घर के आंगन में उगने वाला यह मामूली पौधा कई बीमारियों के लिए काल! कई गंभीर बीमारियों में कारगर

Last Updated:April 03, 2026, 20:26 IST Barabanki News: पत्थरचट्टा का पौधा सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है. पत्थरचट्टा का उपयोग लंबे समय से पारंपरिक घरेलू उपचारों में किया जाता रहा है. इसकी पत्तियों और तने में ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को कई समस्याओं से राहत देने में मददगार माने जाते हैं. बाराबंकी: हमारे आसपास कई ऐसे पेड़-पौधे पाए जाते हैं, जिनमें प्राकृतिक औषधीय गुण भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं. इन्हीं में से एक है पत्थरचट्टा का पौधा, जिसे आयुर्वेद में बेहद उपयोगी माना जाता है. यह पौधा आसानी से घरों, बगीचों, पार्कों और खुले स्थानों पर देखने को मिल जाता है. पत्थरचट्टा का उपयोग लंबे समय से पारंपरिक घरेलू उपचारों में किया जाता रहा है. इसकी पत्तियों और तने में ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को कई समस्याओं से राहत देने में मददगार माने जाते हैं. उन्होंने कहा कि कुछ लोग इसका सेवन सब्ज़ी और घरेलू नुस्खों के रूप में भी करते हैं. आयुर्वेद के अनुसार, यह पौधा शरीर को अंदर से मजबूत बनाने, सूजन कम करने और कई सामान्य परेशानियों से बचाव में सहायक माना जाता है. पत्थरचट्टा का पौधा औषधीय गुणों से भरपूर होता है. ये जोड़ों के दर्द, गठिया, अल्सर, लीवर, चेहरे के दाग, धब्बे, एलर्जी, सूजन, पथरी और त्वचा संबंधित कई गंभीर बीमारियों में काफी कारगर है. पत्थरचट्टा पौधे के औषधीय गुणआयुर्वेदिक चिकित्सक डॉक्टर अमित वर्मा एमडी मेडिसिन ने बताया कि वैसे तो आयुर्वेद में पत्थरचट्टा का पौधा बेहद लाभकारी माना गया है. इसके पत्तों मे बहुत सारे औषधीय गुण पाए जाते हैं. अगर किसी को जोड़ों मे दर्द या गठिया की समस्या है या स्वेलिंग आ जाती है, उन लोगों को इसके पत्तों को तीन से चार बार इस्तेमाल करना चाहिए, जिससे काफी फायदा होता है. साथ ही साथ अगर किसी को घाव है या चेहरे पर रेशेज हैं या स्किन में जलन की समस्या है, वही मौसम बदलने से एलर्जी हो जाती है, वहां पर इसके पत्तों का लेप बनाकर लगाने से बहुत ही जल्दी राहत मिलती है. एक-दो घंटे बाद एक गिलास पानी का इस्तेमालवहीं अगर किडनी स्टोन है, तो इसकी 5 पत्तियों को खाली पेट सेवन करना चाहिए. दिनभर में एक-दो घंटे बाद एक गिलास पानी का इस्तेमाल जरूर करें, इससे किडनी स्टोन में काफी फायदा होता है. वहीं अगर किसी को अल्सर या लीवर की समस्या होती है, उन्हें इसके पत्तों का रस पानी के साथ सेवन करना चाहिए, जिससे काफी लाभ होता है. About the Author आर्यन सेठ आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए. Location : Bara Banki,Uttar Pradesh First Published : April 03, 2026, 20:26 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
गर्मी में मिलने वाला 10रु का ये काला फल, कंट्रोल रखता है ब्लड शुगर-BP, स्किन के लिए भी फायदेमंद

Last Updated:April 03, 2026, 20:26 IST Indian Blackberry Benefits: गर्मियों में बिकने वाला काला जामुन सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है. ये फल किफायती होने के साथ डायबिटीज-ब्लड प्रेशर पेशेंट के लिए बहुत असरदार साबित होता है. आयुर्वेद में इसे गर्मी नाशक फल भी माना गया है, जिससे ये बॉडी को ठंडा भी रखता है. ख़बरें फटाफट Jamun Khane ke Fayde: गर्मियों के मौसम में कई सारे मौसमी फल मार्केट में आने लगते हैं. जामुन इनमें से ही एक है.ये स्वाद में लाजवाब होने के साथ-साथ सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है. आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों ही जामुन को गर्मियों का एक बेहतरीन सुपरफूड मानते हैं. आयुर्वेद में जामुन को खासतौर पर डायबिटीज और पेट से जुड़ी समस्याओं के लिए उपयोगी बताया गया है. इसके फल ही नहीं, बल्कि पत्तियां भी औषधि बनाने में काम आती हैं. यहां तक कि जामुन की टहनी से दातून करने से मुंह से जुड़ी कई समस्याएं दूर होती हैं और दांत- मसूड़े स्वस्थ रहते हैं. पित्त नाशक फल जामुनजामुन की तासीर ठंडी मानी जाती है, इसलिए यह गर्मियों में शरीर को ठंडक देता है और पित्त को शांत करता है. यह शरीर की अतिरिक्त गर्मी को कम करने में मदद करता है और पेट को भी ठंडा रखता है. इसलिए इसे आयुर्वेद में पित्त नाशक भी कहते हैं. आप इसे सीधे फल के रूप में खा सकते हैं, जूस बनाकर पी सकते हैं या सलाद में मिलाकर भी खा सकते हैं. यह सस्ता, आसानी से मिलने वाला और शरीर को हाइड्रेट रखने वाला फल है, जो आपको दिनभर ऊर्जा देता है. जामुन के स्वास्थ्य लाभ जामुन ब्लड शुगर को कंट्रोल रखने में मदद करता है, इसलिए डायबिटीज के मरीजों के लिए खासतौर पर फायदेमंद माना जाता है. इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, जिससे शुगर लेवल अचानक नहीं बढ़ता. गर्मियों में जब शुगर बढ़ने का खतरा ज्यादा होता है, तब जामुन का सेवन मददगार साबित होता है. जामुन में फाइबर अच्छी मात्रा में पाया जाता है, जो पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है. यह कब्ज की समस्या को दूर करता है और पेट को स्वस्थ रखता है. गर्मियों में भारी या