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तमिलनाडु के लिए पवन कल्याण के चुनाव अभियान से एनडीए की उम्मीदें क्यों बढ़ीं; क्या विजय फैक्टर मायने रखता है? | चेन्नई-समाचार समाचार

File photo of Prime Minister Narendra Modi

आखरी अपडेट:06 अप्रैल, 2026, 13:24 IST आंध्र प्रदेश के डिप्टी सीएम और जन सेना पार्टी के प्रमुख पवन कल्याण 6 अप्रैल को तमिलनाडु के नागरकोइल से भाजपा उम्मीदवार एमआर गांधी के समर्थन में अभियान शुरू करेंगे। चेन्नई, कोयंबटूर और नागरकोइल में तेलुगु भाषी मतदाताओं की आबादी 15-20% है। पवन कल्याण की फैन फॉलोइंग के साथ-साथ एनडीए इसका लाभ उठाने की उम्मीद कर रहा है। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव एक करीबी नजर वाला मुकाबला बनता जा रहा है, जिसमें राजनीतिक दांव ऊंचे स्तर पर हैं। सत्तारूढ़ द्रमुक दबाव का सामना कर रही है, भले ही वह क्षेत्रीय पहचान को आगे बढ़ाकर समर्थन मजबूत करने की कोशिश कर रही है। इस बीच, आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और जन सेना पार्टी के प्रमुख पवन कल्याण 6 अप्रैल को प्रचार अभियान में उतर रहे हैं। वह भाजपा उम्मीदवार एमआर गांधी के समर्थन में नागरकोइल में प्रचार करने के लिए तैयार हैं, जो 23 अप्रैल के चुनावों से पहले चुनावी कहानी में एक महत्वपूर्ण क्षण है। पवन कल्याण की एंट्री क्यों मायने रखती है? पवन कल्याण के अभियान को भाजपा और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन के रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है। आंध्र प्रदेश में एनडीए के एक प्रमुख सहयोगी के रूप में, तेलुगु भाषी मतदाताओं के बीच उनकी लोकप्रियता तमिलनाडु में मतदाताओं को प्रभावित करने में भूमिका निभाने की उम्मीद है। अनुमान बताते हैं कि चेन्नई, कोयंबटूर और नागरकोइल जैसे कुछ क्षेत्रों में तेलुगु भाषी मतदाता आबादी का लगभग 15-20% हैं। एनडीए सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के खिलाफ अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए, कल्याण के प्रशंसक के साथ-साथ इस जनसांख्यिकीय का लाभ उठाने की उम्मीद कर रहा है। तमिलनाडु में राजनीतिक परिदृश्य तमिलनाडु का राजनीतिक मुकाबला बहुकोणीय बना हुआ है. मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली द्रमुक सरकार 2021 में मजबूत जनादेश के साथ सत्ता में आई थी, लेकिन अब उसे सत्ता विरोधी लहर का सामना करना पड़ रहा है, यहां तक ​​कि कई जनमत सर्वेक्षणों में भी वह आगे चल रही है। विपक्षी एनडीए गठबंधन, जिसमें अन्नाद्रमुक, भाजपा, पीएमके और एएमएमके शामिल हैं, एक मजबूत चुनौती पेश कर रहा है। उसी समय, अभिनेता से नेता बने विजय अपनी पार्टी, तमिलागा वेट्री कज़गम (टीवीके) के साथ मैदान में उतरे हैं, जो तीसरी ताकत के रूप में उभर रही है जो युवा मतदाताओं को प्रभावित कर सकती है और संभावित रूप से सत्ता विरोधी वोटों को विभाजित कर सकती है। अभियान रणनीति और संदेश अभियान से पहले बोलते हुए, पवन कल्याण ने एनडीए की संभावनाओं पर विश्वास व्यक्त किया और कहा कि गठबंधन तमिलनाडु में बदलाव ला सकता है। उन्होंने राज्य में तेलुगु भाषी समुदायों के समर्थन के महत्व पर भी जोर दिया। भाजपा नेताओं ने अभियान में उनके प्रवेश को संभावित “गेम चेंजर” बताया है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां भाषाई और सांस्कृतिक ओवरलैप मतदाताओं की भावना को प्रभावित कर सकते हैं। तमिलनाडु से परे क्षेत्रीय प्रभाव यह अभियान पड़ोसी राज्यों में भी ध्यान खींच रहा है। तमिलनाडु में तेलुगु भाषी आबादी का आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के साथ मजबूत सांस्कृतिक संबंध है, और कल्याण की उपस्थिति राज्य की सीमाओं से परे भी गूंजने की उम्मीद है। हैदराबाद और सभी तेलुगु मीडिया प्लेटफार्मों में, अभियान को व्यापक कवरेज मिलने की संभावना है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि यह आंध्र प्रदेश में एनडीए की कहानी को और मजबूत कर सकता है, जबकि तेलंगाना में मतदाताओं के बीच रुचि भी आकर्षित कर सकता है। एक व्यापक राजनीतिक संकेत पवन कल्याण की भागीदारी एक व्यापक राजनीतिक बदलाव को भी दर्शाती है, जिसमें क्षेत्रीय नेता अपने गृह राज्यों से परे भूमिका निभा रहे हैं। चेन्नई में अध्ययन करने और तमिल संस्कृति से जुड़ाव बनाए रखने के बाद, उनके अभियान को एनडीए द्वारा तेलुगु-तमिल राजनीतिक जुड़ाव के प्रतीक के रूप में पेश किया जा रहा है। हालाँकि, इस कदम की द्रमुक नेताओं ने भी आलोचना की है, जिन्होंने इसे तमिलनाडु के राजनीतिक परिदृश्य में “बाहरी हस्तक्षेप” करार दिया है। आगे क्या देखना है 6 अप्रैल को नामांकन बंद होने और 23 अप्रैल को मतदान होने के साथ, आने वाले सप्ताह महत्वपूर्ण होंगे। पवन कल्याण के अभियान का प्रभाव, चाहे वह एनडीए को सक्रिय करे या प्रतीकात्मक रहे, चुनाव नजदीक आने के साथ स्पष्ट हो जाएगा। हालाँकि, यह निश्चित है कि उनके प्रवेश ने पहले से ही गतिशील चुनावी लड़ाई में एक नया आयाम जोड़ दिया है, जिससे तमिलनाडु देश में सबसे अधिक देखे जाने वाले राजनीतिक मुकाबलों में से एक बन गया है। पहले प्रकाशित: 06 अप्रैल, 2026, 13:24 IST समाचार शहर चेन्नई-समाचार तमिलनाडु के लिए पवन कल्याण के चुनाव अभियान से एनडीए की उम्मीदें क्यों बढ़ीं; क्या विजय फैक्टर मायने रखता है? अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। इस बीच, आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और जन सेना पार्टी के प्रमुख पवन कल्याण 6 अप्रैल को प्रचार अभियान में उतर रहे हैं। वह भाजपा उम्मीदवार एमआर गांधी के समर्थन में नागरकोइल में प्रचार करने के लिए तैयार हैं, जो 23 अप्रैल के चुनावों से पहले चुनावी कहानी में एक महत्वपूर्ण क्षण है। पवन कल्याण की एंट्री क्यों मायने रखती है? पवन कल्याण के अभियान को भाजपा और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन के रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है। आंध्र प्रदेश में एनडीए के एक प्रमुख सहयोगी के रूप में, तेलुगु भाषी मतदाताओं के बीच उनकी लोकप्रियता तमिलनाडु में मतदाताओं को प्रभावित करने में भूमिका निभाने की उम्मीद है। अनुमान बताते हैं कि चेन्नई, कोयंबटूर और नागरकोइल जैसे कुछ क्षेत्रों में तेलुगु भाषी मतदाता आबादी का लगभग 15-20% हैं। एनडीए सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के खिलाफ अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए, कल्याण के प्रशंसक के साथ-साथ इस जनसांख्यिकीय का लाभ उठाने की उम्मीद कर रहा है। तमिलनाडु में राजनीतिक परिदृश्य तमिलनाडु का राजनीतिक मुकाबला बहुकोणीय बना हुआ है. मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली द्रमुक सरकार 2021 में मजबूत जनादेश के

