Tuesday, 26 May 2026 | 01:51 PM

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‘पापा, शो देखने आओगे? गालियां हैं’:समय रैना ने पिता को रात के 4 बजे किया मैसेज, जवाब सुनकर दर्शक हंस पड़े

‘पापा, शो देखने आओगे? गालियां हैं’:समय रैना ने पिता को रात के 4 बजे किया मैसेज, जवाब सुनकर दर्शक हंस पड़े

कॉमेडियन समय रैना ने हाल ही में बताया कि उनके शो ‘स्टिल अलाइव’ में गालियां होने के कारण वह पिता को बुलाने में हिचकिचा रहे थे। गौरतलब है कि समय रैना इन दिनों अपने शो ‘स्टिल अलाइव’ स्पेशल को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें उनके मम्मी-पापा भी नजर आ रहे हैं। यह वीडियो शो की स्क्रीनिंग के दौरान का है, जहां वह दर्शकों के सामने पिता को भेजा गया मैसेज पढ़ते हैं। बता दें कि समय ने रात के लगभग 4 बजे अपने पिता को मैसेज कर पूछा, “पापा, कल आओगे आप शो देखने? थोड़ी गालियां हैं उसमें, इसलिए पूछने में शर्म आ रही थी, पर ज्यादा नहीं हैं।” इसके जवाब में उनके पिता ने बहुत ही कूल अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा, “हमने ‘धुरंधर’, ‘द फैमिली मैन’ और ‘द बैड्स ऑफ बॉलीवुड’ भी देखी है, इसलिए कोई दिक्कत नहीं है।” समय रैना के पिता का यह जवाब सुनकर दर्शक हंस पड़े। समय का शो पिता को काफी पसंद आया और उन्होंने बेटे पर गर्व जताया। बता दें कि इस शो में समय ने ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ शो से जुड़े विवाद, एफआईआर और अन्य घटनाओं पर भी चर्चा की। साल 2025 में शो में रणवीर अल्लाहबादिया के एक जोक के बाद शो विवादो में घिर गया था। विवाद के चलते शो के कई वीडियो हटाने पड़े और माफी भी मांगनी पड़ी थी। हालांकि, समय रैना ने हाल ही में संकेत दिया है कि वह जल्द ही ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ का नया सीजन लेकर आ सकते हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

बालाघाट में ज्योतिबा फुले की 199वीं जयंती मनाई:मरार माली समाज ने प्रतिमा पर माल्यार्पण कर रैली निकाली

बालाघाट में ज्योतिबा फुले की 199वीं जयंती मनाई:मरार माली समाज ने प्रतिमा पर माल्यार्पण कर रैली निकाली

बालाघाट में शनिवार को समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा राव फुले की 199वीं जयंती मनाई गई। इस अवसर पर नगर के सरेखा चौक स्थित महात्मा ज्योतिबा फुले और माता सावित्रीबाई फुले की प्रतिमा पर सामाजिक लोगों ने माल्यार्पण किया। जयंती समारोह समिति ने आंबेडकर चौक से सरेखा चौक तक एक बाइक रैली निकाली। रैली से पहले समिति पदाधिकारियों ने आंबेडकर चौक पर झंडावंदन कर बाबा साहेब आंबेडकर और महात्मा ज्योतिबा फुले को नमन किया। मरार माली समाज के अध्यक्ष रमेश पंचे ने बताया कि ज्योतिबा फुले की 199वीं जयंती उनके जीवन समर्पण, त्याग और तपस्या की थीम पर मनाई जा रही है। सरेखा चौक पर प्रतिमा माल्यार्पण के बाद महात्मा फुले चौक से रैली निकाली गई। यह रैली हनुमान चौक, नया सराफा, सुभाष चौक, महावीर चौक, राजघाट चौक, काली पुतली होते हुए आंबेडकर चौक से रानी अवंतीबाई चौक पहुंची, जहां शहीदों की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण किया गया। रानी अवंतीबाई चौक पर मंचीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें वक्ताओं ने ज्योतिबा फुले के जीवन और उनके योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि देश की सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना में ज्योतिबा फुले का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने जाति प्रथा और छुआछूत के खिलाफ काम किया। वक्ताओं ने यह भी बताया कि महात्मा ज्योतिबा फुले ने देश की पहली महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले के साथ मिलकर शिक्षा और समाज की उन्नति के लिए कार्य किया। उन्होंने ऐसे समय में शिक्षा की अलख जगाई, जब लड़कियों का घर से बाहर निकलना भी मुश्किल था। ज्योतिबा राव फुले के जयंती कार्यक्रम की अन्य तस्वीरें…

