‘पिक्चर अभी बाकी है’: AAP के इस दावे के बाद राघव चड्ढा ने पलटवार किया कि उन्होंने पंजाब के मुद्दे नहीं उठाए | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:05 अप्रैल, 2026, 12:02 IST राघव चड्ढा ने AAP नेताओं के इस दावे को खारिज कर दिया कि उन्होंने संसद में पंजाब की अनदेखी की, एमएसपी, ननकाना साहिब कॉरिडोर, भूजल पर काम का हवाला दिया। आम आदमी पार्टी सांसद राघव चड्ढा (फाइल फोटो) आम आदमी पार्टी (आप) के भीतर बढ़ते तनाव के बीच, राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने रविवार को अपनी ही पार्टी की आलोचना का जवाब दिया, जिसने उन पर संसद में पंजाब की चिंताओं की उपेक्षा करने का आरोप लगाया था। एक्स पर एक पोस्ट में, चड्ढा ने आरोपों को खारिज कर दिया, राज्य के साथ अपने गहरे संबंध पर जोर दिया और एक सांसद के रूप में उन्होंने जो मुद्दे उठाए हैं, उन्हें रेखांकित किया। इनमें ननकाना साहिब तक गलियारे की मांग, किसानों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के लिए कानूनी समर्थन, राज्य में घटते भूजल पर चिंता और भगत सिंह को भारत रत्न से सम्मानित करने की मांग शामिल है। चड्ढा ने पंजाब के मुद्दों पर अपने रिकॉर्ड का बचाव किया AAP में मेरे सहयोगियों के लिए जिन्हें यह कहते हुए वीडियो जारी करने के लिए मजबूर किया गया कि “राघव चड्ढा संसद में पंजाब के मुद्दों को उठाने में विफल रहे”, यहां एक छोटा ट्रेलर है… पिक्चर अभी बाकी है। पंजाब मेरे लिए बात करने का मुद्दा नहीं है। यह मेरा घर है, मेरा कर्तव्य है, मेरी मिट्टी है, मेरी आत्मा है❤️ pic.twitter.com/qdTMHK4sqU – राघव चड्ढा (@raghav_chadha) 5 अप्रैल 2026 उन्होंने ट्वीट किया, “आप में मेरे सहयोगियों के लिए जिन्हें यह कहते हुए वीडियो जारी करने के लिए मजबूर किया गया कि “राघव चड्ढा पंजाब के मुद्दों को संसद में उठाने में विफल रहे”, यहां एक छोटा ट्रेलर है… पिक्चर अभी बाकी है। पंजाब मेरे लिए बात करने का मुद्दा नहीं है। यह मेरा घर है, मेरा कर्तव्य है, मेरी मिट्टी है, मेरी आत्मा है।” दरार गहरी, AAP ने चड्ढा पर लगाया पंजाब के मुद्दों को नजरअंदाज करने का आरोप सांसद की यह प्रतिक्रिया पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा, राज्य इकाई के प्रमुख अमन अरोड़ा और नेता कुलदीप सिंह धालीवाल द्वारा शनिवार को जारी एक संयुक्त बयान में, गंभीर मुद्दों पर चड्ढा की चुप्पी पर असंतोष व्यक्त करने के बाद आई है। चीमा ने कहा कि पंजाब के विधायकों द्वारा चुने जाने के बावजूद चड्ढा राज्य को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण मामलों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने में विफल रहे। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, मंत्री ने कहा कि सांसद ने राज्य से संबंधित “एक भी संवेदनशील मुद्दा” नहीं उठाया। इस सप्ताह की शुरुआत में चड्ढा को राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से हटाए जाने के बाद विवाद और बढ़ गया। इस कदम के बाद उन्होंने नेतृत्व पर उनकी आवाज दबाने का प्रयास करने का आरोप लगाया। जवाब में, पार्टी के कई नेताओं ने उनकी तीखी आलोचना की और आरोप लगाया कि उन्होंने “समझौता” कर लिया है और वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से डरते हैं। इन दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए, चड्ढा ने आरोपों को उन्हें निशाना बनाने के जानबूझकर किए गए प्रयास का हिस्सा बताया और उन आरोपों को खारिज कर दिया कि उन्होंने संसदीय विरोध प्रदर्शनों से परहेज किया या मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का समर्थन करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, “कल से मेरे खिलाफ एक स्क्रिप्टेड अभियान चल रहा है। वही भाषा, वही शब्द, वही आरोप। यह कोई संयोग नहीं है, बल्कि एक समन्वित हमला है। पहले तो मैंने सोचा कि मुझे जवाब नहीं देना चाहिए। फिर मैंने सोचा कि अगर एक झूठ को 100 बार दोहराया जाए, तो कुछ लोग उस पर विश्वास कर सकते हैं। इसलिए, मैंने जवाब देने का फैसला किया।” पहले प्रकाशित: 05 अप्रैल, 2026, 12:02 IST समाचार राजनीति ‘पिक्चर अभी बाकी है’: AAP के इस दावे के बाद राघव चड्ढा ने पलटवार किया कि उन्होंने पंजाब के मुद्दे नहीं उठाए अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)राघव चड्ढा पंजाब मुद्दे(टी)आम आदमी पार्टी में दरार(टी)राघव चड्ढा आलोचना(टी)आप आंतरिक संघर्ष(टी)पंजाब राजनीतिक विवाद(टी)राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा(टी)हरपाल सिंह चीमा का बयान(टी)भगत सिंह को भारत रत्न
