Friday, 11 Sep 2026 | 01:49 AM

Trending :

IPL 2026 RR vs MI: Hardik Fitness Suspense | Bumrah Wicketless

IPL 2026 RR vs MI: Hardik Fitness Suspense | Bumrah Wicketless

Hindi News Sports Cricket IPL 2026 RR Vs MI: Hardik Fitness Suspense | Bumrah Wicketless | Bishnoi Leads Purple Cap Race गुवाहाटी26 मिनट पहले कॉपी लिंक IPL में मंगलवार को मुंबई इंडियंस (MI) का सामना राजस्थान रॉयल्स (RR) से होगा। यह मुकाबला गुवाहाटी के बरसापारा स्टेडियम में खेला जाएगा। टॉस शाम 7 बजे होगा। जबकि 7:30 बजे से मैच शुरू होगा। मुंबई के लिए सबसे बड़ी चिंता उनके कप्तान हार्दिक पांड्या की फिटनेस है। वे पिछला मैच बीमारी के कारण नहीं खेल पाए थे। दूसरी ओर राजस्थान की टीम अपने शुरुआती मैचों की जीत से मिले मोमेंटम को जारी रखने के इरादे से मैदान पर उतरेगी। IPL में दोनों के बीच मुकाबला लगभग बराबर का रहा है। अब तक दोनों टीमों में IPL में 30 बार भिड़ी हुई हैं। इसमें 16 मैच मुंबई ने और 14 मैच राजस्थान रॉयल्स ने जीते। पिछले सीजन दोनों के बीच एक मुकाबला हुआ था। इस मैच को मुंबई ने 100 रन से जीता था। हार्दिक की वापसी की उम्मीद, नेट्स में अभ्यास किया दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ पिछले मैच में हार्दिक पंड्या की कमी मुंबई को खली थी, जहां टीम को 6 विकेट से हार का सामना करना पड़ा। उनकी गैरमौजूदगी में सूर्यकुमार यादव ने कप्तानी की थी। पंड्या टीम के साथ गुवाहाटी पहुंचे गए हैं। उन्होंने नेट्स में अभ्यास भी शुरू कर दिया है। पिछले मैच में अनुभवी ट्रेंट बोल्ट की जगह शामिल किए गए साउथ अफ्रीकी ऑलराउंडर कॉर्बिन बॉश काफी महंगे साबित हुए थे। मुंबई की गेंदबाजी बनी चिंता का विषय मुंबई इंडियंस के लिए गेंदबाजों का फॉर्म चिंता का विषय बना हुआ है। जसप्रीत बुमराह टीम के सबसे किफायती गेंदबाज रहे हैं, लेकिन उन्हें इस सीजन में अब तक एक भी विकेट नहीं मिला है। शार्दूल ठाकुर पहले मैच में प्रभावशाली प्रदर्शन के बाद पिछले मुकाबले में काफी महंगे साबित हुए। स्पिन विभाग में मिचेल सैंटनर ने अफगान स्पिनर अल्लाह गजनफर की जगह अपनी उपयोगिता साबित की है और उनके अगले मैच में भी खेलने की पूरी संभावना है। मुंबई के गेंदबाजों के सामने राजस्थान के शानदार फॉर्म में चल रहे टॉप ऑर्डर को रोकने की बड़ी चुनौती होगी। RR का टॉप ऑर्डर फॉर्म में, बिश्नोई टॉप विकेट टेकर राजस्थान रॉयल्स के लिए सलामी बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल और वैभव सूर्यवंशी ने अब तक विस्फोटक शुरुआत दी है। मध्यक्रम में ध्रुव जुरेल टीम को मजबूती दे रहे हैं। गेंदबाजी में रवि बिश्नोई इस सीजन के सफल गेंदबाजों में से एक बनकर उभरे हैं, उन्होंने 2 मैचों में 5 विकेट झटके हैं। वह अब तक सबसे सफर गेंदबाज रहे हैं और पर्पल कप में सबसे ऊपर हैं। वहीं, तुषार देशपांडे ने पिछले मैच में गुजरात टाइटंस के खिलाफ आखिरी ओवर में 10 रन बचाकर अपनी डेथ बॉलिंग का लोहा मनवाया। कप्तान रियान पराग भले ही बल्ले से अभी तक बड़ा स्कोर नहीं बना पाए हों, लेकिन उनकी कप्तानी और टैक्टिकल फैसलों की काफी सराहना हो रही है। पिच रिपोर्ट- हाई स्कोरिंग मैच हो सकता है बरसापारा क्रिकेट स्टेडियम की पिच आमतौर पर बैटिंग फ्रेंडली मानी जाती है। यहां गेंद बल्ले पर अच्छे से आती है, जिससे बल्लेबाज खुलकर शॉट खेल सकते हैं और बड़े स्कोर देखने को मिलते हैं। हालांकि, शुरुआत में तेज गेंदबाजों को हल्की मदद मिल सकती है, खासकर नई गेंद से स्विंग देखने को मिलती है। यहां चेज करना थोड़ा आसान माना जाता है, क्योंकि रात में ओस का असर पड़ सकता है और बल्लेबाजी आसान हो जाती है। यहां अब तक IPL के सिर्फ 7 मैच खेले गए हैं। 3 मैच में पहली इनिंग में बैटिंग करने वाली टीम और 2 में चेज करने वाली टीम को जीत मिली। जबकि एक मैच का रिजल्ट नहीं निकल सका। यहां का हाईएस्ट टीम स्कोर 199/4 है, जो राजस्थान रॉयल्स ने 2023 में दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ बनाया था। संभावित प्लेइंग-12 मुंबई इंडियंस: रोहित शर्मा, रायन रिकेल्टन (विकेटकीपर), तिलक वर्मा, सूर्यकुमार यादव (कप्तान), नमन धीर, शेरफन रदरफोर्ड, मिचेल सैंटनर, हार्दिक पांड्या, शार्दूल ठाकुर, दीपक चाहर और जसप्रीत बुमराह, ट्रेंट बोल्ट राजस्थान रॉयल्स: यशस्वी जायसवाल, वैभव सूर्यवंशी, ध्रुव जुरेल (विकेटकीपर), रियान पराग (कप्तान), शिमरोन हेटमायर, डोनोवन फरेरा, रवींद्र जडेजा, जोफ्रा आर्चर, नांद्रे बर्गर, तुषार देशपांडे और संदीप शर्मा, रवि बिश्नोई। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