भाजपा नेता से मारपीट का कांग्रेस ने किया विरोध:एसपी कार्यालय के सामने धरना, आरोपियों को गिरफ्तार करने की मांग

भाजपा नेता से मारपीट का कांग्रेस ने किया विरोध:एसपी कार्यालय के सामने धरना, आरोपियों को गिरफ्तार करने की मांग

नरसिंहपुर जिले में भाजपा नेता पवन पटेल से मारपीट के मामले में कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन किया है। आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर कांग्रेस जिलाध्यक्ष सुनीता पटेल सोमवार दोपहर 12 बजे एसपी कार्यालय पहुंचीं और धरने पर बैठ गईं। जानकारी के अनुसार, सुनीता पटेल ने शनिवार को एसपी को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की थी। पुलिस से संतोषजनक जवाब न मिलने के बाद उन्होंने यह कदम उठाया। धरने के दौरान सुनीता पटेल ने आरोप लगाया कि पवन पटेल को बुरी तरह पीटा गया, लेकिन अभी तक किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस ने प्रेस नोट जारी किया, पर उनके पत्र का कोई जवाब नहीं दिया। पटेल ने क्षेत्र में अवैध उत्खनन और डंपरों की आवाजाही को भी गंभीर समस्या बताया। उन्होंने कहा कि गाडरवारा में लगातार हादसे हो रहे हैं, जैसे हाल ही में गांधी गांव में एक ट्रक घर में घुस गया, जिससे एक युवक की मौत हो गई थी। उन्होंने बताया कि इस संबंध में वह दिसंबर में भी पत्र लिखकर डंपरों के संचालन का समय निर्धारित करने की मांग कर चुकी हैं। सुनीता पटेल ने स्पष्ट किया कि जब तक उन्हें लिखित आश्वासन नहीं मिलेगा, वे धरना समाप्त नहीं करेंगी। दूसरी ओर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संदीप भूरिया ने मामले पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह घटना 1 तारीख की दरमियानी रात पलोहा थाना क्षेत्र में हुई थी। पुलिस ने आरोपियों की पहचान कर ली है और दो-तीन लोगों को हिरासत में लिया गया है। शेष आरोपियों की भी जल्द गिरफ्तारी की जाएगी। भूरिया ने बताया कि कुछ आरोपी स्थानीय हैं, जबकि कुछ बाहर के हैं। मामले की विस्तृत जानकारी एसडीओपी द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी जा रही है। पुलिस का कहना है कि त्वरित कार्रवाई की जा रही है और क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास जारी हैं।

Gut Health news: डेस्क पर खाना, बैठे रहना, ऑफिस हर साल छीन रहा आपकी उम्र में से 11 दिन!

