केरल चुनाव: वोट से पहले ‘कैश फॉर वोट’ का खंडन, वीडियो से अनमोल गरमाई; कांग्रेस ने EC पर भी कसा तंज

केरल विधानसभा चुनाव 2026: केरल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले ससुराल पक्ष चरम पर है। कांग्रेस नेता वी.डी. शेरीशन ने एक कथित वीडियो जारी कर बड़ा आरोप लगाया है कि बीजेपी कार्यकर्ता वोट के बदले पैसे बांट रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि वीडियो में साफा दिख रहा है कि एक बुजुर्ग महिला को पैसे दिए जा रहे हैं और यह सभी पार्टी कैंडिडेट्स की परीक्षा में शामिल हो रहे हैं। साथ ही सतीशन ने कहा कि यह सिर्फ एक सीट तक सीमित नहीं है, बल्कि कई इलेक्ट्रोलाक्ट्स में महिलाओं को पास और सा ग्लास लाइट की कोशिश की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘यह केरल में पहली बार और बीजेपी वोटरों को प्रभावित करने के लिए नई व्यवस्था लागू कर रही है।’ उनका कहना है, इस लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की गंभीर कोशिश की गई है, जिसे बंद नहीं किया जा सकता। #घड़ी | एर्नाकुलम | कल केरलम विधानसभा चुनाव से पहले, कांग्रेस नेता वीडी सतीसन कहते हैं, “हमने एक वीडियो जारी किया है, दृश्यों में यह बहुत स्पष्ट है कि भाजपा कार्यकर्ता भाजपा उम्मीदवार की उपस्थिति में वोट के लिए एक बूढ़ी महिला को पैसे दे रहे हैं। वे ऐसा कर रहे हैं… pic.twitter.com/EEvGnG5av1 – एएनआई (@ANI) 8 अप्रैल 2026 कांग्रेस ने इस मुद्दे पर चुनाव आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है. श्रीशेषन ने चेतावनी दी कि यदि संबंधित अधिकारी कार्रवाई नहीं करते हैं, तो पार्टी कानूनी तौर पर हट जायेगी. उन्होंने कहा कि चुनाव के ठीक पहले इस तरह की चुनावी आचार संहिता का खुला उल्लंघन है। अलाप्पुझा में कांग्रेस के सांसद केसी वेणुगोपाल ने भी पलक्कड़ में पैसे की चमक के साथ को “चौंकाने वाला” बताया। उन्होंने कहा कि मीडिया वैज्ञानिक और वीडियो में साफा संकेत शामिल हैं कि प्रतियोगी की भूमिका संदिग्ध है। उन्होंने चुनाव आयोग से सक्रिय और कड़ी कार्रवाई की मांग की, ताकि चुनाव की समितियां बनी रहें। #घड़ी | अलाप्पुझा, केरल: कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल का कहना है, “चौंकाने वाली मीडिया रिपोर्टें हैं कि पलक्कड़ में बीजेपी उम्मीदवार के पक्ष में पैसे बांटे गए हैं। साथ ही, सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बीजेपी उम्मीदवार खुद इन सभी चीजों में शामिल हैं। वीडियो में यही बताया गया है… pic.twitter.com/FeyzaOyOGz – एएनआई (@ANI) 8 अप्रैल 2026 पलक्क में जीत तय, कांग्रेस-एल दोष के आरोप: बीजेपी का पलटवार एस.एस.सुरेश ने कांग्रेस और एलएलसी के समर्थकों को लेटर से खारिज करते हुए पल्कॉक में बीजेपी की जीत का दावा किया है। उन्होंने कहा कि ‘पलक्क की जनता ने तय कर दिया है कि यहां बीजेपी के नेता बने हैं, इसी डर से कांग्रेस ने बयान दे रही है.’ महिलाओं को पैसे उधार देने पर उन्होंने कहा कि ये ‘गंभीर आरोप नहीं हैं’ और संबंधित महिला ने खुद को स्पष्ट कर दिया है कि बीजेपी ने कोई पैसा नहीं दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और एलएफ़टी हार के डर से झूठ फैला रहे हैं। सोभा सुंदरन का नाम लेते हुए उन्होंने कहा कि जनता उन्हें ही अनुयायी मानती जा रही है। बीजेपी ने भरोसा जताया कि इस बार पलक्कड में जीत तय है। #घड़ी | तिरुवनंतपुरम, केरलम | पलक्कड़ में महिला मतदाताओं को पैसे देने के कांग्रेस के बीजेपी पर आरोप पर प्रदेश बीजेपी महासचिव एस सुरेश कहते हैं, ”ये गंभीर आरोप नहीं हैं. महिला ने साफ कर दिया है कि बीजेपी ने कोई पैसा नहीं दिया है. लेकिन कुछ लोग… pic.twitter.com/aJWuqCZjPt – एएनआई (@ANI) 8 अप्रैल 2026 लेफ्ट का भी आरोपइधर, प्लाकॉक के विधायक राहुल मैमकुथिल ने भी कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा, “आप अपना पैसा अलग-अलग तरह से फैला सकते हैं, लेकिन पलक्क के दम पर एक भी वोट नहीं खरीदा जा सकता।” उन्होंने कहावतों का जिक्र करते हुए कहा कि एक प्रतियोगी के सहयोगी को जनता ने पैसे बांटते हुए पकड़ा था, जो बेहद खतरनाक है। इसके अलावा कांग्रेस ने चुनाव आयोग के समर्थकों पर भी सवाल उठाए हैं. श्रीशिशन ने कहा कि पोस्टल