IPL 2026 RR vs MI: Hardik Fitness Suspense | Bumrah Wicketless

IPL 2026 RR vs MI: Hardik Fitness Suspense | Bumrah Wicketless

Hindi News Sports Cricket IPL 2026 RR Vs MI: Hardik Fitness Suspense | Bumrah Wicketless | Bishnoi Leads Purple Cap Race गुवाहाटी1 घंटे पहले कॉपी लिंक IPL में मंगलवार को मुंबई इंडियंस (MI) का सामना राजस्थान रॉयल्स (RR) से होगा। यह मुकाबला गुवाहाटी के बरसापारा स्टेडियम में खेला जाएगा। टॉस शाम 7 बजे होगा। जबकि 7:30 बजे से मैच शुरू होगा। मुंबई के लिए सबसे बड़ी चिंता उनके कप्तान हार्दिक पांड्या की फिटनेस है। वे पिछला मैच बीमारी के कारण नहीं खेल पाए थे। दूसरी ओर राजस्थान की टीम अपने शुरुआती मैचों की जीत से मिले मोमेंटम को जारी रखने के इरादे से मैदान पर उतरेगी। IPL में दोनों के बीच मुकाबला लगभग बराबर का रहा है। अब तक दोनों टीमों में IPL में 30 बार भिड़ी हुई हैं। इसमें 16 मैच मुंबई ने और 14 मैच राजस्थान रॉयल्स ने जीते। पिछले सीजन दोनों के बीच एक मुकाबला हुआ था। इस मैच को मुंबई ने 100 रन से जीता था। हार्दिक की वापसी की उम्मीद, नेट्स में अभ्यास किया दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ पिछले मैच में हार्दिक पंड्या की कमी मुंबई को खली थी, जहां टीम को 6 विकेट से हार का सामना करना पड़ा। उनकी गैरमौजूदगी में सूर्यकुमार यादव ने कप्तानी की थी। पंड्या टीम के साथ गुवाहाटी पहुंचे गए हैं। उन्होंने नेट्स में अभ्यास भी शुरू कर दिया है। पिछले मैच में अनुभवी ट्रेंट बोल्ट की जगह शामिल किए गए साउथ अफ्रीकी ऑलराउंडर कॉर्बिन बॉश काफी महंगे साबित हुए थे। मुंबई की गेंदबाजी बनी चिंता का विषय मुंबई इंडियंस के लिए गेंदबाजों का फॉर्म चिंता का विषय बना हुआ है। जसप्रीत बुमराह टीम के सबसे किफायती गेंदबाज रहे हैं, लेकिन उन्हें इस सीजन में अब तक एक भी विकेट नहीं मिला है। शार्दूल ठाकुर पहले मैच में प्रभावशाली प्रदर्शन के बाद पिछले मुकाबले में काफी महंगे साबित हुए। स्पिन विभाग में मिचेल सैंटनर ने अफगान स्पिनर अल्लाह गजनफर की जगह अपनी उपयोगिता साबित की है और उनके अगले मैच में भी खेलने की पूरी संभावना है। मुंबई के गेंदबाजों के सामने राजस्थान के शानदार फॉर्म में चल रहे टॉप ऑर्डर को रोकने की बड़ी चुनौती होगी। RR का टॉप ऑर्डर फॉर्म में, बिश्नोई टॉप विकेट टेकर राजस्थान रॉयल्स के लिए सलामी बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल और वैभव सूर्यवंशी ने अब तक विस्फोटक शुरुआत दी है। मध्यक्रम में ध्रुव जुरेल टीम को मजबूती दे रहे हैं। गेंदबाजी में रवि बिश्नोई इस सीजन के सफल गेंदबाजों में से एक बनकर उभरे हैं, उन्होंने 2 मैचों में 5 विकेट झटके हैं। वह अब तक सबसे सफर गेंदबाज रहे हैं और पर्पल कप में सबसे ऊपर हैं। वहीं, तुषार देशपांडे ने पिछले मैच में गुजरात टाइटंस के खिलाफ आखिरी ओवर में 10 रन बचाकर अपनी डेथ बॉलिंग का लोहा मनवाया। कप्तान रियान पराग भले ही बल्ले से अभी तक बड़ा स्कोर नहीं बना पाए हों, लेकिन उनकी कप्तानी और टैक्टिकल फैसलों की काफी सराहना हो रही है। पिच रिपोर्ट- हाई स्कोरिंग मैच हो सकता है बरसापारा क्रिकेट स्टेडियम की पिच आमतौर पर बैटिंग फ्रेंडली मानी जाती है। यहां गेंद बल्ले पर अच्छे से आती है, जिससे बल्लेबाज खुलकर शॉट खेल सकते हैं और बड़े स्कोर देखने को मिलते हैं। हालांकि, शुरुआत में तेज गेंदबाजों को हल्की मदद मिल सकती है, खासकर नई गेंद से स्विंग देखने को मिलती है। यहां चेज करना थोड़ा आसान माना जाता है, क्योंकि रात में ओस का असर पड़ सकता है और बल्लेबाजी आसान हो जाती है। यहां अब तक IPL के सिर्फ 7 मैच खेले गए हैं। 3 मैच में पहली इनिंग में बैटिंग करने वाली टीम और 2 में चेज करने वाली टीम को जीत मिली। जबकि एक मैच का रिजल्ट नहीं निकल सका। यहां का हाईएस्ट टीम स्कोर 199/4 है, जो राजस्थान रॉयल्स ने 2023 में दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ बनाया था। संभावित प्लेइंग-12 मुंबई इंडियंस: रोहित शर्मा, रायन रिकेल्टन (विकेटकीपर), तिलक वर्मा, सूर्यकुमार यादव (कप्तान), नमन धीर, शेरफन रदरफोर्ड, मिचेल सैंटनर, हार्दिक पांड्या, शार्दूल ठाकुर, दीपक चाहर और जसप्रीत बुमराह, ट्रेंट बोल्ट राजस्थान रॉयल्स: यशस्वी जायसवाल, वैभव सूर्यवंशी, ध्रुव जुरेल (विकेटकीपर), रियान पराग (कप्तान), शिमरोन हेटमायर, डोनोवन फरेरा, रवींद्र जडेजा, जोफ्रा आर्चर, नांद्रे बर्गर, तुषार देशपांडे और संदीप शर्मा, रवि बिश्नोई। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

जिम करने वालों के लिए 1 टुकड़ा एनर्जी का तूफान, सुबह खाएं या रात में? जानिए तरबूज का गुणा गणित

ask search icon

Last Updated:April 07, 2026, 04:34 IST Watermelon Benefits : तपती गर्मियो में दोपहर के समय अगर कोई फल सबसे ज्यादा राहत देता है, तो उसका नाम तरबूज है. इसकी खेती बलिया में भी खूब की जाती है. यह लगभग 92% पानी से भरपूर एक ऐसा रसीला फल है, जो प्यास बुझाने के साथ शरीर को अंदर से ठंडक देता है. यह कई रोगों का रामबाण इलाज भी है. बलिया की चिकित्सक डॉ. वंदना तिवारी लोकल 18 से बताती हैं कि ऐसे लोग जो एक्सरसाइज या मेहनत भरा काम करते हैं, उनके लिए ये सबसे जरूरी फल है. कसरत के बाद तरबूज का सेवन करने से शरीर को जल्दी राहत और कम थकान की अनुभूति होती है. गर्मी में तरबूज का कोई जवाब नहीं है. बलिया के द्वाबा क्षेत्र में इसकी खेती खूब होती है. इसमें विटामिन A, C और पोटेशियम जैसे जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं. इसमें लाइकोपीन नाम का शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट भी होता है, जो शरीर को कई गंभीर बीमारियों से बचाने में मदद करता है. यह फल न केवल स्वादिष्ट होता है, बल्कि पोषण के लिहाज से भी बेहद उपयोगी है. गर्मी के मौसम में शरीर को हाइड्रेटेड रखना बहुत जरूरी हो जाता है और इसके लिए तरबूज बेहतरीन विकल्प है. तरबूज में पानी की मात्रा अधिक होती है. इसमें फाइबर भी होता हैं, जो पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है और कब्ज जैसी समस्याओं से छुटकारा दिलता है. तरबूज दिल की सेहत के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं है. इसमें लाइकोपीन, सिट्रुलिन और पोटेशियम पाया जाता है, जो आपस में मिलकर ब्लड प्रेशर को संतुलित रखते हैं और कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करते हैं. इसके नियमित सेवन से हृदय संबंधी जोखिम कम हो सकते हैं, जिससे शरीर लंबे समय तक निरोग रहेगा. Add News18 as Preferred Source on Google राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर बलिया की पांच साल अनुभवी चिकित्साधिकारी डॉ. वंदना तिवारी के अनुसार, ऐसे लोग जो एक्सरसाइज या मेहनत भरा काम करते हैं, उनके लिए तरबूज खासतौर पर बहुत उपयोगी है. इसमें सिट्रुलिन नामक अमीनो एसिड पाए जाते हैं, जो मांसपेशियों के दर्द को कम करते हैं. कसरत के बाद तरबूज का सेवन करने से शरीर को जल्दी राहत और कम थकान की अनुभूति होती है. तरबूज त्वचा और बालों की खूबसूरती बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाता है. इसमें विटामिन C पाया जाता है, जो कोलेजन के निर्माण में मदद करता है. इससे त्वचा में अद्भुत निखार आता है. विटामिन A त्वचा को नमी भी देता है और बालों को मजबूत बनाता है. इससे शरीर प्राकृतिक रूप से सुंदर बनता है. तरबूज में एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जो कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के खतरे को कम करता है. यह विशेष तौर पर प्रोस्टेट और स्तन कैंसर के जोखिम को घटाने में बहुत उपयोगी साबित हो सकता है. तरबूज आंखों के लिए भी लाभकारी है और उम्र के साथ होने वाली समस्याओं से छुटकारा दिलाता है. तरबूज को सीधे या सलाद में शामिल कर खाया जा सकता हैं. इसका ताजा जूस भी लिया जा सकता हैं. हालांकि, इसे रात में खाने से बचना चाहिए, अगर बहुत ज्यादा मन करें, तो नमक के साथ खाएं. शुगर के मरीजों को भी इसे सीमित मात्रा में ही खाना चाहिए. अगर आप किसी गंभीर रोग से ग्रस्त हैं, तो बगैर आयुर्वेद चिकित्सक से सलाह लिए इसका सेवन न करें. First Published : April 07, 2026, 04:34 IST

