Wednesday, 26 Aug 2026 | 11:13 AM

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Delhi Assembly Security Breach | Speakers Car Ink Attack

Delhi Assembly Security Breach | Speakers Car Ink Attack

नई दिल्ली2 घंटे पहले कॉपी लिंक कार ने दिल्ली विधानसभा के गेट नंबर 2 से एंट्री की और विधानसभा स्पीकर के ऑफिस के बाहर गुलदस्ता रखा। दिल्ली विधानसभा कैंपस में सोमवार दोपहर को सुरक्षा में चूक हुई। दोपहर करीब 2 बजे यूपी नंबर की कार वीआईपी एंट्री वाला गेट नंबर-2 की बैरिकेडिंग तोड़कर अंदर घुसी। कार ड्राइवर ने नकाब पहना हुआ था। अधिकारियों के मुताबिक, ड्राइवर सीधे विधानसभा स्पीकर विजेंद्र गुप्ता के कार्यालय की ओर गया और पोर्च के पास गुलदस्ता रखकर कार समेत मौके से फरार हो गया। हालांकि बम जैसी कोई चीज नहीं मिली। घटना के बाद दिल्ली पुलिस मौके पर पहुंची है। गेट नंबर 2 पर अब सीआरपीएफ की तैनाती की गई है। न्यूज एजेंसी IANS के मुताबिक दिल्ली पुलिस ने आरोपी समेत 3 लोगों को हिरासत में लिया। हिरासत में लिए गए लोगों में से एक उत्तर प्रदेश के पीलीभीत रहने वाला सरबजीत है। पुलिस ने टाटा सिएरा कार भी बरामद की है। हाल ही में विधानसभा को बम से उड़ाने की धमकियां भी मिली थीं। हिरासत में लिए गए सरबजीत की सीसीटीवी फुटेज। घटना की 4 तस्वीरें… अज्ञात कार दिल्ली विधानसभा के गेट नंबर 2 को बैरियर तोड़कर अंदर घुसी। इसके बाद बाहर भी निकली। ड्राइवर कार लेकर फरार हो गया। गेट नंबर 3 से वीआईपी एंट्री होती है। पुलिस अब अज्ञात कार की तलाश में जुटी है। विधानसभा कैंपस में दिल्ली पुलिस की डॉग स्क्वॉड टीम ने कारों की चेकिंग की। दिल्ली पुलिस की टीम ने गुलदस्ते की जांच की। 20 अगस्त 2025: दिल्ली सीएम रेखा गुप्ता पर हमला हुआ था दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर 20 अगस्त 2025 की सुबह जनसुनवाई के दौरान रेखा गुप्ता पर हमला हुआ था। शिकायतकर्ता बनकर पहुंचे आरोपी ने सीएम को कागज देते समय उनका हाथ खींचा था। आरोपी ने उनके बाल खींचे और फिर थप्पड़ मारा था। हमले में रेखा के हाथ-कंधे, सिर पर चोटें आईं थीं। आरोपी का नाम राजेशभाई खीमजी था। गुजरात के राजकोट का रहने वाला था। उसे तुरंत ही गिरफ्तार कर लिया गया था। राजेश पर गुजरात में भी चाकूबाजी समेत 5 केस पहले से दर्ज थे। हालांकि, गिरफ्तारी के दौरान उसके पास कोई हथियार नहीं मिला था। ———————————————– यह खबर भी पढ़ें… AAP ने रेखा गुप्ता को ‘बीजेपी की पप्पू’ कहा: दिल्ली CM ने कहा था- AQI एक टेंपरेचर है; केजरीवाल बोले- ये नया विज्ञान कब आया आम आदमी पार्टी (AAP) ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को ‘बीजेपी की पप्पू CM’ कहा है। AAP ने X पर रेखा गुप्ता के बयानों के छोटे-छोटे वीडियो क्लिप जारी करते हुए लिखा- बीजेपी की पप्पू CM का कोई मुकाबला नहीं है। रेखा गुप्ता ने हाल ही में NDTV को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) एक टेंपरेचर है, जिसे किसी भी इंस्ट्रूमेंट से मापा जा सकता है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

भाजपा स्थापना दिवस पर रानीताल कार्यालय में कार्यक्रम:मंत्री राकेश सिंह ने कहा, यह पार्टी के लिए पर्व जैसा अवसर

भाजपा स्थापना दिवस पर रानीताल कार्यालय में कार्यक्रम:मंत्री राकेश सिंह ने कहा, यह पार्टी के लिए पर्व जैसा अवसर

