पश्चिम बंगाल में रोबोटिक भूचाल! हुमायूं कबीर का कथित स्टिंग वीडियो, टीएमसी बोली- ‘1000 करोड़ की बीजेपी से हुई डील’

पश्चिम बंगाल की सूची में हलचल मच गई है। युवा कांग्रेस (टीएमसी) ने हुमायूँ कबीर से एक कथित स्टिंग ऑपरेशन वीडियो जारी किया है। पार्टी का दावा है कि इस वीडियो में कबीर और बीजेपी के बड़े नेताओं के बीच करोड़ों रुपये की डील की बातचीत सामने आई है। टीएमसी ने इस मामले की पूरी जांच की मांग भी की है. स्टिंग वीडियो में क्या दावा?टीएमसी के मुताबिक, हुमायूं कबीर के जारी किए गए वीडियो में कथित तौर पर 1000 करोड़ रुपये की डील की बात कही जा रही है, जिसमें 300 करोड़ रुपये की अग्रिम प्रस्तुति का भी जिक्र किया गया है। किन नेताओं ने लिया नाम?पार्टी का आरोप है कि इस कथित घोटालेबाज में बीजेपी के कई बड़े नेताओं के नाम सामने आए हैं. इनमें मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, पश्चिम बंगाल के नेता शुभेंदु अधिकारी और भी शामिल हैं। टीएमसी की प्रेस कॉन्फ्रेंसइस मामले को लेकर टीएमसी नेता फिरहाद हकीम, अरूप बिस्वास और प्रशांत घोष ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसे ‘बड़ा खुलासा’ किया। उन्होंने कहा कि यह वीडियो बेहद गंभीर है और इससे बड़ी राजनीतिक गठजोड़ की साजिश का संकेत है। ईडी जांच की मांगटीएमसी ने इस मामले में पूरे की जांच निदेशालय निदेशालय (ईडी) से की मांग की है। पार्टी का कहना है कि बड़े पैमाने पर वित्तीय वित्तीय लेन-देन के सहयोगियों की जांच जरूरी है। उद्योगपति के वकील का हुमायूं कबीर ने दिया जवाब. उन्होंने कहा, ‘वो स्टिंग ऑपरेशन एआई से बनाया गया है। ये सब कुछ टीएमसी के संस्थापक पर हुआ है।’ कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा, ‘हुमायूँ कबीर कबीले के लिए काम कर रहे हैं? उनके पास इतने पैसे कहां से आए कि वे हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल कर रहे हैं? लोगों को अनाउंस कौन कर रहा है, लोग इस पर जरूर विचार करेंगे।’ चुनाव से पहले आर्टिकल घमासानटीएमसी ने इसे पश्चिम बंगाल चुनाव से जुड़ी साजिश बताया है और दावा किया है कि यह एक बड़ा राजनीतिक खेल है। इस खुलासे के बाद राज्य की राजनीति में तनाव और आरोप-प्रत्यारोप तेजी से हो गए हैं.
काला या लाला… गर्मियों में किस मटके का पानी होता है ज्यादा ठंडा? जानिए आपके सवाल का जवाब

X काला या लाला… गर्मियों में किस मटके का पानी होता है ज्यादा ठंडा? जानिए लाल मटका Vs काला मटका: भीषण गर्मी के बीच देसी मटकों की मांग तेजी से बढ़ गई है. ऐसे में लोग बाजार में काले और लाल मटकों को लेकर लोग कंफ्यूज हैं. सीधी के कुम्हार रोमी प्रजापति ने बताया कि गर्मी बढ़ने के साथ ही मटकों की डिमांड अचानक बढ़ जाती है. लोग खासतौर पर काले रंग के मटकों को ज्यादा पसंद करते हैं. ये मटके पूरी तरह हाथों से तैयार किए जाते हैं और इन्हें बनाने में सोन नदी की मिट्टी और पीली मिट्टी का उपयोग होता है. पारंपरिक चाक पर इन्हें आकार देने के बाद भट्टी में पकाया जाता है. इस प्रक्रिया के कारण मटके में हल्की झरझराहट रहती है, जिससे पानी धीरे-धीरे बाहर की ओर नमी छोड़ता है और प्राकृतिक रूप से ठंडा बना रहता है. वहीं इसके विपरीत लाल रंग के मटके ज्यादातर मशीनों से बनाए जाते हैं. इनमें काले मटकों जैसी झरझराहट कम होती है, इसलिए ये पानी को उतना ठंडा नहीं रख पाते. हालांकि आजकल कुछ लाल मटकों में भी झरने की क्षमता विकसित की जा रही है लेकिन वे काले मटकों जितने प्रभावी नहीं माने जाते.