Supreme Court Hearing Update; Sabarimala Women Entry

Supreme Court Hearing Update; Sabarimala Women Entry

Hindi News National Supreme Court Hearing Update; Sabarimala Women Entry | Dawoodi Bohra Khatna, Parsi Women Rights नई दिल्ली7 मिनट पहले कॉपी लिंक धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के साथ भेदभाव का मामला बीते 26 सालों से देश की अदालतों में हैं। सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संविधान पीठ आज से 22 अप्रैल तक 50 से ज्यादा पेंडिंग याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई करेगी। जिन मुद्दों पर सुनवाई होगी उनमें केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर रोक अहम है। इसके अलावा मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश पर रोक, दाऊदी बोहरा मुस्लिम समुदाय में महिला खतना और गैर-पारसी पुरुषों से शादी करने पर पारसी महिलाओं को धार्मिक स्थल पर प्रवेश से रोकने के मामले भी सुने जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कहा गया है कि 7 अप्रैल की सुबह 10.30 बजे सबरीमाला रिव्यू केस की सुनवाई शुरू होगी। रिव्यू पिटीशनरों और उन्हें सपोर्ट करने वालों की सुनवाई 7 अप्रैल से 9 अप्रैल तक होगी। रिव्यू का विरोध करने वालों को 14 अप्रैल से 16 अप्रैल तक सुना जाएगा। सबरीमाला में 10 से 50 साल की फीमेल को एंट्री नहीं, पूरा मामला 5 पॉइंट्स में सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 साल की फीमेल की एंट्री बैन है। इसकी वजह मासिक धर्म है, क्योंकि पीरियड के दौरान महिलाओं को अशुद्ध माना जाता है। उन्हें धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेने से रोका जाता है।सबरीमाला मंदिर की पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान अयप्पा एक ब्रह्मचारी हैं, जिन्होंने ब्रह्मचर्य का व्रत लिया है, और इसी कारण एक निश्चित आयु वर्ग की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाती थी। इसी पर विवाद है। 1990 में मंदिर में महिला की एंट्री को लेकर विवाद उठा। समय के साथ स्थानीय कोर्ट में मामला चला बाद में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। 2006 में सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए थे। केस 2008 में 3 जजों की बेंच को सौंपा गया। 7 साल बाद 2016 में सुनवाई हुई। इसके बाद 2017 में तत्कालीन सीजेआई की 3 जजों की बेंच ने केस 5 जजों की संविधान पीठ को सौंपा। 2018 में संविधान पीठ ने 4-1 के बहुमत से फैसला सुनाया कि सबरीमाला में सभी आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश दिया जाए। प्रतिबंध असंवैधानिक है। इसके बाद बड़े विरोध के बीच 2 महिला बिंदु कनकदुर्गा और बिंदु अम्मिनी ने मंदिर में प्रवेश किया। इसके बाद 2019 में 7 जजों की बेंच ने यह मुद्दा 9 जजों की बड़ी बेंच को भेजा दिया था। तब अन्य धर्मों की महिलाओं से जुड़े मामले में भी इसमें जोड़ दिए गए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 2 जनवरी 2019 को बिंदु कनकदुर्गा (45) और बिंदु अम्मिनी (46) ने पुलिस सुरक्षा में सबरीमाला मंदिर में प्रवेश किया। वे ऐसा करने वालीं पहली महिलाएं थीं। दोनों ने मंदिर में जाने के लिए पारंपरिक काले कपड़े पहने। 9 जजों की बेंच 5 मुद्दों पर सुनवाई करेगी 1. सबरीमाला मंदिर में महिलाओं का प्रवेश: क्या सभी आयु की महिलाओं को प्रवेश का अधिकार है? बेंच यह तय करेगी कि साल 2018 में इंडियन यंग लायर एसोसिएशन Vs स्टेट ऑफ केरल मामले में हाईकोर्ट का फैसला सही था या नहीं। 2. मस्जिदों में महिलाओं का प्रवेश: क्या मुस्लिम महिलाओं को मस्जिद में नमाज पढ़ने से रोका जा सकता है। 2016 में यास्मीन जुबैर अहमद पीरजादा नाम की महिला ने मुस्लिम महिलाओं का मस्जिद में प्रवेश का मुद्दा उठाया और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। 3. दाऊदी बोहरा समुदाय में महिलाओं का खतना: क्या यह प्रथा मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है? 2012 में पारसी महिला गूलरुख एम गुप्ता ने हिंदु व्यक्ति से शादी की। उन्हें पारसी धर्मस्थलों में प्रवेश से रोका जाने लगा। उन्होंने इसके खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में पारसी महिलाओं के धार्मिक अधिकार को लेकर याचिका लगाई। बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। 4. पारसी महिलाओं का अग्निमंदिर में प्रवेश: क्या गैर-पारसी से शादी करने वाली पारसी महिला को अग्नि मंदिर में प्रवेश से रोका जा सकता है? 2017 में एड. सुनीता तिवारी ने दाऊदी बोहरा समुदाय में महिला खतना का मुद्दा उठाया और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। 5. मुस्लिम पर्सनल लॉ से जुड़े लैंगिक भेदभाव के प्रश्न: क्या व्यक्तिगत कानून मौलिक अधिकारों की कसौटी पर परखे जा सकते हैं? सुप्रीम कोर्ट ने 7 सवाल तय किए 13 जनवरी 2020 को सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि वह सीधे पुनर्विचार याचिकाओं पर नहीं, बल्कि आर्टिकल 25 (धार्मिक स्वतंत्रता) और आर्टिकल 14 (समानता) के बीच संतुलन तथा आवश्यक धार्मिक प्रथाएं जैसे सिद्धांतों पर विचार करेगा। 14 से 23 जनवरी के बीच चली सुनवाई में याचिकाकर्ताओं ने महिलाओं के बहिष्कार को असंवैधानिक बताया, जबकि धार्मिक पक्ष ने आस्था और आर्टिकल 26 के तहत स्वतंत्रता का हवाला देते हुए न्यायिक हस्तक्षेप सीमित रखने की मांग की। इसी दौरान कोर्ट ने आवश्यक धार्मिक प्रथाएं और ज्यूडिशिअल रिव्यू की सीमाओं पर सवाल उठाए। 3 से 7 फरवरी के दौरान भी बहस जारी रही, जहां समानता बनाम धार्मिक स्वतंत्रता और न्यायिक सीमा के मुद्दों पर चर्चा हुई। लेकिन कोविड-19 के कारण सुनवाई रोक दी गई। सुप्रीम कोर्ट अपने ही फैसले को बरकरार रखती तो क्या बदलेगा अगर सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की बेंच केरल हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों की संविधान पीठ के फैसले को बरकरार रखती है तो भविष्य में धार्मिक मामलों में कोर्ट के दखल की सीमा तय हो सकती है। केंद्र सरकार का स्टैंड, सबरीमाला मामले पर किसने क्या कहा केंद्र ने रूख बदला: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के 2018-2019 के फैसले का समर्थन किया था। कहा था कि मंदिर में महिलाओं के प्रवेश होना चाहिए, लैंगिक समानता के खिलाफ कोई भी प्रथा नहीं होनी चाहिए। हालांकि बाद में रिव्यू स्टेज 2019–2020 के दौरान में केंद्र ने थोड़ा संतुलित रुख अपनाते हुए कहा कि मामला व्यापक संवैधानिक प्रश्नों (धर्म बनाम समानता) से जुड़ा है और इसे संविधान पीठ तय करे। अखिल भारतीय संत समिति: 2019 की याचिका में समिति ने कहा है कि अदालतें धार्मिक मामलों में तभी हस्तक्षेप करें जब वे सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता या स्वास्थ्य के खिलाफ हों। अनुच्छेद 14 का उपयोग अनुच्छेद 25 के अधिकार को खत्म करने के लिए न हो। केरल सरकार: पुरानी धार्मिक परंपराओं में बदलाव से पहले धर्म

