West Bengal CS SC Slams Judicial Officers Attack

नई दिल्ली20 मिनट पहले कॉपी लिंक पश्चिम बंगाल के मालदा में 1 अप्रैल को प्रदर्शनकारियों ने बीडीओ ऑफिस घेरा। वहीं गुरुवार को सड़क पर आगजनी की। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में लगे 7 न्यायिक अधिकारियों के घेराव और उन पर हमले के मामले में राज्य के चीफ सेक्रेटरी दुष्यंत नारियाला को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने अपने प्लेनरी पावर का इस्तेमाल करते हुए मामले की जांच NIA (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) को सौंप दी। CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने कहा कि जब न्यायिक अधिकारियों पर हमला हुआ (1 अप्रैल ) तब चीफ सेक्रेटरी ने कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस का फोन नहीं उठाया। कोर्ट ने कहा कि उन्हें इसके लिए माफी मांगनी चाहिए और यह प्रशासन की बड़ी विफलता है। कोर्ट ने पूछा कि जब प्रशासन को घेराव के बारे में पहले ही सूचित कर दिया गया था तो सुरक्षा के प्रभावी उपाय क्यों नहीं किए गए? घटना सोची-समझी साजिश लगती है। सरकारी दफ्तरों में राजनीति का असर बढ़ रहा कोर्ट ने कहा कि पश्चिम बंगाल की प्रशासनिक व्यवस्था पर भरोसा कम हो रही है और सरकारी दफ्तरों में राजनीति का असर बढ़ रहा है। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि इस मामले में राज्य पुलिस ने जिन 26 लोगों को गिरफ्तार किया है उनसे NIA पूछताछ करेगी, चाहे वे जेल (न्यायिक हिरासत) में ही क्यों न हों। 60 लाख दावे-आपत्तियों का निपटारा आज कोर्ट ने बताया कि पश्चिम बंगाल में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के दौरान जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उनके लगभग 60 लाख दावे और आपत्तियां आज ही निपटा दी जाएंगी। 6 अप्रैल दोपहर तक लगभग 59.15 लाख मामलों का निपटारा हो चुका है। कोर्ट ने कहा कि हाल की घटनाओं को देखते हुए केंद्रीय सुरक्षा बल पश्चिम बंगाल से नहीं हटाए जाएंगे। CJI ने यह भी कहा कि अगर राज्य की व्यवस्था ठीक से काम नहीं करती है, तो कोर्ट आगे कार्रवाई पर विचार करेगा। दरअसल, 7 न्यायिक अधिकारी 1 अप्रैल को मालदा के बीडीओ ऑफिस पहुंचे थे। इनमें तीन महिलाएं थीं। तभी वोटर लिस्ट में नाम कटने के विरोध में हजारों लोगों ने ऑफिस को घेर लिया।पुलिस ने इस मामले में 35 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है। मालदा हमले के गिरफ्तार आरोपियों की तस्वीरें पश्चिम बंगाल पुलिस ने शुक्रवार को हमले के आरोपी मोफक्करुल इस्लाम (ब्लैक जैकेट) और उसके साथी एकरामुल बागनी को अरेस्ट किया है। गुरुवार को मालदा घटना से जुड़ी करीब 18 आरोपियों को अरेस्ट किया गया था। अब तक कुल 35 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। मालदा हिंसा, 2 दिन का घटनाक्रम… 1 अप्रैल: दोपहर में प्रदर्शन, शाम को अधिकारी बंधक बनाए गए एक अप्रैल को प्रदर्शनकारियों ने 7 न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाया था। जब उन्हें पुलिस ने बाहर निकाला तो रास्ता रोकने की कोशिश की गई। मालदा में विरोध प्रदर्शन दिन में पहले कालियाचक 2 ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिस के बाहर शुरू हुआ था। जो देर रात तक जारी रहा। प्रदर्शनकारियों ने शुरू में न्यायिक अधिकारियों से मिलने की मांग की थी। अंदर जाने की परमिशन न मिलने पर, उन्होंने शाम करीब 4 बजे प्रदर्शन शुरू कर दिया और परिसर का घेराव कर लिया। अधिकारियों को 9 घंटे से ज्यादा समय तक बंधक बनाकर रखा गया था। इस मामले में पुलिस ने गुरुवार को 18 लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें एक चुनावी उम्मीदवार भी शामिल है। इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) के उम्मीदवार मौलाना शाहजहां अली और 16 लोगों को गिरफ्तार कर जिला अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। 