बैलेट की सुविधा न होने से अधिकारियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र में कई अधिकारियों ने प्रस्ताव पेश किए, लेकिन वहां बैलेट की व्यवस्था ही नहीं की गई। #घड़ी | अदूर, केरलम: राज्य विधानसभा चुनावों पर पलक्कड़ के विधायक राहुल मामकुत्तथिल कहते हैं, “…आप अपनी विचारधारा फैला सकते हैं, लेकिन आप पैसे से पलक्कड़ में एक भी वोट नहीं खरीद सकते। हाल ही में, एक उम्मीदवार और उसके करीबी सहयोगी पर वोट के लिए नकदी बांटने का आरोप लगाया गया था। एक सहयोगी,… pic.twitter.com/ZThRY68SkY – एएनआई (@ANI) 8 अप्रैल 2026 यह भी पढ़ें: बंगाल चुनाव 2026: कृष्णेंदु नाम के तीन उम्मीदवार एक सीट पर लड़ रहे चुनाव, दिलचस्प है इस सीट पर चुनावी लड़ाई
‘सूबेदार’ मेरे लिए सिर्फ फिल्म नहीं, बड़ा मौका रही:गौरव कुमार बोले- अनिल कपूर सर के साथ काम करना सपना पूरा होने जैसा था

रायबरेली से निकलकर हिंदी और तेलुगु सिनेमा में अपनी पहचान बना रहे गौरव कुमार एक बहुमुखी अभिनेता और फिल्ममेकर हैं। हाल ही में वे अनिल कपूर की फिल्म ‘सूबेदार’ में नजर आए हैं। अपनी सफल फिल्म ‘रायबरेली’ के बाद अब वे ‘प्रधानी’, ‘लाल दाना’ और ‘सूअर’ जैसे प्रोजेक्ट्स के जरिए नई संभावनाओं की तलाश कर रहे हैं। उनसे खास बातचीत… ‘सूबेदार’ में काम करने का मौका कैसे मिला? कास्टिंग प्रोसेस कैसा रहा? सच कहूं तो यह एक इत्तेफाक जैसा था। ‘कास्टिंग बे’ ने लखनऊ में पांच दिन का ऑडिशन रखा था। मुझे लगा शायद यह फेक होगा, क्योंकि पांच दिन लंबा ऑडिशन? लेकिन एक दोस्त जबरदस्ती ले गया। वहां कास्टिंग डायरेक्टर्स को मेरा लुक पसंद आया, फिर दो बार और ऑडिशन हुआ। जब उन्होंने बताया कि फिल्म में अनिल कपूर जी हैं, तो मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। बचपन से उनकी ‘नायक’ जैसी फिल्में देखी हैं, हम उनके काम के कायल रहे हैं। ऑडिशन के दौरान मैंने किसी को यह नहीं बताया था कि मैं पहले भी 2-3 फिल्में कर चुका हूं। ‘रायबरेली’ नाम की फिल्म में मैंने सोलो रोल किया है। सेट पर अनिल कपूर के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? आज भी वे 20-25 साल के लड़के जैसी एनर्जी रखते हैं। मेरा 15 दिन का शेड्यूल था, जिसमें उनके साथ स्क्रीन स्पेस मिला। वे अपने काम के प्रति बेहद ईमानदार और गंभीर हैं। डायरेक्टर जो कहते हैं, वही करते हैं। शूट के बाद वे मस्ती-मजाक भी करते थे। उन्होंने मुझसे ‘नायक’ फिल्म के कई किस्से साझा किए, खासकर कीचड़ वाला सीन, बताते थे कि वह कितना मेहनत भरा था। फिल्म में आपके किरदार और सह-कलाकारों के बारे में बताएं? फिल्म में मुझे अच्छा-खासा स्क्रीन स्पेस मिला है। मैं फैजल मलिक (सीरीज ‘पंचायत’ फेम) के राइट हैंड के तौर पर हूं । फैजल भाई बेहद शानदार इंसान हैं। उनके साथ काम करके बहुत मजा आया। इसके अलावा परेश रावल जी के बेटे आदित्य रावल भी फिल्म में हैं, उन्होंने भी जबरदस्त काम किया है। क्या आपने सेट पर बताया कि आप खुद फिल्म बना चुके हैं? सौरभ शुक्ला और फैजल मलिक को हमने यह बात बताई, क्योंकि उनका थिएटर से गहरा जुड़ाव रहा है। उन्होंने इसकी काफी तारीफ की। जब हमने बताया कि हम भारतेंदु नाट्य अकादमी से पासआउट हैं, तो वे और भी खुश हुए। उन्होंने आशीर्वाद देते हुए कहा- ‘बहुत बढ़िया, यह तो और भी अच्छी बात है।” उनका मानना है कि जितना सीखकर और पढ़कर जाएंगे, वह अनुभव आगे जरूर काम आएगा। इंडिपेंडेंट फिल्मों और बड़े बैनर के साथ काम करने में क्या अंतर है? सबसे बड़ा अंतर प्रोफेशनलिज्म और ईमानदारी का है। बड़े स्टार्स समय से सेट पर आते हैं और काम के दौरान पूरी तरह गंभीर रहते हैं। डायरेक्टर सुरेश त्रिवेणी और अनिल कपूर जी ने मेरे काम और लुक की तारीफ की। यहां तक कि उनके बॉडीगार्ड ने आकर बताया कि सर आपकी बहुत तारीफ कर रहे थे। यह मेरे लिए बहुत बड़ा प्लस पॉइंट है। ‘सूबेदार’ एक सस्पेंस थ्रिलर है और उम्मीद है कि इसके दूसरे पार्ट में भी मेरा किरदार नजर आए। सोशल मीडिया के दौर को एक एक्टर के तौर पर कैसे देखते हैं? सोशल मीडिया आज की जरूरत है। कास्टिंग एजेंसियां अब फॉलोअर्स भी देखती हैं, क्योंकि वे प्रमोशन में काम आते हैं। मैं भी अब अच्छे और संदेशपूर्ण कंटेंट पर काम करने जा रहा हूं। लेकिन एक बात जरूर कहूंगा,एक्टिंग और यूट्यूबिंग