MP Congress Leaders Out of New Committee Get Space in Bharat Krishak Samaj

खंडवा में ग्रामीण जिलाध्यक्ष लक्ष्मीचंद्र गुर्जर को बनाया गया। मध्यप्रदेश की राजनीति में संगठनात्मक हलचल के बीच अब नए समीकरण बनते नजर आ रहे हैं। पूर्व पीसीसी अध्यक्ष व केंद्रीय मंत्री रहे अरुण यादव ने भारत कृषक समाज के माध्यम से ऐसे नेताओं को मंच देना शुरू कर दिया है, जो हाल ही में कांग्रेस की टीम से बाहर हो गए . सोमवार को खरगोन जिले के बोरावा में आयोजित किसान गोष्ठी के दौरान 1956 में गठित हुए भारत कृषक समाज नाम के संगठन का विस्तार करते हुए कई अहम नियुक्तियां की गईं। खंडवा शहर इकाई के लिए अर्ष पाठक को शहर जिलाध्यक्ष बनाया गया, जबकि दक्षिण ब्लॉक अध्यक्ष के रूप में विनोद यादव और उत्तर ब्लॉक अध्यक्ष के रूप में इकबाल कुरैशी को जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्र में मूंदी के किसान नेता लक्ष्मीचंद्र गुर्जर को खंडवा जिले का ग्रामीण जिलाध्यक्ष नियुक्त किया गया। सभी को नियुक्ति पत्र स्वयं अरुण यादव ने सौंपे। कार्यक्रम में अरूण यादव के भाई कसरावद विधायक सचिन यादव (पूर्व कृषि मंत्री) सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। नियुक्तियों के राजनीतिक मायने हाल ही में जीतू पटवारी की अगुवाई में कांग्रेस संगठन में हुए फेरबदल के बाद कई नेता सक्रिय भूमिका से बाहर हो गए थे। ऐसे में अरुण यादव द्वारा उन्हें भारत कृषक समाज में स्थान देना एक नई राजनीतिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। यह कदम न केवल संगठन विस्तार बल्कि असंतुष्ट नेताओं को साधने की कोशिश भी माना जा रहा है। किसानों पर फोकस, क्षेत्रीय समीकरण भी अरुण यादव ने कहा कि किसानों की आवाज को मजबूत करने के लिए संगठन का विस्तार जरूरी है। उन्होंने नए पदाधिकारियों से अपेक्षा जताई कि वे जमीनी स्तर पर किसानों की समस्याओं को उठाएं और संगठन को सक्रिय बनाएं। इधर, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह नियुक्तियां सिर्फ संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि आने वाले समय में क्षेत्रीय राजनीति में नए समीकरणों की शुरुआत भी हो सकती है।
14 साल की किशोरी का शव फंदे पर लटका मिला:छतरपुर में साड़ी से बनाया फंदा, पिता बाड़े में कर रहे थे काम, घर पर अकेली थी

छतरपुर जिले के हरपालपुर थाना क्षेत्र के परेथा गांव में एक 14 वर्षीय किशोरी का शव फंदे पर लटका मिला। किशोरी का नाम नम्रता रैकवार (14) पुत्री सुनील रैकवार है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, सोमवार सुबह नम्रता के पिता सुनील रैकवार अपने बाड़े में थे। इसी दौरान गांव के एक व्यक्ति ने उन्हें सूचना दी कि उनकी बेटी ने घर के अंदर फांसी लगा ली है। साड़ी के फंदे पर लटका मिला शव सूचना मिलते ही परिजन मौके पर पहुंचे और घटना की जानकारी हरपालपुर थाना पुलिस को दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने कमरे में साड़ी के फंदे से लटके शव को नीचे उतरवाया। शव को पोस्टमार्टम के लिए नौगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेज दिया गया है। पुलिस ने मर्ग कायम कर मौत के कारणों की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि किशोरी ने यह कदम किन परिस्थितियों में उठाया। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विस्तृत जांच के बाद ही मामले के कारणों का खुलासा हो सकेगा।
ज्यादा चीनी नहीं, ट्रंकल ओबेसिटी है डायबिटीज की सबसे बड़ी वजह, ये होती क्या है जानिए