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शहरी जीवन की तेज रफ्तार के बीच भारत में खान-पान की आदतों में एक गहरा बदलाव आया है. सुबह का नाश्ता अक्सर मोबाइल स्क्रीन स्क्रॉल करते हुए लोग खाते हैं. दोपहर का खाना ऑफिस की मीटिंग्स के बीच डेस्क पर ही बैठे-बैठे खा लिया जाता है. रात का भोजन देर रात ऐप से मंगाकर जल्दबाजी में निपटा दिया जाता है, और फिर हम अपने काम, दफ्तर, मीटिंग में जुट जाते हैं. यह सब देखने में तो सुविधा जैसा लगता है, लेकिन धीरे-धीरे यही ऑफिस का रूटीन और आपाधापी का भोजन हमें खा रहा है. लंबे काम के घंटे, व्यस्त दिनचर्या और फूड डिलीवरी ऐप्स की आसान उपलब्धता ने खाने को एक जरूरत से ज्यादा सुलभ और तेज प्रतिक्रिया बना दिया है. अब लोग यह नहीं सोचते कि क्या खा रहे हैं, बल्कि यह सोचते हैं कि कितनी जल्दी खा सकते हैं. हालांकि डॉक्टरों की मानें तो समस्या कभी-कभार के गलत खाने की नहीं, बल्कि रोजमर्रा की इस आदत की है, जो शरीर को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रही है. पैसिफिक वन हेल्थ में प्रिवेंटिव वेलनेस एवं मेटाबॉलिक डिजीज एक्सपर्ट डॉक्टर ऐजाज इल्मी कहते हैं कि अक्सर लोग आंतों की सेहत को केवल पाचन से जोड़ते हैं, जबकि इसका प्रभाव इससे कहीं अधिक व्यापक है. माइक्रोबायोम में असंतुलन इम्यूनिटी, नींद और हृदय स्वास्थ्य तक को प्रभावित कर सकता है. आज जो स्थिति हम देख रहे हैं, वह रोजमर्रा के छोटे-छोटे खान-पान के फैसलों का नतीजा है, जो शरीर की प्राकृतिक जरूरतों के अनुरूप नहीं हैं.’ आंतों की हेल्थ है बड़ा मुद्दा डॉ. कहते हैं कि मानव शरीर में आंतों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है. लगभग 70 से 80 प्रतिशत प्रतिरक्षा तंत्र आंतों में मौजूद होता है, जिसे माइक्रोबायोम नामक सूक्ष्मजीवों का जटिल तंत्र संचालित करता है. यह तंत्र न केवल पाचन को प्रभावित करता है, बल्कि इम्यूनिटी, सूजन, हार्मोन संतुलन और मानसिक स्वास्थ्य तक में भूमिका निभाता है. स्टडी में हुआ खुलासा वर्ष 2025 में शहरी कामकाजी लोगों पर किए गए एक अध्ययन के अनुसार, लगभग 39 प्रतिशत लोग कम फाइबर वाला आहार लेते हैं, 36 प्रतिशत से अधिक लोग अधिक चीनी वाले खान-पान का पालन करते हैं, और 28 प्रतिशत से ज्यादा लोग नियमित रूप से मीठे पेय पदार्थों का सेवन करते हैं. यह आदतें अब कभी-कभार नहीं, बल्कि रोजमर्रा का हिस्सा बन चुकी हैं. ऐसा आहार आंतों में मौजूद सूक्ष्मजीवों की विविधता को कम करता है, जिससे शरीर में सूजन बढ़ती है, इम्यून सिस्टम अधिक संवेदनशील हो जाता है और मेटाबॉलिज्म प्रभावित होता है. नए शोधों में यह भी सामने आया है कि खराब आंत स्वास्थ्य धमनियों में प्लाक बनने और वसा के असंतुलित मेटाबॉलिज्म से भी जुड़ा हो सकता है. हर साल छिन रहे आपके 11 दिन इसका असर केवल शरीर तक सीमित नहीं है. आंतें शरीर में सेरोटोनिन के उत्पादन में अहम भूमिका निभाती हैं, जो नींद और मानसिक स्थिति को नियंत्रित करता है. भारत के वर्कप्लेस वेलबीइंग रिपोर्ट 2025 के अनुसार, खराब नींद के कारण हर कर्मचारी औसतन 11.3 कार्यदिवस प्रति वर्ष खो देता है. ये हैं लक्षण पेट फूलना दोपहर के समय थकान रात में बेचैनी आमतौर पर ये समस्याएं अक्सर सामान्य मान ली जाती हैं, जबकि विशेषज्ञ इन्हें आंतों की खराब होती सेहत के संकेत मानते हैं, जिन्हें तत्काल सुधार की जरूरत होती है. डॉ. एजाज कहते हैं कि आंतों की सेहत को सुधारना मुश्किल नहीं है, बशर्ते कुछ चीजों को कड़ाई से फॉलो किया जाए. क्या करना चाहिए? दिन में कम से कम एक बार बिना किसी स्क्रीन के शांति से भोजन करना आहार में दाल, फल और मेवों जैसे फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ शामिल करना मीठे पेय पदार्थों को कम करना रात के भोजन और सोने के बीच कम से कम दो घंटे का अंतर रखना डॉक्टर कहते हैं कि तेज और सुविधाजनक जीवनशैली के इस दौर में सबसे जरूरी है जागरूकता. शरीर को परफेक्शन नहीं, बल्कि थोड़ी समझ और संतुलन की जरूरत है. रोज के छोटे-छोटे फैसले ही तय करते हैं कि हम स्वस्थ रहेंगे या धीरे-धीरे बीमार पड़ते जाएंगे.

ऊपर से नमक नहीं खाते फिर भी हाई रहता है बीपी? आपके किचन की इन 5 चीजों में छिपा है ‘असली विलेन’, आज ही करें तौबा