में फर्क है। जो लोग मुंबई आना चाहते हैं, उन्हें सीखकर आना चाहिए। पढ़ाई बहुत जरूरी है। सिर्फ किसी के कहने पर कि “तुम हीरो लगते हो” या “मुंबई जाकर ट्राई करो”, बिना सोचे-समझे कदम न उठाएं। सबसे जरूरी है खुद को समझना कि आप अभिनय कर सकते हैं या नहीं। क्या आपने किसी टैलेंट एजेंसी से जुड़ने की कोशिश की? अभी मैं किसी एजेंसी से जुड़ा नहीं हूं, लेकिन इसके बारे में अच्छी जानकारी ली है। आमतौर पर एजेंसियां 2 या 5 साल का एग्रीमेंट करती हैं। उस दौरान आप जो भी काम करते हैं, वह उनकी जानकारी और अनुमति से होता है। यह सिस्टम प्रोफेशनल है। अगर आप पारदर्शिता रखते हैं और उनसे सलाह लेते हैं, तो वे आपके करियर को सपोर्ट करती हैं। इस वक्त आप किन प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं? मेरी एक फिल्म ‘सूअर’ OTT के लिए आने वाली है, जिसमें मेरा लुक बिल्कुल अलग होगा। इसके अलावा ‘लाल दाना’ और ‘प्रधानी’ की शूटिंग पूरी हो चुकी है। ‘प्रधानी’ एक रियलिस्टिक फिल्म है, बिल्कुल ‘पंचायत’ की तरह, जिसमें गांव की राजनीति और प्रधान के कामकाज को असली अंदाज में दिखाया गया है। ‘रायबरेली 2’ का क्या अपडेट है? ‘रायबरेली’ को बहुत प्यार मिला। अब हम ‘रायबरेली 2’ की तैयारी कर रहे हैं और कोशिश है कि इसकी शूटिंग इसी साल शुरू हो। मेरा मकसद लोकल टैलेंट को मौका देना है, जो आर्थिक कारणों से मुंबई नहीं जा पाते। पॉजिटिव के साथ कुछ निगेटिव फीडबैक भी मिला, इसलिए अगली फिल्म में उन कमियों को दूर करने की कोशिश करूंगा। एक दिलचस्प बात यह रही कि मुंबई में ऑडिशन के दौरान लोग ‘रायबरेली’ को ‘बरेली’ समझ रहे थे। तभी सोचा कि अपने शहर के नाम से फिल्म बनाऊंगा, ताकि उसकी पहचान बने। ‘रायबरेली’ की फंडिंग कैसे हुई थी? फिल्म की फंडिंग हमारे मित्र विनीत यादव (इटावा/मैनपुरी) के जरिए हुई। शुरुआत में वे थोड़ा हिचकिचा रहे थे, लेकिन हमने उन्हें कन्विंस किया और लोकेशन व अन्य व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी खुद ली। अब यूपी सरकार भी फिल्मों को बढ़ावा दे रही है। अगर 70 प्रतिशत शूट यूपी में होता है, तो सब्सिडी मिलती है, जिससे फिल्ममेकर्स को काफी मदद मिलती है।
अचानक मुंह में मक्खी या मच्छर चले जाने पर घबराएं नहीं, जानिये एक्सपर्ट की सलाह

अक्सर टहलते समय, बात करते हुए या गाड़ी चलाते हुए अचानक मच्छर या मक्खी मुंह में चली जाती है. यह स्थिति डराने वाली हो सकती है, लेकिन अधिकतर मामलों में घबराने की जरूरत नहीं होती. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, छोटे कीड़े गलती से निगल लेना आमतौर पर नुकसानदेह नहीं होता, क्योंकि हमारा पाचन तंत्र उन्हें संभाल सकता है. 1) तुरंत क्या करें शांत रहें: घबराने से खांसी या उल्टी जैसा रिफ्लेक्स बढ़ सकता है.मुंह खोलकर थूक दें: अगर कीड़ा अभी मुंह में है तो तुरंत बाहर थूकें.पानी से कुल्ला करें: सादा पानी या हल्का नमक‑पानी गले की जलन कम करता है.धीरे‑धीरे पानी पिएं: इससे गले में अटकन का एहसास कम होता है. 2) क्या यह खतरनाक हो सकता है? सामान्य मक्खी/मच्छर: अधिकतर मामलों में सुरक्षित. पेट का एसिड कीड़ों को नष्ट कर देता है.बीमारी का खतरा: मच्छर‑जनित बीमारियां काटने से फैलती हैं, निगलने से नहीं.अपवाद: अगर मधुमक्खी/ततैया जैसे डंक मारने वाले कीड़े अंदर चले जाएं, तो गले में सूजन हो सकती है, यह स्थिति गंभीर हो सकती है. 3) किन लक्षणों पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं सांस लेने में दिक्कतहोंठ, जीभ या गले में तेज सूजनलगातार उल्टी, चक्कर या बेहोशीत्वचा पर पित्ती/एलर्जी के लक्षणये संकेत एलर्जिक रिएक्शन (एनाफिलैक्सिस) के हो सकते हैं और तुरंत इलाज ज़रूरी है. 4) एक्सपर्ट्स क्या सलाह देते हैं उल्टी कराने की कोशिश न करें, इससे जलन बढ़ सकती है.अगर खांसी से बाहर न आए और सांस में रुकावट लगे, तो इमरजेंसी मदद लें.अस्थमा या एलर्जी वाले लोग विशेष सावधानी रखें. 5) भविष्य में कैसे बचें बाहर खाते‑पीते समय गिलास ढकेंसाइक्लिंग/जॉगिंग के दौरान मुंह बंद रखेंमच्छर‑रोधी उपाय अपनाएं अचानक मच्छर या मक्खी मुंह में चले जाना एक आम घटना है और ज़्यादातर मामलों में हानिरहित ही है. सही कदम उठाएं, लक्षणों पर नज़र रखें और आवश्यकता पड़ने पर तुरंत चिकित्सक की सहायता लें.