Murena Forest Guard Murder | Tractor Attack; Supreme Court Takes Suo Motu Cognizance

वन रक्षक हरकेश गुर्जर की हत्या करने वाला ट्रैक्टर ड्राइवर विनोद कोरी अभी भी फरार है। मुरैना के अंबाह गेम रेंज में रेत से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली को रोकने की कोशिश कर रहे वन रक्षक हरकेश गुर्जर (33) की बुधवार सुबह कुचलकर हत्या कर दी गई। चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन रोकने गई वन विभाग की टीम पर हुए इस हमले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान . मृतक के साले गौरव गुर्जर ने बताया कि मेरी आंखों के सामने जीजा के सिर के चीथड़े उड़ गए। उन्होंने तड़प-तड़पकर दम तोड़ा। मैं कुछ नहीं कर सका। मेरी बहन मेरी आंखों के सामने विधवा हो गई। छोटे भांजे-भांजी के सिर से पिता का साया उठ गया। वहीं हरकेश गुर्जर के सहकर्मी और वारदात के प्रत्यक्षदर्शी संदीप गुर्जर ने बताया कि हम रोज की तरह पेट्रोलिंग पर थे। रानपुर तिराहे से ट्रैक्टर आता दिखा तो रेंज ऑफिसर ने उसे रुकवाने को कहा। हरकेश टीम में सबसे फुर्तीला था। वह तेजी से गाड़ी से उतरा और डंडा दिखाते हुए ट्रैक्टर को रोकना चाहा। हम सब गाड़ी से उतर पाते, इसके पहले ही ट्रैक्टर ड्राइवर विनोद कोरी ने हरकेश को टक्कर मार दी। हरकेश के सड़क पर गिरते ही ‘ये ले’ कहते हुए सिर से पहिया निकाल दिया। वारदात को रेंज ऑफिसर वीर कुमार तिर्की, वन रक्षक शत्रुघ्न सिंह, अवधेश कुशवाह, विनोद माहौर और हरकेश के साले गौरव के सामने अंजाम दिया गया। आंखों के सामने अपने दोस्त, सहकर्मी को तड़पकर दम तोड़ते देखकर सब दहशत में आ गए। आरोपी विनोद कोरी की तस्वीरें पेट्रोल पंप के सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई हैं। यहां रेत खाली करने के बाद वह भाग निकला। आरोपी ट्रैक्टर ड्राइवर अभी भी पुलिस की पकड़ से दूर वन रक्षक की हत्या करने के बाद आरोपी विनोद कोरी वारदात स्थल से एक किमी दूर शिवबैकुंठ पेट्रोल पंप पहुंचा। यहां कपड़े बदले और कर्मचारियों से कहा- पुलिस पीछे लगी है। इसके बाद ट्रॉली से रेत खाली कर 4 किमी दूर दिमनी थाने के सामने से निकल गया। फिर माता बसैया इलाके में ट्रैक्टर छोड़कर फरार हो गया। डीएसपी विजय भदौरिया ने बताया कि रात में भी कई ठिकानों पर दबिश दी गई, पर आरोपी गिरफ्त में नहीं आया है। वन रक्षक हरकेश गुर्जर को जिस ट्रैक्टर से कुचला गया, उसके मालिकों में दो लोगों के नाम सामने आए हैं। इनमें से एक का नाम पवन तोमर है, जो बीजेपी का दिमनी मंडल उपाध्यक्ष हैं। दूसरे का नाम सोनू चौहान है, जो बीजेपी युवा मोर्चा में मंडल का मंत्री है। सहकर्मी बोला- सरकार ने डंडा देकर मौत के सामने भेज दिया संदीप ने कहा- सरकार ने हमारे हथियार भी छीन लिए हैं। हमको डंडा देकर मौत के सामने भेज दिया है। सिर्फ डंडे से हत्यारे माफिया का सामना क्या कोई कर सकता है? कार्रवाई करो तो मरो, नहीं करो तो सरकार का ऊपर से डंडा पड़ता है। कल अगर हथियार होता तो मजाल थी कि वह हरकेश पर ट्रैक्टर चढ़ा जाता। वहीं, उसे मार गिराते। अपनी सुरक्षा करने का तो सभी को अधिकार है। हम 5 साल से निहत्थे हैं। डंडा लेकर ड्यूटी कर रहे हैं। हमारी रेंज में 18 घाट हैं, जो दिमनी से भिंड तक हैं। हमारी 12 बोर की 5 राइफल नगरा थाने में जमा हैं। साले ने कहा- मेरी आंखों के सामने जीजा ने दम तोड़ा हरकेश के साले गौरव गुर्जर इस गश्त में उनके साथ थे। गौरव ने बताया कि वारदात के एक दिन पहले मंगलवार को जीजा हरकेश से मिलने अंबाह गेम रेंज कार्यालय पहुंचा था। रात में वहीं रुक गया। बुधवार सुबह जीजा ने बताया कि अवैध रेत पर कार्रवाई करने जाना है। मैंने