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सिर्फ 5 मिनट में पेट की गैस से मिलेगा छुटकारा, डॉक्टर शुभम वत्स से जानें आसान ट्रिक्स, जरूर करें ट्राई

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  Stomach Gas Relief Tips: पेट में गैस और ब्लोटिंग की समस्या आजकल बहुत आम हो गई है, जो गलत खान-पान, अनियमित दिनचर्या और खराब पाचन के कारण होती है. गैस्ट्रो डॉक्टर शुभम वत्स ने अपने यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो में बताया है कि कुछ ऐसे फूड्स हैं जो बहुत कम समय में गैस की समस्या से राहत दिला सकते हैं. ये फूड्स पेट में बनने वाली गैस को जल्दी बाहर निकालने में मदद करते हैं. खास बात यह है कि ये सभी चीजें आसानी से घर में उपलब्ध होती हैं और इन्हें तुरंत इस्तेमाल किया जा सकता है. इन फूड्स का सही तरीके से सेवन करने से न सिर्फ गैस से राहत मिलती है, बल्कि पाचन तंत्र भी मजबूत होता है. हालांकि अगर गैस की समस्या बार-बार हो रही है, तो डॉक्टर की सलाह लेना भी जरूरी है.

परमाणु ऊर्जा का शक्तिमानः स्वदेशी फास्ट ब्रीडर रिएक्टर तैयार:400 साल की बिजली गारंटी; ऐसा करने वाला भारत दुनिया का दूसरा देश

परमाणु ऊर्जा का शक्तिमानः स्वदेशी फास्ट ब्रीडर रिएक्टर तैयार:400 साल की बिजली गारंटी; ऐसा करने वाला भारत दुनिया का दूसरा देश

भारत ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में वह कीर्तिमान स्थापित किया है, जिसने दुनिया के विकसित देशों को चौंका दिया है। तमिलनाडु के कलपक्कम में भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (भाविनी-BHAVINI) का 500 मेगावाट का प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पीएफबीआर) अब कमर्शियल उत्पादन लिए तैयार है। इसे बनाने में 200 से अधिक भारतीय एमएसएमई और निजी कंपनियों ने कलपुर्जे बनाए हैं। इस वजह से भारत पर किसी भी तरह के विदेशी प्रतिबंधों का कोई असर नहीं होगा। रूस के बाद भारत दुनिया का दूसरा ऐसा देश बन गया है, जिसने इस जटिल तकनीक को व्यावसायिक स्तर पर उतारा है। इसे किसी विदेशी मदद के बिना, पूरी तरह स्वदेशी इंजीनियरिंग से तैयार किया गया है। इससे भारत के न्यूक्लियर प्रोग्राम के स्टेज-3 का रास्ता खुलेगा और थोरियम से परमाणु बिजली बनाना संभव होगा। परमाणु विशेषज्ञों के अनुसार, सामान्य रिएक्टरों की तुलना में ‘फास्ट ब्रीडर रिएक्टर’ कहीं अधिक उन्नत होते हैं। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह जितना ईंधन (यूरेनियम) इस्तेमाल करता है, उससे कहीं ज्यादा पैदा करता है। इसीलिए इसे ‘ब्रीडर’ कहा जाता है। भारत के पास यूरेनियम के भंडार सीमित हैं, लेकिन थोरियम का विशाल भंडार है। यह रिएक्टर भारत के ‘तीन चरणों वाले परमाणु कार्यक्रम’ के दूसरे चरण की शुरुआत है, जो भविष्य में थोरियम के इस्तेमाल का रास्ता खोलेगा। परमाणु विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका, फ्रांस ने परमाणु रिएक्टर के एक ही डिजाइन- पेशराइज्ड वाटर रिएक्टर (पीडब्ल्यूआर) को अपनाया। जर्मनी और ब्रिटेन की कोशिश नाकाम रही। भारत ने इस जटिल इंजीनियरिंग चुनौती को स्वीकार किया। भारत में लगभग 9.63 लाख टन थोरियम का भंडार है। एक बार जब हम तीसरे चरण में पूरी तरह प्रवेश कर जाएंगे, तो ये भंडार भारत को अगले 400 वर्षों तक निर्बाध बिजली प्रदान करने में सक्षम होंगे। परमाणु वैज्ञानिक डॉ. अनिल काकोदकर के विजन का जिक्र करते हुए विशेषज्ञ बताते हैं कि हालांकि इस परियोजना में समय लगा, जो ‘मेक इन इंडिया’ की बड़ी मिसाल है। यह भारत की ‘ऊर्जा संप्रभुता’ का घोषणा-पत्र जैसा है। कलपक्कम स्थित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर इसलिए खास है ईंधन की बचत – यह रिएक्टर इस्तेमाल किए गए ईंधन को फिर से रिसाइकिल कर ऊर्जा पैदा करता है। सुरक्षा – लिक्विड सोडियम का इस्तेमाल, जो बिजली न होने पर भी रिएक्टर को खुद ही ठंडा रख सकता है। 72 साल पहले होमी भाभा ने यह विजन रखा था। 22 साल लगे रिएक्टर के निर्माण में। 7,700 करोड़ रु. कुल लागत। 100% स्वदेशी तकनीक।

रात में भूख कम? ये हल्के डिनर देंगे पेट और नींद दोनों की राहत, मोटापा भी नहीं बढ़ाएंगे!

