एसिडिटी से राहत का देसी उपाय I Sultanpur news

Last Updated:April 07, 2026, 10:47 IST गलत खान-पान और तनाव की वजह से बढ़ रही एसिडिटी अब आम समस्या बन चुकी है. आयुर्वेद के अनुसार मुलेठी का सेवन पाचन तंत्र को मजबूत कर पित्त दोष को शांत करने में मदद करता है और बार-बार होने वाली जलन से राहत दे सकता है. सुल्तानपुर. आज के समय में गलत दिनचर्या और गलत खान-पान की वजह से हमारा स्वास्थ्य कई तरह की बीमारियों का शिकार होता चला जा रहा है. उसी में एक आम समस्या पित्त अम्ल दोष की भी लोगों को ज्यादा हो रही है. पीत अम्ल दोष जिसे आम बोलचाल की भाषा में एसिडिटी भी कहा जाता है. यह समस्या आज के लोगों में ज्यादा हो रही है और एसिडिटी की वजह से कई बार लोगों को ज्यादा तेज पीड़ा भी होने लगती है. ऐसे में आयुर्वेद में एसिडिटी और पित्त को साफ करने के लिए मुलेठी के सेवन को बताया गया है. चिकित्सकों के मुताबिक मुलेठी का सेवन एसिडिटी के लिए रामबाण इलाज है. तीन चीज़ें हैं महत्वपूर्ण सुल्तानपुर मेडिकल कॉलेज में कार्यरत आयुर्वेद चिकित्सक डॉक्टर संतोष कुमार श्रीवास्तव लोकल 18 से बताते हैं कि इसके लिए हरी करी और बरी यह तीन चीज काफी इंपोर्टेंट होती हैं. इन्हीं तीनों की वजह से लोगों को एसिडिटी की समस्या होती है. जिसमें हरी का मतलब होता है जल्दी-जल्दी खाना खाना क्योंकि जब हम जल्दी-जल्दी खाना खाते हैं तो इससे हमारा पाचन तंत्र खाने को पचाने में अधिक समय लेता है और सही से पचा भी नहीं पाता. वहीं करी का मतलब है मिर्च, मसाला और तली-भुनी हुई चीज का अधिक सेवन करना, ये भी एसिडिटी का कारण बनता है और बरी का मतलब अधिक चिंता करना यानी कि आप अधिक चिंता करते हैं तो भी आपको एसिडिटी हो सकती है. करें यह उपायअगर आपको भी बार-बार एसिडिटी की समस्या आती है तो इसके लिए आप आयुर्वेद के देसी उपाय में मुलेठी का सेवन कर सकते हैं. अगर आप मुलेठी के स्वरस का प्रयोग करते हैं तो यह एसिडिटी के लिए और अधिक फायदेमंद होता है अन्यथा आप मुलेठी के टुकड़े को भी मुंह में रखकर एसिडिटी से छुटकारा पा सकते हैं या फिर आप इसका चूर्ण बनाकर भी इस्तेमाल कर सकते हैं. अन्य में भी है फायदेमंद मुलेठी का सेवन करने से हमारे शरीर का पाचन तंत्र मजबूत होता है इसके साथ ही एसिडिटी की भी समस्या दूर होती है लेकिन इन सबके अलावा मुलेठी का सेवन हमारे लिए उन चीजों में भी फायदेमंद है जिन लोगों को खांसी आदि की समस्या है. वह लोग भी मुलेठी का सेवन कर सकते हैं और खांसी की समस्या से छुटकारा पा सकते हैं. About the Author Monali Paul नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें Location : Sultanpur,Uttar Pradesh First Published : April 07, 2026, 10:47 IST
बेहद खास है यह मुरब्बा, गुलाब के फूलों से होता है तैयार, स्वाद के साथ सेहत का है खजाना

X बेहद खास है यह मुरब्बा, गुलाब के फूलों से होता है तैयार, स्वाद के साथ सेहत भी Gulkand Murabba Recipe: गुलाब की पंखुड़ियों और चीनी से बनने वाला गुलकंद सिर्फ मीठे पान का स्वाद बढ़ाने तक सीमित नहीं, बल्कि गर्मियों में सेहत के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. गोरखपुर के प्राणनाथ इलाके में गुलकंद से तैयार होने वाला खास मुरब्बा लोगों के बीच लोकप्रिय है और गर्मियों में इसकी मांग बढ़ जाती है. भारत में इसका सबसे अधिक उपयोग मीठे पान में होता है. जिससे स्वाद बढ़ने के साथ मुंह में ठंडक मिलती है. इसके अलावा गुलकंद से मुरब्बा, शरबत, लस्सी, मिल्कशेक और मिठाइयां भी बनाई जाती है. आयुर्वेद के अनुसार इसकी तासीर ठंडी होती है जो शरीर का तापमान संतुलित रखती है. यह पेट की गर्मी कम करता है. पाचन सुधारता है और एसिडिटी में राहत देता है. नियमित सेवन से कब्ज कम होती है. मुंह की बदबू दूर होती है और शरीर को हल्की ऊर्जा भी मिलती है.