तला-भुना खाने से पाचन बिगड़ जाता है, ऐसे में जामुन इसे सुधारने में मदद करता है. जामुन में विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स भी भरपूर होते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं. इससे गर्मी में होने वाली आम बीमारियों से बचाव होता है. जामुन में कैलोरी कम होता है, इसलिए वेट कंट्रोल रखने में भी सहायक है. फाइबर अधिक होने के कारण पेट जल्दी भरता है और बार-बार भूख नहीं लगती. दिल की सेहत के लिए भी जामुन फायदेमंद है. इसमें मौजूद पोटैशियम ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में मदद करता है और कोलेस्ट्रॉल को कम करने में भी सहायक होता है, जिससे दिल स्वस्थ रहता है. इतना ही नहीं, जामुन त्वचा के लिए भी अच्छा होता है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा को साफ और चमकदार बनाते हैं. गर्मियों में धूप और पसीने से त्वचा पर जो असर पड़ता है, जामुन उसे कम करने और त्वचा को निखारने में मदद करता है. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह बतौर सीनियर सब एडिटर News18 Hindi से जुड़ी हैं. वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्यू पर आधारित रिपोर्ट्स बनाने में एक्सपर्ट हैं. शारदा पिछले 5 सालों से मीडिया …और पढ़ें Location : New Delhi,Delhi First Published : April 03, 2026, 20:26 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
दुनिया का सबसे सस्ता देश: दुनिया का सबसे सस्ता देश कौन है? कोई समुद्री सीमा नहीं है, जानिए भारत से कितनी दूरी है

बजट यात्रा 2026: दुनिया के सबसे प्रसिद्ध गंतव्यों के बारे में हम आज आपको बताने जा रहे हैं। खुशी की बात ये है कि ये भारत से सिर्फ 5 घंटे की दूरी पर है। ऐसे में अगर आप विदेश घूमना चाहते हैं लेकिन बजट का लक्ष्य है तो लाओस के लिए सटीक गंतव्य स्थान प्राप्त किया जा सकता है। लाओस को 2025 और 2026 दोनों भाइयों के लिए दुनिया का सबसे बड़ा देश बताया गया है। यहां एक दिन का खर्च औसत 15 से 25 डॉलर (लगभग 1300-2100 रुपये) तक है, जिसमें रहना, खाना और स्थानीय घूमना शामिल है। वहीं, भारत से लाओस रेस्तरां भी काफी आसान है। दिल्ली, मुंबई और कोलकाता से भी यहां कनेक्टिंग फ्लाइट्स हैं, यहां की यात्रा में करीब 5 से 9 घंटे लगते हैं। हालांकि कोई सीधी उड़ान नहीं है, लेकिन बैंकॉक और हनोई से यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है। लाओस कैसा देश है? लाओस दक्षिण-पूर्व एशिया का एकमात्र स्थलरुद्ध (स्थलरुद्ध) देश है। इसके बाज़ार चीन, वियतनाम, कंबोडिया, चिन्ता और म्यांमार से हैं। देश का कुल चित्र लगभग 2,36,800 वर्ग किलोमीटर है। यहां का अधिकांश हिस्सा पहाड़ों और घने जंगलों से भरा हुआ है। यहां मेकांग नदी को देश की जीवन रेखा कहा जाता है, खेती और परिवहन के लिए जरूरी है। यहां 2 सीज़न हैं, मई से नवंबर तक बारिश और दिसंबर से अप्रैल तक सूखा मौसम। नवंबर से फरवरी के लिए यात्रा करना सबसे अच्छा माना जाता है। देश में थेरवाद बौद्ध धर्म की व्याख्या है जनसंख्या और यहां की संस्कृति के बारे में बात की जाए तो, 2026 की शुरुआत में लाओस की जनसंख्या करीब 7.97 मिलियन (लगभग 80 लाख) है। यहां औसत आयु 25 वर्ष के आसपास है, यानी युवा आबादी सबसे ज्यादा है। देश में बौद्ध धर्म की गहरी झलक देखने को मिलती है। लुआंग प्रबांग चित्रण विश्व पिरामिड स्थल है, जहां सुबह भिक्षुओं को भिक्षा दर्शन का अनोखा अनुभव मिलता है। पिछले वर्ष 4.6 मिलियन से अधिक बड़ा तूफ़ान आया यहां के लोग काफी सादा जीवन जीते हैं। प्रमुख त्योहारों में लाओ न्यू ईयर (पी माई) और पारंपरिक नाव दौड़ शामिल हैं। आधिकारिक भाषा लाओ है, जो थाई भाषा सेलेट-जुलती है। लाओस एक उन्नत देश है। यहां का उद्योग मुख्य रूप से कृषि, जलविद्युत और बढ़ते पर्यटन पर टिकी है। 80 प्रतिशत से अधिक लोग खेती पर असंबद्ध हैं। चावल, फूलगोभी और रबर मुख्य फसलें हैं।पर्यटन क्षेत्र में तेजी से वृद्धि हो रही है। वर्ष 2025 में लाओस ने 4.6 मिलियन से अधिक बड़े पैमाने पर पर्यटन का स्वागत किया, जो लक्ष्य से अधिक था। लाओस सबसे सस्ता क्यों है? साल 2026 में 5 से 6 मिलियन अंतर्राष्ट्रीय फ़िल्म का प्रदर्शन किया गया। चीन-लाओस रेलवे की वजह से चीनी संगीत की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। हेलोसेफ (HelloSafe) और इंडी स्टोरर जैसे पटाखे के अनुसार लाओस 2025-26 में सबसे सस्ता स्टोर डेस्टिनेशन है। हॉस्टल या गेस्ट हाउस में रात का खर्च 7-10 डॉलर से शुरू होता है। स्थानीय खाना 2 डॉलर में मिल जाता है। अन्यत्र किराया 8 डॉलर प्रतिदिन मिल सकता है। यहां लुआंग प्रबांग के बौद्ध मंदिर और फ्रेंच कॉलोनियल स्मारक बहुत खुबसूरतदिखते हैं। मेकांग नदी पर सनसेट क्रूज़ और वांग वियंग की गुफाएं और ट्यूबिंग भी अद्भुत हैं, इसके अलावा बोलावेन वियन्ग के झरने और फ्लोरिडा प्लांटेशन भी यहां प्रतीकात्मक से लोग देखते हैं। भारतीय ऑब्जेक्टिव के लिए बेहतरीन संस्थान भारतीय रेट्रोस्टॉल के लिए लाओस शांत वातावरण, प्राकृतिक प्रकृति और कम खर्च का बेहतरीन कॉम्बिनेशन ऑफर देता है। मास्टर ऑन अराइवल या ई-वीजा आसानी से मिल जाता है। यदि आप कम बजट में विदेश यात्रा का प्लान बनवा रहे हैं, तो लाओस को अपनी सूची में अवश्य शामिल करें। प्रकृति, संस्कृति और शांति एक साथ, साथ ही जेब पर भी कम खर्च। यह भी पढ़ें: दिल्ली में नकली टूथपेस्ट की मूंगफली का भण्डाफोड़, नामी कंपनी का लोगो (टैग्सटूट्रांसलेट)लाओस सबसे सस्ता देश(टी)बजट यात्रा लाओस(टी)भारत से लाओस उड़ान(टी)लुआंग प्रबांग पर्यटन(टी)किफायती दक्षिण पूर्व एशिया गंतव्य
