दावा- समुद्र से जिंदा बाहर निकाले गए थे राहुल बनर्जी:वे बात करने की कोशिश कर रहे थे; क्लिनिक ले जाया गया, वहां डॉक्टर नहीं था

बंगाली सिनेमा के एक्टर राहुल अरुणोदय बनर्जी की 29 मार्च को समुद्र में डूबने से मौत हो गई थी। सीरियल ‘भोले बाबा पार करेगा’ की शूटिंग के दौरान ओडिशा के तालसारी बीच पर यह हादसा हुआ था। लेकिन अब शो के मेकर्स ने दावा किया है कि राहुल को पानी से जिंदा बाहर निकाला गया था और वे बात करने की कोशिश कर रहे थे। उन्हें तुरंत पास के क्लिनिक ले जाया गया, लेकिन वहां कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। इसके बाद उन्हें दीघा स्टेट जनरल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मेकर्स ने मीडिया रिपोर्ट्स को खारिज किया जिनमें कहा गया था कि एक्टर काफी देर तक पानी के अंदर रहे थे। तालसारी बीच पर हुआ हादसा राहुल बनर्जी ओडिशा के बालेश्वर जिले में सीरियल की शूटिंग कर रहे थे। इसी दौरान समुद्र में डूबने से उनकी जान चली गई। प्रोडक्शन हाउस ने पीटीआई को दिए अपने बयान में कहा, “हमारे क्रू के सभी सदस्य गहरे दुख में हैं। हम कुछ दिनों का समय मांगते हैं ताकि वहां मौजूद लोगों से बात कर एक न्यूट्रल और विस्तृत रिपोर्ट पेश कर सकें।” मेकर्स ने एक्टर के परिवार और वेस्ट बंगाल मोशन पिक्चर आर्टिस्ट फोरम को भी जांच प्रक्रिया का हिस्सा बनने का न्योता दिया है। इसके साथ ही प्रोडक्शन हाउस ने अपना आधिकारिक बयान जारी कर निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया है। उन्होंने कहा है कि घटना के वक्त मौजूद क्रू मेंबर्स से पूछताछ कर एक सटीक रिपोर्ट तैयार की जाएगी। लापरवाही की हर पहलू से होगी जांच प्रोडक्शन हाउस ने साफ किया है कि इस मामले में लापरवाही की हर छोटी से छोटी संभावना की जांच की जाएगी। उन्होंने कहा, “शूटिंग से जुड़ी सभी परमिशन और जरूरी दस्तावेज जांच टीम को सौंप दिए जाएंगे। हम अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग कर रहे हैं। को-स्टार का दावा- पैकअप के बाद हुआ हादसा पुलिस के अनुसार शूटिंग के दौरान एक्टर की मौत हुई, लेकिन को-स्टार दिंगता बागची ने पीटीआई से कहा कि पैकअप के बाद वह अकेले समुद्र में गए थे, जहां उनका पैर फंस गया। लहरों में फंसने के बाद सेट पर अफरा-तफरी मच गई। टीम उन्हें निकालकर दीघा अस्पताल ले गई, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। कई बंगाली फिल्मों में काम कर चुके राहुल राहुल अरुणोदय बनर्जी को 2008 की फिल्म ‘चिरोदिनी तुमी जे अमार’ से पहचान मिली। इसके बाद उन्होंने ‘तुमी असबे बोले’ (2014), ‘जुल्फीकार’ (2016), ‘ब्योमकेश गोत्रो’ (2018), ‘बिदय ब्योमकेश’ (2018) और ‘द एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स’ (2025) में काम किया। उन्होंने टीवी सीरियल्स ‘होरोगौरी पिसे होटल’ और ‘मोहोना’ में भी काम किया।
DMA president Dr Neelam Lekhi: कौन हैं डॉ.नीलम लेखी? 63 साल बाद कोई महिला दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन की संभालेंगी कमान

First DMA president Dr. Neelam Lekhi: दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन की जिम्मेदारी पहली बार एक महिला के कंधों पर होगी. दिल्ली की रहने वाली डॉक्टर नीलम लेखी 63 साल बाद इस संस्था की पहली महिला अध्यक्ष बनी हैं. सबसे खास बात है कि 112 साल से भी ज्यादा पुराने इतिहास वाली यह डीएमए सबसे पुराने मेडिकल एसोसिएशनों में से एक है लेकिन 63 सालों में कोई भी महिला इसके अध्यक्ष पद तक नहीं पहुंच पाई थीं. जबकि अन्य पदों पर खुद नीलम लेखी भी काम कर चुकी हैं. पेशे से रेडियोलॉजिस्ट डॉ. नीलम ने 31 मार्च 2026 को दरियागंज स्थित DMA हाउस में दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन की वार्षिक आम बैठक के दौरान यह पदभार संभाला है. इससे पहले एसोसिएशन में राज्य स्तर पर उपाध्यक्ष के रूप में और IMA की पूर्वी दिल्ली शाखा की पहली महिला अध्यक्ष के रूप में भी सेवा दे चुकी हैं. इनकी टीम में डॉ. विपेंद्र सभरवाल, डॉ. रामिंदर पोपली वित्त सचिव, डॉ. एसके पोद्दार प्रेसिडेंट-इलेक्ट, और डॉ. जेआर चुघ व डॉ. पूनम गोयल उपाध्यक्ष के रूप में काम करेंगी. इस उपलब्धि पर News18hindi से बातचीत करते हुए डॉ. नीलम ने कहा कि डीएमए की अध्यक्ष बनना खुशी की बात है लेकिन उससे भी ज्यादा