Ayush Shetty Badminton Asia Championships 2026 Final Update

Ayush Shetty Badminton Asia Championships 2026 Final Update

Hindi News Sports Ayush Shetty Badminton Asia Championships 2026 Final Update | Badminton News स्पोर्ट्स डेस्क16 मिनट पहले कॉपी लिंक आयुष ने सेमीफाइनल में टॉप सीड और डिफेंडिंग चैंपियन कुन्लावत वितिदसर्न को तीन गेम में हराया। भारतीय शटलर आयुष शेट्टी ने एशियन बैडमिंटन चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचकर इतिहास रच दिया है। 60 सालों के बाद किसी भारतीय ने चैंपियनशिप के मेंस सिंगल्स कैटेगरी के फाइनल में जगह बनाई है। आयुष से पहले दिनेश खन्ना ने 1965 में मेंस सिंगल्स में गोल्ड जीता था। सात्विक साइराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी ने 2023 में डबल्स खिताब जीता था। 20 साल के आयुष ने शनिवार को चीन के झेजियांग में खेले गए सेमीफाइनल में टॉप सीड और डिफेंडिंग चैंपियन थाई प्लेयर कुन्लावत वितिदसर्न को तीन गेम में हराया। दुनिया के 25वें नंबर के खिलाड़ी आयुष ने पेरिस ओलिंपिक ब्रॉन्ज मेडलिस्ट और 2023 के वर्ल्ड चैंपियन वितिदसर्न पर 10-21, 21-19, 21-17 से जीत दर्ज की। आयुष ने सेमीफाइनल मैच 10-21, 21-19, 21-17 से जीता। 1965 में दिनेश खन्ना लखनऊ में चैंपियन बने थे इस चैंपियनशिप में भारत के लिए गोल्ड सिर्फ दिनेश खन्ना ने जीता था। उन्होंने 1965 में लखनऊ में थाईलैंड के सांगोब रत्तनुसोर्न को मेंस सिंगल्स फाइनल में हराया था। आयुष ने पिछली हार का बदला लिया दोनों खिलाड़ी इससे पहले पिछले साल आर्कटिक ओपन में भिड़े थे, जहां वितिदसर्न ने सीधे गेम में जीत हासिल की थी, लेकिन इस बार आयुष ने शानदार वापसी करते हुए हिसाब बराबर कर लिया। पहला गेम हारने के बाद जिस तरह उन्होंने वापसी की, उसने उनकी मानसिक मजबूती को भी साबित किया। क्वार्टर फाइनल में क्रिस्टी को हराया वर्ल्ड नंबर-25 आयुष ने क्वार्टर फाइनल में वर्ल्ड नंबर-4 जोनाथन क्रिस्टी को 23-21, 21-17 से हराया था। इसके अलावा उन्होंने चीनी ताइपे के चिन यू जेन और चीन के ली शी फेंग जैसे खिलाड़ियों को भी मात दी। अब आयुष खिताबी मुकाबले में चाऊ तियेन चेन और शी यूकी के बीन होने वाले दूसरे सेमीफाइनल के विजेता से भिड़ेंगे। —————————————————- स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़िए… चेस कैंडिडेट्स टूर्नामेंट- वैशाली ड्रॉ के साथ टॉप पर पहुंचीं भारतीय ग्रैंडमास्टर वैशाली रमेशबाबू ने FIDE चेस कैंडिडेट्स टूर्नामेंट के विमेंस कैटेगरी के 10वें राउंड में यूक्रेन की अन्ना मुजिचुक के खिलाफ ड्रॉ खेला। इस ड्रॉ से मिले आधे पॉइंट्स के साथ वैशाली टॉप पर पहुंच गईं। दूसरी ओर, भारतीय ग्रैंडमास्टर दिव्या देशमुख को रूस की अलेक्जेंड्रा गोर्याचकिना के खिलाफ हार झेलनी पड़ी। पढ़ें पूरी खबर दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