विदिशा के हैदरगढ़ में ओलावृष्टि-आंधी:खड़ी फसलें बिछीं, खलिहानों में रखी उपज को भी नुकसान

विदिशा जिले की ग्यारसपुर तहसील के हैदरगढ़ और आसपास के ग्रामीण इलाकों में शनिवार रात मौसम अचानक बदल गया। रात करीब 11 बजे तेज आंधी-तूफान के साथ बेर के आकार के ओले गिरे, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ। खेतों में तैयार खड़ी फसलें बुरी तरह प्रभावित हुईं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, तेज हवा और ओलावृष्टि से गेहूं और चने की खड़ी फसलें जमीन पर बिछ गईं। जिन किसानों की फसलें कटकर खलिहानों में रखी थीं, उन्हें भी भारी नुकसान की आशंका है। बारिश और ओलों के कारण कटी हुई फसलें भीग गईं, जिससे उनकी गुणवत्ता खराब होने का खतरा बढ़ गया है। इस प्राकृतिक आपदा का असर केवल खेतों तक ही सीमित नहीं रहा। गांवों में तेज हवाओं ने रिहायशी इलाकों को भी नुकसान पहुंचाया। कई कच्चे मकानों के कबेलू उड़ गए, जबकि टीन और फाइबर की चादरें हवा में उखड़कर दूर जा गिरीं। आंधी के कारण घरों की छतों पर रखा सामान भी बिखर गया। ग्रामीणों के अनुसार, हैदरगढ़ क्षेत्र के लगभग 4 से 5 गांव इस आपदा से प्रभावित हुए हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द नुकसान का सर्वे कराने और प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग की है।
मुफ्त में एचपीवी वैक्सीनेशन से होगी बेटियों की रक्षा, सर्वाइकल कैंसर से होगा बचाव, अंबाला में शुरू हुआ अभियान

Last Updated:April 05, 2026, 11:49 IST महिलाओं में तेजी से बढ़ रहे सर्वाइकल कैंसर के खतरे को खत्म करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग ने जिलेभर में ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) संक्रमण के खिलाफ टीकाकरण अभियान को गति दे दी है. इस अभियान के तहत वे सभी किशोरियाँ पात्र हैं जिन्होंने 14 वर्ष की आयु पूर्ण कर ली है और 15 वर्ष से कम हैं. क्योंकि भारत में महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर दूसरा सबसे आम कैंसर है, जिसका मुख्य कारण HPV संक्रमण है. ख़बरें फटाफट अंबालाः बेटियों की मुस्कान को सुरक्षित रखने और उनके भविष्य को बीमारी के साये से बचाने के लिए अम्बाला में एक संवेदनशील और सराहनीय पहल शुरू हुई है. दरअसल महिलाओं में तेजी से बढ़ रहे सर्वाइकल कैंसर के खतरे को खत्म करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग ने जिलेभर में ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) संक्रमण के खिलाफ टीकाकरण अभियान को गति दे दी है. बता दें कि इस अभियान के तहत वे सभी किशोरियाँ पात्र हैं जिन्होंने 14 वर्ष की आयु पूर्ण कर ली है और 15 वर्ष से कम हैं. क्योंकि भारत में महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर दूसरा सबसे आम कैंसर है, जिसका मुख्य कारण HPV संक्रमण है. ऐसे में मर्क एंड कंपनी द्वारा निर्मित गार्डासिल 4 टीका इस संक्रमण से बचाव का सबसे प्रभावी और सुरक्षित उपाय है, जिसे भारत सरकार ने कड़े वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद मंजूरी दी है. सर्वाइकल कैंसर के रोकथाम में कारगर साबित होगा टीकाकरण वहीं लोकल 18 को ज्यादा जानकारी देते हुए अंबाला सिविल सर्जन डॉ. रेनू बेरी पजनी ने बताया कि भारत में सर्वाइकल कैंसर के मामले महिलाओं में काफी ज्यादा बढ़ रहे हैं, जिसकी रोकथाम को लेकर भारत सरकार ने प्रदेश भर के जिलों में ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) टीकाकरण का अभियान तेजी चला दिया है. उन्होंने बताया कि भारत में महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर सबसे आम कैंसर बन चुका है, जिसका मुख्य कारण HPV संक्रमण है. ऐसे में टीकाकरण इस संक्रमण से बचाव का सबसे प्रभावी और सुरक्षित उपाय है, जिसे भारत सरकार ने कड़े वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद मंजूरी दी है. बताया कि यह टीकाकरण अंबाला जिले के नागरिक अस्पताल और सीएचसी, पीएचसी सभी जगह पर उपलब्ध हैं. वैसे निजी अस्पतालों में यह टीका लगभग 12000 रूपये में लगता है जोकि काफी महंगा होता है. लेकिन सरकारी कार्यक्रम के तहत यह सभी पात्र किशोरियों को निःशुल्क लगाया जा रहा है. अगले तीन महीनों तक चलने वाले इस अभियान में प्रत्येक पात्र किशोरी को टीके की केवल एक ही खुराक दी जाएगी. यह एक टीका जहां सर्वाइकल कैंसर से किशोरियों की रक्षा करेगा तो वही इसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं है. 31 मार्च तक अंबाला जिले में 139 किशोरियों को यह वैक्सीन लगाई जा चुकी है, जोकि काफी ज्यादा पहले से बेहतर महसूस कर रही है. सहमति और डिजिटल प्रमाण पत्र वहीं मिली जानकारी के अनुसार टीकाकरण के लिए OTP आधारित सहमति या अभिभावकों की लिखित सहमति अनिवार्य है. टीकाकरण के बाद लाभार्थी की जानकारी ऑनलाइन U-WIN पोर्टल पर दर्ज की जाएगी और पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एक लिंक भेजा जाएगा, जिससे डिजिटल प्रमाण पत्र डाउनलोड किया जा सकेगा. About the Author Rajneesh Kumar Yadav मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें First Published : April 05, 2026, 11:49 IST