anushka sharma virat kohli praise ranveer singh’s dhurandhar 2, actress said- never seen a cinematic experience like this made in India

Hindi News Entertainment Bollywood Anushka Sharma Virat Kohli Praise Ranveer Singh’s Dhurandhar 2, Actress Said Never Seen A Cinematic Experience Like This Made In India 6 मिनट पहले कॉपी लिंक आदित्य धर के निर्देशन में बनी फिल्म धुरंधर 2 लगातार बॉक्स ऑफिस पर बड़े रिकॉर्ड कायम कर रही है, जिसे न सिर्फ आम जनता बल्कि फिल्म इंडस्ट्री की भी जमकर तारीफें मिल रही हैं। अब हाल ही में पावर कपल विराट कोहली-अनुष्का शर्मा ने फिल्म देखकर इसकी तारीफों के पुल बांध दिए हैं। विराट कोहली ने तो ये तक कहा कि उन्होंने ऐसी फिल्म भारत में पहले कभी नहीं देखी। वहीं रणवीर सिंह की पूर्व को-स्टार अनुष्का शर्मा ने उनके अभिनय की सराहना की है। अनुष्का शर्मा ने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से फिल्म धुरंधर-2 का रिव्यू कर लिखा है, ‘आपने कितनी शानदार फिल्म बनाई है आदित्य धर। लगभग 4 घंटे लंबी फिल्म बनाने के लिए बहुत हिम्मत चाहिए होती है। यह फिल्म बेहद रोचक और आपको पूरी तरह बांधे रखने वाली है। बहुत बारीकी से बनाई गई है और शुरुआत से अंत तक आपका ध्यान बनाए रखती है। आप एक बेहद मौलिक और आत्मविश्वासी फिल्ममेकर हैं।’ आगे अनुष्का ने लिखा, ‘रणवीर सिंह, आपने जिंदगी में एक बार मिलने वाले किरदार को पूरी तरह जी लिया और एक दमदार, बेदाग परफॉर्मेंस दी। आर.माधवन, अर्जुन रामपाल और राकेश बेदी सर और फिल्म के सभी शानदार एक्टर्स, आप सभी की परफॉर्मेंस एकदम सटीक थी। आप में से हर एक के बिना यह फिल्म अधूरी है। इससे जुड़े हर शख्स को बधाई।’ विराट कोहली ने भी की धुरंधर 2 की तारीफ अनुष्का के अलावा विराट कोहली ने भी फिल्म धुरंधर के तारीफों के पुल बांधे हैं। उन्होंने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से लिखा है, ‘आज मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूं कि मैंने भारत में इससे पहले कभी ऐसा सिनेमाई अनुभव नहीं देखा। इस फिल्म ने हर तरह की भावना को सतह पर ला दिया और पूरे 4 घंटे तक मैं एक बार भी पलक नहीं झपका पाया।’ आगे उन्होंने लिखा, ‘आदित्य धर आपका टैलेंट और आपका दृढ़ विश्वास आपके काम में साफ झलकता है। आपको सलाम। आप जीनियस हैं। भले ही सभी एक्टर्स अपने-अपने रोल में बेहतरीन थे, लेकिन रणवीर सिंह, आप इस फिल्म के बाद एक अलग लेवल पर पहुंच गए हैं और आपकी परफॉर्मेंस शानदार से भी कहीं बढ़कर थी। बिल्कुल वॉव।’ बता दें कि अनुष्का शर्मा ने करियर की शुरुआती सालों में रणवीर सिंह के साथ 2 फिल्में बैंड बाजा बारात और लेडीज वर्सेस रिक्की बहल के साथ काम किया था। दोनों फिल्में हिट रही थीं। तब दोनों की डेटिंग की खबरें भी सुर्खियों में थीं। करण जौहर ने भी एआईबी में दोनों के रिलेशनशिप और ब्रेकअप पर कंफर्मेशन दी थी। बॉलीवुड की दूसरी हाईएस्ट ग्रॉसिंग फिल्म बनी धुरंधर-2 19 मार्च को रिलीज हुई फिल्म धुरंधर ने 1622 करोड़ रुपए का वर्ल्डवाइड कलेक्शन कर लिया है। ये बॉलीवुड के इतिहास की दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बन चुकी है। फिलहाल ये आमिर खान की दंगल से पीछे है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Pushpa the real story: पुष्पा…ये हैं असली फायर, पहले कैंसर को हराया, फिर नाप डाले समंदर और पहाड़

