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मंदसौर पुलिस ने गुजरात से पकड़ा ड्रग तस्कर:डेढ़ किलो एमडी की तस्करी के मामले में था फरार, एसपी ने बनाई थी टीम

मंदसौर पुलिस ने गुजरात से पकड़ा ड्रग तस्कर:डेढ़ किलो एमडी की तस्करी के मामले में था फरार, एसपी ने बनाई थी टीम

मंदसौर सिटी कोतवाली पुलिस ने एमडी ड्रग्स तस्करी के एक बड़े मामले में फरार चल रहे आरोपी को गुजरात से गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। पुलिस द्वारा नशे के सौदागरों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई। एसपी के निर्देश पर थाना प्रभारी पुष्पेंद्र सिंह राठौर के नेतृत्व में टीम ने कार्रवाई करते हुए गुजरात निवासी आरोपी गोविंद भाई को पकड़ लिया। आरोपी लंबे समय से फरार चल रहा था और उसकी तलाश जारी थी। 1.5 किलो एमडी ड्रग्स के साथ पकड़े गए थे आरोपी जानकारी के अनुसार, 1 फरवरी 2026 को कोतवाली पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों गुलशेर खान पठान और नंदकिशोर उर्फ नंदू को गिरफ्तार किया था। दोनों के कब्जे से 1 किलो 500 ग्राम एमडी ड्रग्स बरामद की गई थी, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 1 करोड़ 50 लाख रुपये बताई गई। इसके अलावा आरोपियों से डोडाचूरा और दो मोटरसाइकिल भी जब्त की गई थीं। कुल जब्ती की कीमत 1 करोड़ 51 लाख 22 हजार रुपये आंकी गई। इस मामले में एनडीपीएस एक्ट की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया था। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने तस्करी नेटवर्क का खुलासा करते हुए पहले ही आरोपी अजय सिंह शक्तावत को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में उसने बताया कि मादक पदार्थ गुजरात निवासी गोविंद भाई को सप्लाई किया जाना था। इसी आधार पर पुलिस टीम को गुजरात भेजा गया, जहां कार्रवाई करते हुए आरोपी को सुरेंद्रनगर जिले के मूली थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया। यह आरोपी गिरफ्तार अजय सिंह शक्तावत, निवासी सेमलिया हीरा, थाना दलौदा, जिला मंदसौर गोविंद भाई कोडी पटेल, निवासी जैपर, तहसील मूली, जिला सुरेंद्रनगर (गुजरात) पुलिस की सतर्कता से तस्करी पर बड़ा प्रहार कोतवाली पुलिस की इस कार्रवाई को नशे के खिलाफ चल रहे अभियान में बड़ी सफलता माना जा रहा है। पुलिस का कहना है कि अवैध मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश भी जारी है और अभियान लगातार जारी रहेगा।

कान में दर्द से हो रहे हैं परेशान? अदरक और इस पाउडर से बनाएं देसी तेल, तुरंत मिलेगा राहत

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Last Updated:April 06, 2026, 20:02 IST आजकल हेडफोन और ईयरबड्स के ज्यादा इस्तेमाल से कान दर्द बढ़ रहा है और आयुर्वेद इसे वात दोष से जोड़ता है. इस दर्द से बचने के लिए होममेड नुस्खा अपनाया जा सकता है. इसके लिए अदरक, सेंधा नमक और सरसों तेल की बूंदें हल्के दर्द में राहत दे सकती हैं. आइए जानते हैं इसके फायदे… ख़बरें फटाफट कान के दर्द से राहत आज के समय में कान का दर्द एक आम समस्या बनता जा रहा है, जिसका एक बड़ा कारण लगातार हेडफोन और ईयरबड्स का इस्तेमाल है. लंबे समय तक तेज आवाज में सुनने से न सिर्फ कानों पर दबाव पड़ता है, बल्कि सुनने की क्षमता पर भी असर पड़ सकता है. कई बार यह समस्या धीरे-धीरे शुरू होती है और लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन समय के साथ यह दर्द बढ़ सकता है. आयुर्वेद के अनुसार, कान से जुड़ी अधिकतर समस्याएं शरीर में वात दोष के असंतुलन से जुड़ी होती हैं. जब वात बढ़ जाता है, तो कानों में सूखापन, जकड़न और हल्का दर्द महसूस होने लगता है, जो आगे चलकर ज्यादा परेशानी पैदा कर सकता है. ऐसे में आयुर्वेद में कुछ घरेलू उपाय बताए गए हैं, जो शुरुआती और हल्के कान दर्द में राहत देने में मदद कर सकते हैं. पुराने समय से एक खास तेल का इस्तेमाल किया जाता रहा है, जिसे घर पर आसानी से तैयार किया जा सकता है. इसके लिए अदरक का रस, सेंधा नमक और नींबू की कुछ बूंदों को सरसों के तेल में डालकर हल्का गर्म किया जाता है. जब यह मिश्रण अच्छे से पक जाए, तो इसे छानकर ठंडा कर लिया जाता है. इसके बाद इस तेल की दो-दो बूंद प्रभावित कान में डाली जाती है. यह उपाय धीरे-धीरे दर्द को कम करने में सहायक माना जाता है और कानों को आराम पहुंचाता है. आयुर्वेद के अनुसार क्यों होता है कान दर्दआयुर्वेद में कान दर्द को वात दोष की वृद्धि से जोड़ा जाता है. जब शरीर में वात बढ़ता है, तो इसका असर कानों पर भी पड़ता है. इससे सूखापन, खिंचाव और दर्द जैसी समस्याएं होने लगती हैं. इसलिए वात को संतुलित रखना जरूरी माना जाता है. अदरक को आयुर्वेद में प्राकृतिक दर्द निवारक माना जाता है. इसकी गर्म तासीर दर्द को कम करने में मदद करती है. साथ ही यह वात को शांत करने में भी सहायक होता है, जिससे कानों में होने वाली परेशानी धीरे-धीरे कम हो सकती है. सेंधा नमक का असरसेंधा नमक भी दर्द और सूजन को कम करने में मददगार माना जाता है. जब इसे अदरक के साथ इस्तेमाल किया जाता है, तो यह मिश्रण और भी प्रभावी हो जाता है और कान के दर्द में राहत देने में सहायक बनता है. इस तेल को इस्तेमाल करने से पहले उसे हल्का गुनगुना कर लें. फिर साफ ड्रॉपर की मदद से प्रभावित कान में एक से दो बूंद डालें. इससे धीरे-धीरे आराम महसूस हो सकता है. इस्तेमाल से पहले रखें सावधानीअगर कान में किसी तरह का घाव है, पस आ रहा है या कान बह रहा है, तो इस तेल का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. ऐसी स्थिति में पहले चिकित्सक से सलाह लेना जरूरी है. कान के दर्द से बचने के लिए साफ-सफाई बहुत जरूरी है. नहाते समय ध्यान रखें कि साबुन या पानी कान के अंदर न जाए. इसके अलावा समय-समय पर कानों की हल्की सफाई करते रहें, ताकि संक्रमण का खतरा कम हो सके. About the Author Vividha Singh विविधा सिंह न्यूज18 हिंदी (NEWS18) में पत्रकार हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में बैचलर और मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में ये 3 वर्षों से काम कर रही हैं. फिलहाल न्यूज18…और पढ़ें Location : Delhi,Delhi,Delhi First Published : April 06, 2026, 20:02 IST

