाल सफेद होने लगते हैं. स्मोकिंग करने वालों में समय से पहले बाल सफेद होने का खतरा अन्य लोगों की तुलना में ज्यादा होता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. क्रोनिक स्ट्रेस : अगर आप लंबे समय से तनाव से जूझ रहे हैं, तो इससे आपके बाल समय से पहले सफेद हो सकते हैं. तनाव केवल दिमाग को ही नहीं, बल्कि शरीर के सेल्स को भी प्रभावित करता है. स्ट्रेस की वजह से शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ता है, जो मेलानोसाइट्स यानी मेलानिन बनाने वाले सेल्स को नुकसान पहुंचाता है. हार्मोनल असंतुलन : शरीर में अगर हार्मोन्स का बैलेंस बिगड़ जाए, तो इससे भी सफेद बालों की समस्या पैदा हो सकती है. थायराइड की समस्या या शरीर में टेस्टोस्टेरोन के स्तर में बदलाव भी छाती के बालों के सफेद होने का कारण बन सकता है. अगर आपको हार्मोनल समस्या है, तो इससे आपके बालों का रंग बुरी तरह प्रभावित हो सकता है. जेनेटिक्स : अगर आपके परिवार में पिता या दादा को कम उम्र में बाल सफेद होने की समस्या रही है, तो आपके साथ भी ऐसा होने की संभावना बढ़ जाती है. यह आपके DNA में होता है और इसे रोकना थोड़ा मुश्किल होता है. हालांकि आप सही डाइट और लाइफस्टाइल अपनाएं, तो इसे रोकने में मदद मिल सकती है. सफेद बालों से बचाव कैसे करें? डॉक्टर युगर राजपूत के अनुसार सफेद हो चुके बालों को प्राकृतिक रूप से वापस काला करना मुश्किल है, लेकिन इस प्रक्रिया को धीमा जरूर किया जा सकता है. अपनी डाइट में अंडा, मशरूम, हरी पत्तेदार सब्जियां, नट्स और डेयरी प्रोडक्ट्स शामिल करें, ताकि विटामिन B12 और जिंक की पूर्ति हो सके. आप स्मोकिंग बंद कर दें. यह न केवल आपके फेफड़ों बल्कि आपके लुक्स के लिए भी जरूरी है. योग और ध्यान को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं, ताकि स्ट्रेस कम हो. रात में 7-8 घंटे की नींद लेना भी जरूरी है. छाती के बालों पर हार्श साबुन या बॉडी वॉश का इस्तेमाल कम करें, क्योंकि इनमें मौजूद सल्फेट बालों को डैमेज कर सकते हैं. अगर आपके बाल बहुत तेजी से सफेद हो रहे हैं और साथ में कमजोरी या थकान महसूस होती है, तो एक बार डर्मेटोलॉजिस्ट से जरूर मिलें. वे ब्लड टेस्ट के जरिए सही वजह का पता लगाकर ट्रीटमेंट कर सकते हैं.

ईरान जंग में ट्रम्प अपने 5 मकसद से कितने दूर:पहले ही दिन खामेनेई की हत्या, मिसाइल इंडस्ट्री तबाह की, लेकिन परमाणु खतरा बरकरार

ईरान जंग में ट्रम्प अपने 5 मकसद से कितने दूर:पहले ही दिन खामेनेई की हत्या, मिसाइल इंडस्ट्री तबाह की, लेकिन परमाणु खतरा बरकरार