पत्नी बोली- 21 साल बड़ा पति, साथ नहीं रहूंगी:बॉयफ्रेंड के साथ रहने की जताई इच्छा; हाईकोर्ट ने दी परमिशन, शॉर्या दीदी भी नियुक्त की

ग्वालियर हाईकोर्ट में एक अनोखा मामला सामने आया है। कोर्ट में 19 साल की युवती ने अपने से 21 साल बड़े पति के साथ वैवाहिक जीवन में सामंजस्य नहीं बन पाने की बात कहते हुए बॉयफ्रेंड के साथ रहने की इच्छा जताई। युवती की इच्छा पर कोर्ट ने उसे अपने प्रेमी के साथ जाने की अनुमति दी। साथ ही 6 महीने की निगरानी के लिए ‘शौर्या दीदी’ की नियुक्ति भी की गई। मामला हैबियस कॉर्पस से जुड़ी याचिका का है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र यादव की युगलपीठ ने यह फैसला सुनाया। पति ने लगाई थी याचिका युवती के पति अवधेश की ओर से यह याचिका अधिवक्ता सुरेश पाल सिंह गुर्जर ने दायर की थी। आरोप था कि उसकी पत्नी को अनुज कुमार ने अवैध रूप से अपने पास रखा है। युवती को पुलिस ने वन स्टॉप सेंटर में रखा था। सुनवाई के दौरान शुक्रवार को युवती को वन स्टॉप सेंटर से सब-इंस्पेक्टर जितेंद्र सिंह सिकरवार, हेड कांस्टेबल अखिलेश सेंथिया और लेडी कांस्टेबल भावना द्वारा कोर्ट में पेश किया गया। युवती के माता-पिता, पति अवधेश और प्रेमी अनुज भी कोर्ट में मौजूद रहे। सभी की मौजूदगी में मामले की सुनवाई की गई और न्यायाधीश ने युवती की इच्छा को प्राथमिकता देते हुए फैसला सुनाया। युवती बोली- मेरी उम्र 19 साल, पति 21 साल बड़ा सुनवाई के दौरान कोर्ट ने युवती से उसकी इच्छा पूछी। युवती ने साफ कहा कि वह बालिग है, किसी अवैध बंधन में नहीं है और अपनी मर्जी से रह रही है। उसने पति और अपने माता-पिता, दोनों के साथ रहने से इनकार कर दिया। युवती ने बताया कि उसकी उम्र 19 साल है, जबकि पति की उम्र 40 साल है। इस 21 साल के अंतर के कारण वैवाहिक जीवन में सामंजस्य नहीं बन पाया और उसके साथ दुर्व्यवहार भी हुआ। कोर्ट के निर्देश पर शासकीय अधिवक्ता अंजलि ज्ञानानी ने युवती की काउंसलिंग की, लेकिन काउंसलिंग के बाद भी उसने अपने बॉयफ्रेंड अनुज के साथ रहने की इच्छा दोहराई। अनुज ने भी कोर्ट को आश्वासन दिया कि वह युवती की पूरी देखभाल करेगा और किसी तरह की प्रताड़ना नहीं देगा। इन परिस्थितियों को देखते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि याचिका का उद्देश्य समाप्त हो चुका है। बॉयफ्रेंड के साथ जाने की अनुमति कोर्ट ने युवती को अनुज के साथ जाने की अनुमति देते हुए अंजलि ज्ञानानी और लेडी कांस्टेबल भावना को अगले 6 महीने के लिए ‘शौर्या दीदी’ नियुक्त किया, जो युवती के संपर्क में रहकर उसकी सुरक्षा, भलाई और मार्गदर्शन सुनिश्चित करेंगी। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि युवती को वन स्टॉप सेंटर, कंपू (ग्वालियर) से आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद मुक्त किया जाए। इसी के साथ याचिका का निस्तारण कर दिया गया।
ईरान के पहाड़ों में छिपा था अमेरिकी पायलट:24 घंटे में दुश्मन के बीच से बचाया, ट्रम्प बोले- यह इतिहास का सबसे साहसी रेस्क्यू ऑपरेशन

अमेरिका के एक F-15 फाइटर जेट को ईरान के ऊपर मार गिराए जाने के बाद उसके दोनों क्रू मेंबर्स को अमेरिकी स्पेशल फोर्स ने बचा लिया है। शनिवार को स्पेशल कमांडो यूनिट ने दर्जनों लड़ाकू विमानों के साथ ईरान में ऑपरेशन चलाया। अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरानी फोर्स को उस इलाके तक पहुंचने से रोकने के लिए हमले भी किए। इस दौरान भारी गोलीबारी हुई, लेकिन अंत में अमेरिकी टीम अधिकारी को सुरक्षित निकालने में सफल रही और सभी सैनिक ईरान से बाहर आ गए। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने इसे अमेरिकी इतिहास का सबसे साहसी सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन करार दिया है। पैराशूट से उतरने के बाद घायल हुआ था अफसर अमेरिकी वेबसाइट एक्सियोस ने 3 अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि ईरान ने शुक्रवार को F-15 विमान गिरा दिया था। उसमें दो लोग थे। एक पायलट और एक वेपन सिस्टम ऑफिसर (जो हथियारों को ऑपरेट करता है)। पायलट को कुछ घंटों के भीतर ही बचा लिया गया था। लेकिन दूसरा क्रू मेंबर, जो वेपन सिस्टम ऑफिसर था, पैराशूट से उतरने के बाद घायल हो गया। चोट लगने के बावजूद वह चलने की हालत में था। इसके बाद वह ईरान के पहाड़ी इलाके में छिप गया और वहां एक दिन से ज्यादा समय तक पकड़ से बचता रहा। उसने अपनी SERE ट्रेनिंग (जिंदा रहना, बचना, विरोध करना और निकलना) का इस्तेमाल करते हुए कोहगिलुयेह और बोयर-अहमद प्रांत के कठिन पहाड़ी इलाके में खुद को छिपाए रखा। CIA ने अफवाह फैलाकर ईरान को भटकाया अमेरिका और ईरान दोनों उसे ढूंढ रहे थे। ईरान की IRGC (रिवोल्यूशनरी गार्ड) भी उसे पकड़ने के लिए वहां पहुंच गई थी। दूसरे अधिकारी को ढूंढना बहुत मुश्किल था। इसके लिए CIA ने एक चाल चली। उन्होंने ईरान के अंदर गलत जानकारी फैलाई कि अमेरिकी सेना उसे पहले ही ढूंढ चुकी है और उसे निकालने की तैयारी कर रही है। इससे ईरान की खोज की दिशा भटक गई। इसी दौरान CIA ने अपनी खास तकनीक का इस्तेमाल करके उस अधिकारी की सही लोकेशन पता कर ली। यह लोकेशन पेंटागन, अमेरिकी सेना और व्हाइट हाउस को दी गई। इसके बाद राष्ट्रपति ट्रम्प ने तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन का आदेश दिया। अफसर के पास सिर्फ 1 पिस्तौल थी शनिवार को स्पेशल कमांडो यूनिट ने भारी हवाई सुरक्षा के साथ ऑपरेशन चलाया। अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरानी फोर्स को उस इलाके तक पहुंचने से रोकने के लिए हमले भी किए। घायल अफसर के पास सिर्फ एक पिस्तौल थी। जब अमेरिकी फोर्स उस एयरमैन तक पहुंचने लगी, तब गोलीबारी भी हुई। लेकिन अंत में अमेरिकी टीम अधिकारी को सुरक्षित निकालने में सफल रही और सभी सैनिक ईरान से बाहर आ गए। अमेरिका के पूर्व सेना अधिकारी मेजर जनरल (रिटायर्ड) मार्क मैककार्ली ने CNN से कहा कि जिस इलाके में यह घटना हुई, वह पहाड़ी था और पूरी तरह सुनसान था। इसके साथ ही ईरान की तरफ से उस सैनिक को पकड़ने पर इनाम भी घोषित किया गया था। इन सभी हालात को देखते हुए यह मिशन बेहद खतरनाक था। मैककार्ली ने यह भी बताया कि उस सैनिक की लोकेशन एक इमरजेंसी बीकन (सिग्नल देने वाला उपकरण) के जरिए पता चली होगी। जब फाइटर जेट गिरता है, तो यह बीकन लगातार कमांड सेंटर को लोकेशन भेजता रहता है। पहली बार दुश्मन ने गिराया अमेरिकी फाइटर जेट इस रेस्क्यू मिशन की शुरुआत शुक्रवार को हुई, जब F-15E स्ट्राइक ईगल विमान को ईरान की सेना ने मार गिराया। यह इस एक महीने से चल रही जंग में पहला मौका था, जब किसी अमेरिकी फाइटर जेट को दुश्मन की फायरिंग से गिराया गया। F-15E विमान में दो लोग थे, जो इजेक्ट होकर बाहर निकले। पायलट को जल्दी बचा लिया गया, लेकिन वेपन्स सिस्टम ऑफिसर का पता नहीं चल पाया, जिससे तुरंत बड़े स्तर पर खोज अभियान शुरू किया गया। हालांकि, मिशन के दौरान एक बड़ी रुकावट भी आई। दो ट्रांसपोर्ट विमान, जो कमांडो और एयरमैन को निकालने वाले थे, ईरान के एक दूरदराज बेस पर खराब हो गए। इसके बाद तीन नए विमान भेजे गए। अमेरिकी फोर्स ने उन खराब विमानों को उड़ा दिया, ताकि वे ईरान के हाथ न लगें। ट्रम्प बोले- पहली बार एक साथ दो सफल रेस्क्यू ऑपरेशन हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि इस सैनिक को बचाने के लिए अमेरिकी सेना ने दर्जनों विमान भेजे, जिनमें दुनिया के सबसे खतरनाक हथियार लगे थे। उन्होंने बताया कि सैनिक घायल जरूर हुआ है, लेकिन वह ठीक हो जाएगा। ट्रम्प ने यह भी कहा कि यह ऑपरेशन एक और पायलट के सफल रेस्क्यू के बाद हुआ, जिसे एक दिन पहले बचाया गया था। उस समय इसकी जानकारी इसलिए नहीं दी गई थी, ताकि दूसरे ऑपरेशन पर खतरा न आए। ट्रम्प के मुताबिक, सैन्य इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि दुश्मन के इलाके के अंदर, दो अमेरिकी पायलटों को अलग-अलग ऑपरेशन में सुरक्षित निकाला गया है। उन्होंने कहा कि यह साबित करता है कि अमेरिका का ईरान के आसमान पर पूरा दबदबा है, हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि F-15 जेट को ईरान ने कैसे मार गिराया। ट्रम्प ने इस ऑपरेशन को पूरे अमेरिका के लिए गर्व का पल बताया और कहा कि देश को इस पर एकजुट होना चाहिए।
ईरान के पहाड़ों में छिपा था अमेरिकी पायलट:24 घंटे में दुश्मन के बीच से बचाया, ट्रम्प बोले- यह इतिहास का सबसे साहसिक रेस्क्यू ऑपरेशन