जबलपुर में भारतीय जनता पार्टी का स्थापना दिवस रविवार को रानीताल स्टेडियम स्थित पार्टी कार्यालय में उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। मध्य प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि स्थापना दिवस भाजपा के लिए किसी पर्व से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि देशभर में कार्यकर्ताओं ने इसे उत्साह और समर्पण के साथ मनाया। राकेश सिंह ने कहा कि यह दिन उन संस्थापकों और पुरोधाओं को याद करने का अवसर है, जिन्होंने भारतीय जनसंघ से भाजपा तक की यात्रा में अपना योगदान दिया। उन्होंने कार्यकर्ताओं से संगठन की विचारधारा को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। राकेश सिंह ने कहा कि कार्यकर्ताओं की निष्ठा और अनुशासन ही संगठन की ताकत है, जिसके बल पर भाजपा ने कठिन परिस्थितियों में भी खुद को मजबूत किया है। कार्यक्रम में सांसद आशीष दुबे, विधायक अभिलाष पाण्डेय, विधायक ईश्वरदास रोहाणी, भाजपा महिला मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष अश्विनी परांजपे और नगर अध्यक्ष रत्नेश सोनकर सहित कई नेता मौजूद रहे।

समझाया: असम में घटेंगे मुस्लिम विधायक क्या हैं? कैसे 30-35 से 20-22 मंत्रियों तक प्रतिनिधि हो सकते हैं, सिद्धांतकारों से

समझाया: असम में घटेंगे मुस्लिम विधायक क्या हैं? कैसे 30-35 से 20-22 मंत्रियों तक प्रतिनिधि हो सकते हैं, सिद्धांतकारों से