Real Life Pushpa: आज हम आपको मूवी नहीं बल्कि रियल लाइफ पुष्पा से मिलवाने जा रहे हैं, जिनकी जिंदगी तो फूल की तरह शुरू हुई लेकिन जिंदगी के थपेड़ों ने उन्हें फायर बना दिया और फिर उसे उसमें से तपकर निकली महिला ने सभी को हैरान कर दिया. पुष्पा सिंह वो कैंसर सर्वाइवर हैं, जिन्होंने न केवल कैंसर को हराया बल्कि जिंदगी में बड़े झटके लगने के बाद उठ खड़े होने, जीने और दूसरों का सहारा बनने की कठिन राह भी तय की. साल 2014 में पुष्पा ने अपने जीवनसाथी को खो दिया.यह एक ऐसा दुख था जिसने उनकी जिंदगी की दिशा ही बदल दी. वह अभी इस दर्द को संभाल ही रही थीं कि ठीक दो साल बाद साल 2016 में उन्हें ब्रेस्ट कैंसर डिटेक्ट हुआ, उस वक्त उनकी उम्र 57 साल थी. इस बीमारी ने उन्हें अंदर तक हिला जरूर दिया लेकिन यहीं से उन्होंने खुद को मजबूती से खड़ा करने की ठान ली और उनका मूलमंत्र,’मृत्यु तो एक दिन सभी को आनी है, लेकिन उससे पहले जीने के लिए एक खूबसूरत जिंदगी भी है’ ने उन्हें जीने की नई दिशा दी. इसके बाद जो सफर शुरू हुआ, वह सिर्फ इलाज का नहीं था बल्कि वो साहस, धैर्य और अडिग इच्छाशक्ति का सफर था.दर्द, अनिश्चितता, अस्पताल के लंबे दिन, इलाज के लिए कई रातों की बेचैनी को उनके अपने आत्मबल से जीत लिया. वे इन दिनों में अटूट और स्थिर बनी रहीं. दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट ने अपनी सबसे बहादुर कैंसर सर्वाइवर की कहानी को साझा किया है. इंस्टीट्यूट ने पुष्पा सिंह की ओर से बताया कि पति के जाने के बाद जो खालीपन आया, वह कभी-कभी आज भी महसूस होता था. परिवार में दो बेटे, बहुएं और प्यारे पोते थे मगर उनके साथ होने के बावजूद, कुछ पल ऐसे आते थे जब अकेलापन चुपचाप दस्तक देता था लेकिन उन्होंने अकेलेपन को अपनी पहचान नहीं बनने दिया और उन्होंने अपनी कहानी खुद लिखी. बन गईं सोलो ट्रैवलर पुष्पा सिंह कैंसर को हराने के बाद सोलो ट्रैवलर बन गईं. निडर होकर देश के कोने-कोने में घूमने लगीं.पहाड़ों से लेकर समंदर तक, भीड़भाड़ वाले शहरों से लेकर शांत गांवों तक, उन्होंने सिर्फ जगहें नहीं देखीं, बल्कि खुद को फिर से खोजा. हर यात्रा के साथ उन्होंने साबित किया कि जिंदगी रुकती नहीं है, बल्कि नए रूप में आगे बढ़ती है. सोशल मीडिया बना हथियार उन्होंने तकनीक को भी उतनी ही लगन से अपनाया. स्मार्टफोन और सोशल मीडिया सीखकर, उन्होंने व्हाट्सएप स्टेटस के जरिए अपनी जिंदगी के छोटे-छोटे पल साझा करने शुरू किए. उनकी मुस्कान, उनके सफर, उनकी जीत. ये सिर्फ पोस्ट नहीं थे, बल्कि उम्मीद और आत्मनिर्भरता के प्रतीक भी थे लेकिन उनकी सबसे खास बात सिर्फ उनका खुद का संघर्ष नहीं है बल्कि दूसरों के लिए उनका साथ है. दूसरों का बन गईं सहारा अपने दर्द और अनुभवों से गुजरने के बाद, वह दूसरों के लिए एक मजबूत सहारा बन गईं. जब भी कोई दोस्त, रिश्तेदार या पड़ोसी