अमेरिका के एक F-15 फाइटर जेट को ईरान के ऊपर मार गिराए जाने के बाद उसके दोनों क्रू मेंबर्स को अमेरिकी स्पेशल फोर्स ने बचा लिया है। शनिवार को स्पेशल कमांडो यूनिट ने दर्जनों लड़ाकू विमानों के साथ ईरान में ऑपरेशन चलाया। अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरानी फोर्स को उस इलाके तक पहुंचने से रोकने के लिए हमले भी किए। इस दौरान भारी गोलीबारी हुई, लेकिन अंत में अमेरिकी टीम अधिकारी को सुरक्षित निकालने में सफल रही और सभी सैनिक ईरान से बाहर आ गए। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने इसे अमेरिकी इतिहास का सबसे साहसी सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन करार दिया है। पैराशूट से उतरने के बाद घायल हुआ था अफसर अमेरिकी वेबसाइट एक्सियोस ने 3 अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि ईरान ने शुक्रवार को F-15 विमान गिरा दिया था। उसमें दो लोग थे। एक पायलट और एक वेपन सिस्टम ऑफिसर (जो हथियारों को ऑपरेट करता है)। पायलट को कुछ घंटों के भीतर ही बचा लिया गया था। लेकिन दूसरा क्रू मेंबर, जो वेपन सिस्टम ऑफिसर था, पैराशूट से उतरने के बाद घायल हो गया। चोट लगने के बावजूद वह चलने की हालत में था। इसके बाद वह ईरान के पहाड़ी इलाके में छिप गया और वहां एक दिन से ज्यादा समय तक पकड़ से बचता रहा। उसने अपनी SERE ट्रेनिंग (जिंदा रहना, बचना, विरोध करना और निकलना) का इस्तेमाल करते हुए कोहगिलुयेह और बोयर-अहमद प्रांत के कठिन पहाड़ी इलाके में खुद को छिपाए रखा। CIA ने अफवाह फैलाकर ईरान को भटकाया अमेरिका और ईरान दोनों उसे ढूंढ रहे थे। ईरान की IRGC (रेवोल्यूशनरी गार्ड) भी उसे पकड़ने के लिए वहां पहुंच गई थी। दूसरे अधिकारी को ढूंढना बहुत मुश्किल था। इसके लिए CIA ने एक चाल चली। उन्होंने ईरान के अंदर गलत जानकारी फैलाई कि अमेरिकी सेना उसे पहले ही ढूंढ चुकी है और उसे निकालने की तैयारी कर रही है। इससे ईरान की खोज की दिशा भटक गई। इसी दौरान CIA ने अपनी खास तकनीक का इस्तेमाल करके उस अधिकारी की सही लोकेशन पता कर ली। यह लोकेशन पेंटागन, अमेरिकी सेना और व्हाइट हाउस को दी गई। इसके बाद राष्ट्रपति ट्रम्प ने तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन का आदेश दिया। अफसर के पास सिर्फ 1 पिस्तौल थी शनिवार को स्पेशल कमांडो यूनिट ने भारी हवाई सुरक्षा के साथ ऑपरेशन चलाया। अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरानी फोर्स को उस इलाके तक पहुंचने से रोकने के लिए हमले भी किए। घायल अफसर के पास सिर्फ एक पिस्तौल थी। जब अमेरिकी फोर्स उस एयरमैन तक पहुंचने लगी, तब गोलीबारी भी हुई। लेकिन अंत में अमेरिकी टीम अधिकारी को सुरक्षित निकालने में सफल रही और सभी सैनिक ईरान से बाहर आ गए। अमेरिका के पूर्व सेना अधिकारी मेजर जनरल (रिटायर्ड) मार्क मैक्कार्ली ने CNN से कहा कि जिस इलाके में यह घटना हुई, वह पहाड़ी था और पूरी तरह सुनसान था। इसके साथ ही ईरान की तरफ से उस सैनिक को पकड़ने पर इनाम भी घोषित किया गया था। इन सभी हालात को देखते हुए यह मिशन बेहद खतरनाक था। मैक्कार्ली ने यह भी बताया कि उस सैनिक की लोकेशन एक इमरजेंसी बीकन (सिग्नल देने वाला उपकरण) के जरिए पता चली होगी। जब फाइटर जेट गिरता है, तो यह बीकन लगातार कमांड सेंटर को लोकेशन भेजता रहता है। पहली बार दुश्मन ने गिराया अमेरिकी फाइटर जेट इस रेस्क्यू मिशन की शुरुआत शुक्रवार को हुई, जब F-15E स्ट्राइक ईगल विमान को ईरान की सेना ने मार गिराया। यह इस एक महीने से चल रही जंग में पहला मौका था, जब किसी अमेरिकी फाइटर जेट को दुश्मन की फायरिंग से गिराया गया। F-15E विमान में दो लोग थे, जो इजेक्ट होकर बाहर निकले। पायलट को जल्दी बचा लिया गया, लेकिन वेपन्स सिस्टम ऑफिसर का पता नहीं चल पाया, जिससे तुरंत बड़े स्तर पर खोज अभियान शुरू किया गया। अमेरिका ने निकलने से पहले अपने दो विमान जलाए द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान से एक बचाए गए अमेरिकी एयरमैन और कमांडो को निकालने वाले दो ट्रांसपोर्ट विमान वहीं फंस गए थे। इसके बाद अमेरिका को तीन नए विमान भेजने पड़े, ताकि एयरमैन और सैनिकों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। रिपोर्ट के अनुसार, बाद में अमेरिकी सेना ने उन फंसे हुए ट्रांसपोर्ट विमानों को उड़ा दिया, ताकि वे ईरान के हाथ न लगें। ईरान के अंदर से आई तस्वीरों से संकेत मिलता है कि ये विमान एक अस्थायी एयरस्ट्रिप पर फंस गए थे, जिसे अमेरिकी सेना ने देश के एक दूरदराज इलाके में बनाया था। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, इस पूरे रेस्क्यू मिशन में सैकड़ों स्पेशल ऑपरेशंस सैनिक शामिल थे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बचाए गए वेपन्स ऑफिसर को रेस्क्यू के बाद इलाज के लिए कुवैत ले जाया गया। ट्रम्प बोले- पहली बार एक साथ दो सफल रेस्क्यू ऑपरेशन हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि इस सैनिक को बचाने के लिए अमेरिकी सेना ने दर्जनों विमान भेजे, जिनमें दुनिया के सबसे खतरनाक हथियार लगे थे। उन्होंने बताया कि सैनिक घायल जरूर हुआ है, लेकिन वह ठीक हो जाएगा। ट्रम्प ने यह भी कहा कि यह ऑपरेशन एक और पायलट के सफल रेस्क्यू के बाद हुआ, जिसे एक दिन पहले बचाया गया था। उस समय इसकी जानकारी इसलिए नहीं दी गई थी, ताकि दूसरे ऑपरेशन पर खतरा न आए। ट्रम्प के मुताबिक, सैन्य इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि दुश्मन के इलाके के अंदर, दो अमेरिकी पायलटों को अलग-अलग ऑपरेशन में सुरक्षित निकाला गया है। उन्होंने कहा कि यह साबित करता है कि अमेरिका का ईरान के आसमान पर पूरा दबदबा है, हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि F-15 जेट को ईरान ने कैसे मार गिराया। ट्रम्प ने इस ऑपरेशन को पूरे अमेरिका के लिए गर्व का पल बताया और कहा कि देश को इस पर एकजुट होना चाहिए। —————————- ये खबर भी पढ़ें… 23 साल बाद दुश्मन ने गिराया अमेरिकी फाइटर जेट:ट्रम्प का ईरानी आसमान पर कब्जे का दावा गलत; अब तक अमेरिका के 7 विमान तबाह ईरान जंग के एक महीने बाद ट्रम्प ने 2 अप्रैल को अमेरिकी जनता को संबोधित किया। 19 मिनट के भाषण में उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान की हवाई सेना को तबाह कर दिया है और
SBI Research: Global Uncertainty, Crude Oil Impact RBI Repo Rate

Hindi News Business SBI Research: Global Uncertainty, Crude Oil Impact RBI Repo Rate | 5.25% नई दिल्ली17 मिनट पहले कॉपी लिंक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक 6-8 अप्रैल को होने वाली है। बाजार को उम्मीद थी कि इस बार शायद ब्याज दरों में कुछ राहत मिले, लेकिन पश्चिम एशिया (वेस्ट एशिया) में बढ़ते तनाव ने समीकरण बदल दिए हैं। SBI रिसर्च की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, ग्लोबल अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल को देखते हुए RBI फिलहाल रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करेगा। इससे पहले फरवरी में हुई मीटिंग में भी ब्याज दर में बदलाव नहीं हुआ था। अभी ब्याज दर 5.25% पर है। दुनियाभर में उथल-पुथल, सप्लाई चेन पर असर SBI रिसर्च की रिपोर्ट में कहा गया है कि इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष ने पूरी दुनिया को संकट में डाल दिया है। होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने जैसी स्थिति से ग्लोबल ऑयल मार्केट में 1973 के बाद का सबसे बड़ा व्यवधान पैदा हुआ है। युद्ध की शुरुआत के बाद यह पहली पॉलिसी समीक्षा है, इसलिए RBI काफी फूंक-फूंक कर कदम उठाएगा। डॉलर के मुकाबले रुपया 93 के पार, बढ़ेगी ‘इंपोर्टेड इन्फ्लेशन’ भारत इस ग्लोबल संकट से अछूता नहीं है। कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं, जिससे भारत में ‘इंपोर्टेड इन्फ्लेशन’ (आयातित महंगाई) बढ़ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, डॉलर के मुकाबले रुपया 93 के स्तर को पार कर गया है। इसके साथ ही ‘सुपर अल नीनो’ का खतरा भी बना हुआ है, जो आने वाले समय में महंगाई की स्थिति को और बिगाड़ सकता है। अगले 3 क्वार्टर तक 4.5% से ऊपर रह सकती है महंगाई घरेलू मोर्चे पर भी चुनौतियां कम नहीं हैं। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि आयातित महंगाई पहले ही 5.4% पर पहुंच चुकी है और इसके आगे भी बढ़ने के आसार हैं। अनुमान है कि अगले तीन तिमाहियों तक कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) आधारित महंगाई 4.5% से ऊपर बनी रह सकती है। ऐसे माहौल में RBI के लिए ब्याज दरों में कटौती करना जोखिम भरा हो सकता है। लिक्विडिटी मैनेजमेंट पर रहेगा फोकस, ‘ऑपरेशन ट्विस्ट’ की चर्चा रिपोर्ट का सुझाव है कि RBI अभी केवल ब्याज दरों पर ध्यान देने के बजाय मार्केट लिक्विडिटी और माइक्रोस्ट्रक्चर को सुधारने पर काम कर सकता है। सरकारी बॉन्ड की यील्ड को मैनेज करने के लिए केंद्रीय बैंक ‘ऑपरेशन ट्विस्ट’ (लंबे समय के बॉन्ड खरीदना और कम समय के बॉन्ड बेचना) जैसे कदम उठा सकता है। इसके अलावा, मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी रोकने के लिए हाल ही में उठाए गए कड़े कदमों से बैंकों के लिए कुछ ऑपरेशनल चुनौतियां भी आ सकती हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
SBI Research: Global Uncertainty, Crude Oil Impact RBI Repo Rate