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Last Updated:April 08, 2026, 15:52 IST रात का भोजन हल्का होना चाहिए. अगर आप देर रात भारी खाना खा लेते हैं तो नींद और पाचन पर असर पड़ सकता है. पोहा, दलिया, सूप, मूंग दाल की खिचड़ी और दही-रोटी जैसे विकल्प न केवल हल्के हैं बल्कि शरीर को जरूरी पोषक तत्व भी देते हैं. पोहा हल्का और जल्दी पचने वाला भोजन है. इसमें कम तेल का इस्तेमाल होता है और सब्जियों के साथ बनाने पर यह और भी पौष्टिक बन जाता है. रात में भूख कम होने पर हल्का पोहा खाने से पेट भरता है और भारीपन नहीं होता. यह शरीर को ऊर्जा देने के साथ पाचन को भी आसान बनाता है. गेहूं का दलिया रात के लिए बेहतरीन विकल्प माना जाता है. यह फाइबर से भरपूर होता है और पेट को लंबे समय तक भरा रखता है. इसे सब्जियों के साथ नमकीन या हल्का मीठा भी बनाया जा सकता है. दलिया हल्का होने के साथ-साथ पौष्टिक भी होता है, जिससे यह रात के खाने का अच्छा विकल्प बन जाता है. अगर बिल्कुल हल्का खाना चाहते हैं तो वेजिटेबल सूप सबसे बेहतर विकल्प है. इसमें कई तरह की सब्जियां शामिल की जा सकती हैं, जो शरीर को जरूरी पोषक तत्व देती हैं. सूप गर्म और हल्का होता है, जिससे पेट पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ता. रात में भूख कम हो तो एक कटोरी सूप काफी फायदेमंद साबित हो सकता है. Add News18 as Preferred Source on Google मूंग दाल की खिचड़ी पाचन के लिए सबसे हल्का भोजन माना जाता है. इसमें चावल और मूंग दाल का संतुलन होता है, जो शरीर को प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट दोनों देता है. हल्के मसालों के साथ बनाई गई खिचड़ी रात के लिए आदर्श भोजन है. यह पेट को आराम देती है और नींद भी बेहतर करती है. दही-रोटी भी हल्का और आसान डिनर विकल्प है. दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स पाचन को बेहतर बनाते हैं. अगर भूख कम हो तो एक-दो रोटी के साथ दही लेना काफी होता है. यह पेट को ठंडक देता है और रात में भारीपन नहीं होने देता. बहराइच मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अरविंद शुक्ला के अनुसार, भोजन का समय रात 8:00 बजे से 9:00 बजे के बीच रखना चाहिए और सोने जाने से कम से कम 2 घंटे पहले ही भोजन कर लेना चाहिए. शास्त्रों के अनुसार भी सूर्यास्त के बाद भोजन करना उचित माना जाता है. ऐसा करने से पाचन सुचारू रहता है और लंबे समय तक कोई समस्या नहीं होती. First Published : April 08, 2026, 15:52 IST

ग्लोबल स्टोर तक भारतीय लग्जरी फैशन की धमक:इनका 22% बिजनेस विदेशी बाजारों से; न्यूयॉर्क से दुबई तक खुले स्टोर, हॉलीवुड मुरीद

ग्लोबल स्टोर तक भारतीय लग्जरी फैशन की धमक:इनका 22% बिजनेस विदेशी बाजारों से; न्यूयॉर्क से दुबई तक खुले स्टोर, हॉलीवुड मुरीद

कभी ऑयलफील्ड के उपकरणों की दुनिया से निकले तरुण ताहिलियानी आज दुबई के पॉश जुमेरा इलाके में दो मंजिला लग्जरी स्टोर सजा रहे हैं। यह महज एक शख्स की कहानी नहीं, बल्कि पूरे भारतीय फैशन इंडस्ट्री के वैश्विक महत्वाकांक्षा का प्रतीक है। रिलायंस, आदित्य बिड़ला फैशन जैसे कॉरपोरेट निवेशकों की बदौलत सब्यसाची, मनीष मल्होत्रा, अनिता डोंगरे जैसे भारतीय ब्रांड्स न्यूयॉर्क, दुबई जैसे शहरों में मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं। भारतीय क्राफ्ट, हैंडवर्क इन ब्रांड्स को पहचान दिला रहे हैं। दिलचस्प मार्केटिंग, अलग स्टाइल और तासीर की बदौलत ये ब्रांड्स पूरी दुनिया में जगह बना रहे हैं। इसके चलते भारतीय फैशन इंडस्ट्री की 22 प्रतिशत आय विदेशी बाजारो से होने लगी है। भारतीय फैशन हॉलीवुड, पेरिस के सबसे बड़े मंचों तक पहुंचा अंतरराष्ट्रीय पहचान – भारतीय डिजाइन्स को वैल्यू मिल रही है। भारतीय कारीगरी को ग्लोबल लेवल पर एक ‘ब्रांड’ माना जाता है। हॉलीवुड स्टार्स की पसंद- गौरव गुप्ता जैसे भारतीय डिजाइनरों के कपड़े अब ‘कार्डी बी’ और ‘मेगन दी स्टैलियन’ जैसे बड़े ग्लोबल सुपरस्टार्स पहन रहे हैं। यह ट्रेंड बढ़ रहा है। रेड कार्पेट तक- मशहूर एक्ट्रेस जेंडाया ने राहुल मिश्रा के डिजाइन किए कपड़े पहने, वहीं पॉप स्टार बियॉन्से ने अपने शो के लिए गौरव गुप्ता के आउटफिट्स चुने। विदेशी ब्रांड्स पर प्रभाव- प्रादा जैसे बड़े इंटरनेशनल लग्जरी ब्रांड ने भारत की पारंपरिक कोल्हापुरी चप्पलें अपने कलेक्शन में शामिल की है। पेरिस फैशन वीक में धाक – दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित ‘पेरिस हॉट कूटूर वीक’ में अब भारतीय डिजाइनर हर साल नियमित रूप से शो कर रहे हैं। डिजाइन चोरी गंभीर परेशानी, कस्टम ड्यूटी में खप रही पूंजी – इंटरनेशनल रेंट, स्टाफिंग और कस्टम्स में काफी पूंजी खप रही। हाथ से बने प्रोडक्ट्स के लिए इन्वेंट्री मैनेजमेंट जरूरी है। – यूरोपियन लग्जरी हाउस से सीधी प्रतिस्पर्धा बड़ी चुनौती, करेंसी मार्केट में उतार-चढ़ाव और मैक्रोइकोनॉमिक अस्थिरता – राहुल मिश्रा के ‘टाइग्रेस’ डिजाइन की एक टीवी शो में नकल पाई गई। – सूरत, चांदनी चौक, इंस्टाग्राम पेज पर कूटूर लुक दिनों में कॉपी हो जाते हैं। साब्यसाची, मनीष मल्होत्रा, अनीता डोंगरे, सभी को दिल्ली हाईकोर्ट से स्टे ऑर्डर मिले -आईपी कानून मौजूद हैं पर फैशन की रफ्तार से काफी धीमे हैं।