2 अप्रैल: कई जिलों में विरोध, सड़कें जाम कीं, आगजनी हुई 2 अप्रैल को प्रदर्शनकारियों ने नेशनल हाईवे-12 जाम किया। टायरों में आग लगा दी। कलियाचक की घटना के बाद मालदा में 2 अप्रैल को भी विरोध प्रदर्शन हुआ। गुरुवार को नारायणपुर में BSF कैंप के सामने भीड़ इकठ्ठा हो गई। लोगों ने नेशनल हाईवे-12 को जाम कर दिया। सड़क पर टायरों में आग लगा दी गई। मालदा, जलपाईगुड़ी, कूच बिहार और पुरबा बर्धमान में प्रदर्शनकारियों ने टायर जलाए, सड़कें जाम कीं और मौन जुलूस निकाले; इन जगहों पर 23 अप्रैल को मतदान होना है। सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला, CJI बोले- हमें पता है उपद्रवी कौन सुप्रीम कोर्ट ने इस पर एक्शन लिया और घटना को न्याय प्रशासन में बाधा डालने का एक ‘दुस्साहसी और जानबूझकर किया गया प्रयास’ बताया। CJI सूर्यकांत की बेंच ने इस बात पर चिंता जताई कि पहले से पता होने के बावजूद, राज्य के अधिकारी समय पर सुरक्षा मुहैया कराने में विफल रहे, जिसके कारण अधिकारियों को घंटों तक बिना खाना-पानी के रहना पड़ा। यह घटना सोची-समझी और भड़काऊ लगती है। हमें पता है उपद्रवी कौन हैं, इनका मकसद न्यायिक अधिकारियों का मनोबल गिराना और चुनावी प्रक्रिया को बाधित करना है। पूरी खबर पढ़ें… —————- ये खबर भी पढ़ें… पश्चिम बंगाल में 7 इलेक्शन ऑब्जर्वर बंधक, सुप्रीम कोर्ट नाराज:कहा- हमें पता है उपद्रवी कौन; वोटर लिस्ट से नाम कटने पर लगातार दूसरे दिन प्रदर्शन सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में SIR से जुड़े 7 इलेक्शन ऑब्जर्वर को बंधक बनाए जाने की घटना पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा- उन्हें नौ घंटे बंधक बनाकर रखा। खाना-पानी तक नहीं मिला। यह घटना सोची-समझी और भड़काऊ लगती है। हमें पता है उपद्रवी कौन हैं, इनका मकसद न्यायिक अधिकारियों का मनोबल गिराना और चुनावी प्रक्रिया को बाधित करना है। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
West Bengal CS SC Slams Judicial Officers Attack

नई दिल्ली41 मिनट पहले कॉपी लिंक पश्चिम बंगाल के मालदा में 1 अप्रैल को प्रदर्शनकारियों ने बीडीओ ऑफिस घेरा। वहीं गुरुवार को सड़क पर आगजनी की। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में लगे 7 न्यायिक अधिकारियों के घेराव और उन पर हमले के मामले में राज्य के चीफ सेक्रेटरी दुष्यंत नारियाला को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने अपने प्लेनरी पावर का इस्तेमाल करते हुए मामले की जांच NIA (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) को सौंप दी। CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने कहा कि जब न्यायिक अधिकारियों पर हमला हुआ (1 अप्रैल ) तब चीफ सेक्रेटरी ने कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस का फोन नहीं उठाया। कोर्ट ने कहा कि उन्हें इसके लिए माफी मांगनी चाहिए और यह प्रशासन की बड़ी विफलता है। कोर्ट ने पूछा कि जब प्रशासन को घेराव के बारे में पहले ही सूचित कर दिया गया था तो सुरक्षा के प्रभावी उपाय क्यों नहीं किए गए? घटना सोची-समझी साजिश लगती है। सरकारी दफ्तरों में राजनीति का असर बढ़ रहा कोर्ट ने कहा कि पश्चिम बंगाल की प्रशासनिक व्यवस्था पर भरोसा कम हो रही है और सरकारी दफ्तरों में राजनीति का असर बढ़ रहा है। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि इस मामले में राज्य पुलिस ने जिन 26 लोगों को गिरफ्तार किया है उनसे NIA पूछताछ करेगी, चाहे वे जेल (न्यायिक हिरासत) में ही क्यों न हों। 60 लाख दावे-आपत्तियों का निपटारा आज कोर्ट ने बताया कि पश्चिम बंगाल में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के दौरान जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उनके लगभग 60 लाख दावे और आपत्तियां आज ही निपटा दी जाएंगी। 