Hindi News Business SBI Research: Global Uncertainty, Crude Oil Impact RBI Repo Rate | 5.25% नई दिल्ली55 मिनट पहले कॉपी लिंक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक 6-8 अप्रैल को होने वाली है। बाजार को उम्मीद थी कि इस बार शायद ब्याज दरों में कुछ राहत मिले, लेकिन पश्चिम एशिया (वेस्ट एशिया) में बढ़ते तनाव ने समीकरण बदल दिए हैं। SBI रिसर्च की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, ग्लोबल अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल को देखते हुए RBI फिलहाल रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करेगा। इससे पहले फरवरी में हुई मीटिंग में भी ब्याज दर में बदलाव नहीं हुआ था। अभी ब्याज दर 5.25% पर है। दुनियाभर में उथल-पुथल, सप्लाई चेन पर असर SBI रिसर्च की रिपोर्ट में कहा गया है कि इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष ने पूरी दुनिया को संकट में डाल दिया है। होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने जैसी स्थिति से ग्लोबल ऑयल मार्केट में 1973 के बाद का सबसे बड़ा व्यवधान पैदा हुआ है। युद्ध की शुरुआत के बाद यह पहली पॉलिसी समीक्षा है, इसलिए RBI काफी फूंक-फूंक कर कदम उठाएगा। डॉलर के मुकाबले रुपया 93 के पार, बढ़ेगी ‘इंपोर्टेड इन्फ्लेशन’ भारत इस ग्लोबल संकट से अछूता नहीं है। कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं, जिससे भारत में ‘इंपोर्टेड इन्फ्लेशन’ (आयातित महंगाई) बढ़ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, डॉलर के मुकाबले रुपया 93 के स्तर को पार कर गया है। इसके साथ ही ‘सुपर अल नीनो’ का खतरा भी बना हुआ है, जो आने वाले समय में महंगाई की स्थिति को और बिगाड़ सकता है। अगले 3 क्वार्टर तक 4.5% से ऊपर रह सकती है महंगाई घरेलू मोर्चे पर भी चुनौतियां कम नहीं हैं। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि आयातित महंगाई पहले ही 5.4% पर पहुंच चुकी है और इसके आगे भी बढ़ने के आसार हैं। अनुमान है कि अगले तीन तिमाहियों तक कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) आधारित महंगाई 4.5% से ऊपर बनी रह सकती है। ऐसे माहौल में RBI के लिए ब्याज दरों में कटौती करना जोखिम भरा हो सकता है। लिक्विडिटी मैनेजमेंट पर रहेगा फोकस, ‘ऑपरेशन ट्विस्ट’ की चर्चा रिपोर्ट का सुझाव है कि RBI अभी केवल ब्याज दरों पर ध्यान देने के बजाय मार्केट लिक्विडिटी और माइक्रोस्ट्रक्चर को सुधारने पर काम कर सकता है। सरकारी बॉन्ड की यील्ड को मैनेज करने के लिए केंद्रीय बैंक ‘ऑपरेशन ट्विस्ट’ (लंबे समय के बॉन्ड खरीदना और कम समय के बॉन्ड बेचना) जैसे कदम उठा सकता है। इसके अलावा, मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी रोकने के लिए हाल ही में उठाए गए कड़े कदमों से बैंकों के लिए कुछ ऑपरेशनल चुनौतियां भी आ सकती हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
जयारोग्य न्यूरोसर्जरी ओपीडी में छत का प्लास्टर गिरा:ओपीडी शुरू होने से पहले हादसा; ग्वालियर में अस्पताल की 50 साल पुरानी इमारत

ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल समूह (जेएएच) की न्यूरोसर्जरी ओपीडी में ओपीडी शुरू होने से ठीक पहले शनिवार को छत का भारी प्लास्टर गिर गया। घटना न्यूरोसर्जरी विभाग के कमरा नंबर 1 में हुई, जहां विभागाध्यक्ष की ओपीडी लगनी थी। उस समय मरीज और डॉक्टर मौजूद थे, लेकिन कोई घायल नहीं हुआ। प्लास्टर जूनियर डॉक्टरों के बैठने की जगह के ठीक पीछे गिरा। घटना के समय वहां कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था, जिससे बड़ा हादसा टल गया। 60 से 80 साल पुराने भवन जर्जर जेएएच के न्यूरोसर्जरी-न्यूरोलॉजी और केआरएच भवन 60 से 80 साल पुराने हैं। जर्जर हालत के कारण यहां अक्सर प्लास्टर और छज्जे टूटकर गिरते रहते हैं। 2 अप्रैल 2026 को कमलाराजा अस्पताल में छज्जे का बड़ा हिस्सा गिरा था। प्रभावित क्षेत्र को पहले ही बंद कर दिया गया था, इसलिए कोई घायल नहीं हुआ। चार साल में 11 बार भेजे गए प्रस्ताव अस्पताल प्रबंधन ने भवन मरम्मत और वायरिंग बदलने के लिए पिछले चार साल में 11 बार शासन को प्रस्ताव भेजे हैं। अभी तक कार्य शुरू नहीं हुआ है। गायनिक और पीडियाट्रिक विभागाध्यक्ष एक साल पहले नए भवन की मांग कर चुके हैं। डीन डॉ. आरकेएस धाकड़ ने पुनर्निर्माण प्रक्रिया तेज होने की बात कही है। 5 मार्च 2026 को न्यूरोलॉजी वार्ड, 12 मार्च को न्यूरोसर्जरी वार्ड और 30 मार्च को शौचालय में प्लास्टर गिरा। इन घटनाओं में भी कोई घायल नहीं हुआ। 2024 से अब तक कई संरचनात्मक हादसे 4 जुलाई 2024 को एसएनसीयू की फॉल्स सीलिंग और 27 दिसंबर 2025 को गलियारे की बीम गिरी थी। 25 फरवरी 2026 को लेबर रूम के शौचालय की दीवार धंस गई थी। 2022 के फायर ऑडिट में फायर सेफ्टी सिस्टम में कई खामियां मिली थीं। सुधार के लिए प्रस्ताव भेजे गए, लेकिन कार्रवाई लंबित है।
डायबिटीज के मरीज भूलकर भी न करें 4 गलतियां, किडनी हो जाएंगी खराब, जिंदगीभर कराना पड़ेगा डायलिसिस !