Todays Sarkari Naukri 2026 | MP Police, Bihar, Delhi Govt Jobs & Vacancies

Todays Sarkari Naukri 2026 | MP Police, Bihar, Delhi Govt Jobs & Vacancies

Hindi News Career Todays Sarkari Naukri 2026 | MP Police, Bihar, Delhi Govt Jobs & Vacancies 11 मिनट पहले कॉपी लिंक आज की सरकारी नौकरी में जानकारी ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में 380 पदों पर भर्ती, एमपी पुलिस में कॉन्स्टेबल बैंड की 679 वैकेंसी और DDA में कंसल्टेंट की 17 ओपनिंग्स की। साथ ही NITCON दिल्ली में 100 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन की आखिरी तारीख 8 अप्रैल की। इन जॉब्स के बारे में पूरी जानकारी के साथ आवेदन की प्रक्रिया यहां देखिए… 1. ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में 380 पदों पर भर्ती, बिना एग्जाम के सिलेक्शन ऑर्डिनेंस फैक्ट्री, खमरिया में डेंजर बिल्डिंग वर्कर्स के 380 पदों पर भर्ती निकली है। उम्मीदवारों को ऑफलाइन माध्यम से आवेदन करना होगा। वैकेंसी डिटेल्स : पद का नाम पदों की संख्या टेन्योर बेस्ड डेंजर बिल्डिंग वर्कर 350 टेन्योर बेस्ड ग्रेजुएट, डिप्लोमा प्रोजेक्ट इंजीनियर 30 टोटल 380 एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : डेंजर बिल्डिंग वर्कर : NCVT द्वारा जारी नेशनल अप्रेंटिस सर्टिफिकेट होना चाहिए। यह प्रमाण पत्र अटेंडेंट ऑपरेटर केमिकल ट्रेड में होना चाहिए। फीडर ट्रेड्स जैसे केमिकल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल और अन्य संबंधित विषयों के उम्मीदवार भी आवेदन कर सकते हैं। ग्रेजुएट, डिप्लोमा प्रोजेक्ट इंजीनियर : केमिकल इंजीनियरिंग में बीई, बीटेक की डिग्री या एम्युनिशन, एक्सप्लोसिव्स मेन्यूफैक्चरिंग या हैंडलिंग में अप्रेंटिसशिप के साथ केमेस्ट्री में बीएससी की डिग्री। एज लिमिट : न्यूनतम : 18 साल अधिकतम : 40 साल ओबीसी : 3 साल की छूट एससी, एसटी : 5 साल की छूट सैलरी : 19 हजार 900 रुपए प्रतिमाह अन्य अलाउंस का लाभ भी मिलेगा। सिलेक्शन प्रोसेस : मेरिट बेसिस पर ट्रेड टेस्ट/प्रैक्टिकल टेस्ट इंटरव्यू ऐसे करें आवेदन : ऑफिशियल वेबसाइट munitionsindia.in से आवेदन फॉर्म का पीडीएफ निकालें। मांगे गए डिटेल्स दर्ज करें। जरूरी डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें। फॉर्म पर अपने सिग्रेचर करें। लिफाफे पर “Application for Tenure Based DBW” जरूर लिखें। इसे ‘चीफ जनरल मैनेजर, ऑर्डिनेंस फैक्ट्री खमरिया’ जिला जबलपुर, – पिन, 482005 पर स्पीड पोस्ट या रजिस्टर्ड पोस्ट से भेजें। टेन्योर बेस्ड डेंजर बिल्डिंग वर्कर नोटिफिकेशन टेन्योर बेस्ड प्रोजेक्ट इंजीनियर भर्ती नोटिफिकेशन ऑफिशियल वेबसाइट लिंक 2. एमपी पुलिस में 679 भर्ती, 10वीं, 12वीं पास करें अप्लाई एमपी पुलिस ने कॉन्स्टेबल बैंड के पदों पर 679 भर्ती निकाली है। कार्यालय पुलिस महानिरीक्षक विसबल (मुख्यालय) पुलिस मुख्यालय भोपाल की तरफ से इस भर्ती का ऑफिशियल नोटिफिकेशन जारी किया गया है। ऑनलाइन आवेदन में करेक्शन की तारीख 5 अप्रैल से 24 अप्रैल 2026 तय की गई है। इस भर्ती के लिए सिर्फ पुरुष उम्मीदवार ही आवेदन कर सकते हैं। एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : 10वीं, 12वीं पास। अनुसूचित जनजाति के 8वीं पास उम्मीदवार भी आवेदन कर सकते हैं। शारीरिक योग्यता : कैटेगरी वाइस हाइट और चेस्ट : कैटेगरी का नाम हाइट चेस्ट सामान्य, अन्य पिछड़ा वर्ग, ईडब्ल्यूएस 168 81-86 सेमी मराठा, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति 165 79-84 सेमी गोरखा, गढवाली, कुमाउ 158 76-81 सेमी एज लिमिट : 19 अप्रैल 2026 को उम्मीदवारों ने न्यूनतम 18 वर्ष की उम्र पूरी कर ली हो। एमपी के पुरुष अनारक्षित, ईडब्ल्यूएस, अन्य प्रदेश के उम्मीदवारों की उम्र 33 वर्ष होना चाहिए। आरक्षित, श्रेणी एससी, एसटी और ओबीसी के लिए : अधिकतम 38 साल आरक्षित वर्गों को नियमानुसार छूट दी जाएगी। विक्रम पुरस्कार से सम्मानित उम्मीदवारों को अधिकतम उम्र में 5 साल की छूट दी जाएगी। सैलरी : 19500-62000 रुपए प्रतिमाह सिलेक्शन प्रोसेस : स्किल टेस्ट बैंड प्लेइंग टेस्ट इंटरव्यू फीस : सामान्य : 500 रुपए एससी,एसटी,ओबीसी,ईडब्ल्यूएस : (केवल एमपी के मूल निवासी) : 250 रुपए एमपी ऑनलाइन की पोर्टल फीस : 150 रुपए इन म्युजिकल इंस्ट्रूमेंट्स बजाने में एक्सपर्ट होना जरूरी : पिकलो कॉन्सर्ट फिल्यूट ओबो क्लारिनेट टेनर सेक्सोफोन फ्रेच हार्न ट्रम्पिट कॉरनेट ट्रम्बोन बसून इफोनियम बेस ट्यूबा बैग पाईप टेनर ड्रम बिगुलसाईड ड्रम बेस ड्रम की-बोर्ड/आर्गन/पियानो, गिटार, वायलिन/वायोला/स्ट्रिंगबेस/प्रकाशन/ड्रम/भारतीय शास्त्रीय वाद्ययंत्र में एक्सपर्ट आवेदन कर सकते हैं। ऐसे करें आवेदन : ऑफिशियल वेबसाइट mponline.gov.in पर जाएं। “MP Police Constable Band Recruitment 2026” पर क्लिक करें। रजिस्ट्रेशन करके फॉर्म भरें। डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें। फीस जमा करके फॉर्म सब्मिट कर दें। ऑनलाइन आवेदन लिंक ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक 3. DDA ने कंसल्टेंट के 17 पदों पर निकाली भर्ती, सैलरी 75 हजार से ज्यादा दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने 17 पदों पर भर्ती निकाली है। उम्मीदवार डीडीए की ऑफिशियल वेबसाइट dda.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। कॉन्ट्रेक्चुअल बेस पर यह पद 01 साल के लिए भरा जाएगा। इसके बाद डीडीए चाहे तो कॉन्ट्रेक्ट को आगे भी बढ़ा सकता है। वैकेंसी डिटेल्स : पद का नाम पदों की संख्या कंसल्टेंट (लैंडस्केप आर्किटेक्ट) 14 कंसल्टेंट (आर्किटेक्ट) 3 कुल पदों की संख्या 17 एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : कंसल्टेंट (लैंडस्केप आर्किटेक्ट): लैंडस्केप आर्किटेक्ट में मास्टर्स की डिग्री या समकक्ष डिग्री। या बैचलर डिग्री आर्किटेक्ट में पूरी की हो। मास्टर्स की डिग्री के साथ ही लैंडस्केप प्रोजेक्ट पर काम करने का प्रोफेशनल एक्सपीरियंस। आर्किटेक्चरल बेस्ड सॉफ्टवेयर जैसे ऑटो सीएडी,एडोब क्रिएटिव सूट, एमएस ऑफिस पर काम करना आना चाहिए। इस क्षेत्र में 5 से 10 साल तक एक्सपीरियंस होना चाहिए। कंसल्टेंट (आर्किटेक्ट): मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से बैचलर की डिग्री। साथ में लैंडस्केप प्रोजेक्ट पर काम करने का एक्सपीरियंस। आर्किटेक्चरल बेस्ड सॉफ्टवेयर पर काम करने का नॉलेज। एज लिमिट : अधिकतम : 45 साल सिलेक्शन प्रोसेस : इंटरव्यू के बेसिस पर शॉर्टलिस्टिंग सैलरी : पद का नाम सैलरी कंसल्टेंट (लैंडस्केप आर्किटेक्ट) 52,500- 76,000 रुपए प्रतिमाह कंसल्टेंट (आर्किटेक्ट) 47,000-64,000 रुपए प्रतिमाह दोनों ही पदों के लिए 1500- 3000 रुपए प्रतिमाह कन्वेंस के लिए दिया जाएगा। ऐसे करें आवेदन : ऑफिशियल वेबसाइट dda.gov.in पर जाएं। “ऑनलाइन आवेदन” लिंक पर क्लिक करें। रजिस्ट्रेशन प्रोसेस पूरी करें। जरूरी डिटेल्स भरें और डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें। फीस जमा करके फॉर्म सब्मिट करें। इसका प्रिंटआउट निकाल कर रखें। ऑफिशियल वेबसाइट लिंक ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक 4. NITCON दिल्ली में 100 पदों पर भर्ती, लास्ट डेट 8 अप्रैल NITCON लिमिटेड, दिल्ली में 100 पदों पर भर्ती निकली है। इस भर्ती के लिए आवेदन की आखिरी तारीख 8 अप्रैल तय की गई है। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट www.applicationportal.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। वैकेंसी डिटेल्स : पद का नाम पदों की संख्या जूनियर इंजीनियर (सिविल) 80 जूनियर इंजीनियर (इलेक्ट्रिकल या मैकेनिकल) 20 कुल पदों की संख्या 100 एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : कम से कम 60% अंकों के साथ सिविल, इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल में डिप्लोमा या बीई, बीटेक की डिग्री। डिप्लोमा होल्डर्स को 3 साल का एक्सपीरियंस होना चाहिए। वहीं