6 अप्रैल दोपहर तक लगभग 59.15 लाख मामलों का निपटारा हो चुका है। कोर्ट ने कहा कि हाल की घटनाओं को देखते हुए केंद्रीय सुरक्षा बल पश्चिम बंगाल से नहीं हटाए जाएंगे। CJI ने यह भी कहा कि अगर राज्य की व्यवस्था ठीक से काम नहीं करती है, तो कोर्ट आगे कार्रवाई पर विचार करेगा। दरअसल, 7 न्यायिक अधिकारी 1 अप्रैल को मालदा के बीडीओ ऑफिस पहुंचे थे। इनमें तीन महिलाएं थीं। तभी वोटर लिस्ट में नाम कटने के विरोध में हजारों लोगों ने ऑफिस को घेर लिया।पुलिस ने इस मामले में 35 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है। मालदा हमले के गिरफ्तार आरोपियों की तस्वीरें पश्चिम बंगाल पुलिस ने शुक्रवार को हमले के आरोपी मोफक्करुल इस्लाम (ब्लैक जैकेट) और उसके साथी एकरामुल बागनी को अरेस्ट किया है। गुरुवार को मालदा घटना से जुड़ी करीब 18 आरोपियों को अरेस्ट किया गया था। अब तक कुल 35 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। मालदा हिंसा, 2 दिन का घटनाक्रम… 1 अप्रैल: दोपहर में प्रदर्शन, शाम को अधिकारी बंधक बनाए गए एक अप्रैल को प्रदर्शनकारियों ने 7 न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाया था। जब उन्हें पुलिस ने बाहर निकाला तो रास्ता रोकने की कोशिश की गई। मालदा में विरोध प्रदर्शन दिन में पहले कालियाचक 2 ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिस के बाहर शुरू हुआ था। जो देर रात तक जारी रहा। प्रदर्शनकारियों ने शुरू में न्यायिक अधिकारियों से मिलने की मांग की थी। अंदर जाने की परमिशन न मिलने पर, उन्होंने शाम करीब 4 बजे प्रदर्शन शुरू कर दिया और परिसर का घेराव कर लिया। अधिकारियों को 9 घंटे से ज्यादा समय तक बंधक बनाकर रखा गया था। इस मामले में पुलिस ने गुरुवार को 18 लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें एक चुनावी उम्मीदवार भी शामिल है। इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) के उम्मीदवार मौलाना शाहजहां अली और 16 लोगों को गिरफ्तार कर जिला अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। 2 अप्रैल: कई जिलों में विरोध, सड़कें जाम कीं, आगजनी हुई 2 अप्रैल को प्रदर्शनकारियों ने नेशनल हाईवे-12 जाम किया। टायरों में आग लगा दी। कलियाचक की घटना के बाद मालदा में 2 अप्रैल को भी विरोध प्रदर्शन हुआ। गुरुवार को नारायणपुर में BSF कैंप के सामने भीड़ इकठ्ठा हो गई। लोगों ने नेशनल हाईवे-12 को जाम कर दिया। सड़क पर टायरों में आग लगा दी गई। मालदा, जलपाईगुड़ी, कूच बिहार और पुरबा बर्धमान में प्रदर्शनकारियों ने टायर जलाए, सड़कें जाम कीं और मौन जुलूस निकाले; इन जगहों पर 23 अप्रैल को मतदान होना है। सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला, CJI बोले- हमें पता है उपद्रवी कौन सुप्रीम कोर्ट ने इस पर एक्शन लिया और घटना को न्याय प्रशासन में बाधा डालने का एक ‘दुस्साहसी और जानबूझकर किया गया प्रयास’ बताया। CJI सूर्यकांत की बेंच ने इस बात पर चिंता जताई कि पहले से पता होने के बावजूद, राज्य के अधिकारी समय पर सुरक्षा मुहैया कराने में विफल रहे, जिसके कारण अधिकारियों को घंटों तक बिना खाना-पानी के रहना पड़ा। यह घटना सोची-समझी और भड़काऊ लगती है। हमें पता है उपद्रवी कौन हैं, इनका मकसद न्यायिक अधिकारियों का मनोबल गिराना और चुनावी प्रक्रिया को बाधित करना है। पूरी खबर पढ़ें… —————- ये खबर भी पढ़ें… पश्चिम बंगाल में 7 इलेक्शन ऑब्जर्वर बंधक, सुप्रीम कोर्ट नाराज:कहा- हमें पता है उपद्रवी कौन; वोटर लिस्ट से नाम कटने पर लगातार दूसरे दिन प्रदर्शन सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में SIR से जुड़े 7 इलेक्शन ऑब्जर्वर को बंधक बनाए जाने की घटना पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा- उन्हें नौ घंटे बंधक बनाकर रखा। खाना-पानी तक नहीं मिला। यह घटना सोची-समझी और भड़काऊ लगती है। हमें पता है उपद्रवी कौन हैं, इनका मकसद न्यायिक अधिकारियों का मनोबल गिराना और चुनावी प्रक्रिया को बाधित करना है। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