29 जनवरी 2026… असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा, ‘मिया मुस्लिम को किसी भी तरह की चिंता मत करो… अगर उन्हें परेशानी होगी तो वे असमंजस छोड़ देंगे…’ असम के विधानसभा चुनाव में कुछ ही दिन बाकी हैं, ऐसे में सीएम हिमंत का यह बयान जमीनी स्तर पर काम कर रहा है। हालाँकि, इसकी शुरुआत 2023 में डिलिम इंडस्ट्री से हुई थी। यानी पूरे राज्य में 34 मुस्लिम मुस्लिम पवित्र स्थान, जो नतीजे देता है कि पलटने का दम लिखा है। उन रेज़्यूमे के इलाक़े में बदलाव दिए गए हैं, जिससे अब सिर्फ़ 20-22 रेज़्यूमे पर मुस्लिम बचे हैं। तो क्या असम में मुस्लिम नाम का पत्ता कट जाएगा? व्याख्याताओं में शामिल हैं… प्रश्न 1: असम में मुस्लिम समुदाय की स्थायी संख्या क्या है और 2026 में क्या घटेगी?उत्तर उत्तर: भारत के असम राज्य में पिछले विधानसभा चुनाव 2021 में हुए थे, जिसमें कुल 31 मुस्लिम विधायक चुने गए थे। इनमें 16 कांग्रेस के थे और 15 ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट यानी एआईयूडीएफ के थे। यह संख्या नतीजे पलटने की ताकत लिखी थी, लेकिन सिर्फ 5 साल बाद शीशे बदल दिए गए। अब 9 अप्रैल 2026 को होने वाले चुनाव में मुस्लिम बिश्राम की संख्या 22 रहने का अनुमान है, क्योंकि 2023 में असम में डिलम उद्योग हुआ था। आसान शब्दों में कोनाडो को 126 आदर्श वाक्यों में बदल दिया गया था। इससे मुस्लिम मुसलमानों को वोटों का बड़ा नुकसान होगा। 2011 के अनुसार, असम में मुस्लिम आबादी 34% है, लेकिन प्रतिनिधित्व पहले से ही कम था, अब और घटने वाला है। यानी असम में कोई बड़ा मुस्लिम नेता नहीं है. प्रश्न 2: असम में डिलिमिटन उद्योग क्या है और असम में क्या हुआ?उत्तर उत्तर: असम में डिलम वास्तुशिल्प से 126 विधानसभाएं तो चलती ही रहीं, लेकिन उनका अंत बदल दिया गया। सबसे ज्यादा प्रभावशाली मुस्लिम बहुल अरब पर हुआ। पहले 35 प्रमुख मुस्लिम बहुमत वाले, अब ये समूह करीब 20 रह गए हैं। कई मुस्लिम बहुल एशिया में हिंदू बहुल क्षेत्र शामिल हो गए, जिससे मुस्लिम बहुल क्षेत्र का प्रभाव टूट गया। बारपेटा जिले में मुस्लिम बहुल 8 समुदाय 6 हो गए। बराक घाटी की 15 यात्रा 13 राहें। गोलापारा वेस्ट के चर्च एसटी होटल हो गए, जहां सबसे पहले मुस्लिम विधायक जीते थे। जानिया, बाघबर और चेंगा जैसे मुस्लिम क्षेत्र को हिंदू बहुल क्षेत्र के साथ जोड़ा गया। धुबरी और बिलासीपारा दो मुस्लिम बहुल तीर्थस्थलों में से एक में मर्ज कर दिया गया। भाषाएँ इसे ‘गेरीमैंडरिंग’ (सीटों की संख्या) बता रहे हैं। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, मुस्लिम बहुल 35 को हिंदू बहुल क्षेत्र के साथ समग्र मुस्लिम वोट बनाया गया।’ सीपीआई (एम) के राज्य सचिव सुप्रकाश तालुकदार ने कहा, ‘हिंदू इलाकों को मुस्लिमों से जोड़ा गया और मुस्लिम मतदाताओं को हिंदू बहुसंख्यक क्षेत्र में विभाजित किया गया।’ प्रश्न 3: इस बदलाव का क्या असर होगा?उत्तर उत्तर: पॉलिटिकल विशेषज्ञ रशीद किदवई का मानना ​​है कि मुस्लिम वोटरों का ‘पॉलिटिकल फुटप्रिंट’ करीब 30% कम हो गया है। पहले मुस्लिम 30-35 पर क्लासिक थे, अब सिर्फ 20-22 पर। मुस्लिम प्रतिनिधित्व पहले से कम था, अब और घटेगा। अगर मुस्लिम नेता 22 रह गए तो उनकी सामूहिक ताकतें और ताकतें हो जाएंगी। असम के मुस्लिम (खासकर मिया या बैलर मूल के) में लंबे समय से कोई एक मजबूत, प्रतिष्ठित नेता नहीं पाया गया। 2024 के लोकसभा चुनाव तक AIUDF के बदरुद्दीन अजमल जैसे नेता थे, लेकिन उन्होंने अपनी सीट गंवा दी। अब ना तो कोई नया चेहरा है जो पूरी कम्यूनिटी की बात रख सके, ना ही मुस्लिम मुस्लिम लीडर्स को पाल रही हैं। बदरुद्दीन अजमल 2024 में धुबरी लोकसभा सीट से चुनाव हारे थे रशीद किदवई ने कहा, ’31 मुस्लिम अपराधी तो हैं, लेकिन वे अपने-अपने क्षेत्र तक सीमित हैं। बैस्ट, पुशबैक और वोटर लिस्ट से नाम कटना जैसी बड़ी हस्तियों पर कोई सामूहिक आवाज नहीं उठती। कांग्रेस के मुस्लिम नेता भी चुप रहते हैं क्योंकि उन्हें डर है कि बोलने से वोट कम हो जायेंगे। परिणाम? मुस्लिम समुदाय ‘राजनीतिक नो-मैनस लैंड’ में फंस गया है।’ सवाल 4: बीजेपी की रणनीति और मिया मुसलमानों का डर क्या है?उत्तर उत्तर: सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने बार-बार कहा, ‘मिया को वोट की जरूरत नहीं।’ यानि बीजेपी मुस्लिम मुस्लिम जनता का विरोध कर रही है। सीएम सरमा ने ये भी कहा, ‘मिया मुसलमानों को किसी भी तरह से परेशान करो.’ अगर वे परेशान होंगे तो असम ठीक हो जाएगा।’ मार्च 2026 में बारपेटा में उन्होंने कहा था, ‘पिछली बार कुछ टांगें तोड़ें, इस बार मार्जिन टूट गया।’ असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा कई बार आदर्शों के खिलाफ कड़वे बयान दे चुके हैं इससे साफ है कि बीजेपी इस बार 89वीं बार एक भी मुस्लिम उम्मीदवार नहीं निकलेगी। बीजेपी ने अपना ‘मुस्लिम वोट’ का बोझ सहयोगी एजीपी पर डाला है। एजीपी ने 26 पर 13 मुस्लिम उम्मीदवार उतारे हैं। इससे बीजेपी की यूक्रेनी वाली छवि बनी रहेगी। एजीपी प्रवक्ता कस्तूरी बोरुआ ने कहा, ‘बीजेपी घुसपैठियों और पार्टी के खिलाफ है, लेकिन यह बजरंग मुसलमानों के खिलाफ नहीं है।’ वहीं, 2021 में कांग्रेस-एआईयूडीएफ गठबंधन ने 31 मुस्लिम विधायक जीते थे, लेकिन इस बार कोई गठबंधन नहीं. मुस्लिम कांग्रेस अस्वीकृत है लेकिन अस्वीकृत है। एआईयूडीएफ अकेले लड़ रही है, लेकिन उसकी प्राथमिकता घटी है। वोट बंटाने से भी मुस्लिम हितैषी का चांस कम हो रहा है। प्रश्न 5: तो क्या असम से मुस्लिम रिश्ते का पत्ता साफ होगा?उत्तर उत्तर: नहीं, असम से मुस्लिम रिश्ते का पत्ता बिल्कुल साफ नहीं होगा। रशीद किदवई कहते हैं, ‘2026 के चुनाव में मुस्लिम समुदाय की संख्या 31 से 20-23 के आसपास रहने की संभावना है या अधिकतम 22 राह हो सकती है। पूर्णतया समाप्त (शून्य) होने की कोई छूट नहीं है।’

मीठा खाने की इच्छा क्यों होती है? क्या यह शरीर में छिपी किसी समस्या का संकेत, डाइटिशियन ने बताया सच