मुश्किल समय से गुजरता, चाहे वह दुख हो, बीमारी हो या मानसिक तनाव, पुष्पा सिंह उनके साथ मजबूती से खड़ी रहतीं. अब वे समाज में लोगों को हिम्मत देती हैं, उन्हें संभालती हैं, और जरूरत पड़ने पर बिना किसी अपेक्षा के मदद करती हैं. उनकी जिंदगी यह सिखाती है कि असली जीत सिर्फ खुद संभलने में नहीं, बल्कि दूसरों को संभालने में भी है. वे कहती हैं कि उनके पोते उनके जीवन का जश्न हैं. और वे उनके लिए ही जीने की लालसा रखती हैं. उनकी खिलखिलाहट, उनकी ऊर्जा मिसाल है लेकिन उन्होंने अपनी दुनिया को सीमित नहीं होने दिया, बल्कि उसे और बड़ा किया है. 10 साल से लगातार आ रहीं अस्पताल पुष्पा पिछले दस वर्षों से लगातार दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट में नियमित रूप से अपनी जांच और इलाज का ध्यान रख रही हैं. उन्होंने कभी शिकायत नहीं की न दर्द की, न परिस्थितियों की. उन्होंने हमेशा कृतज्ञता को चुना. वे कहती हैं कि अगर मैं जीत सकती हूं, तो कोई भी जीत सकता है… बस अपनी ताकत को कभी मत भूलो.
वृंदावन में मोहन भागवत ने संत के पैर छुए:संत मलूक दास के जयंती उत्सव में शामिल हुए, रामदेव ने समाधि के दर्शन किए

संत मलूक दास की आज 452वीं जयंती है। वृंदावन के मलूक पीठ में उनका जन्मोत्सव कार्यक्रम मनाया जा रहा है। इसमें RSS प्रमुख मोहन भागवत पहुंचे हैं। मंच पर संत रसिक माधव दास ने मोहन भागवत को शाल ओढ़ाकर स्वागत किया। भागवत ने हाथ जोड़कर अभिवादन स्वीकार किया और पैर छूकर आशीर्वाद लिया। योग गुरु बाबा रामदेव भी संत मलूक दास की जयंती में पहुंचे। उन्होंने संत की समाधि के दर्शन-पूजन किए। सीएम योगी दोपहर ढाई बजे पहुंचेंगे। हालांकि, उनकी मोहन भागवत से मुलाकात नहीं होगी, क्योंकि तब तक संघ प्रमुख कार्यक्रम से जा चुके होंगे। कृष्ण भक्त संत मलूक दास का जन्म कौशांबी में खत्री परिवार में हुआ था, लेकिन उन्होंने अपनी साधना स्थली वृंदावन को बनाया। यहां उन्होंने यमुना किनारे वंशीवट पर अपनी कुटिया बनाई, जिसे मलूक पीठ के नाम से जाना जाता है। संत का गोलोक गमन (मृत्यु) वृंदावन में हुआ, जहां उनकी समाधि बनी हुई है। संत मलूक दास का अजगर करे न चाकरी, पंछी करे न काम, दास मलूका कह गए, सबके दाता राम दोहा सबसे मशहूर हुआ। इसका अर्थ है कि अजगर किसी की नौकरी नहीं करता, पक्षी काम नहीं करता, लेकिन भगवान पर विश्वास हो तो राम जी सबका भला करते हैं। तस्वीरें देखिए- संत मलूक दास की जयंती पर कार्यक्रम से जुड़े अपडेट के लिए लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…
गर्मियों में 5 मसाले बन सकते हैं शरीर के लिए ‘जहर’, थाली से आज ही करें आउट, वरना पड़ेगा पछताना

Last Updated:April 07, 2026, 10:25 IST Harmful Spices In Summer : गर्मी का मौसम शुरू हो चुका है. हम अपनी हर चीज की देखभाल कर रहे हैं. स्किन से लेकर कपड़े, जूते और खाने पीने तक में ऐसी में ऐसी चीजें शामिल कर रहे हैं जो हमें फायदा पहुचाए. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके किचन के डिब्बे में रखे कुछ मसाले इस चिलचिलाती गर्मी में आपके शरीर के लिए ‘स्लो पॉइजन’ का काम कर सकते हैं? आयुर्वेद और साइंस दोनों कहते हैं कि हर मौसम का अपना खान-पान होता है. SpicesTo Avoid In Summer : हम भारतीय बिना मसालों के खाने की कल्पना भी नहीं कर सकते, लेकिन जो मसाला सर्दियों में आपको गर्माहट देकर बचा रहा था, वही इस वक्त आपके पेट में ‘आग’ लगा सकता है. सबसे पहले बात करते हैं ‘लाल मिर्च’ की. चटपटा खाना किसे पसंद नहीं? लेकिन लाल मिर्च की तासीर बहुत गर्म होती है. गर्मियों में इसे ज्यादा खाने से सीने में जलन और पेट में अल्सर का खतरा बढ़ जाता है, साथ ही शरीर का तापमान अचानक बढ़ सकता है. अब बात करते हैं ‘अदरक और सोंठ’ की. सर्दियों में अदरक वाली चाय जान बचाती थी, लेकिन गर्मियों में सोंठ या बहुत ज्यादा कच्चा अदरक आपके लिए मुसीबत बन सकता है. इसकी तासीर बेहद गर्म होती है. गर्मी में इसके ज्यादा सेवन से नाक से खून आना (नकसीर) या पेट में मरोड़ जैसी समस्याएं हो सकती हैं. अगर आप चाय के शौकीन हैं, तो इस मौसम में अदरक की मात्रा कम से कम रखने की कोशिश करें. ‘लहसुन’ वैसे तो औषधीय गुणों की खान है और दिल की सेहत के लिए अच्छा माना जाता है, लेकिन इसमें सल्फर की मात्रा अधिक होती है. गर्मियों में ज्यादा लहसुन खाने से शरीर में आंतरिक गर्मी बढ़ती है और पसीने में दुर्गंध की समस्या भी हो जाती है. इसके अलावा, यह आपके एसिड रिफ्लेक्स को ट्रिगर कर सकता है, जिससे रात में सोते समय बेचैनी और गले में जलन महसूस हो सकती है. Add News18 as Preferred Source on Google ‘काली मिर्च’ को हम अक्सर हेल्दी मानकर हर चीज में डाल देते हैं, लेकिन गर्मियों में यह आंखों और पेट पर भारी पड़ सकती है. काली मिर्च शरीर में ‘पित्त’ को बढ़ाती है. अगर आप गर्मियों में इसका ज्यादा सेवन करते हैं, तो आपको त्वचा पर रैशेज, मुँहासे और गले में खराश की समस्या हो सकती है. इसे सूप या सलाद में केवल नाममात्र के लिए ही इस्तेमाल करना इस मौसम में बेहतर होता है. तो फिर सवाल उठता है कि इस मौसम में क्या खाएं? प्रकृति ने हमें गर्मियों के लिए बेहतरीन विकल्प दिए हैं. सौंफ, जीरा और धनिया जैसे मसाले इस मौसम में ‘सुपरफूड’ की तरह काम करते हैं. सौंफ एक नेचुरल कूलेंट है जो पेट की जलन को शांत करती है, जबकि जीरा डाइजेशन को सुधार कर शरीर को अंदर से ठंडा रखने में मदद करता है. इनका पानी पीना भी गर्मी में बहुत फायदेमंद है. इसके अलावा, ताजी हरी धनिया और पुदीना को अपनी डाइट का अनिवार्य हिस्सा बनाएं. पुदीना न केवल आपको लू से बचाता है, बल्कि यह आपके पाचन तंत्र को भी ताजगी देता है. सूखे धनिया पाउडर का इस्तेमाल ग्रेवी में करने से सब्जी की तासीर ठंडी रहती है. ये छोटे-छोटे बदलाव आपको गर्मी के साइड इफेक्ट्स से बचा सकते हैं और आपकी एनर्जी लेवल को भी बनाए रखते हैं. याद रखिए कि आयुर्वेद के अनुसार गर्मी का मौसम ‘पित्त’ बढ़ाने वाला होता है. अगर आप गर्म मसालों पर कंट्रोल नहीं करेंगे, तो चिड़चिड़ापन और पेट की बीमारियां आपको घेर लेंगी. इसलिए, इस सीजन में अपनी डाइट को ‘लाइट और कूल’ रखें. स्वाद से ज्यादा अपनी सेहत को प्राथमिकता दें और आज ही अपनी रसोई के उन ‘गर्म’ मसालों पर थोड़ा कंट्रोल शुरू करें. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.) First Published : April 07, 2026, 10:24 IST