एसएटीआई कॉलेज में 7 माह वेतन न मिलने पर हड़ताल:120 कर्मचारी अनिश्चितकालीन आंदोलन पर, फंड होने के बावजूद भुगतान न होने के आरोप

विदिशा के एसएटीआई कॉलेज में गंभीर आर्थिक संकट के कारण लगभग 120 शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए। कर्मचारियों को पिछले सात महीनों से वेतन नहीं मिला है, जिससे कॉलेज की शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से वेतन न मिलने के कारण उन्हें गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। बच्चों की फीस, बैंक ऋण की किश्तें और दैनिक खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। उन्होंने कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को आवेदन और ज्ञापन दिए हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि कॉलेज के पास पर्याप्त फंड होने के बावजूद वेतन का भुगतान नहीं किया जा रहा है। उनका कहना है कि संस्था को करोड़ों रुपए का अनुदान और विद्यार्थियों से फीस के रूप में अच्छी-खासी राशि प्राप्त होती है, लेकिन प्रबंधन भवन निर्माण कार्यों को प्राथमिकता दे रहा है, जबकि कर्मचारियों को उनका हक नहीं मिल रहा। जब तक वेतन नहीं, तब तक आंदोलन का ऐलान एसएटीआई कॉलेज 1956 में स्थापित एक प्रतिष्ठित संस्था है, जिसे सिंधिया रियासत ने शुरू किया था और वर्तमान में यह शासन द्वारा वित्तपोषित है। कर्मचारियों के अनुसार, पिछले एक वर्ष से अनुदान की राशि नहीं मिलने से स्थिति बिगड़ती चली गई, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें सात महीने से वेतन नहीं मिल पाया है। हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उन्हें पूरा बकाया वेतन नहीं मिल जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने अपनी समस्याओं को लेकर जनप्रतिनिधियों से मुलाकात की और पत्राचार भी किया, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। कर्मचारियों ने बताया कि वे कल (मंगलवार) जनसुनवाई में पहुंचकर अपनी समस्या प्रशासन के सामने रखेंगे।
‘भूत बंगला’ के इवेंट में प्रियदर्शन-परेश रावल गिरते-गिरते बचे:अक्षय कुमार कहा- टीम के साथ ऐसे छोटे-मोटे हॉरर मोमेंट्स चलते रहते हैं

मुंबई में आज अक्षय कुमार की अपकमिंग फिल्म ‘भूत बंगला’ का ट्रेलर लॉन्च इवेंट काफी चर्चा में रहा। इवेंट के दौरान एक छोटा सा हादसा होते-होते टल गया, जब फिल्म के डायरेक्टर प्रियदर्शन और अभिनेता परेश रावल स्टेज पर गिरते-गिरते बच गए। हालांकि मौके पर मौजूद टीम की सतर्कता से दोनों संभल गए और कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। इस घटना ने कुछ पल के लिए माहौल को थोड़ा तनावपूर्ण बना दिया, लेकिन जल्द ही सब सामान्य हो गया। अक्षय कुमार ने माहौल हल्का करते हुए मजाकिया अंदाज में कहा कि उनकी टीम के साथ ऐसे छोटे-मोटे ‘हॉरर मोमेंट्स’ तो चलते रहते हैं। इसी बीच इवेंट में अक्षय कुमार ने अपने को-स्टार राजपाल यादव को लेकर भी मजेदार टिप्पणी की। उन्होंने हंसते हुए कहा, “राजपाल को देखते ही अपने आप हंसी आ जाती है, कुछ करने की जरूरत ही नहीं पड़ती।” अक्षय की इस बात पर पूरा हॉल ठहाकों से गूंज उठा। ‘भूत बंगला’ एक हॉरर-कॉमेडी फिल्म है, जिसमें अक्षय कुमार के साथ परेश रावल और राजपाल यादव की जोड़ी एक बार फिर दर्शकों को हंसाने और डराने के लिए तैयार है। ट्रेलर में भी डर और कॉमेडी का अनोखा मिश्रण देखने को मिला, जिसे दर्शकों से अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। डायरेक्टर प्रियदर्शन ने बताया कि फिल्म में पुरानी हॉरर फिल्मों की झलक के साथ नई कहानी और ताजगी देखने को मिलेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह फिल्म दर्शकों को एंटरटेन करने में सफल रहेगी। कुल मिलाकर, ट्रेलर लॉन्च इवेंट में जहां एक तरफ हल्की अफरा-तफरी देखने को मिली, वहीं दूसरी ओर कलाकारों की मस्ती और केमिस्ट्री ने माहौल को खुशनुमा बना दिया। अब दर्शकों को फिल्म के रिलीज का बेसब्री से इंतजार है।