कहा कि मैं भी मुरैना निकल जाऊंगा। मैं अपनी गाड़ी से जांच दल के पीछे ही चल रहा था। रानपुर तिराहे के पास वीरपुर कुठियाना तरफ से ट्रैक्टर-ट्रॉली आती दिखाई दी। रोकने के निर्देश मिले तो जीजा हरकेश गाड़ी से उतरे और ड्र्र्राइवर को ट्रैक्टर रोकने का इशारा किया। वह नहीं रुका तो उन्होंने अपने पास का डंडा ड्राइवर को दिखाया। ड्राइवर ने गाड़ी पहले धीमी की, फिर तेजी से जीजा को टक्कर मार दी। जनकपुर गांव में परिजन और रिश्तेदारों ने वन रक्षक हरकेश गुर्जर का अंतिम संस्कार किया। ऐसी घटनाओं पर हलफनामा दाखिल करने के निर्देश अवैध रेत परिवहन को रोकने की कोशिश के दौरान वन रक्षक की हत्या के इस मामले का सुप्रीम कोर्ट में तात्कालिक उल्लेख (अर्जेंट मेंशनिंग) किया गया। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने स्वत: संज्ञान लिया। यह मामला उस सुओ मोटू याचिका से जुड़ा है, जो क्षेत्र में अवैध रेत खनन पर लगी है, जिसमें एमिकस क्यूरी (न्यायालय मित्र) द्वारा आवेदन दायर किया गया था। सुनवाई के दौरान गुरुवार को न्यायमूर्ति मेहता ने कहा कि इस क्षेत्र में कुछ “अत्यंत गंभीर” घटनाएं सामने आई हैं। पीठ ने मामले का उल्लेख करने वाली अधिवक्ता एओआर रूपाली सैमुअल (जो एमिकस में से एक हैं), से कहा कि वे अन्य घटनाओं का विवरण रिकॉर्ड पर लाने के लिए हलफनामा दाखिल करें और मध्य प्रदेश की ओर से पेश होने वाले वकील को अग्रिम सूचना दें। कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़, एसपी समीर सौरभ और डीएफओ हरिश्चंद्र बघेल हरकेश के गांव पहुंचे। यहां उनके पिता कलेक्टर से लिपटकर रो पड़े। 2016 में लगी थी नौकरी, 2025 में मुरैना ट्रांसफर हुआ हरकेश के दोस्त प्रताप गुर्जर ने कहा- वह अच्छा एथलीट था। लोकल से लेकर नेशनल तक 800 और 1500 मीटर दौड़ में बढ़िया प्रदर्शन किया था। नेशनल चैंपियन रहा है। कई अवॉर्ड भी जीते। साल 2016 में वन रक्षक के पद पर सिलेक्ट हुआ था। 26 जून 2016 को पन्ना टाइगर रिजर्व में उसे ज्वाइनिंग मिली थी। 7 अगस्त 2025 को उसका ट्रांसफर मुरैना वन विभाग के गेम रेंज सबलगढ़ के घाट वरोठा में हो गया था। बाद में इसमें संशोधन हुआ और उसे गेम रेंज अंबाह के घाट सांकरी भेज दिया गया। हरकेश के परिवार में पिता रामनिवास गुर्जर, पत्नी लवली, 4 साल की बेटी तन्वी और 2 साल का बेटा तन्मय हैं। बड़ा भाई ऋषिकेश गुर्जर दतिया की इंदरगढ़ तहसील में रीडर है। हरकेश गुर्जर की कुछ महीने पहले ही मुरैना के अंबाह में पोस्टिंग हुई थी। 2021 में रायफलें जमा कराईं, तब
विवाहिता ने एसिड पिया, दस दिन बाद मौत:पारिवारिक विवाद के बाद बैतूल, भोपाल, नागपुर में चला इलाज

बैतूल के टिकारी इलाके में एक विवाहिता की एसिड पीने के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई। अंजली (30) ने 29 मार्च को घर में किसी बात से नाराज होकर एसिड पी लिया था। उसे बैतूल, भोपाल और नागपुर के अस्पतालों में करीब दस दिनों तक उपचार दिया गया, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। घटना के बाद अंजली की हालत बिगड़ने पर परिजनों ने उसे तत्काल एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। वहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे भोपाल रेफर किया गया। भोपाल में भी उसकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ, जिसके बाद परिजन उसे नागपुर ले गए। नागपुर के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान अंजली की मौत हो गई। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस के अनुसार, अंजली की शादी लगभग दो साल पहले टिकारी निवासी रमाकांत सोलंकी (56) से हुई थी, जो एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं। यह दोनों की दूसरी शादी थी। रमाकांत की पहली पत्नी से दो बच्चे हैं, जिनमें एक बेटी की शादी हो चुकी है। अंजली का भी पहले पति से तलाक हो चुका था और उसका एक बेटा है। इस मामले में मर्ग कायम कर लिया गया है। चूंकि यह नवविवाहिता से जुड़ा मामला है, इसलिए तहसीलदार द्वारा भी बयान दर्ज कर जांच की गई है। अस्पताल पुलिस चौकी ने मर्ग डायरी तैयार कर कोतवाली पुलिस को भेज दी है, जहां आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
मोदी की हत्या की साजिश, बिहार से 3 गिरफ्तार:अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA से किया था संपर्क , हमले के लिए पैसों की डिमांड की थी

प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से जुड़ी संवेदनशील जानकारी लीक करने और इसके बदले विदेशों से पैसे मांगने के मामले में बक्सर पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। डुमरांव अनुमंडल के सिमरी थाना क्षेत्र स्थित आशा पड़री गांव में बुधवार देर रात छापेमारी कर एक युवक समेत 3 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने विदेश में बैठे संदिग्ध लोगों से संपर्क कर न केवल गोपनीय जानकारी साझा करने की बात की, बल्कि 22 दिनों के अंदर प्रधानमंत्री पर हमले और सुरक्षा में सेंध लगाने की साजिश भी रची थी। SP के निर्देश पर बनी टीम, देर रात छापेमारी मामले की सूचना मिलते ही बक्सर SP शुभम आर्य के निर्देश पर विशेष टीम का गठन किया गया। टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आशा पड़री गांव में छापेमारी की और तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। SP ने बताया कि अमन तिवारीने यूएएस की एजेंसी CIA को ईमेल कर संपर्क किया था। ईमेल के जरिए पैसे की डिमांड की। इसके बदले हम प्रधानमंत्री पर जानलेवा हमला कर सकते है। इस काम को पूरा करने के लिए 22 दिनों का वक्त मांगा था। विदेशी संपर्क और पैसों की डिमांड पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने अमेरिका (USA) की एजेंसी CIA से जुड़े लोगों से संपर्क साधा था। आरोप है कि उन्होंने प्रधानमंत्री से जुड़े मामलों में सुरक्षा में सेंध लगाने और हमले की योजना के एवज में पैसे की मांग की थी। हालांकि कितनी रकम मांगी गई थी, इस पर पुलिस ने कुछ भी स्पष्ट करने से इनकार किया है। SP शुभम आर्य ने कहा कि मामला अत्यंत गोपनीय है और जांच पूरी होने के बाद ही इसका पूरा खुलासा किया जाएगा। गुप्त स्थान पर पूछताछ, कई खुलासों की उम्मीद सूत्रों के मुताबिक, मुख्य आरोपी की पहचान अमन कुमार के रूप में हुई है। फिलहाल सभी आरोपियों को गुप्त स्थान पर रखकर गहन पूछताछ की जा रही है। पुलिस का मानना है कि पूछताछ के दौरान इस पूरे नेटवर्क और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन से जुड़े कई अहम खुलासे हो सकते हैं। पहले भी साइबर केस में हो चुकी है गिरफ्तारी प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, अमन कुमार का आपराधिक इतिहास भी रहा है। साल 2022 में कोलकाता एयरपोर्ट को हैक करने की धमकी देने के मामले में उसे गिरफ्तार किया गया था। उस समय कोलकाता और बक्सर पुलिस की संयुक्त टीम ने कार्रवाई की थी। इस बार मामला प्रधानमंत्री कार्यालय से जुड़ा होने के कारण इसकी गंभीरता कई गुना बढ़ गई है। लैपटॉप समेत कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के घर से लैपटॉप सहित कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए हैं। इन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि इन उपकरणों से डिजिटल सबूत