अमेरिका और इजराइल ने मिलकर 28 फरवरी को ईरान पर हमला किया। इसके कुछ ही देर बाद राष्ट्रपति ट्रम्प ने 8 मिनट का वीडियो जारी करके जंग के टारगेट बताए। उन्होंने कहा कि उनका मकसद अमेरिकी लोगों की रक्षा करना और ईरान से आने वाले खतरों को खत्म करना है। अब ट्रम्प के बताए टारगेट्स के मुताबिक समझते हैं कि अमेरिका को जंग में अब तक कितनी कामयाबी मिली है। उसे क्या हासिल हुआ है और क्या अब भी अधूरा है। 1. मिसाइल और हथियार इंडस्ट्री खत्म करना अमेरिका और इजराइल का अहम मकसद था कि ईरान की मिसाइल ताकत को कमजोर कर दिया जाए, ताकि वह दूर तक हमला न कर सके। इसके लिए दोनों देशों ने बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च करने वाले ठिकाने (लॉन्चर), मिसाइल बनाने वाली फैक्ट्रियों, मिसाइल स्टोर करने के गोदाम और कमांड एंड कंट्रोल सेंटर पर हमले किए। इन हमलों से ईरान की मिसाइल क्षमता को काफी नुकसान हुआ है। कई लॉन्चर और फैक्ट्रियां नष्ट हो चुकी हैं। इससे उसकी नई मिसाइल बनाने की रफ्तार धीमी पड़ी है। लेकिन अभी भी ईरान के पास काफी मिसाइलें बची हुई हैं और वह हमले कर रहा है। ईरान ने अपनी मिसाइलें अलग-अलग जगहों पर छिपाकर रखी हैं। कई ठिकाने जमीन के नीचे (अंडरग्राउंड) हैं, जिन्हें पूरी तरह नष्ट करना मुश्किल है। कुछ मोबाइल लॉन्चर होते हैं, जिन्हें जल्दी-जल्दी जगह बदलकर इस्तेमाल किया जा सकता है। ईरान अब सिर्फ मिसाइलों पर निर्भर नहीं है, बल्कि बड़ी संख्या में ड्रोन (मानवरहित विमान) का भी इस्तेमाल कर रहा है। 2. नौसेना को खत्म करना अमेरिका और इजराइल का टारगेट था कि ईरान की नौसेना को कमजोर या लगभग खत्म कर दिया जाए, ताकि वह समुद्र के रास्ते कोई बड़ा हमला या बाधा न डाल सके। इसके लिए युद्धपोत, पनडुब्बियां, नौसैनिक ठिकाने और बंदरगाह और हथियार और मिसाइल ले जाने वाले जहाजों को निशाना बनाया गया। मार्च की शुरुआत में अमेरिकी पनडुब्बी ने टॉरपीडो दागकर श्रीलंका के पास मौजूद ईरानी वॉरशिप IRIS डेना को डुबो दिया। इस जहाज पर करीब 180 लोग सवार थे। रिपोर्ट के मुताबिक, कम से कम 80 लोगों की मौत हुई। यह हमला इसलिए अहम था क्योंकि यह जहाज लंबी दूरी तक ऑपरेशन करने में सक्षम था और हाल ही में भारत के साथ एक नौसैनिक अभ्यास में भी शामिल हुआ था। इन हमलों से ईरान के कई बड़े जहाज और संसाधन नष्ट हो गए। समुद्र में उसकी ताकत पहले से कमजोर हो गई। लंबी दूरी पर ऑपरेशन करने की क्षमता घट गई। हालांकि वह अब भी समुद्र में खतरा पैदा करने की क्षमता रखता है। ईरान के पास छोटी-छोटी तेज नावें (स्पीड बोट्स) हैं, जिनका इस्तेमाल वह अब भी कर सकता है। वह समुद्र में बारूदी सुरंग (माइन) बिछाने जैसी रणनीति अपना सकता है जो होर्मुज जैसे संकरे समुद्री रास्तों में छोटी ताकत भी बड़ा असर डाल सकती है। 