‘भूत बंगला’ के इवेंट में प्रियदर्शन-परेश रावल गिरते-गिरते बचे:अक्षय कुमार कहा- टीम के साथ ऐसे छोटे-मोटे हॉरर मोमेंट्स चलते रहते हैं

मुंबई में आज अक्षय कुमार की अपकमिंग फिल्म ‘भूत बंगला’ का ट्रेलर लॉन्च इवेंट काफी चर्चा में रहा। इवेंट के दौरान एक छोटा सा हादसा होते-होते टल गया, जब फिल्म के डायरेक्टर प्रियदर्शन और अभिनेता परेश रावल स्टेज पर गिरते-गिरते बच गए। हालांकि मौके पर मौजूद टीम की सतर्कता से दोनों संभल गए और कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। इस घटना ने कुछ पल के लिए माहौल को थोड़ा तनावपूर्ण बना दिया, लेकिन जल्द ही सब सामान्य हो गया। अक्षय कुमार ने माहौल हल्का करते हुए मजाकिया अंदाज में कहा कि उनकी टीम के साथ ऐसे छोटे-मोटे ‘हॉरर मोमेंट्स’ तो चलते रहते हैं। इसी बीच इवेंट में अक्षय कुमार ने अपने को-स्टार राजपाल यादव को लेकर भी मजेदार टिप्पणी की। उन्होंने हंसते हुए कहा, “राजपाल को देखते ही अपने आप हंसी आ जाती है, कुछ करने की जरूरत ही नहीं पड़ती।” अक्षय की इस बात पर पूरा हॉल ठहाकों से गूंज उठा। ‘भूत बंगला’ एक हॉरर-कॉमेडी फिल्म है, जिसमें अक्षय कुमार के साथ परेश रावल और राजपाल यादव की जोड़ी एक बार फिर दर्शकों को हंसाने और डराने के लिए तैयार है। ट्रेलर में भी डर और कॉमेडी का अनोखा मिश्रण देखने को मिला, जिसे दर्शकों से अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। डायरेक्टर प्रियदर्शन ने बताया कि फिल्म में पुरानी हॉरर फिल्मों की झलक के साथ नई कहानी और ताजगी देखने को मिलेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह फिल्म दर्शकों को एंटरटेन करने में सफल रहेगी। कुल मिलाकर, ट्रेलर लॉन्च इवेंट में जहां एक तरफ हल्की अफरा-तफरी देखने को मिली, वहीं दूसरी ओर कलाकारों की मस्ती और केमिस्ट्री ने माहौल को खुशनुमा बना दिया। अब दर्शकों को फिल्म के रिलीज का बेसब्री से इंतजार है।
सेहत का खजाना है ‘शतावरी’! इम्यूनिटी बढ़ाने से लेकर तनाव दूर करने तक, आयुर्वेद के इस नुस्खे के कायल हुए डॉक्टर

Last Updated:April 06, 2026, 18:43 IST Shatavari Benefits in Hindi: बागपत के आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉक्टर राघवेंद्र चौधरी के अनुसार, शतावरी एक ऐसी चमत्कारी और किफायती औषधि है जो इम्यूनिटी बढ़ाने, पाचन शक्ति सुधारने और मानसिक तनाव दूर करने में बेहद कारगर है. यह औषधि महिलाओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, विशेषकर स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए यह अत्यंत लाभकारी है. शारीरिक कमजोरी दूर करने और निरोगी जीवन जीने के लिए डॉक्टर इसे दूध के साथ लेने की सलाह देते हैं. बेहतर स्वास्थ्य लाभ के लिए इसका चिकित्सकीय परामर्श से सेवन करें. बागपत: भागदौड़ भरी जिंदगी और खराब खान-पान के बीच आयुर्वेद एक बार फिर संजीवनी बनकर उभर रहा है. बागपत के प्रसिद्ध आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉक्टर राघवेंद्र चौधरी ने ‘शतावरी’ को स्वास्थ्य के लिए एक चमत्कारी औषधि बताया है. बाजार में बेहद किफ़ायती दाम पर मिलने वाली यह जड़ी-बूटी न केवल इम्यूनिटी को फौलादी बनाती है, बल्कि महिलाओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. मानसिक तनाव से लेकर शारीरिक कमजोरी तक, शतावरी हर मोर्चे पर शरीर को निरोगी बनाने की क्षमता रखती है. शतावरी: एक चमत्कारी आयुर्वेदिक