अक्षय कुमार के इवेंट में बेकाबू भीड़, बड़ा हादसा टला:मॉल में फैंस एस्केलेटर पर चढ़े और जान जोखिम में डाली, सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल उठे

अक्षय कुमार के इवेंट में बेकाबू भीड़, बड़ा हादसा टला:मॉल में फैंस एस्केलेटर पर चढ़े और जान जोखिम में डाली, सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल उठे

अक्षय कुमार के इवेंट में फैंस की दीवानगी खतरनाक दिखी। शुक्रवार को ग्रेटर नोएडा के गौर सिटी मॉल में फिल्म ‘भूत बंगला’ के प्रमोशन के दौरान हुई घटनाओं ने फैंस की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए। अक्षय कुमार अपने को-स्टार्स राजपाल यादव और वामिका गब्बी के साथ प्रमोशन के लिए मॉल पहुंचे थे। देखते ही देखते भीड़ बेकाबू हो गई। हालात बिगड़े और भगदड़ जैसी स्थिति बनी। लोग जान जोखिम में डालते नजर आए। वायरल वीडियो में दिखा कि कुछ फैंस बेहतर व्यू के लिए एस्केलेटर की रेलिंग पर चढ़ गए। ग्राउंड फ्लोर पर बैरिकेड्स टूटे और लोग एक-दूसरे को धक्का देते हुए आगे बढ़े। यह स्थिति बड़े हादसे में बदल सकती थी। सबसे बड़ा सवाल है कि क्या ऐसे पब्लिक इवेंट्स के लिए सही सुरक्षा इंतजाम थे? बंद जगह में हजारों की भीड़ जुटना और कंट्रोल का टूटना, मॉल मैनेजमेंट और इवेंट ऑर्गनाइजर्स की तैयारियों पर सवाल उठाता है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद यूजर्स नाराज दिखे। कई लोगों ने इसे गैर-जिम्मेदाराना बताया और कहा कि स्टार्स और उनकी टीम को ऐसे इवेंट्स में फैंस की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए। हालांकि, इस दौरान अक्षय कुमार स्टेज पर शांत नजर आए और फैंस से बातचीत करते रहे। लेकिन भीड़ का बेकाबू होना बड़ी चेतावनी है। फिल्म ‘भूत बंगला’ 17 अप्रैल को रिलीज होने वाली है। लेकिन प्रमोशन के दौरान सामने आई तस्वीरें सवाल छोड़ती हैं कि क्या स्टारडम के नाम पर लोगों की जान जोखिम में डालना सही है?

Election Fight Legal Right, Not Fundamental: Supreme Court Ruling

Election Fight Legal Right, Not Fundamental: Supreme Court Ruling

नई दिल्ली5 मिनट पहले कॉपी लिंक सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को कहा कि मतदान करने और चुनाव लड़ने का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं, बल्कि वैधानिक अधिकार हैं। जस्टिस बीवी नागरत्ना और आर महादेवन की बेंच ने कहा कि ये अधिकार केवल उतनी ही सीमा तक अस्तित्व में हैं, जितनी कानून में अनुमति दी गई है। पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वोटिंग का अधिकार व्यक्ति को चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने की अनुमति देता है, जबकि चुनाव लड़ने का अधिकार एक अलग और अतिरिक्त अधिकार है, जिसे योग्यता, पात्रता शर्तों और अयोग्यताओं के अधीन रखा जा सकता है। खबर अपडेट की जा रही है… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