Ice Cream Health Risks; Cooling Saturated Food Digestion Issue

Ice Cream Health Risks; Cooling Saturated Food Digestion Issue

Hindi News Lifestyle Ice Cream Health Risks; Cooling Saturated Food Digestion Issue | WJPLS Study Updates 19 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल कॉपी लिंक गर्मियों में लोग आइसक्रीम को ‘कूलिंग फूड’ मानकर खाते हैं। लेकिन ज्यादा आइसक्रीम खाने से कई हेल्थ रिस्क हो सकते हैं। ‘वर्ल्ड जर्नल ऑफ फार्मास्यूटिकल्स एंड लाइफ साइंस’ (WJPLS) में पब्लिश स्टडी के मुताबिक, आइसक्रीम में हाई शुगर और सैचुरेटेड फैट होता है। ये शरीर में इंफ्लेमेशन और मेटाबॉलिक डिसऑर्डर का रिस्क बढ़ाते हैं। इससे मोटापा, टाइप 2 डायबिटीज और हार्ट डिजीज का जोखिम भी बढ़ता है। गर्मियों में हीट स्ट्रेस बॉडी फंक्शन को कमजोर कर देता है। ऐसे में आइसक्रीम खाना ज्यादा नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए ‘जरूरत की खबर‘ में आज आइसक्रीम से होने वाले हेल्थ रिस्क की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे- आइसक्रीम के कौन से इंग्रीडिएंट्स सेहत के लिए नुकसानदायक हैं? ज्यादा आइसक्रीम खाने से किन बीमारियों का रिस्क बढ़ता है? एक्सपर्ट: डॉ. अंकित बंसल, कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन एंड इन्फेक्शियस डिजीज, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली डॉ. अनु अग्रवाल, सीनियर क्लीनिकल डाइटीशियन, फाउंडर- ‘वनडाइडटुडे’ सवाल- क्या आइसक्रीम खाने से शरीर को सचमुच ठंडक मिलती है? जवाब- आइसक्रीम खाने से मुंह और गले में तुरंत ठंडक का एहसास होता है, लेकिन यह अस्थायी होता है। इससे शरीर का कोर बॉडी टेम्परेचर कम नहीं होता। इसे पॉइंटर्स से समझिए- आइसक्रीम खाने पर तुरंत क्या होता है? मुंह और गले में ठंडक महसूस होती है। ब्रेन में ‘कूलिंग सिग्नल’ जाता है। ब्लड शुगर तेजी से बढ़ता है। थोड़ी देर के लिए ताजगी और खुशी का एहसास होता है। शरीर के अंदर क्या प्रोसेस शुरू होता है? हाई शुगर के कारण इंसुलिन तेजी से रिलीज होता है। फैट डाइजेशन के लिए पाचन तंत्र एक्टिव हो जाता है। बॉडी खुद को नॉर्मल करने के लिए थर्मोजेनेसिस प्रक्रिया (हीट प्रोडक्शन) बढ़ाती है। आधे घंटे बाद क्या होता है? एनर्जी लेवल गिरने लगता है। शरीर को फिर से ठंडक की जरूरत महसूस होती है। प्यास बढ़ सकती है। हैवीनेस या सुस्ती महसूस हो सकती है। कुल मिलाकर आइसक्रीम से मिली ठंडक कुछ मिनटों की होती है। लंबे समय में यह शरीर को गर्म करती है, ठंडा नहीं। सवाल- क्या गर्मियों में ज्यादा आइसक्रीम खाना बॉडी टेम्परेचर का बैलेंस बिगाड़ सकता है? जवाब- हां, ज्यादा आइसक्रीम खाने से शरीर का थर्मल बैलेंस बिगड़ सकता है। जब शरीर में कोई ठंडी चीज जाती है तो शरीर उसे संतुलित करने के लिए अंदर से गर्मी पैदा करता है। बार-बार ऐसा होने पर शरीर का बॉडी टेम्परेचर कंट्रोल सिस्टम प्रभावित हो सकता है। इससे थकान, डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रेस बढ़ सकता है। सवाल- आइसक्रीम में ऐसे कौन से इंग्रीडिएंट्स होते हैं, जो सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं? जवाब- आइसक्रीम में स्वाद के लिए मिलाए गए कई तत्व सेहत पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं। नीचे ग्राफिक में सभी इंग्रीडिएंट्स देखिए- सवाल- गर्मियों में ज्यादा आइसक्रीम खाने से किन बीमारियों का रिस्क बढ़ता है? जवाब- आइसक्रीम में मौजूद हाई शुगर और सैचुरेटेड फैट शरीर में इंफ्लेमेशन, मोटापा और मेटाबॉलिक डिसऑर्डर का कारण बन सकते हैं। सभी हेल्थ रिस्क ग्राफिक में देखिए- सवाल- आइसक्रीम हमारे डाइजेशन को कैसे प्रभावित करती है? जवाब- पॉइंटर्स से समझिए- आइसक्रीम में मौजूद हाई शुगर और फैट डाइजेशन की प्रक्रिया को धीमा कर सकते हैं। ठंडी चीज पेट में जाने से डाइजेस्टिव एंजाइम्स की एक्टिविटी स्लो हो जाती है। इससे डाइजेस्टिव सिस्टम पर दबाव बढ़ता है। हाई फैट चीजें पचने में ज्यादा समय लेती हैं, जिससे भारीपन और सुस्ती महसूस होती है। ज्यादा शुगर गट बैक्टीरिया का संतुलन बिगाड़ सकती है, जिससे गैस, ब्लोटिंग और अपच जैसी समस्याएं होती हैं। जिन्हें लैक्टोज इनटॉलरेंस (इसमें शरीर डेयरी प्रोडक्ट्स में मौजूद लैक्टोज शुगर नहीं पचा पाता) है, उन्हें पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। सभी असर ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या ज्यादा ठंडी चीजें हमारे इम्यून सिस्टम को कमजोर करती हैं? जवाब- पॉइंटर्स में देखिए– ज्यादा ठंडी चीजें कुछ मामलों में इम्यून सिस्टम को अस्थायी रूप से प्रभावित कर सकती हैं। ये म्यूकस मेम्ब्रेन (नाक और गले की प्रोटेक्टिव लेयर) को सिकोड़ सकती हैं। इससे शरीर की बैक्टीरिया और वायरस से लड़ने की क्षमता कमजोर हो जाती है। इस कारण गले में खराश, सर्दी-जुकाम और संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है। बच्चों और बुजुर्गों में इसका रिस्क ज्यादा होता है। सवाल- क्या रात में आइसक्रीम खाना सेहत के लिए ज्यादा नुकसानदायक होता है? जवाब- विज्ञापनों में रात में आइसक्रीम ऑर्डर करना मजेदार और रिलैक्सिंग दिखाया जाता है। लेकिन सेहत के लिहाज से यह गलत है। इसके कारण हैं– आइसक्रीम हैवी शुगर, हैवी फैट आइटम है। रात में बॉडी का मेटाबॉलिज्म स्लो होता है। इससे आइसक्रीम में मौजूद शुगर और फैट आसानी से पचते नहीं। इससे अपच और एसिडिटी होती है। स्लीप क्वालिटी खराब होती है। देर रात खाया गया मीठा फैट सेल्स बनकर बॉडी में जमा होता है यानी इससे मोटापा बढ़ता है। रात में ठंडा खाने से गले में खराश या कफ हो सकता है। सवाल- क्या खाली पेट आइसक्रीम खाना ज्यादा नुकसानदायक होता है? जवाब- हां, खाली पेट आइसक्रीम खाने से ब्लड शुगर तेजी से बढ़ता है और इंसुलिन स्पाइक होता है। यह डाइजेस्टिव सिस्टम पर दबाव डालता है, जिससे एसिडिटी, गैस या ऐंठन हो सकती है। सवाल- क्या शुगर-फ्री आइसक्रीम या लो-फैट वाली आइसक्रीम सचमुच में हेल्दी होती है? जवाब- नहीं, शुगर-फ्री या लो-फैट आइसक्रीम में आर्टिफिशियल स्वीटनर्स होते हैं, जो गट हेल्थ पर नेगेटिव प्रभाव डालते हैं। इसलिए ये हेल्दी विकल्प नहीं है। सवाल- क्या गर्मी के मौसम में ज्यादा आइसक्रीम खाना टूथ सेंसिटिविटी को बढ़ा सकता है? जवाब- हां, ठंडी और मीठी चीजों का कॉम्बिनेशन दांतों के इनेमल को कमजोर करता है। इससे सेंसिटिविटी और कैविटी का खतरा बढ़ता है। सवाल- क्या घर पर बनी आइसक्रीम हेल्दी होती है? जवाब- हां, ये कंपनी मेड आइसक्रीम से बेहतर होती है, क्योंकि इसमें आप शुगर और फैट को कंट्रोल कर सकते हैं। इसमें फ्रूट्स, ड्राई फ्रूट्स और नेचुरल स्वीटनर डाल सकते हैं। लेकिन घर की बनी आइसक्रीम भी सीमित मात्रा में ही खाएं, क्योंकि ठंडा और मीठे का प्रभाव वही रहता है। ………………… जरूरत की ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- गर्मियों में फल खाना फायदेमंद: डिहाइड्रेशन से बचाए, थकान-कमजोरी दूर करे, जानें इसके हेल्थ

जीतेंद्र@84, कभी हीरोइन के स्टंट किए, फिर बने स्टार:रेखा को टाइमपास कहा, सरेआम फूट-फूटकर रोईं, महमूद ने हंसाने के लिए उतारी पेंट, जानिए किस्से

जीतेंद्र@84, कभी हीरोइन के स्टंट किए, फिर बने स्टार:रेखा को टाइमपास कहा, सरेआम फूट-फूटकर रोईं, महमूद ने हंसाने के लिए उतारी पेंट, जानिए किस्से