मिलेंगे, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपी किस स्तर तक सक्रिय थे और किन-किन लोगों से जुड़े थे। पिता बोले- हमें कुछ नहीं पता अमन के पिता गणेश तिवारी ने बताया कि वे उस समय पूजा में गए हुए थे। घर लौटने पर उन्हें घटना की जानकारी मिली। उन्होंने कहा कि उन्हें अब तक यह नहीं पता कि उनका बेटा किस मामले में पकड़ा गया है और क्या आरोप हैं। कमरा सील, गांव में दहशत का माहौल घटना के बाद प्रशासन ने उस कमरे को सील कर दिया है, जहां अमन कुमार रहता था। बताया जा रहा है कि वह गांव में रहकर साइबर कैफे चलाता था। गिरफ्तारी के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि अमन सामान्य जीवन जीता था, ऐसे में उस पर लगे इतने गंभीर आरोपों ने सभी को हैरान कर दिया है। बड़ा सवाल: गांव से PMO तक कैसे पहुंची साजिश? इस घटना ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे अहम सवाल यह है कि एक गांव में साइबर कैफे चलाने वाला युवक देश के सबसे संवेदनशील कार्यालय से जुड़ी साजिश में कैसे शामिल हो गया। फिलहाल बक्सर पुलिस हर एंगल से मामले की जांच कर रही है। आने वाले दिनों में इस हाई-प्रोफाइल केस में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना है।
अमिताभ बच्चन बोले- खाली हाथ आए थे, ऐसे ही जाएंगे:बिग बी ने जिंदगी के ‘क्यों’ और ‘कैसे’ पर किया चिंतन, खुद से सवाल-जवाब किए

एक्टर अमिताभ बच्चन ने हाल ही में जीवन और उसके अर्थ को लेकर एक नोट शेयर किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने एक पूरा दिन शांति में रहकर खुद से सवाल-जवाब करते हुए बिताया। अमिताभ ने अपने ब्लॉग में लिखा कि दिनभर उन्होंने अपने आसपास और खुद के साथ समय बिताया, जवाब खोजने की कोशिश की, लेकिन ज्यादातर सवालों के साफ जवाब नहीं मिले। उन्होंने लिखा कि जीवन के ‘क्यों’ और ‘कैसे’ को समझने की कोशिश हर व्यक्ति करता है, लेकिन इसके ठोस जवाब मिलना मुश्किल होता है। उन्होंने यह भी कहा कि इंसान खाली हाथ आता है और खाली हाथ ही जाता है। ब्लॉग के आखिर में उन्होंने यह भी लिखा, आप सबसे सच्चे रूप को ढूंढते रहते हैं, लेकिन यह तलाश कभी खत्म नहीं होती क्योंकि असली जवाब आसानी से मिलता ही नहीं… और शायद ऐसा ही होना चाहिए। किसी भी सवाल का एक तय जवाब नहीं होता। हर सोच के कई रास्ते होते हैं, और हर रास्ता एक ही मंजिल तक नहीं पहुंचता। और इसलिए… मैं सोचता रहता हूं… काम न करने पर होती है बेचैनी: अमिताभ इससे पहले 6 अप्रैल को भी अमिताभ ने लिखा था कि जब वह रोज काम नहीं करते, तो उन्हें असहज महसूस होता है। उन्होंने कहा कि बिना काम के दिन उन्हें परेशान और असंतुलित लगते हैं। उनके अनुसार, काम न करने से उनकी दिनचर्या प्रभावित होती है, जिससे बेचैनी हो सकती है, अगर इसे समझा और संभाला न जाए। अमिताभ बच्चन के वर्क फ्रंट की बात करें तो उन्हें आखिरी बार फिल्म कल्कि 2898 AD में देखा गया था, जिसे नाग अश्विन ने डायरेक्ट किया था। वहीं, अमिताभ ने इसके दूसरे पार्ट की भी शूटिंग शुरू कर दी है और फिल्म के सेट से बिहाइंड द सीन (BTS) तस्वीरें शेयर की थीं। साथ ही उन्होंने करीब 40 साल बाद कमल हासन के साथ दोबारा काम करने को लेकर उत्साह जताया था।
अमिताभ बच्चन बोले- खाली हाथ आए थे, ऐसे ही जाएंगे:बिग बी ने जिंदगी के ‘क्यों’ और ‘कैसे’ पर किया चिंतन, खुद से सवाल-जवाब किए