3. ईरान समर्थित मिलिशिया को कमजोर करना अमेरिका और इजराइल चाहते थे कि ईरान जिन हथियारबंद ग्रुप्स को समर्थन देता है, उन्हें कमजोर कर दिया जाए। ये ग्रुप्स अलग-अलग देशों में ईरान के लिए काम करते हैं और जरूरत पड़ने पर हमले भी करते हैं। इसलिए इन्हें ‘प्रॉक्सी’ ताकत कहा जाता है। जंग के दौरान इन्हें निशाना बनाया गया। इजराइल ने खास तौर पर लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमले किए। कई कमांडरों और लड़ाकों को मार गिराया। इससे इनकी ताकत कमजोर हुई, लेकिन उनका असर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अमेरिका के लिए असल चुनौती यह है कि ये मिलिशिया किसी एक देश या एक जगह तक सीमित नहीं हैं। इराक, लेबनान, सीरिया और यमन जैसे देशों के अलग-अलग इलाकों में इनके नेटवर्क फैले हुए हैं। इनके पास स्थानीय सपोर्ट भी होता है और अपनी अलग व्यवस्था भी होती है। ऊपर से ईरान इनकी मदद करता रहता है, जिससे ये जल्दी संभल जाते हैं। इसी वजह से, हमलों के बावजूद ये पूरी तरह खत्म नहीं हुए। इराक में अब भी कुछ गुट अमेरिकी ठिकानों पर रॉकेट से हमले कर रहे हैं। हिज्बुल्लाह पर लगातार हमले हुए हैं, लेकिन वह अब भी एक मजबूत ताकत बना हुआ है और पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। 4. ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना अमेरिका का सबसे बड़ा मकसद यह था कि ईरान किसी भी हालत में परमाणु हथियार न बना सके। ट्रम्प बार-बार कह चुके हैं कि ईरान के पास कभी परमाणु बम नहीं होना चाहिए। अमेरिका ने पिछले साल ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर हमले किए थे, जिससे उन्हें भारी नुकसान हुआ। फिर भी अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि कुछ समृद्ध यूरेनियम अब भी मौजूद है। यह यूरेनियम जमीन के नीचे गहरी सुरंगों या बंकर जैसे ठिकानों में छिपा हो सकता है, जहां तक हवाई हमलों का असर पूरी तरह नहीं होता। अगर इन्हें पूरी तरह नष्ट करना हो, तो जमीन पर सेना भेजनी पड़ सकती है, जो बेहद जोखिम भरा कदम होगा और जंग को और बड़ा बना सकता है। 5. ईरान में सत्ता परिवर्तन ट्रम्प ने ईरान की जनता से सरकार के खिलाफ उठने की अपील भी की थी। लेकिन अभी तक ऐसा कोई बड़ा जन आंदोलन नहीं हुआ है। हालांकि ट्रम्प का दावा है कि उन्होंने रेजीम चेंज यानी सत्ता परिवर्तन कर दिया है, क्योंकि हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और कई बड़े अधिकारी मारे गए। लेकिन जमीन पर अलग स्थिति दिखाई देती है। अब नए सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई बने हैं, जो सख्त रुख वाले माने जाते हैं और सेना के ताकतवर हिस्से के करीब हैं। कुल मिलाकर, ईरान की सरकार अब भी पहले जैसी ही है। ईरान की सरकार अब भी धार्मिक और कड़े नियंत्रण वाली है। अमेरिका के खिलाफ उसका रुख भी पहले जैसा ही है। ——————————— ईरान जंग से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… अमेरिका ने ईरान पर 850 टॉमहॉक मिसाइलें दागीं: 2 साल में बनता है 34 करोड़ का यह हथियार, जंग खिंची तो स्टॉक खत्म होने की आशंका ईरान के साथ युद्ध में अमेरिका ने बड़े पैमाने पर टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों का इस्तेमाल किया। इसे अमेरिकी हथियारों के जखीरे का अहम हथियार माना जाता है। वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक चार हफ्तों में 850 से ज्यादा मिसाइलें दागी गईं। अनुमान है

