Thursday, 09 Jul 2026 | 03:11 PM

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Nabha Jail Orders Punjab Police to Find Former DSP in Khaira Murder Case

Nabha Jail Orders Punjab Police to Find Former DSP in Khaira Murder Case

रवनीत बिट्‌टू ने ये फोटो सोशल मीडिया पर जारी की हैं।

पंजाबी सिंगर और एक्टर दिलजीत दोसांझ की फिल्म सतलुज विवाद के बीच केंद्रीय राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्‌टू ने आतंकियों के फोटो जारी किए हैं। इस पोस्ट में उन्होंने बताया है कि ये 1990 के दशक के आतंकी हैं, जो पंजाब की गलियों में घूमते थे। पोस्ट में उन्हों

.

इधर, सतलुज विवाद हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। मोहाली के व्यक्ति सरवन सिंह ने याचिका लगाकर फिल्म को OTT प्लेटफॉर्म पर वापस लाने की मांग की है। इसी बीच मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के कत्ल का मामला भी गरमा गया है। अब नाभा ओपन एग्रीकल्चर जेल प्रशासन ने होशियारपुर पुलिस को पत्र लिखकर इस मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे दोषी पूर्व DSP जसपाल सिंह का पता लगाने के निर्देश दिए हैं।

होशियारपुर थाना सदर ने इस बात की पुष्टि की है कि उन्हें पूर्व DSP को ढूंढने के लिए कहा गया है। दरअसल, जसवंत सिंह खालड़ा हत्याकांड में उम्रकैद काट रहे पूर्व DSP जसपाल सिंह को मई 2023 में नाभा ओपन एग्रीकल्चर जेल से 1 लाख रुपए के निजी बॉन्ड पर जमानत पर रिहा किया गया था।

सितंबर 2022 में पंजाब सरकार ने जसपाल सिंह की समय से पहले सजा माफी का प्रस्ताव राज्यपाल को भेजा था। यह प्रस्ताव अब भी राज्यपाल के पास पेंडिंग पड़ा है। एग्रीकल्चर जेल नाभा ने होशियारपुर पुलिस को जल्द से जल्द उसका पता लगाने को कहा है।

बिट्‌टू ने फोटो जारी किए…

बिट्‌टू ने ये 2 बातें लिखीं

  1. 5 बजते ही पंजाब में सन्नाटा छा जाता था: उन्होंने लिखा- ये 90 के दशक की तस्वीरें हैं, आज के किसी प्री-वेडिंग फोटोशूट की नहीं। AK-47 और ड्रम मैगजीन लेकर घूमने वाले ये कौन थे, जिनके सिरों पर लाखों का इनाम था? जिन्होंने निर्दोष लोगों को बसों और बाजारों से निकालकर गोलियों का निशाना बनाया। शाम के 5 बजते ही पूरे पंजाब में सन्नाटा पसर जाता था। माताओं के लाल, बहनों के भाई एक झटके में खत्म कर दिए जाते थे।
  2. गोलियों ने हिंदू-सिख नहीं देखा: बिट्टू ने आगे लिखा- आज भी उन परिवारों के बच्चे वे खौफनाक रातें याद करके कांप जाते हैं। यह था 90 का दशक—खून से लिखा इतिहास। चली हुई गोली ने कभी हिंदू या सिख नहीं देखा। हथियारों और हिंसा का दिखावा कभी भी पंजाब का भविष्य नहीं हो सकता। आज पंजाब को हथियारों की नहीं, बल्कि शांति, तरक्की और आपसी भाईचारे की जरूरत है।

हाई कोर्ट के इस नियम के आधार पर मिली थी जमानत

जेल के एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक, सरकार के प्रस्ताव पर राज्यपाल की तरफ से लंबे समय तक कोई फैसला नहीं लिया गया। हाईकोर्ट के एक पुराने आदेश (COCP नंबर 2020/2022) के अनुसार, यदि सरकार के सजा माफी के प्रस्ताव पर राज्यपाल 3 महीने तक कोई फैसला नहीं लेते हैं, तो अंतिम फैसला आने तक कैदी को जमानत पर रिहा किया जा सकता है। इसी नियम के आधार पर पटियाला की चीफ ज्यूडिशियल मैजिस्ट्रेट (CJM) नवदीप कौर गिल ने जसपाल सिंह को जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए थे।