Last Updated:April 06, 2026, 21:07 IST Sugar Causes : देश शुगर मरीजों का गढ़ बन चुका है. तेजी से बढ़ रही इस बीमारी का एक नया कारण सामने आया है. डॉक्टर इसे ट्रंकल ओबेसिटी बता रहे हैं. ट्रंकल ओबेसिटी में पेट के आसपास चर्बी जाम होने लगती है. हर साल 10 से 15% डायबिटीज के मरीज बढ़ रहे हैं. इसकी एक वजह ये भी है. कानपुर के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. एसके गौतम लोकल 18 से बताते हैं कि पिछले दो-तीन सालों में लोगों के शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ रहा है, जो धीरे-धीरे डायबिटीज की ओर धकेल रहा है. कानपुर. देश में तेजी से बढ़ रही डायबिटीज की बीमारी के पीछे अब एक बड़ा कारण सामने आ रहा है, जिसे डॉक्टर ट्रंकल ओबेसिटी यानी पेट के आसपास जमा होने वाली चर्बी बता रहे हैं. विशेषज्ञों के अनुसार हर साल 10 से 15% तक डायबिटीज के मरीज बढ़ रहे हैं और इसकी सबसे बड़ी वजह बदलती जीवनशैली और बढ़ता मोटापा है. कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. एसके गौतम लोकल 18 से बताते हैं कि पिछले दो-तीन सालों में लोगों की दिनचर्या पूरी तरह बदल गई है. देर रात तक जागना, समय पर भोजन न करना और शारीरिक गतिविधियों में कमी ने शरीर पर सीधा असर डाला है. इससे शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ रहा है, जो धीरे-धीरे लोगों को डायबिटीज की ओर धकेल रहा है. ट्रंकल ओबेसिटी में होता क्या है डॉ. गौतम के मुताबिक ट्रंकल ओबेसिटी एक ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर का फैट खासतौर पर पेट के आसपास जमा होने लगता है और पेट बाहर की ओर निकल आता है. यह सामान्य मोटापे से ज्यादा खतरनाक होता है, क्योंकि यह शरीर के अंदरूनी अंगों को प्रभावित करता है और हार्मोनल असंतुलन पैदा करता है. यही वजह है कि ऐसे लोगों में डायबिटीज का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. डॉ. गौतम कहते हैं कि डायबिटीज को लाइफस्टाइल डिजीज कहा जाता है, क्योंकि यह सीधे हमारी आदतों से जुड़ी हुई है. अगर समय रहते खानपान और दिनचर्या में सुधार कर लिया जाए तो इस बीमारी से बचाव संभव है. करें तो करें क्या डॉ. गौतम बताते हैं कि हाल के वर्षों में हुए शोध भी बताते हैं कि प्री-डायबिटिक मरीज सही खानपान और नियमित व्यायाम के जरिए पूरी तरह स्वस्थ हो सकते हैं. रोजाना कम से कम आधा घंटा टहलना, संतुलित आहार लेना, मीठा और तला-भुना कम करना और पर्याप्त नींद लेना बेहद जरूरी है. कमर और वजन पर नजर रखना भी जरूरी है, क्योंकि पेट की बढ़ती चर्बी कई गंभीर बीमारियों का संकेत हो सकती है. ट्रंकल ओबेसिटी को हल्के में लेना खतरनाक साबित हो सकता है. समय रहते सतर्क होकर और जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव करके डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारी से बचा जा सकता है. About the Author Priyanshu Gupta Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें Location : Kanpur Nagar,Uttar Pradesh First Published : April 06, 2026, 21:07 IST
moringa leaves namkeen recipe healthy snacks immunity booster

Last Updated:April 06, 2026, 21:07 IST Moringa Namkeen Recipe: सहजन के पत्तों से बना नमकीन स्वादिष्ट स्नैक है. इसके साथ ही यह विटामिन और आयरन का पावरहाउस भी है. प्रोफेसर डॉ सविता के अनुसार यह साधारण सा दिखने वाला नमकीन आपकी इम्युनिटी बढ़ाकर बीमारियों से लड़ने में मदद करता है. इसे घर पर बनाने की आसान विधि क्या है. समस्तीपुर: सहजन यानी मुनगा की सब्जी तो ज्यादातर लोगों की पसंदीदा होती है. बड़े-बुजुर्ग भी इसके फायदे गिनाते नहीं थकते. लेकिन इसके पत्तों के बारे में अक्सर लोगों को ज्यादा जानकारी नहीं होती. सहजन के पत्ते पोषण का भंडार माने जाते हैं. जिनमें विटामिन, आयरन और कई जरूरी तत्व पाए जाते हैं. डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के कम्युनिटी साइंस विभाग की प्रोफेसर डॉ. सविता के अनुसार, इन पत्तों का उपयोग कर किसान और आम लोग अपने खानपान को और भी हेल्दी बना सकते