Kaushambi Reporter Jobs | Dainik Bhaskar App Block Level Apply

Kaushambi Reporter Jobs | Dainik Bhaskar App Block Level Apply

कौशांबी16 मिनट पहले कॉपी लिंक कौशांबी जिले में ब्लॉक स्तर पर रिपोर्टर बनने का बेहतरीन मौका है। दैनिक भास्कर डिजिटल को कौशांबी जिले के नवादा, कौशांबी, कड़ा, सिराथू और मूरतगंज ब्लॉक में पत्रकारिता के लिए रिपोर्टर की आवश्यकता है। ब्लॉक स्तर की खबरों पर अगर आपकी पकड़ अच्छी है और आप में थोड़ी बहुत लीडिंग क्वालिटी है तो आप ब्लॉक रिपोर्टर बन सकते हैं। इसके लिए आपको ऑनलाइन आवेदन करना होगा। ऑनलाइन आवेदन के लिए लिंक नीचे दिया गया है। ध्यान रहे कि जिले में जिन ब्लॉकों पर रिपोर्टर की जरूरत है, इच्छुक साथी संबधित ब्लॉक का ही रहने वाला हो। रिपोर्टर नियुक्ति की यह प्रक्रिया पूरी तरह नि:शुल्क है। जरूरी योग्यता 10वीं पास हिंदी बोलने, पढ़ने और लिखने में दक्षता। आयु 18 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए। खबरों की समझ हो। ब्लॉक व पंचायत क्षेत्र में लोगों से अच्छा संपर्क हो। जिस ब्लॉक के लिए आवेदन कर रहे हैं, उसी क्षेत्र के दायरे में रहते हों। ऑनलाइन आवेदन के लिए यह स्टेप फॉलो करें स्टेप 1- नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें, गूगल फॉर्म खुलेगा। स्टेप 2- आप जिस ब्लॉक क्षेत्र में रहते हैं, उसे सेलेक्ट करें। स्टेप 3- फिर अपनी जानकारी भरकर भेज दें। इसके बाद दैनिक भास्कर की टीम आपको कॉल करके जल्द ही संपर्क करेगी। कौशांबी जिले में ब्लॉक रिपोर्टर के आवेदन के लिए यहां क्लिक करें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

"जल सरंचना के फोटो वास्तविक हो, एआई फोटो ना लगाएं":खंडवा कलेक्टर के पंचायत सचिवों को निर्देश, पहले फर्जीवाड़ा आया था सामने

"जल सरंचना के फोटो वास्तविक हो, एआई फोटो ना लगाएं":खंडवा कलेक्टर के पंचायत सचिवों को निर्देश, पहले फर्जीवाड़ा आया था सामने