केरल चुनाव 2026: व्हाट्सएप युद्ध से लेकर एआई वीडियो तक, सोशल मीडिया कैसे चुनावी आख्यानों को आकार दे रहा है | चुनाव समाचार

आखरी अपडेट:03 अप्रैल, 2026, 20:06 IST केरल की पार्टियाँ चुनावी आख्यानों को आकार देने, युवाओं और गेटेड मतदाताओं को लक्षित करने के लिए एआई संचालित सोशल मीडिया वॉर रूम चलाती हैं, लेकिन अधिकारी बढ़ती गलत सूचना और सांप्रदायिक सामग्री के बारे में चेतावनी देते हैं। एआईसीसी महासचिव और वायनाड लोकसभा सीट के उपचुनाव के लिए पार्टी उम्मीदवार प्रियंका गांधी केरल के वायनाड जिले में चुनाव प्रचार के दौरान एक परिवार से मिलीं। (छवि: पीटीआई) केरल के चुनावी विमर्श में सोशल मीडिया अब गौण नहीं रह गया है। यह इस बात का केंद्र है कि राजनीतिक आख्यान कैसे बनाए जाते हैं, लड़े जाते हैं और बढ़ाए जाते हैं। व्हाट्सएप फॉरवर्ड से लेकर एआई-जनरेटेड वीडियो तक, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म अभियान के जमीन पर पहुंचने से पहले ही मतदाता धारणा को तेजी से आकार दे रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में, पहचान, समुदाय और शासन के इर्द-गिर्द राजनीतिक रूप से आरोपित आख्यानों ने राज्य में ऑनलाइन लोकप्रियता हासिल की है। ये आख्यान हमेशा जमीनी हकीकतों को सीधे तौर पर प्रतिबिंबित नहीं करते हैं, लेकिन वे यह तय करते हैं कि मतदाता उनकी व्याख्या कैसे करते हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि विभिन्न राजनीतिक दलों ने इस बदलाव को पहचान लिया है। अभियान अब डिजिटल-प्रथम दृष्टिकोण के साथ डिज़ाइन किए जा रहे हैं, जहां संदेश को त्वरित उपभोग और उच्च साझाकरण के लिए तैयार किया गया है। द हिंदू की एक रिपोर्ट के अनुसार, आईटी पेशेवरों और एजेंसियों द्वारा संचालित चौबीसों घंटे चलने वाले वॉर रूम अब केरल में तीनों मोर्चों के लिए सोशल मीडिया-केंद्रित अभियान चला रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक प्रमुख उपकरण के रूप में उभरा है, जिसका उपयोग पार्टियां वीडियो बनाने और राजनीतिक संदेशों को अधिक आकर्षक प्रारूपों में पैकेज करने के लिए कर रही हैं। रिपोर्ट में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि कैसे सीपीआई (एम) के राज्य आईटी केंद्र ने चुनाव-केंद्रित सामग्री की ओर रुख किया है, एआई का उपयोग करके दृश्यों को फिर से बनाया है और शासन की कहानियां सुनाई हैं जहां अभिलेखीय फुटेज सीमित हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस ने समर्पित एजेंसियों को काम पर रखा है और युवा दर्शकों तक पहुंचने के लिए एआई-संचालित सामग्री और व्यंग्य-शैली वाले वीडियो के मिश्रण का प्रयोग कर रही है। भाजपा भी एलडीएफ और यूडीएफ दोनों के खिलाफ अपनी हमले की रेखाओं को तेज करने के लिए डिज़ाइन किए गए वीडियो सहित एआई-जनित सामग्री और लक्षित संदेश तैनात कर रही है। लेकिन सोशल मीडिया की बढ़ती केंद्रीयता जोखिमों के साथ आती है। वही पारिस्थितिकी तंत्र जो अभियान संदेश को बढ़ाता है, गलत सूचना को भी सक्षम बनाता है। द हिंदू की रिपोर्ट में एक हालिया उदाहरण का हवाला दिया गया है जहां अभिनेता आसिफ अली को सार्वजनिक रूप से उनके नाम पर प्रसारित एक फर्जी, सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील पोस्ट का खंडन करना पड़ा, जिससे यह रेखांकित हुआ कि झूठी कहानियां कितनी तेजी से लोकप्रियता हासिल कर सकती हैं और ध्रुवीकृत प्रतिक्रियाएं शुरू कर सकती हैं। डिजिटल स्पेस पर नज़र रखने वाले पुलिस अधिकारियों ने चुनाव अवधि के दौरान सांप्रदायिक रूप से आरोपित सामग्री में वृद्धि को चिह्नित किया है, जिसे अक्सर वास्तविक और नकली दोनों प्रोफाइलों के माध्यम से प्रसारित किया जाता है। एक मामले में, केरल पुलिस ने एआई-जनरेटेड वीडियो पर कानूनी कार्रवाई शुरू की, जिसमें कथित तौर पर संवैधानिक अधिकारियों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया था। यह विस्तारित डिजिटल युद्धक्षेत्र बदलती सामाजिक वास्तविकताओं की प्रतिक्रिया भी है। द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, राजनीतिक दलों – विशेष रूप से सीपीआई (एम) – ने पिछली हार से सबक लिया है, जिसमें त्रिपुरा में भाजपा का व्हाट्सएप-संचालित अभियान भी शामिल है। सीपीआई (एम) के केएस अरुण कुमार ने कहा, “इसने हमें मतदाताओं तक पहुंचने में डिजिटल संचार और सोशल मीडिया की ताकत का महत्व सिखाया।” “पहले, घर का दौरा प्रचार के केंद्र में था। अब, ज्यादातर लोग काम पर हैं, और गेटेड समुदायों या अपार्टमेंट में, प्रवेश प्रतिबंधित है। उन तक पहुंचने का एकमात्र तरीका मैसेजिंग और सोशल मीडिया के माध्यम से है,” उन्होंने बताया कि डिजिटल आउटरीच क्यों अपरिहार्य हो गया है। यहां तक कि सांस्कृतिक प्रारूपों को भी इस नए युद्धक्षेत्र के लिए अनुकूलित किया जा रहा है। राजनीतिक रूप से भरे रैप गाने, लघु वीडियो और मीम-आधारित सामग्री का उपयोग अभियान संदेशों को