हिंदी सिनेमा के जंपिंग जैक कहे जाने वाले जीतेंद्र आज 84 साल के हो गए हैं। कभी मुंबई की चॉल में 10×12 की खोली में रहने वाले जीतेंद्र आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। मिडिल क्लास परिवार में जन्में जीतेंद्र आर्टिफिशियल जूलरी सप्लाई करने में पिता का हाथ बंटाते थे। एक रोज वो सेट पर जूलरी पहुंचाने गए, जहां उन्हें जूनियर आर्टिस्ट का काम मिला। तनख्वाह थी 100 रुपए महीना। उस दिन जीतेंद्र का फिल्मों से ऐसा रिश्ता जुड़ा कि उन्होंने पहले जूनियर आर्टिस्ट से बतौर लीड हीरो काम किया और फिर हिंदी सिनेमा के स्टार बने। ये रिश्ता 200 से ज्यादा फिल्मों और 5 लाइफटाइम अचीवमेंट्स अवॉर्ड्स के साथ आज भी कायम है। आज जीतेंद्र के 84वें जन्मदिन के खास मौके पर जानिए उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ मजेदार और अनसुने किस्से- खोली में पंखा लगा, तो पूरा चॉल देखने पहुंचा जीतेंद्र का जन्म 7 अप्रैल 1942 में अमृतसर के एक पंजाबी परिवार में हुआ। जन्म के समय उनका नाम रवि कपूर रखा गया, जो बाद में फिल्मों में आकर जीतेंद्र हुआ। जीतेंद्र कुछ महीनों के ही थे, जब परिवार मुंबई आकर बस गया और गिरगांव की श्याम सदन चॉल में रहने लगा। 8 लोगों का पूरा परिवार 10 बाय 12 की खोली में रहता था, जिसका भाड़ा था 6 रुपए। उनके पिता अमरनाथ फिल्मों के सेट में आर्टिफिशियल जूलरी सप्लाई करने का काम करते थे। समय के साथ जब घर की आर्थिक स्थिति सुधरने लगी तो उनके घर में ट्यूबलाइट और पंखा लगा। चॉल में गरीबी का वो आलम था कि पूरे चॉल के लोग उनके घर वो पंखा और ट्यूबलाइट देखने पहुंचे थे। जिंदगी के 20 साल जीतेंद्र ने उसी चॉल में गुजारे। पंजाबी परिवार से होने के बावजूद आसपास के माहौल में घुल-मिलकर उन्होंने फर्राटेदार मराठी बोलना सीख लिया। सेट पर जूलरी सप्लाई करते हुए बने जूनियर आर्टिस्ट जीतेंद्र न पढ़ाई में अच्छे थे न उनके पास कोई खास टैलेंट या रुचि थी। शुरुआती पढ़ाई जैसे-तैसे पूरी की, तो पिता ने अपने आर्टिफिशियल जूलरी के बिजनेस में लगा दिया। काम था फिल्मों के सेट पर जूलरी पहुंचाना। साल 1959 में जीतेंद्र को वी.शांताराम की फिल्म नवरंग के सेट पर जूलरी पहुंचाने का काम मिला। वो रोज बस में धक्के खाते हुए सेट पर पहुंचते थे। उम्र करीब 17 साल थी। एक रोज चकाचौंध देखकर जीतेंद्र को भी फिल्म देखने का मन किया। उन्होंने वहां खड़े लोगों से पूछा तो उन्हें साफ इनकार कर दिया गया। सबने कहा कि वी.शांताराम किसी को शूटिंग देखने की इजाजत नहीं देते। जीतेंद्र मुंह लटकाए घर पहुंचे और चाचा से शिकायत की। अगले दिन चाचा उन्हें लेकर फिर सेट पर पहुंचे और असिस्टेंट से कहा कि मेरे भतीजे को शूटिंग देखनी है। उन्होंने जवाब दिया, ‘शूटिंग देखना है, तो काम भी करना पड़ेगा।’ उन्होंने जीतेंद्र को देखा और कहा- ‘हम तुम्हें प्रिंस का रोल देंगे।’ जीतेंद्र की खुशी का ठिकाना ही नहीं रहा। रोज बस से जाने वाले जीतेंद्र अगले दिन टैक्सी में सेट पर पहुंचे। वहां पहुंचते ही उन्हें प्रिंस के कपड़े पहनाए गए, लेकिन जैसे ही वो सेट पर पहुंचे उन्हें जोरदार धक्का लगा। सेट पर वो अकेले प्रिंस नहीं थे, बल्कि वहां 200 प्रिंस बने लड़के बैठे थे। उन्हें फिल्म नवरंग के गाने तू छुपी है कहां में हीरोइन के पीछे खड़े होने वाले जूनियर आर्टिस्ट का काम मिला था। वी.शांताराम से मांगा काम, बना दिया गया हीरोइन का बॉडी डबल नवरंग की शूटिंग के दौरान जीतेंद्र ने खुद भी फिल्मों में काम करने का मन बना लिया। जब उन्हें 1963 में फिल्म सेहरा के सेट पर जूलरी पहुंचाने का काम मिला, तो एक दिन उन्होंने मौका पाते ही डायरेक्टर वी.शांताराम से मराठी में कहा- मुझे फिल्मों में काम करना है। वी.शांताराम ने उनकी बात से ज्यादा इस बात पर गौर किया कि एक पंजाबी कपूर साहब का लड़का इतनी अच्छी मराठी कैसे बोल रहा है। इस तरह बात चल निकली। उन्होंने जाते हुए कहा, मैं गारंटी नहीं देता, लेकिन तुम ट्राय करते रहो। इस एक बात की बदौलत जीतेंद्र को फिल्म सेहरा में ही एक्स्ट्रा का काम मिल गया। उन्हें बस सेट पर मौजूद रहना होता था, जिससे अगर कोई जूनियर आर्टिस्ट न आए, तो वो उनकी जगह खड़े हो सकें। इस काम के लिए जीतेंद्र को महीने के 100 रुपए तनख्वाह मिली। एक दिन फिल्म के एक सीन के लिए एक्ट्रेस संध्या को आग के ऊपर से कूदता दिखाना था। एक्ट्रेस संध्या, डायरेक्टर वी.शांताराम की पत्नी थी। उस दौर में आम तौर पर खतरनाक सीन करने के लिए एक्टर-एक्ट्रेसेस के बॉडी डबल रखे जाते थे, जो उन्हीं की तरह तैयार होकर खतरनाक स्टंट करते थे। उस दिन भी सेट पर एक बॉडी डबल बुलाई गई थी, लेकिन आग देखकर उसने सीन करने से इनकार कर दिया। इसके लिए एक्ट्रेस की बॉडी डबल बनने के लिए एक लड़की बुलाई गई थी। आग की लपटें देख वो लड़की डर गई और वहां से चली गई। सेट पर मौजूद जब कोई लड़की वो सीन करने के लिए राजी नहीं हुई तो वी.शांताराम ने जीतेंद्र को ही ये काम दे दिया। जीतेंद्र को एक्ट्रेस संध्या की तरह तैयार किया गया, जिसके बाद उन्होंने हीरोइन बनकर सीन किया। पहला डायलॉग ही नहीं बोल पाए जीतेंद्र, चिढ़ गए फिल्म के डायरेक्टर इस एक रोल से जीतेंद्र ने वी.शांताराम के दिल में घर लिया। उन्हें इस फिल्म में एक डायलॉग भी दिया गया। उन्होंने कहना था, सरदार, दुश्मनों का दल टिड्डियों की तरह आगे बढ़ रहा है। 25 रीटेक के बावजूद जीतेंद्र डायलॉग ठीक तरह नहीं बोल पाए। खिजियाकर वी.शांताराम ने वो गलत डायलॉग ही फिल्म में फाइनल कर लिया। वो वी.शांताराम ही थे, जिन्होंने जीतेंद्र का हुनर परखा और उन्हें फिल्म गीत गाया पत्थरों ने में लीड रोल दिया। पहली फिल्म देखने पेरेंट्स के साथ पहुंचे, खाली पड़ा था थिएटर जीतेंद्र की बतौर हीरो पहली फिल्म गीत गाया पत्थरों ने साल 1964 में रिलीज हुई। चॉल में रहने वाले जीतेंद्र के लिए ये खास दिन था। उन्होंने चॉल के पास स्थित एक थिएटर में पिता अमरनाथ और मां कृष्णा को फिल्म दिखाने के लिए तीन टिकटें खरीदीं। थिएटर पहुंचते ही उन्होंने टिकट देखने के लिए गेट पर खड़े शख्स से

Brahmos Scientist Alexander Dies | Divya Everest Climber; Air India Suspends Tel Aviv Flights

Brahmos Scientist Alexander Dies | Divya Everest Climber; Air India Suspends Tel Aviv Flights