जिम्मेदारी का अहसास हो रहा है. इस पद पर रहते हुए वे दिल्ली के डॉक्टरों के अलावा आम लोगों के लिए सस्ते और तत्काल उपलब्ध इलाज को और बेहतर करने के लिए दिल्ली सरकार के साथ मिलकर काम करेंगी. उन्होंने बताया,’ कुछ प्रमुख मुद्दे जो लंबे समय से बिना सुलझे पड़े हैं, उनका निपटारा जल्द से जल्द करने के लिए काम किया जाएगा. इनमें प्रमुख रूप से डॉक्टरों पर होने वाले पेशेंट या उनके परिजनों के जानलेवा हमले से सुरक्षा के लिए पहले से मौजूद कानून को सख्ती से लागू करना, छोटे-छोटे इलाकों में खुले हुए छोटे क्लिनिकों और नर्सिंग होमों का नियमानुसार पंजीकरण कराना, फायर NOC, पीसी-PNDT अधिनियम से संबंधित समस्याएं, रेजिडेंट और सर्विस डॉक्टरों की समस्याएं शामिल होंगी.’ सबसे पहले क्या करेंगी?दिल्ली में आबादी बहुत ज्यादा है. उन्हें सस्ता इलाज मिलना चाहिए. इसके लिए गली-मोहल्लों में खुले क्लिनिकों का पंजीकरण कराया जाएगा, क्योंकि अगर कोई समस्या होती है तो सबसे पहले व्यक्ति मेडिकल हेल्प के लिए इन्हीं नजदीकी केंद्रों में जाता है, कॉरपोरेट अस्पतालों के एवज में ये काफी सस्ते भी होते हैं लेकिन कई बार पंजीकरण न होने की वजह से फेल हो जाते हैं. इसके साथ ही झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्रवाई की जाएगी. डॉक्टरों की कौन सी समस्या का करेंगी निपटारा?दिल्ली में डॉक्टरों की सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा है. आए दिन डॉक्टरों पर होते जानलेवा हमलों को रोकने के लिए कानून का सख्ती से पालन करवाने पर जोर होगा, क्योंकि दिल्ली में कानून है लेकिन वह पूरी तरह फंक्शनल नहीं है. क्या बढ़ती लाइफस्टाइल बीमारियों को लेकर भी काम होगा?हां’एनीमिया मुक्त भारत’, स्तन और सर्वाइकल कैंसर के प्रति जागरूकता और रोकथाम, स्वास्थ्य पेशेवरों और आम लोगों के लिए CPR प्रशिक्षण, जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों (जैसे मोटापा, मधुमेह, गठिया आदि) के प्रति जागरूकता फैलाना भी अहम कामों में शामिल है.
नारियल पानी से कैसे पाएं ग्लोइंग और साफ त्वचा? जानिए स्किन के लिए इसके जबरदस्त फायदे, इस्तेमाल का सही तरीका

Nariyal Paani Ke Fayde Skin Ke Liye: गर्मी के मौसम में नारियल पानी पीना शरीर के लिए जितना फायदेमंद माना जाता है, उतना ही यह आपकी स्किन के लिए भी कमाल का काम करता है. आजकल हर कोई चाहता है कि उसकी त्वचा साफ, चमकदार और हेल्दी दिखे, लेकिन इसके लिए लोग महंगे प्रोडक्ट्स और ट्रीटमेंट पर बहुत खर्च करते हैं. जबकि सच यह है कि कई बार प्राकृतिक चीजें ही सबसे ज्यादा असरदार होती हैं, और नारियल पानी उनमें से एक है. इसमें मौजूद पोषक तत्व जैसे विटामिन, मिनरल और एंटीऑक्सीडेंट स्किन को अंदर से हेल्दी बनाते हैं. अगर आप रोजाना नारियल पानी का सेवन करते हैं या इसे सही तरीके से स्किन पर इस्तेमाल करते हैं, तो आपकी त्वचा में नेचुरल ग्लो आ सकता है. आइए अब समझते हैं कि नारियल पानी स्किन के लिए कैसे फायदेमंद है और इसका सही उपयोग कैसे करें. त्वचा को हाइड्रेट रखने में मदद करेनारियल पानी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह शरीर को हाइड्रेट रखता है. जब शरीर में पानी की कमी नहीं होती तो इसका असर सीधे आपकी त्वचा पर दिखता है. स्किन ज्यादा सॉफ्ट और चमकदार नजर आती है. सूखी और बेजान त्वचा वाले लोगों के लिए यह खास तौर पर फायदेमंद होता है. पिंपल और एक्ने को कम करेनारियल पानी में एंटी बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो पिंपल और एक्ने को कम करने में मदद करते हैं. अगर आप इसे नियमित रूप से पीते हैं या हल्के से चेहरे पर लगाते हैं, तो त्वचा साफ रहने लगती है और दाग धब्बे भी धीरे धीरे कम होते हैं. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. नेचुरल ग्लो बढ़ाता हैअगर आप बिना मेकअप के भी ग्लोइंग स्किन चाहते हैं, तो नारियल पानी एक अच्छा ऑप्शन है. यह खून को साफ करने में मदद करता है, जिससे चेहरे पर नेचुरल चमक आती है. नियमित सेवन से स्किन ज्यादा हेल्दी और फ्रेश दिखती है. एजिंग के असर को धीमा करता हैनारियल पानी में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो स्किन को फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं. इससे झुर्रियां और फाइन लाइन्स जल्दी नहीं आतीं. यानी यह आपकी त्वचा को लंबे समय तक जवां बनाए रखने में मदद करता है. स्किन को ठंडक देता हैगर्मी के मौसम में त्वचा पर जलन और लालिमा की समस्या हो जाती है. ऐसे में नारियल पानी स्किन को ठंडक देता है और उसे शांत करता है. आप इसे फेस पर हल्के से लगा भी सकते हैं, जिससे तुरंत राहत मिलती है. दाग धब्बे कम करने में सहायकअगर आपके चेहरे पर दाग धब्बे या टैनिंग है, तो नारियल पानी धीरे धीरे इसे हल्का करने में मदद कर सकता है. इसमें मौजूद पोषक तत्व त्वचा को रिपेयर करते हैं और रंगत को निखारते हैं. नारियल पानी का सही इस्तेमाल कैसे करेंनारियल पानी को रोज सुबह पीना सबसे आसान तरीका है. इसके अलावा आप कॉटन की मदद से इसे चेहरे पर लगा सकते हैं और कुछ देर बाद धो सकते हैं. इससे स्किन साफ और फ्रेश लगती है. ध्यान रखें कि ताजा नारियल पानी ही इस्तेमाल करें. किन बातों का रखें ध्यानहर चीज की तरह नारियल पानी का भी संतुलित इस्तेमाल जरूरी है. ज्यादा मात्रा में सेवन करने से बचें. अगर आपकी स्किन बहुत ज्यादा सेंसिटिव है तो पहले थोड़ा टेस्ट जरूर करें. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
bel juice benefits and side effects | bel juice benefits in hindi | बेल के जूस के फायदे | बेल के जूस के फायदे और नुकसान |

Last Updated:April 02, 2026, 17:03 IST तपती गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच प्रकृति ने हमें ‘बेल’ के रूप में एक अनमोल वरदान दिया है. आयुर्वेद में ‘श्रीफल’ के नाम से मशहूर यह फल न केवल शरीर को बर्फ जैसी ठंडक देता है, बल्कि पुरानी से पुरानी कब्ज और डायबिटीज जैसी बीमारियों को जड़ से खत्म करने की ताकत रखता है. महज ₹20 में मिलने वाला बेल का एक गिलास जूस आपकी सेहत के लिए किसी महंगे टॉनिक से कम नहीं है. आइए जानते हैं क्यों इस मौसम में बेल का सेवन आपके लिए अनिवार्य है. गर्मियों के मौसम में कई ऐसे फल होते हैं जो हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद माने जाते हैं. ऐसे में आज हम आपको एक ऐसे फल के बारे में बताने जा रहे हैं जो कई बीमारियों के लिए रामबाण माना जाता है. ऐसा ही एक फल बेल है, जिसे श्रीफल भी कहा जाता है. यह एक औषधीय गुणों से भरपूर फल है, जो आयुर्वेद में प्राचीन काल से इस्तेमाल होता आ रहा है. यह गर्मियों में विशेष रूप से उपयोगी होता है. शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ कई गंभीर बीमारियों से बचाने की ताकत रखता है. बेल का फल, पत्ते, बीज और जड़ सब कुछ औषधि की तरह काम करते हैं. परंतु गर्मियों के मौसम में बेल के जूस की डिमांड अधिक रहती है क्योंकि बेल का जूस हमारे शरीर को ठंडक प्रदान करता है, जिससे कई बीमारियां ठीक हो सकती हैं. बेल का जूस हमारे पाचन तंत्र के लिए बहुत ही फायदेमंद माना जाता है. बेल के फल के गूदे से बना शरबत या मुरब्बा कब्ज, गैस, एसिडिटी और दस्त जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है. यह फल सिर्फ गर्मियों के मौसम में ही मिलता है. बाजारों में आसानी से ₹20 से लेकर ₹40 तक बेल के जूस का गिलास मिल जाता है. Add News18 as Preferred Source on Google बेल के पत्तों का रस डायबिटीज के रोगियों के लिए लाभदायक माना जाता है. यह ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है. सुबह खाली पेट आप बेल के पत्तों को साफ पानी से धुलाई करने के बाद पीसकर रस निकालकर सेवन करने से डायबिटीज जैसी समस्या से राहत मिल सकती है. बेल में एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन ‘C’ प्रचुर मात्रा में होते हैं, जो शरीर की इम्यूनिटी को मजबूत करते हैं. यह संक्रमण से लड़ने की ताकत देता है और मौसम बदलने पर होने वाली बीमारियों से सुरक्षा करता है. बेल का सेवन हार्ट के लिए भी लाभकारी है. यह कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करता है. आयुर्वेदिक आचार्य देवेंद्र कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि बेल का जूस खून साफ करने में भी मदद करता है. बेल में मौजूद विटामिन्स और मिनरल्स त्वचा को ग्लोइंग बनाते हैं और बालों को जड़ से मजबूत करते हैं. बेल के पत्तों का रस त्वचा पर लगाने से कील-मुंहासे और फोड़े-फुंसियों से राहत मिलती है. बेल फायदेमंद होता है, लेकिन बेल का सेवन सीमित मात्रा में ही करें, क्योंकि अत्यधिक मात्रा में इसका सेवन कब्ज पैदा कर सकता है. First Published : April 02, 2026, 17:03 IST