क्या चॉकलेट खाने से बढ़िया हो जाता है मूड? ब्रेन पर किस तरह होता है असर, जानिए 5 रोचक तथ्य

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Last Updated:April 08, 2026, 15:39 IST Chocolate and Mood: चॉकलेट खाने से मूड बेहतर हो सकता है, क्योंकि इसमें मौजूद तत्व सेरोटोनिन, डोपामाइन और एंडॉर्फिन जैसे फील-गुड हार्मोन को बढ़ाते हैं. खासकर डार्क चॉकलेट तनाव कम करने और मन को शांत रखने में मदद करती है. हालांकि इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए, ताकि इसके फायदे ज्यादा मिलें और नुकसान न हो. कई रिसर्च में पता चला है कि डार्क चॉकलेट स्ट्रेस कम करती है और मूड बेहतर बनाती है. Chocolate Reduce Stress: जब हमारा मूड खराब होता है, तब ऐसी चीजें खाना का मन करता है, जिससे मूड बेहतर हो जाए. कई लोग इसके लिए चॉकलेट खाना पसंद करते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो डार्क चॉकलेट खाना सेहत के लिए कई तरह से फायदेमंद है. इसमें पाए जाने वाले कुछ तत्व मूड को बेहतर करते हैं और आपका तनाव कम कर सकते हैं. कई लोग इसे कम्फर्ट फूड मानते हैं, क्योंकि इसे खाने के बाद तुरंत अच्छा महसूस होता है. यह सिर्फ एक मनोवैज्ञानिक आदत नहीं है, बल्कि इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी मौजूद हैं. चॉकलेट में ऐसे कई प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं, जो हमारे भावनाओं को प्रभावित करते हैं. साइंस डायरेक्ट की रिपोर्ट के मुताबिक चॉकलेट खाने से हमारे दिमाग में सेरोटोनिन, डोपामाइन और एंडॉर्फिन जैसे न्यूरोट्रांसमीटर सक्रिय हो जाते हैं. ये सभी फील-गुड केमिकल्स माने जाते हैं, जो खुशी, संतोष और रिलैक्सेशन का एहसास दिलाते हैं. सेरोटोनिन मूड को स्थिर करता है, डोपामाइन हमें खुशी और इनाम जैसा एहसास देता है, जबकि एंडॉर्फिन दर्द और तनाव को कम करते हैं. यही वजह है कि चॉकलेट खाने के बाद मन हल्का और खुश महसूस करता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. चॉकलेट में एक खास यौगिक पाया जाता है, जिसे फेनाइलएथाइलामाइन कहा जाता है. यह वही रसायन है, जो हमारे दिमाग में तब बनता है, जब हम प्यार में होते हैं या बहुत खुश होते हैं. यह दिमाग में एनर्जी और उत्साह का एहसास पैदा करता है. हालांकि इसकी मात्रा कम होती है, फिर भी यह मूड को थोड़ा बेहतर करने में भूमिका निभा सकता है. डार्क चॉकलेट में फ्लेवोनॉयड्स जैसे एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो शरीर में तनाव को कम करने और दिमाग के कार्य को बेहतर बनाने में मदद करते हैं. कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि डार्क चॉकलेट का सेवन कोर्टिसोल हार्मोन को कम कर सकता है. इससे चिंता और तनाव कम होता है. चॉकलेट का असर केवल शरीर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मनोवैज्ञानिक रूप से भी हमें खुशी देता है. इसका स्वाद, खुशबू और बचपन की यादें भी हमारे दिमाग को सकारात्मक संकेत देती हैं. जब हम चॉकलेट खाते हैं, तो हमें एक रिवॉर्ड जैसा एहसास होता है, जो मूड को बेहतर बनाता है. चॉकलेट मूड अच्छा करने में मदद कर सकती है, लेकिन इसका ज्यादा सेवन सेहत के लिए सही नहीं है. इसमें शुगर और कैलोरी अधिक होती है, जिससे वजन बढ़ सकता है, दांतों की समस्या हो सकती है और ब्लड शुगर लेवल भी बढ़ सकता है. इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि चॉकलेट सीमित मात्रा में ही खानी चाहिए. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : April 08, 2026, 15:39 IST

trikonasana worl record: इस योगासन ने बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड, ABR में हुआ दर्ज, क्या हैं त्रिकोणासन करने के फायदे? एक्सपर्ट से समझिए

