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मिर्गी आने से पहले कर लेगी पता! IIT कानपुर ने बना डाली ऐसी डिवाइस, जेब में रखकर कहीं भी घूमिए

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IIT Kanpur News : ये डिवाइस दिमाग की हर गतिविधि पर नजर रखेगी और किसी भी गड़बड़ी के संकेत पहले ही दे देगी. इसकी मदद से ब्रेन स्ट्रोक और मिर्गी के मरीजों की जान बचाना आसान हो जाएगा. इसे खासतौर पर ग्रामीण इलाकों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है, जहां बड़े अस्पतालों की सुविधा आसानी से नहीं मिलती. इस डिवाइस का लैब टेस्ट सफल रहा है और अब इसे क्लिनिकल ट्रायल के लिए भेजा गया है.

कानपुर. अब ब्रेन से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा पहले ही पहचाना जा सकेगा. इसकी मदद से ब्रेन स्ट्रोक और मिर्गी के मरीजों की जान बचाना आसान हो जाएगा. आईआईटी कानपुर में तैयार की गई एक नई “प्वाइंट ऑफ केयर” डिवाइस दिमाग की हर गतिविधि पर नजर रखेगी और किसी भी गड़बड़ी के संकेत पहले ही दे देगी. यह डिवाइस आईआईटी कानपुर के इंक्यूबेशन एंड इनोवेशन सेंटर में काम कर रहे स्टार्टअप मेंटीव हेल्थ प्राइवेट लिमिटेड ने तैयार की है. स्टार्टअप के सीईओ हर्ष अरोड़ा के अनुसार, इस तकनीक का मकसद इलाज को अस्पतालों तक सीमित न रखकर सीधे मरीज तक पहुंचाना है, खासकर गांवों में.

कैसे करेगी काम

यह डिवाइस दिमाग की गतिविधियों को लगातार मॉनिटर करती है. इसमें आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) का इस्तेमाल किया गया है, जिससे यह डेटा को समझकर संभावित खतरे का अंदाजा लगा सकती है. अगर मस्तिष्क में किसी तरह की असामान्य गतिविधि शुरू होती है, तो यह डिवाइस पहले ही अलर्ट दे देगी. इससे डॉक्टर समय रहते इलाज शुरू कर सकेंगे. यह डिवाइस मिर्गी के दौरे आने से पहले भी संकेत दे सकती है, जो मरीजों के लिए राहत भरी बात है. हर्ष अरोड़ा बताते हैं कि डिवाइस का लैब टेस्ट सफल रहा है और अब इसे क्लिनिकल ट्रायल के लिए भेजा गया है. आईआईटी कानपुर की लैब में इसकी टेस्टिंग अभी भी जारी है.

पॉकेट में फिट

इस डिवाइस की सबसे बड़ी खासियत इसका छोटा और पोर्टेबल होना है. यह पॉकेट साइज की है और पूरी तरह से चार्जेबल है, यानी मरीज इसे कहीं भी आसानी से साथ रख सकता है. हर्ष के मुताबिक, उनकी कंपनी ऐसी डिवाइसेस पर काम कर रही है जिन्हें पहनना और इस्तेमाल करना आसान हो. यही वजह है कि इसे खासतौर पर ग्रामीण इलाकों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है, जहां बड़े अस्पतालों की सुविधा आसानी से नहीं मिलती.

पूरी तरह स्वदेशी

इस डिवाइस को पूरी तरह भारत में तैयार किया गया है और इसकी कीमत भी विदेशी डिवाइसेस के मुकाबले काफी कम रखी जाएगी. हर्ष अरोड़ा का कहना है कि यह डिवाइस आधे से भी कम कीमत में उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसका फायदा उठा सकें. इस प्रोजेक्ट को आईआईटी कानपुर और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय से फंडिंग भी मिली है, जिससे इसे आगे और बेहतर बनाने का काम चल रहा है.