एक्टर अमिताभ बच्चन ने हाल ही में जीवन और उसके अर्थ को लेकर एक नोट शेयर किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने एक पूरा दिन शांति में रहकर खुद से सवाल-जवाब करते हुए बिताया। अमिताभ ने अपने ब्लॉग में लिखा कि दिनभर उन्होंने अपने आसपास और खुद के साथ समय बिताया, जवाब खोजने की कोशिश की, लेकिन ज्यादातर सवालों के साफ जवाब नहीं मिले। उन्होंने लिखा कि जीवन के ‘क्यों’ और ‘कैसे’ को समझने की कोशिश हर व्यक्ति करता है, लेकिन इसके ठोस जवाब मिलना मुश्किल होता है। उन्होंने यह भी कहा कि इंसान खाली हाथ आता है और खाली हाथ ही जाता है। ब्लॉग के आखिर में उन्होंने यह भी लिखा, आप सबसे सच्चे रूप को ढूंढते रहते हैं, लेकिन यह तलाश कभी खत्म नहीं होती क्योंकि असली जवाब आसानी से मिलता ही नहीं… और शायद ऐसा ही होना चाहिए। किसी भी सवाल का एक तय जवाब नहीं होता। हर सोच के कई रास्ते होते हैं, और हर रास्ता एक ही मंजिल तक नहीं पहुंचता। और इसलिए… मैं सोचता रहता हूं… काम न करने पर होती है बेचैनी: अमिताभ इससे पहले 6 अप्रैल को भी अमिताभ ने लिखा था कि जब वह रोज काम नहीं करते, तो उन्हें असहज महसूस होता है। उन्होंने कहा कि बिना काम के दिन उन्हें परेशान और असंतुलित लगते हैं। उनके अनुसार, काम न करने से उनकी दिनचर्या प्रभावित होती है, जिससे बेचैनी हो सकती है, अगर इसे समझा और संभाला न जाए। अमिताभ बच्चन के वर्क फ्रंट की बात करें तो उन्हें आखिरी बार फिल्म कल्कि 2898 AD में देखा गया था, जिसे नाग अश्विन ने डायरेक्ट किया था। वहीं, अमिताभ ने इसके दूसरे पार्ट की भी शूटिंग शुरू कर दी है और फिल्म के सेट से बिहाइंड द सीन (BTS) तस्वीरें शेयर की थीं। साथ ही उन्होंने करीब 40 साल बाद कमल हासन के साथ दोबारा काम करने को लेकर उत्साह जताया था।
केरल चुनाव 2026: त्रिशूर में वोट डालने के लिए लगी लाइन, 62 साल से चल रही वोटिंग, हुई मौत

केरल में 140 विधानसभा पर मतदान जारी है। इस बीच केरल के त्रिशूर जिले के वानियामपारा से मतदान के दिन एक अनोखी घटना सामने आई है। यहां एक 62 वर्षीय बुजुर्ग व्यक्ति के वोट के तुरंत बाद गिरा दिया गया और बाद में उनकी मृत्यु हो गई। पुलिस के मुताबिक, मृतक की पहचान विनोद के रूप में हुई है, जो वानियामपारा के पास रामनचिरा के रहने वाले थे। वे गुरुवार की सुबह वानियामपारा स्थित ईकेईएम यूपी स्कूल के लिए अपना वोट वोट डालने गए। जानकारी के अनुसार, विनोदन करीब एक घंटे से अधिक समय तक कतार में रहे। इसके बाद उन्होंने अपनी फ्रेंचाइजी का प्रयोग किया। लेकिन वोटिंग सेंटर से बाहर सुपरमार्केट का समय सुबह करीब 10 बजे 45 मिनट पर वे अचानक से आकाशवाणी गिर पड़े। मस्जिद पर मौजूद लोगों ने तुरंत उनकी मदद करने की कोशिश की और उन्हें कुर्सी पर बिठा दिया, लेकिन उनका नतीजा लगातार खराब हुआ। कुछ ही देर में एंटरप्राइज़ मशीनरी पर ऑपरेशंस और उन्हें सरकारी अस्पताल ले जाया गया। विद्वानों ने मृत घोषित कर दिया अस्पताल के वकीलों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद इलाके में शोक का माहौल है। पुलिस ने बताया कि मामले में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी और घटना की जांच शुरू कर दी गई है, ताकि मृतकों के सही तथ्यों का पता लगाया जा सके। यह घटना मतदान के सामने दिन आई उन पर्वत को भी छोड़ देती है, जहां लंबी दूरी और शारीरिक परेशानी के लिए कुछ लोगों को जोखिम बन सकता है। केरल में चुनावी मुकाबला काफी दिलचस्प है केरल विधानसभा चुनाव में इस बार मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है. राज्य में कुल 883 अभ्यर्थी मैदान में हैं, यानी हर सीट पर औसत छह से सात अभ्यर्थी अपनी-अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इससे साफ है कि चुनाव में मुकाबला काफी बढ़ गया है। हालाँकि कई प्रारंभिक स्थिति और भी जटिल हो गई है, क्योंकि बागी और प्रतियोगी प्रतियोगी भी बड़ी संख्या में चुनावी लड़ाई में हैं। वास्तविक कारणों से कई इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा बहुकोणीय हो गई है, जहां नतीजों का आकलन करना आसान नहीं है। कंपनी की बात करें तो राज्य में करीब 27 लाख वोटर्स हैं, जो 30,000 से ज्यादा वोटिंग पर अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे. चुनाव आयोग ने मतदान के लिए इतने बड़े स्तर पर व्यापक तैयारी की है, ताकि प्रक्रिया पूरी तरह से संभव हो सके। ये भी पढ़ें: विधानसभा चुनाव 2026 लाइव: केरल में कांग्रेस ने किया जीत का दावा, सीएम कौन होगा इस पर दिया बड़ा बयान (टैग्सटूट्रांसलेट)केरल विधानसभा चुनाव(टी)केरल विधानसभा चुनाव 2026(टी)केरल चुनाव 2026(टी)केरल चुनाव समाचार(टी)त्रिशूर घटना(टी)वोट डालने के बाद मौत(टी)विनोदन की मौत केरल(टी)चुनाव समाचार हिंदी(टी)मतदान के दिन की घटना(टी)केरल विधानसभा चुनाव(टी)केरल विधानसभा चुनाव 2026(टी)केरल चुनाव 2026(टी)केरल चुनाव समाचार
गर्मियों में चाय पीने का सेहत पर क्या होता है असर? जानिये इसके फायदे और नुकसान

गर्मियों में चाय पीना भारतीय आदतों में शामिल है. चाहे तेज़ धूप हो या लू चल रही हो, बहुत से लोग बिना चाय के दिन की शुरुआत अधूरी ही मानते हैं. बेसक पसीना निकल रहा हो, लेकिन चाय पीना कई लोगों के लिये बहुत ही जरूरी होता है. लेकिन असली सवाल यह है कि गर्मियों में चाय पीना फायदेमंद है या नुकसानदायक? आइए इसके फायदे और नुकसान दोनों को विस्तार से समझते हैं. गर्मियों में चाय पीने के फायदे 1. थकान और सुस्ती दूर करती हैचाय में मौजूद कैफीन दिमाग को अलर्ट करता है. गर्मियों में अक्सर सुस्ती और थकान महसूस होती है, ऐसे में एक कप चाय ताजगी और ऊर्जा देने में बहुत मदद करती है. 2. पाचन को बेहतर बनाती हैहल्की मात्रा में चाय पीने से पाचन क्रिया बेहतर हो सकती है. जिन लोगों को भारी भोजन के बाद गैस या अपच की समस्या होती है, उनके लिए चाय राहत दे सकती है. 3. तनाव और सिरदर्द में राहतगर्मी के मौसम में चिड़चिड़ापन और सिरदर्द आम समस्या है. चाय पीने से दिमाग को सुकून मिलता है और मूड बेहतर होता है. 4. गर्म पेय शरीर को ठंडा महसूस करवा सकता हैयह सुनने में अजीब लगे, लेकिन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि सीमित मात्रा में गर्म चाय पीने से शरीर पसीना छोड़ता है, जिससे नेचुरल कूलिंग होती है. गर्मियों में चाय पीने के नुकसान 1. डिहाइड्रेशन का खतराचाय की तासीर मूत्रवर्धक (diuretic) होती है. ज्यादा चाय पीने से शरीर में पानी की कमी हो सकती है, जो गर्मियों में खतरनाक साबित हो सकती है. 2. एसिडिटी और गैस की समस्याखाली पेट या अधिक मात्रा में चाय लेने से पेट में जलन, साथ ही एसिडिटी और गैस की शिकायत बढ़ जाती है. 3. लू लगने का जोखिमतेज धूप में बाहर निकलने से पहले या बहुत गर्म समय पर चाय पीने से शरीर का तापमान अचानक से और भी बढ़ सकता है, जिससे लू लगने का खतरा भी बढ़ जाता है. 4. नींद और बेचैनी की परेशानीगर्मियों के मौसम में रात की नींद पहले से ही प्रभावित होती है. शाम या रात में चाय पीने से अनिद्रा, बेचैनी और दिल की धड़कन और भी तेज़ होने की समस्या हो सकती है. कितना और कैसे पिएं चाय? दिन में 1–2 कप से ज्यादा न पिएंखाली पेट चाय पीने से सावधान रहेंआपके लिये दूध वाली चाय की जगह ग्रीन टी या हर्बल टी एक बेहतर विकल्प हो सकती हैचाय के साथ-साथ पानी और मौसमी फल ज़रूर लेते रहें गर्मियों में चाय पूरी तरह नुकसानदायक भी नहीं होती है, लेकिन अधिक मात्रा में चाय पीना सेहत के लिए ज्यादा सही भी नहीं हैं. संतुलित मात्रा और सही समय पर ली गई चाय फायदे दे सकती है, जबकि लापरवाही नुकसान पहुंचा सकती है. इसलिए गर्मी के मौसम में चाय का आनंद समझदारी से लें.