हैं. खास बात यह है कि इससे स्वाद और सेहत दोनों का बेहतरीन संतुलन मिलता है. बनाने की विधिनमकीन बनाने के लिए सबसे पहले सहजन के ताजे पत्तों को तोड़कर साफ करें और हल्के गर्म पानी से धो लें. इसके बाद उन्हें धूप में अच्छी तरह सुखा लें, ताकि उसमें नमी बिल्कुल न रहे. जब पत्ते पूरी तरह सूख जाएं, तो उन्हें ग्राइंडर में डालकर बारीक पाउडर बना लें. अब इस पाउडर को बेसन मैदा में मिलाएं और स्वाद के अनुसार मसाले जैसे अजवाइन, मंगरैला, नमक, हल्दी, मिर्च पाउडर, नमक आदि डालें. चाहें तो थोड़ा सा खाने वाला सोडा भी मिला सकते हैं. जिससे नमकीन और कुरकुरा बनेगा. इसके बाद मिश्रण को अच्छी तरह गूंथकर छोटी-छोटी लोइयां बनाएं और मनचाहे आकार में काट लें. स्वाद और फायदेअब कढ़ाही में तेल गर्म करें और तैयार नमकीन को मध्यम आंच पर तल लें, जब तक वह सुनहरा और कुरकुरा न हो जाए. बाहर निकालकर ठंडा करें और इसका आनंद लें. यह नमकीन स्वाद में लाजवाब होने के साथ-साथ सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद है. सहजन के पत्तों में मौजूद पोषक तत्व शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं. नियमित सेवन से शरीर को ऊर्जा मिलती है और कई बीमारियों से बचाव भी होता है. इस तरह यह नमकीन न सिर्फ एक स्वादिष्ट स्नैक है. About the Author Amit ranjan मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें Location : Samastipur,Bihar First Published : April 06, 2026, 21:07 IST
केरल-तमिलनाडु में कांटे की टक्कर, स्टालिन की जा रही सत्ता, जानें सर्वे में एक्टर्स की जीत को लेकर

दक्षिण के राज्य केरल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर सरगर्मी तेज है। इन दोनों राज्यों में भाजपा खुद को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। चुनाव से पहले ओपिनियन पोल के मुताबिक केरल में लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) और यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट यूनाइटेड (यूडीएफ) के बीच कड़ा मुकाबला हो सकता है। वहीं, तमिलनाडु में एडीएमके एलायंस और केरल के बीच कांटे की टक्कर होने की संभावना है। केरल में वापसी टीवी पर दिए गए मैट्रिज ओपिनियन पोल के अनुसार केरल में एलडीएफ को 62-68 एंट्री, यूडीएफ को 67-73 एंट्री, बीजेपी को 05-08 एंट्री और अन्य को 0-3 एंट्री पर भारत का अनुमान है। यहां बड़ा उलटफेर हो सकता है। सर्वेक्षण में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यू.एस. अलायंस के बहुमत मिलने की संभावना है। एलडीएफ पिछले करीब एक दशक से केरल में सरकार चला रही है। वोट शेयर की बात करें तो केरल में एलडीएफ गठबंधन को 39%, यूडीएफ को 42%, पार्टी को 15% और अन्य को 4 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान है। तमिल में शिक्षकों को झटका: सर्वेक्षण मैट्रिज़ ओपिनियन पोल के अनुसार, शिक्षकों के गठबंधन में बड़ा नुकसान देखने को मिल रहा है। यहां गठबंधन को बहुमत मिलने की संभावना है. राज्य के 234 में से ड्यूक अलायंस को 102-115 एट्रिब्यूशन, एवेंजेज को 107-120, टीवीके को 5-12 एट्रिब्यूशन, अन्य को 1-6 एट्रिब्यूशन मिलने की संभावना है। राज्य में 40 फीसदी, टीचर्स अलायंस को 38 फीसदी, टीवीके को 16 फीसदी और अन्य को 6 फीसदी वोट मिलने की संभावना है. तमिलनाडु विधानसभा का चुनाव 23 अप्रैल को होने वाला है और परिणाम 4 मई को घोषित किये जायेंगे। इसके लिए नामांकन नामांकन की प्रक्रिया सोमवार (6 अप्रैल 2026) को समाप्त हो चुकी है। 2021 में हुए विधानसभा चुनाव में शिक्षकों को एक तरफा बहुमत मिला था। पार्टी 188 में चुनावी लड़की थी और 133 में जीत की एंट्री हुई थी। वहीं एडीएमके को 66 मंजिल मिली थी. केरल में 9 अप्रैल को वोट डालेंगे जबकि 4 मई को वोटिंग की घोषणा की जाएगी। पिछले विधानसभा चुनाव में सीपीआई (एम) को 17 मंजिल, सीपीआई (एम) को 62 मंजिल, कांग्रेस को 21, कांग्रेस को 2, आईयूएमएल को 15, जेडीएस को 2, केईसी (एम) को 5 मंजिल मिली थी।