खंडवा जिले में जल संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने के उद्देश्य से चलाए जा रहे जल संचय, जन भागीदारी अभियान-2.0 के तहत अब जिला प्रशासन ने मॉनिटरिंग और पारदर्शिता पर खास जोर देना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में सोमवार को जनपद पंचायत खंडवा के सभाकक्ष में जलग्रहण संरचनाओं के फोटो पोर्टल पर अपलोड करने को लेकर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी संरचनाओं के निर्माण से पहले और बाद के फोटो अनिवार्य रूप से अपलोड किए जाएं। उन्होंने कहा कि एक ही फोटो का बार-बार उपयोग न किया जाए और सभी तस्वीरें पूरी तरह वास्तविक हों। कलेक्टर ने चेतावनी देते हुए कहा कि एआई या फर्जी फोटो अपलोड करने पर संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सचिवों से मौके पर कराया लाइव अभ्यास प्रशिक्षण को केवल औपचारिक न रखते हुए कलेक्टर गुप्ता ने पंचायत सचिवों और ग्राम रोजगार सहायकों से मीटिंग हॉल के बाहर बनी 10 जलग्रहण संरचनाओं के फोटो मौके पर ही अपलोड करवाए। इससे फील्ड स्तर पर आने वाली तकनीकी दिक्कतों को समझने और तुरंत समाधान देने में मदद मिली। एआई फोटो के इस्तेमाल से हो चुका फर्जीवाड़े का खुलासा जल संचय, जन भागीदारी अभियान 1.0 के तहत खंडवा जिले को सबसे ज्यादा जल संरचनाओं के निर्माण में देश में पहला पुरस्कार मिल चुका है। इसके लिए कलेक्टर ऋषव गुप्ता और सीईओ जिला पंचायत डॉ. नागार्जुन बी. गौड़ा राष्ट्रपति से सम्मानित हो चुके हैं। इस अभियान में फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ, जब जमीनी स्तर पर कई काम अधूरे पाए गए और अधिकांश जगह काम शुरू ही नहीं किए गए थे। एआई आधारित फोटो तक का इस्तेमाल किया गया। मामले में दैनिक भास्कर के खुलासे के बाद जांच दल गठित हुआ और इसके बाद जमीन पर कार्य किए गए। यह खबर भी पढ़ें… 2-2 फीट गड्‌ढे को कुआं बताया; कलेक्टर-सीईओ का सरकारी झूठ एमपी के खंडवा जिले को सबसे ज्यादा जल संरचनाओं के निर्माण और संरक्षण के उत्कृष्ट कामों के लिए जो पहला पुरस्कार मिला है, दरअसल वो इस साल का सबसे बड़ा सरकारी झूठ है। प्रशासन ने जिन तालाबों, डक वैल और स्टॉप डैम के निर्माण का दावा किया वो हकीकत में जमीन पर मौजूद ही नहीं है। पूरी खबर पढ़ें…