आपकी जान को खतरा! घर के किचन में घूमने वाली छिपकलियां फैला रहीं यह बीमारी, समय रहते करें यह काम

Last Updated:April 02, 2026, 17:00 IST Health News: गर्मी का समय आते ही दीवारों पर छिपकलियां मंडराने लगती हैं. कई बार छिपकली खाने के बर्तन, खुले खाने आदि में घूम जाती है, जिस कारण वह बर्तन या खाना दूषित हो जाता है. चिकित्सक ने इसको लेकर खास जानकारी दी है और बताया है कि किन-किन बातों का ध्यान देना जरूरी है. आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा में गर्मियों ने दस्तक दे दी है. गर्मियों के आते ही घरों में जगह-जगह छिपकली भी दिखने लगती है. सर्दियों के मौसम में जहां छिपकली छुप जाती है, वहीं गर्मी आते ही वह बाहर निकलने लगती है. इस दौरान घर की किचन में भी छिपकली जाने का डर रहता है. कई बार छिपकली खाने के बर्तन, खुले खाने आदि में घूम जाती है, जिस कारण वह बर्तन या खाना दूषित हो जाता है. चिकित्सक ने बताया कि छिपकली से कई तरह के संक्रमण होने का डर सताता है. उन्होंने कहा कि छिपकली से मुख्य रूप से साल्मोनेला नामक बीमारी फैलने का डर रहता है. इससे मरीज को फूड पॉइजनिंग, पेट दर्द, उल्टी और दस्त जैसी बीमारियां हो सकती हैं. उन्होंने बताया कि छिपकली के काटने से घाव में संक्रमण (Infection) का खतरा भी रहता है. किचन में रखा खाना हमेशा ढ़ककर रखेंआगरा के वरिष्ठ चिकित्सक आशीष मित्तल ने बताया कि छिपकली से साल्मोनेला नाम की बीमारी होने का डर रहता है. उन्होंने कहा कि इससे बचने के लिए हमेशा किचन में रखे बर्तन और खाने को अच्छी से तरह से पैक करके ही रखना चाहिए. डॉ. आशीष मित्तल ने बताया कि छिपकली से होने वाले साल्मोनेला संक्रमण से बचने के लिए सबसे जरूरी है. घर में साफ-सफार्ड रखें, छिपकलियों को खाने-पीने की चीजों से दूर रखें, छिपकली के मल-मूत्र के संपर्क में आने के बाद साबुन से अच्छी तरह हाथ धोएं. उन्होंने बताया कि कीटाणुनाशक से सतहों को साफ करें और घर में छिपकली के छिपने की जगहों को बंद रखने की कोशिश करें. साल्मोनेला का समय रहते इलाज है जरूरीआगरा के वरिष्ठ चिकित्सक आशीष मित्तल ने बताया कि साल्मोनेला का समय रहते इलाज कराना जरूरी है. उन्होंने बताया कि साल्मोनेला एक गंभीर जीवाणु संक्रमण है, जो मख्य रूप से आंतों को प्रभावित करता है. साल्मोनेला के कारण मरीज को दस्त, बुखार, पेट दर्द और उल्टी जैसे लक्षण दिखाई देते है. यदि यह लक्षण दो तीन दिनों से अधिक रहते हैं, तो तत्काल समय रहते इसका उपचार कराना जरूरी है. डॉ. आशीष मित्तल ने बताया कि कई बार मरीज कि इम्यूनिटी कमजोर होने के कारण यह जानलेवा भी साबित हो सकता है. डॉ. मित्तल ने कहा कि कभी भी किसी को अपने स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही नहीं करनी चाहिए. कोई भी समस्या होने पर अपने चिकित्सक की सलाह जरूर लेनी चाहिए. About the Author आर्यन सेठ आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए. Location : Agra,Uttar Pradesh First Published : April 02, 2026, 17:00 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
बंगाल में एसआईआर किराएदारों को बंधक बनाने को लेकर एससी शेयर बाजार पर माता की नींद, जानें क्या है इंटरनेट

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राज्य में चुनावी हलचल काफी तेज है। इस बीच राज्य के मालदा जिले में गरीबों की सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को बंधक बनाने की घटना पर देश की सर्वोच्च अदालत ने बंगाल की ममता बनर्जी सरकार को बंधक बना लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह घटना सिर्फ ऐतिहासिक अधिकारियों को गिरफ्तार करने की एक कोशिश नहीं है, बल्कि इस अदालत की शक्तियों को भी चुनौती दी गई है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार (2 अप्रैल, 2026) को इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उन्हें यह पता ही नहीं था कि मालदा जिले में सात निगम अधिकारियों को रात भर बंधक बंधक रखा गया था। उन्होंने इस बात की शिकायत की कि इस महीने राज्य में होने वाले चुनाव से पहले चुनाव आयोग ने प्रशासन में शीर्ष स्तर के बदलाव लागू किए थे, इसलिए अब उन्हें ऐसा लग रहा है कि राज्य की मान्यताएं उनकी धार्मिकता में नहीं हैं. सुप्रीम कोर्ट की अवमानना पर ममता बनर्जी की प्रतिक्रिया पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार (2 अप्रैल, 2026) को मुर्शिदाबाद जिले के सागरदिग्घी में आयोजित रैली को संबोधित करते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी. बनर्जी ने कहा, ‘मुझे नहीं पता कि इसके लिए कौन जिम्मेदार है। किसी ने मुझे यह बात की जानकारी नहीं दी. प्रशासन मेरे हाथ में नहीं है. राज्य में कानून-व्यवस्था को चुनाव आयोग नियंत्रित कर रहा है और वो केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की बात सुनते हैं।’ उन्होंने कहा, ‘सब कुछ बदल गया है. मेरी शक्तियों चुनाव आयोग को समर्पित है। यह सुपर प्रेसिडेंट शासन जैसा है।’ सागरदिघी, पश्चिम बंगाल: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का कहना है, “…प्रशासन मेरे हाथ में नहीं है। चुनाव आयोग कानून व्यवस्था को नियंत्रित कर रहा है, वे गृह मंत्री अमित शाह की बात सुनते हैं, डीजी से लेकर एसपी तक सभी को बदल दिया गया है। मेरी शक्तियां ईसीआई को हस्तांतरित कर दी गई हैं, यह एक… pic.twitter.com/gIKSWbdb2j – आईएएनएस (@ians_india) 2 अप्रैल 2026 ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग में राज्य व्यवस्था पूरी तरह से विफल रही है और मेरी सारी शक्तियां चोरी हो गई हैं। उन्होंने कहा कि मुझसे (बंधक द्वारा बनाए गए मूल्यवान के बारे में) आधी रात को एक पत्रकार से इस बात की जानकारी मिली। उन्होंने एसआईआर अभ्यर्थियों को असंतोष का प्रस्ताव देते हुए यह भी कहा कि वे समझते हैं कि लोग क्यों नाराज हैं। मालदा में हुई घटना सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? देश की सर्वोच्च अदालत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्य कांत ने कहा कि यह घटना सर्वोच्च अदालत की शक्तियों को चुनौती देने की एक सोची-समझदारी और उकसावे वाली कोशिश है और इसकी जांच या पैमाने की जांच किसी केंद्रीय एजेंसी से की जानी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘यह घटना सिर्फ ऐतिहासिक अधिकारियों को देखने की कोशिश नहीं है, बल्कि इस अदालत के अधिकार को भी चुनौती देती है।’ यह एक सोची-समझी और मोटिवेशनल फिल्म में प्रदर्शित एक्शन फिल्म है, जिसका उद्देश्य मुख्य किरदारों का समूह गिराना और दोस्तों के साथ जुड़ना है।’ यह भी पढ़ेंः अमेरिका-ईरान युद्ध: ईरानी सेना की बर्बादी, सत्ता परिवर्तन से लेकर परमाणु क्षमता तक… 20 मिनट के भाषण में कई बड़े झूठ बोल गए!
Frances Flying Whales Expands Heavy Cargo Project in India

नई दिल्ली45 मिनट पहले कॉपी लिंक पीएम नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की आधिकारिक मुलाकात के बाद फ्लाइंग व्हेल्स और भारत के BLP ग्रुप ने हाथ मिलाया है। इस साझेदारी का मकसद भारत को नेक्स्ट जेन कार्गो एयरशिप मैन्युफैक्चरिंग का ग्लोबल हब बनाना है। यह समझौता एक बड़े औद्योगिक प्लान का पहला हिस्सा है। इसके तहत भारत, फ्रांस और कनाडा के बाद फ्लाइंग व्हेल्स का तीसरा ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनेगा। इसका लक्ष्य मिडिल ईस्ट और एशिया पैसिफिक क्षेत्र में हैवी लिफ्ट एयरशिप टेक्नोलॉजी को तेजी से पहुंचाना है। पीएम नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की मुलाकात के बाद भारत में कार्गो एयरशिप बनाने की घोषणा की गई। (फाइल फोटो) भारत को चुना गया तीसरा ग्लोबल एयरोस्पेस हब इस समझौते (MoU) के तहत, फ्लाइंग व्हेल्स और BLP ग्रुप मिलकर भारत में LCA60T कार्गो एयरशिप की असेंबली लाइन लगाएंगे। इसके लिए तमिलनाडु को लोकेशन के तौर पर देखा जा रहा है। इस प्रोजेक्ट से एयरोनॉटिक्स क्षेत्र में 300 से ज्यादा हाई-स्किल्ड नौकरियां मिलने की उम्मीद है। इससे देश के एयरोस्पेस सप्लाई चेन को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे एडवांस और सस्टेनेबल एविएशन मैन्युफैक्चरिंग में भारत की स्थिति और मजबूत होगी। भारत वाला प्लांट फ्लाइंग व्हेल्स के ग्लोबल स्ट्रक्चर का तीसरा बड़ा स्तंभ होगा। पहला फ्रांस में है जो यूरोप और अफ्रीका को देखेगा। दूसरा कनाडा में है जो अमेरिका के लिए है। अब भारत का प्लांट मिडिल ईस्ट और एशिया पैसिफिक क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करेगा। हर हब की अपने क्षेत्र के लिए विशेष उत्पादन