Last Updated:April 05, 2026, 11:19 IST Diabetes and Kidney Health: डायबिटीज के मरीज अगर खान-पान में गलती करेंगे, तो इससे उनकी किडनी डैमेज हो सकती हैं. डॉक्टर्स की मानें तो ज्यादा नमक वाली चीजें, प्रोसेस्ड फूड, हाई प्रोटीन डाइट और ज्यादा चीनी का सेवन किडनी पर दबाव बढ़ाता है, जिससे किडनी को नुकसान होता है. बेहतर खानपान से किडनी को हेल्दी रखा जा सकता है. शुगर लेवल अनकंट्रोल हो जाए, तो इससे किडनी फेलियर की नौबत आ सकती है. Tips to Prevent Kidney Damage: डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है, जो धीरे-धीरे शरीर को खोखला कर देती है. अगर शुगर लेवल अनकंट्रोल रहता है, तो इससे शरीर के अन्य ऑर्गन्स डैमेज होने लगते हैं. डायबिटीज के मरीजों को किडनी डैमेज का रिस्क स्वस्थ लोगों की तुलना में ज्यादा होता है. डॉक्टर्स की मानें तो गलत खान-पान और लापरवाही के कारण डायबिटीज के मरीजों में किडनी प्रॉब्लम्स तेजी से बढ़ रही हैं. छोटी-छोटी आदतें किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचा रही हैं. अगर इन आदतों को बदल लिया जाए और शुगर लेवल को कंट्रोल रखा जाए, तो किडनी की समस्याओं से बचाव किया जा सकता है. अपोलो डायलिसिस के नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. अश्विनी पाणिग्रही ने HT को बताया कि जब लंबे समय तक ब्लड शुगर लेवल ज्यादा रहता है, तब यह किडनी की छोटी ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंचाता है. इससे किडनी की फिल्टर करने की क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है. यही कारण है कि डायबिटीज के मरीजों में किडनी डैमेज एक प्रोग्रेसिव यानी धीरे-धीरे बढ़ने वाली समस्या बन जाती है. हालांकि सही खान-पान से इस प्रक्रिया को काफी हद तक धीमा किया जा सकता है. कुछ लोग खान-पान में छोटी-छोटी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे शुगर लेवल अनकंट्रोल होता है और किडनी को गंभीर नुकसान होता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. किडनी को नुकसान पहुंचा रहीं ये गलतियां डॉक्टर ने बताया कि डायबिटीज के मरीज अक्सर अपनी डाइट में कुछ कॉमन गलतियां करते हैं, जो किडनी के लिए खतरनाक साबित हो सकती हैं. सबसे बड़ी गलती ज्यादा नमक का सेवन है. पैकेज्ड फूड, नमकीन स्नैक्स, अचार और रेडी-टू-ईट चीजों में सोडियम की मात्रा बहुत अधिक होती है, जो ब्लड प्रेशर बढ़ाकर किडनी पर अतिरिक्त दबाव डालती है. इसके अलावा प्रोसेस्ड फूड जैसे चिप्स, इंस्टेंट फूड और पैकेज्ड मीट में मौजूद प्रिजर्वेटिव्स और अनहेल्दी फैट्स भी शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं. आजकल मसल्स बढ़ाने के लिए लोग हाई प्रोटीन डाइट ले रहे हैं, लेकिन डायबिटीज के मरीजों के लिए यह खतरनाक हो सकता है. ज्यादा प्रोटीन किडनी पर अतिरिक्त बोझ डालता है और अगर पहले से किडनी कमजोर हैं, तो यह समस्या को और बढ़ा सकता है. इसके अलावा ज्यादा चीनी और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट का सेवन ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ाता है, जिससे लंबे समय में किडनी फेलियर का खतरा बढ़ जाता है. शुगर का सेवन डायबिटीज के मरीजों को कम से कम करना चाहिए. किस तरह किडनी डैमेज से बचा जाए? नेफ्रोलॉजिस्ट का कहना है कि सही डाइट अपनाकर किडनी को सुरक्षित रखा जा सकता है. इसके लिए नमक का सेवन कम करें और प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाएं. घर का बना ताजा और संतुलित खाना सबसे बेहतर विकल्प है. अपनी डाइट में हरी सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और हेल्दी फैट्स शामिल करें. फल भी खाएं, लेकिन सीमित मात्रा में खाएं. इसके अलावा प्रोटीन का सेवन संतुलित रखें. डायबिटीज के मरीजों के लिए केवल सही खाना ही काफी नहीं है, बल्कि नियमित जांच भी उतनी ही जरूरी है. पर्याप्त पानी पीना, ब्लड शुगर की निगरानी करना और समय-समय पर किडनी फंक्शन टेस्ट कराना बेहद जरूरी है. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : April 05, 2026, 11:19 IST