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होमताजा खबरदेश इस योगासन ने बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड, ABR में हुआ दर्ज, कौन सा है आसन? Last Updated:April 08, 2026, 15:28 IST Trikonasana world record: योगासनों में से एक त्र‍िकोणासन ने वर्ल्‍ड र‍िकॉर्ड बनाया है. महाराष्ट्र के बुलढाणा में 5000 लोगों ने एक साथ त्रिकोणासन कर एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में यह उपलब्‍ध‍ि दर्ज कराई है. आइए जानते हैं क‍ि इस आसन को करने के क्‍या फायदे हैं? त्र‍िकोणासन कर भारतीयों ने बनाया व‍िश्‍व र‍िकॉर्ड. Trikonasana World Record: अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अब 74 दिन बाकी बचे हैं लेकिन उससे पहले ही एक योगासन ने ऐसा वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है, जो एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हो गया है. यह योगासन है त्रिकोणासन.आयुष मंत्रालय के तहत मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा (MDNIY) के भव्य योग महोत्सव-2026 में इस योगासन ने नया विश्व रिकॉर्ड बनाया है. आयुष मंत्रालय की ओर से मिली जानकारी के अनुसार 7 अप्रैल को महाराष्ट्र के बुलढाणा में सुबह 6 बजे से 8 बजे तक चले योग महोत्सव में शामिल हुए 5000 योग प्रेमियों ने कॉमन योग प्रोटोकॉल (CYP) का सामूहिक अभ्यास करते हुए त्रिकोणासन (Trikonasana) किया. यह पहली बार था जब इतनी बड़ी संख्या में लोगों ने एक जगह पर इकठ्ठे होकर त्रिकोणासन का अभ्यास किया. अब इस उपलब्धि को एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में बतौर नया विश्व रिकॉर्ड दर्ज कर लिया गया है. आइए जानते हैं इस योगासन के बारे में और इसके फायदे क्या हैं? कैसे किया जाता है त्रिकोणासन 5000 लोगों ने त्र‍िकोणासन कर वर्ल्‍ड र‍िकॉर्ड कायम क‍िया है. तस्‍वीर- MDNIY त्रिकोणासन (Triangle Pose) एक खड़े होकर किया जाने वाला योगासन है. इसमें पैरों, हाथों और रीढ़ की मदद से शरीर एक त्रिकोण (Triangle) जैसी आकृति बनाता है, जिससे पैरों, कूल्हों और रीढ़ की हड्डी में खिंचाव आता है और वे मजबूत बनते हैं. यह एक सामान्य आसन हैं जो कॉमन योग प्रोटोकॉल में शामिल है लेकिन इसके फायदे जानकर आपको हैरानी होगी. इस योगासन के क्या फायदे हैं? मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान, नई दिल्ली में योग प्रशिक्षक, वसुधा राजावत बताती हैं, ‘त्रिकोणासन का अभ्यास महिलाओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी है. इस आसन का अभ्यास पेट की चर्बी को कम करने में सहायक है. जिन महिलाओं को इन्फर्टिलिटी की समस्या है, उन्हें इसका अभ्यास विशेष रूप से करना चाहिए. मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान, नई दिल्ली में योग प्रशिक्षक,वसुधा राजावत वे बताती हैं कि यह कमर का लचीलापन बढ़ाता है, अकड़न को कम करता है. यह अभ्यास पिंडली, जंघा और कटिभाग की मांसपेशियों को मजबूती प्रदान करता है. यह मेटाबॉलिज्म को मजबूत करता है, पाचन शक्ति को सक्रिय करता है, पूरे शरीर में रक्तसंचार को बढ़ाता है. साथ ही यह अभ्यास श्वास के आवागमन को सक्रिय कर शरीर में स्फूर्ति लाता है. क्या बरतें सावधानियांराजावत आगे कहती हैं कि इस योगासन का अभ्यास करते हुए हमेशा इस बात का ध्यान रखें कि पीठ, गर्दन और घुटने की गंभीर चोट होने पर इस अभ्यास को नहीं करना चाहिए. चक्कर आने या उल्टी जैसा महसूस होने पर भी इस अभ्यास को नहीं करना चाहिए. इस अभ्यास को क्षमता के अनुसार ही करना चाहिए. About the Author प्रिया गौतमSenior Correspondent Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …और पढ़ें First Published : April 08, 2026, 15:28 IST

Doctors are prescribing fishing, gardening, and social service alongside medication; these can improve mental health.

Doctors are prescribing fishing, gardening, and social service alongside medication; these can improve mental health.