ऐसे प्रारूप में संप्रेषित करने के लिए किया जा रहा है जो युवा मतदाताओं के साथ प्रतिध्वनित होता है और सभी प्लेटफार्मों पर आसानी से फैलता है। तो फिर, सवाल यह नहीं है कि क्या सोशल मीडिया जमीनी हकीकत को पूरी तरह से प्रतिबिंबित करता है। अक्सर ऐसा नहीं होता. लेकिन यह उस लेंस को तेजी से आकार देता है जिसके माध्यम से उस वास्तविकता को देखा जाता है। केरल में, जहां चुनाव बारीकी से लड़े जाते हैं और मतदाता जागरूकता अधिक है, वहां यह नजरिया मायने रखता है। जगह : तिरुवनंतपुरम, भारत, भारत पहले प्रकाशित: 03 अप्रैल, 2026, 20:06 IST समाचार चुनाव केरल चुनाव 2026: व्हाट्सएप युद्धों से लेकर एआई वीडियो तक, सोशल मीडिया कैसे चुनावी आख्यानों को आकार दे रहा है अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग अनुवाद करने के लिए)केरल चुनाव सोशल मीडिया(टी)केरल डिजिटल प्रचार(टी)ऑनलाइन राजनीतिक आख्यान(टी)एआई-जनित राजनीतिक सामग्री(टी)सोशल मीडिया गलत सूचना(टी)व्हाट्सएप चुनाव अभियान(टी)सीपीआई (एम) डिजिटल रणनीति(टी)बीजेपी सोशल मीडिया आउटरीच
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नई दिल्ली54 मिनट पहले कॉपी लिंक भारतीय नौसेना में शुक्रवार को तीसरी परमाणु सबमरीन INS अरिदमन कमीशन की गई। इससे पहले INS अरिहंत (2016) और INS अरिघात (अगस्त 2024) को नौसेना में शामिल किया जा चुका है। अरिदमन को कई महीनों के ट्रायल के बाद केरल स्थित नौसैनिक अड्डे पर नौसेना को सौंपा गया। INS अरिदमन को विशाखापट्टनम के शिप बिल्डिंग सेंटर (SBC) में तैयार किया गया है। इससे न्यूक्लियर ट्रायड क्षमता और मजबूत हुई है। यह देश के गोपनीय न्यूक्लियर बैलिस्टिक मिसाइल सबमरीन कार्यक्रम SSBN का हिस्सा है। इस कैटेगरी की सबमरीन परमाणु हथियार ले जाने और लंबे समय तक समुद्र में तैनात रहने में सक्षम होती हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक केरल के नौसैनिक अड्डे पर आयोजित कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी मौजूद रहे। हालांकि इस संबंध में नौसेना या रक्षा मंत्रालय की ओर से फिलहाल आधिकारिक बयान नहीं आया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा- यह सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि शक्ति का प्रतीक है-अरिदमन। इसके बाद इसके नौसेना में शामिल होने की जानकारी सामने आई। सोशल मीडिया पर राजनाथ सिंह के पोस्ट की तस्वीर। न्यूक्लियर ट्रायड को मिली मजबूती INS अरिदमन के शामिल होने से भारत की न्यूक्लियर ट्रायड क्षमता और मजबूत हुई है। न्यूक्लियर ट्रायड का मतलब जमीन, समुद्र और हवा, तीनों माध्यमों से परमाणु हमला करने की क्षमता है। 2016 में INS अरिहंत के शामिल होते ही भारत उन देशों की लिस्ट में शामिल हो गया, जो जमीन, हवा और समुद्र तीनों तरफ से परमाणु हमला कर सकते हैं। इस लिस्ट में अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन भी शामिल हैं। INS अरिदमन के शामिल होने से हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सैन्य ताकत और बढ़ गई है। —————————————- ये खबर भी पढ़ें… INS तारागिरी नेवी में शामिल हुआ:यह ब्रह्मोस और एयर डिफेंस सिस्टम से लैस; राजनाथ बोले- सेना की ताकत बढ़ेगी INS तारागिरी विशाखापत्तनम में इंडियन नेवी में शामिल हुआ। डिफेंस मिनिस्टर राजनाथ सिंह इस सेरेमनी में मौजूद रहे। तारागिरी को मझगांव डॉक शिप बिल्डिंग लिमिटेड ने प्रोजेक्ट 17-ए के तहत तैयार किया है। पूरी खबर पढे़ं… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
6565 Posts Govt Jobs Notification Out

57 मिनट पहले कॉपी लिंक आज की सरकारी नौकरी में जानकारी रेलवे में 6565 भर्ती का जोन वाइज नोटिफिकेशन जारी होने की, NITCON दिल्ली में 100 वैकेंसी की। साथ ही इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्पोरेशन में 23 ओपनिंग्स की। इन जॉब्स के बारे में पूरी जानकारी के साथ आवेदन की प्रक्रिया यहां देखिए… 1. रेलवे में 6565 भर्ती का नोटिफिकेशन जारी, सबसे ज्यादा पद मध्य रेलवे में आरआरबी ने टेक्नीशियन के 6565 पदों पर भर्ती का जोन वाइज शॉर्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। इस भर्ती को रेल मंत्रालय की ओर से मंजूरी मिल गई है। आवेदन प्रक्रिया की शुरुआत होने के बाद उम्मीदवार अप्लाई कर सकेंगे। जोन वाइस वैकेंसी डिटेल्स : जोन का नाम पदों की संख्या मध्य रेलवे 870 पूर्व तटीय रेलवे 169 पूर्व मध्य रेलवे 186 पूर्व रेलवे 291 इंटीग्रल कोच फैक्ट्री 236 उत्तर मध्य रेलवे 268 पूर्वोत्तर रेलवे 169 पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे 701 उत्तर रेलवे 548 उत्तर पश्चिम रेलवे 199 रेल पहिया कारखाना 05 दक्षिण मध्य रेलवे 368 दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे 90 दक्षिण पूर्व रेलवे 576 दक्षिण रेलवे 785 दक्षिण पश्चिम रेलवे 240 पश्चिम मध्य रेलवे 231 पश्चिम रेलवे 544 कुल 6565 अप्रूव्ड वैकेंसी : पद का नाम वैकेंसी का नाम टेक्नीशियन ग्रेड 3 6242 टेक्नीशियन ग्रेड 1 323 कुल पदों की संख्या 6565 इस भर्ती का डिटेल नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया है। ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक ऑनलाइन आवेदन लिंक 2. NITCON दिल्ली में 100 पदों पर भर्ती, इंजीनियर करें अप्लाई NITCON लिमिटेड, दिल्ली में 100 पदों पर भर्ती निकली है। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट www.applicationportal.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। वैकेंसी डिटेल्स : पद का नाम पदों की संख्या जूनियर इंजीनियर (सिविल) 80 जूनियर इंजीनियर (इलेक्ट्रिकल या मैकेनिकल) 20 कुल पदों की संख्या 100 एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : कम से कम 60% अंकों के साथ सिविल, इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल में डिप्लोमा या बीई, बीटेक की डिग्री। डिप्लोमा होल्डर्स को 3 साल का एक्सपीरियंस होना चाहिए। वहीं डिग्री होल्डर्स के लिए 1 साल का एक्सपीरियंस जरूरी है। एज लिमिट : न्यूनतम : 18 साल अधिकतम : 30 साल एससी/एसटी/पीडब्ल्यूडी : 5 साल की छूट ओबीसी : 3 साल की छूट फीस : सामान्य, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस : 885 रुपए (GST सहित) एससी, एसटी, पीडब्ल्यूडी : 531 रुपए (GST सहित) सैलरी : 55,932 रुपए प्रतिमाह सिलेक्शन प्रोसेस : कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन पर्सनल इंटरव्यू एग्जाम पैटर्न : एग्जाम ड्यूरेशन 60 मिनट रीजनिंग 15 प्रश्न एप्टीट्यूड 15 प्रश्न अंग्रेजी 15 प्रश्न सामान्य जागरूकता 15 प्रश्न टेक्निकल डिसिप्लिन 40 प्रश्न ऐसे करें आवेदन : NITCON लिमिटेड की ऑफिशियल पोर्टल www.applicationportal.in पर जाएं। Vacancy Advertisement No 19/2025-26″ के तहत ‘Apply Online’ लिंक पर क्लिक करें। मांगी गई डिटेल्स दर्ज करें। जरूरी डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें। ऑनलाइन माध्यम से फीस का भुगतान करें। फॉर्म सब्मिट करें। इसका प्रिंटआउट निकाल कर रखें। ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक ऑनलाइन आवेदन लिंक ऑफिशियल वेबसाइट लिंक 3. इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्पोरेशन में 23 वैकेंसी, सैलरी 1 लाख से ज्यादा इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड में असिस्टेंट और असिस्टेंट मैनेजर के पदों पर भर्ती निकली है। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट irfc.co.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। वैकेंसी डिटेल्स : पद का नाम पदों की संख्या असिस्टेंट 16 असिस्टेंट मैनेजर 7 कुल पदों की संख्या 23 एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : असिस्टेंट : कॉमर्स में कम से कम 60% अंकों के साथ ग्रेजुएशन की डिग्री। आईसीएआई या आईसीएमएआई से इंटरमीडिएट परीक्षा पास होना चाहिए। असिस्टेंट मैनेजर (फाइनेंस) : कॉमर्स में ग्रेजुएशन के साथ सीए/सीएमए क्वालिफाइड या मान्यता प्राप्त संस्थान से फाइनेंस में दो वर्षीय नियमित एमबीए की डिग्री। एज लिमिट : न्यूनतम : 18 साल अधिकतम : 30 साल ओबीसी : 3 साल की छूट एससी/एसटी : 5 साल की छूट पीडब्ल्यूडी : 10 साल की छूट सैलरी : असिस्टेंट : 21,000-74,000 रुपए प्रतिमाह असिस्टेंट मैनेजर : 40,000-1,40,000 रुपए प्रतिमाह सिलेक्शन प्रोसेस : कंप्यूटर बेस्ड एग्जाम डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन इंटरव्यू फीस : सामान्य : 500 रुपए अन्य पिछड़ा वर्ग : 500 रुपए एससी, एसटी : नि:शुल्क ऐसे करें आवेदन : ऑफिशियल वेबसाइट irfc.co.in पर जाएं। होमपेज पर “करियर” सेक्शन पर क्लिक करें। “सहायक एवं सहायक प्रबंधक (वित्त) भर्ती 2026 (विज्ञापन 01/2026)” पर क्लिक करें । “रजिस्टर” पर क्लिक करें और अपनी डिटेल्स दर्ज करें। ओटीपी जनरेट करें और अपना मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी वेरिफाई करें। जरूरी डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें। फीस जमा करके फॉर्म सब्मिट करें। इसका प्रिंटआउट निकाल कर रखें। ऑफिशियल वेबसाइट लिंक ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक 4. हिमाचल प्रदेश में 331 भर्ती, लास्ट डेट 4 अप्रैल हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग (HPRCA) ने 331 पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है। इस भर्ती के लिए आवेदन की शुरुआत 10 मार्च 2026 को होगी। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट hprca.hp.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकेंगे। एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : पंचायत सचिव : किसी भी विषय में ग्रेजुएशन की डिग्री, टाइपिंग (English 30 WPM / Hindi 25 WPM) चिकित्सा/मनोचिकित्सीय सामाजिक कार्यकर्ता : संबंधित विषय में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ओटी असिस्टेंट : 12वीं (PCB) , OT कोर्स/बीएससी के साथ काउंसिल रजिस्ट्रेशन रेडियोग्राफर : 12वीं साइंस, रेडियोलॉजी में बीएससी, रजिस्ट्रेशन फार्मासिस्ट : 12वीं साइंस, फार्मेसी डिग्री/डिप्लोमा के साथ काउंसिल रजिस्ट्रेशन MLT/ऑडियोमेट्रिक टेक्नीशियन : संबंधित बीएससी डिग्री लिथोग्राफर : 12वीं, फाइन आर्ट्स में 3 साल का डिप्लोमा, 3 साल अनुभव सिलेक्शन प्रोसेस : रिटन एग्जाम टाइपिंग टेस्ट फीस : एग्जाम फीस : 100 रुपए प्रोसेसिंग फीस : 700 रुपए ORA फॉर्म में करेक्शन फीस : 100 रुपए सैलरी : पद के अनुसार, 12,500 – 34,800 