तमिलनाडु चुनाव पोल: तमिलनाडु में डीएमके-कांग्रेस गठबंधन की बंपर रैली, इस प्री पोल सर्वे का अनुमान एआईएडीएमके-बीजेपी की उड़ी नींद

तमिलनाडु चुनाव पोल: तमिलनाडु में डीएमके-कांग्रेस गठबंधन की बंपर रैली, इस प्री पोल सर्वे का अनुमान एआईएडीएमके-बीजेपी की उड़ी नींद

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले आए लोकपाल के ताजा सर्वे में राज्य की राजनीति की तस्वीर काफी हद तक साफ कर दी गई है। इस सर्वे के मुताबिक, जनता के बीच अभी किस पार्टी का मनोबल है, इसका आकलन किया जा सकता है। लोक पोल के इस सर्वे में बताया गया है कि राज्य में एक बार फिर डीएमके गठबंधन की सरकार पर नजरें टिकी हुई हैं. तमिलनाडु में कुल 234 विधानसभाएं हैं और सरकार बनाने के लिए 118 विधानसभाओं की जरूरत है। सर्वे के मुताबिक डीएमके और कांग्रेस गठबंधन को 181 से 189 सीटें मिल सकती हैं। इसका मतलब यह है कि इस गठबंधन के बहुमत के आंकड़ों को बहुत आसानी से पार किया जा सकता है और स्थिर मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की सरकार बन सकती है। वहीं एआईएडीएमके और बीजेपी का गठबंधन इस दौड़ में काफी पीछे दिख रहा है. इस गठबंधन को सिर्फ 38 से 42 सदस्यों की मुलाकात का अनुमान है, जो बहुमत से काफी दूर है। विजय थलापति की पार्टी को लेकर सर्वेक्षण के नतीजे इस बार चुनाव में एक नया चेहरा भी चर्चा में है. अभिनेता से नेता बने विजय थलापति की पार्टी टीवीके पहली बार चुनाव लड़ रही है। सर्वे के मुताबिक इस पार्टी को 8 से 10 टिकटें मिल सकती हैं. हालाँकि पर्वतारोहण कम दिख रहे हैं, लेकिन उनके आगमन ने राजनीति का माहौल जरूर बदल दिया है। अगर वोट प्रतिशत की बात करें तो डीएमके गठबंधन को करीब 40.1% वोट मिल रहे हैं। एआईएडीएमके-बीजेपी गठबंधन को करीब 29% वोट मिल सकते हैं। वहीं टीवीके को 23.9% वोट मिलने का अनुमान है, जो एक नई पार्टी के लिए काफी बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है। थलापति की पार्टी का वोट शेयर खास बात यह है कि सर्वे में पहली बार चुनाव में जीत थलापति की पार्टी का वोट शेयर एआईएडीएमके के काफी करीब पहुंच रही है। इससे साफ है कि युवाओं और नए मतदाताओं के बीच उनकी अच्छी पकड़ बन रही है। मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर भी सर्वे में लोगों की राय सामने आई है. इसमें एमके स्टाइल सबसे आगे हैं और इन्हें 41% लोगों ने पसंद किया है। दूसरे नंबर पर एआईएडीएमके के ई पलानीस्वामी हैं, जिनमें 24.1% लोगों का समर्थन मिला है। वहीं विजय थलापति को 27.1% लोग मुख्यमंत्री की तरह पसंद कर रहे हैं, जो उन्हें एक मजबूत नए नेता के रूप में जीत दिलाते हैं। तमिलनाडु में डीएमके गठबंधन की स्थिति मजबूत लोकपाल के सर्वेक्षण से साफ संकेत मिल रहा है कि तमिलनाडु में ब्लॉक डीएमके गठबंधन मजबूत स्थिति में है और कंपनी सरकार बना सकती है। लेकिन विजय थलापति की शुरूआत ने भविष्य की राजनीति को नई दिशा जरूर दी है। असली नतीजे चुनाव के बाद ही साफ होंगे, लेकिन अभी के मोन्ट में दिलचस्प मुकाबला बन गया है। ये भी पढ़ें: पश्चिम बंगाल ओपिनियन पोल: बीजेपी को मिल सकती है बढ़त? कितने प्रतिशत लोग ममता बनर्जी को सीएम बनाना चाहते हैं, प्री पोल सर्वे का आकलन वाला (टैग्सटूट्रांसलेट)टीएन चुनाव 2026(टी)तमिलनाडु विधानसभा चुनाव(टी)तमिलनाडु चुनाव 2026(टी)तमिलनाडु चुनाव सर्वेक्षण(टी)डीएमके बनाम एआईएडीएमके(टी)विजय थलापति टीवीके(टी)एमके स्टालिन(टी)तमिलनाडु राजनीति हिंदी(टी)टीएन चुनाव 2026(टी)तमिलनाडु विधानसभा चुनाव(टी)तमिलनाडु चुनाव 2026(टी)तमिलनाडु चुनाव सर्वे(टी)डीएमके बनाम एआईएडीएमके(टी)विजय थलपति टीवीके(टी)एमके स्टालिन(टी)तमिलनाडु राजनीति

तेजाजी नगर इलाके में बाइक में आग:पूरी जलकर हुई खाक,बदमाशो ने दो बाइको को किया आग के हवाले