दुष्कर्म का आरोपी एक साल बाद गिरफ्तार:सूरत से लेकर आए पुलिस, बचने के लिए बदल लेता था ठिकाना

उमरिया जिले की सिविल लाइन पुलिस ने दुष्कर्म के एक फरार आरोपी को सोमवार को सूरत से गिरफ्तार किया है। आरोपी पर शादी का झांसा देकर एक युवती से दुष्कर्म करने का आरोप है और वह पिछले एक साल से फरार चल रहा था। पीड़िता की शिकायत पर एक वर्ष पूर्व आरोपी जयप्रकाश यादव के खिलाफ कोतवाली थाने में मामला दर्ज किया गया था। मामला दर्ज होने के बाद से ही जयप्रकाश गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार अलग-अलग स्थानों पर छिप रहा था। पुलिस उसकी तलाश में लगातार जुटी हुई थी। तकनीकी निगरानी के दौरान आरोपी की मोबाइल लोकेशन गुजरात में मिली। सूचना के आधार पर एक पुलिस टीम सूरत के लिए रवाना हुई और घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया।
2 रुपये की यह गोली किडनी कर सकती है खराब ! ऐसे मरीज भूलकर भी न करें गलती, रिसर्च में बड़ा खुलासा

Last Updated:April 07, 2026, 10:16 IST Statins and Kidney Health: कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने के लिए डॉक्टर्स आमतौर पर स्टैटिन्स दवाएं देते हैं. ये दवाएं खून में जमा बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करती हैं. इससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा कम हो जाता है. कुछ रिसर्च बताती हैं कि ये दवाएं किडनी के लिए भी फायदेमंद होती हैं. हालांकि लंबे समय तक स्टैटिन यूज करने से किडनी डिजीज का रिस्क भी बढ़ सकता है. कोलेस्ट्रॉल की दवा स्टैटिन्स का लंबे समय तक इस्तेमाल किडनी डिजीज का रिस्क बढ़ा सकता है. Do Statins Affect Your Kidneys: आजकल हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या तेजी से बढ़ रही है. बड़ी संख्या में युवा भी इसका शिकार हो रहे हैं. जब कोलेस्ट्रॉल बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, तब डॉक्टर्स मरीजों को रोज स्टैटिन दवा लेने की सलाह देते हैं. स्टैटिन्स दवाओं का इस्तेमाल खून में जमा कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए किया जाता है. ये दवाएं कोलेस्ट्रॉल कम करने और हार्ट डिजीज से बचाने में बेहद असरदार मानी जाती हैं. खास बात यह है कि स्टैटिन्स की कीमत काफी कम होती है. इन दवाओं की पूरी स्ट्रिप आपको 20-25 रुपये में मिल जाती है. ये दवाएं लिवर में जाकर उस एंजाइम को रोकती हैं, जो कोलेस्ट्रॉल बनाने में जिम्मेदार होता है. इसलिए हाई कोलेस्ट्रॉल और हार्ट डिजीज के हाई रिस्क मरीजों को अक्सर स्टैटिन्स लिखी जाती हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार कोलेस्ट्रॉल घटाने के अलावा स्टैटिन्स शरीर को कई अन्य तरीकों से फायदा पहुंचाती हैं. इनमें से एक किडनी की सुरक्षा है. एक रिसर्च में पता चला है कि जिन लोगों में जिनको पहले से किडनी की समस्या है, उन्हें स्टैटिन्स लेने से किडनी के कामकाज को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है. कई स्टडी बताती हैं कि स्टैटिन्स का उपयोग किडनी डिजीज की प्रोग्रेस को धीमा कर सकता है और एक्यूट किडनी इंजरी (AKI) जैसी घटनाओं के जोखिम को कम कर सकता है. अधिकतर रिसर्च और क्लीनिकल ट्रायल स्टैटिन्स को सुरक्षित और फायदेमंद बताते हैं. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक एक स्टडी में दावा किया गया कि कई सालों तक स्टैटिन्स लेने से किडनी की समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है. इस अध्ययन में 40,000 से अधिक मरीजों का 8.4 साल तक अध्ययन किया गया और तुलना की गई कि कौन स्टैटिन्स ले रहा था और कौन नहीं. अध्ययन में यह पाया गया कि स्टैटिन्स लेने वालों में तीन प्रकार की किडनी की समस्याएं ज्यादा थीं. इनमें एक्यूट किडनी इंजरी का खतरा 30% ज्यादा पाया गया. क्रोनिक किडनी डिजीज का रिस्क 36% ज्यादा देखने को मिला और नेफ्राइटिस या रीनल स्क्लेरोसिस का जोखिम 35% अधिक पाया गया. यह जोखिम केवल बीमारियों वाले मरीजों तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वस्थ लोगों में भी क्रोनिक किडनी डिजीज का संबंध पाया गया. स्टैटिन्स के फायदे कई रिसर्च में साबित हो चुके हैं, जबकि कुछ स्टडी में इसे लॉन्ग टर्म के लिए रिस्की भी माना गया है. क्लीनिकल ट्रायल आमतौर पर केवल कुछ सालों के लिए होते हैं और इनमें स्टैटिन्स के शॉर्ट टर्म फायदे दिखाई देते हैं. जब लोग इन दवाइयों को दस साल या उससे अधिक समय तक रोजमर्रा की ज़िंदगी में लेते हैं, तो किडनी पर दीर्घकालिक प्रभाव अलग हो सकता है. इसका मतलब यह नहीं कि स्टैटिन्स सीधे किडनी डिजीज का कारण हैं, बल्कि इससे कनेक्शन जुड़ा हुआ है, जिस पर ध्यान देने की जरूरत है. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : April 07, 2026, 10:16 IST
हाथठेला पर पोहा-जलेबी बेचने पहुंची पूर्व CM उमा भारती:अपने बंगले के सामने लगाई दुकान, प्रशासन से बोलीं- गरीबों की रोजी-रोटी मत छीनों

टीकमगढ़ में मंगलवार सुबह पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने सड़क किनारे हाथठेला लगाकर पोहा-जलेबी बेची। उन्होंने एक दिन पहले नगर पालिका द्वारा हटाए गए छोटे दुकानदारों को वापस ठेले लगाने के लिए बुलाया। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि गरीबों की रोजी-रोटी नहीं छीनी जाए। दरअसल, सोमवार को नगर पालिका, एसडीएम और तहसीलदार की टीम ने सिविल लाइन रोड पर अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया था। इस दौरान जेसीबी मशीन से कई छोटी दुकानें और हाथठेले हटा दिए गए थे। उमा भारती ने इस कार्रवाई का विरोध किया था और छोटे दुकानदारों को हटाने को गलत बताया था। इसी के मद्देनजर, मंगलवार सुबह वह अपने सिविल लाइन रोड स्थित बंगले से निकलकर हाथठेले पर पहुंचीं और खुद पोहा-जलेबी बेचकर दुकानदारों का समर्थन किया। उन्होंने हाथठेला वालों से दोबारा सड़क किनारे अपने ठेले लगाने कहा। पहले जगह उपलब्ध कराए प्रशासन उमा भारती का कहना था कि पार्षदों ने इसके लिए पहले स्थान चिह्नित करने को कहा था। तीन चार स्थान भी बताए थे। प्रशासन पहले इन्हें दुकानों लगाने के स्थान दे, बाद में हटाया जाए। उमा भारती ने हटाए गए दुकानदारों से अपील की है कि वह वापस आए और यही पर अपनी दुकानें लगाए, मैं उनके साथ हूं। उनके ठेलो को यहां से नहीं हटने दिया जाएगा। उमा भारती से पूछा गया कि क्या उन्होंने इस मामले में प्रशासन से बात की है तो उनका कहना था कि मुझे अभी इसकी जानकारी हुई है। मै अभी प्रशासन से बात करूंगी, सभी के ठेले वापस यहां लगाए जाएंगे।