रोटी और चावल का आदर्श सेवन: एक दिन में कितनी रोटी और चावल खाना स्वास्थ्यवर्धक है? ज्यादातर खाने से क्या होता है नुकसान

रोटी और चावल का आदर्श सेवन: भारतीय थाली बिना रोटी और चावल के अधूरी मानी जाती है। उत्तर भारत में जहां खेतों की रोटियां मुख्य हैं, वहीं दक्षिण और पूर्वी भारत में चावल को प्राथमिकता दी जाती है। अक्सर वजन या फिटनेस की बात आती है तो लोग सबसे पहले रोटी या चावल को छोड़ने की सलाह देते हैं। लेकिन क्या वास्तव में पूरी तरह से सही है? या फिर मात्रा तय करना अत्यंत आवश्यक है? आइए जानते हैं कि एक कार्मिक को दिन भर में कितनी रोटी और चावल खाना चाहिए? एक विशेषज्ञ व्यक्ति को अपनी कैलोरी का लगभग 50-60% भाग कार्बोहाइड्रेट लेना चाहिए। रोटी और चावल दोनों ही कार्बोहाइड्रेट के मुख्य स्रोत हैं। आपको बता दें, एक रोटी में लगभग 70-100 कैलोरी होती है। एक स्वस्थ व्यक्ति दिन में 4 से 6 रोटियां, दोपहर और रात का भोजन आसानी से खा सकता है। एक दिन में कितना चावल खाना चाहिए? एक छोटी कटोरी में पके चावल की कीमत लगभग 120-150 कैलोरी होती है। अगर आप रोटी और चावल दोनों एक साथ खा रहे हैं तो एक कटोरी चावल और दो रोटीयां पूरी तरह से खायी जाती हैं। अगर आपका वजन घटाना है, तो रात के समय चावल की जगह से भरपूर रोटी या ‘ब्राउन राइस’ खाना जरूरी है। ज्यादा चावल और रोटी से हो सकता है ये नुकसान चावल और अनाज दोनों में कार्बोहाइड्रेट अधिक होता है। यदि आप शारीरिक श्रम कम करते हैं और अधिक सेवन करते हैं, तो शरीर में अतिरिक्त कार्ब्स वसा के रूप में जमा हो जाते हैं, जिससे पेट का मोटापा बढ़ जाता है।सफेद चावल का ‘ग्लाइसेमिक स्टॉकर’ (जीआई) काफी अधिक होता है। इसे खाने से शरीर में शुगर का स्तर तेजी से बढ़ सकता है, जो डायबिटीज के लिए खतरनाक हो सकता है।अधिक मात्रा में कार्बोहाइड्रेट लेने से शरीर में ‘इंसुलिन’ की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे भोजन के बाद भारीपन और नींद महसूस होने लगती है।मैदा युक्त रोटियां या पूरी तरह से नमक युक्त चावल खाने से कब्ज और ब्लोटिंग की समस्या हो सकती है क्योंकि इनमें पोषक तत्वों की कमी होती है। अपनी थाली में रोटी-चावल के मोर्टार और हरी चावल की मात्रा की मात्रा रखें। इससे आपका पोषण भी जरूरी होगा और पेट भी जल्दी भरेगा।रि फाइन आटे के स्थान पर चोकरयुक्त आटे और सफेद चावल की जगह कभी-कभी ब्राउन चावल या लाल चावल का प्रयोग करें।कार्बोहाइड्रेट के साथ पनीर, दही, अंडा या दालें जरूर लें। प्रोटीन कार्ब्स के पाचन को धीमा कर देता है, जिससे ग्लूकोज स्तर स्थिर रहता है। (टैग्सटूट्रांसलेट)वजन घटाने के लिए प्रतिदिन कितनी रोटियां खानी चाहिए(टी)प्रति दिन कितना चावल स्वस्थ है(टी)मधुमेह के लिए चावल या रोटी(टी)रोटी और चावल के साथ संतुलित आहार(टी)चावल और रोटी खाने का सबसे अच्छा समय(टी)भारतीय आहार में स्वस्थ कार्ब्स(टी)एक दिन में कितनी रोटी खानी चाहिए(टी)एक दिन में कितनी रोटी खानी चाहिए(टी)वजन गणना के लिए रोटी स्वस्थ या स्वादिष्ट(टी)वेट लॉस के लिए
मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने का प्रस्ताव खारिज:लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष लेकर आया था महाभियोग प्रस्ताव, 193 सांसदों ने साइन किए थे