तेजाजी नगर इलाके में बाइक में आग:पूरी जलकर हुई खाक,बदमाशो ने दो बाइको को किया आग के हवाले

इंदौर के तेजाजी नगर में लिबोंदी गेट के सामने एक बाइक में देर रात आग लग गई। आग की सूचना के बाद पुलिस की गाडी वहां पहुंची। आसपास के लोगो ने आग पर काबू करने का प्रयास किया। लेकिन आग पूरी तरह से जलकर खाक हो गई। तेजाजी नगर पुलिस के मुताबिक लिंबोदी गेट पर रात डेढ बजे के लगभग एक बाइक में आग लगने की सूचना मिली थी। जानकारी के बाद यहां पुलिस की गाडी पहुंची थी। लेकिन फायर ब्रिगेड को मामले की सूचना नही दी गई। बिल्डीग के रहवासियो ने यहां आग को बुझाने का प्रयास किया। लेकिन आग से पूरी बाइक जलकर खाक हो गई। बदमाशो ने लगाई आग बाणगंगा में भी रविन्द्र पाल निवासी वृंदावन कॉलोनी किला मैदान में भी अज्ञात बदमाशो ने उनके यहां खडी दो बाइक में आग लगा दी। रविद्र पाल ने बताया कि बाइक भागवत राव और प्रेमसिंह कीर की थी। रात में उन्हें आग लगने की जानकारी लगी तो वह उठे। इस दौरान आसपास के लोगो की मदद से आग पर काबू किया गया। पुलिस के मुताबिक आसपास के सीसीटीवी कैमरो से आग लगाने वाले बदमाशो की जानकारी निकाली जा रही है।

Ranbir Kapoors Ramayan New Ram Glimpse on Hanuman Jayanti

Ranbir Kapoors Ramayan New Ram Glimpse on Hanuman Jayanti

कुछ ही क्षण पहले कॉपी लिंक फिल्म ‘रामायण’ से रणबीर कपूर का भगवान राम के रूप में लुक सामने आया है। इसकी झलक आज यानी हनुमान जयंती पर जारी की गई। बता दें कि भगवान राम के रूप में रणबीर कपूर का लुक सादगी, गरिमा और आध्यात्मिकता से भरा हुआ है। शाही वेशभूषा और बारीक आभूषणों के साथ उनका शांत और संतुलित रूप काफी अच्छा नजर आ रहा है। टीजर में शानदार वीएफएक्स देखने को मिलते हैं। श्रीराम की पहली झलक प्रजा के बीच दिखाई गई है। साथ ही बैकग्राउंड स्कोर भी लाजवाब है। देखें भगवान राम के लुक की झलक- भगवान राम के रूप में रणबीर कपूर शाही वेशभूषा में दिखाई दिए। भगवान राम के रूप में रणबीर कपूर का शांत और संतुलित अंदाज नजर आया। रणबीर कपूर तेजी से दौड़ते हुए भी नजर आए। वीडियो में भगवान राम के रूप में रणबीर कपूर धनुष चलाते हुए भी नजर आए। भगवान राम के रूप में रणबीर सूर्यास्त के बीच धनुष के साथ खड़े नजर आए। भगवान राम का रोल निभाने के बारे में बात करते हुए रणबीर ने कहा था, “मुझे नहीं लगता कि मैं यहां राम का रोल करने आया हूं। मैं यहां उनसे सीखने आया हूं। उनमें एक सादगी और पवित्रता है जो बहुत कम देखने को मिलती है और उसे समझने और अपनाने की कोशिश करना मेरे लिए बहुत ही विनम्र करने वाला अनुभव रहा है।” फिल्म ‘रामायण’ से जुड़ी अहम बातें फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम, साई पल्लवी सीता, यश रावण, सनी देओल हनुमान और रवि दुबे लक्ष्मण के रोल में नजर आएंगे। 1987 की ‘रामायण’ में राम का किरदार निभाने वाले अरुण गोविल इस फिल्म में राजा दशरथ की भूमिका में दिखेंगे। फिल्म का कुल बजट लगभग 4,000 करोड़ रुपए बताया जा रहा है, जो इसे भारतीय सिनेमा की सबसे महंगी फिल्मों में शामिल करता है। फिल्म को नितेश तिवारी डायरेक्ट कर रहे हैं, जिन्होंने सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्म दंगल बनाई थी। फिल्म का म्यूजिक ऑस्कर विनर ए.आर. रहमान और हॉलीवुड कंपोजर हैंस जिमर तैयार कर रहे हैं। फिल्म को नमित मल्होत्रा के प्राइम फोकस स्टूडियोज, DNEG और यश की मॉन्स्टर माइंड क्रिएशन्स बना रहे हैं। फिल्म IMAX पर रिलीज होगी। फिल्म के विजुअल इफेक्ट्स (VFX) का काम ऑस्कर विनर स्टूडियो DNEG और प्राइम फोकस संभाल रहे हैं। फिल्म को दो भाग में रिलीज किया जाएगा। पहला भाग दिवाली 2026 और दूसरा भाग दिवाली 2027 में सिनेमाघरों में रिलीज होगा। …………. फिल्म ‘रामायण’ से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… रणबीर कपूर ने पहले ठुकरा दिया था रामायण का ऑफर:बेटी राहा के जन्म के बाद बदला फैसला; रामानंद सागर की रामायण देखकर की तैयारी नितेश तिवारी के निर्देशन में बनी फिल्म ‘रामायण’ का पहला टीजर कल यानी गुरुवार को भारत में रिलीज किया जाएगा। हाल ही में लॉस एंजेलिस में हुए फिल्म के स्पेशल प्रिव्यू सेशन रणबीर ने बताया की उन्होंने पहले रामायण फिल्म का ऑफर ठुकरा दिया था। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Nifty Falls 400 Points | Banking, Energy, Auto Stocks Dip