क्लॉड मिथोस मॉडल; साइबर पैमाने पर 100% स्कोर:एंथ्रोपिक ने ताकतवर एआई बनाया पर लॉन्च रोका; वजह-गलत हाथों में आने से साइबर तबाही का डर

एआई दिग्गज कंपनी एंथ्रोपिक ने बुधवार को दुनिया का सबसे ताकतवर मॉडल ‘क्लॉड मिथोस’ पेश किया, लेकिन इसे आम यूजर के लिए लॉन्च नहीं किया गया। कंपनी का कहना है कि यह मॉडल खुद जिम्मेदारी से काम करता है, लेकिन इसकी ताकत गलत हाथों में बेहद खतरनाक हो सकती है। बैंक, अस्पताल, बिजली ग्रिड और सरकारी सिस्टम सब इसके निशाने पर आ सकते हैं। एंथ्रोपिक ने इसे फिलहाल प्रोजेक्ट ग्लासविंग के तहत अमेजन, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट जैसी 12 बड़ी कंपनियों और 40 से अधिक संस्थाओं को दिया है, ताकि वे पहले अपने सिस्टम की सुरक्षा दुरुस्त कर सकें। प्रोजेक्ट ग्लासविंग नाम एक पारदर्शी पंखों वाली तितली से लिया गया है। यह खुले में होने पर भी नजर नहीं आती। ठीक वैसे ही जैसे सॉफ्टवेयर की खामियां छुपी रहती हैं। एंथ्रोपिक ने 850 करोड़ रु. के क्रेडिट व ओपन सोर्स संस्थाओं को 34 करोड़ रु. की मदद का वादा किया है। 90 दिनों बाद कंपनी बताएगी कि मॉडल ने कितनी खामियां पकड़ी। ऐतिहासिक – 50 लाख टेस्ट में नहीं पकड़ी खामी, इसने पहली बार में ढूंढ़ी पायलट में मॉडल ने कई ऑपरेटिंग सिस्टम और वेब ब्राउजर में हजारों गंभीर साइबर खामियां खोजीं। सबसे सुरक्षित ऑपरेटिंग सिस्टम ओपनबीएसडी में 27 साल पुरानी खामी ढूंढी। वीडियो सॉफ्टवेयर एफएफएमपेग में 16 साल पुरानी खामी जो 50 लाख बार स्कैन में भी नहीं मिली। इसने पहली बार में पकड़ा। लिनक्स कर्नेल में कई खामियां जोड़कर पूरे सिस्टम का नियंत्रण हासिल करने का रास्ता भी इसी मॉडल ने दिखाया। बेंचमार्क – साइबर परीक्षण में 100%, कोडिंग में 93.9% स्कोर साइबर सुरक्षा के सबसे कठिन परीक्षणों में इस मॉडल ने शत-प्रतिशत सफलता हासिल की। कोडिंग बेंचमार्क में 93.9% जबकि पिछले मॉडल का स्कोर 80.8% था। साइबरजिम परीक्षण में 83.1%, पिछले मॉडल का 66.6% स्कोर था। बता दें कि इस मॉडल के लॉन्च के साथ एंथ्रोपिक की सालाना आय भी तीन गुना से अधिक बढ़कर करीब 2.5 लाख करोड़ रुपए हो गई है। सीईओ अमोडेई बोले- मिथोस मॉडल से खतरा बहुत हमने मिथोस को साइबर सुरक्षा के लिए नहीं बल्कि कोडिंग के लिए बनाया था। लेकिन कोडिंग की ताकत का साइड इफेक्ट यह निकला कि यह साइबर हमलों में भी उतना ही माहिर हो गया। यदि यह सही हाथों में रहा तो यह तकनीक पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित इंटरनेट और दुनिया बना सकती है। लेकिन अगर गलत हुआ तो खतरा बहुत है।’