और संचालन की जिम्मेदारी होगी, लेकिन सभी ग्लोबल तकनीकी मानकों का पालन करेंगे। LCA60T ट्रांसपोर्ट का एक नया और आधुनिक तरीका है। यह हवा में एक ही जगह स्थिर रहकर भी टनों में भारी सामान को लोड और अनलोड कर सकता है, जिससे जमीन पर कोई असर नहीं पड़ता। इसमें हाइब्रिड प्रोपल्शन सिस्टम लगा है, जिसे आगे चलकर पूरी तरह इलेक्ट्रिक बनाया जा सकता है। इससे यह बिना किसी प्रदूषण के उड़ान भर सकेगा। भविष्य के लॉजिस्टिक्स में LCA60T का रोल इस साझेदारी के केंद्र में LCA60T (लार्ज कैपेसिटी एयरशिप 60 टन) है। यह हीलियम से चलने वाला मजबूत एयरशिप है जो 60 टन तक वजन ले जा सकता है। इसे ऐसे दूरदराज और दुर्गम इलाकों में काम करने के लिए बनाया गया है जहां सड़क, रेलवे या पोर्ट की सुविधा नहीं है। इसकी हवा में स्थिर रहने की खूबी और वर्टिकल लोडिंग सिस्टम की मदद से भारी बुनियादी ढांचे के उपकरण सीधे साइट पर पहुंचाए जा सकते हैं। उम्मीद है कि यह एयरशिप विंड टरबाइन के ब्लेड और बिजली के टावरों जैसे रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स में काफी मदद करेगा। इसका इस्तेमाल कंस्ट्रक्शन, डिफेंस, राहत कार्यों, मोबाइल मेडिकल यूनिट और दूरदराज के इलाकों में माल ढुलाई के लिए भी किया जाएगा। कंपनियों का कहना है कि ट्रेडिशनल हेवी लिफ्ट ट्रांसपोर्ट सिस्टम के मुकाबले इसका पर्यावरण पर बहुत कम असर पड़ता है। ग्लोबल डिमांड और शुरुआती समझौते फ्लाइंग व्हेल्स ने मिडिल ईस्ट और एशिया पैसिफिक क्षेत्र में पहले ही 25 से ज्यादा कॉमर्शियल समझौते कर लिए हैं, जो इस टेक्नोलॉजी में लोगों की दिलचस्पी को दर्शाता है। कंपनी के मुताबिक, उसकी सर्विस यूनिट के जरिए दुनिया भर में कुल 90 ऐसे समझौते हो चुके हैं। भारत में हब बनने से उन इलाकों में काम तेज होगा जहां खराब रास्तों या मुश्किल इलाकों की वजह से ट्रांसपोर्ट की चुनौती रहती है। तीन स्तंभों वाली ग्लोबल स्ट्रेटजी फ्लाइंग व्हेल्स ने अपनी लॉन्ग-टर्म स्ट्रेटजी को तीन क्षेत्रीय हब में बांटा है: फ्रांस: यूरोप और अफ्रीका के लिए कनाडा: अमेरिका के लिए भारत: मिडिल ईस्ट और एशिया पैसिफिक के लिए भारत के तीसरे मुख्य केंद्र के तौर पर जुड़ने के साथ ही कंपनी का ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग प्लान अब पूरा हो गया है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है ताकि उत्पादन एक ही जगह सीमित न रहकर अलग-अलग देशों में हो सके और इंटरनेशनल ऑपरेशंस को बड़े स्तर पर बढ़ाया जा सके। फ्लाइंग व्हेल्स एक फ्रेंच-कनाडाई एरोस्पेस कंपनी है, जिसे फ्रांस की सरकार और प्राइवेट सेक्टर के पार्टनर्स का साथ मिला हुआ है। फ्लाइंग व्हेल्स दुनिया का सबसे बड़ा एयरशिप प्रोग्राम तैयार कर रही है, जिसका फोकस भारी सामान की ढुलाई पर है। इनका LCA60T एयरशिप बिजली के टावर, विंड एनर्जी के पुर्जे और यहां तक कि टैंक जैसे मिलिट्री साजो-सामान को भी दूरदराज के इलाकों तक ले जाने के लिए बनाया गया है। कंपनी अपना पहला मैन्युफैक्चरिंग प्लांट फ्रांस में लगा रही है, जबकि दूसरा प्लांट क्यूबेक सरकार की मदद से कनाडा में तैयार किया जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया तक फैले इस विशाल क्षेत्र के लिए भारत को तीसरे ग्लोबल हब के तौर पर पहली पसंद माना गया था, जिसे अब इस पार्टनरशिप के जरिए फाइनल कर दिया गया है। लीडरशिप के बयान फ्लाइंग व्हेल्स के प्रेसिडेंट सेबेस्टियन बोगन ने इसे कंपनी के सफर का एक ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा, “भारत के साथ यह साझेदारी इनोवेशन और बड़े लक्ष्यों को साथ लाने का एक बड़ा मोड़ है। फ्रांस और कनाडा के साथ मिलकर हम सिर्फ एयरशिप नहीं बना रहे, बल्कि ट्रांसपोर्ट का एक नया सस्टेनेबल मॉडल तैयार कर रहे हैं जो दूरदराज के इलाकों को जोड़ेगा और भारी लॉजिस्टिक्स में प्रदूषण कम करेगा। बीएलपी ग्रुप मिडिल ईस्ट और एशिया पैसिफिक में हमारी रणनीति का मुख्य हिस्सा होगा।” BLP ग्रुप के सीईओ तेजप्रीत एस चोपड़ा और फ्लाइंग व्हेल्स के प्रेसिडेंट सेबस्टियन बुगोन। बीएलपी ग्रुप के सीईओ तेजप्रीत एस चोपड़ा ने कहा कि यह सहयोग टेक्नोलॉजी और सस्टेनेबिलिटी के एक जैसे विजन को दर्शाता है। उन्होंने कहा, “LCA60T से इंफ्रास्ट्रक्चर, क्लीन एनर्जी और डिफेंस जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाएं खुलेंगी। हमें भारत में इस एयरोस्पेस इकोसिस्टम को बनाने में मदद करने पर गर्व है।” BLP ग्रुप और उसका AI इकोसिस्टम BLP ग्रुप एक भारतीय ग्रुप है, जो इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट, रिन्यूएबल एनर्जी और एडवांस इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में काम करता है। कंपनी ने विंड और सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट्स के लिए इटली की एनेल ग्रीन पावर और नॉर्वे की स्टैटक्राफ्ट के साथ जॉइंट वेंचर किया है, साथ ही यह एपी मोलर कैपिटल की भी पार्टनर है। इसकी टेक्नोलॉजी विंग, ‘इंडस्ट्री एआई’, मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए इंडस्ट्रियल इंटेलिजेंस सिस्टम तैयार करती है। इनके प्लेटफॉर्म के केंद्र
यात्री बस ने बाइक सवार दो को टक्कर मारी:भोपाल में हादसे के बाद एक की मौत, एक जख्मी

भोपाल के बिलखिरिया इलाके में बुधवार रात तेज रफ्तार यात्री बस ने बाइक सवार दो लोगों को टक्कर मार दी। हादसे में एक की मौत हो गई, जबकि एक की हालत नाजुक है। पुलिस ने इस मामले में बस चालक के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोपी की अभी गिरफ्तारी नहीं की जा सकी है। गुरुवार को पीएम के बाद शव परिजनों के हवाले कर दिया गया है। परिजन बॉडी लेकर बेगमगंज रवाना हो गए हैं। वहीं शव का अंतिम संस्कार किया जाएगा। थाना प्रभारी उमेश चौहान के मुताबिक 30 वर्षीय सुरेंद्र लोधी पुत्र सुंदर लोधी ग्राम बेगमगंज रायेसन में रहता था। वह पोकलेन मशीन ऑपरेट करता था। बुधवार दोपहर पोकलेन का सामान लेने भोपाल आए थे। रात करीब आठ बजे वह भोपाल से रायसेन अपने साथी के साथ बाइक पर सवार होकर जा रहा था। तभी रास्ते में पीछे से आई यात्री बस क्रमांक एमपी 10 पी 0990 ने बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में महेंद्र की मौके पर ही मौत हो गई और उसका साथी गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के समय बस में सवार थे यात्री घटना के समय बस में यात्री सवार थे। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने घायल को इलाज के लिए भर्ती कराया और शव को पीएम के लिए भेज दिया। साथ ही पुलिस ने यात्रियों को दूसरी बस से रवाना करने के साथ ही बस को जब्त कर लिया। अब पुलिस ड्राइवर की तलाश में जुटी है।
सेम के पत्तों का कमाल! त्वचा रोग, पाचन और इम्यूनिटी के लिए हैं जबरदस्त, जानिए इसके फायदे

Last Updated:April 02, 2026, 16:12 IST सेम के पत्ते सिर्फ एक सामान्य सब्जी नहीं, बल्कि औषधीय गुणों का खजाना हैं. ये पाचन सुधारने, त्वचा को स्वस्थ रखने और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं. आइए जानते हैं सेम के पत्तों के ऐसे फायदे, जो आपको हैरान कर देंगे. सेम के पत्ते पोषक तत्वों और औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं, जो पाचन, त्वचा रोगों और सूजन को कम करने में बेहद फायदेमंद हैं. इनमें प्रोटीन, विटामिन A, आयरन और फाइबर भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और कब्ज जैसी पेट की समस्याओं को दूर करने में सहायक होते हैं. डॉक्टर रवि आर्य ने बताया कि सेम के पत्ते चेहरे की चमक और त्वचा संबंधी समस्याओं के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं. इसके पत्तों में मौजूद औषधीय गुण चेहरे के काले धब्बे, दाद (रिंगवर्म) और ललौसी जैसे त्वचा रोगों को ठीक करने में मदद कर सकते हैं. इसका रस त्वचा को साफ़ और स्वस्थ बनाने में सहायक माना जाता है. सेम के पत्ते पाचन सुधारने के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं. इनमें भरपूर मात्रा में फाइबर होता है, जो कब्ज, पेट की सूजन, अपच और पेट के हानिकारक बैक्टीरिया को कम कर पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है. इसके सेवन से पेट दर्द, दस्त और त्वचा की समस्याओं में भी राहत मिलती है. यह सूजन कम करने और पेट के स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने में कारगर हैं. Add News18 as Preferred Source on Google सेम के पत्ते पेट दर्द, मरोड़, उल्टी और दस्त में राहत देने के लिए बेहद फायदेमंद हैं. इनके औषधीय गुण पाचन में सुधार, सूजन कम करने और पेट के हानिकारक बैक्टीरिया को संतुलित करने में मदद करते हैं. इनका उपयोग सब्जी, काढ़ा या पत्तियों के रस के रूप में