Hindi News Happylife Doctors Are Prescribing Fishing, Gardening, And Social Service Alongside Medication; These Can Improve Mental Health. लंदन / वॉशिंगटन7 घंटे पहले कॉपी लिंक फिश एंड चैट सेशन में बुजुर्ग। ब्रिटेन के कैंट में रहने वाले स्टीफन (58) की पत्नी को हार्ट अटैक आया। इसके बाद वे मानसिक संकट में घिर गए। स्टीफन बताते हैं, ‘एक समय ऐसा आया था जब मुझे अपनी जिंदगी समझ ही नहीं आ रही थी। 50 साल के ली भी उन्हीं की तरह विषम परिस्थितियों से जूझ रहे थे। अवसाद हावी होने लगा था… दोनों को फैमिली डॉक्टर्स ने मछली पकड़ना, आर्ट ग्रुप, वॉकिंग ग्रुप और वॉलंटियरिंग से जुड़ने को कहा। यह सोशल प्रिस्क्राइविंग है… इलाज का पारंपरिक तरीका। दोनों ने फिशिंग चुनी। वे गैर लाभकारी संस्था ‘कास्ट ए थॉट’ से जुड़ गए। यहां उन्हें बचपन की पसंदीदा गतिविधि के साथ समान अनुभव वाले लोग भी मिले। स्टीफन कहते हैं, ‘यहां आकर लोगों से मिलना और पानी के किनारे बैठना जादू जैसा रहा। यह थेरेपिस्ट के सामने सूट पहनकर बैठने से कहीं आसान और असरदार है। इस सेशन का नाम ‘फिश एंड चैट’ रखा गया। दो घंटे फिशिंग होती है। फिर कैफे में कॉफी। दोस्त बनते हैं। कोई तय स्क्रिप्ट नहीं होती। दुनियाभर में हेल्थ केयर सिस्टम दबाव में हैं। कोविड के बाद वेटिंग लिस्ट लंबी हुई, स्टाफ की कमी बढ़ी। ऐसे में डॉक्टर ‘सोशल प्रिस्क्राइविंग’ की ओर लौट रहे हैं। इसमें डॉक्टर मरीज की बीमारी के सामाजिक और मानसिक कारणों को समझते हुए उन्हें ऐसी गतिविधियों से जोड़ते हैं जो उनके अकेलेपन को दूर करें और मानसिक सेहत में सुधार लाएं। ब्रिटेन और नीदरलैंड्स में इसकी सफलता के बाद अमेरिका में पायलट शुरू हुए हैं। ‘सोशल प्रिस्क्राइविंग यूएसए’ संगठन 2035 तक अमेरिकियों को कला, संगीत व प्रकृति आधारित उपचार दिलाने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। रोमानिया व डेनमार्क में नए प्रोजेक्ट शुरू हुए। मकसद है पोस्टनेटल डिप्रेशन घटाना। नई मांओं को गाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। नीदरलैंड्स में साइक्लिंग क्लब, म्यूजियम विजिट, ताई ची जैसी एक्टिविटी पर सब्सिडी मिलती है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार 2030 तक दुनिया में करीब 1.1 करोड़ स्वास्थ्य कर्मियों की कमी होगी। ऐसे में बीमारियों को रोकने के लिए ‘रोकथाम और सामाजिक जुड़ाव’ ही सबसे सस्ता व प्रभावी रास्ता दिख रहा है। सोशल प्रिस्क्राइविंग यूएसए के कोफाउंडर एलन सीगल कहते हैं, ‘डिप्रेशन में उनके पास थेरेपी और दवा के बाद विकल्प जल्दी खत्म हो जाते हैं। कई लोग साइड इफेक्ट झेलते हैं। कई थेरेपिस्ट के पास नहीं जाना चाहते। उनके मुताबिक इलाज का बड़ा हिस्सा क्लिनिक के बाहर की जिंदगी में होता है। ऐसे में सोशल प्रिस्क्राइविंग बेहतर विकल्प बन सकता है।’ एक्टिविटी कोच डेव एलस्टोन कहते हैं, ‘सोशल प्रिस्क्राइविंग उसी दौर की याद दिलाता है जब डॉक्टर घर-घर जाकर मरीजों की बातें सुना करते थे। डेव कहते हैं, ‘चाहे ताजी हवा से काम हो या गप्पे मारने से, सच तो यह है कि यह काम करता है… हमने लोगों को ठीक होते देखा है।’ दवाइयों की जरूरत कम पड़ रही, डिप्रेशन भी आध आधाः एक्सपर्ट यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन की प्रोफेसर डेजी फैनकोर्ट के शोध के अनुसार, जो लोग महीने में कम से कम एक बार संगीत बजाने या बुनाई जैसी गतिविधियां करते हैं, उनमें डिप्रेशन का खतरा करीब आधा हो जाता है। ग्लोबल मेटा-एनालिसिस में पाया गया कि सर्जरी के बाद संगीत सुनने वाले मरीजों को कम दर्द हुआ और उन्हें दवाइयों की जरूरत भी कम पड़ी। यही वजह है कि डॉक्टर्स इसे महत्व दे रहे हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

गर्मियों में ठंडक चाहिए? यह खास सौंफ वाली ठंडाई कर देगी कमाल, जानिए घर पर बनाने की आसान रेसिपी