औषधिशतावरी एक ऐसी चमत्कारी आयुर्वेदिक औषधि है, जो आसानी से बाजार में उपलब्ध होती है. इस औषधि का इस्तेमाल करने से इम्यूनिटी मजबूत होती है, पाचन शक्ति मजबूत होती है और मानसिक तनाव से छुटकारा मिलता है. डॉक्टर बताते हैं कि यह औषधि महिलाओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. इसका इस्तेमाल कर चिकित्सा के फायदे ले सकते हैं, हालांकि महिलाओं और पुरुषों को इसका इस्तेमाल करने से पहले चिकित्सक के परामर्श जरूर लेना चाहिए. इसका इस्तेमाल महिला-पुरुष जरूरी मात्रा में करके सेहत को बेहतर बना सकते हैं और एक लंबा और निरोगी जीवन जी सकते हैं. डॉक्टर की राय: शरीर पर होते हैं चौंकाने वाले फायदेआयुर्वेदिक चिकित्सक डॉक्टर राघवेंद्र चौधरी ने जानकारी देते हुए बताया कि शतावरी एक चमत्कारी आयुर्वेदिक औषधि है, जो बाजार में सस्ते रेट पर उपलब्ध होती है. इसका इस्तेमाल करने से शरीर पर चौंकाने वाले फायदे देखने को मिलते हैं. शतावरी का इस्तेमाल करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है, जिससे शरीर में कोई भी बीमारी आने से रोकी जा सकती है. पाचन तंत्र और शारीरिक कमजोरी में रामबाणशतावरी का उपयोग करने से पाचन शक्ति मजबूत होती है. शरीर में खाने पीने से ताकत मिलती है और शरीर की कमजोरी को दूर किया जाता है. अक्सर कमजोरी महसूस करने वाले लोगों के लिए यह औषधि अत्यंत प्रभावी है. इसके साथ ही, शतावरी का इस्तेमाल करने से मानसिक तनाव से छुटकारा मिलता है और मानसिक विकारों में यह लाभदायक साबित होती है. महिलाओं के लिए किसी वरदान से कम नहींडॉक्टर के अनुसार, शतावरी का इस्तेमाल महिलाओं के लिए विशेष रूप से लाभकारी है. बच्चों को स्तनपान कराने वाली महिलाओं को इसका अत्यधिक सेवन करना चाहिए, जिससे उनके शरीर में किसी प्रकार की कमी नहीं रहती और बच्चों को भी स्तनपान से भरपूर पोषण और लाभ मिलता है. डॉक्टर ने बताया कि महिला, पुरुष और बुजुर्ग सभी इसका इस्तेमाल कर शारीरिक लाभ ले सकते हैं, बस शर्त यह है कि इसका इस्तेमाल चिकित्सक की देखरेख में ही करना चाहिए. कैसे करें सेवन? जानें सही तरीकाडॉक्टर ने बताया कि शतावरी का उपयोग आप चूर्ण के रूप में दूध के साथ सुबह और शाम कर सकते हैं. हालांकि इसका शरीर पर कोई दुष्प्रभाव नहीं होता, लेकिन इस्तेमाल से पहले चिकित्सक की सलाह और जरूरी मात्रा का निर्धारण करना आवश्यक है. यह एक ऐसी औषधि है जो शरीर पर तेजी से काम करके स्वास्थ्य लाभ देने का काम करती है. About the Author Rahul Goel राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें Location : Baghpat,Uttar Pradesh First Published : April 06, 2026, 18:43 IST
तमिलनाडु कस्टोडियल डेथ केस- 9 पुलिसकर्मियों को मौत की सजा:6 साल पहले पिता-पुत्र की हिरासत में मौत हुई थी, लॉकडाउन में दुकान खुली रखी थी

तमिलनाडु के मदुरै कोर्ट ने तूतीकोरिन के सथानकुलम कस्टोडियल डेथ केस में 9 पुलिसकर्मियों को मौत की सजा सुनाई है। यह मामला 2020 में पिता-पुत्र की हिरासत में मौत से जुड़ा है। दरअसल, 19 जून 2020 को पुलिस ने व्यापारी पी जयराज और उनके बेटे जे बेनिक्स को लॉकडाउन के दौरान दुकान खुली रखने के आरोप में गिरफ्तार किया था। दोनों को सथानकुलम पुलिस स्टेशन ले जाया गया और फिर न्यायिक हिरासत में भेजा गया, जहां कुछ ही दिनों में उनकी मौत हो गई। परिजनों ने आरोप लगाया था कि पुलिस स्टेशन में रातभर दोनों के साथ मारपीट की गई। उनके शरीर पर गंभीर चोटों के निशान और खून बहने के संकेत मिले थे। मद्रास हाईकोर्ट के निर्देश पर मामले की जांच राज्य की सीबी-सीआईडी से लेकर CBI को सौंपी गई। CBI ने 10 पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया, जिनमें एक इंस्पेक्टर, दो सब-इंस्पेक्टर और अन्य कॉन्स्टेबल शामिल थे। एजेंसी ने सभी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया। जांच के दौरान एक महिला कांस्टेबल ने बताया कि पिता-पुत्र को रातभर पीटा गया था। पुलिस स्टेशन में टेबल और लाठियों पर खून के निशान थे। यह गवाही मामले में अहम साबित हुई। जांच में यह भी सामने आया कि सथानकुलम थाने का CCTV फुटेज सुरक्षित नहीं रखा गया। रिकॉर्डिंग रोजाना अपने आप डिलीट हो जाती थी, जिससे महत्वपूर्ण सबूत नहीं मिल पाए। खबर लगातार अपडेट की जा रही है…