किया जा सकता है, जो पाचन क्रिया को बेहतर बनाते हैं. एंटी-ऑक्सीडेंट से भरपूर सेम के पत्ते दाद-खाज-खुजली (त्वचा रोग), पाचन सुधार, पेट दर्द, सूजन कम करने और ब्लड शुगर नियंत्रित करने में बेहद फायदेमंद माने जाते हैं. इनके सेवन या लेप से शरीर में जमा विषैले पदार्थ (टॉक्सिन्स) बाहर निकलने में मदद मिलती है और यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाते हैं. सेम के पत्ते गले की खराश और दर्द के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं. इनमें सूजन-रोधी और औषधीय गुण होते हैं, जो गले में खराश, सर्दी और खांसी जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करते हैं. सेम के पत्ते त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं, खासकर दाद, खाज, खुजली और सूजन जैसी समस्याओं में. इनके पत्तों का रस या पेस्ट लगाने से ललौसी, चेहरे के काले धब्बे और फंगल इन्फेक्शन कम होने में मदद मिलती है. इनमें मौजूद प्राकृतिक एंटी-इंफ्लेमेटरी और औषधीय गुण त्वचा को स्वस्थ और साफ बनाए रखने में सहायक होते हैं. First Published : April 02, 2026, 16:12 IST
delhi high court Ani news agency openai chat gpt content copyright case

नई दिल्ली2 घंटे पहले कॉपी लिंक दिल्ली हाईकोर्ट ने ANI और OpenAI से जुड़े मामले में सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया है। ANI ने OpenAI पर चैटजीपीटी (ChatGPT) को ट्रेन करने के लिए उसकी खबरों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया गया है। ANI का आरोप है कि OpenAI ने वेब टूल्स के माध्यम से उसका कंटेंट इकट्ठा किया और बिना परमिशन-भुगतान उसकी खबरों का इस्तेमाल कर ChatGPT को ट्रेन किया। ANI के मुताबिक यह फेयर डीलिंग के नियमों में नहीं आता, क्योंकि इसका उपयोग कमाई और व्यवसाय के लिए किया जा रहा है। OpenAI ने आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि सिस्टम सिर्फ इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी से पैटर्न सीखता है। मॉडल पूरा आर्टिकल कॉपी नहीं करता। OpenAI ने कहा कि आगे की ट्रेनिंग के लिए ANI की वेबसाइट ब्लॉक कर दी गई है। AI ट्रेनिंग और कॉपीराइट कानून से जुड़ा पहला बड़ा मामला इस मामले का सबसे बड़ा मुद्दा भारतीय कानून में फेयर डीलिंग की सही व्याख्या है। भारत में AI ट्रेनिंग और कॉपीराइट कानून से जुड़ा यह पहला बड़ा मामला माना जा रहा है। यह मामला 19 नवंबर 2024 को कोर्ट में आया था। तब से लेकर 27 मार्च 2026 तक इस पर कुल 32 बार सुनवाई हो चुकी है। सुनवाई के दौरान जस्टिस अमित बंसल ने AI और कॉपीराइट से जुड़े कई जरूरी कानूनी सवालों पर विचार किया। इस मामले में कई मीडिया संस्थानों और दूसरे संगठनों ने भी अपनी बात रखी। कुछ मीडिया समूहों ने ANI का समर्थन करते हुए कॉपीराइट की सुरक्षा की मांग की, जबकि कुछ पक्षों ने OpenAI का समर्थन किया और कहा कि मौजूदा कानून AI ट्रेनिंग की अनुमति देता है। कोर्ट रूम में ANI और OpenAI की दलीलें… ANI- कॉपीराइट का उल्लंघन उसी समय शुरू हो जाता है, जब ट्रेनिंग के लिए डेटा इकट्ठा किया जाता है। ChatGPT के कुछ जवाबों में पेड कंटेंट जैसी सामग्री दिखाई दी है। OpenAI- AI मॉडल पूरे आर्टिकल्स को सेव नहीं करते। वे सिर्फ भाषा और डेटा के पैटर्न सीखते हैं। अस्थायी रूप से डेटा का उपयोग करना कॉपी करना नहीं माना जाना चाहिए। ANI- AI कंपनियों को इसका फायदा नहीं मिलना चाहिए। OpenAI- AI ट्रेनिंग एक रिसर्च गतिविधि की तरह है और इसे अनुमति मिलनी चाहिए। इस मामले में अब कोर्ट तय करेगी कि AI मॉडल की ट्रेनिंग में कंटेंट का इस्तेमाल कॉपीराइट कानून के तहत कॉपी माना जाएगा या नहीं। यह फैसला भारत में AI और कॉपीराइट नियमों की दिशा तय करने में अहम होगा। —————————————— ये खबर भी पढ़ें… चैटजीपीटी की मदद से घर ₹9.5 करोड़ में बिका:₹95 लाख ज्यादा कीमत मिली, बिना एजेंट 5 दिन में डील हुई अमेरिका के फ्लोरिडा में एक शख्स ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करके अपना घर करीब 1 मिलियन डॉलर (लगभग 9.5 करोड़ रुपए) में बेच दिया है। मियामी में रहने वाले रॉबर्ट लेविन ने घर बेचने के लिए किसी रियल एस्टेट एजेंट की मदद नहीं ली, बल्कि चैटजीपीटी को अपना गाइड बनाया। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…