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला और राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने का महाभियोग प्रस्ताव खारिज कर दिया है। इस प्रस्ताव पर 12 मार्च को 193 विपक्षी सांसदों (लोकसभा के 130 और राज्यसभा के 63) ने साइन किए थे। कानूनी और संवैधानिक पहलुओं पर विचार के बाद स्पीकर बिरला और राधाकृष्णन ने इसे न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 की धारा 3 के तहत मंजूरी नहीं दी। इस फैसले के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकेगी, जब तक नए सिरे से संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप पहल न की जाए। नियम के अनुसार 100 सांसदों के दस्तखत जरूरी यह नोटिस INDIA गठबंधन के सभी दलों के सांसदों ने मिलकर साइन किया था। यह पहली बार है जब मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए ऐसा नोटिस दिया जा रहा है। राज्यसभा में इसके लिए कम से कम 50 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं। वहीं लोकसभा में CEC को हटाने के प्रस्ताव के लिए कम से कम 100 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं। विपक्ष का आरोप-SIR केंद्र सरकार को फायदा पहुंचाने के लिए विपक्ष का आरोप है कि CEC कई मौकों पर सत्तारूढ़ भाजपा को फायदा पहुंचाने में मदद कर रहे हैं, खासकर स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) नाम की मतदाता सूची की समीक्षा प्रक्रिया को लेकर। विपक्ष का कहना है कि यह प्रक्रिया केंद्र की सरकार को फायदा पहुंचाने के लिए की जा रही है। विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में इस प्रक्रिया को लेकर चिंता जताई गई है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग असली मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा रहा है। कानून के अनुसार प्रस्ताव मंजूर होने पर ही जांच समिति मुख्य चुनाव आयुक्त को उसी तरीके से हटाया जा सकता है जैसे सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाया जाता है। अन्य चुनाव आयुक्तों को हटाने के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त की सिफारिश जरूरी होती है। जजेज़ (इन्क्वायरी) एक्ट 1968 के अनुसार, अगर दोनों सदनों में एक ही दिन नोटिस दिया जाता है, तो जांच समिति तभी बनेगी जब दोनों सदनों में प्रस्ताव स्वीकार कर लिया जाएगा। इसके बाद लोकसभा स्पीकर और राज्यसभा चेयरमैन मिलकर एक संयुक्त जांच समिति बनाएंगे।
कैडर से प्रमुख तक: रवींद्र चव्हाण ने व्यक्तिगत चिंतन के साथ भाजपा स्थापना दिवस मनाया | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:06 अप्रैल, 2026, 20:48 IST महाराष्ट्र भाजपा प्रमुख ने पार्टी का स्थापना दिवस मनाया, कैडर संचालित विकास, आंतरिक लोकतंत्र, सामाजिक विविधता और योजनाओं, तकनीक, 5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था के दृष्टिकोण पर ध्यान केंद्रित किया। महाराष्ट्र बीजेपी अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण. (छवि X/@RaviDadaChavan के माध्यम से) भारतीय जनता पार्टी के स्थापना दिवस के अवसर पर, महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने न केवल पार्टी के विकास, बल्कि इसके भीतर अपनी यात्रा पर भी विचार किया – एक सामान्य कार्यकर्ता से राज्य इकाई के प्रमुख तक। एक लिखित नोट के माध्यम से साझा किए गए उनके संदेश में व्यक्तिगत अर्थ और पार्टी की आंतरिक संरचना के बारे में व्यापक राजनीतिक दावा दोनों शामिल थे। 6 अप्रैल, 1980 को अपनी स्थापना के बाद से पार्टी के 47वें वर्ष में प्रवेश करते हुए, चव्हाण ने भाजपा को विचारधारा में गहराई से निहित और अपने कैडर के निरंतर प्रयासों पर निर्मित एक संगठन बताया। उन्होंने अपने स्वयं के उत्थान को पार्टी के आंतरिक लोकतंत्र के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया – एक ऐसी प्रणाली जहां एक जमीनी स्तर का कार्यकर्ता रैंकों में आगे बढ़ सकता है। पीछे मुड़कर देखें तो, चव्हाण ने भाजपा की उत्पत्ति को दशकों पहले भारत के राजनीतिक माहौल की पृष्ठभूमि में रखा, जब, जैसा कि उन्होंने कहा, समाजवादी और वामपंथी विचारधाराओं