स्प्राउट्स खाने का जोखिम: सेहत बनाने वाले स्प्राउट्स कहीं भी आपको बीमार न कर दें, खाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

अंकुरित अनाज खाने का जोखिम: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में ‘हेल्थ कॉन्शियस’ अच्छी बात हो रही है और जब भी बात आती है स्प्राउट्स की तो उसका नाम सबसे ऊपर आता है। प्रोटीन, विटामिन, विटामिन और फ़्लोरेंस से भरपूर स्प्राउट्स को अक्सर ‘सुपरफ़ूड’ माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस स्प्राउट्स को आप स्वास्थ्यवर्धक बनाने के लिए खा रहे हैं, आप किस अस्पताल में भी पहुंच सकते हैं? अगर स्प्राउट्स को सही तरीके से न खाया जाए, तो यह पाचन और संक्रमण से जुड़ी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है। आइए जानते हैं स्प्राउट्स से जुड़े जोखिम और सावधानी के तरीके क्या हैं? स्प्राउट्स से क्यों हो सकता है नुकसान? अनाज के साथ सबसे बड़ी चुनौती अमूर्त प्रभाव है। अनाज को नमकीन बनाने के लिए उसे लंबे समय तक जापानी और गर्म वातावरण में रखा जाता है। ये फूड फूड पॉइजनिंग के कारण होते हैं, जिससे पेट में ऐंठन, दस्त, उल्टी और तेज बुखार हो सकता है। खाने से पहले इन बातों का रखें खास ध्यान आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा दोनों ही स्प्राउट्स को रॉ खाने के बजाय प्रभाव पकाकर खाने की सलाह देते हैं। स्नैक्स में खाना पकाने से लेकर वहां तक मौजूद एलर्जेनिक बैचलर खत्म हो जाते हैं और पचने में भी ये आसान हो जाता है।अनाज को पहले और न्यूनतम होने के बाद साफ पानी से अच्छी तरह से लगाया जाता है। सिलिकॉन हाथों या प्लास्टिक से बने बैक्टीरिया का खतरा और बढ़ता है।अगर स्प्राउट्स से स्टिकहट महसूस हो रही हो या उनका अजीब सी गंध आ रही हो, तो उन्हें तुरंत हटा दें। यह होना बुरे के संकेत हैं।स्प्राउट्स को हमेशा फ़िरोज़ में रखें। बाहर बने रहने पर आश्रम के कारण तेजी से मल्टीपलाई होती हैं। उदाहरण के लिए 2-3 दिन से अधिक स्टोर न करें। स्प्राउट्स किसे नहीं खाना चाहिए? बुजुर्ग, बच्चों और गर्भवती महिलाओं को कच्चे स्प्राउट्स का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। संक्रमण की स्थिति में उनके शरीर में बैक्टीरिया से लड़ने का पता नहीं चलता है। जिसमें अक्सर गैस, ब्लोटिंग या अपच की समस्या बनी रहती है, उन्हें कच्चे स्प्राउट्स खाने से परहेज करना चाहिए क्योंकि कच्चे अनाज में जटिल दानेदार होना शामिल है, जिसे पचाना मुश्किल हो सकता है। (टैग्सटूट्रांसलेट)अंकुरित अनाज के दुष्प्रभाव(टी)क्या अंकुरित अनाज खाना सुरक्षित है(टी)कच्चे अंकुरित अनाज स्वास्थ्य जोखिम(टी)अंकुरित के लाभ और जोखिम(टी)अंकुरित अनाज को सुरक्षित रूप से कैसे खाएं(टी)अंकुरित मूंग और चना के लाभ(टी)अंकुरित के लिए खाद्य सुरक्षा युक्तियाँ(टी)खाने से पहले पांच महत्वपूर्ण बातें ध्यान रखें
गर्मियों में Cold Drink नहीं, गर्म चाय देती है लंबी ठंडक! जानें कैसे काम करता है ये अनोखा फॉर्मूला

Hot Tea In Summer: गर्मी शुरू होते ही सबसे पहले हमारी लाइफस्टाइल बदल जाती है. ठंडा पानी, जूस और कोल्ड ड्रिंक्स अचानक हमारी पहली पसंद बन जाते हैं, और चाय जैसे गर्म पेय से लोग दूरी बनाने लगते हैं. अक्सर ये माना जाता है कि चाय पीने से शरीर और ज्यादा गर्म हो जाता है, इसलिए इसे गर्मियों में कम पीना चाहिए, लेकिन अगर आप चाय के शौकीन हैं और हर मौसम में “एक कप चाय” के बिना दिन अधूरा लगता है, तो आपके लिए एक दिलचस्प बात है. क्या हो अगर हम कहें कि गर्मियों में चाय पीना आपको ठंडक भी दे सकता है? सुनने में ये थोड़ा अजीब लगता है, लेकिन इसके पीछे एकदम साफ साइंस काम करता है. शरीर का अपना एक कूलिंग सिस्टम होता है, जो सही तरीके से एक्टिव हो जाए तो गर्मी में भी राहत मिल सकती है. इस आर्टिकल में हम आसान भाषा में समझेंगे कि गर्म चाय पीने से शरीर पर क्या असर पड़ता है, कब ये फायदा देती है और किन