रुपए प्रतिमाह एग्जाम पैटर्न : रिटन एग्जाम (CBT / स्क्रीनिंग टेस्ट) क्वेश्चन टाइप : ऑब्जेक्टिव कुल अंक : 120 ड्यूरेशन : डेढ़ घंटा हर प्रश्न पर मिलने वाला अंक : 1 टाइपिंग टेस्ट (केवल पंचायत सचिव के लिए) इंग्लिश: 30 शब्द प्रति मिनट हिंदी : 25 शब्द प्रति मिनट ऐसे करें आवेदन : ऑफिशियल वेबसाइट www.hprca.hp.gov.in पर जाएं। रिक्रूटमेंट सेक्शन पर जाएं और HPRCA पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करें। अपना यूजरनेम और पासवर्ड बनाने के लिए “साइन अप” पर क्लिक करें। वन-टाइम रजिस्ट्रेशन (OTR) पूरा करें। HPRCA पोर्टल hprca.hp.gov.in पर जाएं। “अप्लाई ऑनलाइन ” पर क्लिक करें। ड्रॉपडाउन लिस्ट से अपना पसंदीदा एग्जाम डिस्ट्रिक्ट चुनें। आपका एप्लिकेशन फॉर्म आपकी प्रोफाइल जानकारी का इस्तेमाल करके ऑटो-फिल हो जाएगा। अवेलेबल ऑनलाइन पेमेंट ऑप्शंस से पेमेंट करें। फॉर्म सब्मिट करें। इसका प्रिंटआउट निकाल कर रखें। ऑफिशियल वेबसाइट लिंक ऑफिशियल नोटिफिकेशन
केरल में करीबी मुकाबले आम क्यों हैं: पांच सीटें जो दिखाती हैं कि मुकाबला कितना कड़ा है | चुनाव समाचार

आखरी अपडेट:03 अप्रैल, 2026, 19:52 IST एलडीएफ की जीत, द्विध्रुवीय एलडीएफ यूडीएफ प्रतियोगिता, खंडित जनादेश, स्थानीय मुद्दे और गठबंधन अंकगणित के बावजूद केरल चुनावों में मामूली अंतर होता है, जो छोटे वोट स्विंग को निर्णायक बनाते हैं। केरल के तिरुवनंतपुरम में केरल स्थानीय निकाय चुनाव के पहले चरण के दौरान एक बुजुर्ग महिला ने अपना वोट डाला। (छवि: पीटीआई) केरल के चुनाव अक्सर व्यापक जनादेश से नहीं, बल्कि कम अंतर से तय होते हैं। 2021 के विधानसभा चुनावों ने इस पैटर्न की याद दिला दी, जिसमें वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) की निर्णायक समग्र जीत के बावजूद कई निर्वाचन क्षेत्रों में कड़ी प्रतिस्पर्धा देखी गई। मंजेश्वर को ही लें, जहां इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के एकेएम अशरफ ने महज 745 वोटों से जीत हासिल की, जो राज्य में सबसे कम अंतर से एक है। हाई-प्रोफाइल सीट त्रिशूर में सीपीआई के पी बालाचंद्रन ने 1,000 से कम वोटों से जीत हासिल की। राजधानी क्षेत्र में, वट्टियूरकावु में सीपीआई (एम) के वीके प्रशांत को लगभग 1,500 वोटों से जीत मिली, जबकि नेमोम, जिसे लंबे समय से एक प्रमुख युद्धक्षेत्र के रूप में देखा जाता था, सीपीआई (एम) के वी शिवनकुट्टी के पक्ष में लगभग 2,800 वोटों से तय हुआ। कुंडारा में भी करीबी अंत देखने को मिला, जहां कांग्रेस नेता पीसी विष्णुनाथ ने 2,000 वोटों के अंतर से जीत हासिल की। ये केरल की राजनीति की संरचनात्मक विशेषता को दर्शाते हैं। इसके केंद्र में राज्य की मजबूत द्विध्रुवीय व्यवस्था है, जिस पर एलडीएफ और यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) का वर्चस्व है। अधिकांश निर्वाचन क्षेत्रों में दो गठबंधनों के बीच सीधा मुकाबला होने के कारण, वोटों का विखंडन सीमित है, जिससे मार्जिन कम हो रहा है। यहां तक कि जब छोटे दल या भाजपा मैदान में उतरते हैं, तब भी मुख्य लड़ाई काफी हद तक दोतरफा ही रहती है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) के एक विश्लेषण के अनुसार, 2021 में केरल के 140 विधायकों में से 100 से अधिक विधायक 50 प्रतिशत से कम वोट शेयर के साथ चुने गए, जो खंडित जनादेश और करीबी मुकाबले की ओर इशारा करते हैं। चुनाव के अलग-अलग डेटा विश्लेषण से यह भी पता चलता है कि कई सीटों का फैसला कुछ सौ वोटों से हुआ, जिनमें से अधिकांश विजेता एक संकीर्ण जीत बैंड के भीतर रहे। ऐसे में वोटों का छोटा सा उतार-चढ़ाव भी निर्णायक साबित हो सकता है. एलडीएफ और यूडीएफ के बीच एक से दो प्रतिशत अंकों का मामूली बदलाव अक्सर एक सीट पलटने के लिए पर्याप्त होता है। गठबंधन का अंकगणित इस कारक को और तीखा करता है। केरल की सामाजिक संरचना – जिसमें कई धार्मिक और जाति समूह चुनावी महत्व रखते हैं – यह सुनिश्चित करती है कि कोई भी एक गुट हावी न हो। स्थानीय कारक एक और परत जोड़ते हैं। उन राज्यों के विपरीत जहां व्यापक आख्यान हावी हैं, केरल के मतदाता अक्सर निर्वाचन क्षेत्र-स्तरीय मुद्दों और उम्मीदवार प्रोफाइल पर दृढ़ता से प्रतिक्रिया देते हैं। उदाहरण के लिए, त्रिशूर जैसे निर्वाचन क्षेत्रों में प्रतियोगिताएं विकास के आख्यानों और शहरी मतदाताओं की प्राथमिकताओं पर टिकी हुई हैं। ऐसे जिलों में एर्नाकुलम की तरह, स्थानीय शासन और बुनियादी ढाँचे की चिंताएँ मतदान निर्णयों को आकार देती हैं, जिससे अक्सर मार्जिन कड़ा हो जाता है। परिणाम एक राजनीतिक परिदृश्य है जहां निर्वाचन क्षेत्र स्तर पर भूस्खलन अपेक्षाकृत दुर्लभ है, तब भी जब एक गठबंधन राज्यव्यापी जोरदार प्रदर्शन करता है। जगह : तिरुवनंतपुरम, भारत, भारत पहले प्रकाशित: 03 अप्रैल, 2026, 19:52 IST समाचार चुनाव केरल में करीबी मुकाबले आम क्यों हैं: पांच सीटें जो दिखाती हैं कि मुकाबला कितना कड़ा है अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)केरल चुनाव(टी)केरल विधानसभा चुनाव(टी)संकीर्ण जीत का अंतर(टी)लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट(टी)यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट(टी)द्विध्रुवीय राजनीतिक प्रणाली(टी) करीबी मुकाबले वाली सीटें(टी)वोट शेयर विश्लेषण