उम्मीद की नई किरण

ब्रेन से जुड़ी बीमारियां अक्सर अचानक और खतरनाक होती हैं, लेकिन यह डिवाइस समय से पहले चेतावनी देकर मरीजों की जिंदगी बचाने में बड़ी भूमिका निभा सकती है.खा सकर गांवों में रहने वाले मरीजों के लिए यह तकनीक किसी वरदान से कम नहीं.

About the Author

Priyanshu Gupta

Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें

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कानपुर. अब ब्रेन से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा पहले ही पहचाना जा सकेगा. इसकी मदद से ब्रेन स्ट्रोक और मिर्गी के मरीजों की जान बचाना आसान हो जाएगा. आईआईटी कानपुर में तैयार की गई एक नई “प्वाइंट ऑफ केयर” डिवाइस दिमाग की हर गतिविधि पर नजर रखेगी और किसी भी गड़बड़ी के संकेत पहले ही दे देगी. यह डिवाइस आईआईटी कानपुर के इंक्यूबेशन एंड इनोवेशन सेंटर में काम कर रहे स्टार्टअप मेंटीव हेल्थ प्राइवेट लिमिटेड ने तैयार की है. स्टार्टअप के सीईओ हर्ष अरोड़ा के अनुसार, इस तकनीक का मकसद इलाज को अस्पतालों तक सीमित न रखकर सीधे मरीज तक पहुंचाना है, खासकर गांवों में.

कैसे करेगी काम

यह डिवाइस दिमाग की गतिविधियों को लगातार मॉनिटर करती है. इसमें आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) का इस्तेमाल किया गया है, जिससे यह डेटा को समझकर संभावित खतरे का अंदाजा लगा सकती है. अगर मस्तिष्क में किसी तरह की असामान्य गतिविधि शुरू होती है, तो यह डिवाइस पहले ही अलर्ट दे देगी. इससे डॉक्टर समय रहते इलाज शुरू कर सकेंगे. यह डिवाइस मिर्गी के दौरे आने से पहले भी संकेत दे सकती है, जो मरीजों के लिए राहत भरी बात है. हर्ष अरोड़ा बताते हैं कि डिवाइस का लैब टेस्ट सफल रहा है और अब इसे क्लिनिकल ट्रायल के लिए भेजा गया है. आईआईटी कानपुर की लैब में इसकी टेस्टिंग अभी भी जारी है.

पॉकेट में फिट

इस डिवाइस की सबसे बड़ी खासियत इसका छोटा और पोर्टेबल होना है. यह पॉकेट साइज की है और पूरी तरह से चार्जेबल है, यानी मरीज इसे कहीं भी आसानी से साथ रख सकता है. हर्ष के मुताबिक, उनकी कंपनी ऐसी डिवाइसेस पर काम कर रही है जिन्हें पहनना और इस्तेमाल करना आसान हो. यही वजह है कि इसे खासतौर पर ग्रामीण इलाकों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है, जहां बड़े अस्पतालों की सुविधा आसानी से नहीं मिलती.

पूरी तरह स्वदेशी

इस डिवाइस को पूरी तरह भारत में तैयार किया गया है और इसकी कीमत भी विदेशी डिवाइसेस के मुकाबले काफी कम रखी जाएगी. हर्ष अरोड़ा का कहना है कि यह डिवाइस आधे से भी कम कीमत में उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसका फायदा उठा सकें. इस प्रोजेक्ट को आईआईटी कानपुर और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय से फंडिंग भी मिली है, जिससे इसे आगे और बेहतर बनाने का काम चल रहा है.

उम्मीद की नई किरण

ब्रेन से जुड़ी बीमारियां अक्सर अचानक और खतरनाक होती हैं, लेकिन यह डिवाइस समय से पहले चेतावनी देकर मरीजों की जिंदगी बचाने में बड़ी भूमिका निभा सकती है.खा सकर गांवों में रहने वाले मरीजों के लिए यह तकनीक किसी वरदान से कम नहीं.

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