2019 में तत्कालीन राज्यपाल ने खारिज की थी अर्जी

जसपाल सिंह को हाईकोर्ट से पैरोल मिली थी, लेकिन टांडा के एक अन्य मामले (FIR 81/1996) में 5 साल की सजा के चलते जेल प्रशासन ने उसे अंदर ही रखा। इसके खिलाफ उसने हैबियस कॉर्पस याचिका लगाई, जिसे बाद में वापस ले लिया गया।

तत्कालीन राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर ने केंद्रीय गृह मंत्रालय की आपत्ति के बाद जसपाल सिंह की सजा माफी की अर्जी को खारिज कर दिया था। इसके बाद उसकी उम्रकैद की सजा दोबारा शुरू हो गई थी।

कोरोना काल में पैरोल मिली

कोरोना महामारी के दौरान जसपाल सिंह को फिर पैरोल मिली। 2021 में उसने दोबारा हाईकोर्ट में अपील की, लेकिन अगस्त 2022 में केस वापस ले लिया। कोर्ट ने उसे 16 अगस्त 2022 तक सरेंडर करने को कहा था। जसपाल सिंह ने अपनी ज्यादातर सजा ओपन जेल में ही काटी है।

जसवंत सिंह खालड़ा हत्याकांड के बारे में जानिए

साल 1995 में मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा को अगवा कर उनकी हत्या कर दी गई थी। इस हाई प्रोफाइल मामले में 2005 में पटियाला की CBI कोर्ट ने तत्कालीन DSP जसपाल सिंह और ASI अमरजीत सिंह को उम्रकैद और 4 अन्य पुलिसकर्मियों को 7-7 साल की सजा सुनाई थी।

बाद में हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान ASI अमरजीत सिंह को बरी कर दिया था। जबकि बाकी 4 पुलिसकर्मियों (सुरिंदरपाल सिंह, जसबीर सिंह, सतनाम सिंह और पृथ्वीपाल सिंह) की सजा को 7 साल से बढ़ाकर उम्रकैद में तब्दील कर दिया था।

॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰

यह खबर भी पढ़ें…

दिलजीत की ‘सतलुज’ OTT पर लौट सकती है, केंद्र ने रिव्यू कमेटी बनाई

केंद्र सरकार ने पंजाबी एक्टर दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर रिव्यू कमेटी का गठन किया है। भाजपा के पंजाब प्रधान केवल ढिल्लों की अपील के बाद यह कमेटी बनाई गई। इसकी पुष्टि भाजपा नेता आरपी सिंह ने की। कमेटी फिल्म की सामग्री, तथ्यों और प्रस्तुत किए गए विषयों का अध्ययन करेगी। पढ़ें पूरी खबर…

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इधर, सतलुज विवाद हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। मोहाली के व्यक्ति सरवन सिंह ने याचिका लगाकर फिल्म को OTT प्लेटफॉर्म पर वापस लाने की मांग की है। इसी बीच मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के कत्ल का मामला भी गरमा गया है। अब नाभा ओपन एग्रीकल्चर जेल प्रशासन ने होशियारपुर पुलिस को पत्र लिखकर इस मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे दोषी पूर्व DSP जसपाल सिंह का पता लगाने के निर्देश दिए हैं।

होशियारपुर थाना सदर ने इस बात की पुष्टि की है कि उन्हें पूर्व DSP को ढूंढने के लिए कहा गया है। दरअसल, जसवंत सिंह खालड़ा हत्याकांड में उम्रकैद काट रहे पूर्व DSP जसपाल सिंह को मई 2023 में नाभा ओपन एग्रीकल्चर जेल से 1 लाख रुपए के निजी बॉन्ड पर जमानत पर रिहा किया गया था।