महिला मोर्चा प्रदेश महामंत्री सिवनी पहुंचीं:बोलीं- स्कूलों में बालिकाओं के शौचालय का मुद्दा प्रदेश में उठाएंगी; संगठन विस्तार पर जोर

भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा की प्रदेश महामंत्री ज्योति नरेश सिंह राजपूत ने सिवनी के दो दिवसीय दौरे पर रही। इस दौरान उन्होंने छपारा और जिला मुख्यालय में कार्यकर्ताओं की बैठकें लीं। बैठक में लखनादौन, घंसौर, केवलारी और कान्हीवाड़ा सहित जिले के विभिन्न मंडलों की महिला पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुईं। प्रदेश स्तर पर गूंजेगा स्कूलों में शौचालय का अभाव शाम को आयोजित प्रेसवार्ता में जिले के स्कूलों में बालिकाओं के लिए शौचालयों की कमी का मुद्दा प्रमुखता से उठा। प्रदेश महामंत्री ने इस विषय पर गंभीरता जताते हुए आश्वस्त किया कि वे इस मामले को प्रदेश स्तर पर उठाएंगी। उन्होंने कहा कि बेटियों की शिक्षा और सम्मान से जुड़े इस बुनियादी और जमीनी मुद्दे का समाधान करना संगठन की प्राथमिकता में शामिल है। निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी पर जोर बैठक के दौरान ज्योति नरेश सिंह राजपूत ने स्पष्ट किया कि महिला मोर्चा का लक्ष्य केवल सदस्य संख्या बढ़ाना नहीं है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया में बराबर का भागीदार बनाना ही संगठन का असली उद्देश्य है। उन्होंने बताया कि सिवनी जिले में अब तक लगभग 5 हजार महिलाएं पार्टी की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण कर चुकी हैं। सरकारी योजनाओं का लाभ उठाएं प्रदेश महामंत्री ने केंद्र और राज्य सरकार की प्रमुख योजनाओं जैसे उज्ज्वला, सुकन्या समृद्धि, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और लखपति दीदी का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर पात्र महिलाओं को इन योजनाओं का अधिकतम लाभ दिलाने में मदद करें। कार्यक्रम में पूर्व सांसद नीता पटेरिया और जिलाध्यक्ष मीना बिसेन सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी मौजूद रहीं।
‘अबर जीतबे बांग्ला’ बनाम ‘पलटानो डार्कर’: 2026 बंगाल चुनाव से पहले टीएमसी-बीजेपी का नारा युद्ध तेज हो गया है | चुनाव समाचार

आखरी अपडेट:03 अप्रैल, 2026, 19:32 IST पश्चिम बंगाल में 2026 के चुनावों से पहले टीएमसी और बीजेपी ने नए नारे लगाए, टीएमसी ने सांस्कृतिक पहचान और बाहरी आख्यान पर जोर दिया, बीजेपी ने शासन और बदलाव पर ध्यान केंद्रित करते हुए सुर बदले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कोलकाता के विवेकानन्द युबा भारती क्रीरंगन (वीवाईबीके) में 134वें डूरंड कप के उद्घाटन के दौरान फुटबॉल को किक मारती हुईं। (छवि: पीटीआई) पश्चिम बंगाल में राजनीतिक संदेश अक्सर घोषणापत्रों से भी तेज गति से प्रसारित होते हैं। जैसे-जैसे राज्य 2026 के विधानसभा चुनावों की ओर बढ़ रहा है, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच नारे की लड़ाई पहले से ही प्रतियोगिता को परिभाषित कर रही है। टीएमसी की नवीनतम पिच, “जोतोई कोरो हमला, अबर जितबे बांग्ला” (जितना चाहें उतना हमला करें, बंगाल फिर से जीतेगा), अवज्ञा और परिचितता दोनों रखती है। यह ताल “खेला होबे” की याद दिलाती है, जो 2021 के विधानसभा चुनावों का नारा-गान बन गया, जिसने पॉप-सांस्कृतिक यादों के साथ राजनीतिक संदेश को धुंधला कर दिया। देबांगशु भट्टाचार्य द्वारा रैप-जैसे प्रारूप में लिखा और प्रस्तुत किया गया वह प्रारंभिक अभियान, स्तरित सांस्कृतिक संदर्भों पर आधारित था। “बैरे थेके बोर्गी ऐश, नियोम कोरे प्रोति माशे” जैसी पंक्तियाँ बोर्गी शब्द का आह्वान करती हैं, जो बंगाल में ऐतिहासिक रूप से प्रचलित शब्द है। बोर्गी 18वीं सदी के मराठी घुड़सवार हमलावरों को संदर्भित करता है, जिन्होंने 1741 और 1751 के बीच बंगाल में बार-बार घुसपैठ की थी। यह शब्द फ़ारसी बारगीर से लिया गया है, जो राज्य द्वारा सुसज्जित सैनिकों के एक वर्ग को संदर्भित करता है। समय के साथ, बोर्गी ने लोककथाओं और लोरी के माध्यम से बंगाली सांस्कृतिक स्मृति में प्रवेश किया, विशेष रूप से “छेले घुमलो, पाडा जुरालो, बोर्गी एलो देशे”, जो अघोषित रूप से आने वाले बाहरी खतरे का प्रतीक है। वर्तमान राजनीतिक संदर्भ में, टीएमसी का संदेश एक समानांतर खींचता है, जो भाजपा को एक “बाहरी” ताकत के रूप में पेश करता है जो बंगाल के भाषाई और सांस्कृतिक लोकाचार के साथ संरेखित नहीं है। पार्टी सूत्र बताते हैं कि नया नारा टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी के दिमाग की उपज है। एक सोशल मीडिया पोस्ट में, पार्टी ने कहा कि नारा और उसके साथ जुड़ी दृश्य पहचान “भाजपा और केंद्र सरकार के खिलाफ आम लोगों की शिकायतों और नाराजगी” को दर्शाती है। टीएमसी के एक वरिष्ठ नेता ने संदेश को पार्टी द्वारा “शोषण, अपमान, धमकी और उत्पीड़न” के खिलाफ “सामूहिक क्रोध” को पकड़ने का प्रयास बताया, जबकि इसे भाजपा को अस्वीकार करने के लिए एक सहज सार्वजनिक कॉल कहा जाता है। यह टीएमसी की अभियान रणनीति में एक पैटर्न जारी है। 2021 में, पार्टी के नारे “बांग्ला निजेर मेयेकेई चाय” ने ममता बनर्जी को बंगाल की “अपनी बेटी” के रूप में पेश किया। 