SEAL Team 6 Rescue US Airman in Iran

SEAL Team 6 Rescue US Airman in Iran

वॉशिंगटन डीसी/तेहरान11 मिनट पहले कॉपी लिंक सील टीम-6 पर बनी एक फिक्शनल फिल्म का दृश्य अमेरिका ने ईरान में लापता दोनों पायलट्स को 36 घंटे के भीतर रेस्क्यू कर लिया। ईरान में 3 अप्रैल को एक ऑपरेशन पर गए F-15E फाइटर जेट्स पर हमला हुआ था। विमान के क्रैश होने से पहले दोनों पायलट्स पैराशूट की मदद से इजेक्ट हो गए थे। इसमें से एक पायलट को अमेरिकी सेना ने कुछ ही घंटे बाद ढूंढ़ लिया जबकि दूसरे के लिए एक बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। इसकी सफलता की तारीफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी की। उन्होंने इसे देश के इतिहास का सबसे खतरनाक रेस्क्यू मिशन बताया। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि अमेरिकी नेवी की स्पेशल यूनिट ‘सील टीम-6’ ने इसे अंजाम दिया। यह वही स्पेशल फोर्स है जिसने 15 साल साल पहले 2011 में आतंकी ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान के एबटाबाद में घुसकर मारा था। इजराइल के साथ से संभव हुआ मिशन ईरान के साथ जारी संघर्ष के बीच यह 2026 का पहला कन्फर्म्ड अमेरिकी ग्राउंड ऑपरेशन माना जा रहा है। एक सैनिक को बचाने के लिए बड़े स्तर पर सैन्य ताकत का इस्तेमाल किया गया, जो इस मिशन की अहमियत दिखाता है। मिशन को सफल बनाने के लिए अमेरिका ने कई लेयर में रणनीति बनाई। पहले, इजराइली खुफिया एजेंसी ने ईरानी सेना की मूवमेंट ट्रैक की। फिर हवाई हमले 36 घंटे के लिए रोके गए ताकि रेस्क्यू टीम आगे बढ़ सके। जिसके बाद अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA ने फर्जी जानकारी फैलाई कि ऑफिसर सड़क के रास्ते से भाग निकला है। ऊपर अमेरिकी फाइटर जेट्स निगरानी कर रहे थे, जबकि जमीन पर कमांडो धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे थे। अमेरिकी नेवी की स्पेशल यूनिट SEAL टीम-6 ने ऑपरेशन शुरू किया। जब कमांडो अफसर तक पहुंचे, तब ईरानी सेना बेहद करीब थी। ऐसे में भारी गोलीबारी कर दुश्मन को पीछे धकेला गया। इसके बाद ट्रांसपोर्ट विमान फायरिंग के बीच उतरे और घायल अफसर को बाहर निकाला गया। अमेरिकी सेना ने अपने ही दो विमान नष्ट किए ऑपरेशन के बीच इस्फाहन के पास तकनीकी खराबी के कारण दो अमेरिकी ट्रांसपोर्ट विमान काम नहीं कर पाए। इन विमानों को मौके पर ही विस्फोट से नष्ट कर दिया गया, ताकि कोई संवेदनशील तकनीक दुश्मन के हाथ न लगे। इस मिशन की तुलना 2011 में पाकिस्तान के एबटाबाद में हुए ऑपरेशन से की जा रही है, जब ओसामा बिन लादेन को मार गिराया गया था। तब भी अमेरिकी कमांडो ने खराब हेलीकॉप्टर को नष्ट कर दिया था। तस्वीर में अमेरिकी ट्रांसपोर्ट विमान जलते हुए नजर आ रहे हैं, जिन्हें ईरान से निकलने से पहले आग लगा दी गई। (सोर्स- Osinttechnical) एबटाबाद से ज्यादा बड़ा था ईरान का रेस्क्यू मिशन ईरान में रेस्क्यू का यह मिशन एबटाबाद ऑपरेशन से ज्यादा बड़ा था। उसमें 24 सील कमांडो दो स्टेल्थ ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टरों में पाकिस्तान के अंदर घुसे थे। लेकिन इसमें सैकड़ों स्पेशल फोर्स सैनिक, दर्जनों लड़ाकू विमान और हेलिकॉप्टर, साइबर और स्पेस टेक्नोलॉजी। सब एक ही मिशन के लिए जुटे थे। ईरान के अंदर, इस्फहान के पास एक छोड़े गए एयरस्ट्रिप पर फॉरवर्ड रिफ्यूलिंग पॉइंट बनाया गया। दो MC-130J कमांडो विमान और MH-6 हेलिकॉप्टर वहां उतरे। लेकिन दोनों ट्रांसपोर्ट विमान वहीं फंस गए और उड़ नहीं पाए। नए विमान बुलाए गए। वे गोलाबारी के बीच पहुंचे। आखिरकार, सील टीम 6 ने एयरमैन को ढूंढ लिया। मिशन कामयाब- एक भी अमेरिकी सैनिक नहीं मरा अब जरा सी भी गलती की गुंजाइश नहीं थी। ईरानी फोर्स पास पहुंच रही थी। कमांडो ने फायरिंग कर उन्हें रोका। ऊपर से हवाई हमले कर दुश्मन के काफिलों को निशाना बनाया गया। घायल एयरमैन को पहाड़ों से निकालकर विमान में बैठाया गया, साथ ही फंसी हुई रेस्क्यू टीम को भी। तीन नए ट्रांसपोर्ट विमान उन्हें लेकर ईरान से बाहर निकले। इस मिशन में अमेरिका का कोई सैनिक नहीं मरा। ईरान में ऑपरेशन नाकाम, फिर बनी सीगल टीम-6 1979 में ईरान की इस्लामिक क्रांति के बाद तेहरान में अमेरिकी दूतावास पर कब्जा हो गया। इस दौरान 52 अमेरिकी बंधक बना लिए गए। इन्हें छुड़ाने के लिए अमेरिका ने अप्रैल 1980 में एक मिशन ऑपरेशन ईगल क्लॉ लॉन्च किया। ईरान के रेगिस्तान में तकनीकी खराबी, मौसम और कोऑर्डिनेशन फेल होने से यह मिशन असफल हो गया। इसमें 8 अमेरिकी सैनिक मारे गए थे। तब अमेरिका को एहसास हुआ कि उसके पास ऐसा यूनिट नहीं है जो हाई-रिस्क काउंटर-टेरर ऑपरेशन में हॉस्टेज रेस्क्यू और दुश्मन के इलाके में सीक्रेट मिशन को पूरी क्षमता से कर सके। इस नाकामी के तुरंत बाद अमेरिकी नेवी ने सील टीम-6 बनाया। इसका असली नाम नेवेल स्पेशल वारफेयर डेवलपमेंट ग्रुप है। इसका कोड नेम DEVGRU है। यह डेवलेपमेंट और ग्रुप से मिलकर बनाया गया है। सील टीम 6 को अफगानिस्तान के नेता हामिद करजई की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई थी। साल 2002 में कंधार में उन पर एक जानलेवा हमला हुआ। इस दौरान एक कमांडो घायल हो गया था।उसने अपने शर्ट से सिर से निकल रहा खून रोककर स्थिति संभाली और ड्यूटी को अंजाम दिया। टीम-6 नाम सोवियत यूनियन को धोखा देने के लिए रखा इससे पहले रेगुलर स्पेशल ऑपरेशन के लिए सील टीम-1 और सील टीम- 2 थी। लेकिन सबसे सीक्रेट मिशन को पूरा करने के लिए सील टीम-6 बनाई गई। तब टीम-6 नाम जानबूझकर रखा गया था ताकि सोवियत यूनियन को लगे कि अमेरिका के पास कई सील टीमें हैं। सील टीम 6 को इस तरह तैयार किया जाता है कि वे जमीन, समुद्र और हवा तीनों जगह ऑपरेशन कर सकें। रात, खराब मौसम, दुश्मन के इलाके हर हालत में काम करें और बिना पहचान के सीक्रेट मिशन पूरा करें। जैसे अमेरिका सेना के पास डेल्टा फोर्स है वैसे ही नेवी की सील टीम-6 है। दोनों ही टायर-1 (सबसे ऊंचा स्तर) यूनिट हैं। फर्क सिर्फ ऑपरेटिंग डोमेन का है। जैसे डेल्टा फोर्स जमीन आधारित ऑपरेशन के लिए है। वहीं सील टीम-6 समुद्र और मल्टी डोमेन ऑपरेशन के लिए। दुनिया में सबसे कठिन एंट्री टेस्ट सील टीम 6 में शामिल होना दुनिया की सबसे कठिन स्पेशल फोर्स चयन प्रक्रियाओं में से एक माना जाता है। इसमें सीधे भर्ती नहीं होती। सबसे पहले अमेरिकी नेवी की स्पेशल यूनिट Navy