सितंबर 2022 में पंजाब सरकार ने जसपाल सिंह की समय से पहले सजा माफी का प्रस्ताव राज्यपाल को भेजा था। यह प्रस्ताव अब भी राज्यपाल के पास पेंडिंग पड़ा है। एग्रीकल्चर जेल नाभा ने होशियारपुर पुलिस को जल्द से जल्द उसका पता लगाने को कहा है।

बिट्‌टू ने फोटो जारी किए…

बिट्‌टू ने ये 2 बातें लिखीं

  1. 5 बजते ही पंजाब में सन्नाटा छा जाता था: उन्होंने लिखा- ये 90 के दशक की तस्वीरें हैं, आज के किसी प्री-वेडिंग फोटोशूट की नहीं। AK-47 और ड्रम मैगजीन लेकर घूमने वाले ये कौन थे, जिनके सिरों पर लाखों का इनाम था? जिन्होंने निर्दोष लोगों को बसों और बाजारों से निकालकर गोलियों का निशाना बनाया। शाम के 5 बजते ही पूरे पंजाब में सन्नाटा पसर जाता था। माताओं के लाल, बहनों के भाई एक झटके में खत्म कर दिए जाते थे।
  2. गोलियों ने हिंदू-सिख नहीं देखा: बिट्टू ने आगे लिखा- आज भी उन परिवारों के बच्चे वे खौफनाक रातें याद करके कांप जाते हैं। यह था 90 का दशक—खून से लिखा इतिहास। चली हुई गोली ने कभी हिंदू या सिख नहीं देखा। हथियारों और हिंसा का दिखावा कभी भी पंजाब का भविष्य नहीं हो सकता। आज पंजाब को हथियारों की नहीं, बल्कि शांति, तरक्की और आपसी भाईचारे की जरूरत है।

हाई कोर्ट के इस नियम के आधार पर मिली थी जमानत

जेल के एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक, सरकार के प्रस्ताव पर राज्यपाल की तरफ से लंबे समय तक कोई फैसला नहीं लिया गया। हाईकोर्ट के एक पुराने आदेश (COCP नंबर 2020/2022) के अनुसार, यदि सरकार के सजा माफी के प्रस्ताव पर राज्यपाल 3 महीने तक कोई फैसला नहीं लेते हैं, तो अंतिम फैसला आने तक कैदी को जमानत पर रिहा किया जा सकता है। इसी नियम के आधार पर पटियाला की चीफ ज्यूडिशियल मैजिस्ट्रेट (CJM) नवदीप कौर गिल ने जसपाल सिंह को जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए थे।

2019 में तत्कालीन राज्यपाल ने खारिज की थी अर्जी

जसपाल सिंह को हाईकोर्ट से पैरोल मिली थी, लेकिन टांडा के एक अन्य मामले (FIR 81/1996) में 5 साल की सजा के चलते जेल प्रशासन ने उसे अंदर ही रखा। इसके खिलाफ उसने हैबियस कॉर्पस याचिका लगाई, जिसे बाद में वापस ले लिया गया।

तत्कालीन राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर ने केंद्रीय गृह मंत्रालय की आपत्ति के बाद जसपाल सिंह की सजा माफी की अर्जी को खारिज कर दिया था। इसके बाद उसकी उम्रकैद की सजा दोबारा शुरू हो गई थी।

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जसवंत सिंह खालड़ा हत्याकांड के बारे में जानिए

साल 1995 में मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा को अगवा कर उनकी हत्या कर दी गई थी। इस हाई प्रोफाइल मामले में 2005 में पटियाला की CBI कोर्ट ने तत्कालीन DSP जसपाल सिंह और ASI अमरजीत सिंह को उम्रकैद और 4 अन्य पुलिसकर्मियों को 7-7 साल की सजा सुनाई थी।

बाद में हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान ASI अमरजीत सिंह को बरी कर दिया था। जबकि बाकी 4 पुलिसकर्मियों (सुरिंदरपाल सिंह, जसबीर सिंह, सतनाम सिंह और पृथ्वीपाल सिंह) की सजा को 7 साल से बढ़ाकर उम्रकैद में तब्दील कर दिया था।

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