सतना में अतिक्रमण हटाने पहुंची टीम पर पथराव:पुलिस ने दागे अश्रुगैस, हवाई फायरिंग भी की; कोर्ट के आदेश पर अवैध कब्जा ढहाया

सतना में अतिक्रमण हटाने पहुंची टीम पर पथराव:पुलिस ने दागे अश्रुगैस, हवाई फायरिंग भी की; कोर्ट के आदेश पर अवैध कब्जा ढहाया

सतना के डालीबाबा इलाके में शुक्रवार को अतिक्रमण हटाने पहुंची प्रशासनिक टीम पर पथराव किया गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को अश्रुगैस के गोले दागने पड़े और हवाई फायरिंग भी करनी पड़ी। यह घटना सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र में हुई, जहां एक निजी भूमि पर हुए अवैध कब्जे को हटाने के लिए प्रशासन की टीम पहुंची थी। कोर्ट के आदेश पर नगर निगम की अतिक्रमण विरोधी टीम जेसीबी मशीन के साथ मौके पर मौजूद थी। मकानों की आड़ लेकर किया पथराव जैसे ही टीम ने एक भवन को तोड़ने की प्रक्रिया शुरू की, आसपास के मकानों की आड़ लेकर कुछ अज्ञात लोगों ने पथराव शुरू कर दिया। पथराव इतना तेज था कि मौके पर मौजूद अधिकारी और कर्मचारी अपनी जान बचाने के लिए भागने लगे। इस घटना में एसडीएम राहुल सिलाड़िया और थाना प्रभारी रावेंद्र द्विवेदी बाल-बाल बच गए। स्थिति बिगड़ते देख तत्काल अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया। भारी संख्या में पुलिस बल ने पूरे इलाके को घेर लिया। पुलिस ने अश्रुगैस के गोले दागे हालात को काबू में करने के लिए पुलिस ने अश्रुगैस के गोले दागे और दो हवाई फायर भी किए। इसके बाद धीरे-धीरे स्थिति नियंत्रण में आई। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पथराव में शामिल दो पुरुषों और एक महिला को हिरासत में लिया है। अन्य आरोपियों की पहचान कर उनकी तलाश की जा रही है। घटना के बाद प्रशासन ने कड़ी सुरक्षा के बीच दोबारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की और अवैध कब्जे को हटाया। क्षेत्र में फिलहाल पुलिस बल तैनात है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में बताई जा रही है।

चेस में ‘चीटिंग’ का सस्पेंस:हार से बौखलाए कार्लसन 19 साल के नीमन से भिड़ने पहुंच गए थे

चेस में ‘चीटिंग’ का सस्पेंस:हार से बौखलाए कार्लसन 19 साल के नीमन से भिड़ने पहुंच गए थे