Nifty Falls 400 Points | Banking, Energy, Auto Stocks Dip

मुंबई13 मिनट पहले कॉपी लिंक शेयर बाजार में आज यानी 2 अप्रैल को गिरावट है। सेंसेक्स करीब 1,400 अंक (2%) की गिरावट के साथ 71,700 के स्तर कारोबार कर रहा है। वहीं निफ्टी में भी 400 अंक (1.90%) की बढ़त है, ये 22,250 के स्तर पर है। आज बैंकिंग, मेटल, फार्मा और ऑटो शेयर्स में ज्यादा गिरावट है। सुबह 9:30 बजे सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 29 में गिरावट है। बाजार गिरने की 3 बड़ी वजहें… अमेरिका-इजराइल और ईरान युद्ध से सप्लाई चेन बिगड़ गई है। कच्चे तेल के दाम बढ़कर 106 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गए हैं। एशियाई बाजारों में गिरावट का असर भारत पर भी दिख रहा। एशियाई बाजार में भी गिरावट साउथ कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 4% गिरकर 5,268 पर कारोबार कर रहा है। जापान का निक्केई इंडेक्स 2% गिरकर 52,557 पर कारोबार कर रहा है। हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग इंडेक्स 1% गिरकर 25,012 पर कारोबार कर रहा है। चीन का शंघाई कंपोजिट इंडेक्स 0.5% गिरकर 3,927 पर कारोबार कर रहा है। अमेरिकी बाजार में 1 अप्रैल को रही बढ़त डाउ जोन्स 224 अंक (0.48%) बढ़कर 46,565 के स्तर पर बंद हुआ। टेक बेस्ड इंडेक्स नैस्डैक कंपोजिट 1.16% बढ़कर 21,840 पर बंद हुआ। S&P 500 इंडेक्स 46 अंक (0.72%) बढ़कर 6,575 पर बंद हुआ। क्रूड 5% बढ़कर 106 डॉलर प्रति बैरल पर आया आज कच्चा तेल करीब 5% ऊपर है। ये 106 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। 28 फरवरी को ईरान जंग शुरू होने से पहले कच्चे तेल के दाम 70 डॉलर प्रति बैरल के आस-पास थे। कल बाजार में रही थी तेजी इससे पहले कल यानी 1 अप्रैल को बाजार में तेजी रही थी। सेंसेक्स 1,187 अंक (1.65%) की तेजी के साथ 73,134 पर बंद हुआ था। वहीं निफ्टी में भी 348 अंक (1.56%) की बढ़त रही, ये 22,679 के स्तर पर बंद हुआ। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…