हालात में इससे बचना बेहतर है. क्या कहता है साइंस? समझें आसान भाषा मेंजब आप गर्म चाय पीते हैं, तो आपके शरीर का अंदरूनी तापमान थोड़ा बढ़ता है. जैसे ही ऐसा होता है, शरीर तुरंत रिएक्ट करता है और खुद को ठंडा करने की कोशिश शुरू कर देता है. इस प्रोसेस में सबसे बड़ा रोल होता है पसीने का. शरीर ज्यादा पसीना निकालता है, और जब ये पसीना स्किन से सूखता है, तो वह गर्मी को अपने साथ ले जाता है. यही वजह है कि कुछ समय बाद आपको ठंडक महसूस होती है. यानी सीधी बात ये है कि गर्म चाय शरीर के नैचुरल कूलिंग सिस्टम को एक्टिव कर देती है. अदरक और इलायची वाली चाय क्यों होती है खासभारतीय चाय सिर्फ चाय पत्ती तक सीमित नहीं होती. इसमें अदरक, इलायची और कई बार काली मिर्च भी डाली जाती है. अदरक पेट को आराम देता है और डाइजेशन को बेहतर बनाता है. गर्मियों में जब खाने-पीने से जुड़ी दिक्कतें बढ़ती हैं, तब ये काफी मददगार होता है. इलायची बॉडी को हल्का महसूस कराती है और ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाती है. यानी मसाला चाय सिर्फ स्वाद नहीं बढ़ाती, बल्कि शरीर को अंदर से संतुलित रखने में भी काम आती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. हर जगह काम नहीं करती ये ट्रिकअब जरूरी बात ये है कि चाय से ठंडक मिलने वाला फॉर्मूला हर जगह काम नहीं करता, अगर आप ऐसी जगह रहते हैं जहां हवा सूखी होती है और पसीना जल्दी सूख जाता है, तो चाय पीना फायदेमंद हो सकता है, लेकिन अगर आप ऐसी जगह हैं जहां उमस ज्यादा है और पसीना सूखता नहीं, तो चाय पीने से उल्टा चिपचिपाहट और बेचैनी बढ़ सकती है. जिन लोगों को कम पसीना आता है, उनके लिए भी ये तरीका ज्यादा असरदार नहीं होता. चाय पीते समय इन बातों का रखें ध्यान-बहुत ज्यादा गर्म चाय न पिएं, इससे गले को नुकसान हो सकता है-चाय को जरूरत से ज्यादा न उबालें, वरना उसमें कड़वाहट और एसिडिटी बढ़ सकती है-दिन में सीमित मात्रा में ही चाय पिएं-अच्छी क्वालिटी की चाय पत्ती का इस्तेमाल करें चाय vs कोल्ड ड्रिंक -कौन बेहतर?कोल्ड ड्रिंक पीते ही शरीर को तुरंत ठंडक मिलती है, लेकिन ये असर थोड़ी देर का होता है.वहीं चाय धीरे-धीरे शरीर के कूलिंग सिस्टम को एक्टिव करती है, जिससे लंबे समय तक राहत मिल सकती है. इसलिए तुरंत ठंडक के बजाय अगर आप लंबे समय की राहत चाहते हैं, तो चाय एक बेहतर ऑप्शन हो सकती है.
फुटबॉल में इक्विटी, बास्केटबॉल में रेवेन्यू शेयरिंग से कमाई:महंगे खिलाड़ियों का बिजनेस मॉडल, कई खेलों में संन्यास के बाद भी सैलरी

खेल की दुनिया का एक सीधा सच है कि जो खिलाड़ी जितना मशहूर है, उसकी कीमत उतनी ही ज्यादा है। मौजूदा दौर में सुपरस्टार एथलीट्स सिर्फ अपनी टीमों के लिए खेलने वाले मोहरे नहीं रह गए हैं। वे खुद ग्लोबल ब्रांड हैं। यही वजह है कि लियोनेल मेसी या क्रिस्टियानो रोनाल्डो जैसे दिग्गज करियर के ढलान पर होने के बावजूद दुनिया में सबसे ज्यादा कमाई करने वाले एथलीट हैं। इन खिलाड़ियों को पैसे देने का बिजनेस मॉडल काफी अलग है। कहीं ‘डिफर्ड मनी’ (भविष्य में भुगतान) से टैक्स बचाया जा रहा है, तो कहीं ‘लेवरेज’ (दबाव) का इस्तेमाल कर खिलाडी मनचाही कीमत वसूल रहे हैं। फुटबॉल – मेसी को अमेरिकन क्लब इंटर मियामी में सैलरी के साथ हिस्सेदारी भी मिली 38 साल के लियोनेल मेसी जब यूरोप छोड़कर अमेरिकी लीग की टीम इंटर मियामी से जुड़े, तो उन्हें सिर्फ 800 करोड़ रुपए की सालाना सैलरी ही नहीं मिली, बल्कि क्लब में ‘इक्विटी’ (हिस्सेदारी) और लीग के ब्रॉडकास्ट पार्टनर के रेवेन्यू में से एक तय हिस्सा भी दिया गया। वहीं, रोनाल्डो सऊदी क्लब अल-नासर क्लब में सालाना 2000 करोड़ रुपए कमा रहे हैं। यह पैसा सऊदी के ‘पब्लिक इन्वेस्टमेंट फंड’ से आता है। रोनाल्डो की स्टार पावर का इस्तेमाल कर सऊदी अरब अपनी छवि सुधारना चाहता है। बेसबॉल – शोहेई ओटानी के साथ ‘डिफर्ड मनी’ मॉडल, क्लब की टैक्स बचाने की डील मेजर लीग बेसबॉल में