शतरंज की बिसात पर मोहरे अक्सर गहरी खामोशी व एकाग्रता के साथ चले जाते हैं। लेकिन 2022 में एक ऐसी चाल चली गई, जिसने कोहराम मचा दिया। वर्ल्ड नंबर-1 मैग्नस कार्लसन ने अमेरिका के 19 वर्षीय ग्रैंडमास्टर हंस नीमन पर चीटिंग का आरोप लगाया था। यह शतरंज के इतिहास का सबसे बड़ा, गंभीर और चर्चित विवाद बन गया। अब चार साल बाद, नेटफ्लिक्स की नई डॉक्यूमेंट्री ‘अनटोल्ड: चेस मेट्स’ ने इस विवाद को फिर से कुरेदा है। 74 मिनट की डॉक्यूमेंट्री में कई ऐसे छिपे हुए पहलुओं को सामने लाने की कोशिश की गई है, जो दबे थे। डॉक्यूमेंट्री में मैग्नस कार्लसन के पिता हेनरिक कार्लसन ने एक बेहद चौंकाने वाला किस्सा साझा किया है। अमेरिका में चल रहे प्रतिष्ठित सिंकफील्ड कप में जब नीमन ने कार्लसन को हराया, तो वह कार्लसन की लगातार दूसरे टूर्नामेंट में नीमन के हाथों हार थी। इस हार के बाद कार्लसन इस कदर गुस्से और हताशा में थे कि वे सीधे नीमन के होटल के कमरे का दरवाजा खटखटाना चाहते थे। हेनरिक बताते हैं, ‘मैग्नस उस रात नीमन के कमरे में जाकर उससे सीधे पूछना चाहते थे कि आखिर यह सब क्या चल रहा है? तुम मुझे कैसे हरा रहे हो?’ नीमन रैंकिंग और खेल कौशल में कार्लसन से काफी नीचे थे। इसके बावजूद वे बिना कोई खास मेहनत के, बिल्कुल सहजता से दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी को मात दे रहे थे। पिता के समझाने पर कार्लसन नीमन के कमरे तक नहीं गए, लेकिन उन्होंने शतरंज के सबसे बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ‘चेस डॉट कॉम’ का रुख किया। इस हाई-प्रोफाइल मामले में यह प्लेटफॉर्म ही मुख्य गवाह था, जिसने सबसे पहले इशारा किया कि नीमन ने अतीत में बेईमानी की है। कार्लसन टूर्नामेंट से हट गए और चेस डॉट कॉम ने तत्काल नीमन को बैन कर दिया। इतना ही नहीं, प्लेटफॉर्म के सीईओ एरिक एलेबेस्ट ने जांच शुरू कर दी। अंततः इसी प्लेटफॉर्म ने 72 पन्नों की एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की, जिसमें स्पष्ट तौर पर कहा गया कि नीमन के खिलाफ ‘आमने-सामने बैठकर खेले गए’ मैच में बेईमानी का कोई सुराग या प्रमाण नहीं मिला है। कार्लसन ने कभी सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट नहीं किया कि उन्हें नीमन पर किस खास तरीके से चीटिंग करने का शक था, इसलिए इंटरनेट की दुनिया में अफवाहों का बाजार गर्म हो गया। इनमें सबसे चर्चित थ्योरी यह थी कि नीमन ने अपने शरीर में कोई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस छिपा रखी थी, जो उन्हें बाहर किसी कंप्यूटर से सही चाल बता रहा था। डॉक्यूमेंट्री में नीमन इस बात को लेकर बेहद भावुक और गहरे अवसाद में नजर आते हैं। डॉक्यूमेंट्री के आखिरी हिस्से में कार्लसन खुद को ठगा हुआ महसूस करते हैं। उन्हें लगता है कि प्लेटफॉर्म ने उन्हें गुमराह किया। चार साल बीत जाने के बाद भी यह पूरा स्कैंडल एक ऐसे अंधे मोड़ पर खड़ा है, जहां दोनों पक्ष अपनी-अपनी जिद पर अड़े हैं। सटीक जवाब किसी के पास नहीं है। नीमन ने स्वीकारी चीटिंग डॉक्यूमेंट्री में चेस डॉट कॉम के चीफ चेस ऑफिसर डैनी रेंच ने बताया कि नीमन ने 100 से ज्यादा ऑनलाइन मैचों में अनुचित साधनों का प्रयोग किया था। नीमन ने स्वीकार किया कि उन्होंने 12 व 16 साल की उम्र में कुछ ऑनलाइन मैचों में रेटिंग बढ़ाने के लिए चीटिंग की थी।

चेस में ‘चीटिंग’ का सस्पेंस:हार से बौखलाए कार्लसन भिड़ने पहुंच गए थे नीमन से, 4 साल बाद भी नहीं मिला बेईमानी का सबूत