हिमाचल में लैंडस्लाइड से निर्माणाधीन सिंयूर पुल टूटा:रावी नदी में समाया, कई गांवों का कटा संपर्क, 4 करोड़ से हो रहा था निर्माण

हिमाचल प्रदेश के चंबा में आज सुबह लैंडस्लाइड से एक निर्माणाधीन पुल टूट गया। भरमौर और होली क्षेत्र को जोड़ने वाला सिंयूर पुल रावी नदी में समा गया। इसके बाद क्षेत्र के कई गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क टूट गया है, जिससे लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा इस पुल का निर्माण पिछले 2 वर्षों से किया जा रहा था। लगभग 4 करोड़ रुपए की लागत से बन रहे इस पुल के दोनों छोर पर स्टील की रैलिंग का काम पूरा हुआ था। अगले कुछ महीनों में इस पर वाहनों की आवाजाही शुरू होने की उम्मीद थी। 200 फीट ऊंचाई तक उड़े धूल के गुबार इससे पहले ही आज करीब आठ बजे पहाड़ी से भारी मलबा और चट्टानें पुल पर गिर गईं। इससे पुल का एक कोना नदी में समा गया। लैंडस्लाइड के बाद जोर-जोर से आवाजें सुनाई दीं और 200 फीट ऊंचाई तक धूल के गुबार उड़े। बड़े वाहनों के लिए बनाया जा रहा था लोहे का पुल इस पुल का निर्माण बड़े वाहनों की आवाजाही के लिए किया जा रहा था। इसके साथ ही एक अन्य लकड़ी का पुल है, जिस पर केवल छोटे वाहनों की आवाजाही होती है। दुर्गम क्षेत्र भरमौर में खड़ामुख-होली मार्ग बंद होने पर इस पुल का वैकल्पिक मार्ग के तौर पर इस्तेमाल किया जाता था। मानसून सीजन में एक महीने तक इसी पुल से चला ट्रैफिक बीते मानसून सीजन में खड़ामुख-होली सड़क बंद होने के बाद एक महीने तक लकड़ी के पुल से ट्रैफिक चला था। मगर अब पुल बंद होने से लोगों को परेशानी झेलनी पड़ेगी। स्थानीय लोगों ने प्रशासन और विभागीय अधिकारियों से तत्काल मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेने और आवश्यक कदम उठाने की मांग की है। लैंडस्लाइड से पश्चिम बंगाल का दंपत्ति घायल बता दें कि पहाड़ों पर बीते एक सप्ताह से बारिश हो रही है। इससे जगह जगह लैंडस्लाइड की घटनाएं देखने को मिल रही है। बीते सोमवार दोपहर बाद भी लाहौल के मोसूमा थेतुप कुरकुर में पहाड़ी से बड़ा पत्थर गिरने के बाद सीधा HP-01-KA-3006 नंबर गाड़ी पर गिरा। इस हादसे में कार में सवार पश्चिम बंगाल के दंपती मनोजित सिंह रॉय और उनकी पत्नी पॉलिनी सिंघा घायल हो गए, जबकि ड्राइवर पूरी तरह सुरक्षित है। घायल दंपती को केलांग अस्पताल में प्राथमिक उपाचर के बाद कुल्लू रेफर कर दिया गया है। दोनों की हालत खतरे से बाहर है। मनाली में भी चचोगा के पास सड़क धंस गई। इससे वाहन चालकों के साथ राहगीरों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कुल्लू-मनाली में कई जगह मानसून से पहले ही इस तरह जमीन धंसने और लैंडस्लाइड की घटनाएं पेश आ रही है।