कोई सैलरी कैप नहीं है, लेकिन एक तय सीमा से ज्यादा खर्च करने पर ‘लग्जरी टैक्स’ देना पड़ता है। जापानी सुपरस्टार शोहेई ओटानी ने लॉस एंजिलिस डोजर्स के साथ 10 साल के लिए करीब 6450 करोड़ रुपए का करार किया। ओटानी हर साल करीब 18.5 करोड़ रुपए की सैलरी लेंगे। बाकी के करीब 6300 करोड़ उन्हें उनके रिटायरमेंट के बाद (2034 से 2043 तक) किश्तों में दिए जाएंगे। इस ‘डिफर्ड मनी’ मॉडल ने टीम को लग्जरी टैक्स से बचा लिया। एनएफएल व बास्केटबॉल – कमाई में हिस्सा और टीम पर दबाव बनाकर राशि बढ़वाना एनएफएल में डलास काउबॉयज के डैक प्रेस्कॉट (4 साल के लिए 2230 करोड़) सबसे महंगे खिलाड़ी हैं। प्रेस्कॉट लीग के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी नहीं हैं, लेकिन उन्होंने सही समय पर टीम पर दबाव बनाया। टीम के पास दूसरा विकल्प नहीं था, इसलिए उन्हें ऐतिहासिक डील देनी पड़ी। वहीं, एनबीए में रेवेन्यू खिलाड़ियों और मालिकों के बीच 50-50 बंटता है। 10 साल से ज्यादा अनुभव वाले सुपरस्टार्स सैलरी कैप का 35% तक ले सकते हैं। इसलिए स्टीफन करी जैसे खिलाड़ी इस सीजन में करीब 550 करोड़ रुपए कमा रहे है। बॉक्सिंग – खिलाड़ी की मार्केट वैल्यू और पे-पर-व्यू सबसे अहम बॉक्सिंग में मार्केट वैल्यू और पे-पर-व्यू की ताकत है। मैक्सिकन बॉक्सर अल्वारेज को हाल ही में टेरेंस क्रॉफर्ड के खिलाफ हार मिली। इसके बावजूद, कैनेलो को इस फाइट के लिए करीब 910 करोड़ रुपए मिले। वहीं, विजेता क्रॉफर्ड को करीब 92 करोड़ राशि मिली। गोल्फ – सऊदी का नया टूर्नामेंट बना तगड़ी कमाई का आधार वर्ल्ड नंबर-1 स्कॉटी शेफलर ने 2024 व 2025 में हर साल करीब 280 करोड़ कमाए। दूसरी तरफ, जॉन रैम ने 2025 में एक भी टूर्नामेंट नहीं जीता लेकिन सऊदी फंडेड ‘LIV Golf’ में खेलने के कारण शुरुआती साइनिंग बोनस करीब 3 हजार करोड़ रुपए मिला।
लेटेंट विवाद पर समय रैना के बड़े खुलासे:कहा- कपिल शर्मा मेरे अगले एपिसोड में आने वाले थे; सुनील पाल, मुकेश खन्ना पर कसा तंज

स्टैंडअप कॉमेडियन समय रैना ने अपने नए यूट्यूब स्पेशल ‘समय रैना- स्टिल अलाइव’ के साथ वापसी की है। पिछले साल ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ शो को लेकर हुए भारी विवाद के बाद यह उनका पहला बड़ा वीडियो है। मंगलवार को रिलीज हुए इस 1 घंटे 21 मिनट के स्पेशल में समय ने उन सभी सेलेब्स को जवाब दिया है जिन्होंने मुश्किल वक्त में उनकी आलोचना की थी। साथ ही उन्होंने अपने फैंस को बताया कि वे जल्द ही ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ का सीजन 2 लेकर आ रहे हैं। समय ने लेटेंट विवाद को ‘क्रॉस फायर’ बताया है, जिसमें एक कश्मीरी होने के नाते वे बीच में फंस गए। मुकेश खन्ना और बी प्राक पर साधा निशाना विवाद के दौरान मुकेश खन्ना (शक्तिमान) और सिंगर बी प्राक ने समय की काफी आलोचना की थी। इस पर पलटवार करते हुए समय ने कहा, “शक्तिमान कह रहे थे कि ऐसे कंटेंट का बच्चों पर क्या असर पड़ेगा। भाई, जब शक्तिमान आता था, तब हर दूसरे महीने खबर आती थी कि किसी बच्चे ने शक्तिमान समझकर छत से छलांग लगा दी। आपने तो बच्चे मारे हैं, आप क्या बोल रहे हो?” वहीं बी प्राक के लिए उन्होंने कहा कि उन्हें किसी ने पॉडकास्ट पर बुलाया भी नहीं था, फिर भी वे बीच में कूद पड़े। सुनील पाल और कपिल शर्मा का जिक्र समय ने कॉमेडियन सुनील पाल पर भी तंज कसा। उन्होंने बताया कि सुनील पाल उन्हें टीवी पर कपिल शर्मा से सीखने की सलाह दे रहे थे, जबकि असलियत में कपिल समय के अगले एपिसोड में आने वाले थे। समय ने दावा किया कि कपिल उन्हें मैसेज करके शो की तारीफ करते थे और खुद को उनका बड़ा फैन बताते थे। समय ने कहा कि एक ‘साफ-सुथरा’ किरदार निभाना उनके लिए बनावटी है और वे अपनी डार्क कॉमेडी के अंदाज को नहीं छोड़ेंगे। रणवीर अल्लाहबादिया पर किया खुलासा समय रैना ने अपने स्पेशल में उस FIR पर खुलकर बात की जो यूट्यूबर रणवीर अल्लाहबादिया के एक कमेंट के कारण हुई थी। समय ने बताया कि उस विवादित एपिसोड में रणवीर ने एक कंटेस्टेंट के माता-पिता को लेकर अभद्र सवाल एक बार नहीं, बल्कि 8 बार पूछा था। समय ने मजाक में कहा, “मैंने एडिट के दौरान उन 8 में से 7 सवाल हटा दिए थे। मैंने तो अपनी तरफ से 99% कीटाणु मार दिए थे, पर एक परसेंट रह गए और विवाद हो गया।” उन्होंने रणवीर की ‘क्लीन इमेज’ पर तंज कसते हुए उन्हें ‘द मंक हू सोल्ड माई फेरारी’ कहा। ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ का सीजन 2 आएगा वीडियो के आखिरी हिस्से में समय ने अपने फ्यूचर प्रोजेक्ट का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि लोग अक्सर पूछते हैं कि क्या ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ खत्म हो गया है? समय ने कहा, “सीजन 1 इससे बेहतर हाई पॉइंट पर खत्म नहीं हो सकता था। लेकिन मैं सीजन 2 जरूर लाऊंगा क्योंकि मुझे वह काम करने में मजा आता है। अब मैं दुनिया में जब तक हूं, बस मजे करना चाहता हूं।” उन्होंने वादा किया कि अगला सीजन और भी ‘वाइल्ड’ होगा। क्या था 2025 का विवाद? साल 2025 में समय रैना का शो ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ अपनी डार्क कॉमेडी और अश्लील चुटकुलों के कारण विवादों में घिर गया था। शो में गेस्ट बनकर आए रणवीर अल्लाहबादिया ने एक कंटेस्टेंट के परिवार पर टिप्पणी की थी, जिसके बाद पुलिस में FIR दर्ज हुई। भारी दबाव और कानूनी कार्रवाई के चलते समय को वह एपिसोड डिलीट करना पड़ा था और माफी भी मांगनी पड़ी थी।
बालों की सेहत के लिये क्या है ज्यादा जरूरी, अंडा खाना या लगाना? जानिये सही तरीका

अक्सर लोग हेल्दी और काले घने बालों के लिए यह सोचकर बहुत उलझन में रहते हैं कि अच्छे बालों के लिए पौष्टिक चीजों को खाना ज्यादा जरूरी हैं या फिर तेल, शैंपू और हेयर मास्क लगाना. सच यह है कि बालों की अच्छी सेहत अंदर और बाहर, दोनों से ही जुड़ी होती है. लेकिन इन दोनों में क्या ज्यादा असरदार है, आइए इस बात को विस्तार से समझते हैं. बालों की सेहत: अंदर से शुरू होती हैबालों की जड़ें हमारी त्वचा के नीचे होती हैं और उन्हें पोषण खून के जरिए मिलता है. अगर शरीर में प्रोटीन, आयरन, जिंक, बायोटिन और ओमेगा‑3 फैटी एसिड की कमी होगी, तो बाल कमजोर, पतले और रूखे होने लगेंगे. हरी सब्जियां, दालें, अंडा, दूध, नट्स, बीज, फल और पर्याप्त पानी पीना बालों के लिए बेहद जरूरी है. अच्छी डाइट बालों को झड़ने से रोकने, नए बाल उगाने और प्राकृतिक चमक लाने में मदद करती है. इसलिए अगर शरीर ही कमजोर होगा, तो ऊपर से कुछ भी लगाने का असर सीमित ही रहेगा. बाहर से लगाने का क्या रोल हैतेल लगाना, सही शैंपू चुनना, कंडीशनर और हेयर पैक लगाना भी बालों की देखभाल में अहम भूमिका निभाता है.तेल मालिश करने से स्कैल्प में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है, जिससे जड़ें मजबूत होती हैं. शैंपू बालों को गंदगी और पसीने से साफ करता है, जबकि कंडीशनर नमी बनाए रखता है. हालांकि ध्यान रखें, बाहरी प्रोडक्ट्स बालों के दिखने और महसूस होने को बेहतर बनाते हैं, जड़ों की असली समस्या को अकेले दूर नहीं कर सकते. सिर्फ लगाना काफी क्यों नहींकई लोग महंगे तेल और ट्रीटमेंट पर भरोसा करते हैं, लेकिन उनकी डाइट खराब होती है. ऐसे में बाल कुछ समय अच्छे दिख सकते हैं, पर झड़ना और टूटना बंद नहीं होता.अगर शरीर को अंदर से पोषण नहीं मिलेगा, तो बाल दोबारा कमजोर हो जाएंगे. तो क्या ज्यादा बेहतर है, खाना या लगाना?स्पष्ट जवाब है, दोनों का संतुलन.• हेल्दी बालों की नींव अच्छी डाइट से पड़ती है• बालों की मजबूती और सुंदरता बनाए रखने में बाहरी देखभाल मदद करती है. अगर आप सच में लंबे समय तक मजबूत, घने और चमकदार बाल चाहते हैं, तो केवल तेल या शैंपू नहीं, बल्कि सही खान‑पान को प्राथमिकता दें. याद रखें, जो आप खाते हैं, वही आपके बालों में दिखता है, और बाहर से लगाया गया care उसे और बेहतर बनाता है.