चेस में ‘चीटिंग’ का सस्पेंस:हार से बौखलाए कार्लसन भिड़ने पहुंच गए थे नीमन से, 4 साल बाद भी नहीं मिला बेईमानी का सबूत

शतरंज की बिसात पर मोहरे अक्सर गहरी खामोशी व एकाग्रता के साथ चले जाते हैं। लेकिन 2022 में एक ऐसी चाल चली गई, जिसने कोहराम मचा दिया। वर्ल्ड नंबर-1 मैग्नस कार्लसन ने अमेरिका के 19 वर्षीय ग्रैंडमास्टर हंस नीमन पर चीटिंग का आरोप लगाया था। यह शतरंज के इतिहास का सबसे बड़ा, गंभीर और चर्चित विवाद बन गया। अब चार साल बाद, नेटफ्लिक्स की नई डॉक्यूमेंट्री ‘अनटोल्ड: चेस मेट्स’ ने इस विवाद को फिर से कुरेदा है। 74 मिनट की डॉक्यूमेंट्री में कई ऐसे छिपे हुए पहलुओं को सामने लाने की कोशिश की गई है, जो दबे थे। डॉक्यूमेंट्री में मैग्नस कार्लसन के पिता हेनरिक कार्लसन ने एक बेहद चौंकाने वाला किस्सा साझा किया है। अमेरिका में चल रहे प्रतिष्ठित सिंकफील्ड कप में जब नीमन ने कार्लसन को हराया, तो वह कार्लसन की लगातार दूसरे टूर्नामेंट में नीमन के हाथों हार थी। इस हार के बाद कार्लसन इस कदर गुस्से और हताशा में थे कि वे सीधे नीमन के होटल के कमरे का दरवाजा खटखटाना चाहते थे। हेनरिक बताते हैं, ‘मैग्नस उस रात नीमन के कमरे में जाकर उससे सीधे पूछना चाहते थे कि आखिर यह सब क्या चल रहा है? तुम मुझे कैसे हरा रहे हो?’ नीमन रैंकिंग और खेल कौशल में कार्लसन से काफी नीचे थे। इसके बावजूद वे बिना कोई खास मेहनत के, बिल्कुल सहजता से दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी को मात दे रहे थे। पिता के समझाने पर कार्लसन नीमन के कमरे तक नहीं गए, लेकिन उन्होंने शतरंज के सबसे बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ‘चेस डॉट कॉम’ का रुख किया। इस हाई-प्रोफाइल मामले में यह प्लेटफॉर्म ही मुख्य गवाह था, जिसने सबसे पहले इशारा किया कि नीमन ने अतीत में बेईमानी की है। कार्लसन टूर्नामेंट से हट गए और चेस डॉट कॉम ने तत्काल नीमन को बैन कर दिया। इतना ही नहीं, प्लेटफॉर्म के सीईओ एरिक एलेबेस्ट ने जांच शुरू कर दी। अंततः इसी प्लेटफॉर्म ने 72 पन्नों की एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की, जिसमें स्पष्ट तौर पर कहा गया कि नीमन के खिलाफ ‘आमने-सामने बैठकर खेले गए’ मैच में बेईमानी का कोई सुराग या प्रमाण नहीं मिला है। कार्लसन ने कभी सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट नहीं किया कि उन्हें नीमन पर किस खास तरीके से चीटिंग करने का शक था, इसलिए इंटरनेट की दुनिया में अफवाहों का बाजार गर्म हो गया। इनमें सबसे चर्चित थ्योरी यह थी कि नीमन ने अपने शरीर में कोई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस छिपा रखी थी, जो उन्हें बाहर किसी कंप्यूटर से सही चाल बता रहा था। डॉक्यूमेंट्री में नीमन इस बात को लेकर बेहद भावुक और गहरे अवसाद में नजर आते हैं। डॉक्यूमेंट्री के आखिरी हिस्से में कार्लसन खुद को ठगा हुआ महसूस करते हैं। उन्हें लगता है कि प्लेटफॉर्म ने उन्हें गुमराह किया। चार साल बीत जाने के बाद भी यह पूरा स्कैंडल एक ऐसे अंधे मोड़ पर खड़ा है, जहां दोनों पक्ष अपनी-अपनी जिद पर अड़े हैं। सटीक जवाब किसी के पास नहीं है। नीमन ने स्वीकारी चीटिंग डॉक्यूमेंट्री में चेस डॉट कॉम के चीफ चेस ऑफिसर डैनी रेंच ने बताया कि नीमन ने 100 से ज्यादा ऑनलाइन मैचों में अनुचित साधनों का प्रयोग किया था। नीमन ने स्वीकार किया कि उन्होंने 12 व 16 साल की उम्र में कुछ ऑनलाइन मैचों में रेटिंग बढ़ाने के लिए चीटिंग की थी।