2024 के लोकसभा चुनावों में, “जोनोगोनर गोर्जोन, बांग्ला बीजेपीर बिसोर्जोन” ने इस प्रतियोगिता को भाजपा के खिलाफ लोगों के नेतृत्व वाले पुशबैक के रूप में तैयार किया। भाजपा, अपनी ओर से, स्वर और शब्दावली दोनों को पुन: व्यवस्थित करती दिख रही है। जबकि “जय श्री राम” पिछले चुनाव चक्रों में एक प्रमुख मंत्र के रूप में उभरा था, अब “जॉय मां काली” और “जॉय मां दुर्गा” की ओर एक स्पष्ट बदलाव देखा जा रहा है, जो बंगाल की धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना में गहराई से अंतर्निहित देवताओं का आह्वान करता है। इस सांस्कृतिक पुनर्मूल्यांकन के साथ-साथ, भाजपा ने शासन के मुद्दों पर अपना ध्यान केंद्रित रखा है। इसके नारे – “पलटानो डार्कर, चाय बीजेपी सरकार” (परिवर्तन की जरूरत है, हम बीजेपी सरकार चाहते हैं) और “बंचते चाय, बीजेपी ताई” (जीवित रहने के लिए, हमें बीजेपी की जरूरत है) – चुनाव को एक विकल्प के बजाय एक आवश्यकता के रूप में पेश करते हैं। पार्टी का अभियान भ्रष्टाचार के आरोपों, महिलाओं की सुरक्षा से संबंधित चिंताओं को प्रमुखता से जारी रखता है, जिसमें आरजी कर मामले जैसी घटनाओं का संदर्भ भी शामिल है, जिसके कारण राज्य भर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया, और घुसपैठ और अवैध आप्रवासन का मुद्दा, जिसके बारे में उसका दावा है कि यह बंगाल में जनसांख्यिकीय पैटर्न को बदल रहा है। मैसेजिंग में बहुत बड़ा विरोधाभास है। टीएमसी अपनी “अंदरूनी बनाम बाहरी” कथा को तेज करने के लिए बोर्गी जैसे ऐतिहासिक रूप से निहित रूपकों का उपयोग करते हुए पहचान, सांस्कृतिक स्मृति और प्रतिरोध पर झुक रही है। भाजपा, अपनी सांस्कृतिक अपील को स्थानीय बनाने का प्रयास करते हुए, अपने अभियान को शासन की कमियों और परिवर्तन के वादे पर केंद्रित कर रही है। बंगाल की चुनावी राजनीति में नारे सिर्फ प्रचार के औजार नहीं हैं. वे राजनीतिक आशुलिपि के रूप में कार्य करते हैं, जटिल आख्यानों को रैलियों, सोशल मीडिया और स्थानीय प्रवचन में प्रसारित पंक्तियों में संपीड़ित करते हैं। चुनाव होने में कई महीने बाकी हैं, ऐसे में संदेश की लड़ाई से पता चलता है कि 2026 का मुकाबला चुनावी अंकगणित के साथ-साथ प्रतिस्पर्धी आख्यानों द्वारा भी तय किया जाएगा। पहले प्रकाशित: 03 अप्रैल, 2026, 19:32 IST समाचार चुनाव ‘अबर जीतबे बांग्ला’ बनाम ‘पलटानो डार्कर’: 2026 बंगाल चुनाव से पहले टीएमसी-बीजेपी के बीच नारा युद्ध तेज अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल चुनाव के नारे(टी)टीएमसी अभियान रणनीति(टी)बीजेपी संदेश बंगाल(टी)2026 पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)अंदरूनी बाहरी कथा(टी)राजनीतिक नारे बंगाल(टी)सांस्कृतिक राजनीति पश्चिम बंगाल(टी)ममता बनर्जी का नारा
Naagin 7 TRP Fall | Ekta Kapoor Blames AI, Budget; Show May End

2 घंटे पहले कॉपी लिंक एकता कपूर का सुपरनैचुरल शो ‘नागिन 7’ शुरू होने के महज 3 महीने बाद ही बंद हो सकता है। भारी टीआरपी साथ शुरू हुए इस शो की रेटिंग अब लगातार गिर रही है। इसके पीछे कमजोर कहानी और विजुअल इफेक्ट्स में एआई (AI) के ज्यादा इस्तेमाल को मुख्य वजह माना जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह शो जल्द ही बंद हो सकता है। 25 दिसंबर को हुआ था ग्रैंड प्रीमियर मेकर्स ने 25 दिसंबर 2025 को नागिन 7 का प्रीमियर किया था। शुरुआत में शो को दर्शकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला और पहले ही एपिसोड ने टीआरपी के पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। शुरुआती दो महीनों तक शो ने अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन इसके बाद कहानी और प्रेजेंटेशन को लेकर दर्शकों की दिलचस्पी कम होने लगी। AI के इस्तेमाल और बजट पर हुई ट्रोलिंग शो में वीएफएक्स (VFX) की जगह एआई तकनीक के इस्तेमाल ने मेकर्स की मुश्किलें बढ़ा दीं। एकता कपूर ने बजट बचाने के लिए एआई के जरिए विजुअल्स तैयार करवाए, जिसे सोशल मीडिया पर ‘सस्ता और खराब’ बताकर ट्रोल किया गया। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए एकता ने कहा था कि उनके पास शो के लिए ज्यादा बजट नहीं है, इसलिए वे इस तकनीक का सहारा ले रही हैं। हालांकि, आज की समझदार ऑडियंस और ‘जेन-जी’ (Gen Z) को यह प्रयोग रास नहीं आया। नागिन 7 शो की लीड एक्ट्रेस प्रियंका चाहर। प्रियंका चौधरी की मौनी रॉय से हुई तुलना शो की लीड एक्ट्रेस प्रियंका चाहर चौधरी की परफॉर्मेंस भी फैंस की कसौटी पर खरी नहीं उतर पाई। दर्शकों ने सोशल मीडिया पर उनकी तुलना मौनी रॉय और अदा खान जैसे ‘नागिन’ के पुराने चेहरों से शुरू कर दी। फैंस का मानना है कि मौनी रॉय का इस शो की मेन रोल था और प्रियंका वह जादू पैदा नहीं कर सकीं। इसी नाराजगी का असर टीआरपी पर दिखा और शो टॉप 10 की लिस्ट से बाहर हो गया। एक्ट्रेस मौनी रॉय। क्या सच में बंद होगा शो? मीडिया रेपोर्ट्स के मुताबिक गिरती रेटिंग के चलते चैनल और मेकर्स इसे बंद करने का मन बना चुके हैं। हालांकि, अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। अगर आने वाले दिनों में एकता कपूर कहानी में कोई बड़ा बदलाव करती हैं, तो शायद शो को विस्तार मिल जाए। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔