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Last Updated:April 06, 2026, 13:16 IST Hidden Sodium in Foods: भारत में हर चार में से एक वयस्क को हाई बीपी है. जब भी किसी को हाई ब्लड प्रेशर होता है तो डॉक्टर सलाह देते हैं कि नमक खाना कम कर दीजिए. डॉक्टरों की सलाह पर लोग नमक खाना बहुत कम कर देते हैं. यहां तक कि सब्जी, दाल या उपर से नमक लेना बंद कर देते हैं. इसके बावजूद कुछ लोगों का ब्लड प्रेशर नहीं घटता है. क्या आप जानते हैं इसका कारण है. दरअसल, इसका कारण है नमक जो आपके भोजन में छिपा होता है.आइए इसके बारे में जानते हैं. किन-किन चीजों में छुपा होता है नमक. Hidden Sodium in Foods: नमक का स्वाद लोगों को ऐसा लगा है कि इसके बिना भोजन बेस्वाद हो जाता है. लेकिन नमक का ज्यादा सेवन ब्लड प्रेशर मरीजों के लिए मीठा जहर है. यही कारण है कि बीपी के मरीजों को डॉक्टर कम से कम नमक खाने की सलाह देते हैं. इसके बाद मरीज नमक बिल्कुल कम कर देते है. लेकिन फिर भी ब्लड प्रेशर कम नहीं होता है. क्या आप जानते हैं कि नमक से दूर रहने के बावजूद आपके शरीर में भारी मात्रा में सोडियम कहां से पहुंच रहा है. यह खतरा वास्तव में आपके भोजन में ही छिपा है. इसके बारे में आपको पता भी नहीं रहता है लेकिन खाने की ये चीजें आपके शरीर में सोडियम भर देता है. यही सोडियम ब्लड प्रेशर को आउट ऑफ कंट्रोल कर देता है. सोडियम से क्यों बढ़ जाता है बीपीपहले यह जानिए कि सोडियम से बीपी क्यों बढ़ जाता है. सोडिएम अत्यंत महत्वपूर्ण माइक्रोन्यूट्रेंट्स हैं. यह इलेक्ट्रोलाइट्स का हिस्सा है जो शरीर में नसों को एक्टिव रखने के लिए जरूरी है. सोडियम, मैग्नीशियम और जिंक मिलकर इलेक्ट्रोलाइट्स बनाता है. इसके अलावा सोडियम शरीर में तरल पदार्थों को बैलेंस रखता है. सोडिएम के कारण शरीर में पानी की संतुलित मात्रा बनी रहती है. अगर सोडियम की मात्रा कम हो जाए शरीर में पानी नहीं रुकेगा जिससे हजारों तरह की गतिविधियां बंद होने लगेगी. इसलिए सोडियम बहुत जरूरी है लेकिन जब यह जरूरत से ज्यादा हो जाए तो शरीर में पानी की मात्रा बढ़ने लगती है. यह पानी पहले खून की नलियों में पहुंचता है जिससे खून का वॉल्यूम बढ़ जाता है. जब खून की मात्रा नलियों में बढ़ जाएगी तो इसका प्रेशर भी ज्यादा होगा. यह अतिरिक्त प्रेशर खून की नलियों की दीवाल को नुकसान पहुंचाने लगता है. इस तरह यह ब्लड प्रेशर तो बढ़ाता ही है साथ नसों के फटने यानी हेमरेज की आशंका को भी बढ़ा देता है. किन-किन चीजों में छुपा होता सोडियमदरअसल, आप सब्जी या दाल में नमक तो कम देते हैं लेकिन रोजमर्रा की जिंदगी में आप कई ऐसी चीजें खाते हैं जिनमें आपको लगता है कि इनमें नमक नहीं है या बहुत कम है लेकिन उसमें बहुत ज्यादा सोडियम मिलाया जाता है. आमतौर पर ये पैकेटबंद चीजों में होता है. मसलन आप पॉपकॉर्न खाते हैं और आपको लगता है कि इसमें तो बिल्कुल नमक नहीं होगा लेकिन आप गलत हैं क्योंकि पॉपकॉर्न में कंपनियां सोडियम मिलाती है. इतना ही नहीं कुछ मीठे बिल्किट में भी सोडियम की मात्रा बहुत ज्यादा होती है. अगर आप बाजार से मटर जैसी फ्रोजन सब्जियां खरीदते हैं और आपको लगेगा इसमें थोड़ा भी नमक नहीं है लेकिन इसमें बहुत अधिक नमक होता है क्योंकि किसी भी चीज को प्रिजर्व करने के लिए सोडियम मिलाया जाता है. पैकेटबंद चिप्स, कुरकुरे, बिस्किट, चॉकलेट, केक, पिज्जा, बर्गर, सॉस, नूडल्स, बेकरी आयटम, सूप, प्रोसेस्ड फूड,ब्रेड, कुकीज, फास्ट फूड आदि में बहुत अधिक सोडियम मिला रहता है. फिर बीपी कंट्रोल कैसे करेंनमक कम करना बीपी कंट्रोल करने का सबसे बेहतर तरीका होता है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन यानी डब्ल्यूएचओ के मुताबिक एक दिन में 5 ग्राम से ज्यादा नमक नहीं खाना चाहिए. यह 5 ग्राम आप पूरे दिन में जितनी चीजें खाते हैं सबको मिलाकर होना चाहिए. यानी आपके फूड में जितना नमक होता है सिर्फ वही नहीं बल्कि अन्य चीजें जैसे बाहर के पैकेटबंद चीजें बिस्किट, केक आदि से जो नमक आता है, उन सबको जोड़कर 5 ग्राम से ज्यादा नमक नहीं खाना चाहिए. 5 ग्राम का मतलब एक चम्मच नमक. हालांकि भारत में करीब-करीब लोग 7 से 9 ग्राम तक नमक रोज खाते हैं. यही कारण है कि भारत में बीपी के मरीज बढ़ रहे हैं. ऐसे में नमक कम करना ही एक मात्र विकल्प है. इसके लिए थोड़ा-थोड़ा कर नमक को कम करें. शुरुआत में एक-दो सप्ताह मामूली मात्रा में नमक को घटाए और इसे धीरे-धीरे और कम करें. इसके साथ ही बाहर की चीजें जिनमें नमक की मात्रा ज्यादा रहती है, उनके बदले साबुत अनाज, फल, ड्राई फ्रूट्स, सीड्स आदि का सेवन करें. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp,आपके सवालों का हम देंगे जवाब. About the Author Lakshmi Narayan 18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें First Published : April 06, 2026, 13:16 IST

बास्केटबॉल चैम्पियन का ‘कैंडी’ सीक्रेट:मिलन शॉट से पहले दिमाग में दोहराते हैं ‘जेलीबीन’, ओवरथिंकिंग दूर करने का मिला अचूक फॉर्मूला

बास्केटबॉल चैम्पियन का ‘कैंडी’ सीक्रेट:मिलन शॉट से पहले दिमाग में दोहराते हैं ‘जेलीबीन’, ओवरथिंकिंग दूर करने का मिला अचूक फॉर्मूला

बड़े मैचों के दबाव में अक्सर दुनिया के बेहतरीन खिलाड़ियों का दिमाग भी सुन्न पड़ जाता है। ऐसे में वे अपने ही खेल पर शक करने लगते हैं। अमेरिका के कॉलेज बास्केटबॉल टूर्नामेंट में इस साल के सर्वश्रेष्ठ 3-पॉइंट शूटर मिलन मोमसिलोविक भी इसी ओवरथिंकिंग का शिकार हो रहे थे। लेकिन इस 6 फीट 8 इंच लंबे स्नाइपर ने अपने दिमाग को शांत करने का एक बेहद अजीब, लेकिन 100% अचूक तरीका खोज निकाला है। यह तरीका है एक शब्द ‘जेलीबीन’। आयोवा स्टेट के मिलन इस वक्त डिवीजन-1 कॉलेज बास्केटबॉल के सबसे सटीक शूटर हैं। लेकिन एक वक्त था जब हर शॉट से पहले उनका आत्मविश्वास डगमगा जाता था। मिलन बताते हैं, ‘मुझे हमेशा लगता था कि मेरे शॉट में कुछ कमी है। शायद गेंद का आर्क सही नहीं है या मैं सही तरीके से थ्रो नहीं कर रहा हूं।’ लगातार गिरते कॉन्फिडेंस को बचाने के लिए उन्होंने एक मशहूर स्पोर्ट्स साइकोलॉजिस्ट डॉ. मैथ्यू मायरविक से संपर्क किया। डॉ. मैथ्यू ने उन्हें एक बेहद आसान मनोवैज्ञानिक तरकीब बताई- ‘थ्रो करने से ठीक पहले दिमाग में किसी एक चीज, खासकर किसी खाने की चीज का नाम सोचो।’ मिलन ने इसके लिए ‘जेलीबीन’ शब्द चुना। वे कहते हैं, ‘शायद यह शब्द बोलने में थोड़ा लंबा है, इसलिए मैंने इसे चुना। मजेदार बात यह है कि जेलीबीन मेरी फेवरेट कैंडी भी नहीं है।’ मिलन यह शब्द जोर से नहीं बोलते, शॉट लेने से ठीक पहले वे इसे बस अपने दिमाग में दोहराते हैं। यह टेक्निक उनके दिमाग में आने वाले नकारात्मक ख्यालों को ब्लॉक कर देती है, जिससे उनका फोकस सिर्फ थ्रो पर रहता है। जैसे ही दिमाग ओवरथिंकिंग करना बंद करता है, शरीर की ‘मसल मेमोरी’ अपना काम बिल्कुल सटीक तरीके से करने लगती है। यह तकनीक खिलाड़ी का ध्यान नतीजे से हटाकर प्रोसेस पर ले आती है। आयोवा स्टेट के हेड कोच टीजे ओत्जेल्बर्गर इस बदलाव से बेहद खुश हैं। उनका कहना है, ‘पहले अगर वह एक-दो शॉट मिस करता था, तो अगला शॉट लेने से डरने लगता था। लेकिन अब उसका माइंडसेट बदल गया है। अब वह सिर्फ अपनी कोशिशों पर फोकस करता है, नतीजों पर नहीं।’ इस एक शब्द ने मिलन के खेल को पूरी तरह बदल दिया है। वे इस सीजन में 49.3% की सटीकता से 3-पॉइंट्स स्कोर कर रहे हैं, जो पूरे टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा है। उन्होंने अब तक 134 थ्री-पॉइंटर्स दागे हैं, जो किसी भी अन्य खिलाड़ी से अधिक है। वे 17.2 पॉइंट्स प्रति मैच के औसत के साथ अपनी टीम के टॉप स्कोरर बन गए हैं।

Gold & Silver Prices Surge in India

Gold & Silver Prices Surge in India

नई दिल्ली17 मिनट पहले कॉपी लिंक सोना-चांदी के दाम में आज 6 अप्रैल को तेजी है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 1,283 रुपए बढ़कर 1.48 लाख रुपए पर पहुंच गया है। इससे पहले 3 अप्रैल को इसकी कीमत 1.47 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम थी। वहीं, एक किलो चांदी 3,215 रुपए बढ़कर 2.31 लाख रुपए पर पहुंच गई है। इससे पहले शुक्रवार को इसकी कीमत 2.28 लाख रुपए प्रति किलो थी। अलग-अलग शहरों में सोने के दाम अलग होने की 4 वजहें ट्रांसपोर्टेशन और सिक्योरिटी: एक शहर से दूसरे शहर सोना ले जाने में ईंधन और सुरक्षा खर्च जुड़ता है, जिससे दूरी बढ़ने पर दाम बढ़ते हैं। खरीदारी की मात्रा: दक्षिण भारत में ज्यादा खपत (करीब 40%) के कारण ज्वेलर्स बड़ी खरीद करते हैं, लेकिन छूट का फायदा सीमित रहता है। लोकल ज्वेलरी एसोसिएशन: राज्य और शहर के ज्वेलरी एसोसिएशन स्थानीय मांग-सप्लाई के आधार पर रेट तय करते हैं। पुराना स्टॉक और खरीद मूल्य: ज्वेलर्स का खरीदी रेट तय करता है कि वे ग्राहकों को कितनी कीमत में बेचेंगे। सोना इस साल ₹14,696 और चांदी ₹608 महंगी इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। सोना 2026 में अब तक 14,696 रुपए और चांदी 608 रुपए महंगी हुई है। 31 दिसंबर 2025 को 10g सोना 1.33 लाख रुपए पर था, जो अब 1.48 लाख रुपए पर पहुंच गया है। वहीं चांदी 2.30 लाख रुपए किलो थी, जो अब 2.31 लाख रुपए पर पहुंच गई है। इस दौरान 29 जनवरी को सोने ने 1.76 लाख रुपए और चांदी ने 3.86 लाख रुपए का ऑलटाइम हाई भी बनाया था। लेकिन, 28 फरवरी को अमेरिका और इजारइल की ईरान से जंग शुरू होने के बाद लगातार गिरावट देखी जा रही है। तब से 38 दिन में सोना 11,206 रुपए और चांदी 35,672 रुपए गिरी है। विदेशी जेवर मंगाने के लिए लाइसेंस लेना होगा सरकार ने सोने-चांदी और प्लैटिनम के गहनों को ‘फ्री’ कैटेगरी से हटाकर ‘रिस्ट्रिक्टेड’ कैटेगरी में डाल दिया है। इसका सीधा असर बाजार की सप्लाई दिख रहा है, जिससे आज सोना-चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी हैं। विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) की ओर से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, अब इन कीमती धातुओं से बनी ज्वेलरी किसी भी देश से गहने मंगाने के लिए सरकार से विशेष लाइसेंस या परमिशन लेना होगा। सरकार ने यह कदम फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए उठाया है। ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान 1. सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह से हो सकता है- AZ4524। हॉलमार्किंग से पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है। 2. कीमत क्रॉस चेक करें: सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी कीमत कई सोर्सेज (जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट) से क्रॉस चेक करें। सोने का भाव 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होता है। असली चांदी की पहचान करने के 4 तरीके मैग्नेट टेस्ट: असली सिल्वर चुंबक से नहीं चिपकती। अगर चिपक जाए तो फेक है। आइस टेस्ट: सिल्वर पर बर्फ रखें। असली सिल्वर पर बर्फ तेजी से पिघलती है। स्मेल टेस्ट: असली सिल्वर में गंध नहीं होती। फेक में कॉपर जैसी गंध आती है। क्लॉथ टेस्ट: चांदी को सफेद कपड़े से रगड़ें। अगर काला निशान आए तो असली है। ————————————– ये खबर भी पढ़ें… भारतीय घरों में देश की GDP से ज्यादा का सोना: 34,600 टन गोल्ड की कीमत ₹450 लाख करोड़, देश की GDP ₹370 लाख करोड़ भारतीय परिवारों के पास मौजूद कुल सोने की वैल्यू 5 ट्रिलियन डॉलर (₹450 लाख करोड़) के पार निकल गई है। यह आंकड़ा देश की कुल 4.1 ट्रिलियन डॉलर यानी, 370 लाख करोड़ रुपए की GDP से भी ज्यादा है। सोने की कीमतें रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने के कारण ऐसा हुआ है। मॉर्गन स्टेनली की एक रिपोर्ट के अनुसार भारतीय घरों में लगभग 34,600 टन सोना जमा है। अभी सोने की वैल्यू 1.38 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के करीब चल रही है। वहीं इंटरनेशनल मार्केट में सोना 4,500 डॉलर प्रति औंस (करीब 28 ग्राम) के पार ट्रेड कर रहा है। रुपए में इसे बदलें तो इसकी वैल्यू 1.30 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के करीब होती है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Delhi High Court Overturns Former Chief Minister Arvind Kejriwal Rent Assurance COVID-19 lockdown

Delhi High Court Overturns Former Chief Minister Arvind Kejriwal Rent Assurance COVID-19 lockdown

Hindi News National Delhi High Court Overturns Former Chief Minister Arvind Kejriwal Rent Assurance COVID 19 Lockdown नई दिल्ली3 मिनट पहले कॉपी लिंक अरविंद केजरीवाल अपने तीसरे कार्यकाल में सितंबर 2024 तक दिल्ली के मुख्यमंत्री रहे। दिल्ली हाईकोर्ट ने 2021 के एक सिंगल जज के आदेश को पलट दिया है। उस आदेश में कहा गया था कि COVID-19 लॉकडाउन के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गरीबों के किराए का भुगतान करने की घोषणा कानूनी तौर पर लागू करने लायक थी। जस्टिस सी हरि शंकर और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की डिवीजन बेंच ने कहा कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिए गए बयान को कानूनी वादा नहीं माना जा सकता, जिसे अदालतें लागू करवा सकें। बेंच ने जोर देकर कहा कि कोई भी ‘रिट ऑफ मैंडमस’ (आदेश जारी करने का अधिकार) सरकार को ऐसे वादे को लागू करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। कोर्ट का आदेश 3 पॉइंट्स में… 29 मार्च 2020 को मुख्यमंत्री की घोषणा को लागू करने की मांग कानून की नजर में सही नहीं है, और इसलिए इसे खारिज किया जाता है। यह वादा किसी भी सरकारी आदेश का हिस्सा नहीं था, यहां तक कि उसी दिन जारी किए गए दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) के आदेश का भी नहीं। इस आदेश को कभी चुनौती भी नहीं दी गई थी। हालांकि मकान मालिक प्रवासी किराएदारों से उस समय का किराया नहीं मांग सकते, जब वे COVID-19 लॉकडाउन के कारण अपने किराए के घरों से बाहर नहीं निकल पा रहे थे। यह राहत सिर्फ लॉकडाउन के लिए है, और उसके बाद लागू नहीं होगी। हाईकोर्ट बोला- दिल्ली सरकार फैसला लेने के लिए स्वतंत्र है हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि दिल्ली सरकार इस बारे में कोई भी नीतिगत फैसला लेने के लिए स्वतंत्र है कि वह किराए का भुगतान करके किराएदारों की मदद करना चाहती है या नहीं, लेकिन अदालत सरकार को ऐसा करने के लिए मजबूर नहीं कर सकती। अदालत ने आगे कहा कि ऐसे वादे के वित्तीय और व्यावहारिक असर के बारे में कुछ भी साफ नहीं है, और ऐसा लगता है कि यह बयान किसी आपातकालीन स्थिति में दिया गया था। सिंगल जज बेंच ने क्या आदेश दिया था मामला 22 जुलाई 2021 को एक सिंगल जज के आदेश से जुड़ा है। उस आदेश में कहा गया था कि मुख्यमंत्री के वादे को लागू करवाया जा सकता है। साथ ही बेंच ने सरकार एक तय समय-सीमा के भीतर इस पर कोई नीति बनाने का निर्देश दिया गया था। यह आदेश 5 दिहाड़ी मजदूरों की तरफ से दायर एक याचिका पर दिया गया था। ये मजदूर लॉकडाउन के दौरान अपने किराए का भुगतान करने में असमर्थ थे और चाहते थे कि सरकार मुख्यमंत्री की ओर से की गई घोषणा को पूरा करे। दिल्ली सरकार ने कोर्ट में कहा था- हमने अपील की थी, वादा नहीं दिल्ली सरकार ने सिंगल जज बेंच के आदेश को चुनौती देते हुए कहा था कि यह बयान मकान मालिकों से सिर्फ एक अपील थी कि वे किराएदारों पर किराया देने का दबाव न डालें, न कि कोई पक्का वादा। सरकार ने दलील दी कि उसने तो सिर्फ इतना कहा था कि अगर जरूरत पड़ी, तो वह इस मामले पर विचार करेगी। इससे पहले, 27 सितंबर 2021 को डिवीजन बेंच ने सिंगल-जज के आदेश पर रोक लगा दी थी, यह कहते हुए कि इसे लागू करने से सरकार के लिए गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इस अंतिम फैसले के साथ हाईकोर्ट ने अब पिछले आदेश को रद्द कर दिया है और अपील का निपटारा कर दिया है, जिसमें खर्चों के संबंध में कोई आदेश नहीं दिया गया है। ——————————————– ये खबर भी पढ़ें… शराब नीति मामला- केजरीवाल दिल्ली हाईकोर्ट में आज खुद रखेंगे पक्ष अरविंद केजरीवाल सोमवार को शराब घोटाले मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में खुद अपनी दलील रख सकते हैं। यह मामला CBI की उस याचिका पर से जुड़ा है, जिसमें ट्रायल कोर्ट से केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य 22 आरोपियों को राहत देने के आदेश को चुनौती दी गई है। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

क्या वेट लॉस की दवा लेने से हड्डियां कमजोर हो सकती हैं? ब्रिटेन के डॉक्टर ने किया सनसनीखेज दावा

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Last Updated:April 06, 2026, 13:03 IST Weight Loss and Bone Health:वेट लॉस के लिए इस्तेमाल की जा रही GLP-1 दवाएं वजन घटाने में मदद करती हैं, लेकिन इससे बोन डेंसिटी कम हो सकती है. यूके के डॉक्टर करन राजन के अनुसार हड्डियों के घनत्व में कमी दवा के कारण नहीं, बल्कि मसल्स और शरीर के वजन घटने की वजह से होती है. हड्डियों की सुरक्षा के लिए स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और पर्याप्त प्रोटीन जरूरी होता है. डॉक्टर के अनुसार तेजी से वजन घटाने से हड्डियों की डेंसिटी कम हो सकती है. How GLP-1 Impact Bone Density: दुनिया भर में इस वक्त वेट लॉस की दवाएं लोकप्रिय हो रही हैं. मोटापा और डायबिटीज से जूझ रहे तमाम लोग इन दवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं. डॉक्टर्स की मानें तो GLP-1 इंजेक्शन तेजी से वजन कम करने और बॉडी मैनेजमेंट का पसंदीदा विकल्प बन चुके हैं. सेलेब्स से लेकर आम लोग तक सभी इन दवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं. अब तक माना जा रहा है कि ये दवाएं डायबिटीज और मोटापे से जूझ रहे लोगों के लिए वरदान साबित हो सकती हैं. हालांकि कुछ एक्सपर्ट्स ने इन दवाओं से हड्डियां कमजोर होने की आशंका जताई है. सवाल उठ रहा है कि क्या GLP-1 दवाओं के कारण हड्डियों की मजबूती घट सकती है? इस बारे में यूके के डॉक्टर करन राजन ने हकीकत बताई है. HT की रिपोर्ट के मुताबिक यूके बेस्ड सर्जन और हेल्थ कंटेंट क्रिएटर डॉक्टर करन राजन ने अपने इंस्टाग्राम पर GLP-1 दवाओं और बोन डेंसिटी के बीच कनेक्शन को लेकर कई अहम बातें बताई हैं. उन्होंने बताया कि GLP-1 दवाओं से हड्डियों की कमजोरी सीधे तौर पर नहीं होती है. वजन कम होने से बोन मिनरल डेंसिटी में कमी आ सकती है, लेकिन यह किसी भी वजन घटाने की प्रक्रिया में देखा जाता है. इन दवाओं का हड्डियों को तोड़ने वाले या बनाने वाले सेल्स पर कोई सीधा बायोलॉजिकल असर नहीं पड़ता है. सिर्फ वेट लॉस ड्रग्स को हड्डियों की कमजोरी से जोड़ना ठीक नहीं है. View this post on Instagram

गर्मियों के लिए ब्यूटी टिप्स | Summer Beauty Tips for Dry Lips and Hands

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Last Updated:April 06, 2026, 12:50 IST Beauty Tips: गर्मियों के मौसम में तेज धूप और डिहाइड्रेशन के कारण होंठ फटने और हाथों के रूखेपन की समस्या बढ़ जाती है. नागौर की ब्यूटी एक्सपर्ट के अनुसार, UV किरणें होंठों की नाजुक परत को नुकसान पहुँचाती हैं, जबकि बार-बार साबुन और सैनिटाइजर का उपयोग हाथों की नमी छीन लेता है. इसके बचाव के लिए शहद, गुलाबजल, मलाई और हल्दी जैसे घरेलू उपाय बेहद कारगर हैं. इसके साथ ही शरीर को अंदर से हाइड्रेट रखने के लिए पर्याप्त पानी, तरबूज और नारियल पानी का सेवन करना चाहिए. रात में सोने से पहले नारियल तेल या देसी घी का इस्तेमाल होंठों को मुलायम रखता है. एक्सपर्ट की सलाह है कि विटामिन की कमी की जांच कराएं और धूप में निकलते समय SPF युक्त उत्पादों का प्रयोग करें ताकि त्वचा स्वस्थ बनी रहे. तेज पराबैंगनी (UV) किरणें होंठों की नाजुक त्वचा को गहराई से नुकसान पहुँचाती हैं, जिससे उनकी ऊपरी सुरक्षात्मक परत कमजोर हो जाती है. इसके परिणामस्वरूप होंठ न केवल फटने लगते हैं, बल्कि उनमें कालेपन (Pigmentation) की समस्या भी तेजी से बढ़ सकती है. अक्सर लोग सूखेपन से राहत पाने के लिए बार-बार होंठों पर जीभ फेरते हैं, लेकिन यह आदत नमी को और भी कम कर देती है. इसके अलावा, पोषण की कमी भी एक बड़ा कारण है; शरीर में विटामिन बी-12, आयरन, जिंक और मैग्नीशियम जैसे आवश्यक तत्वों का अभाव इस समस्या को और अधिक गंभीर बना देता है. गर्मियों के मौसम में होंठों का फटना और हाथों का रूखा होना एक आम समस्या है, लेकिन इसे नजरअंदाज करना कभी-कभी भारी पड़ सकता है. ब्यूटी एक्सपर्ट सोनू कुमावत के अनुसार, तेज धूप, लू और बढ़ता तापमान शरीर की प्राकृतिक नमी को तेजी से सोख लेते हैं. अत्यधिक पसीना निकलने के कारण शरीर डिहाइड्रेट (Dehydrate) हो जाता है, जिसका सबसे पहला और सीधा असर हमारी कोमल त्वचा और होंठों पर दिखाई देता है. इसके परिणामस्वरूप वे न केवल सूखे और खुरदरे हो जाते हैं, बल्कि अपनी स्वाभाविक चमक खोकर बेजान नजर आने लगते हैं. घरेलू उपायों में शहद और गुलाबजल का मिश्रण होंठों के लिए एक बेहतरीन प्राकृतिक मॉइस्चराइजर की तरह काम करता है, जो उन्हें गहराई से हाइड्रेट कर फटे होंठों को जल्दी ठीक करने में मदद करता है. वहीं, हाथों के रूखेपन को दूर करने के लिए दूध की मलाई में चुटकी भर हल्दी मिलाकर मसाज करना बेहद फायदेमंद होता है, क्योंकि यह त्वचा को भीतर से पोषण देकर उसे निखारता है. इसके अतिरिक्त, एलोवेरा जेल, ग्लिसरीन और नींबू का संगम त्वचा की नमी को बरकरार रखने (Hydrate) में अत्यंत प्रभावी माना जाता है, जिससे भीषण गर्मी के बावजूद आपकी त्वचा कोमल, मुलायम और स्वस्थ बनी रहती है. Add News18 as Preferred Source on Google गर्मियों में त्वचा और होंठों के रूखेपन से बचने का सबसे प्रभावी तरीका शरीर को अंदरूनी रूप से हाइड्रेट (Hydrate) रखना है. इसके लिए दिनभर में पर्याप्त पानी पीना अनिवार्य है. अपनी डाइट में नारियल पानी, नींबू पानी, और ताजी छाछ जैसे तरल पदार्थों के साथ-साथ तरबूज, खीरा और ककड़ी जैसे पानी से भरपूर फलों को प्राथमिकता देनी चाहिए. ये खाद्य पदार्थ न केवल भीषण गर्मी में शरीर को भीतर से ठंडक प्रदान करते हैं, बल्कि त्वचा की कोशिकाओं में नमी (Moisture) के स्तर को भी बनाए रखते हैं, जिससे रूखापन प्राकृतिक रूप से कम होने लगता है. ब्यूटी एक्सपर्ट सोनू कुमावत के अनुसार, हाथों के रूखेपन के पीछे कई प्रमुख कारण जिम्मेदार होते हैं. बार-बार साबुन, हैंडवॉश और सैनिटाइजर का इस्तेमाल करने से उनमें मौजूद कड़े केमिकल्स त्वचा की प्राकृतिक नमी (Natural Oils) को पूरी तरह छीन लेते हैं. इसके परिणामस्वरूप, हाथों की त्वचा न केवल खुरदरी और बेजान हो जाती है, बल्कि समय के साथ अपनी चमक भी खो देती है. इसके अतिरिक्त, धूल-मिट्टी और तेज धूप का सीधा संपर्क भी त्वचा की निचली परतों को नुकसान पहुँचाता है, जिससे स्किन अत्यधिक ड्राय और संवेदनशील (Sensitive) हो जाती है. होंठों की कोमल त्वचा की सुरक्षा के लिए दिन में कई बार SPF युक्त लिप बाम का उपयोग करना चाहिए, जो सूरज की हानिकारक यूवी किरणों (UV Rays) से एक रक्षा कवच की तरह काम करता है. रात को सोने से पहले देसी घी, शुद्ध नारियल तेल या ताजी मलाई का प्रयोग होंठों को प्राकृतिक रूप से पोषण देकर उन्हें रातभर में ही मुलायम बना देता है. इसी तरह, हाथों के रूखेपन से बचने के लिए नियमित रूप से माइल्ड मॉइश्चराइजर का इस्तेमाल करें और घर से बाहर निकलते समय हाथों पर हल्का सनस्क्रीन लगाना भी बेहद फायदेमंद रहता है, जिससे त्वचा धूप के सीधे प्रभाव से सुरक्षित रहती है.’ First Published : April 06, 2026, 12:50 IST

अस्पताल में पहुंचकर मरीजों से मिलीं विधायक:बुरहानपुर में सुविधाओं के बारे में पूछा, बोलीं- व्यवस्थाएं बेहतर करने कलेक्टर से चर्चा करूंगी

अस्पताल में पहुंचकर मरीजों से मिलीं विधायक:बुरहानपुर में सुविधाओं के बारे में पूछा, बोलीं- व्यवस्थाएं बेहतर करने कलेक्टर से चर्चा करूंगी

बुरहानपुर विधायक अर्चना चिटनिस ने सोमवार सुबह 11 बजे जिला अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने अस्पताल की व्यवस्थाओं का जायजा लिया और मरीजों से भी बातचीत की। निरीक्षण के दौरान विधायक ने जिला अस्पताल के नोडल अधिकारी व डिप्टी कलेक्टर राजेश पाटीदार और सिविल सर्जन डॉ. दर्पण टोके से अस्पताल की व्यवस्थाओं के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने विभिन्न वार्डों में जाकर मरीजों से उनके स्वास्थ्य और मिल रहे उपचार के बारे में पूछा। मरीजों ने दी जा रही सुविधाओं पर संतुष्टि व्यक्त की। विधायक अर्चना चिटनिस ने बताया कि जिला अस्पताल में सुविधाएं और संसाधन जुटाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के लिए कलेक्टर से चर्चा की जाएगी। आज शाम ही जिला अस्पताल के अधिकारियों, डॉक्टरों और अन्य टीम के साथ एक बैठक आयोजित की जाएगी। इस अवसर पर विधायक ने एसएनसीयू कक्ष, प्रसव कक्ष और जनरल वार्ड का दौरा किया। इस दौरान जिला अस्पताल के आरएमओ भूपेंद्र गौर, प्रबंधन धीरज चौहान, डॉ. गौरव धावानी सहित अन्य डॉक्टर और स्टाफ सदस्य उपस्थित थे।