थरूर बोले- महिला आरक्षण कानून को राजनीतिक हथियार न बनाएं:बिल के साथ परिसीमन प्रक्रिया में जल्दबाजी करने से राज्यों का लोकतांत्रिक संतुलन बिगडे़गा

थरूर बोले- महिला आरक्षण कानून को राजनीतिक हथियार न बनाएं:बिल के साथ परिसीमन प्रक्रिया में जल्दबाजी करने से राज्यों का लोकतांत्रिक संतुलन बिगडे़गा

कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा कि महिला आरक्षण कानून में होने वाले संशोधन को राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। ताकि संघवाद कमजोर न हो और संसद की गरिमा को ठेस न पहुंचे। संसद में 16 अप्रैल से होने वाले विशेष सत्र से पहले थरूर ने आरोप लगाया कि सरकार 3 दिन के सत्र का इस्तेमाल राज्य चुनावों से पहले राजनीतिक लाभ लेने और 2029 लोकसभा चुनाव से पहले परिसीमन की तैयारी के लिए कर रही है। थरूर ने X पर लिखा कि कांग्रेस हमेशा से महिलाओं के लिए 33% आरक्षण की समर्थक रही है। 2013 में कांग्रेस ने ही यह बिल पेश कर राज्यसभा से पास कराया था, लेकिन मौजूदा सरकार का रवैया चिंताजनक है। इससे पहले शुक्रवार को कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी। इसमें सरकार के प्रस्तावित संशोधनों पर आपत्ति जताई गई। थरूर ने दक्षिण के राज्यों का मुद्दा क्यों उठाया 2023 के कानून में साफ लिखा है कि महिला आरक्षण जनगणना और परिसीमन के बाद ही लागू होगा। परिसीमन यानी जनसंख्या के आधार पर लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या और सीमाएं तय करना। जनगणना के आंकड़ों के आधार पर एक आयोग सीटों का बंटवारा तय करता है। आखिरी बार परिसीमन 2002-2008 के बीच हुआ था, जो 1971 की जनगणना के आधार पर था। सरकार लोकसभा सीटें 543 से बढ़ाकर 816 करना चाहती है। इससे ज्यादा आबादी वाले राज्यों (UP, बिहार, मध्य प्रदेश) की सीटें बढ़ेंगी। दक्षिण भारत के राज्यों (जैसे तमिलनाडु, केरल) को डर है कि उनकी सीटों का अनुपात कम हो जाएगा। अगर कुछ राज्यों की सीटें ज्यादा बढ़ती हैं, तो संसद में उनका प्रभाव भी बढ़ेगा। इससे क्षेत्रीय संतुलन बिगड़ सकता है। यही विपक्ष की बड़ी चिंता है। बिल पर चर्चा के लिए कांग्रेस ने वर्किंग कमेटी की बैठक बुलाई कांग्रेस ने शुक्रवार को वर्किंग कमेटी की बैठक बुलाई। इस दौरान पार्टी ने मोदी सरकार पर महिला आरक्षण कानून के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाया। साथ ही यह भी कहा कि इससे जुड़ा प्रस्तावित परिसीमन संवैधानिक नहीं है। इसके नतीजे गंभीर हो सकते हैं। इस पर 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद विचार-विमर्श किए जाने की जरूरत है। CWC की बैठक के दौरान, पार्टी प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा था कि वे अब सभी विपक्षी दलों के बड़े नेताओं की एक बैठक बुलाएंगे, जो 15 अप्रैल को हो सकती है, ताकि 16 से 18 अप्रैल तक चलने वाले संसद के विशेष सत्र के लिए चर्चा की जा सके और एक संयुक्त रणनीति बनाई जा सके। महिला आरक्षण संशोधन बिल पर विशेष सत्र क्यों केंद्र सरकार लोकसभा की सीटें बढ़ाने की तैयारी कर रही है। अभी लोकसभा में 543 सीटें हैं, जिन्हें बढ़ाकर करीब 816 किया जाना है। इसके साथ ही महिलाओं के लिए सीटें भी तय की जाएंगी, यानी लगभग 273 सीटें (करीब 33%) महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। यह बदलाव नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 में संशोधन करके लागू किया जाएगा। इस कानून का मकसद संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देना है, जिसमें SC/ST महिलाओं का हिस्सा भी शामिल रहेगा। सरकार चाहती है कि यह व्यवस्था 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू हो जाए, ताकि राजनीति में महिलाओं की भागीदारी और बढ़ सके। —————————- ये खबर भी पढ़ें… खड़गे बोले- महिला आरक्षण संशोधन जल्दबाजी में लाया जा रहा: सरकार आचार संहिता का उल्लंघन कर रही खड़गे ने शुक्रवार को कहा कि सरकार महिला आरक्षण संशोधन और लोकसभा में सीटें बढ़ाने की बिल जल्दबाजी में ला रही है। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान संसद सत्र बुलाना अचार संहिता का उल्लंघन है। सरकार बिल को जल्द से जल्द पास कराना चाहती है, ताकि आने वाले विधानसभा चुनावों में इसका फायदा मिल सके। पढ़ें पूरी खबर…