4 Astronauts Travel 4.02 Lakh Km From Earth; Moon Dark Side Photo

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वॉशिंगटन2 मिनट पहले कॉपी लिंक नासा के ओरियन स्पेसक्राफ्ट में सवार चार अंतरिक्ष यात्री चांद की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। भारतीय समयानुसार आज 6 अप्रैल की सुबह वे चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में प्रवेश कर चुके हैं। आज का दिन इस मिशन के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। अंतरिक्ष यात्री न केवल चांद के पिछले हिस्से को देखेंगे, बल्कि वे पृथ्वी से इतनी दूर चले जाएंगे जहां आज तक कोई भी इंसान नहीं पहुंचा है। यह मिशन अपोलो 13 का 1970 में बनाया गया धरती से सबसे ज्यादा दूरी का 400,171.18 km का रिकॉर्ड तोड़ देगा। इन अंतरिक्ष यात्रियों के पृथ्वी से 402,336 किमी दूर तक पहुंचने की उम्मीद है। भारतीय समयानुसार आर्टेमिस-II फ्लाईबाय का पूरा शेड्यूल इवेंट समय (EST) समय (IST) अपोलो-13 का रिकॉर्ड टूटेगा 1:56 PM 12:26 AM एस्ट्रोनॉट्स का संदेश 2:10 PM 12:40 AM चांद का ऑब्जर्वेशन शुरू 2:45 PM 01:15 AM संपर्क टूटेगा 6:44 PM 05:14 AM चांद के सबसे करीब 7:02 PM 05:32 AM पृथ्वी से अधिकतम दूरी 7:07 PM 05:37 AM पृथ्वी से दोबारा संपर्क 7:25 PM 05:55 AM सूर्य ग्रहण 8:35 PM 07:05 AM चांद का ऑब्जर्वेशन खत्म 9:20 PM 07:50 AM नोट: EST यानी ईस्टर्न स्टैंडर्ड टाइम और IST इंडियन स्टैंडर्ड टाइम के बीच 10 घंटे 30 मिनट का अंतर है। EST का टाइम 6 अप्रैल का हैं। IST का टाइम 7 अप्रैल का हैं। चांद के अंधेरे हिस्से की फोटोग्राफी होगी नासा ने क्रू को चांद की सतह के 30 खास टारगेट की लिस्ट भेजी है, जिनकी उन्हें फोटोग्राफी और ऑब्जर्वेशन करना है। इसमें सबसे प्रमुख है ‘ओरिएंटल बेसिन’ , जो करीब 600 मील चौड़ा एक क्रेटर है। यह 3.8 अरब साल पहले किसी बड़े उल्कापिंड के टकराने से बना था। इसके अलावा वे ‘हर्ट्जस्प्रंग बेसिन’ का भी अध्ययन करेंगे ताकि समझ सकें कि समय के साथ चांद की सतह कैसे बदलती है। यह उस एप्लिकेशन का स्क्रीनशॉट है जिसे आर्टेमिस II का क्रू अपने PCDs पर देखता है। यह सॉफ्टवेयर उन्हें चांद से जुड़े वैज्ञानिक ऑब्जर्वेशन प्लान को पूरा करने में गाइड करता है। इस खास सॉफ्टवेयर को ‘क्रू लूनर ऑब्जर्वेशन टीम’ ने बनाया है, जो आर्टेमिस II की लूनर साइंस टीम का ही एक हिस्सा है। इस स्क्रीनशॉट में आप चंद्रमा के नीचे दाईं ओर ‘ओरिएंटल बेसिन’ देख सकते हैं, जिस पर टारगेट नंबर 12 का गोला बना है। इसके बाईं ओर टारगेट नंबर 13, ‘हर्ट्जस्प्रंग बेसिन’ दिखाई दे रहा है। सातवां दिन: चांद की ग्रेविटी से पृथ्वी पर लौटेगा यान चांद के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र से बाहर निकलकर यान वापस धरती की ओर अपना सफर शुरू कर देगा। आर्टेमिस-2 का रास्ता काफी हद तक 1970 के अपोलो-13 मिशन जैसा है। यह चांद के गुरुत्वाकर्षण का इस्तेमाल ‘गुलेल’ की तरह करेगा, जो यान को वापस पृथ्वी की ओर धकेल देगा। पूरे मिशन में चारों अंतरिक्ष यात्री करीब 11.02 लाख किमी का सफर तय करेंगे। दसवां दिन: 10 अप्रैल को प्रशांत महासागर में गिरेगा यान भारतीय समय के अनुसार 11 अप्रैल को सुबह 6:30 बजे ओरियन पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करेगा। 6:36 बजे यह सैन डिएगो के पास प्रशांत महासागर में ‘स्प्लैशडाउन’ करेगा। इसके बाद ह्यूस्टन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी, जिसमें मिशन की जानकारी दी जाएगी। मकसद: ‘लाइफ सपोर्ट सिस्टम’ की जांच चाहता है नासा मिशन का मकसद स्पेसक्राफ्ट के ‘लाइफ सपोर्ट सिस्टम’ की जांच करना है। नासा देखना चाहता है कि अंतरिक्ष में इंसानों के रहने के लिए यह कितना सुरक्षित है। यान अभी चंद्रमा की सतह पर नहीं उतरेगा, लेकिन भविष्य में चंद्रमा पर इंसानों के बसने का रास्ता आसान बनाएगा। 4 एस्ट्रोनॉट्स: पहली बार कोई महिला चांद के करीब पहुचेगी मिशन में नासा के तीन और कनाडाई स्पेस एजेंसी (CSA) का एक अंतरिक्ष यात्री शामिल है। 1. रीड वाइजमैन: यूएस नेवी के टेस्ट पायलट रह चुके वाइजमैन (50) मिशन कमांडर हैं। 2014 में स्पेस स्टेशन पर 6 महीने बिताने वाले वाइजमैन जमीन पर ऊंचाई से डरते हैं। 2020 में अपनी पत्नी को खोने के बाद वाइजमैन अपनी दो बेटियों की अकेले परवरिश कर रहे हैं। 2. क्रिस्टीना कोच: इंजीनियर और फिजिसिस्ट क्रिस्टीना कोच (47) मिशन स्पेशलिस्ट हैं। वह अंतरिक्ष में सबसे लंबे समय तक रहने वाली महिला (328 दिन) का रिकॉर्ड बना चुकी हैं। बचपन में अपोलो-8 की खींची गई ‘अर्थराइज’ फोटो देखकर उन्होंने अंतरिक्ष यात्री बनने की ठानी थी। 3. जेरेमी हैनसन: कनाडा के पूर्व फाइटर पायलट जेरेमी हैनसन (50) मिशन स्पेशलिस्ट हैं। अगर सब-कुछ प्लान के मुताबिक रहा तो हैनसन इस मिशन के जरिए चांद तक पहुंचने वाले पहले गैर-अमेरिकी बनेंगे। हैनसन अपने साथ कनाडा का मशहूर मैपल सिरप और कुकीज ले गए हैं। 4. विक्टर ग्लोवर: मिशन के लिए पायलट चुने गए ग्लोवर (49) चांद के करीब पहुंचने वाले पहले अश्वेत व्यक्ति होंगे। ग्लोवर अपने साथ बाइबिल, अपनी शादी की अंगूठियां ले गए हैं। वे कहते हैं कि ब्रह्मांड में अपनी जगह को तलाशना और सीखना ही इंसान होने का असली मतलब है। अपोलो और आर्टेमिस प्रोग्राम में बड़ा अंतर 70 के दशक में हुए अपोलो मिशन का मुख्य उद्देश्य सोवियत संघ के साथ चल रही ‘स्पेस रेस’ में खुद को बेहतर साबित करना था। लेकिन आर्टेमिस प्रोग्राम पूरी तरह से भविष्य की तैयारी है। नासा इस बार चांद पर एक स्थायी बेस बनाना चाहता है, ताकि इंसान वहां रहकर काम करना सीख सके। यह अनुभव भविष्य में मंगल पर जाने के सपने को पूरा करने में मदद करेगा। साल 1969 में चंद्रमा की सतह पर अमेरिकी झंडे के पास खड़े अंतरिक्ष यात्री बज एल्ड्रिन। नॉलेज पार्ट: अब तक केवल 24 लोग ही चांद के पास या उसकी सतह तक पहुंच पाए हैं। वे सभी अमेरिकी एस्ट्रोनॉट्स थे। सभी 1968 से 1972 के बीच चले अपोलो मिशन का हिस्सा थे। नासा के ‘अपोलो प्रोग्राम’ में क्रू और बिना क्रू वाले मिलाकर कुल 17 मिशन हुए। अगर सिर्फ उन मुख्य मिशनों की बात करें जिनमें अंतरिक्ष यात्री शामिल थे, तो ये 11 थे। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

देवास में सिविल लाइन थाने के निर्माण का विरोध:हिंदू समाज के लोगों ने धार्मिक स्थान को बचाने की मांग की, अपर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा

देवास में सिविल लाइन थाने के निर्माण का विरोध:हिंदू समाज के लोगों ने धार्मिक स्थान को बचाने की मांग की, अपर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा

देवास में प्राचीन मेढकी वाटर वर्क्स बावड़ी और धार्मिक स्थल को बचाने के लिए हिंदू समाज ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने अपर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर सिविल लाइन थाने के निर्माण को तुरंत रोकने की मांग की। सामाजिक कार्यकर्ता अनिल सिंह ठाकुर ने बताया कि शहर की यह अति प्राचीन बावड़ी खतरे में है। यह बावड़ी कभी देवास शहर की प्यास बुझाती थी। कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि इसकी साफ-सफाई की जाए तो इसमें आज भी पर्याप्त पानी उपलब्ध है। बावड़ी में लगा बोरिंग आसपास के किसानों के बोरिंग को रिचार्ज कर रहा है, जो इसकी जल संरक्षण क्षमता को दर्शाता है। परिसर में धार्मिक स्थान भी है परिसर में एक प्राचीन आंकड़े के पेड़ से गणेश जी की प्रतिमा निकली थी, जिसके बाद एक भक्त ने मंदिर की स्थापना की। प्रत्येक बुधवार को श्री गणेश मंदिर में पूजा-पाठ और भजन होते हैं। साथ ही, हनुमान मंदिर में भजन, सुंदरकांड और हनुमान चालीसा जैसे धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इसी परिसर में पीपल के पेड़ की परिक्रमा कर प्रतिदिन जल भी चढ़ाया जाता है। विगत कुछ दिनों से मेढकी बावड़ी के आसपास मिट्टी एकत्रित कर उसे बावड़ी में डालने का प्रयास किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह प्राचीन धरोहर को समाप्त कर सिविल लाइन थाना बनाने की तैयारी है। मेढकी चक और आसपास की कॉलोनियों के निवासियों को जैसे ही इसकी जानकारी मिली, उन्होंने तुरंत विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। विधायक ने पार्क बनावाने की कही थी बात स्थानीय लोगों ने बताया कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले विधायक गायत्री राजे पंवार और महापौर गीता दुर्गेश अग्रवाल ने यहां आमजन और बच्चों के मनोरंजन के लिए एक पार्क का भूमि पूजन किया था। नगर निगम परिषद में इसका प्रस्ताव भी पारित हुआ था। 22 सितंबर 2025 को यह भूमि शिव शक्ति सेवा मंडल को अस्थायी गार्डन के लिए सौंपी गई थी। निवासियों ने सवाल उठाया है कि नगर निगम ने किस नियम के तहत गार्डन की जमीन पर पक्का निर्माण की अनुमति दी, जबकि यह नियमानुसार अवैध है। उन्होंने यह भी पूछा कि नगर निगम ने गार्डन की जमीन राजस्व विभाग को कैसे सौंप दी।

‘ईडी, सीबीआई, एनआईए के बाद धार्मिक अधिकारी और अब सीआरपीएफ…’, भड़की बीजेपी, टीएमसी को ‘भड़काऊ भाईजान कमेटी’ पर ममता का बयान

'ईडी, सीबीआई, एनआईए के बाद धार्मिक अधिकारी और अब सीआरपीएफ...', भड़की बीजेपी, टीएमसी को 'भड़काऊ भाईजान कमेटी' पर ममता का बयान

त्वरित पढ़ें दिखाएँ एआई द्वारा उत्पन्न मुख्य बिंदु, न्यूज़ रूम द्वारा सत्यापित पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव को लेकर विपक्ष की सरगर्मी बढ़ती जा रही है। इस बीच राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक चुनावी सभा में लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के अयोध्या से 200 ट्रक आप पर हमला करने के लिए पश्चिम बंगाल आ रहे हैं। ममता बनर्जी के इस बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) भड़क उठी है। बीजेपी ने कहा कि ममता बनर्जी के खिलाफ केंद्रीय जांच दल, ऐतिहासिक अधिकारियों के बाद अब केंद्रीय सुरक्षा बलों के खिलाफ हिंसा भड़काने की कोशिश की जा रही है। सिर्फ 15-20 का खेल हैः ममता बनर्जी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, ‘आज मैंने सुना है कि उत्तर प्रदेश के अयोध्या से जुड़े 200 लोगों पर आप हमला करने के लिए आ रहे हैं, लेकिन आपको खबर देने की जरूरत नहीं है।’ ये सिर्फ 15-20 दिन का खेल है. उसके बाद उन्हें वास्तविक खेल समझ आएगा।’ ममता बनर्जी ने सुरक्षा बलों के खिलाफ दी हेट स्पीच पूनावाला भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने सोमवार (6 अप्रैल, 2026) को एक बयान जारी कर कहा, ‘अब यह पूरी तरह से स्पष्ट हो गया है कि यह टीएमसी (तृणमूल कांग्रेस) नहीं, बल्कि बीबीसी वाइली भाईजान समिति है। पहले मालदा में राक्षसी अधिकारियों के खिलाफ हिंसा और बंधक बनाने की कोशिश और अब ममता बनर्जी केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के भाषण दे रही हैं। उन्होंने बंगाल के लोगों से कहा कि आप पर हमला करने के लिए 200 ट्रक आ रहे हैं।’ उन्होंने कहा, ‘ममता बनर्जी ने पहले कहा था कि राज्य में आने वाले सीआईएसएफ और सीआरपीएफ जैसे सुरक्षा बलों पर पीओके और घरेलू ठिकानों पर हमला करना है। और यह सिर्फ एक बार नहीं है, पहले भी कई बार संवैधानिक आधार पर, कानूनी आधार पर या टोयोटा फोर्सेज पर हमला करने के लिए उकसाने का बयान दिया गया है।’ पहले भी कई बार हुए हमले, दिए गए संकेत: पूनावाला पूनावाला ने कहा, ‘फिराद हकीम कहते हैं कि चुनाव आयोग के हाथ-पैर तोड़ देते हैं, कल्याण बनर्जी कहते हैं उंगली काट दिए, कोई कहता है आग लगा दो, जमीन में गाड़ दो।’ इसके अलावा, एस. उन्होंने कहा, ‘इससे ​​पहले भी एचडीएफसी, कंक्रीट, कंस्ट्रक्शन और आर्किटेक्चर अधिकारियों पर हमले हो चुके हैं और अब सेंट्रल फोर्सेज पर हमले की तैयारी है।’ ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी और वैष्णव कांग्रेस चुनाव हार रही हैं, तो किसी भी तरह से राजनीतिक हिंसा को भड़काते रहिए, संवैधानिक सिद्धांतों को चुनौती देते रहिए, उनका अपमान करते रहिए, उनके खिलाफ वैमनस्य भड़काती रहिए। ‘ये बन चुका है टीएमसी का बीबीसी यानी ऐतिहासिक भाईजान समिति।’ टीएमसी पर पहले भी सेना में रहे सवाल: पूनावाला बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा, ‘आज जिस तरह से सेना हासिल की जा रही है. इससे पहले भी हमारे आतंकियों ने भारतीय सेना और सुरक्षा बलों पर आतंकियों के खिलाफ सवाल उठाए थे और आज भी सेना के विध्वंसक उपकरणों का षड्यंत्र रचा जा रहा है। ऐसी बातों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी कई बार लांछन लगाया है, लेकिन बार-बार टीओडिया फोर्सेज, आर्म्ड फोर्सेस से लेकर संवैधानिक सिद्धांतों के लिए खतरा पैदा करने की कोशिश कर रही है।’ राहुल गांधी पर भी आधारित प्रयोगशाला उन्होंने इस दौरान कांग्रेस और विपक्ष में नेता राहुल गांधी पर भी अध्ययन किया। पूनावाला ने कहा, ‘राहुल गांधी का ये संविधान प्रेम है कि वो मालदा में धार्मिक अधिकारियों पर हमले, आरक्षण में हुई घटनाओं पर एक शब्द भी बोल नहीं पाए हैं. यहां तक ​​कि संवैधानिक संवैधानिक से लेकर ईसाइयों के हमले पर भी उन्होंने साधे रखा है।’ यह भी पढ़ेंः असम ओपिनियन पोल 2026: असम में कांग्रेस की वापसी या बीजेपी फिर से मारेगी बाजी? जानिए क्या है ओपिनियन पोल