Hindi News Career Brahmos Scientist Alexander Dies | Divya Everest Climber; Air India Suspends Tel Aviv Flights 30 मिनट पहले कॉपी लिंक जानते हैं आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं… नेशनल (NATIONAL) 1. एयर इंडिया ने तेल अवीव के लिए फ्लाइट सस्पेंड की 5 अप्रैल को एयर इंडिया ने नई दिल्ली से तेल अवीव यानी इजराइल रूट पर चलने वाली सभी उड़ानों को 31 मई तक के लिए सस्पेंड कर दिया है। वेस्ट एशिया में चल रहे वार के चलते ये फैसला लिया गया है। तेल अवीव के लिए ज्यादातर अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस पहले ही अपनी उड़ानें बंद कर चुकी हैं। एयर इंडिया की फ्लाइट सस्पेंड होने से 40 हजार से ज्यादा भारतीय प्रभावित होंगे। अब तेल अवीव से भारत आने के लिए जॉर्डन या मिस्र के रास्ते गुजरना पड़ेगा। भारत के राजदूत जेपी सिंह और दूतावास की टीम ने इजराइल में भारतीय मजदूरों और छात्रों के साथ वर्चुअल बातचीत की। नई दिल्ली-तेल अवीव के बीच सीधी उड़ान सेवा 1 जनवरी 2026 से शुरू हुई थी, जिसमें सप्ताह में चार फ्लाइट बोइंग 787 ड्रीमलाइनर से ऑपरेट की जा रही थीं। तेल अवीव में स्थित भारतीय दूतावास ने रेगुलर कॉन्टेक्ट बनाए रखने के लिए 24×7 हेल्प लाइन शुरू की है और रजिस्ट्रेशन शुरू किए हैं। 2. नेविस के विदेश मंत्री डेंजिल डगलस नई दिल्ली पहुंचे 5 अप्रैल को नेविस के विदेश मंत्री डेंजिल डगलस नई दिल्ली पहुंचे। वे भारत की आधिकारिक यात्रा पर आए हैं। नेविस कैरेबियन सागर में स्थित एक छोटा सा द्वीप है। डेंजिल की इस यात्रा का उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना और दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाना है। डेंजिल इस यात्रा के दौरान भारत में सेंट किट्स और नेविस के हाई कमीशन का उद्घाटन भी करेंगे। अपनी इस भारत यात्रा के दौरान डगलस, विदेश मंत्री एस जयशंकर से भी मुलाकात करेंगे। दोनों देशों के प्रमुख इस मुलाकात में व्यापार एवं आर्थिक सहयोग, साझेदारी और कैरेबियाई क्षेत्र के साथ संबंधों को मजबूत करने पर बातचीत करेंगे। डेंजिल 1995 से 2015 तक सीनियर कैरेबियाई नेता और नेविस के पूर्व पीएम भी रहे। डेंजिल 2022 से विदेश मंत्री के पद पर कार्यरत हैं। 2024 में डेंजिल डगलस पहली बार भारत आए थे। निधन (DEATH) 3. ब्रह्मोस मिसाइल के साइंटिस्ट अलेक्जेंडर लियोनोव का निधन 5 अप्रैल को ब्रह्मोस मिसाइल प्रोजेक्ट से जुड़े रूस के वैज्ञानिक अलेक्जेंडर लियोनोव का निधन हो गया। लियोनोव 74 साल के थे। वे रूस के प्रमुख मिसाइल डिजाइनरों में शामिल थे। लियोनोव NPO माशिनोस्ट्रोएनिया (NPOMASH) के CEO और चीफ डिजाइनर थे। NPO माशिनोस्ट्रोएनिया रूस की एक प्रमुख एयरोस्पेस और मिसाइल डिजाइन कंपनी है। NPO माशिनोस्ट्रोएनिया भारत-रूस की ब्रह्मोस एयरोस्पेस की प्रमुख साझेदार कंपनी है। लियोनोव ने जिरकॉन हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल समेत कई अहम प्रोजेक्ट्स में योगदान दिया। लियोनोव ने इसके अलावा ग्रेनिट, वल्कन और बास्टियन जैसे मिसाइल और कोस्टल डिफेंस सिस्टम्स के डेवलपमेंट में भी भूमिका निभाई। लियोनोव को रूस की जिरकोन मिसाइल को डिजाइन करने का श्रेय दिया जाता है। ये एक जहाज-आधारित हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जो 3K22 मिसाइल प्रणाली का हिस्सा है। ब्रह्मोस : ब्रह्मोस भारत की सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है। ब्रह्मोस दुनिया की सबसे तेज चलने वाली क्रूज मिसाइलों में से एक है। ऑपरेशन सिन्दूर के दौरान भी ब्रह्मोस का उपयोग किया गया था। ब्रह्मोस को रक्षा अनुसंधान विकास संगठन (DRDO) और रूस के NPO मशीनोस्ट्रोयेनिया ने मिलकर विकसित किया है। लियोनोव हीरो ऑफ लेबर के गोल्डन स्टार से सम्मानित हैं। मिसलीनियस (MISCELLANEOUS) 4. एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में राहुल द्रविड़, अनिल कुंबले के नाम पर स्टैंड 5 अप्रैल को एम चिन्नास्वामी स्टेडियम, बेंगलुरू में राहुल द्रविड़ और अनिल कुंबले के नाम पर स्टैंड का अनावरण हुआ। कर्नाटक राज्य क्रिकेट एसोसिएशन (KSCA) के अध्यक्ष वेंकटेश प्रसाद और उपाध्यक्ष सुजीत सोमसुंदर इस अनावरण में शामिल रहे। KSCA ने 14 फरवरी को राहुल द्रविड़ और अनिल कुंबले के नाम पर स्टैंड के नाम रखने की घोषणा की थी। द्रविड़ ने इंटरनेशनल क्रिकेट में 24,177 रन बनाए हैं और कुंबले ने इंटरनेशनल क्रिकेट में 956 विकेट लिए हैं। अब BEML एंड का नाम ‘राहुल द्रविड़ एंड’ होगा और पवेलियन एंड का नाम अनिल कुंबले एंड होगा। भारत की पूर्व महिला क्रिकेटर शांता रंगास्वामी के नाम पर भी चिन्नास्वामी में स्टैंड होगा। एम चिन्नास्वामी स्टेडियम के 50 साल पूरे होने के मौके पर राहुल द्रविड़ और अनिल कुंबले के नाम पर स्टैंड का नाम रखा गया। 5. भारत ने अफगानिस्तान बाढ़, भूकंप पीड़ितों के लिए सहायता भेजी 5 अप्रैल को भारत ने अफगानिस्तान में आई बाढ़ और भूकंप से पीड़ितों की मदद के लिए अफगानिस्तान में राहत सामग्री की एक नई खेप भेजी है। इस राहत सामग्री में भारत ने किचन सेट, हाईजीन किट, प्लास्टिक शीट, तिरपाल, स्लीपिंग बैग जैसे सामान भेजे। 3 अप्रैल को उत्तरी अफगानिस्तान में 5.8 तीव्रता के भूकंप के बाद काबुल के बाहरी इलाके में कम से कम 77 लोग मारे जा चुके हैं। इससे पहले मार्च में पाकिस्तानी हमलों के बाद घायलों के इलाज के लिए भी 2.5 टन इमरजेंसी मेडिकल सहायता भेजी गई थी। 3 अप्रैल को दिल्ली NCR के कई हिस्सों में भी भूकंप आया। जम्मू-कश्मीर, पंजाब और हरियाणा समेत उत्तर भारत के अन्य हिस्सों में भी झटके महसूस किए गए। इस खेप को ह्यूमन असिस्टेंस एंड डिजास्टर रिलीफ (HDAR) नाम दिया गया। 6. दिव्या सिंह एवरेस्ट बेस कैंप तक साइकिल से पहुंची 5 अप्रैल को उत्तर प्रदेश की दिव्या सिंह काठमांडू से एवरेस्ट बेस कैंप तक साइकिल से पहुंचने वाली भारत की पहली महिला बनीं। दिव्या सिंह ने 14 दिनों में काठमांडू से एवरेस्ट बेस कैंप तक साइकिल चलाई। बर्फीली हवाओं, कम होते ऑक्सीजन के स्तर और ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी रास्तों के बीच उन्होंने रास्ता तय किया। काठमांडू से एवरेस्ट बेस कैंप तक की दूरी 17,560 फीट (5,364 मीटर) थी, जिसे उन्होंने तय किया। दिव्या ने -12°C टेम्परेचर में रोज लगभग 10-12 घंटे तक साइकिल चलाई। ऐसे रास्ते जहां ट्रैक बहुत ज्यादा मुश्किल था, वहां दिव्या ने अपनी साइकिल कंधों पर ले ली थी। 28 साल की दिव्या ऐसा करने वाली भारत की पहली और दुनिया की दूसरी महिला बन गई हैं। आज का इतिहास 7 अप्रैल 1827 में जॉन वॉकर ने पहली माचिस का आविष्कार किया। 1920