ICICI Prudential Hybrid Active FOF: Same Strategy, Better Stability

ICICI Prudential Hybrid Active FOF: Same Strategy, Better Stability

Hindi News Business ICICI Prudential Hybrid Active FOF: Same Strategy, Better Stability | Dr. Rai 20 मिनट पहले कॉपी लिंक ICICI प्रूडेंशियल थीमेटिक एडवांटेज फंड (FOF) को SEBI के नए फ्रेमवर्क के मुताबिक, अप्रैल 2026 से एक ‘एग्रेसिव हाइब्रिड एक्टिव FOF’ के तौर पर फिर से क्लासिफाई किया गया है। हालांकि इसका स्ट्रक्चर बदल रहा है, लेकिन इसकी मुख्य रणनीति वही रहेगी- यानी, सेक्टर और थीम से जुड़े मौकों पर ज्यादा फोकस बनाए रखना और इक्विटी में एग्रेसिव रुख अपनाना। इसमें डेट एक्सपोजर जोड़ने का मकसद ज्यादा स्थिरता लाना और ग्रोथ की संभावनाओं से समझौता किए बिना, बाजार के उतार-चढ़ावों को बेहतर तरीके से संभालना है। इस नए बदलाव से फंड को ज्यादा फ्लक्सिबिलिटी मिलती है, जिससे वह अलग-अलग थीम, सेक्टर और मार्केट कैप में मौजूद मौकों का फायदा उठा सकता है, और साथ ही निवेशकों का कुल अनुभव भी बेहतर होता है। ICICI प्रूडेंशियल हाइब्रिड एक्टिव FOF को लेकर बियोण्ड फाइनेंशियल फ्रंटियर्स प्राइवेट लिमिटेड के फाउंडर और CEO डॉ अनुबंध राय ने क्या कहा, जानने के लिए ऊपर वीडियो पर क्लिक करें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