तमिलनाडु कस्टोडियल डेथ केस- 9 पुलिसकर्मियों को मौत की सजा:कोर्ट ने ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ बताया; 6 साल पहले पिता-पुत्र की हिरासत में मौत हुई थी

तमिलनाडु के मदुरै सेशन कोर्ट ने सथानकुलम कस्टोडियल डेथ केस में 9 पुलिसकर्मियों को मौत की सजा सुनाई है। कोर्ट ने इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ मानते हुए अत्यधिक बर्बरता और सत्ता के दुरुपयोग का मामला बताया। यह मामला 2020 में पिता-पुत्र की हिरासत में मौत से जुड़ा है। छह साल तक सुनवाई चली। फर्स्ट एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज जी. मुथुकुमारन ने CBI की दलील को माना कि हिरासत में दोनों को योजनाबद्ध तरह से टॉर्चर किया गया। इसलिए अधिकतम सजा दी गई। दरअसल,19 जून 2020 को पुलिस ने व्यापारी पी. जयराज (59) और उनके बेटे जे. बेनिक्स (31) को हिरासत में लिया था। आरोप था कि उन्होंने लॉकडाउन के दौरान दुकान खुली रखी थी। दोनों को सथानकुलम पुलिस स्टेशन ले जाया गया। वहां से न्यायिक हिरासत में भेजा गया, जहां कुछ ही दिनों में उनकी मौत हो गई। परिजनों ने आरोप लगाया कि दोनों के साथ थाने में रातभर मारपीट की गई। उनके शरीर पर गंभीर चोटों के निशान और खून बहने के निशान थे। CBI जांच में हिरासत में पिटाई की पुष्टि हुई मद्रास हाईकोर्ट के निर्देश पर जांच राज्य की CB-CID से लेकर CBI को सौंपी गई। एजेंसी ने एक इंस्पेक्टर, दो सब-इंस्पेक्टर और अन्य पुलिसकर्मियों समेत 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया। जांच के दौरान एक महिला कांस्टेबल ने बयान दिया कि पिता-पुत्र को पूरी रात पीटा गया था। थाने में टेबल और लाठियों पर खून के निशान थे। यह गवाही मामले में अहम सबूत बनी। जांच में यह भी सामने आया कि सथानकुलम थाने का CCTV फुटेज सुरक्षित नहीं रखा गया। रिकॉर्डिंग रोजाना अपने आप डिलीट हो जाती थी, जिससे महत्वपूर्ण सबूत नहीं मिल पाए। इन 9 पुलिसकर्मियों को सजा दोषी ठहराए गए पुलिसकर्मियों में इंस्पेक्टर एस. श्रीधर, सब-इंस्पेक्टर पी. रघु गणेश और के. बालकृष्णन, हेड कॉन्स्टेबल एस. मुरुगन और ए. समदुरई है। साथ ही कॉन्स्टेबल एम. मुथुराज, एस. चेल्लादुरई, एक्स. थॉमस फ्रांसिस और एस. वेलुमुथु शामिल हैं। मामले में 10वें आरोपी स्पेशल सब-इंस्पेक्टर पॉलदुरई की ट्रायल के दौरान कोविड से मौत हो गई थी। ———- ये खबर भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट बोला- हिरासत में मौतें बर्दाश्त नहीं:दैनिक भास्कर की खबर पर केंद्र-राज्य को नोटिस; थानों में CCTV पर 16 दिसंबर तक रिपोर्ट मांगी सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि पुलिस हिरासत में होने वाली मौतें सिस्टम पर धब्बा है और अब देश इसे बर्दाश्त नहीं करेगा। साथ ही कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र की ओर से थानों में CCTV को लेकर मांगी गई रिपोर्ट न सौंपने पर नाराजगी जताई। पूरी खबर पढ़ें…
सीधी के सम्राट चौक पर कांग्रेस का प्रदर्शन:पूर्व मंत्री पटेल के नेतृत्व में महंगाई-बेरोजगारी और किसानों के मुद्दों को लेकर दिया धरना