Khabar Hatke Rajasthan Temple Tractor Climb; UP Farmer ₹14 Cr Notice; China Septic Tanker Baraat

Khabar Hatke Rajasthan Temple Tractor Climb; UP Farmer ₹14 Cr Notice; China Septic Tanker Baraat

राजस्थान में मंदिर तक पहुंचने वाली 800 सीढ़ियों पर उल्टा ट्रैक्टर चढ़ाया गया। वहीं, यूपी के एक गरीब किसान को ₹14 करोड़ का टैक्स नोटिस भेज दिया गया। उधर, चीन में सेप्टिक टैंकरों में दूल्हे की बारात निकाली गई। . आज खबर हटके में जानेंगे ऐसी ही 5 रोचक खबरें… तो ये थी आज की रोचक खबरें, कल फिर मिलेंगे कुछ और दिलचस्प और हटकर खबरों के साथ… खबर हटके को और बेहतर बनाने के लिए हमें आपका फीडबैक चाहिए। इसके लिए यहां क्लिक करें…

11 Minute Extra Sleep Study; Heart Attack Risk Impact

11 Minute Extra Sleep Study; Heart Attack Risk Impact

Hindi News Lifestyle 11 Minute Extra Sleep Study; Heart Attack Risk Impact | Cardiology Health Tips 3 मिनट पहलेलेखक: गौरव तिवारी कॉपी लिंक मार्च 2026 में ‘यूरोपियन जर्नल ऑफ प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी’ में एक स्टडी पब्लिश हुई। इसके मुताबिक, रोज 11 मिनट ज्यादा नींद और 5 मिनट एक्स्ट्रा एक्सरसाइज से हार्ट अटैक और स्ट्रोक का जोखिम 10% तक कम हो सकता है। BW हेल्थकेयर की रिपोर्ट ‘बीट बाई बीट 2025’ के मुताबिक, दुनियाभर में हार्ट अटैक से होने वाली मौतों में 20% भारत में होती हैं। इसका मतलब है कि हमें ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। इसका मतलब है कि हमें ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। इसलिए ‘फिजिकल हेल्थ’ में आज हार्ट डिजीज पर आई नई स्टडी की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे- हेल्दी हार्ट के लिए कितनी नींद जरूरी है? अच्छी और गहरी नींद के लिए क्या करें? सवाल- हार्ट हेल्थ से जुड़ी इस नई स्टडी में क्या पता चला है? जवाब- इस स्टडी में ये मुख्य बातें पता चलीं- हार्ट अटैक और स्ट्रोक का रिस्क 10% कम होगा, अगर- रोज 11 मिनट ज्यादा नींद लें। 5 मिनट एक्स्ट्रा एक्सरसाइज करें। डाइट में सब्जियां ज्यादा लें। हार्ट हेल्थ और लाइफस्टाइल का सीधा कनेक्शन नींद, डाइट और एक्सरसाइज तीनों का हार्ट हेल्थ पर सीधा असर पड़ता है। लाइफस्टाइल में छोटे बदलाव भी बड़ा फर्क पैदा करते हैं। रोज 8-9 घंटे की नींद, नियमित एक्सरसाइज और संतुलित डाइट से हार्ट डिजीज का रिस्क 57% तक कम हो सकता है। सवाल- सिर्फ 11 मिनट एक्स्ट्रा नींद से हार्ट डिजीज का रिस्क कैसे कम होता है? जवाब- 11 मिनट कोई जादुई संख्या नहीं है, लेकिन यह शरीर में एक ‘पॉजिटिव चेन रिएक्शन’ शुरू करती है। इससे ये बदलाव होते हैं- ब्लड प्रेशर में सुधार- नींद के दौरान शरीर ‘नॉक्टर्नल डिप’ (BP कम होना) मोड में जाता है। 11 मिनट ज्यादा नींद से हार्ट की ब्लड वेसल्स को आराम करने का ज्यादा समय मिल जाता है। स्ट्रेस में कमी- थोड़ी ज्यादा नींद से स्ट्रेस कम होता है। इससे स्ट्रेस हॉर्मोन ‘कोर्टिसोल’ घटता है, जिससे हार्ट पर दबाव कम पड़ता है। शुगर कंट्रोल- इससे ‘इंसुलिन सेंसिटिविटी’ सुधरती है और डायबिटीज, हार्ट डिजीज का रिस्क कम होता है। हॉर्मोनल बैलेंस- थोड़ी ज्यादा नींद ‘घ्रेलिन’ (भूख बढ़ाने वाला हॉर्मोन) को कंट्रोल करती है, जिससे वजन कंट्रोल में रहता है। सेल रिपेयर- शरीर को डैमेज सेल्स, टिशूज की मरम्मत के लिए ज्यादा समय मिल जाता है। सवाल- नींद की अवधि में सिर्फ 11 मिनट बढ़ाने से फायदा कैसे हो सकता है? जवाब– अगर कोई 4-5 घंटे की नींद लेता है तो उसकी नींद की क्वालिटी खराब है। ऐसे में 11 मिनट ज्यादा नींद से तुरंत फायदा नहीं होगा। समझने वाली बात ये है कि- 11 मिनट चमत्कारी नंबर नहीं है। रिसर्च कहती है कि मामूली सुधार भी बड़ा रिजल्ट दे सकता है। 11 मिनट ज्यादा नींद से हार्ट बेहतर काम करता है, मेटाबॉलिज्म सुधरता है और शरीर बेहतर काम करता है। रोज 8 घंटे की अच्छी नींद से ज्यादा फायदे होते हैं। सवाल- रिसर्च में हार्ट हेल्थ के लिए कितनी नींद बेस्ट बताई गई है? जवाब- रिसर्च के मुताबिक, हेल्दी हार्ट के लिए रोज 8-9 घंटे की नींद जरूरी है। अगर कोई इतना नहीं सोता, तो रोज 10-15 मिनट नींद बढ़ाने से भी फायदा हो सकता है। सवाल- नींद के अलावा हार्ट को हेल्दी रखने के लिए डाइट में क्या बदलाव करना चाहिए? जवाब- केवल अच्छी नींद काफी नहीं है। खाने की थाली का भी हार्ट हेल्थ पर असर पड़ता है। नई स्टडी के मुताबिक, एक्स्ट्रा फाइबर और सब्जियां हार्ट अटैक का जोखिम कम कर सकती हैं। हेल्दी हार्ट के लिए डाइट में ये बदलाव करें- सवाल- अच्छी और गहरी नींद के लिए सोने से पहले क्या करें? जवाब- नींद के ‘ड्यूरेशन’ के साथ ‘क्वालिटी’ भी जरूरी है। अगर आप 8 घंटे बिस्तर पर बिताते हैं, लेकिन नींद बार-बार टूटती है तो हार्ट को आराम नहीं मिलता। गहरी नींद के लिए ‘स्लीप हाइजीन’ रूटीन फॉलो करना जरूरी है- नींद और हार्ट हेल्थ से जुड़े कॉमन सवाल-जवाब सवाल- क्या सिर्फ 15-20 मिनट वॉकिंग से भी हार्ट डिजीज का रिस्क कम होता है? जवाब- हां, कम होता है। हल्की वॉकिंग से– ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है। हार्ट मसल्स एक्टिव रहती हैं। ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने में मदद मिलती है। कोलेस्ट्रॉल बैलेंस सुधरता है। धीरे-धीरे हार्ट डिजीज का रिस्क कम होता है। सवाल- क्या वजन बढ़ने पर हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ता है? जवाब- हां, इससे हार्ट पर दबाव बढ़ता है- ज्यादा फैट आर्टरीज पर दबाव डालता है। बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है। इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है। ब्लड प्रेशर हाई हो सकता है। इससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है। सवाल- क्या मोबाइल और स्क्रीन टाइम ज्यादा होने से भी हार्ट डिजीज का रिस्क बढ़ता है? जवाब- हां, इससे हार्ट हेल्थ प्रभावित होता है- ज्यादा स्क्रीन टाइम से फिजिकल एक्टिविटी कम होती है। नींद का पैटर्न बिगड़ता है। स्ट्रेस और हार्ट रेट बढ़ सकता है। आंखों और ब्रेन पर दबाव पड़ता है। सवाल- क्या ज्यादा देर तक बैठकर काम करने से भी हार्ट पर बुरा असर पड़ता है? जवाब- हां, सिडेंटरी लाइफस्टाइल से सीधे जोखिम बढ़ता है- लंबे समय तक बैठने से ब्लड फ्लो धीमा होता है। फैट जमा होता है। मेटाबॉलिज्म स्लो हो जाता है। शुगर और कोलेस्ट्रॉल लेवल प्रभावित होते हैं। हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ सकता है। ………………………………………. ये खबर भी पढ़ें… फिजिकल हेल्थ- कोलेस्ट्रॉल पर 8 साल बाद आई नई गाइडलाइन:LDL 100 से नीचे रखें, 20 साल की उम्र से कराएं टेस्ट, जानें जरूरी बातें अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) और अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी (ACC) ने कोलेस्ट्रॉल पर नई गाइडलाइन जारी की है। यह अपडेट इसलिए अहम है, क्योंकि इसने कोलेस्ट्रॉल के पुराने पैरामीटर्स को पूरी तरह बदल दिया है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Supreme Court Hearing Update; Sabarimala Women Entry

Supreme Court Hearing Update; Sabarimala Women Entry

Hindi News National Supreme Court Hearing Update; Sabarimala Women Entry | Dawoodi Bohra Khatna, Parsi Women Rights नई दिल्ली2 घंटे पहले कॉपी लिंक धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के साथ भेदभाव का मामला बीते 26 सालों से देश की अदालतों में हैं। सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संविधान पीठ आज से 22 अप्रैल तक 50 से ज्यादा पेंडिंग याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई करेगी। जिन मुद्दों पर सुनवाई होगी उनमें केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर रोक अहम है। इसके अलावा मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश पर रोक, दाऊदी बोहरा मुस्लिम समुदाय में महिला खतना और गैर-पारसी पुरुषों से शादी करने पर पारसी महिलाओं को धार्मिक स्थल पर प्रवेश से रोकने के मामले भी सुने जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कहा गया है कि 7 अप्रैल की सुबह 10.30 बजे सबरीमाला रिव्यू केस की सुनवाई शुरू होगी। रिव्यू पिटीशनरों और उन्हें सपोर्ट करने वालों की सुनवाई 7 अप्रैल से 9 अप्रैल तक होगी। रिव्यू का विरोध करने वालों को 14 अप्रैल से 16 अप्रैल तक सुना जाएगा। सबरीमाला में 10 से 50 साल की फीमेल को एंट्री नहीं, पूरा मामला 5 पॉइंट्स में सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 साल की फीमेल की एंट्री बैन है। इसकी वजह मासिक धर्म है, क्योंकि पीरियड के दौरान महिलाओं को अशुद्ध माना जाता है। उन्हें धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेने से रोका जाता है।सबरीमाला मंदिर की पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान अयप्पा एक ब्रह्मचारी हैं, जिन्होंने ब्रह्मचर्य का व्रत लिया है, और इसी कारण एक निश्चित आयु वर्ग की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाती थी। इसी पर विवाद है। 1990 में मंदिर में महिला की एंट्री को लेकर विवाद उठा। समय के साथ स्थानीय कोर्ट में मामला चला बाद में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। 2006 में सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए थे। केस 2008 में 3 जजों की बेंच को सौंपा गया। 7 साल बाद 2016 में सुनवाई हुई। इसके बाद 2017 में तत्कालीन सीजेआई की 3 जजों की बेंच ने केस 5 जजों की संविधान पीठ को सौंपा। 2018 में संविधान पीठ ने 4-1 के बहुमत से फैसला सुनाया कि सबरीमाला में सभी आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश दिया जाए। प्रतिबंध असंवैधानिक है। इसके बाद बड़े विरोध के बीच 2 महिला बिंदु कनकदुर्गा और बिंदु अम्मिनी ने मंदिर में प्रवेश किया। इसके बाद 2019 में 7 जजों की बेंच ने यह मुद्दा 9 जजों की बड़ी बेंच को भेजा दिया था। तब अन्य धर्मों की महिलाओं से जुड़े मामले में भी इसमें जोड़ दिए गए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 2 जनवरी 2019 को बिंदु कनकदुर्गा (45) और बिंदु अम्मिनी (46) ने पुलिस सुरक्षा में सबरीमाला मंदिर में प्रवेश किया। वे ऐसा करने वालीं पहली महिलाएं थीं। दोनों ने मंदिर में जाने के लिए पारंपरिक काले कपड़े पहने। 9 जजों की बेंच 5 मुद्दों पर सुनवाई करेगी 1. सबरीमाला मंदिर में महिलाओं का प्रवेश: क्या सभी आयु की महिलाओं को प्रवेश का अधिकार है? बेंच यह तय करेगी कि साल 2018 में इंडियन यंग लायर एसोसिएशन Vs स्टेट ऑफ केरल मामले में हाईकोर्ट का फैसला सही था या नहीं। 2. मस्जिदों में महिलाओं का प्रवेश: क्या मुस्लिम महिलाओं को मस्जिद में नमाज पढ़ने से रोका जा सकता है। 2016 में यास्मीन जुबैर अहमद पीरजादा नाम की महिला ने मुस्लिम महिलाओं का मस्जिद में प्रवेश का मुद्दा उठाया और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। 3. दाऊदी बोहरा समुदाय में महिलाओं का खतना: क्या यह प्रथा मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है? 2012 में पारसी महिला गूलरुख एम गुप्ता ने हिंदु व्यक्ति से शादी की। उन्हें पारसी धर्मस्थलों में प्रवेश से रोका जाने लगा। उन्होंने इसके खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में पारसी महिलाओं के धार्मिक अधिकार को लेकर याचिका लगाई। बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। 4. पारसी महिलाओं का अग्निमंदिर में प्रवेश: क्या गैर-पारसी से शादी करने वाली पारसी महिला को अग्नि मंदिर में प्रवेश से रोका जा सकता है? 2017 में एड. सुनीता तिवारी ने दाऊदी बोहरा समुदाय में महिला खतना का मुद्दा उठाया और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। 5. मुस्लिम पर्सनल लॉ से जुड़े लैंगिक भेदभाव के प्रश्न: क्या व्यक्तिगत कानून मौलिक अधिकारों की कसौटी पर परखे जा सकते हैं? सुप्रीम कोर्ट ने 7 सवाल तय किए 13 जनवरी 2020 को सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि वह सीधे पुनर्विचार याचिकाओं पर नहीं, बल्कि आर्टिकल 25 (धार्मिक स्वतंत्रता) और आर्टिकल 14 (समानता) के बीच संतुलन तथा आवश्यक धार्मिक प्रथाएं जैसे सिद्धांतों पर विचार करेगा। 14 से 23 जनवरी के बीच चली सुनवाई में याचिकाकर्ताओं ने महिलाओं के बहिष्कार को असंवैधानिक बताया, जबकि धार्मिक पक्ष ने आस्था और आर्टिकल 26 के तहत स्वतंत्रता का हवाला देते हुए न्यायिक हस्तक्षेप सीमित रखने की मांग की। इसी दौरान कोर्ट ने आवश्यक धार्मिक प्रथाएं और ज्यूडिशिअल रिव्यू की सीमाओं पर सवाल उठाए। 3 से 7 फरवरी के दौरान भी बहस जारी रही, जहां समानता बनाम धार्मिक स्वतंत्रता और न्यायिक सीमा के मुद्दों पर चर्चा हुई। लेकिन कोविड-19 के कारण सुनवाई रोक दी गई। सुप्रीम कोर्ट अपने ही फैसले को बरकरार रखती तो क्या बदलेगा अगर सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की बेंच केरल हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों की संविधान पीठ के फैसले को बरकरार रखती है तो भविष्य में धार्मिक मामलों में कोर्ट के दखल की सीमा तय हो सकती है। केंद्र सरकार का स्टैंड, सबरीमाला मामले पर किसने क्या कहा केंद्र ने रूख बदला: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के 2018-2019 के फैसले का समर्थन किया था। कहा था कि मंदिर में महिलाओं के प्रवेश होना चाहिए, लैंगिक समानता के खिलाफ कोई भी प्रथा नहीं होनी चाहिए। हालांकि बाद में रिव्यू स्टेज 2019–2020 के दौरान में केंद्र ने थोड़ा संतुलित रुख अपनाते हुए कहा कि मामला व्यापक संवैधानिक प्रश्नों (धर्म बनाम समानता) से जुड़ा है और इसे संविधान पीठ तय करे। अखिल भारतीय संत समिति: 2019 की याचिका में समिति ने कहा है कि अदालतें धार्मिक मामलों में तभी हस्तक्षेप करें जब वे सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता या स्वास्थ्य के खिलाफ हों। अनुच्छेद 14 का उपयोग अनुच्छेद 25 के अधिकार को खत्म करने के लिए न हो। केरल सरकार: पुरानी धार्मिक परंपराओं में बदलाव से पहले धर्म