सर्वे- 29 में से 23 देश भविष्य को लेकर चिंतित:भारत के 65 फीसदी लोग मानते हैं कि देश सही दिशा में – इप्सोस

इस साल दुनियाभर में कई महत्वपूर्ण व्यवधान देखने को मिले हैं, जिनमें पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष भी शामिल है। वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के लिए चुनौतियां बढ़ गई हैं। पूरी दुनिया के लोग भविष्य को लेकर चिंतित है और निराशा बढ़ रही है। इसके बीच भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ देशों में उम्मीद की किरण बरकरार है। ग्लोबल रिसर्च फर्म इप्सोस ने मार्च 2026 की एक रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट का शीर्षक है ‘वाट वरीज द वर्ल्ड’ यानी पूरी दुनिया को सबसे ज्यादा क्या चितिंत करता है। रिपोर्ट में सर्वे किए गए 29 में से 23 देशों के अधिकांश लोग अपने भविष्य को लेकर नकारात्मक सोच रखते हैं लेकिन भारत, सिंगापुर, मलेशिया, दक्षिण कोरिया और थाईलैंड जैसे देश इस ट्रेंड से अलग खड़े हैं। सर्वे में शामिल भारत के 65% लोगों का मानना है कि देश सही दिशा में जा रहा है। दुनिया में यह औसत महज 39% है। सर्वे में उन प्रमुख राष्ट्रीय मुद्दों पर नागरिकों की राय भी शामिल की गई है जो उनके दैनिक जीवन को सीधे प्रभावित करते हैं। सर्वे में कई लोगों ने माना है कि तेल और गैस आपूर्ति पर बढ़ता दबाव भविष्य में चुनौती बन सकता है। अपराध-हिंसा-बेरोजगारी सबसे बड़ी चिंताएं वैश्विक चिंताओं में अपराध, हिंसा, बेरोजगारी, महंगाई, गरीबी और सामाजिक असमानता, वितीय और राजनीतिक भ्रष्टाचार प्रमुख हैं। भारत में भी इसी तरह की चिंताएं देखने को मिलती हैं, लेकिन प्राथमिकताओं का क्रम अलग है। महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा, अपराध और हिंसा के अलावा वित्तीय और राजनतिक भ्रष्टाचार भारतीयों की सबसे बड़ी चिंताएं हैं। भारत की तटस्थ स्थिति ने बढ़ाई सकारात्मकता इप्सोस इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक भारत के लोगों को सकारात्मक सोच के पीछे कई कारण हैं। भारत की तटस्थ भू राजनीतिक स्थिति और वैश्विक ईंधन संकट के प्रभाव को कम करने के लिए किए गए सक्रिय प्रयासों ने अर्थव्यवस्था को अपेक्षाकृत स्थिर बनाए रखा है। पूरी दुनिया में एक सी चिंता- लगातार बढ़ रहे भू-राजनीतिक तनावों से बन रहीं कठिन परिस्थितियां ये सभी चिंताएं एक साझा वैश्विक चिंता की ओर इशारा करते है। यह बैचेनी काफी हद तक लगातार हो रहे भू-राजनीतिक तनावों की वजह से पैदा हुई है। बीते कुछ वर्षों में इन तनाव और संघर्षों ने दुनियभर की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है, आपूर्ति श्रृंखलाओं पर दबाव डाला है और नागरिकों के लिए कठिन परिस्थितियां पैदा की – सुरेश रामलिंगम, सीईओ, इप्सोस इंडिया
निवाड़ी में नशे में टंकी पर चढ़ा लड़का:बोला- दादाजी 15 लाख की जमीन 5 लाख में बचे रहे, मैं जान देने यहां आया

निवाड़ी जिले के सिमराखास गांव में बुधवार को एक लड़का जमीन के विवाद को लेकर पानी की टंकी पर चढ़ गया। शराब के नशे में धुत महेंद्र कुशवाहा गले में फंदा डालकर जान देने की जिद कर रहा था, जिसे पुलिस ने मौके पर पहुंचकर सुरक्षित नीचे उतारा। महेंद्र अचानक गांव की पानी की टंकी पर चढ़ गया और रस्सी का फंदा गले में डालकर कूदने की धमकी देने लगा। गांव के लोगों ने उसे नीचे आने के लिए बहुत मनाया, लेकिन वह किसी की बात सुनने को तैयार नहीं था। करीब एक घंटे तक वह ऊपर ही चढ़ा रहा और नीचे लोगों की भीड़ जमा रही। पुलिस ने ऊपर चढ़कर बचाया जब लगा कि लड़का गिर सकता है, तो थाना प्रभारी धर्मेंद्र सिंह राजपूत खुद अपनी टीम के साथ टंकी पर चढ़ गए। उन्होंने महेंद्र को पकड़ा और फंदे से बाहर निकाला। इसके बाद पुलिस उसे सही-सलामत नीचे लेकर आई। 15 लाख की जमीन 5 लाख में बिक रही थी महेंद्र ने बताया कि उसके दादाजी के पास सवा एकड़ जमीन है, जिसकी कीमत 15 लाख रुपए है। गांव के ही कुछ लोग उस जमीन को डरा-धमकाकर सिर्फ 5 लाख रुपए में खरीदना चाहते थे। महेंद्र ने अपने दादाजी को बहुत समझाया कि वे घाटे में जमीन न बेचें, लेकिन जब दादाजी नहीं माने तो उसने गुस्से में शराब पी और मरने के लिए टंकी पर चढ़ गया। पुलिस की फुर्ती की वजह से लड़के की जान बच गई और उसे उसके परिवार को सौंप दिया गया है।