सीधी जिला मुख्यालय के सम्राट चौक पर सोमवार को कांग्रेस पार्टी ने जनहित के मुद्दों को लेकर धरना प्रदर्शन किया। कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य कमलेश्वर पटेल और जिला अध्यक्ष ज्ञान सिंह के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के बाद कलेक्टर को ज्ञापन देकर समस्याओं के समाधान की मांग की गई। रसोई गैस की किल्लत और बिजली बिल पर विरोध इस दौरान पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल ने कहा कि बाजार में खाद्यान्न होने के बावजूद रसोई गैस की कमी से आम जनता और छोटे व्यापारी परेशान हैं। कांग्रेस नेताओं ने बिजली बिलों में हो रही बेतहाशा बढ़ोतरी और बढ़ती महंगाई को सरकार की विफलता बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन समस्याओं के कारण आमजन का बजट बिगड़ गया है। गेहूं खरीदी में देरी से बिचौलियों को लाभ धरने के दौरान किसानों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। नेताओं ने कहा कि गेहूं खरीदी प्रक्रिया समय पर शुरू नहीं होने से किसान अपनी उपज बिचौलियों को कम दामों पर बेचने को मजबूर हैं। कांग्रेस ने मांग की है कि किसानों को उनकी मेहनत का उचित दाम दिलाने के लिए तत्काल सरकारी खरीदी केंद्र सक्रिय किए जाएं। भारी पुलिस बल तैनात रहा सम्राट चौक पर दोपहर 12 बजे शुरू हुए इस विरोध प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे। कोतवाली थाना प्रभारी अभिषेक उपाध्याय के नेतृत्व में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। जिला अध्यक्ष ज्ञान सिंह ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इन मांगों पर जल्द ठोस कदम नहीं उठाए, तो आगामी दिनों में आंदोलन उग्र किया जाएगा।
India-Bangladesh Border: BSF May Use Crocodiles & Snakes for Patrol

Hindi News National India Bangladesh Border: BSF May Use Crocodiles & Snakes For Patrol | Smuggling Deterrent 1 घंटे पहले कॉपी लिंक BSF बांग्लादेश सीमा की पेट्रोलिंग के लिए मगरमच्छों और सांपों का इस्तेमाल कर सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 26 मार्च को गृह मंत्रालय ने BSF मुख्यालय को ऑपरेशनल स्तर पर सरीसृपों (मगरमच्छ और सांप) के इस्तेमाल पर विचार करने का आदेश दिया है। भारत-बांग्लादेश की 4,096 किमी लंबी सीमा में लगभग 175 किमी हिस्सा नदी और दलदली क्षेत्र में आता है। इन इलाकों में फेंसिंग लगाना मुश्किल होता है। घुसपैठ और तस्करी की घटनाएं होती रहती हैं। सीमा पर 10 सालों में 7 हजार से ज्यादा घुसपैठ हुई। सीमा के पास रह रहे लोगों के लिए खतरा और चुनौती BSF अधिकारियों ने कहा कि फिलहाल यह सिर्फ एक प्रस्ताव है। इसे लागू नहीं किया गया है। इसमें जानवरों की व्यवस्था से लेकर सीमा के पास रह रहे लोगों की सुरक्षा जैसी कई चुनौतियां है। भारत-बांग्लादेश बॉर्डर के पास घनी आबादी और बाढ़ के हालतों की वजह से ग्रामीणों के लिए जोखिम भी बढ़ सकता है। 17 मार्च को सरकार ने भारत-बांग्लादेश बॉडर पर 3,326 किमी फेंसिंग को मंजूरी दी थी। लगभग करीब 371 किमी हिस्सा अभी भी बाकी है। गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, जहां फेंसिंग संभव नहीं है, वहां ड्रोन जैसे तकनीकी उपाय अपनाए जाएंगे। लगातार समाने आ रही तस्करी का घटनाएं जनवरी 2026ः BSF की 32वीं बटालियन ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर, पश्चिम बंगाल के नादिया जिले के पास एक सोना तस्कर को पकड़ लिया। उसके पास से करीब 1 करोड़ रुपये के सोने के बिस्किट बरामद किए गए। नवंबर 2025ः BSF की पेट्रोलिंग के दौरान बांग्लादेशी तस्कर को गोली लगी तस्करों ने जवानों पर देसी हथियारों से हमला किया। बाद में वहां से 96 बोतल फेंसिडिल कफ सिरप और 2 बोतल विदेशी शराब बरामद की। ——————————– पूरी खबर पढ़ें… बांग्लादेशी गौतस्करों ने BSF जवान का अपहरण किया:घनी धुंध का फायदा उठाकर ले गए प भारत-बांग्लादेश सीमा पर शनिवार तड़के कुछ बांग्लादेशी गौतस्करों ने एक BSF जवान का अपहरण कर लिया। गौतस्कर घनी धुंध का फायदा उठाकर जवान को साथ ले गए। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔