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Causes of Sugar Cravings: कई बार आपने महसूस किया होगा कि अचानक मीठा खाने की इच्छा करने लगती है. कभी चॉकलेट, कभी मिठाई, तो कभी मीठी चाय पीने का खूब मन करता है. ऐसा लगता है कि शरीर खुद ही शुगर की मांग कर रहा है. कई बार लगता है कि ऐसा लोग स्वाद की वजह से करते हैं, लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो यह सेहत से जुड़ा संकेत भी हो सकता है. अगर आपको बार-बार मीठा खाने की इच्छा हो रही है, तो इसे नजरअंदाज न करें. नोएडा के डाइट मंत्रा क्लीनिक की डाइटिशियन कामिनी सिन्हा ने News18 को बताया कि कभी-कभी मीठा खाने का मन करना बिल्कुल सामान्य है. हमारा दिमाग ग्लूकोज को एनर्जी के मुख्य सोर्स के रूप में इस्तेमाल करता है. जब शरीर को इंस्टेंट एनर्जी की जरूरत होती है, तो मीठा खाने की इच्छा बढ़ सकती है. अगर यह इच्छा बहुत बार या कंट्रोल से बाहर हो जाए, तो इसके पीछे कुछ कारण हो सकते हैं. जब आप लंबे समय तक कुछ नहीं खाते या बहुत ज्यादा रिफाइंड कार्ब्स खाते हैं, तो ब्लड शुगर तेजी से बढ़ता और फिर गिरता है. इस गिरावट के बाद शरीर फिर से शुगर मांगता है, जिससे मीठा खाने की क्रेविंग बढ़ जाती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. डाइटिशियन के अनुसार कम नींद लेने से शरीर का एनर्जी बैलेंस बिगड़ जाता है. इससे भूख बढ़ाने वाले हार्मोन एक्टिव हो जाते हैं और मीठा खाने की इच्छा तेज हो जाती है. थकान के समय शरीर इंस्टेंट एनर्जी पाने के लिए शुगर की ओर झुकता है. इसके अलावा स्ट्रेस, एंजायटी या उदासी के समय लोग अक्सर कंफर्ट फूड की ओर जाते हैं, जिसमें मीठा सबसे ऊपर होता है. मीठा खाने से दिमाग में फील-गुड हार्मोन रिलीज होता है, जिससे थोड़ी देर के लिए अच्छा महसूस होता है. एक्सपर्ट की मानें तो कभी-कभी शरीर में कुछ पोषक तत्वों की कमी भी मीठा खाने की इच्छा बढ़ा सकती है. अगर मैग्नीशियम, क्रोमियम, प्रोटीन की कमी है, तब भी क्रेविंग बढ़ जाती है. हालांकि यह सीधा कारण नहीं होता, लेकिन असंतुलित डाइट क्रेविंग्स को बढ़ा सकती है. बार-बार और बहुत ज्यादा मीठा खाने की इच्छा टाइप 2 डायबिटीज, हार्मोनल असंतुलन, अत्यधिक तनाव या एंजायटी का भी संकेत हो सकता है. अगर इसके साथ बार-बार प्यास लगना, थकान या वजन में बदलाव जैसे लक्षण भी हों, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है. डाइटिशियन के अनुसार अगर आपको मीठा खाने की क्रेविंग हो रही है, तो प्रोटीन और फाइबर से भरपूर डाइट लें. लंबे समय तक खाली पेट न रहें, पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, मीठे के हेल्दी ऑप्शन चुनें और रोज 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद लें. मीठा खाने की इच्छा हमेशा खराब नहीं होती, लेकिन अगर यह बार-बार और अनकंट्रोल हो जाए, तो यह शरीर के किसी असंतुलन का संकेत हो सकती है. सही खानपान, अच्छी नींद और स्ट्रेस मैनेजमेंट से इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है. जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह लेना सबसे सुरक्षित तरीका है.

अक्षय कुमार की ‘भूत बंगला’ का ट्रेलर रिलीज:राजपाल और परेश रावल के साथ पुराने अंदाज में दिखे; 16 अप्रैल से पेड प्रिव्यूज

अक्षय कुमार की ‘भूत बंगला’ का ट्रेलर रिलीज:राजपाल और परेश रावल के साथ पुराने अंदाज में दिखे; 16 अप्रैल से पेड प्रिव्यूज

अक्षय कुमार की मोस्ट अवेटेड फिल्म ‘भूत बंगला’ का ट्रेलर आखिरकार रिलीज हो गया है। प्रियदर्शन के निर्देशन में बनी इस फिल्म का ट्रेलर दर्शकों को पुराने दिनों की याद दिलाता है। इसमें अक्षय कुमार के साथ उनकी पुरानी कॉमेडी टीम यानी परेश रावल और राजपाल यादव भी नजर आ रहे हैं। फिल्म में हॉरर और कॉमेडी का वैसा ही बैलेंस दिख रहा है, जिसके लिए अक्षय और प्रियदर्शन की जोड़ी जानी जाती है। ट्रेलर को देखकर लग रहा है कि मेकर्स ने इसे बिना किसी तामझाम के काफी सरल और मनोरंजक रखा है। पुराने अंदाज में दिखे अक्षय और प्रियदर्शन फिल्म का ट्रेलर उस विंटेज स्पेस में ले जाता है, जिसमें अक्षय और प्रियदर्शन सालों से काम करते आए हैं। ट्रेलर की लय काफी तेज और मजेदार है। इसमें कॉमेडी के साथ स्पूकी (डरावने) एलिमेंट्स का इस्तेमाल किया गया है, लेकिन कुछ भी ओवरडन या जबरदस्ती नहीं लगता। फिल्म की राइटिंग काफी सहज नजर आ रही है। ट्रेलर के आखिर तक आते-आते दर्शकों की जिज्ञासा फिल्म को लेकर काफी बढ़ जाती है। कास्ट और टीम का दिखा तालमेल फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी कास्टिंग है। अक्षय कुमार एक बार फिर उसी जॉनर में लौटे हैं जो उन पर सबसे ज्यादा सूट करता है। उनके साथ परेश रावल और राजपाल यादव की टाइमिंग हमेशा की तरह दिख रही है। साथ ही असरानी ने भी अपने चिर-परिचित अंदाज में कॉमेडी का तड़का लगाया है। इन दिग्गजों के अलावा फिल्म में वामिका गब्बी, तब्बू, जिशु सेनगुप्ता और मिथिला पालकर जैसे कलाकार भी अहम भूमिकाओं में हैं। ट्रेलर में क्या है खास ? टीजर में जहां सिर्फ फिल्म के टोन की झलक मिली थी, वहीं ट्रेलर कहानी की दुनिया से भी परिचित कराता है। यह पूरी कहानी बताए बिना दर्शकों को फिल्म के माहौल से जोड़ देता है। मेकर्स ने किसी ट्रेंड को फॉलो करने के बजाय उस क्लासिक कॉमेडी स्टाइल पर भरोसा किया है जिसमें कंफ्यूजन और कैरेक्टर-ड्रिवन मोमेंट्स होते हैं। 16 अप्रैल से शुरू होंगे पेड प्रिव्यूज फिल्म को लेकर दर्शकों का इंतजार अब खत्म होने वाला है। मेकर्स ने जानकारी दी है कि 16 अप्रैल 2026 की रात 9 बजे से फिल्म के एडवांस पेड प्रिव्यूज शुरू हो जाएंगे। फिल्म में 14 साल बाद अक्षय कुमार और प्रियदर्शन की जोड़ी साथ दिखेगी। इस जोड़ी ने हिंदी सिनेमा को ‘हेरा फेरी’, ‘गरम मसाला’, ‘भागम भाग’ और ‘भूल भुलैया’ जैसी कल्ट क्लासिक फिल्में दी हैं। इन दोनों ने आखिरी बार साल 2010 में आई फिल्म ‘खट्टा मीठा’ में साथ काम किया था। अब करीब 14 साल बाद दोनों फिर से हॉरर-कॉमेडी जॉनर में वापसी कर रहे हैं।

Bhopal Minister Bungalow Theft | Store Room Shields Stolen

Bhopal Minister Bungalow Theft | Store Room Shields Stolen

भोपाल46 मिनट पहले कॉपी लिंक मंत्री विश्वास सारंग का बंगला भोपाल के 74 बंगला इलाके में है। मध्य प्रदेश के खेल एवं सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग के सरकारी बंगले में चोरी हो गई है। बंगला परिसर में बने स्टोर रूम से अज्ञात चोर ट्रॉफियां, मोमेंटो और शील्ड उड़ा ले गए हैं। वारदात 2 और 3 अप्रैल की दरमियानी रात की है। इसका खुलासा 6 अप्रैल की सुबह हुआ है। टीटीनगर पुलिस के मुताबिक, 3 अप्रैल की सुबह बंगले के स्टोर रूम का ताला टूटा मिला। सिक्योरिटी गार्ड ने देखा तो सामान गायब था। स्टोर रूम मंत्री के बंगले के साइड में बना है। टीटी नगर थाना पुलिस कर रही जांच थाना प्रभारी गौरव दोहरे ने बताया कि चोरी गईं ट्रॉफियां, मोमेंटो और शील्ड मंत्री सारंग को अलग-अलग कार्यक्रमों में सम्मान स्वरूप मिले थे। फिलहाल, इनकी कीमत का आकलन किया जा रहा है। जांच में सामने आया है कि जिस स्टोर रूम में चोरी हुई, वहां सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हैं। इससे आरोपियों की पहचान में दिक्कत आ रही है। दोहरे ने कहा- पुलिस आसपास की सड़कों और मकानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। जल्द ही आरोपियों को पकड़ लिया जाएगा। ये खबर भी पढ़ें… भोपाल में दिग्विजय के विधायक बेटे के बंगले में चोरी पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के विधायक बेटे जयवर्धन सिंह के चार इमली स्थित बंगले पर चोरी हो गई है। बदमाश यहां से नकदी और जेवरात लेकर भागे हैं। बताया जा रहा है कि पुलिस एक शख्स से पूछताछ कर रही है। इस मामले को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

बुरहानपुर में भाजपा कार्यालय का भूमिपूजन:एक साल में होगा तैयार; स्थापना दिवस पर वरिष्ठ नेताओं का सम्मान

बुरहानपुर में भाजपा कार्यालय का भूमिपूजन:एक साल में होगा तैयार; स्थापना दिवस पर वरिष्ठ नेताओं का सम्मान

बुरहानपुर में भारतीय जनता पार्टी का स्थापना दिवस 6 अप्रैल को मोहन नगर स्थित पार्टी कार्यालय के पास मनाया गया। इस अवसर पर नए भाजपा कार्यालय का भूमिपूजन किया गया और 1980 में पार्टी की स्थापना के समय मुंबई अधिवेशन में शामिल हुए वरिष्ठ नेताओं को सम्मानित किया गया। भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. मनोज माने ने बताया कि यह पार्टी का 47वां स्थापना दिवस है। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं के अथक प्रयासों से पार्टी इस मुकाम पर पहुंची है। कार्यालय निर्माण में आ रही बाधाएं अब दूर हो गई हैं। बुरहानपुर विधायक अर्चना चिटनिस ने कार्यालय के लिए 20 लाख रुपये की राशि दी है और इस वित्तीय वर्ष में 15 लाख रुपये और देने की बात कही है। डॉ. माने ने बताया कि कार्यालय का निर्माण कार्य आज से ही शुरू हो गया है। इसे एक साल के भीतर पूरा कर लिया जाएगा और अगले साल 6 अप्रैल 2027 को इसका लोकार्पण किया जाएगा। कार्यक्रम में 1980 में जनसंघ से भाजपा की स्थापना के समय मुंबई अधिवेशन में शामिल हुए वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में रामदास शिवहरे, ज्ञानेश्वर मोरे, प्रकाश कानूनगो, गोकुल प्रजापति, हीरालाल बड़गुर्जर, जगदीश कपूर, अरुण शेंडे, अतुल पटेल और दीपक अग्रवाल शामिल थे। इस अवसर पर सांसद ज्ञानेश्वर पाटील, विधायक अर्चना चिटनिस, जिला संगठन प्रभारी क्षितिज भट्ट, संभाग प्रभारी सुरेंद्र शर्मा और नेपानगर विधायक मंजू दादू सहित अन्य वरिष्ठ नेता उपस्थित थे। मंच का संचालन जिलाध्यक्ष डॉ. मनोज माने ने किया।

धुरंधर देखकर परेश रावल बोले- काश मैं इसमें होता:यह सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि गाथा है; आदित्य धर की ‘उरी’ में कर चुके हैं काम

धुरंधर देखकर परेश रावल बोले- काश मैं इसमें होता:यह सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि गाथा है; आदित्य धर की ‘उरी’ में कर चुके हैं काम

निर्देशक आदित्य धर की फिल्म धुरंधर और उसके सीक्वल की जबरदस्त सफलता के बीच एक्टर परेश रावल का एक बयान चर्चा में है। रावल ने कहा है कि उन्हें इस फ्रेंचाइजी का हिस्सा होना चाहिए था और पहली बार उन्हें किसी फिल्म को देखकर ऐसा लगा कि काश वे भी इसमें होते। परेश रावल ने हाल ही में न्यूज एजेंसी पीटीआई से बातचीत में धुरंधर और धुरंधर: द रिवेंज की जमकर तारीफ की। उन्होंने बताया कि उन्होंने फिल्म का पहला पार्ट दो बार देखा है, जबकि दूसरा पार्ट भी देख चुके हैं और दोबारा देखने की इच्छा है। उनके मुताबिक, यह सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि एक गाथा है, जिसने उन्हें काफी प्रभावित किया। परेश रावल ने कहा, “पहली बार लगा कि मुझे इस फिल्म का हिस्सा होना चाहिए था।” उन्होंने मजाकिया अंदाज में निर्देशक आदित्य धर से यह भी कहा कि अगर मौका मिलता तो वे फिल्म में एक दिलचस्प किरदार निभाना चाहते। फिल्म में रणवीर सिंह, आर माधवन और अर्जुन रामपाल जैसे सितारे अहम भूमिकाओं में नजर आए हैं। खासतौर पर आर माधवन के किरदार को लेकर भी चर्चा है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से प्रेरित बताया जाता है। दिलचस्प बात यह है कि परेश रावल पहले उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक में इसी तरह के किरदार से जुड़े रोल निभा चुके हैं। उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक में परेश रावल ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार गोविंद भारद्वाज का किरदार निभाया था, जो अजीत डोभाल से प्रेरित माना जाता है। रावल ने दोनों फिल्मों में इस तरह के किरदारों की अलग-अलग व्याख्या को दिलचस्प बताया और कहा कि दर्शकों को यह विविधता पसंद आई है। उन्होंने यह भी माना कि धुरंधर की कहानी, पैमाना और प्रस्तुति इसे खास बनाते हैं, जिसकी वजह से यह दर्शकों के बीच बड़ी हिट साबित हुई है। बता दें कि धुरंधर फ्रेंचाइजी बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन कर रही है और देश-विदेश में इसे जबरदस्त रिस्पॉन्स मिल रहा है।

Dhurandhar 2 Box Office Collection Crosses 1622 Cr Worldwide, 1000 Cr India

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1 घंटे पहले कॉपी लिंक आदित्य धर की फिल्म ‘धुरंधर: द रिवेंज’ भारत में सबसे तेजी से 1000 करोड़ रुपए का नेट कलेक्शन करने वाली फिल्म बन गई है। फिल्म का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन अब 1622 करोड़ रुपए के पार पहुंच गया है। तीसरे वीकेंड में भी फिल्म की कमाई की रफ्तार कम नहीं हुई है। रिलीज के 16वें दिन (शुक्रवार) को फिल्म ने 23 करोड़, 17वें दिन (शनिवार) को 27 करोड़ और 18वें दिन (रविवार) को 30 करोड़ रुपए का कलेक्शन किया। इस तरह तीसरे वीकेंड पर फिल्म ने कुल 80 करोड़ रुपए की कमाई की। भारत में फिल्म का कुल नेट कलेक्शन अब 1041 करोड़ रुपए और ग्रॉस कलेक्शन 1228 करोड़ रुपए हो चुका है। विदेशों में भी कमाई के रिकॉर्ड तोड़ रही फिल्म ‘धुरंधर 2’ न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी नए बेंचमार्क सेट कर रही है। फिल्म ने ओवरसीज मार्केट में अब तक 394 करोड़ रुपए का कलेक्शन कर लिया है। यह नॉर्थ अमेरिका में 25 मिलियन डॉलर का आंकड़ा पार करने वाली पहली भारतीय फिल्म बन गई है। इसके अलावा जर्मनी में भी इसने 1 मिलियन यूरो से ज्यादा की कमाई कर एक नया रिकॉर्ड बनाया है। फिल्म ने नॉर्थ अमेरिका में अब तक की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्म का खिताब भी अपने नाम कर लिया है। पार्ट 1 के लाइफटाइम रिकॉर्ड को 10 दिन में तोड़ा इस फिल्म की कामयाबी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसने ‘धुरंधर’ के पहले पार्ट के ओवरसीज लाइफटाइम कलेक्शन को महज 10 दिनों में ही पीछे छोड़ दिया था। यह सबसे तेजी से 1000 करोड़ रुपए (वर्ल्डवाइड) कमाने वाली फिल्म बन गई है। फिल्म ने भारत में 100 करोड़ से लेकर 1000 करोड़ तक के सभी माइलस्टोन सबसे कम समय में हासिल किए हैं। साथ ही, यह अब तक की सबसे बड़ी हिंदी ओपनर और वर्ल्डवाइड सबसे बड़ा ओपनिंग वीकेंड देने वाली फिल्म भी बन चुकी है। फिल्म के नाम दर्ज हुए ये बड़े रिकॉर्ड्स भारत में 1000 करोड़ नेट कलेक्शन करने वाली पहली फिल्म। नॉर्थ अमेरिका में 25 मिलियन डॉलर कमाने वाली पहली भारतीय फिल्म। सबसे तेजी से 1000 करोड़ का ग्लोबल आंकड़ा पार करने वाली फिल्म। जर्मनी में 1 मिलियन यूरो का आंकड़ा छूने वाली पहली भारतीय फिल्म। ऑल टाइम सबसे बड़ी भारतीय ब्लॉकबस्टर। आगे भी जारी रह सकती है कमाई ‘धुरंधर: द रिवेंज’ का पहला पार्ट पिछले साल दिसंबर में रिलीज हुआ था, जिसे दर्शकों ने काफी पसंद किया था। 19 मार्च को रिलीज हुए इसके सीक्वल ने उम्मीदों से कहीं ज्यादा प्रदर्शन किया है। फिल्म की कहानी, एक्शन और मेकिंग की तुलना ग्लोबल सिनेमा से की जा रही है। ट्रेड एक्सपर्ट्स का मानना है कि फिल्म की लंबी दौड़ अभी जारी रहेगी क्योंकि फिलहाल कोई बड़ी फिल्म इसे टक्कर देने के लिए मैदान में नहीं है। नेट और ग्रॉस कलेक्शन में क्या अंतर होता है? फिल्मों की कमाई में नेट कलेक्शन और ग्रॉस कलेक्शन दो अलग तरीके से गिने जाते हैं। ग्रॉस कलेक्शन वह कुल रकम होती है जो टिकट बेचकर आती है, इसमें टैक्स (जैसे GST) भी शामिल होता है। जबकि नेट कलेक्शन वह रकम होती है जो टैक्स हटाने के बाद बचती है, यानी असली कमाई जो फिल्म के खाते में मानी जाती है। आसान शब्दों में, ग्रॉस पूरी कमाई है और नेट टैक्स निकालने के बाद की साफ कमाई। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

क्या कोई ऐसी दवा है, जिसे खाने के बाद तुरंत स्ट्रेस कम हो जाए? साइकेट्रिस्ट डॉक्टर प्रेरणा कुकरेती से समझिए

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Last Updated:April 06, 2026, 14:15 IST Is There Quick Fix for Stress: स्ट्रेस कई मानसिक परेशानियों की जड़ है और इसे कम करने के लिए कई लोग दवाएं लेना शुरू कर देते हैं. साइकेट्रिस्ट डॉक्टर प्रेरणा कुकरेती के अनुसार तनाव को तुरंत खत्म करने वाली कोई जादुई दवा नहीं होती. कुछ दवाएं जैसे एंटी-एंजायटी और एंटीडिप्रेसेंट स्ट्रेस से राहत दिला सकती हैं, लेकिन ये डॉक्टर की सलाह पर ही लेनी चाहिए. स्ट्रेस को मैनेज करने के लिए सही लाइफस्टाइल, योग, ध्यान और अच्छी नींद बेहद महत्वपूर्ण है. स्ट्रेस के लिए आमतौर पर दवा नहीं दी जाती है, लेकिन यह एंजायटी में बदल जाए, तब दवा लेनी पड़ती है. Stress Relief Medicines: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव एक आम समस्या बन चुका है. काम का दबाव, पारिवारिक जिम्मेदारियां और भविष्य की चिंता लोगों को मानसिक रूप से परेशान कर रही है. बड़ी संख्या में युवा भी स्ट्रेस से परेशान नजर आ रहे हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो स्ट्रेस कम करने के लिए अच्छी लाइफस्टाइल, हेल्दी डाइट, योग, मेडिटेशन समेत कई तरीके होते हैं. हालांकि कई लोग स्ट्रेस के कारण कुछ काम नहीं कर पाते हैं. ऐसे में कई लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या कोई ऐसी दवा है, जिसे लेने के बाद तुरंत स्ट्रेस कम हो जाए? चलिए इस बारे में डॉक्टर से हकीकत जान लेते हैं. नई दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज की प्रोफेसर और साइकेट्रिस्ट डॉ. प्रेरणा कुकरेती ने News18 को बताया कि स्ट्रेस की समस्या आजकल अधिकतर लोगों को परेशान कर रही है. आमतौर पर स्ट्रेस से निजात पाने के लिए स्क्रीन से ब्रेक लेना, काम से छुट्टी लेना, पसंदीदा एक्टिविटी करना, फैमिली के साथ टाइम स्पेंड करना और बाहर घूमने की सलाह दी जाती है. कई लोग डेली एक्सरसाइज, योग और मेडिटेशन के जरिए स्ट्रेस को कंट्रोल कर लेते हैं. हालांकि कई मामलों में स्ट्रेस बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और एंजायटी व डिप्रेशन की कंडीशन पैदा कर देता है. अगर ऐसा होता है, तब लोगों को दवा लेने की सलाह दी जाती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. डॉक्टर प्रेरणा ने बताया कि हर तरह के तनाव के लिए कोई मैजिक पिल नहीं होती है. तनाव की प्रकृति, उसका टाइम और व्यक्ति की मेंटल कंडीशन के आधार पर ही ट्रीटमेंट तय किया जाता है. कुछ दवाएं जरूर हैं, जो तेजी से असर दिखाती हैं, लेकिन उनका उपयोग विशेष परिस्थिति और डॉक्टर की निगरानी में ही किया जाना चाहिए. कुछ मामलों में डॉक्टर एंटी-एंजायटी दवाएं देते हैं, जो घबराहट और चिंता को जल्दी कम कर सकती हैं. हालांकि इन दवाओं के साथ सबसे बड़ा रिस्क एडिक्शन का होता है. लंबे समय तक या बिना डॉक्टर की सलाह के इनका सेवन करना नुकसानदायक हो सकता है. एक्सपर्ट के अनुसार जब तनाव लंबे समय तक बना रहता है और डिप्रेशन का रूप लेने लगता है, तब डॉक्टर एंटीडिप्रेसेंट दवाएं सुझाते हैं. ये दवाएं तुरंत असर नहीं करतीं, बल्कि 2 से 4 हफ्तों में धीरे-धीरे सुधार लाती हैं. इसलिए इन्हें इंस्टेंट रिलीफ के बजाय लॉन्ग टर्म ट्रीटमेंट के रूप में देखा जाता है. डॉक्टर का साफ कहना है कि हल्के और मीडियम लेवल के तनाव के लिए दवा की जरूरत नहीं होती है. नियमित व्यायाम, योग और ध्यान, पर्याप्त नींद और अपनों से खुलकर बात करने से स्ट्रेस कम हो सकता है. अगर तनाव लंबे समय तक बना रहे या इसके साथ घबराहट, नींद की कमी, दिल की धड़कन तेज होना या ध्यान केंद्रित करने में परेशानी जैसी समस्याएं होने लगें, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो जाता है. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : April 06, 2026, 14:15 IST