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Last Updated:April 08, 2026, 15:15 IST गर्मी के दिनों में शरीर को ठंडा और तरोताजा रखना जरूरी होता है. भरतपुर के गांवों में सौंफ से बनी देसी ठंडाई पारंपरिक रूप से सबसे ज्यादा पसंद की जाती है. यह न सिर्फ शरीर को ठंडक देती है, बल्कि ऊर्जा और पाचन में भी मदद करती है, और पूरी तरह प्राकृतिक होने के कारण स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित है. भरतपुर जिले के ग्रामीण इलाकों में गर्मियों के दिनों में एक पारंपरिक पेय लोगों की पहली पसंद बन जाता है. यह पेय है सौंफ से तैयार की जाने वाली देसी ठंडाई, जो न सिर्फ शरीर को ठंडक देती है बल्कि ऊर्जा भी प्रदान करती है. गांवों में लोग इसे पीकर खुद को तरोताजा महसूस करते हैं और गर्मी के असर से बचने के लिए इसे रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बना चुके हैं. ग्रामीण लोगों के अनुसार सौंफ की तासीर ठंडी होती है, जिससे शरीर का तापमान संतुलित रहता है. यही कारण है कि गर्मी के मौसम में सौंफ वाली ठंडाई का सेवन बेहद फायदेमंद माना जाता है. यह पेय पाचन क्रिया को भी बेहतर बनाता है और शरीर में पानी की कमी को दूर करने में मदद करता है. ग्रामीण इलाकों में खेतों पर काम करने वाले लोग इसे खास तौर पर पसंद करते हैं. क्योंकि यह उन्हें लंबे समय तक ऊर्जा देता है. इस देसी ठंडाई को बनाना भी बेहद आसान है और इसके लिए किसी महंगे सामान की जरूरत नहीं होती. सबसे पहले ठंडा पानी लिया जाता है, फिर सौंफ को अच्छी तरह साफ करके बारीक पीस लिया जाता है. इसके बाद पिसी हुई सौंफ को पानी में डालकर अच्छी तरह मिलाया जाता है. स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें चीनी डाली जाती है, जिससे इसका स्वाद मीठा और लाजवाब हो जाता है. Add News18 as Preferred Source on Google इसके बाद इसमें थोड़ी सी काली मिर्च मिलाई जाती है, जो इसे हल्का तीखापन और अलग स्वाद देती है. कुछ लोग इसमें बर्फ भी डालते हैं, जिससे यह और ज्यादा ठंडी और ताजगी भरी बन जाती है. ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि यह ठंडाई पूरी तरह प्राकृतिक होती है और इसमें किसी तरह का केमिकल नहीं होता, इसलिए यह स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित है. बाजार में मिलने वाले ठंडे पेय पदार्थों के मुकाबले यह सस्ती और ज्यादा फायदेमंद मानी जाती है. सौंफ वाली यह देसी ठंडाई न केवल गर्मी से राहत देती है, बल्कि परंपरा और स्वाद का भी बेहतरीन उदाहरण है. यही कारण है कि भरतपुर के गांवों में इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती जा रही है और ग्रामीण क्षेत्र के लोग इसे खूब पसंद करते हैं. First Published : April 08, 2026, 15:15 IST

कच्चा तेल 15% सस्ता होकर 94.27 डॉलर पर आया:वजह- अमेरिका और ईरान के बीच 2 हफ्ते का सीजफायर; पेट्रोल-डीजल सस्ते होने की उम्मीद

कच्चा तेल 15% सस्ता होकर 94.27 डॉलर पर आया:वजह- अमेरिका और ईरान के बीच 2 हफ्ते का सीजफायर; पेट्रोल-डीजल सस्ते होने की उम्मीद

अमेरिका और ईरान के बीच 2 हफ्ते के सीजफायर के ऐलान के बाद ब्रेंट क्रूड ऑयल 15% सस्ता हो गया है। ब्रेंट क्रूड ऑयल के दाम आज (8 अप्रैल) करीब 15% यानी 15 डॉलर गिरकर 94.27 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 6 साल में तेल की कीमतों में यह एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट है। एक दिन पहले ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 109.27 डॉलर प्रति बैरल पर थी। 28 फरवरी को अमेरिका और ईरान के बीच जंग शुरू होने से पहले कच्चा तेल 70 डॉलर प्रति बैरल के आस-पास था। फिर जंग के बीच कच्चे तेल के दाम बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गए थे। क्रूड ऑयल में तेजी की वजह सीजफायर सीजफायर से ग्लोबल मार्केट उछले, डॉलर गिरा युद्ध थमने की खबरों से ग्लोबल शेयर बाजारों में तेजी आई है। अमेरिका का SP 500 फ्यूचर्स 2% और यूरोपीय बाजार 5% तक चढ़ गए। भारत के सेंसेक्स और निफ्टी में भी करीब 4% की तेजी देखने को मिल रही है। निवेशकों का भरोसा बढ़ने से डॉलर की वैल्यू में गिरावट आई है, क्योंकि अब सुरक्षित निवेश के तौर पर लोग डॉलर के बजाय शेयरों की तरफ बढ़ रहे हैं। हालांकि, सोने की कीमतों में सीजफायर की उम्मीद से हल्की बढ़त देखी गई है। क्या कच्चे तेल की कीमतें और गिरेंगी? एनालिस्ट्स का कहना है कि यह राहत अस्थायी हो सकती है। आईजी के एनालिस्ट टोनी सिकामोर के मुताबिक, यह एक अच्छी शुरुआत है, लेकिन अभी कई अगर-मगर बाकी हैं। एक्सपर्ट्स को डर है कि अगर दो हफ्ते बाद स्थायी समझौता नहीं हुआ, तो तेल की कीमतें फिर से 100 डॉलर के पार जा सकती हैं। कच्चा तेल सस्ता होने से भारत को क्या-क्या फायदे होंगे? कच्चा तेल भारत के लिए सबसे जरूरी है, क्योंकि हम अपनी जरूरत का करीब 85% तेल दूसरे देशों से खरीदते हैं। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमतें गिरती हैं, तो भारतीय अर्थव्यवस्था को कई मोर्चों पर राहत मिलती है। 1. पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी: कच्चा तेल सस्ता होने से ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (जैसे IOC, BPCL, HPCL) पेट्रोल और डीजल के दाम कम कर सकती हैं। इससे ट्रांसपोर्टेशन लागत घटती है, जिसका सीधा असर आपके महीने के बजट पर पड़ता है। 2. महंगाई दर पर लगाम: भारत में महंगाई का सीधा कनेक्शन डीजल की कीमतों से है। जब डीजल सस्ता होता है, तो ट्रकों का भाड़ा कम हो जाता है। इससे फल, सब्जियां, अनाज और अन्य रोजमर्रा के सामानों की ढुलाई सस्ती पड़ती है।इससे बाजार में खाने-पीने की चीजों के दाम कम होने लगते हैं। 3. करंट अकाउंट डेफिसिट में सुधार: भारत तेल खरीदने के लिए भारी मात्रा में डॉलर का भुगतान करता है। अगर तेल सस्ता होता है, तो भारत का इंपोर्ट बिल कम हो जाता है। इससे भारत के विदेशी मुद्रा भंडार की बचत होती है और करेंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) कम होता है, जो अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए बहुत जरूरी है। 4. भारतीय रुपये को मजबूती: जब तेल का बिल कम होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मांग कम हो जाती है। इससे डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये को मजबूती मिलती है। मजबूत रुपया आयात की जाने वाली अन्य चीजों (जैसे इलेक्ट्रॉनिक सामान, मशीनरी) को भी सस्ता बनाने में मदद करता है। 5. सरकारी सब्सिडी का बोझ कम होना: सरकार एलपीजी (LPG) और केरोसिन जैसी चीजों पर सब्सिडी देती है। कच्चा तेल सस्ता होने से सरकार पर सब्सिडी का वित्तीय बोझ कम हो जाता है। इस बचे हुए पैसे को सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे सेक्टर में निवेश कर सकती है। 6. कॉर्पोरेट प्रॉफिट में बढ़ोतरी: पेंट, टायर, लुब्रिकेंट, फर्टिलाइजर और लॉजिस्टिक सेक्टर की कंपनियों के लिए कच्चा तेल एक मुख्य कच्चा माल है। तेल सस्ता होने से इन कंपनियों की लागत घटती है और मुनाफा बढ़ता है, जिससे शेयर बाजार में भी पॉजिटिव असर देखने को मिलता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर कच्चे तेल की कीमतों में 10 डॉलर प्रति बैरल की कमी आती है, तो भारत के करंट अकाउंट डेफिसिट यानी चालू खाता घाटे (CAD) में करीब 9-10 बिलियन डॉलर की कमी आ सकती है और महंगाई दर में भी लगभग 0.5% तक की राहत मिल सकती है। होर्मुज प्रभावित होने से तेल की कीमतें बढ़ी थीं जंग शुरू होने के बाद ईरान ने होर्मुज रूट को लगभग बंद कर दिया था। दुनिया का करीब 20% तेल और गैस इसी रास्ते से गुजरता है। इसके बंद होने से न केवल तेल, बल्कि एल्युमीनियम, फर्टिलाइजर और प्लास्टिक की कीमतों में भी भारी तेजी आने लगी थी। ब्रिटेन और यूरोप में भी दवाओं और जरूरी चीजों की कमी होने का खतरा बढ़ गया था, क्योंकि शिपिंग का खर्च कई गुना बढ़ गया है। मार्च में 60% महंगा हुआ था क्रूड ऑयल मार्च में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 60% का उछाल आया था, जो 1990 के खाड़ी युद्ध के बाद एक महीने में सबसे बड़ी बढ़ोतरी थी। फरवरी के आखिरी में ब्रेंट क्रूड 72.48 डॉलर पर था, जो मार्च में 120 डॉलर के पार पहुंच गया था। इससे पहले सितंबर 1990 में सद्दाम हुसैन के कुवैत पर हमले के समय तेल की कीमतें एक महीने में 46% बढ़ी थीं। भारत के कुल तेल आयात का 51% खाड़ी देशों से आता है भारत कच्चे तेल की जरूरतों के लिए सबसे ज्यादा पश्चिम एशिया पर निर्भर है। FY2025-26 के पहले 10 महीनों में भारत के कुल कच्चे तेल और पेट्रोलियम आयात में 51% हिस्सा इसी क्षेत्र का था। कच्चे तेल का भाव बढ़ने से भारत का आयात बिल तेजी से बढ़ रहा था। तेल की कीमतें 10 डॉलर बढ़ने से 0.60% बढ़ेगी महंगाई इससे पहले रेटिंग एजेंसी केयरएज ग्लोबल ने कहा था कि कच्चे तेल की कीमतों में हर 10 डॉलर प्रति बैरल बढ़ोतरी से भारत में रिटेल महंगाई 60 बेसिस पॉइंट्स (0.60%) तक बढ़ सकती है। भारत अपनी तेल जरूरतों के लिए काफी हद तक पश्चिम एशिया पर निर्भर है, ऐसे में वहां के हालात बिगड़ने से भारत के करंट अकाउंट डेफिसिट, GDP ग्रोथ और रुपए की वैल्यू पर भी दबाव बढ़ेगा। ये खबर भी पढ़ें… सेंसेक्स 3000 अंक चढ़कर 77,600 पर कारोबार कर रहा:

अमेरिका-ईरान सीजफायर के बाद कच्चा तेल 100 डॉलर के नीचे:15 प्रतिशत सस्ता हुआ, 6 साल में एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट

अमेरिका-ईरान सीजफायर के बाद कच्चा तेल 100 डॉलर के नीचे:15 प्रतिशत सस्ता हुआ, 6 साल में एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट

अमेरिका-ईरान जंग में 2 हफ्ते के सीजफायर के ऐलान के बाद क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) 15% सस्ता हुआ है। बुधवार को दाम करीब 15 डॉलर गिरकर 94.27 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह करीब 6 साल में एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट है। एक दिन पहले क्रूड ऑयल की कीमत 109.27 डॉलर प्रति बैरल थी। 28 फरवरी को जंग शुरू होने से पहले कच्चा तेल 73 डॉलर प्रति बैरल था। जंग के दौरान दाम बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गए थे। तब से पेट्रोल-डीजल के रेट बढ़ने की आशंका जताई जा रही थी। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, तेल सस्ता होने से अब यह आशंकाएं खत्म हो गई हैं। सीजफायर के चलते होर्मुज खुलने की उम्मीद सीजफायर से ग्लोबल मार्केट उछले, डॉलर गिरा युद्ध थमने की खबरों से ग्लोबल शेयर बाजारों में तेजी आई है। अमेरिका का SP 500 फ्यूचर्स 2% और यूरोपीय बाजार 5% तक चढ़े। भारत के सेंसेक्स और निफ्टी भी करीब 4% चढ़े हैं। निवेशकों का भरोसा बढ़ने से रूपया डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ है। RBI के मुताबिक, बुधवार के शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 41 पैसे मजबूत होकर 92.55 पर पहुंच गया है। कल यह 92.96 पर बंद हुआ था। जंग फिर शुरू हुई तो तेल के दाम दोबारा बढ़ेंगे एनालिस्ट्स का कहना है कि अभी जो राहत दिख रही है, वह ज्यादा समय तक नहीं रह सकती। आईजी के टोनी सिकामोर के अनुसार, यह एक अच्छी शुरुआत जरूर है, लेकिन अभी कई बातें साफ नहीं हैं। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर दो हफ्ते में पूरी तरह समझौता नहीं हुआ, तो कीमतें फिर से 100 डॉलर के ऊपर जा सकती हैं। कच्चा तेल सस्ता होने से भारत को क्या फायदे होंगे? कच्चा तेल भारत के लिए जरूरी है, क्योंकि हम करीब 85% तेल आयात करते हैं। तेल की कीमतें गिरने पर अर्थव्यवस्था को कई मोर्चों पर राहत मिलती है। 1. पेट्रोल-डीजल के रेट नहीं बढ़ेंगे: कच्चा तेल सस्ता होने पर IOC, BPCL, HPCL जैसी कंपनियों के तेल की कीमत बढ़ाने की आशंका कम हो जाएगी। इससे ट्रांसपोर्ट लागत घटती है और आम आदमी के बजट पर असर पड़ता है। 2. महंगाई पर असर: डीजल के रेट न बढ़ने से ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ेगी नहीं। इससे फल, सब्जियां, अनाज और अन्य रोजमर्रा के खाने-पीने के सामानों के दाम नहीं बढ़ेंगे। 3. CAD में सुधार: कच्चा तेल सस्ता होने से इंपोर्ट बिल घटता है। विदेशी मुद्रा भंडार बचता है और करंट अकाउंट डेफिसिट यानी CAD कम होता है। 4. रुपये को मजबूती: कच्चे तेल का बिल घटने से डॉलर की मांग कम होती है। इससे रुपया मजबूत होता है और आयात सस्ता होता है। 5. सब्सिडी बोझ कम: कच्चा तेल सस्ता होने से सरकार का सब्सिडी खर्च घटता है। बचा पैसा सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे सेक्टर में लगा सकती है। 6. कॉर्पोरेट प्रॉफिट: तेल सस्ता होने से लागत घटती है और मुनाफा बढ़ता है। इससे शेयर बाजार पर पॉजिटिव असर पड़ता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कच्चा तेल 10 डॉलर सस्ता होने पर करंट अकाउंट डेफिसिट में 9-10 बिलियन डॉलर की कमी और महंगाई में करीब 0.5% राहत मिल सकती है। होर्मुज प्रभावित होने से तेल महंगा हुआ था जंग के बाद ईरान ने होर्मुज रूट लगभग बंद कर दिया था। दुनिया का करीब 20% तेल-गैस इसी रास्ते से गुजरता है। इसके बंद होने से तेल, LPG, एल्युमीनियम, फर्टिलाइजर और प्लास्टिक महंगे हुए। ब्रिटेन-यूरोप में दवाओं और जरूरी चीजों की कमी का खतरा बढ़ा, क्योंकि शिपिंग खर्च कई गुना बढ़ गया था। मार्च में क्रूड ऑयल 60% महंगा हुआ था मार्च में कच्चे तेल में 60% उछाल आया था। यह 1990 के खाड़ी युद्ध के बाद एक महीने में सबसे बड़ी बढ़ोतरी थी। फरवरी अंत में 72.48 डॉलर से बढ़कर मार्च में 120 डॉलर पार पहुंच गया था। इससे पहले सितंबर 1990 में सद्दाम हुसैन के कुवैत पर हमले के समय तेल की कीमतें एक महीने में 46% बढ़ी थीं। भारत के कुल तेल आयात का 51% खाड़ी देशों से आता है भारत कच्चे तेल के लिए सबसे ज्यादा पश्चिम एशिया पर निर्भर है। FY2025-26 के पहले 10 महीनों में कुल आयात में 51% हिस्सा इसी क्षेत्र का था। कीमत बढ़ने से आयात बिल तेजी से बढ़ रहा था। ——————————– ये खबर भी पढ़ें… सेंसेक्स 3000 अंक चढ़कर 77,600 पर कारोबार कर रहा: निफ्टी भी 900 अंक ऊपर; ऑटो, रियल्टी और बैंकिंग शेयरों में सबसे ज्यादा खरीदारी अमेरिका और ईरान के बीच 2 हफ्ते के सीजफायर के ऐलान के बाद आज यानी बुधवार 8 अप्रैल को शेयर बाजार में तेजी है। सेंसेक्स 3000 अंक (3.95%) चढ़कर 77,600 पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी भी 900 अंक (3.80%) ऊपर है, ये 24,000 पर पहुंच गया है। आज ऑटो, रियल्टी और बैंकिंग शेयरों में ज्यादा खरीदारी है। निफ्टी का ऑटो और रियल्टी इंडेक्स करीब 5% ऊपर है। सरकारी बैंकों के इंडेक्स और मेटल इंडेक्स में भी 3% से ज्यादा तेजी है। FMCG और ऑयल एंड गैस इंडेक्स 2% से ज्यादा ऊपर कारोबार कर रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…