Tej Patta Health Benefits | natural ayurvedic remedies for health | तेज पत्ता के फायदे | home remedies for cough cold hindi |

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Last Updated:April 06, 2026, 19:19 IST Tej Patta Health Benefits: पहाड़ों के खान-पान का अहम हिस्सा रहने वाला तेज पत्ता सिर्फ मसालों की खुशबू तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आयुर्वेद का एक शक्तिशाली खजाना है. डॉ. ऐजल पटेल के अनुसार, रोजाना तेज पत्ते का इस्तेमाल पाचन सुधारने से लेकर डायबिटीज कंट्रोल करने और दिल को सेहतमंद रखने में जादू की तरह काम करता है. एंटीबैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर यह पत्ता न केवल सर्दी-खांसी जैसे मौसमी संक्रमणों से लड़ता है, बल्कि मानसिक तनाव दूर कर बेहतर नींद लाने में भी मददगार है. तेज पत्ता पाचन शक्ति को बढ़ाने में बेहद सहायक होता है. इसमें ऐसे प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं, जो पेट में गैस, अपच और एसिडिटी जैसी समस्याओं को कम करते हैं. नियमित रूप से इसका सेवन करने से खाना आसानी से पचता है, पेट हल्का महसूस होता है. पहाड़ी क्षेत्रों में लोग इसे खाने में शामिल कर पाचन संबंधी दिक्कतों से बचते हैं. डॉ. ऐजल पटेल ने लोकल 18 को बताया कि पाचन अग्नि को तेज करता है, जिससे शरीर का मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है, कब्ज जैसी समस्या से राहत मिलती है. तेज पत्ता डायबिटीज के मरीजों के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. इसमें मौजूद तत्व ब्लड शुगर लेवल को संतुलित रखने में मदद करते हैं. रोजाना सीमित मात्रा में तेज पत्ते का सेवन इंसुलिन की कार्यक्षमता को बेहतर बना सकता है. कई लोग तेजपत्ते का पाउडर या काढ़ा बनाकर इसका सेवन करते हैं. हालांकि, इसका उपयोग डॉक्टर की सलाह के साथ करना अधिक सुरक्षित रहता है. संतुलित आहार और नियमित जीवनशैली के साथ तेज पत्ता डायबिटीज नियंत्रण में सहायक हो सकता है. तेज पत्ते में एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायरल गुण होते हैं, जो सर्दी-खांसी और गले की खराश में राहत देने में मदद करते हैं. इसके पत्तों का काढ़ा बनाकर पीने से गले को आराम मिलता है, बलगम कम होता है. पहाड़ों में ठंड के मौसम में लोग इसका उपयोग घरेलू उपचार के रूप में करते हैं. यह शरीर को अंदर से गर्म रखने में भी मदद करता है. नियमित सेवन से मौसमी बीमारियों से बचाव होता है, इम्यूनिटी मजबूत बनती है. Add News18 as Preferred Source on Google तेज पत्ते में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो शरीर की सूजन को कम करने में मदद करते हैं. जोड़ों के दर्द या गठिया जैसी समस्याओं में इसका सेवन फायदेमंद हो सकता है. इसके तेल या लेप का उपयोग भी दर्द वाले स्थान पर किया जाता है. यह मांसपेशियों को आराम देने और सूजन कम करने में सहायक होता है. आयुर्वेद में इसे दर्द निवारक गुणों वाला माना गया है, जो शरीर को अंदर से राहत प्रदान करता है. तेज पत्ता दिल को स्वस्थ रखने में भी मदद करता है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और फाइबर कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में सहायक होते हैं. नियमित सेवन से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है, दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम हो सकता है. यह शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने और अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में मदद करता है. इसलिए इसे संतुलित मात्रा में आहार में शामिल करना दिल के लिए फायदेमंद माना जाता है. तेज पत्ते की चाय मानसिक तनाव को कम करने में मददगार होती है. इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व दिमाग को शांत करते हैं और चिंता को कम करने में सहायक होते हैं. दिनभर की थकान के बाद इसका सेवन करने से शरीर और मन दोनों को आराम मिलता है. यह नींद को बेहतर बनाने में भी मदद करता है. पहाड़ी इलाकों में लोग इसे हर्बल चाय के रूप में पीते हैं, जिससे मानसिक शांति और सुकून मिलता है. तेज पत्ते में एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण होते हैं, जो त्वचा से जुड़ी समस्याओं में फायदेमंद होते हैं. इसके पत्तों का पेस्ट बनाकर लगाने से फोड़े-फुंसी और संक्रमण में राहत मिलती है. यह त्वचा को साफ रखने और बैक्टीरिया से बचाने में मदद करता है. नियमित उपयोग से त्वचा स्वस्थ और चमकदार बनती है. प्राकृतिक उपचार के रूप में यह सुरक्षित और प्रभावी माना जाता है. तेज पत्ता शरीर के मेटाबॉलिज्म को सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. यह शरीर में ऊर्जा के स्तर को बनाए रखने और वजन को संतुलित करने में मदद करता है.‌ आयुर्वेद में इसे अग्नि बढ़ाने वाला माना गया है, जो शरीर के अंदर भोजन को ऊर्जा में बदलने की प्रक्रिया को तेज करता है. नियमित सेवन से शरीर सक्रिय रहता है, थकान कम महसूस होती है. स्वस्थ जीवनशैली के लिए इसे सीमित मात्रा में शामिल करना फायदेमंद है. First Published : April 06, 2026, 19:19 IST