का बोलबाला था। उन्होंने श्यामा प्रसाद मुखर्जी, दीन दयाल उपाध्याय और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेताओं का जिक्र किया और उन्हें एक वैकल्पिक राजनीतिक कथा को आकार देने का श्रेय दिया, जिसके बारे में उनका मानना है कि यह पार्टी का मार्गदर्शन करता रहेगा। यह भी पढ़ें: राय | स्कूटर से स्टेट्समैन तक: एक कार्यकर्ता की यात्रा महाराष्ट्र में, चव्हाण ने कई राज्य नेताओं के योगदान के माध्यम से भाजपा के विस्तार का पता लगाया। गोपीनाथ मुंडे, जिन्होंने पार्टी को ग्रामीण और ओबीसी समुदायों तक पहुंचने में मदद की, से लेकर नितिन गडकरी और देवेंद्र फड़नवीस तक, जिन्होंने संगठन और शासन दोनों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जोर निरंतरता और विकास पर रहा। साथ ही उनकी टिप्पणी ने राजनीतिक धार भी ले ली. उस आलोचना को संबोधित करते हुए, जिसने कभी भाजपा को सामाजिक रूप से विशिष्ट करार दिया था, चव्हाण ने महाराष्ट्र में पार्टी के नेतृत्व रिकॉर्ड की ओर इशारा करते हुए विविध सामाजिक पृष्ठभूमि के प्रतिनिधित्व का उल्लेख किया। विरोधियों का नाम लिए बिना, उन्होंने तर्क दिया कि पार्टी का विकास पारंपरिक जाति-आधारित आख्यानों को चुनौती देता है। इतिहास और पहचान से परे, चव्हाण ने भाजपा की वर्तमान प्राथमिकताओं को रेखांकित किया – अपने संगठनात्मक नेटवर्क का विस्तार करना, प्रौद्योगिकी को अपनाना और सरकारी योजनाओं की अंतिम मील तक डिलीवरी सुनिश्चित करना। उन्होंने इन प्रयासों को भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था में बदलने के बड़े राष्ट्रीय लक्ष्य से जोड़ा, जिसमें महाराष्ट्र को प्रमुख योगदानकर्ता के रूप में रखा गया। फिर भी, राजनीतिक संदेश के नीचे, स्वर एक कैडर-संचालित बल के रूप में पार्टी के विचार पर टिका रहा। चव्हाण के लिए, स्थापना दिवस उत्सव के बारे में कम और एक विश्वास की पुष्टि के बारे में अधिक था – कि भाजपा की ताकत सिर्फ नेतृत्व में नहीं, बल्कि उसके कार्यकर्ताओं की सामूहिक महत्वाकांक्षा में निहित है। पहले प्रकाशित: 06 अप्रैल, 2026, 20:48 IST समाचार राजनीति कैडर से प्रमुख तक: रवींद्र चव्हाण ने व्यक्तिगत चिंतन के साथ भाजपा स्थापना दिवस मनाया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट) महाराष्ट्र बीजेपी स्थापना दिवस(टी)रवींद्र चव्हाण(टी)बीजेपी का आंतरिक लोकतंत्र(टी)बीजेपी कैडर-आधारित पार्टी(टी)महाराष्ट्र में बीजेपी(टी)बीजेपी नेतृत्व विविधता(टी)बीजेपी संगठनात्मक विस्तार(टी)$5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था भारत
इंदौर में फायर सेफ्टी में कमी पर इमारतें होंगी सील:लापरवाही पर अधिकारियों पर जुर्माना, नोटिस जारी; कलेक्टर की समीक्षा बैठक में एक्शन

इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा की अध्यक्षता में सोमवार को आयोजित समय-सीमा (टीएल) बैठक में सीएम हेल्पलाइन, राजस्व प्रकरणों और शहरी व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई। बैठक में फायर सेफ्टी, ट्रैफिक प्रबंधन, बेसमेंट पार्किंग, नागरिक सुविधाएं और शिक्षा व्यवस्था को लेकर सख्त निर्देश जारी किए गए। कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि शहर की जी+3 व्यावसायिक इमारतों, जहां अधिक भीड़ रहती है, वहां अनिवार्य रूप से फायर सेफ्टी सिस्टम, उपकरण और नियमित मॉक ड्रिल होना चाहिए। इस संबंध में पूर्व में जारी सार्वजनिक सूचना के तहत 15 दिन की समय-सीमा लगभग पूरी हो चुकी है। निरीक्षण में कमी पाए जाने पर संबंधित इमारतों को सील किया जाएगा और बिल्डिंग बायलॉज के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन द्वारा लगातार निरीक्षण, नोटिस और फायर ड्रिल आयोजित की जा रही हैं। कलेक्टर ने सीएम हेल्पलाइन के लंबित पांच प्रकरणों के आवेदकों को सीधे बुलाकर उनकी समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को त्वरित निराकरण के निर्देश दिए। लापरवाही पाए जाने पर नगर निगम अधिकारी वसीम खान पर 5 हजार रुपए, सब इंजीनियर सिद्धार्थ बरावलिया पर 5 हजार रुपए और देपालपुर-बेटमा की मुख्य नगर पालिका अधिकारी रंजना गोयल पर 10 हजार रुपए का अर्थदंड लगाया गया। निगम अधिकारी मोहित पवार को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। हातोद क्षेत्र के सीमांकन प्रकरण में गंभीर लापरवाही पर संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जांच की जिम्मेदारी अपर कलेक्टर नवजीवन पवार को सौंपी गई है।
भाजपा 47 पर: 2 संसदीय सीटों से पूर्ण राजनीतिक प्रभुत्व और ‘विश्व की सबसे बड़ी पार्टी’ की स्थिति तक | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:06 अप्रैल, 2026, 20:22 IST आज, भाजपा अपने इतिहास को “संघर्ष से सेवा” में परिवर्तन के रूप में प्रस्तुत करती है, जिसका लक्ष्य 2047 तक भारत को एक पूर्ण विकसित राष्ट्र – ‘विकसित भारत’ में बदलना है। 47वें स्थापना दिवस पर एक संदेश में, पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि भाजपा की वृद्धि उसके ‘कार्यकर्ताओं’ के समर्पण का प्रमाण है। (छवि: पीटीआई) सोमवार को अपना 47वां स्थापना दिवस मनाने वाली भारतीय जनता पार्टी के लिए यह हाशिए से अभूतपूर्व प्रभुत्व तक की यात्रा रही है। इन 47 वर्षों में, भाजपा ने दो संसदीय सीटें जीतने से लेकर दुनिया का सबसे बड़ा राजनीतिक संगठन बनने तक की परिवर्तनकारी यात्रा की है। यह 47वां मील का पत्थर लगभग पांच दशकों के राजनीतिक विकास को दर्शाता है, जो वैचारिक संघर्ष के दौर से प्रमुख राष्ट्रीय शासन की स्थिति तक पहुंच गया है। आज, भाजपा अपने इतिहास को “संघर्ष से सेवा” में परिवर्तन के रूप में प्रस्तुत करती है, जिसका लक्ष्य 2047 तक भारत को एक पूर्ण विकसित राष्ट्र – ‘विकसित भारत’ में बदलना है। यहां इसकी 47 साल की यात्रा का विवरण दिया गया है: विचारधारा और जनसंघ (1951-1977) भाजपा की वंशावली 1980 में इसकी औपचारिक स्थापना तक ही सीमित नहीं है, क्योंकि इसकी वैचारिक जड़ें 1951 में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा स्थापित भारतीय जनसंघ (बीजेएस) से जुड़ी हैं। जनसंघ का निर्माण सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और एकात्म मानववाद के दोहरे स्तंभों पर किया गया था – पंडित दीनदयाल उपाध्याय द्वारा प्रतिपादित। ये दर्शन आज भी पार्टी की पहचान के केंद्र में हैं, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भाजपा को मुखर्जी, उपाध्याय और अटल बिहारी वाजपेयी के लोकतांत्रिक आदर्शों से ओत-प्रोत एक “जीवंत वैचारिक परंपरा” बताया है। इस यात्रा में पहला बड़ा बदलाव आपातकाल (1975-77) के दौरान हुआ, जब कांग्रेस को हराने के लिए जनसंघ का जनता पार्टी में विलय हो गया। यह “जनता हालाँकि, प्रयोग” अल्पकालिक था। “दोहरी सदस्यता” के मुद्दे पर, विशेष रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रति जनसंघ के पूर्व सदस्यों की निष्ठा पर आंतरिक घर्षण पैदा हुआ। जब जनता पार्टी ने मांग की कि सदस्य पार्टी और आरएसएस के बीच चयन करें, तो पूर्व जनसंघ गुट अलग हो गया, जिसके परिणामस्वरूप 6 अप्रैल, 1980 को भाजपा का आधिकारिक जन्म हुआ और अटल बिहारी वाजपेयी इसके पहले अध्यक्ष बने। ‘कमंडल’ राजनीति का उदय (1980-1996) भाजपा के प्रारंभिक वर्ष महत्वपूर्ण चुनावी चुनौतियों से भरे हुए थे। 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद लोकसभा में यह सिर्फ दो सीटों पर सिमट गई। यह झटका एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ, जिसने अधिक मजबूत वैचारिक रुख की ओर एक रणनीतिक बदलाव को प्रेरित किया। 1980 के दशक के अंत में लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में पार्टी ने खुले तौर पर ‘हिंदुत्व’ को अपनाया। 1990 की सोमनाथ से अयोध्या रथ यात्रा ने बड़े पैमाने पर जमीनी स्तर पर लामबंदी के लिए उत्प्रेरक का काम किया, जिससे भाजपा की संसदीय उपस्थिति 1989 में दो सीटों से बढ़कर 85 और उसके बाद 1991 में 120 हो गई। 1996 तक, यह पहली बार सबसे बड़ी एकल पार्टी के रूप में उभरी, हालांकि वाजपेयी की पहली सरकार प्रसिद्ध रूप से केवल 13 दिनों तक चली। वाजपेयी युग (1998-2004) 1990 के दशक के अंत में भाजपा ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के माध्यम से सफल गठबंधन राजनीति की शुरुआत की। इस युग को पोखरण-द्वितीय परमाणु परीक्षण, कारगिल युद्ध में जीत और राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे पर महत्वपूर्ण फोकस, विशेष रूप से स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना जैसे मील के पत्थर द्वारा परिभाषित किया गया था। हालाँकि, ‘इंडिया शाइनिंग’ अभियान के बावजूद, पार्टी ने 2004 में सत्ता खो दी और अगला दशक विपक्ष में बिताया – इस अवधि को अक्सर अगले प्रमुख बदलाव से पहले संघर्ष की वापसी के रूप में वर्णित किया जाता है। ‘मोदी लहर’ (2014 से अब तक) 2014 में प्रधान मंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी के चुनाव ने भारतीय राजनीतिक परिदृश्य को मौलिक रूप से बदल दिया। भाजपा 30 वर्षों में 282 सीटें हासिल करके अपने दम पर पूर्ण बहुमत हासिल करने वाली पहली पार्टी बन गई – 2019 में उसने 303 सीटों के साथ एक उपलब्धि हासिल की। 2024 तक, पार्टी ने 18वीं लोकसभा में अपना प्रभुत्व जारी रखा। इस अवधि में पार्टी के लंबे समय से चले आ रहे मुख्य वादों को पूरा किया गया है, जिसमें अनुच्छेद 370 को निरस्त करना, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का कार्यान्वयन और अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण शामिल है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया है कि पार्टी का विकास उसके समर्पण का प्रमाण है कार्यकर्ताओं (श्रमिक)। मोदी ने 47वें स्थापना दिवस के अवसर पर एक संदेश में कहा, “हमारी पार्टी ‘इंडिया फर्स्ट’ के सिद्धांत द्वारा निर्देशित होकर समाज की सेवा करने में हमेशा सबसे आगे रही है।” भाजपा के मूल दर्शन क्या हैं? भाजपा के वर्तमान शासन मॉडल के केंद्र में “का दर्शन” हैअन्त्योदय“- पंक्ति में अंतिम व्यक्ति का उत्थान। 47वें स्थापना दिवस पर अपने संदेश में, आदित्यनाथ ने पार्टी की यात्रा को “संकल्प की पूर्ति” बताया। अन्त्योदय को राष्ट्रोदय (हाशिये पर पड़े लोगों के उत्थान से लेकर राष्ट्र के उत्थान तक)”। वर्तमान नेतृत्व के आंकड़ों ने भी “राष्ट्र पहले, पार्टी उसके बाद, स्वयं अंतिम” के मंत्र को मजबूत किया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस भावना को दोहराते हुए कहा कि भाजपा ने कार्रवाई के माध्यम से अपने संकल्पों का उदाहरण दिया है, चाहे वह सीमाओं को सुरक्षित करने का हो या “भारतीय संस्कृति के ऐतिहासिक सार और महत्वपूर्ण भावना को फिर से जगाने का”। उन्होंने उन लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की जिन्होंने हिंदू ऋषि दधीचि की तरह भाजपा को “विशाल बरगद का पेड़” बनाने के लिए अपना सब कुछ बलिदान कर दिया। ‘विज़न 2047’: संघर्ष से सेवा तक जैसे-जैसे भाजपा भविष्य की ओर देखती है, उद्देश्य ‘विकसित भारत 2047’ की ओर स्थानांतरित हो गया है – भारत को अपनी स्वतंत्रता की शताब्दी तक पूर्ण विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे इस संकल्प को पूरा करने के लिए पूरे भारत में लोगों को जोड़ें और “छूटें” कहें भगवा (भगवा) पंचायत से संसद तक”। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि मोदी के नेतृत्व में, पार्टी न








